वामपंथी पोर्टल द वायर की रिपोर्ट को आधार बनाकर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) की पत्नी रिंकी भुयान सरमा (Rinki Bhuyan Sarma) के खिलाफ पीपीई किट में भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के मामले में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) बुरे फँस गए हैं। शुक्रवार (1 जुलाई 2022) को सीएम सरमा ने उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) का केस गुवाहाटी की कामरूप (ग्रामीण) कोर्ट में दर्ज कराया है। सिसोदिया के खिलाफ ये दूसरा केस है। इससे पहले सीएम हिमंता की पत्नी रिंकी भुयान सरमा ने 100 करोड़ का मानहानि का केस फाइल किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की याचिका पर कोर्ट ने 22 जुलाई को सुनवाई के लिए तारीख तय कर दिया है। अब अगर आप मंत्री मनीष सिसोदिया दोषी करार दिए जाते हैं तो उन्हें दो साल तक की जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma has filed a criminal defamation case against Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia before the CJM court, Kamrup (Rural) on June 30.
सरमा पर लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए वरिष्ठ वकील देवजीत लोन सैकिया ने कहा, “सारे आरोप झूठे हैं। पीपीई किट बनाने वाली उनकी कंपनी ने कभी कोई बिल नहीं दिया। उस समय, एनएचएम ने पीपीई व्यवसाय में सभी से किट की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था और उन्होंने अपने सीएसआर के तहत लगभग 1500 पीपीई किट की आपूर्ति की थी। इसके लिए एक पैसा नहीं लिया गया।” सैकिया के मुताबिक, आरोप साबित होने पर सिसोदिया को दो साल की कैद और जुर्माना लग सकता है।
क्या है पूरा मामला
बुधवार (1 जून 2022) को विवादित पोर्टल ने एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि कथित तौर पर रिंकी भुयान के मालिकाना हक वाली वाली एक कपंनी को कोरोना से निपटने के लिए पीपीई किट और दूसरे कोविड से जुड़े सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री थे और हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे, तो उनकी पत्नी रिंकी भुयान सरमा की कंपनी को बिना किसी अनुभव के ही 5,000 पीपीई किट, मेडिकल उपकरण और अन्य सुरक्षा के सामानों की आपूर्ति करने का ऑर्डर दिया गया था।
बाद में रिंकी भुयान सरमा ने द वायर की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन किया और कहा कि ये पूरी तरह से फ्री था। बावजूद इसके 4 जून 2022 को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और हिमंत बिस्वा सरमा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। बाद में सीएम हिमंता ने आरोपों का खंडन करते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी।
22 जून 2022 को सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुयान ने सिसोदिया के खिलाफ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का केस कर दिया। अब सरमा ने भी सिसोदिया के खिलाफ एक्शन ले लिया है। हालाँकि, पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेताओं अरुण जेटली और नितिन गडकरी के खिलाफ भी झूठा आरोप लगाया था। भाजपा नेता द्वारा मानहानि का मामला दर्ज कराने के बाद दिल्ली के सीएम को माफी माँगनी पड़ी थी।
पाकिस्तान गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। आर्थिक संकट की वजह से पड़ोसी देश में आम जनता पर कई तरह की पाबंदियाँ लगाई जा चुकी हैं। आर्थिक संकट के अलावा बिजली संकट भी पाकिस्तान में मुँह बाए खड़ी हो गई है। अब हालात यह हो गई है कि पाकिस्तान की सरकार ने चेताया है कि बिजली संकट की वजह से फोन और इंटरनेट सेवाएँ भी ठप हो सकती हैं।
पाकिस्तान राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड (NITB) ने ट्विटर पर कहा कि पाकिस्तान में दूरसंचार ऑपरेटरों ने देश भर में लंबे समय तक बिजली गुल रहने के कारण मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को बंद करने की चेतावनी दी है, क्योंकि बिजली में भारी कमी से संचालन में काफी मुश्किल हो रहा है।
TECH NEWS UPDATE || BY NITB✅ Telecom operators in Pakistan have warned about shutting down mobile and internet services due to long hours power outages nationwide, as the interruption is causing issues and hinderance in their operations.✔️ Stay tuned for more information.? pic.twitter.com/CA1d4gx7xa
— National Information Technology Board (@NationalITBoard) June 30, 2022
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले दिनों चेतावनी थी कि जुलाई में देश को लोड शेडिंग का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आवश्यक एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति नहीं मिल सकी है। गठबंधन सरकार ने सौदा करने की कोशिश की थी। हालाँकि, सरकार समझौते पर सहमति बनाने में कामयाब नहीं हो पाई।
दरअसल, पाकिस्तानी में एलएनजी से बड़े पैमाने पर बिजली बनाई जाती है। एलएनजी की कमी से बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी सरकार अगले महीने के लिए एलएनजी का सौदा नहीं कर पाई है। रिफाइनिटिव डेटा के अनुसार पाकिस्तान को बिजली उत्पादन के लिए एलएनजी खरीदने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। एलएनजी की दुनिया में बढ़ती माँग भी एक बड़ी वजह है। इसकी कीमत में भी वृद्धि हुई है। इसके कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे पाकिस्तान को एलएनजी खरीदने में परेशानी हो रही है।
