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जहाँ हुआ जगद्गुरु का जन्म, वहीं के वामपंथी मंत्री ने किया उनका अपमान: कहा – मनुस्मृति आधारित क्रूर जाति-व्यवस्था के समर्थक थे शंकराचार्य

केरल के मंत्री और वामपंथी नेता एमबी राजेश (MB Rajesh) ने आदि गुरु शंकराचार्य को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ‘शंकराचार्य मनुस्मृति पर आधारित क्रूर जाति व्यवस्था के समर्थक थे। केरल के वर्कला स्थित शिवगिरि मठ के एक कार्यक्रम के दौरान राजेश ने यह बयान दिया। राजेश दरअसल श्री नारायण गुरदेव और शंकराचार्य की तुलना कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने शंकराचार्य को जाति व्यवस्था का पक्षधर बता दिया।

राजेश ने अपने बयान में कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य जातिवादी व्यवस्था के पक्षधर थे। उन्होंने कहा कि बहुत सारे लोग समाज में जाति व्यवस्था का शिकार बने और इसके लिए शंकराचार्य भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर श्री नारायण गुरु ने जाति व्यवस्था को खत्म करने का काम किया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर श्री नारायण गुरु ने शंकराचार्य की आलोचना भी की थी। मंत्री ने इसके साथ ही कहा कि केरल में अगर कोई आचार्य हैं तो वह श्री नारायण गुरु हैं, न कि शंकराचार्य।

वहीं भाजपा नेता और केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने राजेश के बयान की निंदा की है। उन्होंने कहा कि वेदांत दार्शनिक आदि शंकराचार्य और संत व समाज सुधारक श्री नारायण गुरु दोनों देश के एक ही परंपरा के थे। उन्होंने कहा कि राजेश हिंदू धर्म में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजेश के बयान की निंदा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका बयान प्राचीन भारतीय परंपराओं और दर्शन के प्रति कम्युनिस्टों की असहिष्णुता को दर्शाता है। इसे झूठा प्रचार करार देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सौ कम्युनिस्टों के घोषणापत्र भी आदि शंकराचार्य और श्री नारायण गुरु द्वारा प्रचारित दर्शन से मेल नहीं खा सकते।

उन्होंने दावा किया कि भक्तों ने स्वामी चिदानंदपुरी की शिक्षाओं से महसूस किया है कि शंकराचार्य के विजन का अन्य भारतीय संन्यास परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पंडित एस चिदानंदपुरी स्वामी ने हाल ही में शंकराचार्य और श्री नारायण गुरुदेव के कार्यों में समानता का उल्लेख किया था और दोनों को एकसमान बताया था। उनके बयान से कथित तौर पर वामपंथी नाराज हो गए थे, जिसके चलते राजेश ने बयान दिया।

बता दें कि आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत के ज्ञान और दर्शन को प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भगवद्गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र के सिद्धांतों को भी बताया। उन्हें एक दार्शनिक के रूप में जाना जाता है। एकता और आध्यात्मिकता पर दिए गए उनके ज्ञान को लोग आज भी सराहते हैं।

कैंसर (गला+स्तन) की दोहरी मार झेल रहीं मार्टिना नवारितोवला: कभी लिएंडर पेस की रहीं पाटर्नर, 59 टाइटल जीत रचा था इतिहास

पूर्व टेनिस खिलाड़ी और इस खेल के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक गिनी जाने वाली मार्टिना नवरातिलोवा (Martina Navratilova) एक बार फिर से कैंसर की चपेट में आ गई हैं। वर्ष 2010 में उन्हें पहली बार स्तन कैंसर (Breast Cancer) कैंसर का पता चला था। उन्होंने उस वक्त 6 माह में ही कैंसर को हरा दिया था। हालाँकि, इस बार उन्हें कैंसर की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। उनमें गला व स्तन कैंसर दोनों का पता चला है।

‘Tennis.com’ की रिपोर्ट के अनुसार, “इतिहास की सबसे महान एथलीटों में से एक मार्टिना नवरातिलोवा में स्टेज 1 के गले के कैंसर (Throat Cancer) का का पता चला है। इसके अलावा, जाँच के दौरान पता चला कि उन्हें स्तन कैंसर भी है। दोनों कैंसर अपने प्रारंभिक चरण में हैं। अच्छे परिणाम की उम्मीद है।” वो भारतीय टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस की डबल्स में पार्टनर रही हैं।

