Home Blog Page 2132

30/12/ 2022- PM मोदी ने बंगाल को दिया वंदे भारत एक्सप्रेस, 02/01/2023 उसी ट्रेन पर पत्थरबाजी: सुवेंदु अधिकारी ने पूछा- क्या यह जय श्रीराम का बदला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को पश्चिम बंगाल को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात दी थी। अब इस ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई है। इससे ट्रेन का गेट और विंडो क्षतिग्रस्त हो गए। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने घटना की एनआईए जाँच की माँग की है। साथ ही पूछा है कि क्या यह जय श्रीराम का बदला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी 2023) शाम वंदे भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी से हावड़ा लौट रही थी। इसी दौरान, मालदा जिले के कुमारगंज के पास अज्ञात लोगों ने ट्रेन पर पत्थर फेंके। पथराव के कारण ट्रेन के कोच सी-13 का दरवाजे को नुकसान हुआ साथ ही विंडो में दरार आ गई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद, रेलवे विभाग हरकत में आ गया और ट्रेन को हथियारबंद 4 पुलिस कर्मियों के साथ रवाना किया। पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ भी की है।

इस घटना को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर हमला बोला है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने ट्वीट कर कहा है, “यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में भारत के गौरव, वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव हुआ है। क्या यह उद्घाटन के दिन लगाए गए ‘जय श्री राम’ के नारों का बदला है? मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय रेल से इस मामले की जाँच NIA को सौंपकर दोषियों को दंडित करने का आग्रह करता हूँ।”

वैसे यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव किया गया है। इससे पहले 14 दिसंबर 2022 को वंदे भारत एक्सप्रेस नागपुर से रायपुर जा रही थी। इस दौरान, दुर्ग और भिलाई स्टेशन के बीच पथराव की घटना सामने आई थी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिम बंगाल को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की सौगात दी थी। यह ट्रेन हावड़ा और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच चल रही है। ट्रेन के उद्घाटन हेतु आयोजित कार्यक्रम में, ममता बनर्जी जब मंच की ओर बढ़ रहीं थीं तब वहाँ मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए थे। इन नारों के कारण ममता बनर्जी ने मंच में बैठने से मना कर दिया था। पूरे कार्यक्रम के दौरान, वह प्लेटफॉर्म के पास लगी कुर्सियों में बैठी रहीं।

UP के एटा में 35 लोगों ने की घर वापसी: 1995 में बना दिए गए थे ईसाई, पथवारी माता मंदिर में हवन कर वापस बने हिंदू

उत्तर प्रदेश के एटा में 10 ईसाई परिवारों के 35 लोगों ने सनातन धर्म में वापसी की है। वर्ष 1995 में धर्मांतरण कर ये लोग ईसाई बन गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन्हें प्रलोभन देकर ईसाई बनाया गया था। मामला एटा जिले के थाना शकरौली क्षेत्र के जरानीकलां गाँव का है।

हिंदू एकता समूह के सदस्यों ने इस संबंध में प्रयास किया था। समूह के सदस्यों ने इन लोगों से बातचीत की तो पता लगा कि इनमें से कई लोग सनातन धर्म में वापसी के इच्छुक हैं। इसके बाद संगठन की ओर से अन्य लोगों को भी समझाया गया और हिंदू धर्म की महत्ता के बारे में बताया गया। इसके बाद सोमवार (2 जनवरी 2023) को गाँव के ही पथवारी माता मंदिर में इस संबंध में कार्यक्रम का आयोजन किया गया और इनलोगों की सनातन धर्म में वापसी करवाई गई। 35 लोगों ने हवन में आहुति देकर अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाया।

हिंदू एकता समूह के संस्थापक शुभम ने बताया कि वर्ष 1995 में इनलोगों को प्रलोभन देकर और गुमराह करके ईसाई बना दिया गया था। इसके बाद हिंदू देवी-देवताओं के फोटो को अलग कर इन्हें हर रविवार चर्च बुलाया जाने लगा था। इसके बाद ये लोग ईसाई धर्म के अनुसार ही जीवन-यापन करने लगे थे। पर इनमें से कई लोग सनातन धर्म में वापसी के इच्छुक थे। इसलिए इनमे से 35 लोगों ने स्वेच्छा से हवन में आहुति देकर घर वापसी की।