बिजली की कमी के चलते पाकिस्तान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के काम के घंटों में कटौती की है। वहीं, कराची सहित विभिन्न शहरों में कारखानों से लेकर शॉपिंग मॉल तक को जल्दी बंद करने का आदेश दिया है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ्ता इस्माइल ने कहा कि सरकार कतर से एलएनजी खरीद के लिए बात कर रही है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों देश में कागज के संकट की खबर आई थी। कहा गया कि आसमान छूती कीमतों की वजह से प्रकाशकों के लिए छपाई करना मुमकिन नहीं है। ऐसे में अगले साल बच्चों को सिलेबस की किताबें उपलब्ध नहीं हो पाएँगी।
इससे पहले पाकिस्तान के एक मंत्री ने लोगों से कम चाय पीने के लिए कहा था, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। देश के योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने कहा था कि पाकिस्तानी अपनी चाय की खपत को प्रति दिन ‘एक या दो कप’ कम कर सकते हैं, क्योंकि इसका आयात सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल रहा है। इसके पहले एक एयरपोर्ट कर्मचारी ने देश में बढ़ते पेट्रोल के दामों को लेकर गधा गाड़ी से ऑफिस पहुँचने की अनुमति माँगी थी।
कर्नाटक के शिवमोगा जिले में हर्षा (26) नामक बजरंग दल कार्यकर्ता की हत्या के मामले में गुरुवार (30 जून 2022) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने शिवमोगा जिले में 13 स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। तेरह स्थानों पर तलाशी ली। जिन लोगों के घरों में तलाशी ली गई, वो सभी हर्षा की हत्या के मामले में संदिग्ध हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एनआईए की टीम गुरुवार को 8 गाड़ियों से शिवमोगा पहुँची। वहाँ पर संदिग्धों के घरों में ताबड़तोड़ तलाशी अभियान चलाने के बाद वहाँ से निकल गई। इस सर्च ऑपरेशन को लेकर एक अधिकारी ने कहा कि आरोपित और संदिग्धों के घरों से तलाशी के दौरान विभिन्न डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनमें मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड, हार्ड डिस्क और अन्य आपत्तिजनक सामग्री और दस्तावेज शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि शिवमोगा जिले में हिजाब विवाद के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता हर्षा की 20 फरवरी 2022 को हत्या कर दी गई थी। इस मामले में इस्लामिक कट्टरपंथियों के शामिल होने की बात सामने आई थी। सोशल मीडिया पर ऐसी कई सारी पोस्ट की गई थीं, जिनमें हर्षा को कट्टरपंथियों ने टार्गेट बनाया हुआ था।
हर्षा की मौत के मामले में कट्टरपंथी एंगल सामने आया था। इस हर्षा की हत्या के मामले में कर्नाटक पुलिस ने सभी 10 आरोपितों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धाराएँ लगा दी थी। इस मामले को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा था कि इस मामले में जो नजर आ रहा है यह उससे कहीं ज्यादा बड़ा मामला है।
उल्लेखनीय है कि यूएपीए अधिकतर उन मामलों में लगाया जाता है, जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मसला हो या देश के खिलाफ किसी बड़ी साजिश का शक हो। बाद में 23 मार्च को इस मामले की जाँच को एनआईए को सौंप दिया गया था। इसी को लेकर जाँच एजेंसी ने ये रेड की है।
राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में मोहम्मद रियाज अख्तर और मोहम्मद गौस द्वारा हिंदू शख्स कन्हैया लाल की निर्मम हत्या ने देश को झकझोर कर रख दिया है। जहाँ वैश्विक मीडिया ने सैमुअल पैटी की हत्या पर दुनिया का ध्यान खींचा, वहीं कन्हैया लाल जैसे नामों पर मीडिया और सोशल मीडिया के दिग्गजों द्वारा इस्लामवादी हत्या को दबाने के साथ-साथ हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाले AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर जैसों को बचाने का प्रयास करते हैं।
ऑपइंडिया ने 28 जून 2022 को एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था। रिपोर्ट में ऑपइंडिया ने TimesNow का एक YouTube वीडियो एम्बेड किया था। इस वीडियो में पुलिस को लैपटॉप बरामद करने के लिए मोहम्मद जुबैर को उसके बेंगलुरु के घर तक ले जाते हुए दिखाया गया था।
बता दें कि जुबैर ने पहले अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सौंपने से इनकार कर दिया था और उन्हें फॉर्मेट कर दिया था। पुलिस ने कहा कि बार-बार उपकरण माँगने के बावजूद जुबैर ने अपने उपकरण पुलिस को सौंपने से इनकार कर दिया था।
ट्विटर यूजर @BeffitingFacts ने 1 जुलाई 2022 को एक स्क्रीनशॉट पोस्ट किया, जिसमें दिखाया गया है कि टाइम्स नाउ के जिस वीडियो को ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में एम्बेड किया था, वह गायब हो गया है। यूट्यूब ने अपनी नोटिस में कहा है कि वीडियो को सामुदायिक मानकों का उल्लंघन करने के लिए हटा दिया गया है।
Youtube removed video of Times Now for showing house of Altnews co founder Zubair Mohammed. Since when live reporting of crime accused became violation of privacy? @YouTubepic.twitter.com/Hsxr1Ly5yd
TimesNow का यह वीडियो पुलिस का जुबैर को उसके आवास पर ले जाने के दौरान का लाइव कवरेज वीडियो था। संभव है कि YouTube ने वीडियो को इसलिए हटा दिया, क्योंकि ज़ुबैर के समर्थकों द्वारा वीडियो को बड़े पैमाने पर रिपोर्ट किया गया था। लाइव रिपोर्टिंग के दृश्यों में, जुबैर को उनके आवास के अंदर ले जाते हुए देखा गया था, जिसमें उनकी इमारत के दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे।
यूट्यूब इंडिया की पूर्वाग्रह वाली इस कार्रवाई पर कई लोगों ने सवाल उठाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह मोहम्मद जुबैर को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
@YouTubeIndia why you’re so biased. You removed a video because zubair is arrested. When your hypocrisy will finally end ?
