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1000 साल तक अक्षुण्ण रहे अयोध्या का राम मंदिर, इसलिए 3 मंजिल इमारत की ऊँचाई जितनी खोदी जमीन: रामनवमी पर सीधे रामलला के मुख पर पड़ेंगी सूर्य की किरणें

अयोध्या में 71 एकड़ में बन रहे भगवान राम का भव्य एवं विशाल मंदिर के पहले चरण का काम अगले साल दिसंबर में पूरा हो जाएगा। इस मंदिर को नागर शैली में बनाया जा रहा है। इसके साथ ही इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह भव्य मंदिर कम-से-कम 1,000 साल तक हर परिस्थिति में अपनी भव्यता और आभा बिखेरता रहे। इस मंदिर को कुछ ऐसा बनाया जा रहा है कि रामनवमी के दिन रामलला का मस्तक भगवान सूर्य की किरणों से सुशोभित हो।

यह मंदिर तीन चरणों में पूरा होगा। पहला चरण का काम 30 दिसंबर 2023 को पूरा होगा। इस दौरान भगवान श्रीराम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित हो जाएँगे। दूसरा चरण 30 दिसंबर 2024 को पूरा होगा। इसमें मंदिर की पहली और दूसरी मंजिल का काम पूरा हो जाएगा। कलाकृति बनाने का काम छोड़कर लगभग सारा काम पूरा हो जाएगा। अंतिम चरण में साल 2025 में मंदिर के पूरे 71 एकड़ का काम पूरा हो जाएगा।

यह मंदिर कम से कम एक हजार साल तक इसी स्वरूप में विद्यमान रहेगा। इसके लिए इस मंदिर को विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है। मंदिर के निर्माण प्रक्रिया को लेकर श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा कहते हैं, “ये हमारे लिए चुनौती थी। हमारे इंजीनियरों के लिए भी चुनौती थी। इंजीनियर कहते थे कि इसके हमारे पास कोई मापदंड ही नहीं है। तो हम ये कैसे कहेंगे कि ये एक हजार साल होगा। इसके बाद अध्ययन किया गया। पुराने मंदिरों को देखा गया, उनका विश्लेषण किया गया।”

मिश्रा ने बताया कि साधु-संतों ने कहा था कि मंदिर में लोहा का प्रयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि लोहे का जीवन सिर्फ 94 साल का होता है। लोहे के अलावा, संतों ने लोहा और सीमेंट को मिलाकर जो RCC होता है, उसे नहीं करने का फैसला किया था। मंदिर की नींव में पाइल फाउंडेशन की जाएगी। मिश्रा बताते हैं कि जब इसके बारे में IIT चेन्नै को बताया गया तो वे आश्चर्यचकित हो गए कि पाइल फाउंडेशन से तो आजकल पूरी दुनिया में निर्माण होता है। इसके बाद मिट्टी को टेस्ट कर उसे हटाने पर सहमति बनी।

नृपेंद्र मिश्रा कहते हैं, “नींव को करीब-करीब 15 मीटर यानी 3 मंजिला इमारत के बराबर मिट्टी हटा दी गई और उसमें इंजीनियर्स मिट्टी डाली गई। IIT चेन्नै, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट रूड़की और IIT कानपुर ने मिलकर बताया कि ऐसे फॉर्मूलेशन से मिट्टी बनाई जाए, जिसकी गुणवत्ता 28 दिन में स्टोन की तरह हो जाए। इस तरह 15 मीटर नींव जो भरा गया वो एक तरह से पत्थर भरा गया।”

उन्होंने आगे बताया, “15 मीटर भरने के बाद उसका अगला लेयर करीब 3 मीटर का था, उसे राफ्ट कहा जाता है, उसे बनाया जाना था। उस राफ्ट की भी गुणवत्ता यही होनी थी कि वह भी स्टोन जैसा हो। इसमें एक सबसे महत्वपूर्ण चुनौती आई। जब हम राफ्त (सीमेंट आदि के मिश्रण) को डालते हैं और उसमें क्रैक आ जाए तो वह स्वीकार नहीं है। शुरू की जो पहली 9 लाइन बनीं, उनमें क्रैक आ गए। जाँच के बाद कम्बाइंड रिपोर्ट में कहा गया कि तापमान को नियंत्रित करना होगा और स्लैब को छोटा करना होगा।”

