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सिगरेट वाली ‘काली’, लक्ष्मी बम, गाड़ी को धक्का लगाते भगवान शंकर… मनोरंजन के नाम पर देवी-देवताओं का मजाक, इस हिंदू घृणा का इलाज क्या

मनोरंजन के नाम पर हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाना फिल्ममेकर्स का शौक रहा है। कहानी में कैसे भगवान शिव, दुर्गा और काली की एंट्री करानी है, हिंदुओं की आस्था से कैसे खिलवाड़ करना है, इसे वह बखूबी जानते हैं। लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) की डॉक्यूमेंट्री ‘काली’ इसका ताजा नमूना है।

तमिलनाडु के मदुरै में जन्मी लीना कनाडा की टोरंटो बेस्ड फिल्ममेकर हैं। ट्विटर (Twitter) ने लीना के उस पोस्ट पर रोक लगा दी है, जिसे उन्होंने 2 जुलाई 2022 को शेयर किया था। इस पोस्टर में एक्ट्रेस को ‘काली’ के रूप में सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है, जिसने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBTQ का झंडा थाम रखा है। हालाँकि, लीना पहली बार विवादों में नहीं हैं। उन्होंने साल 2002 में शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री ‘मथम्मा’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। काली के अलावा उनकी पिछली कई फिल्में जैसे ‘सेंगडल’, ‘पराई’, ‘व्हाइट वैन स्टोरीज’ भी विवादों का हिस्सा रह चुकी है।

हिंदू देवी-देवताओं को इस तरह चित्रित करने का भी यह पहला मामला नहीं है। डायरेक्टर अनुराग बासु भी अपनी फिल्म ‘लूडो’ में इसका पूरा ख्याल रखा गया था कि कैसे हिंदुओं को नीचा दिखाना है और उनकी भावनाओं को आहत करना है। ढाई घंटे की बेसिरपैर की फिल्म ‘लूडो’ का एक ही मकसद था। सीधे-सीधे हिन्दू धर्म का उपहास। सांकेतिक रूप से पूरी फिल्म में हिन्दू संस्कृति को चोट पहुँचाने की कोशिश की गई थी। इस फिल्म में हिन्दू त्रिदेवों का बेशर्मी से मजाक बनाया गया था और उसको बिलकुल उसी ढंग से ही फिल्माया गया था, जिस तरीके से आमिर खान की ‘पीके’ में दिखाया गया था। स्वांग रचने वाले तीन लोग ब्रह्मा, विष्णु, महेश का भौंडा सा रूप धरे सड़क पर नाच-कूद कर रहे थे, जिन्हें देख कर फिल्म का हीरो आदित्य रॉय कपूर वितृष्णा के भाव से मुँह बना रहा था। एक सीन में तो भगवान शंकर और महाकाली गाड़ी को धक्का भी देते दिखे थे।

अक्षय कुमार की फिल्म ‘लक्ष्मी बम’ (विरोध के बाद नाम बदलकर लक्ष्मी किया), आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ समेत अन्य कई फिल्मों में भी भावनाओं को ठेस पहुँचाया गया था। वर्ष 2021 में निर्देशक अली अब्बास की वेब सीरीज ‘तांडव’ में भगवान शिव और राम को लेकर विवादित सीन और डायलॉग्स दिखाए गए थे। एक्टर सैफ अली खान-स्टारर इस सीरीज को इसके कारण काफी विरोध भी झेलना पड़ा था।। बावजूद इसके हिन्दू देवी-देवताओं का फिल्मों में मजाक उड़ाना बंद नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि यह हिंदुओं की संस्कृति पर हमले की एक सोची-समझी साजिश है। आधुनिकता, सृजनात्मकता की आजादी के नाम पर ऐसी चीजों को परोसा जा रहा है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।

यह भी साफ है कि ऐसा जानबूझकर किया जाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो कभी किसी भी फिल्ममेकर ने अन्य मजहब के खिलाफ ऐसा लिखा या फिल्माया क्यों नहीं है। उन्हें पता है कि हिंदू देवी-देवताओं का उपहास करना सरल है। विवाद होने पर मुफ्त प्रमोशन और कमाई के चांस भी बढ़ जाते हैं। ज्यादा तूल पकड़ने पर कभी कभार नाम बदलकर या सीन को कट कर रिलीज कर दिया जाता है। लेकिन, इन सबमें उन्हें वह जोखिम नहीं झेलना होता है जो अन्य मजहब पर टिप्प्णी करने के कारण पैदा होता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करने के लिए माफी माँगना और टाइटल बदल लेना ही काफी है? आखिर क्यों बार-बार ऐसी फिल्मों को बनाया जाता है, जिसमें हिंदुओं की आस्था का मजाक उड़ाया जाता है। ऐसे में जब तक इस तरह की विवादित फिल्मों का निर्माण करने वालों, कलाकारों पर हमेशा के लिए बैन नहीं लगेगा, तब तक हिंदू संस्कृति का मजाक बनता रहेगा और हिन्दी फिल्मों में देवी-देवताओं को फूहड़ स्वांग रचा कर पेश किया जाता रहेगा।

बम, बंदूक, तलवार से कभी खत्म नहीं होगा हिंदुत्व: BJP नेता दिलीप घोष, पूछा- जब हजारों का कत्लेआम हुआ, तब नूपुर शर्मा थीं क्या

