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पहले ही दिन ₹80 करोड़! तमिल फिल्म ‘PS-1’ ने सैफ-ऋतिक की रीमेक मूवी को ऐसे ही पटखनी, बुरी तरह फ्लॉप हो सकती है ‘विक्रम वेधा’

मणिरत्नम द्वारा निर्देशित तमिल फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन 1 (PS-1)’ ने पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर कई रिकार्ड्स ध्वस्त कर दिए हैं। दुनिया भर में PS-1 का ओपनिंग डे कलेक्शन 80 करोड़ रुपए रहा है। वहीं ‘विक्रम वेधा’ भारत में मात्र 10.25 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन ही कर पाई। ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की इस फिल्म का बजट 175 करोड़ रुपए है, ऐसे में ये अपने बजट का आधा ही कमा ले यही बहुत है।

‘PS-1’ का निर्माण करने वाली फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘Lyca Productions’ ने अपने बयान में कहा है कि इस मूवी को पहले दिन सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनाने के लिए लोगों का धन्यवाद। साथ ही कंपनी ने इस कलेक्शन का आधिकारिक पोस्टर भी जारी किया। इससे पहले इसी कंपनी द्वारा निर्मित सुपरस्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म 2.0 (2018) ने सारे रिकार्ड्स ध्वस्त किए थे। उसके बाद कोई तमिल फिल्म खास कमाल नहीं दिखा रही थी।

फिल्म ‘Ponniyin Selvan: I’ में विक्रम, कार्ति, ऐश्वसर्य राय, जयम रवि और तृषा कृष्णन जैसे स्टार्स हैं। फिल्म ने अकेले तमिलनाडु में 26 करोड़ रुपए की कमाई की है। वहीं उत्तर भारत में ये खास कमाल नहीं दिखा पाई और यहाँ इसने मात्र 3.50 करोड़ रुपए की ही कमाई की। फिल्म की कमाई का एक बड़ा हिस्सा (35 करोड़ रुपए) विदेश से आया है। तेलुगु राज्यों में फिल्म ने 6 करोड़ रुपए की कमाई की। वहीं कर्नाटक में इसका कलेक्शन 5 करोड़ रुपए से भी अधिक रहा।

‘PS-1’ को समीक्षकों का भी जम कर प्यार मिल रहा है। समीक्षकों का कहना है कि इस फिल्म की कहानी दमदार है और मणिरत्नम ने चोल युग के इतिहास पर लिखित पुस्तक के साथ न्याय किया है। साथ ही ये फिल्म शुरू से अंत तक दर्शकों को बाँधे रखती है। हालाँकि, हिंदी बेल्ट में फिल्म का ठीक से प्रमोशन न करना उत्तर भारत में इसकी कमाई पर असर डाल रहा है। वहीं इसी दिन धनुष की फिल्म ‘नाने वरुवन’ भी रिलीज हुई है, जिसने पहले दिन अकेले तमिलनाडु में साढ़े 7 करोड़ रुपए का कारोबार किया।

‘घर में घुस कर गोली मार देंगे’: माँ सरस्वती को भला-बुरा कहने के बाद अब व्यापारी को जान से मारने की धमकी, शरद पवार की पार्टी के नेता पर FIR

महाराष्ट्र के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और NCP नेता छगन भुजबल समेत 3 लोगों पर जान से मारने की धमकी देने के आरोप में केस दर्ज किया गया है। मुंबई की चेंबूर पुलिस ने शुक्रवार (30 सितंबर, 2022) को व्यापारी ललित कुमार टेकचंदानी की शिकायत पर धारा 506 (2) और 34 के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्यापारी ललित कुमार टेकचंदानी ने छगन भुजबल को व्हाट्सएप्प पर दो वीडियो भेजे थे। इस वीडियो में छगन भुजबल हिंदू, देवी- देवताओं का अपमान करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करने के बाद से व्यापारी टेकचंदानी को धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए।

पीड़ित ललित टेकचंदानी ने आरोप लगाया है कि उन्हें मिली धमकी में आरोपितों ने कहा, “तुमने भुजबल साहब को मैसेज भेजा। तुम्हारे घर आकर तुम्हें गोली मार देंगे। मैं दुबई के लोगों को तुम्हारे पीछे छोड़ दूँगा। भुजबल साहब को संदेश भेजने पर पछतावा होगा।”

इस धमकी से जुड़े कुल 15 सबूत व्यापारी ललित टेकचंदानी ने मुंबई के चेंबूर पुलिस को दिए हैं। इन सबूतों में वे नंबर हैं जिनसे कॉल आया था साथ ही जो धमकी भरे मैसेज भेजे गए हैं उनका भी स्क्रीनशॉट दिया गया है। इन्हीं सबूतों और पीड़ित के बयान के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पीड़ित शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। जाँच की जा रही है।

बता दें कि छगन भुजबल ने सोमवार (26 सितंबर 2022) को एक कार्यक्रम में कहा था कि स्कूलों में माँ सरस्वती और शारदा माता की तस्वीर लगाई जाती है, जिन्हें हमने कभी देखा ही नहीं और ना ही उन्होंने कुछ पढ़ाया। उन्होंने कहा था कि अगर माँ सरस्वती ने पढ़ाया भी होगा तो सिर्फ 3 प्रतिशत आरएसएस के लोगों को ही शिक्षा दी होगी, हमें शिक्षा से दूर रखा।

