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कन्हैया लाल की अंतिम यात्रा में उमड़ा उदयपुर, आनाकानी के बाद पुलिस ने दी श्मशान घाट ले जाने की इजाजत: शरीर पर 26 घाव के निशान, 10 तो गर्दन पर ही

कन्हैया लाल का अंतिम संस्कार उदयपुर के अशोक नगर श्मशान घाट में होगा। उनकी अंतिम यात्रा में बुधवार (29 जून 2022) को जन सैलाब उमड़ पड़ा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में में उनके शरीर पर घाव के 26 निशाने मिलने की बात कही गई है। इनमें से करीब 10 उनके गर्दन पर मिले।

इससे पहले खबर आई थी कि पुलिस और परिजनों के बीच अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की खबरें सामने आई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस चाहती है कि कन्हैया लाल का अंतिम संस्कार उनके घर के पास ही हो, जबकि परिजन अशोक नगर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार चाहते थे। शुरुआती आनाकानी के बाद पुलिस इसके लिए तैयार हो गई और शव परिजनों को सौंप दिया।

इसके बाद कन्हैया लाल की अंतिम यात्रा निकली तो लोगों को हुजूम उमड़ पड़ा। पुलिस के भारी बंदोबस्त के बीच कन्हैया लाल की अंतिम यात्रा निकाली गई। लोगों ने ‘कन्हैया लाल अमर रहे’ के नारे लगाए। इस दौरान कन्हैया की माँ और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी यशोदा का कहना है कि उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत नहीं सुनी। उन्होंने कहा, “आरोपितों को फाँसी दो, आज उसने हमें मारा है, कल दूसरों को मारेगा।”

गौरतलब है कि 28 जून को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैया लाल की दुकान में घुसे थे और उनका गला काट डाला था। इसके बाद से उदयपुर में तनाव की स्थिति है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात है। एनआईए और एसआईटी की टीम भी जाँच के लिए पहुँच चुकी है।

जिस ईश्वर ने देखा कन्हैया लाल का गला कटते, उस पर भी हुआ हमला: रिपोर्ट में दावा- उदयपुर के 2 और लोग भी इस्लामी दरिंदों के टारगेट पर

राजस्थान के उदयपुर (Udaipur, Rajasthan) में कन्हैया लाल साहू (Kanhaiya Lal Sahu) की निर्मम हत्या ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। वहीं, कन्हैया लाल को बचाने की कोशिश करने वाले उनके साथी ईश्वर सिंह (Ishwar Singh) भी इस्लामी आतंकियों के हमले में घायल हो गए हैं। वे फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं।

अब तक जो कहानी सामने आ रही है, वो यही है कि हत्या इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी करने वाली नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने पर की गई है। उदयपुर शहर के धानमंडी थाना क्षेत्र की मालदीस स्ट्रीट में टेलर का करने वाले कन्हैया लाल का सिर दो इस्लामी आतंकियों ने कलम कर दिया।

इसके साथ ही खबर यह भी सामने आ रही है कि कन्हैया लाल के बाद दो और लोगों की हत्या हो सकती है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपितों के निशाने पर कन्हैया लाल सहित तीन लोग थे। जिन अन्य दो लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है, उनमें से एक का जिक्र आरोपित मोहम्मद रियाज अत्तारी ने अपने 17 जून वाले वीडियो में भी किया है।

दरअसल, भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट को लेकर 10 जून को कुछ लोगों ने धानमंडी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कन्हैया लाल के अलावा 2 और लोगों का नाम था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। हालाँकि, 13 जून को कोर्ट ने तीनों को जमानत दे दी थी।

जमानत पर बाहर आने के बाद तीनों को लगातार धमकियाँ मिल रही थी। तीनों ने ही पुलिस से सुरक्षा की माँग की थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस ने कन्हैया और आरोपित पक्षों को बुलाकर आपस में समझौता करा दिया था। परिणाम ये हुआ कि कन्हैया लाल की दिन-दहाड़े सरेआम हत्या हो गई। वहीं, दो अन्य लोगों की जान भी खतरे में है।

कन्हैया लाल की हत्या की घटना के संबंध में उनकी दुकान में काम करने वाले ईश्वर सिंह ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताया कि मालदास स्ट्रीट पर कन्हैया लाल टेलरिंग का काम करते थे। इस दौरान दुकान में झब्बा-पायजामा सिलवाने के लिए दो व्यक्ति (गौस मोहम्मद और मोहम्मद रियाज अत्तारी) आए (कुछ मीडिया रिपोर्टों में आरोपितों का नाम रफीक मोहम्मद और मोहम्मद गौस बताया जा रहा है।)। वे दोनों कन्हैया लाल से इस सिलसिले में बात करने लगे।

