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201, 208 KMPH… T20 में भुवनेश्वर कुमार के गेंद की स्पीड देख नेटिजन्स पूछने लगे- शोएब अख्तर कौन: स्पीडोमीटर से सब चकराए

भारत और आयरलैंड के बीच पहले टी-20 मैच की दो गेंदों ने सबको हैरान कर दिया। रविवार (26 जून 2022) को डब्लिन में हुआ यह मैच भारत ने सात विकेट से जीता। इस मैच में भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar) की एक गेंद की स्पीड 201 KMPH (किलोमीटर प्रति घंटा) थी। अगली गेंद उन्होंने 208 KMPH की स्पीड से फेंकी!

स्पीडोमीटर ने जब यह आँकड़ा दिखाया तो हर कोई हैरान रह गया। हालाँकि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से ऐसा हुआ। लेकिन सोशल मीडिया पर इसके बाद प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई।

नेटिजन्स पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख्तर को याद करने लगे, जिनके नाम वर्ल्ड क्रिकेट में 161.3 kmph की गति से से सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड है। उसामा करीम ने लिखा, “शोएब अख्तर, उमरान मलिक कौन? भुवी ने अब तक की सबसे तेज गेंद फेंकी है। असली तस्वीर, अभी-अभी ली है।”

पंकज मिश्रा ने लिखा, “मैच में तो कमाल ही हो गया, भुवनेश्वर कुमार ने 200 से भी ज्यादा किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाल दी। ये मैच की पहली गेंद थी। सोनी स्पोर्टस नेटवर्क ये क्या था?”

रोहित बिश्ननोई लिखते हैं, “वर्ल्ड रिकॉर्ड! भुवनेश्वर कुमार ने 201 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डाली। क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद।” साथ ही उन्होंने फायर इमोजी भी शेयर किया है। इसके बाद वह दूसरा ट्वीट करते हैं, “भुवी ने 208 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ डाला। भुवी आज रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं। यह अविश्वसनीय है।”

करण नाम के एक और यूजर ने मैच का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, “शोएब अख्तर कौन?”

हालाँकि, यह सब किसी तकनीकी गलती के कारण हुआ। भुवनेश्वर कुमार भले ही सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड नहीं बना पाए हों, लेकिन टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट के पावरप्ले ओवर में वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ मुकाबले के पहले ही ओवर में कप्तान एंड्रयू बालबर्नी को बोल्ड किया।

यह टी-20 इंटरनेशनल मैच के पावरप्ले में भुवी का 34वाँ विकेट था। वह पावरप्ले ओवर में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। बता दें कि भारतीय टीम ने आयरलैंड के साथ दो मैच की टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला रविवार को जीतकर 1-0 की लीड बना ली है। इस मैच से जम्मू-कश्मीर के उमर मलिक को टी20 में डेब्यू करने का मौका मिला।

महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच शिवसेना सांसद संजय राउत को ED का समन, ₹1034 करोड़ के जमीन घोटाले में मंगलवार को होगी पूछताछ

महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच शिवसेना नेता संजय राउत को ईडी ने समन भेजा है। उन्हें 28 जून, 2022 को मुंबई स्थित ईडी दफ्तर में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। संजय राउत को प्रवीण राउत और पात्रा चॉल से जुड़े जमीन घोटाले के केस में प्रवर्तन निदेशालय ने समन भेजा है। वहीं संजय राउत को समन भेजे जाने पर शिवसेना ने सवाल उठाया है।

क्या है यह घोटाला

बता दें कि साल 2017 में कॉन्ग्रेस-एनसीपी की सरकार ने तय किया था कि पात्रा चॉल में रहने वाले 672 किराएदारों को फ्लैट मिलेगा। इसके लिए हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी एचडीआईएल की सहायक कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन को महाराष्ट्र हाउसिंग एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएचडीए) ने कॉन्ट्रैक्ट दिया था। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन की तरफ से 672 फ्लैट चॉल के किराएदारों को देने होंगे और 3000 फ्लैट एमएचडीए को हैंडओवर करना होगा।

ये सभी फ्लैट 47 एकड़ जमीन पर बनने वाले थे। तय ये भी हुआ था कि किराएदारों और एमएचडीए के लिए फ्लैट तैयार करने के बाद जो जमीन बच जाएगी उसे बिक्री और विकसित करने के लिए अनुमति देनी होगी। सबकुछ तय था कि कौन-कौन क्या करेगा और कैसे करेगा। लेकिन कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली फर्म गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन ने ऐसा नहीं किया। फर्म ने न तो चॉल के लोगों के लिए फ्लैट बनाए और न ही एमएचडीए को कोई फ्लैट दिया। यहाँ तक कि कंपनी ने जमीन आठ अन्य बिल्डरों को 1,034 करोड़ रुपए में बेच दी।

इस घोटाले में गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड यानी एचडीआईएल के लोग शामिल थे। ये कंपनी देश के चर्चित पीएमसी घोटाले में भी शामिल है। कंपनी के डायरेक्टर ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर बैंक कर्मचारियों और अफसरों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से लोन लिया। फिर कंपनी के एनपीए को खत्म करने के लिए 250 करोड़ रुपए का फेक डिपॉजिट बैंक में दिखाया गया। इसके बाद बैंक ने फिर से एनपीए वाली कंपनी एचडीआईएल को फ्रेश लोन दे दिया।

कैसे आया संजय राउत का नाम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस एचडीआईएल ने ये दोनों जमीन घोटाले किए थे, उसके डायरेक्टर प्रवीण राउत, सारंग वधावन, राकेश वधावन हैं। प्रवीण राउत और सारंग को 2020 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था। तब दोनों से पूछताछ में शिवसेना सांसद संजय राउत का कनेक्शन सामने आया था। बता दें कि प्रवीण राउत शिवसेना सांसद संजय राउत के दोस्त हैं।

