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कन्हैया, उमेश, किशन… हत्या का एक जैसा पैटर्न, लिंक की पड़ताल कर रही NIA: रिपोर्ट में बताया- PFI कनेक्शन की भी हो रही जाँच

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल को काट डाला गया। महाराष्ट्र के अमरावती में 22 जून 2022 को उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई। उससे पहले गुजरात के अहमदाबाद में 25 जनवरी 2022 किशन भरवाड की हत्या हुई थी। उदयपुर की बर्बरता के बाद से लगातार ये सवाल पूछा जा रहा है कि इन घटनाओं में कोई समानता है? क्या ये सारी हत्याएँ किसी एक साजिश का हिस्सा हैं?

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार NIA इन मामलों के बीच लिंक की पड़ताल करेगी। कन्हैया लाल की हत्या की भी एजेंसी जाँच कर रही है। रिपोर्ट में एजेंसी के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ये सभी घटनाएँ काफी मिलती-जुलती हैं। इसकी वजह से एजेंसी इनके बीच लिंक और पैटर्न की जाँच कर रही है। इसके अलावा इन घटनाओं में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है, “ये एक ही तरह की घटनाएँ हैं। हम लिंक ढूँढ रहे हैं और पैटर्न का अध्ययन कर रहे हैं। सभी मामलों में आरोपितों को आसानी से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने अपने गुनाहों को छिपाने की कोशिश नहीं की।”

कन्हैया लाल की हत्या उनके टेलर शॉप में घुसकर मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने कर दी थी। इस मामले में ‘आतंकी संगठन’ की भूमिका से एनआईए इनकार कर चुकी है। दरअसल, कन्हैया लाल को मिल रही धमकियों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने के कारण राजस्थान पुलिस की लगातार आलोचना हो रही थी। इसके बाद एक वर्ग खासकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी इसके पीछे आतंकी संगठन, विदेश लिंक की ओर लगातार इशारा कर हत्या के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पीठ थपथपा रहे थे।

उमेश और किशन को कैसे मारा था?

महाराष्ट्र के अमरावती में रहने वाले एक केमिस्ट उमेश कोल्हे की 22 जून को चार मुस्लिम हमलावरों ने हत्या कर दी थी। ये हत्या उस वक्त की गई थी, जब वो अपनी मेडिकल शॉप से अपने बहू बेटे के साथ अलग-अलग बाइक पर घर आ रहे थे। मामले में अब्दुल, शोएब, मुदस्सिर और शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इस वारदात में बाइक से आ रहे कोल्हे की गर्दन पर पीछे से चाकू से वार किया गया था। दावा किया जा रहा है कि नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने के कारण उनकी हत्या की गई। कन्हैया लाल की हत्या के पीछे भी यही वजह बताई जाती है।

वहीं 25 जनवरी को गुजरात में 30 वर्षीय दुकानदार किशन भरवाड की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में दो आरोपितों शब्बीर और इम्तियाज को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की जाँच एनआईए और एटीएस कर रही है। भरवाड भी एक पोस्ट को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर थे।

नूपुर शर्मा हीरो, कन्हैया लाल की हत्या के लिए ‘जिहादी मुस्लिम’ जिम्मेदार: डच MP ने कहा- मुझे लगता था भारत में शरिया कोर्ट नहीं है

डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा (Nupur Sharma) का एक बार फिर समर्थन किया है। उन्होंने शर्मा का बचाव करते हुए कहा कि वह किसी भी चीज के लिए जिम्मेदार नहीं हैं और उन्हें पैगंबर के बारे में सच बोलने के लिए कभी माफी नहीं माँगनी चाहिए। वहीं, भारत में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने उदयपुर में कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के लिए पूर्व भाजपा प्रवक्ता को ‘जिम्मेदार’ माना है।

वाइल्डर्स ने शुक्रवार (1 जुलाई 2022) को अपने ट्वीट में लिखा, “मुझे लगा कि भारत में शरिया अदालतें नहीं हैं। मुहम्मद के बारे में सच बोलने के लिए उन्हें कभी माफी नहीं माँगनी चाहिए। वो उदयपुर के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। कट्टरपंथी असहिष्णु जिहादी मुस्लिम जिम्मेदार हैं और कोई नहीं। नुपुर शर्मा एक हीरो हैं।”

वाइल्डर्स का ट्वीट सुप्रीम कोर्ट के कुछ न्यायाधीशों द्वारा की गई टिप्पणी के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने नूपुर शर्मा को कहा था कि उनकी बयान ने पूरे देश में आग लगा दी। साथ ही कट्टरपंथियों द्वारा फैलाई गई अराजकता और हिंसा के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया था।