ईश्वर सिंह ने आगे बताया कि रियाज नाप देने लगा और गौस वहाँ खड़ा रहा। इस दौरान वो भी अपने एक और साथी राजकुमार के साथ वहाँ मौजूद थे। अचानक चिल्लाने की आवाज आई और उन्होंने मुड़कर देखा तो रियाज कन्हैया लाल पर धारदार हथियार से लगातार हमला कर रहा था। 

ईश्वर सिंह ने बीच-बचाव किया तो उन पर भी हमला किया गया। आरोपितों के हथियार लगने से उनके सिर और बाएँ हाथ से खून निकल रहा था। फिलहाल उन्हें एमबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। ईश्वर सिंह ने बताया कि कन्हैया लाल कहा करते थे कि कपड़े ऐसे सिलो कि आदमी सज जाए। क्या पता था कि जिन्हें सजाने के लिए वे नाप ले रहे थे, वहीं कफन में बँधवा जाएँगे।

वहीं, कन्हैया लाल के पड़ोसी यशवंत का कहना है कि अगर उन्हें पुलिस सुरक्षा दी जाती तो उन्हें बचाया जा सकता था। यशवंत ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, “उन्होंने पाँच दिनों के बाद दुकान खोली थी, उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थीं। अगर पुलिस ने सुरक्षा दी होती तो शायद उसकी जान बच जाती।”

गौरतलब है कि कन्हैया लाल ने 15 जून को पुलिस में शिकायत दी थी और सुरक्षा की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। हालाँकि पुलिस ने सिर्फ दोनों पक्षों के बीच समझौता कराकर मामला रफा-दफा कर दिया।

मंगलवार (28 जून 2022) को दोनों आरोपित कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैया लाल की दुकान में घुसे थे। एक आरोपित वीडियो बनाता रहा, जबकि दूसरा अपना नाप देने लगा। कन्हैया नाप लेने में व्यस्त हो गए। फिर अचानक से आरोपितों ने उन पर हमला कर दिया। कन्हैया चीखते रहे लेकिन आरोपितों ने दबोच कर उनका सिर कलम कर दिया। खून से लथपथ कन्हैया ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

कन्हैया लाल तेली का सिर कलम किए जाने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सख्त, NIA को सौपी जाँच: अंतरराष्ट्रीय लिंक की होगी छानबीन, पूरे राजस्थान में धारा-144

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली का सिर कलम कर हत्या किए जाने की घटना की जाँच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) को सौंप दिया है। HMO ने इसे क्रूर हत्या करार देते हुए कहा कि इस घटना में किसी भी संगठन या अंतरराष्ट्रीय तार की मौजूदगी की पूर्णरूपेण जाँच की जाएगी। NIA की टीम घटनास्थल पर पहुँच भी चुकी है और उसने छानबीन शुरू कर दी है। जिहादियों ने धान मंडी स्थित कन्हैया लाल तेली की दुकान में घुस कर उनका सिर कलम कर दिया था।

बुधवार (29 जून, 2022) की सुबह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गृह सचिव के साथ एक आपात बैठक की, जिसके बाद ये निर्णय लिया गया। MHA ने हत्या वाले दिन ही NIA की टीम को घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया था। इससे पहले राजस्थान की सरकार ने भी इस घटना की जाँच के लिए SIT का गठन किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि ये कोई साधारण मामला नहीं है। नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर जिहादियों ने इस घटना को अंजाम दिया।

उधर अब उदयपुर में कन्हैया लाल के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है, जिसके लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। एक महीने के लिए पूरे प्रदेश में धारा-144 लागू कर दी गई है। हालाँकि, भाजपा ने बंद भी बुलाया है। पोस्टमॉर्टम के बाद कन्हैया लाल तेली का पार्थिव शरीर परिजनों के हवाले कर दिया गया है। दोनों हत्यारों गौस मोहम्मद और रियाज जब्बार से SIT ने उदयपुर पहुँच कर पूछताछ भी की है।

राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी उदयपुर पहुँच कर कन्हैया लाल के परिजनों से मुलाकात की है। उन्होंने राज्य सरकार के ख़ुफ़िया तंत्र को विफल बताते हुए कहा कि अपराधियों में कानून का कोई भय ही नहीं है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर दौरे को बीच में काट कर राजधानी जयपुर में अधिकारियों के साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। प्रशासन ने मृतक के परिजनों को 31 लाख रुपए और एक सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया, ​शिवसेना आदेश के खिलाफ पहुँची सुप्रीम कोर्ट

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Maharashtra Governor Bhagat Singh Koshyari) ने गुरुवार (30 जून 2022) को पत्र जारी कर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। इस दौरान मुख्यमंत्री उद्धव सरकार को बहुमत साबित करना होगा। सत्र सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। साथ ही पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी।

