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UP के जंग बहादुर को पाकिस्तानी दोस्त ने मार डाला, सऊदी अरब से जन्माष्टमी पर आने के लिए परिजनों को किया था प्रॉमिस

नौकरी के सिलसिले में सऊदी अरब गए उत्तर प्रदेश के जगदीशपुर निवासी जंग बहादुर यादव की हत्या कर दी गई है। हत्या का आरोप सऊदी में ही रहने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक पर है। यह पाकिस्तानी भी यादव का सहकर्मी था। घटना के बाद परिजनों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर शव को भारत मँगाने की विनती की है।

जगदीशपुर थाना क्षेत्र के वारिसगंज टांडा गाँव के निवासी राज नारायण यादव के 43 वर्षीय पुत्र जंग बहादुर यादव साल 2017 में नौकरी के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहाँ वे रियाद निवासी मलिक अल-दकतूर अब्दुल अजीज अल-बशर के यहाँ ड्राइवर की नौकरी करने लगे।

इसी बीच 6 जुलाई 2022 की रात को जंग बहादुर के साथ रहने वाले भारतीय अरविंद ने कुवैत में नौकरी करने वाले जंग बहादुर के भाई विनोद को फोन किया। फोन पर अरविंद ने बताया कि जंग बहादुर की हत्या कर दी गई है और हत्या करने वाला उनका ही एक पाकिस्तानी सहकर्मी है। इस खबर को सुनकर घर में कोहराम मच गया।

शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को जंग बहादुर के पिता राज नारायण ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी। उन्होंने आरोपित पाकिस्तानी को सजा दिलाने और अपने बेटे के शव को जल्द से जल्द उन्हें दिलाने का आग्रह किया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय अधिकारी पीड़ित परिवार से जाकर मिले और हर तरह का सहयोग दिलाने का भरोसा दिया। अमेठी के डीएम राकेश कुमार मिश्रा के अनुसार, इस संबंध में शासन से जुड़े सभी बड़े अफसरों को जानकारी देने के बाद विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को पत्र भेजा गया है।

मृतक जंग बहादुर के परिवार में बुजुर्ग माता-पिता के अलावा पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है। पिता का कहना है कि वे साल 2020 में ही घर आना चाहते थे, लेकिन कोविड की वजह से नहीं आ सके।

हालाँकि, मौत से कुछ घंटों पहले यानी 6 जुलाई को सुबह जंग बहादुर ने अपने पिता राज नारायण व दोपहर बाद पुत्र सौरभ से बात कर जंग बहादुर ने जन्माष्टमी के दौरान घर आने की बात कही थी। जन्माष्टमी के पहले उनके परिजनों को उनकी मौत की खबर मिल गई।

अयोध्या ब्लास्ट का आरोपित रहमतउल्ला गिरफ्तार: घर में ही फट पड़ा था बारूद… UP पुलिस को मिले थे 9 बोरे विस्फोटक

उत्तर प्रदेश की अयोध्या पुलिस ने 7 जुलाई 2022 को जिले के इनायतनगर थानाक्षेत्र में एक घर में हुए ब्लास्ट के आरोपित रहमतउल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उस पर विस्फोटक अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई की है। इस केस में शिकायतकर्ता खुद पुलिस बनी है। रहमतउल्ला को 9 जुलाई 2022 (शनिवार) को गिफ्तार किया गया है।

अयोध्या पुलिस के मुताबिक रहमतउल्ला के अब्बा का नाम अब्दुला है, जो हैरिग्टनगंज के सेमरा गाँव में रहता है। उसको उसके घर से थोड़ी दूर रेवतीगंज चौराहे से गिरफ्तार किया गया है। इस केस में शिकायतकर्ता खुद चौकी इंचार्ज हैरिग्टनगंज सब इंस्पेक्टर यशवंत द्विवेदी हैं।

अयोध्या पुलिस की प्रेसनोट

FIR के मुताबिक, “मैं 7 जुलाई रात 9 बजे अपने क्षेत्र में वारंटियों की तलाश कर रहा था। इस दौरान हमें बाजार में तेज धमाके की सूचना मिली तो मैं मौके पर पहुँचा। वहाँ कच्चा मकान टूट गया था और छत पर सीमेंट की चादर उड़ गई थी। विस्फोट में रहमतउल्ला का बेटा इमरान घायल हो गया था, जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।”

