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नौकरी-रोजगार और पैसे का लालच: UP के हरदोई में 40 लोगों को ईसाई बनाने की कोशिश करने वाला गिरफ्तार, कहा- हिंदू धर्म अच्छा नहीं

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने और इसे अपनाने का दबाव देने वाले आरोपित कमलेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित 31 दिसंबर 2022 की शाम को चौपाल का आयोजन किया था और उसमें लोगों को प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव दे रहा था। वहाँ मौजूद एक शख्स ने पुलिस से इसकी शिकायत कर दी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोप है कि ग्रोसरी शॉप चलाने वाला 45 वर्षीय कमलेश कुमार हरदोई में टीकर मजरा मलेहरा स्थित अपने घर में चौपाल लगाया था। इसमें शामिल करीब 40 लोगों को वह ईसाई धर्म अपनाने के लिए विभिन्न तरह का प्रलोभन दे रहा था। इसके लिए वह हिंदू धर्म पर कई तरह के तोहमत लगा रहा था।

एक स्थानीय पत्रकार ने ट्वीट कर बताया, “हरदोई में घर के अंदर चौपाल लगाकर लोभ लालच देकर ईसाई धर्म को अपनाने के लिए किया जा रहा था प्रेरित। करीब आधा सैकड़ा महिला-पुरुष को घर के अंदर जमा किया गया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करके भेजा जेल दिया है। मामला संडीला कोतवाली क्षेत्र के टीकर मजरा मलेहरा का है।”

संडीला थाना के प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र गिरी ने बताया कि किराना दुकान चलाने वाले कमलेश ने टिकर माजरा स्थित अपने घर पर पार्टी का आयोजन किया था, जिसमें 40 से अधिक लोग शामिल हुए थे। कमलेश ने उन्हें नौकरी और रोजगार के अलावा नियमित आर्थिक मदद का लालच दिया था।

गिरि ने बताया, “वहाँ मौजूद लोगों में से एक बबलू दयाल ने पुलिस को बताया कि कमलेश ने पहले सभी को समझाने की कोशिश की कि हिंदू धर्म अच्छा नहीं है और बाद में भोले-भाले स्थानीय लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया।”

वहीं, हरदोई पुलिस ने भी ट्वीट कर घटना की जानकारी दी है। पुलिस ने बताया है कि आरोपित कमलेश को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम- 2021 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

पता था कार में फँसी है लड़की, फिर भी 12 किमी तक भगाते रहे: कंझावला केस में सबूत मिटाने की भी हुई कोशिश, दिल्ली पुलिस ने बताया- 7 हैं आरोपित

दिल्ली के कंझावला मामले में पुलिस ने गुरुवार (5 जनवरी 2023) को बड़ा खुलासा किया। स्पेशल सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) सागर प्रीत हुडा (Sagar Preet Hooda) ने बताया, “वारदात को अंजाम देने वाले 5 नहीं कुल 7 आरोपित हैं। आशुतोष और अंकुश खन्ना की तलाश जारी है। पाँचों आरोपितों के बयान अलग-अलग हैं।”

उन्होंने आगे बताया, “हम जल्द से जल्द मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की कुल 18 टीमें इस मामले की जाँच कर रही हैं। दो नए आरोपितों ने सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की है। हमें गलत सूचना दी और आरोपितों की मदद करने की कोशिश की।”

यह बात भी सामने आई कि आरोपितों को पता था कि गाड़ी के नीचे लड़की फँसी हुई है, इसके बावजूद वे गाड़ी को नहीं रोके। आरोपित कार को लगभग 12 किलोमीटर तक घूमाते रहे।

उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है। कई सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है। अंजलि का आरोपितों से कोई संबंध नहीं था। गाड़ी अमित चला रहा था। अंजलि ने शराब पी या नहीं पी, इसका इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है। निधि इस मामले की मुख्य गवाह है।

SCP हुड्डा ने कहा कि अभी कई रिपोर्ट आना बाकी है। सभी पहलुओं की जाँच करने के बाद ही पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी। पुलिस की 18 टीमें दिन-रात काम में जुटी हुई हैं। यह भयानक दुघर्टना 1 जनवरी 2023 को हुई और 5 जनवरी तक इससे जुड़ी कई जानकारी जुटा ली गई है।

