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‘आतंक को नहीं सहेंगे, सब हिन्दू एक रहेंगे’: उदयपुर-अमरावती की घटनाओं के विरोध में हिन्दुओं ने बुलाया पाली बंद, हनुमान चालीसा का पाठ

बीजेपी से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के कथित बयान को लेकर राजस्थान के उदयपुर में हिन्दू कन्हैयालाल और महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या के विरोध में अब हिन्दू संगठन खड़े हो गए हैं। इसी क्रम में बुधवार (6 जुलाई 2022) को सर्व हिन्दू समाज की ओर से पाली बंद आह्वान किया गया।

इस मौके पाली जिले (राजस्थान) सूरजपोल चौराहे पर हजारों की तादात में हिन्दुओं ने रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुँचे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस रैली में करीब 4-5 हजार लोग शामिल थे। रैली के दौरान संत सुरजनदास, संत ओम महाराज 72 फीट बालाजी, संत परशुराम और संत रामविचार के नेतृत्व में पाँच बार सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इस मौके पर संतों ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर इस्लामिक हत्याएँ करने वालों का संरक्षण करने का आरोप लगाया।

रैली के दौरान लोगों ने अपने हाथ में तख्तियाँ ले रखी थी। इसमें लिखा था, आतंक को नहीं सहेंगे, सब हिन्दू एक रहेंगे। उसके साथ ही जय श्री राम के नारे भी लगाए गए। कलेक्ट्रेट में संतों ने जिलाधिकारी नमित मेहता से मिलकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को सर्व समाज की बैठक में 65 समाजों के 850 से भी अधिक लोग मौजूद रहे। इसके अलावा इस बंद को बार एसोसिएशन, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और पाली जिला केमिस्ट एसोसिएशन ने सपोर्ट किया।

राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में हिन्दू समाज में गहलोत सरकार को बर्खास्त कर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने, पीएफआई को बैन करने, मृतक के परिवार को मुआवजा और सुरक्षा देने, देश विरोधी तत्वों पर कार्रवाई करने और उदयपुर-अमरावती जैसी घटनाओं को अंजाम देने वालों को फाँसी देने की माँग की गई है।

इसके अलावा इस रैली में बीजेपी के जिलाध्यक्ष मंशा राम परमार, बीजेपी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मनोहर कंवर, विधायक ज्ञानचंद परमार समेत कई नेता भी शामिल रहे।

कन्हैया लाल की पत्नी को ₹1 करोड़, उमेश कोल्हे के परिवार को ₹30 लाख: कपिल मिश्रा के आह्वान पर हिंदुओं ने जुटाया था चंदा

राजस्थान के उदयपुर जिले में कन्हैयालाल की जघन्य हत्या के बाद उनके लिए फंड जुटाने वाले बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने आज बुधवार (6 जुलाई, 2022) को उनके परिवार के नाम एक करोड़ की राशि ट्रांसफर कर दी। साथ ही उन्होंने कहा कि कल अमरावती के उमेश कोल्हे के परिवार से मिलकर 30 लाख रुपए की सहायता राशि दूँगा एवं आगे की कानूनी लड़ाई में भी साथ देने का वादा किया।

इस बात की जानकारी उन्होंने ट्विटर पर दो अलग-अलग ट्वीट के जरिए दी। पहले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कन्हैया लाल जी की धर्मपत्नी के खाते में आपके दिए एक करोड़ रुपए पहुँच गए हैं।” जिसका उन्होंने स्क्रीनशॉट भी साझा किया।

दूसरे ट्वीट में कपिल मिश्रा ने महाराष्ट्र के अमरावती के उमेश कोल्हे के पपरिवार को सहायता राशि देने के बारे में जानकारी देते हुए लिखा, “कल अमरावती में उमेश कोल्हे जी के परिवार से मिलूँगा। हम उनके परिवार को ₹ 30 लाख की सहायता दे रहे हैं। कानूनी लड़ाई में भी हमेशा साथ खड़े रहेंगे।”

बता दें कि कन्हैयालाल और उमेश कोल्हे दोनों की हत्या बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन के कारण कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा कर दी गई थी। दोनों मामलों की जाँच NIA कर रही है। इसी बीच पिछले शनिवार को जब कपिल मिश्रा कन्हैयालाल के परिवार से मिलने पहुँचे तभी उन्होंने उनके परिजनों से मुलाकात के बाद उन्हें एक करोड़ रुपए सहायता राशि देने की घोषणा की थी। इस दौरान कपिल मिश्रा ने मृतक के बेटे सहित उनके पत्नी और बहिनों से भी मुलाकात की थी। करीब 20 मिनट की मुलाकात के दौरान कपिल मिश्रा ने कहा था कि कन्हैयालाल के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन उनकी सहायता कर उनके परिवार के बोझ को कम किया जा सकता है।

बता दें कि कपिल मिश्रा ने मृतक कन्हैयालाल के घर पर मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए हत्या करने वाले लोगों को चुनौती देते हुए कहा कि जिन लोगों ने हत्या की है, वे लोग न तो हरा सकते और न ही डरा सकते है। जब-जब देश में आंतक का साया रहा है तब-तब लोगों ने डटकर मुकाबला किया है। कपिल मिश्रा ने कन्हैयालाल के परिवार से भी मिलकर कहा था कि न तो उनके परिवार को कभी अकेला पड़ने देगें न ही कमजोर पड़ने देगें।

गौरतलब है कि कपिल मिश्रा ने कन्हैयालाल के परिवार को सहयोग करने के बारे में बताते हुए कहा कि कन्हैयालाल के परिवार के लिए देश ही नहीं बल्कि कई अन्य देशों से 14 हजार से ज्यादा लोगों ने छोटी-छोटी राशि प्रदान की है। एक करोड रूपए का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अभी तक एक करोड 70 लाख रूपए इकठ्ठा हो चुका है। इसलिए कन्हैयालाल के साथ-साथ अन्य लोगों को भी सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

बता दें कि लगातार हिन्दुओं की मदद करने वाले बीजेपी नेता कपिल मिश्रा को भी हाल ही में जान से मारने की धमकी दी गई है। हिंदू सेना के दिल्ली चैप्टर के अध्यक्ष दीपक मलिक ने भी इस्लामी कट्टरपंथियों से धमकी मिलने की शिकायत पुलिस से की है।

