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60 फॉरेस्ट गार्ड, 40 CCTV, 5 वैन, 2 ट्रैक्टर…बिहार में बाघ को पकड़ने हैदराबाद से आई खास टीम, 26 दिन बाद ‘आदमखोर’ मरा, 9 लोगों की ली जान

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में बसे बगहा में शनिवार (8 अक्टूबर 2022) को शूटर्स ने एक आदमखोर बाघ को मार गिराया। इस बाघ ने बीते 9 महीनों में 10 लोगों पर हमला किया था, जिसमें से 9 लोगों की मौत हो गई थी। आदमखोर बाघ के डर से स्थानीय लोग अपने घर से निकलने में कतरा रहे थे। शनिवार (8 अक्टूबर) सुबह भी बाघ ने माँ-बेटे को अपना शिकार बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) के इस आदमखोर बाघ की तलाश बीते 26 दिनों से की जा रही थी। चूँकि, यह बाघ लोगों पर लगातार हमले किए जा रहा था इसलिए शुक्रवार को इसे मारने के आदेश जारी किए गए थे।

इसके बाद से इसकी सर्चिंग तेज कर दी गई थी। कई स्थानों पर बाघ के पैरों के निशान मिल रहे थे। जिसके बाद एक्सपर्ट टीम की पुष्टि के बाद उसका पीछा किया जा रहा था। बाद में, एक्सपर्ट ने शूटर्स की टीम को बाघ के पैरों के हिसाब से बताया कि वह गन्ने के खेत मे छिपा हुआ है।

जानकारी मिलने पर, इस खेत के चारों ओर जाल फैलाकर घेराबंदी की गई। और फिर, शूटर्स की टीम हाथी पर सवार होकर गन्ने के खेत में पहुँची। जहाँ, शूटर्स की नजर बाघ पर पड़ी और शूटर्स ने बाघ को 4 गोलियाँ मारी। इनमें से दो गोली उसे लगी और बाघ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

इस आदमखोर बाघ को पकड़ने के लिए हैदराबाद से खास टीम भी बुलाई गई थी। इस टीम में एक्सपर्ट के साथ डॉक्टर भी बाघ को पकड़ने में लगे हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, बाघ को पकड़ने के लिए 60 फॉरेस्ट गार्ड, पाँच वैन, चार बड़े जाल, दो ट्रैंकुलाइजर गन, दो ट्रैक्टर, 40 सीसीटीवी कैमरे और एक ड्रोन कैमरा लगाया गया था।

बाघ के बढ़ते आतंक और आदमखोर होने के चलते गत 13 सितंबर को इसे पकड़ने के आदेश जारी किए गए थे। हालाँकि, वन विभाग की टीम के लगातार प्रयास के बाद भी यह बाघ पकड़ा नहीं जा सका था। इस दौरान, 5-6 अक्टूबर को दो दिन में ही बाघ ने दो लोगों को अपना शिकार बनाया था। इसके बाद 7 अक्टूबर को उसे मारने का आदेश जारी किया गया था।

‘हमें सिखाया जा रहा अपनी ही संस्कृति से नफरत करना, धर्म पर शर्मसार होना’: बोले ‘हिंदुत्व’ के हीरो – वक्फ सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा, बॉलीवुड हुआ पथभ्रष्ट

आशीष शर्मा टीवी की दुनिया में जाना-पहचाना नाम हैं, जिनकी फिल्म ‘हिंदुत्व चैप्टर वन’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म का निर्देशक करण राजदान ने किया है। ‘हिंदुत्व’ फिल्म को लेकर इसके मुख्य अभिनेता आशीष शर्मा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। कई ऐतिहासिक किरदारों को छोटे पर्दे पर निभा चुके आशीष शर्मा ने ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ से लेकर लिबरल गिरोह द्वारा हिन्दू धर्म को बदनाम किए जाने जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

‘हिंदुत्व’ फिल्म के मुख्य अभिनेता आशीष शर्मा का इंटरव्यू

प्रश्न: आप ‘सिया के राम’ हैं या ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ हैं? खुद को आप किस रूप में देखते हैं?
जवाब: दोनों हूँ मैं। देखिए, दोनों के अंश हैं मेरे अंदर और हमारे अंदर होने भी चाहिए। अगर हमें नेतृत्व करना है तो इन दोनों के गुण होने चाहिए। श्रीरामचन्द्र हों या चन्द्रगुप्त मौर्य, कार्य दोनों ने एक ही किया था और वो है भारतवर्ष को एक करने का।

प्रश्न: एक अभिनेता रूप में आप काफी ऐतिहासिक किरदारों को निभा चुके हैं, चाहे वो ‘चन्द्रगुप्त मौर्य (2011-12)’ हो, ‘सिया के राम (2015-16)’ हो या फिर ‘पृथ्वी वल्लभ (2018)’ हो। इन किरदारों को निभाने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिलती है? आखिर क्या कारण है कि ऐसे किरदार घूम-फिर कर आपके पास ही पहुँचते हैं?
जवाब: वो होता है ना, जब आप अंदर से जो भी होते हैं उन्हीं चीजों को आकर्षित करने लगते हैं। मैं बचपन से इन्हीं किताबों को पढ़ते हुए पला-बढ़ा हूँ। कहीं न कहीं बचपन में ये किरदार ही मेरे रोल मॉडल रहे हैं। साहित्य में मेरी बचपन से रुचि रही है, खासकर हिंदी साहित्य। आज भी इन्हें मैं पढ़ता हूँ। शुरुआत में मैंने इन किरदारों को आकर्षित किया, जिसके बाद एक कड़ी जुड़ती चली गई। एक अभिनेता के तौर पर इन किरदारों को करने के बाद निर्माताओं को आपके ऊपर एक भरोसा आने लगता है कि आप इन किरदारों को अच्छे से निभा सकते हैं। ऐतिहासिक जो किरदार हैं, उन्हें निभाने के लिए भाषा पर पकड़ और स्क्रीन प्रेजेंस के अलावा उनकी साइक्लोजी और फिलॉसफी भी समझ में आनी चाहिए।