हवन कराने वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मौके पर घर वापसी करने वाले सभी लोगों को कभी हिंदू धर्म नहीं छोड़ने का संकल्प दिलाया। संकल्प दिलाने के बाद उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हिंदू धर्म के लिए अपने बलिदान दिए हैं। ऐसे में उन्हें अपमानित नहीं करना चाहिए। इसके बाद सभी लोगों की गंगा जल से शुद्धि कराई गई।

गौरतलब है कि बीते 25 दिसंबर 2022 को मध्य प्रदेश के दमोह में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी रामकथा के दौरान 300 लोगों की घर वापसी करवाई थी। उससे एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के जशपुर में भी विशाल हिंदू सम्मेलन के दौरान अखिल भारतीय घरवापसी के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने 50 धर्मांतरित परिवार के सदस्यों का चरण पखार उनकी सनातन धर्म में वापसी करवाई थी।

पहले रेलवे की जमीन कब्जाई, अब महिलाओं-बच्चों को आगे कर शुरू किया नया ‘शाहीन बाग़’: समर्थन में जुटे कॉन्ग्रेस नेता, 1975 से ही अवैध अतिक्रमण

उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित गफूर बस्ती में अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यहाँ लोगों ने रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा कर अपने घर बना लिए हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट इन अवैध कब्जों को हटाने की अनुमति दे चूका है। इसी मुद्दे को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं। हालाँकि, विरोध कर रहे लोगों ने अब अपने बच्चों और घर की महिलाओं को आगे कर दिया है। प्रदर्शनकारी इनकी आड़ में शाहीन बाग़ जैसा प्रदर्शन करना चाह रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग़ में ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)’ विरोधी प्रदर्शन के दौरान इसी तरह से बच्चों और महिलाओं को आगे कर दिया गया था।

दरअसल, मंगलवार (27 दिसम्बर, 2022) को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के वनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे। इसके लिए न्यायालय ने प्रशासन को सप्ताह भर की समयसीमा दी थी। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू भी कर दी गई थी, लेकिन लोगों ने भारी विरोध करना शुरू कर दिया, जिसके चलते कार्रवाई को 10 जनवरी, 2022 तक रोक दिया गया है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट भी रेलवे की जमीनों पर अतिक्रमण को ले कर चिंता जताते हुए इसे जल्द से जल्द खाली करवाने के आदेश दे चुका है।

वहीं हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शनकारी ‘विक्टिम कार्ड’ खेल रहे हैं। अपने बच्चों और घर की महिलाओं को आगे कर रहे हैं। साथ ही ठंड का भी हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि कड़ाके की ठंड में उन्हें बेघर किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि अतिक्रमण हटाने से पहले उन्हें कहीं और बसाया जाए। साथ ही सोशल मीडिया पर भी अतिक्रमणकारियों के पक्ष में एजेंडा चलाया जा रहा है, ताकि सरकार अतिक्रमण हटाने का इरादा ही छोड़ दे। साथ ही कॉन्ग्रेस नेता भी इस आग को खूब हवा दे रहे हैं।

वहीं एक दावे के मुताबिक, हल्द्वानी में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्ज़े की शुरुआत साल 1975 से हुई थी। पहले कच्ची झुग्गियाँ बनाई गईं, जो बाद में पक्के निर्माण में तब्दील हो गए। बाद में इसी अवैध कब्ज़े में न सिर्फ इबादतगाहें बल्कि अस्पताल तक बना डाले गए। आरोप है कि यह सब देखने के बाद भी तत्कालीन रेलवे सुरक्षा बल खामोश रहा। साल 2016 में नैनीताल हाईकोर्ट की कड़ाई के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने अवैध कब्जेदारों के खिलाफ पहला केस दर्ज करवाया, लेकिन तब तक लगभग 50 हजार लोग अवैध तौर पर वहाँ रहना शुरू कर चुके थे।