उन्होंने भी कहा था कि स्कूलों से माँ सरस्वती की तस्वीरें हटा देनी चाहिए। छगन भुजबल ने कहा था, “उनकी पूजा क्यों करनी है। स्कूलों में सावित्रीबाई फुले, महात्मा ज्योतिबा फुले, भीमराव अंबेडकर, छत्रपति शाहू महाराज और कर्मवीर भाऊराव पाटिल की तस्वीरें लगाई जानी चाहिए। इन हस्तियों की वजह से हमें शिक्षा और अधिकार मिले हैं। इसलिए, इनकी पूजा कीजिए। ये आपके देवता हैं, इनके विचारों की पूजा होनी चाहिए, बाकी देखेंगे बाद में।”

बाल न ढकने पर महिलाओं को 74 कोड़े, बाल खोल कर निकलने की अनुमति नहीं: शरिया से चलने वाले ईरान में महिलाएँ दिखा रहीं ताकत, अमेरिकी प्रतिबंधों से भी जूझ रहा मुल्क

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पिछले कुछ हफ्तों में अगर कोई देश मीडिया का समय और ध्यान खींचने में कामयाब हुआ है, तो वह ईरान है। ‘शंघाई सहयोग संगठन’ में शामिल होने का ईरान का निर्णय हो या फिर बहरीन पर क्षेत्रीय दावे की बात हो, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान वो देश है जो ताज़ा चर्चा और विवाद का केंद्र बना हुआ है। ईरान में इन दिनों हिजाब पर हंगामा बरपा हुआ है। महिलाएँ ईरान सरकार के ख़िलाफ़ अपना विरोध जता रही हैं।

इससे पश्चिम एशिया में सामाजिक और राजनीतिक अशांति का माहौल है। मामला कुछ यूँ है कि 22 साल की लड़की महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। ‘नैतिक पुलिस (Moral Police)’ ने महसा को हिजाब ठीक से न पहनने के जुर्म में हिरासत में लिया था। लेकिन, पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गई, जिसके बाद लोगों का ग़ुस्सा भड़क गया। विरोध प्रदर्शन ईरान की राजधानी तेहरान से शुरू हो कर देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया।

इस पूरे शासन विरोधी प्रदर्शन में ईरानी महिलाएँ सबसे आगे रही हैं। ईरान पश्चिमी एशिया में एक इस्लामी मुल्क है। इस्लामी मुल्क होने के नाते ईरान में कठोर शरिया क़ानून लागू है। इस क़ानून के अंतर्गत देश में 7 साल से बड़ी किसी भी लड़की या महिला को बाल खोलकर बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। ईरान में हिजाब पहनना 1979 की ‘इस्लामी क्रांति’ के बाद से ही अनिवार्य कर दिया गया था। 7 साल से ऊपर की आयु वाली सभी महिलाओं को सार्वजनिक रूप से ढीले-ढाले कपड़े और एक हेडस्कार्फ़ पहनना आवश्यक है।

1983 में संसद ने फैसला किया कि जो महिलाएँ सार्वजनिक रूप से अपने बालों को नहीं ढकती हैं, उन्हें 74 कोड़े मारने की सजा दी जाएगी। 1995 में नियम बना कि बिना सिर ढके बाहर निकलने वाली महिलाओं को 60 दिनों तक की कैद भी हो सकती है। हाल ही में 5 जुलाई को ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने देश हिजाब क़ानून को सख्त बनाया था, जिसमें महिलाओं को गर्दन और कंधो को ठीक से ढकने की बात की गई थी।

हिजाब आंदोलन से ईरान सरकार घबराई हुई दिख रही है। नैतिक पुलिस के चीफ़ को प्रदर्शन के तीसरे दिन ही पद से हटा दिया गया। किसी इस्लामी मुल्क में महिलाओं के प्रदर्शन के बाद सरकार का यह कदम उठाना बहुत बड़ी बात है। अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध और ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में रुकावट के कारण ईरान गम्भीर आर्थिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। ऐसे में आंतरिक अशांति ईरान के लिए दोहरी चुनौती उत्पन्न कर रही है।

ईरानी सुरक्षा बल इस विरोध प्रदर्शन को बल पूर्वक कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अभी तक 83 लोगे से ज़्यादा की मौत हो चुकी है। इस कारण से दुनिया भर में ईरान के धार्मिक शासन के ख़िलाफ़ और अधिक विरोध शुरू हो गया है। यह ईरान के लिए अच्छें संकेत नहीं है। गुरुवार (29 सितंबर, 2022) को ईरान के राष्ट्रपति, इब्राहिम रईसी का पहला बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि महसा अमिनी की मौत से सभी प्रभावित हुए है।

उन्होंने कहा कि सभी जानना चाहते है की उसकी मौत कैसे हुई लेकिन कुछ लोग विरोध के आड़ में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे है। ईरान के’ इस्लामिक रेवलूशनेरी गॉर्ड कॉर्प्स’ ने अभी तक 500 से ज़्यादा पत्रकार, सेलब्रेटी और जो लोग भी इस प्रोटेस्ट में शामिल हैं – उनको गिरफ़्तार कर चुकी है। ऐसी पुलिस कार्रवाई लोकतांत्रिक लोकाचार के ख़िलाफ़ है। ऐसे मानवधिकारों का उल्लंघन किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देता।

ईरान का हिज़्बुल्लाह और हमास जैसे उग्रवादी संगठनों का सहयोग करना, बहरीन जैसे मुल्क पर अपना क्षेत्रीय दावा करना और छद्म युद्धों (Proxy Wars) से पश्चिमी एशिया को अशांत करना, ईरान के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों के लिए ठीक नहीं है। आर्थिक स्थिरता और ईरान परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ईरान में आंतरिक स्थिरता का होना बहुत ज़रूरी है। ऐसे में ईरान को हिजाब विरोध को समझदारी के साथ नियंत्रित करते हुए एक तर्कसंगत राज्य का परिचय देना चाहिए। यही समय और परिस्थिति की माँग है।

