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इंडोनेशिया में फुटबॉल मैच खत्म होते ही भड़का दंगा: 129 की मौत, 180 घायल, 34 लोग स्टेडियम में मरे

इंडोनेशिया में एक फुटबॉल मैच के दौरान भड़की हिंसा में लगभग 129 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में हालात काबू कर रहे पुलिस पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इस हिंसा में लगभग 180 लोग घायल भी हुए हैं। घटना पूरी जावा इलाके की है जहाँ एक टीम की हार से उसके प्रशसंक भड़क गए और उन्होंने मैदान में घुस कर विजेता खिलाडियों पर हमला बोल दिया। घटना रविवार (2 अक्टूबर 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना अरेमा एफसी और पर्सबाया सुरबाया के बीच हुए फुटबॉल मैच के दौरान घटी। इस मैच में अरेमा एफसी की 3-2 से हार हो गई। इस हार से नाराज सैकड़ों समर्थक मैदान में घुस गए और उन्होंने हिंसा करनी शुरू कर दी। मौके पर हालात को संभालने के लिए इंडोनेशिया के सशस्त्र बलों ने मैदान में प्रवेश किया तो उत्पात मचाने वाले उनसे भी भिड़ गए। हिंसक भीड़ पर्सबाया सुरबाया के खिलाडियों पर हमला करना चाह रही थी जिन्हें पुलिसकर्मी बचाना चाह रहे थे। इस हिंसा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बताया जा रहा है कि इसके बाद सुरक्षा बलों और हारी हुई टीम के प्रशसकों के बीच झड़प शुरू हो गई। हिंसक भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर सामान फेंकने शुरू कर दिए। सुरक्षा बलों ने भी भीड़ को काबू करने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़े। इसी दौरान विजेता टीम के समर्थक भी हारी हुई टीम के प्रशंसकों से भिड़ गए।

पूर्वी जावा के पुलिस चीफ निको अफिंटा के अनुसार 34 मौतें स्टेडियम के अंदर ही हो गईं थीं, बाकी लोगों की मौत अस्पताल ले जाते या इलाज के दौरान हुई। उन्होंने बताया कि मरने वाले में 2 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। अफिंटा के मुताबिक कई लोग बाहर निकलने के दौरान भी कुचलकर, दम घुटने से मारे गए।

पुलिस का मानना है कि कई गंभीर रूप से घायलों की हालत को देखते हुए अभी मृतकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इस हिंसा के बाद पीटी लीगा इंडोनेशिया बारू (एलआईबी) के अध्यक्ष अखमद हादियान लुकिता ने हिंसा में मृत लोगों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने कहा कि इस बात के पूरे प्रयास किए जाएँगे कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दुबारा न हों।

1300 छेद, 600 किलो बारूद, 60 एक्सपर्ट: ट्विन टावर के बाद पुणे में धराशायी हुआ चांदनी चौक ब्रिज, मात्र 6 सेकेंड लगे; Video देखें

यूपी के नोएडा स्थित सुपरटेक ट्विन टावर को सफलतापूर्वक गिराने के बाद अब महाराष्ट्र के पुणे के एक व्यस्त इलाके में पुराने पुल को सफलतापूर्वक गिराया गया है। यह ब्रिज काफी पुराना हो गया था, इसलिए इसे गिराने का फैसला लिया गया था।

इस पुल को एडिफिस इंजीनियरिंग नाम के फर्म ने शनिवार-रविवार (1-2 अक्टूबर 2022) की रात को गिराया। यह वही फर्म ने जिसने नोएडा के ट्विन टावर को भी गिराया था। जिला कलेक्टर राजेश देशमुख के अनुसार, जिस ब्रिज को गिराया गया है, वह चाँदनी चौक नाम के व्यस्ततम इलाके में स्थित था और इसे सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

एडिफिस ने इस पुल को भी गिराने में उसी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसका उपयोग वह ट्विन टावर को गिराने के लिए किया था। यानी, पुल को कंट्रोल्ड ब्लास्ट के जरिए पुल को गिराया गया। इस तकनीक में विस्फोटकों को ‘चार्जिंग’ प्रक्रिया के तहत टारगेट में फिट किया जाता है, उसके बाद उसमें विस्फोट किया जाता है।

पुल में भी चार्जिंग प्रक्रिया के तहत विस्फोटक को लगाया गया था। इसके बाद विस्फोट करने पर पुल अंदर की ओर गिर गया। इस स्थान पर अब नए प्रोजेक्ट के तहत नया निर्माण किया जाएगा। इसी निर्माण के लिए स्थानीय प्रशासन ने यह निर्णय लिया। वहीं, ट्विन टावर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गिराया गया था। टावर पर भवन निर्माण के नियमों के उल्लंघन का आरोप था।

एडिफिस इंजीनियरिंग के साथ एनएचआईए (NHAI) की टीम वहाँ मौजूद रही। पुल को गिराने के लिए पुल में ड्रिल कर 1,300 छेद किए गए। इसके लिए 60 एक्सपर्ट की मदद ली गई। इन छेदों में 600 किलोग्राम तरल विस्फोटकों को भरा गया और फिर उसे उड़ाया गया।

