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‘सुशांत की आँख पर मारे थे मुक्के’: कूपर हॉस्पिटल के कर्मचारी ने कहा- उद्धव सरकार पर नहीं था भरोसा, अब एजेंसी के सामने बयान देने को हूँ तैयार

मुंबई कूपर हॉस्पिटल के मोर्चरी कर्मचारी रूपकुमार शाह ने सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत को लेकर एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि सुशांत की आँख पर चोट के निशान थे। ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें कई मुक्के मारे गए हैं।

14 जून 2020 को बांद्रा के अपने घर में सुशांत मृत मिले थे। उनका पोस्टमार्टम कूपर हॉस्पिटल में ही हुआ था। शाह का दावा है कि वे पोस्टमार्टम के समय मौजूद थे। वे यह भी बता चुके हैं शव को देखने से ही लग रहा था कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या है।

शाह ने इंडिया टुडे को बताया कि सुशांत की आँख पर शरीर पर चोट के निशान थे। उनकी हड्डियाँ टूटी हुई थी। उनका दावा है कि उन्होंने अपने सीनियर्स को यह बताने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने उन्हें अपने काम से मतलब रखने की सलाह दी गई थी। हालाँकि शाह को अब यह याद नहीं है कि सुशांत का पोस्टमार्टम करने वाली टीम की अगुवाई कौन कर रहे थे।

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने 2020 में इन बातों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया, शाह ने कहा कि उन्हें उस समय की राज्य सरकार पर भरोसा नहीं था। उस समय महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महा विकास अघाड़ी सरकार थी। शाह के अनुसार इसी कारण वे चुप रहे। अब उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता नहीं है। वे चाहते हैं कि सुशांत सिंह राजपूत को न्याय मिले। इसके लिए जाँच एजेंसी के सामने वह अपना बयान रिकॉर्ड करवाने के लिए तैयार हैं।

इससे पहले शाह ने टीवी 9 मराठी से कहा था, “हत्या और आत्महत्या में बहुत फर्क होता है। शव देखने के तुरंत बाद पता चल जाता है वो हत्या है या आत्महत्या है। सुशांत के गले में निशान थे। वह बिलकुल हत्या जैसा लग रहा था। बॉडी को मुक्के मारे गए थे, उस पर चोट के निशान थे। जो आदमी आत्महत्या करता है उसे चहरे पर पंच के निशान नहीं होते जैसे कि सुशांत के चेहरे पर थे।”

दरअसल, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ही कूपर हॉस्पिटल की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है। कूपर हॉस्पिटल पर पहला सवाल तब खड़ा हुआ था जब सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के हॉस्पिटल के मोर्चरी में जाने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, रिया हॉस्पिटल में करीब 45 मिनट रही थी। उन्होंने मोर्चरी में भी करीब 7 मिनट का समय बिताया था। नियम के अनुसार, मोर्चरी में केवल मृतक के परिवार वाले ही जा सकते हैं। ऐसे में, सवाल उठा था कि हॉस्पिटल ने उन्हें मोर्चरी में कैसे जाने दिया। इसे लेकर महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी कूपर हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया था। गौरतलब है कि सुशांत की मौत के बाद से रिया की भूमिका सवालों के घेरे में है।

₹10 हजार दो, भारतीय बनो: जन सेवा केंद्र पैसे लेकर विदेशियों को देता था उत्तराखंडी पहचान, STF रेड में आधार से लेकर आयुष्मान कार्ड तक मिले

उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो पैसे लेकर विदेशी नागरिकों को भारतीय पहचान मुहैया कराता था। इसका संचालन ऋषिकेश के एक जन सेवा केंद्र (CSC) से हो रहा था। इस सेंटर पर छापे में फर्जी आधार, वोटर, पैन और आयुष्मान कार्ड बरामद किए गए हैं।

एसटीएफ ने तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है। विदेशियों को उत्तराखंड का निवासी बताने वाले ये फर्जी आधार और वोटर कार्ड मुहैया कराते थे। साथ ही अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बनाए जा रहे थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किसी भी व्यक्ति द्वारा राष्ट्रविरोधी व आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के साथ-साथ जमीन खरीदने के लिए भी किया जाता है।

