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‘कोर्ट ब्लास्ट करने जा रहे हैं, बचा सकते हो तो बचा लो’: ज्ञानवापी के शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर सुनवाई से पहले CM ऑफिस में धमकी, 1 हिरासत में

उत्तर प्रदेश पुलिस ने वाराणसी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह धमकी लखनऊ के पाँच कालिदास मार्ग पर मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद एक ड्यूटी स्टाफ को फोन पर दी गई थी। इसी धमकी का दूसरा कॉल वाराणसी के SP देहात को आया था। जाँच में पता चला कि यह फोन वाराणसी के फुलवरिया से किया गया था। धमकी शुक्रवार (30 सितम्बर 2022) को आई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धमकी के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से वाराणसी पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने धमकी को गंभीरता से लेते फ़ौरन ही धमकी देने वाले की तलाश शुरू कर दी। पड़ताल के बाद पुलिस ने एक सब्ज़ी विक्रेता को हिरासत में लिया गया। सब्ज़ी विक्रेता का कहना है कि किसी ने उनका फोन चुरा कर ये हरकत की है। फ़िलहाल पुलिस सब्ज़ी विक्रेता से पूछताछ कर रही है।

टाइम्स नाऊ के पत्रकार के अनुसार, फोन कॉल पर कहा गया था कोर्ट ब्लास्ट करने जा रहे हैं, बचा सकते हो तो बचा लो।

मालूम हो कि यह धमकी वाराणसी कोर्ट द्वारा ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर फैसले से पहले दी गई है। गौरतलब है कि 29 सिंतबर 2022 को ज्ञानवापी-माँ श्रृंगार गौरी केस की सुनवाई के दौरान शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराने का मुद्दा उठाया गया था। हिन्दू पक्ष ने शिवलिंग नुमा आकृति वाला पत्थर कब का है? इसे जानने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जाँच और वैज्ञानिक जाँच की माँग की है। हिन्दू पक्ष की इस माँग पर न्यायालय ने अगली तारीख 7 अक्टूबर तय की थी।

महाराष्ट्र: ठाकरे गुट का 3000+ शिवसैनिकों ने छोड़ा हाथ, सब एकनाथ शिंदे के साथ आए

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) आजकल मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनकी पार्टी शिवसेना (Shiv Sena) के दो टुकड़े होने के बाद अब नेता के साथ-साथ कार्यकर्ता भी एक-एक कर उनका साथ छोड़ रहे हैं। वर्ली, मुंबई के 3000 से अधिक शिवसेना के कार्यकर्ता रविवार (2 अक्टूबर 2022) को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए।

यह ठाकरे परिवार के लिए इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि जहाँ के लोगों ने पार्टी छोड़कर शिंदे गुट को ज्वॉइन किया है, वह क्षेत्र आदित्य ठाकरे का है। उद्धव ठाकरे के बेटे और पूर्व सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे मुंबई के वर्ली विधानसभा क्षेत्र से ही विधायक हैं।

पार्टी सदस्यों के एक-एक करके साथ छोड़ते जाने के बाद शिवसेना पर उद्धव ठाकरे की पकड़ और दावा, दोनों कमजोर होता जा रहा है। बता दें कि एकनाथ शिंदे गुट कहता रहा है कि असली शिवसेना उनकी गुट है। वहीं, उद्धव ठाकरे अपने गुट को लेकर ऐसा दावा करते हैं।

इससे पहले 27 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एकनाथ शिंदे समूह के असली शिवसेना होने के दावे पर फैसला लेने से रोकने से इनकार कर दिया था। दिन भर की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने ठाकरे गुट की ओर से दायर अर्जी को खारिज कर दिया था।

जस्टिस एम.आर. शाह, कृष्णा मुरारी, हिमा कोहली और पी.एस. नरसिम्हा वाली बेंच ने कहा कि पार्टी के भीतर विवाद और पार्टी के ‘धनुष और तीर’ पर चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी। कोर्ट ने कहा था, “हम निर्देश देते हैं कि भारत के चुनाव आयोग के समक्ष कार्यवाही पर कोई रोक नहीं होगी।”