बंगाल में भाजपा के उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने हाल में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2022 में नुपूर शर्मा के ऊपर बात की। उन्होंने एक टीवी डिबेट शो के बाद देश में भड़के कट्टरपंथियों को लेकर कहा कि जो लोग तर्कों से नहीं जीत पाते वो बहस को तलवार से जीतने की कोशिश करते हैं। हिंदुत्व कभी तलवार, बम या बंदूक से नहीं खत्म हो सकता। इतिहास में बहुत कोशिशें हुई लेकिन जीत कोई नहीं पाया।

ट्विटर पर साझा की गई वीडियो में देख सकते हैं कि जब उनसे नुपूर शर्मा पर सवाल किया जाता है तो वह पूछते हैं, “अभी जो हो रहा है वो हो रहा है लेकिन स्वतंत्रता से पहले जो होता था तब भी नुपूर शर्मा थीं क्या? इतने सारे कत्लेआम किए गए। हजारों लोगों को मार दिया गया।”

इस पर एंकर ने उनसे पूछा कि क्या वो ये सब जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पर दिलीप घोष ने कहा,

ये सब जिस विचारधारा के कारण हो रहा है उसे बोलने से लोग डरते हैं। नुपूर का विषय कोर्ट में है। अगर गलत बात कही है तो उसका फैसला वहाँ पर हो जाएगा। आपके पास तर्क है तो उस तर्क को काटिए। चौड़े में आओ, टीवी चैनल पर बताओ गलत क्या कहा है। लेकिन आप जानते हैं सही कहा है तो आपका कपड़ा उतर जाएगा। विचारधारा को कोई तलवार से नहीं खत्म कर सकता। अगर ऐसा होता तो हजार साल राज हुआ तो हिंदुत्व खत्म हो जाता। क्यों नहीं हुआ?बम, बंदूक, तलवार सब चले। हजार लोग कत्लेआम हुए। खिलजी से लेकर नादिर शाह ने पूरे देश में खून की नदी बहा दी। लेकिन हिंदू खत्म हुए क्या? आज भी 100 करोड़ यही हैं। विचारधारा को खत्म नहीं किया जा सकता। आप खत्म हो जाएँगे। ये लोग तर्क से डरते हैं कि उन्होंने जो बोला सच था या गलत था ये सब चर्चा में साबित होना चाहिए।

बता दें कि इस चर्चा के दौरान घोष ने प्रदेश सीएम ममता बनर्जी पर धर्म दूषित करने का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा, “हमारा धर्म सिखाता है कि अपने धर्म का आचरण करो और दूसरे के धर्म का आदर। यहाँ उलटा होता है। हमारी मुख्यमंत्री हिंदू ब्राह्मण परिवार से हैं। पर पता नहीं वो आचरण क्या करती हैं। शाम में वो जाकर नमाज पढ़ती हैं। रोजे में भर पेट खाकर इफ्तार करती हैं। वह दूसरे के धर्म को भी दूषित करती हैं और अपने धर्म को भी दूषित करती हैं।”

जीसस क्राइस्ट पर टिप्पणी, केरल के मौलवी के खिलाफ केस दर्ज: BJP नेता ने की थी शिकायत, कहा – ईसाइयों की भावनाएँ आहत हुईं

केरल में बुधवार (6 जुलाई 2022) को कोच्चि की साइबर पुलिस ने ईसा मसीह पर अपमानजनक टिप्पणी के जरिए ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में वसीम अल हिकामी (Waseem Al Hikami) नाम के एक इस्लामिक मौलवी के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपित मौलवी के खिलाफ भाजपा नेता अनूप एंटनी ने पुलिस में शिकायत की थी। इसके बाद ये एक्शन लिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित मौलवी मलप्पुरम जिले के कोंडोट्टी का रहना वाला है। पिछले साल दिसंबर 2021 में आरोपित मौलवी ने यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में कथित तौर पर ईसाईयों को लेकर कई अपमानजनक टिप्पणियाँ की थी। इसी मामले में भाजपा नेता अनूप एंटनी ने शिकायत की थी। अनूप एंटनी भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व राष्ट्रीय सचिव हैं।

शिकायत में बीजेपी नेता ने आरोप लगाया है कि मौलवी वसीम अल हिकामी ने ईसा मसीह के जन्म को लेकर घटिया टिप्पणी की थी। उन्होंने इसमें कहा, “कई लोगों ने उन टिप्पणियों के बारे में शिकायत की थी, जो यीशु मसीह के लिए अपमानजनक थीं, लेकिन कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की गई थी। उसके बाद मैंने सीधे राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से शिकायत कर एर्नाकुलम साइबर सेल में भी एक याचिका दर्ज की थी। जिस तरह की मुझे उम्मीद थी, वैसी प्रतिक्रिया तो नहीं मिली, जिसके बाद मैंने एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से संपर्क किया और माननीय अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को संज्ञान में लेने की जरूरत है। जिसके बाद राज्य पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।”