मार्टिना नवरातिलोवा ने कहा, “इस बार कैंसर की दोहरी मार है, जो कि गंभीर है। लेकिन, इसे ठीक किया जा सकता है। मैं बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रही हूँ। मुझे कुछ समय के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन मुझसे जितना बन सकेगा, मैं इससे लड़ूँगी।” नवरातिलोवा ने टेक्सास के फोर्ट वर्थ में नवंबर 2022 के डब्ल्यूटीए फाइनल के दौरान गले की समस्या का पता चला था। उसी दौरान डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि उन्हें फिर से स्तन कैंसर हो गया है। बाद में जब बायोप्सी कराई गई तो पता चला कि उन्हें गले का कैंसर भी है।

मार्टिना का इलाज इसी महीने शुरू किया जाएगा। डॉक्टरों को उम्मीद है कि वह कैंसर से उबर जाएँगी। वैसे भी वह इससे पहले भी कैंसर को हरा चुकी हैं। मार्टिना विश्व की दिग्गज टेनिस खिलाड़ी रहीं हैं। वह रिकॉर्ड 331 सप्ताह तक दुनिया की नंबर 1 टेनिस खिलाड़ी रहीं थी। चेकोस्लोवाकिया में पैदा हुईं मार्टिना नवरातिलोवा के नाम कई रिकॉर्ड हैं। उन्होंने 18 महिला सिंग्लस ग्रैंडस्लैम खिताब जीते हैं। इसके अलावा उन्होंने महिला युगल में 31 और मिश्रित युगल में 10 टाइटल अपने नाम किए हैं। वर्ष 1994 में वह रिटायर हो गईं थीं।

मार्टिना फ़िलहाल अमेरिका में रहती हैं और टेनिस मैचों में कमेंट्री करती हैं। हालाँकि, कैंसर का पता चलने का बाद वह अब आगामी ऑस्ट्रेलियन ओपन में कमेंट्री नहीं कर पाएँगी। मार्टिना ने टेनिस खेलने के दौरान 59 टाइटल अपने नाम किया था।

होटल में लड़ाई, स्कूटी पर साथ, लेकिन एक्सीडेंट होते ही भाग निकली: दिल्ली में लड़की को कार से घसीटे जाने के मामले में CCTV से नया मोड़

दिल्ली में रविवार (1 जनवरी 2022) की रात स्कूटी सवार एक लड़की कार में फँसकर कई किलोमीटर तक घिसटती रही और उसकी मौत हो गई। इस मामले में सीसीटेव फुटेज से नई जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक स्कूटी पर दो लड़की सवार थीं। दूसरी एक्सीडेंट के बाद भाग निकली थी।

दिल्ली के कंझावला में हुई इस घटना को लेकर पुलिस ने कहा है कि एक्सीडेंट वाले रास्ते के सीसीटीवी फुटेज की जाँच से पता चला है कि मृतका अपनी स्कूटी पर अकेली नहीं थी। हादसे के वक्त उसके साथ एक अन्य लड़की भी थी। एक्सीडेंट में वह घायल हो गई और डर के कारण वहाँ से भाग गई। वहीं, मृत लड़की का पैर कार के एक्सल में फँस गया और वह 10-12 किलोमीटर तक सड़क पर घिसटती रही।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी 2022) को पुलिस ने मृतका के साथ स्कूटी में बैठी युवती को ढूँढ़ लिया। अब पुलिस उसके बयान दर्ज करने की तैयारी में है। फिलहाल, उसने पुलिस को बताया है कि यह एक एक्सीडेंट था। घटना से पहले दोनों एक होटल में आयोजित बर्थडे पार्टी में गईं थीं।

रिपोर्ट में होटल के मैनेजर के हवाले से बताया गया है कि दोनों लड़की शाम 7.30 बजे के करीब आई थी और 1.15 बजे के करीब होटल से निकलीं। इनसे मिलने इनके कुछ दोस्त भी आए थे। आपस में लड़ाई के बाद होटल स्टाफ ने इन्हें बाहर निकाल दिया था। मैनेजर के अनुसार होटल के बाहर भी दोनों लड़की के बीच झगड़ा हुआ। आसपास के लोगों ने रोका तो दोनों स्‍कूटी पर बैठकर चली गईं।