बरोजगार लड़कियों को होमगार्ड की नौकरी का लालच देकर फाँसता था फर्जी इंस्पेक्टर मोहम्मद जमील, ‘ट्रेनिंग’ के लिए भेजता था संदिग्ध जगह: नेपाल सीमा से कनेक्शन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बेरोजगार लड़कियों को महिला होमगार्ड में भर्ती कराने का लालच देकर ठगी करने वाले जमील अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, उसकी महिला सहयोगी अभी फरार है। जमील खुद को पुलिस इंस्पेक्टर बताता था और इसी के रोब में वह लड़कियों एवं उनके घरवालों से पैसे लेता था।

दो युवतियों के परिजनों ने इस संबंध में नाके थाने में मामला दर्ज कराया। इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने शिकायत के आधार पर जिला देवरिया के भटनी हरैया निवासी जमील अहमद को गिरफ्तार किया गया है। वह इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर लोगों को अपनी जाल में फँसाता था। इससे लोग उसकी बातों में आसानी से आ जाते थे।

नाका के क्लिनिक में काम कनरे वाले चौक अकबरी गेट निवासी मोहम्मद फरीद ने आरोप लगाया कि जमील 5 सितंबर 2022 को क्लिनिक पर अपनी पत्नी अमरीन सुल्ताना के साथ आया था। वहाँ उसने खुद को इंस्पेक्टर बताया था और विभाग में ऊँची पहुँच होने की बात कहकर उनकी बहनों को होमगार्ड में नौकरी दिलाने का झाँसा दिया था।

मोहम्मद फरीद ने अपनी शिकायत मे आगे बताया कि जमील की बातों में आकर उन्होंने 85,000 रुपए चारबाग मेट्रो स्टेशन के पास उसे सौंप दिए। 23 सितंबर को फरीद दोनों बहनों का मेडिकल कराने बलरामपुर अस्पताल पहुँचे। वहाँ मेडिकल के नाम पर खानापूर्ति की गई।

मोहम्मद फरीद ने बताया कि अस्पताल में उन्हें मदेयगंज की भी दो लड़कियाँ मिली थीं। उन लड़कियों से किसी रानी नाम की महिला ने 40,000 रुपए लिए थे और होमगार्ड में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। इसके बाद बाद जमील ने उन्हें गोरखपुर में ट्रेनिंग के लिए आने की बात कही।

पीड़िताओं का आरोप है कि 29 सितंबर को जमील ने सबको ट्रेन का टिकट भेजा। इसके साथ ही उन्हें कहा कि वे अपने परिजनों को साथ लेकर ना आएँ। इसके अलावा, ट्रेनिंग कहाँ होनी है, इसका भी सही पता जमील ने नहीं दिया। इसके बाद पीड़िताओं को जमील पर शक हुआ। इस शक के आधार पर उन्होंने थाने में शिकायत की।

पुलिस का कहना है कि मामले में इस एंगल से जाँच करने की कोशिश की जाएगी कि ये महिलाओं को दूसरे जिलों में ट्रेनिंग के लिए क्यों बुलाते थे। कहीं इनका संबंध किसी मानव तस्करी गिरोह से तो नहीं। पुलिस का कहना है कि ठगी सिर्फ महिलाओं से करने को लेकर इस बात की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए हर एंगल की जाँच की जाएगी।

एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा का कहना है कि आरोपित जमील ने चारों युवतियों का महराजगंज के आनंदनगर का टिकट कराया था। यहाँ से नेपाल सिर्फ 30 किलोमीटर दूर है। ऐसे में मानव तस्करी गिरोह से जुड़े होने की आशंका को बल मिल रहा है। पूछताछ के लिए आरोपित को रिमांड पर लिया जाएगा।

जमील 10वीं फेल है और दुबई में बुरका पेंट करने का काम करता था। तीन माह पहले नौकरी छूट गई तो वह लखनऊ आ गया। यहाँ मदेयगंज निवासी रानी से मुलाकात हुई और दोनों मिलकर धोखाधड़ी करने लगा। उसने बताया कि उनके निशाने पर अधिकांश निजी अस्पताल होते थे।

इतना ही नहीं, कहा जा रहा है कि लिवाना होटल में हुए अग्निकाण्ड के बाद आरोपित जमील ने अग्निशमन उपकरण की चेकिंग के नाम पर चारबाग और नाका के कई होटलों से रुपए भी वसूले थे। पूछताछ में आरोपित जमील ने बताया कि उसने महाराजगंज में ही इंस्पेक्टर की वर्दी बनवाई थी। उसने 700 रुपए में नेम प्लेट, कंधे के सितारे और UPP लिखा बिल्ला खरीदा था।

गार्ड से बदसलूकी कर जयपुर के गरबा पंडाल में घुसे मुस्लिम युवक, आयोजकों में से भी 2 निकले मुस्लिम: हिन्दू संगठन पहुँचे तो सब हुए फरार

बुधवार (28 सितंबर, 2022) को मध्य प्रदेश के इंदौर व गुजरात के अहमदाबाद में गरबा पंडाल में घुसे मुस्लिम युवकों की पिटाई का मामला सामने आया था। ऐसी ही घटना शुक्रवार (30 सितंबर) को राजस्थान के जयपुर से सामने आई है, जहाँ कुछ मुस्लिम युवक गरबा पंडाल में जबरन घुस गए थे। लेकिन, जैसे ही बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे, मुस्लिम युवक फरार हो गए।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर के मुरलीपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत नारायण वाटिका मैरिज गार्डन में गरबा का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में माँ दुर्गा के भजनों के बीच भक्त गरबा नृत्य कर रहे थे। इस दौरान कुछ मुस्लिम युवक मैरिज गार्डन में आ धमके और वहाँ मौजूद गार्ड से कार्यक्रम में एंट्री के लिए बहस करने लगे। गार्ड ने उन लोगों को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन मुस्लिम युवक गार्ड से बदतमीजी कर गरबा पंडाल में घुस गए।

