अमेरिका (USA) के मूल निवासी कियमाह दिन खलीफा और उनकी प्रेमिका केशा खलीफा ने उत्तर प्रदेश के जौनपुर में महादेव शिव के मंदिर में हिन्दू विधि-विधान से शादी की है। दोनों ने यह शादी अपनी काशी की यात्रा के दौरान की है।
कियामाह और केशा खलीफा दोनों मुस्लिम हैं। पहले दोनों वाराणसी के कैथी मंदिर में शादी करना चाहते थे लेकिन वहाँ विवाह आयोजन बंद होने के चलते दोनों ने यह रस्म जौनपुर में पूरी की। यह शादी शनिवार (17 सितम्बर 2022) को सम्पन्न हुई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कियामह और केशा खिलफा दोनों काफी लम्बे समय से लिव इन रिलेशन में हैं। दोनों पिछले 5 वर्षों से लगातार काशी की यात्रा कर रहे हैं और यहाँ पर उन्हें हिन्दू संस्कृति काफी पसंद आई। दोनों अक्सर गंगा नदी के घाटों पर घूमते दिखाई देते थे। इसी दौरान अपनी इस यात्रा में इन दोनों ने अपने गाइड से किसी ज्योतिष से मिलवाने के लिए कहा। ज्योतिष ने दोनों की कुंडली बनाई।
बताया जा रहा है कि इसी के बाद दोनों ने हिन्दू रीति-रिवाज़ से शादी करने का फैसला किया। इसके लिए सबसे पहले उन्होने काशी के कैथी मंदिर में शादी का प्रयास किया लेकिन वहाँ शादियाँ फिलहाल बंद होने के चलते वो अपने गाइड की सलाह पर जौनपुर के प्रसिद्ध त्रिलोचन महादेव मंदिर पहुँचे। यहाँ दोनों ने हिन्दू परिधान पहने और अग्नि के 7 फेरे लेकर 7 जन्मों तक एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया। दोनों की शादी का वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है।
शादी के बाद दोनों काफी खुश दिखे। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों और पूजा करवाने वाले पंडित ने दोनों को सदा सुखी रहने की शुभकामनाएँ दीं। शादी के बाद केशा खलीफा ने अपने पति कियामाह खलीफा के पैर छू कर आशीर्वाद लिया। दोनों ने बताया कि 3 दिन काशी में रहने के बाद वो अपने देश अमेरिका वापस लौट जाएँगे। कियामह का अमेरिका में व्यापार और खेती का काम है।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में हिन्दू लड़के से प्यार करने वाली मुस्लिम लड़की को मार डालने का आरोप उसके ही अब्बा पर लगा है। मृतिका नाबालिग थी जिसके कत्ल के बाद उसके अब्बा ने खुद ही थाने में जा कर सरेंडर कर दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित मुवीस अहमद को हत्या में प्रयोग हुए तमंचे सहित गिरफ्तार कर लिया है। घटना गुरुवार (15 सितंबर 2022) की है।
मामला वरला थानाक्षेत्र के गाँव नगला कसाब का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लड़की ने अपने परिजनों को बहुत समझाने का प्रयास किया लेकिन उसके परिवार वाले नहीं माने। इसी बीच 2 महीने पहले लड़की घर छोड़ कर जा भी चुकी थी। तब लड़की के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया था और लड़की को बरामद कर के उसके परिवार वालों को सौंप दिया था। तब से लड़की का बाहर निकलना भी बंद करवा दिया गया था और उस पर तमाम प्रतिबंध लगा दिए गए थे।
घटना के दिन एक बार फिर से लड़की अपने हिन्दू प्रेमी के साथ ही शादी करने की जिद करने लगी। बताया जा रहा है कि इस बात से नाराज हो कर लड़की के अब्बा ने उसको 315 बोर के तमंचे से गोली मार दी। हत्या के बाद वो घर छोड़ कर फरार हो गया था। अगले दिन शुक्रवार (16 सितम्बर 2022) को मुवीस अहमद खुद ही थाने पहुँच गया और तमंचे सहित खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। वहीं अलीगढ़ इस प्रकरण को पुराना बता कर आरोपित को जेल भेजने की जानकारी दे रही है।
प्रकरण पुराना है, पूर्व में ही अभियोग पंजीकृत कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल जा चुका है ।
मृतका के की हत्या के आरोपित अब्बा की दी जानकारी पर पुलिस उसे घटनास्थल पर ले गई तो वहाँ लड़की का शव पड़ा मिला। लड़की के पड़ोसी छोटे खान ने भी लड़की के हिन्दू लड़के से प्रेम प्रसंग की जानकारी दी है। मामले में पुलिस को ग्राम प्रधान ने तहरीर दी। बाद में लड़की के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। पुलिस क्षेत्राधिकारी अभय पांडेय ने बताया कि घटना में केस दर्ज के आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