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने आगे बताया, “5 के अलावा दो और आरोपितों में से एक अमित का भाई है। जब उसने यह देखा कि उसके भाई अमित के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है और ये एक एक्सिडेंट केस है, तब उसने दूसरे आदमी (दीपक) को सजेस्ट किया कि तुम कहो कि मैं गाड़ी ड्राइव कर रहा था। इस तरह उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। क्रिमिनल को बचाने की कोशिश की है। वो भी इस मामले में हमारे लिए आरोपित है।”

इस मामले में आगे खुलासा करते हुए SCP हुड्डा ने कहा, “जिसकी गाड़ी थी, उसको भी मालूम था कि गाड़ी कौन लेकर गया है। गाड़ी दीपक लेकर नहीं गया था, बल्कि कोई दूसरा लेकर गया था। उसने भी एक तरह से गुमराह करने की कोशिश की है और आरोपित की मदद की। मुझे उम्मीद है कि हम जल्दी ही इस मामले में एक मजबूत चार्जशीट दाखिल करेंगे।” वहीं, दीपक ने पुलिस पूछताछ में बताया था कि वह गाड़ी चला रहा था, जबकि गाड़ी अमित चला रहा था।

बता दें कि 1 जनवरी 2023 को अंजलि की भयानक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी स्कूटी को टक्कर मारते हुए एक कार उसे कई किलोमीटर तक घसीटती रही। पुलिस ने कार सवार आरोपितों पर गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही से मौत और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

वहीं, अंजलि की दोस्त निधि ने कहा था कि उस वक्त अंजलि ने शराब पी रखी थी, जबकि परिवारवालों ने निधि के दावों को खारिज कर दिया है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंजलि के पेट में किसी तरह का अल्कोहल नहीं पाया गया है। यानी अंजलि ने शराब नहीं पी थी।

‘भगवा छोड़ मॉडर्न बनें CM योगी’: कॉन्ग्रेस नेता हुसैन दलवई का विवादित बयान, BJP ने बताया- संतों का अपमान

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में अगले महीने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट होने जा रहा है। इसके पहले योगी आदित्यनाथ मुंबई के दौरे पर हैं। योगी आदित्यनाथ समिट के लिए स्थानीय निवेशकों को आमंत्रित करने के साथ-साथ नोएडा में बनने वाले फिल्म सिटी को लेकर फिल्मी दुनिया के हस्तियों से मुलाकात कर रहे हैं। इस बीच महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने यूपी के सीएम योगी पर विवादास्पद टिप्पणी की है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को भगवा कपड़ों का त्याग कर मॉडर्न बनने की सलाह दी है।

कॉन्ग्रेस नेता हुसैन दलवई ने पत्रकारों से मराठी में बातचीत करते हुए योगी आदित्यनाथ के भगवा वस्त्र पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री आधुनिकता का प्रतीक है इसलिए उन्हें (योगी आदित्यनाथ) को भगवा कपड़े छोड़कर आधुनिक कपड़े पहनने चाहिए। दलवई ने कहा कि उन्हें हर दिन धर्म की बात नहीं करनी चाहिए। भगवा कपड़े नहीं पहनने चाहिए और थोड़ा मॉडर्न हो जाना चाहिए।

भाजपा नेता राम कदम ने हुसैन दलवई के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दलवई के बयान को देश के साधु-संतो का अपमान करार दिया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि कॉन्ग्रेस का हिंदू विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आ गया है।

एक अन्य ट्वीट में राम कदम ने कॉन्ग्रेस नेता दलवई के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी और उनके नेताओं को हिंदू धर्म के सनातनी पवित्र भगवे रंग से इतनी नफरत क्यों ?” उन्होंने लिखा कि भगवा रंग साधु-संतो का पहनावा मात्र नहीं है बल्कि त्याग, बलिदान, सेवा, ज्ञान, शुद्धता एवं आध्यात्म का परिचायक भी है।

राम कदम ने लिखा कि कन्ग्रेस को सिर्फ चुनाव के समय हिंदू धर्म तथा हिंदू लोगों की याद आती है।

ताजा जानकारी मिलने तक योगी आदित्यनाथ की उद्योगपतियों के साथ बैठक चल रही है। मुंबई में उनका रोड शो होने वाला है। जानकारी के मुताबिक उनके कैबिनेट के दूसरे मंत्री भी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए देश के बड़े-बड़े महानगरों में रोड शो निकालने वाले हैं।

मौलवी वसीम को पानीपत से कैराना ले गया उर्दू का उस्ताद दिलशाद, डंडे से पीट-पीटकर मार डाला; फिर निर्माणाधीन मकान में गाड़ा