मंदिर के प्लींथ को लेकर उन्होंने बताया कि यह करीब 3.5 मीटर – 4 मीटर की है। उस पर सबने ग्रेनाइट डालने की बात कही। इसकी वजह ये है कि ग्रेनाइट पानी बिल्कुल नहीं सोखता, स्टोन क्वालिटी बेस्ट है, उसकी यूनिफॉर्मिटी का मुकाबला नहीं है। हालाँकि, लागत बहुत है लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं था। इसके बाद जब ग्रेनाइट डाला जाने लगा तो देखा गया कि एक-एक स्लैब दो टन का है। इस तरह सात लेयर पड़ेंगे तब प्लींथ का काम पूरा होगा। इसके लिए कर्नाटक के सबसे बेस्ट माइंस से ग्रेनाइट के 17,000 ब्लॉक्स मँगाए गए। उन्हें मँगाने से पहले नमूने को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टोन रिसर्च को भेजा गया। जब उन्होंने सर्टिफाई किया, तब उसे मँगवाया गया।

अयोध्या के कारसेवकपुरम में पिछले 30 साल से तराशे जा रहे पत्थरों को लेकर मिश्रा ने कहा कि जाँच दल को बुलाकर उस स्टोन की जाँच कराई गई और उनमें से 40 प्रतिशत पत्थर को सही पाया गया, जिन्हें वर्तमान आर्टिटेक्ट अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। बाकी जो पत्थर हैं, उनका उपयोग पिलर बनाने में किया जाएगा और अगर उसके लिए वे सही नहीं पाए गए तो उनका उपयोग नहीं किया जाएगा। इसी तरह कारसेवकों ने जो गाँव-गाँव से लाखों ईंट इकट्ठा किए थे, उन्हें भी नीचे डाल दिया गया है और वे आज मंदिर के हिस्से हैं।

मंदिर नागर शैली में बन रहा है। इसे इसलिए चुना गया, क्योंकि माना गया कि यह अयोध्या में सबसे अधिक स्वीकृत होगी। मंदिर में मंडप कैसा होगा, स्तंभ कैसे होंगे, पिलर के किस-किस लेयर पर कौन-कौन से भगवान होंगे, गर्भगृह के सामने प्रहरी कौन होगा, गर्भगृह के सामने हनुमान जी और गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना कैसे होगी। ये सारी चीजें नागरी शैली में एक-एक विवरण पर चर्चा की गई है।

मंदिर में भगवान के स्वरूप को लेकर मिश्रा ने बताया कि मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी जी की अध्यक्षता में हो रहा कि भगवान का वर्तमान स्वरूप तो मंदिर में स्थापित होगा ही, लेकिन एक दूसरी विशाल मूर्ति की भी प्राण प्रतिष्ठा होगी, क्योंकि 19 फीट की दूरी से श्रद्धालुओं को देखना है। जो नई प्रतिमा स्थापित होगी उसकी आँखें सम्मुख होंगी, ताकि आँखों से आँखों का संपर्क बने। उनके पदचिह्न सम्मुख होंगे। यह विग्रह 2.5 से 3 फीट का हो सकता है।

मंदिर का मुख्य भवन 8 एकड़ में फैला होगा। इसकी लंबाई 360 फीट और चौड़ाई 235 फीट होगी। मंदिर का शिखर 161 फीट ऊँचा होगा। यह शिखर गर्भगृह के ठीक ऊपर स्थित होगा। तीन तल वाले इस मंदिर पर कुल 366 स्तंभ होंगे। प्रत्येक स्तंभ पर धर्मग्रंथों पर आधारित चित्र उकेरे जाएँगे। मंदिर के पूर्व दिशा में सिंहद्वार स्थित होगा यही मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार होगा।

सिंहद्वार के आगे नृत्य मंडप, रंग मंडप, गृह मंडप और सबसे अंत में गर्भगृह होगा। गर्भगृह में भगवान राम अपने भाइयों- लक्ष्मण, भरत और शत्रुध्न के साथ विराजमान होंगे। गर्भगृह के ऊपर प्रथम तल पर राम दरबार का निर्माण होगा। इसमें भगवान राम माता जनकी, अपने तीनों भाइयों, भक्त हनुमान और अन्य देवी-देवताओं के साथ विराजमान रहेंगे।

खुदाई की दौरान मिले कलाकृतियों के लेकर मिश्रा ने बताया कि मंदिर बनाने के दौरान खुदाई के दौरान भी कलाकृतियाँ मिलती रहीं। शुरू में शिवलिंग मिला, जो अद्भुत था। पूजा के विभिन्न स्वरूप भी मिले। ये कलाकृतियाँ कुछ कमिश्नर के यहाँ हैं, कुछ सुप्रीम कोर्ट ने लॉक करा दिया है। जितनी कलाकृतियाँ मिली हैं, उन्हें देखने के लिए कोर्ट की अनुमति लेनी पड़़ती है। जब यहाँ म्यूजियम बन जाएगा, तब उसमें इन्हें प्रदर्शित किया जाएगा।

जाँच से रोका, 15 दिन में सुलझ गई होती गुत्थी: बिहार के पूर्व DGP ‘सुशांत की हत्या’ के दावों पर कहा, याद दिलाया मुंबई पुलिस का अड़ंगा

सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर मुंबई के कूपर अस्पताल के कर्मचारी रुप कुमार शाह ने चौंकाने वाले दावे किए हैं। इसको लेकर बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा है कि यदि उनकी टीम को जाँच के लिए 15 दिन का समय और मुंबई पुलिस का सहयोग मिला होता तो सुशांत के मौत की गुत्थी सुलझ चुकी होती। उन्होंने भरोसा जताया कि महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार के कार्यकाल में इस केस का सच सामने आ सकता है।

मुंबई पुलिस पर पूर्व डीजीपी के आरोप

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के समय गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी हुआ करते थे। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि मामले की जाँच के दौरान मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस की टीम को सहयोग नहीं किया। बिहार पुलिस के प्रति मुंबई पुलिस का व्यवहार ठीक नहीं था। बिहार के एक आईपीएस को मुंबई पहुँचते ही नजरबंद कर दिया गया था। तब मुझे एहसास हुआ कि मुंबई पुलिस कुछ छिपा रही है।

पांडेय ने कहा कि सुशांत की मौत की जाँच के लिए उनकी टीम को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। यदि टीम को 15 दिन का समय मिलता तो मामला सुलझ चुका होता। पूर्व डीजीपी ने कहा कि सुशांत को जल्दी से जल्दी न्याय दिलाने के लिए सीबीआई को चाहिए कि एसआईटी के साथ विवरण साझा करे।

सुशांत के पिता ने पटना में दर्ज कराया था मुकदमा

आपको बता दें कि सुशांत की मौत के बाद उनके पिता केके सिंह ने पटना में रिया चक्रवर्ती सहित 6 लोगों के खिलाफ बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद बिहार पुलिस की टीम जाँच के लिए मुंबई पहुँची थी। उस वक्त बिहार पुलिस के डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय ने आरोप लगाया था कि मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ सुशांत सिंह राजपूत की ऑटोप्सी रिपोर्ट शेयर करने से इनकार कर दिया। कई जरूरी कागजात और सीसीटीवी फुटेज की माँग की गई, लेकिन ये सब उपलब्ध नहीं कराया गया।

कूपर अस्पताल के स्टाफ का खुलासा

कूपर हॉस्पिटल के कर्मचारी रुप कुमार शाह ने 26 दिसंबर 2022 को दावा किया था कि सुशांत की लाश देखकर लग रहा था कि वह आत्महत्या नहीं, हत्या है। उनकी आंख पर ऐसे निशान थे जैसे किसी ने मुक्के मारे हो। शरीर पर फ्रैक्चर के निशान थे। शाह का दावा है कि अस्पताल में जब सुशांत का पोस्टमार्टम हो रहा था तब वे भी मौजूद थे। बता दें कि 34 साल के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को 14 जून, 2020 को उनके बांद्रा स्थित घर पर मृत पाया गया था।

गायों को ले जा रहे थे तस्कर, BJP सांसद ने कहा- 10 हजार को बचाया; Video भी दिखाया: झारखंड पुलिस बोली- गायों की संख्या 100-200 ही

झारखंड के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित गोड्डा से लगातार तीसरी बार सांसद निशिकांत दुबे ने एक वीडियो शेयर कर जानकारी दी है कि उन्होंने 10,000 गायों को गौ-तस्करों से मुक्त कराया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि रात के अँधेरे में भाजपा नेता निशिकांत दुबे अपने समर्थकों के साथ सड़क पर पैदल चल रहे हैं और उनके पीछे कई गायें हैं। उन्होंने जानकारी दी कि गोड्डा के सरैयाहाट से इन गायों को तस्करों के चंगुल से आज़ाद कराया गया है।

ये घटना बुधवार (28 दिसंबर, 2022) तड़के सुबह की है, जब निशिकांत दुबे गोड्डा से भागलपुर के लिए निकल रहे थे। बता दें कि बिहार में आज नगर निकाय का चुनाव हो रहा है और निशिकांत दुबे भागलपुर से मतदान करते हैं। भाजपा सांसद ने बताया कि बांग्लादेश के तस्कर इन गायों की तस्करी में लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में तरक्की की जगह तस्करी का काम हो रहा है।

इस मामले में मोईनुद्दीन और अली अंसारी नामक दो आरोपितों को पुलिस के हवाले किया गया है। हालाँकि, पुलिस ने 200 गायों को तस्करों के चंगुल से आज़ाद कराए जाने की बात कही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस के हवाले से 100-150 गायें होने की बात कही जा रही है। इन्हें बांग्लादेश ले जाया जा रहा था। ‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए सरैयाहाट थानाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि तस्करों ने गायों को बांग्लादेश में बेचने की बात नहीं कबूली है।

