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राँची के बाद अब धनबाद में मंदिर को बनाया निशाना, हनुमान जी की मूर्ति खंडित की: पहले भी दो बार मंदिरों में तोड़फोड़ कर चुका है इम्तियाज अंसारी

झारखंड में हिंदू मंदिरों पर हमलों की शिकायतें लगातार आ रही हैं। राजधानी राँची के बाद अब धनबाद में कट्टरपंथियों में एक मंदिर में हमला कर बजरंग बली की मूर्ति में तोड़फोड़ किया है। स्थानीय लोगों ने आरोपित इम्तियाज अंसारी को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है।

घटना गोविंदपुर थाना क्षेत्र की जमडीहा पंचायत अंतर्गत कुबरीटांड़ शिव मंदिर की है। इस मंदिर में स्थित भगवान हनुमान की प्रतिमा को मुस्लिम युवक ने शुक्रवार (30 सितंबर 2022) की सुबह साढ़े नौ बजे के करीब क्षतिग्रस्त कर दिया। युवक को ऐसा करता देख स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ कर बंधक बना लिया।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुँची और आरोपित इम्तियाज अंसारी, पिता मुस्लिम अंसारी को कठोर सजा दिलाने का आश्वासन देकर लोगों से छुड़ाया और थाने लेकर आई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इम्तियाज ने छह महीना पहले टुंडी थाना क्षेत्र के कोटालडीह गाँव के एक मंदिर में भी भगवान की मूर्ति मे तोड़फोड़ की थी। इससे पहले 15 जनवरी 2016 को नावाटांड़ में भी उसने भगवान की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया था। आरोपितों को दोनों बार चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था।

हालाँकि, इस बार ग्रामीण किसी तरह का रहम करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से आरोपित पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। मामले की जानकारी मिलने पर विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल एवं अन्य हिंदूवादी संगठन के नेता पर मौके पर पहुँचकर हंगामा किया और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

इस घटना को भाजपा नेता बाबुलाल मरांडी ने सोची-समझी साजिश बताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “झारखंड में राँची के बाद अब धनबाद के गोविंदपुर में मंदिर की प्रतिमा खंडित करने की खबर है। दुर्गा पूजा में नवरात्रि के मंदिरों को निशाना बनाना संयोग नहीं, बल्कि सोची समझी साजिश का हिस्सा है। यह झारखंड के सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ कर राज्य को अशांत करने की साजिश है। पूरे देश में PFI के ठिकानों में छापे और गिरफ्तारियों के बाद ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है।”

बता दें कि 27 सितम्बर 2022 की रात को राँची के मुस्लिम बहुल हिन्दपीढ़ी थाना क्षेत्र के मेन रोड पर स्थित हनुमान मंदिर के ताला को तोड़कर अंदर घुसे अपराधियों ने हनुमान जी की मूर्ति में तोड़फोड़ की थी। अपराधियों ने मंदिर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति का नाक, माथा और गदा तोड़ दिया गया था।

हंगामा बढ़ने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपित रमीज अहमद को गिरफ्तार लिया था। इसके बाद उसके परिजनों ने आरोपित को मानसिक रूप से कमजोर बताना शुरू कर दिया। वहीं, हिंदपीढ़ी के SHO ने रमीज अहमद को मानसिक रोगी बताया।

वहीं, स्थानीय लोगों ने कहा था कि पुलिस रमीज को मानसिक रोगी बता रही है, लेकिन उसने चाँदी के मुकुट और दान पेटी के पैसे को छोड़ कर सिर्फ मूर्ति को टारगेट क्यों किया। एक अन्य स्थानीय व्यक्ति का दावा किया था कि मूर्ति तोड़े जाने की रात वे दुर्गा पूजा के लेकर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने मजहबी नारे लगाकर उन्हें भड़काने की कोशिश की थी।

दो बच्चों की पॉलिसी को लेकर राज्यों को नोटिस जारी करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, UCC से जुड़ी याचिका पर भी गौर करने से मना किया

दो खबरें हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of india) से। दोनों चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ से जुड़े हैं। एक मामला टू चाइल्ड पॉलिसी को लेकर है। दूसरा मामला समान नागरिक संहिता यानी UCC से संबंधित है।

रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण की नीति बनाने को लेकर राज्यों को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया है। इस संबंध में याचिका अश्विनी उपाध्याय ने दायर कर रखी है। याचिका में कहा गया है कि जनसंख्या नियंत्रण (Population Control) समवर्ती सूची में आता है। आबादी के बढ़ते बोझ को देखते हुए राज्यों को टू चाइल्ड पॉलिसी (Two Child Policy) के लिए नोटिस जारी करने की अपील शीर्ष अदालत से याचिकाकर्ता ने की है।

पीठ ने उपाध्याय की दलीलों से असंतुष्टि जताते हुए ऐसा करने से इनकार किया। रिपोर्ट के अनुसार पीठ ने कहा कि यह नीतिगत निर्णय से जुड़ा मामला है। लिहाजा वे याचिका खारिज कर रहे हैं। हालाँकि उपाध्याय ने मामले को फिर से सूचीबद्ध करने की अपील की ताकि वे अपनी अपील पर और प्रकाश डाल सकें। इससे सह​मति जताते हुए पीठ ने मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर को तय की है। गौरतलब है कि 2018 में भी इसी तरह की एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने नीतिगत निर्णय से जुड़ा बताते हुए खारिज कर दिया था।