प्रश्न: बात ‘हिंदुत्व’ फिल्म की करें तो आपने क्या सोच कर इस फिल्म को हाँ कहा? आपका मन कैसे बना कि इसे करनी चाहिए?
जवाब: जब करण राज़दान (फिल्म के निर्माता-निर्देशक) ने मुझे बुलाया और उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने पहले ही शब्द में कह दिया कि वो ‘हिंदुत्व’ फिल्म बना रहे हैं। ये सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए। पहले तो मैंने उनके साहस की दाद दी कि एक ऐसा फिल्ममेकर इस विषय पर मूवी बना रहा है, जिसे देखते हुए हमलोग बड़े हुए हैं। मुझे बड़ी ख़ुशी हुई। फिर उन्होंने मुझे कहानी सुनाई और मुझे ये अच्छी लगी। मैं व्यक्तिगत तौर पर काफी चीजें समझता-पढ़ता-देखता हूँ। इस समय देश-दुनिया में जो चल रहा है न, या यूँ कह लीजिए कि आज हमें दिखाई दे रहा है – हमलोग पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित हो गए हैं। इसका जो असर है, हम वेस्ट को देख कर खुद को धर्मनिरपेक्ष बनाने की कोशिश कह रहे हैं, जबकि हमें खुद इसका मतलब पता हैं। हिन्दुओं को सेक्युलर होने का मतलब पता नहीं। किसी और के प्रभाव में आकर हिन्दू खुद को सेक्युलर बताने लगे हैं, जबकि उन्हें नहीं पता है कि कैसे उन्हें योजनाबद्ध तरीके से अपने ही धर्म, संस्कृति और रीति-रिवाजों से अलग किया जा रहा है। मैंने व्यक्तिगत तौर पर ये महसूस किया और इस फिल्म के जरिए इसे युवाओं तक पहुँचाना ज़रूरी है। हिंदुत्व को लेकर योजनाबद्ध तरीके से एक नैरेटिव बनाया गया है, जिसके चक्कर में पड़ कर हम अपने धर्म को भूल गए हैं।

प्रश्न: क्या आपको लगता है कि ‘हिंदुत्व’ फिल्म एक ऐसा माध्यम बनेगा, जिससे युवा अपने धर्म को समझेंगे?
जवाब: सबसे ज्यादा ज़रूरी है कि युवा हिंदुत्व के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें, जो उनका अधिकार भी है। वो न सिर्फ हिन्दू धर्म को अपनाएँ, बल्कि इसे बचाएँ और अपनी आने वाली पीढ़ियों को बताएँ। जब बाकी दुनिया विकसित नहीं हुई थी, हम यहाँ किताबें लिख रहे थे, वेद-पुराण लिख रहे थे। विज्ञान को हमने उसी समय समझा। तब वैज्ञानिकों का धरती प अता-पता ही नहीं था। हमारा धर्म सबसे पुरातन है और ये आज तक टिका हुआ है, इसका कारण है कि ये खुद को बार-बार नए तरीके से विकसित करती है, हर दौर में, हर दशक में। जो घट रही हैं, उस हिसाब से अपने आपको अनुकूल बनाती चली जाती है। इतनी खूबसूरत संस्कृति पर हमें योजनाबद्ध तरीके से शर्म करना सिखाया जा रहा है। हम हिंदी में बात करें तो हमें तुच्छ समझा जाए, कुर्ता-पजामा पहन रहे हैं तो ‘कूल’ नहीं हैं और हमने पूजा-पाठ कर लिया या तिलक लगा लिया तब हम रूढ़िवादी हो गए। हमें कट्टरवादी बता दिया गया। हिंदुत्व को इससे जोड़ दिया गया। अगर एक मुस्लिम पाँच वक्त नमाज पढ़ता है, सिर पर टोपी रखता है और रोजा रखता है तो कहा जाता है कि वो अपने मजहब का पालन कर रहा। लेकिन, अगर मैं नवरात्र कर लूँ, मंगल का व्रत कर लूँ या शिव की पूजा-आराधना कर लूँ तो ‘कट्टरवादी’ हो गया। जबकि हमारी पूजा-पाठ की समाप्ति के समय ‘विश्व का कल्याण हो’ कहा जाता है। ध्यान दीजिए, निजी कल्याण की नहीं, सबकी भलाई की बात की जाती है। ऐसे करने में हमें अपने ही धर्म पर शर्मशार होना सिखाया जाता है।

प्रश्न: ‘हिंदुत्व’ शब्द को काफी बदनाम कर दिया गया है। हिन्दुओं पर हमले होते हैं, तब भी उन्हें आरोपित बताया जाता है। क्या ये एक सोची-समझी साजिश है?

