Home Blog Page 2354

‘अब सिर्फ मजहब के लिए काम करूँगा’: पाकिस्तानी गायक ने किया संगीत छोड़ने का ऐलान, ‘इस्लाम में संगीत पूरी तरह हराम नहीं’ कहने वाले एक्टर को मिली गालियाँ

पाकिस्तानी गायक अब्दुल्ला कुरैशी ने गुरुवार (6 अक्टूबर, 2022) को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट कर कहा है कि उन्होंने इस्लाम के लिए संगीत की दुनिया को अलविदा कह दिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि वह अब से केवल वही काम करेंगे जो उनके मजहबी मूल्यों के अनुरूप हो।

अब्दुल्ला कुरैशी ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, “मुझे पता है कि मैं लंबे समय से खोया हुआ हूँ। लोग यह जानने के लिए मुझे लगातार मैसेज कर रहे हैं कि मैं कहाँ हूँ। मैं ब्रेक पर था, थोड़ी देर के लिए पॉज़ बटन दबाया और यह जानने की कोशिश कर रहा था कि मैं क्या था, मैं कहाँ जा रहा हूँ और मैं क्या बनना चाहता हूँ।”

अब्दुल्ला कुरैशी ने यह भी लिखा, “म्यूजिक बनाने, हजारों लोगों के लिए म्यूजिक कॉन्सर्ट करने से लेकर प्यार और सराहना पाने, विवादों का सामना, कुछ गलत निर्णय, कुछ सकारात्मकता फैलाने और अद्भुत दोस्त बनाने व बेहतरीन लोगों के साथ काम करने के लिए मेरे पास बहुत अच्छा समय था।” क़ुरैशी ने यह भी लिखा कि उनका मानना है जीवन का वास्तविक उद्देश्य इन सब चीजों से बहुत बड़ा है। उन्होंने लिखा कि हमारे पास इस दुनिया में अपने बाद के जीवन को बेहतर बनाने के लिए बहुत कम समय है।

उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में यह भी लिखा, “अल्हम्दुलिल्लाह, मैं अपने इस फैसले से संतुष्ट हूँ और अब वास्तविक सच्चाई की तलाश में हूँ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि अल्लाह मेरे लिए इस नई यात्रा को आसान बना दे।” उन्होंने यह भी कहा कि अब वह केवल उन कार्यक्रमों का हिस्सा होंगे जिनमें ‘मजहब’ को बढ़ावा दिया जा रहा होगा।

इस्लाम के लिए संगीत छोड़ने से पहले अब्दुल्ला ने खुद के द्वारा किए गए ‘बुरे व्यवहारों’ और ‘कामोत्तेजना’ के लिए साल 2021 में ‘माफीनामा’ भी जारी किया था। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए इस ‘माफीनामे’ में अब्दुल्ला कुरैशी ने कहा था कि उन्हें अपने कर्मों पर दुःख है। उन्होंने किसी भी तरह से यदि किसी को चोट पहुँचाई या नुकसान पहुँचाया तो उन्हें इसका बहुत है। वह इन सब चीजों को हटाना चाहते हैं। उनका कहना है कि इससे उनके करियर पर असर पड़ा है और इससे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे उनकी बेटी के प्रभावित होने की भी संभावना है।

(फोटो साभार: BolNews)

उनके माफीनामे में लिखा था, “मैं अपने शराबी वाली स्थिति के लिए किसी को भी दोष नहीं दूँगा। मुझे ही शराब पीने की आदत थी, साथ ही मैं कामोत्तेज था। लेकिन, हर कोई कामोत्तेजक हो सकता है। हालाँकि, जब मेरी बेटी हुई तब मैंने यह सब छोड़ दिया। मैं अपनी बेटी से सबसे खराब पिता होने के लिए माफी माँगता हूँ। मैंने एक साल पहले अपनी पत्नी के साथ बात करके इसे सुलझा लिया है। हम अब खुश हैं और मैं एक बदला हुआ आदमी हूँ।”

एक्टर हमजा अली अब्बासी को मिलीं गालियाँ…

गायक अब्दुल्ला कुरैशी ने जब घोषणा की कि वह इस्लाम के लिए संगीत छोड़ रहे हैं, तब पाकिस्तानी एक्टर हमजा अली अब्बासी ने उन्हें ट्विटर पर शुभकामनाएँ दीं। लेकिन, उन्होंने यह भी कहा कि “इस्लाम में संगीत पूरी तरह से हराम नहीं है”।

अपने ट्विटर बायो में, अब्बासी ने लिखा है कि वह एक एक्टर और ‘इस्लाम के छात्र हैं। हालाँकि, इस्लाम में क्या हराम है और क्या नहीं इस बारे में उनके ट्वीट के बाद उन्हें मुस्लिमों द्वारा जमकर गालियाँ दी गईं हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा “मुझे हैरान हूँ है कि अधूरा हराम क्या है? हराम तो हराम है चाहे यह 1% ही हराम हो।”


