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शौच के लिए गई दलित लड़की से मुस्लिम लड़कों ने की बदसलूकी, हल्ला होने पर बाईक छोड़ भागे: अब्दुल अजीज समेत 3 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर जिले में एक नाबालिग दलित लड़की से छेड़खानी के आरोप में मुस्लिम समुदाय के 3 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। आरोपितों के नाम लालबाबू, अब्दुल अजीज और एक अन्य है जो नाबालिग बताया जा रहा है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

घटना बलरामपुर के सदुल्लानगर थानाक्षेत्र के गाँव गंधाउर नगर फ़िरोज़पुर में रविवार (2 अक्टूबर 2022) को घटी। इस घटना पर स्थानीय महंत ने राष्ट्रीय SC/ST आयोग को पत्र लिख कर केस को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की माँग की है।

पीड़िता के पिता ने घटना की शिकायत दर्ज कराते हुए कहा घटना के दिन उनकी 2 नाबालिग बेटियाँ शौच के लिए खेतों की तरफ गईं थीं। एक बेटी की उम्र लगभग 14 वर्ष और दूसरी की उम्र लगभग 10 वर्ष है। इसी दौरान बाइक से हबीबपुर के रहने वाले लालबाबू, अब्दुल अज़ीज़ और एक अन्य नाबालिग लड़का वहाँ पहुँच गए।

पीड़ित पिता ने शिकायत में आगे बताया कि तीनों आरोपितों ने उनकी बड़ी बेटी का हाथ पकड़ लिया। आरोप है कि इस दौरान पीड़िता को खींचने की कोशिश करते हुए उसके साथ छेड़खानी की गई। पीड़िता की बहन यह सब देख कर डर गई और जोर-जोर से रोने लगी।

रोने की आवाज सुन कर आस-पास से गुजर रहे लोग मौके पर पहुँचे। लोगों को आता देख कर तीनों आरोपित अपनी बाईक छोड़ कर भाग गए। मिली जानकारी के मुताबिक तीनों आरोपितों की उम्र क्रमशः लगभग 30, 20 और 14 वर्ष है।

शिकायत के मुताबिक दोनों नाबालिग लड़कियों ने अपने घर पहुँच कर सारी बात बताई। बाद में उनके परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने अगले दिन सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि नाबलिग आरोपित की जमानत पहले ही दिन हो गई और बाकी दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के साथ SC/ST एक्ट और IPC की धारा 354 के तहत कार्रवाई की है।

स्थानीय महंत ने की फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाने की माँग

इस घटना के बाद बलरामपुर जिले के ही हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत महेंद्र दास ने राष्ट्रीय SC/ST आयोग को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने आयोग से घटना का संज्ञान लेने और आरोपितों का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की माँग की है। महंत महेंद्र दास ने पीड़िता को ‘बलरामपुर की बेटी’ कह कर सम्बोधित किया है।

महंत महेंद्र दास के पत्र को हिंदी खबर की पत्रकार आँचल यादव ने ट्वीट किया है। इस ट्वीट पर बलरामपुर पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच DSP स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और साथ में जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

नेपाल बॉर्डर की रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने की थी सदुल्लानगर की चर्चा

गौरतलब है कि यह घटना जिस सादुल्लानगर थानाक्षेत्र की है उसका जिक्र ऑपइंडिया ने नेपाल बॉर्डर से जुडी अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में किया था। तब हमने बताया था कि नेपाल से सटे बलरामपुर जिले के सादुल्लानगर थानाक्षेत्र के कई गाँवों में मुस्लिम आबादी हिन्दुओं से अधिक हो गई है।

राजस्थान में छाया बिजली संकट: 23 थर्मल स्टेशनों में से 11 बंद, प्रदेश में बचा है सिर्फ 4 दिन का कोयला

राजस्थान में बिजली संकट का खतरा बढ़ता जा रहा है। कोयले की आपूर्ति न होने के कारण प्रदेश में 23 थर्मल स्टेशनों में से 11 ने बिजली उत्पादन करना बंद कर दिया है। कई जिले में तो कई घंटों बिजली गायब होती है। स्थानीय शिकायत देते हैं लेकिन अधिकारी कोई सुनवाई नहीं करते। राज्य के ऐसे हालातों को देख डर है कि कहीं दीवाली तक राजस्थान में अंधेरा न छा जाए।

राजस्थान में बिजली घरों की 11 यूनिट बंद

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में कोयला आपूर्ति न होने पर बिजली घरों की जिन 11 यूनिस्ट को बंद किया गया है उनमें 4 तो सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट की हैं। वहीं 3- कोटा थर्मल पावर प्लांट की और 3 राजवेस्ट की हैं। इसी तरह छबड़ा थर्मल पावर प्लांट और रामगढ़ की 1-1 यूनिट को भी बंद किया गया है।