जवाब: बिलकुल, ऐसा ही है। और सालों से ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर आप इतिहास उठा कर देखेंगे तो जब मुगलों ने हम पर आक्रमण किया, उस समय भी उन्हें पता था कि उनके विरुद्ध लड़ रहे राजाओं पर वो शौर्य में विजय प्राप्त नहीं कर सकते। इसीलिए, उन्होंने हिन्दुओं को एक-दूसरे से लड़ाना शुरू किया। हमारे हिन्दू राजा हारे भी तब, जब कोई ‘जयचंद’ निकला। इसी ‘तरह Divide And Rule’ के तहत एक हिन्दू को दूसरे के खिलाफ खड़ा कर के हमें हराया गया। जब-जब हम इकट्ठे हुए, हमें कोई नहीं हरा पाया। अंग्रेज भी आए, उनकी भी ‘फूट डालो, राज करो’ वाली नीति थी। आज भी यही कोशिश हो रही है। हिन्दुओं को सिखाया जा रहा है कि असली हिन्दू सेक्युलर होता है, ‘कट्टर’ नहीं होता। लेकिन, बाकी सरे मजहब कट्टरपंथ पर भी उतर आएँ तब हम कहते हैं कि उनकी एकता काफी अच्छी है। एक छोटा सा उदाहरण समझिए। जब फिलिस्तीन में कुछ होता है, तो हमारे यहाँ के ‘Woke’ और सेक्युलर किस्म के लोग नारे लगाते है, ऑनलाइन ट्रेंड चलाते हैं और प्लाकार्ड लेकर खड़े हो जाते हैं। काफी सारे सेलेब्रिटी भी ऐसा करते हैं। विरोध व्यक्त किया जाता है, कड़ी निंदा की जाती है। लेकिन, जब लेस्टर और बर्मिंघम में हिन्दुओं पर हमला होता है और मंदिरों को निशाना बनाया जाता है, तब ये सब चुप हो जाते हैं और उनकी आवाज़ नहीं निकलती। ये ‘सेलेक्टिव आउटरेज’ है। इसीलिए, हमें ‘सेक्युलर’ होने बोल कर मूर्ख बनाया जा रहा है। जबकि, हमें सुदृढ़ बनने की ज़रूरत है। पुणे में PFI की रैली में देश विरोधी नारे लगाए गए। इस पर ये लोग क्यों नहीं बोल रहे? जो नहीं बोल रहे, वो राष्ट्र के हित में नहीं हैं। हिन्दू धर्म में ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की धारणा है, अर्थात पूरा विश्व एक परिवार है। हमारा धर्म सबसे पहले पहले राष्ट्रवाद सिखाता है। हम इसी वसुधा की बात करते हैं और अगर इसकी भलाई नहीं कर सकते तो हमें न तो हिन्दू कहलाने का अधिकार है और न ही राष्ट्रवादी।

प्रश्न: ‘हिंदुत्व’ फिल्म में ‘लव जिहाद’ पर भी चोट की गई है। क्या आपको लगता है कि ये असली में एक समस्या है, क्योंकि लिबरल गिरोह अक्सर इसे बनावटी बताता है।
जवाब: आप एक ऐसी घटना दिखा दीजिए, जहाँ किसी हिन्दू लड़की से शादी कर के कोई मुस्लिम लड़का हिन्दू धर्म को अपना ले। ऐसी कितनी घटनाएँ आती हैं? मेरी शादी एक ईसाई लड़की से हुई हैं। मेरी पत्नी एक रोमन कैथोलिक हैं, लेकिन वो महाराष्ट्रियन हैं। उनकी पिछली कुछ पीढ़ियाँ ईसाई रही होंगी। लेकिन, वो अपना धर्म निभाती हैं और उतनी ही शिद्दत से मेरा धर्म भी निभाती हैं। वो करवा चौथ का व्रत करती हैं और हवन भी करती हैं, लेकिन मैंने उनसे कभी नहीं कहा कि आप धर्म-परिवर्तन कर लो। लेकिन, ऐसा नहीं है कि वो मेरे धर्म को नीचा देखती हैं। ये होती है धर्मनिरपेक्षता, जहाँ किसी को नीचा नहीं दिखाया जाता। धर्मनिरपेक्षता ये नहीं है कि अंतर्धार्मिक विवाह की आज़ादी तो चाहिए लेकिन लड़की को हमारे मजहब में आना ही पड़ेगा। ये प्रेम नहीं है। प्रेम के अंदर सौदेबाजी नहीं होती। प्रेम का अर्थ है कि जो जो हैं, उन्हें वो रहने दीजिए। लड़की को ही जब धर्म-परिवर्तन करना पड़े हमेशा, तो ये दोगलापन है।

प्रश्न: आपकी फिल्म ‘हिंदुत्व’ में छात्र राजनीति को भी उभारा गया है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ में भी छात्र राजनीति के कई पहलू दिखाए गए थे। क्या आप कोई तुलना देखते हैं?
जवाब: मैं ‘द कश्मीर फाइल्स’ से कोई तुलना नहीं करना चाहता, क्योंकि वो वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म है। जो घटनाएँ घटीं, उन्हें उन्होंने उसी पीड़ा के साथ हूबहू ईमानदारी से सामने रखा, उसे डॉक्यूमेंट किया। वो डोक्यू-ड्रामा थी, जबकि हमारी फिक्शनल फिल्म है। ये सत्य घटनाओं पर आधारित है। हमारे देश की राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में दो दोस्तों की कहानी है। ये दोनों भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत आज की तारीख़ में जो देश है, वो विभाजन की नींव पर बना था। जो चीजें विभाजन पर आती हैं, उन्हें जोड़ कर रखने की आवश्यकता होती है। ये फिल्म इसी जोड़ की बात करती है। इसके चक्कर में एक पलड़े को भारी और एक को कम नहीं कर सकते, समानता होनी चाहिए। ‘हम अल्पसंख्यक हैं, हमने अपने कानून बना लिए’ – ये सही नहीं है। ‘वक्फ बोर्ड’ कितना बड़ा फर्जीवाड़ा है। कानून से अधिकार पाकर वो किसी भी जमीन पर दावा कर के उसे ले लेते हैं। जबकि मंदिरों के मामले में उनकी पूरी कमाई सरकार के पास जाती है। समानता दोनों तरफ से होनी चाहिए, वरना इनमें पड़ने का कोई फायदा नहीं है।

