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छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस पार्षद मन्नान खान ने वाजपेयी की प्रतिमा लगाने से रोका, पार्टी कार्यकर्ताओं ने की मारपीट: उधर ‘सदैव अटल’ पर राहुल गाँधी

जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘सदैव अटल’ पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर टकराव हो रहा है। दुर्ग जिले में दिवंगत प्रधानमंत्री की प्रतिमा लगाने को लेकर जम कर बवाल हुआ। बता दें कि रविवार (25 दिसंबर, 2022) को अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती थी। इसी दौरान दुर्ग के कैम्प-2 स्थित संत रविदास नगर वार्ड में बवाल हुआ।

ये विवाद दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा को लेकर हुआ। इस वार्ड में एक ‘अटल स्मृति उद्यान’ बना हुआ है। यहीं पर दिवंगत पूर्व पीएम की प्रतिमा लगाने के लिए कार्यकर्ता पहुँचे हुए थे। लेकिन, स्थानीय पार्षद ने इसका विरोध किया। कॉन्ग्रेस नेताओं के उकसाने के बाद पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं ने भी मोहल्ले के लोगों के साथ इसका विरोध करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे विवाद ने उग्र रूप भी ले लिया और हंगामा होने लगा।

इसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने दहारा-145 लगाते हुए इस उद्यान को सील कर दिया है। जिलाधिकारी के आदेश के बाद इस मामले में आगे की कार्यवाही किए जाने की बात कही जा रही है। वार्ड 37 में प्रतिमा लगाने पहुँचे भाजपा कार्यकर्ताओं का भी विरोध किया गया। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता धक्का-मुक्की पर उतर आए। स्थानीय कॉन्ग्रेस पार्षद मन्नान खान ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति ऐसा किया जा रहा है और जिस छोटे से गार्डन में 50 लोग बमुश्किल से आ सकते हैं, वहाँ ऐसा किया जा रहा था।

सांसद विजय बघेल ने कहा कि जब दुर्ग की नगरपालिका को इस बाबत पत्र भेजा गया था तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अब कहा जा रहा है कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष मामले को रखा जाएगा और वही इस संबंध में अंतिम निर्णय लेगी। इस गार्डन का स्वामित्व पहले भिलाई स्टील प्लांट के पास था और उनके पास सेंट्रल PSU से द्वारा प्राप्त एक NOC प्रमाण-पत्र भी है। उधर राहुल गाँधी ‘सदैव अटल’ पर श्रद्धांजलि अर्पित कर के सभी महापुरुषों के आदर का संकेत दे रहे हैं, लेकिन उनके ही नेता इसके विपरीत बयानबाजी कर रहे।

कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ‘अंग्रेजों का मुखबिर’ बता दिया। इस बयान को लेकर भाजपा, कॉन्ग्रेस पर हमलावर है। भाजपा नेताओं ने कॉन्ग्रेस से माफी की माँग की है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि वीर सावरकर से लेकर वाजपेयी जैसी हस्तियों का अपमान करना कॉन्ग्रेस की आदत बन गई है। खुद राहुल गाँधी कई बार वीर सावरकर का अपमान कर चुके हैं और महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस भी इस पर चुप्पी साधे रखती है।

वीर बाल दिवस: 300 साल पहले मुगलों के आगे साहिबजादों ने नहीं झुकाया सिर, कहा- नहीं छोड़ेंगे धर्म, दीवार में चुनवा दो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरु परब के मौके पर 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के तौर पर मनाने की घोषणा किए जाने के बाद आज (26 दिसंबर 2022) गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों को पूरा देश याद कर रहा है। प्रधानमंत्री इस अवसर पर आज मेजर ध्यानचंदन नेशनल स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। वह यहाँ 300 बाल किरतनियों से मुलाकात करेंगे और 3000 बच्चों को ‘मार्च-पास्ट’ दिखाकर रवाना करेंगे।

आज के दिन तरह-तरह के क्रियाकलापों के जरिए बच्चों को साहिबजादों की बहादुरी के बारे में बताया जा रहा है। स्कूलों में जहाँ इस पर निबंध प्रतियोगिता और क्विज चल रहे हैं। वहीं सार्वजनिक स्थान जैसे रेलवे स्टेशन, पेट्रोल पंप आदि पर डिजिटल प्रदर्शनी का इंतजाम किया गया है। हर माध्यम से ये बताने का प्रयास हो रहा है कि कैसे गुरु गोविंद सिंह के बेटों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने भी धर्म की रक्षा के लिए अत्याचारियों के आगे सिर नहीं झुकाया और मौका आने पर बलिदान भी हो गए।

साहिबजादों की बहादुरी

वो 1704 का साल था। औरंगजेब ने गुरु गोविंद सिंह की खालसा सेना से लड़ने के लिए वजीर खान को अपना सूबेदार बनाकर पीछे छोड़ा। वजीर ने विशाल फौज के बावजूद सिख सैनिकों से शुरुआत में मात खाई, जिसके बाद उन्होंने संधि प्रस्ताव भेजा और कहा कि अगर गुरु गोविंद सिंह दुर्ग से चले जाएँ तो वह उनके परिवार को सुरक्षित निकलने का रास्ता देंगे। मुगल सेना ने अपनी बात पर यकीन दिलाने के लिए कुरान तक की कसम खाई।