पुलिस को एक्सीडेंट वाले रास्ते के कई सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। इनमें से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में, स्कूटी पर दो लड़कियों को बैठे हुए देखा जा सकता है। पुलिस की जाँच में सामने आया है कि आरोपित सड़क के दूसरी ओर कार चला रहे थे। इसलिए, दो-दो परमानेंट पुलिस पिकेट्स होने के बाद भी वह बच गए। यही नहीं, उन्होंने पुलिस पिकेट्स से ठीक पहले यू-टर्न ले लिया था।

बता दें कि सोमवार (2 जनवरी 2022) को मृतका का पोस्टमार्टम हुआ था। दिल्ली पुलिस के स्‍पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) सागर प्रीत हुड्डा ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आरोपितों के खिलाफ धाराएँ बढ़ाई जा सकती हैं। इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय भी सख्त नजर आ रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस को मामले की विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द सौंपने का निर्देश दिया है।

इस मामले में पुलिस ने 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान दीपक खन्ना अमित खन्ना, कृष्णन, मिथुन और मनोज मित्तल के रूप में हुई। पुलिस को शक है कि आरोपित नशे में थे। फिलहाल, उनकी ब्लड रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। यह भी सामने आया है कि आरोपितों ने कार अपने दोस्त से ली थी।

30/12/ 2022- PM मोदी ने बंगाल को दिया वंदे भारत एक्सप्रेस, 02/01/2023 उसी ट्रेन पर पत्थरबाजी: सुवेंदु अधिकारी ने पूछा- क्या यह जय श्रीराम का बदला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को पश्चिम बंगाल को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात दी थी। अब इस ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। इससे ट्रेन का गेट और विंडो क्षतिग्रस्त हो गए। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने घटना की एनआईए जाँच की माँग की है। साथ ही पूछा है कि क्या यह जय श्रीराम का बदला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी 2023) शाम वंदे भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा लौट रही थी। इसी दौरान, मालदा जिले के कुमारगंज के पास अज्ञात लोगों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके। पथराव के कारण ट्रेन के कोच सी-13 का दरवाजे को नुकसान हुआ साथ ही विंडो में दरार आ गई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद, रेलवे विभाग हरकत में आ गया और ट्रेन को हथियारबंद 4 पुलिस कर्मियों के साथ रवाना किया। पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ भी की है।

इस घटना को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने ट्वीट कर कहा है, “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में भारत के गौरव, वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव हुआ है। क्या यह उद्घाटन के दिन लगाए गए ‘जय श्री राम’ के नारों का बदला है? मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय रेल से इस मामले की जाँच NIA को सौंपकर दोषियों को दंडित करने का आग्रह करता हूँ।”

वैसे यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव किया गया है। इससे पहले 14 दिसंबर 2022 को वंदे भारत एक्सप्रेस नागपुर से रायपुर जा रही थी। इस दौरान, दुर्ग और भिलाई स्टेशन के बीच पथराव की घटना सामने आई थी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिम बंगाल को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सौगात दी थी। यह ट्रेन हावड़ा और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच चल रही है। ट्रेन के उद्घाटन हेतु आयोजित कार्यक्रम में, ममता बनर्जी जब मंच की ओर बढ़ रहीं थीं तब वहाँ मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए थे। इन नारों के कारण ममता बनर्जी ने मंच में बैठने से मना कर दिया था। पूरे कार्यक्रम के दौरान, वह प्लेटफॉर्म के पास लगी कुर्सियों में बैठी रहीं।

UP के एटा में 35 लोगों ने की घर वापसी: 1995 में बना दिए गए थे ईसाई, पथवारी माता मंदिर में हवन कर वापस बने हिंदू

उत्तर प्रदेश के एटा में 10 ईसाई परिवारों के 35 लोगों ने सनातन धर्म में वापसी की है। वर्ष 1995 में धर्मांतरण कर ये लोग ईसाई बन गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन्हें प्रलोभन देकर ईसाई बनाया गया था। मामला एटा जिले के थाना शकरौली क्षेत्र के जरानीकलां गाँव का है।

