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सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून पर तत्काल रोक लगाई, नहीं दर्ज हो सकेगी कोई नई FIR: सिब्बल ने पेश की थी दलीलें

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजद्रोह कानून (Sediton Law) के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि पुनर्विचार तक राजद्रोह कानून यानी 124ए के तहत कोई नया मामला दर्ज न किया जाए। केंद्र इस बाबत राज्यों को गाइडलाइन जारी करेगा। कोर्ट ने कहा है कि जो लंबित मामले हैं उनपर यथास्थिति रखी जाए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जिनके खिलाफ राजद्रोह के आरोप में मुकदमे चल रहे हैं और वो इसी आरोप में जेल में बंद हैं वो जमानत के लिए समुचित अदालतों में जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं। मामले में अब जुलाई में सुनवाई होगी।

बता दें कि राजद्रोह कानून (Sediton Law) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के मामले पर बुधवार (11 मई 2022) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हमने राज्य सरकारों को जारी किए जाने वाले निर्देश का ड्राफ्ट तैयार किया है। उसके मुताबिक राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश होगा कि बिना जिला पुलिस प्रमुख यानी एसपी या उनसे ऊँचे स्तर के अधिकारी की मंजूरी के राजद्रोह की धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इस दलील के साथ सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा कि फिलहाल इस कानून पर रोक न लगाई जाए।

सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को ये भी बताया कि पुलिस अधिकारी राजद्रोह के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने के समर्थन में पर्याप्त कारण भी बताएँगे। उन्होंने कहा कि कानून पर पुनर्विचार तक वैकल्पिक उपाय संभव है।

आँकड़ों की बात पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ये तो जमानती धारा है, अब सभी लंबित मामले की गंभीरता का विश्लेषण या आकलन कर पाना तो मुश्किल है। लिहाजा ऐसे में कोर्ट अपराध की परिभाषा पर रोक कैसे लगा सकती है? यह उचित नहीं होगा। जबकि याचिकाकर्ताओं की तरफ से दलील रखते हुए वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से माँग रखी थी कि राजद्रोह कानून पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। इन तमाम दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने राजद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है।

हिमाचल विधानसभा के बाहर खालिस्तानी झंडे लगाने वाला एक शख्स गिरफ्तार: CM ठाकुर ने कहा- प्रदेश में हो रही घटनाएँ चिंता का विषय

हिमाचल प्रदेश विधानसभा भवन के बाहर खालिस्तानी झंडे लगाने के मामले में पुलिस ने बुधवार (11 मई 2022) को एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दूसरा अभी भी फरार है। हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर (Himachal Pradesh CM Jairam Thakur) ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “हिमाचल विधानसभा के बाहर खालिस्तानी झंडे लगाने के मामले में कुछ घंटे पहले ही दो लोगों में से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है।” हिमाचल पुलिस ने इस मामले में सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसिल गुरपतवंत सिंह पन्नू को मुख्य आरोपित बनाया है। साथ ही उसके खिलाफ एक एफआईआर भी दर्ज की गई है, जिसमें यूएपीए (UAPA) समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

वहीं हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करने के लिए आज दिल्‍ली पहुँचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने एसएफजे (SFJ) के ‘खुली धमकी’ वाले पत्र पर कहा कि मैं ऐसी बातों पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करूँगा। रही बात गुरपतवंत सिंह पन्नू की तो, मैं उसे बहुत गंभीरता से नहीं लेता। हालाँकि, प्रदेश में कुछ ऐसी घटनाएँ हो रही हैं जो चिंता का विषय हैं।

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2021 में SFJ आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannu) ने हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर को धमकी दी थी कि वह उन्हें 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराने देगा। आडियो संदेश में ये भी कहा गया था कि पंजाब के बाद वे हिमाचल में भी कब्जा करेंगे, क्योंकि हिमाचल का कुछ क्षेत्र पहले पंजाब का हिस्सा था।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मेन गेट पर खालिस्तानी झंडे लटकाए गए और इसकी दीवारों पर कुछ आपत्तिजनक नारे भी लिखे गए थे। विधानसभा परिसर के मेन गेट नंबर एक की बाहरी तरफ ये झंडे लटके मिले जिन्हें बाद में प्रशासन ने हटा दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा था कि दोषियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था, “हिमाचल सौहार्दपूर्ण राज्य है और यहाँ शांति कायम रहनी चाहिए। धर्मशाला में हुई घटना के दोषी जहाँ भी होंगे उन्हें शीघ्र पकड़ा जाएगा। उन लोगों का यह कायरतापूर्ण दौर अब अधिक नहीं चलेगा। निश्चित तौर पर इस घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।’’

