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मैं रहूँ या ना रहूँ… पूर्व PM अटल बिहारी वाजपेयी पर बनेगी फिल्म, Atal के बारे में जानिए सब कुछ

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) पर फिल्म बनने जा रही है। मंगलवार (28 जून 2022) को इसका ऐलान किया गया। फिल्म का नाम ‘मैं रहूँ या न रहूँ ये देश रहना चाहिए- अटल’ है। फिल्म का मोशन पोस्टर भी रिलीज कर दिया गया है।

मोशन पोस्टर में अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण का एक अंश सुनाई दे रहा है। इसमें वे कहते हैं, “सत्ता का खेल तो चलेगा। सरकारें आएँगी, जाएँगी… पार्टियाँ बनेंगी, बिगड़ेंगी। मगर ये देश रहना चाहिए। इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए।” ट्रेंड एनालिस्ट तरण आदर्श ने इसे ट्विटर पर साझा किया है।

उल्लेख एनपी की किताब ‘द अनटोल्ड वाजपेयी: पॉलिटिशियन एंड पैराडॉक्स’ पर आधारित यह फिल्म अगले साल क्रिसमस पर रिलीज होगी। 25 दिसंबर 2023 को अटल बिहारी वाजपेयी की 99वीं जयंती भी है। फिल्म को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। ‘अटल’ को विनोद भानुशाली और संदीप सिंह प्रोड्यूस कर रहे हैं। हालाँकि, अभी तक फिल्म के स्टारकास्ट को लेकर कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है।

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। 1951 में भारतीय जनसंघ के गठन में उनकी अहम भूमिका रही। 1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने। हालाँकि, उनकी सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई और 13 दिन ही चली। 1998 के मध्यावधि चुनावों भाजपा फिर सबसे बड़े दल और NDA सबसे बड़े गठबंधन के रूप में उभरा। वाजपेयी ने दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन इस बार उन्हें 13 महीने बाद ही इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद हुए चुनावों में NDA पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई और 1999 में वे फिर से प्रधानमंत्री बने। 16 अगस्त 2018 को 93 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था।

अफगान MMA स्टार अब्दुल के पास से मिला भारत का फर्जी पासपोर्ट और आधार कार्ड, भारतीय फाइटर पर हमले के बाद भागने की फिराक में था

अफगानिस्तान के मिक्स मार्शल आर्ट (MMA) स्टार अब्दुल अजीम बदाक्षी (Abdul Azim Badakshi) ने अफगानों और समर्थकों के साथ मिलकर रिंग के बाहर भारतीय फाइटर श्रीकांत शेखर पर जानलेवा हमला किया है। इस हमले में श्रीकांत का जबड़ा टूट गया है और उन्हें गहरी चोटें आई हैं, जिसके चलते खिलाड़ी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 24 जून को नई दिल्ली में आयोजित मैट्रिक्स फाइट नाइट 9 में अब्दुल अजीम ने भारतीय एमएमए फाइटर श्रीकांत शेखर (Srikanth Sekhar) पर जानलेवा हमला किया था। इसके बाद से अफगानी MMA भारत छोड़ने कोशिश में जुट गया।

हमला सेठ रोसारियो और बदाक्षी के बीच लड़ाई के बाद हुआ, जिसमें बदाक्षी की हार हो गई। इससे उसके अफगान समर्थक नाराज हो गए। श्रीकांत शेखर के अनुसार, अफगान प्रशंसकों ने उन पर बोतलें मारी थीं और बदाक्षी ने उन्हें पीछे से घूंसा मारा था। उन्होंने अपने अफगान समकक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

अब सामने आए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे बदाक्षी और उनके समर्थकों की भीड़ ने भारतीय एमएमए स्टार का घेराव किया और उनके साथ मारपीट की।

बॉलीवुड अभिनेता और एमएमए टॉक शो एक्पर्ट परवीन डबास ने ट्वीट कर चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के अब्दुल बदाक्षी के पास दो पासपोर्ट हैं, एक अफगान का और दूसरा भारत का। इसके अलावा उसके पास एक आधार कार्ड (भगवान जाने कैसे) भी है।

डबास ने यह भी दावा किया है कि श्रीकांत पर जानलेवा हमला करने की जानकारी सामने आने के बाद अब्दुल बदाक्षी भारत से भागने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अपने ट्वीट में दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए लिखा, “मुझे नहीं पता कि दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ FIR दर्ज की है या नहीं, लेकिन आज रात वह देश छोड़ने का प्रयास कर सकता है।”

वहीं, मामला तूल पकड़ने के बाद अफगानिस्तान के खिलाड़ी ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर दिया है।

फोटो साभार: इन्स्टाग्राम

परवीन डबास ने अब्दुल बदाक्षी के भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड की तस्वीरें भी शेयर की हैं। भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड में उसका नाम अजीम सेठी है। आधार कार्ड में उसने अपनी जन्म तिथि 10 अक्टूबर 1995 और पता गुरुग्राम हरियाणा का लिखवाया है। वहीं, भारतीय पासपोर्ट में उसने अपना जन्म स्थान दिल्ली बताया है।

