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‘भारत जोड़ो यात्रा’ छोड़ कर दिल्ली पहुँचे कॉन्ग्रेस के महासचिव, कमलनाथ-प्रियंका से भी मिलीं सोनिया गाँधी: राजस्थान के बागी बोले- सड़कों पर बहा सकते हैं खून

राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की ‘भारत जोड़ो’ यात्रा में राजस्थान की राजनीतिक उठापटक ने खलल डाल दिया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और सचिन पायलट (Sachin Pilot) गुट के बीच जारी घमासान के बीच कॉन्ग्रेस (Congress) हाईकमान सोनिया गाँधी (Sonia Gandhi) ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को दिल्ली बुलाया है। खबर है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होने तक राजस्थान की वर्तमान स्थिति में कोई परिवर्तन के मूड में हाईकमान नहीं है।

राजस्थान के जारी सियासी घमासान के बीच राहुल गाँधी ने पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल को दिल्ली को भेजा है। वहीं, प्रियंका गाँधी (Priyanka Gandhi) भी सोनिया गाँधी के आवास पर पहुँचकर उनसे मुलाकात की। इधर राज्य में हालात का जायजा लेकर लौटे केंद्रीय पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन ने भी सोनिया गाँधी से मुलाकात की। वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी दिल्ली बुला लिया गया है।

इन वरिष्ठ नेताओं से मंथन के बाद कहा जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव होने तक राजस्थान में यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। तब तक हाईकमान अन्य विकल्पों पर भी विचार करेगा। इस पर चर्चा के लिए कई वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुँच चुके हैं।

वहीं, राजस्थान की राजनीतिक हालात (Rajasthan Political Crisis) का जायजा लेकर लौटे खड़गे और माकन गहलोत गुट के बागी विधायकों से नाराज बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बागी विधायकों की गतिविधियों को अनुशासनहीनता बताया है। इसके बाद इन विधायकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा सकता है।

दरअसल, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नाम आगे बढ़ाने के बाद राज्य की कमान सचिन पायलट को सौंपने की तैयारी पार्टी हाईकमान कर रही थी। इसी बीच गहलोत गुट के विधायकों ने पायलट को मुख्यमंत्री मानने से इनकार कर दिया और विधानसभा अध्यक्ष को 92 विधायकों ने इस्तीफा भी सौंप दिया। गहलोत गुट के इन विधायकों का कहना है कि पायलट पूर्व में कॉन्ग्रेस को तोड़ने की कोशिश कर चुके हैं। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री वे नहीं मान सकते।

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भी मुख्यमंत्री बने रहना चाहते हैं। यदि विकल्प ना हो तो वे अपने किसी विश्वस्त को मुख्यमंत्री बनाना चाह रहे हैं। वे पायलट गुट के धुर विरोधी रहे हैं और पायलट को किसी भी कीमत पर राज्य का मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाह रहे हैं। वहीं, राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने स्पष्ट किया था कि पार्टी में एक व्यक्ति, एक पद का फॉर्मूला लागू होगा।

उधर, केंद्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा बागी विधायकों की इस्तीफे की कार्रवाई को अनुशासनहीनता बताए जाने पर राज्य सरकार के कई मंत्री सामने आ गए हैं। खेल मंत्री अशोक चंदना ने कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं और वे देखेंगे कि पार्टी हाईकमान कब कार्रवाई करेगी। मैंने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और कई लोगों ने ऐसा खुशी-खुशी किया है। पत्र को सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है। 

मंत्री शांति धारीवाल ने सचिन पायलट पर निशाना साधते हुए जयपुर में कहा, “जो लोग उप-मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष होने के बावजूद कॉन्ग्रेस सरकार गिरने की साजिश की, ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनाने के मिशन के साथ दिल्ली से नेताओं को भेजा गया। अजय माकन पायलट को सीएम बनाने की बात कर रहे थे। अगर मुख्यमंत्री बनाना ही है तो उन 102 विधायकों में से बनाया जाए, जिन्होंने सरकार बचाने में साथ दिया था।”

उधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी और बागी विधायकों के गुट की अगुवाई करने वाले मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार को बचाने के लिए कार्यकर्ता सड़कों पर खून बहा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बचाने के लिए कॉन्ग्रेस का हर विधायक और कार्यकर्ता एकजुट है। बता दें कि बागी विधायकों ने शांति धारीवाल के आवास पर ही बैठक कर विरोध की राजनीति तय की थी।

‘उनके भी अधिकार हैं’: वड़ोदरा स्टेशन पर भगदड़ मचने से गई थी 1 की जान, अब सुप्रीम कोर्ट ने शाहरुख खान पर चल रहा मामला रद्द किया