जब ऑपइंडिया ने यूट्यूब के दिशा-निर्देशों को देखा तो टाइम्स नाउ वीडियो को रिपोर्ट करने के बाद उसे गोपनीयता नीति गोपनीयता नीति के तहत हटाया गया होगा। YouTube गोपनीयता दिशा-निर्देश है: “सामग्री को हटाने पर विचार करने के लिए उस व्यक्ति की पहचान विशिष्ट रूप में होनी चाहिए और हमें शिकायत उस व्यक्ति या उसके प्रतिनिधि द्वारा मिली होनी चाहिए और उसकी छवि, आवाज, पूरा नाम, सरकारी पहचान संख्या, बैंक खाता संख्या, संपर्क जानकारी (जैसे घर का पता, ईमेल पता) या अन्य विशिष्ट रूप से उसकी पहचान होनी चाहिए। हम यह भी ध्यान में रखते हैं कि गोपनीयता उल्लंघन के लिए सामग्री को हटाया जाना चाहिए या नहीं। यह निर्धारित करते समय सार्वजनिक हित, समाचार योग्यता, सहमति और यह जानने की कोशिश करते हैं कि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से अन्य जगहों पर उपलब्ध है या नहीं। YouTube इस बात का अंतिम निर्धारण करने का अधिकार सुरक्षित रखता है कि उसके गोपनीयता दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।”
यूट्यूब की गोपनीयता नीति
यूट्यूब का कहना है कि अगर उसे प्राइवेसी को लेकर कोई शिकायत मिलती है तो वह यूजर को संशोधन के लिए 48 घंटे का समय देता है और अगर इसमें संशोधन नहीं किया जाता है तो वह वीडियो को हटाने की दिशा में आगे बढ़ता है।
लेकिन यहाँ एक मसला है। उसका यह भी कहना है कि तीसरे पक्ष की ओर से शिकायत तब तक नहीं की जा सकती है, जब तक कि जिस व्यक्ति की निजता का उल्लंघन किया जा रहा है, वह अक्षम ना हो। इसलिए, यह पूरी तरह से संभव है कि जिस गोपनीयता शिकायत का YouTube ने संज्ञान लिया, वह जुबैर के परिवार के किसी सदस्य या सहयोगी द्वारा उठाया गया था।
यूट्यूब की गोपनीयता नीति
हालाँकि, Times Now का यह वीडियो मोहम्मद जुबैर की निजता का उल्लंघन नहीं कर रहा था। यह एक आरोपित के बारे में एक ऑन-ग्राउंड रिपोर्ट थी, जिसे पुलिस उसके आवास पर ले जाते समय पूछताछ कर रही थी। अब सवाल यह है कि अन्य दूसरे अपराधियों के लिए यूट्यूब ऐसा करेगा, यदि पुलिस पूछताछ करने के लिए उसे उसके घर लेकर जाती है।
YouTube के इरादे सवालों के घेरे में आ गए हैं। लोगों का कहना है कि YouTube ने Times Now के इस वीडियो के खिलाफ इसलिए कार्रवाई की है क्योंकि वह मोहम्मद जुबैर के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी को छिपाना चाहता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि YouTube ने नुपुर शर्मा को जान से मारने की धमकी देने वाले ज़ुबैर के गैंग के लोगों के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की।
कन्हैया लाल की निर्मम हत्या के खिलाफ प्रदर्शन को भी YouTube ने हटाया
Times Now का वीडियो हटाने के बाद ऑपइंडिया ने यह भी पाया कि YouTube ने सामुदायिक मानकों के उल्लंघन के नाम पर रिपब्लिक टीवी के कुछ अन्य वीडियो को भी हटा दिया है। YouTube द्वारा हटाए गए वीडियो में से एक में दो इस्लामवादियों द्वारा कन्हैया लाल की हत्या के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन दिखाया गया है।
#BREAKING | Massive protests in Udaipur over Kanhaiya Lal’s brutal murder; groups demand death sentence over killing
हालाँकि, जब कोई YouTube लिंक पर क्लिक करता है तो यह दिखाता है कि वीडियो उपलब्ध नहीं है।
वीडियो उपलब्ध नहीं है
इस मामले में हम इस बात की पुष्टि नहीं कर सके कि वीडियो को YouTube ने हटाया था या रिपब्लिक टीवी ने स्वयं हटा लिया था, क्योंकि नोटिस में कहा गया है कि वीडियो अब उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, एक अन्य मामले में यह स्पष्ट था कि इसे YouTube द्वारा हटा दिया गया था। एक अन्य ट्वीट में रिपब्लिक ने कन्हैया लाल के परिवार के लिए न्याय की माँग को लेकर एक यूट्यूब लिंक पोस्ट किया था।
जब कोई YouTube लिंक पर क्लिक करता है तो यह कहता है कि वीडियो को सामुदायिक मानकों के उल्लंघन के कारण हटा दिया गया है।
कन्हैया लाल का परिवार हत्या की बात करते हुए जाहिर तौर पर बेहद आक्रोशित था। परिवार के कुछ सदस्यों ने यह भी माँग की कि अपराधियों को ठीक उसी तरह मार दिया जाए जैसे कन्हैया लाल की हत्या की गई थी। एक वीडियो में सीएम अशोक गहलोत को ‘मुसलमानों का गुलाम’ कहा गया।
हालाँकि, हम नहीं जानते कि इस वीडियो में क्या कहा गया था, लेकिन पूरी संभावना है कि इसे YouTube द्वारा इस्लामवादियों और वामपंथियों द्वारा ‘अभद्र भाषा’ के रूप में बड़े पैमाने पर की गई रिपोर्टिंग के बाद हटा दिया गया।