नीदरलैंड के सांसद गीर्ट वाइल्डर्स ने 29 जून को ट्वीट कर इस्लामी कट्टरपंथ को लेकर भारत को फिर से आगाह किया था। उदयपुर की घटना के बाद वाइल्डर्स ने कहा था कि कट्टरवाद, आतंकवाद और जिहादियों से हिंदुत्व को बचाना जरूरी है। उन्होंने ट्वीट किया था, “एक दोस्त होने के नाते मैं भारत को सलाह दे रहा हूँ कि असहिष्णुता के प्रति सहिष्णु होना बंद कीजिए। जिहादियों, आतंकवादियों और कट्टरपंथियों से हिंदुत्व की रक्षा कीजिए। इस्लाम का तुष्टिकरण मत कीजिए, नहीं तो यह बहुत भारी पड़ेगा। हिंदुओं को ऐसे नेता चाहिए जो शत प्रतिशत उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हो।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा था, “भारत में हिंदुओं को सुरक्षित होना चाहिए। यह उनका देश है। उनकी मातृभूमि है। भारत उनका है। भारत कोई इस्लामिक देश नहीं है।” गौरतलब है कि जून की शुरुआत में वाइल्डर्स ने नूपुर शर्मा का समर्थन करते हुए कहा था कि अपराधी और आतंकवादी अपनी धार्मिक असहिष्णुता और घृणा व्यक्त करने के लिए सड़क पर हिंसा करते हैं।

गीर्ट ने अपने अगले ट्वीट में कट्टरपंथियों द्वारा नूपुर शर्मा को दी गई धमकी का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा था, “यही है, जिसके कारण मैं बहादुर नूपुर शर्मा का समर्थन कर रहा हूँ। जान से मारने की सैकड़ों धमकियाँ। यह मुझे उनका समर्थन करने के लिए और भी अधिक दृढ़ बनाता है। क्योंकि, बुराई कभी नहीं जीत सकती। कभी नहीं।”

एक अन्य ट्वीट में वाइल्डर्स ने कहा था, “तुष्टिकरण कभी काम नहीं करता। यह केवल चीजों को और खराब करेगा। इसलिए भारत के मेरे प्यारे दोस्तों, इस्लामिक देशों से डरो मत। आजादी के लिए खड़े हों और अपने राजनेता नूपुर शर्मा का बचाव करने में गर्व और दृढ़ रहें जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद के बारे में सच बोला था।”

बता दें कि डच सांसद ने मुस्लिम देशों की निंदा करते हुए कहा था, ”इस्लाम असहिष्णु है और इसकी विचारधारा दुनिया के लिए खतरा है। भारत को माफी माँगने के लिए कहने वाले मुल्क बेहद क्रूर शरिया शासन का पालन करते हैं और उनका मानवाधिकार का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब है।”

गौरतलब है कि राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल साहू की 28 जून 2022 को बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी। मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने टेलर शॉप में घुसकर कन्हैया लाल की गर्दन को काट डाला था। हत्यारों ने घटना का खौफनाक वीडियो भी बनाया था। इस मामले में कन्हैया लाल के 20 वर्षीय बेटे ने जो FIR दर्ज कराई है, उससे भी कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं।

इसके मुताबिक, हमले से पहले उनसे इस्लामी हत्यारों ने कहा था कि ‘तुमने हमारे नबी के खिलाफ लिखा इसलिए तुम्हें जीने का कोई अधिकार नहीं। तुम काफिर हिन्दुओं को हम अंजाम तक पहुँचाएँगे’।

न्यूज़ 18 के अनुसार, दर्ज एफआईआर में कन्हैया लाल के बेटे के हवाले से कहा गया है, “ये 2 हत्यारे देश के लोगों में आतंक और तनाव फैलाने के साथ निर्मम हत्याएँ करने का एक गैंग चलाते हैं। इन्होंने पूरी प्लानिंग के साथ मेरे पिता की हत्या कर दी। इसके बाद इन्होंने बाकी लोगों को भी धमकी दी है।”

FIR के मुताबिक दुकान में मौजूद 2 लोगों ने कन्हैया लाल को बचाने की कोशिश की थी। लेकिन उन दोनों पर भी हमला कर दिया गया। इस दौरान ईश्वर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका इलाज महाराणा भूपाल सिंह अस्पताल में चल रहा है।

ममता बनर्जी को TMC के विधायक ने बताया माँ शारदा का अवतार, रामकृष्ण मिशन ने जताई आपत्ति, टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक डॉक्टर निर्मल माजी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की पत्नी माँ शारदा का अवतार बता दिया। विधायक के इस टिप्पणी पर रामकृष्ण मिशन ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि विधायक के इस टिप्पणी बहुत से अनुयायी आहत हैं।

बता दें कि गुरुवार (30 जून 2022) को रामकृष्ण मिशन और रामकृष्ण मठ के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय बेलूर मठ (Belur Math) ने तृणमूल कॉन्ग्रेस विधायक निर्मल माजी की टिप्पणी की निंदा की थी, जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी को रामकृष्ण परमहंस की पत्नी माँ शारदा (Maa Sarada) का अवतार बताया था। माजी की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संगठन के महासचिव स्वामी सुवीरानंद ने कहा था कि इससे माँ शारदा के शिष्य आहत हैं।