ऐसे कई लोग थे जिन्होंने अब्बासी से कहा कि वह मुफ्ती नहीं हैं और इसलिए, उन्हें इस बारे में निर्णय नहीं सुनाना चाहिए कि इस्लाम में क्या हराम है और क्या नहीं।

(फोटो साभार: BolNews)
(फोटो साभार: BolNews)
(फोटो साभार: BolNews)

वहीं, मोमिना अली नामक ट्विटर यूजर ने हमजा अब्बासी पर सभी “हराम चीजों” को वैध बनाने का भी आरोप लगाया।

वेबसाइट al-Islam.org के अनुसार , संगीत इस्लाम में हराम है और इस स्थिति की पुष्टि कुरान की कई आयतों से होती है। वेबसाइट में दिया गया एक कोट इस प्रकार है, “मूर्तियों के प्रदूषण से दूर रहो और झूठे व्यर्थ शब्दों से दूर रहो।” (22:30)। अरबी शब्द “ज़ूर” के कई अर्थ हैं, जिनमें झूठ और संगीत के भाव शामिल हैं। इमाम जाफ़र अस-सादिक (अ) के अनुसार, ‘मूर्तियों के प्रदूषण’ का अर्थ शतरंज है और “व्यर्थ शब्द” का अर्थ संगीत है।

‘काफिरों! अब शुरू हुई असली जंग’: PFI ने BJP विधायक को दी ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी, पत्र में कहा- ‘मोदी-योगी भी हमारी रडार पर’

प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने महाराष्ट्र के भाजपा विधायक विजय कुमार देशमुख (BJP MLA Vijay Kumar Deshmukh) को ‘सिर तन से जुदा’ करने की धमकी दी है। यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब PFI के खिलाफ पिछले महीने देश भर में कार्रवाई की गई थी।

बता दें कि कुछ समय पहले सरकार ने PFI के विध्वंसक गतिविधियों को लेकर संगठन पर प्रतिबंध लगाया है। जाँच एजेंसियों ने जाँच में पाया था कि PFI के आईएसआईएस (ISIS) और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे आतंकवादी समूहों के साथ संबंध हैं। एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह निर्णय लिया।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में भाजपा विधायक विजय देशमुख ने कहा कि PFI नेता मोहम्मद शफी बिराजदार (Mohammad Shafi Birajdar) ने सरकार द्वारा संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध से नाराज होकर उनका सिर काटकर हत्या करने की धमकी दी। यह धमकी एक पत्र के माध्यम से दी गई है। सोलापुर पुलिस पत्र की सत्यता की जाँच कर रही है।

शिकायत में आगे कहा कि PFI सदस्य ने आत्मघाती हमलावरों द्वारा अयोध्या के राम मंदिर और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि जैसे प्रमुख हिंदू मंदिरों को निशाना बनाने की धमकी दी है। आरोपितों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और सीएम आदित्यनाथ योगी (CM Adityanath Yogi) जैसे कई नेता भी उनके रडार पर हैं।

सामने आए पत्र में लिखा है, “अब शुरू हुआ असली जंग। काफिरों, ये तुम्हारे नेता मोदी ने जो गलत काम किया है (प्रतिबंध लगाकर), उसका अंजाम भुगतना ही पड़ेगा। तुम्हारी सरकार ने पहले भी हमारी सिमी (SIMI) पर पाबंदी लगाई थी। उसका नतीजा क्या हुआ, Fail. तुम हमारे PFI पर लाख-लाख कोशिश करो, फिर हम ‘फिनिक्स’ की तरह उभर आएँगे।”

PFI द्वारा भेजी गई चिट्ठी में आगे लिखा है, “तुम लोग हमारे जैसे जहरीले साँप की पूँछ पर पैर रखी है। अब हमारा घर-घर का बच्चा चुप नहीं बैठेगा। हर घर कसाब, अफजल, यूसुफ, याकूब निकलेंगे। ये बात जान लो।”

बता दें कि PFI की देशद्रोही गतिविधियों के कारण ही भारत सरकार ने 22 सितंबर 2022 को उस पर और उससे जुड़े 8 अन्य संगठनों पर पाँच साल के लिए UAPA के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। जिन संगठनों को प्रतिबंधित किया गया उनमें रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमेन फ्रंट (NWF), जूनियर फ्रंट (JF), एम्पावर इंडिया (EI) शामिल हैं।