मिश्रा को धमकी भरा ई-मेल भेजा गया है। मिश्रा ने इस मेल का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर साझा किया है। ईमेल करने वाले अकबर आलम ने लिखा है, “कपिल मिश्रा आतंकवादी तुमको ज्यादा दिन तक जीने नहीं देंगे। मेरे आदमी ने प्लान बना लिया है तुमको गोली मारने के लिए।” यह ईमेल रविवार (3 जुलाई 2022) शाम 7:48 पर भेजा गया था।

हिन्दुओं पर ‘जूते चलाने’ की बातें, मीम का फैक्ट चेक, 4 जिलों में दंगे लेकिन पीछा अमन चोपड़ा का: चिश्ती को बचाने वाली राजस्थान पुलिस, कन्हैया लाल को नहीं दी थी सुरक्षा

राजस्थान पुलिस लोगों के निशाने पर है। कारण ये है कि वो एक ऐसे मुस्लिम कट्टरपंथी को बचा रही है, जिसने एक महिला की गर्दन पर इनाम रखा है। वो एक ऐसे मुस्लिम कट्टरपंथी को बचा रही है, जो अजमेर के ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह का खादिम है। वो एक ऐसे मुस्लिम कट्टरपंथी को बचा रही है, जिसके ऊपर पहले से 13 मामले दर्ज हैं और जो हिस्ट्रीशीटर है। अब भला क्यों न उस पर इस्लामी कट्टरवादियों का साथ देने का आरोप लगाया जाए?

राजस्थान पुलिस का एक नया वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वो सलमान चिश्ती से कहते दिख रही है, “बेफिकर रह, सब बात हो गई है।” आखिर एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी से पुलिस के इस प्रेम का क्या कारण हो सकता है? यही कि राजस्थान में मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कुख्यात कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार है? यही कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पूरी सियासत ही हर एक घटना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराने पर टिकी हुई है।

राजस्थान पुलिस का वायरल वीडियो: सलमान चिश्ती से कहा – बोल देना नशे में था

राजस्थान पुलिस का एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके बाद उस पर इस्लामी कट्टरवादियों से मिले होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसमें राजस्थान पुलिस सलमान चिश्ती को गिरफ्तार कर के ले जा रही है। साथ ही ‘आ जाओ’ की आवाजें आ रही हैं। वीडियो में कोई कहता है, “हम साथ में ही हैं, चिंता मत कर।” इसमें पुलिस वाले ‘चलो-चलो, बेफिकर रह’ भी कह रहे हैं। साथ ही पूछते हैं, “कौन सा नशा कर रखा था वीडियो बनाते समय?”

इसके बाद पुलिस वाले सलमान चिश्ती को सलाह देते हैं कि बोल देना, नशे में था। राजस्थान पुलिस ने अपने बयान में भी कहा था कि खादिम भड़काऊ बयान देने वक्त नशे में था। अजमेर पुलिस बार-बार जोर दे रही है कि वो नशे में था। भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इसे सीएम अशोक गहलोत का हिन्दू विरोधी चेहरा का सबूत करार दिया। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए बताया कि खादिम सलमान चिश्ती कह रहा है कि वो नशा नहीं करता, लेकिन इसके बावजूद राजस्थान पुलिस उससे कहती है, “बोल देना नशे में था, ताकि बचाया जा सके।”

एक महिला की गर्दन पर इनाम रखने वाले व्यक्ति के साथ राजस्थान पुलिस की इस मिलीभगत के बाद कॉन्ग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं। अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के दरगाह के खादिमों का शासन चलता है या फिर कानून का? एक और खादिम सैयद सरवर चिश्ती खुलेआम भारत को हिला देने की धमकी दे रहा है और कह रहा है कि अजमेर के दुकानदार खाते दरगाह की हैं और नूपुर शर्मा के समर्थन में दुकानें बंद रखते हैं, उनके साथ क्या सलूक हो। इन भड़काऊ बयानों पर क्या कार्रवाई होगी, जब गर्दन काटने वाले बयान को भी हल्के में लिया जा रहा।

‘नशे की हालत’ में क्यों अटकी है राजस्थान पुलिस? खादिम अपराध करेगा तो सज़ा क्यों नहीं पाएगा?

धमकी वाला वीडियो वायरल होने और काफी दबाव के बाद आखिरकार अजमेर पुलिस ने मंगलवार (5 जुलाई ,2022) रात उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) विकास सांगवान ने भड़काऊ बयान देने के आरोप में उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने भी कहा, “ऐसा लगता है कि वीडियो बनाते समय वह नशे की हालत में था।”

उल्लेखनीय है कि वीडियो वायरल होने के बाद सलमान चिश्ती के खिलाफ अजमेर के अलवर गेट थाने में मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद एएसपी विकास सांगवान ने कहा था कि उसकी तलाश की जा रही है। कश्मीर में उसका लोकेशन मिलने की बात कही जा रही है। एफआईआर के बाद भी एएसपी ने कहा था, “वीडियो में सलमान चिश्ती नशे की हालत में नजर आ रहा है।” ये हाल उस पुलिस का है, जहाँ गर्दन कट चुकी है जिहाद के नाम पर हाल ही में। उदयपुर की घटना से देश उबरा नहीं है।

जहाँ कुछ ही दिन पहले नूपुर शर्मा को बहाना बना कर ही किसी आम हिन्दू का सिर कलम कर दिया गया हो, वहाँ इसी तरह की धमकी को गंभीरता से न लिया जाना और इस पर कार्रवाई की बजाए धमकीबाज का बचाव करना उस पुलिस के बारे में क्या कहता है? पुलिस को पता है, कल को किसी और की भी गर्दन कट जाती है तो राज्य की कानून-व्यवस्था देखने वाले गृह मंत्रालय सँभालने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ये कह कर इतिश्री कर लेंगे कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री देश को सम्बोधित करें। फिर पुलिस कहेगी ये मजहब का मामला नहीं, जबकि गर्दन काटने वाला मजहब की बातें करते हुए ऐसा करेगा।

मीम का फैक्ट चेक करने वाली पुलिस से और भला क्या उम्मीद करे जनता?

