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‘भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार के पास नहीं है 1962, 1965, 1971 के युद्ध के रिकॉर्ड: NAI का खुलासा – मंत्रालयों ने नहीं दिया विवरण, हरित क्रांति के भी डिटेल्स नहीं

भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) की जिम्मेदारी देश से जुड़ी हर महत्वपूर्ण घटनाओं का रिकॉर्ड अपने पास रखने की होती है। हालाँकि, आपको जानकार आश्चर्य होगा कि राष्ट्रीय अभिलेखागार के पास देश में लड़े गए तीन प्रमुख युद्धों और हरित क्रांति से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। यह जानकारी NAI के डायरेक्टर जनरल चंदन सिन्हा (Chandan Sinha) ने दी है।

चंदन सिन्हा ने बताया कि NAI के पास 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के साथ-साथ हरित क्रांति से संबंधित रिकॉर्ड नहीं हैं। उन्होंने बताया कि कई केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों ने इन घटनाओं विवरण और रिकॉर्ड NAI के साथ साझा नहीं किया है। सिन्हा ने शुक्रवार (23 दिसंबर, 2022) को दिल्ली में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग द्वारा सुशासन पर आयोजित कार्यशाला में यह टिप्पणी की।

उल्लेखनीय है कि 1962 का युद्ध चीन के साथ और 1965 का युद्ध पाकिस्तान से साथ लड़ा गया था। वहीं 1971 का ऐतिहासिक युद्ध भी पाकिस्तान के साथ लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना की अपमानजनक हार हुई थी और विश्व पटल पर एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। वहीं 1960 के दशक में नॉर्मन बोरलॉग ने हरित क्रांति की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य प्रति हेक्टेयर अनाजों का उत्पादन बढ़ाना और देश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था।

सिन्हा ने बताया कि NAI केवल भारत सरकार और उसके संगठनों के रिकॉर्ड रखता है और उन्हें संरक्षित करता है। NAI को वर्गीकृत दस्तावेज नहीं दिया जाता है। सिन्हा ने कहा कि कुल 151 मंत्रालय और विभाग में से NAI के पास 36 मंत्रालयों और विभागों सहित केवल 64 एजेंसियों के रिकॉर्ड हैं। सिन्हा ने कहा, “सरकार के रिकॉर्ड का सही तरीके से प्रबंधन करना सुशासन का एक जरूरी पहलू है। कई मंत्रालय हैं जिन्होंने आजादी के बाद से NAI के साथ अपने रिकॉर्ड साझा नहीं किए हैं। इसका मतलब है कि भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में हरित क्रांति का कोई रिकॉर्ड नहीं है, जिसकी हम हमेशा गुणगान करते हैं। साथ ही 1962, 1965 और 1971 के ऐतिहासिक युद्ध के रिकॉर्ड भी नहीं है।”

सिन्हा ने कहा कि ये इस तरह की घटनाएँ हैं, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि लेकिन सरकार ने इन घटनाओं का दस्तावेजीकरण सही ढंग से नहीं किया। उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए बहुत दुःख हो रहा है कि हम अपने इतिहास को सहेज कर नहीं रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक बड़ा प्रश्न हमारे सामने यह है कि क्या हम अपने इतिहास को न सहेज कर देश का नुकसान कर रहे हैं।

वहीं उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने आज़ादी के बाद इस साल की शुरुआत में 426 फ़ाइल भेजी थी। वहीं इस वर्ष 1960 तक की 20 हजार फाइलों को ट्रांसफर किया गया है।। सिन्हा ने साथ ही सुझाव देते हुए बताया कि फाइलों की छाँटने के लिए किसी विशेष अभियान की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि यह कार्य हर तिमाही में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिलेख को किसी भी हाल में नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने पर 1 साल की सजा का प्रावधान है।

ड्राइवर, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता… दरभंगा एयरपोर्ट पर हथियार के साथ पकड़े गए कलामुद्दीन की कई पहचान: भाई का मदरसा, भतीजा ड्रग्स तस्कर

दरभंगा एयरपोर्ट पर 24 दिसंबर 2022 को 42 साल के मोहम्मद कलामुद्दीन को पकड़ा गया। उसके पास से गुलजार सईद और कमालुद्दीन के नाम से भी दस्तावेज मिले हैं। दरभंगा पुलिस जाँच का हवाला देकर खुलकर कुछ भी बताने से इनकार कर रही है। लेकिन कलामुद्दीन से जुड़े जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे लगता है कि वह किसी अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी का महत्वपूर्ण लिंक है।

कलामुद्दीन बिहार के पूर्वी चंपारण जिला के ढाका थाना क्षेत्र के कुशमहवा गाँव का रहने वाला है। यह गाँव कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए कुख्यता चंदनबारा से सटा है। कलामुद्दीन मुंबई की फ्लाइट पकड़ने के लिए दरभंगा एयरपोर्ट आया था। जाँच के दौरान उसके सामान में एक मैगजीन और 9 एमएम के तीन जिंदा कारतूस मिले थे। शुरुआत में उसने हंगामा करते हुए एयरपोर्ट अधिकारियों पर अपने सामान में मैगजीन और कारतूस रखने का आरोप लगाया था। ​बाद में उसे दरभंगा सदर थाने की पुलिस को सौंप दिया गया।