बता दें कि बीते दिनों मुख्यमंत्री ठाकुर ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “धर्मशाला विधानसभा परिसर के गेट पर रात के अंधेरे में खालिस्तान के झंडे लगाने वाली कायरतापूर्ण घटना की मैं निंदा करता हूँ। इस विधानसभा में केवल शीतकालीन सत्र ही होता है इसलिए यहाँ अधिक सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता उसी दौरान रहती है। इसी का फायदा उठाकर इस कायरतापूर्ण घटना को अंजाम दिया गया है, लेकिन हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस घटना की त्वरित जाँच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। मैं उन लोगों को कहना चाहूँगा कि यदि हिम्मत है तो रात के अंधेरे में नहीं, दिन के उजाले में सामने आएँ।”

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश की विधानसभा के ऊपर खालिस्तान का झंडा लगाए जाने के मामले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो के अनुसार, धर्मशाला में लगाया गया खालिस्तानी झंडा उस सिख कार्यकर्ता के माध्यम से भेजा गया था जो अरविन्द केजरीवाल की मंडी जिले में हुई सभा में शामिल हुआ था। बताया गया है कि वह कार्यकर्ता पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ जनसभा में शामिल हुआ था।

21 वीं सदी की Top फिल्म बनी KGF-2: थिएटर पहुँचे 5 करोड़ दर्शक, बॉक्स ऑफिस पर ₹1160 करोड़ का आँकड़ा पार

KGF चैप्टर 2 ने फिर से नया इतिहास रचा है। मात्र 26 दिन में बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ के करीब पहुँचने जा रही इस फिल्म को लेकर खबर है कि अब तक सिनेमाघरों में इसे 5 करोड़ से भी अधिक दर्शक देखने पहुँचे। इससे पहले दर्शकों का इतना प्यार सिर्फ गदर, बाहुबली: द कन्क्लूजन को मिला था। इसके अलावा , बाहुबली: द बिगनिंग भी इस आंकड़े के करीब थी पर 10 लाख के अंतर की वजह से वह 5 करोड़ दर्शकों की लिस्ट में शामिल नहीं हो पाई थी।

पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 दिन के अंदर केजीएफ चैप्टर 2 ने दुनिया भर में अब तक ₹1160 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ली है। आने वाले समय में संभव है कि 5 करोड़ दर्शकों की लिस्ट में 35-40 लाख दर्शक और भी जुड़ें। फिलहाल इस फिल्म को नॉर्थ से 2.35 करोड़ , साउथ से 2.70 करोड़, आँध्र प्रदेश-तेलंगाना में 85 लाख, कर्नाटक-तमिलनाडु से 70-70 लाख, केरल से 45 लाख दर्शक मिले हैं।

केजीएफ-2 से पहले 21वीं सदी में सबसे ज्यादा जो फिल्में देखी गईं उनमें बाहुबली 2 टॉप पर है- इस फिल्म को 10.80 करोड़ दर्शकों ने देखा था, दूसरे नंबर पर गदर है जिसे करीबन 8-9 करोड़ दर्शक सिनेमाघरों में देखने गए, तीसरे नंबर पर केजीएफ चैप्टर- 2 है, चौथे नंबर पर बाहुबली है जिसके 4 करोड़ 90 लाख लोगों का प्यार मिला और पाँचवे नंबर पर RRR है जिसे अब तक 4.40 करोड़ लोग देख चुके हैं।

बता दें कि केजीएफ फ्रैंचाइजी के फैन केजीएफ और केजीएफ 2 देखने के बाद केजीएफ 3 का इंतजार करने लगे हैं। फिल्म के सुपरस्टार यश बता भी चुके हैं। केजीएफ के अगले भाग में एक्शन का लेवल और ऊपर होगा। इसके अलावा ज्यादा रोमांच भी देखने को मिलेगा। प्रोड्यूसर विजय किरगंदुर इसके लिए योजना बना रहे हैं। ‘सालार’ की 30-35% शूटिंग पूरी हो चुकी है। अलग-अलग फिल्मों के अभिनेताओं को ‘मार्वल यूनिवर्स’ की तर्ज पर ‘KGF’ सीरीज में लाया जाएगा। ये सभी एक्शन स्टार ही होंगे। ‘KGF 3’ का बजट भी 500 करोड़ रुपए पहुँच सकता है। अक्टूबर-नवंबर तक ‘सालार’ की शूटिंग भी पूरी हो जाने की उम्मीद है।