शाहरुख के पास उर्दू पढ़ने गई थी 8 साल की बच्ची, अकेला देख दुष्कर्म किया: घर रोते-रोते लौटी, बताया- प्राइवेट पार्ट में हुई गलत हरकत

मध्यप्रदेश के विदिशा के थाना पथरिया में 8 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के आरोप में शाहरुख खान नाम के उर्दू पढ़ाने वाले टीचर को गिरफ्तार किया गया है। प्रशासन ने आरोपित की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं प्रशासन ने उसके मकान पर बुलडोजर चलवाया। इस दौरान भारी तादाद में पुलिस भी मौजूद थी।

जानकारी के मुताबिक, कस्बाताल गाँव से 8 साल की बच्ची शाहरुख के घर उर्दू पढ़ने जाती थी। मंगलवार (4 अक्टूबर 2022) के दिन भी ऐसा ही हुआ, लेकिन उस दिन शाहरुख ने उसे अकेला देख उसका दुष्कर्म कर दिया। बच्ची जब अपने घर पहुँची तो उसने सारी घटना के बाद अपने घरवालों को बताई। लड़की ने बताया कि कैसे उसके प्राइवेट पार्ट के साथ शाहरुख ने छेड़खानी की। उसके बाद से उसे असहनीय दर्द है।

शाहरुख की हरकत का अंदाजा होते ही घरवालों ने पुलिस में शिकायत दी और गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) को उसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 376,376एबी और 506 के तहत केस दर्ज हुआ। पीड़िता को अस्पताल ले जाया गया। वहीं पुलिस ने जाकर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

विदिशा के एएसपी समीर यादव ने बताया कि उन्होंने आरोपित शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया है। वह लड़की को ट्यूशन देता था। उसे पुलिस ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि अपराधी को सजा जरूर दी जाएगी।

बता दें कि आरोपित शाहरुख खान के विरुद्ध पड़ताल में सामने आया है कि वह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था, लेकिन उर्दू जानता था और पिछले दो साल से वह बच्चों को उर्दू ही पढ़ा रहा था। उसके घर पर ही बच्चे आकर उर्दू की क्लास लेते थे।

₹1550 करोड़ के 250 किलो हेरोइन जहाजों से जब्त: गुजरात ATS ने 6 पाकिस्तानी पकड़े, NCB की कार्रवाई में 6 ईरानी तस्कर गिरफ्तार

भारत में ड्रग्स की तस्करी (Drugs Smuggling) को लेकर सरकार सतर्क है। सुरक्षा एजेंसियों ने गुजरात (Gujarat) और केरल (Kerala) में 250 किलोग्राम से अधिक हेरोइन जब्त की है। इसके साथ 12 पाकिस्तानी और ईरानी नागरिकों (Pakistani and Iranian Citizens) को गिरफ्तार किया है। इन हेरोइन का बाजार मूल्य 1550 करोड़ रुपए से अधिक है।

भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने गुजरात एटीएस (Gujarat ATS) के साथ मिलकर अहमदाबाद में पाकिस्तानी नाव में सवार 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 350 करोड़ रुपए मूल्य के 50 किलोग्राम हेरोइन भी बरामद की है।

वहीं, केरल के कोच्चि में NCB और भारतीय नौसेना ने संयुक्त रुप से अभियान चलाकर मछली पकड़ने वाले एक ईरानी जहाज को जब्त किया है। इसमें से 1200 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की करीब 200 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है।

गुजरात में हेरोइन बरामदगी को लेकर भारतीय तटरक्षक के अधिकारी ने बताया कि उन्हें पाकिस्तानी नाव की सूचना मिली थी। इसके बाद शनिवार (8 अक्टूबर 2022) की सुबह एक पाकिस्तानी नाव अल साकर को पकड़ा। इसमें 6 लोग सवार थे। इनके पास 350 करोड़ रुपए की कीमत वाले 50 किलोग्राम हेरोइन पकड़ा गया है।

जाँच के लिए नाव को जखाऊ लाया गया है। ICG और एटीएस का पिछले एक साल में यह छठा ऑपरेशन है। एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी घटना है, जिसमें इतनी भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद हुए हैं। इससे पहले 14 सितंबर को एक पाकिस्तानी नाव से लगभग 200 करोड़ रुपए मूल्य की 40 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई थी।

वहीं, केरल के कोच्चि में ईरानी मछली पकड़ने वाली जहाज से 200 किलोग्राम हेरोइन जब्त किया गया है। इसके सभी 6 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है। NCB के उप-महानिदेशक (संचालन) संजय कुमार सिंह ने बताया कि जहाज को जब्त करने के बाद मट्टनचेरी गोदी लाया गया।

