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यूक्रेन से प्रधानी चलाने वाली सपा नेता की बेटी वैशाली यादव लौटीं देश: अधिकारी ने माँगी रिपोर्ट, बोलीं- नोटिस मिलने पर क्लियर कर दूँगी

यूक्रेन (Ukraine) में MBBS की पढ़ाई करने वाली यूपी में ग्राम प्रधान वैशाली यादव (Vaishali Yadav) भारत पहुँचते ही प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ गई हैं। दरअसल ग्राम प्रधान बनने के बाद वैशाली बिना सूचना दिए विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं। इसको लेकर उनके खिलाफ अधिकारियों ने जाँच शुरू कर दी है। हरदोई के पंचायती राज अधिकारी गिरीश चंद्र ने ADO पंचायत को प्राथमिकता के आधार पर मामले की जाँच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

प्रधान बनने के बाद चली गईं थी यूक्रेन, अब होगी कार्रवाई

गिरीश चंद्र ने कहा, “हरदोई के ग्राम तेरा पुरसौली की प्रधान वैशाली यादव अपनी ड्यूटी से नदारद हैं। पता चला है कि वह यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई करने गई हैं। हमने ADO पंचायत से रिपोर्ट माँगी है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

इधर वैशाली ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए News18 से कहा, “पिछले दिनों जब मैं यूक्रेन में फँसी हुई थी तो मैंने मदद के लिए एक वीडियो बनाया था। इस पर लोगों ने मुझे बहुत ट्रोल किया, उसे राजनीति से जोड़ दिया। मैं ये वीडियो सिर्फ ये बताने के लिए बना रही हूँ कि मैं सुरक्षित हूँ, अपने घर वापस आ गई हूँ। और मुझ पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उसको मैं तब क्लियर कर दूँगी, जब अधिकारी मेरे यहाँ नोटिस भेजेंगे।” 

उन्होंने आगे कहा, “भारत सरकार का नारा है- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ तो अगर बेटी पढ़ रही है तो लोग उस पर इतना ऑब्जेक्शन क्यों कर रहे हैं? आजकल तो लोग हर काम डिजिटली कर रहे हैं, वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं तो मैं अगर यूक्रेन में रहते हुए अपने गाँव की कमान सँभाल रही हूँ तो उसमें ऑब्जेक्शन की कोई बात ही नहीं है। हमारे गाँव के लोग मेरे काम से खुश हैं। उन्होंने आज तक हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तो आप लोग मुझ पर बेबुनियाद आरोप ना लगाएँ।”

वहीं, वैशाली के पिता और समाजवादी पार्टी के नेता का कहना है कि यूक्रेन में रहने के बावजूद वह इंटरनेट एवं व्हाट्सएप के जरिए अपने क्षेत्र के लोगों के साथ संपर्क में रही हैं। वह साल में दो बार आती हैं और अपनी उपस्थिति दर्ज करवाती है, जो कि प्रधान के लिए आवश्यक है।

गौरतलब है कि पिछले साल हरदोई के तेरा पुरसौली की प्रधान निर्वाचित होते ही वैशाली यादव एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन चली गई थीं। वो वहीं रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं। उनका वीडियो वायरल होने के बाद उनकी पोल खुल गई। जिला प्रशासन ने इस मामले में रिपोर्ट तलब की है।

पिछले दिनों वैशाली के इस तरह गाँव छोड़कर विदेश में रहने को लेकर पंचायती राज विभाग ने कथित तौर पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण माँगा था। यह बात भी सामने आई थी कि वैशाली के यूक्रेन में रहने के बावजूद उनका काम हुआ और इस दौरान कुछ धन का भी इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पंचायती राज विभाग उनकी अनुपस्थिति में ग्राम पंचायत द्वारा उपयोग किए गए धन की जाँच करेगी।

सोशल मीडिया पर शेयर किया था वीडियो, यूजर्स ने किया ट्रोल

युद्ध के हालात के बीच वैशाली ने यूक्रेन से वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर शेयर किया। हालाँकि, यूजर्स ने इसको लेकर वैशाली को ट्रोल करना शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि सपा नेता की बेटी होने के कारण वह सरकार की छवि को खराब करने की कोशिश कर रही हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि वैशाली पर कार्रवाई हुई और उन्हें गिरफ्तार भी किया गया है। हालाँकि, प्रशासन ने इस तरह की खबरों का खंडन किया।

पाकिस्तान की मारिया को बचाने के लिए बमबारी से भी नहीं डरे हरियाणा के अंकित, यूक्रेन से कुत्ते को लेकर ही लौटे ऋषभ

यूक्रेन औऱ रूस के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine) का आज शुक्रवार (4 मार्च 2022) को नौवाँ दिन है। वहाँ फँसे भारतीय लोगों को रेस्क्यू करने के लिए सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ चला रही है। इस बीच हिंदुस्तानियों की दरियादिली सामने आई है। किसी ने कुत्ते के बिना यूक्रेन से आने से मना कर दिया तो किसी ने अनजान पाकिस्तानी लड़की की मदद की।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में हरियाणा के रहने वाले अंकित ने बमबारी के बीच पाकिस्तानी लड़की की जान बचाकर उसे रोमानिया (Romania) के बॉर्डर तक पैदल पहुँचाया। अंकित वहाँ पर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट में यूक्रेनी भाषा के छात्र हैं। दरअसल, यूक्रेन में रूस की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसके कारण वहाँ फँसे करीब 80 छात्रों को बंकरों में छिपने के लिए कहा गया। इन लोगों में अंकित अकेला भारतीय थे और उनके साथ थी पाकिस्तान की मारिया।