6 साल की बच्ची से बलात्कार करने वाले मदरसे के मौलवी अब्दुल रहीम को उम्रकैद, जज ने लिखी कविता – तुम्हें रुलाने वाले दुष्ट राक्षस को…

राजस्थान के कोटा जिले में 6 साल की बच्ची से रेप के एक मामले में दोषी पाए गए मदरसे के मौलवी और उर्दू टीचर अब्दुल रहीम को कोर्ट ने अंतिम साँस तक जेल की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने दोषी मौलवी पर एक लाख रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया है। पीड़ित बच्ची से रेप की घटना नवंबर 2021 में घटित हुई थी। फैसला सुनाते समय स्पेशल जज दीपक दुबे इमोनशल हो गए। उन्होंने पीड़ित बच्ची के लिए अपने द्वारा लिखी कविता सुनाई।

“ओ मेरी नन्ही मासूम परी रानी तुम खुश हो जाओ। तुम्हें रुलाने वाले दुष्ट राक्षस को हमने जिंदगी की आखिरी साँस तक के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है। अब तुम इस धरती पर निडर होकर अपने सपनों के खुले आसमान में पंख लगाकर उड़ सकती हो, तुम सदा हँसती रहो, चहकती रहो, बस यही प्रयास है हमारा।”

ये पंक्तियाँ कोटा के पॉक्सो कोर्ट के आदेश में दर्ज हैं।

5 माह पुराने मामले में पॉक्सो कोर्ट ने मंगलवार (10 मई 2022) को मौलवी अब्दुल रहीम को अंतिम साँस तक जेल की सजा सुनाई है। 1 लाख अर्थदंड भी लगाया गया है। दोषी मौलवी अब्दुल रहीम की उम्र 43 साल है। वह कोटा के रामपुरा का रहने वाला है। अब्दुल रहीम पेशे से उर्दू टीचर था। बच्चों को उर्दू पढ़ाता था। उसने ट्यूशन पढ़ने आई 6 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म किया था। रेपिस्ट अब्दुल रहीम के खुद 4 बच्चों का पिता है। उसकी 1 बेटी व 3 बेटे हैं। अब्दुल 4 महीने पहले पीड़िता के गाँव में आया था। यहाँ वह मदरसे में रहता था। उसे पिछले साल 14 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था।

मामले के अनुसार, दीगोद थाने पर 13 नवंबर, 2021 को एक व्यक्ति ने आकर रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसकी 6 साल की बेटी दोपहर 3 बजे मदरसे में पढ़ने जाती है। वहाँ पर कोटा से आए हुए मौलवी उर्दू बच्चों को पढ़ाते हैं। उसने बताया था कि उनमें 6 साल की उसकी बेटी भी शामिल है। बच्ची मदरसे से वापस लौटी तो काफी रो रही थी। बच्ची की माँ और ताई ने उससे रोने का कारण पूछा तो बालिका ने बताया कि मौलवी अब्दुल रहीम ने उसे कमरे में बुलाया और उसके साथ गलत काम किया। इस पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। बालिका के 164 के बयान करवाए गए। इसके बाद पुलिस ने मौलवी अब्दुल रहीम को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही उसका पोटेंसी टेस्ट भी करवाया गया। इसके अलावा डीएनए भी मैच हुआ था।

विशेष लोक अभियोजक ललित शर्मा ने बताया कि घटना नवंबर महीने की है। इस मामले में साढ़े 4 महीने ट्रायल चली है। पुलिस ने घटना के बाद जनवरी महीने में ही चालान पेश कर दिया था। कोर्ट में 13 गवाह और 23 दस्तावेज पेश किए गए थे। इन सभी सबूतों के आधार पर आरोपित को कोर्ट ने दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे पर जज की दो टूक – ‘जरूरत पड़ी तो कोर्ट खुद मौके पर जाएगा, कार्रवाई करवाएगा’, SC के रास्ते मुस्लिम पक्ष