बता दें कि नोएडा के ट्विन टावर को गिराने के लिए उसके पिलरों में 9,400 छेद किए गए और उनमें करीब 3,500 किलोग्राम विस्फोटक भरे गए थे। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए हर तरह के सुरक्षा उपाय किए गए थे। वहीं, पुणे में भी उन्हीं सुरक्षा उपायों को लागू किया गया।

कभी भी गिरफ्तार किए जा सकते हैं पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान, जारी हुआ वॉरंट

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान किसी भी समय गिरफ्तार हो सकते हैं। शनिवार (1 अक्टूबर, 2022) को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया गया है। यह गिरफ्तारी वॉरंट अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेबा चौधरी के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में जारी किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मरगल्ला थाने के एरिया मजिस्ट्रेट ने इमरान खान के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया है। महिला जज को धमकाने के मामले में इमरान खान के खिलाफ इस्लामाबाद सदर मजिस्ट्रेट अली जावेद की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी।

इस एफआईआर में पाकिस्तान दंड संहिता (पीपीसी) की चार धाराओं- 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान), 189 (लोक सेवक को चोट की धमकी), और 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा) व आतंकवाद विरोधी अधिनियम की धारा 7 तथा धारा 144 का उल्लंघन शामिल है।

बता दें कि इमरान खान के खिलाफ यह वॉरंट उनके द्वारा हलफनामा प्रस्तुत करने के कुछ घंटों के अंदर आया है। इस हलफनामे में उन्होंने कहा है कि ऐसा लगता है कि उन्होंने 20 अगस्त को इस्लामाबाद की रैली में अपनी सीमा पार कर ली थी।

इस हलफनामे में इमरान खान ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह भविष्य में ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे किसी भी अदालत और न्यायपालिका, खासकर निचली न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचे। इमरान ने यह भी कहा है कि पिछली सुनवाई में उन्होंने अदालत के सामने जो भी कहा है उसका पूरी तरह से पालन करेंगे। वह इस संबंध में अदालत की संतुष्टि के लिए आगे की कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं अगर अदालत कहेगी तो वह माफी माँगने के लिए भी तैयार हैं।

आरोप है कि 20 अगस्त को इस्लामाबाद में आयोजित एक रैली में इमरान खान ने अपने भाषण में कई आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिसके आधार पर उनके खिलाफ आतंकवाद विरोधी अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालाँकि, बाद में उनके खिलाफ अन्य धाराएँ जोड़ी गईं थीं।

6 दिन से गायब केरल के भाजपा कार्यकर्ता का मिला शव, ‘दृश्यम’ स्टाइल में घर में ही दफना दी थी लाश: नए फर्श ने बढ़ा दिया था पुलिस का शक

केरल के कोट्टयम जिले के चंगनसेरी से भाजपा कार्यकर्ता बिंदु कुमार का शव बरामद हुआ है। वो बीते 26 सितंबर से लापता थे। उनका शव मशहूर बॉलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ स्टाइल में एक घर के अंदर दफनाया गया था। फर्श की खुदाई कर पुलिस ने शव बरामद किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 43 वर्षीय बिंदु कुमार किसी रिश्तेदार की मौत के बाद उसके यही जाने के लिए 26 सितंबर को घर से निकले थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे तब उनके परिवार वालों ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

इसके बाद पुलिस ने कई एंगल से जाँच शुरू कर दी थी, जिसमें राजनीतिक एंगल होने की बात भी कही जा रही थी। पुलिस की शुरुआत जाँच में बिंदु कुमार का फोन लगातार आउट ऑफ कवरेज आ रहा था। हालाँकि, इस जाँच में यह सामने आया कि चंगनसेरी के एसी कॉलोनी में बिंदु कुमार की आखिरी लोकेशन थी। इसके बाद पुलिस ने जाँच को आगे बढ़ाते हुए हुए एसी कॉलोनी में छानबीन की तो जाँच घूम-फिर कर मुथुकुमार के घर पर जाकर रुक रही थी।

चूँकि, मुथुकुमार के घर पर पुलिस को नया फर्श दिख रहा था इसलिए पुलिस ने वहाँ पर खुदाई शुरू की। 6 घण्टे की खुदाई के बाद पुलिस को वहाँ से शव बरामद हुआ है। मुथुकुमार को बिंदु कुमार का परिचित बताया जा रहा है। इससे पहले उनकी बाइक वाकाथनम से बरामद हुई थी। बता दें, बॉलीवुड फिल्म ‘दृश्यम’ में भी इसी तरह हत्याकर शव को पुलिस स्टेशन में दफनाया गया था। हालाँकि, फिल्म में दिखाया गया है कि काफी जाँच के बाद भी शव बरामद नहीं हो सका था।