सुवीरानंद ने यह कहा था, “हमें माजी की टिप्पणी के संबंध में कई शिष्यों से फोन और ईमेल मिले हैं। इस टिप्पणी से कई शिष्यों की भावना आहत हुई है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, माजी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी की थी। इस दौरान उन्होंने बंगाल की सीएम को फ्लोरेंस नाइटिंगेल, मदर टेरेसा और सिस्टर निवेदिता भी बताया था।

उन्होंने कहा था, “स्वामी विवेकानंद की मृत्यु से कुछ दिन पहले, माँ शारदा ने स्वामीजी के साथियों से कहा था कि जब उनका पुनर्जन्म होगा, तो वह नहर पार करेंगी, हरीश चटर्जी रोड से कालीघाट पहुँचेंगी। अभी जहाँ दीदी (ममता) रहती हैं। दीदी माँ शारदा हैं।”

सुवीरानंद ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि रामकृष्ण मठ, रामकृष्ण मिशन और अन्य किसी भी किताब में इस तरह की कोई जानकारी प्रकाशित नहीं की गई है। वह यही नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस टिप्पणी के संबंध कई ऐसे श्रद्धालुओं और शिष्यों से भी संपर्क किया, लेकिन उन्होंने भी इस बारे में ऐसा कुछ नहीं बताया। मुझे नहीं पता कि नेता को इतनी अजीब जानकारी कहाँ से मिली है।” माजी के बयान की समाज के विभिन्न वर्गों ने आलोचना भी की। वहीं, टीएमसी ने महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि पार्टी उनकी टिप्पणी का समर्थन नहीं करती है।

नूपुर शर्मा पर बोला इतना, आदेश में लिखा कुछ नहीं: SC जजों की टिप्पणियों को वापस लेने के लिए CJI के पास याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में उनके खिलाफ दायर सभी मामलों को एक साथ करने और उसे दिल्ली में स्थानांतरित करने की माँग वाली भाजपा की पूर्व नेता की याचिका को खारिज करते हुए उन पर तीखी टिप्पणी की। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने उदयपुर में कन्हैया लाल की क्रूर हत्या सहित देश भर में इस्लामवादियों द्वारा की गई हिंसा के लिए उन्हें दोषी ठहराया था। अब इस टिप्पणी के खिलाफ मुख्य न्यायाधीश के यहाँ याचिका दाखिल की गई है।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने यह टिप्पणी मौखिक की है और अपने औपचारिक लिखित आदेश में इसे शामिल नहीं किया है। फिर भी जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अवकाश पीठ ने सुनवाई करते हुए हिंसा के लिए पूरी तरह नूपुर शर्मा को दोषी ठहराया था।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा था, “जिस तरह से उन्होंने पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है … देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है।” अदालत ने यह भी कहा कि उन्हें पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है और उन्होंने आम नागरिकों के लिए उपलब्ध न्यायिक अधिकार खो दिया है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला वाली सुप्रीम कोर्ट की अवकाश पीठ ने अपने आदेश में नूपुर शर्मा को कानून के तहत उपलब्ध वैकल्पिक उपायों का लाभ उठाने की स्वतंत्रता के तहत अपनी याचिका को वापस लेने की अनुमति दी। बता दें कि नूपुर ने पैगंबर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी को लेकर देश भर में उनके खिलाफ दर्ज सभी FIR को क्लब करने और उसे दिल्ली स्थानांतरित करने की माँग की थी। इसी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी।

जस्टिस सूर्यकांत की इस टिप्पणी को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष एक याचिका दायर की गई है, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को नूपुर शर्मा के खिलाफ की गई मौखिक टिप्पणी को वापस लेने का निर्देश देने की माँग की गई है। गौ महासभा के नेता अजय गौतम ने अपनी याचिका में न्यायमूर्ति सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ द्वारा की गई टिप्पणी को अनुचित घोषित करने की माँग भी की।

वहीं, लेखक मिनहाज मर्चेंट ने ट्वीट कर कहा, न्यायमूर्ति कांत, “जिन्होंने ये भयावह टिप्पणियाँ कीं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। अच्छा है कि CJI के पास एक याचिका दायर की गई है, जिसमें 1) मामले को दूसरी बेंच को ट्रांसफर करने और 2) जस्टिस कांत से अपनी टिप्पणियों को वापस लेने के लिए कहा गया है।”

‘नबी की शान में कुछ कहा तो काट देंगे जुबान’: जहर उगलने के 28 दिन बाद गिरफ्तार हुआ राजस्थान का मुफ्ती नदीम