एसटीएफ को शिकायत मिली थी कि ऋषिकेश और देहरादून स्थित एक जन सेवा संस्थान पैसे लेकर फर्जी वोटर कार्ड, आधार कार्ड व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बना रहा है। एसटीएफ ने मामले की जाँच शुरू की। उन्हें पता चला कि ऋषिकेश एम्स रोड पर लक्ष्मण सैनी अपने साथियों के साथ सीएससी चलाता है। वहीं पैसे लेकर फर्जी दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। एसटीएफ ने एक नेपाली नागरिक फर्जी दस्तावेज बनवाने के इस सीएससी सेंटर में भेजा।

सीएससी चलाने वाला लक्ष्मण सैनी बिना किसी वैध दस्तावेज या अन्य प्रूफ के ही 10 हजार रुपए में वोटर और आधार कार्ड बनाने के लिए तैयार हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक लक्ष्मण सैनी ने एडवांस के तौर पर 3000 रुपए लिए और वोटर तथा आधार कार्ड देने का वादा किया। सोमवार (26 दिसम्बर 2022) को नेपाली नागरिक दिल बहादुर सीएससी पहुँचा। सैनी ने उनके लिए पौड़ी के किसी गाँव का वोटर कार्ड बनाकर रखा था। इसी पते पर आधार कार्ड बनाने के लिए फॉर्म भी भर चुका था। इसी दौरान एसटीएफ ने छापा मारकर सीएससी से लक्ष्मण सैनी समेत 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

एसटीएफ की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक मौके से 68 आधार कार्ड, 28 वोटर कार्ड बरामद किए गए। बरामद वोटर कार्ड में से तीन नेपाली नागरिक के लिए बने थे, जिसमें से एक दिल बहादुर का भी था। इसके अलावा सेंटर से 17 पैन कार्ड और 7 आयुष्मान कार्ड भी बरामद किए गए हैं।

एसटीएफ ने सेंटर से लक्ष्मण सैनी के साथ बाबू सैनी और भरत सिंह उर्फ भरदे दमई नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। फिलहाल उनसे यह पता लगाया जा रहा है कि अभी तक उन्होंने कितने विदेशी नागरिकों को फर्जी आधार और वोटर आईडी कार्ड मुहैया कराया है।

प्रोग्राम बौद्ध दीक्षा का, जलाए हिंदू धर्म ग्रंथ: राजस्थान के बाड़मेर का Video वायरल, भरतपुर के सामूहिक विवाह में भी दिलाई थी हिंदू विरोधी शपथ

राजस्थान के बाड़मेर में हिंदू धर्म ग्रंथों को जलाने का मामला सामने आया है। यह घटना 25 दिसंबर 2022 को आयोजित बौद्ध दीक्षा प्रोग्राम के दौरान की बताई जा रही है। हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद अजमल सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले राजस्थान के भरतपुर में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में नवविवाहित जोड़ों को हिंदू विरोधी शपथ दिलाने का मामला सामने आया था।

बाड़मेर में हिंदू धार्मिक ग्रन्थ को जलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। बाड़मेर जिले के बाखासर में 10 लोगों ने बौद्ध दीक्षा ली। आरोप है कि इसी दौरान लोगों ने जय भीम के नारे लगाए और सनातनी धर्म ग्रन्थ की प्रतियों को जलाया व अपमानित किया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों व अन्य लोगों ने इस पर आपत्ति जताई है।

बाड़मेर जिला मुख्यालय पर विभिन्न हिंदू संगठनों और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से 24 घंटों के भीतर हिंदू ग्रंथ की प्रतियाँ जलाने वाले सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की है। उन्होंने कार्रवाई न किए जाने पर बाड़मेर बंद करने और पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

बाड़मेर में हिंदू संगठनों का प्रदर्शन (साभार ट्विटर)