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (मीडिया अभी भी ज्ञानवापी मस्जिद लिख रही है) के सर्वे मामले में बुधवार (11 मई 2022) को फैसला आने की उम्मीद है। वहीं इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF: Indo-Islamic Cultural Foundation) ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में वीडियोग्राफी मामले में सुप्रीम कोर्ट का रूख किया है।

वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे के संबंध में सुनवाई जारी है। इस मामले में बुधवार को एक बार फिर दोपहर 2 बजे से सुनवाई होनी है। उम्मीद है कि कोर्ट कमिश्नर के मुद्दे पर आज फैसला आ जाएगा। 

क्या बोले जज?

यह उम्मीद इसलिए भी जगी है क्योंकि मंगलवार को सुनवाई के दौरान जज ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कोर्ट खुद मौके पर जाएगा और कमीशन की कार्रवाई करवाएगा। अदालत में सुनवाई के दौरान जज की इस टिप्पणी पर दोनों पक्षों ने खुशी जताई। दोनों पक्षों का कहना है कि जज की मौजूदगी में सर्वे होगा तो इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।

कमिश्नर बदलने पर हुई बहस

इससे पहले कोर्ट कमिश्नर को बदलने के सवाल पर अदालत में दोनों पक्षों में खूब बहस हुई। हिंदू पक्ष ने दलील दी कि सर्वे का काम शुरू हो चुका है। जबकि मुस्लिम पक्ष की दलील है कि दोबारा सर्वे का काम कराया जाए। वहीं हिंदू पक्ष का कहना है कि मौजूदा कोर्ट कमिश्नर से ही सर्वे पूरा कराया जाए। जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि कोर्ट कमिश्नर पर सवाल उठे हैं, उन्हें बदला जाए। 

वकीलों के अनुसार मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने मंगलवार को होने वाले सर्वेक्षण पर रोक लगाने के अनुरोध को तब तक के लिए खारिज करने की माँग की थी, जब तक कोर्ट कमिश्नर बदलने की माँग वाली याचिका पर फैसला नहीं हो जाता लेकिन न्यायाधीश ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद आयुक्त की कार्यवाही दूसरे दिन फिर से शुरू हो गई। 

इधर इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने कहा कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में की जा रही वीडियोग्राफी पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का स्पष्ट उल्लंघन है। इनका कहना है कि एक धार्मिक स्थान का ढाँचा उसी तरह का रहेगा, जैसा कि 15 अगस्त 1947 को था। इस संबंध में आईआईसीएफ अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

आईआईसीएफ के सचिव अतहर हुसैन ने कहा कि वो अयोध्या के फैसले को लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि के अलावा भारत में किसी भी पूजा स्थल की स्थिति को चुनौती देने वाली कोई भी अदालत सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर, 2019 के फैसले का उल्लंघन करती है।

बता दें कि आईआईसीएफ एक ट्रस्ट है, जो बाबरी मस्जिद भूमि के बदले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मस्जिद के निर्माण के लिए आवंटित अयोध्या में 5 एकड़ जमीन का मालिक है। पूजा स्थल अधिनियम, 1991 में यह निर्धारित किया गया था कि कोई भी धार्मिक स्थान उसी स्वरूप को बनाए रखेगा, जैसा वह आजादी के समय था। अयोध्या में राम जन्मभूमि मुद्दे को अधिनियम के दायरे से बाहर रखा गया था।

क्या है विवाद?

गौरतलब है कि बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी विवादित ढाँचा 1991 से वाराणसी की स्थानीय अदालत में लंबित है। श्रृंगार गौरी मामला हालाँकि महज 7 महीने पुराना है। 18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पाँच महिलाओं ने श्रृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन करने की माँग समेत अन्य माँगों को लेकर वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में मुकदमा दायर किया था।

अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए न केवल मौके पर स्थिति जानने के लिए वकीलों का एक आयोग गठित करने का आदेश दिया था, बल्कि वकीलों का एक कमीशन भी नियुक्त किया था। इतना ही नहीं विपक्ष को नोटिस जारी किया गया, लेकिन विवादित स्थल का निरीक्षण नहीं हो सका था।