ध्यान दीजिए, ये वही राजस्थान पुलिस है जिसकी रुचि गर्दन काटने की धमकी देने वालों को बचाने में तो है ही, साथ-साथ मीम का फैक्ट चेक करने में भी है। आखिरकार बहुत समय जो है इनके पास। जिस राजस्थान के जैसलमेर में पिछले 5 दशक से एक मौलवी गाजी फकीर की सामानांतर सत्ता चल रही हो और जिसका बेटा अशोक गहलोत सरकार में मंत्री हो, उस राजस्थान में पुलिस इस्लामी कट्टपंथियों पर कार्रवाई कैसे करेगी? जिस राजस्थान की सीमा आतंकी मुल्क पाकिस्तान से लगती हो, उस संवेदनशील इलाके में पुलिस का इस तरह का व्यवहार ‘टुकड़े-टुकड़े’ गिरोह को उत्साहित ही करेगा।

राजस्थान पुलिस और मीम पर आते हैं अब। इससे अंदाज़ा लगता है कि ये पुलिस कितनी गंभीर है, कितनी सजग है और इसके पास कितना दिमाग है। कन्हैया लाल का गला काटने वाले मोहम्मद रियाज अख्तर और मोहम्मद गौस की गिरफ़्तारी के बाद एक पत्रकार ने दोनों हत्यारों की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि राजस्थान की जेल में इन्हें बिरयानी परोसी जाएगी, अगर उत्तर प्रदेश होता तो? राजस्थान पुलिस फटाक से इसका फैक्ट चेक करने उतर गई।

राजस्थान पुलिस ने लिखा कि ये तथ्य गलत हैं, आरोपित बख्शे नहीं जाएँगी। सबसे बड़ी बात तो ये कि इसे उसने ‘फेक न्यूज़ अलर्ट’ की श्रेणी में डाल दिया। साथ ही ‘Fake’ का ठप्पा भी लगा दिया। असल में ये एक कहावत की तरह लिखा गया था। 26/11 मुंबई हमलों में पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने कई वर्षों तक जेल में बिरयानी खाई और उसे 4 साल बाद फाँसी हुई, इसीलिए धीमी न्यायिक व्यवस्था और जेल में अपराधियों-आतंकियों को मिले वाली सुविधाओं को निशाना बनाते हुए बिरयानी वाला तंज कसा जाने लगा।

किसी के विचार को, किसी के तंज को या फिर किसी के द्वारा भविष्य के लिए लगाई गई किसी अटकल को राजस्थान पुलिस ही फैक्ट-चेक कर सकती है। अब भविष्य में उस जेल में कभी बिरयानी बनती है जिसमें दोनों हत्यारों को रखा गया है, तो क्या राजस्थान पुलिस झूठी नहीं हो जाएगी? अगर मैं कहता हूँ कि राजस्थान पुलिस की कार्रवाई ऊँट के मुँह में जीरा के बराबर है, तो क्या वो मेरा फैक्ट-चेक कर के ये बोलेगी कि ये फेक न्यूज़ है, हमारी कार्रवाई ऊँट के मुँह में जीरा नहीं, कद्दू के बराबर है?

कन्हैया लाल के बार-बार आग्रह के बावजूद नहीं दी सुरक्षा: लापरवाह राजस्थान पुलिस, हिन्दू का हो गया सिर कलम

मीम का फैक्ट चेक करने वाली और एक महिला की गर्दन उड़ाने की धमकी देने वाले को बचाने वाली राजस्थान पुलिस ने अगर कन्हैया लाल की शिकायत और आग्रह पर जरा सा भी ध्यान दिया होता तो एक निर्दोष टेलर का सिर कलम नहीं हुआ होता। ये आरोप हमारे नहीं, कन्हैया लाल के परिजनों और इस घटना के चश्मदीद के हैं। कन्हैया लाल की शिकायत पर पुलिस ने जैसा रवैया दिखाया था उसके कारण चश्मदीद राजकुमार को प्रशासन की ओर से किए गए सुरक्षा के वादों पर भी नहीं भरोसा हो रहा है।

राजकुमार ने बताया था, “मास्टर जी (कन्हैया लाल) ने जब अपनी जान को खतरा बताया था तब पुलिस ने उन्हें 2 दिन की सुरक्षा दी थी। बाद में पुलिस ने CCTV लगवाने की सलाह देते हुए सुरक्षा हटा ली थी।” इसके बाद कन्हैया लाल ने 16 जून को दुकान में कैमरे भी लगवा लिए थे। हत्यारों ने दुकान में घुसने से पहले ही CCTV का कनेक्शन काट दिया था। अब उन्हें अपनी जान का ख़तरा सता रहा है, क्योंकि उनका कहना है कि राजस्थान पुलिस ने कुछ ऐसा ही भरोसा कन्हैया लाल को भी दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स से तो यहाँ तक पता चला था कि कन्हैया लाल की पत्नी का कहना था कि उनका पूरा परिवार खतरे में है, लेकिन घर के बाहर एक कॉन्स्टेबल तक की तैनाती नहीं है। कन्हैया लाल की पत्नी जसोदा देवी ने मुख्य सचिव उषा देवी से परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। वहीं आरोपित रियाज के आसींद स्थित घर के बाहर राजस्थान पुलिस ने कड़ा पहरा लगा रखा था। रियाज के परिवार के अन्य सदस्यों के घर के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती थी।

याद रखिए, ये वही राजस्थान पुलिस है जिसने कन्हैया लाल को सुरक्षा देने की बजाए उलटा उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और धमकियों के बाद ‘सुलह’ करवाने का दवा किया था। उनकी हत्या के बाद परिजन जिस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने जा रहे थे, वहाँ ले जाने में भी राजस्थान पुलिस ने आनाकानी की। पड़ोसी कन्हैया लाल की फोटो बाँट रहे थे, उनकी रेकी हो रही थी और इतने गंभीर मामले में कार्रवाई की बजाए ये पुलिस ‘समझौता’ करा रही थी।

जब राजस्थान में हो रहे थे हिन्दू विरोधी दंगे, तब राजस्थान पुलिस ने पीड़ित हिन्दुओं को ही बनाया निशाना

राजस्थान में हाल ही में एक के बाद एक दंगे हुए, लेकिन पुलिस सोई रही और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कहते रहे कि यहाँ तो कुछ हुआ ही नहीं है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस तरफ इशारा भी किया कि दंगों की आग में जलते राजस्थान में सीएम गहलोत ने वास्तविकता स्वीकार नहीं की। करौली में दंगे हुए, भीलवाड़ा में मुस्लिम भीड़ पर उत्पात मचाने के आरोप लगे और जोधपुर भी सांप्रदायिक दंगों की आग में जला, लेकिन एक SIT का गठन कर इतिश्री कर ली गई।