बीजेपी नेता ने कहा कि वो इस मामले में तब तक कार्रवाई करते रहेंगे, जब इसका समाधान नहीं हो जाता। उल्लेखनीय है कि इस मामले में केरल पुलिस ने 28 जून को एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देश पर धारा इंडियन पीनल कोड की धारा 153-A (विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) और 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए अनुकूल बयान) के तहत केस दर्ज किया था।

पहले भी दर्ज हुआ था केस

गौरतलब है कि इससे पहले भी आरोपित इस्लामिक मौलवी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इसी साल जनवरी 2022 में हाबिल फ्रांसिस नाम के एक शख्स की शिकायत पर केस दर्ज हुआ था। एंटनी का आरोप है कि केरल पुलिस ने इसी तरह के मामलों में पीसी जॉर्ज को गिरफ्तार करने में बड़ी तेजी दिखाई थी, लेकिन इस मामले में कुछ नहीं किया। उन्होंने दोहराया कि वो वसीम अल हिकामी के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाएँगे।

BJP नेता के परिवार को उड़ाने की धमकी, कन्हैया लाल की हत्या पर कहा था- जिहादियों का बहिष्कार करो: नूपुर शर्मा का फोटो लगाने वाले वकील टारगेट पर

उदयपुर में कन्हैया लाल और अमरावती में उमेश कोल्हे की बर्बर हत्याओं के बाद से इस्लामवादियों द्वारा धमकी दिए जाने के मामले लगातार सामने आ रहे है। गुजरात के एक अहमदाबाद में वकील कृपाल रावल को हत्या की धमकी दी गई है। वहीं, राजस्थान के बाड़मेर में बीजेपी आईटी सेल संयोजक भूर सिंह राजपुरोहित को परिवार समेत बम से उड़ाने की धमकी दी गई है।

अहमदाबाद के रहने वाले वकील कृपाल रावल (32) ने पिछले महीने नूपुर शर्मा की तस्वीर अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लगाई थी। ये इमेज केवल तीन मिनट के लिए अपलोड की गई थी। इसके बाद इसे उन्होंने हटा लिया था। लेकिन इसके बाद से उन्हें लगातार इस्लामवादी धमकियाँ दे रहे हैं। व्हाट्सएप स्टेटस हटाने के करीब दो घंटे बाद उन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज आया। इसमें उन्हें गाली देते हुए नूपुर शर्मा को सपोर्ट करने का कारण पूछा गया।

इसके कुछ घंटों के बाद एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें नूपुर शर्मा वाले मामले को लेकर हत्या की धमकी दी। इसके बाद रावल ने साबरमती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 507 के तहत केस दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि 13 जून को रावल ने नूपुर शर्मा के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए उनकी इमेज को स्टेटस बनाया था।

इसी तरह से राजस्थान में बीजेपी नेता भूर सिंह राजपुरोहित को धमकी मिली है। उन्हें अज्ञात लोगों ने फोन पर 24 घंटे के अंदर मारने की धमकी दी। फोन करने वाले ने उनकी पूरी फैमिली को खत्म करने की बात भी कही। उसने कहा कि घर में घुसकर बम विस्फोट करूँगा।

घटना के बाद जिले के एसपी से मिलकर बीजेपी नेता ने सुरक्षा की गुहार लगाई। एसपी दीपक भार्गव के मुताबिक, फिलहाल बीजेपी नेता की सुरक्षा में एक गनमैन को लगा दिया गया है। भूर सिंह के मुताबिक, 4-5 दिनों से अलग-अलग नंबरों से दर्जनों फोन आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि कन्हैया लाल की हत्या के बाद एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने जिहादियों का बहिष्कार करने की बात कही थी। इसमें असंवैधानिक या गैर कानूनी शब्दों का प्रयोग नहीं किया। केवल इतना लिखा कि जिहादियों का बहिष्कार करो। इसके बाद से ही धमकी आने का सिलसिला शुरू हो गया।

‘खाते दरगाह की हैं, दुकान नूपुर शर्मा के समर्थन में बंद करते हैं’: अजमेर के एक और चिश्ती का भड़काऊ बयान, कहा- मुस्लिम बर्दाश्त नहीं करेगा, भारत हिल जाएगा

अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती ने भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा का सिर काट कर लाने वाले को अपना मकान देने का ऐलान कर डाला। अजमेर की दरगाह शरीफ मैनेजमेंट कमिटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने कई टीवी चैनलों में घूम-घूम कर कहा कि वो इस बयान का समर्थन नहीं करते, लेकिन खुद के भड़काऊ बयानों पर सवाल पूछे जाने पर मर्यादा लाँघ दी। उन्होंने पूछा, “तुम्हारे बाप का नौकर हूँ क्या?”