200 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज (Jacqueline Fernandez) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर जहाँ नोरा फतेही को प्रवर्तन निदेशालय के बाद दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से क्लीन चिट मिल गई है, वहीं EOW ने जैकलीन फर्नांडीज से बुधवार (14 सितंबर, 2022) को लगातार 8 घण्टे तक पूछताछ की है। इस पूछताछ में जैकलीन ने महाठग सुकेश चन्द्रशेखर को लेकर कुछ नए खुलासे किए थे। साथ ही अब यह बात सामने आ रही है कि जैकलीन सुकेश से शादी करने वाली थीं।
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि महाठग सुकेश चंद्रशेखर और जैकलीन फर्नांडिस से जुड़े ₹200 करोड़ की ठगी के मामले की जाँच कर रही टीम के अधिकारियों का कहना है कि जैकलीन फर्नांडीज को उनके कुछ दोस्तों ने सुकेश को लेकर चेतावनी दी थी। लेकिन, जैकलीन ने किसी की बातों में ध्यान नहीं दिया। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि जैकलीन फर्नांडीज सुकेश चन्द्रशेखर से शादी की प्लानिंग भी कर रहीं थीं।
गौरतलब है कि, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि जैकलीन फर्नांडीज सब कुछ जानते हुए भी उसके संपर्क में थीं। साथ ही, ईडी ने जैकलीन को सुकेश का ‘क्राइम पार्टनर’ भी बताया था।
जैकलीन ने महाठग सुकेश चन्द्रशेखर से लिए थे करोड़ों के गिफ्ट
बता दें कि ₹215 करोड़ की ठगी के इस मामले में ईडी जैकलीन फर्नांडिस पर लगातार शिकंजा कस रही है। ईडी जैकलीन की 7.27 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर चुकी है। जैकलीन ने यह रकम फिक्स डिपॉजिट के रूप में अपने पास रखी हुई थी।
रिपोर्ट्स की मानें तो सुकेश ने जैकलीन की माँ को लग्जरी कार मासेराती और पॉर्श कार, बहन को उसने 1.50 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.20 करोड़ रुपए) लोन के रूप में दिए थे। वहीं, जैकलीन के भाई को भी 15 लाख रुपए भी दिए गए थे। जैकलीन की बहन अमेरिका में जबकि भाई ऑस्ट्रेलिया में रहता है।
इसके अलावा, महाठग सुकेश ने जैकलीन को डिजाइनर गुच्ची, चैनल एवं वाईएसएल बिर्किन के महँगे बैग व महँगे झुमके गिफ्ट किए थे। वाईएसएल, लुई वुइटन और गुच्ची के जूते, कार्टियर चूड़ियाँ तथा हेमीज़ एवं टिफ़नी के कंगन दिए। इसके अलावा रोलेक्स, रोजर डुबुइस और फ्रेेंक मूलर की लग्जरी घड़ियाँ गिफ्ट की थी।
यही नहीं, सुकेश जैकलीन पर इतना मेहरबान था कि उसने BMW (5) और मिनी कूपर कार भी जैकलीन को गिफ्ट की थी। इसके अलावा, गुच्ची के दो जिमवियर, 52 लाख रुपए का अरबी घोड़ा एस्पुएला, 9-9 लाख रुपए की तीन फारसी बिल्लियाँ भी दी थी। हालाँकि, जैकलीन फर्नांडिस ने बार-बार यह दावा किया है उसने कई सारी चीजें सुकेश चन्द्रशेखर को लौटा दी थी।
पंजाब के फरीदकोट जिले की गुरुद्वारा साहिब में दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प की घटना सामने आई है। ये घटना गुरुद्वारा के अध्यक्ष पद को लेकर हुई है। इसमें शुरुआती बहस हिंसा में बदल गई और दो गुटों के बीच तलवारें (कृपाण) तक चल गईं हैं। इस झड़प में कुछ लोग घायल भी बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, फरीदकोट के जर्मन कॉलोनी स्थित एक गुरुद्वारा साहिब में अध्यक्ष पद को लेकर मीटिंग बुलाई गई थी। इस बैठक में वर्तमान अध्यक्ष और कमेटी के सदस्यों के साथ ही पूर्व अध्यक्ष और कमेटी के सदस्य पहुँचे थे। इस बीच जब गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष मीटिंग को संबोधित कर रहे थे, तभी पूर्व अध्यक्ष की अध्यक्षता को लेकर बहस छिड़ गई। यह बहस मारपीट से होते हुए खूनी हिंसा में बदल गई। इसमें दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर तलवार (कृपाण) से भी हमला किया गया है।
Two groups attacked on each other with sword over the Presidency, Inside Gurdwara Sahib in the German colony of Faridkot district of Punjab. pic.twitter.com/EP6wjtuczz
इस हिंसक घटना के दौरान दोनों पक्षों के कुछ लोगों की पगड़ी भी उछाली गई है। साथ ही बीच-बचाव कर रहे कुछ लोगों और एक दंपति के घायल होने की बात कही जा रही है। इस पूरे मामले में फरीदकोट पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया है। झड़प में घायल हुई महिला के बयान भी दर्ज किए गए हैं। साथ ही 3 लोगों को गिरफ्तार कर कड़ी पूछताछ की बात पुलिस द्वारा कही जा रही है।