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ इस्लामवादियों ने कन्हैया लाल का सिर कलम कर दिया, वहीं उनके परिवार की पीड़ा व्यक्त करने वाली आवाज को YouTube ने शायद हेट स्पीच के नाम पर दिया। YouTube की हेट स्पीच नीति में उल्लेख है कि धर्म पर आधारित कोई भी ‘लक्ष्यीकरण’ वीडियो को हटाए जाने का एक कारण है।
यूट्यूब की हेट स्पीच नीति
कन्हैया लाल की बर्बर हत्या पर पश्चिमी मीडिया ने आँखें बंद की
पश्चिमी मीडिया ने भी इस्लामवादी क्रूरता वाली कन्हैया लाल की हत्या वाली खबर को पूरी तरह दबा दिया है। एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) के संपादकों में से एक ने बुधवार को खुलासा किया कि कई पश्चिमी मीडिया आउटलेट्स ने राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल नाम के एक हिंदू दर्जी की नृशंस हत्या के बारे में रिपोर्ट नहीं करने का विकल्प चुना था। पश्चिमी मीडिया हाउस को उदयपुर हत्या पर ANI द्वारा 5 वीडियो स्टोरी दी गई थीं, लेकिन उनमें से कुछ ने ही इसे चलाया।
ANI के संपादक ईशान प्रकाश ने 30 जून को ट्वीट किया कि एजेंसी ने दुनिया की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी थॉमसन रॉयटर्स के माध्यम से कन्हैया की हत्या पर 5 विस्तृत वीडियो स्टोरी विश्व स्तर पर साझा की थीं। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स ने कहानी को नजरअंदाज कर दिया है।
प्रकाश ने बताया कि खबर को चलाने वालों में बीबीसी, वाको ट्रिब्यून-हेराल्ड, द वॉशिंगटन पोस्ट और टोरंटो सन शामिल हैं। हालाँकि, बीबीसी ने अपनी स्टोरी में हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा घटना के विरोध में प्रदर्शन और और ‘बहुसंख्यक हिंदुओं और अल्पसंख्यक मुसलमानों’ के बीच तनाव को प्रदर्शित किया। लेकिन, उसने उदयपुर घटना के इस्लामी हत्यारों (रियाज़ मोहम्मद और ग़ुस मोहम्मद) का अपनी रिपोर्ट में नाम तक नहीं लिया। वहीं, वाको ट्रिब्यून-हेराल्ड ने रिपोर्ट को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और कहा कि यह हमला ‘गहरे धार्मिक ध्रुवीकरण से प्रभावित देश में सांप्रदायिक हिंसा की नाटकीय वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है’।
वाको ट्रिब्यून हेराल्ड ने आगे लिखा कि कन्हैया को भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट साझा करने के लिए मारा गया था, जिन्होंने हाल में कथित ‘ईशनिंदा’ की थी। इसके बाद उसने लिखा, “आजकल अल्पसंख्यक समूहों, विशेष रूप से मुसलमानों पर हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा हमलों की बाढ़ आ गई है। उन्हें उनके भोजन और कपड़ों की शैली से लेकर अंतरधार्मिक विवाह तक, हर चीज के लिए निशाना बनाया गया है। कुछ भारतीय राज्यों में मुस्लिम घरों को भी बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया, जिसे आलोचक अल्पसंख्यक समूह के खिलाफ बुलडोजर न्याय बताते हैं।”
पश्चिमी मीडिया और बड़ी तकनीकी संस्थान इस्लामवादी क्रूरता की खबरों को सक्रिय रूप से दबाने और हिंदुओं को दोष देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें यह याद रखना महत्वपूर्ण हो जाता है कि सरकार द्वारा नए सोशल मीडिया दिशा-निर्देशों के अनुसार, YouTube और अन्य सोशल मीडिया दिग्गज ‘संपादक’ के रूप में कार्य करना जारी रखते हैं और तार्किक आधार के बिना महत्वपूर्ण समाचारों को दबाते रहते हैं तो वे सरकार द्वारा इंटरमीडियरी के रूप में दी गई सुरक्षा को खो देंगे।
मुस्लिम देश मालदीव (Maldives) इन दिनों न्यूड वीडियो और तस्वीरें लीक होने की वजह से विवादों में है। खास बात यह है कि समलैंगिकता को अपराध मानने वाले इस्लामिक देश में स्थानीय लोगों के साथ कई सांसदों और उनके रिश्तेदारों को भी इनमें समलैंगिक रिश्ते बनाते हुए दिखाया गया है। एक लीक वीडियो में मालदीव की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद नशीद के भाई, वकील अहमद नज़ीम अब्दुल सत्तार को एक प्रवासी के साथ समलैंगिक सेक्स करते हुए दिखाया गया है। वहीं एक तस्वीर में दक्षिण-हेनवीरू के सांसद हुसैन शहीम, एक महिला और पुरुष के बीच आपत्तिजनक अवस्था में सोते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, मालदीव पुलिस ने इन तस्वीरों और वीडियो को लीक करने वाले संदिग्ध की पहचान कर ली है। सहायक पुलिस आयुक्त मोहम्मद रियाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूड वीडियो लीक करने वाले संदिग्धों की पहचान करने का दावा किया है। रियाज ने मीडिया से कहा, “हमें मामले से जुड़े कुछ संदिग्धों की जानकारी मिली है। हम फिलहाल और जानकारी के लिए जाँच कर रहे हैं।”
