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जिस राम सेतु को तोड़ना चाहती थी UPA सरकार, वो घोषित होगा ‘राष्ट्रीय धरोहर स्मारक’? सुनवाई को राजी सुप्रीम कोर्ट, तय की तारीख़

सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु को ‘राष्ट्रीय धरोहर स्मारक (National Heritage Monument)’ घोषित करने की माँग सम्बंधित याचिका पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। बुधवार (23 फरवरी, 2022) को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 9 मार्च को इस मामले की सुनवाई की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना, जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्यीय पीठ ने भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा किए गए निवेदन के बाद ये निर्देश जारी किया।

सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले में त्वरित सुनवाई की माँग की थी। याचिका में माँग की गई है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि राम सेतु को ‘राष्ट्रीय धरोहर स्मारक’ घोषित किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश होकर भाजपा सांसद ने कहा कि इस मामले को हटाया न जाए और इस पर त्वरित सुनवाई हो। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद 9 मार्च को इसे लिस्ट किए जाने की तारीख़ मुकर्रर की और कहा कि इस पर आगे बढ़ना है या नहीं, इसे उसी दिन तय किया जाएगा।

CJI द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में डॉक्टर स्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस मामले में काउंटर-एफिडेविट दायर की है और ये मामला काफी लंबे समय से पेंडिंग पड़ा हुआ है। अप्रैल 2021 में तत्कालीन CJI एसए बोबडे ने इस मामले को अगले CJI के समक्ष सुनवाई के लिए रखे जाने की बात कही थी, जिन्होंने उसी साल 24 अप्रैल से कार्यभार संभाला। बता दें कि राम सेतु ‘लाइमस्टोन शोल्स’ की एक श्रृंखला है, जो तमिलनाडु के दक्षिणी-पूर्वी छोर पर स्थित है।

ये दक्षिण में रामेश्वरम के नजदीक स्थित पम्बन द्वीप से लेकर श्रीलंका के उत्तरी छोर पर स्थित मन्नार द्वीप तक फैला हुआ है। रामायण में इसका जिक्र है कि कैसे माँ सीता को वापस लाने के लिए भगवान श्रीराम की वानर-भालू सेना ने इस पुल का निर्माण किया था। जनवरी 2020 में ही सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कई लंबित मामलों के कारण इसे तीन महीने बाद लाने के लिए कहा गया था। स्वामी का कहना था कि 2017 में एक केंद्रीय मंत्री ने इस माँग को लेकर एक बैठक बुलाई तो थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं।

2007 में यूपीए की सरकार के दौरान ही सुब्रमण्यम स्वामी ने ‘सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट’ के खिलाफ याचिका दायर करते हुए ये माँग की थी, जिसके बाद राम सेतु की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इस परियोजना पर रोक लगा दी थी। इसके तहत 83 किलोमीटर लंबे वॉटर चैनल का निर्माण किया जाना था, जिससे मन्नार और पाल्क स्ट्रेट को जोड़ा जाता। इसके तहत इस ‘राम सेतु’ को तोडना भी पड़ता। इसके बाद केंद्र सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था की बात कही थी।

‘योगी शेर और मैं कबूतर’: शायर मुनव्वर राना ने फिर रोना रोया, कहा- चुनाव बाद गर्मी निकलने वाली है, इसलिए गर्मी स्टोर कर रहा हूँ

विवादित शायर मुनव्वर राना (Munawwar Rana) ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) शेर हैं और वह कबूतर हैं। उन्होंने कहा कि उन जैसी चिड़ियों की आवाज सुनाई नहीं देती है। उन्होंने कहा कि वह यूपी में जारी विधानसभा चुनावों में अपना वोट डालने से वंचित कर गए हैं।

दैनिक भास्कर से बातचीत में राना ने एक बार फिर विक्टिम कार्ड खेलते हुए खुद को निरीह दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “इस प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शेर हैं, वह दहाड़ रहे हैं। मैं तो एक कबूतर की तरह हूँ, मेरी कौन सुनेगा? हम जैसी चिड़ियों की आवाज कहाँ सुनाई देगी? जंगल में एक चिड़िया की हैसियत क्या है?”