उन्होंने तस्करों से सख्ती से पूछताछ किए जाने का आश्वासन देते हुए कहा कि बांग्लादेश इन्हें कैसे ले जाया जाता था, इस संबंध में भी जानकारी ली जाएगी। पुलिसिया कार्रवाई के बाद गायों को गौशाला भेज दिया जाएगा। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी आरोप लगाया है कि झामुमो की सरकार गौ-तस्करों पर कार्रवाई न कर के तुष्टिकरण की राजनीति में लगी है। जहाँ कॉन्ग्रेस ने इस घटना को सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश बताया है, JMM का कहना है कि भाजपा सांसद अनर्गल प्रलाप कर रहे।

2036 ओलंपिक की दावेदारी करेगा भारत, अहमदाबाद हो सकता है मेजबान शहर: अनुराग ठाकुर ने बताया- आयोजन के लिए हैं तैयार

2036 ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए भारत दावेदारी पेश करेगा। इस संबंध में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के पूर्ण सदस्यों के समक्ष रोडमैप पेश किया जाएगा। आईओसी का यह सत्र मुंबई में सितंबर 2023 में होना है। यह जानकारी केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurag Thakur) ने दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में ठाकुर ने मंगलवार (27 दिसंबर 2022) को कहा कि इस आयोजन के लिए भारत तैयार है। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर की वजह से गुजरात का अहमदाबाद मेजबान शहर हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की ओर से पेश की जाने वाली इस दावेदारी के साथ भारत सरकार मजबूती के साथ खड़ी होगी। भारत 1982 में एशियाई और 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों की सफल मेजबानी कर चुका है। ऐसे में अब अगला लक्ष्य खेल के सबसे बड़े आयोजन की मेजबानी हासिल करना है।

गुजरात में आयोजन पर अनुराग ठाकुर कहा कि राज्य इससे पहले कई बार ओलंपिक खेलों की मेजबानी की इच्छा जता चुका है। वहाँ बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं। आयोजन के लिए होटल, हॉस्टल, एयरपोर्ट और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स हैं। साथ ही ओलंपिक खेलों का आयोजन, राज्य सरकार के घोषणा-पत्र में भी था।

बकौल ठाकुर जब भारत इतने बड़े स्तर पर G20 प्रेसीडेंसी की मेजबानी कर सकता है तो सरकार भारतीय ओलंपिक संघ के साथ मिलकर देश में ओलंपिक की मेजबानी भी कर सकती है। यह तो सबको पता है कि ओलंपिक खेलों के लिए 2032 तक स्लॉट बुक हो चुके हैं। लेकिन हमारी उम्मीदें 2036 को लेकर हैं।

वहीं सोमवार (26 दिसंबर 2022) को केंद्रीय खेल मंत्री ने भोपाल में खेल सुविधाओं का निरीक्षण के दौरान कहा था कि भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के नेतृत्व में किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकता है। साथ ही कहा था कि वह दिन अब दूर नहीं, जब भारत ओलंपिक खेलों की मेजबानी करेगा।

उन्होंने कहा था, “भारत में अब कुछ भी संभव है। देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोई भी आयोजन करने को तैयार है। भारत द्वारा जी-20 की अध्यक्षता से यह संदेश गया है कि भारत नई ऊँचाइयों को छू रहा है। एक नए भारत का निर्माण हो रहा है, जिसमें खेलों की बड़ी भूमिका होगी। वह दिन दूर नहीं जब भारत ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार होगा।”

PM मोदी की माँ की बिगड़ी तबीयत, एक दिन पहले ही भाई का हुआ था एक्सीडेंट: जिस अस्पताल में नई सुविधाओं का बेटे ने किया उद्घाटन वहीं भर्ती हुईं हीराबेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ हीराबेन मोदी की तबीयत बिगड़ गई है, जिसके बाद उन्हें अहमदाबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 1 दिन पहले उनके भाई प्रह्लाद मोदी दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। हीराबेन मोदी क साँस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल ने उनकी हालत स्थिर होने की बात बताई है। उन्हें अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ गुजरात भाजपा के कई विधायक और नेता भी पहुँचे।

हीराबेन मोदी गुजरात की राजधानी गाँधीनगर में अपने सबसे छोटे बेटे पंकज मोदी के साथ रायसेन स्थित वृन्दावन बँगला-2 में रहती हैं। 18 जून, 1923 को जन्मीं हीराबेन मोदी ने इसी वर्ष अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश किया है। फ़िलहाल वो ‘यूएन मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर’ में एडमिट हैं। 5 दिसंबर को उन्होंने गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने मतदान भी किया था। हाल ही में पीएम मोदी ने अपनी माँ से मिल कर उनके साथ समय भी बिताया था।

चर्चा ये भी है कि अस्पताल में भर्ती अपनी माँ का हालचाल लेने के लिए प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अहमदाबाद पहुँच सकते हैं। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के कैलाशनाथन अस्पताल पहुँचे हुए हैं। अस्पताल की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हीराबेन मोदी पहले भी अपने स्वास्थ्य चेकअप के लिए इसी अस्पताल में आती रही हैं। चुनाव से ठीक पहले पाई मोदी ने इस अस्पताल के दौरा भी किया था और कई सुविधाओं का उद्घाटन किया था।