वहीं, मालदीव की मीडिया की मुताबिक, होराफुशी से सांसद अहमद सलीम साल्ले (Hoarafushi MP Ahmed Saleem) ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “मैंने किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध नहीं बनाया और ना ही कभी इस्लामी शरिया और मालदीव के कानूनों के विरुद्ध जाकर कोई कार्य किया है।”
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के लीक होने के बाद 26 जून को पुलिस आयुक्त मोहम्मद हमीद को लिखे एक पत्र में अपना बयान दिया था। लीक वीडियो में कथित तौर पर रज्जी टीवी के पूर्व रिपोर्टर अब्दुल्ला नसीर इब्राहिम को एक अन्य पुरुष के साथ ओरल सेक्स करते हुए दिखाया गया है। वहीं, इस वीडियो लीक होने के कुछ ही समय बाद होराफुशी से सांसद अहमद सलीम सल्ले पर आरोप लगाया गया कि वह वीडियो में दिखाई दे रहे दूसरे पुरुष हैं।
पत्र में साल्ले ने यह भी कहा कि था वह एक सांसद हैं उनकी गरिमा का ध्यान रखा जाए। उन्होंने पुलिस से उन रिपोर्टों की गहनता से जाँच करने के लिए कहा है, जिन्होंने उन पर इस्लाम में हराम कृत्य में शामिल होने का आरोप लगाया है। सांसद साल्ले ने गुरुवार (30 जून 2022) को सन चैनल को बताया कि उन्होंने आज Dhiyares मीडिया हाउस के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है, जिसने 25 जून को अपनी वेबसाइट पर उनकी छवि धूमिल करने के लिए एक लेख छापा था। सांसद ने उन्हें बदनाम करने और उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए 10 मिलियन एमवीआर (51528238.81 रुपए) से अधिक के मुआवजे की माँग की है।
बता दें कि मालदीव इस्लामिक नियमों का कड़ाई से पालन करता है। इसके तहत समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी मे रखा गया है। इस्लामिक देश में समलैंगिक रिश्ते बनाने का दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है।
कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद से हुई पूछताछ से पता चला है कि कन्हैया लाल को घर में घुसकर मारने का प्लान बनाया गया था। लेकिन पता नहीं मिलने के कारण दुकान में उनकी हत्या की गई। इतना ही नहीं उन्हें गोली नहीं मारने के ऑर्डर थे। कहा गया था कि गला काटकर उसका वीडियो बनाना है। उल्लेखनीय है कि उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल का गला काट डाला गया था।
एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद लगातार कन्हैया लाल को मारने की प्लानिंग कर रहे थे। पहले घर में घुसकर हमले की योजना बनाई गई, क्योंकि धमकियों के कारण उन्होंने कुछ दिन दुकान बंद रखी थी। लेकिन हत्यारों को उनके घर का पता नहीं चल पाया। साथ ही उन्हें दुकान पर हमला करना आसान लगा। लिहाजा वे इसी प्लान पर काम करने लगे और हत्या से पहले दुकान की रेकी की गई।
वहीं दैनिक भास्कर ने राजस्थान पुलिस की SIT के हवाले से बताया है कि नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने वाले कई लोग टारगेट पर थे। इसमें कई लोग शामिल थे। रियाज और गौस को आदेश दिया गया था कि गला काटकर उसका वीडियो बनाना है ताकि दहशत कायम की जा सके। यही कारण है कि दोनों ने ऐसे हथियार तैयार किए जिससे गर्दन आसानी से धड़ से अलग किया जा सके। हालाँकि दोनों को आदेश कौन दे रहा था, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
इस बीच कन्हैया लाल की हत्या के मामले में 2 और गिरफ्तारी हुई है। इनके नाम मोहसिन और आसिफ हैं। इनपर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। दोनों की गिरफ्तारी 1 जुलाई 2022 (शुक्रवार) को हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कन्हैयालाल की हत्या न सिर्फ एक बड़ी साजिश थी, बल्कि उसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क भी था। माना जा रहा है कि कुछ और गिरफ्त्तारियाँ हो सकती हैं। पुलिस ने अब इस मामले में दर्ज FIR में अन्य धाराओं के साथ साजिश की धारा 120-B के साथ 307 और 326 IPC भी जोड़ दिया है। इससे पहले नूपुर शर्मा के समर्थन में में पोस्ट करने वाले उदयपुर के ही कारोबारी नितिन जैन को धमकी देने के मामले में बावला नाम के शख्स को भी गिरफ्तार किया गया था।
कर्नाटक के मंगलौर में पिछले सोमवार (27 जून 2022) को 13 साल के मदरसा छात्र ने आरोप लगाया था कि उसके साथ दूसरे धर्म के लोगों ने मारपीट की और उसका कुर्ता फाड़ा। अब यही लड़का पुलिस की पूछताछ में अपने बयान से पलट गया है। खुद को पीड़ित दिखाने वाले मदरसा छात्र ने पुलिस के सामने गुरुवार (30 जून 2022) को कबूल किया कि घर और स्कूल में ठीक से ध्यान नहीं दिए जाने के कारण उसने झूठी कहानी गढ़ी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले को लेकर मंगलौर के पुलिस कमिश्नर एन शशि कुमार ने कहा कि लड़के ने पेन से खुद ही अपनी शर्ट को फाड़ लिया था, ताकि लोगों को ये यकीन दिला सके कि उसके साथ मारपीट की गई है।