फोटो साभार: दैनिक भास्कर

इसी बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के आदेश के खिलाफ शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। शिवसेना के मुख्य सचेतक सुनील प्रभु ने फ्लोर टेस्ट पर रोक की माँग की है। कहा गया है कि अभी 16 विधायकों (बागी) के खिलाफ अयोग्य ठहराए जाने की कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। शिवसेना ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी होने से पहले फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता।

वहीं, महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट के बीच शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे बुधवार (29 जून 2022) को चार अन्य विधायकों के साथ गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर पहुँचे। उन्होंने कामाख्या देवी की पूजा-अर्चना की। इस दौरान शिंदे ने कहा, “मैं यहाँ महाराष्ट्र की शांति और खुशी के लिए प्रार्थना करने आया हूँ। फ्लोर टेस्ट के लिए कल (30 जून 2022) मुंबई जाऊँगा और सभी प्रक्रिया का पालन करूँगा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुवाहाटी के जिस रेडिसन ब्लू होटल में सभी बागी विधायक ठहरे हुए हैं, उसकी बुकिंग भी 12 जुलाई तक बढ़ाने की बात सामने आई है। उस दिन तक बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला भी आ जाएगा। शिंदे गुट की पूरी कोशिश है कि NCP के डिप्टी स्पीकर को अयोग्य ठहराया जाए।

बुधवार (29 जून 2022) को भाजपा ने भी अपने विधायकों को मुंबई बुलाया है। दल बदल कानून के तहत एकनाथ शिंदे को किसी दूसरे दल में शिवसेना का विलय करने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है, जिसका वो दावा कर रहे हैं। मंगलवार (28 जून 2022) देर रात भाजपा के देवेंद्र फडणवीस, गिरीश महाजन और चंद्रकांत पाटील उद्धव सरकार के खिलाफ फ्लोर टेस्ट की माँग को लेकर राजभवन पहुँचे थे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट को बड़ी राहत देते हुए 26 जून को अयोग्य ठहराए जाने वाले नोटिस पर जवाब देने के लिए अब 12 जुलाई की शाम 5:30 तक का समय दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे गुट की अर्जी पर सभी पक्षों को नोटिस भेजा है और सभी से पाँच दिन में नोटिस का जवाब माँगा है।

हिंदू हित में पहली बार गिर रही सरकार… अब तक सेकुलर ढोंग के नाम बिकती थी कुर्सी: महाराष्ट्र में लिखा जा रहा राजनीतिक इतिहास

राज्य में शिवसेना के नेतृत्व में बनी महा विकास अघाड़ी की उद्धव सरकार का बचना अब तकरीबन असंभव है। नई सरकार किसकी होगी और कौन इसका मुखिया होगा, फिलहाल इसके सिर्फ अनुमान लगाए जा सकते हैं। मगर महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में जो उखाड़-पछाड़ हो रही है, उसका असर यहीं तक सीमित नहीं रहेगा। उसके परिणाम भारतीय राजनीति पर दूर तक पड़ेंगे।

देखा जाए तो ये देश में उभरी नई राजनीतिक वास्तविकता का परिणाम है। स्वतंत्र भारत में यह पहला मौका है, जब ताल ठोक कर ये कहकर एक सरकार को गिराया जा रहा है कि वह हिन्दू विरोधी है। शिवसेना से विद्रोह करने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव की अघाड़ी सरकार को साफ-साफ ‘हिन्दू विरोधी’ कहा है। यही शिवसेना से बाहर आने का उनका मूल तर्क भी है। नहीं तो इतने नेताओं का शिवसेना जैसी पार्टी में एकसाथ होकर नेतृत्व को खुली चुनौती देना एक तिलिस्म जैसा ही लगता है। अगर जमीनी हकीकत बदली नहीं होती तो गठजोड़ों की राजनीति के उस्ताद शरद पवार के नेतृत्व वाले एमवीए को ऐसे ललकारना कोई आसान बात नहीं थी।

ये बात सही है कि राजनीति में सब कुछ सीधा-सीधा नहीं होता इसलिए शिवसेना से अलग होने के कई और भी कारण ज़रूर हैं। मगर अघाड़ी सरकार का ‘हिन्दू विरोधी’ चरित्र वह धागा है, जो इतने शिवसेना विधायकों और मंत्रियों को एकसाथ जोड़ रहा है। इससे पहले छगन भुजबल और नारायण राणे जैसे नेता भी सेना से अलग हुए थे। लेकिन वह कुछेक नेताओं का ही पार्टी से अलग होना था। अबकी बार तो जनता के वोट से चुने तकरीबन सभी बड़े नेता अगर शिवसेना से अलग हो रहे हैं तो बात कुछ गहरी है।

