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‘मर चुकी’ माँ के कोख से पैदा हुए थे पुतिन, हिलेरी क्लिंटन की किताब से खुलासा: ऐसी कहानी, जो रूसी राष्ट्रपति ने खुद सुनाई

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine War) के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के माता-पिता को लेकर एक अनोखी कहानी वायरल हो रही है। कई सारे सोशल मीडिया साइटों पर तेजी से वायरल हो रही पोस्ट में द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान पुतिन के माता-पिता के बारे में बताया गया है। साथ ही, इस पोस्ट में पुतिन अपनी माँ मारिया इवानोव्ना पुतिना की गोद में बैठे दिखाई दे रहे हैं।

इस वायरल पोस्ट को लेकर कहा जा रहा है कि अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने एक किताब लिखी थी, उसी में इस बात का खुलासा किया गया है। वायरल पोस्ट में देखा जा सकता है कि अपने बालपन में पुतिन अपनी माँ की गोद में बैठे हैं। इसमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके माता-पिता के जीवन को लेकर जानकारी साझा की गई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट

हिलेरी क्लिंटन की किताब ‘हार्ड च्वॉइस’ 2014 में रिलीज हुई थी। इसमें क्लिंटन ने एक घटना को लेकर दावा किया है कि उन्हें पुतिन ने बताया था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान लेनिनग्राद की घेराबंदी के दौरान उनकी माँ को गलती से मरा मना लिया गया था, लेकिन उनके पिता ने उन्हें बचा लिया था।

किताब में क्लिंटन लिखती हैं, “उन्होंने अपने माता-पिता को लेकर ऐसी कहानी बताई, जिसके बारे में मैंने कभी नहीं सुना या पढ़ा था। युद्ध के दौरान एक छोटी-सी छुट्टी पर पुतिन के पिता अपने घर आए थे। जैसे ही वो उस अपार्टमेंट में पहुँचे तो उन्हें लाशों का एक ढेर दिखा। लोग उन लाशों को ट्रकों में लाद रहे थे। जैसे ही वो पास गए तो उन्हें एक महिला का जूता दिखा और उसे देखकर वे अपनी पत्नी को पहचान गए। वो दौड़कर गए और अपनी पत्नी की बॉडी की माँग की। पुतिन के पिता ने अपनी पत्नी को अपनी बाहों में लेकर देखा तो वो जिंदा मिलीं। इसके बाद पत्नी को लेकर वो अपार्टमेंट में गए और उनका इलाज किया। उस घटना के 8 साल बाद 1952 में व्लादिमीर पुतिन का जन्म हुआ।”

क्लिंटन ने किताब में कहा कि उन्होंने रूस में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत माइक मैकफॉल को ये कहानी सुनाई थी, जिसको लेकर उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्होंने ये नहीं सुना था। वो आगे लिखती हैं, “निश्चित रूप से मेरे पास पुतिन की कहानी को सत्यापित करने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन मैंने इसके बारे में अक्सर सोचा।”

पुतिन की आत्मकथा अलग ही किस्सा बयाँ कर रही

हिलेरी ने भले ही पुतिन के हवाले से ये दावे किए हों, लेकिन साल 2000 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा ‘फर्स्ट पर्सन: एन एस्टोनिशिंगली फ्रैंक सेल्फ-पोर्ट्रेट बाय रशियाज प्रेसीडेंट’ में पुतिन ने अन्य बातों के अलावा अपने परिवार, अपने बचपन और केजीबी में अपने करियर के बारे में संक्षेप में बात की है।

पुतिन ने इसमें कहा था कि उनकी माँ भूख के कारण बेहोश हो गई थी और लोगों ने उन्हें लाशों के पास लेटा दिया था। इसके अलावा उन्होंने ये भी दावा किया था कि उनके पिता युद्ध के अग्रिम मोर्चे पर लड़ रहे थे न कि वो घर में थे। अपनी आत्मकथा में पुतिन ने दावा किया था कि पूरे समय उनके पिता युद्ध के मैदान में थे।

पुतिन अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, “मेरे चाचा ने उनकी मदद की। वह उन्हें अपना भोजन खिलाते थे। एक बार कुछ समय के लिए चाचा का ट्रांसफर कहीं और कर दिया गया था, जिसके कारण माँ भुखमरी की शिकार हो गई थीं। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि एक बार मेरी माँ भूख से बेहोश हो गई। लोगों ने सोचा कि वह मर गई हैं और उन्हें लाशों के साथ बाहर कर दिया। सौभाग्य से माँ समय पर जाग गईं और कराहने लगीं। किसी चमत्कार से वह जीवित रहीं। ये उन्होंने लेनिनग्राद की पूरी नाकाबंदी के दौरान किया। ”