अपनी आगामी फिल्म ‘जवान’ के प्रमोशन में जुटे शाहरुख (Shah Rukh Khan) खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार (26 सितंबर, 2022) को हुई सुनवाई में शाहरुख के खिलाफ बड़ोदरा रेलवे स्टेशन में मची भगदड़ को लेकर दर्ज किए गए आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है। इससे पहले, हाई कोर्ट ने भी आपराधिक मामला रद्द करने का फैसला सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने शाहरुख खान के खिलाफ इस मामले की सुनवाई की है। इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया है कि मशहूर हस्तियों के पास भी अन्य सभी नागरिकों की तरह अधिकार हैं और उन्हें वैकल्पिक रूप से दोषी नहीं बनाया जा सकता है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा है, “अगर कोई ट्रेन से यात्रा करता है, तो कोई व्यक्तिगत गारंटी नहीं है। एक सेलेब्रिटी को भी देश के हर नागरिक की तरह समान अधिकार हैं। वह (शाहरुख खान) एक सेलिब्रिटी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह हर किसी को नियंत्रित कर सकते हैं। आइए, हम अधिक महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित करें, जो इस अदालत के ध्यान और समय के लायक हैं।”

वरोदड़ा स्टेशन पर मची थी भगदड़, गई थी एक की जान

शाहरुख खान के खिलाफ दर्ज किए गए जिस केस में सुनवाई हो रही थी, वह करीब 5 साल पुराना यानी 23 जनवरी, 2017 का है। दरअसल, शाहरुख खान अगस्त क्रांति एक्सप्रेस से अपनी फिल्म ‘रईस’ का प्रमोशन कर रहे थे। यह ट्रेन जब वडोदरा रेलवे स्टेशन पर रुकी तो हजारों लोग शाहरुख की एक झलक पाने को बेताब थे। इस दौरान, कथित तौर पर शाहरुख खान ने लोगों के बीच अपनी टी-शर्ट और स्माइली बॉल फेंकी थी।

शाहरुख खान द्वारा फेंकी गई इन चीजों को लेने के लिए लोग दौड़ पड़े, जिससे रेलेव स्टेशन में भगदड़ मच गई थी। इस भगदड़ में एक स्थानीय नेता फरहीद खान पठान की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, जबकि कुछ अन्य घायल हुए थे।

इस घटना के बाद स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता जितेंद्र सोलंकी ने शाहरुख खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद वडोदरा की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने इस शिकायत के आधार शाहरुख खान को समन जारी किया था। स्थानीय अदालत ने यह देखते हुए शाहरुख को समन जारी किया कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 336, 337 और 338 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसलिए, इस मामले में कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हैं।

हालाँकि, इसके बाद तमाम सबूतों और गवाहों को देखते हुए हाई कोर्ट ने इस अप्रैल में शाहरुख खान के खिलाफ आपराधिक मामले को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि शाहरुख खान को आपराधिक लापरवाही का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है और न ही यह कहा जा सकता है कि उनके द्वारा किया गया कार्य ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना का कारण था। हाई कोर्ट के आदेश की तरह ही सुप्रीम कोर्ट ने भी शाहरुख के खिलाफ आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है।

अब इटली में भी इस्लामी कट्टरपंथियों की खैर नहीं, वहाँ बन गई राष्ट्रवादी सरकार: देश को मिली पहली महिला PM, तानाशाह मुसोलिनी की हैं समर्थक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ‘नेशन फर्स्ट’ के तर्ज पर ‘इटली और इटैलियन फर्स्ट’ का नारा देकर सत्ता में आने वाली राष्ट्रवादी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी (Brothers of Italy party)’ पार्टी की जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं। रविवार (25 सितंबर 2022) को ही इटली में चुनाव संपन्न हुए हैं।

‘गॉड, कंट्री एंड फैमली’ की मोटो वाली मेलोनी पूर्व राष्ट्रपति सिल्वियो बर्लुस्कोनी (Silvio Berlusconi) की धुर दक्षिणपंथी पार्टी फोर्जा इटालिया पार्टी (Forza Italia party) और मेट्टो साल्विनी (Matteo Salvini) की पार्टी लीग (League) के साथ गठबंधन वाली सरकार का नेतृत्व करेंगी। मेलोनी एक समय फासीवादी तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी (Benito Mussolini) की कट्टर समर्थक थीं।

मेलोनी इस्लामी कट्टरता और समलैंगिकता की मुखर विरोधी हैं। अपने राष्ट्रवादी मुद्दों के चलते वह इटली में लोगों की पहली पसंद बनी हैं। उन्होंने 10 साल पहले ही यानी साल 2012 में अपनी पार्टी का गठन किया था। उनकी सफलता से यूरोप (Europe) के कई देशों में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

कौन हैं जॉर्जिया मेलोनी

इतालवी पत्रकार और राजनीतिज्ञ जॉर्जिया मेलोनी का जन्म 15 जनवरी 1977 को हुआ है। उनके पिता अकाउंटेंट थे। मेलोनी के जन्म के उनके पिता उनकी माँ से अलग हो गए। मेलोनी का पालन-पोषण उनकी माँ ने बहुत कठिन परिस्थितियों में किया था। अब मेलोनी की पाँच साल की एक बेटी है।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद इटली के तानाशाह मुसोलिनी के समर्थकों की नव-फासीवादी पार्टी इटैलियन सोशल मूवमेंट (MSI) में चली गईं। मेलोनी तब 15 साल की थीं और इसके यूथ विंग से जुड़ गई थीं। 1990 के दशक के मध्य में MSI का बर्लुस्कोनी की पार्टी में विलय हो गया।

