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मुख़्तार अंसारी के धमकीबाज बेटे अब्बास पर कार्रवाई शुरू: भारी पड़ेगा ‘हिसाब-किताब’ वाला बयान, यूपी पुलिस ने लगाई कई धाराएँ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा को लेकर हिसाब-किताब लेने की बात करने वाला भड़काऊ भाषण देने के मामले में गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी पर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने अब अपने जाँच के दायरे को आगे बढ़ा दिया है। अब्बास के खिलाफ कुछ और धाराएँ भी लगाई गई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, अब्बास अंसारी मऊ की सदर सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। 3 मार्च 2022 को पहाड़पुरा मैदान में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव से उनकी बात हो गई है। सपा के चुनाव जीतते ही अगले 6 महीने के लिए सभी अधिकारियों का ट्रांसफर रोककर सभी के साथ हिसाब-किताब किया जाएगा। इस घटना के बाद अब्बास अंसारी पर एक्शन लेते हुए चुनाव आयोग ने 24 घंटे के लिए उनके चुनाव प्रचार पर न केवल रोक लगा दी, बल्कि उनके खिलाफ 171 एच और इंडियन पीनल कोड की धारा 506 के तहत केस दर्ज किया था।

पुलिस ने लगाई नई धाराएँ

हालाँकि, अब भाजपा की प्रदेश में दोबारा से पूर्ण बहुमत के साथ वापसी हो चुकी है तो पुलिस ने अब्बास के खिलाफ अपना शिकंजा कसते हुए उनके ऊपर नई धाराएँ लगा दी हैं। पुलिस ने 186 (सरकारी काम में बाधा), 189(लोक सेवक को धमकी), 153a (किसी वर्ग विशेष के खिलाफ बयान या अशांति का प्रयास) और 120 B (आपराधिक षड्यंत्र) को जोड़ा गया है।

गौरतलब है कि मऊ की सदर सीट मुख्तार अंसारी की परंपरागत सीट रही है और वो इस वक्त जेल में है। इस कारण उसका बेटा अब्बास अंसारी सदर सीट से चुनावी मैदान में थे। वो चुनाव भी जीते, लेकिन सरकार बीजेपी बनी। कानून व्यवस्था के मुद्दे पर योगी सरकार का सख्त रवैया उन्हें भारी पड़ सकता है।

ऐराकी ‘सूफी संत’ कहलाया, ललितादित्य भुला दिए गए: क्यों सबको देखनी चाहिए ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘आज़ादी’ के नारे की मिलेगी सच्चाई

विवेक अग्निहोत्री की नई फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ शुक्रवार (11 मार्च, 2022) को रिलीज हुई और इसने पहले ही दिन दुनिया भर में 4.55 करोड़ रुपए कमा कर सबको चौंका दिया। बॉलीवुड वाले कहते रहे हैं कि कंटेंट ड्रिवेन सिनेमा अच्छा नहीं कर सकती, लेकिन इस फिल्म ने उन धारणाओं को तोड़ दिया है। कश्मीरी पंडित अपनी व्यथा को फिल्म में प्रतिबिंबित होते देख रहे हैं। यहाँ हम आपको फिल्म की कहानी बताए बिना ही आपको बताएँगे कि मूवी कैसी बनी है।

ज्यादा तकनीकी शब्दावली में न पड़ते हुए मुद्दे पर आते हैं। रात के 12 बजे से लेकर 3 बजे तक के शो में मैंने इस फिल्म को देखा और बीच-बीच में सिनेमा हॉल में ‘जय श्री राम’ से लेकर ‘भारत माता की जय’ तक के नारे भी गूँजते रहे। फिल्म में कश्मीर में नब्बे के दशक में पंडितों के नरसंहार और इसके पीछे इस्लामी कट्टरपंथियों की क्रूरता को उभारा है और साथ ही इसे आज के परिदृश्य से जोड़ कर कॉलेज कैम्पस की दूषित राजनीति और व्यवस्था में वामपंथियों की भागीदारी को उकेरा गया है।

इस फिल्म में दर्शन कुमार ने एक ऐसे छात्र का किरदार निभाया है, जो वामपंथियों के प्रभाव वाले दिल्ली के एक बड़े विश्वविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ रहा होता है, जहाँ उसके दिमाग में अरुंधति रॉय टाइप की एक वामपंथी प्रोफेसर कचरा ठूँसते जाती है। वहीं दूसरी तरफ उसके दादा के किरदार में अनुपम खेर हैं, जिन्होंने कश्मीरी पंडित नरसंहार की विभीषिका झेलने वाले एक शिक्षक का किरदार अदा किया है।

उस छात्र में मन में चल रहा अंतर्द्वंद्व ही इस फिल्म की कहानी है और यही आज की वास्तविकता भी है। जिस ‘आज़ादी-आज़ादी’ का नारा लगा कर भारत के टुकड़े होने की बात की जाती है और बाद में मीडिया के सामने महिमामंडन के लिए इसे गरीबी और तथाकथित सामंतवाद से जोड़ दिया जाता है, वही ‘आज़ादी’ का नारा जम्मू कश्मीर में आतंकी भी लगाते हैं। नब्बे का दशक ऐसा था, जब कश्मीरी मुस्लिमों और आतंकियों का फर्क समाप्त हो गया था – ये फिल्म उसी कहानी को कहती है।

मेरे हिसाब से अनुपम खेर की पहली फिल्म ‘सारांश (1984)’ और ‘खोसला का घोंसला (2006)’ के बाद इसी लीग में ये उनका सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस है। फिल्म में एक दृश्य है, जहाँ मिथुन चक्रवर्ती (जिन्होंने एक IAS अधिकारी का किरदार निभाया है) दर्शन कुमार को उनके ब्रेनवॉश होने का एहसास दिलाते हैं और इस दृश्य को देख कर ऐसा लगता है जैसे संजीदगी से ऐसे किरदारों को निभाने में अमिताभ बच्चन के साथ-साथ उनका भी कोई तोड़ नहीं। दोनों ही 20वीं सदी के अलग-अलग दौर में बड़े सुपरस्टार्स रहे हैं।

आपको ‘नादिमार्ग नरसंहार’ याद है? उस दौरान 25 कश्मीरी पंडितों को खड़ा करा कर नजदीक से सबको न सिर्फ गोली मार दी गई थी, बल्कि उन सभी के मृत शरीर को भी क्षत-विक्षत कर के अपमानित किया गया था। 23 मार्च, 2003 को पुलवामा जिले के नादिमार्ग में हुई इस घटना में आतंकी भारतीय सेना की वर्दी पहन कर आ थे और 11 पुरुष, 11 महिलाएँ, एक लड़के और एक शिशु तक को मार डाला था। मृतकों में एक 65 वर्ष के बुजुर्ग थे तो एक 2 वर्ष का शिशु भी था।

7 लाख कश्मीरी पंडितों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा था, लेकिन हत्याओं, बलात्कार और क्रूरता के इस दौर को कमतर कर के दिखाया जाता है। विधु विनोद चोपड़ा की दोनों फिल्मों ‘मिशन कश्मीर (2000)’ और ‘शिकारा (2020)’ में इस मुद्दे पर बनाया गया, लेकिन दोनों में इस नरसंहार को अंजाम देने वालों को ही व्हाइटवॉश करने की कोशिश की गई। सवाल ये है कि जब हिटलर और नाजियों द्वारा अंजाम दिए गए ‘होलोकास्ट’ पर दर्जनों फ़िल्में बन सकती हैं और नाजियों को अत्याचारी और यहूदियों को पीड़ित दिखाते हुए सच्चाई बयाँ की जा सकती है, तो फिर भारत में क्यों नहीं?

दुनिया भर में इस तरह की हिंसा पर काफी फ़िल्में बनी हैं। रवांडा में हुए नरसंहार पर ‘100 Days (2001)’ से लेकर ’94 Terror (2018)’ तक एक दर्जन फ़िल्में बनीं। हिटलर द्वारा यहूदियों के नरसंहार पर तो ‘The Pianist (2002)’ और ‘Schindler’s List’ (1993) जैसी दर्जनों फ़िल्में बन चुकी हैं। कंबोडिया के वामपंथी खमेर साम्राज्य पर The Killing Fields (1984) तो ऑटोमोन साम्राज्य द्वारा अर्मेनिया में कत्लेआम पर Ararat (2002) और ‘The Cut (2014)’ जैसी फ़िल्में दुनिया को मिलीं।

लेकिन अफ़सोस कि मुगलों द्वारा किए गए हिन्दुओं के नरसंहार से लेकर कश्मीरी पंडितों तक की व्यथा पर कोई फिल्म नहीं बनी। महमूद गजनी से लेकर यासीन मलिक तक की करतूतों को उलटा छिपाया ही गया, न तो हमने इतिहास में पढ़ा और न ही बॉलीवुड ने सच दिखाने की जहमत उठाई। इस फिल्म को देखने के बाद आप जानना चाहेंगे कि मीर शम्सुद्दीन ऐराकी कौन था? कैसे जिसे ‘सूफी संत’ बताया जाता है, उसने सन् 1477 में जम्मू कश्मीर में आकर शिया आतंक की नींव रखी।

इस फिल्म के पीछे गहरा रिसर्च किया गया है और विवेक अग्निहोत्री ने एक बार सोशल मीडिया के माध्यम से बताया भी था कि कैसे मीर शम्सुद्दीन ऐराकी ने खुद अपनी आत्मकथा में लिखा है कि अगर कोई काफिर इस्लाम अपनाने से इनकार करता है तो सूफी लोग उसे रौंद डालेंगे और उसे ज़िंदा खा जाएँगे। कहा जाता है कि श्रीनगर सोनवार स्थित मंदिर में हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को उसने ध्वस्त किया था। पत्तन का शंकर गौरीश मंदिर हो या सुगंदेश मंदिर, उन्हें ऐराकी ने ही तबाह किया।

इस फिल्म को देखने के बाद एक आम आदमी पता लगाएगा कि ललितादित्य कौन थे। ललितादित्य मुक्तापीड के बारे में जम्मू कश्मीर के इतिहास के सबसे बड़े दस्तावेज कल्हण द्वारा रचित ‘राजतरंगिणी’ में दर्ज है, जिसमें बताया गया है कि भारत के एक बड़े हिस्से पर उनका शासन था। अफगानिस्तान से लेकर मध्य एशिया के कई हिस्से उनके नियंत्रण में थे। परिहासपुर जैसे शहर हों या मार्तण्ड मंदिर जैसे पवित्र स्थल, ललितादित्य ने इन सबकी स्थापना की।

ये अलग बात है कि आज मार्तण्ड सूर्य मंदिर में विशाल भारद्वाज जैसे निर्देशक भारतीय सेना को बदनाम करने वाली फिल्म ‘हैदर (2014)’ बना कर ‘शैतानी नृत्य (Devil Dance)’ के लिए प्रयोग में लाते हैं। दूसरी तरफ देखें तो विधु विनोद चोपड़ा खुद एक कश्मीरी पंडित हैं, लेकिन अपनी फ़िल्में हिट कराने के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों का महिमामंडन करते हैं। उनकी पत्नी अनुपमा चोपड़ा ‘समीक्षक’ बन कर ‘द कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों को बदनाम करती हैं।

आपने वो वीडियो देखा होगा, जिसमें सफूरा जरगर भारत विरोधी नाराएँ लगाती रहती हैं और वैश्विक वामपंथी प्रोपेगंडाबाज अरुंधति रॉय उसे स्नेहमयी नजरों से देखती रहती हैं। ‘द कश्मीर फाइल्स’ में भी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री पल्लवी जोशी का किरदार कुछ ऐसा ही है। ‘सिर्फ नाम रहेगा अल्लाह का’ जैसे नारों को ‘सेक्युलर’ बना कर भले ही प्रस्तुत किया जाता हो, लेकिन जब हम ऐसे नारों और गानों के वास्तविक अर्थ को समझते हैं तो हमें पता चलता है कि इस्लामी गिरोह का असली मकसद क्या है।

बीके गंजू नाम के एक युवा इंजीनियर को कश्मीर में मार डाला गया और उनकी पत्नी को पति के खून से सने चावल खाने के लिए विवश किया गया। वो एक चावल की बोरी में छिपे थे, लेकिन आतंकियों ने उन पर गोलियों की बौछार कर डाली। फिल्म देखने के बाद आपको ‘यहाँ क्‍या चलेगा, निजाम-ए-मुस्तफा’, ‘कश्‍मीर में अगर रहना है, अल्‍लाहू अकबर कहना है’ और ‘असि गछि पाकिस्तान, बटव रोअस त बटनेव सान’ (हमें पाकिस्तान चाहिए और हिन्दू महिलाएँ भी, पुरुषों के बिना) जैसे नारों का मतलब पता चलता है।

क्या पता कल को हिन्दू महिलाओं के बलात्कार को बढ़ावा देने वाला ये नारा भी वामपंथी और इस्लामी गिरोह द्वारा एक गाने में ढाल दिया जाए। फिर इसके सहारे नया सेक्युलर एजेंडा चलाया जाने लगेगा और इसका अर्थ जाने बिना इसका महिमामंडन किया जाएगा। इसीलिए, हमें गिरोह विशेष द्वारा दिए जाने वाले एक-एक नारे और गाने के एक-एक शब्दों को समझने और उसे लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। शाहीन बाग़ और दिल्ली दंगों में हम इसकी परिणीति देख चुके हैं।

अल्पसंख्यक कौन है, ये बहस भी इस फिल्म को देखने के बाद जरूरी हो जाता है। आखिर कश्मीर में बेचारे पंडित अल्पसंख्यक ही हो थे न। क्यों उनके लिए दुनिया के किसी भी अल्पसंख्यक अधिकार की बात करने वाले संगठनों ने आवाज़ नहीं उठाई? आज मिजोरम (2.75%), नागालैंड (8.75%), मेघालय (11.53%), अरुणाचल प्रदेश (29%), पंजाब (38.40%) और जम्मू कश्मीर (28.44%) में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। क्या उनके अधिकारों की कोई बात करता है?

‘द कश्मीर फाइल्स’ के साथ एक अच्छी बात ये है कि फिल्म में सचमुच ‘कश्मीरियत’ है। ऋषि कश्यप ने जिस कश्मीर को स्वर्ग बनाया और जगद्गुरु शंकराचार्य जहाँ केरल से चल कर पहुँचे, उस कश्मीर के बारे में बताया गया है। कश्मीरी भोजन और खाद्य पदार्थों को लेकर दुनिया को बताया गया है। अनुपम खेर खुद एक कश्मीरी पंडित हैं और उनका परिवार इस पलायन का भुक्तभोगी भी, इसीलिए उनकी भाषा में कश्मीरियत झलकती है। कश्मीरी भाषा में गीतों का भरपूर इस्तेमाल किया गया है।

ये फिल्म देख कर आप सोचेंगे कि क्यों और कैसे भारतीय वायुसेना के जवानों समेत कई हत्याओं का दोषी यासीन मलिक भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह से जाकर मिलता है। हालाँकि, इस दृश्य को सेंसर बोर्ड ने काट दिया है। आप सोचेंगे कि कैसे सैयस अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारुख जैसों को ‘गाँधीवादी’ बना कर पेश किया जाता है, लेकिन असल में ये सब उनके खूनी इतिहास को सफेदी देने के लिए होता है।

‘द कश्मीर फाइल्स’ देख कर आप सोचेंगे कि कैसे मीडिया भी वही दिखाता है, जो वामपंथी इकोसिस्टम चाहता है। आप सोचने को विवश होंगे कि कहीं आपका इलाका तो कभी नब्बे के दशक का कश्मीर तो नहीं बन जाएगा? आपके मन में सवाल उठेंगे कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने अब्दुल्ला परिवार को हमेशा सिर पर क्यों चढ़ाए रखा? ‘द कश्मीर फाइल्स’ एक फिल्म नहीं, वास्तविकता है। इतिहास है। इतिहास का चित्रण है। इसे ज़रूर देखिए। युवाओं को दिखाइए।

सऊदी अरब ने एक दिन में 81 को दे दी फाँसी: ISIS और अलकायदा से जुड़े आतंकी भी शामिल, कई बलात्कारियों को भी सुलाया मौत की नींद

कट्टरपंथी वैश्विक इस्लामिक आतंकी संगठन आईएसआईएस और अलकायदा के लिए काम करने औऱ हत्या और बलात्कार समेत कई अन्य मामलों में दोषी रहे 81 आतंकियों को सऊदी अरब की सरकार ने शनिवार (12 मार्च 2022) को फाँसी दे दी। मौत की सज़ा पाने वालों में से अधिकतर दोषी यमन के नागरिक थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन आतंकियों को सरकारी संस्थानों को निशाना बनाने, सुरक्षा अधिकारियों की हत्या, माइंस लगाने, अपहरण, यातना, बलात्कार और हथियारों के बल पर डकैती को अंजाम देने का आरोप है। इतना ही नहीं मौत की सजा पाने वाले 81 लोग देश में अराजकता, हिंसा फैलाकर उसे अस्थिर करने के साथ ही ‘आतंकवादी’ संगठन आईएसआईएस, अल-कायदा और ईरान समर्थित हौथी विद्रोहियों समेत दूसरे आतंकी संगठनों के मंसूबों को अंजाम देने के इरादे से हथियारों की तस्करी के आरोप हैं।

सऊदी के गृह मंत्रालय ने कहा कि अदालत में सुनवाई के बाद अपराधियों को दोषी ठहराया गया था। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि किसी किसी भी किस्म के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और क्षेत्रीय अखंडता को भंग करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी।

यमन के एक नागरिक को ISIS के साथ काम करने, सुरक्षा अधिकारी की हत्या करने और दो सऊदी को भी आईएसआईएस के साथ काम करने व दो सुरक्षा अधिकारियों की हत्या करने और देश में विदेशियों को निशाना बनाने का दोषी ठहराया गया था। इसी तरह से यमन के तीन नागरिकों को दो अधिकारियों की हत्या, हौथी आतंकियों से संबंध रखने, बारूदी सुरंग लगाने और हथियारों की तस्करी करने का दोषी पाया गया। इसके अलावा सऊदी अरब के एक व्यक्ति को कई अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, जिसमें एक सुरक्षा अधिकारी का अपहरण कर उसे प्रताड़ित करना और आतंकी सेल बनाने का दोषी ठहराया गया।

यहीं दो अन्य सऊदी पुरूषों को अपनी ही अम्मी की हत्या और अपने अब्बू व भाई की हत्या की कोशिश का दोषी पाया गया। साथ ही कई अन्य सऊदी के नागरिकों को आतंकियों से संबंध रखने का दोषी ठहराया गया।

‘मुँह पर जूता पड़े तब लौटेगी पंजाब की शान’ : भगवंत मान को केजरीवाल का पाँव छूता देख SFJ का पन्नू भड़का, अपमान का बदला लेने वाले को देगा ₹77 लाख

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के गुरपतवंत सिंह पन्नू की एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में वह अरविंद केजरीवाल को और भगवंत मान को धमकाता नजर आ रहा है। ये धमकी पन्नू ने उस वीडियो को देखने के बाद दी है जिसमें पंजाब के होने वाले नए मुख्यमंत्री दिल्ली मुख्यमंत्री केजरीवाल का पैर छू रहे हैं।

भगवंत मान की यह वीडियो देखने के बाद पन्नू ने कहा, “नए मुख्यमंत्री ने केवल अपनी पगड़ी ही नहीं बल्कि पूरे पंजाब की पगड़ी केजरीवाल के पैरों में रखी है। अगर केजरीवाल ये दिखाना चाहते हैं कि पंजाब उनके घुटनों पर है तो उन्होंने हमारे सामूहिक साहस को चनौती दी है और हम बिन कोई शक इस अपमान का बदला लेंगे।”

पन्नू ने कहा, “हम निश्चित तौर पर इस अपमान का बदला देंगे। मैं सभी समर्थकों से 13 मार्च को रोड शो और 16 मार्च को रैली आयोजित करने के लिए कहता हूँ। हम उन लोगों को सबक सिखाएँगे जिन्होंने सिखों की गरिमा को चुनौती दी है। जिन जूतों पर पंजाब की पगड़ी रखी गई हैं उन्हीं जूतों का इस्तेमाल केजरीवाल और भगवंत मान के मुँह पर मारने के लिए किया जाना चाहिए।”

सिखों को भड़काने के क्रम में पन्नू यहीं नहीं रुका। उसने कहा कि जो कोई भी पंजाब को उसकी शान दोबारा दिलाएगा उसे वह 1 लाख डॉलर देंगे। वह कहता है, “केजरीवाल दोबारा से पंजाब दिखाई नहीं पड़ना चाहिए। वो दिल्ली में दिखे या हरिद्वार में। मैं हर सिख भाई का आह्वान करता हूँ कि वो पंजाब की इज्जत को वापस दिलाएँ। ”

अपने एजेंडे को दोहराते हए पन्नू ने कहा, “पंजाब का समाधान खालिस्तान है। पंजाब की स्वतंत्रता। क्या हुआ अगर AAP ने सरकार बनाई। हम अगले पाँच सालों का इंतजार नहीं कर सकते। हमें त्वरित कार्रवाई करनी होगी।  जो भी इस काम के लिए आगे आया सिख फॉर जस्टिस उसे 1 लाख डॉलर (76.76 लाख रुपए) देगा।”

बता दें कि इससे पहले खालिस्तानी नेता ने कहा था कि पंजाब में AAP ने खालिस्तानी समर्थकों का झूठे दावे कर करके विश्वास जीता था। उन्होंने कहा था कि ये चुनाव पंजाब और खालिस्तान दोनों के लिहाज से जरूरी है, अगर वे आए तो खालिस्तानियों के पास अपना मिशन पूरा करने का नया मौका होगा। दिलचस्प बात यह है कि पन्नू ने पहले के एक वीडियो में उल्लेख किया था कि अब जब AAP उनके नियंत्रण में है और पंजाब के लोगों ने खालिस्तान विरोधी राजनेताओं जैसे बादल, कैप्टन अमरिंद को बाहर कर दिया है तो, खालिस्तान जनमत संग्रह पंजाब में आसानी से होना चाहिए। इसके अलावा AAP की जीत के बाद एक लेटर भी सामने आया था। जिसमें दावा था कि आप ने जीत हासिल करने के लिए खालिस्तान समर्थक वोटों और उनके फंड का प्रयोग किया।

जिस कंपनी में पति हैं डायरेक्टर, उसी में सोनम कपूर के ससुर से ₹27 करोड़ की ठगी: पुलिस ने 9 को गिरफ्तार किया

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनम कपूर आहूजा के ससुर साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। ठगों ने रिबेट ऑफ स्टेट एंड सेंट्रल टैक्सेस एंड लेवीज (RoSCTL) लाइसेंस के जरिये इस ठगी को अंजाम देते हुए उनसे 27 करोड़ रुपए से अधिक ठग लिए। इसका खुलासा उस वक्त हुआ, जब फरीदाबाद पुलिस ने हाईली प्रोफेशनल साइबर क्रिमिनल के एक ग्रुप को गिरफ्तार किया।

शुक्रवार (11 मार्च, 2022) को पुलिस ने खुलासा किया कि दिल्ली, मुंबई, चेन्नई औऱ कर्नाटक से 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। फरीदाबाद के डिप्टी कमिश्नर नीतीश अग्रवाल के मुताबिक, ठगों ने 26 जुलाई 2021 सेक्टर 28 स्थित शाही एक्सपोर्ट कंपनी RoSCTL लाइसेंस के जरिए ठगी की शिकायत मिली थी। बहरहाल इसको लेकर जाँच शुरू कर दी गई है।

गिरफ्तार किए गए आरोपित मनोज राणा, मनीष कुमार, प्रवीन कुमार व मनीष कुमार मोगा और रायचूर (कर्नाटक) निवासी गणेश परसुराम व महाराष्ट्र निवासी भूषण किशन ठाकुर (मुंबई), राहुल रघुनाथ (रायगढ़) व संतोष सीताराम (पुणे) शामिल है। इस मामले में चेन्नई के सुरेंद्र कुमार जैन औऱ दिल्ली के ललित कुमार जैन को भी दबोच लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार एक्सपोर्ट कंपनियों को विशेष प्रकार की छूट देती है। इसे ही RoSCTL लाइसेंस कहा जाता है। ठगों ने सोनम कपूर के ससुर सुनील आहूजा की फर्म का डिजिटल सिग्नेचर बना लिया था।

पुलिस का कहना है कि आहूजा ने पिछले साल ही इसको लेकर शिकायत की थी, जिसके बाद से वो लगातार इस मामले पर गुपचुप तरीके से काम कर रहे थे। गौरतलब है कि अभिनेत्री सोनम कपूर औऱ साल 2018 में बिजनेसमैन आनंद आहूज से शादी की थी। आनंद अपने पिता की कंपनी के डाय़रेक्टर होने के साथ ही एक फैशन ब्रांड भी चलाते हैं। जिस कंपनी में आनंद डायरेक्टर हैं उसी में ठगी की गई है। वहीं सोनम कपूर की बात की जाए तो आखिरी बार वो 2019 में फिल्म ‘द जोया फैक्टर’ में नजर आई थीं। उनकी आने वाली फिल्म ‘ब्लाइंड’ है।

7 पुलिसकर्मी और 15 भाजपा कार्यकर्ता… BJD के निलंबित विधायक प्रशांत जगदेव ने सबको कार से रौंदा, 22+ घायल : Video आई सामने

ओडिशा के खोरधा जिले से रैश ड्राइविंग का मामला प्रकाश में आया है, जहाँ बीजू जनता दल (BJD) के निलंबित विधायक प्रशांत जगदेव ने बानापुर ब्लॉक में अपनी एसयूवी कार लोगों के ऊपर चढ़ा दी। इस घटना में 7 पुलिसवालों समेत 22 से ज्यादा लोग बुरी तरह से घायल हो गए। खोरधा के एसपी अलेख चंद्र पाही ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि घटना में करीब 15 भाजपा कार्यकर्ता और 7 पुलिस कर्मी घायल हो गए। मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

इस हादसे के बाद लोगों ने विधायक को पकड़कर पीट दिया, जिससे वो भी घायल हो गए। इस घटना के संबंध में बीजेपी ने आरोपित विधायक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक, यह हादसा उस वक्त हुआ जब प्रखंड अध्यक्ष पद के लिए चुनाव के दौरान बानापुर के बीडीओ कार्यलय के बाहर भारी भीड़ जुटी थी।

इसको लेकर पुलिस महानिरीक्षक नरसिंह भोल ने बताया कि पंचायत समिति के अध्यक्ष के चुनाव के लिए बानापुर प्रखंड कार्यालय में भाजपा कार्यकर्ता एकत्रित हुए थे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने विधायक को भीड़ में जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वो सुनने के मूड में बिल्कुल नहीं थे। घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने जगदेव को उनकी कार (लैंड रोवर डिस्कवरी) से बाहर खींच लिया और जमकर पीटा। उनकी गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई।

इस मामले में बीजेपी ने आरोपित विधायक के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। हादसे को भयावह बताते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट किया, “खौफनाक मंजर! बीजू जनता दल के विधायक प्रशांत जगदेव द्वारा भीड़ को कार से रौंदने का दर्दनाक दृश्य अक्षम्य है। प्रशांत जगदेव ने पहले भी ऐसे जनविरोधी कृत्य कई बार किया है। अगर ओडिशा बीजेडी समय रहते अपने विधायक पर कड़ी कार्यवाही करती तो आज यह मौत का मंजर नहीं देखना पड़ता। दुख की इस घड़ी में मैं पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा हूँ।”

गौरतलब है कि इस हादसे में बानापुर पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक रश्मि रंजन साहू समेत दो लोगों की हालत गंभीर है और उन्हें इलाज के लिए भुवनेश्वर एम्स में भर्ती कराया गया है। चिल्का के एक विधायक जगदेव को पिछले साल पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निलंबित कर दिया गया था।

1993 मुंबई बम ब्लास्ट: जिन धमाकों से दहला था देश, उसके लिए चुनी गई थी ‘शिवाजी जयंती’, गुल मुहम्मद के कारण बदली थी तारीख

29 साल पहले आज की ही तारीख (12 मार्च) में मुंबई में लगातार 12 जगह हुए 12 बम विस्फोटों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। इन विस्फोटों में 300 लोगों की जान गई थी जबकि सैंकड़ों घायल हुए थे। घटना में आतंकी कनेक्शन जो निकला वो दाऊद इब्राहिम से जुड़ा था जिसने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का बदला लेने के लिए ये धमाके करवाए।

दाऊद इब्राहिम ने अपने करीबी टाइगर मेमन, मोहम्मद दोसा और मुस्तफा दोसा के साथ मिल कर इस घातक हमले की पूरी साजिश को रचा था। इसके लिए मुस्तफा, टाइगर और छोटा शकील ने पाकिस्तान और भारत में अपने ट्रेनिंग कैंप बनाए जहाँ उन्होंने खुद को और अन्य हमलावरों को इस अटैक के लिए तैयार करना शुरू किया। यहाँ ये लोग भारी विस्फोटकों से लेकर बड़े-बड़े हथियारों के बारे में उन्हें जानकारी देते थे। धमाकों से पहले साजिशकर्ता 15 बार एक दूसरे से मिले थे और इसके लिए फंड आया था गल्फ से।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में पाकिस्तान इंटेलिजेंस सर्विस और इंटर सर्विस इंटेलिजेंस भी सक्रिय रूप से शामिल थे। हालाँकि, फिर भी माना जाता है कि अगर मुंबई बम धमाकों से पहले पकड़े गए गुल मुहम्मद की बातों पर पुलिस विश्वास करती तो शायद ये विस्फोट रोके जा सकते थे।

गुल मुहम्मद की गिरफ्तारी और 12 मार्च 1993 को धमकाे

दरअसल, ये गुल मुहम्मद उन 19 लोगों में शामिल एक व्यक्ति था जिसे टाइगर मेमन ने पाकिस्तान से दुबई के जरिए भारत 19 परवरी 1993 को हथियार व बम बनाने  की ट्रेनिंग के लिए भेजा था। शुरुआत में प्लान था कि अप्रैल में आने वाली शिवाजी जयंती के मौके पर मुंबई को निशाना बनाया जाएगा। लेकिन ये प्लॉन गुल्लू उर्फ गुल मुहम्मद की गिरफ्तारी 9 मार्च 1993 के बाद बदल दिया गया। गुल्लू ने बताया कि मुंबई शहर के अलग-अलग भागों में बम धमाकों की साजिश चल रही है। गुल्लू ने पूछताछ में ये भी माना कि उसे इन धमाकों के लिए पाकिस्तान तक से ट्रेनिंग मिली है और उनके निशाने पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज से लेकर शिवसेना भवन हैं। मगर, उस समय पुलिस ने उन दावों के बेफिजूल मान लिया और इस कबूलनामे को नजरअंदाज कर दिया।  

गुल महम्मद बांद्रा के झुग्गी वाले इलाके बेहरामपाड़ा में रहता था। उसका छोटे-मोटे अपराधों में नाम था। लेकिन टाइगर ने जिन लोगों को चुना था उनमें सिर्फ गुल ही ऐसे बैकग्राउंड से नहीं था बल्कि अधिकाँश लोग इस बैकग्राउंड से आते थे। 

धमाकों के बाद इन लोगों के खिलाफ अप्रैल 1995 से ट्रायल शुरू हुआ। 600 चश्मदीद बुलाए गए और इन सबके बयान साल 2000 तक दर्ज ही होते रहे। कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सितंबर 2006 को सुनाया। गुल मुहम्मद को पूरी साजिश का हिस्सा होने के लिए 6 साल की सजा हुई फिर साल 2017 में टाडा कोर्ट ने मुस्तफा दोसा, अबू सलेम और चार अन्य को इसमें दोषी पाया जबकि याकूब मेमन को मुंबई बम विस्फोटों में प्रमुख साजिशकर्ता होने के लिए 2015 में फाँसी दी गई थी। वहीं टाइगर मेमन, दाऊद इब्राहिम, अनीस इब्राहिम, छोटा शकील और अन्य आज भी भारत की पकड़ से फरार हैं।

शरद पवार का झूठ

मालूम हो कि साल 1993 में हुए बम धमाकों ने समाज के हर स्तर के व्यक्ति को नुकसान पहुँचाया। बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त से लेकर माफिया और वरिष्ठ राजनेताओं की छवि को भी नुकसान हुआ। एनसीपी के सुप्रीमों ने तो इस दौरान खुला झूठ बोला। उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे पवार ने समुदाय विशेष को पीड़ित दिखाने के लिए बम ब्लास्ट्स की संख्या बढ़ा दी थी। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की ‘खोज’ कर ली थी, जो असल में हुआ ही नहीं था। 

महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने हमलों के तुरंत बाद दूरदर्शन स्टूडियो में जाकर बोला था और घोषणा की थी कि कुल 13 धमाके हुए हैं। उन्होंने न जाने कहाँ से एक अतिरिक्त विस्फोट की ‘खोज’ कर ली थी। पवार ने कहा था कि मस्जिद बंदर में 13वाँ विस्फोट हुआ था। चूँकि इस हमले में हिन्दू बहुल क्षेत्रों को निशाना बनाया गया था, ऐसे में पवार ने मस्जिद में विस्फोट की कहानी गढ़ी ताकि समुदाय विशेष को भी पीड़ित की तरह पेश किया जा सके। वास्तव में, सभी 12 धमाके हिन्दू बहुल इलाक़े में किए गए थे।

‘मेरी पत्नी महिला नहीं, उसके पास पुरुष का लिंग है’: पति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर कहा- दर्ज हो धोखाधड़ी का मामला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शख्स ने शुक्रवार (11 मार्च 2022) को याचिका दायर करते हुए अपनी पत्नी पर धोखाधड़ी का आपराधिक मुदकमा दर्ज कराने का आग्रह किया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जिससे उसकी शादी कराई गई है, वह महिला नहीं है और उसका जननांग पुुरुष का है। उसने सबूत के तौर पर मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की।

याचिका में ये कहा है कि यह बात उसकी पत्नी और पत्नी के पिता को बात पता थी। इसके बावजूद उसके साथ जान-बूझकर शादी कराई गई। पति ने आरोप लगाया है कि वह अपनी पत्नी के साथ संबंध नहीं बना सकता है। ऐसे में उसके साथ वह कैसे रह सकता है। उसने कहा कि उसकी पत्नी और ससुर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने इस मामले में पहले पत्नी से जवाब माँगा। हालाँकि, जब याचिकाकर्ता ने एक मेडिकल रिपोर्ट पेश की, जिसमें खुलासा हुआ कि उसकी पत्नी के पास लिंग और अपूर्ण हाइमन है। इसके बाद कोर्ट इस मामले पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एनके मोदी ने अदालत को बताया कि यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत एक आपराधिक अपराध है, क्योंकि पत्नी एक ‘पुरुष’ निकली है। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि इस बारे में मेडिकल रिकॉर्ड कहता है कि यह किसी जन्मजात विकार का मामला नहीं है। यह ऐसा मामला है, जहाँ मुवक्किल को एक पुरुष से शादी करके धोखा दिया गया।

इस पर अदालत ने पूछा, “क्या आप कह सकते हैं कि लिंग केवल इसलिए नहीं है, क्योंकि एक अपूर्ण हाइमन है? मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि उसके अंडाशय सामान्य हैं।” इस पर मोदी ने दलील देते हुए कहा, “न केवल ‘पत्नी’ के पास महिला का लिंग है, बल्कि पुरुष लिंग भी है। मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट रूप से कहती है। जब उसके पास पुरुष लिंग है तो वह महिला कैसे हो सकती है?”

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी द्वारा याचिकाकर्ता पति के खिलाफ दायर IPC की धारा 498A (क्रूरता) के मामले का भी संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस शिकायत में याचिकाकर्ता की पत्नी, ससुर और मध्य प्रदेश पुलिस को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।

दरअसल मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर का है। एक शख्स ने अगस्त 2017 में ग्वालियर के मजिस्ट्रेट के समक्ष एक शिकायत देते हुए कहा कि साल 2016 में उसकी शादी हुई थी और जिस लड़की से शादी हुई वह महिला है ही नहीं और उसके पास पुरुष का जननांग है। वह शादी की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इसलिए उसकी पत्नी और ससुर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज की जाए। मजिस्ट्रेट ने मई 2019 में पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का संज्ञान लिया।

दूसरी ओर, पत्नी ने दावा किया कि शिकायतकर्ता ने दहेज के लिए उसके साथ क्रूरता किया। इस बीच ग्वालियर के एक अस्पताल में पत्नी का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया और शिकायतकर्ता और उसकी बहन के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद आरोपित पत्नी और उसके पिता को समन जारी किया गया।

समन मिलने के बाद पत्नी और ससुर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने जून 2021 में मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट का कहना था कि मेडिकल सबूत पत्नी पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त नहीं थे। वरिष्ठ वकील मोदी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बहस कर रहे थे।

कर्ज में डूबे पंजाब में कैसे होंगे अगले 5 साल? हिल गई SAD और कॉन्ग्रेस की बड़ी-बड़ी कुर्सियाँ, BJP के पास आधार तैयार करने का मौका

पंजाब में विधानसभा चुनाव 2022 में ‘एक मौका आप को’ का नारा ले गई गई आम आदमी पार्टी ने यहाँ सरकार बनाने के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इस बार विभिन्न पार्टियों के कई बड़े नामों को वहाँ से मुँह की खानी पड़ी है। इन नामों में कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रकाश सिंह बादल, चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे बड़े नाम शामिल रहे है। कुल 117 विधानसभा सीटों में भाजपा को 2 सीटें हासिल हुई हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि पंजाब में आगे भाजपा का भविष्य क्या है ?

भारतीय जनता पार्टी पंजाब में पहले भी कभी मजबूत स्थिति में नहीं रही है। पार्टी ने हमेशा शिरोमणि अकाली दल के साथ चुनाव लड़ा और बहुत कम समय तक सत्ता में रही। अब शिरोमणि अकाली दल से उसका गठबंधन खत्म हो चुका है। 2022 के विधानसभा चुनावों में SAD के साथ कॉन्ग्रेस के कई बड़े चेहरे चर्चा से बाहर हो गए। ऐसे में भाजपा के पास एक अच्छा मौक़ा है पंजाब में अपना आधार तैयार करने का।

विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को 6.6% वोट शेयर मिला। जबकि विजेता आम आदमी पार्टी ने 42% वोट शेयर हासिल किए। वहीं साल 2019 के लोकसभा चुनाव में NDA को 37.08% वोट शेयर मिले थे जबकि तब AAP पार्टी का वोट शेयर 7.38% ही था। लोकसभा चुनाव को भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ मिल कर लड़ा था। इन चुनावों में लोगों ने उन्हें वोट दिया था जिन्हें वो संसद भेजना चाहते थे। इन चुनावों में क्षेत्रीय पार्टियों को वोट नहीं दिए गए थे। ऐसे में अगर भाजपा 5 साल बाद 2027 में पंजाब में अपनी सीटों और वोट शेयर को बढ़ाना चाहती है तो उसे काफी मशक्क्त करनी पड़ेगी।

ऐसे में भाजपा के पास अधिक समय नहीं है। उन्हें अभी से इसकी तैयारियों में जुट जाना होगा। उन्हें स्थानीय मुद्दों से जुड़ कर पंजाब के लोगों से नजदीकियाँ बढ़ानी होंगी। भाजपा वालों को केंद्र की योजनाओं का लाभ पंजाब के निवासियों तक पहुँचाना होगा। उन्हें लोगों को ये सभी समझाना होगा कि केंद्र सरकार ही उनके खाते में पैसे भेज रही है न कि राज्य सरकार। पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव AAP बनाम भाजपा होगा। ऐसे में इसके लिए भाजपा को तैयार रहना होगा।

कैसे सफल हुई आप पार्टी

पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत के तमाम कारण हैं। इसमें उनका जमीनी कार्य, सटीक प्लानिंग और किसान आंदोलन में किया गया सहयोग मुख्य हैं। खालिस्तानी चरमपंथियों को समर्थन की अफवाह भी कहीं न कहीं आम आदमी पार्टी के पक्ष में ही रही। पंजाब की परम्परागत पार्टियों के कई नकारात्मक कार्य भी आप पार्टी की जीत की एक बड़ी वजह बने। कॉन्ग्रेस पार्टी और शिरोमणि अकाली दल की आंतरिक कलह भी आम आदमी के पक्ष में गई। कैप्टन अमरिंदर का कॉन्ग्रेस से अलग होना, सिद्धू का व्यवहार और भाजपा के खिलाफ नकारात्मक माहौल जैसे भी कई अन्य कारण आम आदमी पार्टी की जीत में अहम रोल अदा किए।

अब पंजाब का परम्परागत राजनैतिक परिदृश्य खत्म हो चुका है। अगले 5 सालों में इसको कौन सी पार्टी किस रूप में प्रयोग में लाती है ये उनके ऊपर है। आम आदमी पार्टी के दृष्टिकोण से देखा जाए तो 92 विधायकों के साथ पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के बाद वहाँ का विपक्ष बेहद कमजोर है। मात्र 27 विपक्षी विधायक आप पार्टी के लिए कोई बड़ी मुसीबत नहीं खड़ी कर पाएँगे। लेकिन आप पार्टी की सरकार के लिए केवल यही चुनौतियाँ नहीं हैं। ऐसे तमाम मुद्दे हैं जो उनकी सरकार को सोने नहीं देंगे।

सीमवर्ती प्रदेश में कानून व्यवस्था

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर मौजूद पंजाब की 547 किलोमीटर सीमा पाकिस्तान से लगती है। पिछले कुछ समय के अंतराल में ही सुरक्षा बलों ने कई बार सीमा पार से हथियार ज़ब्त किए हैं। साथ ही सीमाओं से नशीले पदार्थों की भी तस्करी होती है। लुधियाना की अदालत में टिफिन बम ब्लास्ट भी हुआ था। अलगावादी सोच रखने वाले खालिस्तानी विचारधारा के लोग सीधे पाकिस्तान से जुड़े होते हैं। ऐसी कई अन्य चुनौतियों को ले कर एक ऐसी पार्टी सीमावर्ती प्रदेश में शासन करने जा रही है जिसे कानून व्यवस्था सँभालने का कोई अनुभव नहीं है।

दिल्ली में आए दिन आम आदमी पार्टी केंद्र की भाजपा सरकार पर कानून व्यवस्था को ले कर सवाल खड़े करती है। क्योकि दिल्ली पुलिस केंद्र के गृह मंत्रालय अंतर्गत आती है। लेकिन पंजाब में हालात अलग हैं। यहाँ सभी प्रकार के मामलों के लिए खुद आम आदमी पार्टी ही जिम्मेदार होगी। ऐसे में सीमा पार से अवैध हथियारों की सप्लाई रोकना, नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाना और चरमपंथी खालिस्तानियों पर अंकुश लगाने में कहीं न कहीं सरकार को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी।

बेअदबी के मामले

जब पार्टी सरकार में नहीं होती तो बयान जारी करना बहुत आसान होता है। ऐसे में सरकार पर आरोप लगाना भी कोई कठिन काम नहीं होता। अकेले साल 2021 में बेअदबी से जुडी 4 अलग-अलग घटनाएँ हुई हैं। इसमें 3 पंजाब के अंदर (गुरदासपुर, अमृतसर, कपूरथला) और एक दिल्ली सीमा सिंघु बॉर्डर पर। आने वाली 16 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे भगवंत मान ने इन घटनाओं को सरकार की नाकामी बताया था। अब खुद वही पंजाब में सरकार बनाने जा रहे हैं। वो बीत चुकीं बेअदबी की घटनाओं को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते। ऐसे में राज्य सरकार को इस मुद्दे पर बेहद चौकन्ना रहना पड़ेगा जिसमें एक भीड़ खुद ही इंसाफ करने पर उतर जाती है। आम आदमी पार्टी ने ऐसी घटनाओं के दोषियों पर कार्रवाई करने की घोषणा पाने पंजाब मॉडल के 10 बिंदुओं में कही है। लेकिन वो इसे जमीनी तौर पर करने में कितना सफल हो पाएँगे ये तो समय ही बताएगा।

जनता से किए गए बड़े – बड़े वादे

अपने चुनावी वादों में आम आदमी पार्टी ने बिजली की दरों को घटाने, 18 साल से अधिक उम्र की प्रत्येक महिला को 1000 रुपए हर महीने देने जैसे वादे किए हैं। इन वादों को पूरा करने के लिए जितना पैसा चाहिए उतना पंजाब के पास नहीं है। अभी वर्तमान में ही पंजाब पर लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। चुनाव आयोग के अनुसार पंजाब में फ़िलहाल 1.1 करोड़ महिलाएँ वोटर के तौर पर दर्ज हैं। ऐसे में एक गणना के अनुसार भगवंत मान सरकार को लगभग 1100 करोड़ रुपए हर माह ख़र्च करने होंगे। यही पैसा सालाना 13200 करोड़ रुपए हो जाता है। ऐसे में पहले से कर्ज के बोझ तले दबे प्रदेश में ये वादे आसानी से पूरे होने वाले नहीं हैं।

पहले ही दिन ₹79 करोड़ की कमाई! ‘बाहुबली’ वाले हीरो ने एक बार फिर मनवाया अपना लोहा, तोड़ दिया ‘पुष्पा’ का भी रिकॉर्ड

प्रभास की नई फिल्म ‘राधे श्याम’ ने पहले ही दिन 79 करोड़ रुपए की ओपनिंग लेकर बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। कोरोना संक्रमण आपदा के बाद ये भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का सबसे बड़ा नंबर है। इससे पहले अगस्त 2019 में आई प्रभास की फिल्म ‘साहो’ ने ओपनिंग डे पर दुनिया भर में 125 करोड़ रुपए कमाए थे। हालाँकि, ‘राधे श्याम’ ने कोरोना के बाद आई फिल्मों ‘वलिमै’, ‘भीमला नायक’ और ‘सूर्यवंशी’ के रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है।

इससे पहले आई अन्य फिल्मों की बात करें तो ‘थाला’ अजीत कुमार की तमिल फिल्म ‘वलिमै’ ने 60 करोड़ रुपए कमाए थे, वहीं ‘पॉवर स्टार’ पवन कल्याण की तेलुगु फिल्म ‘भीमला नायक’ ने 61 करोड़ रुपए बटोरे थे। अक्षय कुमार की हिंदी फिल्म ‘सूर्यवंशी’ ने पहले दिन 40 करोड़ रुपए के आसपास बटोरे थे। वहीं अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा’ ने 63 करोड़ रुपए बटोर कर तहलका मचा दिया था। प्रभास ने इन सभी को पीछे छोड़ दिया है।

हालाँकि, प्रभास की फिल्म ‘राधे श्याम’ समीक्षकों के मानकों पर खरी नहीं उतरी है और इसे नकारात्मक रिव्यूज मिले हैं। लोग उनके अभिनय की तो तारीफ़ कर रहे हैं, लेकिन फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। फिल्म ने भारत में पीला दिन 48 करोड़ रुपए का कारोबार किया है, जो इस सूची में सातवाँ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। पहले और दूसरे स्थान पर प्रभास की ‘बाहुबली 2 (121 करोड़ रुपए)’ और ‘साहो (88 करोड़ रुपए)’ है।

इधर विवेक अग्निहोत्री की सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने पहले दिन दुनिया भर में 4.55 करोड़ रुपए का कारोबार कर के चौंका दिया है, जबकि फिल्म को पौने 700 स्क्रीन्स ही मिल पाए थे। फिल्म में इस्लामी कट्टरपथिंयों द्वारा 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को दिखाया गया है। वहीं संजय लीला भंसाली निर्देशित आलिया भट्ट की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ ने अभी 100 करोड़ नेट का आँकड़ा पार कर लिया है।