संजय सिंह ने बताया कि ईरानी जहाज से मिली हेरोइन 200 पैकेट में थी। इन्हें वाटरप्रूफ सात-परत की पैकिंग में पैक किया गया था। इन पैकेटों पर हरेक में अफगानिस्तान और पाकिस्तान स्थित ड्रग कार्टेल से संबंधित विशिष्ट पहचान मौजूद है। कुछ पैकेट पर ‘स्कॉर्पियन’ सील है, जबकि अन्य पर ‘ड्रैगन’ सील के निशान हैं।

NCB ने कहा कि जब्त की गई हेरोइन अफगानिस्तान से पाकिस्तान ले जाई जा रही थी। इन ड्रग्स को जब्त किए गए जहाज में बीच समुद्र में लादा गया था। एजेंसी ने बताया कि इस ड्रग्स को आगे की डिलीवरी के लिए श्रीलंकाई जहाज देने के लिए भारतीय जल सीमा में पहुँचा था।

संजय सिंह ने कहा कि उस श्रीलंकाई जहाज की पहचान कर रोकने की कोशिश की गई, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। उन्होंने बताया कि आरोपितों ने ड्रग्स के खेप को पानी में फेंकने और समुद्र में कूदकर भागने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया।

नुपूर शर्मा पर चर्चा कर रहे थे BJYM नेता, कट्टरपंथी भीड़ ने पीछे से हमला बोला: हाथ में रॉड और धारदार हथियार, दोस्तों की बदौलत बचे

उत्तर प्रेश में भारतीय जनता पार्टी के यूथ विंग के नेता अभिषेक सिंह राठौर पर कट्टरपंथियों ने हमला किया। BJYM नेता ने ट्विटर पर घटना की जानकारी देते हुए बताया कि चूँकि उन्होंने नुपूर शर्मा मामले पर बात की इसलिए मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने ‘सर तन से जुदा’ का नारा लगाते हुए उनके ऊपर जानलेवा हमला किया।

ऑपइंडिया ने इस घटना की जानकारी होने पर अभिषेक से संपर्क किया। वह बिहार के चंपारण के रहने वाले हैं। घटना के दिन वह नोएडा सेक्टर 44 में रेस्टोरेंट में जा रहे थे। तभी, उन्होंने देखा कुछ लोग इकट्ठा होकर राजनैतिक चर्चा कर रहे थे, वह भी उस चर्चा का हिस्सा बने।

अभिषेक ने कहा, “मैं राजनीति से जुड़ा हूँ तो मुझे लगा कि मुझको मेरे विचार साझा करने चाहिए। मैंने वहाँ कई मुद्दों पर बात की, उसी में नुपूर शर्मा का विवाद भी था।” अभिषेक के अनुसार वह चर्चा के बाद वहाँ से निकल गए लेकिन कुछ ही देर में दर्जनों लोग रॉड और धारदार हथियार लेकर उन्हें मारने आ गए।

अभिषेक बताते हैं कि उनके ऊपर पीछे से हमला हुआ। हमलावरों में दो का नाम अमजद और राशिद था। पीड़ित के मुताबिक ये सारे लोग उस समय वहीं थे जब वो नुपूर शर्मा मामले पर बात कर रहे थे। उनके विचार सुनने के बाद ही कट्टरपंथियों ने उनके ऊपर हमला किया।

इस दौरान भाजपा के युवा नेता को उनके दो दोस्तों ने बचाया और उनको अस्पताल लेकर गए। वहाँ उन्हें इमरजेंसी में इलाज मिला। फिर पुलिस को भी घटना के बारे में सूचित किया गया।

फिलहाल अभिषेक अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने नोएडा एसीपी को लिखित शिकायत दी है। मामले में जाँच जारी है। डीएसपी नोएडा ने अभिषेक के आरोपों वाली वीडियो पर ट्वीट करके कहा कि जाँच में अभी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अभिषेक द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करके आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।

याद दिला दें कि नुपूर शर्मा के टीवी पर की गई टिप्पणी के बाद कट्टरपंथियों ने न केवल उनको जान से मारने की धमकियाँ दी बल्कि उन लोगों को भी मारा जो उनके समर्थन में बोलते, अपने विचार प्रकट करते, नुपूर की फोटो लगाते दिखे। अलकायदा भी इस संबंध में बयान जारी कर दिल्ली, मुंबई, यूपी और गुजरात में धमकियाँ दे चुका है।

जॉब के बदले जमीन, ज्वॉइनिंग सिर्फ 3 दिन में: CBI ने लालू यादव के खिलाफ दायर की चार्जशीट, पत्नी और बेटियों को भी बनाया आरोपित

बिहार की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने Land for Job घोटाले में चार्जशीट दाखिल किया है। इसमें लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी (Rabri Devi), और बेटी मीसा भारती (Misa Bharti) और हेमा यादव (Hema Yadav) सहित 16 लोगों को आरोपित बनाया गया है।