मेलोनी ने 19 साल की उम्र में धुर दक्षिणपंथी नेशनल अलायंस की स्टूडेंट विंग की प्रमुख बनीं और इसका खूब प्रचार किया। इस दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मुसोलिनी एक अच्छे राजनेता थे। उन्होंने जो कुछ भी किया, वह इटली के लिए किया।

21 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार स्थानीय निकाय चुनाव जीता। साल 2006 में वह इतालवी संसद के चैंबर ऑफ डेप्युटी के लिए चुनी गईं। इसके दो साल बाद साल 2008 में 31 साल की उम्र में उन्होंने इटली की बर्लुस्कोनी सरकार में युवा विभाग सँभालकर सबसे कम उम्र की मंत्री बनीं।

दस साल पहले, साल 2012 में मेलोनी ने ‘ब्रदर्स ऑफ़ इटली’ पार्टी की स्थापना की। साल 2020 में उन्होंने यूरोपीय कंज़र्वेटिव्स एंड रिफॉर्मिस्ट्स पार्टी की कमान सँभाली। इसमें अन्य पार्टियों के अलावा पोलैंड की सत्तारूढ़ पार्टी PiS शामिल है।

चुनावों के दौरान मेलोनी ने ‘इटली एंड इटैलियन फर्स्ट’ का नारा दिया और यूरोप में नौकरशाही की कम दखलअंदाजी, कठोर आव्रजन नीति और करों में कटौती की बात कही। उन्होंने यूरोपीय संधियों की समीक्षा की भी बात कही। उनकी पार्टी गर्भपात और समलैंगिक विवाह के खिलाफ है।

तानाशाह मुसोलिनी के प्रति झुकाव

जॉर्जिया मेलोनी का इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के प्रति झुकाव रहा है। उनकी पार्टी का दफ्तर भी उसी बिल्डिंग में है, जहाँ कभी मुसोलिनी समर्थकों का आन-जाना था। इसको लेकर एक बार मेलोनी ने कहा था कि उनका इतिहास से अटूट रिश्ता है। तानाशाह मुसोलिनी को उन्होंने ‘जटिल व्यक्तित्व’ वाला शख्स बताया था। उन्होंने कहा था कि आज भी कई इटालवी लोगों को नहीं लगता कि मुसोलिनी में सब कुछ बुरा था। उनकी पार्टी का सिंबल भी मुसोलिनी से प्रभावित है।

साल 2021 में लिखी अपनी आत्मकथा ‘आई एम जॉर्जिया’ में मेलोनी ने लिखा है कि 15 साल की उम्र में एक नया परिवार मिला, जब वह मुसोलिनी के समर्थकों द्वारा साल 1946 में बनाए गए MSI में शामिल हुईं। उन्होंने आगे लिखा है, “हम अपने इतिहास… पूरे इतिहास के बच्चे हैं। जैसा कि अन्य सभी देशों के मामले में है, हमने जिस मार्ग की यात्रा की है, वह जटिल है। उससे भी बहुत अधिक जटिल, जो लोग बताना चाहते हैं।” 

देश विरोधी कंटेंट पर मोदी सरकार की स्ट्राइक, 10 YouTube चैनलों के 45 वीडियो किए गए बैन: सेना के खिलाफ भी कर रहे थे दुष्प्रचार

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) आईटी नियमों नियमों के अंतर्गत काफी सख्त नजर आ रही है। सरकार समय-समय पर सोशल साइट्स पर चल रही देश विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करती रहती है। इसी सिलसिले में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब को 10 यूट्यूब चैनल्स के 45 वीडियोज को बैन (YouTube Channels Ban) करने का आदेश दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह कार्रवाई खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर की है।

मंत्रालय ने जिन वीडियोज को बैन किया है, उन्हें 1 करोड़ 30 लाख से अधिक बार देखा जा चुका था। इन वीडियोज में फेक कंटेंट के माध्यम से भारतीय सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र व कश्मीर के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा था। यही नहीं, इनमें भारत के नक्शे को भी गलत तरीके से दिखाया जा रहा था।

इन वीडियोज को बैन करने के संबंध में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब (Youtube) को 10 यूट्यूब चैनलों से 45 वीडियो को बैन करने का निर्देश दिया है। वीडियो को बैन करने के आदेश 23 सितंबर, 2022 को सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत जारी किए गए थे। बैन किए गए वीडियो को 1 करोड़ 30 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है।”