नैनीताल हाईकोर्ट के साल 2016 में आए आदेश के चलते कब्जेदारों ने लम्बी मुकदमे बाजी की। हालाँकि, वो अपने कब्ज़े का कोई ठोस प्रमाण नहीं पेश कर पाए। बताया जा रहा है कि अवैध कब्जेदारों के खिलाफ डेढ़ दशक पहले भी बड़ा अभियान चलाया गया था। तब भारी फ़ोर्स के साथ सिर्फ कुछ हिस्सों को खाली करवा पाया गया था। इस दौरान कब्जेदारों के घरों के नीचे रेलवे लाइनें तक निकली थीं। कुछ समय की शांति के बाद खाली करवाए गए स्थान पर फिर से अवैध कब्ज़ा हो गया।

कंझावला कांड पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त, अमित शाह ने दिल्ली पुलिस से माँगी रिपोर्ट: मृतका का हुआ पोस्टमॉर्टम, सबूत जुटाने में लगी पुलिस

दिल्ली के कंझावला में कार में फंसकर हुई युवती की मौत को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस से जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा है। वहीं, मृतक युवती का पोस्टमार्टम भी हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कई चीजें सामने आ सकतीं हैं। इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया है कि आरोपितों ने युवती को 10-12 किलोमीटर तक घसीटा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (2 जनवरी 2022) को मृतक युवती का पोस्टमार्टम दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में किया गया। यह पोस्टमार्टम 3 डॉक्टर्स की टीम ने किया है। इस टीम को डॉ. उपेंद्र किशोर रहे थे। वह, एलएनजेपी के फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड हैं।

इस पूरे मामले की जाँच कर रही पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द आएगी। रिपोर्ट देखने के बाद आरोपितों के खिलाफ धाराएँ बढ़ाई जा सकतीं हैं। वहीं, इस मामले में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी सागर प्रीत हुड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। इसमें, उन्होंने कहा है कि मृतक युवती को 10-12 किलोमीटर तक घसीटा गया है। इसके बाद किसी मोड़ पर बॉडी गिरी है।

उन्होंने यह भी कहा है पुलिस फिजिकल, ओरल, सीसीटीवी और सभी प्रकार के सबूत तलाशने में जुटी हुई है। आरोपितों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। इस मामले में धारा 279, 304, 304A, 120b के तहत एफआईआर दर्ज हुई है। पोस्टमार्टम के बाद यदि कुछ सामने आता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। सबूतों के हिसाब से टाइमलाइन बनाई जाएगी। अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वो लोग कहां से आ रहे थे। पुलिस इनके बयानों को सच भी नहीं मान रही।

वहीं, इस मामले में ‘टाइम्स नाउ’ ने दावा किया है कि एफआईआर में दर्ज बयान में दीपक और अमित ने पुलिस को एक्सीडेंट की बात कही है। एक्सीडेंट के वक्त दीपक गाड़ी चला रहा था। एक्सीडेंट होने के बाद दीपक ही गाड़ी लेकर भागा। दिल्ली के जोंटी गाँव में आरोपितों ने गाड़ी रोकी। इसके बाद, दीपक और अमित ने देखा था कि युवती कार में फंसी हुई है।

लड़की का शव नग्नावस्था में हुआ था बरामद

बता दें कि 1 जनवरी को युवती स्कूटी से अपने घर लौट रही थी। तभी, एक कार से उसका एक्सीडेंट हुआ। एक्सीडेंट में युवती कार के निचले हिस्से में फँस गई, लेकिन आरोपितों ने कार नहीं रोकी। इस कारण युवती 10-12 किलोमीटर तक लगातार घिसटती चली गई। इस हादसे में, युवती के पैर भी कट चुके थे। सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने दिल्ली के कंझावला थाना क्षेत्र से लड़की का शव नग्नावस्था में बरामद किया। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। वहीं, मामले पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा है।

2023 में माँ सीता के 2 भव्य मंदिर: सीतामढ़ी आ सकते हैं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति: नौ विग्रह रूप में दिखेगी माता जानकी, 108 स्वरूपों के होंगे दर्शन