इसी पीठ ने शुक्रवार (30 सितंबर 2022) को यूनिफॉर्म सिविल कोड से जुड़े अनूप बर्णवाल की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। वैसे पीठ ने अपनी मौखिक टिप्पणी में लॉ कमीशन की रिपोर्ट को कमजोर माना। केंद्र को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कमीशन ने भारतीय समाज की विविधता को कायम रखने की पैरवी की है।

बता दें कि समान नागिक संहिता लागू होने पर देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो जाएगा। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या समुदाय का हो, हर किसी के लिए एक ही कानून होगा। कोई भी पर्सनल लॉ इससे ऊपर नहीं होगा। मसलन जो कानून किसी हिंदू महिला की सुरक्षा के मद्देनजर बनाया जाएगा, वही कानून मुस्लिम, ईसाई और पारसी महिला को भी सुरक्षा प्रदान करेगा। इसी तरह शादी, तलाक, संपत्ति सबसे जुड़े मामलों में पूरे देश में एक ही कानून लागू होगा। इस्लामी संगठन और मौलवी ऐसे किसी भी कानून के विरोध में हैं।

ऋतिक-सैफ अली की ‘विक्रम वेधा’ को लाल सिंह चड्ढा की नजर लगी? रिव्यू जबर-लेकिन कमाई स्लो, एडवांस बुकिंग के बाद ओपनिंग कलेक्शन में भी निराशा

ऋतिक रोशन (Hritik Roshan) और सैफ अली खान (Saif Ali Khan) स्टारर विक्रम वेधा (Vikram Vedha) की ओपनिंग बेहद धीमी रही। फिल्म के समीक्षकों ने इस फिल्म को 4 स्टार रेटिंग देते हुए ऋतिक रोशन और सैफ की भूमिका को शानदार बताया था। इसके लिए किसी तरह का बॉयकॉट अभियान भी नहीं चलाया गया था, फिर भी इसका असर दिख रहा है।

लगभग 190 करोड़ रुपए की बजट में बनी विक्रम वेधा की पहले दिन की कमाई अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की फिल्मों से भी कम रही। इसकी ओपनिंग कलेक्शन 10.50 करोड़ रुपए रही। इस फिल्म को पूरे भारत में 4007 स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया था।

बता दें कि आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ का ऋतिक रोशन ने खुलकर समर्थन किया था। ऋतिक ने 13 अगस्त 2022 को लोगों से अपील की थी कि वे बॉयकॉट ट्रेंड को दरकिनार कर आमिर खान की फिल्म को जरूर देंखे। वहीं, हिंदू विरोधी रवैए को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स आमिर की फिल्म का लगातार विरोध कर रहे थे।

ऋतिक की बहुप्रतीक्षित फल्म विक्रम वेधा की ओपनिंग की झलक उसके एडवांस बुकिंग में ही मिल गई थी। शुक्रवार को रिलीज हुई विक्रम वेधा एडवांस बुकिंग में भी 500 करोड़ रुपए की बजट से बनी मणिरत्नम की पोन्नियिन सेल्वन (Ponniyin Selvan) का पहला भाग से पिछड़ गई। इसकी एडवांस बुकिंग के आंकड़ें करोड़ के आँकड़े को भी नहीं छू पाई।

पोन्नियिन सेल्वन (Ponniyin Selvan advance booking) के तमिलनाडु में करीब 4.50 करोड़ रुपए के 2.5 लाख टिकट बिके। पोन्नियिन सेल्वन की एडवांस बुकिंग की यह स्थिति तब थी, जब केवल 225 सिनेमाघरों के लिए एडवांस बुकिंग ओपन की गई है।

वहीं, ‘विक्रम वेधा’ (Vikram Vedha advance booking) की बात करें तो मध्य भारत से लेकर उत्तर भारत तक के थिएटर्स में स्क्रीन हासिल करने के बाद भी फिल्म की एडवांस बुकिंग अपेक्षाकृत काफी कम रही है। विक्रम वेधा के अब तक मात्र 17 हजार टिकट ही बिके हैं। ऐसे में इस फिल्म का ग्रॉस कलेक्‍शन 45 लाख के आसपास बताया जा रहा है।

फिल्म समीक्षकों ने विक्रम वेधा को 4 स्टार रेटिंग दी है। कहानी को चुस्त, परोसने की शैली को शानदार, सेनेमेटोग्राफी को लाजवाब और कलाकारों की भूमिका को उत्कृष्ट बताया गया था। तरण आदर्श जैसे समीक्षक ने दोनों की अदाकारी को साँस रोककर देखने वाला बताया है। इसके साथ ही दोनों की भूमिका को समानांतर एवं अद्भुत बताया। हालाँकि, समीक्षकों की समीक्षा को दर्शकों ने नकार दिया।

गौरतलब है कि ऋतिक रोशन ने ‘लाल सिंह चड्ढा’ की तारीफ करते हुए ट्विटर पर लिखा था, “मैंने हाल ही में लाल सिंह चड्ढा देखी। मैंने इस फिल्म के दिल को महसूस किया है। अच्छी और बुरी चीजें एक साइड में रखकर, यह फिल्म वाकई शानदार है। इतनी अच्छी फिल्म को मिस मत करिए। जाइए और इसे अभी देखिए। ये बेहद खूबसूरत और सुंदर है।”

ऋतिक रोशन के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया। भड़के यूजर्स ने ऋतिक रोशन की आगामी फिल्म विक्रम वेधा के बॉयकॉट की धमकी दी थी। ऋतिक के ट्वीट पर एक यूजर ने भड़कते हुए लिखा था, “बॉलीवुड से संन्यास लेने का इरादा कर लिया है क्या तुमने।”