इन 11 यूनिट के बंद होते ही राज्य में 2400 मेगालाट कैपेसिटी बिजली का उत्पादन थम गया है। अधिकारी बता रहे हैं कि हर दिन करीब 30 हजार मीट्रिक टन से अधिक कोयले की आपूर्ति में कमी आने के कारण ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हुई है। कोयला खत्म होने के पीछे विभागीय अधिकारियों की लापरवाही की बात भी सामने आई है।

कितनी बिजली की आवश्यकता, कितनी शेष

खबर में राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की असेसमेंट रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि साल 2022-23 के पीक आवर्स में बिजली की डिमांड 17757 मेगावाट पहुँच सकती है जबकि उपलब्ध कैपेसिटी मात्र 12847 रह पाएगी। ऐसे में राजस्थान के लोगों को कोयला सप्लाई और बिजली प्रोडक्शन के रुकने के चलते लंबे पावर कट की परेशानी को झेलना पड़ सकता है।

फिलहाल, हालातों को सुधारने के लिए दीवाली मेंटेनेंस के नाम पर रोज 4 घंटे बिजली कटौती कई ब्लॉक में की जा रही है। पिछले कई दिनों से ऐसा प्रदेश में चल रहा है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में यदि छोड़ दें तो पावर कट की समस्या शहरी इलाकों में भी बनी हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में 1 करोड़ 47 लोग राज्य में बिजली उपभोक्ता हैं। सभी को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है। अधिकारी बता रहे हैं कि उनके पास 4 दिन का कोयला बाकी बचा है जो कि केंद्र की गाइडलाइंस का उल्लंघन है। केंद्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के पास कम से कम 26 दिन का स्टॉक होना ही चाहिए।

छत्तीसगढ़ में माइनिंग के काम पर लगी रोक

बता दें कि राजस्थान में बिजली और कोयले को लेकर ये जो सारी परेशानियाँ सामने आ रही हैं, इसके पीछे की जड़ छत्तीसगढ़ है। दरअसल राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को कोयला आपूर्ति के लिए छत्तीसगढ़ में ‘पारसा ईस्ट एंड कांटा बासन कोल ब्लॉक’ नामक माइंस अलॉट हो रखी है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने सरजुगा में 841 हेक्टेयर के एक्सटेंशन ब्लॉक में माइनिंग पर रोक लगा रखी है।

यहाँ माइनिंग की शुरुआत न हो पाने का कारण- आदिवासियों से लेकर स्थानीय नेताओं और गैर सरकारी संगठनों का विरोध, जल-जंगल-जमीन से जुड़े आंदोलन और छत्तीसगढ़ सरकार में ही चल रहे अंदरूनी कलह है। इन्हीं कारणों से न कोयला निकल पा रहा है और न ही राजस्थान के पावर प्लांट तक पहुँच पा रहा है।

कॉन्ग्रेस सरकार (छत्तीसगढ़) नहीं सुन रही कॉन्ग्रेस सरकार (राजस्थान) की गुहार

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार होने के बावजूद मंत्री इस संबंध में छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार से बात करके समस्या का समाधान खोजने का प्रयास नहीं कर रहे। वे केंद्र से गुहार लगा रहे हैं कि उनकी मदद की जाए। केंद्र ने भी इस संबंध में हालात देखते हुए उनकी कुछ माँगों को माना है। जैसे 3 रैक कोयले की मदद देते हुए उन्होंने राजस्थान सरकार से कहा है कि वह छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार से बात करके मामले को सुलझाएँ।

जानकारी के मुताबिक राजस्थान के सभी पावर प्लांट्स को चलने के लिए 37 रैक (1 रैक में 4000 मीट्रिक टन) कोयले की प्रतिदिन सप्लाई चाहिए लेकिन कुछ दिन पहले वह घटकर केवल 20 रैक रह गया था और अब वह और कम होकर 14 हो गया है।

खाँसी की सिरप पीने के बाद अफ्रीका में 66 बच्चों की मौत: WHO ने 4 दवाओं को लेकर जारी की चेतावनी, भारत ने सैंपल जाँच को भेजे

अफ्रीकी देश गांबिया (African country Gambia) में कथित रूप से खाँसी की सिरप पीने के बाद 66 बच्चों की मौत के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके लिए भारत की दवा निर्माता कंपनी को जिम्मेवार बताया है। WHO की चेतावनी के बाद दिल्ली स्थित केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (DCGI) ने दवा कंपनी द्वारा बनाए जाने वाले इन कफ सिरप की जाँच का आदेश दिया है।

वहीं, हरियाणा सरकार भी अपनी तरफ से इसकी जाँच कर रही है। इन दवाओं को बनाने वाली सोनीपत की कंपनी से सैंपल लेकर हरियाणा सरकार ने जाँच के भेजा है। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज (Haryana Health Minister Anil Vij) ने कहा कि जिन चार कफ सिरपों के लेकर विवाद हुआ है, उनके सैंपल लेकर कोलकाता स्थित सेंट्रल ड्रग लेबोरेटरी (CDL) में जाँच के लिए भेजा गया है।