अयोध्या पुलिस की FIR कॉपी–I

सब इंस्पेक्टर यशवंत ने FIR में आगे लिखा, “सीनियर अधिकारियों और पड़ोसियों की मौजूदगी में घर की तलाशी ली गई। इस दौरान लगभग डेढ़ बोरी अधूरा बना अनार गोला, 2 बोरी राख, 10 किलो काली मिट्टी, सल्फर और अन्य विस्फोटक सामान बरामद हुआ। इस सामानों से बारूद की बू आ रही थी। पड़ोसियों ने बताया कि इमरान अपने दो और साथियों के साथ गोला-बारूद का काम करता है। इसके बाद मौके पर जमा भीड़ को हटाया गया और प्रत्यक्षदर्शियों से गवाही के लिए कहा गया। हालाँकि कोई गवाही के लिए आगे नहीं आया। विस्फोटक को बरामद कर के प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।”

अयोध्या पुलिस की FIR कॉपी-II

पुलिस ने इस केस में इमरान और उसके 2 साथियों को विस्फोटक अधिनियम का दोषी माना है। इसी सिलसिले में इमरान के अब्बा को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

मीट नहीं खाएगी तो मुस्लिम नहीं बनेगी’: अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल होकर सरिता बनी सानिया, हिंदू नाम रख इमरान ने किया था निकाह

उत्तर प्रदेश के बरेली में लव जिहाद के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिले के इज्जतनगर इलाके में इमरान खान ने सुरेंद्र सिंह बनकर एक छात्रा को अपने जाल में फँसाया और फिर जबरन धर्म परिवर्तन कराकर उससे निकाह कर लिया।

इतना ही नहीं, इस हिंदू महिला को इमरान और उसके परिवार वालों ने भैंसे का मांस जबरन खिलाने की कोशिश की। जब लड़की नहीं मानी तो उसके साथ मारपीट की गई। इमरान और उसके परिजनों ने लड़की को जान से मारने की धमकी भी दी।

उत्पीड़न से तंग आकर महिला ने इज्जतनगर थाने में जबरन धर्मांतरण और निकाह तथा उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। बरेली पुलिस ने ट्वीट कर कहा, “थाना इज्जतनगर, बरेली पर प्रकरण के सम्बन्ध में प्राप्त तहरीर के आधार पर अभियोग पंजीकृत है। साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।”

इस षडयंत्र और उत्पीड़न की कहानी इज्जतनगर के एक इंस्टीट्यूट से शुरू होती है। इलाके के बिहार मान नगला की रहने वाली सरिता धर्म कांटा डेयरी के पास स्थित एक इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर का कर्स करने जाती थी।

इसी दौरान उसे इमरान मिला। इमरान ने अपना नाम सुरेंद्र सिंह बताया। इस तरह दोनों की जान-पहचान और फिर दोस्ती हो गई। इमरान ने सरिता को धीरे-धीरे अपने जाल में फँसा लिया और उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए।

इसके बाद इमरान ने अपना असली चेहरा दिखाया और धर्मांतरण कर निकाह करने का दबाव बनाने लगा। उसने धमकी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करेगी कि उसकी कई अश्लील वीडियो और तस्वीरें उसके पास हैं और उसे वह वायरल कर देगा।

धमकी और ब्लैकमेल से तंग आकर सरिता ने 26 मई 2020 को उससे निकाह करने के लिए बाध्य होना पड़ा। इमरान ने धर्मांतरण कर सरिता को हिंदू से मुस्लिम बना दिया और उसका नाम सानिया खान रख दिया।

सरिता ने बताया कि इमरान अपनी अम्मी रिफत बीबी, भाई मिसिरयार खान, खुर्शीद खान, इरशाद खान और बहनोई आफताब तथा मोइन खान के साथ रहने लगा। इसके बाद इन लोगों ने उसे जबरदस्ती भैंस का मीट खाने पर मजबूर किया।

सरिता का आरोप है कि जब वह मीट खाने से मना करती थी तो उसके साथ मारपीट की जाती थी। आरोपित उससे कहते कि बिना मीट खाए मुस्लिम नहीं बन सकती। मीट नहीं खाना है तो इमरान को छोड़ दो।

बकरीद पर जानवरों की खुलेआम कुर्बानी गैरकानूनी, त्रिपुरा सरकार का आदेश: उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई, DGP को निर्देश