हिजाब+रेप से जल रहा ईरान: इस्लामी पुलिस के मुखिया की हत्या, 36 को गोली मारी-अब तक 83 मौतें, 15 साल की लड़की से कमांडर ऑफिस में बलात्कार

जनता से बढ़कर तानाशाह और धार्मिक नेता नहीं होते। जनता जब चाहे इन्हें उखाड़कर फेंक सकती है। इस्लामी मुल्क ईरान (Iran) में भी कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं के विरोध में वहाँ की महिलाएँ सड़कों पर उतर चुकी हैं और पूरे देश और दुनिया से उन्हें समर्थन मिल रहा है।

ईरान की इस्लामी सरकार की दमनकारी रवैए के बाद वहाँ का हिजाब विरोधी आंदोलन हिंसक हो गया है। वहीं, बलूचिस्तान में 15 साल की एक लड़की के साथ बलात्कार के बाद वहाँ की जनता हिंसक हो गई है। आरोप है कि पुलिस कमांडर ने अपने ऑफिस में ले जाकर इस लड़की का बलात्कार किया।

लोगों के साथ एक झड़प में ईरानी पुलिस ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के सिस्तान एवं बलूचिस्तान के खुफिया प्रमुख अली मौसवी (Ali Mousavi) की मौत हो गई है। वहीं, सुरक्षाबलों की फायरिंग में कम से कम 36 लोगों के मारे जाने की खबर है।

सुन्नी समुदाय के बलूच लोगों का आरोप है कि 15 साल की इस लड़की के साथ चाबहार के पुलिस कमांडर कर्नल इब्राहिम कौचकजाई ने बलात्कार किया है। इसके बाद पुलिस इस मामले को दबाने में लगी हुई थी। पुलिस ने लड़की के परिजनों पर इसको लेकर चुप रहने का दबाव बनाया। इतना ही नहीं लड़की के 3 परिजनों को गिरफ्तार कर उनसे बलात्कार से इनकार वाले बयान देने का भी दबाव बनाया गया। इसके बाद लोग सड़कों पर उतर आए।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, आंदोलनकारी जाहेदान शहर में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने गोलियाँ चलाईं। इसके बाद आंदोलनकारियों की ओर से भी गोलियाँ चलाई गईं। इस झड़प में आंदोलनकारियों की गोली अली मौसवी को लगी। मौसवी को तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।

मौसवी की मौत सरकार विरोधी लोगों में गुस्से का इजहार है। इसके पहले हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारियों का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह अली खोमनई की मौत की माँग कर रहे थे। ओस्लो स्थित ईरान मानवाधिकार संगठन का कहना है कि विरोध शुरू होने के बाद से सुरक्षाबलों ने कम-से-कम 83 लोगों को मार दिया है।

वहीं, हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ संघर्ष में कई सुरक्षाबलों की भी मौत हुई है, लेकिन मारे गए सुरक्षाबलों में अली मौसवी सबसे उच्च रैंक के अधिकारी हैं। बता दें कि बलूचिस्तान ईरान और पाकिस्तान में एक ऐसा क्षेत्र हैं, जहाँ बलूच संप्रदाय के लोग रहते हैं। शिया बहुल ईरान में सुन्नी बलूचों के साथ अक्सर हिंसा की खबरें आती हैं।

पिछले साल भी इलाके के खराब हालात को लेकर यहाँ प्रदर्शन करने वाले लोगों पर ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ की पुलिस ने गोलियाँ चलाई थीं, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। बलूच ईरान और पाकिस्तान से बलूचिस्तान की माँग करते हुए सशस्त्र विद्रोह चलाते हैं। इसमें वे आतंकी संगठन अल-कायदा का भी सहयोग ले रहे हैं।

बता दें कि ईरान में हिजाब विरोधी हिंसा मध्य सितंबर उस समय भड़क उठी, जब महसा अमिनी (Mahsa Amini) नाम की एक युवती अपने भाई के साथ जा रही थी और हिजाब ढंग से नहीं पहने के कारण पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसे थाने में ले जाकर इतना पीटा गया कि वह कोमा में चली गई और बाद में उसकी मौत हो गई।

इसके बाद ईरान में हिजाब जलाकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इन प्रदर्शनों में ईरान पुलिस ने गोली मारकर कई महिला प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी। हालाँकि, पुलिस के दमन के बाद यह आंदोलन और विस्तृत और हिंसक होता जा रहा है। ईरानी महिलाओं के समर्थन में दुनिया भर में प्रदर्शन हो रहे हैं।

नवरात्रि में तोड़ी काली माँ की मूर्ति, दीवारों पर लाल रंग से बाइबल की आयत लिखी: त्रिनिदाद और टोबैगो में 1 हफ्ते में 2 हिंदू मंदिरों पर हमला, पहले गणेश मंदिर से चुराए गए थे कपड़े

कैरेबियन देश त्रिनिदाद एंड टोबैगो के त्रिनिदाद में बीते एक सप्ताह में दो हिंदू मंदिरों को तोड़ने और उन्हें अपवित्र करने की खबर सामने आई है। यहाँ, जिन मंदिरों पर हमला किया गया है वे द्वीप के काउवा और पेनल कस्बे में स्थित हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार (28 सितंबर) को काउवा के कार्ली बे में एक काली माता मंदिर को अज्ञात बदमाशों ने तोड़ते हुए अपवित्र कर दिया था। इस मंदिर में तोड़फोड़ कर देवी काली की मूर्ति को क्षतिग्रस्त किया गया था। यही नहीं, मूर्ति पर जैतून का तेल भी लगाया गया था। हमलावरों ने इस पूरी घटना को रात में अंजाम दिया था।