मंत्री अनिल विज ने बताया कि सोनीपत की दवा कंपनी मेडेन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड (Maiden Pharmaceuticals Limited) से ये नमूने भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGA) और हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की एक टीम ने एकत्र किए गए हैं। बता दें कि जिन चार कफ सिरप को लेकर WHO चेतावनी जारी की है, वे हैं- प्रोमेथाजिन ओरल सॉल्यूशन (Promethazine Oral Solution), कोफेक्समालिन बेबी कफ सिरप (Kofexmalin Baby Cough Syrup), मकॉफ बेबी कफ सिरप (Makoff Baby Cough Syrup) और मैग्रीप एन कोल्ड सिरप (Magrip N Cold Syrup)।

अनिल विज ने आगे कहा, “फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित कफ सिरप को निर्यात के लिए मंजूरी दी गई थी। यह देश में बिक्री या विपणन के लिए उपलब्ध नहीं है। सीडीएल की रिपोर्ट आने के बाद जो भी कार्रवाई करनी होगी, वह की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही हम इस बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि गांबिया में हुई मौतें इन दवाओं के कारण हुई हैं या किसी अन्य कारण से।”

दरअसल, गांबिया में 29 सितंबर 2022 को 66 बच्चों की मौत पर WHO ने बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को एक रिपोर्ट में कहा कि खाँसी की दवा डाइथेलेन ग्लाइकोल और इथिलेन ग्लाइकोल इंसान के लिए जहर की तरह हैं। WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसुस ने कहा कि बच्चों की मौत का संबंध चार दवाओं से है। इन सिरप के सेवन से उनके गुर्दों को क्षति पहुँची।

WHO ने कहा कि इन मौतों के लिए अब तक खाँसी की चार दवाओं की पहचान की गई है। इसके लिए दुनिया के बाकी देशों को भी चेतावनी जारी की गई है। दोयम दर्जे के ये उत्पाद असुरक्षित हैं और खासकर बच्चों की मौत का कारण बन सकते हैं। WHO का कहना है कि इसके 23 नमूनों में से 4 नमूनों में डायथाइलीन ग्लाइकॉल/एथिलीन ग्लाइकॉल की अस्वीकार्य मात्रा पाई गई है, जो इंसान के लिए जहर के समान है।

WHO ने कहा कि आज तक इस कंपनी ने इन उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता की गारंटी नहीं दी है। डायथाइलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल के प्रभाव से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, पेशाब न होना, सिरदर्द, बदली हुई मानसिक स्थिति, और किडनी की समस्या हो सकती है और जान भी जा सकती है। WHO ने कहा उत्पादों के सभी बैचों को तब तक असुरक्षित माना जाना चाहिए, जब तक कि संबंधित राष्ट्रीय नियामक द्वारा उनकी सही से जाँच नहीं हो जाती।

इस मामले को लेकर ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) ने कहा है कि यह कंपनी अपने उत्पाद सिर्फ निर्यात करती है, फिर भी इस बारे में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) कोई दिशा निर्देश देगा तो उसका पालन किया जाएगा। 

अरविन्द केजरीवाल ने ‘पत्नी और लव लेटर’ से कसा तंज, BJP के कपिल मिश्रा ने दिलाई ‘बाप’ की याद

भाजपा नेता मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के उस बयान की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने राज्यपाल पर तंज कसा है। मनोज तिवारी ने केजरीवाल की भाषा को छिछोरापन बताया है। अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना के लिए अपने ट्वीट में कहा था कि LG साहब जितना उन्हें डाँटते है, उतना तो उनकी पत्नी भी नहीं डाँटतीं। गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) को किए गए इसी ट्वीट में उन्होंने लव लेटर का भी जिक्र किया।

अरविन्द केजरीवाल ने आज शाम दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना को सम्बोधित करते हुए ट्वीट किया। उन्होने लिखा, “LG साहिब रोज़ मुझे जितना डाँटते हैं, उतना तो मेरी पत्नी भी मुझे नहीं डाँटतीं। पिछले 6 महीनों में LG साहिब ने मुझे जितने लव लेटर लिखे हैं, उतने पूरी ज़िंदगी में मेरी पत्नी ने मुझे नहीं लिखे। LG साहिब, थोड़ा chill करो। और अपने सुपर बॉस को भी बोलो, थोड़ा chill करें।”

भाजपा ने बताया छिछोरापन

भाजपा नेता मनोज तिवारी ने अरविन्द केजरीवाल के इस बयान की निंदा की है। उन्होंने अरविन्द केजरीवाल के ट्वीट पर लिखा, “ये छिछोरेपन की भाषा बताती है कि केजरीवाल जी की मानसिक स्तर क्या है। 7 साल में एक भी विभाग न सम्भाला, एक भी फाइल साइन न की आज तक आपने। आपकी रुचि सिर्फ़ लूट और झूठ में है, जो अब इस निम्न स्तर पर आ गई है।”

वहीं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने तंज का जवाब तंज से ही दिया है। उन्होंने लिखा, “पति शराबी-कबाबी हो या निकम्मा, एक समय के बाद पत्नियाँ डाँटना छोड़ देती हैं। बाप नहीं छोड़ता।”