फिलहाल पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ता बिंदु कुमार के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस मुथुकुमार और उसके घर के सदस्यों से पूछताछ कर रही है। मौके पर पहुँचकर फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ, डॉग स्क्वॉड समेत पुलिस विभाग की अलग-अलग टीमों ने जाँच शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस ने कहा है कि बिंदू कुमार आर्यडू के रहने वाले थे और उनके लापता होने के बाद उनकी माँ ने अलाप्पुझा उत्तर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें ढूँढ तो लिया, लेकिन तब तक उसकी हत्या कर दी गई थी।

दुर्गा पूजा कार्यक्रम में गरबा करता दिखा मुनव्वर फारूकी, सेल्फी लेने के लिए होड़: वीडियो आया सामने, लोगों ने पूछा – हिन्दू धर्म का मजाक बनाने वाले को क्यों बुलाया?

कॉमेडी के नाम पर हिन्दू देवी-देवताओं को गाली देकर शो करने वाला मुनव्वर फारुकी गरबा के कार्यक्रम में देखा गया, जिसके बाद लोग आक्रोशित हैं। सोशल मीडिया पर भी मुनव्वर फारुकी के वीडियोज वायरल हो रहे हैं, जिनमें उसे गरबा का नृत्य करते हुए देखा जा सकता है। लोगों का कहना है कि हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को एक हिन्दू त्योहार में क्यों बुलाया गया है? मुनव्वर फारूकी के आसपास कई हिन्दू महिला-पुरुष भी देखे जा सकते हैं।

शुक्रवार (30 सितंबर, 2022) को ‘Rj footprint’ नाम के यूट्यूब चैनल से एक वीडियो आया, जिसमें गरबा के कार्यक्रम में फाल्गुनी पाठक गाना गा रही रहीं। इसी कार्यक्रम के बीच में मुनव्वर फारुकी भी देखा गया, जिसके साथ सेल्फी लेने के लिए लोगों में होड़ मची हुई थी। इस कार्यक्रम का वीडियो ट्विटर पर भी वायरल हुआ, जिसमें मुनव्वर फारुकी को गरबा में लड़कियों और लड़कों के साथ नाचते हुए देखा गया। लोग इससे खासे नाराज़ दिखे।

याद दिला दें कि गरबा पंडाल में पहचान छिपाकर मुस्लिम युवकों के घुसने के मामले सामने आए हैं। पकड़े जाने पर गुजरात के अहमदाबाद और मध्य प्रदेश के इंदौर में ऐसे युवकों को लोगों ने पीट दिया। इन पर हिंदू लड़कियों के फोटो-वीडियो बनाने के आरोप हैं। इंदौर में सभी युवकों ने अपने नाम गलत बताए। किसी ने अपना नाम संदीप तो किसी ने बबलू बताया और आईडी भी नहीं दिखाई। बाद में सभी के असली नामों की पहचान होने पर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया।

ऐसी ही घटना शुक्रवार (30 सितंबर, 2022) को राजस्थान के जयपुर से सामने आई है, जहाँ कुछ मुस्लिम युवक गरबा पंडाल में जबरन घुस गए थे। लेकिन, जैसे ही बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे, मुस्लिम युवक फरार हो गए। कुछ मुस्लिम युवक मैरिज गार्डन में आ धमके और वहाँ मौजूद गार्ड से कार्यक्रम में एंट्री के लिए बहस करने लगे। गार्ड ने उन लोगों को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन मुस्लिम युवक गार्ड से बदतमीजी कर गरबा पंडाल में घुस गए।

धर्म ही नहीं जमीन भी गँवा रहे हिंदू: कब्जे की भूमि पर चर्च-कब्रिस्तान से लेकर मिशनरी स्कूल तक, पहाड़ों का भी हो रहा धर्मांतरण

अपनी पिछली रिपोर्टों में हम आपको सनातन को समर्पित पहाड़ी कोरबा की जमीनों पर कॉन्ग्रेसी से लेकर ईसाई मिशनरी की गिद्ध दृष्टि के बारे में बता चुके हैं। मदकू द्वीप जैसी जगहों पर ईसाइयत की घुसपैठ से अवगत करा चुके हैं। जमीनी स्थिति इससे भी कहीं अधिक भयावह है। जमीन चाहे सरकारी (Government land) हो या अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribes) की मिशनरी कब्जा कर रहे हैं। इन जमीनों पर चर्च से लेकर स्कूल तक चल रहे हैं। कब्रिस्तान हैं। जिन पहाड़ों तक पहुँचना आसान नहीं, क्रॉस गाड़कर उनका भी धर्मांतरण कर दिया गया है। मिशनरी के इस लैंड जिहाद से वे जनजातीय हिंदू भी पीड़ित हैं जो धर्मांतरित होकर ईसाई बन चुके हैं।