इस विज्ञप्ति में आगे कहा गया है इन यूट्यूब चैनल्स में धार्मिक समुदायों के बीच नफरत फैलाने के इरादे से फैलाई गई फर्जी खबरें और मॉर्फ्ड वीडियो शामिल थे। यही नहीं, वीडियो में झूठे दावे जैसे कि सरकार ने कुछ समुदायों के धार्मिक अधिकारों को छीन लिया है, धार्मिक समुदायों के खिलाफ हिंसक धमकियाँ, भारत में गृह युद्ध की घोषणा जैसी फेक खबरें थीं। इन वीडियो से देश में सांप्रदायिक वैमनस्य और सार्वजनिक अव्यवस्था हो सकती थी, इसलिए इन्हें बैन किया गया है।

मंत्रालय ने यह भी कहा है कि बैन किए गए वीडियोज द्वारा अग्निपथ योजना, भारतीय सशस्त्र बलों, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र, कश्मीर इत्यादि से संबंधित मुद्दों पर दुष्प्रचार फैलाया जा रहा था। साथ ही कुछ वीडियो में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों को भारतीय सीमा से बाहर गलत तरीके से दिखाया गया है। इस तरह के वीडियो/कंटेट भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए हानिकारक हैं।

बता दें, इससे पहले भारत सरकार ने गत 18 अगस्त 2022 को भी भारत विरोधी प्रोपगेंडा चलाने वाले यूट्यूब चैनल्स पर बड़ी कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई में सरकार द्वारा कुल 8 चैनलों को बैन किया गया था। जिन यूट्यूब चैनलों को बैन किया गया था उनके नाम- लोकतंत्र टीवी, यू एंड वी टीवी, एएम रजवी, गौरवशाली पवन मिथिलांचल, SeeTop5TH, सरकारी अपडेट, सब कुछ देखो। इसके अलावा ‘न्यूज़ की दुनिया’ नामक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को भी बैन किया गया था।

‘मेरी हालत घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला जैसी’: डॉक्टर की मदद ले रही स्वरा भास्कर का छलका दर्द, विश्लेषक ने बताया – ₹14 करोड़ की फिल्म ने कमाए ₹50 लाख

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर सोशल मीडिया पर हो रही ‘ट्रॉलिंग’ से परेशान हैं। उनकी फिल्म ‘जहाँ चार यार’ भी बुरी तरह फ्लॉप हो गई है। स्वरा भास्कर ने कहा कि वो अपनी हालत ऐसी ही महसूस करती हैं, जैसी घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं का होता है। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को भी पता होता है कि ज्यादा कुछ किया नहीं जा सकता। ‘FM Canada’ से बात करते हुए उन्होंने ये बातें कही। उन्होंने ये भी बताया कि वो कई बार अंदर से टूट जाती हैं।

स्वरा भास्कर ने दावा किया कि इन महिलाओं को पता होता है कि उनके साथ क्या होने वाला है और वो इस परिस्थिति से लड़ना सीख लेती हैं। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर जो लोग उन्हें ट्रॉल करते हैं, वो एक खास विचारधारा से प्रेरित हैं। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें एक एजेंडे के तहत ट्रॉल किया जाता है। बकौल स्वरा भास्कर, वो थेरेपी का लाभ ले रही हैं और ट्विटर पर इनबॉक्स भी नहीं चेक करती हैं। उन्होंने बताया कि वो कमेंट्स भी नहीं पढ़ती हैं।

स्वरा भास्कर ने ये भी कहा कि वो कभी-कभी एक ट्वीट देख कर ही समझ जाती हैं कि कुछ होने वाला है। उन्होंने कहा कि वो एक विचारधारा की लड़ाई लड़ रही हैं, जो उन्होंने ही चुना है। उन्होंने बताया कि वो अपने थेरेपिस्ट से लगातार बातचीत करती रहती हैं और उन्हें इसका फायदा भी होता दिख रहा है। कुछ लोग कह रहे हैं कि स्वरा भास्कर को खुद को अब ‘सोशल मीडिया एक्ट्रेस’ का तमगा दे दें, क्योंकि बॉक्स ऑफिस पर तो वो चलने से रहीं।

उधर फिल्म विश्लेषक कमाल आर खान (KRK) ने स्वरा भास्कर की ताज़ा फिल्म ‘जहाँ चार यार’ की कमाई को लेकर तंज कसते हुए उन्हें ‘नंबर-1 अभिनेत्री’ बताया है। KRK ने जानकारी दी कि पहले हफ्ते में ‘जहाँ चार यार’ ने मात्र 50 लाख रुपए की कमाई की है, जिसमें से आधे निर्माताओं की जेब में गए। उन्होंने जानकारी दी कि इस फिल्म का बजट 14 करोड़ रुपए हैं। इसके अलावा निर्माताओं ने 1 करोड़ रुपए डिजिटल चार्ज के रूप में दिए, ताकि इस फिल्म को रिलीज किया जा सके।

केजरीवाल के बाद अब मनीष सिसोदिया का मोदी-मोदी के नारों से हुआ स्वागत, गुजरात के मंदिर में पूजा करने गए थे: AAP कर रही है जीत के दावे