इससे पहले उन्होंने कहा था, “आज जो अजमेर शहर में हिन्दू भाई जुलूस निकाल रहे हैं, हमने तो पिछले जुमे को निकाला था जब हमारे पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताखी की गई थी। हमारे पास तो इसका वाजिब कारण है। हम तो किसी के देवी-देवताओं की बेइज्जती नहीं करते। हमने नूपुर शर्मा की गिरफ़्तारी की माँग की थी, इस बात का जुलूस था। आप किस बात के लिए जुलूस निकाल रहे हैं? ये नूपुर शर्मा के समर्थन में जुलूस निकाला गया था, लेकिन अंत समय में पोस्टर-बैनर बदल दिया गया।

सैयस सरवर चिश्ती ने कहा था कि इसका अर्थ है कि कोई हमारे नबी की शान में गुस्ताखी करेगा और हम गिरफ़्तारी की माँग करेंगे तो आप उसके साथ एकता दिखाएँगे? उन्होंने यहाँ तक दावा कर डाला कि हिन्दुओं ने हमारे जले पर नमक छिड़का है। उन्होंने कहा कि ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को पूरी दुनिया मानती है, ऐसे में इस जुलूस से उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि आज मुस्लिम इन चीजों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने बाजार की दुकानें बंद होने पर भी हिन्दुओं पर निशाना साधा और कहा कि प्रशासन ने उन्हें जो आज़ादी दी, इसका उन्हें बहुत अफ़सोस हुआ है और ये दुकानदार दरगाह की खाते हैं और फिर नूपुर शर्मा के समर्थन में दुकान बंद करते हैं। उन्होंने प्रशासन पर इस जुलूस की अनुमति के लिए निशाना साधा, भले ही वो मौन जुलूस ही हो। उन्होंने कहा कि जिस औरत ने हमारे नबी की शान में गुस्ताखी की, उसको गिरफ्तार करने की माँग के खिलाफ उसके साथ एकता दर्शाने की माँग से हमारी भावनाएँ आहत हुई हैं।

वहीं सलमान चिश्ती के बयान पर सैयद सरवर चिश्ती ने कहा कि वो हिस्ट्रीशीटर है, ड्रग्स का आदी है और पागल है। उन्होंने इस बयान को दरगाह से न जोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि दरगाह के सभी लोगों ने इसकी निंदा की है। उन्होंने इस दरगाह को सूफीवाद का प्रतीक बताते हुए कहा कि खादिम दूसरे धर्म के जुलूस पर भी फूल बरसाते हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब कह दिया कि देश में कलह के लिए, उदयपुर में हत्याकांड के लिए नूपुर शर्मा को जिम्मेदार ठहराया है, ऐसे में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार न कर के उनके लिए रेड कारपेट क्यों बिछाया?

उनसे दरगाह के सामने गौहर चिश्ती द्वारा ‘सर तन से जुदा’ के नारे पर कहा कि ये पूरी तरह गलत है और इस्लाम में इसकी कोई गुंजाइश नहीं है, लेकिन इसे उदयपुर की घटना से जोड़ना गलत है। उन्होंने मुस्लिमों की हत्याओं के लिए धर्म सभाओं में त्रिशूल बाँटे जाने को पूरा हिन्दू समुदाय सेलिब्रेट किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कठुआ के बलात्कारियों को माला पहना कर स्वागत किया। हालाँकि, फिर उन्होंने पूरे हिन्दू समुदाय को लपेटने वाले बयान पर कह दिया कि वो अपने शब्द वापस ले रहे हैं।

वहीं जब उनसे पूछा गया कि नूपुर शर्मा ने अपने शब्द वापस ले लिए हाँ, तो उन्होंने पूछा कि उनकी गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुई? उन्होंने ‘इंडिया टीवी’ के एंकर सौरभ शर्मा से बात करते हुए कहा कि ‘आपकी कम्युनिटी’ ने नूपुर शर्मा का समर्थन किया। वहीं शिवलिंग के अपमान पर उन्होंने कहा कि इस्लाम में इसकी सख्ती से मनाही है और हम ऐसे नहीं करते। इससे पहले एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ, जिसमें कहा गया कि जायरीनों की बदौलत कमाने वाले दुकानदारों की इतनी हिम्मत हो गई कि वो नूपुर शर्मा के समर्थन में दुकानें बंद कर रहे हैं, इन्हें धंधा के लिए तरसा दें।

इससे पहले सैयद सरवर चिश्ती का एक और बयान वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुस्लिम ऐसा अभियान चलाएँगे कि भारत हिल जाएगा। उन्होंने कहा कि नबी की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसा करने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ हमें कार्य करना होगा। बता दें कि सलमान चिश्ती को उसके भड़काऊ बयान के लिए गिरफ्तार किया जा चुका है। उदयपुर के साथ-साथ अमरावती में भी जिहादियों द्वारा नूपुर शर्मा के समर्थन के लिए की गई हत्याओं से देश अभी उबरा नहीं है।

तलवार लहराते स्कूल में घुसा अकबर, शिक्षकों को गाली-गलौज कर धमकाया: रिपोर्ट में बताया- बच्चे को ड्रेस-किताब का पैसा नहीं मिलने से था नाराज

बिहार के अररिया जिले में भगवानपुर पंचायत के एक विद्यालय में मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को ड्रेस और किताब की राशि नहीं मिलने पर तलवार लहराते हुए खाली बदन लुंगी पहने एक व्यक्ति स्कूल जा पहुँचा। इतना ही नहीं बल्कि तलवार लहराते हुए स्कूल के हेडमास्टर को गाली देने के साथ तलवार से काट देने की धमकी देने लगा। यह घटना तब घाटी जब विद्यालय में शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे।

मामला उस समय संज्ञान में आया जब इस अजीबोगरीब दहशत भरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, खुलेआम तलवार लहराने वाले व्यक्ति का नाम अकबर बताया जा रहा है।