त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बकरीद (ईद उल अज़हा) के मौके पर किसी भी पशु की कुर्बानी नहीं (ban on animal slaughter in Bakrid in Tripura) दी जा सकेगी। त्रिपुरा के पशु संसाधन विकास विभाग द्वारा जारी किए गए एक आदेश के कारण यह संभव हुआ है। इस आदेश के अनुसार खुले में कुर्बानी को पशु क्रूरता के तहत अपराध माना गया है।

पशु संसाधन विकास विभाग ने त्रिपुरा पुलिस के DGP से आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। यह आदेश 9 जुलाई 2022 (शनिवार) को जारी किया गया है।

पशु संसाधन विकास विभाग के सचिव डॉ. टीके देबनाथ ने कहा, “पशुओं की कुर्बानी की अनुमति नियमतः केवल बूचड़खानों में है। राजधानी अगरतला में कोई भी बूचड़खाना नहीं है, इसलिए अगर बकरीद पर कोई कुर्बानी वहाँ हुई तो उसको गैरकानूनी माना जाएगा।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाबन्दी के पीछे विभाग ने पशु क्रूरता निवारण नियम (वधशाला) 2001 का हवाला दिया है। इस नियम के मुताबिक पशुओं की हत्या केवल उन बूचड़खानों में ही की जा सकती है, जो सरकार द्वारा लाईसेंस प्राप्त हों और सभी नियमों का पालन कर रहे हों। इसी के साथ आदेश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और परिवहन अधिनियम 1978 का भी जिक्र किया गया है।

अपने आदेश की प्रति राज्य के DGP को भेजते हुए डॉ. देबनाथ ने इसे सख्ती से लागू करवाने के लिए कहा है। साथ ही प्रवर्तन विभाग को भी इस आदेश के बारे में सूचित किया गया है। पशु संसाधन विकास विभाग ने कहा कि नियमों के विरुद्ध जानवरों को लाने और ले जाने के चलते कई पशुओं की रास्ते में ही मौत हो जाती है। विभाग के अनुसार इन्हीं कारणों को देखते हुए इन नियमों का कोई भी उललंघन करता दिखाई दे तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

बकरीद पर कॉन्ग्रेस और CPIM की राजनीति, वक्फ बोर्ड सरकार के साथ

त्रिपुरा की सरकार ने बकरीद पर कुर्बानी के लिए कहीं से भी मनाही नहीं की है। विपक्षी दल लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति नहीं करें, यह कैसे संभव है। कॉन्ग्रेस और सीपीआईएम ने त्रिपुरा के पशु संसाधन विकास विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश पर कहा कि यह एक समुदाय की भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ किसी अन्य समुदाय को खुश करने के लिए किया गया है।

त्रिपुरा वक्फ बोर्ड ने हालाँकि इस मुद्दे पर राज्य सरकार को समर्थन दिया है। वक्फ बोर्ड का कहना है कि अधिसूचना में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारे शरीयत कानून और हदीस दिशा-निर्देश भी हमें एक वर्ष से कम उम्र की गायों को मारने से रोकते हैं और गर्भवती गायों की कुर्बानी को प्रतिबंधित करते हैं। यह लगभग सरकारी आदेश जैसा ही है। कोई अंतर नहीं है।”

पीएम पद से इस्तीफा देने के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने विक्रमसिंघे का घर फूँका, नौसेना के जहाज से भागे राष्ट्रपति राजपक्षे 13 जुलाई को देंगे इस्तीफा

श्रीलंका (Sri Lanka Crisis) आर्थिक संकट के बाद अब राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। राजधानी कोलंबो (Colombo) में शनिवार (9 जुलाई 2022) को आक्रोशित लोगों द्वारा राष्ट्रपति भवन पर कब्जा करने के बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) 13 जुलाई 2022 को इस्तीफा देंगे।

वहीं, प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे (Ranil Wickramasinghe) के इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शनकारियों ने उनके निजी आवास को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। बता दें कि विक्रमसिंघे ने शनिवार की रात को ट्विटर पर अपने इस्तीफे की घोषणा की थी।

खबर यह भी आ रही है कि प्रदर्शनकारी यहीं नहीं रूके। उन्होंने देश के कई अन्य सांसदों के घरों पर भी हमला किया है। इसके अलावा एक सांसद रजिता सेनारत्ने की पिटाई का भी वीडियो सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि घिरे हुए सांसद रजिता को प्रदर्शनकारी पीट रहे हैं और वे बचकर भागने का प्रयास कर रहे हैं।