हिंदू एकता समूह के सदस्यों ने इस संबंध में प्रयास किया था। समूह के सदस्यों ने इन लोगों से बातचीत की तो पता लगा कि इनमें से कई लोग सनातन धर्म में वापसी के इच्छुक हैं। इसके बाद संगठन की ओर से अन्य लोगों को भी समझाया गया और हिंदू धर्म की महत्ता के बारे में बताया गया। इसके बाद सोमवार (2 जनवरी 2023) को गाँव के ही पथवारी माता मंदिर में इस संबंध में कार्यक्रम का आयोजन किया गया और इनलोगों की सनातन धर्म में वापसी करवाई गई। 35 लोगों ने हवन में आहुति देकर अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाया

हिंदू एकता समूह के संस्थापक शुभम ने बताया कि वर्ष 1995 में इनलोगों को प्रलोभन देकर और गुमराह करके ईसाई बना दिया गया था। इसके बाद हिंदू देवी-देवताओं के फोटो को अलग कर इन्हें हर रविवार चर्च बुलाया जाने लगा था। इसके बाद ये लोग ईसाई धर्म के अनुसार ही जीवन-यापन करने लगे थे। पर इनमें से कई लोग सनातन धर्म में वापसी के इच्छुक थे। इसलिए इनमे से 35 लोगों ने स्वेच्छा से हवन में आहुति देकर घर वापसी की।

हवन कराने वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मौके पर घर वापसी करने वाले सभी लोगों को कभी हिंदू धर्म नहीं छोड़ने का संकल्प दिलाया। संकल्प दिलाने के बाद उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हिंदू धर्म के लिए अपने बलिदान दिए हैं। ऐसे में उन्हें अपमानित नहीं करना चाहिए। इसके बाद सभी लोगों की गंगा जल से शुद्धि कराई गई।

गौरतलब है कि बीते 25 दिसंबर 2022 को मध्य प्रदेश के दमोह में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी रामकथा के दौरान 300 लोगों की घर वापसी करवाई थी। उससे एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के जशपुर में भी विशाल हिंदू सम्मेलन के दौरान अखिल भारतीय घरवापसी के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने 50 धर्मांतरित परिवार के सदस्यों का चरण पखार उनकी सनातन धर्म में वापसी करवाई थी।

पहले रेलवे की जमीन कब्जाई, अब महिलाओं-बच्चों को आगे कर शुरू किया नया ‘शाहीन बाग़’: समर्थन में जुटे कॉन्ग्रेस नेता, 1975 से ही अवैध अतिक्रमण

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित गफूर बस्ती में अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यहाँ लोगों ने रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा कर अपने घर बना लिए हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट इन अवैध कब्जों को हटाने की अनुमति दे चूका है। इसी मुद्दे को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं। हालाँकि, विरोध कर रहे लोगों ने अब अपने बच्चों और घर की महिलाओं को आगे कर दिया है। प्रदर्शनकारी इनकी आड़ में शाहीन बाग़ जैसा प्रदर्शन करना चाह रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग़ में ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)’ विरोधी प्रदर्शन के दौरान इसी तरह से बच्चों और महिलाओं को आगे कर दिया गया था।

दरअसल, मंगलवार (27 दिसम्बर, 2022) को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के वनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे। इसके लिए न्यायालय ने प्रशासन को सप्ताह भर की समयसीमा दी थी। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू भी कर दी गई थी, लेकिन लोगों ने भारी विरोध करना शुरू कर दिया, जिसके चलते कार्रवाई को 10 जनवरी, 2022 तक रोक दिया गया है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट भी रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण को ले कर चिंता जताते हुए इसे जल्द से जल्द खाली करवाने के आदेश दे चुका है।

वहीं हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शनकारी ‘विक्टिम कार्ड’ खेल रहे हैं। अपने बच्चों और घर की महिलाओं को आगे कर रहे हैं। साथ ही ठंड का भी हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि कड़ाके की ठंड में उन्हें बेघर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि अतिक्रमण हटाने से पहले उन्हें कहीं और बसाया जाए। साथ ही सोशल मीडिया पर भी अतिक्रमणकारियों के पक्ष में एजेंडा चलाया जा रहा है, ताकि सरकार अतिक्रमण हटाने का इरादा ही छोड़ दे। साथ ही कॉन्ग्रेस नेता भी इस आग को खूब हवा दे रहे हैं।

