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बायकॉट बॉलीवुड खतरनाक ट्रेंड, इसे आप ही रोक सकते हैं: सुनील शेट्टी ने CM योगी आदित्यनाथ से लगाई गुहार, कहा- बॉलीवुड में सब ड्रग्स नहीं लेते

मुंबई में गुरुवार (05 जनवरी, 2023) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बॉलीवुड निर्माताओं, निर्देशकों और अभिनेताओं के साथ बैठक की। ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट इन इंडिया’ के बैनर तले हुई मीटिंग में यूपी में बन रहे फिल्म सिटी और निवेश को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान अभिनेता सुनील शेट्टी ने बायकॉट बॉलीवुड (#BoycottBollywood) का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड से बायकॉट टैग हटना जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में बन रही फिल्म सिटी पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने फिल्मी दुनिया की कई हस्तियों ने बैठक की। बैठक के दौरान सुनील शेट्टी ने सोशल मीडिया पर बायकॉट बॉलीवुड ट्रेंड को खत्म करने के लिए योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के सभी लोग ड्रग्स नहीं लेते। गलत काम नहीं करते। हैशटैग बायकॉट बॉलीवुड एक खतरनाक ट्रेंड है जो आपके कहने से रुक सकता है।

सुनील शेट्टी ने कहा कि इंडस्ट्री में कुछ सड़े हुए सेब हो सकते हैं, लेकिन उसके कारण पूरी इंडस्ट्री को सड़ा हुआ नहीं कह सकते। बॉलीवुड के ज्यादातर लोग मेहनत करके लोगों तक अपना काम पहुँचाते हैं। हममें से 99% लोग गलत कामों में लिप्त नहीं होते हैं। हमें इस धारणा को बदलना होगा। आपकी मदद से हैशटैग ‘बायकॉट बॉलीवुड’ ट्रेंड रुक सकता है। अगर आप नेतृत्व करते हैं और पीएम से भी बात करते हैं तो इससे फर्क पड़ेगा।

बैठक में योगी आदित्यनाथ ने फिल्म निर्माताओं और कलाकारों से यूपी फिल्म सिटी में निवेश करने और रुचि लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसमें उनका पूरा सहयोग करेगी। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार उत्तर प्रदेश में निर्मित होने वाली वेब सीरीज पर 50% तक की सब्सिडी और वेब फिल्मों की लागत पर 25% तक की छूट की दिशा में काम करने जा रही है। साथ ही स्टूडियो और लैब के लिए 25% तक की सब्सिडी उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है।

फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने बैठक के बारे में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा कि सीएम ने सब्सिडी की बात की जो अच्छा है। इससे नए फिल्म निर्माताओं को सहायता मिलेगी। मधुर भंडारकर ने कहा कि सिंगल विंडो क्लीयरेंस और OTT फिल्म को सब्सिडी देना बड़ी पहल है।

आपको बता दें कि इस बैठक में सुनील शेट्टी, कैलाश खेर, सुभाष घई, जैकी श्राफ, सोनू निगम, रवि किशन, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ,’ बोनी कपूर समेत कई फिल्मी हस्तियों ने शिरकत की। उन्होंने यूपी फिल्म सिटी को लेकर अपने-अपने सुझाव दिए।

‘चाचा… शरीयत में मत दे दखल’: जावेद अख्तर ने तालिबानी शासन में महिला स्थिति पर उठाए सवाल, इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेरा

अफगानिस्तान में कट्टरपंथी तालिबान (Afghanistan, Taliban) शासन द्वारा वहाँ की लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसको लेकर बॉलीवुड के गीतकार जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने सवाल उठाया है। जावेद अख्तर के इस ट्वीट पर कट्टरपंथियों ने उन्हें घेर लिया।

जावेद अख्तर ने ट्वीट किया, “तालिबानियों ने इस्लाम के नाम पर सभी महिलाओं और लड़कियों के स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारतीय मुस्लिम पर्सनल बोर्ड और अन्य इस्लामिक विद्वानों ने इसकी निंदा क्यों नहीं की। क्यों। क्या वे तालिबानियों से सहमत हैं?”

इसको लेकर अल हिंद नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “श्याम बिहारी की चौथी पीड़ी तू ज़्यादा दख़ल ना दे शरीयत में।”

आदिल साइन नाम के यूजर ने लिखा, “जावेद भाई, अपने मुल्क की चुनौतियों को पहले समझ लें, फिर पड़ोसी मुल्क की बातों पर सोचा जाए। पर नहीं आप तो आप हैं… ऐसी उम्र में लोग थोड़े चिंतित हो ही जाते हैं.. उम्र का कसूर है आप तो मासूम हैं।”

सलमान नाम के यूजर ने लिखा, “भाई सब क्यों अपनी दुर्गति करवाने पर तुले हैं? आपका इस्लाम से कोई लेना देना है क्या?AIMPLB का तालिबान से कोई कनेक्शन बता रहे हो क्या? बेकार क्यों अपनी टाँग फैला रहे हो..जब किसी ने सपोर्ट नहीं किया है तो जरूरी है कि निंदा करें।”