बता दें कि जून में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार से विधायक एकनाथ शिंदे शिवसेना के 39 अन्य बागी विधायकों के साथ अलग हो गए थे। वे NCP और कॉन्ग्रेस के साथ शिवसेना के गठबंधन के खिलाफ थे।

एकनाथ शिंदे और उनके साथ विधायकों बागी रवैए के बाद राज्य की उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी। उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई है।

उसके बाद से ही ठाकरे और शिंदे गुट शिवसेना पर अपना दावा कर रहे हैं। शिंदे का कहना है कि उनका गुट ही असली शिवसेना है। मामला कोर्ट तक पहुँच गया है कि पार्टी की वार्षिक दशहरा रैली की मेजबानी कौन करेगा। दोनों गुटों ने रैली आयोजित करने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को अलग-अलग पत्र दिया था।

इसके बाद बृहन्मुंबई नगर निगम ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए दोनों गुटों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ठाकरे गुट बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँच गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्धव ठाकरे गुट को 2 अक्टूबर से 6 अक्टूबर के बीच रैली करने की अनुमति दी है।

पंजाब: सिद्धू मूसेवाला मर्डर में गिरफ्तार मुख्य गैंगस्टर पुलिस हिरासत से चौथी बार फरार, हड़कंप मचा

पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्‍या के मामले में गिरफ्तार आरोपित दीपक टीनू के फरार होने की खबर सामने आई है। सिद्धू मूसेवाला को गोली मारने वाला शूटर दीपक टीनू पंजाब पुलिस की हिरासत से फरार हुआ है। जिसके बाद से पंजाब पुलिस में हड़कंप मच हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शूटर दीपक टीनू गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गैंग का करीबी गुर्गा है। उसका नाम उस चार्जशीट में भी था जिसमें मूसेवाला की हत्या में शामिल 15 शूटर, मास्टरमाइंड और अन्य का नाम शामिल थे। दीपक टीनू उस वक्त फरार हुआ है जब मानसा का सीआईए स्टाफ उसे रात के करीब 11 बजे अपने निजी वाहन से कपूरथला जेल से मानसा लेकर जा रहा था।

बता दें, दीपक टीनू को दिल्ली पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर पंजाब लेकर आई थी। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पहला मौका नहीं है जब वह पुलिस की गिरफ्त से फरार हुआ हो। अब तक वह कुल 4 बार पुलिस के हाथ लगने के बाद फरार हो चुका है। इससे पहले दीपक साल 2017 में अंबाला सेंट्रल जेल में सलाखों के पीछे था। तब, वह एक पुलिस अधिकारी की आँखों में काली मिर्च का स्प्रे कर फरार हो गया था।

दीपक टीनू के फरार होने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। मसलन, सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपित को क्या बिना किसी सुरक्षा के लिए ले जाया जा रहा था, यदि हाँ, तो क्यों? यदि सुरक्षा थी तो पुलिस क्या कर रही थी वह फरार कैसे हुआ? साथ ही सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसे निजी वाहन से क्यों ले जाया जा रहा था?

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मानसा पुलिस ने दीपक टीनू के फरार होने की पुष्टि की है। मानसा पुलिस ने बताया है कि आज सुबह गैंगस्‍टर लॉरेंस विश्नोई के करीबी दीपक टीनू को सीआइए स्‍टाफ द्वारा निजी वाहन से कपूरथला जेल से रिमांड पर मानसा लाया जा रहा था। इसी दौरान दीपक टीनू फरार हो गया। सिद्धू मूसेवाला हत्‍याकांड से उसके कनेक्‍शन के बारे में जाँच हो रही थी।

बता दें, सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को पंजाब के मानसा जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में मूसेवाला के साथ कार में बैठा हुआ एक दोस्त और चचेरा भाई भी घायल हुआ था।

‘मार दिया है, लाश उठा लो’ : दिल्ली में सरेआम फैजान, बिलाल और आलम ने मनीष को 60 बार चाकू घोंपा, लोग देखते रहे; CCTV में पूरी वारदात कैद