वहीं प्रवीण का नाम भी पीएमसी बैंक घोटाला मामले में सामने आ चुका है। मामले में यह बात भी सामने आई थी कि प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी ने संजय राउत की पत्नी वर्षा को 55 लाख रुपए का ब्याज मुक्त कर्ज दिया था, जिसका इस्तेमाल राउत परिवार ने दादर में एक फ्लैट खरीदने के लिए किया था। इसे लेकर ईडी ने वर्षा और माधुरी राउत से भी पूछताछ कर, उनका बयान रिकॉर्ड किया था।

संजय राउत की संपत्ति की गई थी कुर्क

गौरतलब है कि 5 अप्रैल, 2022 को पात्रा चॉल भूमि घोटाला मामले में ED ने शिवसेना सांसद संजय राउत पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी संपत्ति कुर्क कर ली थी। इस कार्रवाई के तहत जाँच एजेंसी ने राउत के अलीबाग स्थित आठ प्लॉट और दादर में एक फ्लैट को कुर्क किया था।

इसी मामले में ED ने प्रवीण राउत से जुड़ी करोड़ों की संपत्ति को भी कुर्क किया था। ED ने 11 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की थी। इसमें पालघर में प्रवीण राउत से जुड़ी संपत्ति करीब 9 करोड़ रुपए की है। जबकि 2 करोड़ की कीमत वाले दादर में फ्लैट और अलीबाग में प्लॉट संजय राउत की पत्नी का बताया जाता है।

पत्नी के साथ हिंदू बने थे डायरेक्टर अकबर अली, दावा- मोपला नरसंहार पर बनी उनकी फिल्म की रिलीज केरल में अटकाई

केरल सरकार ने घर-वापसी कर मुस्लिम से हिन्दू बने फिल्म निर्देशक अली अकबर की मूवी ‘Puzha mutual Puzha Vare’ (नदी से नदी तक) को सेंसर सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया है। सेंसर कमिटी ने मोपला नरसंहार पर बने इस फिल्म को पास नहीं किया, जिससे इसकी रिलीज लटक गई है। बता दें कि मोपला मुस्लिमों ने जम कर हिन्दुओं का नरसंहार किया था और बाद में इतिहासकारों ने इसे ‘जमींदारों के खिलाफ विद्रोह’ का नाम दे दिया।

RSS के पदाधिकारी जे नंदकुमार ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी। बता दें कि इसी साल की शुरुआत में जाने-माने मलयाली फिल्मकार अली अकबर (Ali Akbar) विधिवत रूप से हिंदू बन गए थे। उन्होंने 13 जनवरी 2022 को उन्होंने पत्नी लुसिम्मा के साथ सनातन धर्म ग्रहण किया था। उसके बाद वे राम सिम्हन के नाम से जाने जाते हैं। केरल के इस फिल्मकार ने दिसंबर 2021 में तब घर वापसी का ऐलान किया था, जब मजहबी कट्टरपंथियों ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद खुशी का इजहार किया था।

अली अकबर के नए नामकरण के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी सामने आई थी। कहा जाता है कि करीब आठ दशक पहले मालाबार में इसी तरह एक व्यक्ति ने इस्लाम त्याग कर अपना नाम राम सिम्हन रखा था। इसके बाद मजहबी भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए उस व्यक्ति के घर पर हमला कर दिया था। राम सिम्हन और उनके भाई की हत्या कर दी गई थी। उनके परिवार के अन्य सदस्यों को जबरन उठाकर भीड़ अज्ञात जगह पर ले गई थी। देश की स्वतंत्रता से कुछ हफ्ते पहले ही इस घटना को अंजाम दिया गया था।

मोपला नरसंहार को लेकर इतिहास में कई हृदय विदारक घटनाएँ दर्ज हैं। एक शिशु अपनी माता का स्तनपान कर रहा था। मोपला मुस्लिमों ने उस बच्चे को उसकी माता की छाती से छीन कर उसके दो टुकड़े कर दिए। एक जगह एक महिला का बार-बार इस तरह क्रूरता से रेप किया गया कि उसकी मृत्यु हो गई। उसका छोटा सा बच्चा काफी देर तक अपनी मरी हुई माँ के शरीर पर खेलता रहा और स्तनपान करने की कोशिश करता रहा। 10,000 हिन्दुओं का नरसंहार किया गया। उनकी जमीनें, मंदिर और खेत – सब छीन कर नष्ट कर दी गई।

सपा के जिस MLA ने नमाज के लिए विधानसभा में माँगा था कमरा, उसके भाई पर तीन तलाक का केस: बीवी ने लगाया पीटने व अवैध संबंध का आरोप

कानपुर (Kanpur) की सीसामऊ विधानसभा सीट से सपा (Samajwadi Party) विधायक इरफान सोलंकी के भाई फरहान पर उनकी पत्नी ने तीन तलाक को लेकर FIR दर्ज करवाई है। इसके साथ पीड़िता ने चकेरी थाने में दहेज उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी देने की भी शिकायत दी है। इस मामले में पीड़िता ने अपने देवर इमरान और उसकी बीवी रूबी को भी नामजद किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता का नाम अम्बरीन फातिमा है। कानपुर के ही डिफेन्स कॉलोनी की रहने वाली फातिमा का निकाह 25 मार्च 2009 को कानपुर के फरहान सोलंकी से हुआ था। पीड़िता के 3 बच्चे भी हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया, “निकाह के 2 साल बाद फरहान के दूसरी लड़की से अवैध रिश्ते हो गए। जब मैंने इसका विरोध किया तब मुझे मारा-पीटा गया।”

शिकायत में आगे कहा गया है, “कुछ समय बाद फरहान ने मुझ से 5 लाख रुपए दहेज लाने के लिए कहा। मेरे इनकार पर वो लगातार दूसरा निकाह की धमकी देता रहा। 8 सितंबर 2019 को फरहान ने मुझे 3 तलाक देकर घर से निकाल दिया। मैंने इसकी शिकायत चकेरी थाने में की, लेकिन विधायक इरफान सोलंकी के दबाव में पुलिस ने कोई करवाई नहीं की।” फातिमा के मुताबिक, जब वह फरहान की शिकायत अपने जेठ इरफ़ान से करती, तब वह समझौता करवाने का झूठा दिलासा देते थे।

