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भगत सिंह की डायरी में 6 बार वीर सावरकर की ‘हिंदुपदपादशाही’ से उद्धरण, डॉ आंबेडकर ने की थी प्रशंसा: दलितों के लिए किया काम

विनायक दामोदर वीर सावरकर ना केवल स्वाधीनता संग्राम के सेनानी थे बल्कि वो महान देशभक्त, क्रांतिकारी, चिंतक, लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता और देश को गौरवशाली बनाने की सोच रखने वाले दूरदर्शी स्वप्नदृष्टा भी थे। वीर सावरकर जैसे बहुत कम क्रांतिकारी एवं देशभक्त होते हैं, जिनका पूरा जीवन राष्ट्र यज्ञ की बलिबेदी पर समिधा बन गया। उनकी कलम में चिंगारी थी, उनके कार्यों में भी क्रांति की अग्नि धधकती थी।

सावरकर ऐसे महान सपूत थे जिनकी कविताएँ एवं विचार भी क्रांति मचाते थे और वह स्वयं भी महान क्रांतिकारी थे। उनमें तेज भी था, तप भी था और त्याग भी था। 1909 में लिखी पुस्तक ‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस-1857’ में सावरकर ने इस लड़ाई को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आजादी की पहली लड़ाई घोषित किया। वीर सावरकर 1911 से 1921 तक अंडमान जेल में रहे। 1921 में वे स्वदेश लौटे और फिर 3 साल की जेल में सजा काटी।

9 अक्टूबर, 1942 को भारत की स्वतंत्रता के लिए चर्चिल को समुद्री तार भेजा और आजीवन अखंड भारत के पक्षधर रहे। सावरकर एक मात्र ऐसे भारतीय थे जिन्हें एक ही जीवन में दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी। काले पानी की कठोर सजा के दौरान सावरकर को अनेक यातनाएँ दी गईं। अंडमान जेल में उन्हें छः महीने तक अंधेरी कोठरी में रखा गया। दुनिया के वे ऐसे पहले कवि थे जिन्होंने अंडमान के एकांत कारावास में जेल की दीवारों पर कील और कोयले से कविताएँ लिखीं और फिर उन्हें याद किया।

वीर सावरकर और बलिदानी क्रांतिकारी भगत सिंह

इस प्रकार याद की हुईं 10 हजार पंक्तियों को उन्होंने जेल से छूटने के बाद पुनः लिखा। अनेक प्रकार की कठोर यातनाएँ सहने के बाद भी सावरकर ने अंग्रेजों के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। सावरकर जेल में रहते हुए भी स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के मन में सावरकर के देशप्रेम और उनके विचारों को लेकर कितनी श्रद्धा थी, इस बात को भगत सिंह के लिखे एक लेख के माध्यम से आज भी हम समझ सकते हैं।

भगत सिंह ने ‘विश्व प्रेम’ नाम के लेख में, जो 15 और 22 नवंबर, 1924 के ‘मतवाला’ अंक में दो बार प्रकाशित हो चुका है, उसमें भगत सिंह, सावरकर के विषय में लिखते हैं – “विश्वप्रेमी वह वीर है जिसे भीषण विप्लववादी, कट्टर अराजकतावादी कहने में हम लोग तनिक भी लज्जा नहीं समझते – वही वीर सावरकर। विश्वप्रेम की तरंग में आकर घास पर चलते-चलते रुक जाते कि कोमल घास पैरों तले मसली जाएगी|” शहीद-ए-आजम ने ऐसा लिखा था।

यह साबित हो गया है कि भगत सिंह ने सावरकर की किताब ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ का अंग्रेजी अनुवाद प्रकाशित किया था और क्रांतिकारियों में इसका प्रचार किया था। कुछ लेखकों ने दावा किया है कि सावरकर और भगत सिंह रत्नागिरी में मिले थे लेकिन इसकी कोई निर्विवाद पुष्टि नहीं हो पायी। गाँधी जी के अनुयायी वाई डी फड़के के अनुसार, भगत सिंह ने सावरकर की ‘1857 का स्वातंत्र्य समर’ से प्रेरणा पाई। भगत सिंह अपनी जेल डायरी में कई लेखकों के उद्धरण नोट किए हैं।