वहीं एक अन्य किस्सा यह भी है कि पुतिन के पिता ने भूख से बेहाल अपनी पत्नी के साथ अस्पताल में भर्ती होने पर अपने पास रखे थोड़े से खाना को उनके साथ साझा किया था।

माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास पर चुनाव आयोग की कार्रवाई, चुनाव प्रचार पर अगले 24 घंटे का प्रतिबंध: अफसरों को धमकी देने वाला वीडियो हुआ था वायरल

माफिया मुख़्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी का अफसरों को धमकी देने वाला विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में वो अखिलेश यादव की सरकार आने के बाद अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग 6 माह न करने और उनसे हिसाब-किताब करने की धमकी दे रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस बयान को आपत्तिजनक मानते हुए उनके अगले 24 घंटों तक चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है। यह आदेश आज शाम 7 बजे से कल शाम 7 बजे तक लागू रहेगा। चुनाव आयोग का यह आदेश आज 4 मार्च (शुक्रवार) को आया है।

आदेश चुनाव आयोग

बता दें कि अब्बास अंसारी सुहेलदेव भारतीय समाजपार्टी के टिकट पर मऊ से प्रत्याशी हैं। उनके इस बयान पर मऊ पुलिस पहले ही केस दर्ज कर चुकी है। अब्बास पर धारा 171च, 506 IPC के तहत केस दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि एक भीड़ को सम्बोधित करते हुए अब्बास अंसारी धमकी भरे लहजे में कहा था , “सरकार आने पर 6 महीने तक ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं की जाएगी, पहले हिसाब होगा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से ये कह कर आया हूँ कि 6 महीने तक किसी की ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं होगी भैया। जो यहाँ है, वो यहाँ ही रहेगा। पहले हिसाब-किताब होगा। उसके बाद उनके जाने के टिकट पर मुहर लगाया जाएगा।”

‘कल की बातें भूल जा, ल*ड़ा पकड़ के झूल जा’: अपने नए ‘कॉमेडी’ शो में कुणाल कामरा की सुप्रीम कोर्ट पर अपमानजनक टिप्पणी

कॉमेडियन का ढोंग करने वाले प्रोपेगेंडानिस्ट कुणाल कामरा (Kunal Kamra) ने अपने नए ‘कॉमेडी’ शो ‘बी लाइक’ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर अपमानजनक टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ अवमानना चल रहे केस को लेकर कामरा ने कहा, “प्रिय सुप्रीम कोर्ट! कल की बातें भूल जा, ल*ड़ा पकड़ के झूल जा।”

सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से पहले कामरा ने कहा कि उनके मन में शीर्ष न्यायालय से अधिक सम्मान शॉपिंग मॉल के फूड कोर्ट के लिए है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ‘ब्राह्मण बनिया’ का मामला है और यह विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

कामरा ने कहा, “देश का सर्वोच्च न्यायालय, जिसे मैं भी नहीं मानता… मैं एक शॉपिंग मॉल के फूड कोर्ट का अधिक सम्मान करता हूँ … कम से कम यह विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करता है। देश का सर्वोच्च न्यायालय ‘ब्राह्मण-बनिया’ का मामला है। मैं इसका सम्मान नहीं करता।”

सुप्रीम कोर्ट ने कुणाल कामरा के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही शुरू की

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2020 में कुणाल कामरा को एक लिबरल ‘हीरो’ या ‘शहीद’ बनने की कोशिश में न्यायपालिका के खिलाफ अवमानना वाली ​​टिप्पणी करने के बाद कार्रवाई को लेकर एक नोटिस जारी किया था। अपने एक ट्वीट में उन्होंने तत्कालीन सीजेआई अरविंद बोबडे को अपनी मध्यमा उंगली दिखाई थी और दूसरे ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भगवा रंग में रंगते हुए आरोप लगाया था कि यह एनडीए सरकार की कठपुतली बन गई है।

पहले ट्वीट में कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की तुलना सुप्रीम जोक से की। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा, “जिस गति से सुप्रीम कोर्ट ‘राष्ट्रीय हितों’ के मामलों में काम करता है, अब समय आ गया है कि हम महात्मा गाँधी की तस्वीर को हरीश साल्वे की तस्वीर से बदल दें।”