यह स्थिति तब है जब छत्तीसगढ़ में विशेष कानून है। राज्य के भू राजस्व कानून की धारा 170 (ख) कहती है कि 2 अक्टूबर 1959 को यदि कोई जमीन अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के किसी व्यक्ति की रही है और बाद में उस पर किसी एसटी या गैर एसटी का कब्जा हुआ हो तो उसे दो साल के भीतर यह सूचना देनी होगी कि वह उस जमीन पर कब्जे में कैसे आया। ऐसा नहीं होने पर उसका कब्जा अवैध माना जाएगा और उसे जमीन खाली करनी होगी। वकील राम प्रकाश पांडेय के अनुसार इस कानून के तहत यदि कोई आदिवासी व्यक्ति जमीन पर कब्जे को लेकर खुद आवेदन नहीं देता है तो यह सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह पटवारी से इस बारे में रिपोर्ट माँगे कि 2 अक्टूबर 1959 को उस जमीन का मालिक कौन था और आज किसका कब्जा है। पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर भी अदालत फैसला सुना सकती है।

कुछ साल पहले राज्य के जशपुर जिले में ही ऐसे करीब 250 मामले सामने आए थे, जिनमें 170 (ख) का उल्लंघन कर एसटी वर्ग की जमीन पर चर्च बनाए गए थे। वकील राम प्रकाश पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया, “ये मामले काफी समय से राजनितिक दखल के कारन रेवेन्यू कोर्ट में लंबित पड़े थे। इन मामलों को 2007 में हाई कोर्ट के संज्ञान में लाया गया। हाई कोर्ट ने 6 महीने के भीतर ऐसे सभी मामलों के निपटारे के निर्देश दिए। इसके बाद अधिकांश मामलों में चर्च को जमीन खाली करने के आदेश दिए गए थे। लेकिन दुर्भाग्य से कई साल बीतने के बाद जमीनें खाली नहीं हुई हैं।”

लोयोला स्कूल के प्रिंसिपल रहे आर गीट्स पर प्रशासनिक साँठगाँठ से जमीन खरीदने का है आरोप

राजनीतिक और प्रशासनिक साँठगाँठ से जुड़ा एक और मामला कुनकुरी के लोयोला हायर सेकेंडरी स्कूल का है। 50 के दशक में कुछ सालों तक इस स्कूल के प्रिंसिपल रहे आरएच गीट्स बेल्जियम के नागरिक थे। उन्होंने खुद को कुनकुरी का निवासी बताकर तत्कालीन कलेक्टर की अनुमति से इग्नेश लकड़ा नाम के एक व्यक्ति की जमीन ले ली। आज भी इस जमीन पर मिशनरी संस्था का कब्जा है और उस पर इमारत बनी हुई है, जबकि भारत में कोई विदेशी नागरिक जमीन की खरीदी कर ही नहीं सकता। पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया, “इग्नेश लकड़ा ने इस मामले में केस किया था। कानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते उसकी मौत हो चुकी है। अब उसके बच्चे इस लड़ाई को लड़ रहे हैं।”

क्लेमेंट लकड़ा जिनकी 10 एकड़ जमीन पर है मिशनरी का कब्जा

ऐसा ही मामला क्लेमेंट लकड़ा का भी है। कुनकुरी के दुलदुला निवासी क्लेमेंट के पिता भादे उर्फ वशील उरांव का धर्मांतरण 1957-58 में हुआ था। उसके बाद उनकी करीब 10 एकड़ जमीन पर मिशनरी ने कब्जा कर लिया। वशील की भी मौत हो चुकी है। क्लेमेंट ने ऑपइंडिया को बताया, “अदालत से हमारे पक्ष में फैसला आ चुका है। लेकिन मिशनरी जमीन खाली नहीं कर रहे। धमकी दे रहे हैं। बेटियों का भविष्य बर्बाद करने की बात कहते हैं।”

मिशनरियों की ताकत को इस बात से भी समझा जा सकता है कि क्लेमेंट की पत्नी सुषमा लकड़ा सरपंच हैं। बावजूद इस परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है। निराश और हताश क्लेमेंट ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “अब मैं अपने पुराने धर्म में लौट जाना चाहता हूँ।” (क्लेमेंट के मामले पर हम आगे विस्तार से रिपोर्ट करेंगे। इन मामलों से जुड़े सारे कानूनी दस्तावेज भी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं)

कुनकुरी के क्रुस टोंगड़ी का विवादित कब्रिस्तान

कुनकुरी में देश का सबसे बड़ा चर्च भी है। रोजरी की महारानी महागिरिजाघर एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च भी बताया जाता है। कुनकुरी शहर के मुख्य मार्ग से जो सड़क इस चर्च के लिए जाती है, उस पर बना गेट भी विवादित है। स्थानीय लोगों का दावा है कि हाई कोर्ट के स्टे के बावजूद सरकारी जमीन पर इस गेट का निर्माण हुआ है।