नीलिमा पवार नाम की एक यूजर ने लिखा, “हाँ, भारत के 99% मुस्लिम सहमत हैं और वही शरिया यहाँ लाना चाहते हैं। इसलिए श्रद्धा के कितने भी टुकड़े हो चुप रहते हैं। गजवा-ए-हिंद के सपने देखते है। चाचा आप भी जाग जाओ, क्यूँकी शरिया में गैर मुस्लिम ही नहीं, जो शरिया ना माने वह भी काफिर है। पाकिस्तान में शिया, अहमदिया सभी काफिर हैं।”

संकेत एस जोशी ने लिखा, “मुझे हमेशा आश्चर्य होता है कि इन इस्लामिक देशों का किसी भी क्षेत्र के विकास में क्या योगदान है, जिससे मानव को लाभ होता है। वैज्ञानिक अनुसंधान, उत्पाद विकास, कला, खेल, शिक्षा में कोई बड़ी भूमिका नहीं… लेकिन गोला-बारूद के संबंध में उन्नत तकनीक का उपयोग करने में अग्रणी।”

T. Burhagohain नाम की एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा, “इस्लाम में ईसाई और हिंदू धर्म की तरह एक मजबूत सुधार आंदोलन होना चाहिए। इस धर्म की शुरुआत से इस्लाम में कोई सुधार नहीं हुआ है।”

अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने 21 दिसंबर 2022 को एक फरमान जारी करते हुए कहा कि अब तालिबानी महिलाएँ नौकरी और पढ़ाई नहीं करेंगी। तालिबान ने तर्क दिया था, ”विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जा रहे कुछ विषय इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।” इसके साथ ही उसने यह भी कहा था कि लड़कियों पर पश्चिमी देशों का रिवाज हावी हो रहा है।

रेलवे की जिस जमीन पर कब्जा, वहाँ बांग्लादेशी-रोहिंग्या के भी घर: Video में कब्जाधारियों ने कबूला सच, बताया कॉन्ग्रेस नेता का कनेक्शन

उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने फ़िलहाल यहाँ बसे लोगों को सात दिन के अंदर हटाने के हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है। अब अगली सुनवाई 7 फरवरी 2023 को होगी। महिलाओं-बच्चों को आगे करके यहाँ जो इमोशनल कार्ड खेला गया, जिस ‘मानवता’ के आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, ऑपइंडिया की टीम ने ग्राउंड पर जाकर इससे जुड़ी स्थिति का जायजा लिया, लोगों से बात की।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान जब हमने लोगों से पूछा कि आपलोगों ने कहीं और जमीन वगैरह खरीद रखी है। इस पर एक मुस्लिम नौजवान ने कहा कि जब खाने के लिए कुछ नहीं है तो जमीन कहाँ से खरीदेंगे। उसने कहा कि रोज कुआँ खोदना है, रोज पानी पीना है। उसने आगे बताया कि जो पैसे इकट्ठा किए, सब यहीं घर में लगा दिए। मतलब उसने कबूल लिया कि जमीन बिना खरीदे ही वो घर बना लिया।

वहीं जब हमने प्रदर्शन के दौरान मंच पर बैठे इमाम/मौलवी के बारे में पूछा तो वहाँ मौजूद महिला अख्तरी ने कहा, ”वह इमाम यहाँ के किसी मस्जिद से नहीं आए थे। वह बाहर के थे।” वहीं नौजवान ने कहा, ”यहाँ तो और कौमें भी है। क्या सबको लपेट दोगे।”

वहीं अख्तरी ने स्वीकार करते हुए कहा कि कई मुस्लिम महिलाएँ अपने छोटे-छोटे बच्चे को लेकर धरना स्थल गईं थीं। उस धरने में वह भी मौजूद थीं। अख्तरी का कहना था, “यहाँ रेलवे लाउडस्पीकर लगाकर हमें बस्ती खाली करने को कह रहा है।” उसने कहा कि अगर यह जमीन रेलवे की थी तो पहले क्यों नहीं उन लोगों को हटाया गया।

वहीं जब हमने रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बारे में पूछा तो उन्होंने इनकार नहीं किया। इसके जवाब में कहा, “यहाँ तो कई कौमें रहती हैं। किस-किस के बारे में आपको बताएँ। यहाँ बंगाली सब रहते हैं। यहाँ बंगाली-नेपाली सब मिलेंगे। वहीं धरने में बाहरी लोगों के भाग लेने के बारे में वहाँ मौजूद राशिद और अशरफ से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह खुद धरने में शामिल थे और मौलवी व उनके कुछ रिश्तेदार भी धरने में शामिल थे।”