करौली में हिन्दू नववर्ष की शोभा यात्रा पर हमले के बाद जिस तरह से हिंसा हुई, उसके बाद राजस्थान पुलिस पर उलटा हिन्दुओं पर ही कार्रवाई के आरोप लगे। स्थानीय लोगों ने बताया था कि कैसे रामनवमी से 2 दिन पहले करौली के DM और SP ने सभी धर्मों के प्रतिनिधियों की एक सभा बुलाई और इस सभा में हिन्दुओं के लिए तमाम नियम और प्रतिबंध लगा दिए गए, शोभा यात्रा का रूट बदलवा दिया गया। एक हिन्दू ने बताया कि SP बार-बार कह रहे थे कि अगर रामनवमी जुलूस में 5 से अधिक लोग शामिल हुए तो जूते से मारूँगा।

ये भाषा है हिन्दुओं के लिए राजस्थान पुलिस की, जो मुस्लिम धमकीबाज को बचाने में दिन-रात एक कर रही है। भाजपा सांसद ने देखा कि मुस्लिमों की छतों पर पत्थर जमा के, लेकिन FIR चुन-चुन कर हिन्दुओं पर करने के आरोप लगे। हिन्दुओं का कहना है कि उन पर झूठे चार्ज लगाने के कारण कइयों की पढ़ाई-नौकरी बंद है तो कई घर से भाग कर रहने को मजबूर हैं। हिन्दू बच्चों के माता-पिता डरे हुए हैं और हिंदुत्व की बात करने वालों को निशाना बनाए जाने के आरोप लगे हैं।

जोधपुर में एक बार नहीं, कई बार दंगे हुए। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले में जून के पहले हफ्ते में ईंट-पत्थर जम कर चले। इससे पहले 2 मई को (ईद के मौके पर) भी जोधपुर में अल्लाह-हू-अकबर के नारों के साथ हिंसा हुई थी। स्वतंत्रता सेनानी बिस्सा जी की प्रतिमा पर कट्टरपंथी मुस्लिम इस्लामी झंडे लगा रहे थे, जिसका विरोध करने पर मुस्लिम भीड़ ने तलवार, सरिया, लाठी और तेजाब की बोतलों के साथ हमला बोल दिया।

करौली, जोधपुर और भीलवाड़ा के बाद अब राजस्थान के हनुमानगढ़ में साम्प्रदायिक तनाव की घटना हुई। वहाँ मंदिर के पास खड़ी लड़कियों से छेड़छाड़ से मना करने पर उनके ऊपर हमला किया गया। इससे पहले राजस्थान के भीलवाड़ा में हिंदू युवक की हत्या को अंजाम दिया गया था। अगले दिन हनुमानगढ़ में VHP नेता पर हमला हुआ। इन घटनाओं के दौरान पुलिस क्या कर रही थी? कितने दंगाइयों को पकड़ा गया? या फिर कार्रवाई के बिना दंगाइयों और जिहादियों का मनोबल बढ़ता चला गया?

इस्लामी जिहादियों पर कार्रवाई के लिए समय कहाँ? पत्रकारों की प्रताड़ना में लगी है राजस्थान पुलिस

राजस्थान की पूरी की पूरी सरकारी मशीनरी किस तरह हाथ धो कर ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमन चोपड़ा के पीछे पड़ी थी, ये हमने देखा। अदालत से राहत मिलने के बावजूद उनके घर पहुँच कर उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया गया। मीडिया चैनल के दफ्तर में राजस्थान पुलिस ने धावा बोल दिया। अलवर में मंदिर गिराए जाने पर शो करने पर उनके साथ ये सब हुआ। नोएडा तक पहुँच गई उनके लिए राजस्थान पुलिस। 6 घंटे पूछताछ के नाम पर खाना-चाय तक उन्हें नहीं लेने दिया गया। काश, इतना समय और संसाधन इस पुलिस ने दंगाइयों को पकड़ने में लगाया होता तो एक के बाद एक दंगे और हत्याएँ नहीं होतीं!

वहीं अगर अपराधी एक मौलवी हो तो राजस्थान में क्या होता है? उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या से पहले जिस मौलाना नदीम ने राजस्थान में भड़काऊ बयानबाजी की थी, उसे गिरफ्तारी के बाद सिर्फ 24 घंटों में जमानत मिल गई। समझिए, अदालत में किस तरह से राजस्थान पुलिस ने इस केस को रखा होगा। राजस्थान पुलिस ने भड़काऊ बयान देने के 28 दिन बाद दबाव में उसे गिरफ्तार किया था। उसने कहा था, मेरे नबी की शान में एक लफ्ज भी बोला तो याद रखो कि जुबान काट ली जाएगी। हाथ उठाओगे तो हाथ काट लिए जाएँगे। ऊँगली उठाओगे तो ऊँगली काट ली जाएगी। अगर निगाहें भी उठीं तो निकाल कर बाहर फेंक देंगे।”

‘तिरंगा अपने घर में रखो’: राष्ट्रीय ध्वज से भड़के फारूक अब्दुल्ला, BJP ने पूछा – आप कौन सा झंडा उठाएँगे? लाल या हरा?

अपने देश विरोधी बयानों के चलते अक्सर विवादों में घिरे रहने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर से उसी मानसिकता का प्रदर्शन किया है। बुधवार (6 जुलाई, 2022) को श्रीनगर में उनसे जब पत्रकारों ने केंद्र सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कश्मीरी में जबाव दिया, ‘तथैच पन्नी गेरे’ यानी कि तिरंगे को अपने घर में रखो।

फारूक अब्दुल्ला का ये बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसको लेकर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। पूरा मामला कुछ यूँ है कि फारुक अब्दुल्ला श्रीनगर में एक दुकान पर गए थे। वहाँ से निकलते वक्त उनका सामना पत्रकारों से हुआ। इस दौरान उनसे विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को लेकर सवाल किया गया। इसके जबाव में उन्होंने कहा कि 9 जुलाई को यशवंत सिन्हा खुद ही जम्मू-कश्मीर के दौरे पर आ रहे हैं और वो यहाँ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उसी दौरान सारी जानकारियाँ दी जाएँगी।