दरअसल, लड़के के द्वारा मारपीट के आरोपों के बाद किसी भी साम्प्रदायिक तनाव के मामले से बचने के लिए तुरंत एक्शन लिया। मामले की छानबीन के दौरान जब पुलिस ने लड़के के बयान, सीसीटीवी कैमरे के फुटेज और दूसरे सबूतों की जाँच की तो पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई। क्योंकि लड़के ने झूठ बोला था। इसके बाद गुरुवार को दोबारा से उसे पूछताछ के लिए तलब किया गया। लड़के ने बताया कि वो एक गरीब परिवार से आता है और वो पढ़ाई में भी कमजोर है। इस कारण उसे वो सम्मान नहीं मिल रहा है, जो वो चाहता था।
सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने उसके माता-पिता और समुदाय के नेताओं को बुलाकर सच्चाई से अवगत कराया। अब पुलिस बाल कल्याण समिति और डॉक्टरों के सामने फिर से उसका बयान दर्ज करेगी। उल्लेखनीय है कि लड़के के साथ मारपीट की घटना के बाद सूरतकल और उसके आसपास के इलाकों में तनाव पैदा हो गया था।
क्या था पूरा मामला
वहीं हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए सूरतकल पुलिस स्टेशन के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा था कि 8वीं कक्षा का छात्र है। घटना वाले दिन वो चक्रबर्ती मैदान से लौट रहा था। उसका आरोप था कि लौटते वक्त दो लोग पीछे से उसके पास पहुँचे और पीछे से उसे धक्का दिया। फिर उसके कपड़े फाड़ने के बाद वहाँ से भाग गए थे। (अब यही आरोप झूठे पाए हैं।)
ओडिशा का पवित्र शहर पुरी भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव मनाने के लिए तैयार है। पुरी जगन्नाथ यात्रा इस बार आज 1 जुलाई, 2022 से शुरू हो रही है। विधिवत अनुष्ठान के बाद गुरुवार (30 जून 2022) को ही भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा के रथों को खींच कर मंदिर के सिंह द्वार के सामने रख दिया गया। भगवान जगन्नाथ का रथ खींच कर पुण्य कमाने की इच्छा रखने वाले लाखों भक्त पुरीधाम पहुँच चुके हैं। रथ यात्रा का समापन 12 जुलाई को होगा। वहीं इसे लेकर शुभकामना देते वक्त भी राहुल गाँधी हिन्दू-देवी देवताओं से एक बार फिर कन्नी काटते नजर आए।
सभी देशवासियों को महाप्रभु श्री जगन्नाथ रथयात्रा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।
मैं कामना करता हूं कि श्रद्धा और आस्था से भरी ये यात्रा आप सबके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और बेहतर स्वास्थ्य लाए। #RathYatrapic.twitter.com/BqYt5K3xBu
खासतौर से बात करते हैं राहुल गाँधी की, तमाम लोगों की तरह कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी रथ यात्रा की बधाई दी है। हालाँकि, राहुल गाँधी की बधाई से भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्र गायब थीं। उन्होंने बधाई देते हुए लिखा, “सभी देशवासियों को महाप्रभु श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ। मैं कामना करता हूँ कि श्रद्धा और आस्था से भरी ये यात्रा आप सबके जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और बेहतर स्वास्थ्य लाए।”
No Idols and figurine representation of Bhagwaan Jagannath and others. Consistent with all his previous posts on Hindu festival. His hate for Idol worship is pretty evident.
— Chainpuriya । चैनपुरिया । ଧୈନପୁ୍ରିୟା (@AamDuniya) July 1, 2022
राहुल गाँधी ने शुभकामनाएँ तो दे दी, लेकिन उनके अंदर का हिंदू घृणा एक बार फिर झलक उठा। ट्वीट को देखेंगे तो आप पाएँगे कि इसमें किसी भी भगवान की तस्वीर या प्रतिकृति नहीं लगी है। हालाँकि, मूर्ति पूजा के लिए उनकी नफरत काफी पहले से ही स्पष्ट है।
फोटो साभार: राहुल गाँधी ट्विटर
यह पहली बार नहीं है, न राहुल गाँधी ने अनजाने में ऐसा किया है। राहुल गाँधी जब भी हिंदू त्योहारों की शुभकामनाएँ देते हैं, तब उससे जुड़े हिंदू देवी-देवता की तस्वीर गायब कर देते हैं। ये आरोप सोशल मीडिया पर उन पर लगते रहते हैं। पिछले साल भी जगन्नाथ यात्रा की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने भगवान की तस्वीर नहीं लगाई थी।
फोटो साभार: राहुल गाँधी ट्विटर
इसके अलावा गणेश चतुर्थी पर भी उन्होंने लोगों को शुभकामनाएँ तो दी थीं, लेकिन भगवान गणेश की तस्वीर लगाने से परहेज किया। इसी तरह पिछले साल कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ देते हुए भी उन्होंने मोर पंख से काम चला लिया था। महाशिवरात्रि पर भी उन्होंने भगवान शिव की तस्वीर नहीं लगाई।