इसके बाद, गार्ड ने गरबा के आयोजकों को मुस्लिम युवकों के पंडाल में घुसने की सूचना दी। जिस पर आयोजकों ने पुलिस बुलाने के लिए कहा। हालाँकि, इससे पहले वहाँ पुलिस पहुँचती बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता वहाँ पहुँच गए। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने गरबा पंडाल में उपस्थित सभी लोगों की आईडी चेक करना शुरू कर दिया।

गरबा पंडाल के अंदर जब आईडी चेक की जा रही थी तब वहाँ माहौल बिगड़ने लगा और पूरा कार्यक्रम करीब 1 घण्टे के लिए रोका गया। इस दौरान पंडाल में घुसे मुस्लिम युवक डर के मारे पंडाल छोड़कर भाग खड़े हुए। कहा जा रहा है कि गरबा आयोजन में शामिल कुल 5 आयोजकों में से 2 मुस्लिम आयोजक थे। इसकी जानकारी सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो अन्य तीन आयोजक मान गए। इसके बाद, न केवल पोस्टर से बल्कि पूरे आयोजन से मुस्लिम आयोजकों को बाहर कर दिया गया।

इस घटना पर @niteshsainii नामक ट्विटर यूजर ने वीडियो शेयर कर लिखा, “बजरंग दल ने अपनी ताकत दिखाई। जयपुर के मुरलीपुरा नारायण वाटिका में हो रहे गरबा कार्यक्रम से गैर हिंदुओं को बाहर निकाला। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आईडी चेक करके ही प्रवेश दिया। देश का बल बजरंग दल।”

गौरतलब है, बुधवार (28 सितंबर, 2022) को गरबा पंडाल में पहचान छिपाकर मुस्लिम युवकों के घुसने के मामले सामने आने के बाद अहमदाबाद और इंदौर में मुस्लिम युवकों की पिटाई की गई थी। इन पर हिंदू लड़कियों के फोटो-वीडियो बनाने के आरोप हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदौर के पंढरीनाथ चौराहे के गरबा पंडाल में घुसे मुस्लिम युवकों की हरकतें ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं को संदिग्ध लगी। इसके बाद उन पर नजर रखी गई। वे मोबाइल से लड़कियों और महिलाओं के फोटो और वीडियो भी बना रहे थे। शंका होने पर कार्यकर्ताओं ने उनका नाम पूछा और आईडी दिखाने को कहा। सभी युवकों ने अपने नाम गलत बताए। किसी ने अपना नाम संदीप तो किसी ने बबलू बताया और आईडी भी नहीं दिखाई। बाद में सभी के असली नामों की पहचान होने पर उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया।

वहीं, अहमदाबाद के सिंधु भवन रोड स्थित एक गरबा पंडाल में पहचान छिपाकर घुसे मुस्लिम युवकों को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जमकर पीटा था। इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यहाँ मुस्लिम युवकों की पिटाई को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ता हितेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि चेतावनी दिए जाने के बावजूद, दूसरे धर्म के चार युवकों को एक कार्यक्रम स्थल पर देखा गया। हमारे कार्यकर्ताओं ने लव जिहाद को रोकने के लिए उन्हें पकड़ लिया। जिसके बाद उनकी पिटाई की गई।

जो जीसस को पति मान कर जाती हैं चर्च, उन्हें पादरियों को ‘खुश करने’ का दे दिया जाता है काम: तेज़ी से घट रही ननों की संख्या, सच का खुलासा करने पर मिलती है प्रताड़ना

चर्च में हो रहे भेदभाव के खिलाफ 56 वर्षीय सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने आमरण अनशन पर जाने का निर्णय लिया है। वो मंगलवार (27 सितंबर, 2022) से अनशन पर हैं। वो बिशप फ्रेन्को मुलक्कल के यौन उत्पीड़न मामले में उसके खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल रही थी। अब चर्च उन्हें ‘अभिव्यक्ति’ की सज़ा दे रहा है। उन्होंने मनंतवाडी (वायनाड, केरल) के कॉन्वन्ट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सिस्टर लूसी का कहना है कि वहाँ उनके साथ भेद भाव किया जा रहा है।

आरोप है कि उन्हें कॉन्वेंट के अंदर मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। वहाँ उन्हें लेकर ऐसा डर का माहौल बना दिया गया है कि पिछले चार सालों से कोई उनसे बात नहीं करता। उन्हें कान्वेन्ट का फ्रीज इस्तेमाल नहीं करने दिया जाता। उन्हें कॉन्वेन्ट की दूसरी सिस्टर के साथ खाने की इजाजत नहीं है। उनका कसूर सिर्फ इतना है कि उन्होंने चर्च के अंदर चल रहे अधार्मिक गतिविधियों के खिलाफ आवाज बुलंद की है।

बिशप और पादरियों द्वारा यौन उत्पीड़न की कहानी सिस्टर लूसी कलाप्पुरा की आत्मकथा ‘कार्ताविन्ते नामाथिल’ (ईश्वर के नाम पर) में भी पढ़ी जा सकती है। इसे पढ़कर स्पष्ट होता है कि यौन शोषण और उत्पीड़न चर्च के लिए कोई नया शब्द नहीं है। वह पहले भी लगातार चल रहा था, अब तक जारी है। सिस्टरल लूसी ने उस सच को समाज के सामने बेपर्दा कर दिया, जिसकी सजा उन्हें कॉवेन्ट के अंदर दी जा रही है।