रिपोर्ट्स के मुताबिक बाड़मेर पुलिस ने कहा है कि घटना का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार बौद्ध धर्म की दीक्षा के लिए कार्यक्रम का आयोजन समता सैनिक दल के अमृत धनदे, भंत कश्यप, आनंद ने किया था। पुलिस ने धारा 151 के तहत 3 लोगों को गिरफ़्तार किया है। पुलिस की तरफ से कहा गया है कि जाँच में जो लोग दोषी पाए जाएँगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि जलाई गई प्रतियाँ कौन से धर्म ग्रन्थ की हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर में राजस्थान के भरतपुर का एक वीडियो वायरल हुआ ​था। वीडियो में नवविवाहित जोड़ों को शपथ दिलाई जा रही थी। इसमें कहा गया था, “मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश और गणेश को नहीं मानूँगा और ना ही उनकी पूजा करूँगा।” भरतपुर के कुम्हेर कस्बे में 20 नवंबर 2022 को संत रविदास सेवा समिति की ओर से इस सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया गया था।

दुपट्टे से लटका मिला 22 साल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का शव, पिता छत्तीसगढ़ में करते हैं सरकारी नौकरी: मोबाइल जब्त कर जाँच कर रही पुलिस

छतीसगढ़ की सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर लीना नागवंशी (Leena Nagvanshi) ने आत्महत्या कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह सोमवार (27 दिसंबर, 2022) को अपने घर की छत पर लटकी मिली। घटना से एक दिन पहले ही लीना ने क्रिसमस का रील बनाया था। सोशल मीडिया पर वह काफी लोकप्रिय थीं। वहीं वह पूर्व में Tiktok स्टार भी रह चुकी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, लीना नागवंशी चक्रधर नगर के केलो विहार कॉलोनी की निवासी थी। उनके पिता एचआर नागवंशी अंबिकापुर के वरिष्ठ सहाकारिता निरीक्षक हैं। उनकी तीन बच्चों में सबसे छोटी लीना बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। चक्रधर नगर थाने के सब इंस्पेक्टर दिनेश बोहिदार ने बताया, ”सोमवार (27 दिसंबर, 2022) को एक बजे सूचना मिली थी कि छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में केलो विहार कॉलोनी में रहने वाली 22 वर्षीय सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर लीना नागवंशी ने आत्महत्या कर ली है। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा दिया गया था।”

दरअसल सोमवार को लीना की माँ बाज़ार गई हुई थी और जब वह वापस आई तो वह उसे तलाश करते हुए छत पर गईं। वहाँ दरवाजा अंदर से बंद था। दरवाजा खटखटाने पर किसी ने दरवाजा खोला नहीं। किसी तरह उसने दरवाजे को खोला। फिर लीना की माँ वहाँ का दृश्य देख हैरत में पड़ गई, वहाँ लीना का शव पाइप से दुपट्टे के सहारे झूल रहा था।

लीना की माँ ने आसपास के लोगों को बुलाया और उन लोगों को लगा कि वह जिंदा है, जिसके बाद शव को नीचे उतार लिया। हालाँकि, लीना की मौत हो चुकी थी। पुलिस सूचना के बाद वहाँ पहुँची और लड़की का मोबाइल जब्त कर लिया। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नही किया गया है। वहीं कुछ दिन पहले टीवी एक्ट्रेस तुनिषा शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या के मामले में उसके ब्वॉयफ्रेंड और एक्टर शिजान को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस लव जिहाद के एंगल से मामले की जाँच कर रही है।

मुंडेरा बाज़ार का नाम हुआ चौरी-चौरा, तेलिया अफ़ग़ान अब कहलाएगा तेलिया शुक्ल: योगी सरकार के फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की मुहर

उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों के नाम बदलने के प्रस्तावों को गृह मंत्रालय की मंजूरी मिल गई है। इसी के साथ गोरखपुर के मुंडेरा बाज़ार को अब चौरी-चौरा के नाम से जाना जाएगा। साथ ही देवरिया के तेलिया अफ़ग़ान का नाम बदल कर तेलिया शुक्ल कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को 2 स्थानों के नाम बदलने की सिफारिश की थी। प्रस्ताव के तहत गोरखपुर स्थित मुंडेरा बाज़ार और देवरिया के तेलिया अफगान का नाम बदलने की अपील की गई थी। जिसपर मंत्रालय ने अपनी सहमति दे दी है। दी गई जानकारी के मुताबिक गोरखपुर जिले में नगर पालिका परिषद मुंडेरा बाजार का नाम बदलकर ‘चौरी-चौरा’ कर दिया गया है। वहीं देवरिया जिले के तेलिया अफ़ग़ान गाँव का नाम बदलकर ‘तेलिया शुक्ल’ करने के लिए मंत्रालय ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है।

