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कैम्ब्रिज में राहुल गाँधी ने खोल दिया पूरा ‘टूलकिट’, कोर्ट से लेकर प्रेस तक फैलाया प्रोपेगेंडा: बोले अुनराग ठाकुर- उनके दिमाग में है पेगासस

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी इस समय सात दिनी ब्रिटेन के दौरे पर हैं। विदेश धरती पर भी वे उस टूलकिट का अनुसरण कर रहे हैं जो भारत और मोदी सरकार को बदनाम करने की नीयत से तैयार की गई है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अपने संबोधन के दौरान कॉन्ग्रेस नेता ने पेगासस, कोर्ट, प्रेस से लेकर संसद तक पर प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाने का काम किया।

उन्होंने संबोधन के दौरान बड़ी संख्या में नेताओं के फोन में पेगासस होने का दावा किया। कहा कि उनके फोन में भी पेगासस था। कथित तौर पर इंटेलीजेंस अधिकारियों ने उन्हें फोन का सँभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दी थी, क्योंकि फोन की रिकॉर्डिंग की जा रही थी। राहुल गाँधी ने भारत में लोकतंत्र पर हमले होने की बात भी कही। कहा कि मीडिया, न्यायपालिका और लोकतंत्र पर प्रहार हो रहा है। अल्पसंख्यकों और जनजातीय लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

गौरतलब है जुलाई 2021 में आई एक ग्लोबल रिपोर्ट में भारत सहित कई देशों में मोबाइल को पेगासस स्पाईवेयर द्वारा निशाना बनाए जाने का दावा किया गया था। विपक्षी दलों ने केंद्र की मोदी सरकार पर जासूसी कराए जाने का आरोप लगाते हुए इस इजरायली स्पाईवेयर को लेकर खूब हंगामा मचाया ​था। इजरायली कंपनी ने इसके गलत इस्तेमाल से इनकार किया था। केंद्र सरकार ने भी कई मौके पर नेताओं के फोन टैप किए जाने की बात को नकारा था। सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने भी जिन फोनों की जाँच की थी उनमें से केवन 5 में स्पाईवेयर मिले थे। इनके भी पेगासस होने के सबूत नहीं मिले थे। बावजूद इसके कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए झूठ बोलने से राहुल गाँधी ने गुरेज नहीं किया।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि राहुल गाँधी को मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड विधानसभा चुनावों के नतीजों का अंदाजा पहले से था। इसलिए वे विदेशी धरती पर जाकर रोने-धोने का काम रहे हैं। पेगासस मामले पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेगासस उनके फोन में नहीं दिमाग में है। राहुल गाँधी की क्या मजबूरी थी कि उन्होंने अपना फोन जमा नहीं करवाया। भ्रष्टाचार के मामले में बेल पर चल रहे राहुल गाँधी के फोन में ऐसा क्या था कि उन्हें छिपाने की जरूरत पड़ी।

ठाकुर ने राहुल गाँधी पर विदेशी धरती पर विदेशी दोस्तों के जरिए देश को बदनाम करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत का सम्मान बढ़ा है। दुनिया भर के बड़े-बड़े नेता इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। राहुल गाँधी किसी और की नहीं कम से कम इटली के पीएम और उनके नेताओं की सुन लेते। राहुल गाँधी दुनिया के नेताओं द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री की प्रसन्नता स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

बता दें कि गुरुवार (2 मार्च, 2023) को प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से मुलाकात की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जियोर्जिया मेलोनी ने कहा था, “प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे चहेते नेता हैं। ये साबित हो चुका है कि वो कितने बड़े लीडर हैं। इसके लिए उन्हें बधाई।”

वहीं भाजपा नेता शहजाद पुनावाला ने राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट का फैसला याद दिलाया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि एक व्यक्ति (प्रधानमंत्री) के लिए उनकी (राहुल गाँधी) नफरत बार-बार देश के लिए नफरत में बदल जाती है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना चुकी है, लेकिन वो फिर भी झूठ फैला रहे हैं। जिनकी दादी ने आपातकाल लगाया वे लोकतंत्र का उपदेश दे रहे हैं।