अपने तीसरे ट्वीट में उन्होंने जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की तुलना ‘प्रथम श्रेणी के यात्रियों को शैंपेन परोसने वाले फ्लाइट अटेंडेंट’ से की, जो तेज सेवा देता है। जबकि आम लोगों को यह नहीं पता था कि वे कभी सवार होंगे या बैठे होंगे, सेवा की तो बात ही छोड़िए।” आखिरी ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट या उसके जजों का जिक्र करते हुए वकीलों को उनके लिए ‘माननीय’ का इस्तेमाल बंद करने के लिए उकसाया। उन्होंने कहा, “यहाँ सम्मान ने बहुत पहले साथ छोड़ दिया है।”

कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की इमारत की एक मॉर्फ्ड तस्वीर भी पोस्ट की थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के प्रवेश द्वार पर बीजेपी का झंडा फहराया गया था। मुंबई के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कहा कि अगर अदालत ने कामरा द्वारा दिए गए अपमानजनक बयानों पर कार्रवाई नहीं की तो उनके लाखों अनुयायी उन्हीं के रास्ते पर चलेंगे और जब फैसला उनके पक्ष में नहीं होगा तो इसी तरह के आरोप लगाएँगे।

नाबालिग हिन्दू लड़की को नौकरी के नाम पर बिहार से बुलाया रतलाम, फिर बनाने लगा धर्मान्तरण का दबाव: आरोपित अरबाज गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के धार जिले में बिहार की एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और धर्मान्तरण के दबाव की खबर है। आरोप अरबाज खान नाम के एक युवक पर है जिसने पीड़िता को नौकरी दिलाने के बहाने बुलाया था। दोनों में जान पहचान सोशल मीडिया से होना बताया जा रहा है। पुलिस ने आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया है। घटना 1 मार्च की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नाबालिग पीड़िता को अरबाज़ ने शादी का लालच दिया था। आरोपित रतलाम का मूल निवासी बताया जा रहा है। वह लड़की को लेकर औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर प्रीति नगर कॉलोनी गया। वहाँ किराए पर कमरा लेने गए अरबाज़ और लड़की के परिचय पत्र में धर्म अलग-अलग देख कर मकान मालिक को शक हुआ। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने अरबाज़ को हिरासत में ले कर लड़की के परिवार वालों को बिहार से बुलवाया। लड़की ने बताया कि उस पर अरबाज़ धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। वो नौकरी पाने के लिए मुस्लिम बनना जरूरी बता रहा था।

आरोपित अरबाज़ की गिरफ्तारी की पुष्टि पीथमपुर सेक्टर 1 के TI लोकेश सिंह भदौरिया ने भी की है। उन्होंने बताया, “अरबाज़ नाबालिग लड़की को ले कर पीथमपुर आया था। इसकी सूचना पर पुलिस ने अरबाज़ को हिरासत में लेते हुए लड़की के परिवार वालों को बिहार से बुलवाया। लड़की के पिता द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर अरबाज़ के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में जाँच जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित पर धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम और छेड़छाड़ का भी केस दर्ज हुआ है।

24 साल बाद आई, 5 दिन में ही पाकिस्तान से वापस जाने पर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम कर रही विचार: रावलपिंडी में टेस्ट, पेशावर की मस्जिद में फिदायीन हमला

पाकिस्तान औऱ ऑस्ट्रेलिया के बीच रावलपिंडी में टेस्ट मैच खेला जा रहा है, लेकिन जिन सुरक्षा कारणों का अंदेशा जताया गया था वो सही साबित हो रहे हैं। शुक्रवार (4 मार्च 2022) को पाकिस्तान के एक शिया मस्जिद में फिदायीन हमला हुआ, जिसमें कम-से-कम 56 लोगों की मौत होने की खबर है। इसके अलावा लगभग 196 लोग घायल हो गए हैं। इनमें कई लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस बीच हालात को देखते हुए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपनी टीम की सुरक्षा को रिव्यू करना शुरू कर दिया है।