हरियाणा के पानीपत जिले से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इस मामले ने बॉलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ की याद दिला दी है, जिस प्रकार फिल्म में एक युवक ही हत्या करने के बाद उसके शव को निर्माणाधीन पुलिस थाने में दफना दिया गया था, उसकी तरह फिल्मी स्टाइल में आरोपित पहले मौलवी को कैराना ले गया ​और फिर वहाँ उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को निर्माणाधीन म​कान में गाड़ दिया। पुलिस ने हत्यारोपित 65 वर्षीय मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान वसीम के रूप में हुई है। वह 31 दिसंबर 2022 से लापता था। बताया जा रहा है कि वसीम शादीशुदा था और उसके दो बच्चे हैं।

पानीपत पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार की मौजूदगी में मंगलवार (3 जनवरी 2023) को कैराना के रेता वाला मोहल्ला के निर्माणाधीन मकान से वसीम का शव बरामद किया। बुधवार (4 जनवरी 2023) को शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने बताया कि हत्या करने वाला उर्दू उस्ताद व उसका साथी मौलवी ही है। उसने करीब साढ़े 7 लाख रुपए के लालच में आकर वसीम पर जींद की एक महिला के साथ गलत काम करने का आरोप लगाकर उसकी हत्या कर दी।

भाई के व्हाट्सएप पर भेजा मैसेज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 वर्षीय वसीम पानीपत के इमाम साहब मोहल्ला जाटल रोड का निवासी था। वह 4 दिनों से लापता था। मृतक के बड़े भाई कल्लन के अनुसार, उसका छोटा भाई वसीम लकड़ी का काम करता था। वह 31 दिसंबर 2022 की सुबह करीब 8 बजे काम के लिए निकला था, जिसके बाद घर वापस नहीं लौटा। भाई ने बताया, “1 जनवरी 2023 की शाम 6 बजकर 12 बजे मिनट पर मेरे व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया, जिसमें वसीम के शव की फोटो थी। उस मैसेज में लिखा था कि हम जींद से बोल रहे हैं। तुम्हारे भाई ने हमारी लड़की के साथ गलत काम किया था। इसलिए हमने उसे मार दिया। वसीम ने लड़की से 7 लाख 35 हजार रुपए भी ले लिए थे। मरते हुए वसीम ने अपने भाई का नंबर दिया है। अब ये रुपए उसके भाई से वसूले जाएँगे।”

उस्ताद दिलशाद ने हत्या की बात कबूल की

कुछ मीडिया रिपोर्ट में वसीम को वसीन कहा जा रहा है। मामले की जाँच कर रहे जाँच अधिकारी महिपाल सिंह ने बताया, “पीड़ित परिवार ने शुरुआत में वसीम की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद वसीम की हत्या की बात सामने आई। जब उसके भाई को एक मैसेज मिला, जिसमें लड़की और पैसों के लेन-देने की बात कही गई थी।”

उनके मुताबिक, “मामले की जाँच के दौरान परिवार, दोस्त, पड़ोसी और अन्य लोगों से पूछताछ की गई। वसीम मौलवी भी था। उसने 65 साल के दिलशाद को अपना उस्ताद बनाया हुआ था, जो खुद भी मौलवी है। जब उसके इस मामले में सख्ती से पूछताछ की गई उसने अपने शागीर्द की हत्या की बात कबूल कर ली।”

साढ़े 7 लाख रुपए पर थी नजर

आरोपित ने पुलिस को बताया कि वह वसीम को काम दिलाने के बहाने कैराना लेकर गया था। उसने उसे एक निर्माणाधीन मकान में बैठने को कहा। तभी मौका पाकर दिलशाद ने वसीम के सिर पर डंडे से ताबड़तोड़ कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद वह गद्दों का चेन वाला कवर लेकर आया और उसमें वसीम के उसने शव को डालकर छाती तक चेन बंद कर दिया। फिर उसने निर्माणाधीन मकान में ही उसका शव दफना दिया।

आरोपित दिलशाद यूपी के कांधला का रहने वाला है। व​ह वसीम को करीब 7 साल से जानता था। दिलशाद अक्सर वसीम के घर भी आता था। इस दौरान उसे यह पता लगा कि वसीम की जींद निवासी एक महिला अध्यापिका के साथ दोस्ती है। अध्यापिका ने उसे हाल ही में करीब साढ़े 7 लाख रुपए दिए थे, जिन पर उसकी (दिलशाद) की नजर थी। इन पैसों के लिए ही उसने एक सोची समझी साजिश के तहत अपने चेले को मार डाला।