उसमें केवल सात भारतीय लेखक हैं, जिनमें से एकमात्र सावरकर हैं जिनके एक से अधिक उद्धरण भगत सिंह ने अपनी डायरी में शामिल किए हैं और उनमें से छह के छह उद्धरण एक ही पुस्तक, ‘हिंदूपदपादशाही’ से हैं। 23 मार्च, 1931 को जब भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी दी गई, उस समय सावरकर ने एक कविता लिखी, जिसका पहला अंश है-

हा, भगत सिंह, हाय हा !
चढ गया फाँसी पर तू वीर हमारे लिये हाय हा !
राजगुरु तू, हाय हा !
वीर कुमार, राष्ट्रसमर में हुआ शहीद
हाय हा ! जय जय हा !
आज की यह हाय कल जीतेगी जीत को
राजमुकुट लायेगी घर पर
उससे पहला मृत्यु का मुकुट पहन लिया
हम लेंगे हथियार वो हाथ में।
जो तुमने पकड़ा था दुश्मन को मारते मारते !

दलितों से भेदभाव के खिलाफ सावरकर ने चलाया था अभियान, आंबेडकर ने की थी प्रशंसा

वीर सावरकर हमेशा से जात-पात से मुक्त होकर कार्य करते थे। राष्ट्रीय एकता और समरसता उनमें कूट-कूटकर भरी हुई थी। रत्नागिरी आंदोलन के समय उन्होंने जातिगत भेदभाव मिटाने का जो कार्य किया वह अनुकरणीय था। वहाँ उन्होंने दलितों को मंदिरों में प्रवेश के लिए सराहनीय अभियान चलाया। साथ ही अस्पृश्यता को समाप्त करने की दिशा में महनीय योगदान दिया। महात्मा गाँधी ने तब खुले मंच से सावरकर की इस मुहिम की प्रशंसा की थी।

यही नहीं, संविधान निर्माता बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर ने सावरकर के बारे में कहा था – “मैं इस अवसर का उपयोग सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में आपके कामों की प्रशंसा के लिए करता हूँ। यदि अछूतों को मुख्यधारा के हिंदू समाज का हिस्सा बनना है तो केवल अस्पृश्यता को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए चतुर्वर्ण का अभ्यास समाप्त करना होगा। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि आप उन कुछ लोगों में से हैं, जिन्होंने ऐसा करने की आवश्यकता को पहचाना है।“

महाराष्ट्र के महान समाज सुधारक महर्षि शिंदे ने लिखा “मैं इस सामाजिक आंदोलन की सफलता से इतना प्रसन्न हूँ कि मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि वह मेरा शेष जीवन उन्हें (सावरकर को) दे दें” (सत्यशोधक – 5 मार्च, 1933)। वहीं प्रसिद्ध लेखक प्रबोधंकर ठाकरे ने लिखा “हिंदू एकता की आवश्यकता को महसूस करने के बाद जाति उन्मूलन का मुद्दा चाहे जितना कठिन हो, इसे हल करना आवश्यक है। इस दिशा में सावरकर के प्रयास प्रशंसनीय हैं।” (स्वराज्य, मुंबई, 2 सितंबर, 1936)।

भारत का इतिहास दुनिया के लिए एक प्रेरणा है, पूरे विश्व के लिए अनुकरणीय है। सम्पूर्ण दुनिया भारत की ओर देख रही है, हमेशा भारत में विश्व गुरु की पात्रता निरन्तर प्रवहमान रही है। देश ने कोरोना महामारी के संकट के दौरान दुनिया के सभी देशों के हित-चिन्तन का भाव रखा। बिना किसी भेदभाव के वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर ये नया भारत चल रहा है। यही वीर सावरकर का दर्शन था। यही उनका चिंतन था कि भारत प्रभुता सम्पन्न गौरवशाली राष्ट्र बने। पूरी दुनिया का पथ-प्रदर्शक करने वाला राष्ट्र बने। जिस पर भारत शनै:-शनै: चल रहा है।

(लेखक बृजेश द्विवेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

गाय को खिला दी विस्फोटक: फटने से मुँह के उड़े चिथड़े, तड़प-तड़प कर मौत, हरियाणा में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज

हरियाणा के सिरसा (Sirsa, Haryana) में पशु क्रूरता का दहला देने वाला मामला समाने आया है। यहाँ एक व्यक्ति की गाय के मुँह में किसी ने विस्फोटक रख दिया। खाने के दौरान उसमें विस्फोट गया और गाय का जबड़ा उड़ गया। इसके बाद गाय ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इसको लेकर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