ये सब शिवसेना के उस बीज की उपज है, जो प्रखर और व्यक्त रूप से हिन्दू हितों की बात करता रहा है। बाल ठाकरे का स्पष्ट हिंदुत्व इनके ही नहीं बल्कि उस जनता के भी डीएनए में भी है, जिसने इन्हें चुना है। ये समझते हैं कि उद्धव सरकार के मौजूदा रवैये को जिसे ये हिन्दू विरोधी मानते हैं, लेकर वे जनता के बीच नहीं जा सकते।

ये सही है कि राजनीति में लोग पाला और दिशा दोनों बदलते हैं। लेकिन सौ की रफ़्तार से तेज़ी से दौड़ता हुआ व्यक्ति यदि अचानक पलटे तो वह धड़ाम से गिर ही जाएगा। ऐसी रफ़्तार में मुड़ने से पहले गति कम करनी होती है और एक अर्धकार गोल चक्कर लगाना पड़ता है। इन खाँटी शिवसैनिकों के लिए आक्रामक हिंदुत्व छोड़कर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति करना कुछ ऐसे ही हो गया था।

ये कैसे अपने वोटरों और जमीन पर काम करने वाले शिवसैनिकों को समझा पाएँगे कि हनुमान चालीसा पढ़ने के ‘जुर्म’ में एक सांसद और उनके विधायक पति को इनकी सरकार ने जेल भेजा? ये उन्हें कैसे बताएँगे कि एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने के लिए अभिनेत्री केतकी चिताले को एक महीने से अधिक जेल में क्यों रहना पड़ा? क्यों पालघर में दो साधुओं और उनके चालक की भीड़ ने सरेआम पीट-पीट कर हत्या कर दी और बालासाहब के पुत्र के नेतृत्व में चल रही सरकार बस दाएँ-बाएँ करती रही? इन विधायकों को लगता है कि इस तरह उनका दोबारा चुनना ही मुश्किल नहीं होगा, बल्कि उनकी अब तक जमा की हुई सारी राजनीतिक जमापूँजी सिर्फ इस ‘यू टर्न’ को समझाते-समझाते हवा में फुर्र हो जाएगी।

अब तक कथित ‘साम्प्रदायिकता’ का सवाल जिसे मूलतः हिन्दू विरोध के रूप में देखा जा सकता है, भारतीय राजनीति के कई गठजोड़ों की जड़ में रहा है। पर ये पहली बार हो रहा है जब हिन्दू हितों के समर्थन में महाराष्ट्र जैसे बड़े और महत्वपूर्ण राज्य में एक सरकार गिरने की कगार पर है। अल्पसंख्यकवाद की राजनीति का सिक्का देश में खूब चलता रहा है। लेकिन ये सिक्का अब खोटा हो चला है। महाराष्ट्र का घटनाक्रम इसकी पुष्टि कर रहा है।

अल्पसंख्यकों को भावनात्मक मुद्दों पर भड़का कर राजनीति कोई नई बात नहीं है। 1979 में जब चौधरी चरणसिंह और समाजवादियों ने मिलकर जनता पार्टी तोड़ी थी तो उन्होंने दोहरी सदस्यता को मुद्दा बनाया था। याद रहे कि 1977 में विपक्षी दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई थी। जनता पार्टी में तत्कालीन भारतीय जनसंघ (जो अब भारतीय जनता पार्टी है) भी शामिल था। समाजवादियों ने ये कह कर पार्टी तोड़ी थी कि जनसंघ के सदस्य पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दोनों से जुड़े नहीं रह सकते। इसका सीधा साधा मतलब था कि आप अन्य सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े रह सकते हैं लेकिन हिन्दू हितों की बात करने वाले संघ से सम्बन्ध नहीं रख सकते।

जनता पार्टी उस आपातकाल की देन थी, जिसकी बरसी गए 25 जून को देश ने मनाई। हर साँस में मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करने वाले दल, एनजीओ, एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया वीर कॉन्ग्रेस द्वारा देश पर थोपे इस काले अध्याय पर चुप ही रह जाते हैं। और तो और पालघर के साधुओं की हत्या में उन्हें ‘लिंचिंग’ नजर नहीं आती। जुबैर की गिरफ्तारी उन्हें अभिव्यक्ति की आज़ादी का गला घोंटने जैसी लगती है पर केतकी के जेल में रहने को वे एक सामान्य घटना मानते हैं। सवाल अब दोहरी सदस्यता का नहीं बल्कि इन दोहरे मानदंडों का बन गया है।