रानिल विक्रमसिंघे ने बताया कि सरकार के संचालन को सुनिश्चित करने के लिए और हर नागरिक की सुरक्षा के लिए उन्होंने पार्टी नेताओं के सर्वदलीय सरकार बनाने के सुझाव को स्वीकार लिया। उन्होंने ट्वीट में घोषणा की कि वह पीएम पद से इस्तीफा दे रहे हैं।

उधर प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के इस्तीफे के बाद संसद के स्पीकर महिंदा यापा अबेवर्धने ने राष्ट्रपति राजपक्षे के फैसले की घोषणा की। इसके पहले उन्होंने राष्ट्रपति से तुरंत इस्तीफा देने की घोषणा करने का एक पत्र लिखा था।

उम्मीद की जा रही है कि इस्तीफे बाद अगले कुछ दिनों में श्रीलंका में सर्वदलीय सरकार का गठन किया जाएगा। यह सरकार अधिकतम 30 दिनों तक काम करेगी, उसके बाद सरकार के शेष कार्यकाल के लिए सांसदों द्वारा नया राष्ट्रपति चुना जाएगा।

कहा जा रहा कि राष्ट्रपति राजपक्षे नौसेना के जहाज पर सवार होकर कोलंबो से भाग गए हैं। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें नौसेना के एक जहाज के पास एक कार आकर रुकती है उसमें से कुछ सूटकेस निकालकर जहाज पर जल्दबाजी में चढ़ाया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि ये सभी राजपक्षे के कर्मचारी हैं।

चीन के चंगुल में फँसकर बदहाल हो चुके श्रीलंका में हालात को देखते हुए सभी स्कूलों एवं कॉलेजों को 15 जुलाई तक के लिए बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों ने देश के पेट्रोल पंपों की सुरक्षा बढ़ा दी है।

झारखंड के शिव मंदिर में फेंका बीफ, तनाव के कारण इलाके में भारी फोर्स तैनात: साफ़-सफाई के बाद किया गया मंदिर का शुद्धीकरण

झारखंड के लोहरदगा जिले के रामपुर गाँव में एक शिव मंदिर के भीतर बीफ फेंकने की घटना प्रकाश में आई है। मंदिर के अंदर माँस का टुकड़ा देख हिंदू आक्रोशित हैं। पुलिस ने दो समुदायों से जुड़ा मामला समझ गाँव मे फोर्स की तैनाती कर दी है। हालाँकि इलाके में तनाव अब भी बताया जा रहा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट कहती है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने शिव मंदिर के परिसर में बीफ को फेंका, जिसका पता स्थानीयों को शनिवार (9 जुलाई 2022) सुबह चला। माँस देखते ही स्थानीय भड़क गए। देखते ही देखते घटना की जानकारी पूरे गाँव में फैल गई और मंदिर के पास भीड़ बढ़ती गई।

घटना के बाद दो पक्ष के लोग आमने-सामने आ गए। लेकिन तभी किसी ने इस घटना के बारे सदर थाना में सूचना दे दी। पुलिस ने मौके से पहुँचकर दोनों पक्षों को समझाया और तनाव को शांत किया गया। इस दौरान कुछ ग्रामीणों के सहयोग से भी स्थानीयों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गाँव के पंचायत जन प्रतिनिधि शम्भू सिंह ने आरोप लगाया है कि गाँव में असामाजिक तत्वों द्वारा अक्सर किसी न किसी प्रकार आपसी प्रेम और सौहार्द को खराब करने का प्रयास किया जाता रहा है। इसे लेकर वह पुलिस को ज्ञापन भी देने वाले हैं। फिलहाल मंदिर की साफ सफाई करवाकर उसका शुद्धिकरण करवा दिया गया है।

कथिततौर पर, घटना की सूचना मिलने के बाद कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौके पर पहुँचे और उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोपितों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और फौरन गिरफ्तारी की माँग की है।

पुलिस अधीक्षक आर राम कुमार ने बताया कि अभी मामले में जाँच की जा रही है। चारों ओर फोर्स को तैनात कर दिया गया है। जल्द ही असामाजिक तत्वों को पकड़ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जो भी दोषी होगा उसे सलाखों के पीछे डाला जाएगा

