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हत्यारे ने 11 दिन पहले ही कर दिया था ऐलान, राजस्थान पुलिस को नहीं दिखा? कानून व्यवस्था खुद के जिम्मे, लेकिन मोदी-शाह को कोस रहे CM गहलोत

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते हैं हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को सामने आकर देश के हालत पर बोलना चाहिए। जबकि सीएम की पुलिस अपराधियों पर नकेल कसने में विफल रही है। राजस्थान के उदयपुर में बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन वाले कन्हैया लाल को मौत के घाट उतारने से पहले इस्लामवादी हत्यारे ने 17 जून को अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। उसका 10 दिन पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में वह कह रहा है, “मैं मोहम्मद रियाज अंसारी राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से। ये वीडियो में जुम्मे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल ​करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”

उसने आगे कहा, “ये चिंता मत करना मेरे भाई कि तुम्हारी फैमिली का क्या होगा, कारोबार का क्या होगा। मेरी भी फैमिली है। मैं भी नौकरी करता हूँ, लेकिन मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है। क्योंकि मैं अपने रसूले पाक के लिए जी रहा हूँ। मेरा सब कुछ आप पर कुर्बान रसूल अल्लाह।”

हत्यारा अपनी कौम के और लोगों को कहता है, “घबराना नहीं जितने भी लोगों के सिर बचे हैं उन सबको काट देना। मौत आएगी तो जन्नत मिलेगी, जेल में भी गए तो कोई दिक्कत नहीं है। मैं उन दादाओं के लिए भी कहता हूँ, जो उदयपुर की सीट लेकर बैठे हैं। उनके लिए एक तोहफा है, जो मेरे घर से लेकर चले जाना।” इसके बाद वह अपने साथ में रखी हरे रंग की चूड़ियों को उठाता है और कहता है , “ये है हरे रंग की चूड़ियाँ हैं, जो उदयपुर के दादाओं के लिए रखी हुई है। जो अपनों को ही मारने में लगे हुए हैं और उनकी संपत्ति पर कब्जा करने में लगे हुए हैं। तुम्हारा इतना जिगरा नहीं है कि तुम गैर मुस्लिम के खिलाफ आवाज उठा सको। अल्लाह हर किसी को सिर कलम करने की हिम्मत नहीं देता है। तुम्हारे लिए बस सिर्फ इतना है कि तुम चूड़ियाँ पहन लो।”

वो आगे कहता है, “तुम इतने मर्डर कर देते हो, क्या एक मर्डर रसूल के नाम पर नहीं कर सकते हो। तुम सब पर लानत है। और उन पर भी जो मेरा ​वीडियो में देख रहे हैं। सरकार का फरमान है ‘गुस्ताख-ए-नबी की इक सजा, सर तन से जुदा। मोहम्मद रियाज अंसारी को दुआओं में याद रखना।”

बता दें कि टेलर कन्हैयालाल तेली की धानमंडी स्थित भूतमहल के पास सुप्रीम टेलर्स नाम से दुकान है। मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे बाइक पर सवार 2 लोग आए। नाप देने का बहाना बनाकर दुकान में गए। जहाँ कन्हैयालाल उनमें से एक नाप लेते हुए दिख रहे हैं जबकि दूसरा व्यक्ति वीडियो बना रहा है। इससे पहले की कन्हैयालाल कुछ समझ पाते तब तक दोनों इस्लामी हत्यारों ने हमला बोल दिया।

ये सवाल उठाता है मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर, जो इसका ठीकरा केंद्र सरकार के सिर पर फोड़ते हुए कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को देश के हालात पर सम्बोधन देना चाहिए। जबकि शासन व्यवस्था राज्य की सीएम के हाथों में है, पुलिस उनकी पिछले 10 दिनों से धमकियों के ऊपर आँख मूँदे बैठी रही। उदयपुर के डीएम हिन्दू-मुस्लिम वाला ज्ञान देते हुए कह रहे हैं कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती। जबकि अगर इन्होने समय रहते ज्ञान देने की बजाए एक्शन लिया होता तो शायद आज ये नौबत न आती।

इस्लाम के नाम पर हिंदुओं का सिर कलम और ‘प्लान जुबैर’: आतंकवाद का मजहब नहीं होता तो जमीयत की कानूनी मदद किसे?

आज एक और हिन्दू को सेक्युलरिज्म पर कुर्बान कर दिया गया। राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल का सिर धड़ से अलग कर दिया गया, धारदार हथियारों से। वो बेचारे होने काम में व्यस्त थे। कपड़े का नाप ले रहे थे, जो उनका व्यवसाय था। उसी दौरान पहुँचे जिहादियों ने न सिर्फ उनका गला रेत डाला, बल्कि इसका वीडियो भी शूट किया। वीडियो शूट करने का बाद दो हत्यारों ने खुद का वीडियो बना कर ऐलान भी किया कि नूपुर शर्मा का समर्थन करने की सज़ा दी गई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी ऐसा ही होगा।