प्रश्न: आजकल ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ का ट्रेंड भी चल रहा है। ‘शमशेरा’ में हिन्दू धर्म का अपमान होने के कारण इसका बहिष्कार किया गया और ये फ्लॉप हुआ। आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ जैसी बड़ी फिल्म नहीं चली। आपको क्या लगता है, बॉलीवुड कहाँ चूक रहा है?
जवाब: पिछले कुछ ज़माने से बॉलीवुड थोड़ा सा पथभ्रष्ट हो गया है। असल में वो यही काम कर रहे हैं, जो वो करते हैं। वो पूरी शिद्दत से कहानी कह रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कलाकारी ये मेहनत में। फर्क ये नजर आया है कि जनता ने उन्हें कह दिया है कि हमें वो नहीं देखना जो आप बना रहे हैं और आप वो बनाइए, जो हम देखेंगे। पहले हमलोग जो भी बनता था, जाकर देख लेते हैं। मैं भी उसी में था। अब जनता ने पहली बार बोला है और टिकट खिड़की पर इसे साबित भी कर दिया है। नकारना या स्वीकारना ऑडिएंस का अधिकार है। फिल्मकारों को समझना पड़ेगा कि ऑडिएंस को क्या देखना है। उनकी बात माननी पड़ेगी। बॉयकॉट से बेहतर है कि आप जिसे देखना चाहते हैं, उसका समर्थन कर दें। ‘द कश्मीर फाइल्स’ को देख लीजिए, न तो समीक्षकों ने उसका रिव्यू किया और न ही मीडिया ने कवर किया। ज़रूरत ही नहीं पड़ी। जनता ने रिव्यू दे दिए, जनता ने कवर किया, जनता ने टिकट खरीदा और इसे ब्लॉकबस्टर बनाया। आजकल पैसे देकर समीक्षा भी करवाई जाती है। कितने स्टार्स देने के कितने पैसे मिलते हैं, ये जगजाहिर है। दिनकर ने – ‘सिंहासन खाली करो, कि जनता आती है।’

प्रश्न: दक्षिण भारतीय फिल्मों को हिंदी बेल्ट के दर्शकों द्वारा इतना प्यार दिए जाने के पीछे आप क्या कारण मानते हैं? बाहुबली सीरीज के अलावा ‘पुष्पा’, KGF और RRR जैसे फ़िल्में भी उत्तर भारत में ब्लॉकबस्टर हुई हैं। इसका कारण आप क्या मानते हैं?
जवाब: मैं तो एक जमाने से साउथ की फ़िल्में देखता हूँ और सिर्फ उनकी कमर्शियल ही नहीं बल्कि और भी फ़िल्में देखता रहा हूँ। मेरे हिसाब से मलयालम में भारत की बेहतरीन फ़िल्में बनती हैं। काफी खूबसूरत और जमीन से जुड़ी हुई मानवीय कहानियाँ वो कहते हैं, जहाँ आपको भारतीयता, भारत का परिवेश और हिंदुस्तानी नागरिक नजर आता है। उसमें पाश्चात्य प्रभाव नहीं दिखता। वो अपनी छोटी-छोटी मानवीय मुद्दों पर फ़िल्में बनाते हैं, जिनमें आसपास के लोगों की कहानी होती है। साउथ के फिल्मों की कहानी और किरदार जमीनी होते हैं। वो ‘लार्जर दैन लाइफ’ भी बनाते हैं तो वो प्रेरणा देते हैं और भारतीयता को महत्व देते हैं। आपको देख कर लगेगा कि मैं भी इसके जैसा बन सकता हूँ। इसका कारण ये भी है कि वहाँ के अभिनेता-अभिनेत्री भी जमीन से जुड़े रहते हैं। वो अपनी संस्कृति से जुड़े हुए लोग हैं, इसीलिए वो इतनी शिद्दत से ये किरदार निभाते हैं। जबकि बॉलीवुड में अधिकतर लोग पाश्चात्य प्रभाव में बड़े हुए हैं। माहौल वेस्टर्नाइज बन गया है, इसीलिए उनकी सोच-समझ भी ऐसी हो गई है। उनके लिए हिंदी बोलना-समझना भी मुश्किल है। किसी छोटे शहर में किसी युवक की तकलीफ को वो कैसे समझेंगे, जब आपने वो ज़िन्दगी जी ही नहीं। आप रिसर्च कर के उसके करीब पहुँच जाएँगे, लेकिन उसे अपने अंदर नहीं उतार पाएँगे। या तो आपने वो जिया न हो या करीब से देखा न हो, तब तक इसे निभाना संभव नहीं। आजकल जो आधुनिक लेखक हैं, वो भी हमारे समाज, संस्कृति और सभ्यता से जुड़े हुए नहीं हैं। इसका कारण ये भी है कि वो हिंदी साहित्य पढ़ते ही नहीं हैं। आजकल लिखे ही नहीं जाते। हमें हमारे बच्चों को अपनी सभ्यता और संस्कृति से जोड़ना होगा, तभी बड़े होकर वो उसी हिसाब से काम करेंगे।

प्रश्न: आप अपने संघर्ष और शुरुआती दिनों के बारे में बताइए, ताकि नए अभिनेताओं और अभिनय का शौक रखने वालों को भी इससे प्रेरणा मिले।
जवाब: मैं ये कहूँ कि मैं रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोया और बड़ापाव खाया तो मैं ये नहीं कहूँगा। मेरी शुरुआत फिल्मों से ही हुई। दिवाकर बनर्जी की ‘लव, सेक्स और धोखा’ (2010) काफी क्रिटिकली एक्लेम्ड रही, लेकिन मुझे नाम टीवी से मिला। टीवी ने मुझे घर-घर तक पहुँचाया, नाम और पैसा दिया। साथ ही इस लायक बनाया कि मैं चीजों को ना बोल सकूँ। उन चीजों को नकार सकूँ, जो मुझे नहीं करना है। इसका कारण ये है कि मैंने अपने ज़रूरतों और आवश्यकताओं को नियंत्रण में रखा। मैंने Need और Want को कंट्रोल में रखा। आपको ज्यादा चीजों की आवश्यकता नहीं पड़ती। मुझे आज भी कम चीजों की ही ज़रूरत पड़ती है। टीवी ने मुझे इस लायक बनाया कि मैं अपना काम खुद बना सकूँ, कंटेंट क्रिएट सर सकूँ। मेरी प्रोडक्शन कंपनी भी है। उसके तहत मैं ऐसी ही कहानियाँ बना रही हूँ। एक फिल्म मैं बना चुका हूँ। एक सीरीज बन चुकी है। दो फ़िल्में फ्लोर पर हैं। मैंने OTT या फिल्मों की तरफ रुख किया, लेकिन हमारे लिए वहाँ ‘बासी’ शब्द का प्रयोग करते हुए कहा जाता है कि ‘टीवी के बड़े कलाकारों’ को 10 साल से लोग देख रहे हैं, अब उन्हें कौन देखना चाहता है। मेरा मानना है कि दर्शक मुझे नहीं देख रहे, किरदार को देख रहे। अमिताभ बच्चन दशकों से काम कर रहे हैं, लेकिन क्या वो बासी हो गए? वो आज भी इतने ही फ्रेश हैं और शिद्दत से काम करते हैं। इस सोच से मुझे लड़ना है। वो इज्जत से आपको बैठाएँगे, चाय-पानी पिलाएँगे, लेकिन काम नहीं देंगे। इज्जत से तिरस्कार करेंगे। इस पर आप रो सकते हैं या इससे लड़ सकते हैं। छाती पीट कर हाय-हाय करने की जगह आप अपनी जगह खुद बनाना शुरू करते हैं, जो मैं कर रहा। तकलीफें आती हैं, लेकिन अड़चनों के अंदर मौका खोजना चाहिए। मैं यही कर रहा हूँ।