भीषण बमबारी के बीच अचानक अंकित को लगा कि उन्हें किसी तरह से रोमानिया के बॉर्डर तक पहुँचना चाहिए, ताकि वहाँ से भारत सरकार उन्हें रेस्क्यू कर सके। यही सोचकर जब अंकित वहाँ से जाने लगे तो पाकिस्तानी स्टूडेंट मारिया ने अंकित से मदद माँगी और उनसे कहा कि वह भी निकलना चाहती है। बस फिर क्या था, दोनों वहाँ से बचते-बचाते रोमानिया बॉर्डर के लिए निकल पड़े।

दो दिनों से भूखे दोनों फायरिंग से बचते-बचाते 5 किलोमीटर तक चलकर रेलवे स्टेशन पहुँचे। ट्रेन से दोनों टर्नोपिल पहुँचे। टर्नोपिल से पाकिस्तानी दूतावास ने उन दोनों को रोमानिया बॉ़र्डर के लिए बस से रवाना किया, लेकिन बस ने उन दोनों को 15-20 किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया। इसके बाद दोनों इतनी दूर पैदल चलकर बॉर्डर तक पहुँचे।

अंकित के इस जज्बे को पाकिस्तान के दूतावास ने भी सलाम किया और कहा कि यह समय दोनों देशों के लोगों के लिए एक-दूसरे की टांग खींचने का नहीं, बल्कि प्यार और समर्थन दिखाने का है। आपसी नफरत से अधिक महत्वपूर्ण बच्चे हैं। दूतावास ने अंकित को ‘शुक्रिया बेटा’ कहा।

कुत्ते के लिए यूक्रेन से आने से इनकार किया

इसी तरह से उत्तराखंड के देहरादून के रहने वाले ऋषभ कौशिक (21) ऑपरेशन गंगा के तहत हंगरी के बुडापेस्ट से भारत लाए गए। वह अपने साथ अपने पालतू कुत्ते को भी लाए। ऋषभ खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ रेडियो इलेक्ट्रॉनिक्स से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने युद्धग्रस्त यूक्रेन से आने से इसलिए इनकार कर दिया था कि अगर वे अगर अपने कुत्ते को छोड़कर चले गए तो उसका ख्याल कौन रखेगा। उन्होंने कहा था, “अगर मेरा डॉग नहीं जा सकता है तो मैं भी नहीं जाऊँगा।”

‘साहिल ने अपने साथी के साथ मिलकर रेप किया, लिक्विड में कुछ डाल पिला दिया’: जिस हिंदू लड़की को जहर दे जंगल में फेंका, वो मरने से पहले बता गई उसके साथ हुआ क्या

हमने अपनी बेटी को खोजना शुरू किया तो वह टोपरी के एक कच्चे रास्ते पर बेसुध हालत में मिली। उसी हालत में उसने बताया कि साहिल ने अपने साथी के साथ मिल कर उससे रेप किया। रेप के बाद लिक्विड में कुछ डाल कर उसे पिला दिया।

यह बात पुलिस को दी शिकायत में सहारनपुर जिले की उस दलित नाबालिग लड़की की माँ ने कहा है जिसे जहर देकर जंगल में फेंक दिया गया था। नाबालिग ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया था। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि रेप का विरोध करने पर नाबालिग को जहर दे जंगल में फेंका गया था। पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मृतका के साथ रेप हुआ था या नहीं। लेकिन जैसा कि मृतका की माँ की शिकायत से स्पष्ट है कि जहर देने से पहले रेप किया गया था।

शिकायत से यह भी पता चलता है कि इस घटना में साहिल के साथ कोई और भी शामिल था। खबर लिखे जाने तक उसके बारे में पता नहीं चल पाया था। साहिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि उसने पुलिस के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। यह भी कहा जा रहा है कि वह काफी समय से मृतका के घर के चक्कर काट रहा था। बजरंग दल इसे लव जिहाद का मामला बता रही है।

मृतका और आरोपित साहिल दोनों सहरानपुर जिले के बिजुपुरी गाँव के हैं। घटना 3 मार्च 2022 (गुरुवार) की है। नौवीं में पढ़ने वाली नाबालिग लड़की परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी। परिजनों को वह जंगल में तड़पती हुई मिली थी। बताया जा रहा है कि उस समय उसके मुँह से झाग निकल रहा था। उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ उसने दम तोड़ दिया।

सहारनपुर पुलिस ने साहिल की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया है, “थाना कोतवाली देहात पुलिस द्वारा तत्काल मुकदमा पंजीकृत कर त्वरित कार्यवाही करते हुए नामजद अभियुक्त साहिल को गिरफ्तार कर लिया है। अग्रिम आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जा रही है।” ऑपइंडिया से बात करते हुए सहारनपुर के SSP आकाश तोमर ने बताया, “केस दर्ज कर जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। उसी अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

सोशल मीडिया पर मृतका का वीडियो भी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पीड़िता अस्पताल के स्ट्रेचर पर लेटी दिखाई दे रही है। वीडियो में पीछे से एक महिला की आवाज आ रही, “पता नहीं मैं तो स्कूल भेजी थी पेपर देने के लिए। स्कूल के मास्टर और 6 आदमी आए और उन्होंने कहा कि भाई तुम्हारी… ।” वीडियो में पीड़िता काफी दर्द महसूस करती दिखाई दे रही है। ऑपइंडिया के पास यह वीडियो मौजूद है।

अस्पताल के स्ट्रेचर पर पीड़िता

ऑपइंडिया को मिले एक अन्य वीडियो में पीड़िता को अपने 2 परिजनों के बीच बाइक पर बैठे देखा जा सकता है। उस वीडियो में मृतका के परिजन उससे पूछ रहे हैं- जहर किसने दिया था? जवाब में नाबालिग कहती है- साहिल ने। साथ ही सल्फास दिए जाने की बात वीडियो में बताई जा रही है। इस मामले में डॉक्टर बीडी शर्मा के मुताबिक मृतका की उम्र 16 वर्ष है।