लोकल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मामला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर की है। कुचा रिसालदार इलाके के किस्सा ख्वानी बाजार स्थित शिया मस्जिद में जुमे (शुक्रवार) की नमाज के लिए करीब 150 की संख्या में नमाजी इकट्ठा हुए थे। जब मस्जिद के अंदर भीड़ थी, तभी आत्मघाती हमलावर आया और सुरक्षाकर्मियों और रोकने वालों पर गोलियाँ बरसाने लगा। इसके बाद अंदर जाकर खुद को उड़ा लिया।

अधिकारियों का कहना है कि इस वारदात को अंजाम देने में दो हमलावर शामिल थे। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि काले रंग की सलवार कमीज पहने एक हमलावर शहर के किस्सा ख्वानी बाजार में मस्जिद तक पैदल पहुँचा और पिस्तौल लहराते हुए दिखाई दिया। मस्जिद में घुसने से पहले उसने गेट पर खड़े एक पुलिसकर्मी पर गोलियाँ चला दी। मौका मिलते ही वो मस्जिद के अंदर घुस गया और वहाँ पर खुद को विस्फोट कर उड़ा दिया।

खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस महानिरीक्षक मोअज्जम जाह अंसारी ने कहा कि सुरक्षा के लिए मस्जिद में दो पुलिसकर्मियों को नियुक्त किया गया था। इस हमले में एक कॉन्स्टेबल की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमले में करीब पाँच से छह किलोग्राम विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। बहरहाल अभी तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह वही शहर है जहाँ मार्क टेलर ने 1998 में अपना प्रसिद्ध नाबाद 334 रन बनाया था। बहरहाल आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस हमले की निंदा की है। बहरहाल ऑस्ट्रेलियाई टीम इस्लामाबाद में ठहरी है और उसे राष्ट्रपति शैली की सुरक्षा दी गई है।

24 साल बाद पाकिस्तान के दौरे पर ऑस्ट्रेलिया

गौरतलब है कि 24 साल पहले साल 1998 में ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान के दौरे पर आई थी। उसके बाद 2009 में श्रीलंका की टीम पर पाकिस्तान में आतंकी हमला हुआ। इसके बाद से तो कोई भी विदेशी टीम सुरक्षा कारणों के चलते पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने नहीं आई थी। पिछले साल इंग्लैड और न्यूजीलैंड ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान में खेलने से इनकार कर दिया था। यहीं नहीं, दौरे से पहले ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटरों को धमकी भी दी गई थी।

पत्रकार राणा अयूब पर FIR, हिजाब का विरोध करने वाले छात्रों को बताया था आतंकी: हिन्दू IT सेल की शिकायत पर कर्नाटक पुलिस ने लिया एक्शन

हिजाब विवाद को लेकर हिंदू छात्रों को आतंकी बताने वाली विवादित और कथित पत्रकार राणा अयूब मुश्किलों में फँस गई हैं। उनके खिलाफ कर्नाटक की हुबली-धारवाड़ पुलिस ने उडुपी कॉलेज में भगवा झंडा लहराने वाले छात्रों को आतंकवादी बताने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। इससे पहले राणा अयूब पर केटो फंडरेजिंग कैम्पेन के जरिए 1.77 करोड़ रुपए जुटाकर उसमें गड़बड़ी करने के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय ने उनके अकाउंट को फ्रीज कर दिया था।

कर्नाटक में हिजाब को लेकर जारी विवाद के बीच 13 फरवरी 2022 को राणा अयूब ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में उडुपी के कॉलेज के छात्रों को आतंकी करार दिया था। इसके बाद 21 फरवरी 2022 को हिंदू संगठन ‘हिंदू आईटी सेल’ ने राणा अयूब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

बीबीसी के साथ बातचीत में राणा अयूब ने शिक्षण संस्थानों में बुर्के का विरोध करने वाले हिंदू छात्रों को आतंकी करार दिया। अपने टिपिकल आक्रामक लहजे में डींगें हाँकते हुए कथित पत्रकार ने कहा, “… अचानक से ये निगरानी रखने वाले युवा हिंदुओं का समूह क्यों है- उस मामले के लिए हिंदू आतंकवादी जो कर्नाटक में शैक्षिक परिसर में भगवा झंडे लहरा रहे हैं?”

इंटरव्यू के दौरान राणा ने सवाल किया, “एक शिक्षण संस्थान में पुरुष छात्र भगवा ध्वज क्यों लहरा हैं? इसका क्या अर्थ है?”