‘गुस्ताख़-ए-नबी की एक सज़ा, सर तन से जुदा-तन सर से जुदा’ का नारा नया तो है नहीं। इस्लामी जिहादियों द्वारा ईशनिंदा का आरोप लगा कर सिर कलम करने की घटना भी नई नहीं है। घटना के बाद गर्व से बेख़ौफ़ इसकी घोषणा करने भी नया नहीं है। फिर ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ का रट्टा लगाते हुए इनके बचाव में सामने आने वाले बुद्धिजियों की करतूतें भी पहली बार नहीं हो रहीं। और हाँ, इनका केस लड़ने का नाम जमीयत जैसा कोई संगठन भी पहली बार नहीं करेगा।

कमलेश तिवारी हत्याकांड भला किसे नहीं याद होगा। ये दिखाता है कि इस्लामी जिहादी 4 साल बाद भी हत्या कर सकते हैं, कन्हैया लाल के मामले में 10 दिन बाद भी। उन्हें पैगंबर मुहम्मद के बारे में हदीस से कुछ कोट किए जाने पर भी गुस्सा आ सकता है, उन्हें ऐसा करने वालों के समर्थकों से भी गुस्सा आ सकता है। उन्हें कोई टीवी डिबेट भी उकसा सकता है। उन्हें कोई फेसबुक पोस्ट भी बुरा लग सकता है। लेकिन, सज़ा एक ही है – सर तन से जुदा।

उदयपुर के प्रशासन ने बयान भी दे दिया है कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती। भले ही हत्या पैगंबर मुहम्मद के नाम पर की गई हो, मुस्लिमों ने की हो, वीडियो में नबी का नाम लिया हो और इस्लामी जिहाद के लिए किया हो – लेकिन हत्यारों के मजहब के बारे में बताना गुनाह है, क्योंकि वो मुस्लिम हैं। हाँ, अगर किसी हिन्दू पर चाँटा मारने भर का आरोप तक भी लगा होता तो अलग बात थी। ‘भगवा आतंकवाद’ का नाम देकर उस पर अंतरराष्ट्रीय डिबेट बुलाई जा सकती है।

उदयपुर में कन्हैया लाल का शव काफी देर तक दुकान के बाहर पड़ा था, खून से लथपथ। उधर हत्यारे हँसते हुए वीडियो बनाते रहे, देश के प्रधानमंत्री के साथ ऐसा ही करने की धमकी देते रहे। धानमंडी स्थित भूतमहल के पास ‘सुप्रीम टेलर्स’ नाम से वो दुकान चलाते थे। उन्हें लगातार धमकी मिल रही थी, लेकिन कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान की नकारी पुलिस ने सुरक्षा नहीं दी। नामजद रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। 6 दिन डर के मारे उन्होंने दुकान तक नहीं खोली, लेकिन आरोपितों पर कार्रवाई नहीं हुई।

हर कुछ दिन पर एक हिन्दू की हत्या कर दी जाती है, लेकिन जिहादियों का कोई नाम तक लेने की हिम्मत नहीं करता। इससे उनकी हिम्मत और बढ़ती चली जाती है। गुजरात में किशन भरवाड़ की हत्या आपको याद होगी। एक हट्टे-कट्टे युवक को मौत की नींद सुला दिया गया था। लेकिन, हिन्दुओं को याद दिलाया जाता रहता है कि तुम पर फलाँ साल के फलाँ महीने में फलाँ मुस्लिम की दाढ़ी नोचने के आरोप लगे थे, इसीलिए दोषी तुम ही हो।

हम उस दौर में रह रहे हैं जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को ख़त्म कर दिया गया, बांग्लादेश में उनके पर्व-त्योहारों में उत्पात मचाया जाता है, अफगानिस्तान से उन्हें अपने पवित्र ग्रन्थ वापस लेकर आने होते हैं और अरब मुल्कों में उन्हें शरिया का पालन करना पड़ता है। हम उस दौर में रह रहे हैं जहाँ दुनिया के लगभग सरे आतंकी संगठन खुद के इस्लामी जिहादी होने का दावा करते हैं, लेकिन फिर भी हमें रोज सुनाया जाता है कि उनका कोई मजहब नहीं होता।

ये सब हिन्दुओं को भयभीत रखने के लिए किया जा रहा है। दिल्ली सल्तनत और मुगलों के समय जैसे भालों के ऊपर हिन्दुओं-सिखों के कटे हुए सिर सजा कर रैलियाँ निकाली जाती थीं और हिन्दुओं के कटे हुए सिरों का पहाड़ खड़ा किया जाता था, आज कुछ वैसा ही छिटपुट तरीके से किया जा रहा है। इरादा वही है – तुम डर कर रहो। सबसे बड़ी बात कि मानवाधिकार संगठनों की नजर में पीड़ित यहाँ वो नहीं होता जिसका गला कट जाता है, वो होता है जो गला काटता है, क्योंकि वो मुस्लिम है।

ये प्रक्रिया पूरी दुनिया में समान ही है। ISIS जैसा खूँखार आतंकी संगठन लोगों को लाइन में बिठा कर उनका गला रेत देता है। फ़्रांस में शिक्षक सैमुअल पैटी का गला रेत दिया जाता है। कारण – पैगंबर मुहम्मद का कार्टून दिखाने के आरोप। इसी आरोप में शार्ली हेब्दो मैगजीन के दफ्तर में घुस कर नरसंहार किया गया था। राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सरकार है, ऐसे में कोई कथित बुद्धिजीवी इस घटना के खिलाफ बिना हिन्दुओं को गाली दिए हुए बोलेगा इस पर शक है।

