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नुपूर शर्मा कन्हैया लाल की हत्या की जिम्मेदार, उनकी वजह से देश जल रहा: SC की टिप्पणी पर पूछ रहे नेटिजन्स- ये शरिया कोर्ट है क्या

उदयपुर में कन्हैया लाल का गला मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काट डाला। एक वीडियो बनाकर दुनिया को बताया भी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता को जिम्मेदार बताया है। कहा कि यह उनकी ही लगाई आग है और इसके लिए उन्हें देश से माफी माँगनी चाहिए।

दरअसल, शीर्ष अदालत 28 जून 2022 को हुई बर्बर हत्या के लिए नूपुर शर्मा के उस बयान का हवाला दे रही थी जो उन्होंने शिवलिंग के अपमान के जबाव में एक टीवी डिबेट में दिया था। इसे कथित तौर पर ईशनिंदा माना गया। उन्हें दुनिया भर से धमकी मिली। बीजेपी ने निलंबित कर दिया। यहॉं तक नूपुर खुद भी इसके लिए माफी माँग चुकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने नुपूर शर्मा की याचिका पर की सुनवाई

बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस परदीवाला की बेंच के समक्ष नुपूर शर्मा ने अपनी याचिका दी थी कि पैगंबर मोहम्मद पर पूछे गए उनके सवाल के बाद उन्हें मौत की धमकियाँ दी जा रही हैं। ऐसे में जो भी अलग-अलग राज्यों में उनके विरुद्ध एफआईआर हुई है उसे दिल्ली शिफ्ट किया जाए।

कोर्ट ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए नुपूर शर्मा को ही कहा कि उन्हें देश से माफी माँगनी चाहिए। कोर्ट ने कट्टरपंथी तत्वों और उनके द्वारा अंजाम दी जा रही हिंसा को एक किनारे रखते हुए केस पर अपनी टिप्पणी की और देश के हालातों के लिए नुपूर शर्मा को जिम्मेदार बताया।

कोर्ट ने नुपूर शर्मा को माना उदयपुर घटना का जिम्मेदार

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि नुपूर की जुबान फिसलने से पूरा देश जल रहा है। कोर्ट में जस्टिस परदीवाला ने नुपूर के लिए ये भी कहा कि उनके गुस्से का ही नतीजा था कि उदयपुर में अनहोनी हुई और दर्जी की हत्या की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आखिर टीवी चैनल और नुपूर शर्मा का एजेंडा फैलाने के अलावा काम क्या था कि वो इस मसले पर बात करें? कोर्ट को नुपूर शर्मा के वकील ने बताया कि नुपूर ने इस मुद्दे पर सामने से माफी माँग ली है और अपने कहे शब्द भी वापस लिए। कोर्ट ने यह सुन कहा कि उन्हें टीवी पर देश से माफी माँगनी चाहिए। पहले उन्होंने बहुत देर से माफी माँगी और साथ में कंडीशन भी जोड़ा कि – ‘अगर भावना आहत हुई तो वो माफी माँगती हैं।’

जब कोर्ट को ये बताने का प्रयास हुआ कि नुपूर शर्मा की जान को खतरा है तो जस्टिस सूर्य कांत बोले कि नुपूर को खतरा है या वो देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई हैं? जिस तरह उन्होंने देश में भावनाओं को भड़काया, उसके लिए और देश में जो कुछ हो रहा है उसके लिए उन्हें एकलौता जिम्मेदार माना जाना चाहिए।

नुपूर शर्मा को फटकार लगाने के लिए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि आखिर जब नुपूर के विरुद्ध शिकायतें हुई तो उन लोगों ने क्या किया। नुपूर की शिकायत पर तो शख्स अरेस्ट हो गया लेकिन उनके ऊपर जो शिकायतें हुई उसके बावजूद उन्हें हाथ नहीं लगाया गया।

कोर्ट ने नुपूर शर्मा की याचिका को राहत देने से मना करते हुए कहा कि वो चाहें तो हाईकोर्ट जा सकती हैं। लेकिन उनकी ओर से इस केस में राहत नहीं दी जाएगी। वहीं नुपूर के वकील ने बताया कि नुपूर किसी भी जाँच से भाग नहीं रही हैं बल्कि वह जाँच में शामिल हो रही हैं। इस पर भी कोर्ट ने कहा कि तब तो उनके लिए रेड कार्पेट होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर खफा हुए सोशल मीडिया यूजर्स

नुपूर शर्मा को मिल रही धमकियाँ और देश में घटित हो रही कट्टरपंथी घटनाओं के बावजूद सुप्रीम कोर्ट की ऐसी टिप्पणियाँ सुन कई सोशल मीडिया यूजर्स खफा हैं। पूछा जा रहा है कि ये शरीया कोर्ट है क्या? नुपूर अपनी याचिकाओं को दिल्ली शिफ्ट कराने की माँग लेकर आई थी। अगर ऐसा नहीं करना तो साफ मना किया जाता। ये सब कहने की क्या आवश्यकता। बिन सुनवाई के उन्हें दोषी बनाया जा रहा है।

