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‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हुए गोरखनाथ मंदिर में घुसा मुर्तजा अब्बासी, धारदार हथियार से 2 सुरक्षाकर्मियों को किया घायल: वीडियो

उत्तर प्रदेश के के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में एक व्यक्ति द्वारा सुरक्षाकर्मियों पर हमले की खबर है। हमलावर द्वारा मज़हबी नारा भी लगाने की सूचना है। आरोपित के पास मिले पैन कार्ड में मुर्तजा अब्बासी नाम लिखा हुआ है। इस हमले में उत्तर प्रदेश PAC के 2 जवान घायल हुए हैं। हमलावर को पुलिस ने किसी बड़े नुकसान से पहले ही हिरासत में ले लिया है। आतंकी हमले की आशंका के चलते इस मामले की जाँच अब ATS कर रही है। घटना रविवार (3 अप्रैल 2022) की है। इस हमले का वीडियो भी सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावर मंदिर में घुसने का प्रयास कर रहा था। गेट पर तैनात PAC के 2 जवानों को उस पर शक हुआ तो उसे रोका गया। रोके जाने पर आरोपित ने दोनों जवानों पर अपने साथ पहले से लाए गए बाँके (धारदार हथियार) से हमला कर दिया। फिर वो मेन गेट के पा अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाते हुए आया। जहाँ कॉन्सटेबल अनुराग राजपूत और AIU अधिकारी ने उसे रोक लिया। खबर है कि अब्बासी अकेला नहीं था, उसके साथ एक और शख्स था, लेकिन वो भाग गया और अब्बासी को पकड़ लिया गया।

शुरुआती जाँच में पता चला है कि हमलावर ने अलीगढ़ में पढ़ाई की है। इसके बाद उसने मुंबई में केमिकल इंजीनियरिंग से बी टेक किया। हमलावर के पास से एक इंडिगो फ्लाइट का टिकट भी बरामद हुआ है। उसके सीधे मुंबई से गोरखपुर आने का शक जताया जा रहा है। वह गोरखपुर का ही रहने वाला बताया जा रहा है। उसके पास से एक लैपटॉप भी बरामद हुआ है जिसकी पुलिस जाँच कर रही है।

इस हमले के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपित मुर्तजा की पिटाई की जिस से वो घायल हो गया। उसे पुलिस ने ही बचा कर अस्पताल में भर्ती करवाया। मुर्तजा और दोनों घायल PAC जवानों का इलाज चल रहा है। ATS और अन्य अधिकारी इस आरोपित से मंदिर में घुसने की वजह और साथ में बाँका लाने का कारण जानने में लगे हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान मंदिर में गोली चलने की अफवाह उड़ी थी जिस से वहाँ मौजूद श्रद्धालु कुछ समय के लिए परेशान हुए। बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समझाया। इस पूरे मामले में अब तक पुलिस की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसी मठ के महंत हैं जिसे नाग सम्प्रदाय की सर्वोच्च पीठ कहा जाता है।

‘कॉन्ग्रेस को 3 सीटें नहीं मिलेंगी’ कह कर तीसरा पुशअप नहीं किया, हुआ भी यही: कई चुनावों में ऐसे सही साबित हुए प्रदीप भंडारी और ‘जन की बात’

कई चुनाव परिणामों को देखकर यह अहसास होने लगा था कि ओपिनियन पॉल और एग्जिट पॉल बिल्कुल धोखा जैसा ही है। कभी किसी एक एजेंसी की कोई एक एक्जिट पॉल सही हो गई, तो वर्षों तक उसी के मार्केटिंग से नाम चलाने की परंपरा रही है। लेकिन, जब वर्ष 2019 में मेरे गृह राज्य झारखंड में विधानसभा चुनाव होने वाले थे, तब चुनाव के पूर्व ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी से एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में भेंट हुई और उन्होंने मुझे बताया कि झारखंड में न केवल सत्ता परिवर्तन हो रहा है अपितु तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास आपना चुनाव भी हार रहे हैं।

झारखंड के एक्जिट पोल में भी ‘जन की बात’ ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास चुनाव हार रहे हैं और अंततः परिणाम के बाद इसकी पुष्टि भी हो गई। इस घटना के बाद मैं “जन की बात” के चुनावी आकलनों को लगातार फॉलो करने लगा। भारतीय ऑपेनियन पोल और एक्जिट पोल, जिससे मेरा विश्वास उठ चुका था, उस स्थान पर “जन की बात” पर मेरे विश्वास में थोड़ी वृद्धि हुई। लेकिन अब भी मन में यह प्रश्न उठ रहा था कि अन्य कई एजेंसियाँ भी कभी-कभी सही साबित होती हैं, उसी तरह ‘जन की बात’ ने भी तुक्का लगाया होगा और वह सही हो गया होगा।

झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद वर्ष 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी ‘जन की बात’ पर मेरी नजर बनी हुई थी। दिल्ली विधानसभा में सभी एजेंसियाँ कॉन्ग्रेस को 10% का वोट शेयर दिखा रही थी, लेकिन ‘जन की बात’ ने कॉन्ग्रेस को 5% वोट का आकलन किया। इसके साथ ही ‘जन की बात’ के अनुसार, उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया को अपने विधानसभा क्षेत्र में अत्यंत कड़ी चुनौती मिलने की भी बात एग्जिट पोल में बताई।

दिल्ली में कॉन्ग्रेस को 5% से कम वोट शेयर देने के कारण कई राजनीति पंडितों ने ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी की कठोर आलोचना भी की। परंतु चुनाव परिणाम के बाद ‘जन की बात’ का आकलन पुनः सही साबित हुआ। चुनाव परिणाम के दौरान वास्तव में  उ-पमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अपने सीट पर काफी संघर्ष करते हुए दिख रहे थे। इस तरह ‘जन की बात’ ने मेरे दिल में जगह बना ली। मैंने अन्य एजेंसियों के तरह इसके एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल को केवल मनोरंजनात्मक नहीं पाया, बल्कि उसमें काफी गहनता दिखी।

इसका प्रमुख कारण ‘जन की बात’ का वास्तव में ग्राउंड पर सर्वे करना है। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान तो ‘जन की बात’ ने हर वार्ड स्तर पर सर्वे कर डाला था।  जबकि दूसरी एजेंसियाँ अपने AC ऑफिस से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी मतदान व्यवहार के निष्कर्षों को अत्यंत वैज्ञानिक प्रणाली द्वारा निकालते हैं। यही कारण है कि एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल के भारतीय स्वरूप को उन्हें बदलने का श्रेय जाता है।

पिछले वर्ष पश्चिम बंगाल के चुनाव में ‘जन की बात’ बीजेपी की सरकार बना रही थी, लेकिन चुनाव परिणाम में ममता बनर्जी की सरकार पुनः मजबूती आई। मेरा भी व्यक्तिगत आकलन पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए 70-90 सीट था और बीजेपी ने 77 सीटें प्राप्त की। लंबे समय बाद पश्चिम बंगाल में ‘जन की बात’ असफल हुई, लेकिन सफलता-विफलता के अनुपात में अब भी सफलता का हिस्सा काफी बड़ा था। ‘जन की बात’ ने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी के हारने और शुभेंदु अधिकारी के जीतने के बारे में भविष्यवाणी की थी।

साथ ही ‘जन की बात’ ने एग्जिट पोल में बताया था कि ममता बनर्जी इस सीट पर लगभग दो हजार वोटों से हार जाएँगी। अंततः चुनाव परिणाम में ममता बनर्जी को शुभेदु अधिकारी ने 1956 वोटों से हराया। इस तरह नंदीग्राम सीट पर ‘जन की बात’ का आकलन पूर्णतः सही रहा। हाल के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी ‘जन की बात’ ने जबरदस्त ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। न केवल सीटों की संख्या अपितु वोट प्रतिशत के दृष्टि से भी ‘जन की बात’ ने उत्तर प्रदेश एग्जिट पोल में बीजेपी गठबंधन का मत प्रतिशत 40-42% बताया था, चुनाव परिणाम में भी बीजेपी गठबंधन को 41% मत मिला।

इस तरह JKB (जन की बात) उत्तर प्रदेश एग्जिट पोल में पूर्णतः सही रहा। पंजाब में JKB ने एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी (AAP) का मत प्रतिशत 39%-43% के बीच बताया। चुनाव परिणाम में AAP को 42% मत मिले। यहाँ भी ‘जन की बात’ पूर्णतः सही साबित हुई। इसी तरह गोवा में ‘जन की बात’ एग्जिट पोल में बीजेपी गठबंधन का वोट शेयर 31%-33% बताया गया, चुनाव परिणाम में भी बीजेपी को 33.31% प्रतिशत मत मिले।

मणिपुर में JKB एक्जिट पोल में बीजेपी का वोट शेयर 34-38% बताया गया, चुनाव परिणाम में बीजेपी का वोट शेयर 37.68% रहा। यहाँ भी वोट प्रतिशत आकलन शत-प्रतिशत सही रहा। इस तरह सीटों की संख्या के मामले में हाल के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में ‘जन की बात’ पूर्णतः सफल रहा। 2019 के लोकसभा चुनाव में ‘जन की बात’ के संस्थापक प्रदीप भंडारी ने संपूर्ण देश की जबरदस्त यात्रा कर चुनाव सर्वे किया था।

2019 में देश ने कैसे प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को चुना, उस पर प्रदीप भंडारी ने विस्तार के साथ ‘मोदी विजयगाथा’ पुस्तक में लिखा भी है। इस किताब से ही उनके कठिन मेहनत को समझा जा सकता है। वे लगातार ग्राउंड पर भ्रमण कर एसी रूम से सर्वे करने वाले एजेंसियों को चुनौती दे रहे है। इस बार अधिकांश एजेंसियों ने पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने की बात कही, लेकिन आम आदमी पार्टी जिस तरह 92 अप्रत्याशित सीट संख्या पर पहुँच गई, उस संख्या के पास 88 का अनुमान केवल ‘जन की बात’ ने ही लगा पाई।