देश की राजधानी दिल्ली में मनीष नाम के एक हिन्दू युवक की हत्या कर दी गई है। इस हत्या का आरोप फैजान, बिलाल और आलम नाम के युवकों पर लगा है। बताया जा रहा है कि पुराने केस को वापस न लेने के चलते इस घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फ़ैल गया है। मामला शनिवार (1 अक्टूबर 2022) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दिल्ली नार्थ ईस्ट इलाके के सुंदर नगरी की है। यहाँ 25 साल के मनीष की हत्या चाकुओं से गोद कर हुई है। मनीष पर चाकुओं के 60 वार किए गए हैं। आरोपित और मृतक एक ही क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। मनीष के परिजनों के अनुसार 1 साल पहले मनीष का मोबाईल छीन कर उसकी गर्दन और पेट पर चाकुओं से हमला किया गया था। इस घटना की मनीष ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी जिसके बाद कासिम और मोहसिन को गिरफ्तार किया गया था।

घटना के बाद जेल में बंद कासिम और मोहसिन मनीष और उनके घर वालों पर केस वापसी का दबाव बना रहे थे। इस दौरान मनीष के परिजनों को धमकियाँ भी दी जा रही थीं। ऐसी जानकारी है कि मनीष ने इन धमकियों की शिकायत कोर्ट में की थी। साथ ही धमकियों से डरे बिना 28 सितम्बर 2022 को आरोपितों के विरुद्ध गवाही दी थी।

गवाही देने के ठीक 3 दिन बाद कथिततौर पर इसी बात से नाराज हो कर मनीष की हत्या कर दी गई। हत्या का फुटेज CCTV में दर्ज हो गया। इस फुटेज में दिख रहे हमलावर फैज़ान, बिलाल और आलम बताए जा रहे हैं। घटना के समय आस-पास लोग भी मौजूद दिख रहे हैं जिसमें से किसी ने भी मनीष को बचाने की हिम्मत नहीं की। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद आरोपितों ने कहा, “मार दिया है, लाश उठा लो।” पुलिस का कहना है कि मनीष को पहले धमकी देने वाले अन्य आरोपितों की भी तलाश की जा रही है।

‘हेलो की जगह अब से बोलें वंदे मातरम’: महाराष्ट्र में शिंदे सरकार ने जारी किया सर्कुलर, सरकारी अधिकारियों और स्कूल-कॉलेजों पर लागू होगा

महाराष्ट्र (Maharashtra) की एकनाथ शिंदे की सरकार (Eknath Shinde Government) ने राज्य में ‘हेलो’ की जगह कर्मचारियों को ‘वंदे मातरम’ कहने का सरकारी संकल्प (Government Resolution) जारी किया है। इससे पहले अगस्त में राज्य के संस्कृति मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने सरकारी कर्मचारियों को फोन कॉल पर ‘हेलो’ के बजाय ‘वंदे मातरम’ बोलने के लिए कहा था।

सरकार के इस आदेश के बाद अब सरकारी कर्मचारी और अधिकारी मोबाइल या लैंड लाइन पर फोन करते या रिसीव करते वक्त सामने वाले व्यक्ति को हेलो की जगह वंदे मातरम से संबोधित करेंगे। इसके साथ ही मिलने वालों भी इसी शब्द से संबोधन करेंगे।

इससे संबंधित सर्कुलर महाराष्ट्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी किया गया है। सर्कुलर का यह आदेश सरकारी, अर्ध-सरकारी, स्थानीय नागरिक निकायों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठानों पर लागू होता है।

राज्य सरकार के जीआर में कहा गया है कि अधिकारी मिलने आने वाले लोगों से भी वंदे मातरम कहकर अभिवादन करेंगे। इसके लिए जागरूकता पैदा करने की भी बात कही गई है। जीआर में ‘हेलो’ को पश्चिमी संस्कृति की नकल बताया गया है और कहा गया है कि यह ‘बिना किसी विशिष्ट अर्थ का अभिवादन है और इससे कोई स्नेह नहीं दिखता।’