वहीं यह पूछे जाने पर कि क्या अब तो सब कुछ शांत है यहाँ पर। इस पर उन्होंने कहा कि उन लोगों को पार्षद लईक कुरैशी ने शांत रहने और एक-दूसरे से बात नहीं करने को कहा है। आपको बता दें कि लईक कॉन्ग्रेस पार्षद हैं।

जब हम कुछ आगे बढ़े तो हमें एक बुजुर्ग मिले। हमने उनसे पूछा कि क्या यहाँ सही में बाहरी लोग आकर बसे हैं। इस पर उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में अधिकतर लोग बाहर के हैं। लेकिन वे काफी पहले आए थे। एक बार फिर बाहर से आए मौलाना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह अभी यहीं हैं। इतने में वहाँ आया एक व्यक्ति असमंजस में दिखा और कहा नहीं मौलाना यहाँ नहीं हैं।

इससे पहले जब हम हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके में पहुँचे तो वहाँ हमें विरोध-प्रदर्शन वाली भीड़ गायब दिखी। घूमते-घूमते एक आदमी दिखा, जो 8-10 लोगों को कुछ समझा रहा था। यह शख्स लोगों से आरफा (खानम शेरवानी) का नाम लेकर कुछ कह रहा था। आरफा के मजहब से इस भीड़ (जमा हुए लोग में कुछ दाढ़ी रखे हुए, कुछ इस्लामी टोपी लगाए हुए थे) के मजहब को जोड़ रहा था। ‘आरफा कितना अच्छा बोलती हैं’ – यह कह कर लोगों से बोलने की अपील भी कर रहा था। खुद को पत्रकार बताने वाले इस शख्स ने यह भी कहा कि वो TheWire पर भी इस खबर को चलवाएगा।

एक अन्य रिपोर्ट में हम यह बता चुके हैं कि कैसे हल्द्वानी के धरना-प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल किया गया। मदरसे के हाफिज से लेकर वहाँ के एक लोकल नेता तक की पोल इन बच्चों ने ही खोली।

नशे में धुत होकर किया महिला यात्री के कंबल पर पेशाब, होश आने पर गिड़गिड़ाया: Air India फ्लाइट में ‘बदसलूकी’ का दूसरा मामला

एयर इंडिया फ्लाइट में एक बुजुर्ग महिला पर पेशाब किए जाने का मामला अभी शांत नहीं हुआ कि खबर है फ्लाइट में सफर करने के दौरान एक और महिला के साथ ऐसी ही बदसलूकी की गई। पहले वाली घटना न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रही फ्लाइट में हुई थी और ये वाली घटना पेरिस से दिल्ली आने वाली फ्लाइट में घटी। व्यक्ति ने नशे में धुत होकर महिला यात्री के कंबल पर पेशाब कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, यह घटना फ्लाइट संख्या 142 में 6 दिसंबर 2022 की है। पहली वाली घटना के ठीक 10 दिन बाद की। विमान के पायलट के जरिए इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल को इसकी जानकारी दी गई थी। जब फ्लाइट लैंड के बाद आरोपित को पकड़ा गया तो उसके नशे में होने का पता चला। इसके बाद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बुजुर्ग महिला पर किया पेशाब, प्राइवेट पार्ट दिखाया

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 26 नवंबर वाली घटना में भी आरोपित के नशे में होने की बात सामने आई थी। खबरों के मुताबिक जनेस क्लास में यात्रा कर रहे एक शख्स ने शराब के नशे में धुत होकर करीब 70 वर्षीय एक महिला सहयात्री पर पेशाब कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित यात्री ने कथित तौर पर महिला सहयात्री को अपने प्राइवेट पार्ट भी दिखाए थे।

महिला ने उस समय घटना की शिकायत विमान में मौजूद क्रू मेम्बर से की थी, लेकिन उन्होंने महज खानापूर्ति करके मामले को रफा-दफा कर दिया। इतना ही नहीं, शख्स दिल्ली एयरपोर्ट पर बेधड़क उतरा और चलता बना। जिसके बाद महिला ने इस संबंध में एयर इंडिया के चेयरमैन एन चन्द्रशेखरन को पत्र लिखा और इस घटना के बारे में पता चला। वहीं ‘नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA)’ ने ‘एयर इंडिया’ से घटना के संबंध में रिपोर्ट माँगी।

घटना अमेरिका के ‘जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट’ से दिल्ली आ रही उड़ान संख्या एआई-102 में 26 नवंबर, 2022 को घटी थी। इस घटना को लेकर ‘एयर इंडिया’ ने भी पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने बताया था कि भोजन परोसे जाने के और फ्लाइट के अंदर की रोशनी कम किए जाने के बाद यह घटना हुई।

1 जनवरी 2024 को होगा अयोध्या के भव्य राम मंदिर का उद्घाटन, श्रद्धालु भी कर सकेंगे दर्शन: त्रिपुरा में गृहमंत्री अमित शाह ने की घोषणा