सिस्टर लूसी मानती हैं कि पहले और अब में फर्क सिर्फ इतना आया है कि पहले कोई मामला खुल जाता था। किसी नन के शोषण/ उत्पीड़न की बात सामने आ जाती थी तो चर्च के कार्डिनेल-बिशप सिस्टर का समर्थन करते थे लेकिन अब समय बदला है। अब वे आरोपितों के बचाव में लग जाते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि क्रिश्चियन सभा फ्रांसिस्कन क्लैरिस्ट कॉन्ग्रेगेशन (एफसीसी) ने ड्राइविंग लायसेंस बनवाने जैसे कई बचकाने आरोप लगाकर सिस्टर लूसी कलाप्पुरा को सभा से निलंबित किया। सिस्टर लूसी कहती हैं कि बिशप और पादरियों के कारनामों के बारे में सब जानते हैं, बस कोई बोलता नहीं है।

ननों का उत्पीड़न कोई नई बात नहीं

पादरियों और बिशप्स द्वारा ननों का उत्पीड़न कोई नई बात नहीं है। इसी बढ़ते उत्पीड़न का परिणाम है कि दुनिया भर में जीसस को अपना पति मानकर जीवन समर्पित करने वाली ननों की संख्या कम होती जा रही है। केरल जैसे राज्य में तो यह संख्या गिरकर 25% तक रह गई है। इसी का परिणाम है कि चर्च अपने पाँव पूर्वोत्तर भारत में पसार रहा है और पूर्वोत्तर राज्यों समेत पंजाब, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल, ओडिशा जैसे राज्यों के गरीब परिवार की लड़कियों को चर्च में ला रहा है।

60 के दशक में चर्च में ननों की भर्ती भारत में अचानक बहुत बढ़ गई थी, जो 1985 से फिर धीरे-धीरे कम होना शुरू हुई। पहले गरीब कन्वर्ट हुए क्रिश्चियन परिवारों से उनकी एक बेटी को जीसस का आदेश बताकर चर्च अपने कन्वेन्ट में रख लेता था। वहाँ उन्हें नर्स, शिक्षिका या फिर नन बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। चर्च को पता था कि शिक्षा और स्वास्थ्य के रास्ते ही वह भारत में घर-घर तक पहुँच सकता है। लेकिन, लड़कियों को नन बनाकर चर्च की चारदीवारी के अंदर होने वाली यौन शोषण की कहानियाँ जब बाहर आने लगीं, जिसके बाद क्रिश्चियन परिवारों ने अपनी बेटी चर्च को देने से इनकार करना प्रारम्भ कर दिया।

ऐसा सिर्फ भारत में नहीं हो रहा था, पूरी दुनिया में चर्च को बेटी देने से इनकार करने वालों की संख्या बढ़ने लगी है। इसी का परिणाम था कि अमेरिका जहाँ 60 साल पहले दो लाख के आसपास नन थीं, वहाँ अब ननों की संख्या 50,000 से भी कम हो गई हैं। इटली में जब पूर्व नन फेडरिका और इसाबेल ने चार साल पहले एक समलैंगिक शादी की तो क्रिश्चियन समुदाय के बीच पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी। फेडरिका ने चर्च में ननों के बीच बनने वाले समलैंगिक संबंधों पर और चर्च परिसर में होने वाले बलात्कारों पर लिखा।

जब उसने तीन साल संबंध में रहने के बाद पूर्व नन इसाबेल से शादी करने का निर्णय लिया तो उसे कई समाचार पत्रों ने ‘बहिष्कृत नन’ लिखा। फेडरिका ने ही लिखा कि चर्च के अंदर कोई लोकतंत्र नहीं है। पादरियों का वर्चस्व है। नन वहाँ वासना का शिकार होने के लिए है। फेडरिका की बात को इस संदर्भ में परखा जा सकता है कि जहाँ एक तरफ चर्च में ननों की संख्या तेजी घट रही है, वहीं पादरियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

मुलक्कल के मामले में सामने आया चर्च का नारी विरोधी रवैया

पिछले दिनों बिशप फ्रैंको मुलक्कल के मामले में भी चर्च के नारी विरोधी रवैया को हमने देखा। मुलक्कल पर चल रहे नन बलात्कार के मामले में उनके ख़िलाफ़ मुख्य गवाह फ़ादर कुरियाकोस कट्टूथारा का शव संदिग्ध हालत में उनके जालंधर स्थित घर से मिला था। कुरियाकोस के छोटे भाई जोस कुरियन ने केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री पीनराई विजयन को पत्र लिखकर भाई को जान से मारने की मिल रही धमकी के संबंध में बताया था।

मुलक्कल के खिलाफ शिकायत जून 2018 में दर्ज की गई थी। शिकायत में नन ने आरोप लगाया था कि 2014 से 2016 के बीच बिशप मुलक्कल ने उसका यौन शोषण किया था। इस मामले में बिशप मुलक्कल नन को कैद में रखने, उसका बलात्कार करने, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और चुप रहने के लिए धमकाने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था। मुलक्कल के खिलाफ गवाही देने वाली एक दूसरी नन ने भी उस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। दूसरी नन के अनुसार, फ्रैंको मुलक्‍कल ने 2015 से 2017 के बीच उसका यौन उत्‍पीड़न किया था।