फिर क्या था, पत्रकारों ने केंद्र सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर उनसे सवाल पूछ लिया। इतना सुनना था कि आराम से पत्रकारों के सवालों का जबाव दे रहे फारूक अब्दुल्ला ने झट से कहा, तिरंगा अपने घर में रखो।’ इसके साथ ही वो तुरंत अपनी गाड़ी में बैठकर वहाँ से चले गए।

क्या है ‘हर घर तिरंगा’ अभियान

गौरतलब है कि आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार ने इसी साल 15 अगस्त के मौके पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान शुरू करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के इस अभियान के तहत देशभर के लोगों को अपने घरों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी के तहत जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण विभाग ने भी एक ऑर्डर जारी कर इस अभियान को सफल बनाने की अपील की है।

वो कौन सा झंडा उठाना चाहते हैं

फारूक अब्दुल्ला के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि ये वही लोग हैं, जो पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हैं और चीन से मिलकर अनुच्छेद 370 को फिर से बहाल करने की बातें करते हैं। तिरंगा नहीं उठाने की बातें करने वाले ही आतंकी बुरहान वानी और अफजल गुरू की बातें करते हैं।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, “उनका कौन सा झंडा है? यह बात उनसे पूछी जानी चाहिए। यदि तिरंगा घर पर रखा जाए तो वह कौन सा झंडा उठाना चाहते हैं। लाल या हरा? यह उनसे पूछा जाना चाहिए। चुनाव आ रहे हैं और तुष्टिकरण की राजनीति चरम पर है। यह गुपकार गैंग अब गद्दार की तरह बात कर रहे हैं।”

लालू यादव के इलाज का सारा खर्च उठाएगी बिहार सरकार: CM नीतीश कुमार का ऐलान, राजद सुप्रीमो से अस्पताल में मिले

आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई है, जिसके बाद उन्हें पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजद सुप्रीमो को आज शाम 7 बजे पटना से दिल्ली एयर एंबुलेंस से ले जाया जाएगा। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार (6 जुलाई, 2022) को लालू प्रसाद यादव से मिलने पटना के पारस अस्पताल पहुँचे। जहाँ नीतीश कुमार ने डॉक्टरों से भी उनकी स्थिति के बारे में बातचीत की।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी भी अस्पताल में मौजूद रहीं। लालू यादव से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने कहा, “लालू जी कि स्थिति पहले से बेहतर है। उन्हें दिल्ली ले जाकर इलाज और हर तरह का टेस्ट कराने का फैसला किया गया है। सब कुछ सरकार करेगी कोई दिक्कत नहीं है।” नीतीश कुमार ने उनके जल्दी स्वस्थ्य होने की कामना भी व्यक्त की है।

CM नीतीश कुमार ने यह भी कहा, “लालू जी को 10-15 दिन बाद किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सिंगापुर ले जाना था लेकिन अब फ्रेक्चर हो चुका है। दिल्ली में डॉक्टरों से बात करेंगे जो सिचुएशन होगी उस हिसाब से तय करेंगे।”

वहीं नीतीश कुमार ने लालू यादव से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “समाचार मिलने के बाद तुरंत लालू जी की जानकारी ली, आज खुद लालू जी से मिलने पहुँचा हूँ। लालू जी की तबीयत पहले से बेहतर हुई है। लालू जी के साथ हमारे पुराने दिनों के संबंध रहे हैं। आज लालू जी को दिल्ली ले जाकर इलाज कराने का फैसला लिया गया है। बेहतर है दिल्ली जाकर सभी चीज की बेहतर जाँच होगी।”

बता दें कि सरकारी खर्च पर इलाज होने के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा, “ये कोई पूछने वाली बात ही नहीं है। इस पर लालू जी का हक बनता है। सारी बातों को लेकर बिहार में नियम बना हुआ है।”

वहीं तेजस्वी यादव ने बताया कि लालू यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली है। उन्होंने कहा, “मंगलवार (5 जुलाई) को प्रधानमंत्री मोदी का फोन आया था। जब से लालू जी एडमिट हुए हैं तब से लगातार मुख्यमंत्री भी जानकारी ले रहे हैं। राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी से भी हमारी बात हुई है। सब यही दुआ कर रहे हैं कि जल्द से जल्द लालू जी ठीक हो जाएँ।”

गौरतलब है कि बीते रविवार, 3 जुलाई की शाम को लालू प्रसाद यादव राबड़ी आवास में सीढ़ी से उतरने के दौरान गिर गए थे। इससे उनके कमर और कंधे में चोट आई थी। गिराने की वजह से लालू यादव के दाएँ कंधे में माइनर फ्रैक्चर बताया गया था। इसके बाद 4 जुलाई की सुबह उन्हें पटना के पारस अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

SC/ST आरक्षण लागू नहीं कर रहा जामिया, आयोग ने कुलपति नजमा अख्तर को किया तलब: दलित शिक्षक से कहा – बर्तन धो, चाय बनाओ

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की वॉइस चांसलर नजमा अख्तर मुश्किलों में घिर गई हैं। उन्होंने 1 जुलाई 2022 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने पूछताछ के लिए समन जारी किया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय नियुक्तियों और प्रमोशन में कानूनन अनुसूचित जनजाति/ जाति के लोगों को मिलने वाले आरक्षण को लागू ही नहीं कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस जानबूझकर लागू नहीं करने का आरोप है। इसी मामले में 19 जुलाई को कुलपति जनमा अख्तर को तलब किया गया है।

जातिगत अत्याचार का है मामला

दरअसल, विश्वविद्यालय में ही काम करने वाले हरेंद्र कुमार नाम के व्यक्ति आयोग में शिकायत कर नियुक्तियों में आरक्षण संबंधी नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। अनुसूचित जाति से आने वाले कुमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उनकी नियुक्ति यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित एक स्कूल में अतिथि कंप्यूटर शिक्षक के रूप में हुई थी। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके खिलाफ साजिश रची और बाद में उन्हें अवैध तरीके से नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। इसी मामले को लेकर पिछले साल 2021 में भी आयोग ने वीसी को तलब किया था।

जामिया की कुलपति को आयोग द्वारा भेजा गया समन

आयोग को की गई शिकायत में हरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि जिस स्कूल में वो कार्यरत थे, वहाँ की प्रधानाचार्य ने एक महिला शिक्षक के साथ मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची। कुमार के वकील सुशांत ने आरोप लगाया है कि कुमार को स्कूल के प्रिंसिपल के लिए चाय बनाने और बर्तन धोने जैसे काम करने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा,”शिकायत में जाति और धर्म आधारित भेदभाव गहराई से अंतर्निहित था।” हालाँकि, इसे अपना और अपने पद का अपमान बताते हुए हरेंद्र ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उनके खिलाफ स्कूल की ही महिला शिक्षक को परेशान करने का झूठा आरोप जड़ा गया।