मामला सिरसा के लखुआना गाँव की है। यहाँ के रहने वाले सतपाल सिंह ने साहीवाल नस्ल की एक गाय पाल रखी थी। उसे लेकर वे गुरुवार (26 मई 2022) बीसवाला पुल के पास चारा खिलाने गए। इस दौरान किसी ने गाय को चारे में विस्फोटक खिला दिया। इसके बाद एक जोरदार धमाका हुआ। जब वह गाय की ओर गए तो देखा कि उसके मुँह के चिथड़े उड़ गए हैं और वह जमीन पर गिरकर तड़प रही है।

गाय की हालत देखकर सतपाल सिंह घबरा गए और जल्दी से एक वाहन का जुगाड़ कर गाय को पशु अस्पताल ले गए। हालाँकि, ईलाज के दौरान गाय की मौत हो गई। गाय की विस्फोटक से मौत की खबर लगते ही थाना डबवाली सदर पुलिस मौके पर पहुँची। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल से विस्फोटक का सैंपल लिया। इस दौरान आरोपित का पता नहीं चला।

थाना प्रभारी देवीलाल ने बताया कि सतपाल सिंह की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ गौसंरक्षण अधिनियम के साथ-साथ IPC की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि जाँच जारी है और जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

साहीवाल दुधारू नस्ल की गाय मानी जाती है, जो प्रतिदिन लगभग 20-25 लीटर दूध देती है। इसकी कीमत 50 हजार से एक लाख रुपए तक हो सकती है। गर्मी सहने और अधिक दूध देने के कारण इस नस्ल की गाय को हरियाणा, राजस्थान, पंजाब सहित देश के विभिन्न इलाकों में खूब पाला जाता है।

PFI की रैली में हिन्दू विरोधी नारे लगाने वाले नाबालिग का अब्बू गिरफ्तार, केरल में हिन्दुओं को मिली थी हत्या की धमकी

केरल में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की रैली के दौरान हिंसा और भड़काऊ नारेबाजी करने वाले मुस्लिम बच्चे के अब्बू अशकर अली को कोच्चि के पल्लूरथी स्थित उसके घर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब उसे अलप्पुझा पुलिस के हवाले किया जाएगा, क्योंकि वहीं पर उसके खिलाफ केस रजिस्टर है। बच्चे के अब्बू का कहना है कि वो पीएफआई का सदस्य नहीं है, लेकिन उसके कार्यक्रमों में शामिल होता रहा है।

‘रिपब्लिक टीवी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पट्टांजली के एसीपी रविंद्रनाथ ने इस बात को कन्फर्म किया है कि हिन्दुओं के खिलाफ नारेबाजी करने वाले बच्चे का अब्बू पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का एक्टिव मेंबर है। इसके अलावा अशकर अली का कहना है कि बच्चे ने जो भी नारे लगाए थे वो सब सामान्य बात है। उसका दावा है कि सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान भी इस तरह के नारे लगाए गए थे। हालाँकि, वो इस बात से इनकार करता है कि ये नारे हिन्दुओं के खिलाफ लगाए गए थे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शुक्रवार को ये केरल पुलिस ने कहा था कि भड़काऊ नारेबाजी के मामले में उन्होंने 18 अन्य को भी पकड़ा है। इससे पकड़े गए लोगों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि शनिवार (21 मई, 2022) को केरल के अलाप्पुझा में मुस्लिम समूह पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा आयोजित एक रैली एक मुस्लिम नाबालिग बच्चे ने हिन्दुओं और ईसाइयों को धमकी दी थी। इसमें उसने कहा था, “चावल तैयार रखो। यम (मृत्यु के देवता) आपके घर आएँगे। यदि आप सम्मानपूर्वक रहते हैं, तो आप हमारे स्थान पर रह सकते हैं। अगर नहीं, तो हम नहीं जानते कि क्या होगा।”

इस घटना पर आपत्ति प्रकट करते हुए केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी, ‘इस देश में क्या हो रहा है?’ न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा था कि अगर रैली के किसी सदस्य ने भड़काऊ नारे लगाए हैं, तो इसके लिए रैली का आयोजन करने वाले लोग भी जिम्मेदार थे।

हिंसा से भरा है पीएफआई का इतिहास

कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन का इतिहास उठा कर देखें तो उसमें हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा ही भरी मिलती है। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही थी। संगठन के लोगों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा 2020 में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

‘हिन्दुओं में भेद पैदा करने के लिए षड्यंत्र’: The Lallantop को महंत ने लताड़ा, चलाया था शिवलिंग को फव्वारा बताने वाला बयान