विशेष सीबीआई कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में रेलवे की पूर्व जेनरल मैनेजर सौम्या राघवन (Soumya Raghavan) को भी आरोपित बनाया गया है। सौम्या रेलवे बोर्ड के फाइनांशियल कमिश्नर के पद से सेवानिवृत हुई हैं। आरोपितों में नौकरी हासिल करने वाले सात लोगों के भी नाम हैं।

आरोप पत्र में कहा गया है कि रेलवे में नौकरी देने के बदले लोगों से जमीन रिश्वत के रूप में ली गई थी। इन जमीनों का अधिग्रहण सर्किल रेट से कम और मार्केट रेट से काफी कम रेट पर किया गया था। ये जमीन राबड़ी देवी और उनकी बेटियों भारती एवं हेमा यादव के नाम पर ट्रांसफर किया गया था।

बता दें कि जिस समय यह घोटाला हुआ था, उस समय लालू प्रसाद यादव यूपीए शासनकाल में रेलमंत्री थे। उस समय नौकरी के देने बदले लालू प्रसाद यादव के परिजनों को पटना में करीब 1.05 लाख वर्ग फुट जमीन अधिग्रहित की गई थी।

इस घोटाले में बिना विज्ञापन निकाले रिश्वत देने वाले अभ्यार्थियों को तीन दिन के अंदर रेलवे में नौकरी दे दी गई थी। इतना ही नहीं, इन उम्मीदवारों ने नौकरी के लिए झूठे स्थानांतरण प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया है और रेल मंत्रालय में झूठे प्रमाणित दस्तावेज भी जमा कराए थे।

इस मामले में सीबीआई ने मई महीने में लालू यादव और उनके परिजनों के दिल्ली और पटना के 16 ठिकानों पर छापेमारी की थी। पटना में अधिकारियों ने राबड़ी देवी और तेज प्रताप यादव से अलग-अलग कमरों में पूछताछ की। पूछताछ के लिए 3-3 अफसरों की दो टीमें बनाई गई। दिल्ली में मीसा भारती के आवास पर लालू यादव से CBI के एसपी और डीएसपी स्तर के अफसरों ने पूछताछ की।

जुलाई 2022 में सीबीआई ने लालू प्रसाद यादव के पूर्व OSD भोला यादव को गिरफ्तार कर लिया था। भोला यादव 2004 से 2009 तक लालू यादव के ओएसडी रहे। लालू यादव उस वक्त केंद्रीय रेल मंत्री थे। उसी समय रेलवे भर्ती घोटाला हुआ था। आरोप है कि भोला यादव ही घोटाले का कथित सरगना है।

भोला यादव राजद से विधायक और विधान पार्षद भी रहे हैं। वह लालू यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। कहा जाता है कि लालू प्रसाद का अधिकतर राज भोला यादव को पता है। भोला यादव को लालू यादव का ‘हनुमान’ कहा जाता है। वह चारा घोटाले समेत कई मामले में फँसे लालू यादव के साथ अदालत और अस्पताल हर जगह मौजूद रहते हैं। उन पर भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।

क्या है मामला

रेलमंत्री रहने के दौरान लालू यादव ने साल 2004-2009 के दौरान रेलवे के समूह ‘डी’ में नौकरी देने के बदले अपने परिवार और करीबी लोगों के नाम पर जमीनें ली थीं। ये सारी जमीनें पटना में स्थित हैं। ये जमीन लालू यादव के परिवार द्वारा संचालित कंपनी के नाम पर उपहार के तौर पर लिया गया था।

दरअसल, रेलवे में इन नियुक्तियों के लिए कोई विज्ञापन या सार्वजनिक नोटिस नहीं निकाला गया था। इसके बावजूद पटना के जिन लोगों से जमीनें ली गईं उन्हें जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नियुक्ति दे दी गई।

‘मेरे कंधे पर हाथ फेरे…गंदी गालियाँ बकीं’ : 2 कॉन्ग्रेसी विधायकों पर ट्रेन में महिला को छेड़ने के आरोप, FIR होने पर बोले- इल्जाम गलत है, हमने उसकी शक्ल भी नहीं देखी

मध्यप्रदेश में कॉन्ग्रेस के दो नेताओं के ऊपर ट्रेन में एक महिला यात्री से बदसलूकी करने के आरोप लगे हैं। कॉन्ग्रेसी नेताओं के नाम सिद्धार्थ कुशवाहा (सतना विधायक) और सुनील सर्राफ (कोतमा) है। महिला का आरोप है कि ये दोनों नेता नशे में धुत उनकी बर्थ के पास आए और उनसे बदसलूकी की गई।