नूपुर शर्मा के विरोध में राजस्थान के बूँदी में जहरीली बयानबाजी करने वाले मुफ़्ती को आख़िरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित का नाम मुफ़्ती नदीम अख्तर है। मुफ़्ती नदीम ने 3 जून 2022 को पुलिस के आगे ही भड़काऊ बयानबाजी करते हुए मरने और मारने की धमकी दी थी। इस धमकी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। मुफ़्ती की गिरफ्तारी 28 दिनों के बाद आज 1 जुलाई 2022 को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुफ़्ती नदीम अख्तर बूंदी का शहर काजी भी है। कन्हैया लाल की उदयपुर में हुई निर्मम हत्या के बाद मुफ़्ती नदीम का वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रहा था और उसकी गिरफ्तारी की माँग की जा रही थी। आखिरकार सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने, भड़काऊ भाषण देने सहित कई धाराओं में उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

बताया जा रहा है कि मुफ़्ती नदीम की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में थाने के बाहर नदीम समर्थकों का जमावड़ा शुरू हो गया। एहतियातन थाने के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। गिरफ्तारी बूंदी कोतवाली पुलिस द्वारा की गई है। मुफ़्ती नदीम के साथ उसके एक साथी मोहम्मद आलम को भी गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है कि 3 जून को मुफ़्ती नदीम ने बूंदी के DM ऑफिस पर नूपुर शर्मा खिलाफ ज्ञापन दिया था। इस दौरान उन्होंने राजस्थान पुलिस की मौजूदगी में कहा था, “हम अपने आका की शान में की गई गुस्ताखी का बदला लेना जानते हैं। मेरे नबी की शान में एक लफ्ज भी बोला तो याद रखो कि जुबान काट ली जाएगी। हाथ उठाओगे तो हाथ काट लिए जाएँगे। ऊँगली उठाओगे तो ऊँगली काट ली जाएगी। अगर निगाहें भी उठीं तो निकाल कर बाहर फेंक देंगे।” इस दौरान वहाँ मौजूद भीड़ बेशक-बेशक कह कर क़ाज़ी मुफ़्ती नदीम की बातों का समर्थन करती रही और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा था।

डियर मीलॉर्ड, क्या इस्लामी कट्टरपंथियों को ‘फिसली जुबान’ से आपने भी भड़काया?

सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने आज नुपूर शर्मा को निश्चित तौर पर ईशनिंदा करने वाला घोषित कर दिया है। ये वही न्यायालय है जिन्होंने कभी गर्व से कहा था कि असहमति ही लोकतंत्र का सुरक्षा कवच है। आज उसी कोर्ट के जजों ने नुपूर शर्मा और उनके कथन को कन्हैया लाल की हत्या का जिम्मेदार बता दिया। साथ ही कुछ हद तक वैसे इस्लामवादियों की तरह अपनी टिप्पणी दी जो खुद के कृत्यों के लिए महिला को ही जिम्मेदार बताते हैं। कोर्ट के जस्टिस ने भी देश में हो रही हिंसा के लिए नुपूर शर्मा की ‘फिसली जुबान’ को दोषी बताया है।

आदरणीय न्यायधीशों ने सुनवाई में कहा कि नुपूर को राष्ट्र से माफी माँगनी चाहिए। इतना ही नहीं, नुपूर की ओर से जब कोर्ट में कहा गया कि वो अपने ऊपर हुई शिकायत मामले की जाँच में सहयोग कर रही हैं तब सर्वोच्च न्यायलय के न्यायधीशों द्वारा उनके ऊपर ‘रेड कार्पेट’ वाला तंज भी कसा गया।

मीलॉर्ड ने नुपूर को लेकर ये तक कहा, “कई बार सत्ता (ताकत) का सुरूर दिमाग में चढ़ जाता है। लोग सोचते हैं कि उनके पास बैक अप है और वो कुछ भी बोल सकते हैं।” मीलॉर्ड द्वारा लगातार की गई ऐसी हर टिप्पणी ने आज उस मिथ को तोड़ा, जो ये बताता था कि न्यायव्यवस्था ऐसी महिला की मदद के लिए है जिसे मौत की धमकियाँ और रेप की धमकियाँ मिल रही हों, वो भी सिर्फ टेलीविजन डिबेट शो में अपना मत रखने के कारण।

रिपोर्ट बताती हैं कि नुपूर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा इसलिए खटखटाया ताकि उनके विरुद्ध हुई सारी एफआईआर दिल्ली में ट्रांस्फर हों और यही पर जाँच आगे बढ़े। अपनी याचिका में उन्होंने साफ भी किया कि ये सब इसलिए है क्योंकि उन्हें लगातार मौत की धमकियाँ आ रही हैं। हालाँकि कोर्ट ने इस मुद्दे पर सुनने की बजाय देश में हो रही हिंसा और हत्या की घटनाओं का ठीकरा उन्हीं पर फोड़ दिया और उन कट्टरपंथियों का नाम तक नहीं आया जिन्होंने वाकई नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर कन्हैया लाल का गला रेता। कोर्ट ने नुपूर को आरोपित बताते हुए उनकी याचिका में की गई माँग भी खारिज कर दी।