हमलावरों ने मंदिर की दीवारों पर इस दौरान बाइबिल की एक आयत भी लिखी। मंदिर की बाहरी दीवारों पर बड़े लाल अक्षरों में ‘Read Exodus 20:3-4’ लिखा गया। इस आयत में गैर-ईसाइयों के खिलाफ चेतावनी है।

एक्सोडस (Exodus) बाइबल में एक किताब है। इस किताब के अध्याय 20 के पद 3 में लिखा है “मेरे आगे और कोई देवता नहीं होगा।” इसी अध्याय में आयत 4 कहता है, “तू अपने लिए कोई मूरत न बनाना, जो ऊपर स्वर्ग में या नीचे पृथ्वी पर या नीचे के जल में किसी भी वस्तु का रूप हो।” मंदिर में जो कुछ भी हुआ है वह यह दर्शाता है कि इस पूरी घटना के पीछे कट्टरपंथी ईसाइयों का हाथ है।

इस पूरी घटना पर मंदिर के पुजारी पंडित सत्यानंद महाराज का कहना है कि यह घटना उस समय हुई है जब मंदिर के सदस्य नवरात्रि की सेवा पूरी कर अपने-अपने घर चले गए थे।उन्होंने कहा, “मैं जब मंदिर गया तो माता की मूर्ति को टूटा हुआ पाया। मूर्ति में जैतून का तेल भी लगाया गया है। वहाँ एक्सोडस (Exodus) 20:3-4 से एक चेतावनी लिखी गई है। इस बारे में काउवा पुलिस स्टेशन को एक रिपोर्ट दी गई है। हालाँकि, पुलिस द्वारा रिपोर्ट की कोई रसीद नहीं दी गई।”

मंदिर के पुजारी ने आगे कहा “त्रिनिदाद और टोबैगो एक बहु-धार्मिक देश है जहाँ हम सभी पूजा की स्वतंत्रता का आनंद लेते हैं। ऐसा लगता है कि कुछ लोग शांतिपूर्ण वातावरण को खराब करना चाहते हैं। ईसाई धर्म की आड़ में हिंसा के इस कृत्य की सभी आस्था के लोगों द्वारा निंदा की जानी चाहिए।”

हालाँकि, मंदिर में हुई इस घटना के बाद भी यहाँ पूजा जारी रही। कई भक्तों ने पूजा में भाग लिया और मंदिर के बाहर खड़े होकर भजन गाए। इस दौरान, मंदिर में आने वाले कई नियमित भक्त माँ काली की मूर्ति को टूटा हुए देखकर रोते हुए नजर आए। इनमें से कई लोग ऐसे थे जिन्होंने इस मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था।

गणेश मंदिर में तोड़फोड़

काउवा के काली मंदिर में हुए हमले से पहले 22 सितंबर की रात को पेनल में एक गणेश मंदिर में तोड़फोड़ भी की गई थी। यहाँ के गोपी ट्रेस में लकरानी गणेश मंदिर पर हमला कर गणेश जी को मूर्ति को तोड़ा गया था। जबकि, कुछ अन्य मूर्तियों से कपड़े निकाले गए थे। यही नहीं, इस मंदिर में रखे स्पीकर को भी हमलावर अपने साथ ले गया था। उस रात के सीसीटीवी फुटेज में एक बदमाश को स्पीकर के साथ देखा गया था। फुटेज से प्रतीत हो रहा है कि यह काम सिर्फ एक व्यक्ति का है।

मंदिर की उपाध्यक्ष रेखा ने कहा था, “हमने देखा कि मंदिर का पिछला दरवाजा टूटा हुआ है। उस व्यक्ति ने ताला तोड़ा और फिर लात मारकर दरवाजा खोलते हुए मंदिर में घुस गया। उसने मंदिर में तोड़फोड़ की है। साथ ही, उसने दानपेटी को भी नुकसान पहुँचाया है।”

पुलिस को संदेह है कि वह व्यक्ति भक्तों द्वारा चढ़ाए गए धन को चुराने के इरादे से मंदिर में घुसा था। यह सब करने वाले व्यक्ति ने देखा होगा कि लोग मंदिर में चढ़ावा चढ़ाते हैं। चूँकि, मंदिर समिति मंदिर में कोई भी पैसा रात में नहीं रखती है इसलिए उसे कुछ भी नहीं मिला। गणेश जी की मूर्ति तोड़ने के पीछे उसका उद्देश्य यह रहा होगा कि हो सकता है मूर्ति में पैसा हो।

‘साड़ी में बहुत सुंदर लगती हो, मेरे साथ फोटो खिंचवा लो’: राजस्थान के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर की महिला टीचर से जबरदस्ती, व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर की तस्वीरें

राजस्थान के भरतपुर जिले में एक महिला शिक्षिका का यौन उत्पीड़न करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल का हेडमास्टर अमर दयाल शर्मा महिला के साथ अपनी एक जबरदस्ती फोटो खींच लिया और उसे ह्वाट्सएप ग्रुप में डाल दिया। महिला का आरोप है कि हेडमास्टर यह कहते हुए अक्सर छेड़खानी करता है कि वह साड़ी में बहुत सुंदर लग रही है।

मामला भरतपुर जिले के रुपवास कस्बे में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का है। उपखंड शिक्षा अधिकारी को दी गई शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि स्कूल का प्रिंसिपल अमर दयाल शर्मा उसका उत्पीड़न करना है।