8 माह बाद जब गुरु गोविंद सिंह की सेना और परिवार दुर्ग से जाने को तैयार हुआ तो मुगलों ने उन पर हमला कर दिया। गुरु गोविंद सिंह का इसी दौरान अपने परिवार से साथ छूटा था। उनके चार साहिबजादों में से अजीत सिंह और जुझार सिंह उनके साथ चमकौर की गढ़ी तक पहुँच गए थे। लेकिन उनकी माँ गुजरी देवी और साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह उनसे बिछुड़ गए।

इन लोगों ने गुरु गोविंद सिंह के एक पुराने रसोइए के पास शरण ली। लेकिन उसने उनके साथ विश्वासघात किया। उसने दोनों बच्चों को पकड़ औरंगजेब के सिपाही वजीर खान के हवाले कर दिया। वजीर ने दोनों के आगे शर्त रखी कि या तो इस्लाम कबूलो वरना दीवार में चुनवाकर मार दिए जाओगे। बहादुर पिता के साहिबजादों ने दीवार में चुनना पसंद किया।

उन्होंने कहा, हम गुरु गोविंद सिंह के पुत्र हैं, जो अपना धर्म कभी नहीं छोड़ सकते। इसके बाद वजीर खान ने उन्हें चुनवाने का आदेश दिया। वह पहले उन्हें मलेरकोटला के नवाब को सौंपना चाहता था, जिसका भाई सिखों के साथ युद्ध में मारा गया था। लेकिन, उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उसका कहना था कि उस युद्ध में इन दोनों बालकों का क्या दोष?

दोनों साहिबजादों में जोरावर सिंह बड़े थे। जब दीवार ऊपर उठने लगी तो उनकी आँखों में आँसू आ गए। इस पर छोटे भाई ने पूछा कि क्या वो बलिदान देने से डर गए, इसीलिए रो रहे हैं? जोरावर सिंह ने जवाब दिया कि ऐसी बात नहीं है। वो तो ये सोच कर दुःखी हैं कि छोटा होने के कारण फ़तेह सिंह की दीवार में पहले समा जाएँगे और उनकी मृत्यु पहले हो जाएगी। उन्होंने कहा, “दुःख यही है कि मेरे से पहले बलिदान होने का अवसर तुम्हें मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मैं मौत से नहीं डरता, वो मुझसे डरती है।”

देवकीनंदन महाराज को सऊदी अरब से धमकी, कहा- बम से उड़ा देंगे: हरिद्वार के संतों को जहर देकर मारने की साजिश में प्रयागराज से गिरफ्तारी

कथा वाचक देवकीनंदन महाराज को धमकी देने का मामला सामने आया है। सऊदी अरब से कॉल कर उन्हें मुस्लिमों के खिलाफ बोलने पर हत्या करने की धमकी दी गई। वहीं एक अन्य घटना में प्रयागराज से एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। उस पर हरिद्वार के संतों की हत्या का साजिश रचने का आरोप है।

फिलहाल मुंबई के खारघर में श्रीमद्भागवत कथा कर रहे देवकीनंदन महाराज के व्यक्तिगत नंबर पर शनिवार दोपहर सऊदी से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने उन्हें गालियाँ दी। जिंदा जलाने और बम से उड़ाने की धमकी दी। इसकी जानकारी ट्विटर के जरिए साझा करते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा है कि वे सनातन के लिए कार्य करते रहेंगे। इधर महाराष्ट्र पुलिस ने उनके पंडाल की सुरक्षा सख्त कर दी है।

वहीं हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि सहित कई प्रमुख संतों की हत्या की साजिश का मामला सामने आया है। इस मामले में शनिवार (24 दिसंबर 2022) को प्रयागराज से एक संदिग्ध गिरफ्तार किया गया है। उसका नाम विक्रम शर्मा और बागपत का रहने वाला बताया जा रहा है। आरोप है कि जहर देकर वह संतों की हत्या की साजिश रच रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पकड़ा गया संदिग्ध इसी साल 29 नवम्बर को स्वामी कैलाशानंद गिरी के हरिद्वार स्थित दक्षिण काली मंदिर गया था। आश्रम के गेस्ट रजिस्टर में उसने अपना नाम और पता गलत दर्ज करवाया। वह लगभग 5 घंटे तक वहाँ रूका। 500 रुपए की फर्जी रसीद भी कटवाई थी। उसने आश्रम प्रबंधक से स्वामी कैलाशानंद से मिलने की इच्छा जताते हुए उनके आने-जाने के रास्ते पूछे थे। वहाँ से निकल कर वह प्रयागराज पहुँचा। यहाँ वो नैनी थाना क्षेत्र स्थित साध्वी त्रिकाल भवंता के मंदिर में रुका। इसी दौरान साध्वी से हुई बातचीत के दौरान उसने संतों को जहर देकर उनकी हत्या की प्लानिंग का खुलासा किया।

बताया जा रहा है कि साध्वी ने संदिग्ध और उसकी साजिश की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने आश्रम पहुँच कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित से पूछताछ के लिए पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (STF) भी लगी है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक आरोपित के निशाने पर अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी, अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि भी थे। वह एक जनवरी को श्री दक्षिण काली मंदिर में होने वाले जन्मोत्सव आयोजन में दौरान भंडारे में जहर मिलाना चाहता था।