बिशप पर आरोप लगने के बाद चर्च का पूरा नारी विरोधी तंत्र सक्रिय हो गया। सिस्टर लिसी इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक थी। लिसी के अनुसार फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए उस पर लगातार दबाव डाला जा रहा था। उल्लेखनीय है कि आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल सरकार ने पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया था। उन 5 ननों में से चार नन का ट्रांसफर भी बिशप मुलक्कल के मामले में हुआ, जो उसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं थी।

इन चार नन को कोट्टायम जिला स्थित कॉन्वेंट छोड़ने का निर्देश मिला था। ये निर्देश रोम कैथोलिक चर्च के जालंधर डायसिस के तहत मिशनरीज ऑफ जीसस ने दिया था। इतना सब होने के बाद चर्च की बेशर्मी की हद ये है कि ‘कैथोलिक सभा’ के नए साल के कैलेंडर में मार्च पृष्ठ पर बिशप फ़्रैंको मुलक्कल की तस्वीर लगा दी गई। यह तस्वीर सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के त्रिसूर आर्चडायसेस के वर्ष 2021 के नए आधिकारिक कैलेंडर में अन्य बिशप्स की तस्वीरों के साथ लगाई गई थी।

यौन शोषण पर बोलती रहीं सिस्टर जेस्मी

सिस्टर लूसी कलाप्पुरा की तरह कॉन्ग्रीनेशन ऑफ मदर ऑफ कार्मेल (सीएमसी) से निकलकर सिस्टर जेस्मी भी चुप नहीं रहीं। वह चर्च की खामियों और चर्च के परिसर के अंदर हो रहे यौन शोषण पर बोलती रहीं और लिखा भी। उनकी किताब ‘आमीन : एक नन की आत्मकथा’ बहुचर्चित पुस्तक है। यह किताब अब तक मलयालम, अंग्रेजी, तमिल और हिन्दी में उपलब्ध है। किताब में ननों का समलैंगिक आचरण से लेकर पादरियों द्वारा सहजता से उपलब्ध नन को विशेष सुख-सुविधा उपलब्ध कराने तक का उल्लेख है।

जो नन पादरी को जितना खुश रखती, उसके लिए चर्च के अंदर उतनी अधिक सुविधाएँ उपलब्ध होती। मतलब चर्च के अंदर पादरी ही ‘प्रभु’ बने बैठे हैं, नन उनकी सेवा करें और सुविधाएँ पाएँ। समलैंगिक रिश्ते में गर्भवती होने की संभावना नहीं होती। ऐसे संबंध चर्च के अंदर बन रहे हैं, इसकी जानकारी भी बाहर नहीं जा पाती। इसलिए इसे सहज माना जाता है। वरिष्ठ नन समलैंगिक संबंध बनाने के लिए जबरदस्ती भी करती हैं। यह सारी बातें जेस्मी ने लिखी है और जो भी लिखा है, वह सुनी-सुनाई बात नहीं है। उनका भोगा हुआ यथार्थ है।

पूरी दुनिया से मिशनरी (चर्च) गतिविधियों में उत्पीड़न की खबरे सामने आने की वजह से अब लोगों का विश्वास ईसाई शैक्षणिक संस्थानों से भी उठने लगा है। वे विद्या मंदिर, केन्द्रीय विद्यालय, दिल्ली पब्लिक स्कूल, दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल, नवोदय, नेतरहाट जैसे विद्यालयों पर अधिक विश्वास करने लगे हैं। सच्चाई तो यही है कि पादरियों द्वारा यौन उत्पीड़न से जुड़ी खबरों ने चर्च के प्रति समाज का विश्वास जड़ से हिला कर रख दिया है।

(लेखक आशीष कुमार ‘अंशु’ स्वतंत्र पत्रकार हैं)

4G से 10 गुना तेज़ इंटरनेट के लिए हो जाइए तैयार, कीमत भी ज़्यादा नहीं: PM मोदी ने लॉन्च किया 5G, कहा – नई क्रांति के लिए तैयार है देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने शनिवार (1 अक्टूबर, 2022) को 5जी सर्विस लॉन्च (5G Service Launch) कर दी है। इसके साथ ही देश में 5जी सर्विस लाइव हो गई है। हालाँकि, पहले चरण में सभी महानगरों समेत 13 बड़े शहरों में इसकी शुरुआत की जा रही है। लेकिन, धीरे-धीरे इसे विस्तार देते हुए 2023 के अंत तक पूरे देश में शुरू करने की योजना है। 5जी लॉन्चिंग के मौके पर पीएम मोदी ने 5जी को ‘देश के द्वार पर नए दौर की दस्तक’ करार दिया है। साथ ही उन्होंने रिमोट ड्राइविंग टेक्नोलॉजी का भी डेमो लिया।

देश में 5जी सर्विस का शुभारंभ करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज देश की ओर से, देश की टेलीकॉम इंडस्ट्री की ओर से 130 करोड़ भारतवासियों को 5जी के तौर पर एक शानदार उपहार मिल रहा है। 5जी देश के द्वार पर नए दौर की दस्तक है। 5जी अवसरों के अनंत आकाश की शुरुआत है। मैं प्रत्येक भारतवासी को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।”

उन्होंने यह भी कहा है कि नया भारत, टेक्नॉलजी का सिर्फ उपभोक्ता बनकर नहीं रहेगा बल्कि भारत उस टेक्नॉलजी के विकास में, उसके क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएगा। भविष्य की वायरलेस टेक्नॉलजी को डिजाइन करने में, उस से जुड़े निर्माण कार्य में भारत की बड़ी भूमिका होगी।