भारतीय फाइटर पर हमला किए जाने के बाद मैट्रिक्स फाइट नाइट की ओर से अफगानिस्तान के फाइटर पर बैन लगा दिया गया है। अब्दुल अजीम बदाक्षी एमएफएन में हिस्सा लेने वाला सबसे बड़ा फाइटर था।

बता दें कि नई दिल्ली में 24 जून की रात अब्दुल अजीम बदाक्षी ने श्रीकांत पर उस वक्त जानलेवा हमला किया, जब एक मुकाबले में अजीम अपने हमवतन जहोर शाह का और श्रीकांत अपने साथी सेठ रोसारियो का रिंग के बाहर से सपोर्ट कर रहे थे।

उद्धव ठाकरे के पास शिवसेना भी नहीं छोड़ेंगे एकनाथ शिंदे: बताया इरादा, कहा- 50 MLA साथ; अब मुंबई कूच करेंगे

शिवसेना के बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे जल्द ही गुवाहाटी से मुंबई पहुँचेंगे, जहाँ उनकी मुलाकात राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से होनी है। एकनाथ शिंदे बार-बार ये दोहरा रहे हैं कि वो एक शिवसैनिक हैं और उनका उद्देश्य शिवसेना को आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि हमने पार्टी नहीं छोड़ी है और हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी दिल्ली पहुँचे हैं, जहाँ उनकी मुलाकात पार्टी के आलाकमान से होनी है।

गुवाहाटी के जिस रेडिसन ब्लू होटल में सभी बागी विधायक ठहरे हुए हैं, उसकी बुकिंग भी 12 जुलाई तक बढ़ाने की बात सामने आई है। उस दिन तक बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला भी स्पष्ट हो जाएगा। शिंदे गुट की पूरी कोशिश है कि NCP के डिप्टी स्पीकर को अयोग्य ठहराया जाए। बुधवार (29 जून, 2022) को भाजपा ने भी अपने विधायकों को मुंबई बुलाया है। दल-बदल कानून के तहत एकनाथ शिंदे को किसी दूसरे दल में शिवसेना का विलय करने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है, जिसका वो दावा कर रहे हैं।

अब सवाल ये अटका है कि असली शिवसेना कौन सी है, उद्धव ठाकरे वाली या फिर एकनाथ शिंदे वाली। दो तिहाई बहुत अपने पास होने का दावा करते हुए एकनाथ शिंदे असली शिवसेना पर दावा ठोक रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी एकनाथ शिंदे ने इसे ‘असली शिवसेना की जीत’ बताया था। वहीं सांसद अरविंद सावंत और प्रियंका चतुर्वेदी कह रही हैं कि असली शिवसेना उद्धव ठाकरे वाली है। अब ऐसा लगता है कि इस लड़ाई के फैसला अदालत में ही आएगा।

विधानसभा के फ्लोर पर ही ये साबित किया जाता है कि किसके पास कितने विधायकों का समर्थन है। राज्यपाल के सामने परेड कराए जाने का विकल्प भी होता है। दलबदल कानून कहता है कि कोई व्यक्ति किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीत के बाद स्वेच्छा से पद और सदस्यता से इस्तीफा दे देता है तो इसे कानून के अंतर्गत माना जाएगा। पार्टी व्हिप के उल्लंघन पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। पहले ये भी नियम था कि अगर किसी पार्टी के एक तिहाई सदस्य उससे इस्तीफा दे देते हैं तो उस पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा, वाजपेयी सरकार ने इसे दो तिहाई किया।

वहीं किसी दूसरी पार्टी में विलय के लिए दो तिहाई सदस्यों के इस्तीफे की जरूरत होती है। स्पीकर अगर पक्षपाती फैसला देता है तो उसके खिलाफ अदालत जाने का भी विकल्प होता है। उद्धव गुट 16 विधायकों की सदस्यता रद्द करवाना चाहता है। अधिकतर जानकर कह रहे हैं कि शिंदे गुट के पास अब किसी दूसरी पार्टी में विलय का ही रास्ता है, ताकि वो दलबदल कानून से बच सकें। विधायकों को पार्टी अयोग्य ठहरा सकती है या कार्रवाई कर सकती है। मूल शिवसेना होने के लिए शिंदे को सांसदों, नगरसेवकों, कार्यकारी और जिला इकाइयों का पर्याप्त समर्थन भी हासिल करना होगा।

सुनी रोने की आवाज, ट्रक का दरवाजा खुला तो निकली 46 लाश-16 मिले बेहोश: अमेरिका में अवैध तरीके से घुसने की कर रहे थे कोशिश

अमेरिका से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ टेक्सास राज्य के सैन एंटोनियो में एक ट्रक के भीतर 46 लोग मृत पाए गए हैं। सैन एंटोनियो पुलिस ने सोमवार (27 जून 2022) को इस घटना की जानकारी दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ट्रक शहर के दक्षिण की ओर बाहरी इलाके के दूरदराज इलाके में रेल की पटरियों के पास मिला। हालाँकि, सैन एंटोनियों की पुलिस ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन इसे मानव तस्करी का मामला माना जा रहा। कहा जा रहा है कि ट्रक में ठूंस कर इनलोगों को अवैध तरीके से मेक्सिको से अमेरिका लाया जा रहा था।