पूछताछ से जुड़े सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया है कि शुरुआत में कलामुद्दीन ने पुलिस पर भी धौंस जमाने की कोशिश की थी। एक कॉन्स्टेबल को परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। वह ऐसे पेश आ रहा था जैसे वह आसानी से छूट जाएगा। बाद में उसने एसयूवी की खरीद के एक विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि हत्या के लिए उसने पिस्टल और गोली खरीदी थी।

कलामुद्दीन के पास से प्रेस कार्ड, एक मानवाधिकार संगठन का आई कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, डेबिट कार्ड और कुछ वकीलों के वि​जटिंग कार्ड बरामद हुए हैं। सूत्रों के अनुसार ये विजटिंग कार्ड मुंबई हाई कोर्ट, लखनऊ, सिद्धार्थनगर और मोतिहारी के वकीलों के हैं। सूत्रों के अनुसार जो ड्राइविंग लाइसेंस है, उस पर तस्वीर कलामुद्दीन की है और नाम गुलजार सईद अंकित है। इस पर पता मुंबई का है।

सूत्रों के अनुसार कलामुद्दीन के पिता की मृत्यु हो चुकी है। वह चार भाई। एक गाँव में रहकर ड्राइवरी करता है। दो भाई मुंबई में रहते हैं। इनमें से एक मदरसा चलाता है, जबकि दूसरे की टेलर शॉप है।

18 दिसंबर 2022 को मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल की बांद्रा यूनिट ने दो लोगों को करीब ₹1 करोड़ मूल्य के ड्रग्स के साथ पकड़ा था। इनकी पहचान मोहम्मद खयामुद्दीन और मोहम्मद मोइनुद्दीन सैयद के तौर पर हुई थी। खयामुद्दीन दरभंगा एयरपोर्ट पर पकड़े गए कलामुद्दीन का भतीजा बताया जा रहा है। उसका पिता मोहम्मद मोइनुद्दीन है जो मुंबई से ठाणे के कलवा में मदरसा चलाता है। खयामुद्दीन पर मुंबई के विभिन्न थानों में हत्या और हत्या के प्रयास सहित करीब 16 मामले दर्ज हैं।

सूत्रों के अनुसार कलामुद्दीन के पास से जो प्रेस आई कार्ड मिला है, वह कौमी दर्पण नाम की एक पत्रिका का है जो मुंबई से प्रकाशित होती है। आई कार्ड पर कलामुद्दीन का नाम कमालुद्दीन नूर लिखा हुआ है। खुद को ड्राइवर बताने वाले कलामुद्दीन ने पूछताछ में कहा है कि वह पार्ट टाइम पत्रकार है। इसके अलावा मानवाधिकार संगठन ‘मानव अधिकार युवा संगठन’ का भी एक आई कार्ड मिला है। यह दिल्ली से रजिस्टर्ड है। इस पर कलामुद्दीन नाम अंकित है। इसमें उसे पूर्वी चंपारण के सिकरहना का ब्लॉक प्रेसीडेंट बताया गया है।

न्यूज एजेंसी एएनआई ने दरभंगा सदर एसडीपीओ अमित कुमार के हवाले से उसके पास से प्रेस आई कार्ड और मानवाधिकार संगठन का आई कार्ड मिलने की पुष्टि की है।

सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया है कि कलामुद्दीन के मोबाइल की जाँच के दौरान मिले उसके व्हाट्सएप संदेशों और तस्वीरों से लगता है कि वह नेपाल सीमा से तस्करी में संलिप्त है। दरभंगा, पटना से उसके लगातार मुंबई हवाई यात्रा करने के भी साक्ष्य मिले हैं। SDPO अमित कुमार ने ऑपइंडिया से बातचीत में इस केस के लेकर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से संपर्क किए जाने की रिपोर्टों का खंडन किया है। उन्होंने बताया कि पुलिस IB के संपर्क में है। बरामद प्रेस कार्ड को लेकर उनका कहना है कि ऐसा लगता है कि कलामुद्दीन ने इसे खुद से बनवाया है। इसकी जाँच चल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कलामुद्दीन ने अपने रिश्तेदार के मुंबई में ड्रग्स मामले में गिरफ्तारी के बारे में बताया है।

गाँव में टेंट लगा कर 100 लोगों को ईसाई बना रहा पादरी गिरफ्तार, धर्मांतरण के लिए बस से 30-40 को दिल्ली ले जा रहा युवक भी धराया

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण रोकने के लिए कड़ा कानून बनाया गया है। इसके बाद भी, धर्मांतरण की घटनाएँ बढ़ती जा रहीं हैं। रामपुर जिले के पटवई और मिलक में क्रिसमस के दौरान धर्मांतरण कराने के आरोप में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया। पटवई में आरोपित पादरी टेंट लगाकर 100 लोगों को धर्मांतरण का शिकार बनाने की कोशिश में था। वहीं, मिलक में आरोपित युवक धर्मांतरण कराने के लिए बस भर कर लोगों को दिल्ली ले जा रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रामपुर जिले के पटवई थाना क्षेत्र अंतर्गत सोहना गाँव में आरोपित पादरी पोलूम मसीह टेंट लगाकर दलित परिवार के करीब 100 लोगों का धर्मांतरण करा रहा था। इस कार्यक्रम की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे और पुलिस को सूचना दी।