इतना ही नहीं, अपने भड़काऊ और कट्टरपंथी बयानों के लिए कुख्यात पलायनवादी शायर राना ने ABP न्यूज से बात करते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने से पहले वे आज कल गर्मी स्टोर रहे हैं। उन्होंने कहा, “योगी जी ने कहा है कि गर्मी निकाल दूँगा, इसलिए मैं गर्मी स्टोर कर रहा हूँ।”

लेकर राना का आरोप है कि मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है, इसलिए वे घर बैठे हैं। राना का कहना है कि उन्होंने वोट के लिए स्थानयी सभासद से पर्ची माँगी तो उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। नाम नहीं होने के कारण वो वोट नहीं डाल पाए। मुनव्वर लखनऊ के कैंट विधानसभा सीट के मतदाता हैं और लालकुआँ के शशिभूषण स्कूल में उनका पोलिंग बूथ है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में 9 जिलों की 59 सीटों पर विधानसभा चौथे चरण का मतदान जारी है। इस चरण चरण में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, लखनऊ, बाँदा और फतेहपुर जिलों में मतदान जारी है। इस चरण में राना का विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है।

इसके पहले मुनव्वर राना ने कहा था कि यदि प्रदेश में दोबारा योगी सरकार बनती है तो वह पलायन कर जाएँगे। उन्होंने कहा था, “मैं पहले ही कह चुका हूँ कि अगर योगी आएगा तो मैं पलायन कर दूँगा। इस बात को स्पष्ट तौर पर नोट कर लिया जाए।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कारण मुस्लिमों में इतना खौफ है कि कोई बोल नहीं रहा है। उन्होंने कहा, “मुस्लिमों ने अपने घरों में छुरी रखना तक बंद कर दिया कि पता नहीं योगी उनको बंद करवा दे।”

गौरतलब है कि मुनव्वर राना की बेटी उरूशा इमरान राना उन्नाव की पुरवा विधानसभा से कॉन्ग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। वो भी अपने पिता के समर्थन में बयान देती रहती हैं। उन्होंने अपने पिता के पलायन करने वाले बयान पर कहा था, “मेरे पापा नहीं योगी आदित्यनाथ प्रदेश से पलायन करेंगे।”

मुनव्वर राना अपने कट्टरपंथी बयानों के लिए भी अक्सर चर्चा में रहते हैं। उन्होंने इस्लामिक आतंकी संगठन तालिबान को स्वतंत्रता सेनानी कहा था। वहीं, महर्षि वाल्मिकी को डाकू कहा था। मुनव्वर ने तालिबान के साथ वाल्मिकी की तुलना की थी। इस बयान के बाद उनके खिलाफ कई एफआईआर हुई थी। ‘न्यूज नेशन’ चैनल पर दीपक चौरसिया से बात करते हुए मुनव्वर राना ने कहा कि दो बड़े दुश्मनों को, जो रूस और अमेरिका से ज़िंदगी भर लड़े हों, तो उन पर कितने जुल्म हुए होंगे इसका भी हिसाब निकाला जाना चाहिए।

‘…अब भी BJP को वोट न दें तो लोग बेवकूफ हैं’ : NDTV प्रोपगेंडे को 12वीं की लड़की और मजदूर ने किया तार-तार, फजीहत के बाद Video डिलीट

उत्तर प्रदेश में चल रहे चौथे चरण के मतदान के बीच सोशल मीडिया पर NDTV की एक वीडियो शेयर हो रही है। इस वीडियो में NDTV न्यूज एंकर श्रीनिवासन ग्राउंड रिपोर्टिंग करने के लिए यूपी गए और सरकार द्वारा दी जा रही सुविधानओं के बारे में ग्रामीणों से बात की। वीडियो में एंकर द्वारा राशन, महंगाई, विकास और नौकरी जैसे मुद्दों को लेकर सवाल किए गए, जिन्हें सुन जनता ने उन्हें जवाब ऐसे दिए कि आखिर में एनडीटीवी को ये वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से डिलीट करनी पड़ी।

इस वीडियो में श्रीनिवासन 12 वीं में पढ़ने वाली एक लड़की से मिले, जिसने उन्हें उनके हर सवाल का जवाब दिया। फिर उनकी मुलाकात एक मजदूर से हुई जिसने उन्हें बताया कि अगर सरकार के इतना करने के बावजूद भी वोट नहीं दे तो सिर्फ बेवकूफी है।

12 वीं की लड़की ने NDTV को बताए UP में बदलाव

वीडियो में 12 वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की से पूछा जाता है कि कैसा चल रहा है सब? इस पर लड़की जवाब देती है कि सब अच्छा चल रहा है जबसे मोदी आए तब से सब अच्छा है। लड़की बताती है कि उन्हें किसी चीज की कोई कमी नहीं हो रही है। हर महीने किसानों का पैसा आ रहा है। राशन महीने में दो बार मिलता है।

पत्रकार लड़की की ये सारी बात सुन उससे पूछते हैं कि आप क्या करती हैं? इस पर लड़की का जवाब आता है- इंटरमीडिएट। ये सुन पहले दोनों पत्रकार कुछ सेकेंड की चर्चा करते हैं कि आखिर ये 10 वीं होता है या 12 वीं। बाद में तय होता है कि लड़की 12 वीं की है। इस पर लड़की से पूछा जाता है कि वो जॉब करेगी? लड़की ‘हाँ’ में जवाब देती है और श्रीनिवासन कहते हैं कि जब यहाँ जॉब नहीं है तो आप कैसे जॉब करेंगी। इस सवाल पर लड़की कहती है कि अगर काम करना होगा तो वारणसी जाकर कर लेंगे, जरूरी नहीं है कि यहाँ जॉब नहीं है तो काम ही नहीं है। 