‘समाधान यात्रा’ से पहले PK का नीतीश-तेजस्वी पर वार: कहा- बताएँ कौन देता है फंड, मैंने मुँह खोला तो धोती-पायजामा नहीं बचेगा

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) आजकल ‘जनसुराज यात्रा’ पर हैं। यात्रा के दौरान कई मौकों पर उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish kumar) और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पर निशाना साधा है। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर उनका मुँह खुल गया तो किसी का धोती-पायजामा भी नहीं बचेगा। वह यात्रा की फंडिंग पर उठ रहे सवालों का जवाब दे रहे थे।

प्रशांत किशोर ने पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता जनता को लूट कर अपना काम चला रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि वह गरीबों का पैसा लूटकर अपनी बर्थडे पार्टी चार्टर प्लेन में मना रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने कहा, “मैंने तो इन पार्टियों के लिए काम भी किया है। अगर मेरा मुँह खुल गया तो किसी का धोती-पायजामा भी नहीं बचेगा।” उन्होंने कहा कि मीडिया इन लोगों से क्यों नहीं पूछती है कि आखिर ये लोग इतना पैसा लाते कहाँ से हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश और तेजस्वी को बताना चाहिए कि किन लोगों से पैसा लेकर वे बिहार में इतनी बड़ी पार्टी चला रहे हैं।

वहीं जब उनसे पूछा गया कि उनकी ‘जनसुराज यात्रा’ के लिए पैसा कहाँ से आ रहा है तो उन्होंने कहा, “पैसा वहाँ से आ रहा है, जिन राज्यों में सरकार बनाने में मैंने मदद की थी। ऐसे 6 राज्य हैं। अब वो मेरी मदद कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि हर काम के लिए वे पैसों के लेन-देन को चेक के माध्यम से करते हैं।

उधर, नीतीश कुमार भी गुरुवार (5 जनवरी 2023) से ‘समाधान यात्रा’ निकाल रहे हैं, जो 7 फरवरी 2023 तक चलेगी। यात्रा के दौरान बिहार के 18 जिलों को कवर किया जाएगा। इसकी शुरुआत पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर के दरुआबारी गाँव से होगी। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विकास कार्यों का जायजा लेंगे और ग्रामीणों से मिलेंगे।

प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की इस यात्रा को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि जिस यात्रा को वह करने जा रहे हैं, पेपरों पर तो यह उनकी 14वीं यात्रा है, लेकिन वास्तव में यह केवल एक प्रशासनिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का जनता से कुछ लेना-देना नहीं है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार यात्रा के दौरान उन अधिकारियों से मुलाकात करेंगे, जिनसे वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बात करते हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को पता है कि यह उनका अंतिम कार्यकाल है। अब उनके लिए कुछ नहीं बचा है। अब वे समय रहते रिटायर हो जाएँ, इसी में उनकी भलाई है।

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, उत्तराखंड सरकार और रेलवे को नोटिस: कहा- 7 दिन में 50 हजार लोगों को नहीं हटा सकते

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर बसे लोगों को सात दिन के अंदर हटाने के हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस मामले को मानवीय नजरिए से देखना चाहिए। इसके साथ ही उच्च न्यायालय के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और भारतीय रेलवे को नोटिस जारी की है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे की जमीनों पर रह रहे लगभग 50 हजार लोग खुश हैं। पिछले कई दिनों से वे सड़कों पर उतर कर उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इस मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी 2023 को होगी।

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेलवे की याचिका पर सुनवाई करते हुए यहाँ बसे लोगों को अतिक्रमण बताया था और रेलवे को इस जमीन को सात दिन में खाली कराने के लिए कहा था। इसके बाद रेलवे इन इलाकों से अतिक्रमण हटाने के लिए तैयारी करने लगी थी। इसके बाद स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और कॉन्ग्रेस के स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश सुप्रीम कोर्ट चले गए।

क्या है मामला

27 दिसम्बर 2022 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे। इसके लिए न्यायालय ने प्रशासन को सप्ताह भर की समय सीमा दी थी। इसी आदेश में कोर्ट ने प्रशासन से बनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लाइसेंसी हथियार भी जमा करवाने को कहा था।

दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट भी रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर चिंता जताते हुए इसे जल्द से जल्द खाली करवाने का आदेश दे चुका है। बता दें कि रेलवे की ओर से 2.2 किलोमीटर लंबी पट्टी पर बने मकानों और अन्य ढाँचों के कुल 4,365 अतिक्रमण हटाए जाने हैं। जहाँ अतिक्रमण हटाया जाना है, वहाँ 20 मस्जिदें हैं।