महिला की शिकायत

शिकायत में महिला ने बताया कि वह 6 अक्टूबर 2022 को रेवांचल एक्सप्रेस से रीवा स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन जा रही थी। उसकी रिजर्वेशन एसी कोच में थी जहाँ वह अपने 7 माह के बच्चे के साथ बैठी थीं। महिला के मुताबिक, रात के करीब 11.50 पर सामने वाली बर्थ पर दोनों विधायक आए और फिर साइड वाली बर्थ पर बैठकर खाना खाया। इसके बाद दोनों बात करते हुए गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने आगे शिकायत में कहा, “उन्होंने मेरे कंधे को टच करके मुझे उठाया। कहने लगे मैडम आपने खाना खाया है या नहीं। मैंने कुछ नहीं कहा। वे दोनों नशे की हालत में बुरी नीयत से देख रहे थे। मेरे कंधे पर हाथ फेरते हुए बकवास कर रहे थे। मैंने कहा कि मेरा बेटा सो रहा है, गाली-गलौज मत करिए। उन्होंने जब मेरी बात नहीं सुनी तो मैंने अपने पति को कॉल कर पूरी घटना बताई।”

इसके बाद महिला के पति ने घटना की शिकायत सागर पुलिस में और रेल मंत्री को ट्वीट करके दी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सागर पुलिस ने देर रात महिला के पास जीआरपी को भेजा और उन्हें दूसरी सीट पर ट्रांसफर किया गया।

पीड़िता के अनुसार, जब वह जा रही थीं तब भी सुनील सर्राफ ने कहा, “आप क्यों जा रही हो, क्यों परेशान हो रही हो।” महिला ने उनकी शिकायत TTE और सागर पुलिस से की। उन्होंने अपील की कि उन लोगों को ट्रेन से नीचे उतारकर कार्रवाई की जाए। हालाँकि उस समय ऐसा नहीं हुआ।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने दी सफाई

बता दें कि पूरे घटनाक्रम में शिकायत होने के बाद सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने कहा, “नशे में धुत रहने के जो आरोप मुझ पर लगाए गए हैं, वह गलत हैं, ऐसा कुछ भी नहीं है। मेरे जानने वाले बता देंगे कि मैं शराब नहीं पीता। उस दिन भी हम नशे में नहीं थे। हमने तो अपने कंपार्टमेंट की लाइट तक भी नहीं जलाई थी, क्योंकि बच्चा सो रहा था। हमने उन्हें अपनी सीट भी दी थी।”

वहीं सुनील सर्राफ ने बताया कि महिला खुद सिद्धार्थ कुशवाहा की बर्थ पर लेटी थी। ऐसी में उन्होंने बस ये पूछा कि उनकी बर्थ कौन सी है। इसके अलावा उन्होंने कुछ नहीं पूछा। वह कहते हैं कि उनका ट्रेन में सफर रोज होता है, उनकी उम्र 50 की हो गई है, विधायक होकर ये सब करेंगे क्या। उनके मुताबिक महिला का बच्चा सो रहा था इसलिए उन लोगों ने छोटी लाइट में खाना खाया।

विधायक सुनील सर्राफ के मुताबिक, “महिला अगर ऐसा कह रही है तो यह पाप है। हम लोगों ने तो उसका चेहरा भी नहीं देखा। ये सब साजिश लग रहा है वरना महिला ने शिकायत देते हुए हमारी उम्र,और हमारा विधानसभा क्षेत्र तक लिखवाया है। उसे कैसे पता चला कि हम लोगों की उम्र क्या है। कौन सा विधानसभा क्षेत्र है।”

भाजपा ने कॉन्ग्रेस के चरित्र पर सवाल उठाए

उल्लेखनीय है कि इस मामले में शिकायत के बाद सागर थाने में आईपीसी की धारा 354 के तहत छेड़खानी का मुकदमा दर्ज हुआ है। आगे कार्रवाई चल रही है। इस बीच भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस विधायकों ने ट्रेन में एक बहन के साथ छेड़छाड़ की है। प्रियंका गाँधी इस पर जवाब दें कि वो अब क्यों उस बेटी के लिए आगे नहीं आ रहीं। उन्होंने कहा कि पार्टी का असली चेहरा ही यही है।

बांग्लादेश में फिर हिंदू मंदिर पर हमला: ब्रिटिशकालीन मंदिर में घुस कट्टरपंथियों ने माँ काली की प्रतिमा को तोड़ा, सिर को आधा किलोमीटर दूर सड़क पर फेंका

बांग्लादेश में हिंदुओं के प्रति नफरत के कारण उन पर और उनके पूजास्थलों पर हमले की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार (7 अक्टूबर 2022) को इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक बार फिर एक काली मंदिर पर हमला कर मूर्तियों को खंडित कर दिया। प्रतिमा के टुकड़े को आधा किलोमीटर दूर फेंक दिया।