जहाँ दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अकबर के बच्चे उस विद्यालय में पढ़ते हैं। लेकिन अब तक उसके बच्चे को किताब और ड्रेस की राशि नहीं मिल पाई है। इस वजह से अकबर गुस्से में तलवार लेकर स्कूल पहुँच गया और शिक्षकों को गाली गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देने लगा।

दैनिक भास्कर की खबर का स्क्रीनशॉट

अकबर यहीं नहीं रुका बल्कि उसने शिक्षकों को धमकी देते हुए कहा कि उसके बच्चे को 24 घंटे के अंदर पैसा चाहिए। वहीं इस मामले में स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि अकबर शिक्षकों से पैसे की माँग कर रहा था। इधर विद्यालय के हेडमास्टर मोहम्मद जहाँगीर आलम ने जोकीहाट के बीईओ को पूरे घटनाक्रम के बारे में फोन पर सूचना दे दी है।

वहीं एक दूसरी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला रंगदारी का लग रहा है। इस मामले में हेडमास्टर मोहम्मद जहाँगीर आलम ने अकबर के खिलाफ FIR दर्ज करवाते हुए लिखा है कि स्कूल के बगल में ही रहने वाले अकबर नामक व्यक्ति करीब एक साल पहले से स्कूल के अध्यापकों के साथ गाली-ग्लौज कर मिड डे मील का सामान, रूपया-पैसा देने की जोर जबरदस्ती के बल पर माँग करता आ रहा है। उन्होंने अकबर पर स्कूल के सामानों की चोरी कर बाजार में बेच देने का भी आरोप लगाया है।

पूरे मामले के बारे में FIR में जानकारी देते हुए हेडमास्टर जहाँगीर आलम ने घटना के संदर्भ में ने लिखा कि 05 जुलाई को जीतू चौक पर स्कूल के वेंडर याकूब के किराना दुकान पर अंडा की खरीददारी के लिए पहुँचा था। उसी समय अकबर पहुँच कर दुकान पर गाली-ग्लौज कर 50 हजार रुपए रंगदारी स्वरूप माँगने लगा। यहाँ तक कि याकूब को भी धमकी देने लगा और जेब में रखे पैसे को जबरदस्ती लूटकर जान से मारने की धमकी देते हुए घर दौड़ कर चला गया और घर से तलवार लेकर बीच रास्ते मे बैठ गया।

उन्होंने लिखा कि अंडा की खरीददारी के बाद स्कूल लौटने के क्रम में देखते ही जान मारने की धमकी देते हुए अकबर तलवार लेकर दौड़ पड़ा, जिसके बाद हेडमास्टर वापस याकूब के किराना के दुकान पर पहुँचकर, लोगों के मौके पर इकठ्ठा हो जाने से जान बच आने की बात उन्होंने आवेदन में कही है। हेडमास्टर जहाँगीर आलम ने अकबर पर तलवार से काटकर जीवन बर्बाद करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

वहीं इस मामले में जोकीहाट थाना पुलिस ने कहा है कि विद्यालय की तरफ से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है और वायरल वीडियो की भी जाँच की जा रही है। मामले की जाँच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

48 की उम्र में दोबारा दूल्हा बनेंगे भगवंत मान, CM आवास में राघव चड्ढा कर रहे शादी की तैयारियाँ: जानिए कौन हैं होने वाली पत्नी डॉ गुरप्रीत कौर

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान डॉक्टर गुरप्रीत कौर के साथ शादी रचाने जा रहे हैं। अपनी पहली पत्नी से वो 6 वर्ष पूर्व ही अलग हो चुके हैं। शादी का ये कार्यक्रम गुरुवार (6 जून, 2022) को चंडीगढ़ में होगा, जिसमें ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी उपस्थित रहेंगे। भगवंत मान की पहली पत्नी और बच्चे अमेरिका में रहते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद उनके बच्चों को उनके साथ देखा भी गया था।

शपथग्रहण समारोह में उनके दोनों बच्चे मौजूद रहे थे। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री के माँ की ख्वाहिश थी कि उनका बेटा फिर से घर बसाए, इसीलिए उन्होंने दूसरी शादी का निर्णय लिया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उनके लिए लड़की उनकी माँ और बहन ने ही चुनी है। एक सादे समारोह में शादी की बात कही जा रही है, जिसमें परिजनों के अलावा खास लोग ही शामिल होंगे। भगवंत मान ने कानूनी रूप से अपनी पहली पत्नी से तलाक की प्रक्रिया पूरी कर ली है।

2016 में ही भगवंत मान और उनकी पहली पत्नी इंदरप्रीत कौर अलग हो गए थे। 2011 में राजनीति में आए कॉमेडियन भगवंत मान 2014 में AAP के टिकट पर पहली बार संगरूर से सांसद बने थे। उस दौरान उनकी पहली पत्नी ने उनके लिए प्रचार भी किया था। बीच में उनका तलाक हो गया। इसके बाद 2019 में मान ने दोबारा लोकसभा के लिए जीत दर्ज की। 16 मार्च, 2022 को उन्होंने बतौर CM शपथ ली उन्होंने संगरूर से धुरी से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते।