प्रदीप भंडारी और मेरी राजनीति सोच में जबरदस्त अंतर है, लेकिन जब एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल के आँकड़ों की बात होती है, तो ‘जन की बात’ ने जो अब अपना इतिहास बनाया है, वह बेमिसाल है। उत्तर प्रदेश के एग्जिट पोल के दौरान प्रदीप भंडारी ने कॉन्ग्रेस को केवल 2 सीट मिलने की बात कही थी। इसके लिए उन्होने अपने कार्यक्रम में केवल दो पुश अप मारा था और कहा था कि तीसरा पुश अप मैं फुल नहीं करूँगा, क्योंकि कॉन्ग्रेस को तीसरी सीट नहीं मिल रही।

उनका यह वीडियो काफी वायरल भी हुआ तथा वे आलोचना के घेरे में भी आएँ। लेकिन, चुनाव परिणाम के बाद कॉन्ग्रेस को जिस तरह केवल 2 सीटें मिलीं, उससे ‘जन की बात’ पुनः सही साबित हुई। वास्तव में ‘जन की बात’ ने पिछले कुछ वर्षों में एग्जिट पोल और ऑपेनियन पोल में इतिहास बनाया है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता।

(लेखक राहुल लाल वरिष्ठ लेखक एवं आर्थिक विश्लेषक हैं)

‘या तो नंगी होगी या फिर …’: पायल रोहतगी ने किया हलाल का विरोध तो भड़कीं पूनम पांडे, जम कर बकी गालियाँ

कंगना रनौत के शो ‘Lock Upp’ में अभिनेत्री पायल रोहतगी ने पूनम पांडे को निशाने पर लिया। दोनों ही इस शो में कंटेस्टेंट हैं। असल में ये पूरा मामला हलाल मीट को लेकर शुरू हुआ, जिसे कर्नाटक में प्रतिबंध किए जाने की खबर शो में दिखाई गई। इसके बाद ज़ीशान खान और पायल रोहतगी आपस में भिड़ गए। ज़ीशान खान ने इस शो में पायल रोहतगी को गालियाँ भी बकीं। इस दौरान पूनम पांडे भी पायल रोहतगी को गालियाँ बकने लगीं।

पूनम पांडे ने दावा कर दिया कि पायल रोहतगी अपनी हद से आगे बढ़ गई हैं। इस पर पायल रोहतगी ने पूनम पांडे को वो जातिवादी टिप्पणी याद दिलाई, जिसमें उन्होंने निशा रावल को ब्राह्मण होने पर निशाना बनाया था। पूनम पांडे इस दौरान पायल रोहतगी को जम कर गालियाँ बकती रहीं। इस पर पायल रोहतगी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि पूनम पांडे को दो ही चीजें आती हैं – ‘ या तो अपना टॉप उतारना, या फिर गालियाँ बकना।’

उन्होंने कहा, “दे-दे… गंदी-गंदी गालियाँ दे। दो ही तो चीजें आती हैं तुझे। या तो माँ-बहन की गालियाँ देगी, या फिर कपड़े उतारेगी।” जब पूनम पांडे उन्हें फिर भी गालियाँ देती रहीं, तो पायल रोहतगी ने कहा, “या तो नंगी होती है या तो मां बहन की गालियाँ देती है। यही आता ही है तुझे।” हालाँकि, शो की होस्ट कंगना रनौत ने भी पायल रोहतगी को इन शब्दों का इस्तेमाल न करने को कहा। पायल रोहतगी ने कहा कि वो एक सप्ताह से पूनम पांडे की गालियाँ सुन रही हैं, इसीलिए उन्होंने जवाब दिया।

बता दें कि शो में अपनी राय रखते हुए पायल रोहतगी ने कहा कि जिस तरह से हलाल प्रक्रिया में जानवरों को टॉर्चर किया जाता है, यह सब बंद होना चाहिए। यह बात शो में मौजूद जीशान खान (Zeeshan Khan) को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई और वह पायल पर आग-बबूला हो जाता है और उन्हें मिडिल फिंगर दिखाकर गाली देता है। इसके बाद एक्ट्रेस भी गुस्से में जीशान और उसके मजहब को लेकर कुछ बोलती हैं, जिसे मेकर्स को म्यूट करना पड़ता है।

जिस 800+ साल पुरानी रसोई में होता है जगन्नाथ मंदिर का ‘महाप्रसाद’ तैयार, उसके 40 चूल्हों में तोड़फोड़: जाँच के आदेश जारी

ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर की रसोई में मिट्टी के 40 चूल्हे क्षतिग्रस्त पाए जाने की खबर है। घटना रविवार (अप्रैल 3, 2022) को प्रकाश में आई। बताया जा रहा है जिन चूल्हों को तोड़ा गया वह दुनिया की सबसे बड़ी रसोई रोसा-घर में थे। इनका प्रयोग ‘महाप्रसाद’ बनाने के लिए किया जाता था।

चूल्हे टूटने की जानकारी होने के बाद जिला कलेक्टर समर्थ वर्मा ने घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने बताया कि रोसा घर के 40 चूल्हों में तोड़फोड़ की गई है। उन्होंने इस संबंध में जाँच करके रिपोर्ट देने को कहा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि घटना को अंजाम देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स के अनुसार, ये मंदिर 12 वीं (1161 CE) शताब्दी का है। इसमें 240 चूल्हे हैं। इनमें से 40 को नुकसान पहुँचाया गया है। रसोई में केवल रसोइयों की अनुमति होती है। ऐसे में शक है कि ये घटना शनिवार को कुछ सेवकों द्वारा न की गई हो। घटना के बाद मंदिर की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

बता दें कि मंदिर के महाप्रसाद को बनाने के लिए करीब 400 रसोइए लगते हैं और 200 सहायक प्रत्यक्ष रूप से इस प्रक्रिया में जुटे होते हैं। ये प्रसाद आनंद बाजार में बेचा जाता है। 800 साल से ज्यादा पुरानी इस रसोई में 56 व्यंजन बनते आए हैं। इनमें चावल के प्रकार, केक, मिष्ठान आदि शामिल है। पूरी रसोई 15000 स्क्वॉयर फीट क्षेत्र में बनी है। इसकी ऊँचाई 20 फीट है। इस रसोई में बने खाने को सैंकड़ों लोग खाते हैं। त्योहारों पर ये संख्या और बढ़ जाती है। चूल्हों की बात करें तो भव्य रसोई के ज्यादातर चूल्हे 4 फीट के हैं। रसोइए खड़े होकर यहाँ व्यंजन बनाते हैं। अनुमान है कि संध्या रूप आरती के बाद और राजभोग लगने के बाद इस घटना को अंजाम दिया गया।

जिला कलेक्टर का कहना है कि वो आरोपितों को पकड़ने के लिए अपनी जाँच सीसीटीवी फुटेज के जरिए कर रहे हैं। पुलिस और मंदिर प्रशासन इस मामले पर मिलकर पड़ताल करेंगे। जिन चूल्हों को नुकसान हुआ है उन्हें सामान्य करने में दो दिन का समय लगेगा।

अब इस घटना के बाद मंदिर की परंपरा का क्या फर्क पड़ेगा ये भी जान लीजिए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना में एक या दो कोठा चूल्हों को नुकसान पहुँचाया गया है बाकी सब सही हालत में है। ऐसे में मंदिर का प्रसाद बनने में कोई कठिनाई नहीं आई। बस सुबह का प्रसाद आधे घंटे लेट हुआ। घटना ने भक्तगणों की आस्था को ठेस पहुँचाया है। 

‘4 मुस्लिम पत्रकारों को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा’: फिर झूठ फैलाने पर उतरा The Quint, सच्चाई निकली कुछ और

वापमंथी न्यूज पोर्टल द क्विंट झूठ फैलाते हुए पकड़ा गया है। चैनल के रिपोर्टर मेघनाथ बोस ने दिल्ली पुलिस पर मुस्लिम पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया था, जिसका दिल्ली पुलिस खंडन किया है। रविवार (3 अप्रैल, 2022) को बोस ने दावा किया था कि हिंदू महापंचायत कार्यक्रम में हिंदू भीड़ द्वारा उन पर हमला किए जाने के बाद पुलिस ने ‘चार अन्य मुस्लिम पत्रकारों’ सहित उन्हें हिरासत में ले लिया था।

दरअसल, रविवार के दिल्ली के बुराड़ी मैदान पर सेव इंडिया फाउंडेशन ने हिंदू महापंचायत का आयोजन किया था। पंचायत के पोस्टर में इसके एजेंडे का जिक्र किया गया था। जिसमें मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने, धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता समेत कई अन्य मुद्दों के समाधान की माँग की गई थी। आरोप लगाने वाले क्विंट पत्रकार मेघनाद बोस ने दावा किया कि महापंचायक की रिपोर्टिंग करते वक्त मीर फैसल और मोहम्मद मेहरबान नाम पर हिंदू भीड़ द्वारा ‘हमला’ किया गया था। बोस ने हिंदू महापंचायत को ‘मुस्लिम विरोधी कार्यक्रम’ करार दिया।

बोस ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें और चार अन्य मुस्लिम पत्रकारों को हिरासत में ले लिया था। ट्वीट में क्विंट के पत्रकार ने ट्विटर पर दावा किया, “पत्रकारों को दिल्ली पुलिस ने पुलिस की गाड़ी में हिरासत में ले लिया।”