वहीं एक दावे के मुताबिक, हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्ज़े की शुरुआत साल 1975 से हुई थी। पहले कच्ची झुग्गियाँ बनाई गईं, जो बाद में पक्के निर्माण में तब्दील हो गए। बाद में इसी अवैध कब्ज़े में न सिर्फ इबादतगाहें बल्कि अस्पताल तक बना डाले गए। आरोप है कि यह सब देखने के बाद भी तत्कालीन रेलवे सुरक्षा बल खामोश रहा। साल 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट की कड़ाई के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ पहला केस दर्ज करवाया, लेकिन तब तक लगभग 50 हजार लोग अवैध तौर पर वहाँ रहना शुरू कर चुके थे।

नैनीताल हाईकोर्ट के साल 2016 में आए आदेश के चलते कब्जेदारों ने लम्बी मुकदमे बाजी की। हालाँकि, वो अपने कब्ज़े का कोई ठोस प्रमाण नहीं पेश कर पाए। बताया जा रहा है कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ डेढ़ दशक पहले भी बड़ा अभियान चलाया गया था। तब भारी फ़ोर्स के साथ सिर्फ कुछ हिस्सों को खाली करवा पाया गया था। इस दौरान कब्जेदारों के घरों के नीचे रेलवे लाइनें तक निकली थीं। कुछ समय की शांति के बाद खाली करवाए गए स्थान पर फिर से अवैध कब्ज़ा हो गया।

कंझावला कांड पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त, अमित शाह ने दिल्ली पुलिस से माँगी रिपोर्ट: मृतका का हुआ पोस्टमॉर्टम, सबूत जुटाने में लगी पुलिस

दिल्ली के कंझावला में कार में फंसकर हुई युवती की मौत को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस से जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा है। वहीं, मृतक युवती का पोस्टमार्टम भी हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कई चीजें सामने आ सकतीं हैं। इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया है कि आरोपितों ने युवती को 10-12 किलोमीटर तक घसीटा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी 2022) को मृतक युवती का पोस्टमार्टम दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में किया गया। यह पोस्टमार्टम 3 डॉक्टर्स की टीम ने किया है। इस टीम को डॉ. उपेंद्र किशोर रहे थे। वह, एलएनजेपी के फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड हैं।

इस पूरे मामले की जाँच कर रही पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द आएगी। रिपोर्ट देखने के बाद आरोपितों के खिलाफ धाराएँ बढ़ाई जा सकतीं हैं। वहीं, इस मामले में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी सागर प्रीत हुड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। इसमें, उन्होंने कहा है कि मृतक युवती को 10-12 किलोमीटर तक घसीटा गया है। इसके बाद किसी मोड़ पर बॉडी गिरी है।

उन्होंने यह भी कहा है पुलिस फिजिकल, ओरल, सीसीटीवी और सभी प्रकार के सबूत तलाशने में जुटी हुई है। आरोपितों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। इस मामले में धारा 279, 304, 304A, 120b के तहत एफआईआर दर्ज हुई है। पोस्टमार्टम के बाद यदि कुछ सामने आता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। सबूतों के हिसाब से टाइमलाइन बनाई जाएगी। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वो लोग कहां से आ रहे थे। पुलिस इनके बयानों को सच भी नहीं मान रही।

वहीं, इस मामले में ‘टाइम्स नाउ’ ने दावा किया है कि एफआईआर में दर्ज बयान में दीपक और अमित ने पुलिस को एक्सीडेंट की बात कही है। एक्सीडेंट के वक्त दीपक गाड़ी चला रहा था। एक्सीडेंट होने के बाद दीपक ही गाड़ी लेकर भागा। दिल्ली के जोंटी गाँव में आरोपितों ने गाड़ी रोकी। इसके बाद, दीपक और अमित ने देखा था कि युवती कार में फंसी हुई है।