अभी मोहम्मद जुबैर, जो कई वर्षों से हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करता आ रहा है और जिसने अपने अरबी आकाओं को नूपुर शर्मा के टीवी डिबेट के बयान के बारे में बताया था, उसकी कानूनी प्रक्रिया से हुई गिरफ़्तारी के विरोधी में हिन्दुओं को क्या नहीं कहा गया। जहाँ पुलिस और न्यायपालिका अपना काम कर रही थी, शिकायतकर्ता था, सबूत सोशल मीडिया पर उपलब्ध थे – वहाँ कार्रवाई के लिए एडिटर्स गिल्ड जैसी संस्था से लेकर बड़े-बड़े लिबरल गिरोह के पत्रकारों ने आपातकाल की घोषणा कर दी।

क्या किसी को गिरफ्तार किया जाना किसी अपराध के लिए, किसी निर्दोष का गला रेत दिए जाने से ज्यादा जघन्य अपराध है? क्या हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने वाले के खिलाफ शिकायत करना, किसी आम हिन्दू का सिर कलम कर दिए जाने से बड़ा गुनाह है? क्या एक महिला का समर्थन किया, जिसे जिहादियों की हजारों धमकियाँ मिल रही हों – ऐसा गुनाह है कि इसकी सज़ा सीधे मौत हो? क्या भारत में अब शरिया कानून चलेगा?

हम उस देश में रहते हैं जहाँ एक अभिनेत्री किसी नेता का नाम लिए बिना भी आलोचना करती है तो उस पर 21 FIR दर्ज कर के उसे 39 दिन जेल में रखा जाता है, लेकिन कोई उफ्फ तक नहीं करता क्योंकि पीड़ित एक हिन्दू है और नेता भाजपा विरोधी। करौली से लेकर राजस्थान के तमाम इलाकों में हुए दंगों पर आवाज़ नहीं उठी, दोष केंद्र सरकार को दिया वहाँ के मुख्यमंत्री ने, आज उसी राजस्थान में इस तरह की घटना इसकी परिणीति के रूप में हुई है

उदयपुर में इंटरनेट बंद, रिपोर्ट्स में दावा- धमकियों के बाद कन्हैया लाल ने माँगी थी सुरक्षा, राजस्थान पुलिस ने इग्नोर किया, दोनों आरोपित गिरफ्तार

राजस्थान के उदयपुर में मंगलवार (28 जून, 2022) को नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करने के कारण टेलर कन्हैयालाल की गला रेतकर हत्या कर दी गई है। वहीं अब इस मामले में यह बात सामने आ रही है कि दुकानदार के 8 वर्षीय बेटे ने गलती से मोबाइल पर पोस्ट शेयर कर दिया था। जबकि हत्यारों ने वारदात को अंजाम देने के बाद एक वीडियो जारी करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी और नूपुर शर्मा की हत्या करने तक की धमकी दे डाली है।

रिपोर्ट के अनुसार, कन्हैयालाल का गला रेतने के दोनों आरोपितों को राजसमंद जिले के भीमा इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। हालाँकि, चौंकाने वाली बात यह है कि 17 जून को ही आरोपितों ने इस बात का ऐलान कर दिया था कि वह कन्हैयालाल की हत्या कर देंगे। उन्होंने बकायदा इसका वीडियो भी जारी किया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। ऐसे में राजस्थान पुलिस भी सवालों के घेरे में आ गई है। कन्हैयालाल ने धमकियों के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए सुरक्षा माँगी थी जिसे तब पुलिस ने इग्नोर कर दिया था। ऐसा कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है।

बता दें कि ये वारदात उदयपुर के धानमंडी थाना क्षेत्र में हुई। जहाँ मृतक कन्हैया लाल टेलरिंग की दुकान चलाते थे। वीडियो में दिख रहे हत्यारे उनकी दुकान पर कपड़े सिलवाने के बहाने आए और गर्दन काटकर उनकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं हत्यारों ने इस जघन्य वारदात का वीडियो भी बनाया और उसे वायरल कर दिया है।

वीडियो में हत्यारे तलवार पर खून और चेहरे पर हँसी के साथ कहते हैं, ”मैं मोहम्मद रियाज अंसारी और ये हमारे गौस मोहम्मद भाई, उदयपुर के अंदर जो माता स्टेट वाला है उसका सर कलम कर दिया है।” आगे मजहबी नारा लगाते हुए कहता है, ”हम जिएँगे आपके लिए और मरेंगे आपके लिए।”

हमलवार आगे पीएम मोदी की गर्दन काटने और नूपुर शर्मा को धमकी देते हुए कहता है, ”ये नरेंद्र मोदी सुन ले, आग तूने लगाई है और बुझाएँगे हम, इंसाअल्लाह मैं रब से दुआ करता हूँ कि यह छुरा तेरी गर्दन तक भी जरूर पहुँचेगा। और उस कुति** तक भी पहुँचेगा। उदयपुर वालों नारा लगाओ गुस्ताखे नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा। दुआओं में याद रखना।”

टेलर कन्हैयालाल की सिर कलम कर हत्या किए जाने के बाद इलाके में भारी तनाव का माहौल है। हालात पर काबू पाने के लिए उदयपुर जिले में 24 घंटे के लिए इंटरनेट बंद करने के साथ ही भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है। पुलिस की ओर से पूरे राजस्थान में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं घटना पर रोष जताते हुए स्थानीय लोग अपनी दुकानें बंद कर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