उत्तर पश्चिम दिल्ली के डिसीपी ने मेघनाद बोस के दावों का खंडन करते हुए ट्वीट किया, “कुछ पत्रकार स्वेच्छा से अपनी मर्जी से भीड़ से बचने के लिए कार्यक्रम स्थल पर तैनात पीसीआर वैन में बैठ गए और सुरक्षा कारणों से पुलिस स्टेशन जाने का विकल्प चुना। किसी को हिरासत में नहीं लिया गया। पुलिस ने उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान की।” डीसीपी उत्तर-पश्चिम दिल्ली का कहना है कि बोस ने ये आरोप उस वक्त लगाए थे, जब हिंदू कार्यकर्ताओं ने उस समारोह में पत्रकारों की उपस्थिति पर आपत्ति जताई थी।

डीसीपी ने भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि क्विंट पत्रकार मेघनाथ बोस वहीं शख्श हैं, जिन पर 2018 में #MeToo का आरोप लगाया गया था। एक महिला ने आरोप लगाया था कि जब वो शराब के नशे में थी तो बोस ने उसके साथ गलत व्यवहार किया।

खास बात ये है कि जैसे ही मेघनाथ बोस ने ट्विटर पर ये आरोप लगाया तो उसके तुरंत बाद पाकिस्तान के महावाणिज्य दूतावास वैंकूवर के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने कई ट्विटर अकाउंट को टैग करके उन्हें जवाब दिया। पाकिस्तानी अधिकारी कोई कमेंट तो नहीं किया, लेकिन उसने मानवाधिकार निकायों, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ आदि के आधिकारिक अकाउंट्स को टैग किया।

‘आने वाले समय में बजेगा जय श्रीराम’ : लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा सुन मुंबई पुलिस ने MNS नेता को किया गिरफ्तार

मुंबई के घाटकोपर में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) कार्यकर्ताओं द्वारा लाउड स्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाने के मामले में अब मुंबई पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने मनसे के नेता महेंद्र भानुशाली को बिना अनुमति लाउडस्पीकर पर ‘हनुमान चालीसा’ बजाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

2 अप्रैल को गुड़ी पड़वा (हिन्दू नव वर्ष) के मौके पर मस्जिदों से लाउड स्पीकर नहीं हटाए जाने पर मनसे चीफ राज ठाकरे ने हनुमान चालीसा के पाठ की चेतावनी दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनसे के नेता महेंद्र भानुशाली पर ये आरोप है कि पार्टी के घाटकोपर कार्यालय के बाहर उन्होंने ने ही लाउड स्पीकर लगाया था।

ऐसा लगता है कि लाउड स्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाना उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार को पसंद नहीं आया। इसीलिए उद्धव ठाकरे की पुलिस ने ‘हनुमान चालीसा’ बजाए जाने पर आपत्ति जताते हुए मनसे नेता को गिरफ्तार कर लिया।

इस बीच गिरफ्तार होने के बाद महेंद्र भानुशाली ने आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस ने उनका स्पीकर छीन लिया। उन्होंने कहा, “मैं कहना चाहता हूँ कि आने वाले समय में लाउडस्पीकरों पर ‘जय श्री राम’ बजाया जाएगा।” भानुशाली यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, “केवल मैं ही नहीं, इसके लिए कोई भी इजाजत नहीं लेता। इसलिए मेरे ऊपर कार्रवाई की जाए तो सभी पर कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस ने अपना काम किया। राज (ठाकरे) साहब कहते हैं, पुलिस को कभी कुछ मत कहना। जहाँ भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल होता है किया जाता है, वहाँ कार्रवाई की जानी चाहिए।”

राज ठाकरे ने चेताया था मस्जिदों को

गौरतलब है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने 2 अप्रैल 2022 को गुड़ी पड़वा (हिन्दू नववर्ष) के मौके पर शिवाजी पार्क में आयोजित एक रैली में कहा था कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर इतनी तेज आवाज में क्यों बजाए जाते हैं? अगर इसे नहीं रोका गया तो मस्जिदों के बाहर स्पीकर पर अधिक तेज आवाज में हनुमान चालीसा बजाया जाएगा।

उन्होंने चेतावनी देने के बाद यह भी कहा था, “मैं प्रार्थना या किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं हूँ। हर धर्म को प्रार्थना करने का अधिकार है, लेकिन मुझे अपने धर्म पर गर्व है। इसलिए इस बात का ख्याल जरूर रखना चाहिए कि आपकी किसी चीज से दूसरों को परेशानी न हो।” इसके साथ ही उन्होंने मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य स्थानों की बदलती जनसांख्यिकी (Demography) पर बात करते हुए आरोप लगाया था कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से बहुत सारे मुस्लिम इन जगहों पर आकर बस गए हैं और अगर पुलिस मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में मदरसों की ठीक से जाँच करेगी, तो उन्हें बहुत कुछ पता चलेगा।