पीड़िता अम्बरीन ने इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कानपुर के पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई है। कमिश्नर के आदेश के बाद चकेरी थाना पुलिस ने आरोपित शौहर फरहान के साथ पीड़िता के देवर और देवरानी पर तीन तलाक, मारपीट, दहेज अधिनियम और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। ACP कैंट मृगांक शेखर ने अमर उजाला को बताया कि केस दर्ज कर के मामले की जाँच की जा रही है और सबूतों को जुटाया जा रहा है।

विवादित बयानों और कारनामों के लिए चर्चित हैं इरफान सोलंकी

गौरतलब है कि सीसामऊ से सपा विधायक इरफान सोलंकी अपने विवादित बयानों और कारनामों के चलते अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। कुछ दिन पहले 18 जून 2022 को उन्होंने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अग्निपथ योजना के विरोध में पुतला फूँकते हुए प्रदर्शन किया था।

सितंबर 2021 में उन्होंने झारखंड की तर्ज पर UP विधानसभा में भी नमाज़ के लिए कमरे की माँग की थी। मई 2020 में उन्होंने कोरोना काल में गाइडलाइन का उल्लंघन करते हुए उन्होंने भीड़ जुटाई थी। मार्च 2022 में विधानसभा में जीत के बाद उन्होंने प्रशासन के आदेशों को नजरअंदाज करते हुए एक बड़ा जुलूस निकाला था। इस मामले में उन पर FIR भी दर्ज हुई थी।

खरगोन में जहाँ दंगाइयों ने जलाए थे हिंदुओं के घर-दुकान, अब वहाँ ‘सुरक्षा दीवार’: मीडिया बता रहा ‘नफरत की दीवार’, क्योंकि मुस्लिमों को नहीं आ रहा रास

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले (Khargone, Madhya Pradesh) में 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी (Ram navami) की शोभा यात्रा पर उन्मादी भीड़ ने हमला कर दिया था। इस हमले के बाद हिंसक भीड़ ने न सिर्फ पथराव और आगजनी की थी, बल्कि पुलिस अधीक्षक (SP) को भी गोली मारकर घायल कर दिया था।

हिंसा के बाद हमलावरों की धर-पकड़ शुरू हुई और प्रशासन ने आगे ऐसा न हो इसके लिए कुछ कदम उठाए। उन्हीं कदमों में से एक कदम कुछ हिस्सों में बैरिकेड और जालियाँ लगाना शामिल हैं। हालाँकि, सुरक्षा की दृष्टि से उठाए गए इन प्रशासनिक कदमों को लेकर कई मीडिया संस्थानों ने एजेंडा चलाना शुरू कर दिया।

एजेंडा मीडिया ने दिया अलग एंगल

प्रशासन के इस कदम के कुछ ही समय बाद इस पूरे मामले को एक अलग रंग देने की कोशिश की जाने लगी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने इसे भारत-पाकिस्तान के बँटवारे से जोड़ दिया। ‘दैनिक भास्कर’ ने ‘शांति के लिए नफरत की दीवार’ जैसा शीर्षक दिया। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ ने बैरिकेड से झाँकते बच्चे की इमोशनल फोटो के साथ खबर लगाई। ‘द क्विंट’ ने दीवार पर शांति का हवाला देते हुए सवाल खड़ा किया। ‘टू सर्किल’ ने ‘मुस्लिमों को कैदी’ जैसा बताया।

मीडिया कवरेज

दीवार से हम सुरक्षित हो गए

खरगोन के हिंसा प्रभावित मोहल्ले भटवाड़ी के रहने वाले आशीष पंडित ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “मैं सेकेंड हैंड 2 पहिया गाड़ियों को खरीदने-बेचने का काम करता हूँ। मेरे घर पर पत्थरों और पेट्रोल बम से हमला हुआ था। मेरे चाचा कैलाश पंडित की दुकान को लूटकर जला दिया गया था। जो बीच में अवरोध (बैरिकेड) बनाया गया है, वो बहुत अच्छा काम हो रहा है। जिस रास्ते को रोका गया है उसी रास्ते से हमलावर एक बार नहीं, बल्कि कई बार आए थे। संकरी गलियों से वो आते हैं और फिर उधर से ही निकल जाते हैं।”

पहले भी हुआ है उन रास्तों का हिंसा में इस्तेमाल

आशीष ने बताया, “कुछ सालों से हमारी तरफ हिंसक घटनाएँ बढ़ गई थीं। 2018 के दशहरे और 2014 में भी हिंसा की घटनाएँ हुई थीं। उस समय उन्हीं गलियों का इस्तेमाल हुआ था, जहाँ अब बैरिकेड लगाए गए हैं। पथराव तो 2-4 बार पहले भी हुआ है। हमारा इलाका पूरा बॉर्डर इलाका माना जा सकता है। उस तरफ पूरा मुस्लिम बहुल क्षेत्र है।”

बैरिकेड का मतलब रास्ता रोकना नहीं

आशीष ने बताया, “जो बैरिकेड लगने को रास्ता रोक देना प्रचारित कर रहे हैं वो ये जान लें कि किसी का रास्ता नहीं रोका गया है। लोगों के आने और जाने के लिए अभी भी और कई रास्ते खुले हुए हैं। मेरे मोहल्ले में 2 जगहों पर बैरिकेड लगाए गए हैं, लेकिन किसी के भी निकलने का रास्ता नहीं रोका गया है। कई कनेक्टिंग रास्ते और भी हैं।”