सैन एंटोनियों के KSAT चैनल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस घटना की कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। इन तस्वीरों में पुलिस की गाड़ियाँ और एंबुलेंस एक बड़े ट्रक के चारों ओर दिख रही हैं। ये अवैध रूप से अमेरिका में घुसने का मामला माना जा रहा है, क्योंकि जहाँ ये ट्रक मिला है वह अमेरिका और मैक्सिको बॉर्डर से 250 किमी की दूरी पर है। सिटी काउंसिल की प्रमुख एड्रियाना रोचा गार्सिया के मुताबिक ट्रक में मृत मिले लोग प्रवासी हैं।

सैन एंटोनियों पुलिस के चीफ विलियम पी. मैकमैनस (William P. McManus) ने फेसबुक लाइव में बताया, “पुलिस को सोमवार की शाम 5:50 बजे पहली कॉल आई। हमें बताया गया कि एक बिल्डिंग में काम करने वाले एक कर्मचारी ने कुछ लोगों के ‘रोने’ की आवाजें सुनी। इसके बाद वह बिल्डिंग से बाहर निकलकर उस ट्रक के पास पहुँचा, जहाँ से उसने जोर-जोर से रोने की आवाज सुनी। उसने देखा कि ट्रक का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ है और उसके अंदर लोग मरे हुए हैं।”

पीपल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रक से 16 लोगों की बेहोशी की हालत में निकाला गया। इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 4 बच्चे भी हैं। कम से कम पाँच की हालत गंभीर है। पुलिस चीफ मैकमैनस के मुताबिक, तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। हालाँकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि इस मामले में इनकी संलिप्तता है या नहीं।

पश्चिम बंगाल में पेड़ से लटकता मिला एक और बीजेपी कार्यकर्ता का शव, भाजपा ने लगाया TMC के गुंडों पर हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के कोटलदिघी इलाके में सोमवार (27 जून, 2022) की सुबह पाथरचट्टी कबीरस्थान के पास एक 45 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता का शव लटकता हुआ मिला। यह इलाका कोतुलपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान सहदेव खा के रूप में हुई है। भाजपा की राज्य इकाई ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ता सहदेव की हत्या तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के गुंडों ने की थी, हालाँकि, पुलिस ने दावा किया कि हत्या का कोई सबूत नहीं है।

वहीं पुलिस ने प्रारंभिक जाँच के बाद यह भी दावा किया कि सहदेव ने मानसिक अवसाद के कारण आत्महत्या की होगी। हालाँकि, देखने से पता चलता है कि मृतक को कहीं और मारे जाने के बाद यहाँ लाकर फाँसी दी गई है।

हालाँकि, कहा जा रहा है कि मृतक के परिवार ने अभी तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया था। वहीं सहदेव के शव को पोस्टमार्टम के लिए बिष्णुपुर जिला अस्पताल भेजा दिया गया है, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है।

वहीं रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि मरने वाला बीजेपी कार्यकर्ता आइसक्रीम बेचने का काम करता था। इस बीच, भाजपा ने पुलिस के दावों को खारिज किया है। पार्टी ने तर्क दिया कि सहदेव एक सक्रिय भाजपा सदस्य थे जो कोतुलपुर विधानसभा क्षेत्र के गोपालपुर ढक पारा में बूथ संख्या 104 में कार्यरत थे।

पार्टी का आरोप है कि घर लौटने समय सहदेव की हत्या कर दी गई और आत्महत्या का मामला बनाने के लिए उसके शव को पेड़ से लटका दिया गया। विधायक नीलाद्री शेखर दाना के नेतृत्व में भाजपा ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या छह पर नाकाबंदी कर प्रदर्शन किया।

बिष्णुपुर नगर पालिका में विपक्ष के नेता शुक्ला चटर्जी ने भी सहदेव की याद में एक मौन कैंडल मार्च निकाला। वहीं मामले के बारे में बात करते हुए, पुलिस अधीक्षक वैभव तिवारी ने कहा, “हत्या के आरोप निराधार हैं। हम सभी से सोशल मीडिया पर गलत सूचना न फैलाने का आग्रह करते हैं। वहीं भाजपा ने दावा किया कि मृतक सहदेव उसके सदस्य थे और उन्हें कथित तौर पर टीएमसी समर्थकों द्वारा मारा गया था, राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने इस आरोप को खारिज कर दिया।”

उन्होंने कहा, “हमने मामले की उचित जाँच शुरू कर दी है। घटनास्थल की जाँच की गई है और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी एकत्र किए गए हैं।”