संतों के मुताबिक पकड़े गए संदिग्ध का प्लान खीर में जहर मिलना था। इस खुलासे के बाद अब 1 जनवरी के आयोजन में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। संतों के अनुसार जहाँ भोजन तैयार होगा वहाँ CCTV कैमरे भी लगाए जाएँगे। वहीँ पकड़े गए संदिग्ध के अनुसार स्वामी कैलाशानंद ने उससे नौकरी के नाम पर 20 हजार रुपए लिए थे जो न तो लौटाए गए और न ही उसे नौकरी मिली।

इस मामले में महामंडलेश्वर कैलाशानंद ने प्रयागराज पुलिस को धन्यवाद करते हुए कहा कि आरोपित लगातार अपना बयान बदल रहा है। इसी के साथ उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए किसी व्यक्ति द्वारा आरोपित को संचालित करने की आशंका जताई है।

तुनिशा शर्मा की मौत को महाराष्ट्र के मंत्री ने बताया ‘लव जिहाद’: अंकल को परेशान हालत में किया था कॉल, कहा था- मेरे साथ गलत हुआ

टीवी एक्ट्रेस तुनिशा शर्मा की संदिग्ध मौत को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने इसे लव जिहाद से जोड़ा है। एक मीडिया रिपोर्ट में ​बताया गया है कि तुनिशा ने जब अपने अंकल को कॉल किया था तो परेशान थी। उन्होंने अंकल से कहा था कि मेरे साथ गलत हुआ है।

वैसे तुनिशा की मौत के बाद से ही लव जिहाद एंगल की चर्चा है। लेकिन आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। मुंबई पुलिस ने मौत को आत्महत्या करार देते हुए FIR दर्ज की है। लेकिन मंत्री गिरीश महाजन ने इसे लव जिहाद बताते हुए ऐसी घटनाओं में तेजी आने की बात स्वीकार की है। मंत्री के मुताबिक राज्य सरकार लव जिहाद के खिलाफ कड़ा कानून लाने पर विचार कर रही है।

महाजन ने कहा कि तुनिशा की मौत की जाँच चल रही है। उन्होंने कहा कि इस केस की जाँच सामान्य के बजाए लव जिहाद के एंगल से की जा रही है। यह बयान उन्होंने नासिक के एक कार्यक्रम में रविवार (25 दिसंबर 2022) को दिया।

मुंबई पुलिस के ACP चंद्रकांत जाधव ने कहा है कि तुनिशा शर्मा ने आत्महत्या की है। उन्होंने बताया है कि एक्टर शीज़ान खान से ब्रेकअप के बाद तुनिशा काफी परेशान थी। ACP के मुताबिक आरोपित शीजान पर IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए मजबूर करना) की धारा के तहत वर्ली पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक मौत से पहले तुनिशा ने अपनी माँ को भी शीजान के कथित धोखे के बारे में बताया था।

वहीं दैनिक भास्कर मुताबिक मौत से कुछ दिनों पहले तुनिशा ने अपने चाचा को फोन किया था। फोन पर तुनिशा ने खुद को धोखा मिलने और बेहद परेशान होने की बात कही थी। अंकल के अनुसार, “कुछ दिन पहले तुनिशा ने मुझे फोन किया था। वह बहुत परेशान थी। मैंने पूछा कि क्या हुआ है? तब उसने बताया कि मेरे साथ गलत हुआ है। मुझे चीट किया गया है।”

SIT जाँच की माँग

भारत 24 के मुताबिक शीजान खान के ब्लैकमेलिंग में तुनिशा फँस चुकी थी। उसके घर वालों ने भी शीजान को संदिग्ध बताया है। सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने इस मामले में SIT जाँच की माँग की है।

गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 2022 को अभिनेत्री तुनिशा शर्मा का शव को-स्टार शीजान के मेकअप रूम में मिला था। शीजान को 4 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा जा चुका है। तुनिशा की मौत को ले कर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं।

क्रिसमस का दिन, बागेश्वर धाम सरकार की राम कथा और 300 लोगों ने की घर वापसी: पत्थलगाँव में भी 50 परिवार मूल धर्म में लौटे

भारत में धर्मांतरण के काले जाल से लोगों को बचाने के लिए घरवापसी के कई अभियान जगह-जगह चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में हाल में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने 25 दिसंबर 2022 को दमोह में चल रही रामकथा में शामिल होने आए 300 लोगों को सनातन धर्म में लौटवाया। वहीं छत्तीसगढ़ के जशपुर में भी विशाल हिंदू सम्मेलन के दौरान अखिल भारतीय घरवापसी के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने 50 परिवारों ने हिंदू धर्म में घरवापसी करवाई। कार्यक्रम के दौरान मिशनरियों का शिकार लोगों ने बताया कि उन्हें कैसे-कैसे लालच देकर ईसाई बनाया गया था।

बागेश्वर धाम सरकार ने 300 लोगों की करवाई घरवापसी

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने 25 दिसंबर को दमोह के कृष्णा हाइट्स में हुए कार्यक्रम में 250-300 लोगों को शपथ दिलाई। उन्होंने पहले पूछा कि किसी ने जबरन तो उन्हें हिंदू धर्म स्वीकारने को नहीं कहा। जब इस बात से लोगों ने इनकार कर दिया तब उन्होंने कहा बोलो कि चाहे कुछ भी हो जाए आप लोग अपना धर्म किसी कीमत पर नहीं छोड़ोगे। धीरेंद्र शास्त्री ने उन्हें समझाया कि हमारे संतों ने, पूर्वजों ने सनातन की रक्षा के लिए प्राण तक दे दिए लेकिन भूलकर भी दूसरे धर्म में नहीं गए।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पीड़ितों से पूछा कि उन्हें किस तरह का लालच देकर हिंदू धर्म छुड़वाया गया। इस पर एक युवक जितेंद्र ने बताया कि उनके पिता को कहा गया था कि ‘तुम्हारे बच्चे के पैर का इलाज करवा देंगे।’ हालाँकि दवाई एक रुपए की भी नहीं हुई। उलटा उन्हें कहा गया कि घर में चाहे कोई मर जाए लेकिन रविवार को चर्च जरूर आना है।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री द्वारा घरवापसी करने वाले लोगों में से एक युवक (बागेश्वर धाम सरकार का वीडियो)