हाल ही में ‘The Lallantop (दी लल्लनटॉप)’ नामक मीडिया वेबसाइट ने खबर चलाई कि ‘काशी करवट’ के महंत गणेश शंकर उपाध्याय ने कहा है कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में जो मिला, वो शिवलिंग नहीं बल्कि फव्वारा है। मुस्लिम पक्ष के झूठे एजेंडे को चलाने वाले ‘लल्लनटॉप’ को अब महंत ने जम कर खरी-खोटी सुनाई है और उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने पर लताड़ा है। आइए, बताते हैं कि माजरा क्या है।

‘खबर इंडिया’ के केशव मालान से बात करते हुए महंत गणेश शंकर उपाध्याय ने स्पष्ट कहा कि क्या लोग अंधे हैं कि उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है? उन्होंने कहा कि पूरे ज्ञानवापी में हिंदू मंदिर होने के प्रमाण मौजूद हैं, कैसे उसे मस्जिद मान लें? उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी के ऊपर-नीचे, अलग-बगल, चारों तरफ प्रमाण पड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘लल्लनटॉप’ ने उन्हें बरगला कर के कुछ कहवा लिया और घूमा-फिरा कर सिद्ध करने में लगे हुए हैं कि वो फव्वारा है।

‘The Lallantop’ पर महंत गणेश शंकर उपाध्याय का बयान तोड़-मरोड़ कर चलाने का आरोप

महंत ने कहा, “किस सदी की बात कर रहे हैं? हम सनातनियों से सदियों की बात कीजिए, जिनका लाखों वर्षों का इतिहास है। पुराण है। ग्रन्थ है हमारे। कौन उससे इनकार करता है। दुष्प्रचारित करने वाले कलंक हैं हिन्दू समाज के नाम पर। 5 बार आप रिकॉर्डिंग करते हैं और दिखाएँगे 5 मिनट का। कहाँ का किसका आपने किसमें जोड़ दिया और कहा से क्या ले लिया… पूरे षड्यंत्र के तहत मेरे बयान को इस तरह से पेश किया गया, ताकि हिन्दुओं में विभेद हो, वो एकजुट न रहें।”

उन्होंने ऐसा करने वालों को विधर्मी करार देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है, जो एक लॉबी षड्यंत्र के रूप में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ये मीडिया से लेकर राजनीति तक में सक्रिय हैं। मुस्लिम पक्ष के ‘बाबरी देने’ वाले बयान पर महंत ने कहा कि हमने लड़ कर के बाबरी लिया है, हजारों लोगों ने जान न्योछावर किया है – उन्होंने भीख दिया क्या? उन्होंने औरंगजेब की क्रूरता और उसके भाई की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि उससे ज्यादा वीभत्स इतिहास किसी मुग़ल शासक का नहीं रहा।

Swatantra Veer Savarkar: रणदीप हुड्डा लेकर आ रहे वीर सावरकर का वो इतिहास, जिसे दबाया गया, निर्माता बोले – ‘मिलना चाहिए था भारत रत्न’

देश की आजादी के महान नायकों में से एक वीर सावरकर की शनिवार (28 मई 2022) को 139वीं जयंती है। इस मौके पर उनके जीवन पर बन रही फिल्म स्वतंत्र वीर सावरकर (Swatantra Veer Savarkar) का पहला लुक रिलीज कर दिया गया। इसमें रणदीप हुड्डा एक्टर हैं।

रणदीप हुड्डा ने ट्विटर पर 30 सेकंड का एक मोशन पोस्टर साझा किया। इसमें फ्रंट में वीर सावरकर के रूप में खुद रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda in Swatantra Veer Savarkar) की तस्वीर है और बैकग्राउंड में ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा…’ की म्यूजिक बज रही है। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा:

“स्वतंत्रता और आत्म-बोध के लिए भारत के संघर्ष के सबसे गुमनाम नायकों में से एक को सलाम। आशा करता हूँ कि एक सच्चे क्रांतिकारी के पदचिन्हों पर चलने की चुनौती पर खरा उतर कर उनकी असली कहानी बता सकता हूँ, जिन्हें इतने लंबे समय तक दबा कर रखा गया था। #VeerSavarkarJayanti”

उल्लेखनीय है कि एक्टर रणदीप हुड्डा महेश मांजरेकर द्वारा निर्देशित अगली फिल्म ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ में वीर सावरकर का रोल निभा रहे हैं। वीर सावरकर स्वतंत्रता सेनानी के साथ-साथ एक समाज सुधारक, लेखक, कवि, इतिहासकार, राजनीतिक नेता और दार्शनिक भी थे। फिल्म के फर्स्ट लुक के मोशन पोस्टर में टैग लाइन दिया गया है “हिंदुत्व धर्म नहीं, इतिहास है…”

फिल्म समीक्षक तरण आदर्श ने रणदीप हुड्डा की आगामी फिल्म स्वतंत्र वीर सावरकर में वीर सावरकर के रूप में रणदीप हुड्डा का पहला लुक साझा किया। इस फिल्म के प्रोड्यूसर आनंद पंडित और संदीप सिंह हैं, जबकि सह-प्रोड्यूसर रूपा पंडित और सैम खान हैं।

गौरतलब है कि है कि पिछले महीने ही शहीद दिवस के मौके पर रणदीप हुड्डा ने इंस्टाग्राम के जरिए ऐलान किया था कि वो महेश मांजरेकर की फिल्म स्वतंत्र वीर सावरकर में वीर सावरकर की भूमिका निभाएँगे। इस फिल्म के लिए एक्टर ने अपना 10 किलो वजन कम किया है। अभी अगले 2 महीने में उन्हें 12 किलो और मतलब उन्हें कुल मिलाकर 22 किलो वजन कम करना है।

वीर सावरकर पर बन रही फिल्म को लेकर इसके प्रोड्यूसर संदीप सिंह कहते हैं कि वो इसके लिए दो साल से कोशिशें कर रहे थे। संदीप सिंह इस बात को मानते हैं कि भारतीय इतिहास ने वीर सावरकर को कभी भी वो सम्मान नहीं दिया, जिसके वो अधिकारी थे। उन्हें भारत रत्न या फिर नोबल पुरस्कार दिया जाना चाहिए था।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इतिहास वीर सावरकर के प्रति कभी दयालु नहीं रहा है। वीर सावरकर को 1947 में भारत की स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद लगातार सरकारों द्वारा तिरस्कार और अवमानना ​​​​का पात्र बनाया गया। उन्हें गाँधी की हत्या में भी झूठा फँसाया गया था, लेकिन बाद में उनके खिलाफ सबूतों की कमी के लिए उन्हें बरी कर दिया गया था।

MP सरकार में मंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता ने जिन्ना को कहा ‘साहब’, बताया भारत को आजाद कराने वाला: PM मोदी के लिए इस्तेमाल किया आपत्तिजनक शब्द

कॉन्ग्रेस नेताओं का पाकिस्तान और जिन्ना प्रेम जगजाहिर है। अब कॉन्ग्रेस नेता और मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मुहम्मद अली जिन्ना को ‘साहब’ कहकर संबोधित किया है और उन्होंने आजादी दिलाने वाला बताया। इस पर भाजपा ने पलटवार करते हुए जिन्ना को देश का बँटवारा करने वाला बताया।

इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस नेता वर्मा ने संवैधानिक गरिमा को भी नहीं बख्शा। राजनीतिक हमले करने के चक्कर में उन्होंने प्रधानमंत्री पद बैठे व्यक्ति के लिए मर्यादा का भी पालन नहीं किया। वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘पट्ठा’ शब्द और ‘बाप-दादाओं’ तक का इस्तेमाल किया।

महंगाई के विरोध में भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान वर्मा ने शुक्रवार (27 मई 2022) को मंदसौर में कहा, “आजादी हमारे पुरखों महात्मा गाँधी, नेहरूजी, सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाषचंद्र बोस, आजाद और जिन्ना साहब ने दिलाई… और यह पट्‌ठा आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा है।”

सज्जन वर्मा यहीं नहीं रूके। उन्होंने यहाँ तक आरोप लगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के नेताओं ने उस समय अंग्रेजों का साथ दिया था, लेकिन कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने गोरों के छक्के छुड़ाकर देश को आजादी दिलाई। उन्होंने कहा, यह पट्ठा आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मना रहा है। इसके बाप-दादाओं ने किसी भी स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया होगा।”

जिन्ना को ‘साहब’ कहने पर मंदसौर जिला के भाजपा अध्यक्ष नानालाल अटोलिया ने सज्जन वर्मा पर पलटवार किया। अटोलिया ने कहा कि कॉन्ग्रेस की यही विचारधारा है और वह जिन्ना के विचारों को ही आगे ले जा रही है। उन्होंने कहा कि देश का बँटवारा जिन्ना और उसकी विचारधारा के कारण हुआ। कॉन्ग्रेस आज उसी विचारधारा पर चल रही है।

वहीं, मंदसौर से भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि कॉन्ग्रेस में ऐसे ही लोग बचे हैं। कोई ओसामा को जी बोलता है और कोई जिन्ना को साहब। इन्हें इतिहास का जरा भी पता नहीं है। इन लोगों ने बैठकर आपस में देश का बँटवारा कर लिया था। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के जो लोग राष्ट्र को समझते थे, वे निकल गए और कुछ निकलने की तैयारी में हैं।

कॉन्ग्रेसी महिला नेता को पार्टी से नोटिस… क्योंकि महिला अधिकारों और परिवारवाद पर बात की: हिरोइन से पार्क में की थी लप्पड़-थप्पड़

कर्नाटक कॉन्ग्रेस की महासचिव डॉ कविता रेड्डी द्वारा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए प्रत्याशियों के चयन पर दिए बयान पर विवाद गहराता जा रहा है। अब पार्टी की तरफ से उन्हें नोटिस जारी हुआ है। इस शो-कॉज नोटिस में उन पर पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाते हुए 7 दिनों के अंदर जवाब माँगा गया है। यह नोटिस चेयरमैन के रहमान खान द्वारा 25 मई 2022 (बुधवार) को जारी हुई है।

25 मई 2022 को कविता रेड्डी ने वीडियो जारी कर के कहा था:

“राजनीति में लैंगिक समानता लाए बिना सामाजिक समानता नहीं आ सकती। कॉन्ग्रेस में महिलाओं के आगे बढ़ने के विकल्प पुरुषों जैसे क्यों नहीं हैं? कॉन्ग्रेस से सांसद या विधायक का टिकट पाने वाले सभी कैंडिडेट नहीं जीत पाएँगे। फिर सवाल सिर्फ महिलाओं से ही क्यों? कॉन्ग्रेस पार्टी आबादी में 50% की भागीदारी रखने वाली महिलाओं को अनदेखा क्यों कर रही है? कॉन्ग्रेस में जो टिकट महिलाओं को मिलते हैं वो या तो किसी नेता की पत्नी के होते हैं या उनकी बहन, बेटी अथवा विधवा को। ऐसा इसलिए क्योंकि वो परिवार से आते हैं।”

अपने इस बयान के बाद कविता ने खुद को नोटिस मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने इस नोटिस का जवाब उसी अंदाज़ में देने की घोषणा करते हुए खुद को सच्ची ‘कॉन्ग्रेसी महिला’ बताया है।

चर्चित/विवादित रही हैं डॉ कविता रेड्डी

कॉन्ग्रेस नेत्री डॉ कविता रेड्डी का राजनैतिक करियर काफी विवादित रहा है। साल 2020 में उन पर वामपंथियों के साथ मिल कर कन्नड़ पत्रकार महेश हेगड़े के साथ मेंगलुरु एयरपोर्ट पर बदतमीजी का आरोप लगा था। यह हरकत उन्होंने उन्होंने वामपंथी एक्टिविस्ट अमूल्या लियोना के साथ मिल कर की थी। इस दौरान दोनों ने राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ गाकर महेश हेगड़े से देशभक्ति साबित करने को कहा था।

इसके अलावा 4 सितंबर 2020 को डॉ कविता रेड्डी का कन्नड़ अभिनेत्री संयुक्त हेगड़े पर हमले का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसके चलते उन पर 323, 504B और 506 के तहत FIR दर्ज हुई थी। इस दौरान पुलिस पर भी पीड़ित अभिनेत्री के बजाय आरोपित कविता का साथ देने का आरोप लगा था। अभिनेत्री संयुक्त ने तब वीडियो बनाते हुए कविता रेड्डी पर खुद को ड्रग स्कैंडल मामले में फँसाने की भी धमकी देने का आरोप लगाया था। हालाँकि बाद में कविता रेड्डी ने अपनी इस हरकत के लिए माफ़ी माँग ली थी।

कभी दी थी ‘बोली पर गोली’ वाली धमकी, अब उन्हीं CM योगी की शरण में पहुँचे सपा MLA शाज़िल इस्लाम: पेट्रोल पंप पर चला है बुलडोजर

UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेताओं को को कुछ समय पहले धमकी देने वाले सपा विधायक ने अब उनसे मदद की गुहार लगाई है। विधायक का नाम शाज़िल इस्लाम है जो बरेली की भोजपुरा सीट से चुने गए हैं। MLA शाज़िल इस्लाम ने अपने पेट्रोल पम्प पर बरेली प्रशासन द्वारा चलाए गए बुलडोजर की शिकायत CM योगी से करते हुए ‘न्याय की उम्मीद‘ जताई है। उन्होंने शुक्रवार (27 मई, 2022) को मुख्यमंत्री योगी से मिलने का दावा भी किया।

समाजवादी पार्टी के विधायक के मुताबिक उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के बारे में भी मुख्यमंत्री से चर्चा की है। उन्होने अपने विधानसभा क्षेत्र में खाली पड़ी कृषि विभाग की भूमि पर एक एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और एक मेडिकल कॉलेज बनवाने की माँग की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने विधायक की माँगों और शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा भी दिया है।

सपा विधायक की शिकायत है कि उन्होंने पेट्रोल पंप का नक्शा पास करवाने के लिए बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को 10 रुपए लाख का चेक दिया था। इसके बाद उन्हें तमाम संबंधित विभागों द्वारा NOC भी जारी हो गई थी। उन्हें बरेली के DM से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुका था। उनका आरोप है कि इसके बाद उन्होंने पेट्रोल पम्प बनवाना शुरू किया था, लेकिन BDA ने लोगों के मन में डर बिठाने के लिए उस पर बुलडोजर चला दिया। यह कार्रवाई बरेली प्रशासन ने 7 अप्रैल, 2022 को की थी। इसी के साथ उनके निर्माणाधीन पेट्रोल पंप की NOC भी निरस्त कर दी गई थी।

हर शब्द पर एक गोली की दी थी धमकी

1 अप्रैल, 2022 को सपा विधायक शाज़िल इस्लाम की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इस वीडियो में शाज़िल भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी देते नजर आए थे। वीडियो में शाज़िल ने कहा था, “समाजवादी पार्टी की बंदूकें धुआँ नहीं देंगी। उनके हर शब्द पर हमारी एक गोली चलेगी।” इस बयान पर हिन्दू युवा वाहिनी के नेता अनुज वर्मा ने पुलिस में तहरीर दी थी जिसके बाद सपा विधायक सहित उनकी पार्टी के कुछ अन्य नेताओं पर केस दर्ज किया गया था।

सपा विधायक ने तमाम कानूनी दाँव-पेंच अपनाए। उनके खिलाफ 153A, 504 और 506 IPC के तहत केस दर्ज हुआ है। उनकी अग्रिम जमानत भी जिला न्यायालय से ख़ारिज हो गई।

₹6000 इनाम दे रहा भारतीय रेलवे… देना होगा सिर्फ 4 सवालों का जवाब: वायरल है यह मैसेज, जानें सच्चाई

सोशल मीडिया पर भारतीय रेलवे को लेकर कुछ दावे वायरल हो रहे हैं, जिसे लेकर आधिकारिक रूप से सफाई दी गई है। दरअसल, लोगों को एक वेबसाइट से इनाम जीतने के मैसेज आ रहे हैं, जो देखने में भारतीय रेलवे की ही वेबसाइट लगती है। इसमें भारतीय रेलवे का ही लोगों और टैगलाइन लगा हुआ है। साथ ही एक तरफ तारीख़ लिखी रहती है। ऊपर ‘इंडियन रेलवेज गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट सब्सिडी’ लिखा हुआ आ रहा है। व्हाट्सएप्प फॉरवर्ड में भी इस तरह की चीजें वायरल हो रही हैं।

साथ ही बड़े-बड़े अक्षरों में ‘Congratulations’ लिखा हुआ आ रहा है। इसमें बताया गया है कि कुछ प्रश्नों के सही-सही जवाब देने के बाद आपके पास 6000 रुपए जीतने का मौका होगा। साथ में एक तस्वीर लगी है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ट्रेन को हरी झंडी दिखा रहे हैं। चार सवालों में से पहला सवाल है – “क्या आप भारतोय रेलवे को जानते हैं?” साथ ही ‘Yes’ और ‘No’ के विकल्प दिए गए हैं। आइए, आपको बताते हैं इसकी सच्चाई क्या है। हमारे कुछ पाठकों ने ही इसके विवरण भेज कर हमसे इसकी सच्चाई जानने की कोशिश की, जिसके बाद हमने इसकी पड़ताल की।

दरअसल, भारतीय रेलवे ने खुद इसका स्क्रीनशॉट शेयर कर के बताया है कि ये एकदम फेक है। भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट ‘https://indianrailways.gov.in‘ है और इसके अलावा ‘https://www.irctc.co.in‘ से टिकट की बुकिंग होती है। आधिकारिक या सरकारी वेबसाइट्स से जो भी चीजें आती हैं, केवल वही प्रमाणित हैं। इसीलिए, ऐसे मैसेज जिस साइट पर आ रहे हैं उन्हें अच्छे से चेक कर लें।

केंद्रीय रेल मंत्रालय ने कहा है कि लोग फेक वेबसाइटों से सतर्क और सावधान रहें। मंत्रालय ने कहा, “इन कपटपूर्ण वेबसाइटों से सावधान रहें, जो भारतीय रेलवे की तरफ से सब्सिडी और इनाम में रुपए ऑफर कर रहे हैं। पुष्ट जानकारी केवल हमारी आधिकारिक वेबसाइट से ही मिलेगी।” बता दें कि अक्सर व्हाट्सएप्प वगैरह के जरिए इस तरह के सन्देश वायरल होते रहते हैं। PIB ने भी इसे फेक लॉटरी मैसेज बताते हुए स्कैम करार दिया है।

नाइजीरिया के मर्द (देखें फोटो) ने 300+ भारतीय महिलाओं को शादी के नाम पर ठगा, NRI दूल्हा बन ‘कमाए’ करोड़ों रुपए

उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) ने शादी के नाम पर सैकड़ों महिलाओं से करोड़ों रुपए ठगने वाले एक नाइजीरियाई को दिल्ली के किशनगढ़ से गिरफ्तार किया है। यह नाइजीरियाई अवैध रूप से दिल्ली में रह रहा था और वैवाहिक वेबसाइटों (Matrimonial Websites) पर खुद को विदेश में रहने वाला एक भारतीय (NRI) बताता था। बाद में इन महिलाओं को झाँसे में लेकर उनसे पैसों की माँग कर अपने परिवार को भेजता था।

मूल रूप से नाइजीरिया के लागोस का रहने वाला 38 वर्षीय गरुबा गलुमजे (Garuba Galumje) फरवरी 2019 में व्यवसाय संबंधी 6 महीने का वीजा लेकर भारत आया था। उसने बाल संबंधी और कपड़ों के व्यवसाय की बात कही थी। उसके बाद वह मेडिकल वीजा पर मार्च में भारत आया। इसके बाद वह जगह बदलता रहा और महिलाओं से ठगी अंजाम देता रहा।

दरअसल, यूपी पुलिस ने यह कार्रवाई मेरठ की एक महिला की शिकायत पर की। महिला ने शादी के लिए जीवनसाथी वेबसाइट पर अपना अपना प्रोफाइल बनाया था। इसके बाद आरोपित ने खुद को कनाडा में रहने वाले भारतीय NRI संजय सिंह बताकर महिला से संपर्क किया और उसे विश्वास में ले लिया। उसके बाद भावनात्मक शोषण करते हुए उससे पैसे ऐंठने लगा।

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस की प्रभारी रीता यादव ने बताया कि महिला ने शिकायत में बताया कि आरोपित ने उससे धीरे-धीरे करके 60 लाख रुपए ले लिए। इसके बाद महिला को ठगी का आभास हुआ और उसने थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पूछताछ के दौरान आरोपित ने बनाया कि मेरठ की इस महिला की तरह उसने 300 से अधिक महिलाओं के साथ करोड़ों रुपए की ठगी की है। वह मैट्रिमोनियल और सोशल मीडिया साइटों पर अपना प्रोफाइल बनाता था और उसमें स्मार्ट दिखने वाले एक भारतीय व्यक्ति की तस्वीर लगाता था। इसके बाद वह महिलाओं से संपर्क कर उन्हें अपने झाँसे में लेता था।

इसके बाद महिलाओं से भावनात्मक अपील करके पैसे माँगता था और उसे अपने परिवार को भेजता था। उसके पास से कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। इनमें थाईलैंड बैंक, दुबई बैंक, इंटरपोल और FBI के दस्तावेज शामिल हैं। उसके पासपोर्ट पर भी किसी भारतीय अधिकारी का मोहर या हस्ताक्षर नहीं है और ना ही वीजा संबंधित दस्तावेज हैं। पुलिस ने उसके पास से लैपटॉप और 7 मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।