चर्च के पीछे का इलाका क्रुस टोंगड़ी कहलाता है। यहाँ बहुसंख्यक आबादी धर्मांतरित है। यहाँ भी कब्रिस्तान और रोड कब्जे की जमीन पर बनाए जाने के आरोप हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि कुनकुरी में मिशनरी स्कूल के पीछे जो पहाड़ी हिस्सा है, वहाँ हिंदू नियमित रूप से योग करते थे। एक दिन रातोंरात क्रॉस लगाकर उस जगह का भी धर्मांतरण कर दिया गया। इसी तरह भंडरी पहाड़ पर भी क्रॉस गाड़ दिए गए हैं, जबकि इस जगह पर आसानी से पहुँचना भी संभव नहीं है।

क्रॉस गाड़ उन पहाड़ों का भी हो रहा धर्मांतरण जहाँ पहुँचना आसान नहीं

बाइबिल का हर भाषा में अनुवाद करने के मिशन पर काम कर रही संस्था ‘अनफोल्डिंग वर्ल्ड’ के CEO डेविड रीव्स ने 2021 में बताया था कि भारत में 25 साल में जितने चर्च बने थे, उतने अकेले कोरोना काल में बनाए गए हैं। ऐसा ही एक जशपुर के गिरांग में स्थित है। यह चर्च उस जगह पर बनाई जा रही थी, जहाँ जाने के लिए रास्ता तक नहीं है। विरोध के बाद इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया और यह बंद पड़ा है। भाजयुमो से जुड़े अभिषेक गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया, “ईसाई मिशनरी इसी तरह लैंड जिहाद करती है। जहाँ खाली जगह दिखी ये क्रॉस गाड़ देते हैं। चर्च बना लेते हैं। कुछ समय बाद प्रशासनिक मिलीभगत से वहाँ जाने का रास्ता तैयार हो जाता है और फिर प्रार्थना होने लगती है। बाद में आप जितना विरोध कर लें प्रशासन कब्जा नहीं हटाता।”

कोरोना काल के दौरान गिरांग में हो रहे इस चर्च का निर्माण विरोध के बाद रोकना पड़ा था

छत्तीसगढ़ के एक जिले के इन मामलों से आप पूरे राज्य की स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। इससे भी खतरनाक स्थानीय लोगों के मन में ईसाई मिशनरियों का डर है। अपनी रिपोर्टिंग के दौरान हमने पाया कि ज्यादातर लोग कैमरे पर बात नहीं करना चाहते थे। वे कई लोगों को विभिन्न मामलों में फँसाए जाने का हवाला देते हुए कह रहे थे कि खुलकर सामने आने से उनके लिए भी परेशानी खड़ी हो जाएगी। हिंदुओं के भीतर का यह ‘डर’ ईसाई मिशनरियों के फलने-फूलने में ‘खाद’ का काम कर रहा है।

‘नमाज़ पढ़ने के लिए समय क्यों नहीं दिया?’: यूपी सरकार ने बढ़ाए मदरसों में पढ़ाई के घंटे तो भड़के मुल्ला-मौलवी, अब राष्ट्रगान भी हुआ अनिवार्य

शनिवार (1 अक्टूबर, 2022) से उत्तर प्रदेश के मदरसों में होने वाली पढ़ाई का शेड्यूल बदल गया है। अब राज्य के सभी मदरसों में एक घंटे अधिक यानी 6 घण्टे पढ़ाई होगी। उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अब मदरसों में पढ़ाई के लिए सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक का समय तय हुआ है। मदरसों में पढ़ाई के इस नए शेड्यूल को लेकर जहाँ एक ओर योगी सरकार की वाहवाही हो रही है। वहीं, इस शेड्यूल में नमाज का वक्त नहीं होने के कारण विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं।

दरअसल, उत्तर प्रदेश राज्य मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार अब सभी मदरसों में 6 घण्टे पढ़ाई होना अनिवार्य है। अब तक मदरसों में 5 घण्टे ही पढ़ाई होती थी। नए निर्देशों के अनुसार, मदरसों में पढ़ाई शुरू होने से प्रतिदिन दुआ के साथ ही राष्ट्रगान को भी अनिवार्य किया गया है। इस शेड्यूल के अनुसार, मदरसों में सभी कक्षाएँ सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगीं। इसके बाद 30 मिनट का लंच ब्रेक होगा और फिर कक्षाएँ 12:30 से शुरू होकर दोपहर 3 बजे तक चलेंगी।

राज्य सरकार द्वारा तय किए गए इस शेड्यूल पर उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ इफ्तिखार जावेद ने कहा है कि राज्य सरकार ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया है। मदरसा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

हालाँकि, मौलवियों का कहना है कि इस शेड्यूल में मदरसा में पढ़ने वाले छात्रों को नमाज के लिए टाइम नहीं दिया गया है। मुस्लिम समाज का एक तबका, खासकर कुछ मौलाना इसका विरोध कर रहे हैं। मौलाना सुफियान निजामी ने मदरसों में एक घंटा ज्यादा पढ़ाई कराने के निर्देश पर एतराज जताया है।