जिस DFRL को अमेरिकी सरकार देती है पैसा, वह 40 हजार ट्विटर अकाउंट करवाना चाहता था सेंसर: कपिल मिश्रा से लेकर वाराणसी एयरपोर्ट तक का नाम

अटलांटिक काउंसिल का डिजिटल फॉरेंसिक रिसर्च लैब (DFRL) 40 हजार ट्विटर अकाउंट सेंसर करवाना चाहता था। इस लैब को अमेरिकी सरकार से फंड मिलता है। स्वतंत्र पत्रकार और लेखक मैट टैबी (Matt Taibbi) ने अपने ट्विटर फाइल्स के नए संस्करण में इसका खुलासा किया है। इन अकाउंट्स को हिंदू राष्ट्रवाद और विशेष तौर पर बीजेपी से जुड़ा बताते हुए DFRL ने कार्रवाई को कहा था।

DFRL ने इन अकाउंट्स को बैन या शैडो बैन करने के लिए ट्विटर को ईमेल भेजा था। इससे DFRL की बीजेपी और राष्ट्रवादियों के प्रति घृणा का पता चलता है। टैबी ने दावा किया है कि वर्ष 2021 में डीएफआरएल के मैनेजिंग एडिटर एंडी गारविन ने 40 हजार भारतीय ट्विटर हैंडल्स की लिस्ट जारी कर उन पर भाजपा के वर्कर या पेड कर्मचारी होने और हिंदू राष्ट्र के समर्थक होने का आरोप लगाते हुए बैन या शैडो बैन (पहुँच कम करना) करने की माँग की थी।

टैबी के अनुसार लिस्ट में कुछ ऐसे अमेरिकियों के भी नाम थे, जिनमें से कई का भारत से कोई संबंध नहीं था और भारतीय राजनीति के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। हालाँकि ट्विटर ने उस वक्त इन अकाउंट्स पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। ट्विटर उस वक्त के ट्रस्ट एंड सेफ्टी प्रमुख योएल रोथ ने यह कहते हुए ट्विटर अकाउंट्स पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया कि अकाउंट वास्तविक लोगों के हैं।

40 हजार की लंबी लिस्ट में से ऑपइंडिया को 66 ऐसे भारतीयों के अकाउंट की जानकारी मिली है, जिस पर अमेरिकी वित्त पोषित संस्था द्वारा कार्रवाई की माँग की गई थी। इनमें अशोक गोयल, बेबी कुमारी बीजेपी, कपिल मिश्रा, किशोर अजवानी, नवीन कुमार जिंदल, पीयूष गोयल ऑफिस, तजिंदर पाल सिंह बग्गा जैसे भाजपा कार्यकर्ता और राष्ट्रवादियों के नाम शामिल हैं।

दिलचस्प बात यह है कि डीएफआर लैब वाराणसी हवाई अड्डे (@AAIVNSAIRPORT), उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग (@upmsme) और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के कार्यालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को भी सेंसर करने की माँग कर रहा था। बता दें अमेरिकी विदेश विभाग की इकाई के रूप में सूचीबद्ध DFR Lab को अमेरिकी सरकार और ग्लोबल एंगेजमेंट सेंटर (GEC) द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। GEC को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के अंतिम वर्षों में बनाया गया था।

नींद से जगाया, गाली दी-कपड़े फाड़े, घसीटकर ले गए: गलवान के बलिदानी के पिता को बेल, कहा- बिहार पुलिस ने जानवरों सा व्यवहार किया

बिहार के वैशाली में बलिदानी सैनिक जयकिशोर सिंह के पिता राज कपूर सिंह जेल से रिहा हो गए हैं। गुरुवार (02 मार्च, 2023) की शाम उन्हें बेल मिल गई। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने पुलिस पर गाली-गलौज और मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उधर बिहार के पूर्वी चंपारण के रक्सौल में सेना के जवान के साथ मारपीट मामले में दारोगा और सिपाही को निलंबित किया गया है।