अपनी कार्रवाई के पीछे रेलवे ने तर्क दिया है कि अवैध कब्ज़े से न सिर्फ विकास में दिक्कत आ रही बल्कि विस्तार भी प्रभावित हो रहा है। रेलवे का यह भी कहना है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले अतिक्रमण करने वालों को कई नोटिस भेजी गई थी, लेकिन उस पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही किसी ने खुद से अतिक्रमण हटाया।

साल 2013 में उत्तराखंड हाईकोर्ट में हल्द्वानी में बहने वाली रही गोला नदी में अवैध खनन को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। गोला नदी हल्द्वानी रेलवे स्टेशन और पटरी के बगल से बहती है। याचिकाकर्ता ने कहा था कि रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बसे गफूर बस्ती के लोग गोला नदी में अवैध खनन करते हैं, जिसके कारण रेल की पटरियों और गोला पुल को खतरा उत्पन्न हो गया है।

1975 से हो रहा अतिक्रमण

कहा जा रहा है कि हल्द्वानी में रेलवे की जमीनों पर अवैध कब्ज़े की शुरुआत साल 1975 से हुई थी। पहले कच्ची झुग्गियाँ बनाई गईं, जो बाद में पक्के निर्माण में तब्दील हो गए। बाद में इसी अवैध कब्ज़े में न सिर्फ इबादतगाहें बल्कि अस्पताल तक बना डाले गए। आरोप है कि यह सब देखने के बाद भी तत्कालीन रेलवे सुरक्षा बल खामोश रहा।

साल 2016 में हाईकोर्ट की कड़ाई के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ पहला केस दर्ज करवाया, लेकिन तब तक लगभग 50 हजार लोग अवैध तौर पर वहाँ रहना शुरू कर चुके थे। हाईकोर्ट के इस आदेश के चलते कब्जेदारों ने लम्बी मुकदमेबाजी की। हालाँकि, वो अपने कब्ज़े का कोई ठोस प्रमाण नहीं पेश कर पाए।

बताया जा रहा है कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ डेढ़ दशक पहले भी बड़ा अभियान चलाया गया था। तब भारी फ़ोर्स के साथ सिर्फ कुछ हिस्सों को खाली करवा पाया गया था। इस दौरान कब्जेदारों के घरों के नीचे रेलवे लाइनें तक निकली थीं। कुछ समय की शांति के बाद खाली करवाए गए स्थान पर फिर से अवैध कब्ज़ा हो गया।

कहा जाता है कि यहाँ पर अवैध रूप से बसाने की शुरुआत दिवंगत कॉन्ग्रेस नेत्री इंदिरा हृदयेश ने की थी। इसी राह पर अब उनके बेटे सुमित हृदयेश भी हैं। यहाँ ये जानना जरूरी है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ और कब्जेदारों के समर्थन में कैंडल मार्च निकाला है।

‘हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करती हो, नहीं देंगे कास्ट सर्टिफिकेट’: महाराष्ट्र के नांदेड़ में MBBS लड़की के साथ भेदभाव, लोग भड़के

महाराष्ट्र के नांदेड़ में महादेव कोली जनजाति की छात्रा को इसलिए जाति प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया क्योंकि महिला और उसका परिवार हिंदू देवी-देवताओं की उपासना करता है। TV9 मराठी की रिपोर्ट के मुताबिक मयूरी कोली नाम की छात्रा को जाति प्रमाण-पत्र से वंचित किए जाने के बाद समाज का गुस्सा फूट पड़ा। समाज के लोगों ने सड़क पर उतर कर फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया।

मामला नांदेड़ जिले के हडगाँव के खारतवाड़ी गाँव का है। गाँव की युवती मयूरी पुंजरवाड ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है। मयूरी अब एमडी की पढ़ाई करना चाहती है। एमडी में दाखिले के सिलसिले में छात्रा अपना जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए जाति वैधता समिति (Caste Validity Committee) से निवेदन करती है। समिति के लोग यह कहते हुए उसे प्रमाण-पत्र देने से इनकार कर देते हैं कि वह देवी-देवताओं की पूजा करती है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि छात्रा मयूरी के पिता के पास कोली जनजाति का प्रमाण-पत्र है। वही प्रमाण पत्र अब उनकी बेटी को नहीं दिया जा रहा है।