मजदूर ने कहा- बीजेपी को जो वोट न तो बेवकूफी है

इसी तरह एनडीटीवी द्वारा एक मजदूर से जब मोदी कार्यकाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वो ईंट-पत्थर ढोते हैं और कभी मुंबई होते हैं, सूरत में होते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वो कोरोना से पहले अपने गाँव लौट आए थे। श्रीनिवासन ने कहा कि यहाँ जॉब नहीं थी इसलिए तो उन्हें गाँव छोड़ना पड़ा। इस पर मजदूर ने उन्हें जवाब दिया कि जॉब तो मिलती है, करने वाले कहीं भी कर लेते हैं। मजदूर कहता है कि राशन मिलने की वजह से वो भारतीय जनता पार्टी से खुश हैं और अगर जनता अब भी उन्हें लाइक न करे तो ये बेवकूफी है। उन्होंने बताया ये सरकार आटा, दाल से लेकर तेल और नमक भी देती है।

ताहिर हुसैन की जिस बिल्डिंग से हिंदू बने थे निशाना वहाँ चल रहे धंधे, हिंदू बेच रहे मकान: दिल्ली दंगों के 2 साल बाद चाँदबाग का हाल

आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद रहे ताहिर हुसैन का एक बिल्डिंग फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का केंद्र बना हुआ था। इसी बिल्डिंग से चाँदबाग-करावल नगर में हिंदुओं और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाया गया था। अब यह बिल्डिंग फिर से खुल चुकी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि बिल्डिंग के भीतर पहले की तरह काम-धंधा चल रहा है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों के अनुसार ताहिर हुसैन के घर के सामने वाली गली से कई हिंदू अपने घर मुस्लिमों के हाथ बेच इलाके को छोड़ चुके हैं।

ताहिर हुसैन के घर के ठीक सामने वाली गली में लोग क्यों बेच रहे घर-मकान, 2 साल बाद क्या हैं वहाँ के हालात

चाँदबाग पुलिया के पास स्थित ताहिर की बिल्डिंग के पास जब आपइंडिया की टीम पहुॅंची तो कुछ लोग बाहर जमा थे। ये लोग यहीं काम करते थे। जब हमने बिल्डिंग के भीतर चल रही गतिविधियों को देखने की कोशिश की तो इनलोगों ने गेट बंद कर दिया। फ़िलहाल ताहिर हुसैन जेल में है और जमानत पर बाहर निकलने के प्रयास कर रहा। उसकी याचिका पर सुनवाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख रखा है। उसका भाई शाह आलम जेल से बाहर आ चुका है। दंगों से जुड़े एक मामले में शाह आलम को सितंबर 2021 में अदालत ने आरोप मुक्त भी किया था। बताया जाता है कि जेल से निकलने के बाद उसने ताहिर के सारे काम-धंधा सँभाल लिए हैं।

ताहिर हुसैन के बगल का मैरिज लॉन और पार्किंग जो अब पूरी तरह रेनोवेट हो गया है

ताहिर हुसैन के मकान के बगल वाले पार्किंग में हमें कई नए लोग नजर आए। इसे अब रेनोवेट कराकर छोटा सा स्पेस पहले की तरह शादी-पार्टी के लिए बना दिया गया है। वहाँ मौजूद लोगों का कहना था कि अब क्या बात करनी है जो नुकसान हुआ वो हुआ। वैसे इनलोगों का कहना था कि अब किसी तरह का तनाव नहीं है। लेकिन देर रात मुस्लिम बहुल इलाकों से अकेले गुजरने से ये लोग अब भी डरते हैं। साथ ही बताया कि दंगों के बाद कई हिंदू बहुल गलियों के लोग अपना मकान बेच चुके हैं।

मकान बेचकर जा रहे हिन्दू

ताहिर हुसैन के मकान के ठीक सामने गली नंबर-6 है। इसे मूँगानगर गली भी कहते हैं। इसी गली में शिव मंदिर सहित अधिकांश हिन्दुओं के मकान है। गली के मोड़ पर ही अरोड़ा फर्नीचर थी जिसे दंगाइयों ने लूटकर आग के हवाले कर दिया था। शिव मंदिर पर मुस्तफाबाद से पीछे की मस्जिद वाली गली से आए दंगाइयों ने जमकर ईंट-पत्थर बरसाए थे।