हाजीपुर व्ययवहार न्यायलय ने गलवान में बलिदान हुए जय किशोर सिंह के पिता राज कपूर सिंह को 10-10 हजार के 2 मुचलकों पर जमानत दी। जमानत मिलने के बाद राज कपूर सिंह ने बताया कि बिहार पुलिस ने उनके साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया। उन्होंने बताया कि शनिवार (28 फरवरी, 2023) की रात वे अपने बलिदानी बेटे के स्मारक के पास सो रहे थे, तभी पुलिस पहुँची। उन्हें थाने चलने के लिए नींद से जगाया। गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया। अपराधी की तरह घसीट पुलिस की गाड़ी तक ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने कुर्ता पहनने की कोशिश की तो उसे फाड़ दिया गया। सिंह का आरोप है कि थाने में भी उनके साथ मारपीट की गई।

सिंह के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर इसके पहले 1 मार्च को बिहार विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ था। भाजपा विधायकों ने बलिदानी के पिता की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बलिदानी के पिता को ही दोषी ठहराने की कोशिश की थी। बिहार पुलिस के डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी ने मामले की जाँच सीआईडी को सौंपी थी। मामला बढ़ने के बाद कई अधिकारियों ने स्मारक स्थल का मुआयना किया था।

बता दें कि बलिदानी जय किशोर सिंह के परिवार और हरिनाथ राम के बीच स्मारक को लेकर विवाद है। हरिनाथ राम ने बलिदानी परिवार पर सरकारी जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए एससी/एसटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज कराया है। थाना प्रभारी विश्वनाथ राम पर हरिनाथ राम के पक्ष में एकतरफा कार्रवाई का आरोप है।

उधर पूर्वी चंपारण के रक्सौल में सेना के जवान राधा मोहन गिरि साथ हुए मारपीट मामले में कार्रवाई की गई है। रक्सौल के एएसपी की जाँच रिपोर्ट के आधार पर सेना के जवान के साथ मारपीट करने वाले सब इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार और एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया है। बता दें कि पिछले दिनों रक्सौल मुख्य सड़क पर सेना के एक जवान के साथ पुलिस की बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में पुलिसकर्मी सेना के जवान राधा मोहन को गाली देते, पिटाई करते और घसीटते हुए दिखे थे।

‘मुसलमानों पर हो रहे जुल्म’ : UP में माफियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई से भड़के सपा के शफीकुर्रहमान, CM योगी को धमकी दी- तुम भी जद में आओगे

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड के बाद से ही योगी सरकार एक्शन में है। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपित का एनकाउंटर कर दिया तो वहीं प्रयागराज में अतीक के करीबी के खिलाफ बुलडोजर का एक्शन देखने को मिला। योगी आदित्यनाथ के अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन से समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ शफीकुर्रहमान बर्क बौखला गए हैं। बौखलाहट में उन्होंने सीएम योगी को बुलडोजर कार्रवाई की धमकी दी है।

सपा सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क से जब अपराधियों के खिलाफ सीएम योगी के एक्शन पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह एक्शन नहीं है बल्कि ये जुल्म है। उन्होंने अपराधियों पर कार्रवाई को मुसलमानों पर कार्रवाई से जोड़ा और कहा कि मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर चलाया जा रहा है। बुलडोजर से क्या सारी दुनिया को मिटा दोगे।

बर्क ने कहा कि सरकार जफर अहमद पर जुल्म कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि जुल्म है। पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए सपा सांसद शफीकुर्रहमान ने योगी आदित्यनाथ को धमकी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर तुम भी इस ओहदे (पद) पर न रहे तो तुम भी उसी जद में आजाओगे।

बता दें यह पहली बार नहीं है जब सपा सांसद ने अपराधियों की हिमायत की हो। इसके पहले भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उमेश पाल की हत्या में आरोपित माफिया अतीक अहमद को मिट्टी में मिला देने के बयान पर उन्होंने मुस्लिमों पर ज्यादा जुल्म होने की बात कही थी। योगी के विधानसभा में दिए गए बयान को गुरूर भरा बताते हुए शफीकुर्रहमान बर्क ने इसे असंसदीय बताया था।