आपको बता दें कि किसी भी स्थान का नाम बदलने के लिए रेल मंत्रालय, डाक विभाग और भारतीय सर्वेक्षण विभाग से सहमति लेने के बाद ही गृह मंत्रालय की तरफ से एनओसी जारी किया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंडेरा बाज़ार और तेलिया अफ़ग़ान का नाम बदलने की माँग काफी पुरानी है। दरअसल चौरी-चौरा की घटना के सौ साल पूरे होने के अवसर पर कई गलत तथ्यों को सुधारा जा रहा है। इसी कड़ी में चौरी-चौरा के मुख्य बाजार ‘मुंडेरा बाजार’ का नाम बदलने की माँग की जा रही थी। उसी तरह देवरिया जिले के बरहज का गाँव ‘तेलिया अफ़ग़ान’ आम लोगों के बीच ‘तेलिया शुक्ल’ के नाम से ही प्रचलित है। जबकि राजस्व अभिलेखों (revenue records) में इसका नाम तेलिया अफ़ग़ान ही चला आ रहा था।

इन नामों को सुधारने के प्रस्ताव पहले जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को भेजे जिसे स्वीकारने के बाद राज्य सरकार ने केंद्र से सिफारिश की। आपको बता दें कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार ने कई स्थानों के नाम बदले हैं। कुछ महीनों पहले ही लखनऊ के बर्लिगटन चौराहे का नाम बदलकर अशोक सिंघल चौराहा कर दिया गया था। सर्वोदय नगर में एक गेट का नाम विनायक दामोदर सावरकर द्वार रखा गया था, सिकंदराबाद चौराहे का नाम वीरांगना उदादेवी कर दिया गया था जबकि विराम खण्ड राम भवन चौराहा,अमर शहीद मेजर कमल कालिया चौराहा कर दिया गया था।

57वें जन्मदिन पर सलमान खान के घर के बाहर बेकाबू हुए फैंस, पुलिस ने बरसाई लाठियाँ: जूते-चप्पल छोड़ कर सरपट भागे, SRK भी पहुँचे थे पार्टी में

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) मंगलवार (27 दिसंबर, 2022) को अपना 57वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर बॉलीवुड के कई कलाकार समेत दुनिया भर से उनके फैन्स उन्हें बधाई दे रहे हैं। वहीं मुंबई में स्थित उनके गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर सुबह से ही काफी संख्या में लोग जमा थे। दिन ढलने के साथ ही लोगों की भीड़ बेकाबू हो गई। वहीं जब सलमान अपनी बालकनी पर लोगों का अभिवादन करने आए तो पुलिस के लिए लोगों को संभालना मुश्किल हो गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठी भाँजनी पड़ी।

वहीं सेलेब्रेटी पैपराजी वायरल भयानी (Viral Bhayani) ने इस संबंध में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि जैसे ही सलमान खान अपने घर की बालकनी पर फैन्स का अभिवादन करते हुए हाथ हिलाते हैं, वहाँ मौजूद भीड़ बेकाबू हो जाती है। भीड़ को सँभालने के लिए पुलिस को दनादन लाठी भाँजनी पड़ी। वीडियो में लोगों को पुलिस की लाठी से बचने के लिए इधर-उधर भागते देखा जा सकता है। लोग इतनी तेजी से भागे कि कई लोगों के चप्पल-जूते वहाँ बिखर गए।

वहीं सलमान जब अपनी बालकनी से वापस चले जाते हैं, उसके बाद उनके पिता सलीम खान भी वहाँ लोगों का अभिवादन करने आते हैं। सलमान खान ने भी लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए ट्वीटर पर फोटो पोस्ट किया है। हालाँकि, इस फोटो में भी देखा जा सकता है कि पुलिस भीड़ को सँभालने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही है और उन्हें पीछे धकेल रही है।

सलमान खान ने सोमवार (26 दिसंबर 2022) रात को बर्थडे पार्टी दी थी। इस पार्टी में वैसे तो बॉलीवुड के कई लोग उन्हें विश करने पहुँचे थे। पार्टी में शाहरुख़ खान भी मौजूद रहे। इस मौके पर शाहरुख खान और सलमान खान साथ दिखाई दिए। इतना ही नहीं, सेलिब्रेशन के बाद दोनों अभिनेता साथ आए और मीडिया के सामने पोज दिए। पार्टी सलमान की बहन अर्पिता के घर पर रखी गई थी। वहीं सलमान ने मीडिया के सामने केक भी काटा।