सड़कों पर विरोध प्रदर्शन को देखते हुए उदयपुर जिले में धारा 144 लगाई गई है। बाद में उदयपुर शहर के धानमंडी, घंटाघर, हाथीपोल,अम्बामाता, सूरजपोल, भूपालपूरा और सविना थाना क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर में हुए इस जघन्य हत्याकांड पर कहा कि यह बहुत ही दुखद घटना है। यह कोई छोटी घटना नहीं है, जो हुआ वह किसी की कल्पना से परे है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

अशोक गहलोत ने घटना को लेकर दो ट्वीट कर कहा, ”उदयपुर में युवक की जघन्य हत्या की भर्त्सना करता हूँ। इस घटना में शामिल सभी अपराधियों कठोर कार्रवाई की जाएगी एवं पुलिस अपराध की पूरी तह तक जाएगी। मैं सभी पक्षों से शान्ति बनाए रखने की अपील करता हूँ। ऐसे जघन्य अपराध में लिप्त हर व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी से अपील करता हूँ कि इस घटना का वीडियो शेयर कर माहौल खराब करने का प्रयास ना करें। वीडियो शेयर करने से अपराधी का समाज में घृणा फैलाने का उद्देश्य सफल होगा।”

साथ ही राजस्थान के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) ने बताया कि उदयपुर हत्याकांड पर पुलिस बलों की गतिशीलता बढ़ाने और अधिकारियों को जमीन पर बनाए रखने के लिए सभी एसपी और आईजी को राज्यव्यापी अलर्ट जारी किया गया है। हम आगे के निर्णय लेने के लिए कानून व्यवस्था की स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

वहीं, विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने उदयपुर हत्याकांड पर बोलते हुए कहा, “हमने सीएम से बात की है। इसमें शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को सहायता दी जाए। यह घटना एक व्यक्ति के कारण संभव नहीं है, यह किसी संगठन के कारण हो सकता है। यह भयावह और प्रशासन की विफलता है।”

”UAE भेजा गया था बैग: पिनराई विजयन के पूर्व प्रधान सचिव का दावा, स्वप्ना सुरेश ने भी कहा था- सोना तस्करी में CM और उनका परिवार शामिल

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन (Pinarayi Vijayan) ने सोमवार (27 जून 2022) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश के सभी दावों को बेबुनियाद बताते हुए कहा था, “केरल से यूएई में कोई बैग नहीं भेजा गया था।” हालाँकि, जब रिपब्लिक टीवी ने सीमा शुल्क विभाग द्वारा की गई पूछताछ में पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर के बयान को एक्सेस किया तो कुछ और ही पाया। दस्तावेज के मुताबिक, पूर्व प्रधान सचिव ने सीएम के दावे के विपरीत बयान दिया है और स्वप्ना सुरेश के बयान का समर्थन किया है।

जब सोना तस्करी मामले में सीमा शुल्क विभाग ने एम शिवशंकर से पूछा कि क्या 2016 के अंत या 2017 की शुरुआत में उन्होंने स्वप्ना सुरेश के माध्यम से केरल के मुख्यमंत्री (जो उस समय संयुक्त अरब अमीरात में थे) को डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में एक पैकेट भेजने का अनुरोध किया था। पूर्व आईएएस अधिकारी ने इस बात को स्वीकार किया।

उन्होंने कहा, “हाँ। माननीय मुख्यमंत्री पदभार ग्रहण करने के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अपनी पहली यात्रा पर गए थे। वहाँ अपनी यात्रा के दौरान वह कई अहम व उच्च पदों पर आसीन लोगों से मुलाकात कर रहे थे। हमेशा की तरह उस बार भी यह निर्णय लिया गया कि कुछ स्मृति चिन्ह गणमान्य व्यक्तियों को दिए जाने चाहिए।”

उन्होंने आगे खुलासा किया कि प्रतिनिधिमंडल के यूएई के लिए रवाना होने से पहले केवल एक स्मृति चिन्ह तैयार था। अन्य तीन या चार स्मृति चिन्ह जो बाद में तैयार किए गए थे, उन्हें यूएई तक पहुँचाना था और इसके लिए मैंने वाणिज्य दूतवास से मदद करने का अनुरोध किया था। उन्होंने सीमा शुल्क विभाग को बताया उसी दिन या अगले दिन यूएई में प्रतिनिधिमंडल को स्मृति चिन्ह वितरित करने की व्यवस्था की गई थी।

गौरतलब है कि सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने 7 जून 2022 को मुख्यमंत्री विजयन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। कोच्चि की अदालत में पेशी के बाद उसने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि विजयन डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी में शामिल थे। उसने कहा था, “इस मामले में मैंने अदालत से केरल के मुख्यमंत्री, उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, विजयन की पत्नी कमला, बेटी वीणा, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया है। साथ ही मैंने कोर्ट में अपनी सुरक्षा की माँग करते हुए याचिका भी दायर की है।”

क्या है गोल्ड स्मगलिंग केस

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर 2 जुलाई 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था।

उदयपुर में कन्हैया लाल को काट डाला, नुपूर शर्मा के समर्थन में किया था पोस्ट: वीडियो जारी कर हत्यारों ने PM मोदी का गर्दन काटने की भी धमकी दी