वर्ष 2023 सीतामढ़ी के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस वर्ष सीतामढ़ी में माँ सीता की दो मंदिरों की आधारशिला रखी जाएगी। रिपोर्ट की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू इन मंदिरों के भूमिपूजन में शामिल हो सकते हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, बखरी और पुरौना धाम में इन मंदिरों को बनाया जाएगा। बखरी में 251 फीट की प्रतिमा का निर्माण होगा। मंदिर की निशुल्क रजिस्ट्री के लिए प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक़, मंदिर में सीता मैया अपने नौ विग्रह स्वरूप में दिखेंगी। साथ ही वृताकार रूप में माँ सीता के 108 स्वरूपों की प्रतिमा का भी निर्माण होगा। यह सीता माता की विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा होगी।

वहीं सीतामढ़ी के स्थानीय परिसदन ने 19 नवंबर, 2022 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति’ के अध्यक्ष और सीतामढ़ी से जदयू सांसद सुनील कुमार पिंटू ने पत्रकारों को पहली बार आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी दी थी। राघोपुर बखरी के महंत रामलाल दास ने माता सीता की प्रतिमा के निर्माण के लिए 14 एकड़ जमीन भी दान में दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक तक 24.40 एकड़ जमीन के लिए करार हो चुका है।

वहीं बात अगर सीतामढ़ी के ही पुनौरा धाम की करें तो यहाँ दिव्य सीता उद्भव मंदिर की आधारशीला रखी जाएगी। इसका निर्माण मकराना पत्थर से किया जाएगा। इस दिशा में प्रयास भी शुरू कर दिया गया है। यहाँ बनने वाली मंदिर को लेकर गुजरात से इंजीनियर की टीम आई थी, जिन्होंने अपना निरीक्षण कार्य पूरा कर लिया है।

मंदिर के चारों और गुम्बदनुमा 61 भव्य आक्रतियाँ बनाई जाएँगी। मंदिर के आकार की बात करें तो इसकी परिधि 194×194 फीट की होगी। सीता कुंड के मध्य एक दिव्य सीता कुंड मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इस जगह की मान्यता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि त्रेता युग में विदेह के राजा जनक के हल चलाने के दौरान इसी जगह पर माँ सीता अवतरित हुई थीं।

जहाँ वनवास के दौरान रुके थे रघुकुल नायक, वहाँ बनेगा उनका भव्य मंदिर: शिलान्यास के लिए कर्नाटक पहुँचेंगे योगी आदित्यनाथ, ऐसी होगी ‘दक्षिण की अयोध्या’

अयोध्या में राम लला के भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण जोरों-शोरों से चल रहा है। इस बीच कर्नाटक सरकार ने, रामनगर जिले में स्थित प्राचीन रामदेवरा बेट्टा (Ramdevara Betta) मंदिर को अयोध्या की तरह ही भव्य बनाने का ऐलान किया है। इस मंदिर का शिलान्यास उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक की बसवराज बोम्मई सरकार अयोध्या में बन रहे राम लला के मंदिर ही तरह रामदेवरा बेट्टा को दक्षिण भारत की अयोध्या बनाना चाहती है। इस मंदिर निर्माण को लेकर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ सीएन अश्वथ नारायण ने कहा है कि रामदेवरा बेट्टा में राम मंदिर बनाने के फैसले की घोषणा राज्य के अगले बजट में की जाएगी।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “जिस तरह उत्तर भारत के अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, उसी तरह कर्नाटक में राम मंदिर का निर्माण होगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर्नाटक आएँगे और मंदिर के लिए चिह्नित की जाने वाली भूमि का निरीक्षण करेंगे।” बता दें कि इससे पहले, सीएन अश्वथ नारायण ने मुख्यमंत्री बोम्मई और राज्य की धर्मादा मंत्री शशिकला जोले को एक पत्र लिखकर मंदिर निर्माण की माँग की थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि रामदेवराबेट्टा में धर्मादा विभाग की 19 एकड़ जमीन का इस्तेमाल करके श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।

रामदेवरा बेट्टा मंदिर को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में इस मंदिर का निर्माण वानर राज सुग्रीव ने कराया था। सुग्रीव ने ही प्रभु श्रीराम की मूर्ति भी मंदिर में स्थापित की थी। यही नहीं, स्थानीय लोगों की मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के समय, माता सीता और लक्ष्मण के साथ यहाँ एक वर्ष बिताया था।