‘इंशाअल्लाह, खाना मिल जाएगा, बैठ जाएँ’: भाषण रोक कर पाकिस्तान के PM शाहबाज शरीफ को देना पड़ा दिलासा, भूख से जूझ रहा लगभग कंगाल इस्लामी मुल्क

बुरे आर्थिक हालात का सामना कर रहे पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शहबाज़ शरीफ यह कहते सुने जा रहे हैं कि बैठ जाएँ, अभी खाना मिल जाएगा, फिक्र न करें।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म शहबाज शरीफ सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा के लिए विकास परियोजनाओं के बारे में बात कर रहे थे। अपने संबोधन में वे किसी एयरपोर्ट को बनाए जाने का जिक्र कर रहे थे। तभी यह घटना हुई। वीडियो में उनके संबोधन के बीच एक शख्स नारेबाजी करने लगता है। इस पर शहबाज को अपना भाषण रोक देना पड़ता है। शहबाज़ शरीफ कहते हैं, “बैठ जाएँ न जी, अभी इंशाअल्लाह खाना मिल जाएगा, फिक्र न करें।” सभा में मौजूद लोग इस पर ठहाके लगाने लगते हैं। इसके बाद पीएम शरीफ भी मुस्कुराहट के साथ अपना भाषण फिर से शुरू कर देते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियो सोमवार (26 दिसंबर, 2022) का बताया जा रहा है। इसे सबसे पहले पाकिस्तान के उर्दू न्यूज़ चैनल पीटीवी न्यूज़ ने जारी किया था। इसे बाद में अन्य न्यूज़ चैनलों और पोर्टल्स ने भी शेयर किया और वीडियो वायरल होते देरी नहीं लगी। शहबाज़ शरीफ खैबर पख्तूनख्वा के दौरे पर थे। यहाँ वे विकास की बात कर रहे थे लेकिन ऐसा लग रहा था लोगों का ध्यान उनकी बातों से ज्यादा खाने पर था।

आपको बता दें कि अक्टूबर महीने में संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी ने चेतावनी जारी की थी कि पाकिस्तान में बाढ़ से प्रभावित लगभग 57 लाख लोगों को तीन महीनों में बड़े खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिक बारिश और बाढ़ से पाकिस्तान में बड़ी आबादी को खाने के संकट का सामना करना होगा। हालाँकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सैलाब से पहले भी पाकिस्तान की लगभग 16 प्रतिशत आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही थी। ऐसे में बाढ़ ने हालात बद से बदतर कर दिए।

कोरोना का जो वैरिएंट चीन में मचा रहा तबाही, उससे बचने के क्या हैं उपाय? जानिए कितना खतरनाक है ओमीक्रॉन BF.7, वैक्सीन कितना कारगर

कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को परेशान कर रखा है। इस महामारी से लाखों लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। महामारी की वजह से लगाए गए लॉकडाउन की वजह से विश्व की अर्थव्यवस्था अभी तक संघर्ष कर रही है। कोरोना मामलों में लगातार कमी की वजह से लोगों ने राहत की साँस लेना शुरू कर दिया था। हालाँकि, यह राहत बहुत ही कम समय के लिए थी। अब एक बार फिर से विश्व कोरोना की चपेट में है और इसका ज्वलंत उदाहरण चीन है। चीन में ओमिक्रॉन का BF.7 वैरिएंट कोहराम मचा रहा है।

अस्पताल भरे हुए हैं। लोगों का इलाज सड़कों पर हो रहा है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि क्या BF.7 वैरिएंट कोरोना के अन्य वैरिएंट से ज्यादा खतरनाक है। आइए इस रिपोर्ट में इसकी पड़ताल करते हैं।