पहले भी फंदे से लटका मिला था बीजेपी कार्यकर्ता का बेटा

गौरतलब है कि इससे पहले पूर्वी मेदिनीपुर के खेजुरी में एक भाजपा कार्यकर्ता का 22 वर्षीय बेटा देबाशीष पेड़ से लटका मिला था। वह एक भाजपा बूथ कार्यकर्ता मुक्तिपाड़ा मन्ना के पुत्र थे।

तब भी स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया था। हालाँकि, तब भी पश्चिम बंगाल पुलिस ने दावा किया कि मन्ना ने आत्महत्या की है।

चौंकाने वाली बात यह है कि जिस दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा हुआ उसी दिन वह मृत पाए गए थे। गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी यात्रा के दौरान, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर राजनीतिक हिंसा और राजनीतिक हत्या की संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।

अब्बास मोहम्मद चाय पिलाता गया और एक-एक कर मर गए 9, महाराष्ट्र में डॉक्टर परिवार ने नहीं की थी सामूहिक आत्महत्या: पहले ₹1 करोड़ ठगे, फिर खजाना खोजने के नाम पर हत्या

महाराष्ट्र (Maharashtra) के सांगली जिले में मृत मिले नौ लोगों के मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पहले माना जा रहा था कि परिवार ने कर्ज में डूबने के कारण आत्महत्या कर ली है, लेकिन अब खुलासा हुआ है कि पीर अब्बास मोहम्मद अली बागवान ने इस वारदात को अंजाम दिया था।

पुलिस के अनुसार, पीर अब्बास ने दो भाइयों के परिवार के नौ लोगों को बारी-बारी से जहरीली चाय पिलाई और सबको मौत की नींद सुला दिया। पुलिस ने पीर अब्बास और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है। कोल्हापुर रेंज के आईजी मनोज कुमार लोहिया ने इस हत्याकांड का खुलासा है।

ठग चुका था एक करोड़ रुपए

पीर अब्बास ने माणिक वनमोरे और पोपट वनमोरे को उनके घर में गुप्त खजाना छिपे होने का झाँसा दिया था। उसे खोजने के नाम पर उसने दोनों भाइयों से करीब एक करोड़ रुपए भी ऐंठ लिए थे। गुप्त धन पाने के लिए वनमोरे भाइयों ने कई लोगों से कर्ज ले रखा था।

लगातार झाँसे इसके बाद जब दोनों भाइयों को खजाना नहीं मिला तो वे पीर अब्बास पर पैसे लौटाने का दबाव बनाने लगे। उधर अब्बास रुपए लौटाना नहीं चाहता था। जब उसने देखा कि वनमोरे बंधु उस पर लगातार दबाव बना रहे हैं तो उसने एक खतरनाक निर्णय लिया और पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची।

रुपए लौटना नहीं चाहता था, इसलिए हत्या की रची साजिश

दोनों भाइयों के दबाव से तंग आकर अब्बास मोहम्मद अली अपने ड्राइवर धीरज चंद्रकांत सुरवशे को लेकर 19 जून 2022 को वनमोरे भाइयों के गाँव म्हैसल पहुँचा। घर पर उसने गुप्त खजाने को निकालने के लिए तंत्र-मंत्र शुरू करने का नाटक करने लगा।

इस दौरान अब्बास परिवार के सभी सदस्यों को घर की छत पर भेज दिया और उसने नीचे जहरीला चाय तैयार किया। उसके बाद फिर परिवार के सदस्यों को अब्बास बारी-बारी से नीचे बुलाया और जहरीला चाय पीने के दिया। वे चाय पीकर बेहोश होते गए और फिर उनकी मौत होती गई।

सुसाइड नोट और जहरीली शीशी से पुलिस को हुई शंका

घटना के अगले दिन 20 जून को पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट और एक शीशी मिली था। शीशी में जहर था, जो जाँच के बाद पुलिस को पता चला। नौ लोगों के शव में से सिर्फ एक शव के पास जहर की शीशी मिलना पुलिस को पच नहीं रहा था। वहीं, सुसाइड नोट में उन लोगों के नाम लिखे थे, जिनसे वनमोरे परिवार ने कथित रूप से पैसे लिए हुए थे।

जाँच के दौरान पुलिस को सुसाइड नोट के कंटेंट पर शंका हुई। पुलिस के अनुसार, सुसाइड नोट में आमतौर पर खुदकुशी करने वाला पहले कारण लिखता है। इसके बाद वह इसके जिम्मेदार लोगों के नाम लिखता है। वनमोरे परिवार के मामले में यह अलग था। वनमोरे परिवार के मामले में सुसाइड नोट में सबसे पहले कुछ लोगों के नाम लिखे थे। इसके साथ ही इस नोट में खुदकुशी के कारणों का जिक्र नहीं किया गया था।

इसके बाद पुलिस की शंका विश्वास में बदल गया। पुलिस का कहना है कि अब्बास ने पहले साहूकारों के नाम लिखवाए होंगे, ताकि इस कागज को सुसाइड नोट का रूप दिया जा सके। इस तरह वह हत्या को खुदकुशी साबित करने की कोशिश कर रहा था।

सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा

एक ही परिवार के नौ लोगों के शव मिलने के बाद पुलिस ने वनमोरे परिवार की गतिविधियों को खंगालना शुरू किया। इसके लिए पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी दौरान पुलिस को एक गाड़ी दिखी। सड़कों पर लगे सीसीटीवी एवं अन्य तरीकों से पता करने पर उस गाड़ी की लोकेशन सोलापुर दिखी। जब पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि इस गाड़ी का मालिक अब्बास मोहम्मद अली बागवान है।

वहीं, पुलिस ने वनमोरे परिवार के लोगों का कॉल डिटेल निकाला तो देखा कि दोनों भाइयों का एक खास नंबर पर लगातार बात हो रही थी। पुलिस ने जब पता किया तो यह नंबर अब्बास का ही निकला। इसके बाद पुलिस ने अब्बास और उसकी निशानदेही पर ड्राइवर सुरवशे को हिरासत में लेकर पूछताछ कर पूरे मामले का खुलासा किया।

दो भाइयों के परिवार को खत्म कर दिया

पीर अब्बास ने वनमोरे परिवार के दो भाइयों के पूरे परिवार को खत्म कर दिया। 54 वर्षीय पोपट वनमोरे शिक्षक थे और 49 वर्षीय डॉ. माणिक वनमोरे पशु चिकित्सक थे। मृतकों में दोनों भाई, उनकी 74 वर्षीय माँ, दोनों भाइयों की पत्नियाँ और चार बच्चे शामिल हैं।

सांगली पुलिस अधीक्षक दीक्षित गेडाम के अनुसार मुख्य आरोपी मोहम्मद अब्बास बागवान और ड्रावर सुरवशे को सोलापुर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत हत्या का केस दर्ज किया गया है।

घर में मिला था परिजनों का शव

मुंबई से 350 किलोमीटर दूर सांगली जिले के म्हैसल में अपने घर में मृत पाए गए लोगों की पहचान पेशे से वेटनरी डॉक्टर पोपट यालप्पा वनमोरे (52), संगीता पोपट वनमोरे (48), अर्चना पोपट वनमोरे (30), शुभम पोपट वनमोरे (28), माणिक यालप्पा वनमोरे (49), रेखा माणिक वनमोरे (45), आदित्य माणिक वन (15), अनीता माणिक वनमोरे (28) और अक्कताई वनमोरे (72) के रूप में हुई है।

डॉ. वनमोरे का शव उनके परिवार के छह अन्य सदस्यों के साथ महिसाल में नरवाड़ रोड के पास अंबिका नगर वाले घर में मिला था। परिवार का एक घर अंबिका नगर में और दूसरा राजधानी कॉर्नर में है। घटना वाले दिन सुबह से ही दोनों घरों के दरवाजे नहीं खुले थे। पड़ोसियों ने जब दरवाजा खटखटाया तो किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, कुछ देर बाद उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया। इसके बाद पता चला कि एक ही घर में छह लोगों ने आत्महत्या कर ली है। वहीं अन्य तीन के शव बाद में राजधानी कॉर्नर के दूसरे घर में मिले।

अपने फोन में क्या छिपाना चाह रहा है जुबैर? नहीं दे रहा सवालों के जवाब, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी नहीं सौंपे: यहाँ देखें FIR और रिमांड की कॉपी

मोहम्मद जुबैर गिरफ़्तारी के बाद जाँच और पूछताछ में दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग नहीं कर रहा है। रिमांड कॉपी से AltNews के संस्थापक प्रतीक सिन्हा के झूठ का भी पर्दाफाश हो गया है। पुलिस ने मोहमद जुबैर ने जाँच में सहयोग के लिए पहले भी नोटिस दिया था, गिरफ़्तारी अचानक नहीं हुई। मोहम्मद जुबैर ने अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बारे में भी पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी है। सेक्शन 41A के तहत उसे नोटिस दिया गया था।

मोहम्मद जुबैर कह रहा है कि उसका वो फोन खो गया है जिससे उसने 2018 में ये ट्वीट्स किए थे। पुलिस ने कहा है कि जुबैर जाँच और पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है। उसने अधिकतर सवालों के जवाब नहीं दिए और कागज़ात पर हस्ताक्षर करने से भी इनकार कर दिए। पुलिस ने उससे सूचनाएँ निकलवाने के लिए एक दिन की कस्टडी माँगी थी। मोहम्मद जुबैर को उसका गैजेट खोजने को भी कहा गया है। पूरी जाँच में ये गैजेट मुख्य सबूत है।

मोहम्मद जुबैर पर दर्ज FIR की कॉपी भी सामने आई है। ये FIR ‘हनुमान भक्त’ नाम के ट्विटर हैंडल द्वारा दायर की गई शिकायत पर दर्ज कराया गया है। इसमें उसने भगवन हनुमान का मजाक बनाया था। आरोप है कि उसने हनुमान जी को ‘हनीमून’ से जोड़ा। हिन्दू धर्म में हनुमान जी को बाल ब्रह्मचारी कहा गया है। इसे एक समाज की भावनाओं को भड़काने वाला बताया गया, जो बाद में शांति और सामंजस्यता के लिए खतरा बन सकता है।