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेता गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। हालाँकि, गुजरात में आप (AAP) नेताओं के सामने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगने की घटना सामने आ रही है। बीते दिनों अरविंद केजरीवाल जब गुजरात में थे तब उनके सामने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगने के बाद अब दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के सामने लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाए हैं। जिसका वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।

दरअसल, दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया गुजरात के बनासकांठा में स्थित शक्तिपीठ अंबाजी में नवरात्रि की शुरुआत होने पर दर्शन के लिए पहुँचे थे। वहाँ पहले से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इन लोगों ने जैसे ही मंदिर के अंदर मनीष सिसोदिया को देखा तो ‘मोदी-मोदी…’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। यह नारेबाजी काफी देर तक जारी रही। इस दौरान मनीष सिसोदिया अपने साथ हुई इस घटना पर मुस्कुराते हुए नजर आए।

इसके बाद, मनीष सिसोदिया ने अंबाजी शक्तिपीठ में दर्शन करने को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा “नवरात्रि के प्रथम व्रत पर गुजरात के पवित्र अंबाजी मंदिर में दर्शन का सौभाग्य मिला। इस प्राचीन शक्तिपीठ में माँ अम्बे साक्षात विराजमान हैं व अपनी कृपादृष्टि गुजरात व देश पर बनाए हुए हैं। अम्बे माई के चरण में देश के हर बच्चे की अच्छी शिक्षा व हर परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।”

गौरतलब है, इससे पहले जब 20 सितंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal) गुजरात आए, तब उन्हें भी ‘मोदी-मोदी’ के नारों का सामना करना पड़ा था। केजरीवाल बड़ोदरा में एक कार्यक्रम को संबोधित करने के आए थे। उनका स्वागत करने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) के कार्यकर्ता एयरपोर्ट के बाहर ही उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वे एग्जिट गेट से बाहर निकले, तभी वहाँ अचानक ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगना शुरू हो गए। इसकी प्रतिक्रिया में सीएम केजरीवाल भी हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए नजर आए थे।

बता दें किगुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों को लेकर ही आम आदमी पार्टी (AAP) गुजरात में पूरी ताकत झोंक रही है। इसी सिलसिले में पार्टी के कई नेता लगातार गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में दौरा कर रहे हैं। 

तमिलनाडु में BJP-RSS कार्यकर्ताओं पर हमले की 11 घटनाएँ, जानें कहाँ-कहाँ बनाया गया निशाना: PFI पर कार्रवाई के बाद हो रही हिंसा

तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख के अन्नामलाई (Tamil Nadu BJP chief K Annamalai) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था और कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की आतंकी गतिविधियों का जिक्र किया है। उन्होंने हाल में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कट्टरपंथियों द्वारा बीजेपी कार्यालय और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों के घरों पर पेट्रोल बम फेंकने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

अन्नामलाई ने मीडियाकर्मियों से कहा, “पिछले दो दिनों में पीएफआई और कुछ समूहों ने विशेष रूप से बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के घरों और कार्यालयों को निशाना बनाया है। मैंने माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) को एक पत्र लिखा है, जिसमें तमिलनाडु की कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए कहा है।”

कोयंबटूर में बीजेपी दफ्तर पर पेट्रोल बम से हमला

तमिलनाडु के मदुरै जिले में शनिवार (24 सितंबर, 2022) शाम 7 बजे आरएसएस के एक सदस्य के घर में तीन पेट्रोल बम फेंके गए। हमले की फुटेज सीसीटीवी में कैद हुई है। इसमें मुँह पर कपड़ा बाँधे एक युवक को पेट्रोल बम फेंकते हुए देखा जा सकता है। वहीं, कोयंबटूर जिले में 22 सितंबर, 2022 की देर रात वीकेके स्थित भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला किया गया। बीजेपी कार्यकर्ता नंदकुमार ने बताया था कि हमारे दफ्तर पर पेट्रोल बम फेंका गया है। इस तरह के आतंकी हमले होते रहते हैं।

ओपानकारा स्ट्रीट में टेक्सटाइल की दुकान पर हमला

दूसरा हमला तमिलनाडु के कोयंबटूर के ओपानकारा स्ट्रीट पर 22 सितंबर, 2022 को एक टेक्सटाइल की दुकान मारुति सेलेक्शन पर हुआ था। कर्मचारियों ने पुलिस को बताया था कि ज्वलनशील पदार्थ से भरी बोतल शोरूम के सामने गिरी थी।

रतिनापुरी में बीजेपी नेता की दुकान पर पेट्रोल बम फेंका

तमिलनाडु के कोयंबटूर के रतिनापुरी में शुक्रवार (23 सितंबर, 2022) सुबह अज्ञात लोगों ने एक बीजेपी नेता की दुकान पर हमला कर दिया। दुकान के शटर के सामने एक बोतल के टूटे हुए टुकड़े मिले थे। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर मामले की पड़ताल की।