सर्कुलर में आगे कहा गया है, “भारतीय स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर राज्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। उसी को चिह्नित करने के लिए माननीय मंत्री (सांस्कृतिक मामलों) ने सभी से आगंतुकों या साथी अधिकारियों के साथ बैठक शुरू करने की अपील की है और सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों को ‘हेलो’ के बजाय ‘वंदे मातरम’ की बधाई दी जाती है।”

बता दें राज्य में उद्धव ठाकरे की सरकार बदलने के तुरंत बाद एकनाथ शिंदे की सरकार बनी थी। इस सरकार के शपथ ग्रहण के बाद महाराष्ट्र के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने यह प्रस्ताव पेश किया था। हालाँकि बाद में उन्होंने कहा था कि इसकी जगह पर राष्ट्रवाद को दर्शाने वाले किसी भी शब्द का प्रयोग किया जा सकता है।

सरकार के इस आदेश का समाजवादी पार्टी और AIMIM ने निंदा की है। सपा ने कहा कि यह भाजपा द्वारा लोगों को विभाजित करने का एक और प्रयास है। सपा ने सीएम एकनाथ शिंदे पर भाजपा के दबाव में आने का आरोप लगाया गया है। सपा नेता अबू आज़मी ने कहा कि दिवंगत बालासाहेब ठाकरे फोन पर जवाब देते समय हमेशा ‘जय महाराष्ट्र’ कहते थे, न कि ‘वंदे मातरम’।

वहीं, AIMIM के नेता वारिस पठान ने कहा, “बीजेपी के पास मुद्दे नहीं बचे हैं। वे कभी शहर के नाम बदलने की बात करते हैं तो कभी कुछ। इनसे महंगाई, बेरोजगारी पर सवाल पूछ दो तो चीते से भी तेज भाग जाते है। वंदे मातरम बोल दिया तो क्या बेरोजगारी कम हो जाएगी, महंगाई कम हो जाएगी। इनका काम ध्यान भटकाना है।”

RSS में घुसपैठ चाहता था PFI, 50 कट्टरपंथियों को दे रहा था ट्रेनिंग: लखनऊ से फैजान, सूफियान, रेहान की गिरफ्तारी के बाद खुलासा

पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) के ठिकानों पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा छापेमारी के बाद हिरासत में लिए गए तमाम संदिग्धों से नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इन्हीं में से एक खुलासा यह भी है कि PFI राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) में भी अपनी घुसपैठ करना चाहता था। इस साजिश को अंजाम देने के लिए PFI लगभग 50 लोगों को ट्रेनिंग भी दे रहा था। इस साजिश का मकसद संघ की हर गतिविधि पर नजर रखना और बड़े नेताओं की जानकारियाँ जुटाना था।

दैनिक जागरण के मुताबिक संघ में घुसपैठ के लिए करवाई जा रही ट्रेनिंग में हिन्दू देवी-देवताओं के बारे में जानकारी दी जा रही थी। इसी दस्ते को संघ के क्रियाकलापों और RSS से जुड़े लोगों के तौर तरीके भी सिखाए जा रहे थे।

मंगलवार (27 सितम्बर 2022 ) को स्पेशल टॉस्क फ़ोर्स (STF) ने छापेमारी के बाद लखनऊ के बख्शी का तालाब के पास मौजूद अचरामऊ से मोहम्मद फैज़ान, मोहम्मद सूफियान और रेहान को गिरफ्तार किया था। संघ के खिलाफ साजिश के सबूत इन आरोपितों के वाट्सएप और लैपटाप की जाँच के बाद मिले हैं।

आरोपितों के पास से पुलिस ने संघ से जुडी कुछ किताबें भी बरामद की हैं। इन सभी का मकसद संघ की शाखाओं में जा कर वहाँ होने वाली बातों को इस्लामी मुल्कों और अपने आकाओं को भेजना माना जा रहा है।