बता दें कि 1 दिन पहले कर्नाटक के मैसूर में नरेंद्र मोदी के भाई प्रह्लाद मोदी की मर्सिडीज कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। उस समय कार में उनके और उनकी पत्नी के अलावा उनके बेटे-बहू और पोता भी था। उनके पोते के पाँव में फ्रैक्चर आ गया था। JSS अस्पताल में घायलों का उपचार हुआ। प्रह्लाद मोदी 2001 में स्थापित ‘All India Fair Price Shop Dealers Federation’ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया था कि पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी से उनकी एक बार भी मुलाकात नहीं हुई है।

दिल्ली में समाधि-समाधि घूमे राहुल गाँधी, लेकिन हैदराबाद जाकर भी नरसिम्हा राव को नहीं दी श्रद्धांजलि: अब सुरक्षा का हवाला दे कर रही बचाव

तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री और कॉन्ग्रेस के दिवंगत नेता पीवी नरसिम्हा राव (PV Narsimha Rao) को श्रद्धांजलि नहीं देने का बचाव किया है और कहा कि सुरक्षा कारणों से उन्होंने ऐसा नहीं किया था। यह भी अब दलील दी जा रही है कि राहुल गाँधी नरसिम्हा राव की प्रतिमा के पास जाना चाहते थे।

तेलंगाना कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष महेश गौड़ ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी हैदराबाद में राव की को श्रद्धांजलि देना चाहते थे, लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने ऐसा करने से मना किया था।

इसके पहले दिवंगत राव के पोते और भाजपा नेता एनवी सुभाष (NV Subhash) ने राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) को जानबूझकर नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान हैदराबाद पहुँचने पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि नहीं दी। उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस में गैर-गाँधी प्रधानमंत्री को पर्याप्त सम्मान नहीं दिया जाता।

उन्होंने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस में गैर-गाँधी नेताओं की सेवा को महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राव की मृत्यु के बाद कॉन्ग्रेस ने उन्हें सम्मान और विदाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल और पीवी नरसिम्हा राव इसके उदाहरण हैं।

उधर महेश गौड़ राहुल गाँधी का बचाव करते हुए कहा कि नरसिम्हा राव कॉन्ग्रेस के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक थे। पार्टी ने उन्हें सर्वोच्च पद दिया और देश का प्रधानमंत्री बनवाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के सभी नेताओं का सम्मान करती है।

बता दें कि साल नरसिम्ह राव को आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक माना जाता है, लेकिन उन्हें सम्मान देने की बात दो दूर कॉन्ग्रेस ने उन्हें कभी उनकी बरसी पर याद भी नहीं किया। नरसिम्हा राव के लिए कॉन्ग्रेस में उतना ही आदर है, जितना की कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी के लिए था।

नरसिम्हा राव और सोनिया गाँधी के रिश्ते कभी सहज नहीं रहे। कहा जाता है कि दोनों के बीच 36 का आँकड़ा रहा। यही कारण था कि जब राव की मौत हुई तो अन्य प्रधानमंत्रियों की तरह उनके लिए दिल्ली में जगह नहीं आवंटित की गई और उनके परिवार को कहा गया कि उनका अंतिम संस्कार तत्कालीन संयुक्त तमिलनाडु में करे।

विनय सीतापति ने अपनी किताब ‘द हाफ लायन’ में नरसिम्हा राव और उस दौरान कॉन्ग्रेस हाईकमान को लेकर विस्तार से जिक्र किया है। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव का 23 दिसंबर 2004 को दिल्ली के AIIMS में 11 बजे निधन हो गया। राव के पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग पर लाया गया।

यहाँ तक कि तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने नरसिम्हा राव के छोटे बेटे प्रभाकर राव से कहा कि उनका अंतिम संस्कार में हैदराबाद में हो। शिवराज पाटिल की तरह ही उस समय के दिग्गज कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने भी राव के परिवार से शव को हैदराबाद ले जाने के लिए कहा था। आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने राव के परिवार से स्पष्ट दिया था कि पार्टी आलाकमान नहीं चाहता कि राव का अंतिम संस्कार दिल्ली में हो।

हालाँकि, परिवार इसके लिए तैयार नहीं था। राव के शव को पार्टी मुख्यालय लाया गया, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी का दरवाजा बंद कर दिया गया। कहा जाता है कि उस समय सोनिया गाँधी पार्टी कार्यालय में मौजूद थीं। राव का शव आधे घंटे तक पार्टी मुख्यालय के गेट बाहर एयरफोर्स की गाड़ी पर पड़ा रहा, लेकिन दरवाजा नहीं खोला गया। अंत में थक-हार कर परिवार शव को हैदराबाद लेने जाने के लिए एयरपोर्ट निकल गया।