आशीष शर्मा ने इस इंटरव्यू में ये भी बताया कि उनकी प्रोडक्शन कंपनी कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। वो खुद एक और फिल्म कर रहे हैं। उनका कहना है कि फिल्मों के जरिए मनोरंजन के साथ-साथ एक सन्देश छोड़ जाना भी उनका उद्देश्य है। उनकी अगली फिल्म बड़े-बुजुर्गों के प्रति युवाओं की जिम्मेदारी की बात करेगी। उनका मानना है कि कलाकारों की स्वीकार्यता काम से नहीं, नाम से होनी चाहिए। ‘हिंदुत्व’ फिल्म को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

आदिपुरुष में भगवान राम और हनुमान जी का गलत चित्रण…फिल्म रिलीज पर लगे बैन: दिल्ली कोर्ट में दायर हुई याचिका, लखनऊ में शिकायत दर्ज

आदिपुरुष को रिलीज होने से रोकने के लिए दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर हुई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में भगवान राम और भहवान हनुमान को गलत ढंग से दिखाया गया।

समाचारा एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दिल्ली की एक अदालत में फिल्म ‘आदिपुरुष’ की रिलीज पर रोक लगाने की माँग को लेकर याचिका दर्ज की गई है। याचिका में ये आरोप लगाया गया है कि भगवान राम और हनुमान को चमड़े की पट्टियाँ पहनाकर एक अनुचित और गलत कैरेक्टर में दिखाया गया। वहीं रावण का चित्रण भी गलत ढंग से किया गया है।

बता दें कि इससे पहले यूपी के लखनऊ में इस फिल्म के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। कलाकारों और निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की माँग वकील प्रमोद पांडे ने की थी। उनकी माँग थी किं हिंदू देवी-देवताओं को गलत ढंग से कैरेक्टराइज करने के लिए फिल्म निर्माताओं के साथ कलाकारों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 153 ए के तहत केस होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि आदिपुरुष का टीजर रिलीज होने के बाद से उसके बॉयकॉट की माँग सोशल मीडिया पर चल रही है। लोगों में इस बात का गुस्सा है कि 500 करोड़ में इतने घटिया वीएफएक्स वाली फिल्म को तैयार किया गया है। वहीं आरोप यह भी है कि आखिर कैसे फिल्म निर्माताओं ने राम भगवान और हनुमान जी का किरदार निभाने वाले कलाकारों को चमड़े की बेल्ट पहनाकर पेश किया। वहीं रावण के बालों के हेयरस्टाइल पर भी सवाल उठ रहे हैं।

‘सिर तन से जुदा’ चिल्लाते हुए दिनदहाड़े नोएडा में भागे 12 कट्टरपंथी, नूपुर शर्मा की चर्चा सुन BJYM नेता को मारने आए थे: Video में सुनें पीड़ित की आपबीती

कट्टरपंथियों के सिर से ‘सर तन से जुदा’ का जुनून नहीं उतर रहा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेता अभिषेक सिंह राठौड़ (Abhishek Singh Rathaur) को पार्टी से निष्कासित प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के बारे में चर्चा पर मुस्लिम समुदाय के बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया। इस मामले में नोएडा पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

मामला नोएडा के सेक्टर-44 के मार्केट का है। वहाँ BJYM नेता अभिषेक सिंह राठौड़ अपने दोस्तों के साथ पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद पर दिए गए बयान के समर्थन में चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान पीछे खड़े मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सुन लिया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया।

अभिषेक राठौड़ पर हमला करने वाले बदमाशों की संख्या 10-12 थी। इस दौरान हमलावरों ने सिर तन से जुदा के नारे भी लगाए। इस हमले में उन्हें गंभीर रूप से चोट आई है और वे लहूलुहान हो गए। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

अभिषेक राठौड़ ने बताया कि जब हमलावर बाइक पर सवार होकर भागने लगे तो बार-बार ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि हमलावरों में से दो के नाम उन्हें याद हैं, क्योंकि मारपीट के दौरान दोनों नाम उन्होंने सुना था। उनके नाम अमजद एवं राशिद हैं।

अभिषेक राठौड़ ने बताया कि हमले के दौरान उनके कुछ दोस्त वहाँ आ गए। इसके बाद हमलावर भाग गए और वे जिंदा बच गए। उन्होंने कहा कि उनकी हत्या करने की साजिश के तहत बदमाश पहले से ही घात लगाकर वहाँ बैठे हुए थे। उन्होंने वीडियो ट्वीट कर यूपी पुलिस से न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद नोएडा के ACP रजनीश ने संपर्क किया।

बता दें कि नूपुर शर्मा के बयान को लेकर यह पहला हमला नहीं है। इससे पहले उदयपुर में दो कट्टरपंथियों ने कन्हैयालाल की दुकान में ग्राहक बनकर जाने के बाद चाकू से गला रेतकर उनकी हत्या कर दी थी। वहीं, महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की और कर्नाटक के प्रवीण नेट्टारू की इसी तरह हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा भी कई हत्याओं को कट्टरपंथियों ने अंजाम दिया।