इस लिहाज से महाराष्ट्र की घटनाएँ और उत्तर प्रदेश के आजमग़ढ और रामपुर लोकसभा उपचुनावों के नतीजे एक नए जमीनी रुख और राजनीतिक वास्तविकता की और इशारा करते हैं। रामपुर में 50% से अधिक आबादी मुसलमानों की है तो आज़मगढ़ में 40% से अधिक मुस्लिम-यादव जनसंख्या है। इन दोनों सीटों को अल्पसंख्यक लामबंदी और मुस्लिम-यादव गठजोड़ के कारण समाजवादी पार्टी की बपौती माना जाता रहा है। लेकिन उपचुनाव के नतीजे अब नई कहानी कह रहे हैं। ये कहानी है कि चाहे वह उत्तर प्रदेश हो या फिर महाराष्ट्र, मुस्लिम तुष्टिकरण और जातिगत समीकरण की राजनीति एक नए तरह के ज़मीनी ध्रुवीकरण को जन्म दे रही है।

बनावटी, क्षद्म और सुविधा के अनुसार ओढ़ी गई एकतरफा सेकुलरवाद की चादर अब सिर्फ मैली ही नहीं बल्कि तार-तार हो गई है। हिन्दू हितों की बात करने वालों को साम्प्रदायिक बताकर अल्पसंख्यक वोट बटोरने का राजनीतिक खेल अब उलटे राजनीतिक और चुनावी परिणाम दे रहा है। इस मायने में एकनाथ शिंदे के विद्रोह ने एक नई राजनीतिक इबारत लिख दी है। इस नए राजनीतिक यथार्थ को जो दल झुठलाएगा, वह राजनीतिक इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह जाएगा। एक तरह से शिंदे और उनके साथियों ने हिन्दू विरोध की राजनीति के ताबूत में एक मोटी कील ठोक दी है।

कन्हैया लाल ने बताया था- पड़ोसी नाजिम और उसके साथी कर रहे रेकी-बाँट रहे फोटो, पर पुलिस ने कहा- समझौता हो गया, अपना ध्यान रखो: उदयपुर में क्या, कब, कैसे हुआ

राजस्थान के उदयपुर में 28 जून 2022 को इस्लामी दरिंदों ने कन्हैया लाल को काट डाला। इसकी आशंका उन्हें पहले से ही थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि दुकान खोलने पर उनकी हत्या की जा सकती है। इस डर से उन्होंने 6 दिन दुकान भी बंद रखी थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि उनका पड़ोसी नाजिम और उसके साथी उनकी रेकी कर रहे हैं। उनका फोटो अपने समाज के लोगों को भेज रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस की नींद नहीं टूटी। उसने कार्रवाई की बजाए एक समझौता कराकर खानापूर्ति कर ली। कन्हैया लाल से कहा कि समझौता हो गया है, अब बस अपना ध्यान रखना।

एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) हवा सिंह घुमरिया के अनुसार 10 जून को कन्हैया लाल के खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें कहा गया था कि पैगंबर मोहम्मद पर जो आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी उसे उसने आगे बढ़ाया है। इस शिकायत पर ऐक्शन लेते हुए उदयपुर पुलिस ने कन्हैया लाल को 11 जून को थाने में बुलाया और गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि, कन्हैया लाल को उसी दिन कोर्ट से जमानत मिल गई।

जमानत मिलने के बाद कन्हैया लाल को कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलने लगी। उन्हें अलग-अलग नंबरों से फोन और मैसेज के जरिए जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। घुमरिया ने भी पुष्टि की है कि खुद की जान पर खतरे को देखते हुए 15 जून को कन्हैया लाल ने शिकायत की थी। लेकिन कन्हैया को गिरफ्तार करने में देर ना करने वाली पुलिस ने धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी। कार्रवाई के नाम पर कुछ लोगों को थाने में बुलाकर कथित समझौता करवा दिया गया। कन्हैया लाल को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई। घुमरिया ने कहा है कि इस बात की जाँच की जाएगी कि समझौता होने के बाद ऐसी घटना क्यों घटी।

बताया जा रहा है कि कन्हैया लाल के मोबाइल से नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट किया गया था। हालाँकि कन्हैया लाल के परिजनों का कहना है कि यह पोस्ट कन्हैया के 8 साल के मासूम बच्चे ने अनजाने में कर दिया था। 15 जून को दी शिकायत में भी कन्हैया ने इसके बारे में कहा था, “करीब 6 दिन पहले मेरे बेटे से मोबाइल पर गेम खेलते हुए कुछ पोस्ट हो गया था। इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। पोस्ट व डीपी लगाने के दो दिन बाद दो लोग मेरी दुकान पर आए। मोबाइल की माँग की। बोले- आपके मोबाइल से आपत्तिजनक पोस्ट डाली गई है। मैंने कहा कि मुझे मोबाइल चलाना नहीं आता है। मोबाइल से मेरा बच्चा गेम खेलता है। उसी से हो गया होगा। इसके बाद पोस्ट भी डिलीट कर दी गई थी। उन लोगों ने कहा कि आइंदा से ऐसा मत करना।”