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि दंगों के बाद इन इलाकों से बहुत से हिन्दू अपना मकान बेचकर चले गए हैं। उन्होंने कई मकानों के बारे में भी बताया जो बिक गए हैं। ये सभी मकान मुस्लिमों ने काफी ऊँची कीमत पर खरीदी है। उन्होंने जो कुछ कहा वो आप विस्तार से नीचे के वीडियो में सुन सकते हैं;

हिन्दुओं मकान बेचकर जाने का सिलसिला गली नंबर-6 तक ही सीमित नहीं है। यह गली नंबर-7-8 और 9 तक भी पहुँच गया है। यानी दंगों से पहले जिन गलियों में हिन्दू बहुल थे वहाँ भी अब मुस्लिम प्रवेश कर चुके हैं। इसी इलाके में गिरी ऑटोमोबाइल वर्कशॉप और कुछ दूसरे दुकान भी मुस्लिमों के हाथों बेचे गए हैं।

हिन्दुओं की गली में वे मकान जो हाल ही में मुस्लिमों को बेचे गए

इन इलाकों में लोगों से बातचीत में यह बात भी सामने आई कि दंगों से पहले जैसी गर्मजोशी हिन्दू-मुस्लिमों के बीच थी, अब वो नहीं रही है। गौरतलब है कि अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में दायर चार्जशीट से खुलासा हुआ था कि ताहिर हुसैन ने न केवल दंगों की योजना बनाई और भीड़ को उकसाया, बल्कि वो खुद भी चाँदबाग के हिंदुओं के ऊपर छत से पत्थर और एसिड बरसा रहा था।

‘गौ माता को कटने नहीं देंगे’: अमेठी में बोले CM योगी – ‘सपा को वोट मतलब आतंकवाद को वोट, आने वाली पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करना’

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज (23 फरवरी, 2022) बीजेपी के पाँचवें चरण के चुनाव प्रचार अभियान को धार देने में जुटे हैं। इसी क्रम में आज उन्होंने अमेठी के तिलोई विधानसभा (Tiloi Assembly Constituency) में एक रैली को सम्बोधित करते हुए सपा और बसपा के साथ ही कॉन्ग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा।

समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए CM योगी आदित्यनाथ ने किसानों की कर्जमाफी का वादा किया। साथ ही अवैध बूचड़खानों को बंद करने की बात का जिक्र करते हुए कहा, “हम गौ माता को कटने नहीं देंगे। अवैध बूचड़खानों को फलने नहीं देंगे। साथ ही किसानों को गौवंश पालने के लिए 900-1000 रुपए प्रति माह देने का ऐलान भी किया। साथ ही उन्होंने प्रदेश में बड़े पैमाने पर गौ शालाएँ खोलने की बात भी कही।

CM योगी ने तिलोई की जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज तिलोई को एक मेडिकल कॉलेज भी मिल गया है। उस मेडिकल कॉलेज का हमने शिलान्यास किया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी यह मेडिकल कॉलेज नहीं दे सकती थी क्योंकि उसके पास विकास करने का दृष्टिकोण ही नहीं है।

सीएम योगी ने कहा कि हमने अवैध बूचड़खानों को पूरी तरह से बंद कर दिया है। उन्होंने कहा वादा करता हूँ कि हम ‘गौमाता’ का वध नहीं होने देंगे और हम किसानों के खेतों को आवारा पशुओं से भी बचाएँगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक विचारधारा वाली पार्टी है, जिससे लाखों लोग जुड़े हैं। बीजेपी जो भी काम करने का वादा करती है, उसे पूरा भी करती है। उन्होंने लोगों से भारी मत देकर बीजेपी को विजयी बनाने का आह्वान भी किया।

सीएम योगी ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले जब भी रिक्तियाँ होती थीं, तो ‘सैफई परिवार’ उनके लिए ‘वसूली’ करता था, लेकिन हमने युवाओं को 5 लाख सरकारी नौकरियाँ दीं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से अपने एजेंडे को लेकर चलती रही है। सपा ही नहीं, बल्कि कॉन्ग्रेस और बसपा राजनीति तो करते थे, लेकिन इन लोगों की राजनीति का आधार जाति, मत और धर्म हुआ करता था। समाज और राष्ट्र की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते थे।

उन्होंने जनता को सम्बोधित करते हुए कहा, “सपा को वोट देने का मतलब आतंकवाद को वोट देना है।” अहमदाबाद के 2008 के सीरियल ब्लास्ट का जिक्र करते हुए उसमें सजा पाए आतंकियों के परिजनों के सपा प्रचारक होने का भी जिक्र करते हुए घेरा।