संभल से सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि एक पढ़े लिखे व्यक्ति को मिट्टी में मिला देने जैसे बयान शोभा नहीं देते हैं। LIC में पैसे डूबने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कई अन्य माफिया भी हैं जो और ज्यादा पनप रहे हैं। इस दौरान सपा सांसद ने UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। बकौल बर्क मोदी सरकार में मुस्लिमों पर तमाम जुल्म हो रहे हैं जिसमे मॉब लिंचिंग भी शामिल है।

‘बेईमान कहते हैं मर जा मोदी, जनता कहती है मत जा मोदी’: पूर्वोत्तर में BJP की जीत पर बोले PM- पूर्वोत्तर न ही दिल्ली से दूर और न ही दिल से दूर

त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय विधानसभा चुनावों में जीत का डंका बजाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (2 मार्च 2023) की रात दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पहुँचकर भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना भी साधा और पूर्वोत्तर के विकास को सरकार की प्राथमिकता बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि जनता ने भाजपा और उसके सहयोगियों को आशीर्वाद दिया है। इसलिए यह आम जनता को नमन करने का एक और अवसर है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के नतीजे दिखाते हैं कि भारत में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा, “दिल्ली में भाजपा के लिए कार्य करना कठिन नहीं है, लेकिन पूर्वोत्तर में हमारे कार्यकर्ताओं ने दोगुनी मेहनत की है। यह चुनाव दिलों की दूरी समाप्त होने के साथ नई सोच का प्रतिबिंब है। अब पूर्वोत्तर न ही दिल्ली से दूर है और न ही दिल से दूर। यह नया युग और नया इतिहास रचे जाने का पल है।”

इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना भी साधा। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की सरकारों को पूर्वोत्तर के राज्यों की चिंता नहीं थी। उन्होंने कहा, “हमारे कुछ शुभचिंतक भी हैं, जिन्हें इससे तकलीफ है कि आखिर भाजपा के जीतने का राज क्या है? अभी तक के परिणाम को मैंने टीवी नहीं देखा और यह भी नहीं देखा कि ईवीएम को गाली पड़नी शुरू हुई है या नहीं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “कुछ लोग मोदी की कब्र खोदने की साजिश करते हैं, लेकिन कमल खिलता ही जा रहा है, खिलता ही जा रहा है। कुछ लोग बेईमानी भी कट्टरता से करते हैं। बेईमान कह रहे हैं- मर जा मोदी। जनता कह रही है मत जा मोदी।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी नफरत को जगजाहिर कर दिया है। कॉन्ग्रेस कह रही है कि ये तो छोटे राज्य हैं, इनके नतीजे उतना मायने नहीं रखते। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दिल में ही भारत को जोड़ने की भावना ना हो तो ऐसे ही बोल निकलते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में पूर्वोत्तर को महत्व मिलता है तो उनके कुछ विशेष शुभचिंतकों के पेट में दर्द होता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले त्रिपुरा में ये हाल था कि एक पार्टी के अलावा दूसरी पार्टी का एक झंडा तक नहीं लगाया जा सकता था। अगर किसी ने लगाने की कोशिश की तो उसे लहूलुहान कर दिया जाता था। इस बार इन चुनावों में हमने कितना बड़ा परिवर्तन देखा है। पार्टी मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं से मोबाइल की फ्लैश लाइट जलवाकर पूर्वोत्तर के लोगों का आभार व्यक्त करवाया। इस दौरान पीएम ने कहा, “ये नॉर्थ-ईस्ट की देशभक्ति का सम्मान है।”

घर लौटे बिहार के श्रमिक बता रहे माहौल खराब, तमिलनाडु के डीजीपी ने हमले की खबरों को बताया गलत

तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों के साथ कथित हिंसा पिछले कई दिनों से राष्ट्रीय स्तर पर विवादों में है। मीडिया रिपोर्टों में तमिलनाडु से बिहार लौटे श्रमिकों के हवाले से कई गंभीर दावे किए गए थे। हालाँकि तमिलनाडु पुलिस बिहारी श्रमिकों के साथ हिंसा की घटनाओं से इनकार कर रही है।

लेकिन दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें तमिलनाडु में 15 बिहारी श्रमिकों की मौत का दावा किया गया था। 25 साल के अरमान के हवाले से दैनिक भास्कर ने यह बताया था। भास्कर ने अरमान से तब बात की थी, जब वह अपने 20 साथियों के साथ बिहार के जमुई लौट रहा था। उसने कहा था कि तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों की हत्याएँ हुई हैं और शवों को नवादा, लखीसराय, जमुई भेजा गया है। लोग जैसे-तैसे तमिलनाडु से बिहार आ रहे हैं। मगर टिकट मिलने में बहुत दिक्कत है।

भास्कर को अरमान ने यह भी कहा था कि तमिलनाडु में उसके एक दोस्त से यह पूछकर कि क्या वो हिंदी है, उसकी 4 अंगुलियाँ काट दी गईं। इसी तरह 12 मजदूरों को कमरे में बंद करके फाँसी दे दी गई। कुल 15 मजदूरों की हत्या कर दी गई। लेकिन अब भास्कर ने इस रिपोर्ट को अपडेट किया है। इसमें अरमान के हवाले से किए गए हत्या सहित तमाम सनसनीखेज दावे हटा दिए गए हैं।

हालाँकि अपडेट रिपोर्ट में भी अरमान, श्रवण कुमार, राहुल, प्रमोद कुमार, रोहित कुमार जैसे बिहार लौटे श्रमिकों के हवाले से तमिलनाडु में माहौल खराब होने की बात कही गई है।

डीजीपी ने आरोपों को नकारा

बता दें कि सोशल मीडिया में कुछ वीडियो तमिलनाडु में बिहार के लोगों के साथ मारपीट के दावे के साथ वायरल हुए थे। भाजपा ने इस बाबत विधानसभा में प्रदर्शन भी किया। वहीं तमिलनाडु के डीजीपी ने इस वीडियो को लेकर दावा किया कि ये वीडियो झूठी है, जिसमें कहा जा रहा है कि तमिलनाडु में बिहारी मजदूरों को मारा जा रहा है। झूठे दावे के साथ दो वीडियो शेयर हो रही हैं। दोनों झूठी हैं।

डीजीपी शैलेंद्र के अनुसार, “ये दोनों घटनाएँ पहले की हैं जो त्रिपुर और कोयंबटूर में हुईं थीं। दोनों मामलों में ये बिहारी मजदूरों और तमिलनाडु के लोगों के बीच हुई झड़प नहीं थी। इनमें से एक में बिहारी मजदूरों का दो गुट एक दूसरे से भिड़ा हुआ है। दूसरी वीडियो में कोयंबटूर के स्थानीय लोग हैं। अब ये वीडियो इसलिए डाली जा रही है ताकि दिखा सकें कि कैसे बिहारियों पर यहाँ अत्याचार हो रहा है।”

अपडेट: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में तमिलनाडु में हिंदी भाषिक श्रमिकों की हत्या, अंगुलियाँ काटने, फाँसी पर लटकाने जैसे दावे किए गए थे। हमने स्पष्ट रूप से दैनिक भास्कर को क्रेडिट देते हुए ये दावे प्रकाशित किए थे। लेकिन राष्ट्रव्यापी विवाद के बाद दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट अपडेट करते हुए वे दावे हटा लिए हैं। चूँकि भास्कर अपनी पूर्व की रिपोर्ट में किए गए दावों से पीछे हट गया है, इसलिए हमने भी अपनी रिपोर्ट में आवश्यक बदलाव किए हैं।

नाबालिग पर अश्लील टिप्पणियाँ… चार्जशीट में AltNews के मोहम्मद जुबैर का नाम नहीं: HC ने दिल्ली पुलिस से पूछा- आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले का क्या हुआ