जितेंद्र ने बताया कि उन लोगों के आगे हिंदू धर्म को उलटा कहा जाता था जिसका उन्हें बहुत बुरा लगता था। पर कहीं से कोई सपोर्ट न मिल पाने के कारण वो कुछ नहीं कर पाते थे। इसी तरह एक युवक ने बताया कि उसे गाड़ी की किस्त भरने के नाम पर 1 लाख 32 हजार रुपए दिए गए थे और इलाज के लिए 60 हजार रुपए देकर ईसाई धर्म कबूल करवाया गया था।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने सबकी बातें सुनने के बाद कहा कि अगर आप लोग लालच में न आते तो ये दिन नहीं आता। आप यदि भगवान की शरण में आओगे, हनुमान जी को ध्याओगे तो आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

दमोह की तरह जशपुर में भी पत्थलगाँव के किलकिला शिव मंदिर में अखिल भारतीय घरवापसी प्रमुख सूर्य प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने हिंदू विशाल सम्मेलन को आयोजित करवाया। ये आयोजन स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के 96 वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य पर हुआ जहाँ कई संत आए एवं विश्व कल्याण महायज्ञ हुआ। इसी कार्यक्रम में पहलो जूदेव ने भगवान शिव की आराधना की। उसके बाद जय श्रीराम का नारा लगाते हुए 50 हिंदू परिवारों के सैकड़ों लोगों को हिंदू धर्म में वापसी करवाई।

जशपुर में आयोजित विशाल हिंदू समारोह

उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद नहीं होते तो पूरे भारत में धर्मांतरण हो जाता लेकिन उन्होंने अपना जीवन समर्पण कर दिया और हिंदुओं को एक करने के लिए हमेशा लगे रहे। मेरे पिताजी स्व दिलीप सिंह जूदेव के इस घर वापसी के कार्यक्रम को मैं चलाता आ रहा हूँ जिसमें मेरा साथ देने के लिए मैं आप सभी का आभारी हूँ। जूदेव ने कहा हिंदुत्व किसी जाति का नही राष्ट्रीयता का प्रतीक है इतिहास गवाह है जहा हिंदू घटा है देश बटा है। इसीलिए हिंदू बचाना मंदिर बनाने से भी बड़ा कार्य है क्योंकि हिंदू ही मंदिर बनाएगा मंदिर हिंदू नही। अंत मे उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “मैं विरोधियों को चुनौती देता हूँ ये धर्मांतरण का घिनौना कार्य बंद कर दो अन्यथा इसका दूरगामी परिणाम विचारणीय होगा।”

जशपुर में आयोजित विशाल हिंदू समारोह

तीसरी बार नेपाल के PM बने ‘कॉमरेड प्रचंड’, ढाई-ढाई साल के लिए ओली से हुआ समझौता: माओवादी दलों का नया गठबंधन, देउबा को दिखाया बाहर का रास्ता

नेपाल में प्रधानमंत्री पद को लेकर मची जद्दोजहद समाप्त हो गई। सीपीएन-माओवादी सेंटर (CPN-MC) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ मौजूदा पीएम शेर बहादुर देउबा को पछाड़ते हुए देश के नए प्रधानमंत्री बन गए। राष्ट्रपति राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने प्रचंड को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। वह ढाई साल नेपाल के प्रधानमंत्री रहेंगे।

नेपाल के राष्ट्रपति कार्यालय ‘शीतल निवास’ की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, पुष्प कमल दहल प्रचंड को सोमवार (26 दिसंबर, 2022) को शाम चार बजे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। प्रचंड ने राष्ट्रपति बिद्यादेवी भंडारी को सांसदों के समर्थन वाला पत्र सौंपा है। इस पत्र में 169 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।

दरअसल, नेपाल कॉन्ग्रेस के नेता और मौजूदा प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार थे। राजनीतिक दलों के बीच उन्हें प्रधानमंत्री बनाए जाने को लेकर सहमति थी। हालाँकि, राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच देउबा की पार्टी और सीपीएन माओवादी सेंटर के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के बीच ढाई-ढाई साल सरकार चलाने को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी। इसलिए, उन्होंने गठबंधन से अलग होने का ऐलान करते हुए केपी शर्मा ओली की पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया।

राष्ट्रपति भंडारी ने सभी राजनीतिक दलों को प्रधानमंत्री पद हेतु दावा करने के लिए रविवार (25 दिसंबर, 2022) तक की डेडलाइन दी थी। इसके बाद भी मौजूदा प्रधानमंत्री देउबा या उनके गठबंधन की ओर से किसी प्रकार का दावा नहीं किया गया। इसके बाद, प्रचंड ने विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल समेत अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर नई सरकार बनाने दावा पेश किया। तब, राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 76 (2) के तहत प्रचंड को प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