जो था पूरे देश में पहला वामपंथी मुख्यमंत्री, उसी नंबूदरीपाद को वामपंथी पत्रिका अब कह रही ‘सबसे बड़ा गद्दार’

केरल (Kerala) में वामपंथियों एक धड़े की जानी-मानी पत्रिका ने अपने ही नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री को राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा गद्दार बता दिया है। CPI का मुखपत्र ‘नवयुगम’ ने ईएमएस नंबूदरीपाद को केरल की राजनीति का सबसे बड़ा गद्दार कहा है। नंबूदरीपाद ना सिर्फ वामपंथियों के सबसे बड़े नेता थे, बल्कि मार्क्सवादी विचारक और केरल पहले मुख्यमंत्री भी थे।

‘नवयुगम’ के नवीनतम संस्करण में ‘कंडालम कोंडालम पडिक्कातावर’ (जो अनुभव से कभी नहीं सीखते) नाम छपे लेख में कहा गया है कि नंबूदरीपाद ने साल 1967 में सीपीआई के मंत्रियों के खिलाफ कदम उठाया था। नंबूदरीपाद और कुछ अन्य नेताओं ने इन मंत्रियों के साथ धोखा किया था। उन्होंने CPI को खत्म करने के इरादे से अपने लंबे समय तक के साथियों को कठघरे में खड़ा कर दिया था।

यह लेख वामपंथी विचाराधारा वाली राजनीतिक पार्टी CPM की पत्रिका ‘चिंता’ में लिखे गए लेख को लेकर विरोध में लिखा गया है। चिंता पत्रिका में लिखे गए लेख में कहा गया था कि CPI को अपने नाम में से ‘कम्युनिस्ट’ शब्द को बहुत पहले हटा देना चाहिए था। इसके अलावा पार्टी के लाल झंडे को छोड़ देना चाहिए था। ‘चिंता’ ने CPI नेताओं एमएन गोविंदन नायर और टीवी थॉमस के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाया था।

नवयुगम ने अपने लेख में आगे कहा कि कहा कि शानदार प्रदर्शन करने वाले CPI नेता सी अच्युता मेनन केरल के अब तक के सबसे लोकप्रिय मंत्री हैं। उनकी लोकप्रियता को देेखते हुए CPM जानबूझकर उन्हें राज्य के राजनीतिक इतिहास से मिटाने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं, लेख में यह भी कहा गया है कि CPM ने हमेशा कॉन्ग्रेस का समर्थन किया। यहाँ तक इंदिरा गाँधी द्वारा लगाए गए आपातकाल में भी साथ दिया। जबकि, CPI ने आपातकाल का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध किया।

लेख में आगे कहा गया है, “CPM लगातार आरोप लगा रही है, क्योंकि उसके पास CPI के खिलाफ कहने के लिए कुछ और नहीं है। माओवादी विरोधी अभियानों की आड़ में 9 लोगों को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया। जो लोग राजन की मौत के लिए अच्युता मेनन की आलोचना कर रहे हैं, वे लोग माओवादियों की हत्या के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री की आलोचना करेंगे?”

दरअसल, साल 1976 में आपातकाल के दौरान कोझिकोड में इंजीनियरिंग के छात्र पी राजन को पुलिस उठा लिया था और पुलिस हिरासत में ही उनकी मौत हो गई थी। उनका पार्थिव शरीर भी मिला था। इस घटना के वक्त अच्युता मेनन केरल के मुख्यमंत्री थे।

नवयुगम ने यह भी कहा कि CPM हमेशा UAPA कानून को लेकर जुमलेबाजी करती रहती है, जबकि इस कानून का दुरुपयोग भी खुद करती है। अदालत ने खुद कहा था कि इस कानून का इस्तेमाल एलन और तवाहा को फँसाने और उन्हें जेल में डालने के लिए किया गया था। बता दें कि छात्र एलन शुहैब और तवाहा फ़ैसल को नवंबर 2019 में माओवादी लिंक के लिए गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2021 में दोनों को जमानत दे दी थी।

CPI के मुखपत्र ने आरोप लगाया कि CPM ने चुनाव लड़ने के लिए सार्वजनिक रूप से जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी और केरल कॉन्ग्रेस के साथ खुलेआम हाथ मिलाया था और इसे एक रणनीति के रूप में उचित ठहराया था। लेख में साल 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी के विभाजन को त्रासदी बताया और कहा कि कम्युनिस्टों के पास साल 1965 में केरल में सरकार बनाने का मौका था और लोग इसका समर्थन भी कर रहे थे।

‘मम्मी-पापा को बताओगी तो वो मर जाएँगे’: फल बेचने वाले मिर्जा ने नाबालिग लड़की का 6 महीने तक किया रेप, झाड़-फूँक के नाम पर बहलाया

