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‘मरते दम तक पीटते रहे, शरीर पर पेशाब किया’: पिता को खोने वाली कश्मीरी पंडित महिला ने सुनाया अपना अनुभव, भैरव मंदिर टूटते देखा था

इस्लामी चरमपंथियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ को लोग हाथोंहाथ ले रहे हैं। इसी बीच नब्बे के दशक के कई पीड़ितों की कहानियाँ भी सामने आ रही हैं। इसी तरह एक महिला ने अपने अनुभव ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ के माध्यम से शेयर किए हैं, जिसमें उन्होंने लिखा है कि जिस कश्मीर में वो बड़ी हुईं वो काफी अलग था और वो जब भी आँखें बंद करती हैं, उन्हें सुन्दर चिनार के पेड़, दूधगंगा नदी और भैरव मंदिर प्रकाशित हुए दिखते हैं।

उन्होंने लिखा है कि उनका पालन-पोषण एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ। उनके पैतृक निवास स्थान पर रह रहे उस परिवार में तब 18 लोग थे। लेकिन, 1989 आते-आते बदल गया और आए दिन ‘बंद’ का आयोजन होने के साथ-साथ हर दूसरे दिन हड़ताल होती रहती थी। उन्होंने उस घटना को याद किया, जब जस्टिस गंजू को कश्मीरी पंडित होने के कारण मार डाला गया था। महिला ने कहा कि उन्हें तब ये समझने में काफी समय लग गया कि हमारे समुदाय को क्यों निशाना बनाया जा रहा है।

कश्मीरी पंडित महिला ने लिखा है, “घर में ये चर्चा चलती थी कि हमें क्यों निशाना बनाया जा रहा। पापा कहते थे कि शायद इसीलिए, क्योंकि वो लोग ऊँचे पदों पर थे। मेरे दादाजी का मानना था कि शायद राजनेताओं से टकराने के कारण ऐसा हो रहा हो। इसके बाद हमें पहला झटका तब लगा, जब हमारे एक रिश्तेदार की दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी गई। तब भी किसी को इसका भान नहीं था कि पूरे समुदाय को साफ़ करने के लिए एक साजिश रची जा रही है।”

उन्होंने याद किया कि 19 जनवरी, 1990 को मस्जिद से एक घोषणा की गई। तब वो अपने कमरे में थीं। वो तब अपने मेडिकल परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रही थीं। उन्होंने बताया कि तभी उनके चाचा दौड़ते हुए आए, कमरे में लाइट्स ऑफ किए और काँपते हुए कोने में बैठ गए। इसके बाद पूरा परिवार घुप्प अँधेरे में छिप गया। महिला के अनुसार, मस्जिद से घोषणा हुई – “कश्मीर की आज़ादी ज़िंदाबाद! हमें पूरे कश्मीर से हिन्दुओं को मिटा देना है।”

कश्मीरी पंडित महिला ने उस समय की दास्ताँ सुनाते हुए कहा कि तब मस्जिद से ये घोषणा भी की गई थी कि हम हमारी जमीन पर हिन्दुओं को नहीं रहने देंगे, उन्हें जाना होगा और अपनी महिलाओं को हमारे लिए छोड़ना होगा। महिला के अनुसार, तभी ‘भारत की मौत’ और ‘काफिरों की मौत’ का नारा लगाते हुए भीड़ सड़कों पर उतर आई और उनके चाचा ने कहा – कोई नहीं बचेगा। तभी लोगों को अचानक से एहसास हुआ कि वो अपने ही प्रदेश में अल्पसंख्यक बना दिए गए हैं।

महिला ने अपने अनुभव साझा करते हुए याद किया कि जब उन्हें लग रहा था कि पहले ही निकल जाना चाहिए था, परिवार के कुछ लोगों को भरोसा था कि कुछ नहीं होगा, क्योंकि हम ‘उनके’ साथ कई वर्षों से रह रहे हैं। लेकिन, इसके बाद उनके घर के सामने स्थित भैरव मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। दीवारों पर लिख दिया गया कि कोई यहाँ रहना चाहता है तो उसे मुस्लिम बनना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि तब घर की महिलाएँ सिंदूर मिटा कर बाहर जाती थीं और पुरुषों ने डर के मारे जनेऊ पहनना बंद कर दिया था।

महिला ने बताया, “इसके बाद शिवरात्रि पर एक युवा बैंक कर्मचारी को सैकड़ों लोगों के सामने मार डाला गया। लोगों ने बताया कि अंतिम साँस तक भीड़ उसे पीटती रही और उसके शरीर के ऊपर पेशाब भी किया गया। मेरे चाचा चंडीगढ़ जाने को कहने लगे, लेकिन मेरे पिता ने कहा कि ये हमारा घर है और हम इसे क्यों छोड़ें। किसी तरह चाचा मुझे, माँ और चाची को लेकर चंडीगढ़ पहुँचे। मैंने बैग पैक करते हुए जब पूछा कि हम वापस कब आएँगे, तब उन्होंने कहा कि शायद कभी नहीं।”

महिला ने बताया कि उन्हें उस समय का बस इतना ही दृश्य याद है कि वो लोग टैक्सी से निकल रहे थे और उनके पिता एक मजबूर व्यक्ति की तरह हाथ हिला कर विदा कर रहे थे। उन्होंने लिखा, “जैसे ही रात के अँधेरे में टैक्सी गुम हुआ, हमने उसके बाद से कभी पिताजी को नहीं देखा।” सोशल मीडिया पर इस दुःख भरी कहानी को सुन कर लोग उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। हालाँकि, कई इस्लामी कट्टरपंथियों को ये बनी-बनाई कहानी लग रही है।