जो घरों पर पत्थर मारे उनसे खरीदारी कैसे करें

आशीष ने आगे बताया, “जिस आटा चक्की वाले की खबर कई मीडिया वालों ने चलाई है वो तालाब चौक में मस्जिद के पास वाला हो सकता है। उसकी चक्की अभी भी चल रही है। ये सच है कि अब उसके यहाँ आटा पिसवाने हिन्दू कम जा रहे हैं। कोई भी खुद के घरों पर पत्थर मारने वाले से काम कैसे करवाएगा? इसके लिए कोई किसी को उकसा नहीं रहा, बल्कि लोग खुद ही झेल कर ऐसा कर रहे।”

जो गली बंद हुई वहीं से आकर मेरी दुकान लूटी और आग लगा दी

भटवाड़ी मोहल्ले में कौशिकी किराना की दुकान चलाने वाले कैलाश ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “प्रशासन ने जिस गली में बैरिकेड लगाया है वो काफी संकरी है। वहाँ से लगभग 150 की संख्या में भीड़ ने आकर मेरी दुकान लूट ली और जो बचा उसमें आग लगा दी थी। लोग डर से दुबक कर सब देखते रहे। उन्हें पुलिस के आँसू गैस से भगाना पड़ा था। तब तक लगभग 7 लाख रुपए का नुकसान हो चुका था। मुझे 2 लाख रुपए सरकार ने मुआवजा दिया है। यहाँ गेट लगना सुरक्षा की दृष्टि से बहुत सही है। भीड़ इसी राह से हथियार लेकर हमला करती है। बैरिकेड लगने से इतनी बड़ी संख्या में भीड़ अब नहीं आ पाएगी।”

ये तो बस बहाना है बाकी आने जाने के कई और रास्ते हैं

हिंसा पीड़ित कैलाश ने आगे कहा, “ये तो बस बहाना है। आने और जाने के कई रास्ते हैं। हालाँकि ये सरकार का लुकआउट है। जब हिंसा हुई थी तब पुलिस दिन और रात ड्यूटी पर रहती थी, लेकिन फ़िलहाल अब बैरिकेड पर पुलिसकर्मी तैनात नहीं होते। अब गेट लगने से अचानक उपद्रव थोड़ा कंट्रोल में रहेगा, क्योंकि भीड़ अचानक नहीं आ पाएगी। यहाँ भीड़ ने 3 हिन्दुओं के घर जला दिए थे।”

बैरिकेड लगा तो फिर से खोली दुकान

हिंसक भीड़ ने राजेश उर्फ़ राजू पाल की टेलरिंग शॉप को आग लगा दी थी। दुकान मालिक राजू ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “मेरी एन टेलर्स के नाम से दुकान थी, जिसमें लगभग 25 लाख रुपए का माल जलाकर राख कर दिया गया था। मुझे 2 लाख रुपए सरकार ने मुआवजा दिया है। अब सुरक्षा की दृष्टि से गेट लगाए गए हैं, जो बहुत जरूरी थे। अब छोटे बच्चे भले ही इसे पार कर के आ जाएँ पर भीड़ अचानक ही नहीं आ पाएगी। तब से अपनी खुद की जली दुकान के बदले दूसरी दुकान को किराए पर लेकर फिर से काम खड़ा करने की कोशिश कर रहा। अगर कोई इस बैरिकेड को गलत बता रहा तो ये बात सही नहीं है। ये हमारी सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।”

राजू पाल की दुकान जलाने के आरोपित

दोबारा दुकान खोलने के बाद फिर मिली धमकी

राजू पाल ने आगे बताया, “जब मैंने दुबारा अपनी दुकान खोली तब लगभग एक दर्जन मुस्लिम मुझे धमकाने आए। वो मेरी दुकान में आगजनी के बाद मेरे द्वारा कुछ लोगों को नामजद करने से नाराज थे। उन्होंने मुझे केस से मुस्लिमों के नाम वापस लेने की धमकी दी और कहा कि अगर मैं ऐसा नहीं करूँगा तो मेरी दुबारा खोली दुकान भी ज्यादा दिन नहीं चलने वाली। मैंने इस घटना की भी शिकायत पुलिस में की है। मेरी दुकान जलाने वाले उसी राह से आए थे, जहाँ अब बैरिकेड लगा है। हालाँकि, उस तरफ रहने वालों के आने-जाने के और भी रास्ते हैं।”

राजू पाल की जली दुकान

दीवार का विरोध सिर्फ मुस्लिम कर रहे

ऑपइंडिया से बात करते हुए लोकेन्द्र सेन ने कहा, “हिंसा के दौरान पथराव में मेरा छोटा भाई पवन सेन घायल हुआ था। अभी तक वो ठीक से चल नहीं पाता। वह जमींदार मोहल्ले में रहता है। वहाँ भी प्रशासन ने लोहे की जाली लगाई है। इसका विरोध सिर्फ मुस्लिम ही कर रहा होगा। हिन्दू तो अपनी सुरक्षा चाहता है। हिन्दू समाज प्रशासन के कदम से खुद को काफी सुरक्षित महसूस कर है है। जहाँ जाली लगी है, वहीं से हमलावर घुसकर हमला करते थे। यहीं पर शिवम नाम के लड़के को बुरी तरह मारा गया था। लेकिन, अब शायद ऐसा न कर पाएँ।”

पहले से चिह्नित थे हिंसा में प्रयोग होने वाले रास्ते

विश्व हिन्दू परिषद के खरगोन जिला महामंत्री विवेक सिंह ने ऑपइंडिया से कहा, “कुछ ख़ास रास्ते पहले से ही चिह्नित किए गए थे, जहाँ से भीड़ आकर हिंसा करके भाग जाती थी। ऐसे गिने-चुने रास्ते ही बंद किए गए हैं, न कि किसी को पैक कर दिया गया है। इस घटना से पहले भी पथराव करने वाले इन्हीं रास्तों का प्रयोग करते रहे थे। हिंसा के पीड़ित हिन्दुओं से पूछा जाए कि वो दीवार से संतुष्ट हैं या नहीं। अवरोधक हिन्दू समाज के पीड़ित लोगों की माँग पर बनाए गए हैं।”