इसके बाद, पुलिस ने कार्यक्रम स्थल में दबिश दी। पुलिस को देखते ही धर्म परिवर्तन कराने वाले लोग मौके से भाग गए। हालाँकि, पुलिस ने आरोपित पादरी पोलूम मसीह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने ‘विश्व हिंदू परिषद (VHP)’ के प्रखंड संयोजक राजीव यादव की शिकायत के आधार पर उत्तर प्रदेश धर्मांतरण कानून की धारा 3 और 5 (1) क तहत मामला दर्ज किया है।

हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि आरोपित ईसाई पादरी बहला-फुसलाकर भोले-भाले गरीबों का धर्मांतरण कराने की कोशिश कर रहा था। वहीं, रामपुर एएसपी संसार सिंह ने कहा, “पटवई थानाध्यक्ष हरेंद्र यादव को सूचना मिली थी कि सोहना गाँव में एक पादरीपोलुस मसीह निवासी सिविल लाइंस कुछ लोगों को इकट्ठा कर रहा है। पादरी धर्मांतरण के लिए लोगों को प्रलोभन दे रहा है। इस पर थानाध्यक्ष ने तत्काल कार्रवाई की और पादरी को गिरफ्तार कर लिया।”

वहीं, रामपुर जिले के ही मिलक में शनिवार (24 दिसंबर, 2022) की रात स्थानीय युवक धर्मांतरण कराने के लिए करीब 30-40 लोगों को बस में बैठाकर दिल्ली ले जा रहा था। इसकी जानकारी हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं को हुई तो उन्होंने बस रोककर पूछताछ करते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आरोपित युवक शिवदेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया है।

इमरान अली के घर से 500 Kg गोमांस बरामद, 17 ज़िंदा गायें भी बचाई गईं: 3 घंटे तक चली छापेमारी के बाद 5 गिरफ्तार

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में गोहत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने गाय को मार कर उसका माँस बेचने के आरोप में 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए गोहत्यारों के पास से 500 किलो गोमाँस भी बरामद हुआ है। इस माँस के खरीदार 3 ग्राहकों को भी पुलिस ने दबोच लिया है। इस पुलिस कार्रवाई के दौरान 17 गायों को कटने से भी बचाया गया है। यह जानकारी पुलिस ने शनिवार (24 दिसंबर, 2022) को दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला जमशेदपुर से 30 किलोमीटर दूर कोतवाली थाना क्षेत्र का है। यहाँ हल्दीपोखर गाँव में पुलिस को गोकशी की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने इमरान अली के घर पर छापा मारा। सूचना सही पाई गई और मौके से पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया। इन आरोपितों में शमीम उर्फ़ पप्पू भी शामिल है। पप्पू इमरान अली का साथी बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि अली अपने ही घर में पशुओं को काट कर माँस की बिक्री करता था। पुलिस को देखते ही वो दीवाल फाँद कर भागने लगा। पुलिस ने दौड़ा कर उसे पकड़ लिया। पुलिस ने जीवित गायों को कस्टडी में लेते हुए आरोपितों पर झारखंड गोधन पशु वध निषेध अधिनियम 2005 के तहत FIR दर्ज की है। सभी आरोपितों को कोर्ट में पेश किया गया है जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बरामद हुई जीवित गायों को गौशाला के अधिकारी के सौंप दिया गया है। बताते चलें कि झारखंड में गोवंशीय पशुओं की हत्या और उनके माँस की बिक्री पर बैन है।

बताया गया है कि एक दिन पहले गुरुवार को साकची से गोमाँस के साथ पकड़े गए व्यक्ति ने पुलिस को इमरान अली के ठिकाने की जानकारी दी थी। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक जहाँ ये माँस बरामद हुआ उसे मुस्लिम बस्ती कहा जाता है। यहाँ शुक्रवार (23 दिसंबर 2022) को छापेमारी हुई है। ये कार्रवाई सुबह 6:30 से शुरू हो कर लगभग साढ़े 3 घंटे चलने के बाद दोपहर 11 बजे खत्म हुई। कार्रवाई के दौरान गाय काटने में प्रयोग होने वाला लकड़ी का बोटा और चापड़ भी बरामद किया है। छापेमारी के दौरान कुल 8 लोग हिरासत में लिए गए थे।

‘चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में गिरफ्तार हुए ट्विटर के पूर्व CEO पराग अग्रवाल, एलन मस्क ने FBI से की थी शिकायत’: ‘Vancouver Times’ की रिपोर्ट, ये है सच

सोशल मीडिया पर रविवार (25 दिसंबर, 2022) को ट्विटर के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पराग अग्रवाल के बारे में एक चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि अग्रवाल को चाइल्ड पोर्न मामले में गिरफ्तार किया गया है। रिपोर्ट ‘vancouvertimes.org’ वेबसाइट द्वारा प्रकाशित की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्विटर के नए मालिक और सीईओ एलन मस्क ने पुलिस को जानकारी दी थी कि अग्रवाल के पास चाइल्ड पोर्नोग्राफी है। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि अग्रवाल को उनके घर से एफबीआई ने गिरफ्तार किया है और उनके जमानत पर रिहा होने की उम्मीद है। वेबसाइट ने रिपोर्ट को असल दिखाने के लिए कुछ प्रासंगिक ट्वीट को भी शामिल किया है।