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (MHA) ने गुरुवार (5 जनवरी 2023) को कहा कि अयोध्या में बन रहे भगवान राम के भव्य मंदिर का दर्शन श्रद्धालु 1 जनवरी 2024 से कर सकेंगे। अमित शाह त्रिपुरा में एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान यह बात कही।

उन्होंने श्रीराम निर्माण का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। अमित शाह ने कहा कि आजादी के बाद से ही कॉन्ग्रेस अदालतों में राम मंदिर निर्माण के मामले में अड़ंगा लगाती आई है। राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद आया है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने 5 अगस्त 2020 को श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में ‘भूमि पूजन’ किया था। श्रीराम मंदिर के आसपास के 70 एकड़ क्षेत्र में वाल्मीकि, केवट, शबरी, जटायु, सीता, विघ्नेश्वर (गणेश) और शेषावतार (लक्ष्मण) के मंदिरों का भी निर्माण किया जाएगा।

मंदिर के पहले पहले फेज का काम 30 दिसंबर 2023 को पूरा हो जाएगा। उसके बाद इसे श्रद्धालुओं के खोल दिया जाएगा। वहीं, दूसरे फेज का काम 30 दिसंबर 2024 और तीसरे एवं अंतिम फेज का काम 30 दिसंबर 2025 को पूरा होगा। मंदिर निर्माण में करीब 1800 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

मंदिर का पूरा परिसर 71 एकड़ का है। वहीं, रामलला का मंदिर 8 एकड़ में बन रहा है। मंदिर का शिखर 161 फीट का होगा। मंदिर के निर्माण में किसी प्रकार के लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया जा रहा। साथ ही, इसे ऐसा बनाया जा रहा है कि 1000 साल तक यह मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। यहाँ तक कि 6.5 रिएक्टर के भूकंप से भी मंदिर को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचेगी।

मंदिर के गर्भ गृह में जहाँ राम लला विराजमान होंगे, वह आसन सोने का होगा। वहीं, मंदिर का शिखर भी सोने का हो सकता है। इसके लिए, महाराष्ट्र के एक व्यापारी ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से बात की है। हालाँकि, ट्रस्ट की ओर से अब तक इसको लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई।

भगवान राम के इस मंदिर को सरकार देश का सबसे बड़ा धार्मिक, आध्यात्मिक केंद्र बनाने के साथ ही सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाने में जुटी है। चूँकि, रामलला की बालस्वरूप मूर्ति काफी छोटी है। इसलिए, श्रद्धालु सही तरीके से मूर्ति के दर्शन नहीं कर पाएँगे। ऐसे में, ट्रस्ट ने गर्भगृह में एक अन्य प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया है। 

बता दें कि इस साल मार्च में त्रिपुरा सहित देश के 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें उत्तर-पूर्व के त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के साथ-साथ राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश शामिल है। उधर साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में श्रीराम मंदिर का सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।

दरगाह-ए-हकीमी की खेत में गंदगी में पड़ी मिली हनुमान प्रतिमा: हिंदुओं ने ताला तोड़ की पूजा-अर्चना, कहा- 1912 के नक्शे में मंदिर का जिक्र

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में दरगाह-ए-हकीमी और इच्छेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच अतिक्रमण को लेकर विवाद जारी है। इस बीच एक दूसरा विवाद भी सामने आ गया है जिसे लेकर हिंदू संगठन और दरगाह-ए-हकीमी आमने सामने आ गए हैं। मंगलवार (3 जनवरी, 2023) के दोपहर को तो दरगाह के पिछले हिस्से में जमकर हंगामा हुआ। हिंदुवादी संगठनों, इच्छेश्वर हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने दरगाह के पास प्रदर्शन किया।

मगंल को क्यों हुआ प्रदर्शन?

बुरहानपुर‎ के लोधीपुरा स्थित दरगाह-ए-हकीमी के स्वामित्व वाले खेत में हनुमान जी की प्रतिमा के पूजन को लेकर पूरा विवाद हुआ। हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों का दावा है कि इस स्थान पर पहले मंदिर हुआ करती थी जिसे सुरक्षित रखने के वादे के साथ जमीन का सौदा दरगाह के साथ किया गया था। लेकिन दरगाह की तरफ से न केवल मंदिर नष्ट किया गया बल्कि यहाँ तक पहुँचने वाले रास्ते पर ताला लगा दिया गया।

खेत में मंदिर होने का पता कैसे चला?