कितना खतरनाक है BF.7 वैरिएंट?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BF.7 वैरिएंट वाकई में खतरनाक है। इस वैरिएंट में लोगों को अधिक से अधिक संक्रमित करने की क्षमता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, BF.7 वैरिएंट से संक्रमित इंसान अधिकतम 18 लोगों को संक्रमित कर सकता है। यानी, इस वैरिएंट से संक्रमित लोगों से बच कर रहने की जरूरत है क्योंकि ये आसानी से अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। वहीं आरटीपीसीआर टेस्ट में भी इस वायरस को पकड़ पाना काफी मुश्किल साबित हो रहा है।

इस लिहाज से भी इसे खतरनाक माना जा सकता है। खास कर के जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है या जिनकी इम्युनिटी कमजोर है, उनके लिए यह वैरिएंट काफी घातक है।

वहीं एम्स के पूर्व निदेशक रणदीप गुलेरिया भी ओमिक्रोन के इस सबवैरिएंट को खतरनाक बता रहे हैं। उनका कहना है की इस वैरिएंट में इम्युनिटी को चकमा देने की ताकत है। लिहाजा यह वैरिएंट उन्हें भी संक्रमित कर सकता है, जो पहले कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। साथ ही जिन्होंने वैक्सीन ली है, यह वैरिएंट उन्हें भी संक्रमित कर सकता है। हालाँकि इसकी गंभीरता कम ही रहेगी।

क्या BF.7 वैरिएंट भारत में भी तबाही मचाएगा?

BF.7 वैरिएंट भले ही कोरोना के अन्य वैरिएंट के मुकाबले अधिक खतरनाक है, लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें यह वैरिएंट भारत बहुत ज्यादा मुश्किल पैदा नहीं कर पाएगा। इस वैरिएंट से संक्रमित लोग भारत में भी मिले हैं, लेकिन उनमे वायरस के सामान्य लक्षण ही दिख रहे हैं। बकौल गुलेरिया, भारत में इस वायरस से डरने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि भारत में बीते एक साल में जितने भी सब वैरिएंट सामने आए हैं, वे सभी ओमिक्रोन से ही जुड़े हुए हैं।

कई लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और इस वैरिएंट के खिलाफ भारत के लोगों की इम्युनिटी पहले से ही मजबूत है। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार यह ओमिक्रोन का ही सब वैरिएंट है और इसमें थोड़े से बदलाव हुए हैं। हममे से अधिकतर ओमिक्रोन लहर से गुजर चुके हैं और यह हमें ज्यादा नुकसान नहीं पहुँचाएगा।

क्यों इस वैरिएंट से चीन की हालत हुई पतली?

चीन BF.7 वैरिएंट की वजह से बड़ी मुश्किल में है। वहाँ की मीडिया पर सरकारी नियंत्रण है और देश ने कभी भी कोरोना से संबंधित सही आँकड़े दुनिया के नहीं बताए। हालाँकि इस बार स्थिति इतनी विस्फोटक हो गई कि चीन इसे छुपा नहीं पाया। चीन के स्वास्थ्य इंतेजाम की पोल खोलते कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। कई तस्वीरों में लोग सड़क पर अपना इलाज कराते दिखते हैं। बड़ा सवाल यह है कि चीन में हालात इतने खराब कैसे हो गए, जहाँ से सख्त लॉकडाउन की खबरें आती रही हैं।

दरअसल एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन की ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ ने उसे इस कगार पर पहुँचा दिया। साथ ही ऐसी खबरें भी हैं कि वहाँ जनसँख्या के बड़े हिस्से ने कोरोना से बचाव का टीका नहीं लगाया है। चीन में ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ की वजह से कोरोना के थोड़े मामले आते ही सख्त लॉकडाउन लगा दिया जाता था, जिससे लोगों घरों या खास क्वारंटाइन सेंटर में कैद हो जाते थे और वायरस के खिलाफ उनकी इम्युनिटी विकसित ही नहीं हुई।

इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘हर्ड इम्युनिटी’ कहा जाता है। लिहाजा मामले फैलते हीं वहाँ विस्फोटक स्थिति पैदा हो गई। वहीं रणदीप गुलेरिया का कहना है कि चीन में कोरोना से बचाव के लिए दिए गए टीकों की क्वालिटी भी अच्छी नहीं है। आसान भाषा में कहें तो चीन के लोग BF.7 वैरिएंट से मुकाबला करने के लिए तैयार नहीं थे। यही वजह है कि वहाँ ऐसी स्थिति पैदा हुई।