पीएम ने यह भी कहा है कि 2जी, 3जी और 4जी के समय भारत टेक्नॉलजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा। लेकिन 5जी के साथ भारत ने नया इतिहास रच दिया है। 5जी के साथ भारत पहली बार टेलीकॉम टेक्नॉलजी में वैश्विक मानक तय कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया की बात करते हुए कहा, “जब डिजिटल इंडिया की बात करते हैं तो कुछ लोग समझते हैं ये सिर्फ एक सरकारी योजना है। लेकिन, डिजिटल इंडिया सिर्फ एक नाम नहीं है, ये देश के विकास का बहुत बड़ा विजन है। इस विजन का लक्ष्य है उस टेक्नोलॉजी को आम लोगों तक पहुँचाना जो लोगों के लिए काम करे, लोगों के साथ जुड़कर काम करे।”

देश में मोबाइल के निर्माण और निर्यात करने को लेकर पीएम ने कहा कि साल 2014 में जीरो मोबाइल फोन निर्यात करने से लेकर आज हम हजारों करोड़ के मोबाइल फोन निर्यात करने वाले देश बन चुके हैं। स्वाभाविक है इन सारे प्रयासों का प्रभाव डिवाइस की कीमत पर पड़ा है। अब कम कीमत पर हमें ज्यादा फीचर्स भी मिलने लगे हैं।

प्रधानमंत्री ने इंटरनेट फॉर आल की बात करते हुए उन्होंने कहा जैसे सरकार ने घर-घर बिजली पहुँचाने की मुहिम शुरू की। उन्होंने कहा, “जैसे हर घर जल अभियान के जरिए हर किसी तक साफ पानी पहुँचाने के मिशन पर काम किया। जैसे उज्जवला योजना के जरिए गरीब से गरीब आदमी के घर में भी गैस सिलेंडर पहुँचाया। वैसे ही हमारी सरकार ‘इंटरनेट फॉर आल’ के लक्ष्य पर काम कर रही है।

5जी सर्विस के लॉन्चिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिमोट ड्राइविंग टेक्नोलॉजी का भी डेमो लिया। इस तकनीक से यूजर्स 5जी सर्विस का उपयोग करके करके दूर से ही छोटा वाहन चला सकते हैं। इस टेक्नोलॉजी के विस्तार के बाद बड़े वाहनों पर भी इसे प्रयोग करने की बात कही जा रही है।

गौरतलब है कि 5जी सर्विस पूरी तरह शुरू होने के बाद अभी मौजूदा 4G LTE से कम से कम 10 गुना तेज इंटरनेट स्पीड मिलेगी। 5जी में सिर्फ 10 सेकेंड में ही पूरी फिल्म डाउनलोड कर सकेंगे। अभी दो घंटे की फिल्म को डाउलनोड करने में 7-10 मिनट तक का समय लगता है। 5जी से न केवल टेलीकॉम बल्कि हेल्थकेयर, एजुकेशन समेत तमाम टेक्निकल सेक्टर्स में क्रांति आ जाएगी।

भगवा पहन छत्तीसगढ़ में रेकी कर रहे थे UP के दो मुस्लिम: पुलिस ने कड़ाई की तो बताई सचाई, स्वीकारा- बच्चा चोरी करने का था इरादा

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरूर में भगवा चोला पहन कर घूम रहे दो मुस्लिमों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मुसाफिर जोगी और याद अली नाम के दोनों योगियों की गतिविधियों को संदिग्ध पाने पर लोगों ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने उनसे गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र सुनाने को कहा तो वे हड़बड़ा गए।

जब पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की तो दोनों ने माना कि वे मुस्लिम हैं। उसमें एक ने अपनी पहचान झगरू पिता मुसाफिर जोगी और दूसरे ने याद अली उर्फ माले सज्जन बताई। दोनों उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के थाना पट्टी के नवादा गाँव के कहने वाले हैं।

साधु का वेश धर कर घूमने के आरोप में पुलिस ने दोनों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों को न्यायालय में पेश किया। अदालत ने दोनों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

नईदुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुर थाना की पुलिस ने बताया कि उसे मुखबिर से सूचना मिली दो संदिग्ध लोग भगवा पहन कर घूम रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने दोनों को बस स्टैंड के पास से पकड़ लिया और पूछताछ के लिए थाने ले गए। पूछताछ के दौरान ने दोनों ने खुद को हिंदू बताया और कहा कि वे भिक्षा माँग रहे थे।

हालाँकि, पुलिस को उन दोनों की बातों पर विश्वास नहीं हुआ और दोनों से कड़ाई से पूछताछ की। इसके बाद दोनों ने गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र बताने के लिए कहा तो वे हड़बड़ा गए। इसके बाद पुलिस ने कड़ाई की तो वे असली बात बताए। पुलिस का कहना है कि बच्चा चोरी करने के दोनों रेकी कर रहे थे। उन्होंने साधु का वेश इसलिए बनाया ताकि कोई शक ना कर सके।

पुलिस का कहना है कि वह जाँच कर रही है कि वे किसके लिए काम कर रहे थे। बच्चा चोरी के बाद वे उसका क्या करने वाले थे। पुलिस का कहना है कि वह आरोपितों का रिमांड लेने की कोशिश कर रही है।

दीपावली पर PFI ने रची थी देश भर में बम ब्लास्ट की साजिश: आसपास के सामान से IED बनाने की दे रहा था ट्रेनिंग, मंदिर और हिन्दू बहुल इलाके थे निशाना

चरमपंथी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और उसके सहयोगी संगठनों पर देश भर में कार्रवाई कर 350 से अधिक उसके सदस्यों के गिरफ्तार करने के बाद इसकी हिंसक गतिविधियों की परतें खुलने लगी हैं। PFI न सिर्फ हिंदूवादी नेताओं की हत्या की साजिश रच रहा था, बल्कि देश भर के कई राज्यों में बम ब्लास्ट करने की भी योजना बना रहा था।