लोग मान रहे हैं कि इस तरह सुप्रीम कोर्ट का नुपूर पर गुस्सा जाहिर करना, कट्टरपंथियों को बल देगा कि वो जो कर रहे हैं वो सही हैं और सारी गलती नुपूर शर्मा की ही है। इसके अलावा ये भी पूछा जा रहा है कि अगर कन्हैया लाल की मौत की जिम्मेदार नुपूर शर्मा हैं तो कमलेश तिवारी और किशन भरवाड़ की हत्या का मुजरिम कौन है।

जजों पर उठ रहे सवाल

उल्लेखनीय है कि नुपूर शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ सुनने के बाद लोग साझा कर रहे हैं कि जिन जजों ने नुपूर की याचिका पर सुनवाई के बदले उन्हें दोषी ठहराया उनमें से एक जस्टिस पारदीवाल हैं जो 1989 से 1990 में कॉन्ग्रेस विधायक रह चुके हैं और दूसरे जस्टिस सूर्यकांत हैं जिसके ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप रहे हैं जिसके चलते जस्टिस एके गोयन ने उनकी नियुक्ति पर विरोध बी किया था।

11 साल के लड़के के साथ मदरसा शिक्षक अलीयार करता था ओरल सेक्स, यौन शोषण के मामले में केरल की पॉक्सो अदालत ने सुनाई 67 साल की सजा

केरल के पेरुंबवूर के एक मदरसा शिक्षक को 11 साल के छात्र के साथ यौन शोषण का दोषी करार दिया गया है। पेरुंबवूर की पॉक्सो अदालत ने मदरसा शिक्षक अलीयार को कुल 67 वर्ष जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 65 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। हालाँकि, दोषी अलीयार को 20 साल ही जेल में बिताने होंगे क्योंकि सजाएँ एक साथ चलेंगी।

यह घटना जनवरी 2020 में थडियिट्टापरम्बु पुलिस थाना क्षेत्र के एक मदरसे में हुई थी। मामला यह है कि अलीयार ने मदरसे के कमरे में लड़के के साथ कई बार यौन शोषण किया और अपना फोन देकर अश्लील वीडियो देखने के लिए मजबूर करता था। इस बात का खुलासा लड़के ने अपने दोस्तों से किया। दोस्तों ने इसके बारे में क्लास टीचर को बताया और उन्होंने इसके बारे में प्रिंसिपल से बात की। इसके बाद चाइल्ड वेलफेयर कमिटी और पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई गई।

बच्चे द्वारा दिए गए बयान के अनुसार, वह सुबह में मदरसे में तालीम लेने के लिए जाता था, लेकिन काफी समय से अलीयार उसे शाम में बुलाकर उसका यौन शोषण कर रहा था। उसे कमरे में ले जाता था और ओरल सेक्स करने के लिए मजबूर करता था। साथ ही बच्चे ने यह भी बताया कि उसे मुँह बंद रखने के लिए मिठाई देता था और किसी को इसके बारे में बताने पर टेस्ट में फेल करने की धमकी दी जाती थी। 

SSP ने बताया कि बच्चे को अश्लील वीडियो देखने के लिए अलीयार ने मोबाइल भी दिया था। एक बच्चे के पिता ने इसे देख लिया और गुस्से में तोड़ दिया। तब तक उन्हें इसके बारे में पता नहीं था। जब चाइल्ड वेलफेयर कमिटी में शिकायत दर्ज करवाई गई और इसके आधार पर 19 जनवरी 2020 को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया, तब पीड़ित के परिजनों को इसके बारे में पता चला।

इसके बाद मामले में अदालत ने अलीयार को दोषी पाया और विभिन्न धाराओं को जोड़कर अलीयार को 67 साल की सजा सुनाई गई। प्रॉसिक्यूटर के मुताबिक बच्चे ने अपने बयान में बताया कि मदरसा शिक्षक अलीयर ने अन्य बच्चों के साथ भी इस तरह की हरकतें की हैं, हालाँकि, किसी ने शिकायत दर्ज नहीं करवाई। जानकारी के मुताबिक अलीयार को जल्द ही वियूर जेल शिफ्ट कर दिया जाएगा।

हत्यारों के घर राजस्थान पुलिस का पहरा, कन्हैया लाल के परिवार को कॉन्स्टेबल तक नसीब नहीं: रिपोर्ट में दावा, बोलीं यशोदा देवी- पति की हत्या के बाद भी ध्यान नहीं