हालाँकि, अब इस मंदिर निर्माण को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। जेडीएस नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा, “मैं अपने दम पर एक मंदिर का निर्माण कर सकता हूँ। यूपी के सीएम को लाने की कोई जरूरत नहीं है। कर्नाटक दिवालिया नहीं हुआ है। मेरे पास अपने दम पर मंदिर बनाने की ताकत है। मैं शिलान्यास समारोह के लिए वोक्कालिगा समुदाय के धार्मिक प्रमुखों और सुत्तूर संत को भी ला सकता हूँ।”

अब पाकिस्तानी हिन्दू परिवार भी गंगा में प्रवाहित कर सकेंगे अपनों की अस्थियाँ: मोदी सरकार ने लिया फैसला, कराची में इंतजार कर रही 300 मृतकों की अस्थियाँ

पाकिस्तान के हिंदू भी अब भारत आकर गंगा में अपने मृत परिजनों की अस्थियों को प्रवाहित कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने स्पॉन्सरशिप नीति (Sponsorship Policy) में बदलाव किया है। इसके फलस्वरूप अब 426 मृत पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियों को हरिद्वार स्थित गंगा नदी में प्रवाहित किया जा सकता है।

हिंदू धर्म में मान्यता है कि गंगा नदी में अस्थियों को प्रवाहित करने से उक्त आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है। इसलिए, पाकिस्तान में भी कई हिन्दुओं की इच्छा रहती है कि मरणोपरांत उनकी अस्थियों को गंगा नदी में प्रवाहित किया जाए। हालाँकि स्पॉन्सरशिप नीति की वजह से ऐसा होना आसान नहीं था। दरअसल पहले यह प्रावधान था कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू के परिवार का भारत में रहने वाला कोई सदस्य या करीबी उन्हें स्पॉन्सर करे। इसके बाद हीं उन्हें वीजा दिया जा सकता था। दोनों देशों के बीच विभाजन हुए काफी समय बीत गए। ऐसे में पाकिस्तान में रहने वाले काफी कम हिन्दुओं के परिवार ही अब भारत में बचे हैं।

अब नीति में बदलाव के तहत मृत हिंदू के परिवार के सदस्यों को उनकी अस्थियाँ विसर्जित करने के लिए भारत का 10 दिनों का वीजा दिया जाएगा। इसके तहत 426 हिंदू परिवार अपने मृत परिजनों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने में सक्षम होंगे। हालाँकि वर्ष 2011 और 2016 के बीच 295 हिंदुओं की अस्थियों को वाघा बॉर्डर भेजा गया था। लेकिन, ऐसा पहली बार होगा कि हिंदू परिवार खुद इन अस्थियों को लेकर भारत आएँगे और पूरे क्रिया-कर्म से अस्थियों का विसर्जन करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कराची में सोनपुर श्मशान घाट में 300 हिंदुओं की अस्थियाँ रखी हुईं हैं। इसके साथ हीं अन्य जगहों पर भी 128 अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित होने का इंतजार कर रही हैं।पाकिस्तान में ऐसे बहुत सारे हिंदू हैं जो अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के बाद अस्थियों को मंदिरों या श्मशान में सुरक्षित रख देते हैं। इन लोगों को आशा थी कि किसी न किसी दिन वे अपने प्रियजनों (मृतकों) की अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित कर सकेंगे। मोदी सरकार के इस फैसले से ऐसे लोगों की मनोकामना पूरी होगी।

राजा पटनीमल, जिनके वंशजों ने 112 साल लड़ा श्रीकृष्ण जन्मभूमि का केस: कर्जदार हो गए लेकिन नहीं मानी हार, शाही ईदगाह पर अभी भी चल रही सुनवाई

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से शाही ईदगाह मस्जिद हटाने को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने मई 2022 में याचिका स्वीकार की थी। हालाँकि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर केस की शुरुआत साल 1832 में यानी 190 साल पहले ही हो गई थी। वाराणसी के राजा पटनीमल ने पहला केस लड़ा था। इसके बाद, उनके वारिसों ने 112 साल केस लड़ा। केस लड़ते-लड़ते राजा पटनीमल के वारिसों के सिर पर कर्ज हो गया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