नेटिज़न्स की प्रतिक्रिया

कई नेटिज़न्स ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। ट्विटर यूजर ‘@OhAnji77’ ने एलन मस्क को धन्यवाद दिया और कहा, “इस कचरे का पर्दाफाश करने और इससे छुटकारा पाने के लिए एलन मस्क का धन्यवाद। ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल को चाइल्ड पोर्न के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।”

एक अन्य ट्विटर यूजर ‘@patbrody3’ ने लिखा, “BREAKING: ट्विटर के अंदरूनी सूत्र से टिप के बाद पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल को चाइल्ड पोर्न रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।”

ट्विटर यूजर ‘@ralph78087945’ ने कहा, “ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल को चाइल्ड पोर्नोग्राफी रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। एलन मस्क ने इसकी गुप्त सुचना दी थी। एफबीआई ने अग्रवाल को कैलिफोर्निया में उनके घर से गिरफ्तार किया । उनके वकील ने वैंकूवर टाइम्स से कहा है कि वह अदालत में अपना पक्ष रखने की योजना बना रहे हैं।”

एक अन्य ट्वीटर यूजर ग्रेट अमेरिकल मेल ने कहा, ”ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग को चाइल्ड पोर्न के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।”

‘न्यूज वेबसाइट’ का सच

रिपोर्ट के लिंक और स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, लेकिन हकीकत यह है कि कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। vancouverttimes.org एक व्यंग्य (Satire) वेबसाइट है। रिपोर्ट एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है। वेबसाइट ने रिपोर्ट के निचले भाग में एक डिस्क्लेमर जोड़ा गया है, जिसमें लिखा है, “फैक्ट चेकर्स ने फैक्ट चेक करने में अपना समय बर्बाद किया।” भ्रम को कम करने के लिए लेख को व्यंग्य भाग में जोड़ा गया है और लेख के निचले भाग में एक नोट जोड़ा गया है।”

Source: vancouvertimes.org

vancouverttimes.org के ‘हमारे बारे में (About Us)’ पेज में यह भी लिखा है कि यह एक व्यंग्य वेबसाइट है। इसमें लिखा है, “वेस्ट कोस्ट पर व्यंग्य के लिए vancouverttimes.org सबसे भरोसेमंद स्रोत है। हम रूढ़िवादियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के बारे में व्यंग्यपूर्ण कहानियाँ लिखते हैं। हम किसी भी तरह से मुख्यधारा की मीडिया (सीबीसी, सीटीवी इत्यादि) से संबद्ध नहीं हैं और हमारी कंटेंट, हमारे लेखकों के नाम और एमएसएम के बीच कोई समानता विशुद्ध रूप से एक संयोग है।

Source: vancouvertimes.org

वहीं एक समूह से जुड़े ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने वेबसाइट के व्यंग्य वेबसाइट होने की जानकारी भी दी है। नोट में लिखा है, “ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल को चाइल्ड पोर्न रखने के आरोप में गिरफ्तार नहीं किया गया है। लिंक की गई वेबसाइट vancouverttimes.org को है जो खुद को एक व्यंग्य वेबसाइट है। vancouverttimes.org/about-us/”

यह हाल ही में सामने आया था कि ट्विटर कथित रूप से अपने प्लेटफॉर्म पर बाल पोर्नोग्राफ़ी के बड़े पैमाने पर वितरण की लगातार अनदेखी कर रहा था। एलन मस्क ने कंपनी को संभालने के बाद ही इस संबंध में कंटेंट वितरित होने से रोकने पर गंभीरता से काम किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, ऐसे कंटेंट को साझा करने के लिए उपयोग किए जाने वाले प्रमुख हैशटैग को ट्विटर पर खोज से हटा दिया गया है। इसके अलावा, ट्विटर ने प्लेटफॉर्म पर सीएसई सामग्री की रिपोर्ट करने के लिए एक विशिष्ट विकल्प जोड़ा है।

हमारी जाँच से यही पता चला कि ट्विटर के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल को चाइल्ड पोर्न रखने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने की खबरें फर्जी हैं।

क्रिसमस के दिन छत्तीसगढ़ में 20 परिवारों ने की घर-वापसी, गंगाजल ग्रहण कर ली शपथ: जिन किताबों को पढ़ कर बन गए थे ईसाई, उन्हें पानी में बहाया

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में क्रिसमस (25 दिसंबर, 2022) के दिन सामूहिक ‘घर वापसी’ की खबर है। बताया जा रहा है कि इस दौरान 20 परिवारों ने फिर से हिन्दू धर्म में आस्था जताते हुए गंगाजल ग्रहण किया। इस दौरान घर वापसी करने वालों ने उन पुस्तकों को पानी में विसर्जित किया, जिन्हें पढ़ा कर उन्हें अपने मूल धर्म से दूर किया गया था। बताया जा रहा है कि एक लम्बे समय अंतराल के बाद उस गाँव में क्रिसमस का कोई आयोजन नहीं हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘घर वापसी’ का यह सामूहिक आयोजन ग्राम पंचायत महिमागावड़ी के गाँव मडमनार में हुआ है। यहाँ के जिन लोगों ने घर वापसी की है, उनके नाम मंगलू राम, सोमजी, सीतूराम, मानकु, मानिक, सूखु, सुखदेव, कुमा, सोनरू, सिध्राय, फूल सिंह, बिसरू, खेमू और कोर्राम हैं। इन सभी ने घोषणा की है कि उनके द्वारा अपने मूल धर्म में की जा रही घर वापसी के पीछे कोई दबाव नहीं है। इस घर वापसी की वजह से गाँव में खुशियाँ भी मनाई गईं।

बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में धर्मांतरित हुए सभी लोगों ने हाथों में श्रीफल लिया और आगे से हिन्दू धर्म के अनुसार ही जीवन बसर करने का संकल्प लिया। उन्होंने अपने पूर्व में हुए धर्म-परिवर्तन के दौरान और बाद में मिली किताबों को पानी में प्रवाहित कर दिया। इस आयोजन का गवाह पूरा गाँव बना। समाज के सभी लोगों ने घर वापसी करने वालों का स्वागत किया। बताया जा रहा है कि इस आयोजन के बाद अब गाँव मडमनार में एक भी धर्मांतरित व्यक्ति नहीं बचा है।

इस आयोजन का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में घर वापसी करने वाले व्यक्ति ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद उनका समाज अलग जैसा हो गया था। उन्होंने फिर से हिन्दू धर्म में आ कर ख़ुशी जाहिर की है। वीडियो में ग्रामीणों द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के जयकारे लगाते भी सुना जा सकता है। एक अन्य व्यक्ति के मुताबिक घर वापसी करने वालों ने बाइबिल को बाइज्जत वापस कर दिया है। इस दौरान किसी भी प्रकार का कोई वाद-विवाद न होने की भी जानकारी दी गई है।

मौत से 15 मिनट पहले शीजान खान ने तुनिशा के साथ किया था लंच, धर्मांतरण एंगल से भी जाँच: बोले अभिनेत्री के घर वाले – कई लड़कियों से उसके संबंध

शनिवार (24 दिसंबर, 2022) को अभिनेत्री तुनिशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस मामले में, पुलिस से हुई पूछताछ में शीजान खान ने कहा है कि मौत से 15 मिनट पहले दोनों ने साथ में लंच किया था। साथ ही, दावा किया है कि धर्म और उम्र में अंतर होने के कारण उसने तुनिशा से ब्रेकअप किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की पूछताछ में शीजान खान ने बताया है कि उसने 3 बजे तुनिशा के साथ लंच किया था। शीजान के इस बयान के बाद पुलिस यह जानने में जुटी है कि आखिर दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ कि तुनिशा ने 3:15 पर आत्महत्या कर ली।

वहीं, शीजान ने पुलिस से यह भी कहा है कि तुनिशा ने मौत से कुछ दिन पहले भी आत्महत्या करने की कोशिश की थी। लेकिन, उसने तुनिशा को बचा लिया था। शीजान ने दावा किया है कि उसने इस बारे में तुनिशा कई माँ को बताया था।

यही नहीं, पुलिस की पूछताछ में शीजान ने तुनिशा के साथ अपने संबंधों की बात स्वीकार की है। साथ ही, धर्म और उम्र का हवाला देते हुए ब्रेकअप करने की बात कही। हालाँकि, पुलिस शीजान की इस थ्योरी पर यकीन नहीं कर रही है। पुलिस का मानना है कि शीजान बचने के लिए उम्र और धर्म की दुहाई दे रहा है। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि क्या शीजान ने तुनिशा पर धर्म बदलने के लिए दबाव डाला था। या फिर, यह कहा था कि इस्लाम अपनाने के बाद ही वह उससे शादी करेगा।

शीजान के दावे से उलट मृत एक्ट्रेस तुनिशा शर्मा के घरवालों ने शीजान को धोखेबाज बताया है। तुनिशा कि घरवालों का कहना है कि शीजान के कई लड़कियों के साथ संबंध थे। 6 माह पहले जब दोनों रिलेशन में आए तब तुनिशा खुश थी। ब्रेकअप के कारण तुनिशा तनाव आ गई थी। इस कारण उसने आत्महत्या की है।

फिलहाल पुलिस पुलिस मामले की जाँच करते हुए शीजान मोहम्मद खान के सभी बयानों को वेरिफाई करने में जुटी हुई है। इसके, अलावा पुलिस तुनिशा और शीजान खान के साथ काम कर रहे एक्टर्स और अन्य क्रू मेंबर्स से भी पूछताछ कर रही है। पुलिस ने शीजान को फोन कब्जे में ले लिया है। फोरेंसिक जाँच के बाद पुलिस शीजान और तुनिशा के बीच हुई कॉल और चैट्स की डिटेल के आधार पर आगे की पूछताछ करेगी।

गौरतलब है कि तुनिशा शर्मा की माँ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शीजान खान के खिलाफ धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया था। फिलहाल शीजान खान, 4 दिन की पुलिस कस्टडी में है। तुनिशा की माँ ने कहा था कि शीजान के उकसाने के कारण तुनिशा ने आत्महत्या की है।

‘राहुल गाँधी के पीछे जासूस, भारत जोड़ो यात्रा के बारे में पूछताछ’: AAP के बाद अब कॉन्ग्रेस की ‘IB’ थ्योरी, कहा- मोदी-शाह घबरा गए हैं

कॉन्ग्रेस सांसद जयराम रमेश ने हाल में एक ट्वीट में आरोप लगाया है कि राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में जो लोग शामिल हुए उनसे अब आईबी पूछताछ कर रही है। अपने ट्वीट में उन्होंने ये भी कहा कि इस यात्रा में कुछ ऐसा नहीं था जो छिपाकर किया गया। बस ये जासूसी इसलिए हो रही है क्योंकि इससे मोदी और अमित शाह घबराए हुए हैं।