हिंदुओं के प्रति नफरत फैलाने वाला राणा अयूब का यह वीडियों तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद राणा अयूब के खिलाफ एक्शन लेते हुए हिंदू आईटी सेल ने शिकायत दर्ज कराई। हिंदू आईटी सेल ने पुलिस से एंटी इंडिया एलीमेंट राणा अयूब के खिलाफ इंडियन पीनल कोड की धारा 124A (देशद्रोह), 153A (शत्रुता और विभाजन पैदा करना), 295A, 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण प्रयास) और 504 ( हिंदू समुदाय का जानबूझकर अपमान) समेत कई अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज करने का अनुरोध किया था।

अयूब के खिलाफ केस दर्ज कराने के कुछ दिन पहले हिंदू आईटी सेल ने पुलिस पर शिकायत दर्ज करने से इनकार करने का भी आरोप लगाया था।

अपनी बात को साबित करने के लिए हिंदू आईटी सेल ने एक ट्वीट में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपनी शिकायत को शेयर किया था। इसमें आरोप लगाया था कि पुलिस वालों ने उनकी शिकायत दर्ज करने से पहले 36 घंटे तक इंतजार कराया था। हिंदू संगठन का आरोप था कि पुलिस ने तो राणा अयूब के खिलाफ केस दर्ज करने से भी मना कर दिया था।

विवाद बढ़ने के बाद अपनी सफाई में पुलिस के एसआई ने कहा कि उन्हें केस दर्ज करने से पहले उच्चाधिकारियों ने इसे वेरिफाई करने के लिए कहा था।

गौरतलब है कि इससे इस्लामिक प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने वाली अयूब के खिलाफ हिजाब मामले में मुबई के बांद्रा में केस दर्ज किया गया था। अयूब के खिलाफ यह केस बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील आशुतोष जे दुबे ने दर्ज कराया था।

विदेशी प्लेटफॉर्म पर झूठ फैलाने वाली राणा अयूब अपने ही देश में वित्तीय धोखाधड़ी करने के कारण भी चर्चा में थीं। हाल में 1.77 करोड़ रुपए की संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई। कथिततौर पर ये सारा पैसा उन्होंने केटो पर फंड इकट्ठा करने का नाम पर एकत्रित किया था। मगर, सारे पैसे का इस्तेमाल किए बिना उन पैसों को अयूब ने अपने अकॉउंट में रखे रखा। जब विवाद बढ़ा तो अयूब ने खुद को बेगुनाह बताया।

ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर शेन वॉर्न का 52 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन, क्रिकेट जगत में शोक की लहर

दुनिया के महानतम स्पिनरों में शामिल ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ी शेन वॉर्न का शुक्रवार (4 मार्च) को निधन हो गया। 52 वर्षीय शेन वॉर्न के निधन की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है। शेन वॉर्न के प्रबंधन ने इस बारे में जानकारी साझा की है।

वार्न के प्रबंधन ने अपने संक्षिप्त बयान कहा कि थाईलैंड के कोह समुई में एक संदिग्ध दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। शेन वॉर्न अपने विला में अचेत पाए गए थे। स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें होश में लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए।

प्रबंधन ने अपने बयान में आगे कहा कि इस दुखद घड़ी में दिवंगत का परिवार लोगों से गोपनीयता की उम्मीद रखता है और समय आने पर इसके बारे में विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

शेन वॉर्न का 15 वर्षों का शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर रहा है। उन्होंने टेस्ट में 708 टेस्ट विकेट लिए हैं। वॉर्न ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर में पहले और मुथैया मुरलीधरन के बाद दूसरा दूसरे स्थान पर थे।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट जगत के लिए पिछले 24 घंटों में यह दूसरा बड़ा झटका है। ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर रॉड मार्श का शुक्रवार को निधन हो गया। मार्श को हाल ही में दिल का एक बड़ा दौरा पड़ा था।

नारियल की आड़ में हो रहा था नशे का कारोबार, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल का ASI शोएब पिस्टल सहित गिरफ्तार: मेवाती गैंग से जुड़े तार

हरियाणा की पलवल पुलिस ने नशे की तस्करी के रैकेट में शामिल दिल्ली पुलिस से स्पेशल सेल में तैनात असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI) शोएब को गिरफ्तार किया है। शोएब अपनी कार से तस्करी में प्रयोग होने वाली ट्रकों को स्कॉर्ट करता था। उसका रैकेट मेवात के तस्करों से जुड़ा पाया गया। शोएब के पास से एक पिस्टल भी बरामद हुई है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की जानकारी 1 मार्च को दी है।