मयूरी के पिता का कहना है कि समिति के कुछ लोगों ने उनके घर पर भगवान शिव और दूसरे देवी-देवताओं की मूर्तियाँ देखी। समिति के लोगों का कहना है कि मयूरी हिंदू-देवी देवताओं की पूजा करती है इसलिए वह महादेव कोली जनजाति से अलग है और उसे प्रमाण-पत्र नहीं दिया जा सकता।

जाति प्रमाण-पत्र न मिलने से आहत छात्रा का कहना है कि यदि हिंदू देवी देवताओं की पूजा करने से मुझे शिक्षा से वंचित होना पड़ेगा तो वह देवी-देवताओं की पूजा नहीं करेगी। कास्ट सर्टिफिकेट न दिए जाने से नाराज महादेव कोली समाज के लोगों का भी कहना है कि यदि देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए उन्हें जाति प्रमाण -पत्र से वंचित किया जाएगा तो वे कलेक्टर ऑफिस तक मार्च निकालेंगे और अपने घर में विराजमान देवी-देवताओं की तस्वीरें व मूर्तियों को अधिकारियों को सौंप देंगे।

मुस्लिम भीड़, आरफा बहन और मजहब, उर्दू नहीं… हिंदी में बोलो: हल्द्वानी में जमीन कब्जाए लोगों को पत्रकार ने दी ट्रेनिंग, बोला TheWire पर आएगा

हल्द्वानी में सरकारी जमीन कब्जा करके मुफ्त में रह रहे लोगों के लिए वामपंथी मीडिया लामबंदी में जुट गया है। एक जगह भीड़ को जमा करके उसके रोने-धोने वाले वीडियो बार-बार चलाए जा रहे। मानवता की दुहाई देकर सरकार से ही मुफ्त में और सुविधाएँ देने की अपील जारी है। भीड़ कहाँ से आ रही, कौन क्या बोल रहा, किससे क्या पूछा जा रहा – इन सबकी जाँच-पड़ताल के लिए ऑपइंडिया पहुँची ग्राउंड पर।

हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके की जिन गलियों के वीडियो वायरल किए गए, वहाँ पहुँचने पर हमें विरोध-प्रदर्शन वाली भीड़ गायब दिखी। सामान्य चहल-पहल थी। बहुत आश्चर्य हुआ। गलियों में समय बिताने पर असल बात का पता चल गया। अपने टाइप (वामपंथी) की मीडिया आने पर 100-50 की भीड़ जमा हो जाती, इनके अलावा अन्य मीडिया के सामने यहाँ के लोग कुछ भी नहीं बोलते, न ही भीड़ लगाते।

इन्हीं गलियों में घूमते हुए 8-10 लोगों की भीड़ एक जगह मुझे दिख गई। उत्सुकता हुई तो मैं भी शामिल हो गया उस भीड़ में। मोबाइल कैमरा लेकिन चालू कर लिया था। यहाँ एक आदमी था, जो लोगों को कुछ समझा रहा था। ठंड से बचने के लिए भूरे रंग की टोपी पहना यह शख्स लोगों से आरफा (खानम शेरवानी) का नाम लेकर कुछ कह रहा था। आरफा के मजहब से इस भीड़ (जमा हुए लोग में कुछ दाढ़ी रखे हुए, कुछ इस्लामी टोपी लगाए हुए थे) के मजहब को जोड़ रहा था। ‘आरफा कितना अच्छा बोलती हैं’ – यह कह कर लोगों से बोलने की अपील भी कर रहा।

इसके बाद भीड़ की नजरों में मेरा मोबाइल कैमरा चढ़ गया। मैंने उसे बंद करने में ही अपनी गनीमत समझी। चालाकी सिर्फ यह दिखाई कि ऑडियो रिकॉर्डिंग चालू कर दी। वीडियो से ज्यादा मजेदार बातें ऑडियो में रिकॉर्ड हुईं। भीड़ को क्या बोलना है, कैसे बोलना है, किस भाषा में बोलना है – सब कुछ यह कथित पत्रकार बता रहा था। इसी ऑडियो रिकॉर्डिंग में यह भी पता चला कि कथित पत्रकार TheWire पर भी इस खबर को चलवाएगा, यह भी बोल गया। सुनिए इस पत्रकार को, इसकी ट्रेनिंग देने वाली शैली को… जो यह हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके में अवैध रूप से सरकारी जमीन को कब्जाए लोगों को दे रहा है।