ढाई साल रहेंगे प्रधानमंत्री

पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और केपी शर्मा ओली के बीच ढाई-ढाई साल प्रधानमंत्री बनने को लेकर सहमति बनी है। इसलिए, ऐसा माना जा रहा है कि ढाई साल बाद ओली प्रधानमंत्री बनेंगे। प्रचंड तीसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री बनेंगे। पहली बार वह साल 2008 में और दूसरी बार साल 2016 में प्रधानमंत्री बने थे।

बता दें कि नेपाल में हुए आम चुनाव में नेपाली कॉन्ग्रेस ने 275 सीटों में से 89 सीटों में जीत दर्ज की है। वहीं, सीपीएन-यूएमएल के खाते में 78 सीटें गई। सीपीएन-माओवादी सेंटर को 32 सीटें मिलीं थीं। यही नहीं, पहली बार चुनाव लड़ रही राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी ने 20 सीटें अपने नाम की हैं। जनता समाजवादी पार्टी ने 12 सीटें और जनमत पार्टी ने 6 सीटें जीती हैं।

‘अंग्रेजों के जासूस थे अटल बिहारी वाजपेयी, स्वतंत्रता सेनानियों को पकड़वाया’: दिवंगत पूर्व PM की जयंती के दिन कॉन्ग्रेस नेता ने उगला ज़हर, बताया नरसंहार का दोषी

कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी (Gaurav Pandhi) ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ‘अंग्रेजों का मुखबिर’ बताया। इस बयान को लेकर भाजपा कॉन्ग्रेस पर हमलावर है। भाजपा नेताओं ने कॉन्ग्रेस से माफी की माँग की है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला (Shahzad Poonawala) ने कहा है कि वीर सावरकर से लेकर वाजपेयी जैसी हस्तियों का अपमान करना कॉन्ग्रेस की आदत बन गई है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी ने ट्वीट कर अटल बिहारी वाजपेयी को ‘अंग्रेजों का मुखबिर’ बताने के साथ ही उन्हें भीड़ को उकसाने वाला बताया था। पाँधी ने ट्वीट कर कहा था, “1942 में, आरएसएस के अन्य सभी सदस्यों की तरह, अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का बहिष्कार किया और आंदोलन में भाग लेने वालों के खिलाफ अंग्रेजों के मुखबिर के रूप में काम किया।”

पाँधी ने यह भी कहा, “नेली हत्याकांड हो या बाबरी विध्वंस, वाजपेयी ने भीड़ को भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण है कि आज भाजपा नेता हमेशा मोदी की तुलना गाँधी, पटेल या अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं से करते हैं न कि सावरकर, वाजपेयी या गोलवलकर से। वे सच जानते हैं।”

गौरव पाँधी के इस बयान के बाद भाजपा कॉन्ग्रेस पर हमलावर है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “देश आज भारत अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद कर रहा है। कॉन्ग्रेस ने आज अपना असली चेहरा दिखाया। वह सावरकर, अंबेडकर, अटल बिहारी जैसे व्यक्तित्वों का अपमान करने में विश्वास करती है।”

उन्होंने यह भी कहा है, “आज राहुल गाँधी के करीबी माने जाने वाले गौरव पाँधी ने वाजपेयी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यह एक संयोग नहीं बल्कि एक प्रयोग है। यह कॉन्ग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। यह उनकी आदत बन गई है। गौरव पाँधी को बर्खास्त करते हुए कॉन्ग्रेस को माफी माँगनी चाहिए।”

पूनावाला ने ट्वीट कर कहा है, “वाजपेयी जी की नेहरू जी और डॉ मनमोहन सिंह ने प्रशंसा की थी। क्या वे गलत थे और क्या गौरव पाँधी सही हैं? यह पाँधी जैसे लोगों का इस्तेमाल करके प्रथम परिवार (गाँधी परिवार) जानबूझकर भारत के प्रतीक को कलंकित करने का काम कर रहा है।”

एक अन्य ट्वीट में पूनावाला ने लिखा, “एक तरफ राहुल गाँधी वाजपेयी जी की समाधि पर जाकर उन्हें सम्मान देने का नाटक कर रहे हैं। दूसरी ओर जिस दिन हमने बाजपेयी जी को याद किया उसी दिन उनके करीबी सहयोगी गौरव पाँधी उनका अपमान कर रहे हैं। राहुल के दोगलेपन की पोल खुल गई अगर राहुल, कॉन्ग्रेस में वाजपेयी जी का सम्मान करते हैं तो उन्हें (गौरव पाँधी को) बर्खास्त कर दें।”

इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता जितिन प्रसाद ने कहा है, “अटल जी जैसे नेताओं ने राष्ट्र के प्रति उनकी अमर प्रतिबद्धता के कारण राजनीतिक क्षेत्र में नेताओं का सम्मान और भारत के लोगों का प्यार हासिल किया है। क्या गौरव पाँधी के इस बयान को कॉन्ग्रेस की ओर से आधिकारिक मंजूरी मिली हुई है?”