मौलाना सुफियान निजामी ने कहा है कि पढ़ाई के समय में बढ़ोतरी करने से समस्याएँ उत्पन्न होंगी। उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने और पढ़ाने वाले नमाज भी पढ़ते हैं और मदरसों के समय में जो बदलाव किया गया है, उससे मदरसों से जुड़े लोगों की नमाज पर असर पड़ेगा। मौलाना निजामी ने यह भी कहा है कि मदरसा बोर्ड और उसमें काम कर रहे लोगों को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

‘AC क्लास में सेक्स की सुविधा’: पाकिस्तान की रेलवे का कुछ ऐसा है हाल, वायरल हो गई टिकट की तस्वीर

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान समेत सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के कई नेताओं व प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO Pakistan) से ऑडियो लीक होने के बाद अब वहाँ के रेलवे का टिकट सिस्टम हैक होने की बात सामने आई है। टिकट सिस्टम हैक करने के बाद हैकर ने टिकट में प्रिंट होने वाले टेक्स्ट को बदल दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (30 सितंबर, 2022) को हैकर ने रेलवे के टिकट सिस्टम को हैक किया था। इसके बाद, टिकट में ‘एसी क्लास में सेक्स सर्विस उपलब्ध है’ प्रिंट हो रहा था। लोकल ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्री रेलवे द्वारा दी जा रही इस ‘सुविधा’ को देखकर हैरान रह गए थे।

हालाँकि, जब कई टिकट्स में ‘एसी क्लास में सेक्स सर्विस उपलब्ध है’ लिखा होने की बात सामने आई तब यात्रियों ने टिकट बुकिंग कार्यालय में हंगामा करते हुए विरोध जताया। यात्रियों ने इस बारे में रेलवे टिकट मैनेजमेंट को भी सूचित किया था। जिसके बाद, रेलवे अपने टिकट सिस्टम में सुधार करने में जुट गया था। हालाँकि, इससे पहले सब कुछ ठीक होता, पाकिस्तान रेलवे का यह टिकट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था।

पूरा मामला सामने आने के बाद थाल एक्सप्रेस के अधिकारियों ने डीएसपी रेलवे रावलपिंडी को एक आवेदन प्रस्तुत किया है। इस आवेदन में कहा गया है कि उनका सॉफ्टवेयर हैक हो गया था। थाल एक्सप्रेस के अधिकारियों ने डीएसपी से अज्ञात हैकरों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आग्रह करते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा है कि इस हैकिंग की वजह से कंपनी की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।

इस बारे में पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट कर बताया, “टिकट पर बताई गई सुविधाओं का कारण यह है कि कल थाल एक्सप्रेस की टिकट सिस्टम हैक हो गया था। यह सिस्टम एक प्राइवेट ठेकेदार के पास है। रेलवे के टिकट सिस्टम को हैक कर लिया गया था लेकिन अब इसे रिकवर करते हुए हैकर से मुक्त कर दिया गया है।”

हजार राउंड गोलीबारी, 16 मौतों की आशंका: राजद नेता के प्रभाव वाले इस इलाके में माफिया के सामने पुलिस भी बेबस, हथियार वालों को ₹60000 तक का वेतन

बिहार में सत्ता बदलते ही जो काम पर्दे के पीछे हो रहा था, वह अब खुलेआम होने लगा है। माफिया सक्रिय हो गए हैं और हत्याएँ आम हो गईं। बिहार में पिछले जंगलराज की विशेषताएँ थीं, वो सब अब नजर आने लगी हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि बिहार में ‘जंगलराज-2’ का आगाज हो गया है।

जंगलराज कहने के पीछे इसके उद्देश्य की सार्थकता है। जंगलराज में माफियाओं का राज चलता है और पुलिस को उनसे बचकर रहना पड़ता है। पिछली बार भी यही होता था, इस बार भी यही हो रहा है। भोजपुर, पटना और सारण (छपरा) के गंगा और सोन नदी के दियारा क्षेत्र माफियाओं का अड्डा बन गया है और यहाँ पुलिस भी जाने से घबराने लगी है।

पिछले कुछ दिनों से सोन नदी के बालू घाट पर वर्चस्व को लेकर दो गिरोहों में इतनी गोलियाँ चलीं कि पूरा इलाका थर्रा गया। यहाँ भोजपुर से सटे पटना जिले के मनेर इलाके के अमनाबाद गाँव के बालू घाट से लोगों ने 500 गोलियों के खोखे बटोरे। कहा जा रहा है कि इसमें करीब 1000 राउंड गोलियाँ चली हैं। घटनास्थल पर आधा दर्जन से अधिक जगहों पर खून के धब्बे थे।

इस गोलीकांड में अब तक 16 लोगों के मारे जाने की बात कही जा रही है। हालाँकि, पुलिस सिर्फ एक मौत का दावा कर रही है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बिहटा के गोरेयास्थान के शत्रुघ्न राय और दब्यापुर भूधर टोला के लालदेव राय की इसमें मौत हो गई है। ये दोनों सिपाही गुट के बताए जाते हैं।