साथ ही उस पर घृणा फैलाने के आरोप भी हैं। FIR की संवेदनशीलता के कारण इसे ऑनलाइन अपलोड नहीं किया गया। FIR में कहा गया है कि मोहम्मद जुबैर ने जानबूझ कर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से धार्मिक भावनाएँ भड़काने वाले पोस्ट्स किए हैं, ताकि समाज की शांति भंग की जा सके। FIR को सब-इंस्पेक्टर लेवल के पुलिस अधिकारी ने दर्ज कराया है। कॉन्ग्रेस के अलावा लेफ्ट पार्टियों ने भी जुबैर की रिहाई की माँग की है।

मोहम्मद जुबैर पर दर्ज FIR की कॉपी

उधर हिन्दू देवी-देवताओं का खुलेआम अपमान करने वाले मोहम्मद जुबैर की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी पर ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI)’ ने लंबा-चौड़ा बयान जारी किया है। इसमें AltNews के सह-संस्थापक की गिरफ़्तारी की निंदा की गई है। गिल्ड ने अपने बयान में कहा, “एक अज्ञात पहचान वाले ट्विटर हैंडल ने उनके 2018 के एक ट्वीट पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया था।” मोहम्मद ज़ुबैर ट्विटर पर कह चुका है कि वो पत्रकार नहीं है, फिर उसके लिए EGI सामने क्यों आया?

नंदी, राम दरबार, रामायण… भारत के सांस्कृतिक हुनर को दुनियाभर में पहुँचा रहे PM मोदी: G-7 में UP की गुलाबी मीनाकारी से लेकर छत्तीसगढ़ की डोकरा कला तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद मंगलवार (28 जून 2022) को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के लिए रवाना हो गए। जर्मनी में आयोजित G-7 समूह के सदस्य देशों के साथ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका, ब्रिटेन समेत कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान के राष्ट्र प्रमुखों के साथ वार्ता की।

इस दौरान उन्होंने वैश्विक नेताओं को भारतीय संस्कृति से रूबरू कराती अनूठी चीजें गिफ्ट की। प्रधानमंत्री ने जो तोहफे दिए हैं उनका अपना एक सांस्कृतिक इतिहास एवं परंपरा रहा है। ये तोहफे भारत के अलग-अलग हिस्सों की पहचान एवं कला की विशेषता को बताते हैं। इनमें रामायण थीम वाली डोकरा कला, टेबल टॉप, टी सेट और जरी जरदोजी बॉक्स जैसी चीजें शामिल हैं।

जापान के पीएम फुमियो किशिदा को प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के निजामाबाद के बने काली मिट्टी के बर्तन भेंट किए। यूपी के निजामाबाद में काली मिट्टी के बर्तन एक विशेष तकनीक से बनाए जाते हैं। इसमें मिट्टी के बर्तन ओवन के अंदर होते हैं और यह सुनिश्चित किया जाता है कि ओवन में ऑक्सीजन के जाने की कोई गुंजाइश न हो और गर्मी का स्तर उच्च बना रहे।

पीएम मोदी ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो को हाथ से बुनी गई सिल्क की चटाई भेंट की। यह चटाई अपनी खूबसूरती एवं कला के लिए दुनिया भर में लोकप्रिय है। खासकर कश्मीरी सिल्क की बुनावट अनूठी होती है। कश्मीरी सिल्क कार्पेट मोटे तौर पर श्रीनगर इलाके में बनाई जाती है।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को लैक्वेरेंस कला से निर्मित राम दरबार भेंट की। यह दरबार विशेष गूलर (वानस्पतिक नाम: फिकस रेसमोसा) की लकड़ी पर बना है। लकड़ी से निर्मित राम दरबार वाराणसी की पहचान है।

वहीं पीएम ने सेनेगल के राष्ट्रपति को मूंज से बनी टोकरियाँ और कपास की दरियाँ भेंट की। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, सुल्तानपुर और अमेठी में होता है। 

प्रधाननमंत्री ने जर्मनी की चांसलर को निकेल कोटेड पीतल का मटका भेंट किया। यह मटका यूपी की पीतल नगरी मुरादाबाद की पहचान है। जिसे भारत के उत्तर प्रदेश के पीतल नगरी या ‘पीतल शहर’ के रूप में भी जाना जाता है। वहीं इटली के पीएम को प्रधानमंत्री मोदी ने संगरमर से बना टेबल टॉप भेंट किया। यह कलाकृति आगरा की पहचान है। 

फ्रांस के राष्ट्रपति को जरदोजी बॉक्स में इत्र भेंट किए। जरदोजी बॉक्स पर हाथ से नक्काशी और उसके कपड़े में फ्रांस के राष्ट्रीय ध्वज के रंग का इस्तेमाल किया गया है। पीएम ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को प्लेटिनम पेंटेड टी सेट भेंट किया। प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को वाराणसी में बना गुलाबी मीनाकारी ब्रोच और कफलिंक सेट उपहार में दिया। ये कफलिंक राष्ट्रपति और मैचिंग ब्रोच फर्स्ट लेडी के लिए तैयार किए गए हैं।