दरगाह-ए-हकीमी और इच्छेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच चल रहे पूर्व विवाद को सुलझाने के लिए पिछले दिनों विधायक सुमित्रा कास्डेकर के साथ मंदिर ट्रस्ट के लोग खेत के पास चर्चा कर रहे थे। ट्रस्ट के लोगों का दावा था कि यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर हुआ करता था। घनी झाड़ियों के बीच उन्हें हनुमानजी की प्राचीन प्रतिमा नजर आई, जिससे मंदिर ट्रस्ट और हिंदुवादी संगठन के लोगों के दावों को बल मिला। हनुमान जी की प्रतिमा मिलने के बाद भक्त उनकी पूजा करना चाहते थे। परन्तु दरगाह की तरफ से खेत की तरफ जाने वाले रास्ते को बंद करवा दिया गया। जिससे ताज़ा विवाद उत्पन्न हुआ।

जब भगवान का पूजा किए बिना नहीं रह सके भक्त

आराध्य की पूजा से रोके जाने के बाद प्रदर्शन कर रहे भक्तों की संख्या बढ़ने लगी। भक्तों ने गेट के बाहर भजन और हनुमान चालीसा‎ का पाठ किया। इसके बाद गेट बंद होने पर विरोध‎ करते हुए ताला तोड़कर खेत के उस स्थान तक बढ़े जहाँ हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा प्राप्त हुई थी। वहाँ उन्होंने हनुमान जी का पूजन किया। हिंदू संगठन हनुमानजी की प्रतिमा के पूजन के पूरे‎ अधिकार की बात कह रहा है। वहीं, दरगाह प्रबंधन का‎ कहना है बिना अनुमति के निजी‎ संपत्ति में जबरन प्रवेश किया गया है।‎

दरगाह ने भक्तों को रोकने के लिए गेट पर जड़ा ताला (फोटो साभार नई दुनिया)

मामले पर दरगाह-ए-हकीमी का पक्ष

खेत के विवाद पर दरगाह का पक्ष है कि उन्होंने 1986 में यह खेत शंकर सिंह नाम के व्यक्ति से खरीदा था। वहाँ कई वर्षों से हनुमानजी की मूर्ति रखी हुई थी। दरगाह का कहना है कि जिस व्यक्ति का खेत था उसी ने प्रतिमा स्थापित की थी। यह कोई सार्वजनिक स्थान या मंदिर नहीं था। यहाँ निजी चबूतरा और मूर्ति थी। आज भी वह उसी स्थिति में है। ट्रस्ट ने उसे सुरक्षित रखा हुआ है। मंगलवार को‎ विवाद के समय हमने पूजा-पाठ के लिए दरगाह की अनुमति लेने की बात कही जिसे स्वीकार नहीं किया गया। दरगाह की तरफ से खेत को निजी संपत्ति बताया जा रहा है। दरगाह की तरफ से कहा गया कि इस तरह ताला तोड़कर किसी की निजी संपत्ति में प्रवेश करना पूरी तरह गलत है।‎ दरगाह की तरफ से इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।

मामले पर हिंदुवादियों और मंदिर ट्रस्ट का पक्ष

रिपोर्ट्स के मुताबिक इच्छेश्वर मंदिर समिति के सदस्य महेश सिंह चौहान का कहना है, “हमने 1912 का नक्शा देखा। वहाँ मंदिर होने का उल्लेख है। खेत में हनुमान जी की प्रतिमा भी मिली है। हमारी धार्मिक स्वतंत्रता के तहत वहाँ पूजन करने का हमें अधिकार है। इसको लेकर दरगाह प्रबंधन से समझौता भी हुआ था, लेकिन जब पूजन के लिए लोग पहुँचे तो बाहर गेट पर ताला लगा दिया गया। इससे नाराज भक्तों ने ताला तोड़ दिया।” महेश सिंह चौहान ने नक्शे के हवाले से कहा कि इलाके के लगभग 4 एकड़ भूमि पर हनुमान मंदिर और बड़े शिवलिंग का जिक्र है। स्थानीय लोगों ने भी दरगाह के पीछे खेतों में प्राचीन मंदिर होने की बात कही। जब हमलोग वहाँ पहुँचे तो हमें गंदगी में हनुमान जी की मूर्ति मिली। उसके बाद हमारा और भक्तों का विश्वास मजबूत हो गया।

खेत बेचने वाले शंकर सिंह चौहान के वंशज का पक्ष

दरगाह को जमीन बेचने वाले शंकर सिंह चौहान के वंशज जगदीश सिंह चौहान ने आरोप लगाया है कि दरगाह की तरफ से जमीन बेचने से पहले हुए समझौते का पालन नहीं किया जा रहा है। समझौते के तहत मंदिर और मंदिर का रास्ता छोड़कर खेत बेचा गया है। जगदीश सिंह ने मामले में पुलिस को शिकायत भी दी है। शिकायत में कहा गया है कि दरगाह के निसरीन अली ने जगदीश सिंह को झूठी गवाही देने के लिए प्रलोभन दिया। जगदीश सिंह से कहा गया कि आप खेत में बजरंग बली की मूर्ति होने की बात से इनकार कर दें। गवाही दें कि समिति वालों ने मूर्ति यहाँ लाकर रख दी है। जबकि सच्चाई यह है कि यह मंदिर कई पीढ़ियों से स्थापित है।