शिकायत में महिला टीचर ने लिखा, मैं पिछले 17 वर्षों से अध्यापिका के पद पर तैनात हूँ। मेरे स्कूल के प्रिसिंपल मेरे प्रति गलत इरादा रखते हुए मेरे पीछे पड़े हैं। वह कहते हैं कि तुम साड़ी में बहुत सुंदर लगती हो। तुम्हारे साथ एक फोटो लेना चाहता हूँ।”

स्कूल टीचर ने बताया कि 22 सितम्बर 2022 को जब वह स्कूल के रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज कर रही थी, उसी दौरान अमर दयाल शर्मा आ गए। वहाँ स्कूल का पूरा स्टाफ भी था। महिला टीचर ने बताया, “वहाँ प्राचार्य अमर दयाल शर्मा ने मुझसे कहा कि मैडम मेरे पास आइए। मैं अपने साथ मोबाइल से फोटो लेना चाहता हूँ, क्योंकि साड़ी में आप बहुत सुंदर लग रही हो। आप 3 दिन से साड़ी पहनकर स्कूल आ रही हो और मुझे बहुत सुंदर लग रही हो।”

महिला टीचर का कहना है कि जब उसने विरोध किया था तो प्रिंसिपल उस पर गुस्सा होकर चिल्लाने लगा और कहा कि ऐसी औरत को वह अपने पास भी नहीं बैठने देता। महिला टीचर का आरोप है कि प्रिंसिपल शर्मा उस पर स्कूल के छुट्टी के बाद भी शाम 5:00 बजे तक रुकने का दवाब डालता था और कहता था कि वह उसे घर छोड़ देगा।

महिला टीचर ने शिकायत में कहा कि प्रिंसिपल की इन हरकतों से वह मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गई है। एक दिन प्रिंसिपल ने उसके साथ जबरदस्ती फोटो खींच कर ह्वाट्सएप ग्रुप में डाल दिया। महिला टीचर की शिकायत का अधिकारी ने गंभीरतापूर्वक संज्ञान लिया है।

रुपवास के उपखंड मस्जिट्रेट राजीव शर्मा ने कहा कि सरकारी स्कूलों में महिला टीचरों के शारीरिक उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं। एक महिला टीचर ने ऐसी ही एक शिकायत दी है। इस मामले में जाँच के लिए शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है। इसके लिए 5 सदस्यीय एक कमिटी का गठन किया जाएगा, जिसमें महिला सदस्य भी होगी।

बता दें कि दो महीना पहले ही जिले के कुम्हेर थाना इलाके के एक गाँव में स्थित सरकारी स्कूल की एक अध्यापिका ने रेप की कोशिश का आरोप लगाया था। महिला टीचर ने कहा था कि स्कूल के हेडमास्टर ने उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया था। 

‘मैं हिन्दू हूँ इसलिए मेरा उत्पीड़न हो रहा है’ : आगरा के स्कूल में महिला प्रिंसिपल मुस्लिम टीचरों से परेशान, वायरल Video में बोलीं- आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं

उत्तर प्रदेश के आगरा के एक स्कूल की हिन्दू महिला प्रधानाचार्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में प्रिंसिपल ने अपने स्कूल की अन्य मुस्लिम शिक्षिकाओं पर गंभीर इल्जाम लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। अगर ये सब चलता रहा तो वो आत्महत्या कर लेंगी।

वीडियो में हिन्दू शिक्षिका का आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूरी घटना उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में कैंट स्थित जॉय हैरिस स्कूल की है। स्कूल की प्रधानाचार्य वायरल वीडियो में वह रोते हुए कहती हैं,

“मुझे मुस्लिम शिक्षिकाओं द्वारा परेशान किया जा रहा है। उसमें रिहाना खातून उनकी लीडर है। वह 6-7 शिक्षिकाओं को लेकर चलती हैं। फर्स्ट ईयर और इंटर की छात्राओं द्वारा मुझे जीने नहीं दिया जा रहा है। मैं क्लास में पढ़ाने जाती हूँ। मेरा उत्पीड़न होता है। लड़कियाँ आरोप लगाती हैं। अगर मैं प्रार्थना ग्राउंड में खड़ी होती हूँ तो वहाँ भी मुझे तंग किया जाता है।”

प्रिंसिपल आगे बताती हैं, “रिहाना खातून 15 साल से प्रिंसिपल सीट लेने में लगी हुई हैं। वह कहत थी मैं तुझे कुर्सी पर नहीं बैठने दूँगी। उसने नारे लगवाए थे- ममता दीक्षित कुर्सी छोड़ो। लड़कियों में इस तरह राजनीतिक विचार भरे जा रहे हैं। मुझे प्रिंसिपल सरकार ने बनाया है। फिर भी कुर्सी के लिए मेरा उत्पीड़न हो रहा है। मेरा जीना इतना दूभर हो गया है कि आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं है। मेरे दो छोटे-छोटे बच्चे हैं।”

सुन सकते हैं कि आगे प्रिंसिपल ने कहा स्कूल के ऐसे माहौल के कारण उन्हें एक्टिवा से घर जाने में डर लगता है। 150-200 लड़कियाँ ऐसे कर रही हैं। इनमें अधिकांश सराय ख्वाजा की मुस्लिम संप्रदाय की लड़कियाँ हैं। प्रिंसिपल के अनुसार, उनके साथ ये घटनाएँ दो साल से हो रही हैं। उससे पहले भी उन्हें तंग किया जाता था ताकि वो रिजाइन दे दें। इसी के चलते रोज लड़कियों से ऐसी गतिविधियाँ करवाई जाती थीं।