‘मैं हिंदू धर्म को पागलपना मानता हूँ’: गुजरात में अरविंद केजरीवाल के लगे काले होर्डिंग, वेशभूषा मुस्लिमों वाली

गुजरात में आम आदमी पार्टी का विरोध करने के लिए काले होर्डिंग लगाए गए हैं। इसमें अरविंद केजरीवाल इस्लामी टोपी पहने हुए हैं। होर्डिंग में लिखा है- “मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश, राम और कृष्ण को भगवान नहीं मनता।”

केजरीवाल के अन्य पोस्टर को रोड किनारे रखे देखा जा सकता है। इसमें भी अरविंद केजरीवाल मुस्लिम वेशभूषा में हैं। होर्डिंग में लिखा, “मैं हिंदू धर्म को पागलपना मानता हूँ और यही शब्द आम आदमी पार्टी के हैं।”

बता दें कि गुजरात में ये काले होर्डिंग ऐसे समय में सामने आए हैं जब दिल्ली मुख्यमंत्री पंजाब सीएम भगवंत मान के साथ दो दिन के लिए गुजरात दौरे पर हैं। उनका ऐसा विरोध और ऐसे पोस्टर आम आदमी पार्टी के विधायक राजेंद्र पाल गौतम द्वारा हिंदू विरोधी शपथ लेने के बाद सामने आया है।

राजेंद्र पाल गौतम ने झंडेवालान के डॉ बी आर अंबेडकर भवन में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यहाँ 10 हजार के करीब हिंदुओं को बौद्ध धर्म में परिवर्तित किया गया था। इस दौरान शपथ में कहा गया- “मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में विश्वास नहीं करूँगा और न ही उनकी पूजा करूँगा। मेरी आस्था राम और कृष्ण में भी नहीं होगी जिन्हें भगवान माना जाता है और जिनकी पूजा होती है।”

वीडियो में देखने को मिला था कि ऐसी शपथ आप नेता ने भी ली थी और इसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा हुई थी। इसके बाद भाजपा नेता आदेश गुप्ता ने थाने में अरविंद केजरिवाल और उनके नेता के विरुद्ध शिकायत देते हुए कहा था कि ऐसी हरकत से सिर्फ दंगा भड़काने का प्रयास हो रहा है।

‘अब अल्लाह की इबादत और दीन के लिए ज़िन्दगी गुजारूँगी’: पाकिस्तानी गायक के बाद अब भोजपुरी अभिनेत्री ने छोड़ी मनोरंजन इंडस्ट्री

चकाचौंध की दुनिया में कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता का स्वाद सबको नसीब नहीं होता। ऐसे में कलाकार या तो दूसरा प्रोफेशन अपना लेते हैं या फिर मजहब की ओर मुड़ जाते हैं। लंबे समय से इंडस्ट्री से दूर रहने के बाद पाकिस्तान के एक गायक द्वारा गायन की दुनिया को छोड़ मजहबी काम करने की घोषणा के बाद अब भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से भी ऐसी ही एक खबर आई है। इसके पहले जायरा वसीम और सना खान जैसी बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ भी इंडस्ट्री को अलविदा कह चुकी हैं।

भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री सहर अफशा (Sahar Afsha) ने इंडस्ट्री छोड़ दी है। सहर ने सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी और कहा कि फिल्म इंडस्ट्री से अब उनका कोई ताल्लुक नहीं है और वे अब ‘अल्लाह की राह में इबादत’ करेंगी।

अपने इंस्टाग्राम में उन्होंने लिखा, “मैं अगली जिंदगी इस्लामी तालीमात (इस्लामी शिक्षा) और अल्लाह के अल्हम के मुताबिक गुजारने का इरादा रखती हूँ। मैं अपनी गुजिश्ता जिंदगी से तौबा करती हूँ। अल्लाह से तौबा करती हूँ। अल्लाह से माफी की तलबगार हूँ।”

सहर अफशा ने आगे लिखा, “मैं इत्तेफाक से इस इंडस्ट्री में आ गई थी, पर अब सब खत्म करने का इरादा कर लिया है। अगली जिंदगी इंशाअल्लाह अल्लाह के हुकुम के मुताबिक बिताने का इरादा है।” सहर ने अपने लिए लोगों से दुआ करने की भी गुजारिश की।

सहर के पोस्ट पर सना खान ने खुशी जताई है। बता दें कि भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह (Superstar Pawan Singh) समेत खेसारीलाल यादव (Khesarlal Yadav) एवं अन्य कलाकारों के साथ काम कर चुकी हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 2.60 लाख फॉलोवर हैं।

उधर, 6 अक्टूबर को पाकिस्तानी गायक अब्दुल्ला कुरैशी (Abdullah Qureshi) ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डालकर कहा कि उन्होंने इस्लाम के लिए संगीत की दुनिया को अलविदा कह दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि वह अब से केवल वही काम करेंगे जो उनके मजहबी मूल्यों के अनुरूप हो।

अब्दुल्ला कुरैशी ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, “मुझे पता है कि मैं लंबे समय से खोया हुआ हूँ। लोग यह जानने के लिए मुझे लगातार मैसेज कर रहे हैं कि मैं कहाँ हूँ। मैं ब्रेक पर था, थोड़ी देर के लिए पॉज़ बटन दबाया और यह जानने की कोशिश कर रहा था कि मैं क्या था, मैं कहाँ जा रहा हूँ और मैं क्या बनना चाहता हूँ।”

उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में यह भी लिखा, “अल्हम्दुलिल्लाह, मैं अपने इस फैसले से संतुष्ट हूँ और अब वास्तविक सच्चाई की तलाश में हूँ। मैं दुआ करता हूँ कि अल्लाह मेरे लिए इस नई यात्रा को आसान बना दे।” उन्होंने यह भी कहा कि अब वह केवल उन कार्यक्रमों का हिस्सा होंगे जिनमें ‘मजहब’ को बढ़ावा दिया जा रहा होगा।