चिट्ठी से उठा विवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ दिन पहले दिल्ली के राज्यपाल ने केजरीवाल सरकार को पत्र लिख कर इस बात पर नाराजगी जताई थी कि गाँधी जयंती पर उनका कोई भी नेता या मंत्री राजघाट या विजय चौक नहीं गया। पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर की समाधि पर दिल्ली सरकार के किसी भी मंत्री के न जाने की बात लिखी थी। इसके अलावा पूर्व में राज्यपाल वीके सक्सेना ने केजरीवाल सरकार द्वारा दी जा रही बिजली सब्सिडी में अनियमितता बताते हुए जाँच के भी आदेश दे रखे हैं।

लंदन में दिनदहाड़े अज्ञात हमलावर ने 3 लोगों को घोंप दिया चाकू, प्रशासन घटना को ‘आतंकवाद’ से अलग बताने में जुटा: पिछले माह भी 2 पुलिसकर्मी पर हुआ था हमला

बीते दिनों इंग्लैंड से आई हिंसक खबरों के बाद अब सेंट्रल लंदन से तीन लोगों पर धारदार हथियार से हमला करने का मामला सामने आया है। इस वारदात को लिवरपूल स्ट्रीट स्टेशन के पास गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) की सुबह अंजाम दिया गया, जबकि चौथे शख्स को धक्का मार सड़क पर गिरा दिया गया।

सूचना मिलने के बाद लंदन पुलिस (London Police) और एम्बुलेंस सुबह 9.51 बजे घटनास्थल पर पहुँची। तीनों घायलों को LAS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने कहा कि इस मामले की जाँच जारी है। इसे आतंक से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। घटनास्थल की कुछ तस्वीरें और वीडियो भी सामने आई हैं। यहाँ भारी पुलिस बल तैनात है। घटनास्थल पर बिखरा हुआ सामान भी देखा जा सकता है।

सिटी ऑफ लंदन पुलिस के प्रवक्ता ने कहा, “हमें आज सुबह 9.46 बजे बिशपगेट पर तीन लोगों को चाकू मारने और एक व्यक्ति को सड़क पर धक्का मारकर गिराने की सूचना मिली। अधिकारी 9.51 बजे घटनास्थल पर पहुँचे। तीन घायलों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया है। यह घटना आतंकवाद से संबंधित नहीं है।”

वहीं, एक प्रत्यक्षदर्शी ने माय लंदन को बताया, “मैंने इस घटना को यहाँ से बस में जाते हुए देखा था। काफी मात्रा में खून दिखाई दे रहा था, लेकिन हमले में कितने लोग घायल हुए, यह पता नहीं चल पाया। यहाँ काफी पैरामेडिकल स्टाफ था। मैंने बस इतना ही देखा।”

बताया जा रहा है कि बाइक पर सवार यह हमलावर फोन चोरी कर रहा था, जब लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने उन पर हमला कर दिया। टेलीग्राफ यूके के मुताबिक, यह चोरी की घटना थी। एक बाइक सवार चोर ने एक व्यक्ति का फोन लूटने की कोशिश की थी, जब उसने चोर को ऐसा करने से रोका तो उसने उस पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने आए राहगीरों को भी उस चोर ने चाकू मार घायल कर दिया। हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

बता दें कि सिटी ऑफ लंदन पुलिस इस घटना को चोरी से जोड़कर देख रही हैं और आतंकवाद से इसका लिंक होने से मना कर रही है। लेकिन याद दिला दें कि इससे पहले भी दो पुलिसकर्मियों पर लंदन पर चाकू से हमला हुआ था। उस समय पहले पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। तब भी पुलिस ने कहा था कि यह घटना आतंकवाद से संबंधित नहीं लगती है।

‘अरे कौन भौंक रहा है बदतमीज’: नोबेल प्राइज पर पूर्व DGP का मीम देख आगबबूला हुईं रोहिणी सिंह, बदले में करारा जवाब मिला

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद (DGP Shesh Paul Vaid) सोशल मीडिया पर मीम्स शेयर करने के कारण चर्चा में हैं। पूर्व डीजीपी ने गुरुवार (6 अक्टूबर 2022) को नोबेल पुरस्कार को लेकर एक मीम शेयर किया, जो उदारवादियों और इस्लामवादियों को पसंद नहीं आया। उन्होंने इस मीम को देखने के बाद शेष पॉल वैद पर भड़ास निकालनी शुरू कर दी।

दरअसल, पूर्व डीजीपी वैद ने अपनी टाइमलाइन पर मीम टाइम मैगजीन द्वारा प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज के संस्थापक मोहम्मद जुबैर और प्रतीक सिन्हा को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट करने के एक दिन बाद शेयर किया है। सोशल मीडिया पर इसे देखने के बाद वामपंथी पोर्टल द वायर की स्वयंभू पत्रकार रोहिणी सिंह (Rohini Singh) आगबबूला हो गईं। वह बिना सोचे-समझे पूर्व DGP को नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगीं। जबकि उनके ट्वीट में मोहम्मद जुबैर तो क्या किसी का नाम नहीं लिखा हुआ है।

वामपंथी क्यों पड़ गए पूर्व डीजीपी के पीछे?