अगर एक पार्टी के वरिष्ठ नेता की बात छोड़ भी दें तो नरसिम्हा राव को उनकी मौत के बाद पार्टी ने वह सम्मान भी नहीं दिया, जो एक प्रधानमंत्री को दिया जाना चाहिए था। राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस की इसी ‘नेहरूवादी’ विरासत को आगे बढ़ाया और सड़क पर हुजूम के साथ भारत यात्रा करते रहे, लेकिन नरसिम्हा राव की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करने नहीं गए। इसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौड़ द्वारा सुरक्षा कारण बताया जाना, लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

हिन्दू महिला से छेड़खानी, विरोध करने पर जयपुर में हिंसा-पत्थरबाजी: घर और गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त, बुलानी पड़ी कई थानों की पुलिस

राजस्थान के जयपुर में देर रात दो पक्षों के बीच जमकर बवाल हुआ। बताया जा रहा है कि एक महिला की छेड़खानी के बाद 2 पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और मामला बिगड़ने लगा। देखते-देखते दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी होने लगी। उसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने हालात पर काबू पाया।

मामला राजधानी जयपुर के ब्रह्मपुरी थाना इलाके कृष्णा कॉलोनी का है। मंगलवार (27 दिसंबर, 2022) को देर रात एक महिला ने समुदाय विशेष के लोगों पर छेड़खानी का आरोप लगाते हुए इसकी जानकारी परिजनों को दी। मौके पर पहुँचे परिजन जब मौके पर पहुँचे तो छेड़खानी के आरोपितों ने परिजनों के साथ झगड़ा शुरू कर दिया। इस तरह दोनों समुदाय आपस में भिड़ गए और इलाके का माहौल तनावग्रस्त हो गया। लगभग आधे घंटे तक इलाका जंग का मैदान बना रहा और जमकर पथराव हुआ।

वहीं पथराव के बाद कई गाड़ियों के शीशे टूट गए और कई घरों को भी नुकसान पहुँचा। इस बीच दोनों समुदायों में पत्थरबाजी की खबर पुलिस को मिली। मौके पर पहुँची पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया।

माहौल शांत करने के लिए देर रात को कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ गई थी। हालात काबू में रखने के लिए पुलिस अधिकारी देर रात तक गश्त करते रहे। पथराव के दौरान फायरिंग की अफवाह भी उड़ी लेकिन पुलिस ने फायरिंग की घटना से साफ इनकार कर दिया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने अब तक 6 लोगों को हिरासत में लिया है और मुख्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच में जुट गई है। जाँच में पुलिस आस-पास के सीसीटीवी कैमरों की मदद भी ले रही है।

आपको बता दें कि जयपुर का यह इलाका काफी संवेदनशील माना जाता है। यहाँ से अक्सर हिंदू और मुस्लिमों के बीच छोटी-मोटी झड़प की ख़बरें सामने आती रहती हैं। वैसे तो हाल के दिनों में राजस्थान के अलग-अलग शहरों से सांप्रदायिक तनाव के मामले सामने आ रहे हैं। इसी साल हनुमान जन्मोत्सव और रामनवमी के मौके पर हिंसा भड़की थी। इसे लेकर प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार भी लगातार निशाने पर है। ताजा मामले में अब तक सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मध्य प्रदेश के खरगोन हिंसा में हिंदुओं के घरों-दुकानों को नुकसान पहुँचाने वाले दंगाइयों से वसूली: तय रकम 15 दिनों में नहीं देने पर संपत्ति होगी जब्त

मध्य प्रदेश के खरगोन (Khargone, Madhya Pradesh) में रामनवमी (10 अप्रैल 2022) के दौरान मुस्लिम दंगाइयों द्वारा की गई तोड़फोड़ की वसूली की जाएगी। ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुसार, उन्हें तय की गई राशि को चुकाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। अगर तय समय में दंगाई तय राशि नहीं चुकाते हैं तो उनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।

बता दें कि दंगाइयों द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार ने ट्रिब्यूनल का गठन किया था। ट्रिब्यूनल को क्षतिपूर्ति के लिए 343 आवेदन मिले थे, जिनमें से 34 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। ट्रिब्यूनल ने इन्हीं आवेदनों पर 14 मामलों पर मंगलवार (27 दिसंबर 2022) को फैसला सुनाया।

इन 14 मामलों में से 5 लोगों के आवेदन को निरस्त कर गया। ये आवेदक अपना दावा सिद्ध नहीं कर सके और यह नहीं बता सके कि उनका नुकसान करने वाले कौन थे। मान्य 9 आवेदकों को मध्य प्रदेश प्रिवेंशन एंड रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट के तहत हुए नुकसान का हर्जाना मिलेगा। इसके लिए दंगाइयों से 11 लाख 54 हजार 300 रुपए वसूल किए जाएँगे।