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने गुरुवार (2 मार्च 2023) दिल्ली पुलिस से गंभीर सवाल किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि जब ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) का नाम चार्जशीट में नहीं है तो जिस जिस व्यक्ति ने उसके खिलाफ ट्वीट किया, उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने दिल्ली पुलिस से सवाल किया, “आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले व्यक्ति के बारे में क्या हुआ? आपने उस सज्जन को लेकर क्या किया? मैं जानना चाहता हूँ कि क्या हुआ… मैं देखना चाहता हूँ कि क्या चीजें तार्किक रूप से समाप्त हो रही हैं या नहीं।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हमें ये भी देखना है कि जगदीश सिंह नाम का शख्स कहाँ है। दिल्ली पुलिस ने उस तक पहुँचने के लिए कितने हाथ पैर मारे। पुलिस उस तक नहीं पहुँच पा रही है तो इसकी क्या वजह है?” बता दें कि जुबैर ने नाबालिग लड़की को लेकर जो ट्वीट किया था, वह जगदीश सिंह नाम के एक यूजर के कथित अपमानजनक ट्वीट के जवाब में किया था।

उधर, NCPCR ने हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी कि दिल्ली पुलिस का यह कहना कि जुबैर के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है, ‘गलत’ था। एजेंसी का यह रुख अधिकारियों के लापरवाह रवैये को दर्शाता है। NCPR ने आग्रह किया है कि इस मामले की गहन जाँच करने और इसे तार्किक अंजाम तक पहुँचाने के लिए दिल्ली पुलिस को निर्देश दे।

एनसीपीसीआर ने तर्क दिया कि लड़की की तस्वीर को री-ट्वीट करने से उसके पिता के माध्यम से लड़की की पहचान का खुलासा हुआ। इसके कारण लड़की की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। आयोग ने कहा, “नाबालिग लड़की की तस्वीर पर की गई टिप्पणियों में ऐसी टिप्पणियांँ भी शामिल थीं, जो यौन उत्पीड़न की प्रकृति की थीं।”

आयोग ने कहा है कि इस तथ्य को जानने के बाद भी कि लड़की के खिलाफ अश्लील टिप्पणियाँ की जा रही हैं, जुबैर ने उस ट्वीट को हटाने की कोशिश की और न ही संबंधित अधिकारियों को इस बारे में बताने की कोशिश की।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि सोशल मीडिया पर एक नाबालिग को कथित तौर पर धमकाने और प्रताड़ित करने के लिए दर्ज मामले में जुबैर के खिलाफ उसे कोई अपराध नहीं मिला है। इसलिए चार्जशीट में उसका नाम शामिल नहीं किया गया है।

दरअसल, मोहम्मद जुबैर के खिलाफ साल 2020 में एक नाबालिग लड़की को कथित तौर पर धमकाने और प्रताड़ित करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह प्राथमिकी NCPCR की शिकायत के आधार की थी। जुबैर ने अपने विवादास्पद ट्वीट में ऑनलाइन झगड़े के दौरान एक नाबालिग लड़की की तस्वीर ब्लर करके शेयर की थी।

इसके पहले जुबैर के वकील ने अदालत को बताया था कि ट्विटर पर उनके पोस्ट के लिए एक व्यक्ति उन्हें ट्रोल कर रहा था। इतना ही नहीं, उस व्यक्ति ने दुर्व्यवहार और अपमान किया। इसके साथ ही माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर उनके पोस्ट पर सांप्रदायिक टिप्पणी भी कीं।

वकली ने अदालत को आगे बताया कि इसके बाद उसके क्लाइंट जुबैर ने उस व्यक्ति की डिस्प्ले तस्वीर पोस्ट की। उस तस्वीर में वह व्यक्ति अपनी नाबालिग बेटी के साथ खड़ा था और उसका चेहरा जुबैर ने धुंधला कर दिया था। इसके आधार पर शिकायत की गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 13 मार्च 2023 को होगी।