जयराम रमेश ने 25 दिसंबर को शाम के समय किए अपने ट्वीट में लिखा, “IB ऐसे कई लोगों से पूछताछ कर रही है,जिन्होंने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी के साथ बातचीत की थी। जासूस हर तरह के सवाल पूछ रहे हैं और उन्हें सौंपे गए ज्ञापन की कॉपीज़ भी चाहते हैं। यात्रा के बारे में कुछ भी गोपनीय नहीं है लेकिन स्पष्ट रूप से मोदी और शाह(G2) घबराए हुए हैं।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता का यह ट्वीट आने के बाद लोग उन्हें केजरीवाल से जोड़ रहे हैं। एक यूजर ने उन्हें कहा, “जयराम रमेश दूसरे केजरीवाल बनने की ओर अग्रसर हैं। जोड़ने भारत को चले हैं पर टीआरपी मोदी और शाह के नाम से नहीं मिल रही।”

आईबी का नाम लेने पर केजरीवाल से तुलना केवल इसीलिए है क्योंकि कॉन्ग्रेस से पहले आईबी शब्द का इस्तेमाल उन्होंने ही किया था गुजरात चुनावों के वक्त आप प्रमुख भी एक कागज दिखाकर दावा कर रहे थे कि उनके पास आईबी की रिपोर्ट है जो बताती है कि इस बार इलेक्शन आम आदमी पार्टी जीतने वाली है। अपनी बात को सही दिखाने के लिए उन्होंने कहा था कि इस रिपोर्ट के मुताबिक वो ज्यादा मार्जिन से नहीं जीत रहे लेकिन उनकी जीत हो रही है।

हालाँकि गुजरात चुनावों के नतीजे आने के बाद आम आदमी पार्टी अपनी ही बात से पलटती दिखी थी। जब लोगों ने उनसे आईबी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उसका मतलब इंटेलिजेंस ब्यूरो नहीं, इंटरनल ब्रॉडकास्टिंग विभाग वाला आईबी कहा था। वही विभाग सीटों का आँकलन करती हैं। अगर भाजपा इस आईबी को खुफिया एजेंसी समझ गई तो इसमें AAP की क्या गलती।

केजरीवाल और AAP की इसी करतूत के कारण अब जयराम रमेश द्वारा ट्वीट में किया गया आईबी शब्द का प्रयोग का मखौल उड़ रहा है। इंदौर के भाजपा विधायक ने उन्हें लिखा, “आदरणीय जयराम रमेश जी, आपकी आईबी भी वही वाली है न जिसका जिक्र आपके प्रिय अरविंद केजरीवाल जी ने किया था।”

‘जगह तो अच्छी है लेकिन नंगी मूर्तियाँ कर रहीं खराब’: जब ‘गाजी’ बाबर ने मुगलिया फ़ौज से कहा – जैन प्रतिमाओं को तोड़ डालो: सिर खंडित किया, काट डाले जननांग

भारत में मुग़ल शासन की नींव तैमूर के वंशज बाबर ने रखी थी, ये बताने की ज़रूरत नहीं है। भले ही हमें बाबर के विरुद्ध खानवा के युद्ध में लड़ने वाले राणा सांगा, पृथ्वीराज कछवाहा और मालदेव राठौड़ का नाम न पता हो, लेकिन बाबर का बेटा कौन और उसका बेटा कौन – ये तो हमें इतिहास के अलावा अन्य विषयों के शिक्षकों ने भी रटवाया है। लेकिन, क्या इनमें से किसी ने बताया कि बाबर ने हिन्दू धर्म के अलावा जैन धर्म के स्थलों को भी नुकसान पहुँचाया था।

बाबर के जीवन के दो सबसे युद्ध हैं – पानीपत और खानवा के युद्ध। पानीपत के युद्ध में उसने इब्राहिम लोदी को हरा कर दिल्ली पर कब्ज़ा किया था और खानवा के युद्ध में राजपूतों की संगठित सेना को उसने किसी तरह पीछे हटने को मजबूर कर दिया था, हालाँकि इस युद्ध में अधिकतर समय हिन्दू गठबंधन का पलड़ा भारी रहा था। बाबर को भारत के लोगों से नफरत थी, लेकिन यहाँ की दौलत से बेशुमार प्यार था। ‘काफिरों को हराना’ उसका उद्देश्य था, तभी उसने खानवा की जीत के बाद ‘गाजी (इस्लामी योद्धा)’ की पदवी प्राप्त की थी।

बाबर इसके बाद ग्वालियर भी पहुँचा था, जहाँ की इमारतों ने उसका मन मोह लिया था। हालाँकि, इसके बावजूद उनकी बुराई करते हुए उसने दावा किया था कि अंदर के कमरों में हवा नहीं पहुँचती है और प्रकाश भी नहीं आता था। जिस देश में प्राचीन काल से हर एक कलाकारी सिमेट्री से होती आ रही है, वहाँ की इमारतों को ‘आश्चर्यजनक’ के साथ-साथ उसने बेढंगा और ‘भारी’ करार दिया था। वो सन् 1526 का समय था, जब अफगानिस्तान से आया बाबर ग्वालियर पहुँचा था।

यहीं पर उसने सुन्दर जैन स्थलों को देखा। जैन धर्म में दिगंबर और श्वेतांबर की परंपरा रही है और उनका अलग-अल्लाह संप्रदायों में अलग-अलग महत्व है। एक विदेशी, जो ‘मूर्तिपूजकों को हराने’ आया हो, उसे भला इन सबकी क्या समझ। ग्वालियर में झील किनारे जैन स्थलों के भ्रमण के दौरान जैन प्रतिमाओं को देखने के बाद उसने लिखा था, “पूर्णरूपेण नंगी मूर्तियों की प्रदर्शनी लगी हुई है। उनके प्राइवेट पार्ट्स भी नहीं ढँके हुए हैं।”

बाबर ने खुद अपनी आत्मकथा में कबूल किया है कि उसने इन जैन मूर्तियों को ध्वस्त किए जाने का आदेश जारी किया। उसने लिखा है कि ये कोई बुरी जगह नहीं है, लेकिन मूर्तियाँ यहाँ की ‘खामी’ है। उसने ये भी लिखा था कि एक मूर्ति 20 गज (40 फ़ीट) ऊँची है, लेकिन किसी ने कपड़े नहीं पहन रखे हैं। सन् 1527 में इन मूर्तियों को मुगलिया फ़ौज ने नुकसान पहुँचाया। वो इन्हें पूरी तरह ध्वस्त तो नहीं कर पाए, लेकिन इन्हें खंडित ज़रूर कर दिया।

असल में जिस जैन स्थल की यहाँ बात हो रही है, उन्हें सिद्धांचल की गुफाओं के नाम से जाना जाता है। यहाँ की प्रतिमाएँ अपने आकार और संख्या के कारण पूरे उत्तर भारत में लोकप्रिय थीं, आज भी हैं। किले के पास ही उन्हें खुदाई के डायन प्राप्त किया गया था। पहाड़ी के दक्षिणी छोर पर 22 दिगंबर मूर्तियाँ हैं, साथ ही विभिन्न वर्षों के 6 शिलालेख भी हैं। इनमें आदिनाथ की बैठी हुई प्रतिमा भी है, जिन्हें प्रथम जैन तीर्थकर माना जाता है।

बाबर की मुगलिया फ़ौज ने अधिकतर जैन प्रतिमाओं के सिर खंडित कर दिए तो कइयों के जननांगों को काट कर अलग हटा दिया। कई प्रतिमाओं के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुँचाया गया। हालाँकि, कई वर्षों बाद जैन और हिन्दू समाज ने इन प्रतिमाओं को किसी तरह ठीक किया और टूटे हुए ांगों की मरम्मत कर के उन्हें जोड़ा। उर्वशी घाटी ग्वालियर के किले के भीतर ही स्थित है। यहीं पर सिद्धांचल की गुफाएँ भी स्थित हैं।

ये भी जानने वाली बात है कि सिद्धांचल की गुफाओं का निर्माण 7वीं शताब्दी के राजपूत राजाओं ने करवाया था, लेकिन 15वीं शताब्दी में इसमें अधिकतर कार्य हुए थे। ग्वालियर के किले में 32 जैन मंदिर थे, जिनमें से 11 जैन तीर्थकर को समर्पित हैं। आदिनाथ की जो प्रतिमा है, उसकी ऊँचाई 58 फ़ीट 4 इंच (17.78) मीटर है, बाबर के अनुमान से लगभग डेढ़ गुना ऊँची। इन गुफाओं की नक्काशियाँ जैन कथाओं को भी दर्शाती हैं।

उत्तरी मध्य प्रदेश में स्थित सिद्धांचल की पहाड़ियाँ आज भी जैन धर्म के सबसे बड़े तीर्थों में से एक है। ग्वालियर के किले को तोमर राजवंश ने बनवाया था। अंतिम तोमर राजा विक्रमाजीत की मृत्यु के बाद इस्लामी आक्रांता यहाँ हावी हो गए। मान सिंह तोमर को शास्त्रीय संगीत को आगे बढ़ाने के लिए भी जाना जाता है। उसके बाद ही सन् 1519 में उनके बेटे विक्रमादित्य तोमर गद्दी पर बैठे थे। उनकी ही सभा में महान संगीतकार तानसेन ग्वालियर की शोभा बढ़ाते थे।

असल में बाबर से पहले लोदी साम्राज्य ने भी ग्वालियर पर कब्ज़ा कर लिया था। कई दिनों तक घेरा डालने के बाद विक्रमादित्य को आत्म-समर्पण करना पड़ा था। बाबर ने खुद लिखा है कि विक्रमादित्य और उनके पूर्वज 120 वर्षों से राज़ करते आ रहे थे। असल में ग्वालियर पर कब्ज़ा करने के लिए ही सिकंदर लोदी ने आगरा को राजधानी बना कर कई दिनों तक वहाँ डेरा डाल रखा था। बाबर के बेटे हुमायूँ ने भी ग्वालियर पर कब्ज़ा किया था।

बाबर ने अपने सेनापति मेरे बाँकी को आगरा और अवध का प्रभारी बना कर खुद ग्वालियर विजय के लिए निकला था। ये वही मेरे बाँकी है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर को ध्वस्त कर के वहाँ बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। बाबर ग्वालियर की स्थापत्य कला से मुग्ध हो गया था, लेकिन जैन प्रतिमाओं की बुराई के अलावा किले में भी उसने नुख्श निकाल दिए थे। बाबर ने जो कुछ भवन वगैरह बनवाए, वो सब भी ग्वालियर किला से प्रेरित थे और उसमें उसने भारतीय कारीगरों को ही लगाया था।