क्या हैं BF.7 वैरिएंट के लक्षण

इसके लक्षण ओमिक्रॉन के अन्य वैरिएंट के समान हैं। BF.7 वैरिएंट से संक्रमित व्यक्ति में बुखार, खाँसी, गले में खराश, नाक बहना, थकान, उल्टी और दस्त के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह सब-वैरिएंट कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अगर किसी को लंबे समय से बदन दर्द हो रहा है तो उसे कोविड टेस्ट जरुर करवाना चाहिए। वहीं बचाव की अगर बात करें तो कोविड उपयुक्त व्यवहार करके हम इससे बच सकते हैं।

मसलन टीके लगवाना, भीड़-भाड़ से बचना, सार्वजनिक जगहों पर मास्क लगाने इत्यादि हमें इस घातक वायरस से बचा सकता है।

‘कॉन्ग्रेसियों को नंगा घूमना चाहिए’: सलमान खुर्शीद ने भगवान राम से की राहुल गाँधी की तुलना तो BJP सांसद ने सुनाई खरी-खरी

कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने राहुल गाँधी की तुलना भगवान श्रीराम से की थी। वहीं, उन्होंने कॉन्ग्रेसियों को भरत बताया था। खुर्शीद के इस बयान पर भाजपा हमलावर है। भाजपा सांसद दुष्यंत गौतम ने कहा है यदि वास्तव में राहुल, राम हैं तो कॉन्ग्रेसियों को नंगा घूमना चाहिए।

दुष्यंत गौतम ने कहा है, “अगर राहुल गाँधी श्री राम के अवतार हैं, तो उन्हें अपनी ‘सेना’ (कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं) को बताना चाहिए कि वह क्या खाते हैं कि उन्हें ठंड नहीं लगती। उनकी ‘सेना’ बिना कपड़ों के क्यों नहीं घूमती? कॉन्ग्रेस नेताओं को भगवान राम की सेना की तरह नंगा होकर घूमना चाहिए।” गौतम ने यह भी कहा, “इससे पता चलता है कि कॉन्ग्रेस प्रसाद नहीं बाँटती है। वे सब कुछ अपने लिए रखते हैं। आखिर ऐसा कौन सा प्रसाद है जिसके कारण राहुल गाँधी को ठंड नहीं लगती। उन्हें, अपनी माँ और बहन को भी बताना चाहिए। वो लोग इतने सारे कपड़ों पर पैसे क्यों खर्च करते हैं?”

दरअसल, सोमवार (26 दिसंबर, 2022) को सलमान खुर्शीद उत्तर प्रदेश के अमरोहा में राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि भगवान राम की खड़ाऊँ बहुत दूर तक जाती हैं। कभी-कभी खड़ाऊँ लेकर भी चलना पड़ता है। हमेशा भगवान राम हर जगह नहीं पहुँच पाते। उन्होंने कहा कि राम के भाई भरत जी उनकी खड़ाऊँ लेकर चलते हैं। खड़ाऊँ लेकर हम उत्तर प्रदेश में पहुँच गए हैं। अब रामजी भी पहुँचेगें। यह हमारा विश्वास है।

खुर्शीद यहीं रुके। उन्होंने राहुल गाँधी को सुपरह्यूमन तक बता डाला। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी सुपरह्यूमन हैं। हम ठंड में ठिठुर रहे हैं और जैकेट पहन रहे हैं। वहीं, राहुल गाँधी टी-शर्ट में बाहर जा रहे हैं। वह एक योगी की तरह हैं जो अपनी ‘तपस्या’ ध्यान से कर रहे हैं।”

बात दें कि इससे पहले, इसी साल अक्टूबर में राजस्थान सरकार में मंत्री परसादी लाल मीणा ने राहुल गाँधी को भगवान राम से बड़ा बता दिया था। मीणा ने कहा था कि राहुल गाँधी 3500 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं और वह भगवान राम से अधिक पैदल चल रहे हैं। त्रेता युग में वनवास के समय भगवान राम ने भी इतनी लंबी यात्रा नहीं की थी।