गुरुद्वारा साहिब के वर्तमान अध्यक्ष जसवंत सिंह का कहना है कि दूसरा पक्ष हंगामा करने के उद्देश्य से ही गुरुद्वारा साहिब आया था। गुरुग्रंथ साहिब की हजूरी में चल रहे धार्मिक समागम के दौरान झड़प हुई है। उन्होंने आरोप लगाया, “श्री गुरुग्रंथ साहिब के आगे रखे धार्मिक शस्त्रों को उठाकर भी हम पर हमला किया गया है। पूर्व प्रधान ने गुरुद्वारा साहिब में 50 हजार रुपए की हेराफेरी की थी, इसलिए उन्हें निकाल दिया गया था। इसने पहले भी मेरे ऊपर कई बार हमला किया है। आज इसने जान से मारने की कोशिश की थी।
हाल में कई रिपोर्टें आई हैं जो बताती हैं कि नेपाल-भारत सीमा पर तेजी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। मस्जिद-मदरसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए 20 से 27 अगस्त 2022 तक ऑपइंडिया की टीम ने सीमा से सटे इलाकों का दौरा किया। हमने जो कुछ देखा, वह सिलसिलेवार तरीके से आपको बता रहे हैं। इस कड़ी की 15वीं रिपोर्ट:
पिछली रिपोर्टों में हमने जानकारी दी थी कि बलरामपुर से बढ़नी बॉर्डर और जरवा बॉर्डर जाने वाली सड़कों पर मौजूद मस्जिद, मज़ारों और इबादतगाहों को लेकर वहाँ के लोग क्या कहते हैं। इस बार हम नेपाल की सीमा को छूती हुई निकलने वाली तुलसीपुर-हर्रैया-सिरसिया रोड पर आगे बढ़ेंगे। इस पूरे रास्ते में नेपाल सीमा के पहाड़ दाईं तरफ दिखाई देते हैं। इस सड़क पर पड़ने वाले सभी गाँव नेपाल के सीमावर्ती गाँव माने जाते हैं। यह मार्ग भी बलरामपुर जिले में स्थित है।
ये रास्ता नेपाल सीमा पर मौजूद हिन्दुओं के सबसे आस्था के केंद्र बिंदु तुलसीपुर देवीपाटन मंदिर के बगल से जाता है। बॉर्डर से छू कर गुजर रहे इस रास्ते पर आगे बढ़ते ही हमें बाकी राहों की तरह इबादतगाहें दिखनी शुरू हो गईं।
यह रिपोर्ट एक सीरीज के तौर पर है। इस पूरी सीरीज को एक साथ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
चाँद-तारे वाले ‘गरीब नवाज़ स्कूल’ से शुरुआत
अभी हम हर्रैया रोड पर आगे ही बढ़े थे और तुलसीपुर बाजार खत्म हुआ ही था कि हमें ‘गरीब नवाज प्राथमिक विद्यालय’ दिखाई दिया। यह स्कूल तुलसीपुर क्षेत्र के बैरागीपुरवा नाम की जगह पर बना हुआ है। स्कूल के मुख्य बोर्ड पर फ़ारसी भाषा में स्कूल का नाम लिखा था। इसके बाएँ और दाएँ यही चीज क्रमशः अंग्रेजी और हिंदी में लिखी हुई थी। स्कूल के गेट के सबसे ऊपर चाँद-तारे का निशान बना हुआ था।
चाँद-तारे वाला गरीब नवाज़ स्कूल
सड़क से सटा हुआ बड़ा सा मदरसा
गरीब नवाज स्कूल से हम बमुश्किल 2 किलोमीटर ही आगे बढ़े होंगे कि हमें सड़क से सटा हुआ हरे रंग का बड़ा सा मदरसा दिखाई दिया। ये 2 मंजिला मदरसा है। स्थानीय लोगों ने जानकारी दी कि इसमें आसपास के सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं। इस पर बाहर से अरबी भाषा में ‘मदरसा दारुल उलूम’ लिखा हुआ था। इस मदरसे के बगल में सड़क पर हरे रंग का इस्लामी झंडा भी दिखाई दिया। इस जगह का नाम ओड़ाझार है।
मदरसा दारुल उलूम
अभी हम ओड़ाझार बाजार में ही मदरसे से बमुश्किल 200 मीटर ही आगे बढ़े होंगे कि हमें एक और इबादतगाह सड़क से सटा कर बनी हुई दिखी। ये इबादतगाह भी हरे रंग की ही थी, जिसके चारों तरफ बाउंड्री की गई थी। दिखने में यह ईदगाह के जैसी लगती है। हालाँकि इसके पीछे एक मस्जिदनुमा मीनार भी बनी हुई है।
ओड़ाझार की दूसरी इबादतगाह
सुनसान जगह पर मज़ार और मस्जिद
अभी हमने ओड़ाझार पार ही किया था कि हमें सड़क के दाईं तरफ एकदम सुनसान में एक नई जैसी मज़ार दिखी। हमने देखा कि मज़ार के आस-पास हरे रंग के कई झंडे भी लगे थे। मज़ार खेतों में बनी थी और स्थानीय लोगों का कहना था कि वहाँ से आबादी लगभग आधे किलोमीटर दूर है। मज़ार के पीछे नेपाल बॉर्डर के अंदर मौजूद पहाड़ साफ़ दिखाई हैं।
नेपाल सीमा पर गाँव करौंदा में सुनसान में बनी मज़ार
अभी हम इस मज़ार से महज आधे किलोमीटर ही आगे बढ़े ही थे कि हमें नेपाल सीमा से सटी एक मस्जिद दिखाई दी। यह मस्जिद सफेद रंग की थी और मुख्य सड़क से लगभग 1 किलोमीटर दूर बनी थी। इस गाँव के बाद सीमा के जंगली क्षेत्र शुरू हो जाते हैं। इस मस्जिद में एक मीनार थी।
सीमा पर बनी इबादतगाह
हल्का अँधेरा हो चला था लेकिन हम आगे बढ़ते रहे। अभी हम करौंदा गाँव में ही थे और पिछली मस्जिद से अधिकतम 100 मीटर ही आगे बढ़े होंगे कि हमें उसी सीमावर्ती क्षेत्र में एक और मस्जिद दिखाई दी। यह मस्जिद भी नेपाल सीमा पर मौजूद पहाड़ों के पास बनी दिख रही थी, जो मुख्य सड़क से लगभग 1 किलोमीटर दूर है। काफी दूर से ही इसकी मीनार देखी जा सकती है।