दरअसल, साल 1803 में अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के नेतृत्व में मराठा शासक दौलत राव सिंधिया को हराकर मथुरा में कब्जा कर लिया था। इसके बाद, साल 1815 में अंग्रेजों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि की जमीन को नीलाम कर दिया। नीलामी में वाराणसी के राजा पटनीमल ने इसे खरीद लिया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर पहला केस साल 1832 ईदगाह मस्जिद के मुअज्जिन अताउल्लाह खातिब ने किया था। खातिब ने कलेक्टर के सामने बिक्री रद्द करने और मस्जिद को रिपेयर कराने की अर्जी लगाई। हालाँकि, कलेक्टर ने यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि मराठा शासन के दौरान मुअज्जिन मस्जिद छोड़कर भाग गया था।

इसके बाद, अगला केस साल 1897 में अहमद शाह नामक व्यक्ति ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास की रोड को रिपेयर कर रहे गोपीनाथ पर केस कर दिया। उसने आरोप लगाया था कि यह जमीन मुस्लिमों की है। लेकिन मजिस्ट्रेट ने उसकी अपील खारिज कर दी और कहा कि ये साबित नहीं होता कि जमीन मुस्लिमों की है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर अगला केस साल 1920 में अंजुमन इस्लामिया के सेकेट्री काजी मुहम्मद अमीर ने दायर किया। अमीर ने कोर्ट में कहा था कि मस्जिद के आसपास प्रह्लाद नामक व्यक्ति मंदिर बनवा रहा है। यह जमीन मुस्लिमों की है। इस अपील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि यह जमीन राजा पटनीमल ने खरीदी थी। साथ ही, यहाँ कोई नया मंदिर नहीं बन रहा है। क्योंकि यहाँ सालों से पुराना मंदिर था।

इसके बाद, इस मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से साल 1928 में मोहम्मद अब्दुल खाँ नामक व्यक्ति ने एक और केस दायर किया गया। लेकिन, साल 1935 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस विवाद का निपटारा किया और राजा राय कृष्णदास के पक्ष में फैसला सुनाया। तमाम केस लड़ते हुए राजा राय कृष्णदास पर कर्ज हो गया था। हालाँकि, उन्होंने कर्ज के बोझ तले दबने के बाद भी लड़ाई लड़ने का ही फैसला किया। दरअसल, वह नहीं चाहते थे कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुस्लिमों के पास जाए।

हालाँकि, विवादों और उलझनों के बीच 8 फरवरी, 1944 को राजा राय कृष्णदास और उनके पुत्र आनंदकृष्ण ने पंडित मदन मोहन मालवीय, गणेश दत्त और भीखनलाल आत्रेय को इस संकल्प के साथ यह भूमि बेच दी कि वे यहाँ मंदिर निर्माण कराएँगे।

‘श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान’ के सचिव कपिल शर्मा राजा पटनीमल के वारिसों को लेकर कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की जमीन के लिए लड़ते-लड़ते पैरोकारों पर 13,400 रुपए का कर्ज हो गया था। उन्होंने जब बेची तब केवल कर्ज उतारने के लिए 13,400 रुपए ही लिया। उनके इस कर्ज पर ब्याज करीब दस हजार रुपए हो गया था। लेकिन, राजा पटनीमल के वारिसों ने ब्याज धीरे-धीरे अपने पैसों से चुकाने की बात कही थी।

₹3 लाख लो ईसाई बन जाओ: लालच दे भाई-बहन का कराया धर्मांतरण, फिर कहा- पैसे की बात की तो होगा ईसामसीह का प्रकोप, किसी लायक नहीं रहोगे

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से जबरन धर्मांतरण का मामला सामने आया है। यहाँ के गाँव रायपुर में कुछ लोगों पर पैसे का लालच देकर एक परिवार के सदस्यों को ईसाई बनाने का आरोप है। इसी सिलसिले में बजरंग दल के सदस्यों ने मिर्जापुर थाने में रविवार (1 जनवरी 2023) को शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बजरंग दल के जिला संयोजक हरीश कौशिक ने आरोप लगाया है कि 3 लाख रुपए का लालच देकर कुछ लोगों का जबरन धर्मांतरण कराया गया। पीड़ितों को लेकर वह थाने पहुँचे और शिकायत दर्ज कराई है।