10वीं क्लास की लड़की अवॉर्ड लेने स्टेज पर कैसे आई? मुस्लिम नेता ने धमकाते हुए पूछा सवाल, आयोजक के माफी माँगने का वीडियो वायरल

केरल में छात्रों के सम्मान समारोह के दौरान एक स्कूली छात्रा को मंच पर बुलाया गया। यह आम खबर है। खास खबर इसमें यह है कि जब ऐसा किया गया तो एक मुस्लिम नेता ने आयोजकों को इसके लिए जमकर फटकारा। धमकाया भी कि आगे से ऐसा करोगे तो देख लूँगा।

सम्मान समारोह के दौरान 10वीं कक्षा की छात्रा को पुरस्कार देने के लिए मंच पर बुलाया गया। यह बात केरल सुन्नी स्कॉलर के एक संघ, समस्त केरल जेम-इय्यातुल उलमा (एसकेजेयू) के सदस्यों को नागवार गुजरी। इसको लेकर उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे वहीं पर कार्यक्रम के आयोजकों को फटकार लगा दी। इस मामले का वीडियो भी वायरल हो गया है।

​रिपोर्ट्स के मुताबिक, समस्त जेम-इयातुल उलेमा के वरिष्ठ नेता एमटी अब्दुल्ला मुसलियार (M T Abdulla Musaliyar) छात्रा को मंच पर आमंत्रित करने को लेकर आयोजकों पर गुस्सा हो गए। इसको लेकर उन्होंने ना केवल आयोजकों को अपमानित किया, बल्कि उन्हें खुले तौर पर धमकी भी दी है।

यह घटना एक ‘मदरसा’ बिल्डिंग के उद्घाटन के दौरान हुई, जहाँ हाल ही में छात्रों को सम्मानित किया गया था। छात्रा को इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता पनक्कड़ सैयद अब्बास अली शिहाब थंगल ने स्मृति चिन्ह सौंपा। पुरस्कार सौंपे जाने के तुरंत बाद, मुसलियार ने आयोजकों से सवाल किया कि लड़की को मंच पर क्यों बुलाया गया। इस दौरान अब्बास अली शिहाब थंगल भी वहीं पर मौजूद थे।

बताया जा रहा है कि वीडियो में मुस्लिम नेता आयोजकों से नियमों को लेकर सवाल कर रहे हैं। मुसलियार ने कहा, “यहाँ मंच पर 10वीं की छात्रा को किसने बुलाया? हमारी मौजूदगी में ऐसी चीजें न करें। यह सब तस्वीरों में दिखाया जाएगा और प्रसारित किया जाएगा? गुस्से में मुसलियार आयोजकों को धमकी देते हुए कहते हैं कि अगर आपने ऐसा दोबारा किया, तो आपके लिए ठीक नहीं होगा। इस तरह से लड़कियों को यहाँ न बुलाएँ। क्या आप नियम नहीं जानते? माता-पिता को यहाँ बुलाएँ।”

उन्होंने आगे कहा, “क्या तुम थे, जिसने उसे बुलाया? जब हम यहाँ बैठे हैं, तो ऐसे काम मत करो।” मलप्पुरम में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम संस्था समस्त छात्रों का सम्मान कर रही थी। हालाँकि मुस्लिम नेताओं द्वारा फटकारे जाने पर छात्रा के नाम की घोषणा करने वाला और उसे मंच पर बुलाने वाला शख्स मुसलियार से माफी माँगता नजर आया।

राहुल (गाँधी नाम से बनाई दूरी) ने खादी माला पहनने से 2-2 बार किया इनकार… वो भी गाँधी की धरती पर: वीडियो वायरल और बवाल

कॉन्ग्रेस के युवा लेकिन वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी इन दिनों गुजरात दौरे पर हैं। मंगलवार (10 मई 2022) को वह वडोदरा हवाई अड्डे पर पहुँचे। यहाँ पर एक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता स्वागत के दौरान उन्हें खादी माला (खादी के धागे से बनी एक माला) पहनाने लगा। राहुल गाँधी ने इसे पहनने से इनकार कर दिया। बदले में हाथ मिलाया। कार्यकर्ता ने हाथ मिलाने के बाद फिर से माला पहनाने की कोशिश की, राहुल गाँधी ने फिर इनकार कर दिया।