पीएम मोदी ने यूके के पीएम बोरिस जॉनसन को यूपी के बुलंदशहर में बना प्लेटिनम पेंटेड हैंड पेंटेड टी सेट गिफ्ट किया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को छत्तीसगढ़ से रामायण थीम वाली डोकरा कला भेंट की। डोकरा कला अलौह धातु की ढलाई कला है। ऐसी धातु की ढलाई का उपयोग भारत में 4,000 से अधिक वर्षों से होता आ रहा है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति अलबर्टो फर्नांडीज को छत्तीसगढ़ की डोकरा कला से बनी नंदी भेंट की। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार नंदी को भगवान शिव का वाहन माना जाता है।

UAE के बाद अब बहरीन में भी बनेगा भव्य मंदिर, PM मोदी की पहल पर मुस्लिम मुल्क के शाही परिवार ने भेंट की थी जमीन

प्रधानमंत्री मोदी की खाड़ी देशों में की गई सकारात्मक पहल अब रंग ला रही है। जिसका नतीजा है कि इन मुस्लिम देशों में भी एक के बाद एक भव्य हिन्दू मंदिर बनने की बात सामने आ रही है। वहीं इस बार खाड़ी देश बहरीन से हिन्दू मंदिर बनने की खबर सामने आई है। बता दें कि यूएई के बाद बहरीन मध्यपूर्व का दूसरा देश होगा, जहाँ शाही परिवार की मदद से भव्य हिंदू मंदिर बनने जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा ने मंगलवार (27 जून, 2022) को स्वामी ब्रह्मविहारीदास और BAPS स्वामीनारायण संस्था के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान बहरीन में बनने वाले स्‍वामीनारायण हिंदू मंदिर के निर्माण को लेकर चर्चा हुई।

स्वामी ब्रह्मविहारीदास ने इस मंदिर के सपने को साकार होने को लेकर बहरीन के क्राउन प्रिंस और भारत के प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह काफी खास पल है और दोनों देशों के बीच मधुर संबंधों और विचारों का आदान-प्रदान हो रहा है।

बता दें कि इसी साल 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहरीन यात्रा के दौरान इस मंदिर के निर्माण को लेकर बहरीन ने भूमि को उपहार स्वरुप देने की घोषणा की थी। वहीं इस बैठक में में भारतीय राजदूत पीयूष श्रीवास्तव भी मौजूद थे। मीटिंग का नेतृत्व बीएपीएस मध्य पूर्व के प्रमुख और अंतर्राष्ट्रीय समन्वयक स्वामी ब्रह्मविहारीदास ने किया। प्रतिनिधिमंडल में स्वामी अक्षरितदास और BAPS बहरीन के अध्यक्ष डॉ. प्रफुल्ल वैद्य भी शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसा, इस बैठक के दौरान ब्रह्मविहारीदास ने क्राउन प्रिंस को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह संदेश भी दिया जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत किया है। उन्होंने बीएपीएस के वैश्विक आध्यात्मिक नेता महंत स्वामी महाराज का आशीर्वाद और शुभकामनाएँ भी क्राउन प्रिंस को दीं।

गौरतलब है कि बैठक के बाद इस मौके पर स्वामी ब्रह्मविहारीदास ने कहा, “बहरीन में बनने वाला यह मंदिर उन सभी धर्मों के लोगों का स्वागत करेगा जो भारतीय परंपराओं को जानना और समझना चाहते हैं और विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए जगह रखते हैं।”

वाह रे एडिटर्स गिल्ड! जो पत्रकार नहीं उसकी चाहिए रिहाई, जो एडिटर इन चीफ उस पर खानापूर्ति: जुबैर और अर्नब में ऐसे फर्क करता है इकोसिस्टम

हिन्दू देवी-देवताओं का खुलेआम अपमान करने वाले मोहम्मद जुबैर की दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी पर ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI)’ ने लंबा-चौड़ा बयान जारी किया है। इसमें AltNews के सह-संस्थापक की गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए कहा गया है कि 2018 के एक ट्वीट को लेकर सोमवार (27 जून, 2022) को ये कार्रवाई की गई। EGI ने दिल्ली पुलिस से मोहम्मद जुबैर को तुरंत रिहा करने की माँग की है।

गिल्ड ने अपने बयान में कहा, “घटनाओं को विचित्र मोड़ देते हुए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मोहम्मद जुबैर को पूछताछ के लिए बुलाया था। ये 2020 का मामला था, जिसमें उच्च न्यायालय ने उन्हें गिरफ़्तारी से राहत दे रखी है। जब जुबैर ने समन पर प्रतिक्रिया दी तो उन्हें इसी महीने शुरू की गई एक आपराधिक जाँच के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया। एक अज्ञात पहचान वाले ट्विटर हैंडल ने उनके 2018 के एक ट्वीट पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया था।” मोहम्मद ज़ुबैर ट्विटर पर कह चुका है कि वो पत्रकार नहीं है, फिर उसके लिए EGI सामने क्यों आया?