सड़क से सटा कर मज़ार
करौंदा गाँव की दूसरी मस्जिद
2 मस्जिदों और 1 मज़ार वाले करौंदा गाँव से कार से निकले अभी हमें अधिकतम 2 मिनट ही हुआ होगा कि हमें सड़क से ठीक सटा कर एक और मज़ार बनी हुई दिखी। देखने में यह मज़ार सड़क की ही जमीन पर बनी लग रही थी। इस मज़ार को बाकायदा पक्का कर दिया गया था और इसके आसपास ढेर सारे इस्लामी झंडे लगे दिखाई दे रहे थे। इस मज़ार को हरे रंग की चादरों से घेरा गया था, जिसने अच्छी-खासी जगह घेर रखी थी। यह मज़ार भी सुनसान में बनी है, जिसके पीछे किसानों के खेत हैं।
सड़क पर बनी मज़ार
छतों पर मज़हबी झंडे
करौंदा गाँव से हम आगे बढ़ कर पिपरहवा मार्किट में पहुँचे, यहाँ कई घरों की छतों पर मज़हबी और विशेष निशानों वाले झंडे देखे जा सकते हैं। ये झंडे सिर्फ घरों ही नहीं, बल्कि दुकानों पर भी लगे हुए थे।
पिपरहवा बाज़ार में घरों और दुकानों पर लगे मज़हबी झंडे
पिपरहवा बाज़ार में ही हमें 2 मीनारों वाली मस्जिद दिखाई दी। यह मस्जिद सड़क से लगभग 100 मीटर अंदर थी।
पिपरहवा बाज़ार में मस्जिद
सुनसान में एक और मस्जिद
अभी हम पिपरहवा बाज़ार से अधिकतम 1 किलोमीटर ही आगे बढ़े थे कि हमें नेपाल सीमा से सटे गाँव में एक अन्य गाँव में एक और 2 मीनारों वाली मस्जिद दिखी। इस मस्जिद के आसपास खेत थे और आबादी के हिसाब से सन्नाटा था। इस मस्जिद के भी कुछ ही दूर पर नेपाल सीमा के पहाड़ साफ देखे जा सकते हैं। लोगों ने बताया कि इस इलाके में तेंदुआ जैसे जंगली जानवर कभी भी आ जाते हैं।
नेपाल सीमा के पास एक और मस्जिद
मस्जिद और मदरसा एक साथ
नेपाल सीमा से सटी रोड पर हम हर्रैया की तरफ आगे बढ़ रहे थे। इस हमें प्रेम नगर बाजार दिखी। यहाँ बाजार के बीचोंबीच में हमें एक मस्जिद दिखी जो एक मीनार वाली थी। स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि इस मस्जिद के ठीक पीछे एक मदरसा भी है, जिसमें सैकड़ों की संख्या में छात्र पढ़ते हैं।
प्रेम नगर बाज़ार की मस्जिद
सड़क से अधिक इबादतगाहें गाँवों के अंदर
तुलसीपुर से लगभग 15 किलोमीटर आगे जाने के बाद प्रेम नगर बाजार में ही रात हो गई थी। स्थानीय निवासियों ने जंगली क्षेत्र होने की बात कह कर हमें रात में आगे न जाने की सलाह दी। उन्होंने हमें बताया कि इस्लामी इबादतगाहों के दिखने का ये सिलसिला नेपाल सीमा के साथ चल रही इस रोड पर इसी तरह सिरसिया और आगे तक जाता है। ग्रामीणों ने हमें ये भी बताया कि सड़क से हट कर गाँवों में इस से अधिक मस्जिद और मदरसे दिखेंगे। रात में और आगे न जाने की उन सभी की सलाह मान कर हमने भी बलरामपुर शहर की तरफ वापसी कर ली।
अमेरिकी अभिनेत्री केल्ली मारिया रिपा ने अपनी किताब में एक वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि अपने पति मार्क कौंसुलस से सेक्स के दौरान वो बेहोश हो गई थीं। उन्होंने अपनी आने वाली पुस्तक ‘Live Wire: Long-Winded Short Stories’ में ये खुलासे किए हैं। ये किताब बुधवार (28 सितंबर, 2022) को बाजार में आ रही है। उन्होंने बताया कि ये घटना 1997 की है, उनके पहले बच्चे के जन्म से 6 महीने पहले की।
उन्होंने लिखा है कि ये वाकया तब हुआ, जब वो और उनके पति तड़के सुबह सेक्स कर रहे थे। इसी दौरान वो बेहोश होकर गिर गईं। उन्होंने बताया कि ये उनके अंडाशय (Ovary) में दो बड़े गड्ढे की तरह कुछ बन गए थे, जिस कारण ऐसा हुआ। उन्होंने कहा कि कभी-कभी सेक्स का अनुभव काफी बुरा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद लोग निडर रहते हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्हें होश आया तब उनके पति नमकीन बिस्किट खा रहे थे और एक एप्पल जूस पीकर दूसरा ऑर्डर कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि उनके पति ने उन्हें तुरंत कपड़े पहनाए और उन्हें लेकर अस्पताल चले गए थे। उनके पति ने उन्हें 1980s के स्टाइल का एक कपड़ा उन्हें पहना रखा था, जिसे देख कर वो खासी हैरान हुईं। उन्हें उस वक्त यही मिला था। उन्होंने कहा, “मेरी पति खुद तो हमेशा स्टाइलिश रहते हैं, लेकिन मुझे उन्होंने एक वेश्या की तरह कपड़े पहना दिए थे। मुझे आज तक हैरानी होती है कि क्या उन्हें उस समय यही सबसे बेहतर कॉस्ट्यूम मेरे लिए मिला?”
Kelly Ripa recalls 'passing out' while having sex due to ovarian cysts https://t.co/AGfIeC7hnE
उन्होंने बताया कि जब वो स्ट्रेचर पर थीं तो उन्हें ऐसा लग रहा था कि वो सपना देख रही हैं और उन्हें पता ही नहीं चल रहा था कि उन्हें कहाँ लाया जा रहा है। केल्ली रिपा अक्सर अपने पति के साथ अजीबोगरीब तस्वीरों के कारण सुर्ख़ियों में रहती हैं। किताब लिखने के बारे में उन्होंने कहा कि एडिटिंग से लेकर प्रकाशन तक ये एक थकाऊ काम है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनके पति ने उनका खासा साथ दिया। दोनों ने हाल ही में अपनी शादी की 26वीं सालगिरह मनाई है।
‘दिल्ली वक्फ बोर्ड’ में हुई अनियमितता को लेकर गिरफ्तार किए गए आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक अमानतुल्लाह खान (Amanatullah Khan) को दिल्ली की राउज एवन्यू कोर्ट ने 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इससे पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार (16 सितंबर 2022) को अमानतुल्लाह खान के घर समेत उनके सहयोगियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जिसमें, अवैध हथियार समेत 24 लाख रुपए बरामद हुए थे।
Delhi | A special CBI court at Rouse Avenue granted 4-day custody to ACB for questioning AAP MLA Amanatullah Khan in a corruption case related to alleged misappropriation of Waqf Board funds.
शुक्रवार रात अमानतुल्लाह की गिरफ्तारी के बाद शनिवार (17 सितंबर 2022) को उन्हें स्पेशल जज विकास ढुल की कोर्ट में पेश किया गया था। इस सुनवाई में एसीबी ने कहा कि अमानतुल्ला खान ने अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और करीबियों को लाभ देते हुए दिल्ली वक्फ बोर्ड में कर्मचारियों के रूप में नियुक्त किया था।
एसीबी ने कोर्ट से यह भी कहा कि आगे की जाँच के लिए अमानतुल्लाह को तेलंगाना, बिहार, उत्तराखंड और गुजरात समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाना होगा। इस दौरान ही दिल्ली वक्फ बोर्ड में हुई नियुक्ति के लिए पैसे के लेनदेन की जाँच की जाएगी। इसके लिए अमानतुल्लाह को रिमांड पर लेने की आवश्यता होगी।
एसीबी ने अमानतुल्लाह की 14 दिन की पुलिस रिमांड की माँग की थी। हालाँकि, जज ने 4 दिनों की ही पुलिस रिमांड दी है। बताया जा रहा है कि यदि इस रिमांड में पुलिस को अमानतुल्लाह से कुछ खास जानकारी मिलती है तो यह रिमांड बढ़ाई जा सकती है। कुछ वीडियोज भी सामने आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार करने गई पुलिस और जाँच एजेंसियों के अधिकारियों पर भीड़ हमला कर रही है।
बता दें, शुक्रवार (16 सितंबर) को दिल्ली एसीबी ने अमानतुल्लाह खान के घर समेत उनके बिजनेस पार्टनर हामिद अली और एक अन्य सहयोगी इमाम सिद्दीकी उर्फ लड्डन के घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जहाँ से एसीबी को दो बिना लाइसेंस की पिस्टल और 24 लाख रुपए मिले थे। अवैध रूप से हथियार रखने के मामले में पुलिस ने अमानतुल्लाह के पार्टनर हामिद अली को भी शनिवार सुबह गिरफ्तार किया था।
पहले इन्होंने सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया। कोर्ट के बार बार पूछने पर भी ये कोई सबूत पेश नहीं कर पा रहे
फिर मनीष के घर रेड की, कुछ नहीं मिला
अब अमानतुल्लाह को गिरफ़्तार किया है, अभी और भी कई MLAs को गिरफ़्तार करेंगे
अमानतुल्लाह की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) हमेशा की तरह उनका बचाव करते हुए नजर आए। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, “पहले इन्होंने सत्येंद्र जैन को गिरफ़्तार किया। कोर्ट के बार बार पूछने पर भी ये कोई सबूत पेश नहीं कर पा रहे। फिर मनीष के घर रेड की, कुछ नहीं मिला। अब अमानतुल्लाह को गिरफ़्तार किया है, अभी और भी कई विधायकों को गिरफ़्तार करेंगे। गुजरात में लगता है इन्हें तकलीफ़ बहुत ज़्यादा हो रही है।”