आमिर खान पर FIR: फेसबुक पर CM योगी आदित्यनाथ और BSP प्रमुख मायावती को लेकर किया अपमानजनक पोस्ट

उत्तर प्रदेश की जेवर पुलिस ने मंगलवार (15 मार्च, 2022) को आमिर खान नाम के शख्स खिलाफ FIR दर्ज की। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, युवक पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती की मॉर्फ्ड तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट करने का आरोप है। आमिर खान पर आईपीसी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अमर उजाला ने बताया है कि आमिर खान द्वारा फेसबुक पर पोस्ट की गई मॉर्फ्ड तस्वीर के वायरल होने के बाद इस मामले का खुलासा हुआ। एक शिकायतकर्ता ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए उत्तर प्रदेश पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने संज्ञान लिया और जाँच शुरू की। इसके तुरंत बाद, आमिर खान के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, जेवर के दयानतपुर गाँव के रहने वाले आमिर खान ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक फोटो अपलोड की थी, जिसमें उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और पूर्व सीएम मायावती को दूल्हा-दुल्हन के रूप में दिखाया गया था। मॉर्फ्ड इमेज में आपत्तिजनक कैप्शन भी था। शिकायतकर्ता ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी और उत्तर प्रदेश पुलिस से आरोपितों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया। ट्वीट के आधार पर जाँच शुरू की गई और पुलिस द्वारा सूचना को प्रमाणित करने के बाद आमिर खान के खिलाफ आईटी अधिनियम के तहत FIR दर्ज की गई।

गौरतलब है कि इससे पहले 20 फरवरी, 2020 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने फेसबुक पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने के आरोप में ग्रेटर नोएडा के एक व्यापारी चाँद कुरैशी को गिरफ्तार किया था। कुरैशी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 504 के तहत मामला दर्ज किया गया था। स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद ये गिरफ्तारी की गई थी।

इसी तरह, पिछले साल नवंबर में सोशल मीडिया ट्रोल प्रशांत कनौजिया को हिंदू देवताओं और सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक पोस्ट करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले, जून 2019 में, एक स्क्रैप डीलर और गोला निवासी पीर मोहम्मद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बारे में सोशल मीडिया पर ‘आपत्तिजनक पोस्ट’ शेयर किया था।

‘अदालत ने मुस्लिम औरतों के कपड़े उतार दिए’: बुर्के पर फैसला इस्लामी कट्टरपंथियों को नहीं कबूल, लिखा- ‘सारे कुत्ते हमारे खिलाफ हो रहे’

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुर्का मामले पर सुनाए गए अपने फैसले में कहा है कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य प्रथा नहीं है और शैक्षणिक संस्थानों में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। हालाँकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस दौरान ये भी कहा कि क्लासरूम से बाहर महिलाएँ क्या पहनती हैं, ये उनका अधिकार है और इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में ड्रेस कोड सबको बराबर दिखाने के लिए होता है और इसका पालन होना चाहिए।

लेकिन, केंद्र सरकार और हिन्दुओं को भला-बुरा कहने वाला कट्टरवादी इस्लामी गिरोह को न्यायपालिका का ये फैसला पसंद नहीं आया और उन्होंने इसके खिलाफ भी बयानबाजी शुरू कर दी। बुर्का पक्ष ने अब सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। वहीं कर्नाटक सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया है। कर्नाटक के अटॉर्नी जनरल ने कहा कि संस्थागत अनुशासन को व्यक्तिगत चॉइस के ऊपर महत्ता मिली है, जिससे अनुच्छेद-25 को समझने में नया मोड़ आया है।

खुद को ‘मुस्लिम’ और भाषा-विज्ञान में पोस्टग्रेजुएट बताने वाली आफरीन फातिमा ने इस फैसले का विरोध करते हुए ट्विटर पर लिखा, “कर्नाटक उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से सीमाएँ लाँघी है और इस्लाम में क्या ज़रूरी है, क्या नहीं – ये सब तय कर के उसने अपने अधिकार से ज्यादा बातें की हैं। ये अस्वीकार्य है।”

‘मुस्लिम एक्टिविस्ट’ और ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी’ में इतिहास की छात्रा आयशा रेना ने लिखा, “सोचिए कि इस फैसले के बाद मुस्लिम महिलाओं का कैसे अमानवीकरण किया जाएगा और उन्हें गालियाँ दी जाएँगी। हमलोग इसके खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।”

उमर सोफी नाम की मुस्लिम महिला ने लिखा, “इसे जरा फिर से पढ़िए। मुस्लिम महिलाओं के लिए जज मिस्टर अवस्थी ने इसका निर्णय लिया कि इस्लाम में हिजाब अनिवार्य है या नहीं।” साथ ही उन्होंने ‘हिजाब विवाद’ का टैग भी लगाया। उन्हें लोगों ने याद दिलाया कि पैनल में एक मुस्लिम जज (जस्टिस जेएम काजी) भी थीं और उन्होंने भी यही फैसला दिया।

अब बात करते हैं मीडिया पोर्टल ‘The Wire’ की सीनियर एडिटर आरफा खानुम शेरवानी की, जिन्होंने लिखा, “भारत में एकमात्र ‘अनिवार्य’ चीज अब बहुसंख्यकवाद ही है। अब बहुसंख्यक ही तय करेंगे कि अल्पसंख्यक कैसे रहें। अब इस पर कानूनी ठप्पा भी लग गया।”

जावेद हुसैन नाम यूजर ने आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा, “अब सारे कुत्ते हमारे खिलाफ हो रहे हैं।”

खुद को मुस्लिम और मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले आसिफ जीएम ने इसे अदालत की जगह ‘RSS का फैसला’ करार दिया।

AIMIM से जुड़े मुबाशिर ने लिखा, “वाह! एक धर्मनिरपेक्ष अदालत ने इस्लाम में हिजाब के अनिवार्य न होने का फतवा जारी किया। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मुस्लिम महिलाओं के कपड़े उतार दिए। इससे वो सभी नंगी महिलाएँ खुश होंगी, जिनके मुस्लिम नाम हैं। ये कहने के लिए क्षमा कीजिए, लेकिन भारतीय न्यायपालिका में मेरा कोई भरोसा नहीं बचा है। “

बता दें कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि हिजाब सिर्फ एक वस्त्र नहीं है, बल्कि महिलाओं का अधिकार है कि वो क्या चुनती हैं। इसी तरह AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जजमेंट से असहमत होने का उन्हें अधिकार है और उन्हें आशा है कि याचिकाकर्ता अब सुप्रीम कोर्ट जाएँगे। कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस पर भी दुःख जताया था कि किस तरह हिजाब को मुद्दा बना कर शांति भंग करने की कोशिश की गई।

कुमकुम-अहमद-लश्कर… टोटल 6 को NIA ने पकड़ा: रोहिंग्या मुस्लिमों की करवाते थे घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज बनाकर देश भर में बसाते थे

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने रोहिंग्या मुस्लिमों (Rohingya Muslims) की घुसपैठ कराने वाले एक गिरोह के 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 4 असम के कछार जिले से हैं। एसपी रमनदीप कौर ने बताया कि NIA ने 11 मार्च को इनलोगों को पकड़ा। ये लोग जिस गिरोह का हिस्सा हैं वह असम, पश्चिम बंगाल, मेघालय समेत देश के दूसरे सीमावर्ती राज्यों में सक्रिय है। रोहिंग्या मुस्लिमों को अवैध रूप से सीमा पार करवाने के बाद यह गिरोह उनका फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें देश में बसाता था।

NIA ने मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए इस सिलसिले में असम, मेघालय और कर्नाटक में कई स्थानों पर तलाशी की जानकारी दी है। NIA ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 370 और 370 (ए) के तहत इनके खिलाफ मामला दर्ज किया है।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने जानकारी दी है कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड कुमकुम अहमद चौधरी उर्फ केके अहमद चौधरी उर्फ असिकुल अहमद है। वह बेंगलुरु से इस गिरोह को संचालित कर रहा था। इस रैकेट के सदस्य देश के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं। जाँच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में कुमकुम अहमद भी शामिल है। कुमकुम के अलावा सहालम लश्कर, अहिया अहमद चौधरी, बापन अहमद चौधरी, जमालुद्दीन अहमद चौधरी और वानबियांग सुटिंग को गिरफ्तार किया गया है। NIA ने बताया कि तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज, आर्टिकल और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने 2021 में असम के करीमगंज जिले के बदरपुर रेलवे स्टेशन से 15 अवैध रोहिंग्या घुसपैठिये को हिरासत में लिया था, जिनमें 6 नाबालिग और 3 महिलाएँ शामिल थी। उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं थे और वे अवैध रूप में भारत में दाखिल हुए थे।

मंदिर तोड़े, देवी-देवताओं की मूर्ति खंडित की… जिनको दुनिया कहती ‘सूफी संत’, उनकी शह पर केरल से कश्मीर तक हिंदुओं का नरसंहार

90 के दशक में कश्मीरी पंडितों पर जो कुछ बीता उसे द कश्मीर फाइल्स फिल्म ने एक बार फिर से चर्चा में ला दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वो इस्लामी कट्टरता जिसमें सैंकड़ों हिंदू, घाटी में जले उसका बीज 90 के दशक या उसके आसपास नहीं बोया गया था। ये बीज पड़ा था 14 वीं शताब्दी में जिसमें सूफी संतों की बड़ी भूमिका थी। इन्हीं सूफी संतों ने 14वीं शताब्दी में घाटी में राज करने वाले शाहमीर वंश के क्रूर शासकों को इस्लामी पाठ सिखाया था और इन्हीं सूफियों ने केरल के मोपला हिंदू नरसंहार में भी महत्तपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा अजमेर के प्रसिद्ध सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के बारे में भी कहा जाता है कि उनके शागिर्द हिंदुओं के पवित्र स्थल पर गाये कटवाने का काम करते थे।

कश्मीर में सूफी-संतों से फैली कट्टरता

राहुल रोशन की किताब- ‘संघी हू नेवर वेंट टू शाखा’ के अनुसार, कश्मीर का बर्बतापूर्ण इस्लामीकऱण शाहमीर वंश के राज के दौरान हुआ जिन्होंने यहाँ अपने मार्गदर्शन के लिए सूफियों को बसाया। इस वंश के छठे सुल्तान सिकंदर बुतशिकन (1389 से 1413) के काल में तो हिंदुओं पर अत्याचार की हर सीमा लांघ दी गई। तब, सूफियों से मिली सीख पर ही राज्य नीतियाँ निर्धारित होने लगीं। इन नीतियों में हिंदुओं के मंदिर की तोड़फोड़, उनके निर्माण पर प्रतिबंध आदि लगा दिया गया। खुले तौर पर हिंदुओं को दोयम दर्जे का माना जाने लगा, उनसे इस्लाम कबुलवाना और न कबूलने पर उन्हें मारना, सब सामान्य हो गया। कहीं से कहीं तक कश्मीर की धरती को ऋषि मुनियों की पवित्र भूमि के तौर पर नहीं रहने दिया गया और सूफियों की देख-रेख में वहाँ कश्मीरियत ने जन्म लिया।

साभार: संघी- हू नेवर वेंट टू शाखा

सूफियों की देखरेख में हुआ था पहला कश्मीरी पंडितों का नरसंहार और पलायन

बताया जाता है कि बुतशिकन पहले ही एक क्रूर शासक था और जब उसे सूफी-संतों का साथ मिला तो हिंदुओं पर उसके अत्याचार और भी बढ़ गए। उसने मुस्लिमों की तादाद बढ़ाने के लिए अंतर धार्मिक विवाह को बढ़ावा दिया। हिंदुओं को तिलक लगाने से रोका। उनके मंदिरों में तोड़फोड़ की, देवी-देवताओं की मूर्ति को खंडित किया।

मौजूदा जानकारी बताती है कि कश्मीर में कट्टरता को बढ़ावा देने वाला शाहमीर राजवंश सैयद मीर अली हमदानी से प्रभावित था जो अन्य सूफी संतों के साथ पूरे कश्मीर के इस्लामीकरण में जुटा था। उसी ने कश्मीर में हिंदुओं के नरसंहार की बात कही थी। बाद में उसके बेटे मीर मोहम्मद हमदानी ने उसके नक्शेकदम पर चलते हुए सिकंदर बुतशिकन को कश्मीर से हिंदुओं के सफाए पर सीख दी और शुरू हुआ हर मंदिर और उसमें स्थापित देवी-देवताओं का मूर्ति को तोड़े जाने का घिनौना खेल।

हम लोगों को लगता है कि 90 के समय में पहली बार कश्मीर से हिंदुओं का पलायन हुआ। मगर हकीकत है कि सिकंदर के राज में भी तमाम कश्मीरी हिंदुओं ने कश्मीर को छोड़ दिया था। वहीं कई इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे और कुछ को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था। जो ज्यादा भयभीत हुए उन्होंने खुद जहर खा लिया। पंडित जो जनेऊ पहनते थे उन्हें परिवर्तित होने या फिर मरने की धमकी दी गई। जब पंडित नहीं माने तो बर्बरता से मौत के घाट उतारा गया और उनके जनेऊ जलाकर उनकी पुस्तकों को डल झील में फेंक दिया गया। कहते हैं कि उस दौरान करीब 1 लाख से अधिक लोग डल झील मे डूबे थे जिन्हें श्रीनगर के रैनावारी में जला दिया गया था। आज वो जगह कश्मीर में भट्टा मजार कहलाती है।

केरल में हुए नरसंहार के पीछे सूफी कनेक्शन

कश्मीर पहली जगह नहीं है जहाँ पर इस्लामी कट्टरता के पीछे सूफी संतों का हाथ देखने को मिलता है। 1921 में जो केरल में नरसंहार हुआ था वो भी इसी विचारों का परिणाम था। उस समय भी हजारों हिंदू मारे गए थे, कई परिवर्तित हुए थे। राहुल रोशन की किताब बताती है कि उस नरसंहार के पीछे भी सूफी अली मुसलीयार का ही हाथ था।

संघी- हू नेवर वेंट टू शाखा

अजमेर के सूफी संत

इसके अलावा अगर आप इतिहासकार एमए खान की पुस्तक ‘इस्लामिक जिहाद: एक जबरन धर्मांतरण, साम्राज्यवाद और दासता की विरासत’ पढ़ते हैं तो वहाँ आपको प्रसिद्ध सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती के बारे में पढ़ने को मिलेगा जिन्हें आज हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के नाम से बुलाया जाता है।

मोइनुद्दीन चिश्ती

किताब में मोइनुद्दीन चिश्ती, निज़ामुद्दीन औलिया, नसीरुद्दीन चिराग और शाह जलाल जैसे सूफी संतों का उल्लेख है। इस पुस्तक में इस बात का भी जिक्र किया है गया है कि वास्तव में, हिंदुओं के उत्पीड़न का विरोध करने की बात तो दूर, इन सूफी संतों ने बलपूर्वक हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। यही नहीं, ‘सूफी संत’ मोइनुद्दीन चिश्ती के शागिर्दों ने हिंदू रानियों का अपहरण किया और उन्हें मोईनुद्दीन चिश्ती को उपहार के रूप में प्रस्तुत किया। इसी प्रकार सूफियों के अनुयायियों द्वारा हिंदुओं के पावन स्थलों पर गायों का कत्ल करवाने की बात और उन्हें खाने की बात भी पुराने लेखों में पढ़ने को मिलती हैं।

एमए खान की पुस्तक का अंश

आज के हिंदुओं का सूफी-संतों से प्यार

अब हैरानी इस बात की है कि जिन सूफी संतों ने हिंदू समाज और उनकी संस्कृति पर इतने अत्याचार किए, उनके ख़िलाफ़ अपने शासकों को भड़काया, जिहाद जैसे षड्यंत्र रचे, उनके पावन स्थलों को अपवित्र किया…उन्हें आज हिंदू इतना शांतिपूर्ण कैसे मानते हैं कि उनकी दरगाह पर जितनी भीड़ मुस्लिमों की होती है उतने ही हिंदू भी वहाँ जाते हैं…तो बता दें कि शांतिपूर्ण सूफीवाद का कॉन्सेप्ट सदियों से वामपंथी इतिहासकारों द्वारा फैलाया गया और यही पढ़कर बढ़े हुए हिंदू अपने इतिहास, अपने पूर्वजों के साथ हुआ बर्बता से अनभिज्ञ हैं। इन हिंदुओं को कश्मीर से लेकर केरल तक में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा प्रिय है, लेकिन दूसरे पक्ष को सिर्फ अपना मजहब जिसके नाम पर सैंकड़ों हिंदुओं को मारा गया। आज भले ही सूफीवाद को आप एक मधुर संगीत या वामपंथी तथ्यों से परखते हों, लेकिन इसका एक पक्ष ये भी जो आपको लेख में बताया गया।

4000 Kg बारूद और 9 सेकेंड: जानिए नोएडा में कैसे ध्वस्त किए जाएँगे 40 मंजिल के दो टावर, 30 मिनट तक एक्सप्रेसवे भी रहेगा बंद

उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर 93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट सोसायटी में बने ट्विन टावर को ध्वस्त करने की तैयारियाँ तेजी से चल रही है। विस्फोट के जरिए दोनों टावर को महज 9 सेकेंड में ध्वस्त कर दिया जाएगा। इसके लिए 4000 किलो बारूद इस्तेमाल किया जाएगा। 22 मई 2022 को टावर को ध्वस्त करने की योजना है। करीब 100 मीटर दूर से रिमोट दबाकर ब्लास्ट किया जाएगा। 

टावर के ध्वस्त होते ही करीब 10 मिनट तक आसपास के करीब 30 मीटर एरिया तक धूल उड़ने का अनुमान है। इसे रोकने के लिए बड़े स्तर पर पानी से छिड़काव किया जाएगा। इस दौरान आसपास की तीन अन्य सोसायटी में रहने वाले लोगों को करीब 5 घंटे तक अपने घरों से बाहर रहना होगा।

रिपोर्ट के अनुसार दोनों टावर को गिराने का काम एडिफिस इंजीनियरिंग को दी गई है। एजेंसी के हेड उत्कर्ष मेहता के अनुसार इस दौरान आसपास के फ्लैटों को कोई नुकसान नहीं होगा। फिर भी एहतियातन इनका बीमा कराया जा रहा है। फिलहाल दोनों टावर में विस्फोटक लगाने का काम चल रहा है।

आधे घंटे तक बंद रहेगा एक्सप्रेसवे

ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के दौरान करीब 30 मिनट तक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वाहनों के लिए बंद रहेगा। अभी तक देश में इतने ऊँचे टावर कहीं भी ध्वस्त नहीं किए गए हैं। ये 102 मीटर ऊँचे टावर हैं। अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे तक विस्फोट के दौरान कोई भी निर्माण सामग्री नहीं पहुँचेगी, लेकिन एतिहयात के तौर पर इसे बंद रखा जाएगा। इसकी वजह यह है कि ध्वस्तीकरण वाले दिन काफी लोग इसको देखने के लिए इच्छुक रहेंगे। ऐसे में वह एक्सप्रेसवे टावर के सामने वाहनों को खड़ा कर सकते हैं। इससे हादसे हो सकते हैं। 

ट्विन टावर को गिराने से पहले ट्रायल ब्लास्ट होगा

ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण से पहले ट्रायल ब्लास्ट होगा। ट्रायल ट्विन टावर में ही होगा। ट्रायल में कंक्रीट के स्ट्रक्चर बनाकर उसमें विस्फोटक भरे जाएँगे। यह ट्रायल इस महीने के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह में होगा। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रायल के जरिए तैयारियाँ परखी जाएँगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इस टावर को गिराने का आदेश दिया था। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें इन बिल्डिंग्स को अवैध करार दिया गया था। कोर्ट ने इसे मिलीभगत का परिणाम बताते हुए अपनी लागत पर तोड़ने का आदेश दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुपरटेक ट्विन टावर से जुड़े मामले में नोएडा प्राधिकरण के अतिरिक्त सभी आरोपित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया था।

क्यों गिराए जा रहे टावर

सुपरटेक की दोनों बिल्डिंग्स नोएडा सेक्टर 93 यानी एक्सप्रेस-वे की तरफ स्थित हैं। इनका नाम है- एमरल्ड कोर्ट ट्विन टावर्स। जानकारी के मुताबिक इन टावर्स में 950 से ज्यादा फ्लैट हैं और एक टॉवर 40 मंजिल का है। इनमें सैकड़ों फ्लैट बुक हो चुके थे। बता दें कि ये एक अवैध कंस्ट्रक्शन था, इसलिए टावर्स को तोड़ने के आदेश  दिए गए। ये कंस्ट्रक्शन सुपरटेक बिल्डर और नोएडा अथॉरिटी की मिलीभगत से किया गया था। दरअसल, जिस जमीन पर दोनों टावर बने हैं, वो जगह एक पार्क बनाने के लिए थी। हालाँकि, जमीन सुपरटेक की ही थी लेकिन उसने पार्क वाली जगह पर अवैध तरीके से दो टावर बना दिए।

हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं, स्कूल यूनिफॉर्म पहनने से नहीं कर सकते इनकार: कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला

कर्नाटक के पीयू कॉलेज से शुरू हुए हिजाब विवाद मामले पर आज (15 मार्च 2022) हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उन तमाम याचिकाओं को खारिज कर दिया जो शैक्षिणक संस्थानों में हिजाब पहनने की माँग को लेकर दायर की गई थीं। कोर्ट ने अपना फैसला लेते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम में कोई अनिवार्य चीज नहीं है। इसलिए सरकार के 5 फरवरी वाले आदेश को अमान्य करने का कोई मामला नहीं बनता है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले पर फरवरी माह में पूरे 11 दिन तक सुनवाई हुई थी। इसके बाद 25 फरवरी को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जेएम खाजी की पीठ ने की थी। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने स्कूल-कॉलेजों में सिर ढँकने की इजाजत की माँग की थी। वहीं राज्य की ओर से ड्रेस कोड का पालन करने की बात कही गई थी।

अब इसी मामले पर पीठ ने अपना फैसला सुनाया है। इसी के साथ 21 मार्च तक कर्नाटक की कई जगहों पर धारा 144 लगाई गई है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म का सुझाव एक उचित प्रतिबंध है जिस पर आपत्ति नहीं कर सकते हैं।

क्या था पूरा मामला

याद दिला दें कि पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने भी इस संबंध में 5 फरवरी को आदेश दिए थे। सरकार के आदेश में छात्र-छात्राओं को ड्रेस कोड का पालन करने की बात कही गई थी।

चल रहा था कबड्डी का मैच, कार से आए 4 लोगों ने इंटरनेशनल प्लेयर को गोलियों से भूना: पंजाब के जालंधर की घटना, हमले का Video वायरल

पंजाब के जालंधर में इंटरनेशनल कबड्डी प्लेयर संदीप नंगल अंबिया की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सोमवार (15 मार्च 2022) को मैच के दौरान संदीप पर हमला हुआ। उन्होंने अस्पताल के रास्ते में ही दम तोड़ दिया। जालंधर के SSP सतिंदर सिंह ने बताया है कि मैच के दौरान कार में सवार होकर आए चार लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। FIR दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है। हमलावर कौन थे और संदीप पर हमले के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार जालंधर में सोमवार शाम कबड्डी मुकाबला खेला जा रहा था। अचानक अंधाधुंध गोलियाँ चलनी शुरू हो गई। फायरिंग के दौरान संदीप नंगल को कई गोलियाँ लगी, जिसके बाद मौके पर भगदड़ मच गई। इलाके में तनाव न फैले इसको लेकर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

जिस कबड्डी प्रतियोगिता के दौरान हमला हुआ वह शाहकोट के मल्लियाँ कलाँ गाँव में चल रही थी। इस घटना से संबंधित एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि हमलावर दूर से ही संदीप पर गोलियाँ चला रहे हैं और वहाँ मौजूद लोग इधर-उधर भाग रहे हैं। बताया जा रहा है कि संदीप पर करीब 20 राउंड फायरिंग की गई। संदीप स्टॉपर पॉजिशन में खेलते थे। उन्होंने पंजाब के अलावा कनाडा, यूएसए, यूके में काफी अच्छा प्रदर्शन किया।

खेले मसाने में होरी दिगंबर… : काशी में महाश्मशान मणिकर्णिका पर खेली जाती है चिता-भस्म की अनोखी होली, तारक मन्त्र देने आते हैं महादेव

बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी (Kashi) में देवस्थान और महाश्मसान का महत्व एक जैसा है। जहाँ जन्म और मृत्यु दोनों मंगल है। ऐसी अलबेली अविनाशी काशी में खेली जाती है दुनियाभर में सबसे अनूठी जलती चिता की राख और भस्म से होली। महाश्मशान मणिकर्णिका पर बाबा मसान नाथ के चरणों में चिता की राख समर्पित कर फाग और राग-विराग दोनों का ही उत्सव आरम्भ हो जाता है। पूरा दृश्य ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि जैसे भूतभावन महादेव स्वयं वहाँ अपने गणों के साथ प्रकट हो गए हों।

हर वर्ष रंगभरी एकादशी के अगले दिन महाश्मशान मणिकर्णिका पर चिता भस्म की होली होती है। लेकिन माहौल बनाने के लिए रंगभरी एकादशी के दिन भी हरिश्चंद्र घाट के श्मशान पर चिता की राख से होली खेलकर काशी में चिता-भस्म की होली की शुरुआत हो जाती है। इसी दिन से बनारस में रंग-गुलाल खेलने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता है जो लगातार छह दिनों तक चलता है।

इस वर्ष रंगभरी एकादशी सोमवार (14 मार्च, 2022) को थी और महाश्मशान की होली आज यानि मंगलवार (15 मार्च, 2022) को है। यहाँ बता दें कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी कहा जाता है।

पौराणिक मान्यता

काशी में मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के साथ होली खेलने और उत्सव मनाने के लिए भूत-प्रेत, पिशाच, चुड़ैल, डाकिनी-शाकिनी, औघड़, सन्यासी, अघोरी, कपालिक, शैव-शाक्त सब आते हैं।

ये वो लोग हैं जो रंगभरी एकादशी में शामिल नहीं होते हैं। महादेव शिव अपने ससुराल पक्ष के निवेदन पर अपने गणों को जब माता पार्वती का गौना लेने जाते हैं तो बाहर ही रोक देते हैं। क्योंकि, जो हाल महाशिवरात्रि पर शिव के विवाह में हुआ था वही अराजकता दोबारा पैदा न हो जाए। इसलिए अगले दिन मिलने का वादा करके सबको महाश्मशान बुला लेते है जिनको गौना में बुलाने पर उपद्रव तय था।

देश-विदेश से पहुँचते हैं बाबा के भक्त निभाई जाती है लौकिक परंपरा

काशी की आदिकाल से चली आ रही यह परंपरा उसे अविमुक्त क्षेत्र बनाती है। जहाँ आम से लेकर खास तक, संत से लेकर सन्यासी तक चिता भस्म को विभूति मानकर माथे पर रमाए भाँग-बूटी छाने होली खेलते हैं। ऐसे में राग-विराग की नगरी काशी की प्राचीन काल से चली आ रही परम्पराएँ भी निराली हैं। जहाँ रंगभरी एकादशी पर महादेव काशी विश्वनाथ अड़भंगी बारात के साथ माता पार्वती का गौना कराकर ले जाते हैं तो वहीं दूसरे दिन बाबा अप्पने वादे के अनुसार गणों के साथ उत्सव मनाने महाश्मशान मणिकर्णिका भी जाते हैं। जहाँ चिता भस्म के साथ ये होली खेली जाती है।

परंपराओं के अनुसार भगवान शिव के स्वरूप बाबा मशान नाथ की पूजा कर महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर उनके गण जलती चिताओं के बीच गुलाल की जगह चिता-भस्म की राख से होली खेलते हैं। हर वर्ष काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति द्वारा बाबा कीनाराम स्थल रवींद्रपुरी से बाबा मसान नाथ की परंपरागत ऐतिहासिक शोभायात्रा निकाली जाती है।

लौकिक परंपरा की बात करें तो मणिकर्णिका पर जहाँ अनवरत चिताएँ जलती रहती हैं वहाँ पारम्परिक चिता भस्म की होली खेलने न केवल देश के कोने-कोने से साधक और शिव भक्त आते हैं बल्कि विदेशों से भी लोग पहुँचते हैं।

वहीं इस सनातनी परंपरा का निर्वाह करते हुए आज भी काशी में हर वर्ष रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है। वे दूल्हे के रूप में सजाए जाते हैं। फिर विधिपूर्व​क हर्षोल्लास से बाबा विश्वनाथ के संग माता गौरा का गौना कराया जाता है। पूरी परंपरा का बनारस में विधिवत पालन होता है।

काशीवासी आज भी बाराती, भक्त तो शिव के गण बनते हैं। महाशिवरात्रि पर जो गण बाराती बनकर शिव विवाह में शामिल हुए थे वही अब बाबा की पालकी लेकर गौना कराने निकलते हैं। माँ गौरी की विदाई कराकर शिव जब काशी विश्वनाथ मंदिर की तरफ प्रस्थान करते हैं तो काशी में शिव के गण बने शिव-भक्त रंग-गुलाल उड़ाते हुए साथ चलते हैं।

बनारस में कहा जाता है कि महादेव कितनी भी मस्ती में क्यों न हों लेकिन अपने दृश्य-अदृश्य उन गणों को उत्सव में बिसरा दें यह हो नहीं सकता। वे गण जो थोड़े डरावने हैं। वही जो बिना बुलाए जब शिव बारात में सब चलें गए तो द्वारचार में माँ गौरा की माँ मैना देवी ऐसी बारात और बारातियों को देखकर बेहोश हो गई थीं। इसलिए, कहा जाता है कि गौना में ऐसे भूत-पिचास, अदृश्य आत्माएँ थोड़ी दूरी बना लेती हैं ताकि सब सकुशल संपन्न हो जाए।

काशी की संगीत परंपरा में घुला है अड़भंगीपन और होलियाना मिजाज

काशी की संगीत परंपरा पर बात करते हुए पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित छन्नूलाल मिश्र बताते हैं कि बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी है। दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता भस्म की होली होती है। घाट से लेकर गलियों तक होली के हुड़दंग का हर रंग अद्भुत होता है। महादेव की नगरी काशी की होली भी अड़भंगी शिव की तरह ही निराली है।

वह कुछ याद करते हुए गुनगुनाने लगते हैं-

“खेले मसाने में होरी दिगंबर, खेले मसाने में होरी, भूत पिशाच बटोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…। वह कहते हैं कि लखि सुंदर फागुनी छटा के, मन से रंग-गुलाल हटा के चिता भस्म भर झोरी… दिगंबर खेले मसाने में होरी…।”

आखिर ऐसा दृश्य कहाँ देखने को मिलेगा कि भगवान शिव के गण अपने झोली में चिता भस्म की राख भरकर मन भर होली खेलकर तृप्त हो जाते हों। उनका कहना है कि काशी की होली में राग और विराग दोनों नजर आते हैं।

पंडित छन्नूलाल मिश्र ठहरकर कुछ समझाते हुए आगे गुनगुनाते लगते हैं-

“गोप न गोपी श्याम न राधा, ना कोई रोक ना कवनो बाधा, ना साजन ना गोरी दिगंबर खेले मसाने में होरी…।”

भावविभोर हो वह कह उठते हैं कि शिव की नगरी काशी की होली की बात ही निराली है। जब महादेव महाश्मशान में उतरते हैं तो-

“भूतनाथ की मंगल-होरी, देखि सिहाएं बिरिज के गोरी, धन-धन नाथ अघोरी… दिगंबर खेलैं मसाने में होरी।”

काशी में महादेव स्वयं देते हैं तारक मन्त्र

परंपराओं के अनुसार, आज भी महाश्मशान मणिकर्णिका पर, भगवान शिव के स्‍वरुप बाबा मशाननाथ की पूजा कर श्‍मशान घाट पर चिता भस्‍म से उनके गण होली खेलते हैं। कहते शैव-शाक्त, अघोरी से लेकर तमाम महादेव के भक्त-गण इस अवसर का साक्षी होने के लिए कई जन्मों तक प्रतीक्षा करते हैं। कहा तो यह भी जाता है जब तक महादेव न बुलाएँ तब तक किसी को ऐसा सौभाग्य नहीं मिलता कि वह स्वयं काशी में महादेव संग होली खेलने का पुण्य अवसर प्राप्त करे।

काशी मोक्ष की नगरी है और दूसरी मान्‍यता यह भी है कि यहाँ भगवान शिव स्‍वयं तारक मंत्र देते हैं। लिहाजा यहाँ पर मृत्‍यु भी उत्‍सव है और होली पर चिता की भस्‍म को उनके गण अबीर और गुलाल की भाँति एक दूसरे पर फेंककर सुख-समृद्धि-वैभव संग शिव की कृपा पाने का उपक्रम भी करते हैं।

बुढ़वा मंगल तक चलती है होली

चलते-चलते अब आपको यह भी बता दूँ कि होली बनारस और बिहार के गया में बुढ़वा मंगल तक चलता है। होली के बाद आने वाले मंगलवार को काशीवासी बुढ़वा मंगल या वृद्ध अंगारक पर्व भी कहते हैं। काशी में होली जहाँ युवाओं के जोश का त्यौहार है तो बुढ़वा मंगल में बुजुर्गों का उत्साह भी दिखाई पड़ता है।

पंजाब भगवंत मान शपथग्रहण: सरकार बनने से पहले ही विज्ञापन पर ₹85 लाख खर्च, पार्किंग के लिए हटाई गई किसानों की 40 एकड़ फसल

पंजाब में AAP की सरकार बनने से पहले ही उस पर सरकारी खजाने से विज्ञापनों के लिए 85 लाख रुपए लुटाने के आरोप लगे हैं। साथ ही आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने जा रहे भगवंत मान के शपथग्रहण समारोह के लिए भी 40 एकड़ गेहूँ के खेत खाली कराए जा रहे हैं। बता दें कि भगवंत मान ने शहीद भगत सिंह नगर के खटकर कलाँ गाँव में शपथग्रहण की योजना बनाई है। ये बलिदानी स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह का गाँव हैं।

यहीं पर पार्किंग के लिए जगह बनाने के लिए गाँव में 40 एकड़ की गेहूँ के खेत को बर्बाद कर दिया गया। गेहूँ काट कर हटाया गया और पूरे खेत को खाली कर दिया गया। इनमें से अधिकतर खेतों में फसल लहलहा रही है और वो हरी-हरी ही है। इस सम्बन्ध में नवाँशहर के डिप्टी कमिश्नर विशेष सारंगल ने कोई बयान नहीं दिया, लेकिन TOI ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि किसानों को 46,000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।

अधिकारी कह रहे हैं कि इससे ज्यादा खेतों को खाली नहीं किया जाएगा, लेकिन जिस स्तर पर भगवंत मान के शपथग्रहण के लिए तैयारियाँ हो रही हैं, ऐसा लग रहा है कि बड़ी संख्या में लोग वहाँ जुट रहे हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव ए वेणु प्रकाश ने तैयारियों का जायजा लेने के लिए शपथग्रहण स्थल का मुआयना किया। भगवंत मान ने उधर लोकसभा से इस्तीफा देते हुए कहा कि वो इस हाउस को मिस करेंगे, लेकिन उन पर अब और बड़ी जिम्मेदारी आ गई है।

टीवी विज्ञापनों को लेकर ‘आम आदमी पार्टी’ पर निशाना साधते हुए दिल्ली भाजपा के नेता कपिल मिश्रा ने कहा, “पंजाब के लोकल टीवी चैनलों को दो दिन में लगभग एक करोड़ के विज्ञापन। सरकार के शपथ ग्रहण के विज्ञापन – 66 सेकंड का विज्ञापन हर चैनल पर दिन में 30 बार। ये पंजाब की जनता के पैसे हैं। केजरीवाल मॉडल का आनंद लीजिए।” पंजाब के कॉन्ग्रेस और भाजपा के नेताओं ने भी अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लिया है।

इसी तरह पंजाब में पंजाब में गोहत्या का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। जहाँ एक तरफ होशियारपुर में 18 गायों के कटे हुए सिर मिले थे, वहीं दूसरी तरफ उसके एक दिन बाद ही जालंधर में 4 और गायों के सिर बरामद किए गए। जालंधर में मकसूदां थाने के अंतर्गत ये घटना हुई। इससे पहले होशियारपुर जिले में टांडा उड़मुड़ स्थित झाँस गाँव के एक रेलवे ट्रैक के पास गायों के 18 सिर बरामद किए गए थे। भगवंत मान ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए पुलिस को जाँच के निर्देश दिए थे।