बताया ये भी जा रहा है कि ये सभी आरोपित अपने इलाके अचरामऊ और आस-पास PFI से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना चाहते थे। इन सभी का सरगना प्रधान अरशद बताया जा रहा है जो फिलहाल फरार चल रहा है। पुलिस की टीमें अरशद की तलाश में लगातार छापेमारी कर रहीं हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले लखनऊ से गिरफ्तार इन्हीं आरोपितों ने पुलिस के आगे कबूला था कि उनकी साजिश देश भर में बम ब्लास्ट की थी। इसके लिए दीपवाली का दिन चुना गया था जिसमें मंदिर और हिन्दू बहुल इलाके निशाने पर थे। इसी के साथ आरोपितों के निशाने पर कई हिन्दूवादी नेता भी बताए गए थे। इस साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपितों को बारूद बनाने और उसे ब्लास्ट करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही थी।

‘अपनी इज्जत और दीन देखो तुम’: हिंदू त्योहारों में घुसने के लिए मुस्लिमों को उकसा रही थीं आरफा खानम, ट्वीट देख कट्टरपंथियों ने लताड़ा

प्रोपेगेंडा पोर्ट ‘द वायर’ की स्तंभकार और हिंदू विरोधी आरफ़ा खानम शेरवानी फिर दुखी हैं। इस बार उनके दुख का कारण है गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं खासकर मुस्लिमों के प्रवेश पर पाबंदी। दरअसल, बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों ने की जगहों पर गरबा के आयोजकों को पंडालों में जाने वालों की पहचान जाँच करने के लिए कहा है।

इसको लेकर आरफा ने एक ट्वीट किया। अपने ट्वीट में आरफा खानम शेरवानी ने लिखा, “हिंदुत्व फासीवादी उन मुस्लिमों का मजाक उड़ा रहे हैं, हतोत्साहित कर रहे हैं, धमका रहे हैं और यहाँ तक ​​कि उनकी पिटाई कर रहे हैं, जो हिंदू त्योहारों के उत्सव में भाग लेना चाहते हैं। वे भारत और उसकी मिलीजुली संस्कृति का जो कुछ बचा हुआ है, उसे नष्ट कर रहे हैं।”

दरअसल, मूर्ति पूजा इस्लाम में पाप है और नवरात्रि के दौरान गरबा कार्यक्रम देवी-देवताओं की पूजा का एक रूप है। वहीं, कई लोगों ने धार्मिक त्योहार को सांस्कृतिक रूप देने की कोशिश की है, जबकि तथ्य यह है कि नवरात्रि एक हिंदू त्योहार है, जो पूरे भारत में और हिंदुओं द्वारा मनाया जाता है।

हालाँकि, आरफ़ा के ट्वीट ने मुस्लिमों के एक बड़े वर्ग को नाराज कर दिया है, जो मुस्लिमों के गरबा और नवरात्रि उत्सव में भाग लेने के से खुश नहीं हैं। AIMPLB की सदस्य और शरिया कमेटी, हैदराबाद की अध्यक्ष डॉक्टर अस्मा ज़ेहरा तैयबा ने कहा, “सूरा काफिरून स्पष्ट रूप से कहता है ‘लकुम दिनुकम वालिया दीन’, तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन और हमारे लिए हमारा दीन। आप उनके धार्मिक उत्सव में क्यों नाच रहे हैं?”

आरफा को जवाब देेते हुए ट्विटर यूजर मिसराई अली ने कहा, “जब हिंदू त्योहार हिंदुत्व गौरव और मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा कारण बन गए हैं तो आपको ऐसी जगहों पर भाग लेने के लिए मुस्लिमों की और अधिक आलोचना करनी चाहिए।”

इसको लेकर ट्विटर यूजर अहादुन ने कहा, “कम से कम स्वाभिमान के लिए आरफा जैसे लोगों को दूसरे धर्मों के त्योहारों में भाग लेना बंद कर देना चाहिए।”

ट्विटर यूजर शाहिद रजा ने कहा, “मुस्लिम उनके त्योहारों में क्यों जाना चाहते हैं? मुस्लिमों के लिए अन्य धर्मों के अनुष्ठानों में शामिल होने की अनुमति नहीं है। हाल ही में बजरंग दल के कुछ लोगों ने गरबा में भाग लेने/देखने के लिए मुस्लिम पुरुषों की पिटाई की। अगर मुस्लिम उनके त्योहार नहीं पसंद करते तो यह घटना नहीं होती।”