टाइम पत्रिका द्वारा बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को मोहम्मद जुबैर और प्रतीक सिन्हा को नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित विजेताओं की सूची में रखने के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। इसी बीच बिना किसी का नाम लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी ने भी नोबल पुरस्कार के बारे में एक मीम पोस्ट कर दिया।

उन्होंने अक्षय कुमार, अनिल कपूर और नाना पाटेकर अभिनीत 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘वेलकम’ का एक सीन ट्वीट किया। मीम में फिल्म का फेमस डायलॉग, ‘अब घोड़ों की रेस में गधे भी दौड़ेंगे’ लिखा हुआ है। उन्होंने अपने ट्वीट में कैप्शन लिखा, “नोबेल शांति पुरस्कार और उसके बाद मुस्कुराता हुआ इमोजी।”

वैद की इस पोस्ट पर स्पष्ट रूप से किसी का नाम नहीं लिखा हुआ है। इसके बावजूद द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह आहत हो गईं और उनको जवाब लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जो जिम्मेदार पदों पर आसीन हो, एक आईटी सेल ट्रोल के चक्कर में फँस गए। आप बागवानी, मिट्टी के बर्तनों या टोकरी बुनाई की कोशिश क्यों नहीं करते। महोदय, अगर आपको सेवानिवृत्ति के बाद समय बिताना मुश्किल लगता है। तो इन कामों को कर सकते हैं। ये सम्मानजनक शौक हैं।”

रोहिणी सिंह के बाद वैद के मजाकिया मीम पर तथाकथित वामपंथियों, इस्लामवादियों और जुबैर के ऑनलाइन समर्थकों ने पूर्व DGP के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया। उन्होंने वैद पर व्यक्तिगत हमले करने के साथ उनका मजाक भी उड़ाया। एक ने लिखा, “आज हमारे देश की जो हालत है उसमें तुम जैसे पुलिस वाले का बहुत बड़ा हाथ है।” आदिल नाम के यूसर ने लिखा, “गधा? आपका नाम तो नहीं है सर इसमें।”

सोशल मीडिया पर रोहिणी सिंह द्वारा लगाई गई आग के बाद पूर्व डीजीपी ने एक और मीम शेयर किया। यह भी बॉलीवुड फिल्म ‘वेलकम’ का है। इसमें फिल्म का फेमस डायलॉग ‘अरे कौन भौंक रहा है बदतमीज’ लिखा हुआ है।

ऑल्ट न्यूज के संस्थापकों को टाइम पत्रिका ने शॉर्टलिस्ट किया

TIME मैगज़ीन ने खुद को फैक्ट चेकर कहने वाले मोहम्मद जुबैर और प्रतीक सिन्हा को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के संभावित विजेताओं की सूची में रखा है। इस सूची में अन्य नाम वलोडिमिर ज़ेलेंस्की, डब्ल्यूएचओ, डेविड एटनबरो, ग्रेटा थुनबर्ग, एलेक्सी नवलनी सहित कई नाम हैं।

मोहम्मद जुबैर वही शख्स है, जिसके कारण कट्टरपंथियों ने देश में ‘सर तन से जुदा’ का आतंक फैला रखा था। इस हिंसा के कारण उदयपुर के कन्हैयालाल साहू और अमरावती के उमेश कोल्हे सहित कम-से-कम 6 हिंदुओं को जान गँवानी पड़ी। ऐसे व्यक्ति को नोबेल शांति पुरस्कार 2022 की सूची में स्थान देना अत्यंत निंदनीय है और यह टाइम मैगज़ीन के निम्न मानकों को भी दर्शाता है।

याद दिला दें कि कन्हैया लाल की निर्मम हत्या के बाद टाइम मैगजीन ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें इस्लामवादियों की करतूत को छिपाकर पीड़ित को उनकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। कन्हैया लाल की हत्या पर टाइम में लिखते हुए सान्या मंसूर ने कहा था कि गरीब हिंदू दर्जी ने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा की ‘अपमानजनक टिप्पणियों’ का समर्थन करके इस्लामवादियों का गुस्सा मोल ले लिया था।

‘मुझे हर भारतीय जानता है’: ओबामा की पत्नी के ट्वीट पर शेखी बघार रहे थे जावेद अख्तर, इंडियन यूजर्स बोले- इन्हें सीरियसली मत लो, ये आधे समय नशे में रहते हैं

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barak Obama) की पत्नी मिशेल ओबामा (Michelle Obama) अपनी आने वाली पुस्तक के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इसको लेकर उन्होंने एक ट्वीट किया, जिस पर बॉलीवुड लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) कमेंट करने के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोल रहे हैं।