भाजपा नेताओं ने भी बैरिकेड को जरूरी बताया

खरगोन के भाजपा नेता अनूप गोस्वामी और भाजपा से वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ रहे जिग्नेश पटेल ने भी बैरिकेड को लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया। इन दोनों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर इस बैरिकेड अथवा दीवार का कोई भी ऐसा विरोध नहीं, जो समाज में गलत संदेश दे रहा हो।

अवरोधक नगरपालिका प्रशासन ने लगवाए: पुलिस

खरगोन कोतवाली के TI ने बैरिकेड और अन्य अवरोध को पुलिस प्रशासन के बजाय नगरपालिका प्रशासन का निर्णय बताया। SP खरगोन ने भी इस मामले में कोई भी कमेंट करने से मना कर दिया। वहीं, DM ऑफिस का नंबर उठाया नहीं गया। किसी अधिकारी का वर्जन आने के बाद हम इस खबर में उसे अपडेट करेंगे।

बाला साहेब के बाद शिवसेना सुप्रीमो बनने की थी चर्चा, पर ‘दुर्घटना’ में चली गई जान: एकनाथ शिंदे के गुरु ‘धर्मवीर’ से क्या है राज ठाकरे का कनेक्शन

शिवसेना में बगावत और टूट के बीच खबर आ रही है कि पार्टी के बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे ने ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS)’ के संस्थापक राज ठाकरे से बात की है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोनों ने इस दौरान महाराष्ट्र की ताज़ा राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा की। राज ठाकरे, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के चचेरे भाई हैं। इस दौरान एकनाथ शिंदे ने राज ठाकरे के स्वास्थ्य को लेकर भी कुशल-क्षेम पूछा। उन्हें हाल ही में एक अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया है।

महाराष्ट्र राजनीतिक संकट में राज ठाकरे की एंट्री, एकनाथ शिंदे से की बात

बताया जा रहा है कि कम से कम 2 बार एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे की फोन पर बातचीत हो चुकी है। राज ठाकरे 2006 में ही शिवसेना छोड़ कर अपनी अलग पार्टी बना चुके हैं और तभी से उद्धव ठाकरे के साथ उनके सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे हैं। हाल ही में हिंदुत्व को लेकर राज ठाकरे ने आक्रामक रुख अख्तियार किया था। एकनाथ शिंदे का कहना है कि उनके पास 38 विधायकों का समर्थन है, जो शिवसेना से अलग गुट बनाने के लिए पर्याप्त है।

इधर शिवसेना ने बागी गुट के 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करते हुए नया विधायक दल का नेता नियुक्त कर दिया है। डिप्टी स्पीकर NCP से हैं, जिन्होंने इन फैसलों को हरी झंडी भी दिखा दी। शिंदे गुट इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट पहुँचा है। सभी बागी विधायक असम के गुवाहाटी स्थित रेडिसन ब्लू होटल में ठहरे हुए हैं। एकनाथ शिंदे का कहना है कि हम सब हिंदुत्व के लिए बलिदान होने को भी तैयार हैं। जबकि शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत उन्हें ’40 ज़िंदा लाशें’ बताते हुए ‘पोस्टमॉर्टेम’ की धमकी तक दे चुके हैं।

इसी बीच मनसे समर्थकों ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी पोस्ट की है, जिसमें राज ठाकरे अस्पताल के बिस्तर पर लेटे आनंद दीघे से मिल रहे हैं। आनंद दीघे ठाणे के सबसे बड़े नेता हुआ करते थे और एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु भी। इन तस्वीरों के साथ बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे ने उस मुलाकात के दौरान राज ठाकरे से कहा था, “धर्मवीर, हिंदुत्व की लड़ाई अब तुम्हारे हाथों में है।” ये उन दोनों की अंतिम बातचीत थी।

‘ठाणे के बाल ठाकरे’: एकनाथ शिंदे में लोग देखते हैं आनंद दीघे का प्रतिबिंब

आनंद दीघे को ‘ठाणे का बाल ठाकरे’ भी कहा जाता रहा है। दाढ़ी और तिलक के साथ उनका लुक्स कभी बिलकुल वैसा ही हुआ करता था, जैसा एकनाथ शिंदे का आज है। उनका ही प्रभाव था कि ये इलाका शिवसेना का एक अभेद्य दुर्ग बन गया और ठाणे लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना ने 7 बार जीत दर्ज की। उनके निधन के बाद भी उनके चेहरा और उनके शिष्य एकनाथ शिंदे की मेहनत काम करती रही। आनंद दीघे को ‘धर्मवीर’ कहा जाता था।

बालासाहेब ठाकरे के अनुयायी रहे आनंद दीघे को ‘गुरुवर्य धर्मवीर’ बताते हुए ठाणे में आपको कई पोस्टर-बैनरमिल जाएँगे। एकनाथ शिंदे भी कई बार उनका नाम ले चुके हैं। आनंद दीघे का निधन 50 से भी कम की उम्र में अगस्त 2001 में हो गया था। एक संदिग्ध सड़क दुर्घटना के बाद हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई थी। वी आजीवन कुँवारे रहे थे। अपनी उँगलियों में कई अँगूठियाँ पहनने वाले आनंद दीघे अपने कार्यकर्ताओं के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहते थे।

उन पर हाल ही में एक फिल्म भी आई थी, जिसका नाम था – ‘धर्मवीर: मुक्काम पोस्ट ठाणे’, जिसे 13 मई, 2022 को रिलीज किया गया था। ट्रेलर लॉन्च के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मुख्य अतिथि थे। एकनाथ शिंदे भी वहाँ उपस्थित थे। हालाँकि, फिल्म को ख़त्म होने से मात्र 10 मिनट पूर्व उद्धव ठाकरे स्क्रीनिंग से निकल गए। उन्होंने वो दृश्य नहीं देखा, जिसमें आनंद दीघे का एक्सीडेंट हो जाता है और फिर इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो जाती है।