शपथग्रहण समारोह में उनके बेटे और बेटी को भी देखा गया था। भगवंत मान का कहना था कि वो राजनीति की वजह से अपने परिवार को समय नहीं दे पाए, इसीलिए उनकी पत्नी ने उसे दूरी बना ली। सोशल मीडिया पर उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने पंजाब को परिवार के ऊपर चुना, इसीलिए उनका तलाक हुआ। मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में ही शादी समारोह होगा। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा शादी की तैयारियाँ देख रहे हैं, जिसे अब तक गुप्त रखा गया था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अपने-अपने परिवार के साथ वर-वधू को आशीर्वाद देने के लिए पंजाब आएँगे। शादी के आयोजन का खर्च भगवंत मान ही उठा रहे हैं। दूल्हे और दुल्हन दोनों सिख हैं, ऐसे में सिख रीति-रिवाज से ही ये शादी होगी। दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हैं। मान की बहन मनप्रीत और गुरप्रीत कई बार साथ में शॉपिंग भी करती हैं। भगवंत मान ने अपनी पहली पत्नी की तारीफ़ करते हुए कहा था कि उन्होंने बेटे दिलशान और बेटी सीरत का अच्छे से पालन-पोषण किया।

पति के सपने में आई ‘वो’, सोते में पत्नी ने डाल दिया खौलता पानी: हाथ-पीठ, प्राइवेट पार्ट बुरी तरह जले

पति-पत्नी में विवाद आम बात है। कई बार विवाद हिंसक मोड़ भी ले लेता है। लेकिन सपने को लेकर पति-पत्नी में झगड़े की बात आपने शायद ही सुनी हो। बोलीविया के ला पाज शहर में एक महिला ने अपने पति के ऊपर गर्म पानी उस वक्त उड़ेल दिया, जब वो सो रहा था। वजह, उसके पति के सपनों में कोई और महिला आ गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार महिला ने अपने पति के ऊपर सिर्फ इसलिए खौलता हुआ पानी डाल दिया, क्योंकि सोते हुए वह किसी दूसरी महिला के सपने देख रहा था। गर्म पानी के कारण पति के हाथ, पीठ, प्राइवेट पार्ट और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह से जल गए। घटना के बाद से पति का अस्पताल में इलाज चल रहा है। महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

महिला के मुताबिक उसका 45 साल का पति नींद में किसी दूसरी महिला के लिए अपना प्यार बयाँ कर रहा था। साथ में सोई उसकी पत्नी को जैसे ही इसकी भनक लगी, उसने पति को कुछ नहीं कहा। वह चुपचाप किचन में गई और पतीले में पानी को खौलाया। खौलता हुआ पानी लेकर वो आई और अपने पति पर नींद में ही उड़ेल दिया। महिला का कहना है कि उसने गुस्से में ऐसा किया, क्योंकि पति नींद में किसी और का ख्वाब देख रहा था।

TN International के मुताबिक ये साफ नहीं है कि खुद महिला के पति ने ये घटना पुलिस को बताई या फिर पड़ोसियों ने उसकी चीख सुनने के रिपोर्ट की। ला पाज की स्पेशल क्राइम फाइटिंग फोर्स के डिप्टी डायरेक्टर जुआन जोस डोनेयर के मुताबिक महिला एक बार पहले भी अपने पति पर शराब छिड़क कर उसे आग के हवाले करने की कोशिश कर चुकी है। हालाँकि तब उसने ऐसा क्यों किया था यह स्पष्ट नहीं है।

नूपुर शर्मा को कुछ हुआ तो क्या जस्टिस सूर्यकांत और परदीवाला होंगे जिम्मेदार: सुप्रीम कोर्ट से सवाल, गौ महासभा ने दायर किया नया हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों द्वारा नुपूर शर्मा पर की गई टिप्पणी के बाद न्यायालय में चीफ जस्टिस के समक्ष गौ महासभा के प्रमुख अजय गौतम ने एक हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में बताया गया है कि आखिर किस तरह नुपूर शर्मा का न्यायपालिका से गुहार लगाना जायज था लेकिन उनके ऊपर जजों द्वारा की गई टिप्पणियाँ नाजायज थीं। अपने हलफनामे से पहले अजय गौतम ने एक याचिका दायर की थी उसमें भी माँग की गई थी कि न्यायधीश अपने बयानों को वापिस लें। अब न्यायालय में दायर किए गए इस ताजा हलफनामे में केस से जुड़ी विस्तृत जानकारी और वाजिब सवाल हैं।

अपने हलफनामें में याचिकाकर्ता ने नुपूर शर्मा केस के पूरे घटनाक्रम को बिंदुवार ढंग से बताते हुए पूछा कि आखिर बिन किसी ट्रायल या अपील के कोर्ट ने अपने निष्कर्ष कैसे निकाल सकते हैं कि उदयपुर हत्या की असली आरोपित नुपूर हैं। उन्होंने पूछा क्या नुपूर दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों और लखनऊ में कमलेश तिवारी की हत्या जैसी घटनाओं का उदाहरण देकर पूछा क्या उसके पीछे भी नुपूर शर्मा ही हैं।

अजय गौतम के हलफनामे में सवाल किया गया है कि जिस तरह दोनों जजों ने कन्हैयालाल की हत्या को जस्टिफाई किया है, वैसे में अगर नुपूर शर्मा के साथ कुछ भी गलत हुआ तो उसका जिम्मेदार क्या जस्टिस सूर्यकांत और जेबी परदीवाला को ठहराया जाएगा। क्या अगर जजों की टिप्पणी के बाद कोई ईंशनिंदा के लिए कोई किसी को आहत करेगा तो उसके लिए दोनों जज जिम्मेदार कहे जाएँगे?