सुप्रीम कोर्ट निश्चित ही अपनी टिप्पणियों से कह रहा था कि ये नुपूर शर्मा का कसूर है जो इस्लामवादी गुस्से में आ गए, उन्होंने सड़कों पर दंगा कर दिया, हत्या की धमकियाँ दे दीं, बलात्कार करने को कह दिया और एक हिंदू का सिर काट दिया…। शायद न्यायधीशों को कहना था कि ये सब नुपूर की ही गलती थी। उन्हें महिला होने के नाते अपनी जगह का एहसास होना चाहिए था। उन्हें पता होना चाहिए था कि महिला होने के नाते उन्हें अपना मुँह बंद रखना था… पर अब वो जब अपना मत रख चुकी हैं तो जरूरी है कि उन्हें लटका दिया जाए, एक डायन की तरह, जिसके ऊपर भीड़ पत्थर फेंकते हुए तेज-तेज चिल्लाती है।

कमाल की बात है कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी अपनी हिंसा के लिए यही सब तो कहा। उन्होंने कहा कि गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा सिर तन से जुदा। उन्होंने ये भी कहा कि अगर कोर्ट मौत का दंड नहीं दे पाई तो वह देंगे। उन्होंने बताया कि वो शांतिप्रिय समुदाय के लोग हैं। वह आराम से रहना चाहते हैं। बस अगर किसी ने उनकी इच्छा के विरुद्ध काम किया तो वो इस्लाम को बचाने के लिए खून खच्चर पर भी उतर जाएँगे। जैसा कि इस्लामवादियों के लिए ये सब करना आसान है क्योंकि उनके लिए देश के कानून का कोई मतलब नहीं है। वे केवल अपने मजहबी कानून के प्रति सम्मान रखते हैं जो उन्हें इजाजत देता है कि काफिरों का गला काटें।

सुप्रीम कोर्ट का काम है देश के संविधान से चलना जबकि उनकी टिप्पणी इस्लामवादियों को ये हिम्मत देगी कि वो अपनी हिंसा को वाजिब दिखा सकें। उनकी टिप्णपी यही दिखाती है कि अगर कोई इस्लाम के बारे में कुछ भी कहे तो इस तरह कट्टरपंथियों का सड़कों पर आना सही है और भावना आहत के नाम पर किसी का गला काटना भी।

जब से सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नुपूर शर्मा की फिसली जुबान को कन्हैया लाल की हत्या का दोषी बताया है, उसके बाद से यही लग रहा है कि इन न्यायधीशों को अपने भीतर झाँककर देखने की जरूरत है। हैरानी होगी अगर ये जज उन इस्लामी हिंसा के लिए न्यायधीशों को जिम्मेदार ठहराएँ जिनके फैसले सुन कट्टरपंथी सड़कों पर आ गए।

मार्च 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब पर फैसला दिया था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने कर्नाटक कोर्ट के जजों को धमकी देने शुरू कर दी। जाँच में जो कट्टरपंथी पकड़े गए। उनमें एक कोवई रहमतुल्ला और दूसरा जमाल मोहम्मद उस्मानी था।

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में कहा गया कि कोवई रहमतुल्लाह ने कर्नाटक जजों के विरुद्ध हिंसा को भड़काया था। उसने झारखंड के उस जज की मौत का उदाहरण दिया था जो मॉर्निंग वॉक के दौरान मारे गए। इसके बाद उसने ये भी कहा था कि वो जानता है कि कर्नाटक के चीफ जस्टिस कहाँ सुबह की सैर करने जाते हैं।

बस इसी आधार पर आरोपित गिरफ्तार हुए थे। 

अब यही तर्क यदि नुपूर शर्मा मामले में लगाया जाए तो क्या सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों को टिप्पणी से पहले खुद से पूछना नहीं चाहिए कि क्या वह अपने हाईकोर्ट के जजों से भी कहेंगे कि उनकी फिसली जुबान के कारण इस्लामी भड़के और जज की हत्या का षड्यंत्र रचा।

स्पष्ट तौर पर नैतिकता के आधार पर लिया गया फैसला जो एक लिए सही है वो सबके लिए सही ही होगा, लेकिन यहाँ पूछना होगा कि क्या एक आम नागरिक के लिए नीति अलग हैं और मीलॉर्ड के लिए अलग? 

क्या सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक हाईकोर्ट के जज से माफी माँगने को कहेगा क्योंकि उनके फैसले के बाद इस्लामियों ने हत्या को करने मन बनाया। क्या सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के उन जजों से माफी माँगने को कहेगा जिनके फैसले के बाद इस्लामी सड़कों पर आ गए। अगर इन सबके लिए नुपूर शर्मा के लिए जजों को जिम्मेदार बताया जाना चाहिए तो फिर उन्हें वाई कैटेगरी की सुरक्षा क्यों मिली। और अगर उन्हें सुरक्षा मिल गई तो नुपूर शर्मा को क्यों उनके बयान के बाद ये सब कहा जा रहा है।