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के हबीबगंज क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की के साथ 6 माह तक रेप किए जाने की खबर है। यह आरोप उसी इलाके के एक फेरी लगा कर फल बेचने वाले पर लगा है। आरोपित का नाम निहाल बेग उर्फ़ मिर्जा है। बताया जा रहा है कि दुष्कर्म के लिए आरोपित ने पीड़ित परिवार की तकलीफ दूर करने के लिए झाड़ फूंक का बहाना लिया था। पुलिस ने शनिवार (2 अप्रैल) को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना भोपाल के अरेरा कॉलोनी की है। यहाँ कक्षा 10 में पढ़ने वाली 14 वर्षीया छात्रा अपने माता – पिता और भाई के साथ किराए पर रहती है। कुछ समय पहले पीड़िता के पिता ने एजुकेशन का एक ऑनलाइन पोर्टल बनवाया था। लॉकडाउन के चलते उसमें घाटा लग गया। इसके चलते पूरा परिवार अक्सर तनाव में रहने लगा। इस दौरान उसी कॉलोनी में फलों की फेरी लगाने वाले निहाल बेग की नजर नाबलिग लड़की पर गई।

सितम्बर 2021 में मिर्जा ने पीड़िता से तनाव और उदासी की वजह पूछी तो उसने इसकी वजह अपने पिता का व्यापर में हुआ घाटा और परिवार पर लदा कर्ज बताया। इस पर आरोपित मिर्जा ने इसकी वजह परिवार पर भूत-प्रेत का साए को बताया। उसने यह भी कहा कि वो इसका इलाज इबादत से कर देगा। इस काम के लिए उसने 6 महीने का समय बताया। उसके बाद घर में खुशियों के आने का दावा किया। पीड़िता के परिजन भी इस इबादत के लिए मान गए।

अपनी इबादत के नाम पर मिर्जा उर्फ़ निहाल बेग सबको बारी – बारी अकेले कमरे में ले जाने लगा। इस दौरान वो पीड़िता के साथ अकेले में दुष्कर्म करने लगा। वह इसे इबादत का एक हिस्सा बताता रहा। इबादत के नाम पर यह दुष्कर्म हफ्ते में 2 बार हो रहा था। इस बात की भनक भी किसी को नहीं लग पाई। इस बीच निहाल बेग पीड़िता से कहता रहा कि अगर उसने अपने साथ होने वाली हरकत किसी को बताई तो उसके माँ – बाप की मौत हो जाएगी। पीड़िता अपने परिवार की ख़ुशी की लालच में सब कुछ चुपचाप झेलती रही।

6 माह बीत जाने के बाद भी जब पीड़िता के घर की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो उसने निहाल बेग से इसकी वजह पूछी। निहाल बेग उर्फ़ मिर्ज़ा ने बताया कि लड़की के पिता ने उसकी इबादत में शराब पी कर बाधा डाल दी है। इसलिए अब वो इबादत फिर से शुरू से करनी होगी। इस बात से लड़की को शक हुआ और उसने अपने घर पूरी बात बता दी। घटना की जानकारी होते ही पीड़िता के परिजन उसे थाने ले गए।

SHO हबीबगंज इंस्पेक्टर भानसिंह प्रजापति के मुताबिक आरोपित मिर्जा उर्फ़ निहाल बेग मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। वह फिलहाल भोपाल के जहाँगीराबाद में रह रहा था। जब उसे पता चला कि पीड़िता ने अपने घर सब कुछ बता दिया है तब वह भागना चाहता था। लेकिन पुलिस ने उस से पहले ही उसको गिरफ्तार कर लिया। आरोपित पर रेप और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई है। पीड़िता की माँ एक स्कूल में टीचर रह चुकी हैं।

‘शाहजहाँ काल में भुखमरी से मरे 35 करोड़ लोग’: मनोज मुंतशिर के बयान से ‘आज तक’ की छेड़छाड़, पोल खुलने पर भी नहीं माँगी माफी

गीतकार मनोज मुंतशिर ने गुड़ी पड़वा की पूर्व संध्या पर उज्जैन के कार्यक्रम में शामिल होते हुए मुगलों पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने शाहजहाँ द्वारा बनवाए गए ताजमहल पर, उस पर हुए खर्चे पर और देश में फैली भुखमरी पर बात करते हुए कहा था कि जब शाहजहाँ ने 9 करोड़ रुपए एक मकबरे में लगाए तब देश में भुखमरी थी, जिससे 35 लाख लोग मर चुके थे।

उनके इसी बयान को आज तक ने गलत आँकड़ों के साथ पेश किया और अपने हेडलाइन में लिखा कि मनोज मुंतशिर ने 35 करोड़ लोगों के मरने की बात कही है।