साहिल बहुत दिनों से हमारे घर के चक्कर लगा रहा था: मृतका का भाई

ऑपइंडिया ने मृतका के चचरे भाई से बात की। उसने बताया, “चाचा जी (मृतका के पिता) मजदूरी करते हैं। हम दलित समुदाय से हैं। हमारा घर सड़क किनारे है। साहिल हमारे ही गाँव का है। वह बालिग है और उसकी उम्र लगभग 20 साल के आस-पास है। वो बहुत दिनों से हमारे घर के चक्कर लगा रहा था। हमने उसकी हरकतों का विरोध किया और उसके परिवार में कई बार शिकायत की। साहिल के घर वाले बस यही कहते रह गए कि हम उसे समझा लेंगे। लेकिन वो न माना। घटना हो जाने के बाद हमने साहिल की करतूत के बारे में बताने के लिए उसके परिवार वालों को बुलाया। लेकिन उसके घर से कोई नहीं आया।”

सिर्फ बजंरग दल आ रहा काम

मृतका के भाई रजनीश ने आगे बताया, “जब से सोशल मीडिया पर हमारे परिवार वालों के साथ हुई घटना वायरल हुई है तब से बाहर से तमाम लोग फोन कर हमारा हाल-चाल ले रहे हैं। लेकिन यहाँ मौजूद किसी दलित संगठन ने एक बार भी हमारी खबर नहीं ली है। बजरंग दल वाले हमारे साथ शुरू से हैं। उन्होंने हमारी बहुत मदद की है।”

मृतका का अंतिम संस्कार हुआ

ऑपइंडिया से बात करते हुए मृतका के भाई ने बताया, “हम सब बहुत दुखी हैं। हम आज अपनी बहन का अंतिम संस्कार गाँव के ही श्मशान घाट पर कर के आए हैं। इस केस में अभी तक आगे क्या कार्रवाई हुई है इसकी जानकारी हमें ठीक से नहीं है।”

मृतका का अंतिम संस्कार और शोकाकुल परिजन

शाहिल के साथ एक अज्ञात भी हैआरोपित

पुलिस में इस घटना की शिकायत मृतका की माँ ने की है। उन्होंने बताया है, “मेरी बेटी को मेरे ही गाँव के मुकर्रम का बेटा साहिल गलत निगाहों से देखता था। हमने इसका कई बार विरोध किया इसलिए वह मेरी बेटी से रंजिश रखता था। 3 मार्च को मेरी स्कूल गई बेटी को साहिल एक अन्य साथी के साथ अपनी बाइक पर बिठा ले गया। यह सब मेरी दूसरी बेटी ने देखा और घर आकर जानकारी दी। हमने अपनी बेटी को खोजना शुरू किया तो वह टोपरी के एक कच्चे रास्ते पर बेसुध हालत में मिली। उसी हालत में उसने बताया कि शाहिल ने अपने साथी के साथ मिल कर उससे रेप किया। रेप के बाद लिक्विड में कुछ डाल कर उसे पिला दिया।”

FIR Copy

शिकायत में आगे कहा गया है,”हमने साहिल को फोन किया तो उसने कहा कि तुम्हारी बहन को मैं बिजोपुरा छोड़ आया हूँ। हम बेटी को लेकर कोतवाली देहात गए। वहाँ से पुलिस सुरक्षा में सरकारी अस्पताल गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने कुछ देर बाद मेरी बेटी को मृत घोषित कर दिया।” पुलिस ने नामजद साहिल सहित एक अन्य अज्ञात पर केस दर्ज किया है। आरोपितों पर धारा 328, 302, 376 – D, और SC / ST एक्ट की धारा 3 (2) (V) के तहत केस दर्ज किया गया है।

ऑपइंडिया ने इस घटना में अब तक की अपडेट के लिए इंस्पेक्टर कोतवाली देहात सहारनपुर को सम्पर्क किया। उन्होंने बताया, “अब तक की जाँच में इस घटना में साहिल का कोई अन्य साथी प्रकाश में नहीं आया है। साहिल ने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है। मोटरसाइकिल पर वह इससे पहले भी मृतका को ले जा चुका है। पोस्टमार्टम के बाद हमें बिसरा रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा है। हमारी जाँच जारी है।”

बजरंग दल ने घटना को ‘लव जिहाद’ बताया

सहारनपुर बजरंग दल के जिला संयोजक हरीश कौशिक ने इस घटना को सुनियोजित साजिश के तहत किया गया लव जिहाद बताया है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पीड़ित दलित परिवार को प्रशासन द्वारा आर्थिक मदद देने के साथ आरोपित साहिल का केस फ़ास्ट ट्रैक में चलाने की माँग की।

बजरंग दल कार्यकर्ता

ऑपइंडिया से बात करते हुए हरीश कौशिक ने कहा कि उन्होंने अपनी माँगों से प्रशासन को अवगत करा दिया है। साथ ही वो पीड़ित दलित को न्याय दिला कर रहेंगे।

जपोरिजिया न्यूक्लियर प्लांट पर रूस का कब्जा, संयंत्र में लगी आग: राष्ट्रपति जेलेंस्की बोले- विस्फोट हुआ तो तबाह हो जाएगा यूरोप, चेर्नोबिल दोहरा रहे पुतिन