दरअसल, मिशेल ओबामा ने अपनी आने वाली किताब ‘द लाइट वी कैरी: ओवरकमिंग इन अनसर्टेन टाइम्स’ को लेकर अमेरिका के छह शहरों के दौरे की तारीखों की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने ओपरा विनफ्रे, डेविड लेटरमैन और एलेन डीजेनरेस जैसे सेलिब्रिटी मॉडरेटरों की एक सूची साझा की, जो उनके साथ शामिल होंगे।

सूची को साझा करते हुए मिशेल ने ट्वीट किया, “मैं कुछ व्यक्तिगत कहानियाँ और सबक साझा कर रही हूँ, जिन्होंने मुझे जीवन में मदद की है। इसे आपको बताने के लिए मैं और इंतजार नहीं कर सकती। मुझे आशा है कि आप हमारे साथ जुड़ेंगे।”

मिशेल ओबामा के ट्वीट का जवाब देते हुए जवेद अख्तर ने लिखा, “प्रिय सुश्री मिशेल ओबामा, मैं कोई युवा पागल प्रशंसक नहीं हूँ, बल्कि भारत का एक 77 वर्षीय लेखक/कवि हूँ। उम्मीद है कि हर भारतीय मेरा नाम जानता होगा। मैडम, कृपया मेरे शब्दों को गंभीरता से लें कि न केवल अमेरिका बल्कि दुनिया को व्हाइट हाउस में आपकी जरूरत है। आपको इस जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।”

जावेद अख्तर के इतना लिखते ही सोशल मीडिया उनके कमेंट के मीम की बाढ़ आ गई। कुछ सोशल मीडिया यूजर ने उनका मजाक उड़ाया कि उन्हें लगता है कि उन्हें हर भारतीय जानता है। वहीं, कुछ लोगों ने कहा कि वे अब अमेरिका में संभावना तलाश रहे हैं।

जफर नाम के एक यूजर ने लिखा, “प्रिय सुश्री मिशेल, आधे समय यह बुजुर्ग नशे में रहता है। आप ह्वाइट हाउस जाने के बारे में सोचिएगा भी मत, ट्रंक को फिर से आने दीजिए।”

द स्किन डॉक्टर नाम के ट्विटर यूजर ने जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर को संबोधित करते हुए लिखा, “हैलो फरहान अख्तर, लगता है तुम्हारी पुड़िया (गाँजा या ड्रग) आज फिर से बाबूजी के हाथ लग गई है। इनका ध्यान रखा करो भाई।”

एमिनेंट ओक नाम के ट्विटर हैंडल ने उनके एक किरदार को संबोधित करते हुए लिखा, “दुग्गल साहब, आज अमेरिकन सिटीजन बने हैं।”

क्राइम मास्टर गोगो नाम के ट्विटर हैंडल ने कहा, “इस आदमी को भारत के लोग सीरियसली नहीं लेते और यह मिशेल ओबामा से कह रहा है कि सीरियसली ले। यह बड़ा हास्यास्पद है।”

सुपरस्टार राज नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “हाय मिशेल, जावेद अख्तर ने अंग्रेजी में भाषण लिखना शुरू कर दिया है। पिछली बार जब उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के लिए भाषण लिखे थे तो उसने भारत में नैतिकता के आधार पर जीत दर्ज की थी, लेकिन चुनाव हार गई थी।”

फैक्ट्स नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “मुझे नहीं लगता कि जो बाइडेन दो-दो पत्नियों को संभाल सकते हैं। हंटर बाइडेन ऐसा कर सकते हैं।”

रोजी नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “मैं भारतीय हूँ, लेकिन मुझे नहीं पता कि यह जावेद अख्तर कौन है।”

‘कह के पहनो’ नाम के ट्विटर हैंडल ने जावेद अख्तर का माखौल उड़ाते हुए कहा, “ह्वाइट हाउस ही क्यों… उनको इंडिया का प्रेसिडेंट बना दीजिए। हद है अमेरिकी चमचागिरी की।”

वहीं, एक अन्य ट्विटर यूजर mthn ने लिखा, “मैं एक भारतीय हूँ। आप कौन हैं?”

सरकारी स्कूल में मरम्मत के नाम पर बनवाई मजार, बच्चों को राष्ट्रगान गाने से रोका: खुलासा होने पर प्रिंसिपल शाहीना फिरदौस का ट्रांसफर, शौहर बन्ने खाँ पर साथ देने के आरोप

मध्यप्रदेश के विदिशा में एक सरकारी स्कूल में मज़ार बना देने का मामला सामने आया है। इसे बनाने का आरोप वहाँ की प्रिंसिपल शाहीना फिरदौस पर लगा है। बताया जा रहा है कि इस काम में प्रिंसिपल की मदद उनके शौहर ने भी की थी। हालाँकि प्रिंसिपल ने उस ढाँचे को बनवाने से इंकार किया है।

जिला शिक्षा अधिकारी ने DM से उस कथित मज़ार को तोड़ने के लिए पत्र लिखा है। इस खबर का संज्ञान राष्ट्रीय बाल आयोग ने भी लिया है और उसके अध्यक्ष ने स्कूल के दौरे का ऐलान करते हुए संबंधित अधिकारियों को मौजूद रहने के लिए कहा है।