इतना ही नहीं, उन्होंने पिछले साल बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के लिए शुभकामना संदेश तो दिया, लेकिन फोटो किसान का लगा दिया। सरस्वती पूजा के बहाने के यहाँ भी राहुल गाँधी ने राजनीतिक खेल करने की कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया यूजर ने उन्हें पकड़ लिया।
फोटो साभार: राहुल गाँधी ट्विटर
राहुल गाँधी यहीं पर नहीं रूके। उन्होंने सरस्वती पूजा की शुभकामना देने के दो घंटे के भीतर ही सरस्वती पूजा को हिजाब से जोड़ते हुए ट्वीट किया, “छात्राओं की शिक्षा के बीच हिजाब को आने देना भारत के बेटियों का भविष्य बर्बाद करने जैसा है। माँ सरस्वती सबको ज्ञान देती है, किसी में भेदभाव नहीं करती।”
फोटो साभार: राहुल गाँधी ट्विटर
बता दें कि राहुल गाँधी का यह ट्वीट कर्नाटक के हिजाब विवाद के संदर्भ में था, जहाँ कुछ मुस्लिम छात्राएँ स्कूल यूनिफॉर्म पहनने के नियमों का पालन करने से इनकार कर रही थी। वह सेकुलर शैक्षणिक संस्थानों के अंदर हिजाब पहनने पर जोर दे रही थीं। जिसके बाद शैक्षणिक संस्थानों ने मौजूदा नियमों का पालन नहीं करने की वजह से उन्हें एंट्री देने से मना कर दिया था। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हिजाब पहनकर स्कूल-कॉलेज जाने पर रोक लगाते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। हालाँकि, राहुल गाँधी हिंदुओं को शुभकामनाएँ देने के लिए भी हिजाब विवाद को घसीटकर राजनीति करने की कोशिश की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (4 जुलाई, 2022) को आंध्र प्रदेश के भीमावरम शहर में महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। वह सुबह 11 से दोपहर 12:15 बजे तक अल्लूरी सीताराम राजू की मनाई जा रही 125वीं जयंती के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। पीएम भीमावरम पार्क में 30 फुट ऊँची कांस्य प्रतिमा का अनावरण करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
विशेष मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) रजत भार्गव ने गुरुवार (30 जून 2022) को प्रधानमंत्री की यात्रा से जुड़े इंतजामों का जायजा लिया। भार्गव ने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा के लिए चार हेलीपैड तैयार किए गए हैं। विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के कर्मी सुरक्षा की जिम्मेदारी सँभाल रहे हैं। पीएम मोदी हैदराबाद से विशेष उड़ान से गन्नावरम पहुँचेंगे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से पश्चिम गोदावरी जिले में भीमावरम जाएँगे। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भेजा है।
अल्लूरी सीताराम राजू कौन थे?
अल्लूरी सीताराम राजू एक भारतीय क्रांतिकारी थे, जिन्होंने भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक सशस्त्र अभियान चलाया। उनका जन्म 1897 में विशाखापटनम में हुआ था। उनका असली नाम श्रीरामराजू था, जो कि उनके नाना के नाम पर था। वह छोटी उम्र में ही संत बन गए थे। सीताराम राजू वर्ष 1882 के मद्रास वन अधिनियम के खिलाफ ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गए। भारत की ब्रिटिश सरकार ने मद्रास फॉरेस्ट एक्ट पास कर स्थानीय आदिवासियों को जंगल में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी को लेकर उन्होंने आदिवासियों के लिए लड़ाई लड़ी और औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का आह्वान किया।
महज 27 साल की उम्र में वह सीमित संसाधनों के साथ सशस्त्र विद्रोह को बढ़ावा देने और गरीबों, अंग्रेजों के खिलाफ अनपढ़ आदिवासी को प्रेरित करने में कामयाब रहे। अंग्रेजों के प्रति बढ़ते असंतोष ने 1922 के रम्पा विद्रोह (Rampa Rebellion) को जन्म दिया, जिसमें अल्लूरी सीताराम राजू ने एक नेतृत्वकर्त्ता के रूप में एक प्रमुख भूमिका निभाई। 1922 से 1924 के बीच हुए इस विद्रोह में अल्लूरी ने ब्रिटिशर्स के खिलाफ विद्रोह करने के लिए विशाखापट्टनम और पूर्वी गोदावरी जिलों के आदिवासी लोगों को संगठित किया। इस विद्रोह के दौरान कई पुलिस थानों और अंग्रेजी अधिकारियों पर हमला करके लड़ाई के लिए हथियार जमा किए गए।
उनके वीरतापूर्ण कारनामों का ही नतीजा था कि स्थानीयों ने उन्हें ‘मान्यम वीरुडू’ (जंगलों का नायक) उपनाम दे दिया था। साल 1924 में अल्लूरी सीताराम राजू का विद्रोह जब चरम पर था तो पुलिस उनका पता लगाने के लिए आदिवासियों को सताने लगी। ऐसे में जब राजू को इस बात का पता चला तो उनका दिल पिघल गया। उन्होंने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया और खुद अपनी जानकारी देकर पुलिस को कहा कि वो कोइयूर में हैं। आकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए।