इस मराठी फिल्म में आनंद दीघे का किरदार प्रसाद ओक और एकनाथ शिंदे का किरदार क्षितीश दाते ने निभाया है। फिल्म शुरू होने पर एकनाथ शिंदे को क्रेडिट भी दिया गया है। फिल्म ने 20 करोड़ रुपए की कमाई कर हिट का तमगा पाया। फिल्म में आनंद दीघे को गुरु पूर्णिमा पर बाल ठाकरे के पाँव धोते हुए दिखाया गया है। उम्मीदवार के चुनाव में ठाणे में बाल ठाकरे के ऊपर उनके निर्णय को दिखाया गया है। एकनाथ शिंदे फिर यही आनंद दीघे के लिए करते हैं। उनके मेडिकल रिकार्ड्स को गायब होते हुए दिखाया गया है।

आनंद दीघे ने भी बालासाहेब ठाकरे की तरह कभी चुनाव नहीं लड़ा। वो अपने गढ़ से पार्टी के मामलों को संचालित करते रहे। वो ‘ग्राहक सेवा मंच’ के जरिए लोगों की समस्याओं को सुलझाते थे। हमेशा काम में व्यस्त रहने वाले आनंद दीघे तड़के सुबह जग जाते थे। गणेश उत्सव और नवरात्रि के भव्य कार्यक्रम भी वो आयोजित करवाते थे। हालाँकि, TADA के अंतर्गत एक हत्या के आरोप में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। शिवसेना-भाजपा का गठबंधन कराने में उनका एक बड़ा किरदार था।

हत्या के आरोप में कॉन्ग्रेस सरकार ने किया था गिरफ्तार, संदिग्ध दुर्घटना में हुई थी मौत

ठाणे में कई विद्यालय, कॉलेज, सड़कें और पुल आपको आनंद दीघे के नाम पर मिल जाएँगे। सिर्फ ठाणे ही नहीं, बल्कि डोम्बिवली और कल्याण बेल्ट में भी शिवसेना को शून्य से उच्चतम स्तर तक पहुँचाने का श्रेय आनंद दीघे को ही जाता है। एक बार मेयर के चुनाव में वहाँ शिवसेना की हार हो गई। पार्टी कॉर्पोरेटर मोहन खोपकर ने विपक्षी उम्मीदवार को वोट दे दिया था। बाद में उनकी हत्या हो गई। आनंद दीघे ने उससे पहले बयान दिया था कि जिन्होंने पार्टी को धोखा दिया है, उसे नहीं छोड़ा जाएगा।

तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने आतंकवाद की धाराएँ लगा कर उन्हें हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। जेल से निकलने के बाद उनकी लोकप्रियता बढ़ती ही चली गई। लेकिन, सामने की तरफ से आती एक ट्रक ने उनके जीवन और राजनीतिक करियर, दोनों पर लगाम लगा दिया। जिस सिंघानिया अस्पताल में उनका निधन हुआ था, उसे उनके समर्थकों ने गुस्से में तबाह कर डाला था। उद्धव ठाकरे सहित कई शिवसेना नेताओं को ठाणे से बाहर ले जाना पड़ा था।

आनंद दीघे एक कुशल संगठनकर्ता थे,जो न सिर्फ प्रशासन से निराश गरीबों के लिए अलग न्याय व्यवस्था चलाते थे, बल्कि पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को भी आगे बढ़ाते थे। उस समय चर्चा ये चलती थी कि बाल ठाकरे के बाद आनंद दीघे ही शिवसेना का मुखिया बनने के लिए सबसे लोकप्रिय और योग्य व्यक्ति हैं। यही कारण है कि आज शिवसेना के कार्यकर्ता एकनाथ शिंदे का साथ दे रहे हैं और हिंदुत्व से भटकी उद्धव ठाकरे की शिवसेना से नाराज़ हैं।

उद्धव ठाकरे की सरकार के पास बहुमत नहीं: एकनाथ शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- शिवसेना के 38 MLA ने वापस लिया समर्थन

महाराष्ट्र में सियासी संकट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। एकनाथ शिंदे गुट ने विधायकों को नोटिस और विधायक दल के नेता के पद से हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस मामले में आज सुनवाई शुरू हो गई है। याचिका में शिंदे गुट विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई पर रोक की माँग कर रहा है। वहीं महाविकास अघाड़ी के बहुमत खोने की बात भी शिंदे गुट ने सुप्रीम कोर्ट को बताई है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में एकनाथ शिंदे ने कहा है, “महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन ने सदन में बहुमत खो दिया है क्योंकि शिवसेना विधायक दल के 38 सदस्यों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है और इस तरह सदन में बहुमत से नीचे आ गया है।”

वहीं सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के बीच शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे के समर्थक ठाणे में उनके समर्थन में उनके आवास पर एकत्रित हो गए हैं। वहीं पूरी सुनवाई का लाइव प्रसारण शिंदे गुट होटल से देखेगा जिसके लिए उन्हें लिंक भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जे बी पारदीवाला की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।

वहीं महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी भी कोरोना संक्रमण से ठीक होकर अस्पताल से राजभवन वापस लौट आए हैं। ऐसे में अब राज्यपाल की कार्रवाई पर भी सबकी नजर है। इस बीच कोश्यारी ने केंद्रीय गृह सचिव को पत्र लिखकर बागी विधायकों के परिवारों को तुरंत सुरक्षा मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।

वहीं शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे और बागी विधायकों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। इस जनहित याचिका में कहा गया है कि शिंदे गुट के विधायक अपने कर्त्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्हें फिर से अपने कार्यालयों में काम करने का निर्देश देने की माँग की गई है।