पलवल पुलिस द्वारा जारी प्रेसनोट के मुताबिक, 1 मार्च को पुलिस सनपुर चौक होडल पर चेकिंग कर रही थी। इस दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि RJ-20-GB-8399 नंबर की ट्रक में ड्रग्स के 2 तस्कर गुजरने वाले हैं। इनके नाम मोहम्मद और आसिफ बताए गए। इसी के साथ HR-96-3618 नंबर की एक कार में भी 4 तस्करों की सूचना मिली। इस कार में शोएब, आस मोहम्मद, लखपत और तौफीक के होने की जानकारी दी गई। ट्रक में गांजा होना बताया गया, जो उड़ीसा से पलवल के रास्ते फ़िरोज़पुर झिरका आना था।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस अलर्ट थी। शोएब और 3 अन्य लोगों के साथ कार गांजा लदे ट्रक को पायलट कर रही थी। आख़िरकार ट्रक और कार को रोक लिया गया। मौके पर गजटेड अधिकारी बुलाए गए। उनकी मौजूदगी में ट्रक की तलाशी हुई। ट्रक से गांजा की 44 बोरियाँ बरामद हुईं। इनका कुल वजन 1369.75 किलोग्राम है। यह गांजा नारियल के बीच छिपा कर लाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग सवा 2 करोड़ रुपए आँकी गई है। दिल्ली पुलिस के ASI शोएब के पास से पिस्टल भी बरामद हुई है।

पुलिस ने सभी 6 आरोपितों के खिलाफ NDPS एक्ट व अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस को इनके नशे के रैकेट के बाकी साथियों की भी तलाश है। इसके लिए पुलिस इन सभी का रिमांड लेने का प्रयास करेगी। SP पलवल राजेश दुग्गल के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों में मोहम्मद पुत्र अब्दुला मेव है, जो राजस्थान के खेडली नानु का निवासी है। आसिफ पुत्र बसीर भी मेव है, जो बाबुपुर तहसील हथीन जिला पलवल का निवासी है। अन्य आरोपितों में शोएब पुत्र गोरे खाँ और आस मोहम्मद पुत्र असगर सुल्तानपुर जिला नूँह मेवात के रहने वाले हैं। वहीं, लखपत पुत्र ईदरिश दोहा और तौफिक पुत्र नसरू भुडकी नंगली जिला नूँह मेवात का रहने वाले हैं।

छत्तीसगढ़: पत्रकार नीलेश शर्मा को पॉलिटिकल सटायर के लिए किया गया गिरफ्तार, कॉन्ग्रेस ने लगाया था ‘फेक न्यूज’ फैलाने का आरोप

छत्तीसगढ़ पुलिस (Chhattisgarh Police) ने गुरुवार (3 मार्च 2022) को रायपुर के पत्रकार नीलेश शर्मा को उनके लोकप्रिय राजनीतिक व्यंग्य (Political Satire) के लिए गिरफ्तार किया। उन पर छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस के नेताओं के खिलाफ फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया गया है।

नीलेश शर्मा वेब पोर्टल indiawriters.co.in और प्रिंट पत्रिका ‘इंडिया राइटर्स’ के संपादक हैं। वह ‘घुरवा के माटी’ के नाम से राजनीतिक व्यंग्य पर आधारित एक लोकप्रिय सीरीज चलाते हैं। सीरीज में छत्तीसगढ़ के कॉन्ग्रेस नेताओं और विधायकों के काल्पनिक कैरेक्टर को दिखाया जाता है।

जानकारी के मुताबिक, कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता खिलवान निषाद ने शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और उन पर राज्य के कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। पुलिस की साइबर सेल ने शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते हुए नीलेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 504, 505, 505 (1) (बी) और 505 (2) के तहत FIR दर्ज की है।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि निषाद ने पत्रकार पर बीजेपी और आरएसएस का पक्ष लेने का आरोप लगाया और कहा कि वह ‘गोदी मीडिया’ का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शर्मा अपने शो ‘घुरवा के माटी’ के जरिए कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ जानबूझकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने FIR में कहा, “पोर्टल indiawriters.co.in नकारात्मकता फैला रहा है और कॉन्ग्रेस के नेताओं एवं पदाधिकारियों के बीच मतभेद पैदा कर रहा है।”