आपको बता दें कि दरगाह के तकरीबन 100 एकड़ जमीन में से 4 एकड़ पर मंदिर होने का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा दरगाह और इच्छेश्वर हनुमान मंदिर के बीच अतिक्रमण को लेकर विवाद चल रहा है। इस विवाद के निपटारे के लिए पिछले दिनों सर्वे का काम भी किया गया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

सम्मेद शिखरजी रहेगा सिर्फ तीर्थ स्थान, पर्यटन स्थल नहीं बनेगा: मोदी सरकार ने मानी जैन समाज की माँग, झारखंड सरकार के फैसले पर रोक

झारखंड के गिरिडीह जिले में पार्श्वनाथ की पहाड़ियों पर स्थित जैन समाज के प्रसिद्ध तीर्थस्थल ‘सम्मेद शिखरजी’ को पर्यटन स्थल के रूप में नहीं विकसित किया जाएगा। जैन समाज के लोगों के विरोध प्रदर्शन और उनकी माँगों को ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है।

इस मामले को लेकर केंद्र सरकार ने एक कमिटी बनाई है और झारखंड सरकार से कहा है कि इस समिति में वह 2 सदस्यों को शामिल करे। इस समिति में एक सदस्य स्थानीय जनजातीय समुदाय से शामिल किया जाए। यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने जैन समाज के लोगों से मुलाकात की।

केंद्रीय मंत्री यादव ने इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा, “सम्मेद शिखर की पवित्रता बनाए रखने की माँग करने वाले जैन समुदाय के लोगों से मिला। उन्हें विश्वास दिलाया कि पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार सम्मेद शिखर सहित उनके सभी धार्मिक स्थलों पर जैन समुदाय के अधिकारों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने आगे कहा, “सम्मेद शिखर पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्य और तोपचांची वन्यजीव अभयारण्य के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में आता है। निषिद्ध गतिविधियों की एक सूची है, जो नामित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र में और उसके आसपास नहीं हो सकती है। प्रतिबंधों का अक्षरशः पालन किया जाएगा।”

भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी ज्ञापन में कहा गया है, गिरिडीह जिले में सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र और उसके आसपास वन्यजीव अभयारण्य और पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र है। इस संबंध में राज्य सरकार को निर्देशित किया जाता है कि वह पारसनाथ प्रबंधन योजना, जो पूरे पारसनाथ पर्वत क्षेत्र की रक्षा करता है, के खंड 7.6.1 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के लिए तत्काल कदम उठाए।”

मंत्रालय द्वारा जारी ज्ञापन में आगे कहा गया है, “इन प्रावधानों के तहत पारसनाथ पर्वत क्षेत्र पर शराब, ड्रग्स एवं अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री करना; तेज संगीत बजाना या लाउडस्पीकर का उपयोग करना; धार्मिक महत्व के पवित्र स्थल जैसे कि स्मारक, झीलें, चट्टानें, गुफाएँ, मंदिर आदि को छूना या प्रदूषित करने, ट्रैकिंग करना, पालतू जानवरों के साथ आने आदि की इजाजत नहीं है।”

पर्यावरण मंत्रालय ने झारखंड सरकार को यह भी कहा कि पारसनाथ पर्वत क्षेत्र के इलाके में शराब एवं मांसाहारी खाद्य पदार्थों के उपभोग एवं बिक्री पर प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करे। सम्मेद शिखरजी जैन धर्म का सबसे पवित्र और पूजनीय तीर्थस्थल है और मंत्रालय जैन समुदाय के साथ-साथ पूरे देश के लिए इसकी पवित्रता और महत्व को स्वीकार करता है।

बता दें कि झारखंड सरकार द्वारा पारसनाथ पर्वत क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा के बाद जैन समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जैन समाज के लोग राजधानी दिल्ली से लेकर मुंबई, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान सहित पूरे देश में सरकार के इस फैसले को रद्द करने की माँग कर रहे थे।

हल्द्वानी के धरना-प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल: मदरसे के हाफिज से लेकर लोकल नेता तक, सबकी पोल बच्चों ने ही खोली

उत्तराखंड के हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आपत्ति जताई गई है।

NCPCR ने जहाँ नैनीताल के जिलाधिकारी को पत्र लिख बताया है कि कैसे रेलवे के खिलाफ प्रदर्शन में बच्चों का प्रयोग हो रहा है, उनसे इमोशनल अपीलें करवाई जा रही हैं। वहीं, ग्राउंड जीरो पर मौजूद ऑपइंडिया की टीम ने भी देखा कि सरकार, न्यायालय और विदेशी संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए एक ऑर्गनाइज तरीके से काम किया जा रहा है। बच्चों को आगे कर के इमोशनल ब्लैकमेलिंग की जा रही है।