‘JDU का विलय कॉन्ग्रेस में करने को कह रहे थे प्रशांत किशोर’: PK की पदयात्रा के बीच CM नीतीश कुमार का बड़ा आरोप, कहा – उससे कोई लेना-देना नहीं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पुराने ‘अनन्य’ सहयोगी और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पर निशाना साधा है। नीतीश कुमार ने कहा है कि प्रशांत किशोर वही व्यक्ति हैं जिन्होंने जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) को कॉन्ग्रेस में विलय करने की सलाह दी थी। वह कुछ भी बोलते रहते हैं उन्हें बोलने दीजिए।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर जेपी गोलंबर पहुंचे थे। जहाँ, उनसे पत्रकारों ने उनसे पूछा कि प्रशांत किशोर ने कहा है कि उन्हें पद का ऑफर दिया गया था। जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें (प्रशांत किशोर को) जो कुछ भी बोलना है, बोलें। हमें उनसे कोई लेना-देना नहीं है।

नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर (पीके) को लेकर कहा है, “आजकल बीजेपी में गए हैं तो उनके हिसाब से कर रहे हैं। इन लोगों का कोई ठिकाना नहीं है। वह मेरे घर में रहते थे, अब जो चाहे वह बोलते रहते हैं। हमने उनको नहीं बुलाया था बल्कि वो खुद मिलने आए थे। क्या-क्या बात बात हुई थी हमारे बीच, इस पर हम कुछ नहीं बोलेंगे। उनको बोलने दीजिए जो कुछ बोलना है। उनको राजनीति से क्या मतलब है, इसलिए उन्हें बोलने दीजिए।”

उन्होंने पीके पर आरोप लगाते हुए कहा, “हम लोगों को उससे कोई लेना-देना नहीं है। एक बार वह (पीके) हमसे कह रहे थे कि अपनी पार्टी को कॉन्ग्रेस में मर्ज कर लीजिए। आप ही बताइए, हम कॉन्ग्रेस में क्यों मर्ज करेंगे। ये आज से करीब 4-5 साल पहले की बात है।”

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि प्रशांत किशोर अब बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं। जब वो आरजेडी और जेडीयू का विरोध कर रहे हैं तो इसका मतलब तो यही हुआ कि वो बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं।

दरअसल, प्रशांत किशोर ने बुधवार (5 अक्टूबर, 2022) को अपनी ‘जन-सुराज’ यात्रा के दौरान दावा किया करते हुए कहा था कि नीतीश कुमार ने उन्हें पद का ऑफर किया है। उन्होंने कहा था, “जब मैं कुछ दिन पहले नीतीश कुमार से मिला तो उन्होंने मुझसे फिर से जेडीयू में शामिल होने और साथ काम करने के लिए कहा था। साथ ही यह भी कहा कि आप मेरे राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं।”

उन्होंने यह भी कहा था कि सीएम नीतीश कमार ने उन्हें अपना कैंपेन वापस लेने के लिए कहा। लेकिन, उन्होंने नीतीश कुमार से स्पष्ट रूप से कहा कि वह उनके साथ काम नहीं करेंगे, भले ही वह (नीतीश कुमार) उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दें या उनके लिए सीएम की कुर्सी छोड़ दें।

‘इनके ही योगदानों से मजबूत हुई पार्टी’: CM सरमा ने वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ताओं के धोए पाँव, ‘बाढ़ मुक्त असम’ पर अमित शाह ने बनाई रणनीति

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुजुर्ग भाजपा कार्यकर्ताओं के पाँव धोए, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद लोग उनकी तारीफ़ कर रहे हैं। उन्होंने शनिवार (8 अक्टूबर, 2022) को इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। सीएम सरमा ने कहा कि ये भाजपा की परंपरा है कि वरिष्ठों के प्रति सम्मान का भाव रखा जाए। वीडियो में देखा जा सकता है कि सीएम हिमंता वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ताओं के पाँव धो कर कपड़े से पोंछ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने असम के सबसे बड़े शहर गुवाहाटी के खानपारा स्थित वेटेनरी स्टेडियम में जनसभा को संबोधित भी किया। उन्होंने ‘ कार्यकर्ता सम्मेलन’ में भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया और उनकी हौसलाअफजाई की। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुवाहाटी के बशिष्ठ में ‘अटल बिहारी वाजपेयी भवन’ का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि असम और अन्य राज्यों में इससे भाजपा के विकास की गति बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “बड़ों के प्रति सम्मान का प्रदर्शन करना भारतीय संस्कृति के स्वभाव में है। साथ ही ये हमारी पार्टी की परंपरा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुझे हमारे वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ताओं के पाँव धोने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिनके असीम योगदानों ने हमारी पार्टी को शुरुआती दौर में असम में मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।” गुवाहाटी में भाजपा के नए राज्य मुख्यालय के उद्घाटन से कार्यकर्ता भी उत्साह में दिखे।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम को बाढ़ मुक्त बनाने की रणनीति पर चर्चा के लिए नेताओं और अधिकारियों के साथ बैठक की। असम में हर साल की भाँति इस वर्ष भी भीषण बाढ़ ने लोगों को परेशान किया है। अमित शाह ने असम सरकार से कहा है कि वो जल्द ही एक एक्शन प्लान तैयार करे जिससे पानी के स्टोरेज की क्षमता बढ़ाई जा सके। साथ ही उन्होंने पर्याप्त मात्रा में प्राइवेट इन्वेस्टमेंट भी आकर्षित करने का सुझाव दिया।

जिस अडाणी को भला-बुरा कहते हैं कॉन्ग्रेसी, निवेश के लिए उनकी ही शरण में CM गहलोत: राजस्थान में ₹65000 करोड़ के इन्वेस्टमेंट का ऐलान