उल्लेखनीय है कि इसी वेब पोर्टल ने पहले भी एक सीरीज चलाई थी, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह और भाजपा सरकार की काफी आलोचना की गई थी। इससे पहले अक्टूबर महीने में एक अन्य वेब पोर्टल के दो पत्रकारों को राज्य में कॉन्ग्रेस सांसदों के खिलाफ कथित रूप से सामग्री प्रकाशित करने और उनसे जबरन वसूली करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था

BJP पर ‘फ्री स्पीच’ का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाते रहे हैं राहुल गाँधी

ध्यान देेने वाली बात है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी शायद छत्तीसगढ़ में अपनी ही सरकार को ‘फ्री स्पीच’ का पाठ पढ़ाने में विफल रहे हैं, जिसका जिक्र वह अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर करते रहते हैं। गाँधी ने पहले भी कई बार भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर कथित तौर पर बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करने के लिए हमला किया है।

वर्ष 2019 में मणिपुर में हुई एक ऐसी ही घटना में पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को मणिपुर पुलिस ने राज्य सरकार पर निशाना साधने के लिए हिरासत में लिया था। तब राहुल गाँधी ने कहा था कि भाजपा के लिए ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का कोई सम्मान नहीं है। बता दें कि द फ्रंटियर मणिपुर के पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम ने मणिपुर बीजेपी प्रमुख एस टिकेंद्र सिंह की कोरोना से मौत के बाद फेसबुक पर पोस्ट किया था, “गोबर और गोमूत्र काम नहीं किया?”

इसी तरह की एक अन्य घटना में राहुल गाँधी ने बीजेपी और आरएसएस पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने का आरोप लगाया। उन्होंने वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ के समर्थन में कहा था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार है और इसमें कैरेक्टर काल्पनिक था। बता दें कि इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को कायर दिखाया गया था।

बम-बारूद रूस के, पर छलनी कर रहा दुनिया का ‘स्वयंभू रखवाला’ अमेरिका भी: यूक्रेन पर हमले का असली विलेन कौन

रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से दुनिया पर इस समय तृतीय विश्व युद्ध का ख़तरा मंडरा रहा है। देखा जाए तो ये ख़तरा सीधी तौर पर यूरोपियन यूनियन और अन्य पश्चिमी देशों पर है लेकिन इसका असर सारी दुनिया पर देखने को मिलेगा। इसके पीछे एक बड़ी वजह हॉलीवुडिया फ़िल्मों में खुद को सर्वशक्तिमान और दुनिया का रक्षक बताने वाला अमेरिका भी है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 2 महाशक्तियों, सोवियत संघ; अभी का रूस और अमेरिका का उदय होता है। ये वो दौर था जब नए-नए हथियार और तकनीकों का आविष्कार हो रहा था। तभी से दोनों देश खुद को और मज़बूत करने की होड़ में आज एक दूसरे के चिर प्रतिद्वंदी बने बैठे हैं। लेकिन रूस के मुक़ाबले अमेरिका की नीतियाँ हमेशा से ज़्यादा आक्रमणकारी रही हैं। यूनाइटेड नेशंस, विश्व बैंक, इंटरनेशनल मॉनिटरी फ़ण्ड, नाटो जैसी संस्थाओं के गठन के समय से ही अमेरिका का प्रभुत्व और काम करने का तरीक़ा इस बात को इंगित भी करता है।

इन संस्थाओं का इस्तेमाल कर किस देश की कब और कितनी सहायता करनी है, और किसका कब, कैसे और कितना फ़ायदा उठाना है, ये अमेरिका को अच्छे से आता है। इतिहास के पन्ने पलट के देख लीजिए अमेरिका ने समय-समय पर कई छोटे व गरीब देशों जैसे की वियतनाम, सीरिया, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, लीबिया वग़ैरह में सैन्य अभियानों व अभ्यासों, शांति व्यवस्था बनाने और आतंकवाद ख़त्म करने के नाम पर या तो उन्हें तबाह कर दिया या फिर उन्हें अधमरा छोड़ दिया। रूस और चाइना को छोड़ दें तो विश्व के बाक़ी देशों में अमेरिका के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है या कह सकते हैं कि अमेरिका के सामने इन दो देशों को छोड़ किसी और की बिसात नहीं है।