शत्रुघ्न राय की बेटी का कहना है कि उसके पिता और लालदेव अपनी नाव लेकर बालू लादने गए थे, लेकिन उनकी हत्या कर दी गई और लाश को बालू में दफन कर दिया गया है। बेटी का कहना है कि जब वह पुलिस के पहुँची और हत्या की बता कही तो पुलिस ने भगाते हुए कहा कि भागो कोई हत्या नहीं हुई है। पुलिस पर मृतकों की संख्या छिपाने के आरोप लग रहे हैं।

उधर भोजपुर जिले के कमलेश कुमार के भी मारे जाने की बात कही जा रही है। कमलेश मजदूरी करता है और वह रास्ते से अपने गाँव लौट रहा था। इसी दौरान उसे गोली लगी। गोली लगने के बाद माफिया उसे लेकर जाने लगे, लेकिन उसके परिजन जैसे तैसे लेकर भागे।

लोगों का कहना है कि इस कांड में कम से कम 16 लोग मारे गए हैं और माफियाओं ने उनकी लाशों को बालू में गड्ढा खोदकर दफन कर दिया है। स्थानीय लोगों की माँग है कि घटनास्थल पर डॉग स्क्वॉयड को लाया जाए। इससे दफन मृतकों का राज खुलेगा।

कहा जा रहा है कि यहाँ वर्चस्व को लेकर दो गुटों में पिछले तीन महीनों से छिटपुट गोलीबारी हो रही है। इसमें कार्बाइन से लेकर एके-47 तक अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया गया है। कुछ हथियारों की रेंज इतनी है कि नदी के उस पार से चलाई गई गोली इधर के इलाके को भी पार कर गई।

गैंगवार को देखते हुए लोगों ने पुलिस को लगातार आवेदन दिया जाता रहा, लेकिन पुलिस शिथिल बनी रही। हालाँकि, जब मामला गंभीर हो गया तो एसपी सिटी के नेतृत्व में पुलिस ने कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया। उस दौरान पुलिस पर भी बालू माफियाओं ने हमला कर दिया।

पुलिस ने फायरिंग के मामले में अमनाबाद में श्रीराय नाम के एक व्यक्ति के घर छापेमारी करने गई थी तो पुलिस टीम पर गोली चला दी। इसके बाद फायरिंग करते हुए श्री राय, उसके दो बेटों- प्रवीण कुमार और नवीन कुमार, चचेरे भाई गोपाल राय और साथी भाग निकले। हालाँकि, भागते हुए पुलिस ने घर की तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। श्रीराय के घर से देसी कट्टा, गोलियाँ और कुछ रुपए बरामद किए गए हैं। 

कहा जा रहा है कि दोनों माफिया गुट के लोग 60,000 की सैलेरी पर लोगों की भर्ती कर रहे हैं। बस उसके पास हथियार होना चाहिए। यह हथियार वैध हो या अवैध, चलेगा। अनगिनत गोली माफिया की तरफ से उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद शुरू हो जाता है खूनी खेल।

दियारा क्षेत्र में फौजी और सिपाही गैंग की हुकूमत चलती है। यहाँ और गैंगवार आम बात है, लेकिन गैंग के सदस्य या गोली लगने से किसी बाहरी की मौत होने पर लाश वहीं दफन कर जाती है, ताकि कोई सबूत ना बचे। प्रशासन भी बदनामी से बचने के लिए ऐसी खबरों पर पर्दा डालता है। कहा जाता है कि इन गुटों पर नेताओं का भी हाथ है। यही कारण है कि पुलिस भी इस झमेले में नहीं पड़ती है।

सोन नदी के दियारे इलाके मे बिहटा प्रखंड के अमानबाद मौजे के 1/197 खेसरा में स्थित करीब 323 एकड़ भूमि 1987 में बालू का टापू बन गया है। इस पर वर्षों से अवैध बालू खनन का काम होता है और गोली बारी का प्रमुख कारण भी बनाता है। इसके किनारे का इलाका पटना व भोजपुर जिलों को जोड़ता है। दो जिलों की सीमा होने के कारण बालू माफिया इसका फायदा लंबे समय से उठा रहे हैं। दोनों जिलों की पुलिस यहाँ जाने से भी इनकार करती है।

जब सोन नदी में पानी बढ़ जाता है तो छपरा, भोजपुर, पटना के चारों तरफ से यहाँ नावों का आवागमन शुरू होता है। यहाँ से हर दिन हजारों नावों पर बालू की तस्करी होती है। प्रत्येक नाव पर प्रति क्यूबिक फीट 500 रुपए की दर से रंगदारी शुल्क वसूल किया जाता है। इसी वसूली के लिए माफियाओं में गैंगवार होता है।

इससे पहले फौजी और सिपाही गैंग के बीच गैंगवार में दोनों पक्षों के कई सदस्यों की जान जा चुकी है। तीन साल पहले फौजी की हत्या के बाद वर्चस्व को लेकर एक बार फिर गैंगवार छिड़ गया है। फौजी की हत्या में मनेर के सिपाही राय प्रमुख अभियुक्त था। इस बार के गैंगवार में श्री राय मुख्य अभियुक्त है।