सीएम योगी ने कहा, “हमारी सरकार में राशन डबल डोज का मिल रहा है। सपा की सरकार होती तो राशन खा जाते। बसपा की सरकार होती तो बहन जी के हाथी का पेट ही इतना बड़ा है कि सब समा जाता। 10 मार्च को सरकार बनेगी तो उज्जवला योजना के लाभार्थी को होली-दिवाली पर फ्री सिलेंडर भी मिलेगा। सरकार आने के बाद 60 साल से ज्यादा महिला को यूपी परिवहन निगन की बस में टिकट लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।”

बता दें कि इस रैली के बाद सीएम योगी सुल्तानपुर के इसौली विधानसभा और कादीपुर में भी रैली को सम्बोधित करेंगे। आज ही सीएम योगी का प्रतापगढ़ के पट्टी एवं रानीगंज विधानसभा में भी जनसभा है।

गौरतलब है कि इस बार उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 7 चरणों में मतदान हो रहे हैं, अभी तक तीन चरण के मतदान हुए है और आज 23 फरवरी, 2022 को चौथे चरण का मतदान भी हो रहा है। विधानसभा चुनाव के सातों चरणों के मतदान होने के बाद चुनाव के नतीजे 10 मार्च को जारी होंगे।

गोमांस के कारण नहीं हुई JDU नेता खलील आलम की हत्या: बिहार पुलिस ने प्रोपेगेंडा की खोली पोल, गुमराह करने के लिए बनाया था वायरल वीडियो

बिहार (Bihar) के समस्तीपुर (Samastipur) जिले में 16 फरवरी को जनता दल युनाइटेड (JDU) कार्यकर्ता की निर्मम हत्या कर दी गई। पुलिस ने कल्याणपुर थाना क्षेत्र के वासुदेवपुर गाँव के बूढ़ी गंडक नदी के पास सुनसान जगह पर बने एक मकान के अंदर से जेडीयू कार्यकर्ता के शव का जला हुआ अवशेष बरामद किया। मृतक की पहचान 34 वर्षीय जेडीयू नेता मोहम्मद खलील आलम रिजवी के रूप में हुई। घटना मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के हुडहिया गाँव की है।  

घटना के बाद एक सोशल मीडिया एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद खलील की हत्या को मॉब लिंचिंग की घटना बताया गया। इसे सांप्रदायिक एंगल दिया जाने लगा। इसे गाय के नाम पर हत्या बताया जाने लगा। ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन ने भी इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा कि एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी जान की भीख माँगता रहा और ‘हिन्दू भीड़ ने उसकी हत्या के बाद उसे जला डाला’। हालाँकि, समस्तीपुर पुलिस अधीक्षक (SP) ने ऑपइंडिया से बात करते हुए मामले में सांप्रदायिक एंगल का खंडन किया।

उन्होंने कहा, “इसमें कोई सांप्रदायिक दृष्टिकोण नहीं है। गोमांस-गोहत्या को लेकर वायरल एक वीडियो आपको मिला होगा। इस वीडियो को वायरल करने के पीछे उनका मकसद यह था कि अगर पुलिस उन्हें पकड़ लेती है और कांड का खुलासा कर देती है तो हमलोग उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देंगे। जिससे पुलिस का ध्यान उनकी तरफ से हट जाएगा और लोगों को भी उनकी सहानुभूति मिलेगी।”

SP के मुताबिक मोहम्मद खलील आलम की हत्या कांड को पाँच लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था। जिसमें पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि 17 फरवरी को मुसरीघरारी थाने में एक FIR दर्ज करवाई गई थी। इसमें कहा गया था कि खलील का अपहरण हो गया है। फिरौती के लिए फोन आ रहा है। 2,75,000 रुपए फिरौती माँगी गई है। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी शुरू की। 18 फरवरी को पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया। जहाँ उन्होंने बताया कि खलील को मार कर शव को गाड़ दिया है। उन्होंने आगे बताया कि पुलिस ने इस वीडियो को बनाकर वायरल करने वाले युवक के खिलाफ भी FIR दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। 

पुलिस की प्रेस रिलीज

इस संबंध में पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया और प्रेस रिलीज भी जारी किया, ताकि लोगों तक सही सूचना पहुँच सके। प्रेस रिलीज के मुताबिक गिरफ्तार एक आरोपित विपुल झा ने कबूल किया था कि उसने चार अन्य लोगों के साथ मिलकर 16 फरवरी की रात में ही खलील की हत्या कर दी थी। मामले में SIT गठित की गई है।

कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि खलील ने विपुल व उसके दोस्त से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसा लिया था। लेकिन जब नौकरी नहीं दिलाने पर जब विपुल व उसके दोस्त पैसे की माँग करने लगे तो वह टाल मटोल कर जाता था। जिसके बाद सभी ने पैसे उगाही के लिए उसका अपहरण कर मारपीट कर उसकी हत्या कर दी। 