बता दें कि गरबा पंडालों में जिन मुस्लिमों की पिटाई की बात कही जा रही है, वे सभी नकली हिंदू नामों से गरबा स्थल में प्रवेश किया था। इसको लेकर एक अन्य ट्विटर यूजर हमद ने कहा, “माफ करना आरफा, लेकिन मुस्लिमों को हिंदू त्योहारों में शामिल होने की क्या जरूरत है। एक सच्चे मुस्लिम को इससे दूर रहना चाहिए और कम से कम इसकी परवाह करनी चाहिए, क्योंकि तेरे लिए तेरा धर्म है और मेरे लिए मेरा दीन। (सूरत अल-काफिरून)।”

ट्विटर यूजर अबुबकर शेख ने लिखा, “किसी को भी पीटना उचित नहीं है, लेकिन आप दूसरे धर्म के त्योहार में क्यों भाग लेना चाहते हैं। आपको उनकी आस्था का सम्मान करना चाहिए। आपको इसमें भाग लेने की आवश्यकता क्यों है? क्या कोई आपको एक साथ स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए रोक रहा है?”

ट्विटर यूजर मुस्लिमपेन ने कहा, “हम हिंदू फेस्टिवल में हिस्सा नहीं लेना चाहते, क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता। इसलिए हमारी तरफ से चीजें बेचना बंद कर दें। बस इतना कहो कि तुम जाना चाहती हो और वे तुम्हारा मजाक उड़ा रहे हैं।”

ट्विटर यूजर शिफा सीकर ने कहा, “आपकी इस मानसिकता पर शर्म आती है, जहाँ आप संस्कृति की आड़ में इस गैर-इस्लामिक और पाप वाले कृत्य का बचाव करना चाहती हैं। मुस्लिम उस #ईमान की अंतिम समय तक रक्षा करते हैं, जो केवल यही एक चीज आपको अल्लाह के प्रकोप का सामना करने से बचा सकती है।”

ट्विटर यूजर Talktoamuslim ने कहा, “समझदार मुसलमान उन जगहों पर क्यों जाएँगे, जहाँ उनका स्वागत नहीं है? वर्तमान बहुसंख्यकवादी व्यवस्था में उनके उत्सव में शामिल होने पर जोर देना मूर्खता है।”

ट्विटर यूजर मोहम्मद सलमान ने आरफा की हिंदू त्योहार में शामिल होने की इच्छा की निंदा की और सवाल किया कि वह अन्य धर्मों के उत्सवों में क्यों शामिल होना चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति कई इज्जत और उसका दीन (धर्म) अपने हाथों में होता है।

बता दें कि ऊपर में कुछ मुस्लिम यूजर जिस सूरा अल काफिरून का हवाला देकर मुस्लिमों को दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेने से मना कर रहे हैं, वो कुरान के 109वें अध्याय का नाम है। इसमें ‘अविश्वासियों’ (काफिरों) को लेकर कहा गया है, जिसमें पैगंबर मुहम्मद ने मूर्तिपूजा पर समझौता करने से इनकार कर दिया था।

आरफा हिंदुओं के खिलाफ कर चुकी विष-वमन

आरफा खानम शेरवानी अतीत में हिंदू धर्म और संस्कृति के खिलाफ जहर उगलती रही हैं। अब गरबा को सांस्कृतिक बता रही हैं। बहुत समय पहले, दिसंबर 2018 में आरफ़ा ने ‘भारत माता की जय’ के नारे को सांप्रदायिक कहा था।

अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था, “हाँ, भारत माता की जय सांप्रदायिक है, क्योंकि यह मातृभूमि को एक देवी होने के एक निश्चित पौराणिक विचार को मजबूर करता है। यह आपके विश्वास और धार्मिक दर्शन के अनुकूल हो सकता है, लेकिन एकेश्वरवाद- ‘एक ईश्वर में विश्वास करने वाले’ लोगों के लिए नहीं। यह एक बहुसंख्यकवादी नारा है।”