लड़की का शव नग्नावस्था में हुआ था बरामद

बता दें कि 1 जनवरी को युवती स्कूटी से अपने घर लौट रही थी। तभी, एक कार से उसका एक्सीडेंट हुआ। एक्सीडेंट में युवती कार के निचले हिस्से में फँस गई, लेकिन आरोपितों ने कार नहीं रोकी। इस कारण युवती 10-12 किलोमीटर तक लगातार घिसटती चली गई। इस हादसे में, युवती के पैर भी कट चुके थे। सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने दिल्ली के कंझावला थाना क्षेत्र से लड़की का शव नग्नावस्था में बरामद किया। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, मामले पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा है।

2023 में माँ सीता के 2 भव्य मंदिर: सीतामढ़ी आ सकते हैं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति: नौ विग्रह रूप में दिखेगी माता जानकी, 108 स्वरूपों के होंगे दर्शन

वर्ष 2023 सीतामढ़ी के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वर्ष सीतामढ़ी में माँ सीता की दो मंदिरों की आधारशिला रखी जाएगी। रिपोर्ट की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू इन मंदिरों के भूमिपूजन में शामिल हो सकते हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, बखरी और पुरौना धाम में इन मंदिरों को बनाया जाएगा। बखरी में 251 फीट की प्रतिमा का निर्माण होगा। मंदिर की निशुल्क रजिस्ट्री के लिए प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक़, मंदिर में सीता मैया अपने नौ विग्रह स्वरूप में दिखेंगी। साथ ही वृताकार रूप में माँ सीता के 108 स्वरूपों की प्रतिमा का भी निर्माण होगा। यह सीता माता की विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा होगी।

वहीं सीतामढ़ी के स्थानीय परिसदन ने 19 नवंबर, 2022 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति’ के अध्यक्ष और सीतामढ़ी से जदयू सांसद सुनील कुमार पिंटू ने पत्रकारों को पहली बार आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी दी थी। राघोपुर बखरी के महंत रामलाल दास ने माता सीता की प्रतिमा के निर्माण के लिए 14 एकड़ जमीन भी दान में दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक तक 24.40 एकड़ जमीन के लिए करार हो चुका है।

वहीं बात अगर सीतामढ़ी के ही पुनौरा धाम की करें तो यहाँ दिव्य सीता उद्भव मंदिर की आधारशीला रखी जाएगी। इसका निर्माण मकराना पत्थर से किया जाएगा। इस दिशा में प्रयास भी शुरू कर दिया गया है। यहाँ बनने वाली मंदिर को लेकर गुजरात से इंजीनियर की टीम आई थी, जिन्होंने अपना निरीक्षण कार्य पूरा कर लिया है।

मंदिर के चारों और गुम्बदनुमा 61 भव्य आक्रतियाँ बनाई जाएँगी। मंदिर के आकार की बात करें तो इसकी परिधि 194×194 फीट की होगी। सीता कुंड के मध्य एक दिव्य सीता कुंड मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इस जगह की मान्यता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि त्रेता युग में विदेह के राजा जनक के हल चलाने के दौरान इसी जगह पर माँ सीता अवतरित हुई थीं।

जहाँ वनवास के दौरान रुके थे रघुकुल नायक, वहाँ बनेगा उनका भव्य मंदिर: शिलान्यास के लिए कर्नाटक पहुँचेंगे योगी आदित्यनाथ, ऐसी होगी ‘दक्षिण की अयोध्या’

अयोध्या में राम लला के भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण जोरों-शोरों से चल रहा है। इस बीच कर्नाटक सरकार ने, रामनगर जिले में स्थित प्राचीन रामदेवरा बेट्टा (Ramdevara Betta) मंदिर को अयोध्या की तरह ही भव्य बनाने का ऐलान किया है। इस मंदिर का शिलान्यास उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार अयोध्या में बन रहे राम लला के मंदिर ही तरह रामदेवरा बेट्टा को दक्षिण भारत की अयोध्या बनाना चाहती है। इस मंदिर निर्माण को लेकर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ सीएन अश्वथ नारायण ने कहा है कि रामदेवरा बेट्टा में राम मंदिर बनाने के फैसले की घोषणा राज्य के अगले बजट में की जाएगी।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “जिस तरह उत्तर भारत के अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, उसी तरह कर्नाटक में राम मंदिर का निर्माण होगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर्नाटक आएँगे और मंदिर के लिए चिह्नित की जाने वाली भूमि का निरीक्षण करेंगे।” बता दें कि इससे पहले, सीएन अश्वथ नारायण ने मुख्यमंत्री बोम्मई और राज्य की धर्मादा मंत्री शशिकला जोले को एक पत्र लिखकर मंदिर निर्माण की माँग की थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि रामदेवराबेट्टा में धर्मादा विभाग की 19 एकड़ जमीन का इस्तेमाल करके श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।