हलफनामे में ये भी कहा गया कि जजों बयान से देश में सुरक्षा का खतरा पैदा हो गया है। जो मामला अब तक शांत था वो इस टिप्पणी के बाद देश में आरोप-प्रत्यारोप का खेल बन गया है। अगर इसी तरह बयानबाजी करनी थी तो कोर्ट में जज होने की बजाय इन लोगों को राजनेता होना चाहिए था। हलफनामे में ये भी पूछा गया कि क्या जजों के पास ऐसे बयान देने का अधिकार है? अगर नहीं तो फिर इस प्रकार न्यााय पालिका की शक्तियों का दुरुपयोग करके क्यों देश को ऐसी स्थिति में ला दिया गया है जो देश में दंगे तक करवा सकते हैं।

इसमें कहा गया कि दोनों न्यायधीशों ने पहले ही ये सोचा हुआ था कि नुपूर शर्मा के बारे में उन्हें क्या कहना है जबकि हकीकत है कि देश में हो रही हत्याओं के लिए नुपूर शर्मा नहीं बल्कि तालिबानी सोच जिम्मेदार है जो देश में पनपने लगी है।

आगे के हलफनामे में वो तमाम जहरीले बयान उदाहरण के तौर पर दिए गए हैं जिन्हें आजतक कट्टरपंथी खुलेआम देते रहे हैं लेकिन उनपर कार्रवाई नहीं होती। इस लिस्ट में अकबरुद्दीन ओवैसी का वो बयना भी है जिसमें उसने हिंदू देवताओं का अपमान किया और कहा कि वो लोग 15 मिनट में हिंदुओं को देश से साफ कर देंगे। इसी तरह जामा मस्जिद के इमाम पर 50 से ज्यादा एफआईआर हुई मगर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

याचिकाकर्ता ने अपने हलफनामें में कहा कि उनके पास इस मामले में जरूरी कार्रवाई के लिए भारत के चीफ जस्टिस से गुहार लगाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। उनका अनुरोध है कि उनकी याचिका पर गौर किया जाए और जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस परदीवाला को उनका बयान वापस लेने के लिए निर्देश दिए जाएँ। इसके अलावा नुपूर शर्मा की याचिका पर चीफ जस्टिस स्वत: संज्ञान लेकर सभी मामलों को एक जगह जोड़ दें और कोई भी ऐसा निर्देश दे दें जो तथ्यों और परिस्थितियों को भाँपते हुए उचित लगे।

खुद को क्लीन चिट, Razorpay पर मढ़ दिया सारा दोष: विदेशी चंदे पर AltNews की नई कारस्तानी, कई अन्य माध्यमों से भी लेता है डोनेशन

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज (AltNews) ने मंगलवार (5 जुलाई, 2022) को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक बयान साझा कर खुद को क्लीन चिट देने की कोशिश की। ​कथित फैक्ट चेक वेबसाइट ने इसमें पेमेंट गेटवे फर्म रेजरपे (Razorpay) को दोषी ठहराते हुए आरोप लगाया कि उसने मनमाने ढंग से काम किया। ऑल्ट न्यूज ने अपने बयान में यह भी दावा कि उसके दानदाताओं संबंधी डेटा को उसकी जानकारी के बिना ही पेमेंट गेटवे रेजरपे ने पुलिस के साथ साझा किया था। पुलिस के अनुरोध के बाद रेजरपे ने अपने मंच पर ऑल्ट न्यूज के खाते को निष्क्रिय कर दिया था और बाद में इसे फिर से चालू कर दिया था।

ऑल्ट न्यूज ने कहा, “दान मंच ने उन्हें सूचित किया था कि कुछ स्पष्टता मिलने के बाद उनका खाता फिर से सक्रिय कर दिया गया है। लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह स्पष्टता क्या है।”

इसके बाद ऑल्ट न्यूज ने यह दावा करते हुए खुद को क्लीन चिट दे दी कि अगर रेजरपे ने ऑल्ट न्यूज को नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया होता, तो वे फिर से उनके खाते को ​एक्टिव नहीं करते। उनका दावा है कि रेजरपे ने अपने खाते को फिर से सक्रिय किया, यह इस बात का सबूत था कि वे मंच के किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं कर रहे थे। ऑल्ट न्यूज ने फिर ‘दोहराया’ कि वे केवल भारतीय बैंकों के माध्यम से पैसा ले सकते हैं। विदेशी क्रेडिट कार्ड कभी भी रेजरपे के बैकएंड पर चालू नहीं थे। उन्होंने ये सब बताकर यह साबित करने की कोशिश की कि उन्हें विदेशों से कोई फंडिंग नहीं हुई है।