यूक्रेन औऱ रूस के बीच हो रहे महायुद्ध (Russia-Ukraine War) का शुक्रवार (4 मार्च 2022) को नौवाँ दिन है। रूसी आर्मी एक-एक कर यूक्रेन के अहम प्रतिष्ठानों पर या तो कब्जा कर रही है या फिर बमबारी कर उन्हें तबाह कर दे रही है। चेर्नोबिल परमाणु प्लांट के बाद अब रूसी सेना ने यूरोप के सबसे बड़े न्यूक्लियर पॉवर प्लांट जपोरिजिया प्लांट पर कब्जा कर लिया है। रूसी सेना की बमबारी के बाद वहाँ आग लगी हुई है और इसकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं।

इस घटना के बाद से पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। सभी को ये डर सता रहा है कि दुर्भाग्य से कहीं इस प्लांट में विस्फोट हुआ तो पूरे यूरोप में तबाही मच जाएगी। इस न्यूक्लियर प्लांट में 6 यूनिट हैं, जो इसे यूरोप का सबसे बड़ा पॉवर प्लांट बनाती हैं। यह दुनिया का नौवाँ सबसे बड़ा न्यूक्लियर प्लांट है। यह प्लांट यूक्रेन के दक्षिण में एनेर्होदर शहर में स्थित है। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अधिकारियों ने यूक्रेन से संपर्क किया है।

वहीं जपोरिजिया परमाणु संयंत्र पर रूसी कब्जे के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की ने एक बार फिर यूरोपीय यूनियन से रूस के हमले को रोकने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा किया कि रूस दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने परमाणु संयंत्र में आग लगाई है। जेलेंस्की रूस को आतंकवादी देश बताया और कहा कि यूरोप की तत्काल कार्रवाई ही अब रूसी सेना को रोक सकती है।

जेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन में कुल 15 एटॉमिक रिएक्टर हैं। इनमें विस्फोट हुआ तो सब कुछ तबाह हो जाएगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुतिन चेर्नोबिल हादसे को दोहराना चाहते हैं। आशंका जताई जा रही है कि रूस यूक्रेन के सभी परमाणु संयंत्रों पर कब्जा करना चाहता है।

क्या है चेर्नोबिल त्रासदी

सोवियत संघ के दौर में आज से करीब 36 वर्ष पहले 26 अप्रैल 1986 में चेर्नोबिल स्थित न्यूक्लियर पॉवर प्लांट में भीषण धमाका हुआ था। इससे वहाँ काम करने वाले 32 कर्मचारियों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग जल गए। इसके बाद रेडिएशन की चपेट में आने के कारण हजारों लोगों की मौत हो गई। रूस, बेलारूस और यूक्रेन के करीब 50 लाख लोग रेडिएशन की चपेट में आए थे। वहीं 30 किलोमीटर का क्षेत्र 20,000 सालों के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 तक चेर्नोबिल रेडिएशन के कारण रूस, यूक्रेन और बेलारूस में करीब 20,000 लोगों की मौत थायराइड के कैंसर के कारण हुई थी। इससे 2.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

गौरतलब है कि जपोरिजिया परमाणु पॉवर प्लांट, चेर्नोबिल परमाणु प्लांट से कई गुना बड़ा है। अगर यहाँ पर किसी भी तरह का धमाका होता है तो इससे न केवल यूक्रेन और उसके आसपास के देश प्रभावित होंगे, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया में देखा जाएगा।

‘दिल्ली में 272 वार्ड, हर वार्ड में 3 दुकानें, प्रदेश को शराब की राजधानी बना रही केजरीवाल सरकार’: बीजेपी ने घेरा, कहा- गाँधी की बात करने वाला बना दारू का ‘ठेकेदार’

दिल्ली सरकार की शराब नीति के खिलाफ भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है जिसमें केजरीवाल सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में मादक पेय और दवाओं के उत्पादन, वितरण और खपत पर रोक लगाने का निर्देश देने की माँग की गई है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, यह याचिका भारतीय जनता पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है, जिन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने पिछले सात वर्षों में शराब और नशीले पदार्थों की खपत और उत्पादन को प्रतिबंधित / नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने के बजाय, दिल्ली को ‘भारत की शराब राजधानी’ बना दिया है। उनका कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका में याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि दिल्ली में कुल 280 नगरपालिका वार्ड हैं और 2015 तक, केवल 250 शराब की दुकानें थीं यानी औसतन हर नगरपालिका वार्ड में एक शराब की दुकान और 30 वार्ड में एक भी शराब की दुकान नहीं थी। जबकि, केजरीवाल सरकार ने नई शराब नीति के तहत, शराब की दुकानों की संख्या में भारी वृद्धि करने की योजना बना रही है और यह प्रत्येक नगरपालिका वार्ड में लगभग तीन शराब की दुकानें होगी जो न केवल मनमाना और तर्कहीन है, बल्कि कानून के शासन के साथ-साथ अनुच्छेद 14 और 21 के तहत गारंटीकृत स्वास्थ्य के अधिकार का भी हनन है।

याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली को शराब की राजधानी बनाने पर तुली है। अपनी इसी नीति के तहत वह न सिर्फ रिहायशी इलाकों, राशन की दुकानों, मेन मार्किट बल्कि अस्पतालों, स्कूलों और यहाँ तक कि मंदिरों के पास भी शराब की दुकान खोलने का लाइसेंस बाँट रही है।

हाई कोर्ट में यह मामला जस्टिस DN पटेल और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच के पास लिस्टेड थी जिसे मौखिक रूप से सुनने के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 4 जुलाई तक स्थगित कर दिया है। हालाँकि मामले में दिल्ली सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है।