राजस्थान के उदयपुर में पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में 10 दिन पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले एक टेलर की गला रेत कर निर्मम हत्या कर दी गई है। ये वारदात उदयपुर के धानमंडी थाना क्षेत्र में हुई। जहाँ मृतक कन्हैया लाल टेलरिंग की दुकान चलाते थे। वीडियो में दिख रहे हत्यारे उनकी दुकान पर कपड़े सिलवाने के बहाने आए और गर्दन काटकर उनकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं हत्यारों ने इस जघन्य वारदात का वीडियो भी बनाया और उसे वायरल कर दिया है।

मामले में कहा जा रहा है कि पिछले कई दिनों से टेलर कन्हैयालाल तेली को कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा उसे धमकियाँ मिल रही थीं। इसकी नामजद शिकायत भी उसने पुलिस से की थी। वहीं आज मंगलवार (28 जून, 2022) को दिनदहाड़े उसकी दुकान में घुसकर भेषभूषा से मुस्लिम दिख रहे दो युवकों ने कई वार किए। फिर गला काट दिया। इस पूरे हमले का वीडियो भी सामने आया है। इसमें हत्यारे पहले टेलर से कपड़े नपवा रहे हैं फिर उस पर धारदार हथियार से हमला कर रहे हैं जिसकी शुरू में वीडियो में आवाजें ही सुनाई दे रही हैं। फिर कई तस्वीरों और वीडियो में कन्हैयालाल का शव खून से लथपथ जमीन पर पड़ा नजर आ रहा है।

कैसे दिया वारदात को अंजाम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टेलर कन्हैयालाल तेली की धानमंडी स्थित भूतमहल के पास सुप्रीम टेलर्स नाम से दुकान है। मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे बाइक पर सवार 2 लोग आए। नाप देने का बहाना बनाकर दुकान में गए। जहाँ कन्हैयालाल उनमें से एक नाप लेते हुए दिख रहे हैं जबकि दूसरा व्यक्ति वीडियो बना रहा है। इससे पहले की कन्हैयालाल कुछ समझ पाते तब तक दोनों इस्लामी हत्यारों ने हमला बोल दिया।

कहा जा रहा है एक के बाद एक उनपर आधा दर्जन से ज्यादा वार कर दिए। वहीं हत्यारों ने उनकी गर्दन रेत दी जिससे मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके बाद दोनों हत्यारे आराम से फरार हो गए। इस बीच सोशल मीडिया पर एक और वीडियो भी सामने आया है जिसमें दो वही दोनों तलवार लेकर अपना जुल्म कबूल करते दिख रहे हैं।

वीडियो में हत्यारे तलवार पर खून और चेहरे पर हँसी के साथ कहते हैं, ”मैं मोहम्मद रियाज अंसारी और ये हमारे गौस मोहम्मद भाई, उदयपुर के अंदर जो माता स्टेट वाला है उसका सर कलम कर दिया है।” आगे मजहबी नारा लगाते हुए कहता है, ”हम जिएँगे आपके लिए और मरेंगे आपके लिए।”

हमलवार आगे पीएम मोदी की गर्दन काटने और नूपुर शर्मा को धमकी देते हुए कहता है, ”ये नरेंद्र मोदी सुन ले, आग तूने लगाई है और बुझाएँगे हम, इंसाअल्लाह मैं रब से दुआ करता हूँ कि यह छुरा तेरी गर्दन तक भी जरूर पहुँचेगा। और उस कुति** तक भी पहुँचेगा। उदयपुर वालों नारा लगाओ गुस्ताखे नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा। दुआओं में याद रखना।”

वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, “उदयपुर में युवक की जघन्य हत्या की भर्त्सना करता हूँ। इस घटना में शामिल सभी अपराधियों कठोर कार्रवाई की जाएगी एवं पुलिस अपराध की पूरी तह तक जाएगी। मैं सभी पक्षों से शान्ति बनाए रखने की अपील करता हूँ। ऐसे जघन्य अपराध में लिप्त हर व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी से अपील करता हूँ कि इस घटना का वीडियो शेयर कर माहौल खराब करने का प्रयास ना करें। वीडियो शेयर करने से अपराधी का समाज में घृणा फैलाने का उद्देश्य सफल होगा।”

बेटे आकाश के लिए मुकेश अंबानी ने खाली की कुर्सी, डायरेक्टर पद से इस्तीफा: JIO को मिला 30 साल का चेयरमैन

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में अब नई पीढ़ी को कमान देने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसी कड़ी में मुकेश अंबानी ने ग्रुप के टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो के डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके बड़े बेटे आकाश अंबानी (Akash Ambani) को रिलायंस जियो (Reliance Jio) बोर्ड का नया चेयरमैन चुना गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड ने मंगलवार (28 जून 2022) को घोषणा की कि मुकेश अंबानी ने कंपनी के निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है। 27 जून को हुई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में आकाश अंबानी को बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दी गई। पंकज मोहन पवार अब कंपनी के प्रबंध निदेशक का पद संभालेंगे। वहीं, रमिंदर सिंह गुजराल और केवी चौधरी को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। रिलायंस जियो के नए चेयरमैन आकाश अंबानी पहले कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे।