क्या अगर इस्लामी कल को भीड़ में जुटकर राम मंदिर पर हमला करें तो क्या सुप्रीम कोर्ट इसके लिए खुद को जिम्मेदार ठहराएगा, क्योंकि आदेश तो उन्हीं का था। फिर भी इस्लामी लगातार धमकाते हैं कि वो अयोध्या मंदिर को गिराकर बाबरी खड़ा करेंगे। क्या अगर कन्हैया लाल की हत्या की जिम्मेदार नुपूर हैं तो फिर सुप्रीम कोर्ट तैयार है क्या ऐसे समय में देश से माफी माँगने के लिए? क्या तब कहा जाएगा कि ताकत का नशा दिमाग में चढ़ता है तो लोगों को लगता है कि उनके पास बैकअप हैं और कुछ भी बोला जा सकता है।

न्याय पालिका को अपने प्रचुर ज्ञान में से ये निश्चित करना होगा कि वो इस्लामी मौलवी बनना चाहते हैं या फिर प्राकृतिक रूप से न्याय करना चाहते। आज नुपूर शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट की कही टिप्पणियों से सम्मानपूर्वक यही निष्कर्ष निकलता है कि इस्लामी भेड़ियों के सामने नुपूर शर्मा को कटु बातें बोलना न्यायालय की शोभा के खिलाफ था।

नोट: यह लेख ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नुपूर शर्मा के लेख पर आधारित है। आप इस लिंक पर क्लिक करके मूल लेख पढ़ सकते हैं। इसका अनुवाद जयन्ती मिश्रा ने किया है।

कन्हैया लाल की बर्बर हत्या के चश्मदीद को भी सता रहा डर, कहा- मास्टरजी ने सुरक्षा माँगी थी तो पुलिस ने कहा था CCTV लगवा लो

राजस्थान के उदयपुर में हुई कन्हैया लाल साहू की बर्बर हत्या के चश्मदीद को भी डर सता रहा है। नाम-पता उजगार होने के बाद से राजकुमार अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कन्हैया लाल की शिकायत पर पुलिस ने जैसा रवैया दिखाया था उसके कारण उन्हें प्रशासन की ओर से किए गए सुरक्षा के वादों पर भी नहीं भरोसा हो रहा है। कन्हैया लाल के टेलर शॉप में राजकुमार आठ साल से काम कर रहे थे। हमले में उनका एक साथी ईश्वर घायल भी हो गया था। उल्लेखनीय है कि 28 जून 2022 को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने टेलर शॉप में घुसकर कन्हैया लाल को काट डाला था।

दैनिक भास्कर के मुताबिक राजकुमार ने कहा, “मास्टर जी (कन्हैया लाल) ने जब अपनी जान को खतरा बताया था तब पुलिस ने उन्हें 2 दिन की सुरक्षा दी थी। बाद में पुलिस ने CCTV लगवाने की सलाह देते हुए सुरक्षा हटा ली थी।” इसके बाद कन्हैया लाल ने 16 जून को दुकान में कैमरे भी लगवा लिए थे। माना जा रहा है कि हत्यारों ने दुकान में घुसने से पहले ही CCTV का कनेक्शन काट दिया था।

राजकुमार ने बताया, “मैं भी अपनी सुरक्षा को लेकर डर रहा हूँ, क्योंकि मैं गवाह हूँ। मेरा नाम-पता सब सार्वजानिक हो चुका है। मुझे सुरक्षा का भरोसा तो दिया गया है, लेकिन ऐसा भरोसा तो मास्टर जी (कन्हैया लाल) को भी दिया गया था। मुझे अपने घर वालों की भी फ़िक्र सता रही है। कुछ दिनों बाद बाजार की बाकी तमाम दुकानें खुल जाएँगी, लेकिन सुप्रीम टेलर्स (कन्हैया लाल की दुकान) बंद ही रहेगा। इस दुकान से मैं लगभग 15 हजार रुपए महीने में कमा लेता था। अब वो भी नहीं कमा पाऊँगा। सब लोग जानते हैं कि मैं कन्हैया लाल के केस में गवाह हूँ ऐसे में शायद मुझे कोई और अपनी दुकान में काम पर नहीं रखना चाहेगा।”

बताया जा रहा है कि हमलावरों ने दुकान से लगभग 70 मीटर दूर अपनी बाइक स्टार्ट खड़ी रखी थी। ऐसा इसलिए क्योकि वे हत्या कर आराम से भाग सकें।

पटना के पटेल हॉस्टल से मिला बम, लेकर कोर्ट आ गई बिहार पुलिस: पेशी से पहले ही हुआ धमाका, बताया- सबूत के तौर पर लाया था

बिहार की राजधानी पटना स्थित एक सिविल अदालत में शुक्रवार (1 जुलाई 2022) को बम ब्लास्ट (Patna Civil Court Blast) हो गया। इस धमाके में एक दारोगा समेत 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। ब्लास्ट किसी असामाजिक तत्व ने नहीं किया, बल्कि बम को आगमकुआँ थाने की पुलिस एक केस के सिलसिले में बतौर सबूत पेश करने के लिए कोर्ट लाई थी। इसी दौरान उस बम में ब्लास्ट हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, बम ब्लास्ट की चपेट में आने के कारण दारोगा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उनके साथ ही बाकी के घायल अन्य पुलिसकर्मियों को भी पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। हालाँकि, पटना के SSP ने सिर्फ दारोगा के घायल होने की बात कही है।