इससे पहले 14 अक्टूबर 2022 को 34 स्वीकृत मामलों में से 6 पर फैसले सुनाए गए थे। ट्रिब्यूनल ने दंगाइयों से सात लाख 37 हजार रुपए वसूलने के आदेश दिए थे। इसके अलावा 3 आवेदकों ने अपना आवेदन वापस ले लिया था। वहीं, अब 11 मामलों पर फैसले आने बाकी हैं।

मंगलवार (27 दिसंबर 2022) को सुनाए गए फैसले में शीतला माता मंदिर पर पथराव करने वाले दंगाइयों से 2 लाख रुपए की राशि वसूलने का आदेश दिया है। इन दंगाइयों में सद्दाम रियाज, जहाँगीर रजा, जावेद मुकीम खान, रियाज रजा, अकबर गफ्फार, असलम मुनाफ, सादिक रशीद, रियाज बागवान, इमरान जुबेर, आफरीन टेलर, आसिफ हारून, आरिफ रशीद और अशद शाहिद शामिल हैं।

वहीं, खरगोन के आनंद नगर के रहने वाली सुरजबाई गांगले को क्षतिपूर्ति के रूप में 2 लाख 91 हजार 500 रुपए दिए जाएँगे। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में दंगाईयों कालू रहमान, शोएब जाबिर, फैजान कालू, इशाक करीम, सादिक शब्बीर, जाबिर शब्बीर, अनवर रहमान और जावेद भूरे खाँ से क्षतिपूर्ति राशि वसूलने के आदेश दिए गए हैं।

आनंद नगर की ही रहने वाली कालीबाई को क्षतिपूर्ति के रूप में 1 लाख 99 हजार 950 रुपए की राशि दी जाएगी। इनकी संपत्ति का नुकसान करने वाले दंगाई निसार करीम खान, अयाज सत्तार, जफर नईम, जाबीर शब्बीर, नवाज निसार, सादिक शब्बीर, अमजद करीम, आरिफ हुसैन और गुड्‌डू बेकरीवाला से यह राशि वसूली जाएगी।

इसके अलावा, आनंद नगर की रहने वाली राधाबाई को 30 हजार रुपए, आनंद नगर की ही रहने वाली कोमल निहाले को 87 हजार 600 रुपए, सुभाष नानूराम गांगले को 60 हजार रुपए, सलिता निहाले को 1 लाख 10 हजार रुपए, राकेश गांगले को 68 हजार 700 रुपए और पीयूष वसारे को 50 हजार रुपए हर्जाना के तौर पर दिए जाएँगे। इन पैसों को दंगाइयों से वसूल किया जाएगा।

सलमान खुर्शीद ने पहले ‘भगवान राम’ बताया, अब कहा- राम नहीं हैं राहुल गाँधी, रावण के रास्ते पर चल रही BJP

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की तुलना भगवान राम (Bhagwan Ram) से किए जाने के मामले पर बड़ा विवाद छिड़ गया है। कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने उन्हें ‘सुपर ह्यूमन’ भी बताया था। भाजपा (BJP) ने इसका जोरदार विरोध किया था। वहीं अब सलमान खुर्शीद ने अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि राहुल गाँधी भगवान राम नहीं हैं, लेकिन उनके दिखाए रास्ते पर चल सकते हैं। वहीं, उन्होंने भाजपा को रावण के रास्ते पर चलने वाला बता दिया।

उन्होंने कहा, ”राहुल गाँधी भगवान राम नहीं हैं, लेकिन वे भगवान राम के दिखाए रास्ते पर चल सकते हैं। वे (भाजपा) कह रहे हैं कि राहुल को इस पर चलने का अधिकार नहीं है। हमें इस बात पर आपत्ति है क्योंकि वे राम की बजाए खुद रावण के रास्ते पर चल रहे हैं।”

वहीं इससे पहले खुर्शीद ने सोमवार (26 दिसंबर, 2022) को राहुल गाँधी की तुलना भगवान श्रीराम से करके विवाद खड़ा कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेसियों की तुलना भरत से कर दी थी। उन्होंने अमरोहा में राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, “भगवान राम की खड़ाऊँ बहुत दूर तक जाती हैं। कभी-कभी खड़ाऊँ लेकर चलना भी पड़ता है। हमेशा भगवान राम हर जगह नहीं पहुँच पाते। उनके भाई भरत जी उनकी खड़ाऊँ लेकर चलते हैं। खड़ाऊँ लेकर हम उत्तर प्रदेश में पहुँच गए हैं। अब रामजी भी पहुँचेगें। यह हमारा विश्वास है।”