यूपी की राजधानी लखनऊ से पकड़े गए PFI के सदस्यों से पूछताछ में पता चला है कि ये अपने लोगों को इस तरह से ट्रेनिंग दे रहा था कि ब्लास्ट के लिए कहीं से गोला-बारूद लाने की जरूरत ना पड़े। आरोप‍ितों के पास से म‍िली सामग्रि‍यों की जाँच-पड़ताल से इस संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।

लखनऊ के बख्शी तालाब (BKT) से पकड़े गए तीन आरोपितों के पास से जो किताब मिली है, उसमें लिखा है कि आसपास मौजूद सामग्री से कैसे IED बनाई जा सकती है। पुल‍िस को आशंका है क‍ि ये दशहरा और दीपावली में विस्फोट की तैयारी में थे और इनके निशाने पर धार्मिक स्थल और हिंदू आबादी वाले इलाके थे।

मोहम्मद फैजान, मोहम्मद रेहान और मोहम्मद सूफियान की गिरफ्तारी के बाद इनके पास से कई आपत्तिजनक दस्तावेज और उर्दू में लिखी एक किताब मिली। इस किताब को नीली थैली में छिपाकर आरोपितों ने रखा था। इसमें इनके षडयंत्रों की पूरी जानकारी है।

इनके पास से मिले किताब के पहले पन्ने से पता चलता है कि ये साल 2047 तक भारत को मुस्लिम मुल्क बनाने की साजिश के तहत काम कर रहे थे। इसके अलावा, दूसरे पेज पर आसपास आसानी से उपलब्ध सामग्री से IED बम बनाने की विधि के बारे में बताया गया है। चौथे और पाँचवें पृष्ठ पर विस्फोटक के स्रोतों की जानकारी दी गई है।

वहीं, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और खुफिया एजेंसी (IB) की रिपोर्ट के आधार पर केरल के पाँच RSS नेताओं को Y कैटेगरी की सुरक्षा गृह मंत्रालय ने दी है। केरल से 22 सितंबर को गिरफ्तार PFI के सदस्य मोहम्मद बशीर के घर पर रेड के दौरान उसके यहाँ से संघ के नेताओं की लिस्ट मिली थी। इसमें पाँच नेताओं को जान से मारने की बात कही गई थी।

संघ के इन नेताओं की सुरक्षा में अब अर्धसैनिकों बलों के 8 जवान तैनात रहेंगे। इनमें VIP को सुरक्षा देने वाले आर्म्ड स्टैटेक गार्ड के 5 जवान भी शामिल रहेंगे। इसके अलावा, तीन शिफ्ट में तीन PSO की तैनात होकर उनकी सुरक्षा करेंगे।

ताज महल या तेजो महालय? सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कहा- शाहजहाँ ने निर्माण करवाया इसके प्रमाण नहीं, बने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी

आगरा के ताज महल (Taj Mahal) का सच क्या है? इसका पता लगाने की अपील करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि शाहजहाँ (Shah Jahan) ने ताज महल का निर्माण करवाया था। विवाद निपटारे और इसकी असली पहचान का पता लगाने के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (Fact Finding Committee) बनाने की माँग शीर्ष अदालत से की गई है।

यह याचिका रजनीश सिंह ने वकील समीर श्रीवास्तव के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता ने बताया है कि उन्होंने ताज महल को लेकर आरटीआई के जरिए एनसीईआरटी से जानकारी माँगी थी। जवाब में उन्हें बताया गया कि ताज महल का निर्माण शाहजहाँ द्वारा करवाए जाने को लेकर कोई प्राथमिक स्रोत उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में याचिकाकर्ता ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से भी आरटीआई के तहत जानकारी माँगी थी। वहाँ से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात कही गई है।

याचिका में कहा गया है, “कहा जाता है कि ताज महल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने बेगम मुमताज महल के लिए 1631-1653 के बीच करवाया। लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लिहाजा ताज महल के वास्तविक इतिहास का अध्ययन करने और विवाद समाप्त करने के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की जाए।”

इसी साल एक RTI के जवाब में ASI ने बताया था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि ताज महल में कब से और किसकी इजाजत से नमाज पढ़ी जा रही है। इस जवाब के बाद वहाँ मजहबी गतिविधियों को बंद करने की माँग उठी थी। इस संबंध में इतिहासकार राजकिशोर ने आरटीआई दाखिल की थी। इसी साल अगस्त में एक पार्षद ने आगरा नगर निगम में ताज महल का नाम ‘तेजो महालय’ करने का प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव लाने वाले पार्षद शोभाराम राठौर का कहना था कि ताज महल में हिंदू सभ्यता से जुडे़ कई चिन्ह मिलने की बात कही जाती है। इसे देखते हुए उन्होंने इसका नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था।

गौरतलब है कि जयपुर के राजघराने की सदस्य और बीजेपी से सांसद दीया कुमारी ने दावा किया था कि जिस जगह पर ताज महल स्थित है, वो जमीन उनकी थी। दीया कुमारी ने ताज महल के बंद दरवाजों को खोलने के लिए दायर की गई याचिका की तारीफ करते हुए कहा था कि इससे सच निकलकर बाहर आएगा। साथ ही उन्होंने ये भी दावा किया था कि उनके पास ऐसे डॉक्यूमेंट्स हैं, जिससे ये साबित होता है कि ताज महल जयपुर के पुराने शाही परिवार का पैलेस था। हालाँकि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 12 मई 2022 को ताज महल के 20 कमरों को खोलने की याचिका खारिज कर दी थी। इस फैसले के खिलाफ ही अब सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है।