क्या है केजरीवाल सरकार की नई आबकारी नीति में

दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के तहत राजधानी को 32 जोन में बाँट कर 849 लाइसेंस आवंटित किए गए। इसके तहत प्रत्येक जोन में 26-27 दुकानें संचालित हैं। हर इलाके में आसानी से शराब उपलब्ध हो, इसके लिए दिल्ली के 272 वार्ड को जोन में विभाजित किया गया है। एक जोन में आठ से नौ वार्ड शामिल हैं और हर वार्ड में अनिवार्य तौर पर तीन से चार दुकानें खुलेंगी।

कभी दिल्ली को शराब माफियाओं से मुक्त कराने का दम भरने वाले केजरीवाल के आज खुलेआम हर गली-नुक्कड़ पर शराब की दुकान खोलने से लेकर होम डिलीवरी तक की घोषणा के बाद बीजेपी दिल्ली के सभी वार्डों में आम आदमी पार्टी सरकार का विरोध कर रही है।

इसके लिए बाकायदा जनमत संग्रह कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिसमें जनता भी दिल्ली सरकार के विरोध में खुलकर बोल रही है।

बीजेपी के प्रवक्ता नवीन जिंदल ने ट्वीट कर सवाल पूछा, “मोहल्ला सभा का वादा करके सत्ता में आया महाठग केजरीवाल आज हर मोहल्ले में शराब के ठेके खोल रहा है। जिससे दिल्ली की जनता बहुत परेशान है स्वराज और गाँधी जी की बात करने वाला अब शराब का ‘ठेकेदार बन बैठा है।”

बता दें कि बीजेपी लगातार दिल्ली में केजरीवाल के शराब नीति का विरोध कर रही है। हाल ही में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और केजरीवाल सरकार को घेरते हुए सवाल पूछा था, “उप मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि दिल्ली के मुख्यमंत्री क्या बोलते हैं! अरविंद केजरीवाल ने अपनी पुस्तक ‘स्वराज’ में लिखा था कि शराब का एक ठेका खोलने पर नेताओं और अफसरों की जेब भरी जाती है। दिल्ली में हजारों की संख्या में ठेके खोले गए हैं, तो आप की सरकार ने कितनी घूस खाई है?”

वहीं आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास भी कई बार केजरीवाल की शराब नीति के लिए उन्हें लताड़ लगा चुके हैं। कुमार विश्वास ने तब ट्वीट करते हुए लिखा था, “पीनेवालों की उम्र 21 से 18 करने और 1000 नए ठेके खुलवाने की नीति लागू करने की सिफारिश लेकर 2016 में दिल्ली शराब माफिया, दारू जमाखोर विधायक के साथ मेरे पास आया था। मैंने दुत्कार कर भगाया था और दोनों नेताओं को चेताया था। अब छोटेवाले के साले ने 500 करोड़ की डील में मामला सेट कर लिया है।”

राजस्थान के कॉन्ग्रेस MLA का ऑडियो वायरल, 37 मिनट में 103 बार गाली: SHO से कहा- मेरे अनुसार काम नहीं करेगा तो सस्पेंड करा दूँगा

राजस्थान (Rajasthan) के चित्तौड़गढ़ के बेगूं से कॉन्ग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह बिधूड़ी (Congress MLA Rajendra Singh Bidhuri) का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह SHO के साथ गाली-गलौज कर रहे हैं और उन्हें बर्खास्त कराने की धमकी दे रहे हैं। बिधूड़ी अतिक्रमण के एक मामले में उनके अनुसार धारा नहीं जोड़ने से नाराज थे।

बिधूड़ी ने 37 मिनट के ऑडियो में 103 बार गंदी-गंदी गालियाँ दीं रहे और भैंसरोगढ़ थाना के SHO संजय गुर्जर (Sanjay Gurjar) उनसे गाली नहीं देने की गुजारिश करते रहे। जब विधायक नहीं माने तक उन्होंने फोन काट दिया। बाद उन्होंने जिले के एसपी को आवेदन पत्र देकर अपना स्थानांतरण पुलिस लाइन करा लिया। यह ऑडियो दो दिन पुराना बताया जा रहा है।

ऑडियो वायरल होने के बाद संजय गुर्जर ने विधायक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। इसके साथ ही उन्होंने चितौड़गढ़ की एसपी प्रीति जैन को आवेदन देकर अपना स्थानांतरण पुलिस लाइन में करा लिया है। गुर्जर का कहना है कि वे पुलिस में गाली सुनने के लिए नहीं आए हैं। वह विधायक के दबाव में काम नहीं कर सकते।

उधर विधायक राजेंद्र बिधूड़ी का कहना है कि उन्होंने थानाधिकारी को गाली नहीं दी है और वायरल ऑडियो फर्जी है। उनका कहना है कि वे कभी गाली नहीं ही देते। उन्हें बदनाम करने के लिए यह काम किया गया है।

ऑडियो में विधायक के दबाव पर SHO कहते नजर आ रहे हैं कि जब 120बी का कोई केस बन ही नहीं रहा तो वे जबरदस्ती कैसे कर दें। वे कह रहे हैं कि उन्हें भले फाँसी पर चढ़ा दिया जाए, लेकिन वह गलत काम नहीं करेंगे। इस पर विधायक बिधूड़ी ने संजय गुर्जर को 15 दिन में बर्खास्त करने की धमकी दी।

इस मामले में एसपी प्रीति जैन का कहना है कि ऑडियो में किसके बारे में बातचीत हो रही है, यह पूरी तरह से नहीं पता। रावतभाटा में कोई मामला दर्ज किया गया था, जिसकी जाँच संजय गुर्जर द्वारा की जा रही थी। फाइल मँगवाई गई है, उसके बाद ही पता चलेगा कि मामला क्या है?

क्या है मामला

दैनिक भास्कर के मुताबिक, रावतभाटा के रहने वाले एक व्यक्ति की लोठियाना गाँव में खेती की जमीन है, जिसको लेकर खिलाफ अतिक्रमण के तहत धारा 91 में कार्रवाई भी चल रही है। इसका मामला भैसरोड़गढ़ थाने में दर्ज कराया गया। इस मामले में यह कहते हुए 420 बी का मामला बनाने का दबाव बनाया जा रहा था कि सरकारी खेती की भूमि को ठेके पर दे दिया गया है।

इस मामले में कब्जाधारी संजय वाधवा ने हाईकोर्ट में रिट लगाकर जमानत ले ली। इससे विधायक नाराज हो गए। वाधवा के परिवार के साथ रावतभाटा में भी अतिक्रमण की कार्रवाई हुई तो उसमें भी स्टे मिल गया। खबर है कि शायद इसी बात पर विधायक खफा होकर थानेदार पर धमका रहे थे।

पाकिस्तान: पेशावर की मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान आत्मघाती ब्लास्ट, 57 मरे- 200 घायल

पाकिस्तान के पेशावर में हुए आत्मघाती हमले में 57 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि जुमे की नमाज के दौरान भीड़ में से एक शख्स ने खुद को विस्फोट के साथ उड़ा दिया। इस घटना में 200 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों को एंबुलेंस के जरिए लेडी रीडिंग अस्पताल पहुँचाया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पेशावर स्थित मस्जिद में उस वक्त आत्मघाती हमला हुआ जब जुमे की नमाज के लिए काफी भीड़ थी, अचानक भीड़ में से एक व्यक्ति ने खुद को विस्फोट के साथ उड़ा दिया। विस्फोट से पहले गोलियों की आवाज भी सुनाई दी थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और दूसरे सुरक्षाबलों ने धमाके वाले इलाके की घेराबंदी कर दी है। पुलिस को शक है कि इस घमाके को अंजाम देने वाले आत्मघाती हमलावर के सहयोगी आसपास मौजूद हो सकते हैं। लेडी रीडिंग अस्पताल के प्रवक्ता का कहना है कि 10 घायलों की हालत गंभीर है। ऐसे में मरने वालों की तादाद और ज्यादा होने की संभावना है।

हालाँकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि धमाके के पीछे किसका हाथ है। पुलिस की टीम विस्फोट स्थल पर पहुँच गई है। स्थानीय लोगों ने कहा कि इस इलाके में कई बाजार हैं और आमतौर पर जुमे की नमाज के समय भीड़ बहुत ज़्यादा होती है।

गौरतलब है कि इस हमले के चंद घंटे पहले ही ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम पाकिस्तान पहुँची है। उनकी सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंता जताई जा रही थी। अब इस हमले से पाकिस्तान की परेशानी फिर से बढ़ने की आशंका है।

बता दें कि 2009 में श्रीलंका टीम पर आतंकी हमला होने के बाद करीब 10 साल तक पाकिस्तान में कोई टेस्ट मैच नहीं हुआ था। टीम से वर्ल्ड कप 2011 की मेजबानी भी छीन गई थी। वहीं ऑस्ट्रेलिया का दौरा पाकिस्तान क्रिकेट के लिए छवि सुधारने का बड़ा मौका बताया जा रहा था, लेकिन अब इसपर भी सवाल उठ रहे हैं।

जिनकी जिंदगी पर बनी है ‘झुंड’ उस विजय बरसे को जानते हैं आप? पर्दे पर अमिताभ बच्चन निभा रहे किरदार, देखकर रो पड़े थे आमिर खान

अमिताभ बच्चन की ‘झुंड’ (Jhund) शुक्रवार (4 मार्च 2022) को रिलीज हो गई। इस स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म को नागराज मुंजले ने डायरेक्ट किया है। यह फिल्म एक रियल लाइफ हीरो के पर आधारित है। ये हैं- रिटायर्ड स्पोर्ट्स प्रोफेसर विजय बरसे (Vijay Barse)। 77 साल के बरसे ने अपनी जिदंगी झुग्गियों में रहने वाले बच्चों का जीवन सँवारने में लगा दिया।

36 साल बतौर स्पोर्ट्स प्रोफेसर नौकरी करने वाले बरसे का यह सफर 2001 में शुरू हुआ। वे आमिर खान के शो ‘सत्यमेव जयते’ के एक एपिसोड में भी नजर आए थे। इस शो में उन्होंने बताया था कि 2000 में नागपुर के हिसलोप कॉलेज में खेल शिक्षक के रूप में काम करते हुए उन्होंने एक बार बारिश में कुछ बच्चों को टूटी हुई बाल्टी को लात मारकर खेलते हुए देखा था। इसे देख उनके दिमाग में एक आइडिया आया और फिर उस आइडिया को जमीन पर उतारने में वे जुट गए।

बरसे के मुताबिक जब उन्होंने उन बच्चों को पहली बार फुटबॉल खेलने के लिए बुलाया तो वे असहज थे। उन्होंने मटमैले कपड़े पहने हुए थे। फिर उन्होंने खुशी-खुशी फुटबॉल ले लिया। इसके बाद उन्होंने अपने कुछ सहयोगियों के साथ एक टूर्नामेंट आयोजित करने की प्लानिंग की, जिसमें सिर्फ झुग्गी-झोपड़ी वाले बच्चे ही भाग ले सकते थे।

2001 में उन्होंने स्मल सॉकर की स्थापना की और नागपुर में एक टूर्नामेंट आयोजित किया। इस टूर्नामेंट में 128 टीमों ने भाग लिया था। इसके बाद उन्होंने इन बच्चों को एक खेल मैदान दिया और महसूस किया कि जब तक ये बच्चे मैदान में है तब तक वे दुनिया की बुराइयों से दूर रहेंगे। तब उन्होंने सोचा कि ये बच्चे राष्ट्र के भविष्य निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान दे सकते हैं। एक टीचर के तौर पर वे और क्या दे सकते थे। इस तरह उन्होंने 2002 में एक झोपड़पट्टी फुटबॉल की जर्नी की शुरुआत की। 