क्या है मामला

सीएम उद्धव गुट ने डिप्टी स्पीकर से 16 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की माँग की थी। इसपर कार्रवाई करते हुए शनिवार को डिप्टी स्पीकर ने उन विधायकों को नोटिस भेजा था और इस मामले पर जवाब देने के लिए आज विधानसभा में हाजिर होने को कहा था।

यहीं से शिवसेना के बागियों और उद्धव ठाकरे के बीच शुरू हुई सत्ता की जंग में शिंदे गुट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में डिप्टी स्पीकर के नोटिस के खिलाफ याचिका दाखिल की गई है। याचिका में माँग की गई है कि 16 बागी विधायकों के खिलाफ डिप्टी स्पीकर की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

इस याचिका में अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल का नेता बनाने की कार्यवाही को भी शिंदे गुट की तरफ से गैर कानूनी बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि उद्धव सरकार अल्पमत में है और उसकी तरफ से सुनील प्रभु को चीफ व्हिप बनाना भी अवैध है।

गौरतलब है कि शिवसेना के 38 बागी विधायकों के समर्थन के साथ एकनाथ शिंदे ने अपने गुट को ही असली शिवसेना बताया है। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिंदे के अलावा बागी विधायक भरत गोगावले ने भी याचिका दाखिल की है।

‘हमारा बेबी… जल्द आ रहा है’: आलिया भट्ट की प्रेग्नेंसी पोस्ट पर बोले करण जौहर- धड़कनें बढ़ा दी, रणबीर कपूर संग अप्रैल में लिए थे फेरे

हाल में शादी के बंधन में बंधे रणबीर कपूर और आलिया भट्ट माता-पिता बनने जा रहे हैं। आलिया भट्ट ने अपनी प्रेगनेंसी की खबर इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा “हमारा बच्चा… जल्द आ रहा है।” इस पोस्ट को देखने के कमेंट बॉक्स में बधाई के ढेर लग गए। वहीं कुछ ने ये भी कहा कि खुशखबरी बहुत जल्दी ही दे दी गई।

जानकारी के मुताबिक, आलिया भट्ट इस समय हॉलीवुड फिल्म हार्ट ऑफ स्टोन की शूटिंग करने के लिए लंदन में हैं। वहीं से उन्होंने अपने प्रेगनेंस होने की न्यूज दी है। उन्होंने जो तस्वीर शेयर की है उसमें वह और रणबीर सोनोग्राफी देख रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले भी इस कपल के माता-पिता बनने की बात सोशल मीडिया पर मई-जून की शुरुआत में सामने आई थी, लेकिन उस समय कपल द्वारा पुष्टि नहीं की गई थी। यूट्यूब पर भी उनके प्रेगनेंसी की न्यूज खूब ट्रेंड की थी। तब भी सामने आकर कपूर फैमिली से किसी ने इस बारे में नहीं कहा था।

हालाँकि शादी के दो महीने बाद अब ये साफ हो गया है कि मीडिया में लग रहे अनुमान सही थे। नीतू कपूर की भी एक वीडियो सामने आई है जिसमें वह पैपराजी के सामने ये खबर सुनकर मुस्कुराती नजर आती हैं और धन्यवाद देती हैं। वीडियो में वह ज्यादा रिएक्ट नहीं करतीं। बस जब पैपराजी उनके पूछता है कि वो दादी बन रही हैं तो वो मुस्कुरा पर थैंक्यू कहती हैं।

इसके अलावा करण जौहर ने भी आलिया की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि उन्हें ये खबर सुन कितनी खुशी है। उन्होंने कहा- ‘हार्ट इज बर्स्टिंग।’

बता दें कि आलिया और रणबीर, दोनों इसी वर्ष 14 अप्रैल को कुछ करीबियों के बीच शादी के बंधन में बंधे थे। शादी के पहले दोनों ने 7 साल एक दूसरे को डेट किया था। अब फिलहाल वह ब्रह्मास्त्र फिल्म में साथ नजर आने वाले हैं। ये फिल्म 9 सितंबर को रिलीज होगी। इसके निर्देशक अयान मुखर्जी हैं।

सबरीमाला मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिस वाहन पर इस्लामी चिह्न: सोशल मीडिया पर तालिबान से तुलना, BJP ने कहा- फोर्स में भी हैं PFI के भेदिए

केरल (Kerala) के पंबा में पुलिस की एक गाड़ी पर इस्लामी चिह्न चाँद-तारे छपे होने पर विवाद हो गया है। पुलिस का यह वाहन एक मंदिर की सुरक्षा में भेजा गया था। वाहन की ये तस्वीरें मंदिर आए एक भक्त ने ली। बाद में ये तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं।

विवाद बढ़ता देख कर केरल के DGP अनिल कांत ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। इसके साथ वाहन पर चिह्न का प्रयोग करने वाले शख्स पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। DGP ने राज्य पुलिस बल को किसी भी धार्मिक या राजनैतिक चिह्न का प्रयोग नहीं करने का आदेश दिया है।

जनम TV के मुताबिक, यह चिह्न सबरीमाला मंदिर की सुरक्षा में भेजे गए पुलिस वाहन पर छपा था। वहाँ भगवान अयप्पा का दर्शन करने गए किसी श्रद्धालु ने इस वाहन की तस्वीरें खींचीं और इसका वीडियो भी बना लिया। वाहन आयशर कम्पनी की मिनी बस है, जिसके आगे और पीछे इंग्लिश और मलयालम में पुलिस लिखा हुआ है।

भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने इस मुद्दे पर लिखा, “KL 01 CT 6687 नंबर का वाहन केरल के पुलिस प्रमुख के नाम पर रजिस्टर्ड है। यह वाहन पंबा सबरीमाला में खड़ा किया गया था। आप इसके बम्पर पर चाँद और तारे देख सकते हैं। यह केरल पुलिस की कट्टरता का एक बेहतरीन उदाहरण है। PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के भेदिए फोर्स में भी मौजूद हैं।”