राजस्थान के अलवर में 5 बच्चों की एक माँ ने 5 बच्चों के पिता के साथ निकाह किया है। महिला ने निकाह के बाद अपने 4 बच्चों को बाल संरक्षण आयोग में भेज दिया है जबकि एक अन्य को भी अनाथालय भेजने की तैयारी में है। जिन बच्चों को अनाथालय भेजा गया है, उन सभी का रो-रो कर बुरा हाल है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हरियाणा के खोहरी गाँव में रहने वाली नूरजहाँ का निकाह 15 साल पहले राजस्थान के अलवर से 15 किलोमीटर दूर जाजोरबास गाँव के तैयब से हुई थी। तैयब ट्रक ड्राइवरी करता था। हालाँकि, नूरजहाँ का कहना है कि वो न तो वह उसका खयाल रखता था और न ही बच्चों का। उसने आरोप लगाया कि वह शराब पीकर मारपीट करता था। इसलिए, वह बच्चों को लेकर अपने मायके खोहरी चली गई थी।
इस दौरान नूरजहाँ की पहचान जयपुर के रहने वाले मौसम से हुई, जो कि जयपुर में अपनी पत्नी और पाँच बच्चों के साथ रहता है। लेकिन, वो मजदूरी के लिए अलग-अलग शहर में आता-जाता है। मौसम बीते कुछ महीनों से हरियाणा में ही मजदूरी का काम कर रहा था। वहीं पर उसकी मुलाकात नूरजहाँ से हुई थी। मुलाकात के बाद दोनों को प्यार हो गया और फिर दोनों ने निकाह कर लिया।
नूरजहाँ ने अपने 4 बच्चों को ‘बाल संरक्षण आयोग’ के हवाले कर दिया है। हालाँकि, बच्चे उससे अलग नहीं होना चाहते थे। ‘बाल संरक्षण आयोग’ के सदस्यों ने नूरजहाँ को बच्चों को साथ रहने को लेकर काफी समझाया भी। लेकिन, वह तैयार नहीं हुई।
इसके बाद उसकी दो बेटियों को जयपुर के बालिका आवास भेज दिया गया है। दो बेटों को अलवर के बाल आवास केंद्र के हवाले किया गया है। जब, नूरजहाँ बच्चों को छोड़कर मौसम के साथ जाने लगी तो बच्चे रोने लगे और उन्हें साथ लेकर चलने के लिए बार-बार कह रहे थे। लेकिन, वह बच्चों को छोड़कर मौसम के साथ चली गई। नूरजहाँ का एक बेटा हरियाणा में है उसे भी अनाथालय में भेजने की तैयारी चल रही है।
एक ओर जहाँ नूरजहाँ का कहना है कि वह अपने बच्चों का बोझ नहीं उठा सकती, वहीं दूसरी ओर उसके नए शौहर मौसम का कहना है कि वह अपनी पहली बीवी को तलाक नहीं देगा और नूरजहाँ को भी साथ रखेगा।
मेरी माँ का स्वभाव सेवाभावी है। वो थोड़ी वैद्यकी जानती थीं। बच्चों को विशेष तरह की दवाइयाँ दी जाती थीं, जिन्हें लेने वो सूर्योदय से पहले आ जाया करते थे। सुबह 5 बजे से ही हमारे यहाँ बच्चों की कतारें लग जाती थीं। माँ को तक़रीबन 50 किस्म की दवाओं की जानकारी थी। वो अनपढ़ थीं, लेकिन उनमें ये दैवी शक्ति थी। हम भी सुबह उठ कर बच्चों की मदद में लग जाते। उन्हें व्यवस्थित रूप से बिठाने से लेकर अन्य कार्य करते। परिवार के अन्य सदस्यों में भी सेवा भाव इसी तरह आया। मैं लीडर नहीं हूँ, पहल करने वाला व्यक्ति हूँ।
एक इंटरव्यू के दौरान कहे इन शब्दों से स्पष्ट है कि नरेंद्र मोदी में सेवा का भाव कहाँ से आया और उनमें ज़रूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता बचपन से पनपी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (17 सितंबर, 2022) को 72 वर्ष के हो गए। पिछले 8 वर्षों से भी अधिक समय से भारत की सत्ता पर काबिज नरेंद्र मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। जन-कल्याणकारी नीतियों, हिंदुत्व व राष्ट्रवाद की विचारधारा, कुशल संगठनात्मक क्षमता और उनके चमत्कारिक व्यक्तित्व का प्रभाव ऐसा है कि आगामी 2024 लोकसभा चुनाव में भी कोई चेहरा उनके मुकाबले खड़ा होने लायक नहीं दिख रहा है, कड़ी टक्कर देना तो दूर की बात है।
प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर खुद अपनी पुरानी कहानियाँ समझा की हैं और अपने छात्र जीवन के साथ-साथ RSS-भाजपा के संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी वाले दिनों की बातें बताई हैं। उनके परिवार वालों और पुराने जानने वालों ने भी उनके बारे में कई चीजें साझा की। ये एक ऐसा व्यक्तित्व है, जिसके बारे में सब और ज्यादा जानना चाहते हैं। यहाँ हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े ऐसे ही कुछ वाकयों की चर्चा करते हैं, जो उन्हें चाहने वालों को खासे पसंद आएँगे।