बता दें कि 30 वर्षीय आकाश अंबानी ने ब्राउन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक किया है। इसके बाद वह अपने पारिवारिक कारोबार से जुड़ गए थे। वह जियो प्लेटफॉर्म्स, जियो लिमिटेड, सावन मीडिया, जियो इन्फोकॉम, रिलायंस रिटेल वेंचर्स के बोर्ड में शामिल हैं। जियो के 4जी इको सिस्टम को खड़ा करने का श्रेय काफी हद तक आकाश अंबानी को जाता है। दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों ने वर्ष 2020 में जियो में निवेश किया था, वैश्विक निवेश को भारत लाने में भी आकाश ने खूब मेहनत की थी।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में ही मुकेश अंबानी ने कंपनी में मैनेजमेंट लेवल पर बड़े बदलाव के संकेत दे दिए थे। उनका कहना था कि वह वरिष्ठ सहयोगियों के साथ मिलकर युवा पीढ़ी को बागडोर सौंपने की प्रक्रिया में तेजी लाना चाहते हैं। मुकेश अंबानी ने अपने पिता धीरूभाई की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में कहा था, “बड़े सपनों और नामुमकिन नजर आने वाले लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सही लोगों को जोड़ना और सही नेतृत्व होना जरूरी है। रिलायंस अब एक महत्वपूर्ण नेतृत्व बदलाव को अंजाम देने की प्रक्रिया में हैं। यह बदलाव मेरी पीढ़ी के वरिष्ठों से नए लोगों की अगली पीढ़ी को होगा।”

कर्नाटक सरकार काशी विश्वनाथ मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को देगी ₹5000 का अनुदान, बजट में 30 हजार यात्रियों के लिए ‘काशी यात्रा’ का प्रावधान

कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने सोमवार (27 जून 2022) को ‘काशी यात्रा’ परियोजना को मंजूरी दी। इसके तहत वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर जाने के इच्छुक 30,000 तीर्थयात्रियों को 5,000 रुपए प्रतिव्यक्ति नकद सहायता दी जाएगी। इसके लिए धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के कमिश्नर को ‘काशी यात्रा’ के लिए स्वीकृत सात करोड़ रुपए का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया है। 

राज्य के धार्मिक बंदोबस्ती और हज एवं वक्फ मंत्री शशिकला जोले ने कहा कि इस योजना का लाभ सिर्फ कर्नाटक के मूल निवासी ही उठा सकते हैं। मूल निवास का प्रमाण पत्र के रूप में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड या राशन कार्ड आदि देना होगा।

मंत्री ने कहा कि काशी यात्रा का लाभ लेने वाले जो भी आवेदक होंगे, उनकी आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। इसके लिए उन्हें अपना आयु प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित ‘काशी यात्रा’ का लाभ कोई भी तीर्थयात्री अपने जीवन में सिर्फ एक बार ही ले सकता है।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने 1 अप्रैल से 30 जून तक काशी विश्वनाथ मंदिर की यात्रा की थी और इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें अपने दर्शन टिकट या प्रतीक्षा सूची, ‘पूजा रसीद’ जैसे प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। उन्हें तय प्रारूप में इसे धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के कमिश्नर के यहाँ जमा कराना होगा।

बता दें कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 2022-23 के बजट में काशी यात्रा के लिए 5,000 रुपए का अनुदान देने की घोषणा की थी। काशी यात्रा अनुदान योजना 2022 के लाभ उन लोगों के लिए लाई गई है, जो काशी की यात्रा तो करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण ऐसा नहीं कर पाते। 

कोर्ट ने जुबैर को 4 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा, काम नहीं आई वामपंथी वकील की दलील, कहा था – मजहब के कारण बना रहे निशाना

हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले मोहम्मद जुबैर को दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया है। DCP केपीएस मल्होत्रा ने उन आरोपों को नकार दिया है कि मोहम्मद जुबैर की गिरफ़्तारी राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि उसके आपत्तिजनक ट्वीट के कारण ट्विटर पर घृणास्पद बयानों, की झड़ी लग गई, जो सांप्रदायिक सौहार्द के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस की जाँच में 2 चीजें महत्वपूर्ण थीं – गैजेट्स और मंशा। पुलिस ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में मोहम्मद जुबैर के बैंक खाते से 50 लाख रुपए से भी अधिक का लेनदेन हुआ है।

दिल्ली पुलिस के अधिकारी ने बताया कि मोहम्मद जुबैर इन दोनों ही मामलों में कपटी निकला। उसने अपने मोबाइल फोन को फॉर्मेट कर लिया था। गिरफ़्तारी का आधार यही बना। पुलिस अधिकारी ने कहा, “अगर आप सोशल मीडिया पर किसी विचार को आगे बढ़ाते हैं, ये आपके विचार हो जाते हैं। रीट्वीट करना और ये कहना कि मुझे कुछ नहीं पता – दोनों एक साथ नहीं चल सकता। जिम्मेदारी आपकी है। समय मायने नहीं रखता, क्योंकि एक रीट्वीट और चीजें नई हो जाती हैं।”

डीसीपी KPS मल्होत्रा ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति कई मामलों में नामजद है तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उससे उन सभी मामलों में पूछताछ करें। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायपालिका शामिल है, उसकी कस्टडी दी गई और जमानत नामंजूर कर दी गई, इसीलिए इस केस में कुछ दम तो होगा। उन्होंने कहा कि इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बता देना सही नहीं है। उन्होंने बताया था कि पुलिस इस मामले में मोहम्मद जुबैर के और रिमांड की माँग करेगी।