इरोड में बीजेपी नेता की फर्नीचर की दुकान पर हमला

इसी तरह तमिलनाडु के इरोड में बीजेपी नेता की फर्नीचर की दुकान पर हमला किया गया। पेट्रोल और डीजल से भरी बोतलें फेंककर इस हमले को अंजाम दिया गया था।

पोल्लाची में बीजेपी नेताओं के वाहन में तोड़फोड़

तमिलनाडु के पोल्लाची में हमलावरों ने एक भाजपा कार्यकर्ता की कार पर डीजल से भरे प्लास्टिक के थैले फेंके और शीशे तोड़ दिए थे। इसके अलावा हिंदू मुन्नानी नेता सरवन कुमार के दो ऑटो के शीशे तोड़ दिए थे। यह घटना कोयंबटूर में भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने के एक दिन बाद हुई थी।

डिंडीगुल में बीजेपी नेता के वाहनों में आग लगाई

24 सितंबर, 2022 को बेगमपुर में अज्ञात व्यक्तियों ने भाजपा नगर (पश्चिम) सचिव टी पलराज के गोदाम में खड़ी 5 मोटरसाइकिलों और एक कार में आग लगा दी थी। मामला दर्ज करने के बाद डिंडीगुल टाउन साउथ पुलिस ने इसी इलाके के सिकंदर को गिरफ्तार किया था।

चेन्नई में संघ नेता के घर पर पेट्रोल बम से हमला

चेन्नई के पास तांबरम में शनिवार (24 सितंबर, 2022) को आरएसएस नेता के घर पर पेट्रोल बम फेंकने की खबर सामने आई। तमिलनाडु पुलिस के मुताबिक, तामंबरम के चितलापक्कम में आरएसएस कार्यकर्ता सीतारमण के आवास पर पेट्रोल बम फेंका गया था।

मेट्टूपलायम में प्लाईवुड की दुकान पर पेट्रोल बम से हमला

तमिलनाडु के मेट्टुपलायम-करमादई रोड पर मेट्टुपालया के सचिन की प्लाईवुड की दुकान पर शुक्रवार (23 सितंबर, 2022 ) सुबह पेट्रोल बम से हमला किया गया। आग लगने से दुकान में रखे प्लाईवुड क्षतिग्रस्त हो गए। दुकान के सीसीटीवी फुटेज यह घटना देखी गई थी।

तिरुपुर जयनगर में आरएसएस नेता के घर पर पथराव

तिरुपुर जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नेता के आवास पर पथराव किया गया। पुलिस के अनुसार, तिरुपुर के रक्कियापलायम के पास जय नगर निवासी प्रभु ने पुलिस को अपनी शिकायत में बताया था कि दो बाइक पर आए चार लोगों ने उनके किराए के घर पर पथराव किया।

सालेम में संघ नेता के घर पर पेट्रोल से हमला

तमिलनाडु के सलेम के अम्मापेट में 25 सितंबर, 2022 को आरएसएस के एक कार्यकर्ता के घर पर अज्ञात व्यक्तियों ने केरोसिन से भरी बोतल फेंकी थी। यह बोतल घर के दरवाजे के पास गिरी थी। पुलिस ने इस मामले मे पीएफआई (PFI) और एसडीपीआई (SDPI) के छह लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

बीजेपी नेता के ओमनी बस पर पेट्रोल बम से हमला

तमिलनाडु में आरएसएस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के घरों और कार्यालय पर हमलों के बीच तूतीकोरिन (Tutikorin) में एक बीजेपी पदाधिकारी की ओमनी बस पर रविवार (25 सितंबर 2022) रात को पेट्रोल बम फेंका गया। यह हमला उसक वक्त किया गया, जब बीजेपी नेता विवेगम रमेश की बस तिरुचेंदूर से कोयंबटूर जा रही थी।

बता दें कि तमिलनाडु पुलिस ने पिछले कुछ दिनों में भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और हिंदू मुन्नानी के नेताओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंकने की घटनाओं के सिलसिले में राज्य भर से 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक प्रेस बयान में कहा कि अब तक 19 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और आरोपितों को कोयंबटूर, पोल्लाची, इरोड, मदुरै, सलेम, डिंडीगुल, थूथुकुडी और कन्याकुमारी से गिरफ्तार किया गया है।

दलित नाबालिग लड़की से गैंगरेप, फिर पुलिस अधिकारी रौनक अली ने किया यौन शोषण: थाने में गाली-गलौच भी किया, राजस्थान की घटना