मीणा ने आगे कहा था कि भगवान राम अयोध्या से श्रीलंका तक पैदल गए थे और उससे भी ज्यादा राहुल गाँधी की यह ऐतिहासिक पदयात्रा जो कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक जाएगी। उन्होंने कहा कि देश में जैसा माहौल है, सांप्रदायिकता का वातावरण बन गया है, उसमें राहुल गाँधी देश जोड़ने का काम करने वाले हैं। साथ ही, बयान दिया कि इतनी लंबी पदयात्रा न कभी निकली और न आगे कोई निकाल पाएगा।

‘असतग़्फ़िरुल्लाह, मुस्लिम होकर क्रिसमस मना रहे हो?’: मोहम्मद शमी ने दी क्रिसमस की बधाई तो भड़के इस्लामी कट्टरपंथी, कहा – ये हराम है, अल्लाह से डरो

टीम इंडिया के तेज़ गेंदबाज मोहम्मद शमी सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट को लेकर एक बार फिर से कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम और ट्विटर हैंडल से अपने प्रशंसको को क्रिसमस विश किया था। इसके बाद इंस्टाग्राम से लेकर ट्विटर तक उन्हें निशाना बनाया गया।

मोहम्मद शमी ने रविवार (25 दिसंबर 2022) को अपने ट्विटर और इंस्टाग्राम अकाउंट से प्रशंसकों को क्रिसमस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा कि क्रिसमस के मौके पर आपके लिए अमन, खुशी की शुभकामनाओं के साथ ढेर सारा प्यार। फिर क्या था, क्रिसमस के मौके पर जैसे ही उन्होंने पोस्ट शेयर किया कमेंट्स की झड़ी लग गई। ज्यादातर कट्टरपंथियों ने शमी को मुस्लिम होने का हवाला देते हुए नसीहत दी कि क्रिसमस विश न करें। मुस्लिमों ने कहा कि यह हराम है।

इंस्टाग्राम पर अज़ाम अस्लम नाम के एक यूजर ने लिखा कि भाई अल्लाह ने आपको पूरी दुनिया में इज्जत दी है इसलिए कोई भी ऐसा काम न करें जिससे अल्लाह नाराज़ हो जाएँ। अज़ाम अस्लम ने आगे लिखा कि यह पोस्ट डिलीट कर के अल्लाह को इज्जत दो। उसने लिखा, “अल्लाह न किसी का बेटा है न उसका कोई बेटा है। अल्लाह अकेला है और हमेशा अकेला रहेगा। उसके अलावा कोई इबादत के लायक नहीं है। आप मुसलमान हो आप समझो आपसे बहुत मोहब्बत करता हूँ मैं।”

मोहम्मद शमी के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

कुछ यूजर्स ने तो उन्हें अनफॉलो करने तक की धमकी दी। हबीबुल्लाह नाम के यूजर ने लिखा, ‘अस्‍तग़फिरूल्‍ला। एक मुसलमान कभी भी क्रिसमस पर विश नहीं कर सकता, क्योंकि इस्लाम में इसकी मनाही है।

ट्विटर पर एरम नाम की यूजर ने तो एक अटैचमेंट शेयर करते हुए शमी को उसे पढ़ने की नसीहत दी। इसमें यह बताया गया था कि मुस्लिम क्रिसमस क्यों विश नहीं कर सकते। एक ट्विटर यूजर ने मोहम्मद शमी से पूछा कि आप एक मुस्लिम हैं आप क्रिसमस कैसे मना सकते हैं?

मोहम्मद शमी को कोसते समय जब कट्टरपंथी उन्हें इस्लाम का पाठ पढ़ा रहे थे तब एक शब्द “अस्‍तग़फिरूल्‍ला” का इस्तेमाल कर रहे थे। आपको बता दें कि यह एक अरबी शब्द है जिसका इस्तेमाल इस्लाम को मानने वाले अल्लाह से जाने अनजाने किए गए भूल की माफी माँगने के लिए करते हैं।

मोहम्मद शमी के इंस्टाग्राम पोस्ट पर कमेंट्स का स्क्रीन शॉट

यह पहला मौका नहीं है जब मोहम्मद शमी कट्टरपंथियों के निशाने पर आए हों। इसके पहले भी दशहरे के अवसर पर जब उन्होंने पोस्ट साझा किया था तब भी कट्टरपंथियों ने उनपर हमला बोला था।