इसके साथ ही खुर्शीद ने राहुल गाँधी के टीशर्ट पहनने को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “राहुल गाँधी सुपरह्यूमन हैं। हम ठंड में ठिठुर रहे हैं और जैकेट पहन रहे हैं। वहीं, राहुल गाँधी टी-शर्ट में बाहर जा रहे हैं। वह एक योगी की तरह हैं जो अपनी ‘तपस्या’ ध्यान से कर रहे हैं।”

भाजपा के कई नेताओं ने खुर्शीद के इस बयान पर पलटवार किया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “यह वही कॉन्ग्रेस है जो भगवान राम को एक काल्पनिक व्यक्ति कहती थी। जिस व्यक्ति की वे भगवान राम से तुलना कर रहे हैं, वह कहते थे कि पुरुष मंदिरों में महिलाओं से छेड़छाड़ करने जाते हैं।” वहीं भाजपा सांसद दुष्यंत गौतम ने कहा कि यदि वास्तव में राहुल, राम हैं तो कॉन्ग्रेसियों को नंगा घूमना चाहिए।

दुष्यंत गौतम ने कहा ”अगर राहुल गाँधी श्री राम के अवतार हैं, तो उन्हें अपनी ‘सेना’ (कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं) को बताना चाहिए कि वह क्या खाते हैं कि उन्हें ठंड नहीं लगती। उनकी ‘सेना’ बिना कपड़ों के क्यों नहीं घूमती? कॉन्ग्रेस नेताओं को भगवान राम की सेना की तरह नंगा होकर घूमना चाहिए।” गौतम ने यह भी कहा, “इससे पता चलता है कि कॉन्ग्रेस प्रसाद नहीं बाँटती है। वे सब कुछ अपने लिए रखते हैं। आखिर ऐसा कौन सा प्रसाद है जिसके कारण राहुल गाँधी को ठंड नहीं लगती। उन्हें, अपनी माँ और बहन को भी बताना चाहिए। वो लोग इतने सारे कपड़ों पर पैसे क्यों खर्च करते हैं?”

लव का वास्ता देकर शाहबाज ने पहले नील कुसुम से किया सेक्स, फिर तब तक गोदा जब तक मरी नहीं: चीख सुनाई न पड़े इसलिए तकिए से दबा दिया था मुँह

छत्तीसगढ़ के कोरबा में नील कुसुम की 24 दिसंबर 2022 को निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोपित शाहबाज खान अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि हत्या करने से पहले शाहबाज ने नील कुसुम के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। इसके बाद उसे पेचकस से तब तक गोदता रहा जब तक वह मरी नहीं।

21 साल की नील कुसुम ने जनजातीय समाज में जन्म लेने के बाद ईसाई मत अपना लिया था। शुरुआती रिपोर्टों में उसे 51 बार पेचकस से गोदे जाने की बात कही गई थी। लेकिन दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार नील कुसुम के गले, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में पेचकस जैसे नुकीले हथियार से 26 वार किए गए थे। इस रिपोर्ट में शाहबाज खान का नाम शहबाद खान बताया गया है।

पुलिस ने जानकारी दी है कि शाहबाज़ हत्या करने के लिए ही कोरबा आया था। वह गुजरात के किसी कंपनी में काम कर रहा था। वहाँ से वह जब भी नील कुसुम को फोन करता तो उसका फोन व्यस्त आता था। बार-बार फोन व्यस्त आने की वजह से शाहबाज को उस पर शक होने लगा।

शाहबाज़ को शक था कि नील कुसुम का उसके दूर के रिश्तेदार आशीष केरकेट्टा के साथ अफेयर चल रहा है। आशीष को लेकर पहले भी उसने नील कुसुम को मारने की धमकी दी थी। आशीष अक्सर लड़की के घर आता-जाता रहता था। शाहबाज हत्या के मकसद से ही गुजरात से फ्लाइट पकड़कर रायपुर पहुँचा और फिर कोरबा गया।

पुलिस के मुताबिक कोरबा पहुँचकर शाहबाज़ ने नील कुसुम से संपर्क किया। 24 दिसंबर 2022 को मौका देखकर वह लड़की के घर में दाखिल हुआ। शाहबाज ने नील कुसुम को प्यार का वास्ता देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और फिर अचानक साथ लाए पेचकस से उस पर वार करने लगा। चीख दबाने के लिए उसने तकिए की मदद से लड़की का मुँह दबा दिया। इसके बाद अपने फ़ोन बंद कर शाहबाज फरार हो गया। पुलिस का कहना है कि उसे जल्दी ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।

आपको बता दें कि घटना के दिन नील कुसुम घर में अकेली थी। अगली सुबह उसका भाई जब घर लौटा तो उसने सबसे पहले खून से लथपथ बहन की लाश देखी। उसकी बहन बिस्तर पर मृत पड़ी थी। चेहरे पर खून के छींटे थें और उसका मुँह तकिए से दबाया हुआ था।