नाबालिग को फँसा कर रेप करता रहा सोहेल, समय से पहले डिलीवरी के कारण हुआ खुलासा: पॉक्सो और ‘लव जिहाद’ के तहत मामला दर्ज

मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore, Madhya Pradesh) में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। आरोपित सोहेल खान (Sohail Khan) ने किशोरी को बहला-फुसलाकर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। इस मामले में पुलिस ने लव जिहाद, पॉक्सो एक्ट, रेप और अहरण के तहत मामला दर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

मामला इंदौर के संयोगितागंज थाना क्षेत्र (Sanyogita Ganj Police Staton) की है। यहाँ के पीसी सेठी अस्पताल में 17 फरवरी को एक लड़की को डिलीवरी के भर्ती कराया गया। जब अस्पताल के कर्मियों ने लड़की से आधार कार्ड माँगा तो उस पर उसकी उम्र सिर्फ 17 साल थी। इसके बाद अस्पातल के कर्मियों ने चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण समिति को इसकी सूचना दी।

बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने अस्पताल पहुँचकर लड़की से पूछताछ की तो सारी सच्चाई सामने आई। इसके बाद समिति की अध्यक्ष पल्लवी पोरवाल ने पुलिस को सूचित किया। पोरवाल की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित सोहैल के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। समिति ने युवती की काउंसलिंग भी की।

पूछताछ में बता चला कि किशोरी साजन नगर इलाके की रहने वाली है, जबकि सोहेल खान (21) आजाद नगर का रहने वाला है। वह नाबालिग को बहला-फुसलाकर दोस्ती की थी। उसके बाद शादी का झाँसा देकर पिछले साल उससे कई बार दुष्कर्म किया।

लगातार दुष्कर्म के कारण नाबालिग गर्भवती हो गई। इसके बाद परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसने प्री-मैच्योरी डिलीवरी हुई और एक लड़की को जन्म दिया। नाबालिग ने बताया कि उसने आरोपित सोहेल ने उससे विवाह कर लिया था, जिसके बाद वह गर्भवती हो गई थी। नाबालिग और उसकी बच्ची अभी अस्पताल में भर्ती हैं।

पुलिस ने बताया कि सोहेल के खिलाफ भारतीय दंड विधान, पास्को और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वत्रंतता अधिनियम सहित कुल 12 धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इस मामले में अब किशोरी के माता-पिता के भी बयान लिए जाएँगे। आरोपित अभी एक अन्य मामले में जेल में है। पुलिस अब इस मामले में भी उसे जल्द गिरफ्तार करेगी।

मदरसे में नाबालिग लड़कियों का गैंगरेप करवाता था मौलवी, इस्लाम सीखने जाती थीं: ₹10 लाख न देने पर वायरल कर दिया वीडियो

हरियाणा के गुरुग्राम में दो नाबालिगों से गैंगरेप मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में मंगलवार (22 फरवरी 2022) को मौलवी मोहम्मद हसन और उसके 8 संबंधियों को मदरसे रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया गया। इन सभी पर मदरसे में नाबानलिगों के साथ अत्याचार का आरोप है। आरोपितों ने घटना का वीडियो बना लिया था, जिसे वायरल करने की धमकी देकर पीड़िताओं के परिवार से 10 लाख रुपए की भी माँग की थी।

हालाँकि, जब पीड़ित परिवार ब्लैकमेलिंग के तहत माँगे गए रुपए नहीं दे पाए तो आरोपितों ने वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। ये वारदात गुरुग्राम के पुन्हाना स्थित एक मदरसे की है। दरअसल, इस मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब आरोपितों ने इस वीडियो को वायरल कर दिया और इस पर एक पीड़िता के पिता की नजर पड़ी। बेटी के रेप का वीडियो देख वो तुरंत गुरुग्राम पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत करने पहुँचे। हालाँकि, तब तक वीडियो वायरल हो चुका था।

बहरहाल नाबालिग से गैंगरेप के मामले में मौलवी मोहम्मद हसन, जाहुलहक, फखरुद्दीन, मुस्तक, यूनुस, मुस्तफा, तैयब और वारिस की पहचान अब तक की गई है। अपनी शिकायत में पीड़िता के पिता ने पुलिस को ये भी बताया कि विवादित वीडियो को डिलीट करने के एवज में उनसे 10 लाख रुपए माँगे गए थे, लेकिन वो केवल 6 लाख रुपए ही जुटा पाए थे। इसी कारण वीडियो को रिलीज कर दिया गया।