“आपको लास्ट में कंक्लुजन में कहना है सुप्रीम कोर्ट से… क्योंकि टैगलाइन इसी पर होगी। मुँह में बात डाल रहा हूँ, बार-बार कह रहा हूँ… बोलो कि मैं सुप्रीम कोर्ट से कहना चाहता हूँ, हम भी भारत के नागरिक हैं, कृपया हम पर जो गुनाह हो रहा है… नहीं उर्दू शब्द नहीं बोलो, हिंदी वर्ड यूज करो… हम पर जो अन्याय हो रहा है, उस पर आप संज्ञान लें। भैया आप लोग कैमरे के सामने आओ।”

इतना समझाने के बाद भी भीड़ को आप अंत में सुन सकते हैं कि वो गड़बड़ कर देता है। लेकिन कथित पत्रकार के धैर्य को सलाम! वो भीड़ को फिर से समझाता है। जब अच्छे से घुट्टी पिला देता है, तब जाके फाइनल रिकॉर्डिंग होती है। अब सुनिए पूरी तरह से ट्रेनिंग पा चुकी भीड़ की पुकार – इसमें महिला, बच्चे, गर्भवती महिला, मानवता – सब शब्द घुसाए गए हैं। इसी में कथित पत्रकार भीड़ को शाबासी भी देता है, TheWire पर इसे पब्लिश करवाने का वादा भी करता है।

हल्द्वानी में वामपंथी मीडिया भीड़ के मुँह में बात डाल रहा है, चौंकिए मत लेकिन। यह इनका पुराना हथियार है, इसी से ये नैरेटिव बनाते आए हैं, बनाते रहेंगे। हमने पहले भी इनको बेनकाब किया है, आगे भी करते रहेंगे।

नहीं दिखेगी दीपिका पादुकोण की साइड, बेशरम रंग की ‘भगवा बिकनी’ पर सीन क्लियर नहीं: पठान को लगे 10 कट, भारत माता से ‘श्रीमती’ भी हटा

बॉलीवुड की फिल्म पठान के बेशरम रंग गाने के क्लोज अप बोल्ड शॉट्स, साइड पोज़ और कई डांस स्टेप्स को सेंसर कर दिया गया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने पठान फिल्म के साथ-साथ विवादित बेशरम रंग गाने में कई बदलावों का सुझाव दिया था। इसके अलावा कई डायलॉग और अन्य दृश्यों में भी बदलाव की बात कही गई थी। अभी भी फिल्म का विरोध जारी है। अहमदाबाद में बजरंगदल कार्यकर्ताओं ने एक मॉल में फिल्म के पोस्टर फाड़ डाले।

सीबीएफसी ने फिल्म में लगाए 10 कट

सेंसर बोर्ड ने दीपिका पादुकोण और शाहरुख खान पर फिल्माए बेशरम रंग गाने में ऐसे क्लोज-अप सीन हटाने को कहा है, जिनमें नग्नता प्रदर्शित हो रही है। बोर्ड ने गोल्ड स्विमसूट वाले शॉट को भी सेंसर किया है। गाने में आई “बहुत ही तंग किया” लाइन पर दीपिका के स्टेप पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई और इन स्टेप्स को सीमित करने के लिए कहा है। सेंसर ने डांस में कूल्हे के क्लोज-अप हटाने की भी बात कही गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार गाने के अलावा बोर्ड ने फिल्म के कुछ संवादों को भी बदलने की बात कही है। फिल्म में रॉ शब्द के स्थान पर ‘हमारे’, लंगड़े लुल्ले की जगह ‘टूटे फूटे’, पीएम की जगह ‘राष्ट्रपति या मंत्री’ और ‘पीएमओ’ शब्द हटा दिया गया है। इसके अलावा अशोक चक्र को ‘वीर पुरस्कार’, पूर्व-केजीबी को ‘पूर्व-एसबीयू’ और श्रीमती भारत माता को ‘हमारी भारत माता’ शब्दों से बदला गया है। इतने बदलाव के बाद इस फिल्म को यू/ए (U/A) सर्टिफिकेट दिया गया है। 2 घंटे 26 मिनट लंबी इस फिल्म का ट्रेलर 10 जनवरी तक आ सकता है वहीं फिल्म को 25 जनवरी 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज किए जाने की तैयारी है।

अहमदाबाद में फिल्म के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

आपको बता दें कि बेशरम रंग गाने में दीपिका के बोल्ड सीन और ड्रेस को लेकर काफी विवाद हुआ था। कई जगहों पर फिल्म रिलीज न होने देने तक की भी धमकी दी जा रही है। इसे लेकर अब भी विरोध जारी है। अहमदाबाद में बुधवार (04 जनवरी 2023) को शाहरुख खान की फिल्म पठान के प्रमोशन के दौरान जमकर हंगामा हुआ।