जिस तारापीठ का नाम लेकर TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने माँ काली पर की टिप्पणी, वहीं के पुजारी ने किया खंडन: कहा – शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा मांस-शराब लेती हैं देवी

माँ काली को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की ओछी टिप्पणी पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच बीजेपी और विश्व हिन्दू परिषद ने शनिवार (9 जुलाई 2022) को पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही बीजेपी ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा है कि आखिर कब तक वो हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने वाली महुआ मोइत्रा का बचाव आखिर कब तक करेंगी।

इसके साथ ही पार्टी तारापीठ मंदिर के सचिव तारामय मुखर्जी का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने माँ काली पर महुआ मोइत्रा की टिप्पणी की आलोचना की है। इसी क्रम में बंगाल बीजेपी ने एक पोस्ट शेयर किया, “तारामंदिर पीठ के सचिव तारामय मुखर्जी ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा माँ काली के अप्रिय चरित्र चित्रण की खिंचाई की है। शास्त्रों के ज्ञान के बिना मंदिर के पुजारी ने उनकी आलोचना की है।”

तारामय मुखर्जी के मुताबिक, शास्त्रों में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि देवी मांस और शराब का सेवन करती हैं। शास्त्रों में इस तरह से कहने की कोई इजाजत नहीं है। करोक सुधा नाम का एक पेय देवी को अर्पित किया जाता है। लेकिन, ये पेय भी तांत्रिक मंत्रों के उच्चारण और शुद्धिकरण के बाद ही अर्पित किया जाता।

क्या कहा था महुआ मोइत्रा

गौरतलब है कि मंगलवार (5 जुलाई 2022) को डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर को लेकर जारी विवाद के बीच कहा था कि काली के कई रूप हैं। उनके लिए काली का मतलब मांस और शराब स्वीकार करने वाली देवी हैं। हालाँकि टीएमसी ने इस बयान से दूरी बना ली थी और इसकी निंदा की थी। पार्टी ने कहा था कि महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए बयान और माँ काली को लेकर उनके द्वारा अभिव्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं और पार्टी किसी भी सूरत में या किसी भी रूप में इसका समर्थन नहीं करती।

लेकिन महुआ इतने पर नहीं रुकी उन्होंने कहा था, “मैं ऐसे भारत में नहीं रहना चाहती, जहाँ सिर्फ भाजपा का पितृसत्तात्मक ब्राह्मणवादी दृष्टिकोण हावी रहेगा और बाकी लोग धर्म के ईर्द-गिर्द घूमते रहेंगे। मैं मरते दम तक अपने बयान का बचाव करती रहूँगी। तुम जितना चाहे FIR दर्ज करवा लो, मैं हर बार इसका कोर्ट में सामना करूँगी।”

उमेश कोल्हे के घर के पास राणा दंपत्ति ने किया हनुमान चालीसा का पाठ, कहा- हत्यारों को सरेआम मिले फाँसी, अमित शाह उदाहरण पेश करें

महाराष्ट्र में निर्दलीय लोकसभा विधायक सांसद नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा ने अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे के घर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस चालीसा पाठ को लेकर राणा दंपति ने बताया कि अमरावती में आतंक के माहौल को दूर करने और कोल्हे परिवार को हमले को सहने की शक्ति देने के लिए कोल्हे के घर के सामने हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया।

नवनीत राणा ने माँग की कि उमेश कोल्हे के मुजरिमों को जनता के बीच में फाँसी पर लटकाया जाना चाहिए ताकि कोई दोबारा ऐसे अपराध को अंजाम देने की हिम्मत न करें। राणा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इस मामले के जरिए उदाहरण सेट करने को कहा।

मालूम हो कि इससे पहले राणा दंपत्ति ने कोल्हे के परिवार से मुलाकात करके आश्वासन दिया था कि वह लोग इस केस की फास्ट ट्रैक सुनवाई के लिए माँग उठाएँगे। उनका आरोप था कि अमरावती पुलिस इस मामले को दबाने में लगी है। उन्होंने ये भी कहा था कि हत्या के बाद कुछ अन्य लोगों को भी जान से मारने की धमकियाँ आई हैं जिसके कारण वह लोग क्षेत्र को छोड़ जाने लगे हैं।