मदरसे में पढ़ने जाती थीं पीड़िता

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को बताया गया है कि दोनों लड़कियाँ मदरसे में इस्लाम के बारे में पढ़ने के लिए जाती थीं। उसी मदरसे में मौलवी मोहम्मद हसन का रिश्तेदार तैयब और वारिस भी अक्सर जाता रहता था। वो लोग वहाँ पर लड़कियों को फंसाते थे और बाद में मौलवी को कुछ पैसे देकर नाबालिग लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाते थे।

इसी क्रम में तैयब और वारिस ने नाबालिग लड़कियों के साथ कुकर्म किया था। उन्होंने रेप और मारपीट का वीडियो बना लिया था, जिसे वायरल करने की धमकी देकर लगातार उनका रेप कर रहे थे। इस बीच मौलवी मोहम्मद हसन, जाहुलहक, फखरुद्दीन, मुस्तक, यूनुस और मुस्तफा ने तैयब और वारिस को वीडियो से होने वाले खतरे के बारे में आगाह करते हुए धोखे से उस वीडियो को हासिल कर लिया और पीड़िता के परिजनों को ब्लैकमेल करते हुए उनसे 10 लाख रुपए माँगे।

बहरहाल पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 (POCSO) और भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल मामले की जाँच जारी है।

यूक्रेन से भारत लाए गए 242 छात्र, रूस पर कई देशों ने लगाए कड़े प्रतिबंध; आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश

रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine) के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा यूक्रेन के डोनेट्स्क और लोहांस्क को स्वतंत्र देश घोषित करने के बाद वहाँ पर रूसी सेना घुस गई है। बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों को एयरलिफ्ट किया है। एयर इंडिया की स्पेशल फ्लाइट करीब 242 छात्रों को लेकर यूक्रेन से नई दिल्ली पहुँच गई है। हालाँकि, अभी भी कई और छात्र वहाँ पर फँसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने का प्रयास लगातार जारी है।

इस बीच रूस की इस कार्रवाई के बाद अमेरिका की जो बाइडेन सरकार भी एक्शन मोड में है। अमेरिका ने नाटो देश एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया में सेनाओं की तैनाती को बढ़ा दिया है। बाइडेन ने स्पष्ट कर दिया है कि नाटो की एक-एक इंच जमीन के लिए लड़ेंगे। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने की शुरुआत हो गई है। अमेरिका, ब्रिटेन के बाद अब जापान ने भी उस पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

रूस पर लगाए जा रहे प्रतिबंध

रूसी राष्ट्रपति पुतिन के लोहांस्क और डोनेट्स्क को स्वतंत्र देश की मान्यता देने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार (22 फरवरी) को रूस पर सख्त प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया। इसके तहत रूस के फाइनेंस और उसके अमीर व्यापारियों को टार्गेट किया गया है। डिप्लोमैटिक दरवाजे को खुला छोड़ते हुए बाइडेन प्रशासन ने कहा कि युद्ध से बचने के लिए अभी भी समय है।

अमेरिका के नक्शे-कदम पर आगे बढ़ते हुए जर्मनी ने रूस पर प्रतिबंध लगाकर आर्थिक तौर पर उसकी कमर तोड़ने की कोशिश की है। उसने रूस से नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन के सर्टिफिकेशन को रोक दिया है। वहीं, कनाडा ने भी रूस पर प्रतिबंध लगाया है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी पुतिन के खिलाफ एक्शन लेते हुए प्रतिबंधों का ऐलान किया है। रूस पर आर्थिक चोट की कोशिश में ब्रिटेन ने उसके 5 बैंकों और 3 अरबपतियों की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है। इसमें रोसिया, आईएस बैंक, जनरल बैंक, प्रॉमस्व्याज बैंक और ब्लैक सी बैंक शामिल हैं। जबकि, प्रतिबंध झेलने वाले तीन अरबपति गेनेडी टिमचेंको, बोरिस रोटेनबर्ग और आइगर रोटेनबर्ग हैं।

जापान ने भी रूस पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। जापानी प्रधानमंत्री फुइमो किशिदा ने ऐलान किया कि फिलहाल रूसी बांड और कुछ व्यक्तियों की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया भी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के शीर्ष सलाहकारों पर प्रतिबंध लगा चुका है।

हालाँकि, रूसी राष्ट्रपति कहते हैं कि यूक्रेन पर हमला करने की उनकी कोई योजना नहीं है और न ही वो सोवियत यूनियन को फिर से पुनर्जीवित करना चाहते हैं।

‘इस्लाम कबूलने से पहले थे आदिवासी, मत लगाओ SC/ST एक्ट’: सामूहिक धर्मांतरण के आरोपितों की दलील, भरुच कोर्ट का बेल देने से इनकार

गुजरात (Gujarat) के भरुच में सैक़ड़ों आदिवासियों को लालच देकर सामूहिक धर्मान्तरण (Bharuch Mass Religious Conversion) कराने के तीन आरोपितों के खिलाफ कोर्ट (Court) ने कड़ा एक्शन लेते हुए उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। भरुच की स्थानीय अदालत ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। दरअसल, तीनों आरोपितों इब्राहिम पुना पटेल उर्फ ​​जीतूभाई पुनाभाई वसावा, अयूब बरकत पटेल उर्फ ​​रमनभाई बरकतभाई वसावा और यूसुफ जीवन पटेल उर्फ ​​महेंद्रभाई जीवन पटेल के खिलाफ धर्मान्तरण के मामले में पुलिस ने आऱोप पत्र दायर किया था, जिसके बाद आरोपितों ने जमानत याचिका दायर की थी।

आरोपितों के वकील ने स्थानीय अदालत में सुनवाई के दौरान कोर्ट में तर्क दिया कि धर्मान्तरण कर इस्लाम कबूलने से पहले तीनों आरोपित अनुसूचित जनजाति से आते थे। इसलिए उनके खिलाफ एससी/एसटी के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। वकील वोरा ने दावा किया था कि इन सभी पर एससी/एसटी एट्रोसिटी एक्ट लागू नहीं होता है।

इसे काउंटर करते हुए अदालत में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पीबी पांडे ने तर्क दिया कि इन तीनों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर साम्प्रदायिक तनाव का उदाहरण है, जिसे समाज में दो वर्गों के बीच विवाद उत्पन्न करने के इरादे से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चार्जशीट का दायर होना कोई नई वजह नहीं है कि ये लोग बेल फिर एप्लाई करें।

क्या है भरुच धर्मान्तरण केस

गौरतलब है कि नवंबर 2021 में ही ऑपइंडिया ने बताया था कि भरुच जिले की आमोद तहसील के अंतर्गत आने वाले कांकरिया गाँव के रहने वाले प्रवीण वसावा की शिकायत कर फेफड़ावाला हाजी अब्दुल्ला, सलाहुद्दीन शेख समेत कई और लोगों के खिलाफ वसावा समुदाय के लोगों के सामूहिक धर्मान्तरण कराने का आरोप लगाया था। प्रवीण के मुताबिक, अनुसूचित जनजाति से आने वाले लोगों को नौकरी, घर, शादी के लिए भावी दुल्हन और पैसे की लालच देकर सैकड़ों लोगों का इस्लामिक धर्मान्तरण कराया गया था। इसके साथ ही प्रवीण ने इस बात का भी खुलासा किया था कि किस तरह से धर्मान्तरण के रैकेट को चलाने के लिए विदेशी फंडिंग होती थी।

वसावा ने आगे कहा था, “आदिवासी गरीब लोग हैं। अगर कोई हमें थोड़ा अनाज भी देता है, तो हम मानते हैं कि वे अच्छे लोग हैं। यही कारण है कि लोग धर्म परिवर्तन का लालच देते हैं।”

भरुच धर्मान्तरण रैकेट के तार उत्तर प्रदेश से भी जुड़े थे। जहाँ सामूहिक धर्म परिवर्तन रैकेट का खुलासा जून-जुलाई 2021 में ही हुआ था। यूपी एटीएस ने मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और सलाहुद्दीन शेख के खिलाफ कार्रवाई की थी। पता चला था कि भरुच धर्मान्तरण रैकेट में शामिल फेफड़ावाला समेत कई और लोग शेख के एनजीओ एनजीओ एएफएमआई को फंडिंग करते थे, जिससे देश में अशांति फैलाई जाती थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में ही इस एनजीओ का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था। शेख उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में है जबकि फेफड़ावाला फरार है।

15 नवंबर 2021 को भरुच के आमोद पुलिस स्टेशन पार्ट ए में दलित समुदाय से आने वाले प्रवीण वसावा की शिकायत पर गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4, 5, 4-G और आईपीसी की धारा 120 (B), 153 (B) (C), 506 (2), 153A (1), 295 (K), 466, 467, 468, 471 और एट्रोसिटी एक्ट की धारा 3 (2) (5-A), 3 (2) (5) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 धारा 84 -C के तहत 9 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जिन 9 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई उनमें शब्बीर बेकरीवाला (आमोद), समाज बेकरीवाला (आमोद), अब्दुल अजीज पटेल (कांकरिया, आमोद), यूसुफ पटेल (कांकरिया, आमोद), अयूब बरकत पटेल (कांकरिया, आमोद), हसन टिसली (अछोद, आमोद) , फेफड़ावाला हाजी अब्दुल्ला, इस्माइल अछोड़वाला उर्फ ​​डेलावाला (मौलवी) (अछोद, आमोद) और इब्राहिम पटेल (कांकरिया, आमोद) शामिल थे।

इस मामले में हमारी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।