बता दें कि पूरा इलाका दानापुर से सटा हुआ है। यह इलाका बाहुबली रीतलाल यादव का प्रभाव वाला माना जाता है। लालू यादव के बेहद करीबी रीतलाल को इस बार राजद (RJD) ने विधान पार्षद बना दिया है। पिछले महीने खनन विभाग (Mining Department Patna) के इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह ने पटना कोतवाली में रीतलाल के भाई के खिलाफ जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज कराया था।

राजेंद्र सिंह ने अपनी एफआईआर में कहा था कि अवैध बालू और ओवरलोडिंग के लिए उन्होंने एक ट्रक पर फाइन किया था। इसके बाद कुछ लोग खनन विभाग के जिला कार्यालय पहुँचकर उनका नंबर लिया और फोन पर हत्‍या की धमकी दी। उन्होंने बताया कि धमकी देने वाले ने अपना परिचय आरजेडी के बाहुबली विधायक रीतलाल यादव के भाई के रूप में दिया। वे रीतलाल यादव का नाम सुनकर डर गए।

‘ये एक पेशा है, अपना नजरिया बदलो’: वेटिकन सिटी स्टाइल पंडाल के बाद माँ दुर्गा को सेक्स वर्कर के रूप में दिखाया, शत्रुघ्न सिन्हा ने किया उद्घाटन

नवरात्रि में हर कोई माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास करता है। देश भर में माँ दुर्गा की लाखों प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं। हालाँकि, इस वर्ष पश्चिम बंगाल में माँ दुर्गा की प्रतिमाएँ विवादों के घेरे में रहीं हैं। यहाँ ‘वेटिकन सिटी’ के रूप में दुर्गा पंडाल को दिखाने के बाद अब माँ दुर्गा को सेक्स वर्कर के रूप में दिखाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोलकाता में नवापारा दादाभाई संघ पूजा समिति द्वारा माँ दुर्गा व यहाँ के पंडाल को सेक्स वर्कर के रूप में प्रदर्शित किया गया है। इस पंडाल का उद्घाटन तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शत्रुघन सिन्हा, सौगत रॉय और मदन मित्रा जैसे नेताओं ने किया है।

इस पंडाल का उद्घाटन करने के बाद शत्रुघन सिन्हा ने कहा है, “यह माँ दुर्गा का वरदान है। पूरा पश्चिम बंगाल त्यौहार के रंगों में सराबोर है। मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं इस पंडाल का उद्घाटन कर रहा हूँ। मैं सौगत (रॉय) जी और ममता जी का आभारी हूँ।”

(फोटो साभार: ANI)

इस पंडाल की मूर्तियों को सिलिकॉन से बनाया गया है। कहा जा रहा है कि कोलकाता शहर में ऐसा पहली बार हुआ है जब माँ दुर्गा की मूर्तियों को सिलिकॉन से बनाया गया हो।

माँ दुर्गा को सेक्स वर्कर के रूप में दिखाने वाले इस पंडाल के कॉन्सेप्ट और थीम डिजाइनर संदीप मुखर्जी का कहना है, “वेश्यावृत्ति एक पेशा है। क्या यह आम लोगों के लिए एक पेशा है? हम कह सकते हैं हम किस पेशे में हैं। लेकिन क्या वे (सेक्स वर्कर) कह सकते हैं? क्योंकि हम उन्हें अलग दृष्टीकोण से देखते हैं। हमें इस दृष्टिकोण को बदलना चाहिए। हमारा प्रोजेक्ट समाज में बदलाव लाने के लिए है।”

संदीप मुखर्जी ने यह भी कहा, “सेक्स वर्कर जो करते हैं उसके कारण उन्हें हम घेर लेते हैं। हम उन्हें समाज में प्रवेश नहीं करने देते। जब सेक्स वर्कर भी अपना काम कर रहे हैं तो वे समाज में क्यों नहीं आ सकते? हमने मूर्ति में माँ के ऐसे परिवेश को जोड़ा है जो सेक्स वर्कर को दर्शाता है।”

बता दें, इससे पहले कोलकाता में ही श्रीभूमि दुर्गा पूजा पंडाल को ‘वेटिकन सिटी’ के थीम के अनुसार रखा था। इस पंडाल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आयीं थीं। पूरे पंडाल को बिलकुल उसी ढंग में बनाया गया है, जैसे ‘वैटिकन सिटी’ है। बाहर से ये किसी चर्च जैसा लग रहा है। अंदर जीसस की तस्वीरें, मदर मेरी की फोटो लगी हुई है। बीच में दुर्गा माँ की मूर्ति लगाई गई है। इस पंडाल की तस्वीरें सामने आने के बाद लोगों ने नाराजगी जताई थी। लोग पूछ रहे थे कि आखिर दुर्गा पंडाल को इस तरह सजाने का क्या अर्थ है? क्या कभी वेटिकन में क्रिसमस का त्योहार दुर्गा पूजा थीम पर मनाया जाता है?