हल्द्वानी के वनभूलपुरा के अवैध कब्जे वाले स्थानों पर घूमते हुए हम रेल के पटरियों के पास खेलते बच्चों से मिले। खेल में मग्न बच्चों से हमने प्रदर्शन के बारे में सवाल किया। इस दौरान बच्चों ने कई चौंकाने वाली बातें बताई। मोहम्मद समीर नाम के बच्चे ने स्वीकार किया कि बच्चों को मदरसे का ड्रेस पहनाकर धरने में शामिल करवाया गया था।

मोहम्मद समीर ने बताया कि वह इस्लामिया स्कूल में भी पढ़ता है और मदरसे में भी तालीम हासिल करता है। प्रदर्शन के दौरान स्कूल और मदरसों के बच्चों को मदरसे वाले ड्रेस कोड में बुलाया गया था। इसका उद्देश्य भीड़ में ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम मासूमों को दिखाना हो सकता है। धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मदरसे से बच्चों की माँग मतीन सिद्दकी नाम के स्थानीय नेता ने की थी। मतीन सिद्दकी समाजवादी पार्टी से जुड़ा है। मतीन सिद्दकी प्रदर्शन के मुख्य आयोजकों में से एक है। बच्चों ने बतलाया कि मतीन ने ही इरफान हाफिज से बच्चों को तैयार कर प्रदर्शन में लाने की हिदायत दी थी।

वनभूलपुरा के इलाके में कई मदरसे हैं। सभी मदरसों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में बच्चों को इकट्ठा किया गया। बच्चे जिस तरह ऑन कैमरा बात कर रहे हैं, साफ समझा जा सकता है कि उन्हें इसके लिए अच्छे से तैयार किया गया है। बच्चों को ही नहीं बल्कि भीड़ में शामिल लोगों को कैमरे पर क्या बोलना है, कैसे बोलना है, किस भाषा में बोलना है – सब कुछ बतलाया जा रहा है। ऑपइंडिया के पिछले ग्राउंड रिपोर्ट में भी हम इन तथ्यों को सबूत के साथ आपके सामने पेश कर चुके हैं।

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हमने हल्द्वानी के वनभूलपुरा के गलियों में एजेंडाधारियों को देखा जो लोगों को बोलने की ट्रेनिंग दे रहे थे। हमने देखा कि किस तरह एक कथित पत्रकार, भीड़ को ज्यादा से ज्यादा हिंदी शब्दों का इस्तेमाल कर अपनी बात मासूमियत से रखना सिखा रहा था। वह शख्स लोगों से TheWire पर भी सिखाई गई बातें चलवाने का दावा कर रहा था।

महिला के हाथों में होगी नॉर्थ कोरिया की कमांड? 9 साल की बेटी और बहन को ट्रेनिंग दे रहे किम जोंग, कई बीमारियों ने तानाशाह को घेरा

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन (Kim Jong-un) के बीमार होने की अफवाहों के बीच अब यह दावा किया जा रहा है कि वह अपनी बहन और बेटी को भविष्य में देश की सत्ता संभालने के लिए तैयार कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया का तानाशाह किम आने वाली पीढ़ियों के लिए उत्तर कोरिया में अपने परिवार की शक्ति को मजबूत करना चाहता है इसलिए वह यह योजना बना रहा होगा।

द सन की खबर के अनुसार, एक्सपर्ट्स का यह मानना है कि अगर 40 वर्षीय किम की मृत्यु जल्दी हो जाती है या उन्हें किसी वजह से अपनी कुर्सी से हटना पड़ता है तब भी उनका ही शासन जारी रहेगा। ऐसे में किम के बाद उनकी कुर्सी का मजबूत दावेदार उनकी छोटी बहन किम यो जोंग (Kim Yo-jong) को माना जा रहा है। इस बीच किम की नौ साल की बेटी किम ज्यू-एई (Kim Jue-ae) भी खासा चर्चा में हैं। हाल ही में किम ज्यू-एई को अपने पिता के साथ मिसाइल लॉन्च के मौके पर देखा गया था।

उत्तर कोरिया का मीडिया उसे किम की ‘प्यारी’ और ‘अनमोल’ बच्ची के रूप में दिखा रहा है। किम की 35 वर्षीय बहन उसकी खासदार यानी सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक रही है। ये दोनों भाई-बहन बहुत छोटी सी उम्र से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। नॉर्थ कोरिया लीडरशिप वॉच के निदेशक और संस्थापक माइकल मैडेन के अनुसार, अगर किम जोंग-उन को किसी कारण सत्ता छोड़नी पड़ी या उनका निधन हो गया तो भी उत्तर कोरिया कमजोर पड़ने वाला नहीं है। यहाँ किम यो-जोंग के नेतृत्व में अभिजात वर्ग का सामूहिक नेतृत्व देखने को मिल सकता है। मैडेन ने यह भी कहा कि नेतृत्व टीम में किम के अन्य भरोसेमंद लोग अर्थात् उनके इनर सर्कल के सदस्य भी शामिल होंगे।