इस बयान में कहा गया है कि IPC की धाराओं 153 और 295 लगा कर मोहम्मद जुबैर को गिरफ्तार किया जाना काफी आकुल करने वाला है, क्योंकि उसकी वेबसाइट AltNews ने पिछले कुछ समय में फेक न्यूज़ को चिह्नित करने में ‘उदाहरण पेश करने वाले’ कार्य किए हैं और ‘दुष्प्रचार अभियानों को काटा’ है। EGI का कहना है कि मोहम्मद जुबैर ने ये सब तथ्यात्मक और वस्तुनिष्ठ तरीके से किया है। साथ ही संस्था ने कहा कि टीवी पर सत्ताधारी पार्टी के एक प्रवक्ता के ‘ज़हरीले बयान’ का खुलासा था, जिस कारण पार्टी को बदलाव करना पड़ा।

अर्णब गोस्वामी EGI के लिए पत्रकार होते हुए भी पत्रकार नहीं हैं। मोहम्मद जुबैर खुद को पत्रकार न बताते हुए भी इनके लिए पत्रकार है। तभी एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया सेलेक्टिव आउटरेज का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है, जहाँ वो खुद चुनता है कि कब किसकी गिरफ़्तारी को छिपाना है और किसे उठाना है। अब संस्था बताए कि क्या वो जुबैर के हिन्दू देवी-देवताओं वाले ट्वीट्स-पोस्ट्स का समर्थन करता है? वो खुद को खुलेआम हिन्दू विरोधी घोषित कर दे फिर।

वहीं अर्णब गोस्वामी को जब उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित करते हुए उद्धव ठाकरे सरकार की मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तब EGI ने काफी दबाव के बाद दो पैराग्राफ में बयान जारी कर इतना लिख इतिश्री कर ली थी कि पुलिस उनके साथ अच्छा व्यवहार करे। रिहाई की माँग नहीं की गई थी और जिन आरोपों के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया था, उन्हें हाइलाइट किया गया था। जबकि जुबैर के मामले में उसके अपराधों के बारे में कुछ नहीं बताया गया है और सीधा उसे छोड़ने की माँग की गई है।

वहीं मोहम्मद जुबैर के समय EGI खुद ही जज बन बैठा है और कह रहा है कि AltNews की ‘सतर्क चौकसी’ ने उन लोगों को नाराज़ कर दिया था, जो दुष्प्रचार को एक हथियार बना कर समाज का ध्रुवीकरण करते हैं और राष्ट्रवादी भावनाओं को उकसाते हैं। एक तरह से ऐसा लग रहा है जैसे ये किसी विपक्षी पार्टी का बयान हो, पूर्णतः राजनीतिक। लोकतंत्र को लेकर G7 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता की याद दिलाते हुए एडिटर्स गिल्ड ने ऑफलाइन और ऑनलाइन कंटेंट्स की सुरक्षा की सलाह दी है।

अब सवाल उठता है कि जो खुलेआम खुद को पत्रकार ही नहीं मानता, उसकी रिहाई के लिए ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ ने क्यों दिन-रात एक किया हुआ है? जबकि जो उस समय भारत के सबसे ज्यादा टीआरपी वाले चैनल का मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ है, उसके लिए सिर्फ खानापूर्ति की गई थी। EGI ने जैसे अर्णब गोस्वामी के समय आत्महत्या के लिए उकसाने वाले आरोप का जिक्र किया था, अब उसने मोहम्मद जुबैर के सारे हिन्दूफोबिया वाले ट्वीट्स का जिक्र क्यों नहीं किया?

अगर ये संस्था पत्रकारों के हितों की बात करती है तो फिर इसे राष्ट्रवाद से क्या दिक्कत? हिन्दू एकता को ध्रुवीकरण का नाम देकर इसे क्यों भला-बुरा कह रहे ये? पत्रकारिता की बात करें ना। सत्ताधारी पार्टी से इनकी क्या दुश्मनी? बंगाल में पत्रकारों पर हमले पर हमले होते हैं, तब ये कहाँ चले जाते हैं? तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या TMC का नाम तो छोड़िए, एक बयान तक नहीं आता। छत्तीसगढ़ और आंध्र में पत्रकार गिरफ्तार किए जाते हैं तब इनकी घिग्घी बँधी रहती है, क्योंकि वहाँ इनके आकाओं की सरकार होती है।

असल में इनका काम पत्रकारिता है ही नहीं। इनका कार्य है कॉन्ग्रेस और TMC जिसे दलों के साथ मिल कर भाजपा विरोधी एजेंडा चलाना और इसी के तहत ये तय करते हैं कि किस पत्रकार को मार भी डाला जाए तो चूँ नहीं करना है और किसे मच्छर भी काट ले तो देश-दुनिया में हंगामा मचाना है। अब इनकी कोशिश होगी कि हर एक घटना के नैरेटिव का उर्दू और अरबी में अनुवाद कर के अपने क़तर के आकाओं को भेजें और उनसे बयान जारी करवाएँ।