आज तक का यह ट्वीट व रिपोर्ट देख कर कई लोग मनोज मुंतशिर पर हमलावर हो गए। उन्हें इतिहास का ज्ञान दिया जाने लगा। उन्हें शाहजहाँ काल के समय कितनी जनसंख्या थी इसके बारे में बताया जाने लगा। इसके अलावा कई अपशब्द भी उन्हें कहे गए। लेकिन इस बीच, किसी ने भी एक बार आज तक की रिपोर्ट पर प्रश्न नहीं उठाए। कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अमरीश रंजन पांडे ने भी इसी रिपोर्ट के आधार पर गीतकार के ऊपर निशाना साध दिया और जिसका जवाब मुंतशिर ने उन्हें लताड़ लगाते हुए दिया।

हालाँकि, सच क्या है, ये मनोज मुंतशिर के कार्यक्रम की वीडियो देखने पर पता चलता है। इस वीडियो में वह कहते हैं, “17वीं शताब्दी में जब शाहजहाँ ताजमहल बनवा रहे थे वो वही दौर था जब हमारे भारत में 35 लाख लोग भुखमरी का शिकार होकर दम तोड़ चुके थे। भूख से मर चुके थे। ऐसे आलम में एक राजा एक बादशाह उस समय के 9 करोड़ रुपयों को एक मकबरे में खर्च देता है जिससे पूरे देश की गरीबी मिट सकती थी।”

आजतक ने बिन माफी माँगे अपने रिपोर्ट में करेक्शन किया

दिलचस्प बात ये है कि ये ट्वीट कल रात आज तक ने अपने आधिकारिक हैंडल से किया था। इसके बाद तमाम लोगों ने इसके आधार पर मनोज मुंतशिर को भला-बुरा कहा और कुछ लोग ऐसे मिले जो बार-बार आज तक को टैग करके सच्चाई बताते रहे। हालाँकि आज तक ने अपनी गलती में दोपहर तक कोई सुधार नहीं किया। जब विवाद ज्यादा बढ़ा और मनोज मुंतशिर ने भी इस तरह झूठी जानकारी साझा करने पर आज तक को लताड़ा तो आज 5:08 मिनट पर आज तक ने करेक्शन के साथ एक नया ट्वीट किया और बिन कोई माफी माँगे अपनी कॉपी में करोड़ की जगह लाख कर दिया।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य देख भावुक हुए CM योगी, नींव के पत्थर पर लिखा ‘श्री राम’: जून से शुरू हो जाएगा खंभों का कार्य

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य लगातार जारी है। उम्मीद है कि इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से 4 महीने पहले ही दिसंबर 2023 में तैयार कर लिया जाएगा। इस बीच सीएम योगी आदित्यनाथ दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद अयोध्या पहुँचे। इस दौरान वो राम मंदिर का निर्माण कार्य देखकर भावुक हो उठे। उन्होंने नींव में लगाए जाने वाले पत्थर को प्रणाम कर उस पर ‘श्रीराम’ लिखा और उस पर स्टाम्प लगा दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अयोध्या पहुँचे सीएम योगी हनुमानगढ़ी गए और मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चुनाव के पहले जो भी विकास योजनाएँ बनाई गई थी, उन्हें शुरू कर समय पर खत्म किया जाए। अगर डीपीआर नहीं बनीं है तो उसे तुरंत बनाया जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने बड़ा कदम उठाते हुए राम नगरी अयोध्या के मठ, मंदिरों और दूसरे धार्मिक स्थलों से वसूले जाने वाले टैक्स पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया। मंदिरों का टैक्स लाखों में आ रहा था, जिसको लेकर कई बार धर्माचार्यों ने सीएम से इसको लेकर शिकायत की थी।

मंदिर की नीव तैयार

राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के मुताबिक, राम मंदिर की नींव तैयार हो चुकी है। दो महीने में राफ्ट पर अधिष्ठान का कम करने के बाद मंदिर के खंभों और पत्थरों की जुड़ाई जून से शुरू हो जाएगी। अनुष्ठान के बाद रामलला को अस्थायी मंदिर से गर्भगृह में विराजित किया जाएगा। इसके मुख्य यजमान पीएम मोदी होंगे।

मंदिर की 50 नींवों के ऊपर 21 फीट के चबूतरे का पहला लेयर तैयार है। अभी सात लेयर और लगेंगी। हर दिन यहाँ 80 से 100 पत्थरों को लगाया जा रहा है। गौरतलब है कि भव्य राम मंदिर का निर्माण 70 एकड़ में किया जा रहा है, जिसमें से तीन एकड़ में तो मंदिर और उसका कॉरिडोर बस है। इसके अलावा 67 एकड़ में म्यूजियम, सीता, लक्ष्मण, भरत और भगवान गणेश जी का मंदिर होगा।

21 फीट ऊँची सीढ़ियों के बाद होगा दर्शन

मंदिर बनने के बाद भगवान राम के दर्शन करने के लिए भक्तों को 21 फीट ऊँची सीढ़ी चढ़नी होगी, जिसके बाद उन्हें गर्भगृह के दर्शन होंगे। मंदिर को बनाने में एलएनडटी और टीसीई के इंजीनियर दिन रात लगे हुए हैं।