नए वीडियो में मोहमद जुबैर को पटियाला हाउस कोर्ट ले जाए जाते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान उसने अपनी रंग-बिरंगी टोपी और मास्क से अपने चेहरा को ढके रखा। इससे पहले उसे रात को गिरफ्तार किए जाने के बाद मात्र एक दिन के ही रिमांड पर भेजा गया था। मोहम्मद जुबैर की तरफ से ताज़ा सुनवाई में अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर पेश हुईं। उन्होंने बताया कि जुबैर AltNews में काम करता है और उसका काम फैक्ट-चेक का है, क्योंकि आजकल खासा दुष्प्रचार और झूठी खबरें सोशल मीडिया में हैं।

उन्होंने दावा किया कि इस ट्वीट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। साथ ही हड़बड़ी में साइन करा कर गिरफ्तार किए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने बताया कि जिस तस्वीर को लेकर विवाद है, वो ‘किसी से ना कहना (1983)’ फिल्म का है। साथ ही दावा किया कि किसी तरह की भी एडिटिंग नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ये आज़ाद देश है और लोग जो चाहे बोल सकते हैं। उन्होंने इस केस को मूर्खता करार दिया। उन्होंने इसे दुर्भावनापूर्ण टार्गेटिंग करार दिया।

उन्होंने कहा कि ये एक फिल्म का दृश्य है, जिसमें हनीमून पर जाने वालों का मजाक बनाया गया है। उन्होंने इसे कानून का उल्लंघन और प्रताड़ना करार दिया। साथ ही पुलिस पर रिमांड कॉपी तक न दिए जाने का आरोप मढ़ा। वृंदा ग्रोवर ने दावा किया कि जब कई अन्य लोग इसी चीज को शेयर कर रहे हैं तो सिर्फ जुबैर की गिरफ़्तारी क्यों हुई, क्या मजहब और काम के कारण? वृंदा ग्रोवर ने दावा किया कि जुबैर ने शक्तिशाली लोगों को चनौती दी है और शिकायत दर्ज कराने वाला ट्विटर हैंडल ‘हनुमान भक्त’ किसी समुदाय या समाज का प्रवक्ता नहीं है।

उन्होंने अदालत में लोकतंत्र की भी दुहाई दी। साथ ही ‘सत्ता के सामने सच्चाई’ बोलने पर निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया। इसके बाद अदालत में फिल्म का सीन भी चलाया गया। वहीं दिल्ली पुलिस ने बताया कि मोहम्मद जुबैर ने महाभारत से जुड़े ट्वीट्स कर मजाक बनाया था और फोन ब्लेंक लेकर पूछताछ के समय आया था। कोर्ट ने उसे 4 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया।

बिहार में अग्निपथ का विरोध कर रहे थे कॉन्ग्रेसी, नारे लगे- कन्हैया कुमार देशद्रोही है: राजस्थान में पार्टी के मंच से ही युवक ने गिना दिए अग्निवीर के फायदे

अग्निपथ योजना को लेकर कॉन्ग्रेस का विरोध राजस्थान से लेकर बिहार सहित कई राज्यों में उसी पर भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है। पटना में जहाँ आज मंगलवार (28 जून, 2022) को अग्निपथ योजना के विरोध में भाषण देने पहुँचे कन्हैया कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए, वहीं कल राजस्थान के झुंझनूं में भी अग्निपथ योजना के विरोध में चल रहे कॉन्ग्रेस के धरने में लात-घूँसे चले थे। दरअसल, कॉन्ग्रेस कई राज्यों में अग्निपथ योजना के खिलाफ धरना कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसी कड़ी में जहाँ आज कन्हैया कुमार को पब्लिक का विरोध झेलना पड़ा वहीं कल झुंझुनूं में धरने के बीच ही कॉन्ग्रेसियों ने एक योजना के फायदे गिना रहे युवक की पिटाई कर डाली।

अब पहले बात कर लेते हैं पटना की जहाँ जैसे ही कन्हैया कुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को अग्निपथ योजना के खिलाफ संबोधित करना शुरू किया, तो लोगों का एक समूह अग्निपथ योजना के समर्थन में नारे लगाने लगा। साथ कॉन्ग्रेस नेता कन्हैया कुमार के खिलाफ “कन्हैया कुमार देशद्रोही है,” के नारे लगाए जाने लगे। जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। वीडियो में बिहार कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं और कन्हैया कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे युवाओं के बीच हाथापाई होती दिखाई दे रही है।

हालाँकि, इस मामले में यह भी कहा जा रहा है कि नारेबाजी कर रहे लोग थोड़ी ही देर में वहाँ से चले गए वहीं रैली को संबोधित करते हुए कन्हैया कुमार ने भर्ती योजना को तत्काल वापस लेने की माँग की। उन्होंने कहा, “अग्निपथ योजना केवल सुरक्षा बलों को अनुबंधित करने की दिशा में एक कदम है क्योंकि भर्ती किए गए लोगों को उनके कार्यकाल के बाद पेंशन नहीं दी जाएगी।”