कन्हैया लाल ने शिकायत में यह भी कहा था कि रिपोर्ट दर्ज कराने वाले उनके पड़ोसी नाजिम और उसके साथ 5 लोग उनकी दुकान के चक्कर लगा रहे थे। वो उन्हें दुकान नहीं खोलने दे रहे थे। इसमें कहा गया, “मुझे पता चला है कि दुकान खुलते ही ये लोग मुझे जान से मारने की कोशिश करेंगे। नाजिम ने मेरा फोटो वायरल कर दिया है। सबसे कह दिया है कि ये व्यक्ति अगर कहीं रास्ते पर दिखे या दुकान पर आए तो इसे जान से मार देना।” कन्हैया लाल ने नाजिम समेत अन्य आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। साथ ही सुरक्षा की माँग की थी।

28 जून को मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद कपड़ा सिलवाने के बहाने से कन्हैया लाल की दुकान में घुसे थे। एक आरोपित वीडियो बनाता रहा, जबकि दूसरा अपना नाप देने लगा। कन्हैया नाप लेने में व्यस्त हो गए। फिर अचानक से आरोपितों ने उन पर हमला कर दिया। कन्हैया चीखते रहे लेकिन आरोपितों ने दबोच कर उनका सिर कलम कर दिया। खून से लथपथ कन्हैया ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

राजस्थान में धारा 144, उदयपुर में कर्फ्यू-इंटरनेट बंद: रिपोर्ट में दावा- कन्हैया लाल का अंतिम संस्कार घर के पास कराने पर तुली पुलिस

पूरे राजस्थान में एक महीने के लिए धारा 144 लागू कर दिया गया है। उदयपुर में इंटरनेट बंद है। कर्फ्यू लगाया गया है। कन्हैया लाल का गला काटने की घटना के बाद ये कदम उठाए गए हैं।

इस घटना के बाद से शहर में तनाव का माहौल बताया जा रहा है। पत्थरबाजी की भी खबर है। हालाँकि पुलिस हालात नियंत्रण में होने का दावा कर रही है। उदयपुर के डिविजनल कमिश्नर राजेंद्र भट्ट ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार कन्हैया लाल के शव का पोस्टमॉर्टम हो गया है। आज ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। लेकिन इसके लिए परिजनों और पुलिस के बीच विवाद है। पुलिस घर के पास ही उनका अंतिम संस्कार करवाना चाहती है। लेकिन परिवार अशोक नगर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार चाहता है। इसकी वजह से शव अभी भी परिजनो को सौंप नहीं गया है।

गौरतलब है कि कन्हैयालाल की टेलर शॉप थी। मंगलवार को वह दुकान में काम कर रहे थे। इस दौरान बाइक पर आए दो मुस्लिम युवक कपड़े का नाप देने के बहाने दुकान में घुसे और अचानक हथियार से हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट को लेकर उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थी। उन्होंने इसको लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए सुरक्षा माँगी थी जिसे पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया।

मामले में पुलिस ने हत्या के दोनों आरोपितों को राजसमंद से गिरफ्तार कर लिया है। एक का नाम मोहम्मद रियाज और दूसरे का नाम गौस मोहम्मद बताया जा रहा है। हत्यारों ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जान से मारने की धमकी दी थी। रियाज उदयपुर के खाजिपिर में रहकर मस्जिद में खिदमत का काम करता था। वही गौस वेल्डिंग और प्रॉपर्टी का काम करता था।

‘अब तेरी बारी, ऐसे ही तेरी गर्दन काटूँगा’: नवीन जिंदल और उनके पूरे परिवार का सिर काटने की धमकी, कन्हैया लाल के सिर कलम वाला Video भी भेजा

नवीन जिंदल और उनके पूरे परिवार का गला काटने की धमकी दी गई है। इसकी जानकारी उन्होंने बुधवार (29 जून 2022) सुबह ट्वीट कर दी है। उन्हें धमकी भरे तीन ई मेल मिले हैं। उदयपुर में कन्हैया लाल का गला काटने का वीडियो भी भेजा गया है। जिंदल को पैगंबर मुहम्मद पर ​कथित विवादित टिप्पणी के बाद बीजेपी से निकाल दिया गया था।

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “आज सुबह करीब 6:43 बजे मुझको तीन ईमेल आए हैं। उदयपुर में भाई कन्हैया लाल की गर्दन काटने का वीडियो अटैच करते हुए मेरी और मेरे परिवार की भी गर्दन ऐसी ही काटने की धमकी दी गई है। मैंने PCR को सूचना दे दी है।”

जिंदल ने अपने ट्वीट में दोनों ईमेल के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। पहले ईमेल के स्क्रीनशॉट में अकबर आलम का नाम लिखा हुआ है। वह लिखता है, “नवीन कुमार आतंकवादी अब तेरी बारी है। ऐसे ही तेरी गर्दन काटूँगा जल्द ही।” दूसरे ईमेल में अकबर आलम जिंदल को गाली देते हुए कहता है, “नवीन कुमार आतंकवादी @##$$$$ देख ले ऐसे ही कटिंग कर डालूँगा।”