उमेश कोल्हे की हत्या

बता दें कि उमेश कोल्हे पर 21 जून को रात 10 बजे के आसपास कुछ कट्टरपंथियों ने धारधार हथियार से हमला किया था। इन लोगों को कहा गया था कि कोल्हे का सिर उनसे धड़ से अलग होना चाहिए जिसके लिए आरोपितों ने कोशिश भी की। हालाँकि पीछे से कोल्हे के बहू-बेटे को आता देख वह सब फरार हो गए।

पुलिस पड़ताल में सामने आया कि इस घटना को अंजाम देने के लिए मुख्य साजिशकर्ता इरफान ने आटो चालकों और मजदूरों को हायर किया था। पहले उसने इन्हें बुलाकर अपनी दुकान में ब्रेनवॉश किया। उसके बाद इनसे ये हत्या करवाई।

मीडिया में सामने आ चुकी जानकारी बताती है कि हत्यारों ने उमेश को मारने के लिए दो बार और कोशिशें की थी लेकिन पहली दफा मुख्य साजिशकर्ता खुद हत्या को अंजाम देने से घबरा गया था और दूसरी बार उमेश कोल्से समय से पहले घर चले गए थे। लेकिन तीसरी बार इन लोगों ने सोचा हुआ था कि इन्हें उमेश कोल्हे को किस तरह मारना है। हालाँकि उस तरह की सिर को धड़ से अलग नहीं कर पाए। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बताया कि हत्यारों ने इतनी निर्ममता से उन पर वार किया था कि उनके गले उनके गले पर जख्म 5 इंच चौड़ा, एक 7 इंच लंबा और 5 इंच गहरा था। उनकी साँस लेने वाली नली, भोजन निगलने वाली नली और आँखों की नसों पर भी वार किए गए थे।

TMC के रफीकुल ने अपनी ही पार्टी के नेता को मार डाला, 2 सहयोगियों की भी हत्या: खुलासे के बाद बोली तृणमूल कॉन्ग्रेस – वो हमारा आदमी नहीं

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग में तीन टीएमसी नेताओं की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस घटना को लेकर पता चला है कि इस तिहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपित तृणमूल कॉन्ग्रेस का नेता रफीकुल है।

मारे गए लोगों की पहचान स्वप्न मांझी, झंटू हलदर और भूतनाथ प्रमाणिक के रूप में हुई है। इस मामले को लेकर बात करते हुए आरोपित की अम्मी आयशा सरदार ने कहा, “मेरे बेटे और पति दोनों टीएमसी कार्यकर्ता हैं। लेकिन वे स्वप्न मांझी से जुड़े नहीं थे। वे दूसरे गुट से ताल्लुक रखते थे।” खास बात ये है कि ये खुलासा उस वक्त हुआ है, जब टीएमसी लगातार भीषण हत्याओं के लिए लगातार विपक्ष को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रही है। रफीकुल की अम्मी का दावा है कि उसका बेटा टीएमसी से जुड़ा है। वहीं पार्टी इस खुलासे के बाद डिफेंसिव मोड में आ गई है।

इस मामले को लेकर टीएमसी के स्थानीय नेता सैकत मुल्ला ने दावा किया, “कैनिंग में रफीकुल नाम का कोई पार्टी कार्यकर्ता नहीं है। असामाजिक तत्व हमारी पार्टी के सदस्य नहीं हो सकते।” मुल्ला ने दावा किया कि अगर सच में रफीकुल टीएमसी का हिस्सा होता तो वो पार्टी के ही साथी नेता की हत्या क्यों करता?”

टीएमसी का नाम सामने आने के बाद मंत्री फिरहाद हकीम ने रफीकुल की अम्मी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया, “कोई भी इस तरह के बयान दे सकता है। यह पता लगाना पुलिस है और अदालत फैसला करेगी। बीजेपी गुजरात की तरह पश्चिम बंगाल में भी हत्या की राजनीति शुरू करने की कोशिश कर रही है। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।”

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग में पीर पार्क के पास गुरुवार (7 जुलाई, 2022) को टीएमसी (गोपालपुर) के ग्राम पंचायत सदस्य स्वप्न मांझी की 6 लोगों के एक समूह ने हत्या कर दी थी। मांझी के अलावा दो और टीएमसी कार्यकर्ताओं, झंटू हलदर और भूतनाथ प्रमाणिक को भी मार दिया गया था। कथित तौर पर हमलावरों ने पहले तीनों पर एक देशी बम फेंका। स्वपन मांझी को दो बार जबकि भूतनाथ प्रमाणिक को एक बार गोली मारी गई थी। आरोपितों के भागने के बाद भीड़ ने झंटू हलदर की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी।