क्या कन्हैया लाल की तरह राजस्थान पुलिस उनके परिवार की सुरक्षा को भी गंभीरता से नहीं ले रही है? यह सवाल एक मीडिया रिपोर्ट से खड़ा हुआ है? इसके अनुसार कन्हैया लाल की पत्नी का कहना है कि उनका पूरा परिवार खतरे में है। लेकिन घर के बाहर एक कॉन्स्टेबल तक की तैनाती नहीं है। कन्हैया लाल की मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने 28 जून 2022 को गला रेत हत्या कर दी थी।

राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार कन्हैया लाल की पत्नी जसोदा देवी ने मुख्य सचिव उषा देवी से परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है। मुख्य सचिव 30 जून 2022 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ उदयपुर स्थित उनके घर आईं थी। रिपोर्ट के अनुसार उषा देवी को देखते ही कन्हैया लाल की पत्नी भावुक हो गईं और कहा, “मेरा पूरा परिवार खतरे में है। पति की हत्या के बाद भी अब तक किसी का ध्यान हमारी सुरक्षा पर नहीं है। हमारे घर के बाहर एक कॉन्स्टेबल तक नहीं हैं। यदि कोई किसी भी वेश में घर आ जाता है तो हमारा क्या होगा?” इसके बाद मुख्य सचिव ने सुरक्षा का भरोसा दिलाया।

वहीं दैनिक भास्कर की रिपोर्ट की माने तो आरोपित रियाज के आसींद स्थित घर के बाहर राजस्थान पुलिस ने कड़ा पहरा लगा रखा है। रियाज के परिवार के अन्य सदस्यों के घर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती है। आरोपित के घर तक जाने के सभी रास्तों को सील कर दिया गया है। बिना पुलिस की अनुमति के कोई भी रियाज के घर तक नहीं पहुँच सकता है। रियाज के कुछ रिश्तेदार अपने घरों में ताला लगा कर कहीं और चले गए हैं।

हटाए गए उदयपुर के SP और IG

ताजा जानकारी के मुताबिक अशोक गहलोत के उदयपुर दौरे के बाद उदयपुर के SP मनोज कुमार और IG हिंगलाज दान को राजस्थान सरकार ने हटा दिया है। अब विकास शर्मा को उदयपुर का नया SP और प्रफुल्ल कुमार को वहाँ का IG बनाया गया है। करौली जिले के SP शैलेन्द्र सिंह इंदौलिया को भी हटाया गया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक उदयपुर की जिला अदालत ने दोनों आरोपितों को 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। रियाज और गौस को 30 जून को कड़ी सुरक्षा में अदालत में पेश किया गया था। इस दौरान वकीलों ने दोनों को फाँसी देने के लिए नारेबाजी की। राजस्थान ATS ने दोनों के पास से कत्ल में प्रयोग खंजर बरामद कर लिया है। सुरक्षा के लिहाज से दोनों आरोपितों को अजमेर जेल में शिफ्ट किया गया है। यहाँ उन्हें हाई सिक्योरिटी बैरकों में रखा गया है।

AltNews को चलाने वाली प्रावदा मीडिया को ROC ने भेजा नोटिस, प्रतीक सिन्हा और जुबैर से भी माँगा जवाब: कंपनी एक्ट के उल्लंघन का आरोप

अहमदाबाद में कंपनियों के रजिस्ट्रार कार्यालय (ROC) ने कंपनी अधिनियम, 2013 के कई प्रावधानों के कथित उल्लंघन के लिए तथाकथित फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज के मालिक प्रावदा मीडिया फाउंडेशन को नोटिस जारी किया है। रजिस्ट्रार को 22 जून 2022 को एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा कथित उल्लंघन के संबंध में शिकायत मिली थी, जिसके बाद यह नोटिस भेजा गया है। शिकायतकर्ता शशांक सौरव ने 30 जून को ट्वीट करके इसकी जानकारी दी।

आरओसी ने नोटिस की प्रतियाँ प्रावदा मीडिया फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक निर्झारी मुकुल सिन्हा, निदेशक प्रतीक मुकुल सिन्हा (Pratik Mukul Sinha) और मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) को भी भेजी हैं। प्रतीक और जुबैर ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक भी हैं, जबकि निर्झारी सिन्हा प्रतीक सिन्हा की माँ हैं। शिकायतकर्ता शशांक सौरव को भी एक प्रति भेजी गई है। कंपनी को 15 दिनों के भीतर सबूत के तौर पर दस्तावेजों के साथ शिकायतों का जवाब देने को कहा गया है।

नोटिस में कहा गया है कि अगर प्रावदा मीडिया नोटिस का जवाब देने में विफल रहता है, तो कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। शिकायतकर्ता शशांक सौरव सीए होने के साथ-साथ एक लेखक भी हैं, जो टीवी डिबेट्स में भाग लेते हैं। उन्होंने ट्वीट किया, “प्रावदा मीडिया फाउंडेशन के अंतर्गत चलने वाले Alt News के प्रतीक सिन्हा, मोहम्मद जुबैर एवं अन्य निदेशकों को ROC अहमदाबाद ने कम्पनीज एक्ट, 2013 की कई धाराओं के उल्लंघन के आरोप में नोटिस जारी किया है। आशा है कि निदेशकों के तरफ से उचित फैक्ट्स प्रस्तुत किए जाएँगे।”

हालाँकि, शिकायतकर्ता शशांक ने प्रावदा मीडिया के खिलाफ लगाए गए आरोपों का विवरण साझा करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि अभी इस मामले की जाँच चल रही है। अपने दूसरे ट्वीट में शिकायत की कॉपी के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए, शशांक सौरव ने लिखा, “कंपनी अधिनियम, 2013 के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन से संबंधित मामला है। इस मामले की जाँच अभी चल रही है, इसलिए कॉपी को साझा नहीं कर सकते हैं।”

नोटिस में कहा गया है, “कार्यालय को श्री शशांक सौरव द्वारा एक शिकायत (प्रतिलिपि संलग्न) प्राप्त हुई है। अत: आपको निर्देश दिया जाता है कि शिकायत मिलने की तिथि से 15 दिनों के भीतर आरोपों के प्रत्येक बिंदु पर उचित फैक्ट्स के साथ अपना स्पष्टीकरण इस कार्यालय में भेजें। ऐसा नहीं करने पर धारा 447/448/449 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कंपनी अधिनियम, 2013 के उल्लंघन को लेकर बिना किसी सूचना के कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ शुरू की जा सकती है।”

ऑल्ट न्यूज़ चलाने वाली कंपनी के निदेशकों को आरओसी अहमदाबाद का नोटिस साभार: शशांक सौरव का ट्विटर

ऑल्ट न्यूज को प्रावदा मीडिया फाउंडेशन चलाता है। कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर निर्झारी मुकुल सिन्हा हैं। प्रतीक मुकुल सिन्हा और मोहम्मद जुबैर कंपनी के निदेशक हैं। इन सभी को नोटिस जारी किया गया है।

साभार: शशांक सौरव का ट्विटर

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को 28 जून को गिरफ्तार किया था। उस पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 (ऐसे कृत्य जिससे दंगे और उपद्रव होने की आशंका हो) और धारा-295 (किसी समाज द्वारा पवित्र मानी जाने वाली वस्तु का अपमान करना) लगाई गई है। मोहम्मद ज़ुबैर फेक न्यूज़ फैलाने के लिए कुख्यात है और उनका मीडिया पोर्टल भी हिन्दू विरोधी खबरों के लिए ही जाना जाता है। पुलिस ने बताया कि उसे पर्याप्त सबूत के आधार पर ही गिरफ्तार किया गया है। मोहम्मद जुबैर पर मामला ट्विटर पर हनुमान भक्त @balajikijaiin हैंडल के एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया है। इस हैंडल ने मोहम्मद जुबैर के एक ट्वीट “2014 से पहले: हनीमून होटल और 2014 के बाद: हनुमान होटल” पोस्ट के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया था।

कन्हैया लाल की बहन ने अशोक गहलोत को बताया ‘मुस्लिमों का गुलाम’, कहा- जैसे मेरे भाई को काटा, वैसे उसको भी काटो: देखिए Video

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 30 जून को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। इस बीच सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें गहलोत को ‘मुस्लिमों का गुलाम’ बताया जा रहा है। यह आरोप लगाने वाली कन्हैया लाल की बहन हैं।

रिपब्लिक टीवी से बातचीत में कन्हैया लाल की बहन ने ये भी कहा कि जिस तरह उनके भाई को मारा गया है, उसी तरह उनके हत्यारों को भी मारा जाना चाहिए। यह वीडियो मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद द्वारा कन्हैया लाल की बर्बर हत्या किए जाने के अगले दिन का है।

रिपब्लिक वर्ल्ड के यूट्यूब चैनल पर 5 मिनट 24 सेकेंड का यह वीडियो 29 जून को पब्लिश हुआ है। इस वीडियो के 25वें सेकेंड पर आप कन्हैया लाल की बहन को कहते सुन सकते हैं, “जैसे मेरे भाई को काटा है, वैसे उसको भी काटो। मेरे परिवार में 2 भतीजे और भाभी हैं उन्हें इंसाफ दिलाओ।” इसी वीडियो के 50वें सेकेण्ड पर मृतक की बहन कहती है, “हिन्दू की मौतें आए दिन हो रही है। फिर भी हिन्दू को कुछ नहीं सुन रहा। मुसलमान की इतना सुन रहा। मुसलमान को जरा सा भी कुछ होता है तो उनके लिए सरकार खड़ी रहती है।”

वीडियो में कन्हैया की बहन आगे कहती है, “जिसने काटा उसे भी काटो तब लगेगा कि हिन्दू के लिए सरकार है, वरना हिन्दू के लिए सरकार नहीं है।” इसके बाद पत्रकार ने सवाल किया कि पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री गहलोत से क्या कहना चाहेगा? इसके जवाब में कन्हैयालाल की बहन कहती है, “गहलोत तो मुसलमान का गुलाम है एक नंबर का।” एक अन्य महिला ने कहा कि हत्या के बदले हमें हत्या ही चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में राजस्थान पुलिस कन्हैया लाल को मिल रही धमकियों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने के कारण आलोचना के घेरे में है। कन्हैया लाल ने अपनी शिकायत में हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए सुरक्षा माँगी थी। उनकी निर्मम हत्या के बाद से मुख्यमंत्री गहलोत इसके पीछे ‘आतंकी संगठन’ की भूमिका की ओर इशारा कर पुलिस की पीठ थपथपाते रहे हैं। हालाँकि अब तक की जाँच के निष्कर्षों के आधार पर NIA ने इसमें आतंकी संगठन की संलिप्तता के एंगल को खारिज कर दिया है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक NIA को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने बतया है कि वे कन्हैयालाल की हत्या को सोशल मीडिया पर LIVE करना चाहते थे। लेकिन किसी कारणवश उन्हें इस हत्या का वीडियो बनाकर वायरल करना पड़ा। इनके साथ कई दूसरे लोग भी इस नेटवर्क में शामिल थे। एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की भी जानकारी सामने आ रही है, जिसमें शामिल अन्य लोगों की जाँच की जा रही है।

डिप्टी CM में ‘बेइज्जती’ खोज रहे थे राजदीप सरदेसाई, शहजाद पूनावाला ने ‘एडिटर-इन-चीफ’ वाले दिन दिलाए याद: मुस्कुराते हुई छिपाई झेंप

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से अक्सर अपनी फजीहत करवाने वाले राजदीप सरदेसाई को एक बार फिर ऑन टीवी शर्मिंदा होना पड़ा। इस बार उन्हें पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने देवेंद्र फडणवीस का उदाहरण देकर समझाया कि कैसे भारतीय जनता पार्टी पद की भूखी नहीं है, उन्हें माँ भारती के लिए काम करने का मौका चाहिए बस।

इंडिया टुडे पर हुए इस डिबेट में राजदीप पूछ रहे थे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा मुख्यमंत्री बनने का मौका छोड़ा और पार्टी को उनसे अनुरोध करना पड़ा की वो उप-मुख्यमंत्री बन जाएँ। इस सवाल के जवाब में शहजाद ने बताया कि आज देवेंद्र फडणवीस द्वारा ये साबित कर दिया गया है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए सत्ता नहीं सिद्धांत महत्वपूर्ण है। उन्होंने हर कार्यकर्ता को उदाहरण दिया है कि कैसे भाजपा कार्यकर्ता के लिए प्रदेश और पार्टी पहले आते हैं और बाद में कहीं जाकर वह खुद।

शहजाद ने राजदीप को ये भी समझाया कि महाराष्ट्र में एक स्थिर सरकार को सोचते हुए यह निर्णय लिया गया। हालाँकि राजदीप ने बीच में टोंकते हुए दिखाया कि उन्हें ये सब जानने में दिलचस्पी नहीं है। वो तो बस ये जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा भी क्या हुआ कि भाजपा को सामने आकर ये कहना पड़ा की फडणवीस उप-मुख्यमंत्री पद को संभालें वो भी उस सरकार में जिसका नेतृत्व शिवसेना के बागी नेता करने जा रहे हैं।

पूनावाला ने राजदीप को काफी देर राजनीति के मुद्दे पर बात करके समझाया लेकिन राजदीप मानकर बैठे थे कि उन्हें ये सब नहीं जानना। अंत में शहजाद ने उन्हें उनका ही उदाहरण दिया और कहा- “आप इस संस्थान के कंसल्टिंग एडिटर हैं। आप एडिटर इन चीफ भी नहीं हैं। आपके पद में आपके सम्मान में कोई कमी है?” शहजाद पूनावाला की यह बात सुनकर राजदीप मुस्कुराते दिखाई दिए। शहजाद ने फिर समझाया- “मुझे लगता है कि एडिटर इन चीफ न होते हुए भी सिर्फ कंसल्टिंग एडिटर के लिहाज से आप इस चैनल के लिए और नेटवर्क के लिए बहुत शानदार काम कर रहे हैं। इसी तरह हमारे मन में पद की नहीं पर्फॉर्मेंस की लालसा होती है।”

राजदीप ये सुनने के बाद आँख बंद करके ये समझाते हुए दिखे कि इस तरह राजनीति और पत्रकारिता को मिलाना ठीक नहीं। शहजाद ने इस पर पूछा कि ऐसा क्यों नहीं हो सकता जबकि ये दोनों प्रोफेशन पब्लिक सर्विस से जुड़े है। इसके बावजूद राजदीप कुछ सुनने को तैयार नहीं दिखे। तब, शहजाद ने उन्हें बिहार का उदाहरण दिया और बताया कि भाजपा वहाँ भी बड़ी पार्टी थी लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को बनाया। ये बताता है कि उनकी पार्टी हमेशा बड़ा सोचती है और पद से ज्यादा सिद्धांत पर आगे बढ़ती है। उनके पार्टी के हर नेता की यही सोच है। फिर चाहे वो दीन दयाल उपाध्याय से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी हों या पिर नरेंद्र मोदी से लेकर देवेंद्र फडणवीस।

एकनाथ शिंदे सीएम, देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कल देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना के बागी विधायकों को समर्थन देकर सरकार बनाने का ऐलान किया, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि वो सरकार से बाहर रहेंगे। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा मीडिया में आए और उन्होंने अनुरोध किया कि वह इस नई सरकार में डिप्टी सीएम के पद को संभालें। पार्टी के अनुरोध के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने उप मुख्यमंत्री बनने की बात मान ली और कल शाम डिप्टी सीएम पद की शपथ भी ग्रहण की।

‘एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बनेंगे, नहीं थी किसी को कल्पना’: राजनीति के धुरंधर एनसीपी चीफ शरद पवार भी खा गए गच्चा, कहा- उम्मीद थी वो डिप्टी सीएम बनेंगे

शिवसेना (Shiv Sena) के बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) बीजेपी के समर्थन से महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बने हैं। बीजेपी के शिंदे को सीएम बनाने के फैसले से राज्य की राजनीति के धुरंधर शरद पवार (Sharad Pawar) भी अचंभित हैं। उन्होंने कहा कि किसी ने इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि एकनाथ शिंदे को सीएम बना दिया जाएगा।

एनसीपी चीफ ने संभावना जताई कि हो सकता है कि बागी विधायकों ने ऐसी इच्छा व्यक्त की हो, जिसे देखते हुए शिंदे को सीएम पद दे दिया गया। ढाई साल तक राज्य में शासन करने वाले महा विकास अघाड़ी गठबंधन के शिल्पकार माने जाने वाले पवार ने कहा कि शिंदे सहित विद्रोही खेमे से डिप्टी सीएम पद की उम्मीद की जा रही थी। उन्होनें कहा, “जो लोग शिंदे के साथ असम गए थे, वे उम्मीद कर रहे थे कि उनका नेता डिप्टी सीएम बनेगा। मुझे लगता है कि शिंदे को भी शीर्ष पद की पेशकश के बारे में पता नहीं था।”

इसके साथ ही पवार ने शिंदे को मुख्यमंत्री बनने की बधाई देते हुए कहा, “एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुने जाने पर बधाई! मुझे पूरी उम्मीद है कि उनके द्वारा महाराष्ट्र के हितों की रक्षा की जाएगी।”

पवार ने बीजेपी को लेकर कहा, “बीजेपी में दिल्ली या नागपुर से एक बार आदेश आता है और बिना किसी समझौते के इसका पालन किया जाता है।”

शिवसेना के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे पर बोले पवार

पवार ने शिवसेना के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को लेकर उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि शिवसेना खत्म हो गई है। पहले भी छगन भुजबल ने बगावत की थी, लेकिन बाद में वे और उनके समर्थक चुनाव हार गए। बाद में नारायण राणे को भी हार का सामना करना पड़ा। शिवसेना को कई विद्रोहों का सामना करना पड़ा है।”

आँखों के सामने बच्चों को खोने के बाद राजनीति से मोहभंग, RSS से लगाव: ऑटो चलाने से महाराष्ट्र के CM बनने तक शिंदे का सफर

महाराष्ट्र की राजनीति में बीते कई दिनों से छाए रहे शिवसेना (Shiv Sena) के बागी नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) को लेकर भाजपा (BJP) ने चौंकाने वाला फैसला लिया। भाजपा ने शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री (Maharashtra CM) बना दिया है।

वहीं, राज्य के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने पहले तो सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (BJP President JP Nadda) की सलाह पर उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) पद को स्वीकार कर लिया।

शिवसेना (Shiv Sena) की जड़ों को काट कर रख देने वाले एकनाथ शिंदे का सियासी सफर भी जितना रोमांचक रहा है, उतनी ही उनकी व्यक्तिगत जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। एक समय ऐसा भी आया, जब उन्होंने राजनीति छोड़ दी, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था और वे आज महाराष्ट्र की राजनीति के चमके सितारे बन गए हैं।

कौन हैं एकनाथ शिंदे

मूलत: मराठी परिवार से ताल्लुक रखने वाले एकनाथ शिंदे सातारा जिले के जवाली तालुका के रहने वाले हैं। उनका जन्म 9 फरवरी 1964 को हुआ था। सातारा के होने के बावजूद उनका गहरा लगाव ठाणे से रहा। 11वीं तक पढ़ाई करने के बाद उन्होंने ऑटो रिक्शा चलाना शुरु कर दिया था।

उनके निजी सचिव (PA) रह चुके इम्तियाज शेख उर्फ ‘बच्चा’ का कहना है कि ऑटो चलाते वक्त ही वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आए। शाखा में शामिल होने के बाद वो शाखा प्रमुख भी बने। यहीं से उनका हिन्दुत्व से गहरा जुड़ाव शुरू हुआ।

शिवसेना के कद्दावर नेता आनंद दिघे के संपर्क में आने के बाद शिंदे 80 के दशक में शिवसेना में शामिल हो गए। उन्होंने 18 साल की उम्र में राजनीति की शुरुआत की। आगे चलकर वह ठाणे महानगरपालिका से पहली बार 1997 में वो पार्षद चुने गए। इसके बाद 2001 में निगम में विपक्ष के नेता भी बने।

राजनीति में सफलता का कदम दर कदम चूमते हुए उन्होंने साल 2004 में पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा और जीत गए। वो ठाणे के कोपरी-पाचपाखाडी विधानसभा से पिछले 18 वर्षों से लगातार विधायक हैं और उन्होंने लगातार चौथी बार यहाँ से जीत दर्ज की है। उनके बेटे श्रीकांत शिंदे कल्याण से शिवसेना सांसद हैं।

राजनीति को छोड़ा

एकनाथ शिंदे 2 जून 2000 को अपने 11 साल के बेटे दीपेश और 7 साल की बेटी शुभदा के साथ सतारा गए थे। वहाँ पर बोटिंग करते हुए नाव पलटी और उनकी आँखों के सामने उनके बेटा और बेटी बह गए। उस वक्त शिंदे का तीसरा बच्चा श्रीकांत सिर्फ 14 साल का था।

इस घटना से आहत होने के बाद राजनीति से उनका मोहभंग हो गया। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, “ये मेरी जिंदगी का सबसे काला दिन था। मैं पूरी तरह टूट चुका था। मैंने सब कुछ छोड़ने का फैसला कर लिया। यहाँ तक कि राजनीति भी।”

हालाँकि, बाद में अपने राजनीतिक गुरु आनंद दिघे के कहने पर वो वापस राजनीति में लौट आए। 26 अगस्त 2001 को एक हादसे में दिघे की मौत हो गई। हालाँकि, इस हादसे को कई लोग आज भी हत्या मानते हैं। ऐसे में ठाणे से एक प्रमुख चेहरा के रूप में उनका नाम आगे किया गया।

आनंद दिघे के निधन के बाद 2001 में एकनाथ शिंदे को ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में सदन का नेता चुना गया। शिवसेना के कई कार्यक्रमों का आयोजन उनके ही जिम्मे होता था। राज ठाकरे और नारायण राणे के बगावत के बाद एकनाथ शिंदे ने ही शिवसेना से जनता को फिर से जोड़ा।

साल 2019 में एकनाथ शिंदे कई विधायकों को पार्टी में वापस लेकर आए। हालाँकि, अब 2022 में शिवसेना से बगावत कर अब वो बीजेपी के साथ आ गए और उद्धव ठाकरे को सत्ता से हटाकर वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए हैं।

कन्हैया लाल की गर्दन काटकर हत्या का आसिफ खान ने किया समर्थन, फेसबुक पर लिखा- ‘बहुत अच्छा किया मेरे भाई’, नोएडा पुलिस ने भेजा जेल

उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के बाद राजस्थान पुलिस की लापरवाही की भारी आलोचना हो रही है, वहीं उत्तर प्रदेश पुलिस बेहद सतर्क और मुस्तैद नजर आ रही है। उदयपुर घटना का सोशल मीडिया पर समर्थन करने नोएडा पुलिस ने गुरुवार (30 जून 2022) को आसिफ खान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है।

दरअसल, उदयपुर घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। इस वीडियो प छपरौली गाँव के निवासी आसिफ खान ने लाइक और कमेंट किया और लिखा कि ‘बहुत अच्छा किया मेरे भाई।’ इस कमेंट को जब गाँव के लोगों ने देखा तो इसी शिकायत एक्सप्रेस-वे थाने में की।