रामदेवरा बेट्टा मंदिर को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में इस मंदिर का निर्माण वानर राज सुग्रीव ने कराया था। सुग्रीव ने ही प्रभु श्रीराम की मूर्ति भी मंदिर में स्थापित की थी। यही नहीं, स्थानीय लोगों की मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के समय, माता सीता और लक्ष्मण के साथ यहाँ एक वर्ष बिताया था।

हालाँकि, अब इस मंदिर निर्माण को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। जेडीएस नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा, “मैं अपने दम पर एक मंदिर का निर्माण कर सकता हूँ। यूपी के सीएम को लाने की कोई जरूरत नहीं है। कर्नाटक दिवालिया नहीं हुआ है। मेरे पास अपने दम पर मंदिर बनाने की ताकत है। मैं शिलान्यास समारोह के लिए वोक्कालिगा समुदाय के धार्मिक प्रमुखों और सुत्तूर संत को भी ला सकता हूँ।”

अब पाकिस्तानी हिन्दू परिवार भी गंगा में प्रवाहित कर सकेंगे अपनों की अस्थियाँ: मोदी सरकार ने लिया फैसला, कराची में इंतजार कर रही 300 मृतकों की अस्थियाँ

पाकिस्तान के हिंदू भी अब भारत आकर गंगा में अपने मृत परिजनों की अस्थियों को प्रवाहित कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने स्पॉन्सरशिप नीति (Sponsorship Policy) में बदलाव किया है। इसके फलस्वरूप अब 426 मृत पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियों को हरिद्वार स्थित गंगा नदी में प्रवाहित किया जा सकता है।

हिंदू धर्म में मान्यता है कि गंगा नदी में अस्थियों को प्रवाहित करने से उक्त आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है। इसलिए, पाकिस्तान में भी कई हिन्दुओं की इच्छा रहती है कि मरणोपरांत उनकी अस्थियों को गंगा नदी में प्रवाहित किया जाए। हालाँकि स्पॉन्सरशिप नीति की वजह से ऐसा होना आसान नहीं था। दरअसल पहले यह प्रावधान था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू के परिवार का भारत में रहने वाला कोई सदस्य या करीबी उन्हें स्पॉन्सर करे। इसके बाद हीं उन्हें वीजा दिया जा सकता था। दोनों देशों के बीच विभाजन हुए काफी समय बीत गए। ऐसे में पाकिस्तान में रहने वाले काफी कम हिन्दुओं के परिवार ही अब भारत में बचे हैं।

अब नीति में बदलाव के तहत मृत हिंदू के परिवार के सदस्यों को उनकी अस्थियाँ विसर्जित करने के लिए भारत का 10 दिनों का वीजा दिया जाएगा। इसके तहत 426 हिंदू परिवार अपने मृत परिजनों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने में सक्षम होंगे। हालाँकि वर्ष 2011 और 2016 के बीच 295 हिंदुओं की अस्थियों को वाघा बॉर्डर भेजा गया था। लेकिन, ऐसा पहली बार होगा कि हिंदू परिवार खुद इन अस्थियों को लेकर भारत आएँगे और पूरे क्रिया-कर्म से अस्थियों का विसर्जन करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कराची में सोनपुर श्मशान घाट में 300 हिंदुओं की अस्थियाँ रखी हुईं हैं। इसके साथ हीं अन्य जगहों पर भी 128 अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित होने का इंतजार कर रही हैं।पाकिस्तान में ऐसे बहुत सारे हिंदू हैं जो अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के बाद अस्थियों को मंदिरों या श्मशान में सुरक्षित रख देते हैं। इन लोगों को आशा थी कि किसी न किसी दिन वे अपने प्रियजनों (मृतकों) की अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित कर सकेंगे। मोदी सरकार के इस फैसले से ऐसे लोगों की मनोकामना पूरी होगी।