उन्होंने आगे कहा, “शीर्ष नेतृत्व के पदों पर डीपीआरके के अभिजात वर्ग में ऐसे व्यक्ति होते हैं, जिन्हें किम परिवार के नेतृत्व के प्रति उनकी वफादारी के लिए चुना गया था। इस वफादारी के हिस्से में समर्थन भी शामिल है, जो किम जोंग के बाद के सत्ता परिवर्तन के लिए जो भी योजनाएँ हैं, उसके लिए मिला है।” माना जाता है कि किम के करीबी और भरोसेमंद लोगों में उनकी बहन, बेटी के अलावा पत्नी री सोल जू, भाई किम जोंग-चुल और उनके शीर्ष जनरल-प्रीमियर किम टोक-हुन, जनरल चो रयोंग-हे और मार्शल पाक जोंग-चोन भी शामिल हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि किम की बेटी भी उनकी उत्तराधिकारी हो सकती है, जिसे वह (किम) दो मिसाइल लॉन्च के मौके पर लेकर गए थे।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के न्यू कॉलेज में राजनीति के लेक्चरर डॉ एडवर्ड हॉवेल का मानना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह (किम की बेटी) इस लाइन में हैं या नहीं। डॉ हॉवेल ने कहा कि यह सर्वविदित है कि किम का स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है। ऐसा कहा जा रहा है कि किम को उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी कई बीमारियाँ हैं। साल 2020-2021 में किम जोंग का अचानक से वजन घटना उनके गिरते स्वास्थ्य को दर्शाता है। इसके अलावा वह चेन स्मोकिंग के दुष्प्रभावों से भी जूझ रहे हैं।

जोशीमठ में जमीन धँसने के कारण 500 से अधिक घर रहने लायक नहीं: अब तक 77 परिवार शिफ्ट, भाजपा ने बनाई 14 सदस्यीय समिति, PMO की भी नजर

उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धँसने की बढ़ती घटनाओं से वहाँ के लोग डरे हुए हैं। मकानों में दरारों के बढ़ने के साथ-साथ लोगों की चिंताएँ भी बढ़ रही हैं। लोग अपना गुस्सा सरकार पर निकाल रहे हैं। यहाँ के लोगों ने बद्रीनाथ हाईवे को जाम कर दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दूसरी और प्रदेश भाजपा ने स्थिति का जायजा लेने के लिए 14 सदस्यीय समिति गठित की है।

सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिए बुधवार (4 जनवरी 2023) की रात को लोगों ने मशाल जुलूस निकाला था। जमीन धँसने की वजह से लोगों ने गुरुवार (5 जनवरी 2023) दोपहर बद्रीनाथ हाईवे जाम कर दिया। इस वजह से हाईवे पर गाड़ियों की लंबी लाइन लग गईं। स्थानीय लोगों ने विरोध में अपनी दुकानें भी बंद रखी है।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड भाजपा ने स्थिति और इससे हुई क्षति का जायजा लेने के लिए 14 सदस्यीय समिति गठित की है। भाजपा ने इस समिति का गठन प्रदेश महासचिव आदित्य कोठारी के समन्वय से किया है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी अब जमीन धँसने की घटनाओं की निगरानी कर रहा है। PMO की ओर से लगातार अपडेट लिया जा रहा है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा है कि वह भी जल्द जोशीमठ का दौरा करेंगे। स्थिति को सँभालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। अगर यहाँ के हालात की बात करें तो सभी 16 वार्डों में स्थिति खराब है। मारवाड़ी भूमि में पानी का बहाव भी नहीं रुक रहा है, जिससे निचले हिस्सों में स्थित घर तबाह हो रहे हैं।

सिंहधार में स्थित बीएसएनएल के कार्यालय और आवासीय भवनों में भी दरार आ गई है। जेपी कंपनी के परिसर में जमीन के साथ-साथ घरों की दीवारों से भी पानी का रिसाव हो रहा है। खेतों की दरार में ये पानी घुस रहा है। डाकघर को भी शिफ्ट करना पड़ा है।

‘माउंट व्यू’ नामक होटल तो ऐसा धँस गया कि इसकी पूरी संरचना ही तिरछी हो गई है। होटल को खाली करना पड़ा है। ज्योतिर्मठ परिसर, जो कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य का आवास है, वहाँ के मंदिरों के आसपास भी दरारें आ रही हैं। शंकराचार्य ने सरकार से इस पर ध्यान देने की अपील करते हुए आसपास चल रहे विद्युत्-जल परियोजनाओं को रोकने की माँग की है। 

बता दें कि जिन घरों में रहने लायक स्थिति नहीं, उस परिवार को राज्य सरकार ने दूसरी जगह शिफ्ट किया है। बुधवार को जोशीमठ से 66 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया। अब तक 77 परिवारों को शिफ्ट किया जा चुका है। उत्तराखंड डिजास्टर एंड एक्सीडेंट सिनोप्सिस की रिपोर्ट के अनुसार, जोशीमठ में 500 घर रहने के लायक नहीं हैं।