कर्णावती इलाके में स्थित अल्फावन मॉल में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने फिल्म पठान के पोस्टर फाड़ डाले। उन्होंने फिल्म को रिलीज नहीं करने की धमकी भी दी। हंगामे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने मॉल में विरोध प्रदर्शन करे रहे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की फिल्म पठान शुरू से ही विवादों में रही है। फिल्म का गाना बेशरम रंग रिलीज होने के बाद जमकर बवाल हुआ था। लोगों को दीपिका पादुकोण के डांस स्टेप, पहनावे और भगवा रंग की बिकिनी से आपत्ति है। लोगों को शिकायत है कि फिल्म खास तौर पर बेशरम रंग गाने के माध्यम से अश्लीलता फैलाई जा रही है।

माना आप बच्चे की तरह करते हैं प्यार, पर आदमी नहीं है कुत्ता: बॉम्बे HC ने FIR रद्द कर पुलिस पर लगाया जुर्माना, मोड़ पर टक्कर में ठोक दिया था 279/337

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने एक महत्पूर्ण फैसले में कहा कि कोई व्यक्ति किसी कुत्ते को कितना भी अपनी औलाद की तरह माने, लेकिन वह इंसान नहीं बन सकते। इसलिए उनके लिए IPC की धारा 279 और 337 के तहत किसी पर आरोप नहीं लगाया जा सकता है। ये दोनों धाराएँ मानवीय जीवन को खतरे में डालने पर लगाई जाती हैं।

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और पृथ्वीराज चवन की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्विगी फूड डिलीवरी पार्टनर के खिलाफ दर्ज मामले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 279, 337 और 449 के तहत मामला दर्ज कर ‘तर्क की अवहेलना’ की है।

इतना ही नहीं, इस तरह के अतार्किक व्यवहार के लिए कोर्ट ने अधिकारियों को दंडित भी किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ 20,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस जुर्माने की वसूली अधिकारियों के वेतन से किया जाएगा।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “इसमें कोई शंका नहीं है कि कुत्ते या बिल्ली के मालिकों द्वारा उन्हें बच्चे या परिवार के सदस्य के रूप में माना जाता है, लेकिन जीवविज्ञान का मूल सिद्धांत ये कहता कि वे इंसान नहीं हैं। IPC की धारा 279 और 337 मानव जीवन को खतरे में डालने या किसी इंसान को जख्मी करने से संबंधित है।”

दरअसल, डिलीवरी पार्टनर राइडिंग के दौरान रोड पार कर रहे एक कुत्ते से टकरा गया था। इसमें दोनों घायल हो गए। बाद में कुत्ते की मौत हो गई थी। इसके बाद मानस गोडबोले नाम के डिलीवरी पार्टनर के खिलाफ एक महिला ने मामला दर्ज कराया था। घटना के समय मानस की उम्र 18 वर्ष थी और वह ‘डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन’ अंतिम वर्ष का छात्र था।

मानवीय जीवन को खतरे में डालने वाली धाराओं के अलावा, मुंबई की मरीन ड्राइव पुलिस ने गोडबोले के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम की धाराएँ भी लगाई थीं। हालाँकि, इस कानून की धाराओं के तहत भी केस को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से यह हादसा हुआ, उसमें आरोपित का इरादा जानबूझकर नुकसान पहुँचाने की नहीं थी।

दरअसल, साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान गोडबोले 11 अप्रैल को खाने की डिलीवरी देने के लिए जा रहा था। रात 8 बजे के करीब एक महिला मरीन ड्राइव पर आवारा कुत्तों को कुछ खिला रही थी। इसी दौरान एक कुत्ता बाइक के नीचे आ गया। उसे बचाने के लिए स्पीड लिमिट में चल रहे राइडर ने ब्रेक लगाई और वह एक तरह गिर गया। उसी तरफ वह कुत्ता भी गिर गया। इससे कुत्ते को चोट लग गई और वह स्वर्ग सिधार गया।

लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि आरोपित स्पीड लिमिट में गाड़ी चला रहा था। वह फूड आइटम देने के लिए जा रहा था, इसी दौरान रास्ते में कुत्ता आ गया। इससे यह दुर्घटना हुई और आरोपित खुद बाइक से नीचे गिर गया और उसे भी चोट लगी। उसका कोई आपराधिक इरादा नहीं था।