महात्मा गाँधी की धरती पर उनकी ही सोच वाले खादी माला को पहनने से इनकार के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो के वायरल होते ही लोगों ने गाँधी परिवार की आलोचना करनी शुरू कर दी।

वीडियो में, यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि जब राहुल गाँधी वडोदरा हवाई अड्डे पर अपनी पार्टी के अधिकारियों से संपर्क करते हैं, तो सदस्यों में से एक आगे बढ़ता है और उन्हें सफेद खादी के धागे से बनी माला की पेशकश करता है। राहुल गाँधी ने माला पहनने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपने कार्यकर्ता को इसे पहनाने से रोक दिया और हाथ मिलाकर आगे निकल गए।

खादी की माला, राहुल गाँधी और बवाल

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुुल गाँधी जब वडोदरा हवाई अड्डे पर उतरे तो उनके स्वागत के लिए वहाँ कॉन्ग्रेस के कई नेता मौजूद थे। जहाँ पार्टी के कुछ सदस्यों ने अपने नेता को फूलों के गुलदस्ते से बधाई दी, वहीं वडोदरा शहर कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ऋत्विज जोशी ने उन्हें सफेद खादी के धागे से बनी माला भेंट की। हालाँकि, राहुल गाँधी ने माला पहनने से इनकार कर दिया।

राहुल गाँधी के अहंकार ने गुजरात में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को नाराज कर दिया है। कुछ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व स्थानीय जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी करता है और उन्हें खारिज कर दिया जाता है। इसके अलावा, कई लोगों ने इसे महात्मा गाँधी के अनादर के रूप में देखा। उनका मानना ​​है कि राहुल गाँधी ने खादी माला को पहनने से इनकार करके महात्मा गाँधी का अपमान किया है, वह भी उनके गृह राज्य में।

बीजेपी के गुजरात प्रदेश के सह-प्रवक्ता और वडोदरा शहर के पूर्व मेयर डॉ भरत डांगर ने गुजराती में ट्वीट किया, जिसका अनुवाद कुछ इस तरह है, “जिस परिवार ने महात्मा गाँधी जी के उपनाम (Surname) को अपनाकर वर्षों तक देश पर शासन किया है, उन्हें पूज्य बापू की खादी के धागा की माला पहनने में समस्या है?? वो भी गुजरात में???”

रुद्राक्ष की माला पहनने से इनकार करने पर राहुल गाँधी की हुई थी खिंचाई

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरह की पेशकश को स्वीकार करने से इनकार कर विवाद को जन्म दिया। राहुल गाँधी ने पहले भी हरिद्वार नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी द्वारा दी गई रुद्राक्ष की माला को कथित तौर पर स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिसकी काफी आलोचना हुई थी।

पिछले साल दिसंबर में वायरल हुई घटना के एक वीडियो में, राहुल गाँधी को सतपाल ब्रह्मचारी को अपना हाथ दिखाते हुए देखा गया था। इसके बाद सतपाल ब्रह्मचारी ने कॉन्ग्रेस नेता को रुद्राक्ष से बनी एक माला भेंट किया था। हालाँकि उन्होंने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया। 

बीजेपी उत्तराखंड ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। जिसके बाद कई बीजेपी नेताओं ने इसे शेयर किया। वीडियो वायरल होने पर कई लोगों ने उनके हिंदू धर्म पर पाखंड की निंदा और आलोचना की। भाजपा नेता अमित मालवीय ने वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा था, “वह वही आदमी है जो चुनाव से ठीक पहले मंदिरों में जाता है, एक जनेऊधारी हिंदू होने का दावा करता है और हिंदू धर्म पर भाषण देता है।”

दूसरे समुदाय के ‘नाबालिगों’ ने हिंदू युवक को चाकुओं से गोद कर मारा, सरिया से तोड़े पैर: राजस्थान में फिर बवाल, हिंदू संगठनों ने किया बंद का आह्वान