हरेंद्र की शिकायत की जाँच के लिए आयोग ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। समिति की रिपोर्ट को सौंपे जाने के बाद प्राचार्य द्वारा दायर शिकायत को वापस ले लिया गया। लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा होने में चार साल का लंबा वक्त लगा और इस दौरान कुमार को झूठे कलंक के साथ जीना पड़ा।

खुद पर लगे आरोपों को लेकर कुमार कहते हैं, “मुझे प्रिंसिपल के कक्ष में बचे हुए बर्तन धोने और उनके और उनके मेहमानों के लिए चाय तैयार करने के लिए कहा गया था। प्रिंसिपल मुर्सलीन हर छोटी-छोटी बात पर मुझे ये कहकर नीचा दिखा रहे थे कि मैंने मुस्लिम की एक सीट पर कब्जा कर लिया है। मैं स्कूल में रहने के लायक नहीं हूँ, क्योंकि मैं एक हिंदू हूँ और वह भी एक अनुसूचित जाति। वो अक्सर कहते थे कि विश्वविद्यालय प्रशासन में उनके बड़े कनेक्शन हैं और अगर मैं उनकी बातें मानने से इनकार करता हूँ तो वो मुझे बाहर करवा देंगे।”

कुमार ने ये भी आरोप लगाया कि एक बार तो उन्हें अपने मोबाइल पर अश्लील वीडियो डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया। कुमार ने कहा, “उन्होंने (प्रिंसिपल) ने मुझे जाति सूचक गालियाँ दी और कहा कि कमीने ‘चमार’ मैं तेरा करियर तबाह कर दूँगा। हालाँकि, बाद में स्कूल के कुछ शिक्षकों के बीच-बचाव के बाद मामला शांत हुआ।”

मामले के शांत होने के बाद हरेंद्र कुमार को लगा कि मामला शांत हो गया है, लेकिन आश्चर्यजनक ढंग से एक महिला शिक्षक ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। कुमार ने कहा, “मुझसे जबरदस्ती अलग तरीके के माफीनामे पर हस्ताक्षर करवाया गया। मेरी नौकरी खत्म करने की धमकी दी गई। मैं अपने परिवार में इकलौता कमाने वाला हूँ, इस कारण से उन्होंने जहाँ भी हस्ताक्षर करने के लिए कहा। वहाँ मैंने कर दिया। इसके बाद गैर कानूनी तरीके से मुझे टर्मिनेशन लेटर थमा दिया गया।”

विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा टर्मिनेशन के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही थी, जिसके बाद कुमार ने पुलिस में शिकायत करने का फैसला किया। हालाँकि, पहले तो वो ऐसा नहीं कर पाए, लेकिन बाद में साकेत कोर्ट के आदेश के बाद उनकी एफआईआर दर्ज की गई। इसके साथ ही उन्होंने एनसीएससी में शिकायत भी दर्ज कराई। इसके साथ ही कुमार ने आरोप लगाया है कि आरोपित प्रिंसिपल उनके गाँव भी गया था और वहाँ उसने उनके माता-पिता को धमकाया कि वो उन्हें केस को वापस लेने को कहें।

नियुक्तियों और प्रमोशन में आरक्षण खत्म करने का आरोप

जामिया मिल्लिया इस्लामिया को केंद्र सरकार फंडिंग करती है। ऐसे में अब कुमार की शिकायत के बाद नियुक्तियों और प्रमोशन में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को लागू नहीं करने के मामले में जाँच के दायरे में है।

जामिया की कुलपति को आयोग द्वारा जारी किया गया नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के राष्ट्रीय आयोग (एनसीएमईआई) के आदेश को चुनौती देने वाला एक मामला लंबित है। आयोग ने ही 2011 में विश्वविद्यालय को धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया था। एनसीएमईआई ने कहा था, “जामिया की स्थापना मुस्लिमों ने मुस्लिमों के फायदे के लिए की थी। इसने मुस्लिम अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के रूप में अपनी पहचान कभी नहीं खोई।” इसमें कहा गया है, “विश्वविद्यालय अनुच्छेद 30 (1) राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम की धारा 2 (जी) के साथ कवर किया गया है।”

हालाँकि, इस आदेश के तुरंत बाद दिल्ली हाई कोर्ट में तुरंत इसे चुनौती दी गई। लंबित मामले के बावजूद विश्वविद्यालय ने 2011 के एनसीएमईआई आदेश का हवाला देते हुए 2014 में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के आरक्षण और धर्म-आधारित नियुक्तियों और आरक्षणों को मंजूरी दे दी।

इस मसले पर ऑपइंडिया से बात करते हुए कुमार के वकील ने कहा कि इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक और मामला लंबित है। शीर्ष अदालत और दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित दो मामलों में कानून के अनुसार आरक्षण के तहत अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदाय के उम्मीदवारों की नियुक्ति और पदोन्नति पर रोक लगाने का कहीं भी आदेश नहीं है। कुमार ने हालाँकि, लंबित मामलों पर कोई निर्देश नहीं माँगा, लेकिन आयोग से शिक्षण और गैर-शिक्षण दोनों पदों पर नियुक्ति और पदोन्नति में एससी/एसटी समुदाय के आरक्षण को बहाल करने की माँग की है।

संविधान के अनुच्छेद 338 के अनुसार, आयोग को संविधान के तहत और सरकार द्वारा पारित किसी भी कानून के तहत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जाँच और निगरानी के लिए उचित कदम उठाने का अधिकार है।

जामिया को अल्पसंख्यक का दर्जा देने केंद्र ने किया था विरोध

2018 में केंद्र सरकार ने पिछली सरकार द्वारा जमा किए गए हलफनामे के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक एफिडेविट फाइल कर एनसीएमईआई द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने का विरोध किया था।