नोएडा पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आसिफ खान को तुरंत गिरफ्तार कर लिया और उसके मोबाइल को भी जब्त कर लिया है। उस पर धारा 505(2) (विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता, घॄणा या वैमनस्य की भावना पैदा करने के आशय से असत्य कथन, जनश्रुति आदि परिचालित करना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस घटना की जानकारी पुलिस ने ट्विटर पर भी दी है।

आसिफ खान मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है और उसके अब्बू का नाम यूसुफ खान है। वे दोनों पिछले 25 सालों से छपरौली गाँव में रह रहे हैं। थाना प्रभारी सुधीर कुमार के अनुसार, आरोपित पर मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

नोएडा जोन के Additional CP रणविजय सिंह ने बताया कि थाना एक्सप्रेस-वे में छपरौली गाँव के ग्रामीणों ने इस संबंध में लिखित सूचना दी थी। सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर उदयपुर की घटना का वीडियो वायरल हो रहा था, इसी पर आरोपित ने आपत्तिजनक कमेंट की थी।

बता देें कि उदयपुर घटना को लेकर किसी तरह की कानून-व्यवस्था ना बिगड़े, इसको लेकर यूपी पुलिस बेहद सतर्क है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) डीएस चौहान ने कहा था कि प्रदेश में पुलिस चौकसी बढ़ाई गई है। ऐसे में कोई भी अगर सोशल मीडिया पर फर्जी खबर, अफवाह या भड़काऊ पोस्ट पर लाइक, कमेंट या शेयर करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड में चलती कार में महिला और उसकी 5 साल की बच्ची से गैंगरेप, BKU (टिकैत गुट) के सुबोध काकरान और विक्की तोमर सहित 5 आरोपित गिरफ्तार

उत्तराखंड (Uttarakhand) के रुड़की में चलती कार में पाँच साल की बच्ची और उसकी माँ से गैंगरेप (Gangrape) करने वाले पाँच दरिदों को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। दरिंदों ने माँ-बेटी का रेप करने के बाद उन्हें नहर के किनारे फेंक दिया था। आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर हरिद्वार के एसएसपी योगेंद्र रावत ने कहा कि इन पाँच दिनों में आरोपितों की तलाश में 250 सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और 200 से भी अधिक लोगों से पूछताछ की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए पाँचों आरोपित यूपी के मुजफ्फरनगर, देवबंद और उत्तराखंड के रुड़की के रहने वाले हैं। इसके अलावा गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से दो भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के नेता निकले। इनमें से एक का नाम सुबोध काकरान है, जो कि सहारनपुर मंडल का अध्यक्ष है औऱ दूसरा विक्की तोमर है। ये भाकियू की मुख्य बॉडी का मंडल उपाध्यक्ष है। रिपोर्ट के मुताबिक, गैंगरेप के मामले में नाम सामने आने के बाद भारतीय किसान यूनियन ने दोनों को ही गुट से बाहर निकाल दिया है।

वहीं पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में स्पष्ट किया गया है कि 24 जून की रात को वारदात के बाद पीड़िता और उसकी बच्ची अस्पताल में भर्ती हैं, जहाँ उसका इलाज चल रहा है। एसएसपी के मुताबिक, वो केवल एक आरोपित को जानती थी। उसका नाम सोनू था। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने खुलासा किया कि सोनू नाम का व्यक्ति गुलाबी रंग की शर्ट पहने हुए था। पीड़िता ने कहा कि सोनू ने माँ-बेटी को अपनी मोटर साइकिल पर बैठाया और सोनाली पुल पारकर हाईवे की तरफ जाने वाले रास्ते से अचानक बाइक को नीचे उतार लिया और एक सुनसान स्थान पर ले जाकर उससे रेप किया।

इसी बीच सफेद रंग की ऑल्टो कार (नंबर UP12R-5646) में चार अन्य आरोपित वहाँ पहुँचे और माँ-बेटी को जबरन कार में डालकर करीब दो-ढाई किलोमीटर दूर एक खेत में ले गए और वहाँ खेत में महिला और कार में उसकी पाँच साल की बच्ची के साथ रेप किया। वारदात को अंजाम देने के बाद महिला और उसकी बेटी को कार से बाहर फेंक दिया गया और खुद मंगलौर की तरफ भाग गए। बाद में स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

जाँच में पता चला है कि ऑल्टो कार राजीव उर्फ विक्की तोमर (मुज्जफरनगर) के नाम पर रजिस्टर्ड है। सीसीटीवी फुटेज व अन्य सूचनाओं के आधार पर राजीव उर्फ विक्की तोमर (46) व सुबोध ( 30) को पकड़ लिया गया। पूछताछ में दोनों ने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया है। आरोपितों ने अपने साथी सोनू तेजियान (32) और जगदीश के नाम का खुलासा किया।