राजस्थान के भीलवाड़ा में देर रात एक 22 साल के युवक की हत्या कर दी गई। घटना कोतवाली पुलिस थाने की है। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में फोर्स को तैनात किया हुआ है और इंटरनेट सेवा 12 मई की सुबह 6 बजे बंद कर दी गई है। वहीं भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच ने इस मुद्दे को लेकर बंद का आह्वान किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना मंगलवार रात को घटी जब कथिततौर पर पैसे के विवाद के चलते 22 साल के हिंदू युवक आदर्श तापड़िया की दूसरे समुदाय के लोगों ने चाकू से गोद कर हत्या की। घटना के वक्त वह सांगानेर कस्बे के शास्त्री नगर से स्कूटी पर जा रहा था। इसी बीच आरोपितों ने उसे रोका और उसे चाकुओं से गोद डाला। इसके बाद युवक को महात्मा गाँधी अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक के परिजनों ने कहा कि जब तक आरोपित पकड़े नहीं जाएँगे वो तब तक शव नहीं उठाएँगे। मृतक के मामा ने दावा किया कि उनके भांजे को रंजिश के तहत मारा गया। कुछ आरोपित नाबालिग भी हैं।

दैनिक भास्कर की खबर बताती है कि आदर्श के ऊपर चाकू के अलावा सरिए से भी वार हुआ। उसके पैरों को तोड़ दिया गया। पुलिस ने अब तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। शुरुआती जाँच में पता चला है कि आदर्श के भाई हनी का कुछ नाबालिग लड़कों से विवाद हुआ था जिन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया। परिजन जिद्द पर अड़े हैं कि आरोपित गिरफ्तार होंगे तभी शव उठाया जाएगा। ऐसे में अस्पताल के बाहर भी पुलिस को तैनात किया गया है।

बता दें कि सांगानेर के जिस क्षेत्र में ये वारदात घटी वहाँ 5 दिन पहले तनाव भड़का था। दो समुदायों के बीच हुए बवाल में आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। वहीं दो लोग घायल भी हुए थे। इसके अलावा राजस्थान के जोधपुर में भी कुछ दिन पहले ईद के समय दो समुदायों की झड़प की घटना घटी थी जिसमें एक को चाकू लगा था और दूसरे की टांग टूटी थी। कुल 30 लोग घटना में घायल हुए थे। करौली में भी नव वर्ष के मौके पर हिंसा हुई थी। उस समय हिंदू की शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी।

‘बहन’ के साथ ऑटो ड्राइवर जावेद ने किया बलात्कार, कॉन्ग्रेसियों-वामपंथियों ने कोरोना में ‘मदद’ के लिए इसे बनाया था हीरो

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऑटो ड्राइवर जावेद को महिला से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह वही जावेद है, जो कोरोना में अपने ऑटो को ही एंबुलेंस बनाकर सुर्खियों में आया था। तब कॉन्ग्रेस नेताओं को भी कथित तौर पर लोगों की मदद करने वाले जावेद पर गर्व महसूस हुआ था। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो ट्वीट करके उसे कोरोना वारियर्स तक बता दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित ने अपने घर पर किराए पर रहने वाली महिला को पहले बहन बनाया, फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपित से तंग आकर महिला ने 15 दिन पहले ही अपने परिवार के साथ उसका घर छोड़ दिया। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का आरोप है कि जब वह घर पर अकेली रहती थी, तो जावेद उसके साथ छेड़छाड़ करता था और इसके बाद उसने उसके साथ बलात्कार भी किया।

ऐशबाग इलाके में रहने वाली 27 साल की महिला शादीशुदा है। उसने बताया कि ऐशबाग इलाके में रहने वाले 35 साल के जावेद उर्फ चाँद के घर में वह दो महीने तक किराए पर रही। उसने मार्च में उसका मकान लिया था। उस समय जावेद उसे अपनी बहन कहता था, लेकिन कुछ समय बाद वह अक्सर पति के जाने के बाद उसके कमरे में आ जाता था। पहले तो उसकी छेड़छाड़ शरारत लगी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी हरकतें बढ़ने लगी।

पीड़िता ने जब यह बात अपने पति को बताई तो उसका जावेद के साथ विवाद हो गया। विवाद के बाद दोनों ने जावेद का मकान खाली कर दिया और दूसरी जगह रहने चले गए। लेकिन इसके बाद भी जावेद ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे परेशान करने लगा। यही नहीं उसने पीड़िता को बदनाम करने की धमकी भी दी, जिसके बाद महिला ने थाने में आकर जावेद के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया। आरोपित जावेद खुद भी शादीशुदा है।