सोलंकी क्षत्रिय राजाओं ने रूद्रों के नाम पर बनवाया भव्य रुद्र महालय: ज्योतिषी बोला- प्रलय तक रहेगा मंदिर, दो बार इस्लामी आक्रांताओं ने तोड़ा, बना दी जामी मस्जिद

गुजरात के पाटण जिले के सिद्धपुर में अपनी व्यथा लिए हुए अतीत के एक भव्य मंदिर खड़ा है, जिसे रुद्र महालय या रुद्रामल मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भारत के उस राज्य में स्थित है, जो हिंदुत्व का प्रयोगशाला कहलाता है। राज्य मे 27 सालों से देशभक्ति और राष्ट्रीयता की बात करने वाली पार्टी का शासन है, लेकिन इसकी अवस्था में कोई अंतर नहीं आया है।

इस मंदिर का निर्माण चालुक्य क्षत्रिय वंश, जिन्हें सोलंकी राजपूत भी कहा जाता है, के संस्थापक महाराजा मूलराज सिंह सोलंकी ने 943वीं में इसका निर्माण शुरू करवाया था। इसे उनके वंश के सिद्धराज जयसिंह (1094-1144) में पूरा कराया था। सिद्धराज जयसिंह ने प्रसिद्ध सहस्रलिंग तालाब का भी निर्माण कराया था।

इस मंदिर को पहला और सबसे बड़ा चालुक्य मंदिर कहा जाता है। रुद्र महालय मंदिर एक बहुमंजिला मंदिर है। इस मंदिर को भगवान शिव को समर्पित किया गया है। इसके परिसर में 11 सहायक मंदिर भी हैं, जो भगवान शिव के एकादश रूद्रों को समर्पित है।

यह मंदिर 91 मीटर लंबा और 70 मीटर चौड़ा था। इसके मुख्य भवन की ऊँचाई 150 फीट थी। मंदिर में पूर्व, दक्षिण और उत्तर की ओर दरवाजे के साथ एक केंद्रीय मण्डप था। इसके साथ ही इसमें 12 प्रवेशद्वार थे। 3 मंजिला मंदिर में कुल 1600 खंभे थे। पूर्वी द्वार सुंदर नक्काशी वाले ‘तोरण’ से सुशोभित था, जो की सरस्वती नदी की ओर जाता था।

उत्खननों के दौरान इसके कुछ सहायक मंदिरों, एक तोरण, दो ड्योढ़ी और मुख्य मंदिर कपिली के चार स्तंभों का पता चला। इसके बगल में सुंदर तराशे हुए विशाल स्तंभ, विशाल दरवाजा और तोरण मेहराब पाए गए हैं। स्तंभ और तोरण आज मंदिर के एकमात्र अवशेष के रूप में खड़े हैं।

उत्खनन में गए दिवारों और खंभों पर व्यापक और विस्तृत नक्काशी की गई है और राजपूत काल के कलाप्रेम को उजागर करते हैं। इसके राजपूत शैली में बने इस मंदिर की भव्यता का प्रमाण भी देते हैं। हालाँकि, यह मंदिर अब जीर्णावस्था में है। इस मंदिर की विशालता और भव्यता की आज के पूरे गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में प्रसिद्ध थी।

निर्माण की कहानी

इस मंदिर के निर्माण की कई कहानियाँ प्रचलित हैं। अब कहानियाँ तो कहानियाँ होती हैं। अगर इनका साक्ष्य मिल जाए तो इतिहास हो जाती हैंं। ऐसी ही एक कहानी है, राजा के स्वप्न को लेर। कहा जाता है कि महाराजा मूलराज सिंह ने स्वप्न में देखा कि वे सरस्वती नदी के तट पर भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर का निर्माण करा रहे हैं।

इसके बाद अगले दिन उन्होंने प्रसिद्ध वास्तुकार प्रंधार को बुलाया और पत्थरों का चयन तथा निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दिया। प्रंधार ने देश-विदेश से कुशल कारीगरों एवं ज्योतिषियों को बुलाकर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया।

कहा जाता है कि इसी बीच महाराजा मूलराज सिंह का निधन हो गया। उसके बाद प्रंधार भी स्वर्ग प्रस्थान कर गए। पाटण की गद्दी पर उनके वंशज सिद्धराज जयसिंह बैठे। जयसिंह को भी एक रात सपने में अपने पूर्वज के वचनों के बारे में याद दिलाया गया। इसके बाद सिद्धराज ने मंदिर निर्माण का काम फिर शुरू करवाया।

इस मंदिर को सूर्य रहने तक कोई छू नहीं सकेगा- ज्योतिषी मार्कण्डेय शास्त्री

महाराजा सिद्धराज जयसिंह ने रुद्र महालय को पूरा कराने के लिए उस समय के विख्यात ज्योतिष मार्कण्ड शास्त्री को मालवा से बुलवाया। मार्कण्ड ने मंदिर के लिए नया स्थान चुना और फिर से नींव रखवाया। इसके बाद मार्कण्ड ने जमीन में कई जगह सोने की कीलें गड़वाईं। जब राजा सिद्धराज जयसिंह ने पूछा तो मार्कण्ड ने मंदिर के भविष्य को लेकर एक बात कही।

मार्कण्ड ने कहा कि शुभ मुहूर्त में इस नींव के कारण इस रुद्र महालय मंदिर को कोई स्पर्श नहीं कर सकेगा। यह मंदिर जब तक सूर्य-चंद्रमा रहेंगे, तब तक विराजमान रहेगा और इसे कोई खरोंच नहीं आ सकता। मार्कण्ड शास्त्री ने कहा कि इस मंदिर को सोने की कीलों से शेषनाग के सिर पर गाड़ दिया गया है और यह पूरी पृथ्वी शेषनाग के सिर पर है। इसलिए यह मंदिर को कभी खरोंच नहीं आ सकता।