बांग्लादेश के झेनैदाह जिले के दौतिया गाँव में एक ब्रिटिशकालीन एक काली मंदिर है। शुक्रवार को कट्टरपंथी मंदिर में घुसे और प्रतिमा के सिर को तोड़ दिया और उसे ले जाकर लगभग आधा किलोमीटर दूर सड़क पर फेंक दिया। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उधर, पुलिस का कहना है कि वह मामले की जाँच कर रही है।

मंदिर समिति के अध्यक्ष सुकुमार कुंडा ने बताया कि इस मंदिर में अंग्रेजों के जमाने से पूजा होती आ रही है। इधर कुछ दिनों से मंदिरों पर बढ़े हैं, फिर भी इस मंदिर में कोई सुरक्षा व्यवस्था का उपाय नहीं किया गया था।

कुंडा ने कहा कि सुबह 3-4 बजे के हमलावर मंदिर में घुसे और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण बिना किसी डर के मूर्तियों को खंडित कर गए। उन्होंने कहा कि इस हमले में किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुँचा है। हमले की सूचना पुलिस को दी गई है।

बांग्लादेश पूजा सेलिब्रेशन काउंसल के जनरल सेक्रेटरी और ढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर चंदनाथ पोद्दार बताया कि बांग्लादेश में 10 दिवसीय दुर्गा पूजा खत्म होने के 24 घंटे के अंदर यह घटना हुई है। झेनैदाह के ASP अमित कुमार बर्मन ने कहा कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। अज्ञात लोगों के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

पिछले साल भी दुर्गा पूजा के दौरान चाँदपुर जिले में भीड़ ने हिंदू मंदिर पर हमला कर मूर्तियों को खंडित कर दिया था। इसके साथ ही 3 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले के बाद बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल ने प्रधानमंत्री शेख हसीना से अल्पसंख्यक समुदाय को सुरक्षा उपलब्ध कराने की माँग की थी।

मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की घटनाएँ आम बात हैं। इतना ही नहीं, वहाँ नाबालिग हिंदू लड़कियों के अपहरण और बलात्कार की घटनाएँ भी आती रहती हैं। लगातार प्रताड़ना की वजह से बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या घटती जा रही है। वहाँ की 16.9 करोड़ आबादी में हिंदुओं की संख्या करीब 10 फीसदी है।

सजा पूरी होने पर भी भारतीयों को नहीं छोड़ रहा पाकिस्तान, जेल में ही हो रही हैं मौतें: पिछले 9 महीनों में 6 कैदियों ने दम तोड़ा, MEA चिंतित

भारत के प्रति पाकिस्तान की दुर्भावना जगजाहिर है, लेकिन वहाँ की जेलों में बंद भारतीय कैदियों को सजा पूरी करने के बाद भी रिहा नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं, सजा पूरी कर चुके कैदियों की पाकिस्तान की जेलों में मौत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसको लेकर भारत ने चिंता जाहिर की है और पाकिस्तान के संपर्क में है।

सजा पूरी करने के बाद भी पाकिस्तान में जेलों में बंद ऐसे 6 भारतीय कैदियों की पिछले 9 महीनों में मौत हो चुकी है। हालाँकि, ये मौत किस प्रकार हुई, इसका विवरण मंत्रालय ने नहीं दिया है, लेकिन जिस तरह वहाँ की जेलों में भारतीय कैदियों को टॉर्चर किया जाता है, इससे लगता है कि वे सामान्य हालत में नहीं रहे होंगे।

शायद यही कारण है कि सजा पूरी करने के बाद भी इन कैदियों को पाकिस्तान रिहा नहीं करता है कि कहीं उसके द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों का उल्लंघन सामने ना आ जाए। हालाँकि, भारत इन कैदियों को वहाँ की जेलों से छुड़ाने का लगातार कोशिश करता रहता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बताया कि हाल के दिनों में पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय मछुआरों की मौतों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान की जेलों में मारे गए 6 कैदियों में 5 मछुआरे हैं। बागची ने बताया कि कैदियों ने अपनी सजा पूरी कर ली थी, फिर भी पाकिस्तान ने उन्हें रिहा नहीं किया।

अरिंदम बागची ने कहा, “भारतीय कैदियों की मौत की ये बढ़ती घटनाएँ चिंताजनक हैं और पाकिस्तानी जेलों में उनकी सुरक्षा और सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं। यह एक बड़ी और लगातार चलने की समस्या है। पाकिस्तान की कस्टडी में मरे 6 कैदियों में 5 मछुआरे हैं।”

मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम दोहराना चाहेंगे कि पाकिस्तान अपनी हिरासत में सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है और हम अनुरोध करते हैं कि पाकिस्तान सरकार एक बार फिर सभी भारतीयों को तुरंत रिहा करे और उन्हें वापस सौंपे।”

बागची ने कहा कि पाकिस्तान ने इन भारतीय कैदियों को अवैध रूप से जेलों में बंद कर रखा। ये पहले ही अपनी सजा पूरी कर चुके थे। भारत ने इन मछुआरों को जेलों से रिहा कर भारत को सौंपने की कई बार माँग की थी, लेकिन पाकिस्तान इस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं देता।

इससे पहले अगस्त में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री (MoS) वी मुरलीधरन ने कहा था कि सरकार ने भारतीय मछुआरों की सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और पाकिस्तानी हिरासत से उनकी जल्द रिहाई के लिए सभी सहायता प्रदान की जा रही है।

उन्होंने आगे कहा था कि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी और उनकी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को जब्त करने के मामलों को बार-बार पाकिस्तान सरकार के साथ उठाया जाता है और यह बताया जाता है कि इस मुद्दे पर मानवीय और आजीविका के आधार पर विचार किया जा सकता है।

बता दें कि 20 जून 2022 को पाकिस्तान ने अटारी वाघा सीमा के माध्यम से 20 भारतीय मछुआरों को रिहा कर भारत भेजा था। ये मछुआरे अनजाने में पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश कर गए थे। इसके लिए उन्हें चार साल की सजा हुई और सजा काटने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था।

हालाँकि, पाकिस्तान भारत पर संभवत: दबाव बनाए रखने के लिए मछुआरों सहित सजा पूरी कर लिए सभी भारतीय कैदियों को रिहा नहीं करता है। ऐसे भी कई मामले आए हैं, जिनमें भारतीय सीमा में होने के बावजूद इन मछुआरों का अपहरण करने का आरोप पाकिस्तानी सैनिकों पर लगा है।

महसा अमिनी की मौत का कारण बीमारी थी, पिटाई से कुछ नहीं हुआ: जिस लड़की को हिजाब सही से न पहनने पर पुलिस ने मारा, उस पर ईरान ने दी सफाई

ईरान में बीते दिनों हिजाब ढंग से न पहनने के कारण हुई महसा अमिनी की हत्या के बाद वहाँ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। तमाम वीडियोज सामने आ चुके हैं जो बताते हैं कि महसा को कितनी बेरहमी से पीटा गया। बावजूद इन प्रमाणों के ईरान के एक संगठन ने अपना बयान जारी कर दावा किया है कि महसा की मौत पीटे जाने के कारण नहीं बल्कि बीमारी से हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महसा अमीनी की मौत के तीन सप्ताह बाद ईरान के फोरेंसिक संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि महसा की मौत बीमारी की वजह से हुई थी न कि उसकी मौत का कारण पुलिस हिरासत में हुई मारपीट है। इस मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है उसकी मौत आठ साल की उम्र में हुई ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी से जुड़ी हुई थी।

बता दें, गत 13 सितंबर को हिजाब न पहनने की वजह से महसा अमीनी को मॉरल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तीन दिन बाद यानी 16 सितंबर को पुलिस कस्टडी में ही उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद से ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए। जो कि सरकार की दमनकारी नीतियों के कारण हिसंक होते चले गए।

ईरान के लगभग हर शहर में महिलाएँ मॉरल पुलिसिंग और हिजाब कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर रही हैं। ईरान में महिलाएँ सरकार के लिए मुश्किल का सबसे बड़ा सबब बन गई हैं। न तो वो हिजाब पहनने को तैयार हैं और न ही बाल ढंकने को तैयार हैं।

हिजाब विरोधी प्रदर्शन से ईरानी सरकार पूरी तरह परेशान हो चुकी है। प्रदर्शनों से घबराई हुई इब्राहिम रईसी सरकार दमन पर उतारू है। कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा वाली सरकार ने कुछ दिन पहले ईरान में इंटरनेट भी बंद कर दिया था। ऐसा कहा जा रहा है कि ईरान में बीच-बीच में कभी भी इंटरनेट बंद किया जा रहा है। यही कारण है कि वहाँ से काफी कम जानकारी सामने आ रही है।

गौरतलब है कि 16 सितंबर से शुरू हुए यह आंदोलन अब विकराल रूप धारण करता जा रहा है। प्रदर्शनकारी हिजाब की बाध्यता दूर करने की माँग को लेकर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह अंतिम सांस तक अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे। यब प्रदर्शन अब ईरान के सभी 31 प्रांतों के 164 शहरों में फैल गया है। इस प्रदर्शन के दौरान, अब तक 15000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि, करीब 100 लोगों की मौत हो चुकी है।