कोर्ट में ब्लास्ट की घटना की खबर मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुँच गए। शुरुआत में लगा कि ये हमला किया गया था। हालाँकि, बाद में पता चला कि बम को अदालत में सबूत के तौर पर पेश करने के लिए लाया गया था, जो कि अचानक फट गया।

बहरहाल, लापरवाही को देखते हुए अब इस मामले में जाँच शुरू कर दी गई है। इस मामले की जाँच का जिम्मा पीरबहोर थाने की पुलिस को दिया गया है। जाँच के दौरान पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बम को सही तरीके से डिफ्यूज किया गया था या नहीं।

अभियोजन दफ्तर में घटी ये घटना

बताया जाता है कि अभियोजन पक्ष द्वारा बम का सत्यापन कराने के लिए पुलिस अधिकारी उसे कोर्ट लेकर लाए थे। इससे पहले कि सत्यापन का कार्य पूरा हो पाता, दफ्तर में टेबल पर रखा बम ब्लास्ट हो गया।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लन ने घटना की पुष्टि की है कि इस धमाके में कदमकुआँ थाने के एएसआई मदन सिंह का दाहिना हाथ जख्मी हो गया है। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले पटना विश्वविद्यालय के पटेल छात्रावास से इसे बरामद किया गया था।

कन्हैया लाल की बर्बर हत्या सुप्रीम कोर्ट के जिस जज ने नूपुर शर्मा के गले डाली, वे आरक्षण पर भी कर चुके हैं बेतुकी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज जेबी पारदीवाला ने शुक्रवार (1 जुलाई 2022) को भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को कड़ी फटकार लगाई। जज ने उन्हें पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की वजह से उदयपुर हत्याकांड के लिए दोषी ठहराया। दरअसल, मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “नूपुर शर्मा के बयान भड़काने वाले थे। देश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए केवल यह महिला ही जिम्मेदार है। इसके लिए उन्हें देश से माफी माँगनी चाहिए।” वहीं जज का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है।

जबकि यह लगभग सभी को मालूम है कि उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल तेली का गला मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काटा था और उसके बाद एक वीडियो बनाकर पूरी दुनिया के सामने इस जघन्य हत्या की जिम्मेदारी ली थी।

इससे पहले जस्टिस जमशेद बुर्जोर पारदीवाला भी आरक्षण पर ‘अनावश्यक टिप्पणी’ करके चर्चा में आए थे। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों में से एक जस्टिस जेबी पारदीवाला एक समय में गुजरात हाई कोर्ट के न्यायाधीश थे। उस वक्त ‘आरक्षण ने देश को बर्बाद किया’ कहने वाले गुजरात हाई कोर्ट के जज पारदीवाला को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने की माँग तक की गई थी। दिसंबर 2015 में, राज्यसभा में 58 सांसदों ने सभापति हामिद अंसारी को एक याचिका सौंपी थी, जिसमें उन्होंने जेबी पारदीवाला के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की माँग की थी। हालाँकि, याचिका के बाद, न्यायाधीश ने अपने फैसले से टिप्पणियों को यह कहते हुए हटा दिया था कि वे ‘प्रासंगिक और आवश्यक’ नहीं हैं।

दरअसल, उन्होंने हार्दिक पटेल के केस में कहा था, “अगर कोई मुझसे दो ऐसी चीजें बताने को कहे जिसने देश को बर्बाद कर दिया है या जिसने देश को सही दिशा में प्रगति नहीं करने दी है, तो मैं कहूँगा कि ये आरक्षण और भ्रष्टाचार हैं।” सभापति हामिद अंसारी के सामने पेश याचिका में सांसदों ने कहा था कि जज के मुताबिक, “जब संविधान बनाया जा रहा था, तब बताया गया था कि आरक्षण दस साल तक रहेगा। लेकिन आजादी के 65 साल बाद भी यह बना हुआ है।’ लेकिन हकीकत तो यह है कि 10 साल की सीमा केंद्र और राज्य विधायिका में अजा-अजजा के प्रतिनिधित्व पर थी, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नहीं।”

बता दें कि न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला मई 2028 में न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा के सेवानिवृत्त होने पर भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने के लिए तैयार हैं। उनका कार्यकाल 11 अगस्त, 2030 तक रहेगा। उन्होंने वकालत के पेशे में 1989 में कदम रखा था। वह अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जिन्होंने वकालत का पेशा अपनाया ‌है।