राजस्थान के कोटा में एक नाबालिग दलित लड़की से गैंगरेप की खबर है। आरोपितों में अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग बताए जा रहे हैं।। जानकारी के मुताबिक, लड़की को 4 दिनों तक बंधक बना कर रखा गया और बारी-बारी से आधे दर्जन लोगों ने रेप किया। बाद में इस मामले की जाँच कर रहे कोटा पुलिस के ASI रौनक अली पर भी पीड़िता से छेड़खानी का आरोप लगा है। रौनक अली को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की जाँच के लिए पुलिस ने SIT का गठन कर दिया है। लड़की 14 सितम्बर 2022 को अपने घर से गायब हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला रामगंजमंडी थाना क्षेत्र का है। पीड़िता की उम्र 14 साल बताई जा रही है, जो क्लास 10 की छात्रा है। बताया जा रहा है कि 14 सितम्बर, 2022 को पीड़िता अपने घर से निकली और ट्रेन में बैठ कर कोटा पहुँच गई। यहाँ पर उसकी क्लास में उसका सीनियर रह चुका दोस्त मिला, जिसने पीड़िता को अपने साथ 14 सितम्बर से 18 सितम्बर तक जबरन रखा। आरोप है कि इस दौरान पीड़िता के साथ कई बार रेप किया गया। इधर पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी थी। 18 सितंबर को आरोपित ने लड़की को एक पार्क के आगे छोड़ दिया और फरार हो गया।

लड़की यहाँ से पुलिस के हवाले कर दी गई। इस मामले का जाँच अधिकारी असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर रौनक अली था। रौनक अली ने थाने ले जाने के बाद 19 तारीख को लड़की को कोटा के ‘बाल कल्याण समिति’ पहुँचाया। 23 सितम्बर को पीड़िता की काउंसिलिंग करवा कर उसे परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। मामले की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो बजरंग दल ने घटना के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। पीड़िता का मेडिकल करवाया गया और उसके बाद मजिस्ट्रेट के आगे उसके 164 के तहत बयान दर्ज करवाए गए।

पीड़िता के घर वालों ने पुलिस पर कार्रवाई में लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि मामले को दबाने और आरोपितों को बचाने का प्रयास किया जा रहा यही। एक रिपोर्ट के अनुसार, खुद जाँच अधिकारी रौनक अली पर लड़की से छेड़छाड़ का आरोप लगा। आरोप है कि रौनक अली ने थाने में लड़की के साथ गाली-गलौच भी किया। इन आरोपों के बाद ASI रौनक अली को सस्पेंड कर दिया गया।

25 सितम्बर 2022 को भाजपा विधायक और अन्य नेताओं ने मामले की शिकायत IG से की तो उनके निर्देश पर घटना की निष्पक्ष जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है। पुलिस के मुताबिक केस दर्ज कर के मामले की जाँच की जा रही है। फ़िलहाल अभी तक किसी आरोपित की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं है।

इंदौर में निकले PFI के हजारों सदस्य, महिलाओं से लेकर विद्यार्थी तक हैं शामिल: छापे के बाद सब अंडरग्राउंड हुए, धर-पकड़ में जुटीं जाँच एजेंसियाँ

देश भर में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्यों पर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की कार्रवाई के बाद इसके अधिकांश सदस्य भूमिगत हो गए हैं। वहीं, मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) में इसके हजारों सदस्य होने की बात सामने आ रही है। इनमें महिलाओं से लेकर विद्यार्थी तक शामिल हैं। खुफिया विभाग इन पर निगरानी रख रही है।

बता दें कि इसी साल रामनवमी में इंदौर के खरगोन में हिंदुओं के खिलाफ दंगे भड़के थे। इस दौरान भी दंगों में PFI की भूमिका पर संदेह जताया गया था। इंदौर के खरगोन में रामनवमी की शोभा यात्रा के दौरान मस्जिदों से हमले किए गए थे। इसके बाद हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया था।

अब खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि अकेले इंदौर में ही PFI के हजारों सदस्य हैं। इनमें इसके 52 (किसी-किसी रिपोर्ट में 85) सक्रिय सदस्य हैं, जो PFI और उसके राजनीतिक विंग SDPI के कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेते हैं। NIA की कार्रवाई के बाद इसके अधिकांश सदस्य या तो भूमिगत हो गए हैं या फिर कार्रवाई से बचने के लिए अपना स्थान बदल लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खुफिया विभाग ने PFI से जुड़े इंदौर के 85 सक्रिय लोगों की सूची बनाकर उन पर निगरानी बढ़ा दी है। इनका एक डोजियर तैयार किया गया है, जिनमें उनके नाम, काम, मोबाइल नंबर, परिजन, दोस्तों आदि की पूरी जानकारी है। इसमें से अधिकांश का ठिकाना सदर बाजार, मल्हारगंज, छत्रीपुरा और आजाद नगर थाना क्षेत्र है।

इसके बाद इन संदिग्धों के संबंधित थानों को सूचित किया गया और उन पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है। NIA की छापेमारी और पुलिस की सक्रियता देख इसके अधिकांश सदस्य भूमिगत हो गए। कई लोगों के घरों पर ताले लटक रहे हैं। हालाँकि, पुलिस यह जानकारी जुटाने में लगी है कि यहाँ से जाने के बाद ये लोग कहाँ छुपे हैं।