आरफा ने एक देश को एक ‘देवी’ के रूप में ‘जबरदस्ती’ चित्रण पर अपना गुस्सा दिखाया था। दिलचस्प बात यह है कि गरबा नवरात्रि उत्सव के दौरान माँ दुर्गा की पूजा का एक रूप है। माँ दुर्गा एक हिंदू देवी हैं। एक ओर शेरवानी इस बात से नाराज थीं कि मुस्लिमों को एक देवता की पूजा करने के लिए कहा गया और दूसरी ओर वह चाहती हैं कि हिंदू देवी पूजा के उत्सव में मुस्लिमों को आने दें। शेरवानी जिस तरह से ‘दोनों हाथों में लड्डू’ रखना चाहती हैं, वह हैरान करने वाला है।

मंदिर से लौट रहा परिवार, ट्रैक्टर-ट्रॉली हादसे का शिकार: कानपुर में 27 लोगों की मौत, 10 घायल; CM योगी ने UP वालों से की जरूरी अपील

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के तालाब में पलटने से उसमें सवार 27 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। सभी लोग घर के एक नवजात बच्चे के मुंडन संस्कार से वापस लौट रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर दुःख जताया है। दुर्घटना (शनिवार) 1 अक्टूबर 2022 को घटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना घाटमपुर इलाके की है। यहाँ के साढ़ थानाक्षेत्र में कोरथा गाँव के लगभग 40 निवासी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार हो कर वहाँ से कुछ दूरी पर स्थित चंद्रिका देवी मंदिर में मुंडन संस्कार में गए थे।

वापसी के दौरान गम्भीरपुर गाँव के पास अचानक ही ट्रैक्टर और ट्रॉली अनियंत्रित हो कर सड़क के किनारे बनी खाई में गिर गई। खाई में बरसात का पानी भरा हुआ था जिसमें ट्रॉली में मौजूद सवार ऊपर से दब गए। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना के दौरान शाम का समय था। इसके चलते बचाव कार्य में थोड़ी बाधा आई। पुलिस और स्थानीय लोगों ने तत्काल घटनास्थल पर पहुँच कर लोगों को निकालने का प्रयास शुरू किया। इस दौरान लगभग 10 गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल पहुँचाया गया जिनका इलाज चल रहा है।

पुलिस के मुताबिक राहत और बचाव कार्यों के लिए SDRF और PAC की टीमों को लगाया गया है। इसी के साथ घायलों का इलाज सीनियर अधिकारियों की देखरेख में करवाया जा रहा है।

इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुःख जताया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मृतकों के परिवार को 2-2 लाख रुपए और घायलों के लिए 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है।

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रैकटर ट्रॉली का प्रयोग केवल कृषि कार्यों में करने की सलाह देते हुए जीवन को अमूल्य बताया है।

गुजरात में भीड़ के बीच CM केजरीवाल पर बोतल से हमला, पूरी घटना Video में कैद: नेटीजन्स बोले- कहीं AAP कार्यकर्ता ने ही तो नहीं फेंकी

गुजरात में चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी लगातार कोशिशों में है कि वहाँ की जनता का दिल जीत सके। इसी क्रम में वह नवरात्रि में आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों में भी आ जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल भी कल (1 अक्टूबर) शनिवार को राजकोट के खोडलधाम गरबा में शामिल होने गए थे। लेकिन वहाँ उनके ऊपर बोतल फेंक दी गई।

घटना की वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में दिखता है कि अरविंद केजरीवाल अपने समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के साथ गरबा कार्यक्रम में आगे बढ़ रहे होते हैं कि तभी अचानक उनके ऊपर बोतल फेंकी जाती है। ये बोतल केजरीवाल से थोड़ी दूर गिरती है इसलिए दिल्ली सीएम के चेहरे के भाव वैसे ही रहते हैं।

कुछ देर बाद नजर आता है कि वो बोतल गिरने के बाद सीएम केजरीवाल के पैर के पास आ जाती है और जब वो आगे बढ़ते हैं तो वो उनका पैर भी उसे लगता है।