मेघालय में NPP बनाएगी BJP के साथ सरकार, CM कोनराड ने फोन करके अमित शाह से मदद माँगी : असम मुख्यमंत्री सरमा ने कहा- हम जरूर देंगे समर्थन

देश के उत्तर-पूर्व (North-East) के राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम अब स्पष्ट हो चुके हैं। त्रिपुरा में भाजपा ने अकेले ही बहुमत प्राप्त कर लिया है। नागालैंड में बीजेपी और सहयोगी एनडीपीपी ने शानदार जीत दर्ज की है। मेघालय में कोनराड संगमा की पार्टी एनपीपी सबसे बड़े दल के रूप में उभर चुकी है। परंतु NPP बहुमत से दूर है। ऐसे में सत्ताधारी एनपीपी ने सरकार बनाने के लिए बीजेपी से समर्थन माँगा है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मेघालय में सरकार बनाने के लिए समर्थन की माँग की है। एक अन्य ट्वीट के जरिए हिमंत बिस्वा सरमा ने जानकारी दी कि भाजपा नेतृत्व ने एनपीपी को समर्थन देने के लिए राज्य इकाई को हरी झंडी दे दी है।

हिमंता ने लिखा, “भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीजेपी स्टेट यूनिट, मेघालय को राज्य में नई सरकार बनाने के लिए नेशनल पीपुल्स पार्टी को समर्थन देने का निर्देश दिया है। बता दें मेघालय में एनपीपी 28 सीटों पर आगे है। सरकार बनाने के लिए उन्हें और तीन सीटों की जरूरत है। भाजपा और कॉन्ग्रेस 4-4 सीटों पर जीत हासिल करती नजर आ रही है। वहीं अन्य 17 सीटों पर आगे है।

निर्वाचन आयोग की तरफ से जारी अंतिम नतीजों के मुताबिक त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा सीटों में बीजेपी आईपीएफटी गठबंधन को 34 सीटों पर जीत मिली है। इनमें से 32 सीटें बीजेपी के नाम रहीं। वहीं कॉन्ग्रेस और लेफ्ट गठबंधन 14 सीटों पर सिमट गया जबकि पहली बार चुनाव लड़ रही टिपरा मोथा पार्टी के 13 उम्मीदवार विजयी रहे।

इसी प्रकार नागालैंड में भाजपा और उसकी साझेदार नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी फिर से सरकार बनाती नजर आ रही है। यहाँ 60 विधानसभा सीटों में से भाजपा और एनडीपीपी 37 सीटों पर आगे चल रहे हैं। अन्य के खाते में 14 सीटों जाती दिख रही हैं। गठबंधन की बात करें तो भाजपा को 12 और सहयोगी एनडीपीपी को 25 सीटें मिलती नजर आ रही हैं।

सुष्मिता सेन को आया हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी से बची जान: स्टंट डलने के बाद अभिनेत्री बोलीं- ‘जिंदगी जीने के लिए दोबारा तैयार हूँ’

बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन को कुछ दिन पहले दिल का दौरा पड़ा था। इस बात की जानकारी खुद सुष्मिता ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है। उन्होंने अपने पिता के साथ एक तस्वीर भी पोस्ट की है और लिखा है जिंदगी जीने के लिए फिर से तैयार हैं। अभिनेत्री के प्रशंसकों ने उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की है।

सुष्मिता सेन ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी कि पिछले दिनों उन्हें हार्ट अटैक आया था। सुष्मिता ने लिखा, “अपने हृदय में हमेशा खुशी और हिम्मत बनाए रखो। यह आपकी मदद उस समय करेगा जब आपको इसकी सबसे अधिक जरूरत होगी। ज्ञान की ये बातें मेरे पिता ने कही हैं। कुछ दिन पहले मुझे हार्ट अटैक आया था। जिसके बाद एंजियोप्लास्टी की गई है। स्टंट लगाए गए हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि मेरे कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि मेरा दिल वाकई में बड़ा है।”