ये भी जानने वाली बात है कि बाबर और उसकी फ़ौज उत्तर भारत की गर्मी से खासी परेशान थी। इसके बावजूद वो यहाँ कई बड़े युद्ध जीतने में कामयाब रहा। बाबर ने राणा सांगा से सबसे कठिन युद्ध से पहले शराब पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए सैनिकों को कुरान की शपथ दिला कर उनमें जोश भरा और ‘काफिरों’ के विरुद्ध उकसाया। जब फौजी लौटने की बात करते थे, तब उसने स्पष्ट कहा कि वो लौटने के लिए यहाँ नहीं आया है। हालाँकि, जीवन भर वो काबुल वापस जाने के सपने खुद देखता रहा।

मैंने राहुल गाँधी के लिए ट्वीट किया, आधी रात घर पहुँच गई IB: मैंने इसे आपको बताने का फैसला किया है, क्योंकि मेरा चुप रहना साहस की मंदी होगी

मेरे हॉल में लगी घड़ी का घंटा बोला टन टन टन… उसने बताया रात के 12 बज गए हैं। तारीख 25 दिसंबर की आ गई है। तभी मेरे घर की बेल भी बजी टन टन टन… सोचा कोई भूला-भटका यीशु के अवतरण की बधाई देने आ गया होगा। या फिर कोई सेंटा ही गिफ्ट लेकर अव​तरित हो गया हो। दरवाजा खोला तो सामने हाड़-मांस के दो इंसान थे। कहा हम IB से हैं। आपसे पूछताछ करनी है।

मिथिला के अगले कश्मीर बनने की आशंका को लेकर आए दिन ट्वीट करता रहता हूँ। सोचा मेरी आशंकाओं को लेकर भारत सरकार चिंतित हुई होगी। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा में इनपुट लेने के लिए आईबी वालों को भेज दिया होगा। लेकिन ये क्या उन्होंने तो मेरे सामने सोशल मीडिया के तीन पोस्ट रख दिए। उनके बारे में पूछने लगे। आगे बढ़ने से पहले जान लीजिए कि उन पोस्ट में क्या है?

राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा शुरू होने के बाद से मैंने कई ट्वीट किए हैं। इनमें से जिन तीन ट्वीट के प्रिंट आउट मेरे सामने रखे गए वे अलग-अलग तारीखों को किए थे। एक में मैंने टीशर्ट की कीमत पर उठते सवालों को लेकर राहुल गाँधी का बचाव किया है, लेकिन लगे हाथ इस यात्रा से उठने वाली आशंकाओं के बारे में भी बताया है। दूजे में मैंने कहा है कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि राहुल गाँधी इतने दिन पैदल चलेंगे। इसके लिए मैंने उनकी सराहना की अपील की थी। तीसरा ट्वीट मैंने उन लोगों को संबोधित कर रखा है, जो राहुल गाँधी के नशे में लड़खड़ाने की बात कर रहे थे।

आईबी वाले जानना चाहते थे कि दो-दो रुपए पर ट्वीट करने वाला मेरे जैसा आईटी सेल का मनरेगा मजदूर बीच-बीच में लाइन से हटकर सोशल मीडिया पर कुदाल चलाने का कितना लेता है। उन्होंने इससे अधिक भुगतान का ऑफर दिया। कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए तिहाड़ में बंद कट्टर ईमानदार मंत्री यह भुगतान करेंगे। मैं चकराया। जिस आईबी, ईडी, सीबीआई को सब मोदी का तोता कहते हैं, वह तिहाड़ी मंत्री से क्यों पेमेंट का ऑफर दे रहा। सोचते-सोचते मैं लोकतंत्र की हत्या की मुनादी कर पाता, उससे पहले ही सामने बैठे हाड़-मांस के उन दो इंसानों ने मुझे रोका। कहा आप किस दुविधा में हैं। हम इंटेलीजेंस ब्यूरो वाले आईबी नहीं हैं, इंटरनल ब्रॉडकास्टिंग वाले आईबी हैं। यू नो आईबी। वही जिसका हवाला केजरीवाल ​जी गुजरात इलेक्शन में देते थे।

अचानक से 3 साल की बेटी का लात मुँह पर लगा। आँख खुली। न कोई आईबी थी, न कोई ऑफर। कोई सेंटा भी न आया था। मैं खामखा सपने में सेंटी हुआ पड़ा था। भोर हुई तो सोचा किसी को ये बात न बताऊँगा। फिर याद आया कि रवीश कुमार अक्सर कहते हैं कि साहस की मंदी है। मैं ये न बताऊँगा तो दुनिया को कैसे पता चलेगा कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है। मेरे सपनों से पाठक वंचित रह गए तो यह कैसे प्रमाणित होगा कि कोई तो इस देश में है जो मीडिया प्रहरी का काम कर रहा है। कोई तो है जिसे इस देश की सरकार नहीं झुका पा रही है। कोई तो है जिसका मैग्सेसे पर दावा बनता है। उस पर जयराम रमेश का ट्वीट भी बताता है कि साजिश चल तो रही ही है। भले सपनों में।