अभी तक की खबरों के मुताबिक, सीएम केजरीवाल पर बोतल फेंकने वाले अज्ञात शख्स की पहचान नहीं हो सकी है। न ही इस मामले में आम आदमी पार्टी द्वारा कोई शिकायत दर्ज करवाई गई है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग अपने आप ही अंदाजा लग रहे हैं कि कहीं बोतल फेंकने वाला कोई आप कार्यकर्ता ही न हो।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पंजाब सीएम भगवंत मान के साथ गुजरात के दो दिवसीय दौरे पर थे। वहाँ उन्होंने रैलियाँ करके जनता को वादा किया कि अगर उनकी सरकार आई तो वो हर गाँव में सरकारी स्कूल खोलेंगे और कच्छ के हर कोने तक नर्मदा का पानी पहुँचाएँगे। इसके अलावा सत्ता में AAP को लाने के लिए सरकारी अस्पताल मुफ्त इलाज का सपना भी केजरीवाल ने गुजरात की जनता को दिखाया हुआ है।

‘मुझे पहुँचने में देर हुई, मैं माफी माँगता हूँ’: राजस्थान में जनता के सामने घुटनों पर बैठे PM मोदी, देर रात लाउडस्पीकर भी नहीं चलवाया; लोग बोले- ‘हमें ऐसे प्रधानमंत्री पर गर्व है’

विधानसभा चुनाव से पूर्व गुजरात (Gujarat) की दो दिवसीय यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शुक्रवार (30 सितंबर 2022) को अंबाजी में दर्शन करने के बाद राजस्थान के आबू रोड में कुछ देर के लिए लोगों को संबोधित किया। इस दौरान रात अधिक हो जाने के कारण उन्होंने लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने से मना कर दिया।

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी को शुक्रवार को रात 8:30 बजे आबू रोड पहुँचना था, लेकिन देर होने के कारण वो 10:15 बजे पहुँचे। रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक होने के कारण वे लाउडस्पीकर नहीं किए। इस दौरान उन्होंने कहा, “मुझे पहुँचने में देर हो गई। रात के 10 बज गए हैं। मेरी आत्मा कहती है कि मुझे नियम-कानून का पालन करना चाहिए। इसलिए मैं आप सभी से क्षमा माँगता हूँ।”

बिना माइक के ही उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा, “मैं विश्वास दिलाता हूँ कि मैं दोबारा यहाँ आऊँगा और आपके प्यार को ब्याज समेत चुकता करूँगा।” इसके बाद लगभग 8 मिनट रूकने के बाद वे वहाँ से लौट गए। इस दौरान पूरा पंडाल ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूँजता रहा।

इस दौरान प्रधानमंत्री ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए और घुटनों के बल बैठ गए। फिर उन्होंने हाथ जोड़कर माफी माँगी और मंच पर ही नतमस्तक हो गए। पीएम मोदी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

इस आदिवासी इलाके में जहाँ से भी प्रधानमंत्री गुजरे, लोगों का हुजूम खड़ा रहा। प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के प्रमुख शक्ति पीठ अंबाजी धाम पहुँचे थे। दर्शन के बाद वे पहाड़ी पर बने गब्बर तीर्थ पहुँचे और वहाँ महाआरती में शामिल हुए। वहाँ से वे आबू रोड के निकले।

गुजरात यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने वहाँ कई विकास परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में आबू रोड से गुजरात के तारंगा हिल तक नया रेलवे ट्रैक का निर्माण भी शामिल है। यह रेलवे ट्रैक अंबाजी होकर गुजरेगा। फिलहाल वहाँ जाने के लिए सड़क मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। यात्रा के दौरान एक एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए उनका काफिला भी हाईवे पर रुक गया। 

प्रधानमंत्री का वीडियो वायरल होने के कारण यूजर सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “हम सभी को अपने देश के पीएम पर गर्व है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “ऐसी अद्भुत नम्रता के लिए अपने देश के प्रधानमंत्री के लिए नतमस्तक हुए बिना नहीं रहा जा सकता। उनके स्वस्थ जीवन एवम् दीर्घायु की शुभ कामनाओं के साथ।”