हत्यारों ने तीनों पीड़ितों का सिर कलम करने की भी कोशिश की। स्वपन मांझी के बड़े भाई मधु की शिकायत के बाद कैनिंग पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में रफीकुल सरदार, बशीर शेख, बापी मंडल, एबयादुल्लाह मंडल, अली हुसैन नस्कर और जलालुद्दीन अखंड नाम के छह लोगों को आरोपित बनाया गया था। सभी पुलिस से बचकर भाग रहे हैं।

वहीं अब बीजेपी ने ममता सरकार पर निशाना साधते हुए तिहरे हत्याकांड को पार्टी के भीतर गुटबाजी का नतीजा बताया है। बीजेपी नेता भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा, “अब ये साफ हो गया है कि यह टीएमसी की गुटबाजी थी। गुट अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल कर पंचायत चुनाव से पहले क्षेत्र पर नियंत्रण करना चाहते थे।”

पत्रकार ज़ुबैर की अचानक संदिग्ध मौत, फर्श पर पड़ी मिली लाश: लिखा था – AltNews की पूरी टीम को मेरा सलाम

अंडमान एंड निकोबार के पत्रकार ज़ुबैर अहमद की मौत हो गई है। वो ‘The Sunday Islander’ नामक ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल के संपादक थे। उन्हें शुक्रवार (8 जुलाई, 2022) को एक स्कूल में मृत पाया गया। उस स्कूल में वो बतौर मैनेजर कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि उनकी लाश जमीन पर पड़ी हुई थी और गर्दन के चारों तरफ रस्सी बँधी हुई थी। वो गुरुवार को दोपहर 3:30 बजे अपने घर पहुँचे थे और अपने परिवार के साथ समय व्यतीत किया था।

इसके बाद वो बाहर निकले तो वापस नहीं आए। वो दक्षिण अंडमान के विम्बर्लीगंज के रहने वाले थे। ‘अंडमान क्रॉनिकल’ मीडिया संस्थान ने अपने बयान में कहा, “बड़े ही दुःख और शोक के साथ हमें इस हैरान कर देने वाली खबर की घोषणा करनी पड़ रही है। इस खबर ने हमें कँपा दिया है। जाने-माने पत्रकार और एक्टिविस्ट और हमारे अच्छे दोस्त जुबैर अहमद ने अंतिम साँस ली। ये सोच से भी परे है कि हमें इस त्रासद खबर के बारे में बताना पड़ा।”

‘अंडमान क्रॉनिकल’ के संपादक डेनिस गिल्स ने ये बयान जारी करते हुए बताया कि ज़ुबैर अहमद अपने पीछे अपनी पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके करीबी दोस्तों का कहना है कि वो डिप्रेशन में थे। वो ‘राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं स्नायु विज्ञानं संस्थान (NIMHANS)’ के डॉक्टरों द्वारा बताई गई दवा का सेवन कर रहे थे। वो एक साप्ताहिक पत्रिका लॉन्च करना चाहते थे, लेकिन ये योजना सफल नहीं हो पाई। ‘अंडमान एन्ड निकोबार मीडिया फेडरेशन (ANMF)’ ने उनकी मौत को अचानक, असामयिक और दुखद करार दिया है।

वो सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थे। उनको जानने वालों का कहना है कि वो ‘इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म’ में रुचि रखते थे। ‘Andaman Sheekha’ ने उन्हें इस द्वीप समूह का इनसाइक्लोपीडिया करार दिया। इसका कहना है कि वो सामाजिक मुद्दों पर खुल कर बोलते थे। हालाँकि, वो AltNews के समर्थक थे और इसके संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ़्तारी के बाद इसका समर्थन किया था। उनका अंतिम मीडिया ट्वीट AltNews को डोनेशन वाला ही था।

इसमें उन्होंने पेमेंट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा था, “AltNews की पूरी टीम, मोहम्मद जुबैर और प्रतीक सिन्हा को खुलासों के लिए मेरा सलाम। सच्चाई की जीत होगी।”