कहा जा रहा है कि देश के कई जगहों पर जब अग्निपथ का विरोध शांत हो चुका है। तमाम उपद्रवियों की गिरफ़्तारी भी हुई है वहीं कॉन्ग्रेस इस मुद्दे को जिन्दा रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी का कहना है कि राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में इस योजना के खिलाफ कॉन्ग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रैलियाँ कीं।

वहीं बिहार में कन्हैया कुमार के विरोध रैली में उनके खिलाफ लगे देशद्रोही नारे को लेकर भाजपा ने भी निशाना साधा। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोग भारत के सशस्त्र बलों का अपमान सहने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने सेना का अपमान किया, जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों को कमजोर किया, वे अब लोगों के क्रोध का सामना कर रहे हैं। लोग भारतीय सुरक्षा को कमतर नहीं आँक सकते। पूरे देश ने देखा है कि कन्हैया कुमार अफजल गुरु के साथ कैसे खड़े थे।”

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से अग्निपथ के विरोध में उतरी कॉन्ग्रेस ने कल सोमवार (27 जून, 2022) राजस्थान में भी कई जगहों पर विरोध में धरना प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसी कड़ी में पर कॉन्ग्रेस की ओर से अग्निपथ योजना के खिलाफ झुंझनूं कलेक्ट्रेट पर धरना दिया गया। जहाँ कॉन्ग्रेस के झुंझुनूं ब्लॉक अध्यक्ष तैयब अली ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। वहीं इसी कार्यक्रम में जगदीप नामक एक युवा छात्र ने कॉन्ग्रेस से परमिशन लेकर जैसे ही मंच से अग्निपथ योजना के फायदे बताने शुरू की मामला हाथापाई की आ गई।

यहाँ धरने का संचालन कर रहे जिला कॉन्ग्रेस के महामंत्री खलील बुड़ाना युवक पर भड़क गए। उन्होंने युवक से माइक छीन लिया। इसके बाद पहले उसे भाग जाने के लिए कहा। लेकिन जल्द ही आपा खोते हुए खलील बुड़ाना ने युवक के साथ मारपीट की और उसे सड़क पर दौड़ाकर लात मार दी। कहा जा रहा है मौके पर मौजूद पुलिस के जवान भी धरने पर आ गए। पुलिस युवक को हिरासत में लेकर अपने साथ गई है।

अलीगढ़ में शिक्षिका ताहिरा परवीन ने शिक्षा अधिकारी के माथे पर तिलक लगा किया स्वागत, मुस्लिम टीचर हराम बता पढ़ाने लगे ईमान का पाठ

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का तिलक करके स्वागत करने पर मुस्लिम महिला शिक्षिका का उसके कौम के साथी शिक्षक मजाक बना रहे हैं और तरह-तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने जाँच कराने और दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कही है।

दरअसल, जवां ब्लॉक में कार्यरत शिक्षिका ताहिरा परवीन ने कहा कि 15 जून 2022 को जब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सतीश चंद्र ज्वॉइन करने आए तो परंपराओं को निभाते हुए उन्होंने उनका तिलक कर स्वागत किया। यह फोटो उर्दू शिक्षक मोहम्मद अहमद के हाथ लग गया और उन्होंने इसको लेकर मुद्दा बनाना शुरू कर दिया।

शिक्षिका ने कहा कि उर्दू शिक्षक मोहम्मद अहमद फोटो को लेकर शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में तरह-तरह के अनर्गल बयानबाजी करने लगे। उन्होंने कहा कि अहमद की इस सोच खराब है और उसे देखकर ऐसा लगता है कि वह मामले को हिंदू-मुस्लिम कराना चाहते हैं।

शिक्षिका ताहिरा ने कहा, “जब बीईओ आए तो वहाँ पर मैं अकेली महिला थी, जिसके चलते मुझसे तिलक करने को कहा गया। एक अधिकारी का तिलक करने से मेरा धर्म परिवर्तन तो नहीं हो गया। मैंने विभाग की परंपराओं को निभाया और एकता का संदेश दिया।”

शिक्षिका ने कहा कि एक शिक्षक का काम इंसानियत का पाठ पढ़ाना है और उनका धर्म इंसानियत का धर्म है। उन्होंने कहा कि जब उर्दू शिक्षक ऐसी बात कह रहे हैं तो वह बच्चों को कैसी शिक्षा दे रहे होंगे समझा जा सकता है। परवीन ने कहा कि उन्होंने इसकी शिकायत कर दी है।

उर्दू शिक्षक मोहम्मद अहमद ने कहा कि मुस्लिम टीचर हिंदू धर्म का पालन कितनी खुशी से कर रही है। इनका ईमान मर गया है। अहमद के लगातार बयानबाजी के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और इसको लेकर जाँच बैठा दी गई।

इसके बाद मोहम्मद अहमद ने कहा कि शिक्षिका को लेकर उन्होंने जो कहा है, वह उनका निजी विचार है। उन्होंने कहा कि अपने निजी विचार प्रकट करना उनका संवैधानिक अधिकार है। उर्दू शिक्षक मोहम्मद अहमद ने कहा, “मैं इस्लाम का मानने वाला व्यक्ति हूँ और इस्लाम में तिलक लगाना गलत है।”

अलीगढ़ के बेसिक शिक्षा अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी, मुख्यालय और नगर को जाँच दे दी है और 3 दिन के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का पोस्ट करना गलत है और जो भी गलत होगा इस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।