आपको सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘शिवाजी: द बॉस’ याद होगी। कैसे उसमें एक रुपए के सिक्के से ‘शिवाजी’ का किरदार न सिर्फ गुंडे को सलाखों के पीछे पहुँचाता है, बल्कि कालेधन के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए जनता की भलाई करता है। वास्तविक जीवन में अपने बचपन के दिनों में कोई इस तरह की चीज करे, तो उसे चमत्कार नहीं तो और क्या कहा जाएगा? इस घटना के बारे में जान कर आपको विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता कहे जाने वाले व्यक्ति के संघर्ष में बीते बचपन और उनकी संवेदनशीलता पर नाज हो जाएगा।
लेखक किशोर मकवाना अपनी पुस्तक ‘Common Man Narendra Modi‘ में इस घटना का जिक्र करते हुए बताते हैं कि घर की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण 6 भाई-बहनों में से कोई भी ठीक से पढ़ नहीं पाया। लेकिन, चीजों को अलग दृष्टि से देखने की क्षमता नरेंद्र मोदी के पास बचपन से ही थी और गुजरात के वडनगर में स्थित पुस्तकालय में अध्ययन करते हुए उनका अधिकतर समय व्यतीत होता था। समस्याओं का चुटकी में हल निकाल लेना उनकी काबिलियत थी।
ये तब की बात है, जब नरेंद्र मोदी नौवीं कक्षा में पढ़ते थे। उनकी उम्र यही कोई 14-15 साल रही होगी। सावन का महीना था और देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ से स्थिति विकराल बनी हुई थी। इस उम्र में एक आर्थिक रूप से पिछड़े घर का लड़का भला क्या कर सकता था? लेकिन, नरेंद्र मोदी के मन में ये बातें चल रही थीं कि पीड़ितों की सहायता के लिए वो क्या योगदान दे सकते हैं। सावन के महीने में देश के कई इलाकों की तरह वडनगर में भी मेला लगा करता था।
वहाँ आसपास के गाँवों के लोगों का जुटान भी होता था। बाल नरेंद्र को उसके पिता ने मेले में खर्च करने के लिए एक रुपए दिए। इस एक रुपए को देख कर उनके मन में भी ये बात उठने लगी कि कैसे बाढ़ पीड़ितों की मदद की जाए, लेकिन इस रकम से शायद ही कुछ हो सकता था। तब उनकी संगठनात्मक क्षमता और अलग सोचने की कला उनके काम आई। उन्होंने अपने दोस्तों को जुटाया और एक तरकीब सोच निकाली।
उन्होंने निर्णय लिया कि वो लोग उस मेले में चाय का ठेला लगाएँगे और उससे जो भी आय होगी, वो बाढ़ पीड़ितों की सहायता हेतु खर्च करेंगे। सभी दोस्तों ने इसके लिए मात्र एक-एक रुपया कर के जो भी धन था उसे इकट्ठा किया। नरेंद्र मोदी ने भी अपने हिस्से का एक रुपया उसमें लगाया। स्टोव और बर्तन वो अपने घर से ही लेकर आ गए। मेले में चाय का टहला लग चुका था। जो भी आय हुई, उसे बाढ़ पीड़ितों के लिए भेज दिया गया।
इस तरह एक रुपए से नरेंद्र मोदी ने कमाल कर दिखाया। तब वडनगर में डॉक्टर वसंत पारीख नाम के एक समाजसेवी हुआ करता थे। उनकी संगत में नरेंद्र मोदी ने बाढ़ पीड़ित दक्षिणी गुजरात का दौरा किया और वहाँ के पीड़ितों की सेवा भी की। इसी तरह जब 1962 में भारत-चीन का युद्ध हुआ, तब मेहसाणा स्टेशन से गुजरने वाले भारत के वीर जवानों के भोजन-पानी की जिम्मेदारी 12 साल के नरेंद्र मोदी और उनकी टोली ने उठाई।
आधी रात के समय भी जवान वहाँ से गुजरते तो नरेंद्र मोदी उस समय तक जाग कर उनकी सेवा करते और स्टेशन पर ही नींद की झपकी ले लिया करते। जवानों को चाय-बिस्किट खिलाने के लिए वो रोज वडनगर से मेहसाणा जाया करते थे, जिसके किराया तब 8 से 12 आना हुआ करता था। गाँव के तालाब में तैराकी सीखने वाले नरेंद्र मोदी तैर कर एक छोटे से मंदिर में जाकर झंडा लहराया करते थे। ये करना उन्हें खासा अच्छा लगता था।