ऑल्ट न्यूज ने दावा किया कि विदेशों से मिलने वाले फंड की खबरें झूठी थीं। उसने अपने बयान के जरिए ‘गोपनीयता’ के नियम और शर्तों की धज्जियाँ उड़ा दीं और वो इस बात से चिंतित है कि रेजरपे जैसे ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ डेटा को ‘बिना बताए’ साझा किया। रेजरपे के नियमों और शर्तों के अनुसार, वह यूजर्स के डेटा को सरकार और नियामक एजेंसियों के साथ साझा कर सकता है, जो कानूनी रूप से जाँच, सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के तहत गोपनीयता अधिनियम के अंतर्गत आती हैं।

यूजर्स का डेटा साझा करने के लिए रेजरपे की नियम और शर्तें इस प्रकार हैं। रेजरपे यूजर्स या उनके रजिस्ट्रेशन डेटा संबंधित कोई भी जानकारी सरकारी और नियामक एजेंसियों के साथ साझा कर सकता है, जो कानूनी रूप से जाँच, सुरक्षात्मक और साइबर सुरक्षा गतिविधियों के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून की अनदेखी करना उन्हें कमतर आँकना है। रेजरपे कानूनी तौर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को डेटा प्रदान करने से पहले ऑल्ट न्यूज को सूचित करने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसे में ऑल्ट न्यूज द्वारा किए गए दावे इसके उलट हैं। इसके अलावा, कानून का पालन करने वाली कंपनी रेजरपे एक आरोपित को जाँच के बारे में सूचना क्यों देगा?

अब हम आपको यहाँ कुछ ऐसे तथ्यों से रूबरू करवाएँगे, जिन्हें देखने के बाद आप भी शॉक्ड रह जाएँगे। ऑल्ट न्यूज भले ही यह दावे करते नहीं थकता है कि उसे रेजरपे के माध्यम से विदेशी फंडिंग नहीं हो सकती है। लेकिन इस वेबसाइट के पास पैसे इकट्ठा करने के लिए रेजरपे ही एकमात्र प्लेटफॉर्म नहीं है, जिसका वह इस्तेमाल करते हैं।

पैसा लेने के लिए ऑल्ट न्यूज़ के वैकल्पिक प्लेटफॉर्म

फरवरी 2020 में, दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से ठीक 10 दिन पहले सीएए के विरोध में जमकर हिंसक प्रदर्शन किए गए। इस दौरान पत्रकार सागरिका ने ‘इंस्टामोजो’ प्लेटफॉर्म के जरिए ऑल्ट न्यूज को भुगतान किया था। इंस्टामोजो विभिन्न गेटवे जैसे वीज़ा, गूगल-पे, यूपीआई, रुपे और अन्य के माध्यम से पेमेंट स्वीकार करता है।

इंस्टामोजो पेमेंट

इसलिए ऑल्ट न्यूज सारा दोष रेजरपे पर डालने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि, इसका कोई सबूत नहीं है, अभी तक जाँच अधिकारी इस मामले की जाँच कर रहे हैं कि ऑल्ट न्यूज को कितना विदेशी धन प्राप्त हुआ था। इसके अलावा, भले ही ऑल्ट न्यूज को इनमें से किसी भी दान मंच के माध्यम से विदेशी धन प्राप्त नहीं हुआ हो, वे स्विफ्ट के माध्यम से सीधे अपने बैंक खातों में विदेशी धन प्राप्त कर सकते हैं।

वहीं, खुद पर आरोप लगने के बाद रेजरपे ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि सीआरपीसी की धारा 91 के तहत, रेजरपे नियमों का पालन हुए कानूनी जाँच में अपना सहयोग कर सकता और डेटा को पुलिस के साथ साझा कर सकता है। सीआरपीसी की धारा 91 के तहत कोई भी थाना प्रभारी उनसे जाँच के लिए डाटा माँग सकता है।

इसके अलावा, रेजरपे के प्रवक्ता ने मनीकंट्रोल से बात करते हुए कहा कि कंपनी ने ऑल्ट न्यूज से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। प्रवक्ता ने मनीकंट्रोल को बताया, “हमने कंपनी (AltNews) से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए डेटा साझा करने और 4 जुलाई को बेहद कम समय के लिए खाते को निष्क्रिय करने से पहले उन्हें सूचित नहीं कर सके।”

गौरतलब है कि ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को 27 जून को हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले एक ट्वीट को लेकर गिरफ्तार किया था। ऑल्ट न्यूज पर एफसीआरए के उल्लंघन में पाकिस्तान, सीरिया आदि से धन प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है। AltNews की पैरेंट कंपनी ‘Pravda Media’ को विदेश से 2,31,933 रुपए विदेश से मिले हैं। ‘Razorpay’ नामक पेमेंट गेटवे द्वारा दी गई प्रतिक्रिया के अनुसार, कई लेनदेन ऐसे थे जिनके आईपी एड्रेस बैंकॉक, मनामा, नॉर्थ हॉलैंड, विक्टोरिया, न्यूयॉर्क, सिंगापुर और रियाद के थे। इनमें बलदियात अद दावा, शारजाह, स्टॉकहोम, आईची, न्यू जर्सी, ओंटारियो, कैलिफोर्निया, टेक्सास और दुबई व स्कॉटलैंड जैसे लोकेशंस भी शामिल हैं।