गौरतलब है कि राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल साहू की 28 जून 2022 को बर्बर तरीके से हत्या कर दी गई थी। मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने टेलर शॉप में घुसकर उन्हें काट डाला था। हत्यारों ने घटना का खौफनाक वीडियो भी बनाया था। इस मामले में कन्हैया लाल के 20 वर्षीय बेटे ने जो FIR दर्ज कराई है, उससे भी कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं।

इसके मुताबिक हमले से पहले उनसे इस्लामी हत्यारों ने कहा था कि तुमने हमारे नबी के खिलाफ लिखा इसलिए तुम्हें जीने का कोई अधिकार नहीं। तुम काफिर हिन्दुओं को हम अंजाम तक पहुँचाएँगे। न्यूज़ 18 के अनुसार दर्ज एफआईआर में कन्हैया लाल के बेटे के हवाले से कहा गया है, “ये 2 हत्यारे देश के लोगों में आतंक और तनाव फैलाने के साथ निर्मम हत्याएँ करने का एक गैंग चलाते हैं। इन्होने पूरी प्लानिंग के साथ मेरे पिता की हत्या कर दी। इसके बाद इन्होने बाकी लोगों को भी धमकी दी है।”

बिहार विधानसभा में RJD विधायक सऊद आलम ने किया वंदे मातरम् का अपमान: सीट से खड़े नहीं हुए, कहा- भारत हिंदू राष्ट्र नहीं

भारत में नियम-कायदों एवं कानूनों की अवहेलना एक प्रथा बन गई है। पार्षद से लेकर विधायक से लेकर सांसद तक राष्ट्रगीत का अपमान करने से बाज नहीं आ रहे हैं। बिहार में एक लालू यादव की पार्टी राजद (RJD) के विधायक सऊद आलम (RJD MLA Saud Alam) ने वंदे मातरम् के गायन के दौरान विधानसभा में खड़ा होने से मना कर दिया। इस पर बवाल हो गया है। विधायक का कहना है कि भारत हिंदू राष्ट्र नहीं है, एक लोकतांत्रिक देश है।

बिहार में गुरुवार (30 जून 2022) को विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन था। इसके समापन समय सदन में वंदे मातरम् गाया गया। इस दौरान सदन में उपस्थित विधायक खड़े हुए, लेकिन RJD विधायक सऊद आलम अपने स्थान पर बैठे रहे। इसके बाद बिहार से लेकर केंद्र तक राजनीति गरमा गई। 

ठाकुरगंज से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) विधायक सऊद आलम ने इस पर बेहद बेशर्मी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् राष्ट्रगान नहीं है, इसलिए मैं खड़ा नहीं हुआ। हमारा मुल्क अभी हिंदू राष्ट्र नहीं बना है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के दौरान वह खड़े हो सकते हैं, लेकिन वंदे मातरम् के दौरान उन्हें खड़ा होने के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता।

सऊद आलम के इस करतूत की आलोचना होने लगी तब राजद विधायक अख्तरुल इमान शाहीन और भाकपा माले (CPI-ML) के विधायक महबूब आलम ने सऊद का समर्थन किया। महबूब ने कहा, सऊद आलम ने जो किया, ठीक किया। हम सदन में नहीं थे। हम रहते तो हम भी खड़े नहीं होते।”

महबूब आलम ने कहा कि वह सदन का भगवाकरण नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि वे जन-गन-मन पहले भी गाते थे और अब भी गाते हैं, लेकिन सत्ता पक्ष का एजेंडा नहीं लागू होने दिया जाएगा। महबूब आलम ने कहा, “वंदे मातरम् भगवाकरण का गाना है। बिहार विधानसभा में इसे गाने की प्रक्रिया शुरू कर इसे भगवाकरण करने की कोशिश की जा रही है।”

इस पर भाजपा विधायक संजय सिंह (BJP MLA Sanjay Singh) ने कहा कि राजद विधायक ने हजारों देशवासियों और वीरों का अपमान किया है। उन्होंने कहा, “इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो राष्ट्रगीत नहीं गाए वह देशद्रोही है और ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। हमारी माँग है कि उन्हें सदन की सदस्यता से बर्खास्त किया जाए।” 

इससे पहले राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी (Abdul Bari Sidiqui) ने कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ बोलना उनके ईमान और इस्लाम के खिलाफ है। सिद्दीकी ने आगे कहा कि एक ईश्वर यानी अल्लाह को मानने वाला कभी भी वंदे मातरम् नहीं बोलेगा।

बता दें इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी AIMIM के विधायकों ने भी वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया था। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान विधायकों ने वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया था, जिसको लेकर काफी हंगामा हुआ था। भाजपा सदस्यों के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस पर अपनी आपत्ति जतायी थी।

वहीं, पिछले महीने के मध्य में उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर में नगरपालिका की बैठक में मुस्लिम महिला पार्षदों ने राष्ट्रीय गीत का अपमान किया था। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ था। वीडियो में देखा गया कि जब ‘वंदे मातरम्’ बजाया जा रहा है, तब सभी पार्षद इसके सम्मान में खड़े हो गए, लेकिन 4 बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाएँ बैठी रहीं।