पिछले दिनों जिंदल ने बताया था कि उन्हें इस्लामी चरमपंथियों द्वारा लगातार जान से मार डालने की धमकी मिल रही है। इन धमकियों के कारण उन्होंने परिवार सहित दिल्ली छोड़ने के लिए मजबूर होने की भी जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि कुछ लोग उनका पीछा कर रहे थे और उनकी रेकी भी की गई है।

गौरतलब है कि राजस्थान के उदयपुर में मंगलवार (28 जून 2022) को टेलर कन्हैया लाल की नृशंस हत्या कर दी गई थी। दोपहर करीब ढाई बजे बाइक पर सवार मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद आए। नाप देने का बहाना बनाकर वे दुकान में गए। इससे पहले कन्हैयालाल कुछ समझ पाते तब तक दोनों इस्लामी हत्यारों ने उनकी गर्दन काटकर हत्या कर दी।

यही नहीं इस्लामवादी हत्यारे ने 17 जून को अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो में वह कह रहा था, “मैं मोहम्मद रियाज राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से। ये वीडियो में जुम्मे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल ​करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”

‘इस्लाम ज़िंदाबाद! नबी की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं’: कन्हैया लाल का सिर कलम करने का जश्न मना रहे कट्टरवादी, कह रहे – गुड न्यूज़

राजस्थान के उदयपुर में मंगलवार (28 जून 2022) को टेलर कन्हैया लाल की गला रेत कर निर्मम हत्या करने वाले रफीक मोहम्मद और अब्दुल जब्बार का सोशल मीडिया पर समर्थन किया जा रहा है। पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने उदयपुर की घटना को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “उदयपुर हैवानियत कांड के दोनों हैवान पुलिस गिरफ्त में।” उन्होंने अपने ट्वीट में इनके नाम की जगह हैवान शब्द का इस्तेमाल किया है। मीडिया में एक का नाम रफीक मोहम्मद और दूसरे का नाम अब्दुल जब्बार बताया जा रहा है।

वहीं, मकसूद अहमद ने रफीक मोहम्मद और अब्दुल जब्बार का समर्थन करते हुए लिखा, “गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा…।” पोषक लिखता है, “गुड न्यूज”। शेख ने लिखा, “हो गया काम।” इनके अलावा शकील ने लिखा, “अच्छा हुआ।” इमरान अंसारी ने लिखा, “इस्लाम जिंदाबाद।” एमडी आलमगिर रज्वी लिखता है, “नबी की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं।”

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का समर्थन वाले कन्हैया लाल को मौत के घाट उतारने से पहले इस्लामवादी हत्यारे ने 17 जून को अपना वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। उसका 10 दिन पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह कह रहा है, “मैं मोहम्मद रियाज अंसारी राजस्थान के उदयपुर, खांजीपीर से। ये वीडियो में जुम्मे के दिन बना रहा हूँ। माशाल्लाह और 17 तारीख है। मैं इस वीडियो को उस दिन वायरल ​करूँगा, जिस दिन अल्लाह की शान में गुस्ताखी करने वाला का सिर कलम कर दूँगा। आपको एक मैसेज देता हूँ रियाज ने सिर कलम करने की शुरुआत तो कर दी है। बाकी के जो बचे हैं उन सभी का सिर आपको कलम करना है। इस बात का ध्यान रखना।”

वो आगे कहता है, “तुम इतने मर्डर कर देते हो, क्या एक मर्डर रसूल के नाम पर नहीं कर सकते हो। तुम सब पर लानत है। और उन पर भी जो मेरा ​वीडियो में देख रहे हैं। सरकार का फरमान है ‘गुस्ताख-ए-नबी की इक सजा, सर तन से जुदा। मोहम्मद रियाज अंसारी को दुआओं में याद रखना।” बता दें कि कन्हैयालाल का गला रेतने के दोनों आरोपितों को राजसमंद जिले के भीमा इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है।

कमलेश तिवारी होते हुए कन्हैया लाल तक पहुँचा हकीकत राय से शुरू हुआ सिलसिला, कातिल ‘मासूम भटके हुए जवान’: जुबैर समर्थकों के पंजों पर लगा है खून