ये तो सभी को पता है कि मात्र 17 वर्ष की आयु में आध्यात्मिक यात्रा पर नरेंद्र मोदी घर छोड़ कर निकल गए थे और हिमालय पर पहुँचे थे। शुरू में माता-पिता असमंजस में थे, लेकिन बेटे का निश्चय दृढ़ था। अतः, माँ ने मीठा खिला कर और टीका लगा कर उन्हें विदा किया था। माँ को एक साधु ने बेटे की कुंडली देख कर पहले ही बताया था कि अगर वो राजनीति में गया तो चक्रवर्ती सम्राट की कीर्ति पाएगा और संन्यासी बना तो शंकराचार्य जैसी प्रतिष्ठा। 2 वर्षों तक घूमते रहने के बाद वो राजकोट के रामकृष्ण मिशन वापस गुजरात पहुँचे। लेकिन, वहाँ भी ज्यादा दिन ठहरे नही।
कॉन्ग्रेस द्वारा सोशल मीडिया पर RSS विरोधी अभियान का विवादित पोस्टर डाले जाने के बाद उनकी मंशा पर जगह-जगह सवाल उठ रहे हैं। इस बीच राजदीप सरदेसाई ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को बिलकुल दोषमुक्त दिखाने के लिए मोर्चा संभाला है। उन्होंने द लल्लनटॉप पर आने वाले ‘नेतानगरी’ शो पर कहा कि जो भी कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया उसके बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जानकारी नहीं थी।
शो के 29 वें मिनट के बाद वह खाकी हाफ-पैंट पर किए गए विवादित ट्वीट पर बात करते दिखे। उन्होंने कहा, “आज कल खाकी पैंट को जलाने वाला एड काफी चर्चा में हैं। लेकिन मुझे बताया गया है कि दिग्विजय सिंह और पुराने नेता सब इसके सख्त खिलाफ थे। ये सोशल मीडिया टीम ने डाला। वह इससे खुश थे। पुराने नेता तो कह ही रहे हैं कि ये गलत था।”
आगे राजदीप ने कॉन्ग्रेस को डिफेंड करते हुए कहा, “एक पुराना नेता तो ये तक कह रहा था कि उन्होंने एक प्रपोजल देना चाहा कि इस यात्रा में किसी आरएसएस व्यक्ति के घर जाइए, जिसे सीपीएम ने मारा हो। सुधींद्र कुलकर्णी समेत कई नेता कह रहे हैं कि आप आरएसएस से हर रोज नहीं लड़ सकते। आपको उन्हें अपनी तरफ करना होगा।”
राजदीप ने ऐसा दावा उस समय किया है जब राहुल गाँधी RSS को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। उन्होंने पार्टी के पुराने नेताओं के बचाव में बताया कि अब बड़े नेताओं ने कह दिया है कि अगर सोशल मीडिया पर ऐसा कुछ डालना है तो उनसे भी राय माँगी जाए, ऐसे ही कुछ भी न सोशल मीडिया पर डले।
उन्होंने कॉन्ग्रेस की पूरी हरकत को ‘जेनरेशन गैप’ और ‘कम्युनिकेशन गैप’ के नाम पर जस्टिफाई करना चाहा। हालाँकि सच ये है कि न जाने कितनी बार पार्टी के बड़े नेता आरएसएस विरोधी बयान देते हैं और इसकी विचारधारा को देश के लिए घातक तक कह देते हैं।
कॉन्ग्रेस का ट्वीट
12 सितंबर को कॉन्ग्रेस के आधिकारिक अकॉउंट से इस संबंध में ट्वीट किया गया था। इसमें हाफ पैंट को फूँकते दिखाया था। साथ ही फोटो पर ‘145 दिन और’ लिखा गया था। इसके अलावा कैप्शन में कॉन्ग्रेस ने लिखा था, “देश को नफरत की बेड़ियों से मुक्त कराने और भाजपा-आरएसएस द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई करने के लिए कदम दर कदम हम अपने लक्ष्य तक पहुँचेंगे।”
इस पोस्ट के सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस को 1984 जैसी हिंसा के लिए उकसाने का जिम्मेदार बताया गया था। BJYM अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कॉन्ग्रेस पर हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इसने 1984 में दिल्ली को जलाया और इसके इकोसिस्टम ने गोधरा में 59 हिन्दुओं को जलाया।
कॉन्ग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा’
बता दें कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने कंटेनरों के एक बेड़े के साथ ‘भारत जोड़ो’ यात्रा शुरू की थी। इस यात्रा को कॉन्ग्रेस ने भारत को ‘एकजुट’ करने वाले कदम के रूप में दिखाने का प्रयास किया था। फिलहाल इसके लिए करोड़ों रुपए भी खर्च किए जा रहे हैं। इस बीच, कॉन्ग्रेस आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से जिस तरह की फोटो शेयर हुई, वह दिखा रही थी कि कैसे वह लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों को ‘जलाकर राख करने’ की ओर इशारा कर रहे थे।