हिन्दू पोस्ट नाम के हैंडल ने केरल पुलिस के वाहन पर लगे इस निशान की तुलना तालिबान द्वारा प्रयोग किए जाने वाले चिह्न से की है। हैंडल ने एक लेख के साथ केरल पुलिस के वाहन पर छपे चिह्न के साथ तालिबान का एक चित्र साझा किया है। इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि तालिबान के वाहन पर भी ऐसा ही चिह्न मौजूद है।

विवाद बढ़ने पर DGP ने दी सफाई

मामले के तूल पकड़ने पर केरल के DGP अनिल कांत ने सफाई दी है। उन्होंने कहा, “पुलिस बल किसी भी प्रकार के धार्मिक, राजनैतिक या जाति के चिह्न के प्रयोग से बचे। यदि कहीं भी ऐसे चिह्न लगे हैं तो उन्हें फौरन हटाया जाए और मामले की जाँच रिपोर्ट मुझे जल्द सौंपी जाए। अगर आगे से ऐसा कहीं कोई चिह्न दिखा तो वाहन के ड्राइवर और अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएँगे।”

ज्ञानवापी पर राणा अयूब के ‘जहर’ को ट्विटर ने भारत में किया बैन, सर्वे का आदेश देने वाले जज को मिल रही थी मौत की धमकियाँ

राणा अयूब द्वारा ज्ञानवापी पर किए गए एक ट्वीट पर ट्विटर ने कार्रवाई करते हुए उसे भारत में प्रतिबंधित कर दिया है। इस ट्वीट के खिलाफ सोशल मीडिया साइट को भारत सरकार ने एक्शन लेने को कहा था।

अपने ट्वीट में अयूब ने सरकार, न्यायव्यवस्था से लेकर देश के लोकतंत्र पर सिर्फ इसलिए सवाल उठाया था क्योंकि कोर्ट ने ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे की अनुमति दे दी थी। ये वही फैसला था जिसके बाद कट्टरपंथी जज को मारने की धमकी देने लगे हैं। उन्हें विदेशों से कॉल आ रही है।

अब अयूब ने अपने उसी ट्वीट पर लिए गए एक्शन की जानकारी पूरा मेल का सक्रीनशॉट लगाकर खुद दी। उन्होंने ट्विटर से पूछा कि आखिर ये क्या कर दिया। स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि ट्विटर की ओर से राणा अयूब को यह मेल रात के 9:29 पर भेजा गया। कार्रवाई पर हैरानी दिखाते हुए उन्होंने कहा, “हेलो ट्विटर, आखिर ये सब है क्या?”

बता दें कि जो ट्वीट हटने से राणा अयूब इतना आहत हैं उसके स्क्रीनशॉट अब भी सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं। इस ट्वीट में देख सकते हैं कि उन्होंने बार एंड बेंच के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था,

“एक और मस्जिद के ध्वस्तीकरण के लिए मंच तैयार करना, जिसमें अदालत की अनुमति, प्रशासन का साथ, लिबरलों की चु्प्पी और नागरिकों की मिलीभगत शामिल है। ये मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अपमानित करने का एक और दिन रहै। लोकतंत्र है क्या?”

प्रोपेंगेडाबाज हुए आहत

मालूम हो कि देश की छवि पर सवाल उठाने वाले इस ट्वीट के हटने से सिर्फ अयूब आहत नहीं है बल्कि कई प्रोपेगेंडाबाज को इससे दुख हुआ है। भारत विरोधी प्रचार करने के लिए कुख्याच ऑद्रे ट्रुश्के ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्विटर भारत की सबसे बड़ी पत्रकारों में से एक का ट्वीट सेंसर करता दिख रहा है।

नेहा शास्त्री ने इस कार्रवाई को देख ट्विटर से पूछा कि क्या वो वाकई में भारत की उस सरकार के सामने घुटने टेकने लगे हैं, जो प्रेस की अभिव्यक्ति और किसी भी विरोध को दबाते हैं।

स्मृति मुंद्रा ने कहा, “गुजरात दंगों में भूमिका को लेकर भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा सुप्रीम कोर्ट का फैसले जीतने के बाद एक कार्यकर्ता (तीस्ता सीतलवाड़) मुंबई में गिरफ्तार की गई और अब एक मुस्लिम पत्रकार को सेंसर किया जा रहा है।”

एम्नेस्टी इंटरनेशनस के सेक्रेट्री जनरल एजेन्स कैलमार्ड ने ट्विटर की इस कार्रवाई को शर्मिंदा करने वाला बतायाा और पूछा कि आखिर राणा अयूब को चुप कराने की कोशिश की जा रही है।

कोविड राहत कार्य के नाम पर अयूब ने की मनी लॉन्ड्रिंग

उल्लेखनीय है कि इसी साल राणा अयूब के ऊपर ईडी ने कार्रवाई करते हुए उनके 1.77 करोड़ रुपए सीज किए थे। उनके खिलाफ PMLA के तहत कार्रवाई हुई थी। उस समय भी राणा अयूब ने भी गलती स्वीकारने की जगह कहा था कि उन्हें उनकी पत्रकारिता के कारण बदनाम किया गया और उन्होंने पैसों की हेरफेर नहीं की। हालाँकि उनके दावे तब पस्त पड़ गए जब ट्विटर यूजर हॉक आई ने उनके द्वारा किए गए फ्रॉड की पोल खोली थी। ईडी ने भी कहा था कि अयूब ने दान देने वालों को सुनियोजित ढंग से ठगा।

उन्होंने कोविड राहत कार्य के लिए फंड लिया और फिर 50 लाख रुपए की फिक्स डिपोजिट करवाई। इसके बाद अपने पिता और बहन के अकॉउंट में भी पैसे नेट बैंकिंग से ट्रांस्फर किए। 29 मार्च को उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस के चलते अधिकारियों ने लंदन जाने से रोका। 4 अप्रैल को कोर्ट की अनुमति के बाद वह सारी जानकारी साझा करने की शर्त पर विदेश जा पाईं।