सुष्मिता ने अपने पोस्ट में उन लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने समय पर उनकी मदद की। सुष्मिता ने लिखा कि इस बारे में ज्यादा जानकारी दूसरे पोस्ट में दी जाएगी। फिलहाल यह पोस्ट मेरे शुभ चिंतकों के लिए है। उन्हें बताना चाहूँगी कि सब ठीक है। जिंदगी जीने के लिए दोबारा तैयार हूँ। उनकी इस पोस्ट के बाद बॉलीवुड से जुड़े लोगों और सुष्मिता के प्रशंसकों ने उनके अच्छी सेहत के लिए प्रार्थना की।

47 साल की अभिनेत्री सुष्मिता सेन पहले भी कुछ बीमारियों का सामना कर चुकी हैं। साल 2021 में भी उन्होंने अपने जन्मदिन के अवसर पर वीडियो पोस्ट के जरिए एक सर्जरी की जानकारी दी थी। साल 2020 में उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए जानकारी दी थी कि 6 सालों (2014) से वो एडिसंस नामक बीमारी से लड़ रही थीं। इस बीमारी की वजह से उनकी इम्यूनिटी कम हो गई थी। एडिसंस एक दुर्लभ बीमारी है जो लाखों में किसी एक को होती है।

60 सीट, 28 प्रत्याशी… जीते एक भी नहीं: त्रिपुरा में ममता बनर्जी की TMC को मिले NOTA से भी कम वोट, सच हुई शुभेंदु अधिकारी की भविष्यवाणी

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने मोर्चा मारा। भाजपा की लहर के आगे विपक्षी दल पस्त नजर आए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस का सबसे बुरा रहा है। ममता की पार्टी को नोटा से भी कम वोट मिले हैं। त्रिपुरा में तृणमूल कॉन्ग्रेस के इस प्रदर्शन को लेकर कहा जा रहा है कि शुभेंदु अधिकारी की भविष्यवाणी सच हुई है।

दरअसल, त्रिपुरा विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल पर बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि ममता बनर्जी की पार्टी कहीं भी फ्रेम में नहीं है। त्रिपुरा में तृणमूल कॉन्ग्रेस को नोटा से भी कम वोट मिलेंगे। अब चुनाव परिणाम सामने आने के बाद आँकड़ों पर नजर डालें तो तृणमूल कॉन्ग्रेस का वोट बैंक नोटा से भी कम नजर आ रहा है।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में नोटा पर 1.36 प्रतिशत वोट पड़ा। वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी को महज 0.88 प्रतिशत ही वोट मिला है।

ममता बनर्जी ने त्रिपुरा विधानसभा की 60 में से 28 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने त्रिपुरा में कई रैलियाँ भी की थीं। हालाँकि भाजपा की लहर के आगे TMC के किसी भी प्रत्याशी को जीत नहीं मिली है। कई सीटें तो ऐसी रहीं जहाँ तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी हजार वोटों का आँकड़ा भी पार नहीं कर सके। वहीं अधिकांश सीटों में टीएमसी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई।

चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने अगरतला, रामनगर और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा के गृह क्षेत्र टाउन बारदोवाली को टारगेट करते हुए करीब 5.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा की थी। हालाँकि ममता ने अगरतला से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। लेकिन टाउन बारदोवाली से तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी को करारी हार मिली है। हालत यह रही कि तृणमूल प्रत्याशी अनंत बनर्जी 1000 वोट भी नहीं जोड़ पाए। उन्हें महज 623 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। इसी प्रकार रामनगर में तृणमूल प्रत्याशी पूजन विश्वास को महज 2042 वोट मिले।

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव परिणाम…

माणिक साहा के नेतृत्व में उतरी भाजपा को त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एक बार फिर जीत मिली है। यहाँ भाजपा को 30 सीटों में जीत मिली है। वहीं 2 सीटों में बीजेपी अब भी आगे चल रही है। यही नहीं भाजपा की सहयोगी पार्टी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के खाते में भी एक सीट गई है। ऐसे में त्रिपुरा में भाजपा 33 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनते हुए एक बार फिर सरकार बनाते हुए दिख रही है।