ब्रिटिश पुलिस ने बिन समय को गवाए उन्हें अपनी हिरासत में लिया और बाद में उनके साथ विश्वासघात करते हुए उन्हें एक पेड़ में बाँधा, फिर सार्वजनिक रूप से उन्हें गोलियों से भून दिया गया। उनकी हत्या क्रूरता से हुई मगर आदिवासियों के लिए वह नायक बन गए। वहीं सुभाष चंद्र बोस ने कहा कि भारतीय युवाओं को अल्लूरी सीताराम राजू से प्रेरणा लेनी चाहिए।
बता दें कि महान स्वतंत्रता सेनानी का दुर्ग कृष्णा देवी पेटा गाँव में स्थित है। कहते हैं कि देश के लिए लड़ते हुए उन्होंने अंग्रेजों की कई यातनाएँ सहीं, लेकिन उनके सामने सिर नहीं झुकाया। अफसोस की बात है कि सीताराम राजू को राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस से कभी भी कोई समर्थन नहीं मिला। बजाए समर्थन के, उन्होंने ब्रिटिशर्स द्वारा राम्पा विद्रोह का दमन और राजू की हत्या का स्वागत किया।
स्वातंत्र्य साप्ताहिक पत्रिका ने यहाँ तक दावा किया था कि अल्लूरी सीताराम राजू जैसे लोगों को मार दिया जाना चाहिए, और कृष्ण पत्रिका ने कहा था कि पुलिस को लोगों को क्रांतिकारियों से खुद को बचाने के लिए अधिक हथियार दिए जाने चाहिए। ये बात और है कि इन्हीं पत्रिकाओं में राजू की हत्या के बाद उन्हें ‘एक और शिवाजी’ और ‘एक और जॉर्ज वॉशिंगटन’ कहा गया था
कतर (Qatar) से पैसों से भरे सूटकेस लेने के आरोपों के बाद प्रिंस चार्ल्स (Prince Charles) अब अपने चैरिटी के लिए चंदा में बड़ी नकद राशि नहीं ले सकेंगे। ब्रिटिश शाही कार्यालय ने मीडिया के हवाले से यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रिंस चार्ल्स ने 2011 और 2015 के बीच कतर के पूर्व प्रधानमंत्री शेख हमद बिन जसीम बिन जबर अल-थानी (Sheikh Hamad bin Jassim bin Jaber Al Thani) से 3.1 मिलियन डॉलर (24.50 करोड़ रुपए से अधिक) नकद चंदा लिया था।
Prince Charles will stop accepting large cash donations for his charities after he came under scrutiny over a report that he had accepted a $3.1 million donation, some of it in a suitcase and shopping bags, from a Qatari billionaire. https://t.co/F7m3wsoJ5p
ब्रिटेन स्थित प्रिंस चार्ल्स के कार्यालय ने गुरुवार (30 जून 2022) को कहा, “प्रिंस सलाह पर काम करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई बदलाव हुए हैं। परिस्थितियाँ बदली हैं।” एक अज्ञात शाही सूत्र ने द टाइम्स ऑफ लंदन को बताया कि चैरिटी संस्था ने मानक ऑडिटिंग प्रक्रिया अपनाई थी। प्रिंस चार्ल्स दो चैरिटी संस्था संचालित करते हैं, जिनमें से एक संस्था को चंदा देने से संबंधित यह मामला है।
चैरिटी को कंट्रोल करने वाली सरकारी एजेंसी चैरिटी कमीशन के मुताबिक, नकद में दान की अनुमति है। चैरिटी कमीशन ने एक ईमेल बयान में बताया, “हम प्रिंस ऑफ वेल्स चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा प्राप्त दान के बारे में आ रही रिपोर्ट्स से अवगत हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए इसकी समीक्षा करेंगे कि इस मामले में कमीशन की कोई भूमिका है या नहीं।”
जानकारी के मुताबिक, शेख हमद बिन जसीम बिन जबेर अल थानी ने तीन बार अलग-अलग तरीकों से प्रिंस को नकद दान दिया था। एक बार पैसे को एक छोटे सूटकेस में और अंग्रेजी ग्रोसर फ़ोर्टनम एंड मेसन के बैग में दिया गया था।
कथित तौर पर दान को प्रिंस चार्ल्स ने व्यक्तिगत रूप से स्वीकार किया था। इन फंडों को तब प्रिंस ऑफ वेल्स चैरिटेबल फंड (PWCF) में ट्रांसफर कर दिया गया था। कहा जाता है कि शेख हमद ने उस वक्त भी दान दिया था, जब वह प्रधानमंत्री के पद पर नहीं थे। यानी शेख 2007 से 2013 तक कतर के प्रधानमंत्री थे और उन्होंने 2011 और 2015 के बीच दान किया गया था।
चार्ल्स के आधिकारिक निवास और कार्यालय क्लेरेंस हाउस ने द गार्जियन को बताया, “शेख से प्राप्त नकद दान तुरंत प्रिंस की एक चैरिटेबल संस्था को ट्रांसफर कर दिया गया था। हमें भरोसा दिलाया गया कि दान के लिए सभी प्रक्रिया का पालन किया है।”
शेख का नाम 2016 में पनामा पेपर्स और 2021 में पेंडोरा पेपर्स में सामने आ चुका है। इन खुलासों के जरिए दुनिया के कई रईस और ताकतवर लोगों की छिपी हुई दौलत सामने आई थी। बताया गया था कि टैक्स हैवेन मेंल दुनिया के कई रईस और ताकतवर लोगों ने अपनी दौलत छिपाई हुई है।
बता दें कि उनकी दूसरी संस्था प्रिंस फाउंडेशन की जाँच चल रही है। द टाइम्स ऑफ लंदन ने पिछले साल बताया था कि एक बड़े दान के बदले में एक अमीर सऊदी शेख महफूज बिन महफूज के लिए नाइटहुड और ब्रिटिश नागरिकता दिलाने में मदद की गई थी। हालाँकि, महफूज ने इस बात से इनकार किया था कि वह किसी प्रकार से गलत कार्यों में शामिल थे।