स्कूल में मजार बनाने का मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला विदिशा जिले के कुरवई इलाके में पड़ने वाले सेकेंड्री स्कूल का है। इस स्कूल को मध्यप्रदेश सरकार की सीएम राइज़ योजना के लिए भी चयन किया गया है।

कहा जा रहा है कि यहाँ साल 1992 में बतौर शिक्षक ज्वाइन करने वाली प्रिंसिपल शाहीना फिरदौस ने इसके अंदर मज़ारनुमा ढाँचा बनवाया। इस ढाँचे को बनवाने में उनके शौहर बन्ने खाँ ने भी सहयोग किया जो उसी स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर के तौर पर तैनात थे।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक़ ग्रामीणों का कहना है कि मज़ार का आकार चबूतरे जैसा है। इसे फरवरी 2022 में बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान बनवाया गया था। बताया जा रहा है कि इस ढाँचे को बनाने वालों ने बाकी शिक्षकों पर इसकी शिकयत न करने का दबाव डाला था।

स्कूल में नहीं गाया जाता था राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत

आरोप यह भी है कि शाहीना फिरदौस के प्रिंसिपल रहने के दौरान इस स्कूल में ‘जन गण मन’ और ‘वन्देमातरम’ के बदले अलमा इकबाल का ‘ए मालिक तेरे बंदे हम’ गाना प्रार्थना के तौर पर गया जाता था। स्कूल के कुछ कर्मचारियों ने इसकी पुष्टि दैनिक भास्कर से की है। स्कूल के वर्तमान प्रिंसिपल आर के श्रीवास्तव के मुताबिक अगस्त 2022 में उनकी जॉइनिंग के बाद से स्कूल में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गया जा रहा है।

मजार को लेकर जाँच में बोला झूठ, प्रिंसिपल का ट्रांसफर

इस खबर के सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार मौगदिल ने DM को पत्र लिख कर मज़ारनुमा चबूतरे को तोड़ने की माँग की है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि इसी साल फरवरी में स्कूल में मरम्मत के दौरान वहाँ मज़ारनुमा चबूतरा बनवाया गया था।

अतुल कुमार के मुताबिक अगस्त 2022 में इसकी शिकायत हुई थी जिसमें जाँच के बाद आरोप सही पाए गए थे। उन्होंने आगे बताया कि प्रिंसिपल शाहीना ने पहले से ही चबूतरा बने होने की बात कही थी जो जाँच में गलत पाई है। जिला शिक्षा अधिकारी के मुताबिक प्रिंसिपल का ट्रांसफर कर दिया गया है और उनको सस्पेंड करने की कार्रवाई की जा रही है।

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने मामले का संज्ञान लिया है। इसके अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बच्चों को राष्ट्रगान से वंचित रखना एक गंभीर अपराध बताया है। उन्होंने स्वयं स्कूल का दौरा करने का फैसला किया है और संबंधित अधिकारियों को स्कूल में रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि मामले में वो स्वयं कार्रवाई सुनिश्चित करवाऐंगे।

‘राजाराज चोल नहीं थे हिंदू राजा’: PS-1 आने के बाद तमिल डायरेक्टर का विवादित बयान; कमल हासन ने समर्थन में कहा- ‘तब हिंदू धर्म का नामों निशान भी नहीं था’

चोल वंश के राजा की जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन-1’ को दक्षिण भारत के साथ-साथ उत्तर भारत में भी काफी पसंद किया जा रहा है। फिल्म वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ का जादुई आँकड़ा पार कर चुकी है। इसी फिल्म में राजाराज चोल की भी चर्चा की गई है। राजाराज चोल प्रथम इस साम्राज्य के सबसे प्रतापी राजाओं में से थे।

फिल्म कि रिलीज के कुछ दिनों बाद तमिल डायरेक्टर वेत्रिमारन ने चोल वंश को लेकर विवादित बयान दिया है। वेत्रिमारन ने एक कार्यक्रम में दावे के साथ कहा, “राजाराज चोल हिंदू राजा नहीं थे। हमारे प्रतीक लगातार हमसे छीने जा रहे हैं। तिरुवल्लुवर का भगवाकरण करना या राजाराज चोल को हिंदू राजा कहना इसका ताजा उदाहरण है। सिनेमा आम आदमी के लिए है, इसलिए पीछे की राजनीति को समझना जरूरी है।”

दक्षिण भारत में भव्य और विशाल मंदिरों का निर्माण करने वाले चोल राजाओं पर वेत्रिमारन की विवादित टिप्पणी पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा नेता एच राजा ने कहा कि राजाराज चोल एक हिंदू राजा थे। उन्होंने कहा,

“मैं वेत्रिमारन की तरह इतिहास से अच्छी तरह वाकिफ नहीं हूँ, लेकिन वह राजाराज चोल द्वारा बनाए गए दो चर्चों और मस्जिदों के नाम बता सकते हैं? उन्होंने खुद को शिवपद सेकरन कहा। क्या वह तब हिंदू नहीं थे?”