NIA ने छापेमारी कर PFI के सक्रिय सदस्य अब्दुल खालिद और मोहम्मद जावेद बेलिम के घर कई मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त किया है। खालिद के घर से 9 मोबाइल, जावेद के घर से 8 मोबाइल और एक लैपटॉप और अब्दुल करीम बेकरीवाला से एक लैपटॉप बरामद किए हैं। NIA इनके घरों के मोबाइल नंबर को कई दिनों से ट्रैक कर रही थी।

इन मोबाइल पर कई सोशल मीडिया ग्रुप मिले हैं, जिनमें महिलाएँ और कॉलेज के स्टूडेंट भी शामिल हैं। इन ग्रुप में PFI से जुड़ी गतिविधियाँ वायरल की जाती थीं। अब्दुल करीम बेकरीवाला बेकरी में टोस्ट बनाने का काम करता था, लेकिन पिछले कई सालों से वह PFI से जुड़ा था। वह PFI का प्रदेश अध्यक्ष है।

वहीं, चूड़ी बेचने वाला मोहम्मद जावेद बेलिम PFI का कोषाध्यक्ष है और वही पैसे का लेनदेन करता था। यह PFI से जुड़े युवाओं की कानूनी मदद के लिए पैसे जुटाने का काम करता था। अब्दुल खालिद का पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया है। पाकिस्तान से उसे किस तरह की सहायता मिलती थी, एजेंसी इसकी जाँच कर रही है।

बता दें कि NIA और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 22 सितंबर 2022 की रात को इंदौर और उज्जैन से PFI के 4 पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया था। इंदौर से PFI के प्रदेशाध्यक्ष अब्दुल करीम बेकरीवाला, मोहम्मद जावेद बेलिम और अब्दुल खालिद को गिरफ्तार किया था। वहीं, उज्जैन से जमील शेख को हिरासत में लिया गया था। इनके पास से कई तरह के भड़काऊ दस्तावेज भी जब्त किए थे।

वक्फ घोटाले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे गए AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, विधवा पेंशन में गड़बड़ी और भर्तीयों में पक्षपात का भी आरोप

दिल्ली के ओखला से आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) की सोमवार (26 सितंबर, 2022) को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी हुई। इस सुनवाई में अमानतुल्लाह को सीबीआई (CBI) के स्पेशल जज विकास ढुल के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

दिल्ली एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने वक्फ बोर्ड में हुए भ्रष्टाचार के मामले में AAP विधायक को गत 16 सितंबर को गिरफ्तार किया था इसके बाद 17 सितंबर को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया था। इस सुनवाई के दौरान एसीबी (ACB) ने कोर्ट से 14 दिनों की रिमांड माँगी थी। लेकिन, कोर्ट ने अमानतुल्लाह को 4 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था।

इसके बाद एसीबी ने अमानतुल्लाह को 21 सितंबर को कोर्ट में पेश किया था, जहाँ से कोर्ट ने 5 दिनों की रिमांड में भेजा था। अब फिर से सोमवार (25 सितंबर) को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने अमानतुल्लाह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।

बता दें, आप विधायक (AAP MLA) अमानतुल्लाह की गिरफ्तारी से पहले एसीबी ने उनके घर सहित 5 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी के दौरान एसीबी ने अमानतुल्लाह के बिजनेस पार्टनर व एक अन्य सहयोगी के यहाँ से कुल 24 लाख रुपए व बिना लाइसेंस के दो हथियार बरामद किए थे।

गौरतलब है अब तक सिर्फ वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों को लेकर हुई अनियमितता और अन्य वित्तीय गड़बड़ी की बात ही सामने आ रही थी। लेकिन, गत 17 सितंबर को जब अमानतुल्लाह खान को कोर्ट में पेश किया गया था तब एसीबी ने कोर्ट से कहा था कि केवल वक्फ बोर्ड में भर्ती को लेकर अनियमितता ही नहीं हुई है, बल्कि वक्फ फंड में विधवा महिलाओं के लिए नियोजित रकम (विधवा पेंशन फंड) का भी दुरुपयोग किया गया।

एसीबी ने अदालत को बताया था कि वर्ष 2020 के दौरान अमानतुल्लाह खान ने वक्फ को मिली रकम को अपने खाते में स्थानांतरित कराया। वक्फ फंड के खाते की जगह अपने निजी खाते में करीब 80 लाख रुपये की रकम स्थानांतरित की थी।

अमानतुल्लाह खान दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उन पर वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रहते हुए वित्तीय गड़बड़ी, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में किरायेदारी का निर्माण, वाहनों की खरीदी में भ्रष्टाचार और दिल्ली वक्फ बोर्ड में सेवा नियमों में उल्लंघन करते हुए 33 लोगों की नियुक्ति के आरोप है। इन तमाम आरोपों को लेकर ही एंटी करप्शन ब्यूरो ने साल 2020 में अमानतुल्लाह खान के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) के विभिन्न प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया था।