ममता दीक्षिता का आरोप है कि लड़कियों से पहले खाली कागज पर साइन करवाए जाते हैं। उसके बाद शिकायतें अपनी मर्जी से लिखकर जिलाधिकारी, शिक्षा निदेशक और मुख्यमंत्री को दी जाती है। कई वीडियो बनाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की बात भी प्रिंसिपल को कहते सुना जा सकता है। वो कहती हैं, “ये शिक्षिकाएँ मेरा मर्डर करवाकर रहेंगी। मैं हिन्दू हूँ इसलिए मेरा इतना उत्पीड़न हो रहा है।”

यूनिफॉर्म पर टोकने पर भी विरोध

बता दें कि कुछ जगह कहा जा रहा है कि प्रिंसिपल द्वारा यूनिफॉर्म पर टोकने पर भी उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। वह कहती हैं कि स्कूल यूनिफॉर्म में आना चाहिए इस पर भी उनके विरुद्ध शिकायतें होती हैं। कार्यालय में लगी माँ सरस्वती की तस्वीर के खिलाफ भी आपत्ति जताई जाती है।

हिन्दू संगठनों की प्रिंसिपल से बात

प्रिंसिपल की यह वीडियो वायरल होने के बाद हंगामा मच गया। मैनेजमेंट कमेटी ने जहाँ कथिततौर पर आरोपित शिक्षिकाओं को नोटिस भेजा। वहीं हिन्दू संगठन के लोगों ने प्रिंसिपल से मुलाकात की। मुलाकात में यही पता चला कि मामला 15 साल पुराना है और ये लड़ाई प्रिंसिपल की कुर्सी के लिए है।

हिन्दू प्रधानाचार्या के साथ मुलाकात करने वाली एक दुर्गा वाहिनी संगठन की मेरठ क्षेत्र की संयोजिका ने बताया कि प्रिंसिपल की बात संबंधित अधिकारियों से हो गई है। उन्हें आश्वासान दिया गया है कि दोबारा उन्हें तंग नहीं किया जाएगा।

कार्यालय में माँ सरस्वती की तस्वीर पर जताई आपत्ति

दुर्गा वाहिनी की क्षेत्र संयोजिका ने कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले में वो वीडियोज देखीं हैं जिसमें मुस्लिम छात्राएँ तोड़फोड़ कर रही हैं। प्रिंसिपल के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं। ये लड़कियाँ 11-12वीं की हैं। उनकी ही टीचर रिहाना खातून हैं। रिहाना से ममता दो-तीन साल सीनियर हैं इसलिए उन्हें प्रिंसिपल बनाया गया लेकिन रिहाना का कहना है कि वो पोस्ट उन्हें चाहिए क्योंकि स्कूल में मुस्लिम लड़कियाँ हैं।

इसके अलावा उन्होंने जानकारी दी कि उन्हें पता चला है कि स्कूल में लड़कियाँ हिजाब पहनकर आती हैं। साथ ही प्रिंसिपल को कहा जाता है कि उनके कमरे में जो सरस्वती मात्रा का चित्र है उसे हटाया जाए। यहाँ मुसलमान ज्यादा हैं तो मक्का-मदीना का चित्र लगेगा।

बताया जा रहा है कि इन घटनाओं के बाद से प्रिंसिपल ममता दीक्षित काफी डरी हुई हैं। वो किसी से बात करने से पहले भी विचार कर रही हैं। ऑपइंडिया ने उन्हें संपर्क करने का प्रयास किया था। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

‘मोदी को शक्ति मिली तो देश में सनातन का राज हो जाएगा…’: कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद पर मल्लिकार्जुन खड़गे का नामांकन, वायरल होने लगा पुराना Video

मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) द्वारा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के कुछ घंटों बाद उनका एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में खड़गे देश को सनातन धर्म पर शासन करने के बारे में चेतावनी देते हुए नजर आ रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता और अब अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मल्लिकार्जुन खड़गे का यह वीडियो साल 2019 के आम चुनाव के पहले का है। इस वीडियो में खड़गे पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के पहले कार्यकाल की आलोचना करते हैं और फिर देश में सनातन धर्म के शासन के बारे में देशवासियों को चेतावनी देते हुए दिखाई दे रहे हैं।

ट्विटर से लेकर फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत तमाम सोशल साइट्स में वायरल हो रहे इस वीडियो में मल्लिकार्जुन खड़गे कहते हैं, “साढ़े चार कदम भी नहीं चले और हमसे पूछ रहे हैं कि क्या किया। अगर मोदी जी को देश में ऐसे ही शक्ति मिलेगी तो समझो फिर इस देश में सनातन धर्म और आरएसएस की हुकूमत आएगी।”

यह पहला मौका नहीं है, जब किसी कॉन्ग्रेस नेता सनातन धर्म के खिलाफ बयान का वीडियो वायरल हुआ हो। इससे पहले भी कई कॉन्ग्रेसी नेता हिन्दू, हिंदुत्व और सनातन के खिलाफ बोलते रहे हैं।

बता दें कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आने के बदा दिग्विजय सिंह खुद को इस रेस से अलग कर लिया था। कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद के नामांकन की आखिरी तारीख से एक दिन पहले दिग्विजय सिंह ने गुरुवार (29 सितंबर 2022) को कहा था कि वे कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर के खिलाफ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ेंगे।

कॉन्ग्रेस प्रत्याशी शशि थरूर ने भारत के नक्शे से फिर गायब किया J&K और लद्दाख का कुछ हिस्सा: सोशल मीडिया पर हो गए ट्रोल, डिलीट किया ट्वीट