भाजपा नेता एच राजा द्वारा वेत्रिमारन के दावे पर आपत्ति जताए जाने के बाद अभिनेता से नेता बने कमल हासन डायरेक्टर के समर्थन में आ गए हैं।

कमल हासन ने कहा, “राजाराज चोल के काल में हिंदू धर्म का नामों-निशान तक नहीं था। उस समय वैष्णव, शैव थे। वो अंग्रेज थे, जिन्होंने ‘हिंदू’ शब्द गढ़ा, क्योंकि वे नहीं जानते थे कि इसे सामूहिक रूप से कैसे व्यक्त किया जाए। यह ठीक उसी तरह है, जैसे उन्होंने थुथुकुडी को तूतीकोरिन में बदल दिया।” हासन ने आगे कहा कि आठवीं सदी में कई धर्म और आस्थाएँ लोगों के बीच पनप रही थीं।

बता दें कि हाल में कमल हासन ने कलाकारों और क्रू के साथ फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन-1’ देखने के बाद कहा था कि यह इतिहास पर आधारित एक कथा का जश्न मनाने का क्षण है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “हमारे इतिहास को बढ़ा-चढ़ाकर पेश न करें और न ही इसमें भाषा के मुद्दे को शामिल करें।”

अल्ताफ शेख ने साल भर तक योजना बना हॉलीवुड स्टाइल में ICICI Bank से लूट लिए ₹12.20 करोड़, पहचान छिपाने के लिए पहनता था बुर्का, बहन थी सहयोगी

महाराष्ट्र के थाणे के मनपाड़ा (Manpada, Thane, Maharashtra) स्थित ICICI Bank में 12.20 करोड़ रुपए की चोरी करने वाले 43 साल के अल्ताफ शेख को पुलिस ने 2.5 महीने बाद पुणे से गिरफ्तार कर लिया है। शेख बैंक में लॉकर के कस्टडियन का काम करता था। उसने एक साल तक प्लानिंग करने के बाद इस घटना को फिल्मी अंदाज में अंजाम दिया। इस मामले में शेख की बहन नीलोफर सहित अभी तक पाँच आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

चोरी की घटना को अंजाम देने के बाद अल्ताफ अपना हुलिया बदल रखा था और बुर्का पहनकर रहता था। उसने चोरी के कुछ पैसे अपनी बहन नीलोफर के यहाँ भी छुपा कर रखा था। चोरी की इस घटना के बारे में उसकी बहन नीलोफर को सब पता था। पुलिस ने शेख के पास से 9 करोड़ रुपए बरामद कर लिए हैं।

पुलिस ने शेख को सोमवार (3 अक्टूबर 2022) को गिरफ्तार किया। इस मामले में अब तक पाँच आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसमें उसकी बहन भी शामिल है। मुंबई के मुंब्रा निवासी शेख कस्टडियन के तौर पर लॉकर की चाबियों की रखवाली करता था। बैंक चोरी की घटना 12 जुलाई 2022 को हुई थी।

शेख ने बैंक में चोरी करने से पहले एक साल तक वहाँ के सिस्टम पर बारीकी नजर रखा और उसकी खामियों के बारे में पता लगाया। इस दौरान उसने अपनी तरफ से एक फुलप्रूफ योजना बनाई और चोरी की घटना को अंजाम दिया। उसने सीसीटीवी कैमरे तक में छेड़छाड़ की।

जाँच में पुलिस को पता चला कि शेख ने सबसे पहले CCTV टीवी कैमरों के साथ छेड़छाड़ की। इसके बाद उसने बैंक के अलार्म सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया। लॉकर से कैश को बाहर ले जाने के लिए AC के डक्ट को चौड़ा किया और कैश को कचरा फेंकने वाले पाइप तक पहुँचाया। इसके बाद बैंक की तिजोरी खोलकर कैश को डक्ट के जरिए नीचे कजरे में फेंक दिया।

यह घटना तब सामने आई जब बैंक के अधिकारियों ने महसूस किया कि ब्रांच में रखा नकदी कम है। इसके बाद अधिकारियों ने सीसीटीवी की जाँच की तो DVR गायब मिला। इसके बाद जाँच टीम को इसके बारे में सूचित किया गया।

घटना अंजाम देने के बाद शेख फरार हो गया। पहचान छुपाने के लिए वह अपना हुलिया बदल लेता था। इसके साथ ही वह बुर्का भी पहनता था। पुलिस बैंक से चोरी किए गए 12.20 करोड़ रुपए में से करीब नौ करोड़ रुपए ही बरामद कर पाई है। पुलिस का कहा कि बाकी रकम जल्द बरामद कर ली जाएगी।

ठाणे और नवी मुंबई पुलिस की टीम ने अल्ताफ शेख को ठाणे गिरफ्तार किया है। इससे पहले उसकी बहन नीलोफर, मददागार अबरार कुरैशी (33), अहमद खान (33) और अनुज गिरी (30) को गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि इस मामले में और आरोपितों की गिरफ्तारी हो सकती है।