बता दें कि ऐशबाग इलाके में रहने वाला ऑटो रिक्शा चालक जावेद करीब एक साल पहले सुर्खियों में आया था। बताया जाता है कि उसने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान लोगों की मदद के लिए ऑटो को ही एंबुलेंस की तरह बना दिया था। उसके ऑटो में ऑक्सीजन सिलेंडर भी लगा हुआ था। वह कहता था कि वह निशुल्क ऑक्सीजन और मरीज को अस्पताल तक पहुँचने का काम करता है।

Pak में बैठे खालिस्तानी ‘रिंडा’ ने रची मोहाली हमले की साजिश, 20 हिरासत में: ‘पिज्जा’ से मिला पहला सुराग, 7000 मोबाइल डेटा की होगी जाँच

पंजाब के मोहाली में हुए हमले के तार पाकिस्तान से जुड़ते मिल रहे हैं। पुलिस की प्राथमिक जाँच में सामने आया है कि जिस शख्स ने मोहाली के इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर में अटैक कराया वो वांटेड गैंगस्टर हरविंदर सिंह उर्फ रिंडा है, जो पाकिस्तान में रहता है और भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को ऑपरेट करता है।

सूत्र बताते हैं कि रिंडा ही वो व्यक्ति है जिसने हाल में ड्रोन से फिरोजपुर में विस्फोटकों को भिजवाया और इन्हीं विस्फोटकों को तेलंगाना लेकर जाते समय खालिस्तानी आतंकी गिरफ्तार हुए। मोहाली पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस हमले को आतंकी हमला कहा है। पुलिस के अनुसार हमले में इस्तेमाल किया गया लॉन्चर मिल चुका है लेकिन उससे ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। इससे पहले इस मामले में सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू का नाम निकल कर सामने आया था। इस केस में अब तक 20 लोग हिरासत में लिए गए हैं। इनमें से एक अंबाला का भी है। माना जा रहा है कि इन्हीं संदिग्धों में से कुछ ने हमले के लिए अन्य सहायता मुहैया कराई।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, जाँचकर्ता मोबाइल टावरों के कॉन्टैक्ट में 6,000-7000 मोबाइल डेटा की पड़ताल कर रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपितों का पता लगाया जा रहा है। 10 से ज्यादा टीमें हमले की जाँच में लगी हैं। मोहाली पुलिस ने इस केस को आईपीसी की धारा 307,और UAPA की धारा 16 के तहत दर्ज किया है। मोहाली एसपी ने कहा है कि ये आतंकियों की साजिश थी कि वो पंजाब पुलिस के खुफिया तंत्र को निशाना बनाएँ।

पिज्जा डिलीवरी के कारण मिला मोहाली हमले का पहला सुराग

गौरतलब है कि इस पूरे केस का पहला सुराग पंजाब पुलिस को एक पिज्जा डिलीवरी के कारण मिला। दरअसल, हमले से पहले पंजाब इंटेलिजेंस का एक कर्मचारी पिज्जा डिलीवरी को रिसीव करने के लिए दफ्तर से बाहर आया हुआ था। इस दौरान उसने दफ्तर के बाहर एक सफ़ेद रंग की मारुति स्विफ्ट को खड़े हुए देखा, जो कि संदिग्ध नजर आ रही थी। जैसे ही इंटेलिजेंस कर्मचारी अपना पिज्जा का ऑर्डर लेकर अंदर जाने लगा, संदिग्धों ने कार से इंटेलिजेंस बिल्डिंग की तरफ एक ग्रेनेड दाग दिया और मौके से फरार हो गए। अब इस जानकारी के मिलने के बाद इलाके के सभी सीसीटीवी को खँगाला जा रहा है, ताकि संदिग्धों की पहचान की जा सके।

लश्कर-ए-खालसा

इसके अलावा ये भी खबर है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने पंजाब में आतंकवादी घटनाओं के लिए एक नए नाम से आतंकी गुट बनाया है। जानकारी के मुताबिक इस आतंकी गुट का नाम है – ‘लश्कर-ए-खालसा’। इस आतंकी गुट में शामिल दहशतगर्तों को अफगानिस्तान के लड़ाकू ट्रेनिंग दे रहे हैं। मीडिया रिपोट्स के अनुसार लश्कर-ए-खालसा में शामिल करने के लिए पंजाब और हरियाणा के स्थानीय गैंगस्टर और बदमाशों से संपर्क साधा जा रहा है। इसके लिए ड्रग्स के धंधे को भी जरिया बनाया जा रहा है।