कॉन्ग्रेस (Congress) के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने घोषणा पत्र को लेकर ट्विटर पर भारत का एक नक्शा साझा किया था। इस नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का कुछ हिस्सा गायब था। इसको लेकर ट्विटर पर विवाद हो गया और थरूर ने अपने ट्विटर हैंडल से इस पोस्ट को हटा दिया।

थरूर द्वारा ट्वीट किए गए नक्शे के नीचे लिखा, “संगठन विकेंद्रीकरण।” इसके नीचे लिखा था ‘हर पार्टी को सिर्फ शीर्ष पर ही नहीं, बल्कि सभी स्तर पर नेतृत्व की जरूरत होती है। राज्यों में कॉन्ग्रेस को सशक्त बनाने के लिए PCC अध्यक्षों को वास्तविक अधिकार मिलने चाहिए। इससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता सही मायने में सशक्त बनेंगे।’

इसमें आगे लिखा है, ‘हमें भाजपा के केंद्रीकरण सत्ता का एक विश्वसनीय विकल्प उपलब्ध कराना चाहिए।’ यह सब उनके घोषणा पत्र के पेज नंबर दो पर लिखा हुआ था। जब सोशल मीडिया यूजर ने इस नक्शे को देखा तो उन्हें ट्रोल करने लगे। इसके बाद थरूर ने नक्शे वाला वह पोस्ट डिलीट कर दिया।

बता दें कि आज पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन का आखिरी दिन था। इस दौरान शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया। इसके साथ ही झारखंड कॉन्ग्रेस के नेता केएन त्रिपाठी ने भी अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया।

त्रिपाठी और थरूर के प्रस्तावकों में गिने-चुने नेता थे। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रस्तावकों में 30 बड़े नेताओं के नाम हैं। इनमें अध्यक्ष पद की रेस से खुद को अलग करने वाले दिग्विजय सिंह भी शामिल हैं। इसके अलावा, जी-23 के आनंद शर्मा और मनीष तिवारी भी शामिल हैं।

बता दें कि जी-23 उन नेताओं का समूह है, जो पार्टी में गाँधी परिवार से अलग पार्टी अध्यक्ष से चुनाव की माँग करता है। हालाँकि, मल्लिकार्जुन खड़गे गाँधी परिवार, खासकर सोनिया गाँधी की पसंद होने के बावजूद इन दोनों ने माहौल को भाँपते हुए उनका प्रस्तावक बनना उचित समझा। बता दें कि कॉन्ग्रेस के 9000 डेलीगेट्स पार्टी का नया अध्यक्ष चुनेंगे।

थरूर जैसे उच्च शिक्षित व्यक्ति से देश का गलत नक्शा पेश करने की उम्मीद भी नहीं की जाती, लेकिन ये पहली बार नहीं कि उन्होंने ऐसा किया। तीन साल पहले CAA कानून के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी थरूर ने अपने ट्विटर हैंडल से भारत का गलत नक्शा पोस्ट किया था। इस नक्शे में कश्मीर को भारत से अलग दिखाया गया था।

भारत जोड़ो यात्रा पर आंदोलनजीवी, हसदेव अरण्य की कौन सुने: राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के राजनीतिक दोगलेपन से लड़ रहे सरगुजा के ST

राजनीतिक दोगलापन क्या होता है? कॉन्ग्रेस की कथनी और करनी में क्या फर्क है? राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) जिन्हें दिल्ली में ‘मोदी का यार’ बताते हैं, उन लोगों की ही एजेंट उनकी पार्टी की सरकारें कैसे बनी हुई हैं? इन सवालों के जवाब चाहिए तो छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के घने जंगलों के बीच स्थित गाँव हरिहरपुर हो आइए।

इस इलाके को हसदेव अरण्य (Hasdeo Aranya) भी कहते हैं। सितंबर के महीने में दूर-दूर तक फैली हरियाली के बीच जब हम यहाँ पहुँचे तो जोरदार बारिश मानो कॉन्ग्रेस सरकार की करनी पर रो रही हो। छतनार के पेड़ों से चलने वाली ठंडी हवाएँ मानो राहुल गाँधी की वादाखिलाफी और भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) को लानत भेज रही हो।

ऐसे मौसम में भी खेतों के बीच फूस की छत के नीचे कुछ ग्रामीण बैठे हुए हैं। इस उम्मीद में नहीं कि भूपेश बघेल सरकार उनकी सुध लेगी। इस डर से कि प्रशासनिक अमला कहीं उन पेड़ों को काटने के लिए नहीं आ धमके, जिसे बचाने के लिए वे 02 मार्च 2022 से यहाँ डटे हुए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पुलिसिया बल पर अब तक 430 पेड़ काटे भी जा चुके हैं। लेकिन, आज तक उनसे संवाद करने के लिए प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं पहुँचा है।

हरिहरपुर, सालही, फतेहपुर, घाटबर्रा, चारपाड़ा, मदनपुर जैसे कई गाँव का जनजातीय समाज ‘हसदेव बचाओ’ के नारे के साथ छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार और अडानी समूह के खिलाफ मार्च से ही धरने पर बैठा हुआ है। वे इस वन क्षेत्र में खनन की नई इजाजत का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परसा में खदान की अनुमति फर्जी ग्रामसभा का आयोजन कर दी गई है। खुदाई की वजह से वे करीब 4.5 लाख पेड़ों की कटाई होने का दावा कर रहे हैं।

बारिश के मौसम में भी खेतों के बीच चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन

धरने पर बैठे ग्रामीणों को डर है कि खनन से उनके गाँव लुप्त हो जाएँगे। यह बेजा नहीं है। जैसा कि हरिहरपुर की संपतिया ने ऑपइंडिया को बताया, “मेरा मायका केते है। जब वहाँ खदान खुला तब सब पेड़-पौधे काट दिए। मेरे सब भाई-बहन इधर-उधर चले गए। पूरा परिवार बिखर गया। अब हम इस गाँव-बस्ती को छोड़कर नहीं जाएँगे। अडानी हमारी जगह जमीन मत लो। हम इसे नहीं छोड़ेंगे। भले हम लोगों की जान जाए तो जाए, लेकिन हम यह जगह नहीं छोड़ेंगे। हम जंगल नहीं कटने देंगे।”

कॉन्ग्रेस सरकार से इनलोगों की नाराजगी की एक वजह राहुल गाँधी का वह वादा है जो उन्होंने 2015 में किया था। हरिहरपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर मदनपुर में जून 2015 में राहुल गाँधी ने एक सभा की थी। इस दौरान इन ग्रामीणों को भरोसा दिलाया था कि राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने पर इस इलाके में खुदाई की अनुमति नहीं होगी। उनके गाँव नहीं उजड़ने दिए जाएँगे। इस वादे पर भरोसा कर इनलोगों ने 2018 के विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया। राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार भी आ गई। इसके बाद कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी ने यह वादा भूला दिया।

राहुल गाँधी की वह सभा जिसमें उन्होंने हसदेव अरण्य को बचाने का वादा किया था। उस दौरान भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव भी उनके साथ थे।

वादा याद दिलाने के लिए यहाँ के करीब 300 ग्रामीणों ने 4 अक्टूबर 2021 को एक पदयात्रा शुरू की। यह 11 अक्टूबर को रायपुर पहुँची। बघेल सरकार को राहुल गाँधी का वादा याद दिलाया। आश्वासन मिला, पर हुआ कुछ नहीं। इसके बाद ग्रामीणों का एक दल दिल्ली आकर राहुल गाँधी से मिला। उन्होंने भी कथित तौर पर फिर भरोसा दिलाया। फिर भी कोई पहल नहीं हुई तो ग्रामीणों ने ‘हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति’ के बैनर तले धरना शुरू किया। दिलचस्प यह है कि छत्तीसगढ़ का परसा कोल ब्लॉक राजस्थान राज्य विद्युत् उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित है। राजस्थान की सरकार ने अनुबंध पर इसे खनन के लिए अडानी समूह को दिया है। राजस्थान में भी कॉन्ग्रेस की ही सरकार है।

फतेहपुर गाँव के भुनेश्वर सिंह पोर्ते भी ‘हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति’ से जुड़े हुए हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “धरने पर बैठे हुए हमें 190 दिन के आसपास हो गया है। लेकिन आज तक शासन-प्रशासन का कोई आदमी हमारी सुध लेने नहीं आया है।’ सालही गाँव के राम लाल सिंह करियाम कहते हैं, “सरकार ने फर्जी ग्रामसभा के आधार पर खनन की जो अनुमति दी है एनजीटी ने 2014 में ही उसे निरस्त कर दिया था। फिर भी यह सरकार आगे बढ़ रही है। हम पदयात्रा करके रायपुर गए थे। राज्यपाल ने फर्जी ग्रामसभा की जाँच के आदेश दिए थे। लेकिन जिला प्रशासन मौन बैठा हुआ है।”

सालही के ही नंदराम ने ऑपइंडिया को बताया, “छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस सरकार आने से हम लोगों को लगा कि जब ये नरवा, गरुआ, घुरुवा की बात कर रही है तो यह खदान आवंटन रद्द करेगी। लेकिन यह नरवा, घुरुवा को उजाड़ने का काम कर रही है। हमारी जान जाए तो जाए लेकिन हम जंगल-जमीन नहीं छोड़ेंगे। हम लड़कर रहेंगे। सरकार यह मत सोचे कि हम कमजोर हैं। हम कमजोर नहीं हैं। पूरे छत्तीसगढ़ के लोग आज हमारे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।”

सरगुजा के हरिहरपुर में प्रवेश करते ही यह बोर्ड नजर आता है

सवाल केवल यह नहीं है कि इस जगह खनन होना चाहिए या नहीं? इसके लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई वह वैध थी या नहीं? लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई एक सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने लोगों से संवाद करेगी। हसदेव बचाओ आंदोलन को लेकर कॉन्ग्रेस की सरकार ने यह पहल तक नहीं की है। उलटा कुछ ग्रामीणों पर केस दर्ज कर दिए गए हैं।

सबसे हास्यास्पद यह है कि कॉन्ग्रेस की ही सरगुजा यूनिट इन्हें समर्थन देने की बात कहती है। इसी इलाके से आने वाले बघेल सरकार के एक मंत्री टीएस सिंहदेव भी इन आंदोलनकारियों को धरनास्थल पर आकर अपना व्यक्तिगतसमर्थन देकर जा चुके हैं। राज्य सरकार चाहे तो केंद्र की मोदी सरकार का भी अनुकरण कर सकती है जो उसने कृषि कानूनों को वापस लेकर दिखाई है। लेकिन ऐसा कुछ होने की उम्मीद नहीं दिखती, क्योंकि कॉन्ग्रेस, राहुल गाँधी और भारत जोड़ो यात्रा में बिजी आंदोलनजीवियों के लिए हसदेव और उसके जनजातीय बच्चों की आवाज का कोई मोल ही नहीं है।