गुजरात (Gujarat) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की तर्ज पर अब राजस्थान (Rajasthan) की कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) भी निवेश जुटाने के लिए इंवेस्टर समिट (Investor Summit) का आयोजन कर रही है। इसको लेकर भाजपा (BJP) ने तंज कसा है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने Invest Rajasthan Summit 2022 के दौरान अडाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अडाणी (Gautam Adani) को ‘गौतम भाई’ कहकर उनकी प्रशंसा की। सीएम गहलोत की अडाणी से इस नजदीकी को देखकर भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathore) और सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने तंज कसा है।

भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने ट्वीट कर कहा, “अडानी का नाम लेकर केंद्र सरकार को बार-बार कोसने वाले @RahulGandhi जी की कॉन्ग्रेस पार्टी अब उन्हीं पर मेहरबान है। राजस्थान के मुखिया @ashokgehlot51 जी रेड कारपेट बिछाकर अडानी समूह को रियायती दरों पर राजस्थान की बेशकीमती जमीन लुटा रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस को अडानी समूह फूटी आँख नहीं सुहाता है, लेकिन अडानी समूह को सोलर पार्क के लिए सर्वाधिक जमीन देना इस बात को सिद्ध करता है कि कॉन्ग्रेस की कथनी और करनी में हमेशा ही फर्क रहा है। गहलोत जी जनता की आँखों में धूल झोंककर अडानी प्रेम को छुपा नहीं सकते।”

सतीश पूनिया ने तंज कसते हुए कहा, “कल तक जो था विरोधी आज बना मनमीत, धन की जगी उम्मीद तो बदली अपनी रीत।” पूनिया ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें राहुल गाँधी गौतम अडाणी को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं।

इस वीडियो में राहुल गाँधी गौतम अडाणी और मुकेश अंबानी को लेकर कह रहे हैं, “जो भी हिंदुस्तान में होता है, उधर अडाणी जी दिखाई देते हैं। जहाँ भी देखो, दो लोग दिखेंगे अडाणी जी और अंबानी जी।”

भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तय कर लिया है कि जो भी पार्टी आलाकमान कहेगा, उसका उल्टा करना है। इसी वजह से राहुल गाँधी जिन गौतम अडाणी को घेरते रहते हैं, उनके लिए अशोक गहलोत ने रेड कारपेट बिछाया और इन्वेस्ट करने के लिए आमंत्रित किया। 

बता दें कि इन्वेस्ट राजस्थान समिट में बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने भाग लिया है। उद्योगपति गौतम अडाणी ने राजस्थान में 65,000 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की है। समिट के मंच पर अशोक गहलोत और गौतम अडाणी के साथ दिखने के बाद राजनीति गरमा गई है। 

दुर्गा पूजा देखने निकले 6 लोगों को बबलू खान ने बस से कुचला, 3 की मौत, 3 घायल: कंडक्टर नूरूद्दीन और अरमान खान भी गिरफ्तार, शोर मचाने के बाद भी नहीं स्लो की गाड़ी

कोलकाता के सियालदह फ्लाइओवर पर एक बस ने दुर्गा पूजा का पंडाल देखने जा रहे लोगों को टक्कर मार दी। घटना में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई जबकि 3 अन्य घायल हो गए। बताया जा रहा है कि बस मे बैठे ड्राइवर बबलू खान को लोगों ने बार-बार हाथ देकर गाड़ी धीरे करने को भी कहा था। लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी।

अब इस मामले में तीन लोग गिरफ्तार हुए हैं- इनकी पहचान ड्राइवर बबलू खान, कंडक्टर नूरूद्दीन खान और हेल्पर अरमान खान के तौर पर हुई है। इनके विरुद्ध गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज हुआ है।

कुछ रिपोर्ट्स बता रही हैं कि ड्राइवर ने नियंत्रण खोया। हालाँकि जाँच अधिकारी ने बताया कि प्राइवेट बस एयरपोर्ट जा रही थी। रास्ते में 6 लोग ब्रिज पार कर रहे थे। उन्होंने अपने हाथ उठाकर, चिल्लाकर ड्राइवर बबलू खान को रोकने का प्रयास किया लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी और माला होटल के आगे उन्हें कुचल दिया। पड़ताल के दौरान बस को सीज कर लिया गया। मैकेनिकल टेस्ट हो रहा है कि कहीं दुर्घटना की वजह कोई और कारण तो नहीं।

ट्रैफिक पुलिस डीसी सुनील यादव ने बताया, “हमने इनके ऊपर लापरवाही से गाड़ी चलाने, गैर इरादतन हत्या, गैर इरादतन हत्या का प्रयास करने, दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने और उनको गंभीर नुकसान पहुँचाने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।”

जानकारी के मुताबिक पूरी घटना बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को 1:20 मिनट पर घटी। टक्कर लगने के बाद अदिति गुप्ता (18) ने वहीं दम तोड़ दिया जबकि राहुल कुमार प्रसाद (30) और हावड़ा की नंदिनी कुमारी ने अस्पताल में दम तोड़ा। इनके अलावा ऋषि गुप्ता, नीलेश गुप्ता और राहत गुप्ता को घटना में गंभीर चोटे आई हैं।

पुलिस के अनुसार, बबलू खान ने बस से जिस परिवार को टक्कर मारी वो पोर्ट इलाके में रहने वाले थे और घर से दुर्गा पूजा पंडाल घूमने के लिए निकले थे। वह सब संतोष मित्रा स्क्वायर का पूजा पंडाल देखने गए। इसके बाद सियालदह फ्लाईओवर होकर सियालदह रेलवे क्वार्टर पर पूजा पंडाल देखने के लिए निकले। इस बीच उन्हें एक फ्लाईओवर क्रॉस करना था। जब परिवार के सभी लोग ब्रिज पार कर रहे थे तभी तेज रफ्तार आ रही 46 नं. रूट की प्राइवेट बस ने उन्हें कुचल दिया।