उनकी बनाई झोपड़पट्टी फुटबॉल की जर्नी बाद में स्लम सॉकर के नाम से फेमस हुई। उनके कॉलेज के एक साथी ने पूछा कि उन्होंने इस टीम का नाम ‘झोपड़पट्टी फुटबॉल’ क्यों रखा। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा था, “मैं जानता था कि सभी खिलाड़ी झोपड़पट्टी के रहने वाले हैं और मुझे केवल उनके लिए काम करना है इसलिए मैंने यह नाम चुना।”

धीरे-धीरे ये फुटबॉल टीम आगे बढ़ने लगी। शहर और जिला स्तर पर खेलने लगी। 2003 में विजय बरसे लाइमलाइट में आए। उनके काम को बड़े लेवल पर देखा जाने लगा। स्लम सॉकर लीग राष्ट्रीय स्टर पर पहचानी जाने लगी। कई कोच और बच्चे इससे जुड़ना चाहते थे। शुरुआती दिनों में बरसे के पास कोई  स्पॉन्सर नहीं था, जो उनके प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए फंड दे सके। इसी दौरान 2006 में जब अमेरिका में रहने वाले उनके बेटे ने एक अमेरिकी अखबार में पिता के बारे में एक लेख पढ़ा तो वो अपने पिता की मदद के लिए देश लौट आए।

2007 में बरसे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि स्लम सॉकर का राष्ट्रीय टूर्नामेंट बड़े लेवल पर कवर किया गया था। फिर होमलेस वर्ल्डकप के डायरेक्टर एंडी हुक ने उन्हें केप टाउन बुलाया था। यहाँ वे साउथ अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला से मिले थे। उन्होंने कहा, “मुझे उस दिन मेरे काम के लिए सबसे बड़ी पहचान मिली, जब उन्होंने मुझ पर हाथ रखा और कहा- मेरे बेटे, तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो।”

2018 में इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “मैं एक खेल शिक्षक हूँ। लेकिन मैं फुटबॉल के विकास को बढ़ावा नहीं दे रहा हूँ। मैं फुटबॉल के जरिए विकास को बढ़ावा दे रहा हूँ।” 2012 में उन्हें सचिन तेंदुलकर ने रियल हीरो पुरस्कार से सम्मानित किया था। 2016 में स्लम सॉकर ने फीफा डायवर्सिटी समेत कई अवॉर्ड अपने नाम किया। 2019 में बरसे को नागभूषण पुरस्कार से नवाजा गया।

फोटो साभार: विजय बरसे फेसबुक

बरसे को रिटायरमेंट के बाद 18 लाख रुपए मिले थे। उन्होंने इस पैसे से नागपुर से लगभग 9 किमी दूर जमीन खरीदी और यहाँ पर एक फुटबॉल एकेडमी का निर्माण किया, ताकि वह बच्चे भी फुटबॉल खेल सकें जो इस सुविधा से वंचित हैं।

अब इसी पूरी जर्नी को नागराज मंजुले ने अपनी फिल्म में उकेरा है। विजय बिरसे ने ETimes से बातचीत के दौरान कहा, “फिल्म का ट्रेलर देखकर मैं थोड़ा प्रभावित हुआ था। फिल्म में भावनाओं को बखूबी दिखाया गया है। फिल्म में मेरे ही कुछ स्लम सॉकर स्टूडेंट्स को देखकर बहुत खुशी हुई। साथ ही नागपुर की संकरी गलियों को भी अच्छे से दिखाया गया है। मेरी यात्रा, जो काफी मुश्किलों और चुनौतियों से भरी थी, उसे बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा, जिसे दिखने के लिए मैं बहुत उत्साहित हूँ।”

हाल ही में फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई थी। इस स्क्रीनिंग में आमिर खान भी शामिल हुए थे। अभिनेता का कहना है कि इस फिल्म ने अपनी शानदार प्रतिभा से उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित कर दिया है। इस दौरान वह अपने आँसू रोक नहीं पाए। टी-सीरीज ने एक्टर का वीडियो शेयर किया था। जिसमें उन्हें आँसू पोंछते हुए देखा जा सकता है। 

आमिर खान इस वीडियो में कहते हैं, “मेरे पास अल्फाज नहीं हैं। जिस तरह से आपने लड़के-लड़कियों के इमोशन को दिखाया है, वह शानदार है। जिस तरह से बच्चों ने काम किया, वह अविश्वसनीय है।” उन्होंने इसे अमिताभ बच्चन की ग्रेट फिल्मों से एक बताया है।

‘झारखंड में इसलिए उद्योगपति निवेश नहीं करते’: अडानी से जुड़े मामले पर HC ने हेमंत सोरेन सरकार को लताड़ा, कहा- ये कैसा राज्य है…

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने अडानी पावर (Adani Power) नाम की कंपनी को बिना अधिग्रहण किए निजी जमीन को पट्टे पर देने और बाद में उस पर खनन करने से रोकने पर झारखंड (Jharkhand) की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) को कड़ी फटकार लगाते हुए इसे धोखाधड़ी बताया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार के इस रवैए के कारण कोई भी उद्योगपति झारखंड में आकर निवेश नहीं करना चाहता।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल (DN Patel) और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा (Neena Bansal Krishna) की खंडपीठ ने झारखंड सरकार से कहा, “यह धोखाधड़ी है। आपने जमीन का अधिग्रहण नहीं किया, फिर भी आपने निजी जमीन याचिकाकर्ता (अडानी) को दे दी। आप उस संपत्ति को पट्टे पर कैसे दे सकते हैं, जो आपकी है ही नहीं?” कोर्ट ने कहा कि पिछले साल सितंबर में नोटिस जारी करने के बावजूद सरकार की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि वह राज्य सरकार के उन अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश देगा, जिन्होंने इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। इसके साथ ही कोर्ट ने झारखंड के मुख्य सचिव (Chief Secretary) से इसकी कीमत वसूल करने की धमकी दी है।

मुख्य न्यायाधीश ने झारखंड सरकार से कहा, “आपने 92.5 करोड़ रुपए लेकर वह जमीन दी है, जिसका अधिग्रहण किया जाना बाकी है और जो वन भूमि है। केवल 17 हेक्टेयर सरकार का है और वह भी जंगल है। आपने वादा की गई जमीन का केवल 2% या 3% दिया है और आपने 92.5 करोड़ रुपये ले लिए। यह एक आपराधिक कृत्य है।”

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मैं आपके अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश पारित करूँगा। यह धोखाधड़ी है। यह कैसा राज्य है, जहाँ याचिकाकर्ता को ऐसी जमीन दी गई है, जिसका अभी अधिग्रहण किया जाना बाकी है।” कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का एक मौका देने की बात कही और अगली सुनवाई के लिए 29 मार्च की तारीख तय की।

झारखंड सरकार पर आरोप है कि साल 2015 में जीतपुर कोयला ब्लॉक में 295 हेक्टेयर भूमि अडानी को खनन के लिए पट्टे पर दी थी। इसके लिए अडानी पावर ने राज्य सरकार को 92.90 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी दी थी। बाद में पता चला कि इस कोयला ब्लॉक का लगभग 141 हेक्टेयर वन भूमि और 137 हेक्टेयर निजी भूमि है। वहीं, सरकार के 17 हेक्टेयर की हिस्से की भूमि का एक बड़ा हिस्सा भी वन भूमि के अंतर्गत आता है।

बाद में झारखंड सरकार ने यह कहते हुए खनन पर रोक लगा दिया कि वन विभाग से मंजूरी नहीं मिली है। साथ ही निजी भूमि के लिए भूमि अधिग्रहण समाप्त हो गया है और इसके लिए नए सिरे से कार्यवाही की जरूरत है।

इस मामले में अडानी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने सितंबर में एक अंतरिम आदेश पारित किया था और अधिकारियों को अडानी के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया गया था। इसके साथ ही अडानी द्वारा दिए गए बैंक गारंटी को भी भुनाने से राज्य को रोक दिया था।

‘मेवात जैसे हिंदुओं के कई कब्रगाह बन गए थे’: हरियाणा में जबरन धर्मांतरण पर नकेल कसने के लिए खट्टर सरकार ला रही कानून, VHP ने सराहा

मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए कानून लेकर आई है। शुक्रवार (4 मार्च 2022) को गृह मंत्री अनिल विज ने इस संबंध में विधानसभा में बिल पेश किया। ‘हरियाणा विधि विरूद्ध धर्म परिवर्तन निवारण विधेयक-2022’ में जबरन धर्मांतरण पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य सरकार के इस कदम की सराहना की है।

वीएचपी के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा है कि इस बिल से राज्य सरकार ने अपने दृढ़ संकल्प को दिखाया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद राज्य में लव जिहाद और धर्मान्तरण के जरिए देश के खिलाफ साजिश करने के मामलों पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा, “हरियाणा सदा से एक धार्मिक क्षेत्र रहा है। यही वो क्षेत्र है जहाँ मानव सभ्यता फली और फूली। हालाँकि, बीते कुछ समय से राज्य में अवैध धर्मान्तरण की गतिविधियाँ सामने आई हैं। अवैध धर्मांतरण ने मेवात जैसे हिंदुओं के कई कब्रगाह बना दिए थे।”

जैन के मुताबिक, “हरियाणा के इन क्षेत्रों से समय-समय पर कई देशविरोधी तत्वों को पकड़ा गया है। इन सभी कृत्यों को मुल्ला और मौलवियों ने न केवल बढ़ावा दिया, बल्कि मुस्लिम समुदाय को भी कट्टरता में धकेलने का षड्यंत्र कर रहे हैं। ईसाई मिशनरी लगातार धोखा या लालच देकर भोले-भोले लोगों का धर्मान्तरण करा रहे हैं।” जैन का कहना है कि हरियाणा की कानून-व्यवस्था को कई बार देश विरोधी लोगों ने चुनौती देने का काम किया है। लेकिन अब इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद सामाजिक सौहार्द और शाँति का माहौल बन सकेगा।

हरियाणा धर्मान्तरण बिल

गौरतलब है कि फरवरी की शुरुआत में मुख्यमंत्री खट्टर ने खुद ट्वीट कर जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए ‘गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध बिल-2022’ को कैबिनेट से मंजूरी मिलने की जानकारी दी थी। गृह मंत्री अनिल विज ने बिल को सदन में पेश करते हुए बताया कि इसमें में सजा का प्रावधान तीन अलग श्रेणियों में किया गया है। नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से जुड़े हुए जबरन धर्मांतरण करने के मामलों में ज्यादा सजा का प्रावधान किया गया है।

धर्म छिपाकर शादी और धर्मांतरण करने पर अधिकतम दस साल की सजा और तीन लाख रुपए जुर्माने का बिल में प्रावधान है। वहीं सामूहिक धर्मांतरण कराने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है। इस कानून के तहत धर्मांतरण के पहले डीसी को सूचना देनी होगी।