वीर हकीकत राय से जो सिलसिला शुरू हुआ था, वो कमलेश तिवारी पर आकर रुका नहीं। वो आगे बढ़कर अब कन्हैयालाल तक पहुँच गया है। दो मुस्लिमों ने एक निहत्थे-बेगुनाह दर्जी की बेरहमी से हत्या केवल इसलिए कर दी है क्योंकि उसने नुपुर शर्मा को समर्थन देने का व्हाट्स-एप्प स्टेटस लगाया था। बिरियानी में बोटियाँ ढूँढने वाला हर कुत्ता जो कल ईद की सेवइयों पर अश-अश कर रहा था, इस क़त्ल का जिम्मेदार है। गिरफ़्तारी होते ही मुहम्मद जुबैर को पत्रकार घोषित करने की जल्दी पर उतरे हर लिबटार्ड के खूनी पंजों पर कन्हैयालाल का खून लगा है। दंगे के लिए भड़का रहे, दंगाइयों को भटका हुआ मासूम नौजवान बता रहे हर धूर्त के दाँतों में फँसा गोश्त उसके कातिल होने की गवाही दे रहा है।

ये हत्या इसलिए हुई है क्योंकि उन्हें पता है कि सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाने वाली कोई ओम थानवी जैसी किराए की कलम उनके पक्ष में लम्बे लेख लिखने उतर आएगी। उन्हें मालूम है कि कोई दूसरा कातिलों को मासूम भटका हुआ नौजवान बता देगा। उन्हें मालूम है कि गहलोत जैसा कोई मुख्यमंत्री कहने लगेगा कि वीडियो न निकालें क्योंकि इससे समाज में नफरत फैलाने का “उनका” मकसद सफल हो जाएगा।

उसे मालूम है कि सरयू में अश्लील बर्ताव करने पर सख्ती से मना कर दिए जाने पर जो लोग नाराज होकर तीस प्रतिशत संतुष्टों से निकलकर सत्तर प्रतिशत असंतुष्टों में जा बैठे थे, वो इस मुद्दे पर चुप्पी साध लेंगे। कुछ गिरे हुए मानवाधिकार के प्रवक्ता ऐसे भी होंगे जिन्हें इसी मौके पर सामाजिक सरोकार भूलकर, कला-साहित्य-संगीत की चर्चा करनी जरूरी लगने लगेगी।

राजस्थान की ये घटना राज्य की कोई पहली घटना भी नहीं है। रामनवमी के शांतिपूर्ण जुलूसों पर इस राज्य में पथराव किए गए थे। इसी राज्य में जब धरोहर की तरह सहेजे जाने योग्य, एक शिवमंदिर को शासन-प्रशासन के जोर पर तुड़वा दिया गया था। यहीं ओम थानवी जैसे लोगों की सत्ता पक्ष की सहायता से कॉलेज-यूनिवर्सिटी में पद हथियाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। प्राचीन शिवमंदिर को तोड़े जाने की निंदनीय घटना के बाद ओम थानवी जो कि कॉन्ग्रेसी सरकार की वजह से पत्रकारिता पढ़ाते भी हैं, उनके कई चेले-चपाटी तो फ़ौरन इस सरकारी हुक्म के समर्थन में भी उतर आए थे। पता नहीं क्यों उस वक्त वो अपना प्रिय तर्क, जिसमें कहा जाता है कि पत्रकार तो हमेशा सत्ता के विपक्ष में होता है, भूल गए थे। ऐसे लोगों के शिक्षा के संस्थानों में होना ही तो नई पीढ़ी को बरगलाने की उनकी क्षमता सुनिश्चित करता है!

शिक्षण संस्थानों में ऐसी क्षमता होने से ये तय होता है कि हिन्दुओं की पीढ़ी दर पीढ़ी को जब कुछ लोग ये बताएँगे कि आप सभ्यताओं के युद्ध के बीच में फँसे हैं तो आपको सफलता कम मिलेगी। ऐसे लोग ही वो लोग हैं जो बच्चे को कहते हैं “वो देखो कौवा”, और उसी वक्त नीचे से कन-कौव्वा काट लिया जाता है। काटने वाले से बचाना, कटने से बचाना तो जरूरी है ही, साथ ही “वो देखो कौवा” कहकर जिसने ध्यान भटकाया था, उसकी पहचान भी जरूरी है। इनके चेहरे से शराफत का नकाब नोचकर जबतक इनके भेड़िए जैसी लपलपाती जीभ और पैने दाँतों के बीच फँसे इंसानी गोश्त को बेनकाब न कर दिया जाए, सुरक्षा तो अधूरी ही रहेगी। एक कट्टरपंथी जमात है जो आपका सर काटती है, दूसरी लिबटार्ड जमात है जो कहती है नहीं-नहीं कुछ भी तो नहीं हुआ! दोनों से लड़ाई बराबर ही लड़नी होगी।

बाकी लड़ाई हो रही है और आगे लड़ाई तेज ही होने वाली है तो आप सोचिए कि लड़ने के लिए धन चाहिए, हथियार चाहिए, सिपाही भी चाहिए। आपने सभी का इंतजाम किया है या सिर्फ ये सोच रहे हैं कि आपकी ओर से सिपाही बिना हथियार, बिना धन, भूखा लड़ता रहेगा?