वहीं सहारनपुर पुलिस ने इस संबंध में ट्वीट किया है। ट्वीट में कहा गया है, ”प्रकरण के सम्बन्ध में थाना प्रभारी मिर्जापुर को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित कर दिया गया है।”

बजरंग दल नेता हरीश कौशिक ने बताया, “बजरंग दल को सूचना मिली थी कि गाँव रायपुर में हिन्दुओं का जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा है। मौके पर बजरंग दल के कार्यकर्त्ता पहुँचे तो पता चला कि वहाँ कुछ लोगों ने हिंदू परिवार के लोगों का जबरन धर्मांतरण करवाया है। फिर हमलोग पीड़ित परिवार के लोगों को थाने लेकर आए हैं और कोतवाल को इस संबंध में प्रार्थना पत्र सौंपा है। हमारी प्रशासन से माँग है कि जो पादरी हिन्दुओं का जबरन धर्मांतरण करवा रहे हैं उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।”

जबरन धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ शिकायत पत्र

शिकायत पत्र के अनुसार, मिर्जापुर थाना के अंतर्गत रायपुर गाँव में रहने वाले योगेश औए उसकी बहन का पैसे की लालच देकर जबरन धर्मांतरण करवाया गया। सुनीता का किसी मंजू के घर आना-जाना था। मंजू के पति शादीराम ने दोनों को 3 लाख रुपए का लालच देकर धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा। दोनों आरोपित पति-पत्नी ने भाई-बहनों की मुलाकात सुरेन्द्र प्रसाद और हरि सिंह से करवाई। फिर चारों ने मिलकर पीड़ित का धर्म परिवर्तन करवा दिया और माँगने पर पैसे देने से भी इनकार कर दिया।

कथित तौर हिंदू भाई-बहन का धर्मांतरण कराने वालों ने कहा कि अगर तुम पैसे माँगोगे तो ईसामसीह का तुम पर प्रकोप हो जाएगा। तुम अस्वस्थ हो जाओगे। किसी लायक नहीं रहोगे। साथ ही जान से मरने की धमकी भी दी।

बछड़े के साथ रेप करते रंगे हाथ पकड़ा गया इम्तियाज हुसैन मियां, मस्जिद से सटे खेत में चरने के लिए छोड़ चला गया था मालिक: कर्नाटक की घटना

कर्नाटक के रायचूर जिले से बछड़े के साथ रेप की घटना सामने आई है। आरोपित इम्तियाज हुसैन मियां रंगे हाथ पकड़ा गया है। उसने मस्जिद से लगे खेत में इस घटना को अंजाम दिया।

24 वर्षीय मियाँ को पुलिस ने सोमवार (2 जनवरी 2023) को पकड़ा। पुलिस पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसके खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमरेश बसन्ना ने बछड़े को अन्य गायों के साथ खेत में चरने के लिए छोड़ दिया था। वहाँ पास में एक मस्जिद भी है। इसी बीच आरोपित ने मौका पाकर बछड़े को एक पेड़ से बाँध दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। जब आसपास के लोगों ने इम्तियाज हुसैन को यह कुकृत्य करते देखा, तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद बछड़े के मालिक ने हुसैन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, आरोपित ने प्रारंभिक जाँच में ही अपना जुर्म कबूल कर लिया।

इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। अगस्त 2022 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में गाय के साथ घिनौनी हरकत करने का मामला सामने आया था। ई-रिक्शा चालक शोएब को गाय के साथ गंदा काम करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। इसी तरह छत्तीसगढ़ के रायपुर में जुलाई 2022 में गाय के चारों पैर बाँधकर दुष्कर्म करने वाले शहरे आलम को पकड़ा गया था। उसका वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह लोगों के आगे ‘बहक कर’ गाय के साथ गलत काम करने की बात स्वीकार कर रहा था।

फरवरी 2022 में राजस्थान के भिवाड़ी से भी इस तरह की एक घटना सामने आई थी। गाय के साथ रेप का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में एक युवक गाय के मुँह पर पैर रखकर खड़ा था और दूसरा उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था। उनका साथी इसका वीडियो बना रहा था। इस मामले में जुबेर और मोहम्मद चुन्ना को तत्काल गिरफ्तार किया गया था।