इसके बाद राजा जयसिंह ने कहा कि सृष्टि में ऐसी कोई रचना नहीं, जिसका अंत ना हो। इस पर मार्कण्ड बोले, “महाराज मेरी ज्योतिषीय गणना कभी गलत न हो सकती, भले ही कितने प्रलय आ जाए और संसार का अंत हो जाए। वो सब इस महालय के चरणों को नमन करेंगे।”

इसके बाद कहा जाता है कि राजा को जब विश्वास नहीं हुआ तो वह कीलें उखाड़ी। उसमें रक्त का निशान था। यह देखकर ज्यतिषी बोला कि अब इस कील को उखाड़ने के बाद मंदिर की अमरता खत्म हो गई है।

इस्लामी आक्रमण

जब दिल्ली की गद्दी पर अलाउद्दीन खिलजी का शासन था, उस वक्त खिलजी गुजरात जीतने के लिए अपने कमांडर उलुग खान के नेतृत्व में सेना भेजा था। उलुग खान के नेतृत्व में खिलजी की सेना सन 1296 ईस्वी में पाटण पहुँची और मारकाट मचा दिया।

उलुग खान ने इस मंदिर के बड़े हिस्से को ध्वस्त कर दिया और मंदिर के विग्रहों को अपवित्र कर दिया। इतना ही नहीं, उलुग खान ने उस सिद्धपुर और उसके आसपास के इलाके में स्थित सैकड़ों सनातनी, जैन और बौद्ध मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था।

इसके बाद मंदिर के एक बड़े हिस्से पर अलाउद्दीन खिलजी ने एक मस्जिद का निर्माण करा दिया। यह मंदिर जामी मस्जिद के नाम के आजकल जाना जाता है। उसके बाद से यह स्थान विवाद का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।

उलुग खान के हमले के बाद सोलंकी क्षत्रियों ने ध्वस्त मंदिर के हिस्सों का पुनर्निर्माण कराया और विग्रहों को स्थापित किया। हालाँकि, मंदिर में तीन मंजिला शिखर, 1600 खंभे, 12 प्रवेश द्वार, विशाल सभा कक्ष और तीन तरफ बरामदे वाला उसका पुराना स्वरूप नहीं आ पाया।

इसके बाद गुजरात अहमद शाह के कब्जे में चला गया। गुजरात के सुल्तान अहमद शाह ने रुद्न महालय पर 1414-15 ईस्वी में फिर आक्रमण किया है और इसके अधिकांश हिस्से को ध्वस्त कर दिया। आज मंदिर के अवशेष बचे हैं। इतना ही नहीं मंदिर परिसर के बड़े हिस्से पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है।

सुल्तान अहमद शाह के इतिहासकारों ने मिरात-ए-सिकंदरी किताब में मंदिर के मूर्तियों के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने लिखा है कि मंदिर की मूर्तियाँ चीन और खेतान की मूर्तियों से भी भव्य हैं।

पूजा शुरू कराने की कोशिश

जामी मस्जिद बन जाने के कारण इस मंदिर में तब से पूजा-पाठ भी बंद था। हालाँकि, इसी साल अक्टूबर में National Monument Authority के अध्यक्ष और पूर्व सांसद तरुण विजय ने विजयादशमी पर न सिद्धपुर मंदिर में रुद्र महालय पूजा शुरू करने पर जोर दिया था।

इस मंदिर का अब तक कोई डिजिटल रिकॉर्ड नहीं था। तरुण विजय ने रुद्र महालय पर अपनी रिपोर्ट में मंदिर की सभी मूर्तियों को डिजिटल करने के लिए ASI को दिए गए निर्देश का जिक्र किया था। हालाँकि, सरकार की तरफ इसका संरक्षण करने की कोशिश नहीं दिख रही है।

‘मोदी को राष्ट्रपिता कहना उनका अपमान’: जेल से निकलने के बाद संजय राउत ने शुरू की बयानबाजी, ‘सामना’ में बाल ठाकरे की बात को ही बता दिया गैर-ज़रूरी मुद्दा

‘शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)’ के नेता संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपिता कहने वाले बयान पर तंज कसा है। पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे गए एक लेख में राउत ने ऐसा कहना मोदी का अपमान बताया है। हालाँकि इस दौरान उन्होंने महंगाई, गरीबी आदि का भी जिक्र किया। यह बयान उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस द्वारा नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपिता कहने के जवाब में दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सामना में लिखे गए एक लेख में संजय राउत ने भाजपा से सवाल किया है कि क्या वो अमृता फडणवीस के बयान से सहमत हैं। राऊत के मुताबिक भारत गरीबी, आतंकवाद से पीड़ित है और ऐसे समय में मोदी को नया राष्ट्रपिता बताया जा रहा है। राउत ने यह भी सवाल किया कि भाजपा वीर सावरकर को राष्ट्रपिता क्यों नहीं कहती। उन्होंने RSS पर सावरकर विरोधी होने का भी आरोप लगाया।

इस दौरान राउत ने भाजपा पर बलिदानियों का सम्मान न करने का भी आरोप लगाया है। संजय राउत का यह लेख ‘सामना’ के साप्ताहिक कॉलम रोकटोक’ में छपा है। इसी लेख में राऊत ने आगे कहा कि भाजपा ने भारत को नए और पुराने रूप में बाँट दिया है। हालाँकि, इसी लेख में यह स्वीकार किया गया है कि शिवसेना सुप्रीमो दिवंगत बाला साहब ठाकरे गाँधी को राष्ट्रपिता कहे जाने के विरोधी थे। लेकिन राउत ने इस बात को वर्तमान में गैर-जरूरी मुद्दा करार दे दिया।