जामिया में डेमोग्राफिक चेंज पर चिंता

पिछले साल 2021 स्वराज्य पत्रिका में एक रिपोर्ट पब्लिश हुई थी, जिसमें विश्वविद्यालय में डेमोग्राफिक चेंज की ओर इशारा किया गया था। इसके मुताबिक, एडमिशन में 50% सीटें मुस्लिम छात्रों के लिए आरक्षित हैं, जहाँ प्रत्येक कार्यक्रम में 30% सीटें मुस्लिम आवेदकों के लिए आरक्षित हैं, 10% मुस्लिम महिला आवेदकों के लिए और 10% ओबीसी या ओबीसी मुस्लिमों व अनुसूचित जनजाति या एसटी के लिए आरक्षित हैं।

इसके अलावा, जामिया स्कूल से कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों के लिए 5% सीटें आरक्षित हैं। अन्य 5% कश्मीर के छात्रों के लिए आरक्षित हैं। इसी तरह, 10% सीटें विदेशों के छात्रों के लिए और 5% दिव्यांग छात्रों के लिए आरक्षित हैं। प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह से मुस्लिम छात्रों के पक्ष में है।

‘महुआ मोइत्रा आप कमाल हो’ : स्वरा भास्कर ने ‘काली’ पर ठोकी पीठ, शशि थरूर ने भी हिंदुओं को दिया ‘उपदेश’

माँ काली को माँस-मदिरा का सेवन करने वाली हिंदुओं की देवी बताने के बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ भोपाल में प्राथमिकी दर्ज हुई है। धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 295 ए के तहत कार्रवाई की गई है।

महुआ के खिलाफ शिकायत होने के बाद अब उनके समर्थन में लिबरल अपने ट्वीट कर रहे हैं। हिंदू देवी का पर की गई टिप्पणी सुनने के बाद स्वरा भास्कर ने महुआ के लिए कहा, “तुम जबरदस्त हो महुआ। तुम्हारी आवाज और मजबूत हो!”

इसी  तरह शशि थरूर ने कहा, “दुर्भानपूर्ण ढंग से गढ़े गए विवाद से मैं अंजान नहीं हूँ लेकिन महुआ पर होते हमलों से हैरान हूँ जो कि उस बात के लिए किए जा रहे हैं जो हर हिंदू जानता है कि हमारे पूजा के ढंग राज्यों के हिसाब से भिन्न हैं। आप देवी को क्या भोग लगाते हैं ये देवी से ज्यादा आपके बारे में बताता है।”

उन्होंने कहा, “हम लोग उस मुकाम पर पहुँच गए हैं जहाँ बिन किसी के आहत हुए धर्म के किसी पहलू पर बात नहीं होती। ये जाहिर सी बात है कि महुआ किसी का अपमान नहीं करना चाहती थीं। इस मामले को हल्के में लें और धर्म का अनुसरण लोगों को प्राइवेट में करने दें।”

बता दें कि महुआ मित्रा द्वारा काली माँ पर की गई टिप्पणी के बाद उनका नाम सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। भाजपा ने उनकी गिरफ्तारी की माँग उठाई। सामान्य जन भी लोग कह रहे हैं कि महुआ को हिंदू भावना आहत करने के लिए अरेस्ट किया जाना चाहिए।

वही टीएमसी ने भी अपने आधिकारिक अकॉउंट से ट्वीट करके कहा कि जो भी महुआ ने माँ काली को लेकर कहा वो उनके निजी नजरिया है। इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है जबकि कट्टरपंथी उन्हें सोशल मीडिया पर बंगाल की बहादुर महिला कह रहे हैं।

‘हमें प्रताड़ित कर रही केरल सरकार, उनसे लड़ने में असमर्थ’: NGO ने स्वप्ना सुरेश को नौकरी से निकाला, कहा – आतंकियों जैसा हो रहा बर्ताव

केरल सोना तस्करी (Kerala Gold Smuggling) मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) को बुधवार (6 जुलाई, 2022) को नौकरी से निकाल दिया गया। वह पलक्कड़ में हाईरेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (HRDS) एनजीओ के साथ काम कर रही थीं। एनजीओ ने स्वप्ना सुरेश को इस साल फरवरी में नियुक्त किया था। उन्होंने (NGO) राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह उनके साथ आतंकियों की तरह बर्ताव कर रही है। वहीं स्वप्ना सुरेश भी लगातार यह बात कहती रही हैं कि सीएम का नाम लेने के बाद से उन पर दबाव डाला जा रहा है।

एचआरडीएस सचिव अजीकृष्णन (Ajikrishnan) ने एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर सोना तस्करी मामले में स्वप्ना सुरेश ने गंभीर आरोप लगाए थे। अब वे (NGO) राज्य सरकार से ‘लड़ने’ में असमर्थ हैं, इसलिए उन्होंने सुरेश को नौकरी से निकाल दिया है। बयान में आगे कहा गया है, “चार महीने पहले स्वप्ना सुरेश को नौकरी देने के कारण एचआरडीएस को राज्य सरकार द्वारा प्रताड़ित किया गया है।”

अजीकृष्णन ने कहा कि एचआरडीएस ने तय किया था कि सोने की तस्करी मामले के आरोपितों मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर और स्वप्ना सुरेश में से एक को फिर से नौकरी पर रखा जाएगा। इसलिए स्वप्ना को नौकरी दिए जाने में कुछ भी गलत नहीं था।

बयान में यह भी कहा गया है, “हमें उम्मीद है कि जो राज्य सरकार स्वप्ना सुरेश की नियुक्ति के लिए एचआरडीएस के साथ आतंकियों जैसा बर्ताव कर रही है, वह एम शिवशंकर को बर्खास्त करके मिसाल कायम करेगी। इसके साथ ही सरकार खुद को इस आरोप से बचा सकती है कि वे शिवशंकर का बचाव नहीं कर रही है।”

उल्लेखनीय है कि मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को स्वप्ना सुरेश ने कहा था, “मुझे गिरफ्तारी का कोई डर नहीं है। मैंने डरने के लिए कुछ भी नहीं किया। यह फर्जी केस है। यह शुरुआत में जमानती था, लेकिन बाद में इसे गैर जमानती बना दिया गया। मुझे इसका सामना करने दो।”