हालिया समय में अमेरिका के पास 80 से ज़्यादा देशों में लगभग 800 सैन्य अड्डे हैं जहाँ अमरीकी सेना की टुकड़ियाँ तैनात हैं जिनमें से कुछ अड्डे पूरी तरह से गुप्त रखे गए हैं। आज की इस स्थिति में अमेरिका की भूमिका को ऐसे समझिए, 30 में से 5 नाटो सदस्य देशों जर्मनी, तुर्की, इटली, नीदरलैंड और बेल्जियम में अमेरिका ने अपने 200 से ज़्यादा न्यूक्लियर वॉरहेड्ज़ तैनात कर रखे हैं, जो बड़ी आसानी से कभी भी रूस को अपना निशाना बना सकते हैं।

यही वजह है कि अमेरिका पिछले कई सालों से यूक्रेन को नाटो की सदस्यता लेने के लिए भड़काता आ रहा है ताकि अमेरिका को यूरोप में अपनी सैन्य उपस्थिति को मज़बूत करने के लिए ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा और मिल सके। इससे अमेरिका को न सिर्फ़ जियोपोलिटिकल फ़ायदा होगा बल्कि दुनिया की नज़रों में उसका क़द और बढ़ेगा क्योंकि तब अमेरिका रूस की सीमा पर सीना ताने खड़ा उसी को आँख दिखा रहा होगा।

यूक्रेन के नाटो में शामिल होने पर अमेरिका यूक्रेनी ज़मीन को रूस के ख़िलाफ़ आक्रमणकारी तरीक़े से इस्तेमाल कर सकता है और यही बात है जिसने पुतिन को सालों से परेशान कर रखा था इसलिए पुतिन को रशियन हितों और रूस के भविष्य की रक्षा के लिए यूक्रेन पर हमला करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यूक्रेन पर हमले के साथ ही पुतिन ने पूरे विश्व में यह भी साफ़ कर दिया था कि अगर किसी भी देश ने इस युद्ध में यूक्रेन का साथ दिया तो उसे अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा और इसी बात के डर से अभी तक किसी भी देश ने यूक्रेन को सैन्य सहायता नहीं भेजी है।

यहाँ तक कि युद्ध के आठवें दिन भी यूक्रेन की मदद के नाम पर बाइडन ने हाउस ऑफ़ कॉन्ग्रेस में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच एक बड़ी ही काइयाँ स्पीच दी और कह दिया की अमेरीकी सेना इस युद्ध में यूक्रेन का साथ नहीं देगी। कुछ मिलियन डालर्स, आधुनिक हथियारों की सप्लाई और मानवीय आधार पर मिलने वाली मदद को छोड़ दें और वास्तविकता की बात करें तो विश्व का रखवाला बनने वाले अमेरिका ने निर्दोष यूक्रेन को मरने के लिए अकेले छोड़ दिया है।

सीधी तौर पर कहें तो यूक्रेन दूसरे देशों के प्रति अमेरिका के आक्रामक रवैये का शिकार बना है। नाटो देश भले ही यूक्रेन को हथियार और सैन्य उपकरण उपलब्ध करवा रहे हों, विश्व भर में राष्ट्रपति जेलेंस्की की भले ही कितनी भी तारीफ़ की जा रही हो लेकिन ये बात समझनी बहुत ज़रूरी है कि यूक्रेन में रोज़ हो रहे जान-माल के नुक़सान का कारण सिर्फ़ पुतिन नहीं है। कहने का मतलब है पुतिन इस युद्ध के इकलौते खलनायक नहीं हैं और निश्चित रूप से ना ही सबसे बड़े खलनायक हैं।

रूस पर दुनिया भर के प्रतिबंध भले लग रहे हों लेकिन इन प्रतिबंधों से रूस को इतना नुक़सान नहीं होगा जितना फ़ायदा अमेरिका और उसकी अर्थव्यवस्था को होगा क्योंकि दोनों देश परमाणु क्षेत्र, अप्रसार-विश्व भर में दूसरे देशों द्वारा परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु परीक्षण पर अंकुश लगाना, इंटेलिजेन्स, आतंकवाद विरोधी हित साझा करते हैं। अंततः इन प्रतिबंधों से रशिया के अन्य देशों से संबंध टूटने पर अमेरिका की आर्थिक रफ़्तार को कई गुना बढ़ावा मिलेगा।

यह युद्ध रूस बनाम यूक्रेन कभी था ही नहीं, यह हमेशा से अमेरिका बनाम रूस था और है, लेकिन दुःख इस बात का है की यूक्रेन के निर्दोष लोगों को बलि का बकरा बनाया जा चुका है।