इसी लेख में संजय राउत ने कॉन्ग्रेस द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवाल को अपनी तरफ से दोहराया है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के योगदान पर सवाल खड़ा किया है। भाजपा द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को दिए जा रहे सम्मान पर भी संजय राउत ने तंज कसा है। उन्होंने इन कार्यों को कॉन्ग्रेस से जुड़े महापुरुषों के प्रतीक चुराने जैसे काम करार दिया।

गौरतलब है कि अमृता फडणवीस ने कुछ समय पहले अपने इंटरव्यू में गाँधी को पुराना और नरेंद्र मोदी को भारत का नया राष्ट्रपिता कहा था। इस बयान का विरोध गाँधी के प्रपौत्र तुषार गाँधी ने भी किया है।

‘अन्ना-सदा चौकन्ना’: टीम इंडिया को हारी बाजी जिताने के बाद अश्विन ट्विटर पर छाए, सचिन-सहवाग सबने सराहा

टीम इंडिया ने बांग्लादेश के विरुद्ध खेली गई 2 मैचों की टेस्ट सीरीज जीत ली है। शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में रविचंद्रन अश्विन ने पहले शानदार गेंदबाजी और फिर बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया को जीत दिलाई है। मुश्किल परिस्थिति में घिरी टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाने के कारण सोशल मीडिया में अश्विन की जमकर तारीफ हो रही है।

दरअसल, दूसरे टेस्ट मैच में बांग्लादेश ने टीम इंडिया को जीत के लिए 145 रन का लक्ष्य रखा था। हालाँकि, टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज पूरी तरह फेल होते नजर आए। केएल राहुल, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली और ऋषभ पंत जैसे बल्लेबाज दहाई के आँकड़े तक भी नहीं पहुँच पाए थे। वास्तव में, पिच में जिस तरह का टर्न था उससे बल्लेबाजी करना आसान नहीं था।

एक समय ऐसा था जब टीम इंडिया ने 74 रन पर 7 विकेट खो दिए। ऐसे में, बांग्लादेश का पलड़ा पूरी तरह भारी नजर आ रहा था। हालाँकि, इसके बाद, बल्लेबाजी करने आए रविचंद्रन अश्विन ने श्रेयस अय्यर के साथ मिलकर न केवल पारी को आगे बढ़ाया बल्कि बांग्लादेश के हाथ से जीत भी छीन ली। श्रेयस अय्यर 29 और रविचंद्रन अश्विन 42 रन बनाकर नाबाद रहे।

इससे पहले, रविचंद्रन अश्विन ने पहली पारी में 4 विकेट और दूसरी पारी में 2 विकेट झटके थे। अश्विन के इस ऑल राउंडर प्रदर्शन को लेकर क्रिकेट के दिग्गजों से लेकर फैंस तक ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। पूर्व भारतीय ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने अश्विन ने साइंटिस्ट बताते हुए ट्वीट किया। सहवाग ने लिखा, “साइंटिस्ट ने कर दिखाया। कैसे भी यह जीत हासिल हुई। अश्विन ने शानदार पारी खेली और श्रेयस अय्यर के साथ बेहतरीन साझेदारी की।”

वहीं, क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने भी अश्विन की तारीफ की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “सीरीज जीतने के लिए टीम इंडिया को बधाई। बांग्लादेश के स्पिनर्स ने एक समय के लिए भारतीय टीम को बुरी स्थिति में डाल दिया था लेकिन श्रेयस अय्यर और रविचंद्रन अश्विन शानदार बल्लेबाजी कर भारतीय टीम को जीत की ओर ले गए।”

वीरेंद्र सहवाग की ही तरह क्रिकट्रैकर ने अश्विन को साइंटिस्ट के रूप में दिखाते हुए ट्वीट किया और लिखा, “शांत रहें और अश्विन पर विश्वास करें। उन्होंने एक बार फिर जीत का फॉर्मूला खोज निकाला।”

क्रिकट्रैकर ने एक अन्य ट्वीट में अश्विन को सुपरमैन के रूप में दिखाते हुए फोटो ट्वीट की है।

पुलकित नामक ट्विटर यूजर ने एक फोटो ट्वीट की। इस फोटो में लिखा है, “इम्पोर्टेन्ट मैच में बाउंड्री मारकर टीम इंडिया को जिताने का घमंड है।” दरअसल, अश्विन ने टी20 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ हुए मैच में भी बाउंड्री के साथ टीम इंडिया को जीत दिलाई थी।

एक अन्य यूजर ने विराट कोहली के डांस वाली वीडियो ट्वीट कर लिखा, “जीता दिया भाई अय्यर और अश्विन ने मैच। अब मेरा मूड…”

ट्विटर यूजर @abdhi_007 ने लिखा, “आर. अश्विन, श्रेयस अय्यर ने तोड़ा बांग्लादेश का ख्वाब। भारत हारते-हारते आखिरकार जीत ही गया।”

@muktak8 नामक ट्विटर यूजर ने टीम इंडिया की जीत के बाद रविचंद्रन अश्विन और श्रेयस अय्यर की फोटो ट्वीट करते हुए लिखा, “अश्विन अन्ना-सदा चौकन्ना”

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