बताया जा रहा है कि स्वप्ना को 18 फरवरी, 2022 को संगठन ने सीएसआर महिला सशक्तिकरण विभाग की निदेशक के तौर पर नियुक्त किया था। अधिकारी ने कहा उनके नियुक्त होने के बाद से ही एनजीओ पर दबाव बनाया जाने लगा। उनके स्टाफ सदस्य भी काफी दबाव में आ गए हैं, क्योंकि पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। बयान में यह भी कहा गया है कि उनकी सैलरी (सुरेश) एचआरडीएस के फंड से दी गई थी। एचआरडीएस इंडिया के उपाध्यक्ष केजी वेणुगोपाल, जो आरएसएस से जुड़े रहे हैं, उन्होंने कहा था कि जब तक वह उनके संगठन की कर्मचारी हैं, तब तक हम उनकी रक्षा करेंगे।

गौरतलब है कि सोना तस्करी मामले की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने 7 जून 2022 को मुख्यमंत्री विजयन पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। कोच्चि की अदालत में पेशी के बाद उसने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि विजयन डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी में शामिल थे। उसने कहा था, “इस मामले में मैंने अदालत से केरल के मुख्यमंत्री, उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, विजयन की पत्नी कमला, बेटी वीणा, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया है। साथ ही मैंने कोर्ट में अपनी सुरक्षा की माँग करते हुए याचिका भी दायर की है।”

क्या है गोल्ड स्मगलिंग केस

केरल में सोना तस्करी का मामला जुलाई 2020 में सामने आया था। डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। स्वप्ना सुरेश पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर 2 जुलाई 2020 को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी की। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात था।

वकील अबु सोहेल ने नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी के लिए डाली याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपूर शर्मा की गिरफ्तारी की माँग को लेकर दाखिल याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। वकील अबु सुहेल द्वारा दाखिल इस याचिका में अधिकारियों को नूपुर शर्मा पर एक्शन लेने एवं उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश देने की माँग की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता अबू सोहेल ने याचिका में कहा कि नुपूर के खिलाफ FIR होने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं किया है। इस याचिका में पुलिस से मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जाँच की माँग की गई है। इसके अलावा इस अर्जी में हेट स्पीच मामले तहसीन पूनावाला के फैसले को लागू करने की माँग की गई है।

वहीं इस मामले में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाकर्ता अबु सोहेल को रजिस्ट्रार के समक्ष इसका उल्लेख करने की सलाह दी। इस पर वकील वहाँ रजिस्टर होने की बात बताते हुए कहा कि वहाँ मिले डेट के अनुसार उच्चतम न्यायालय 11 जुलाई को सुनवाई कर सकता है।

बता दें कि इससे पहले मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को पूर्व न्यायाधीशों और IAS अधिकारियों ने नूपुर शर्मा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणियों की निंदा की और आरोप लगाया कि शीर्ष अदालत ने इस मामले में ‘लक्ष्मण रेखा’ पार कर दी। 15 पूर्व न्यायाधीशों, अखिल भारतीय सेवा आईएएस के 77 पूर्व अधिकारी और 25 अन्य लोगों ने कहा, “न्यायपालिका के इतिहास में, ये दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणियाँ बेमेल हैं। इस मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने का आह्वान किया जाता है।”

वहीं इसके जवाब में वकीलों के एक संगठन ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिख कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नूपुर शर्मा पर की गई हालिया टिप्पणी का समर्थन भी किया है। एसोसिएशन के चेयरमैन आदिश अगरवाला ने पत्र लिखकर कहा है कि जो भी याचिका सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ दाखिल की जा रही है, उनको खारिज करना चाहिए।

गौरतलब है कि टीवी डिबेट के दौरान बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता ने पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी कर दी थी। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था। वहीं इस विवाद में अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने की अपील लेकर नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जहाँ सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सूर्यकान्त और पारदीवाला ने उनके खिलाफ तल्ख टिप्पणियाँ कीं और उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या का जिम्मेदार बताते हुए कहा कि उन्हें टीवी पर आकर देश से माफी माँगनी चाहिए।

‘बोल देना नशे में था…’: राजस्थान पुलिस का Video वायरल; अजमेर दरगाह के जिस खादिम ने माँगी नूपुर शर्मा की गर्दन, उसे बताया ‘बचाव का रास्ता’

राजस्थान पुलिस का एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसके बाद उस पर इस्लामी कट्टरवादियों से मिले होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसमें राजस्थान पुलिस सलमान चिश्ती को गिरफ्तार कर के ले जा रही है। साथ ही ‘आ जाओ’ की आवाजें आ रही हैं। वीडियो में कोई कहता है, “हम साथ में ही हैं, चिंता मत कर।” इसमें पुलिस वाले ‘चलो-चलो, बेफिकर रह’ भी कह रहे हैं। साथ ही पूछते हैं, “कौन सा नशा कर रखा था वीडियो बनाते समय?”

इसके बाद पुलिस वाले सलमान चिश्ती को सलाह देते हैं कि बोल देना, नशे में था। राजस्थान पुलिस ने अपने बयान में भी कहा था कि खादिम भड़काऊ बयान देने वक्त नशे में था। वो हिस्ट्रीशीटर है और उस पर 13 मामले दर्ज हैं, इसके बावजूद उसके लिए राजस्थान पुलिस की सहानुभूति लोगों की समझ से बाहर है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार है। अजमेर पुलिस बार-बार जोर दे रही है कि वो नशे में था।

वायरल वीडियो में सलमान चिश्ती ने कहा था, “कसम है मुझे पैदा करने वाली मेरी माँ की, मैं उसे सरेआम गोली मार देता। मुझे मेरे बच्चों की कसम, मैं उसे गोली मार देता और आज भी सीना ठोक कर कहता हूँ जो भी नुपुर शर्मा की गर्दन लाएगा, मैं उसे अपना घर दे दूँगा और रास्ते पर निकल जाऊँगा। ये वादा करता है सलमान।” इसके अलावा, उसने खुद को ‘ख्वाजा का सच्चा सिपाही’ बताते हुए मुस्लिमों को भड़काने की कोशिश की थी।

भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इसे सीएम अशोक गहलोत का हिन्दू विरोधी चेहरा का सबूत करार दिया। उन्होंने वीडियो साझा करते हुए बताया कि खादिम सलमान चिश्ती कह रहा है कि वो नशा नहीं करता, लेकिन इसके बावजूद राजस्थान पुलिस उससे कहती है, “बोल देना नशे में था, ताकि बचाया जा सके।” एक महिला की गर्दन पर इनाम रखने वाले व्यक्ति के साथ राजस्थान पुलिस की इस मिलीभगत के बाद कॉन्ग्रेस के मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं।