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अजमेर से लौटा धर्मेंद्र तो छिपकर पढ़ने लगा नमाज, लगाने लगा मुस्लिम टोपी: पत्नी और बेटे पर जबरन इस्लाम कबूलने का दबाव, यूपी पुलिस ने कूटा

उत्तर प्रदेश के कानपुर से जबरन धर्मांतरण के प्रयास का मामला सामने आया है। दरअसल, यह दबाव कोई और नहीं बल्कि चोरी-छुपे इस्लाम अपना चुका महिला का पति ही अपनी पत्नी और बच्चे पर डाल रहा है। कानपुर में महिला ने पुलिस से शिकायत में यह आरोप लगाया है कि उसका पति उसपर और उसके बेटे पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहा है।

न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार, कल्याणपुर आवास विकास निवासी स्मिता श्रीवास्तव की वर्ष 2015 में धर्मेंद्र से विवाह हुआ था। घर में सब ठीक चल रहा था। दोनों का एक 5 साल का एक बेटा भी है। लेकिन महिला के मुताबिक, उसका बुरा दौर तब शुरू हुआ जब उसका पति धर्मेंद्र 2 साल पहले अजमेर शरीफ गया। वहाँ से लौटा तो उसके तौर-तरीके बदल गए। वह पत्नी व बेटे छिपकर मुस्लिम टोपी लगाने लगा और यहाँ तक कि नमाज भी पढ़ने लगा।

महिला का कहना है कि बीते कुछ समय से धर्मेंद्र उस पर और उसके बेटे पर अपना हिन्दू धर्म छोड़कर कर इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहा है। जब पीड़िता स्मिता श्रीवास्तव ने अपने पति की इस हरकत का विरोध किया तो धर्मेंद्र ने उसकी भी बेरहमी से पिटाई कर दी और गाली-गलौज करने लगा। इसके साथ ही महिला ने अपने पति पर अपने ही 5 साल के बेटे को जान से मारने का प्रयास का आरोप लगाया है। मामला इतना बढ़ गया कि पीड़िता के पिता ने कल्याणपुर थाने में जबरन धर्मांतरण के आरोप में अपने दामाद के खिलाफ ही शिकायत दर्ज कराई है।

कानपुर के इस मामले का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि जब थाने में दर्ज जबरन धर्मांतरण की शिकायत के बाद पुलिस जब आरोपित धर्मेंद्र को पकड़ने गई तो वह गाली-गलौज के साथ ही यूपी पुलिस से भी हाथापाई करने लगा। वीडियो में बचाव में पुलिस भी उसकी पिटाई करती नजर आ रही है। फिलहाल, इस मामले में पीड़ित महिला के पिता की शिकायत पर जाँच शुरू कर दी है।

सहारनपुर दंगे का आरोपित मोहर्रम अली पप्पू सपा में शामिल, नाराज़ सिख समाज ने जताई आपत्ति: गुरुद्वारा में हिंसा समेत 87 मामले हैं दर्ज

सहारनपुर दंगे का मास्टरमाइंड बताया जाने वाला मोहर्रम अली पप्पू समाजवादी पार्टी में शामिल हो गया है, जिसके बाद सिख समाज में आक्रोश का माहौल है। मोहर्रम अली पप्पू की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें वो सपा नेताओं के साथ लाल टोपी पहने हुए दिख रहा है। 2014 में सहारनपुर में एक गुरुद्वारा में हिंसा हुई थी, जिसका आरोप मुस्लिम भीड़ पर लगा था। अब सिख समाज के लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए इसे लेकर अपना आक्रोश जारी किया है।

वायरल तस्वीर में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल उन्हें लाल टोपी पहनाते हुए दिख रहे हैं। साथ ही इस तस्वीर में सहारनपुर से सपा के मौजूदा विधायक संजय गर्ग खड़े दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये तस्वीर कुछ दिन पुरानी है। कहा जा रहा है कि ये तस्वीर तब की है, जब मोहर्रम अली पप्पू को सपा की सदस्यता दिलाई जा रही थी। न सिर्फ सिख, बल्कि हिन्दू समाज के लोग भी गुस्से में हैं। 2014 में सहारनपुर गुरुद्वारा रोड पर गुरुद्वारे की जमीन पर लेंटर डालने को लेकर ये विवाद हुआ था।

इस हिंसा में सैकड़ों दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया था। कई लोग घायल हुए थे। पुलिस पर भी गोलीबारी की गई थी। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। तब प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी। कई स्थानीय लोगों के घायल होने के बाद सहारनपुर में कई दिनों तक कर्फ्यू लगाने की नौबत भी आ गई थी। हालात नियंत्रण से बाहर हो गए थे। पूर्व पार्षद मोहर्रम अली पप्पू पर भी पुलिस ने मामला दर्ज किया था। उस पर उस समय 87 मुकदमा दर्ज थे।

उसे डेढ़ साल तक जेल भी हुई थी। उस पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)’ के तहत कार्रवाई की गई थी। 2021 में इस मामले में दोनों समुदायों के बीच समझौता कराया गया था। हालाँकि, मोहर्रम अली पप्पू अब भी जमानत पर ही बाहर है। समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव और सिख समाज से जुड़े अभिषेक अरोड़ा उर्फ टिंकू ने भी इस पर हैरानी जताई है। उन्होंने पूछा कि आखिर ये सपा नेताओं के सामने कैसे हुआ? उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि उस पर दंगा करवाने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि वो शीर्ष नेतृत्व को इसकी जानकारी देंगे, जिसके बाद कार्रवाई होगी।

उज्जैन महाकाल के बाद खजराना गणेश मंदिर पहुँचीं सारा अली खान, ‘ॐ नमः शिवाय’ का किया जाप: माँ के साथ की पूजा-अर्चना

अपनी फिल्म लुकाछिपी-2 की शूटिंग के लिए इंदौर आईं सारा अली खान ने सोमवार (17 जनवरी 2022) को इंदौर के सबसे मशहूर खजराना गणेश मंदिर में दर्शन किए। सारा अली खान अपनी माँ अमृता सिंह के साथ पहुँँची थी। मंदिर के पुजारी ने उनको दर्शन करवाए। सारा ने गणेशजी का आशीर्वाद लिया और मंदिर में पुजारी के साथ फोटो भी खिंचवाई। हालाँकि, खास बात ये है कि मास्क की वजह से मंदिर के पुजारी भी उन्हें नहीं पहचान सके। जब संकल्प के लिए पुजारी ने नाम पूछा तो सच पचा चला।

फोटो साभार: सारा इंस्टाग्राम स्टोरी

सारा ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में खजराना मंदिर की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी है। इन तस्वीरों में वह मंदिर में गणेश भगवान की पूजा करती नजर आ रही हैं। इस दौरान उन्होंने यहाँ कैंपस में बने सभी मंदिरों में जाकर भगवान के दर्शन किए। भगवान गणेश के साथ सेल्फी भी ली।

फोटो साभार: सारा इंस्टाग्राम स्टोरी

इस दौरान सारा और अमृता सिंह दोनों ही ट्रेडिशनल लुक में नजर आई। दोनों ने माथे पर टीका लगाया हुआ था। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप भी किया था। 

फोटो साभार: सारा इंस्टाग्राम स्टोरी

इसके पहले सारा अली खान उज्जैन पहुँच कर महाकाल दर्शन कर चुकीं हैं। वहाँ फोटो शूट भी किए थे। फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते ही कट्टरपंथी मुस्लिम एक्ट्रेस को हिंदू मंदिर जाने पर गालियाँ देने लगे और उन्हें अपना नाम बदलने की सलाह दी। मुस्लिम यूजर ने तो यहाँ तक कह दिया, “तुम्हें मुस्लिम होने पर शर्म आनी चाहिए। शिर्क कर रही हो। अल्लाह का सामना कैसे करोगी आखिरत में।” एक अन्य यूजर ने सारा से कहा था, “अगर तुम्हें इस्लाम नहीं मानना तो मत मानो, लेकिन इस्लामी नाम बदलो। प्लीज बदलो। ये दूसरों के लिए इस्लाम का अपमान है।”

दरअसल फिल्म लुकाछिपी-2 के लिए अभिनेत्री सारा अली खान, अभिनेता विक्की कौशल व प्रोडक्शन टीम इंदौर रूकी है। इंदौर में अलग अलग जगह शूटिंग हो रही है। इसका एक सीन उज्जैन में शूट किया गया है। फिल्म में सारा और विक्की मध्यवर्गीय परिवार से हैं। सारा कोचिंग में शिक्षिका है तो विक्की योग शिक्षक है। मकान खरीदने का एक दृश्य उज्जैन में फिल्माया गया है। इस सीन की शूटिंग के दौरान प्रोडक्शन टीम उज्जैन पहुँची थी। इसी दौरान सारा अली खान ने अपनी माँ अमृता सिंह के साथ महाकाल के दर्शन किए थे।

‘एक समय आता है जब दबाव बर्दाश्त नहीं होता’ : विराट कोहली की कप्तानी छोड़ने पर शाहिद अफरीदी ने कहा- बहुत बढ़िया निर्णय

विराट कोहली ने जब से भारतीय क्रिकेट टीम में टेस्ट मैचों से कप्तानी छोड़ी है उसके बाद से सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। सचिन तेंदुलकर से लेकर शेन वार्न तक ने कोहली के भारतीय क्रिकेट में योगदान के लिए उन्हें सराहा है। इस बीच पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी की प्रतिक्रिया भी आई है। उन्होंने कोहली के फैसले पर अपना समर्थन दिया और कहा कि विराट ने मतलब भर का क्रिकेट खेला है, उन्हें पता है कि क्या सही और क्या नहीं।

अफरीदी ने कोहली की तारीफ करते हुए समा टीवी शो में कहा, “मेरे ख्याल में ये ठीक है। विराट ने बढ़िया खेला है और टीम का नेतृत्व अच्छे से किया है। मुझे लगता है ये सही डिसिजन है। एक समय आता है जब आप दबाव (प्रेशर) को हैंडल ही नहीं कर पाते और इस वजह से आपकी पर्फॉर्मेंस पर भी फर्क दिखता है। मुझे लगता है कि उन्होंने लंबे समय कप्तानी की और बहुत अच्छे स्तर पर की। एक बल्लेबाज के तौर पर, ये सही समय है कि क्रिकेट का आनंद लिया जाए। ” 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले विराट कोहली (Virat Kohli) के भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी से इस्तीफा देने के बाद भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज खिलाड़ी कपिल देव (Kapil Dev) ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था, “कोहली काफी दिनों से दवाब में दिख रहे थे। अब उन्हें अपनी ईगो साइड में रखकर नए कप्तान के अंडर खेलना होगा।”

मिड डे से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं विराट कोहली के टेस्ट कप्तानी छोड़ने के फैसले का स्वागत करता हूँ। टी-20 की कप्तानी छोड़ने के बाद से ही वह बुरे दौर से गुजर रहे थे। वह बीते कुछ दिनों से काफी तनाव में नजर आ रहे हैं। इसलिए स्वतंत्र रूप से खेलने के लिए कप्तानी छोड़ना एक विकल्प था। इसीलिए उन्होंने यह चुना।”

बता दें कि शनिवार (15 जनवरी 2022) को विराट ने भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी से अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री और सपोर्ट स्टाफ को धन्यवाद देते हुए कहा था कि इस गाड़ी के इंजन वही लोग थे और उन्हीं के कारण टेस्ट क्रिकेट में भारत और आगे बढ़ा। विराट कोहली ने अंत में महेंद्र सिंह धोनी को भी धन्यवाद देते हुए कहा था कि उन्होंने उनमें विश्वास जताया और उन्हें इस लायक समझा, कि वो भारतीय क्रिकेट को आगे लेकर जा सकें।

राजस्थान में कब्रिस्तान-मदरसों के लिए ₹5 करोड़, लोन लेंगे तो सब्सिडी भी… अल्पसंख्यकों के लिए कुल ₹98.55 करोड़ की मंजूरी

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) ने अल्पसंख्यकों के लिए लगभग 100 करोड़ रुपए का एक विकास कोष बनाने पर मुहर लगाई है। विकास कोष की अलग-अलग योजनाओं के लिए 98 करोड़ 55 लाख रुपए खर्च करने के संशोधित प्रस्ताव को सोमवार (17 जनवरी 2022) को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी

वक्फ भूमि, कब्रिस्तान और मदरसों के लिए 5 करोड़

प्रस्ताव के अनुसार, इस कोष से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के परम्परागत हुनर के विकास के लिए 50 लाख, अल्पसंख्यक लोगों को रोजगार देने के लिए अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के प्रशिक्षण पर दो करोड़, वक्फ भूमि या सार्वजनिक भूमि पर बने कब्रिस्तान, मदरसों एवं विद्यालयों में चारदीवारी निर्माण के लिए पाँच करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे।

इसके अलावा अल्पसंख्यक शिल्पकारों को विपणन प्रोत्साहन एवं सहायता के लिए एक करोड़ 25 लाख, जयपुर में अंग्रेजी माध्यम के आवासीय विद्यालय के निर्माण के लिए 21 करोड़ 80 लाख रुपए खर्च किए जाएँगे।

अल्पसंख्यक छात्रावासों में ई-स्टडी रूम

15 सरकारी अल्पसंख्यक छात्रावासों में ई-स्टडी रूम विकसित करने के लिए राज्य सरकार के कोष से 58 लाख रुपए आवंटित किए जाएँगे। गहलोत सरकार ने अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए 44 करोड़ रुपए आवंटित करने का फैसला किया है। इंदिरा गाँधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना में लोन पर ब्याज सब्सिडी के लिए 5 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है।

अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए एक ‘शोध पीठ’

इसके साथ ही अल्पसंख्यकों के उत्थान के लिए एक ‘शोध पीठ’ की स्थापना की जाएगी और इसके लिए दो करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। गहलोत प्रशासन ने अल्पसंख्यक किसानों के लिए 15.42 करोड़ रुपए की लागत से सोलर पंप अनुदान योजना स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अल्पसंख्यक मेधावी युवा प्रोत्साहन योजना के लिए एक करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

भगवांत मान CM उम्मीदवार, केजरीवाल ने की घोषणा: कभी राजनीति पर कॉमेडी करने वाला अब पंजाब में AAP का सबसे बड़ा चेहरा

पंजाब में ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। पार्टी ने इसके लिए भगवंत मान का नाम आगे किया है। इससे पहले पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने एक मोबाइल नंबर जारी के के लोगों से कहा था कि वो AAP के किस नेता को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में देखना चाहते हैं, इस पर राय दें। बता दें कि लगभग सभी ओपिनियन पोल्स में पंजाब में AAP को बढ़त में दिखाया जा रहा है। अधिकतर सर्वे वहाँ AAP को बहुमत मिलता दिखा रहे हैं।

भगवंत मान के बारे में बता दें कि वो नेता के साथ-साथ अभिनेता भी हैं। उन्हें पहली बार लोकसभा के लिए 2014 के चुनाव में पंजाब के संगरूर से चुना गया था। 2019 में दोबारा जीत दर्ज करते हुए उन्होंने इस सीट को अपने पास ही रखा। 48 वर्षीय भगवंत मान ने ‘जगतार जग्गी’ नाम के कॉमेडी एल्बम से पंजाब में सुर्खियाँ बटोरी थीं। फिर उन्होंने ‘जुगनू कहंदा है’ नामक टीवी शो बनाया। राजनीति पर कॉमेडी शो करते-करते उन्होंने राजनीति को ही अपना पेशा बना लिया।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोहाली के एक कार्यक्रम में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि 93.9% लोगों ने CM उम्मीदवार के रूप में भगवंत मान को अपनी पसंद बताया। वो 2014 से ही AAP से जुड़े हुए हैं। उससे पहले उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में संगरूर के लेहरा विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें हार नसीब हुई थी। अल्कोहल को लेकर उनकी समस्या को लेकर कई बार आवाज़ उठ चुके हैं। हालाँकि, वो पंजाब में नशा मुक्ति की बात करते हैं।

‘टेलीप्रॉम्पटर में खराबी आते ही PM मोदी बोलना भूल गए’ – कॉन्ग्रेस फैला रही थी झूठ, वीडियो सामने आते ही कौवे ने काटा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (17 जनवरी 2022) को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस एजेंडा समिट में हिस्सा लिया। इस समिट में पीएम मोदी द्वारा दिए गए संबोधन की एक क्लिप को शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस ने उन पर तंज कसा है। इसके साथ-साथ राहुल गाँधी ने भी पीएम मोदी पर निशाना साधा है। कॉन्ग्रेसी इको-सिस्टम के सिपाही विनोद कापड़ी और रोहिणी सिंह जैसे लोगों ने भी खुशी जाहिर की।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अब पहले की तरह विश्व के नेता आमने-सामने नहीं मिलते हैं, सब वीडियो कॉल पर होता है। कोरोना काल में पीएम मोदी भी दावोस एजेंडा समिट में वर्चुअली शामिल हुए। इसी इवेंट की जो क्लिप शेयर की जा रही है, उसमें वह अपने संबोधन के दौरान बोलते-बोलते रुक जाते हैं। इस पर कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी ने निशाना साधा है। आरोप लगाया जा रहा है कि टेलीप्रॉम्पटर (Teleprompter) रुक जाने की वजह से पीएम मोदी आगे नहीं बोले।

टेलीप्रॉम्पटर के कारण बोलना छोड़े PM मोदी?

कॉन्ग्रेस जो झूठ फैला रही है, उसका आधार आधा-अधूरा वीडियो है। पूरी वीडियो देखेंगे तो समझ आएगा कि वास्तव में क्या हुआ था। पूरी वीडियो से पता चलता है कि खामी Teleprompter में नहीं आई थी, बल्कि मैनेजिंग टीम ने पीएम से रुककर यह पूछने को कहा था कि सबको उनकी आवाज आ रही है या नहीं।

बता दें कि कार्यक्रम के दौरान तकनीकी गड़बड़ी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की तरफ से हुआ था। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के यूट्यूब चैनल पर पीएम मोदी का भाषण बीच से शुरू होता है। तभी को-ऑर्डिनेटर ने पीएम मोदी के भाषण के बीच में टोका। इसके बाद क्लॉस स्कैब ने ऑफिशियल सेशन को फिर से शुरू करने की बात कही। उन्होंने सेशन को फिर से शुरू किया। इसके बाद पीएम ने इंगलिश इंटरप्रटेशन के साथ भाषण की शुरुआत की। सच्चाई यह है कि यह खराबी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की तरफ से था ना कि टेलीप्रॉम्पटर की खराबी थी। 

पीएम मोदी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में देश को संबोधित कर रहे थे न कि बीजेपी को। मगर कॉन्ग्रेस के अंदर मोदी के प्रति इतनी नफरत भर गई है कि यह देश से ही नफरत करने लगे हैं और पीएम को लेकर झूठ फैलाने में लगे रहते हैं। कॉन्ग्रेस के आईटी सेल को यह याद रखना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान तकनीकी समस्या एक उत्कृष्ट वक्ता के रूप में प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा को कम करने वाली नहीं है।

2019 के चुनाव में पीएम मोदी को भ्रष्ट दिखाने के लिए इनके ‘चौकीदार चोर है’ वाले अभियान पर भी देश ने दिखा दिया कि पीएम की वक्तृत्व कला को लेकर उनका मुकाबला करना बेहद मुश्किल होगा। जनता ने दिखा दिया कि वे मोदी को पसंद करें या न करें, लेकिन देश के प्रति सम्मान रखना होगा।

हिमालय पर मिलने वाला फूल बन सकता है कोराना की ‘बूटी’, IIT में रिसर्च: हरे बंदर की किडनी पर हुआ शोध

भारत में पौराणिक काल से ही जड़ी-बूटियों का महत्व था। बताया जाता है कि बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज पेड़-पौधों से मिलने वाली इन बूटियों से संभव होता था। हालाँकि, धीरे-धीरे एलोपैथी का इतनी तेजी से प्रचार हुआ कि इनका उपयोग कम होता गया। मगर, आज एक बार फिर कोविड के दौर में इनकी महत्ता का मालूम चला है। हिमालय की वादियों पर एक फूल मिला है जिसके गुणों की जाँच परख के बाद पता चला है कि इसका इस्तेमाल कोविड में इलाज के लिए किया जा सकता है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मंडी और इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी के रिसर्चर्स ने अपने शोध में पाया है कि बुरांश नाम का फूल जो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और कश्मीर में मिलता है और जिसका प्रयोग स्थानीय अच्छे स्वास्थ्य के लिए लंबे समय से करते आए हैं, वो फूल कोरोना की रोकथाम में भी कारगर है। रिसर्च के अनुसार, इस फूल के अर्क से शरीर में कोरोना संक्रमण की संख्या को बढ़ने से रोका जा सकेगा।

इस नए शोध को ‘बायोमॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर और डायनामिक्स’ जर्नल में छापा गया है। रिसर्च का नेतृत्व डॉ श्याम कुमार मसकपल्ली आईआईटी मंडी डॉक्टर रंजन नंदा, डॉ सुजाता सुनील ने किया है। इसमें सामने आया है कि इस फूल की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल है, जिनका उपयोग कोविड-19 होने पर इलाज के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें एंटीवायरल की खूबियाँ हैं जिसकी वजह से ये वायरल से लड़ने भी सक्षम है। जानकारी के मुताबिक बुरांश जिस पौधे पर उगता है उस पौधे को वैज्ञानिक भाषा में रोडोडेंड्रन अर्बोरियम (Rhododendron Arboreum) कहा जाता है।

यहाँ बता दें कि कोरोना महामारी को विश्व में फैले दो साल पूरे हो गए हैं। ऐसे में शोधकर्ता इस रिसर्च में जुटे हैं कि वो किसी तरह ऐसे तरीके को ईजाद करें जिससे इस संक्रमण का रोकथाम संभव हो। बीते दिनों भारत में वैक्सीनेशन को कोरोना रोकने का एकमात्र तरीका माना गया था। हालाँकि अब ऐसी दवाइयों पर भी फोकस हो रहा है जिससे इसका इलाज मुमकिन हो। ऐसे समय में सामने आई इस रिसर्च की चर्च हर जगह है।

इस हालिया रिसर्च को करने वाले आईआईटी मंडी के एसोसिएट प्रोफेसर श्याम कुमार कहते हैं, बुरांश के पौधे में मिले फाइटोकेमिकल्‍स यानी पौधों से मिलने वाले केमिकल असरदार साबित होते हैं। नेचुरल होने के कारण इनके जहरीले होने की आशंका भी नहीं रहती। रिसर्चर राजन नंदा ने कहा कि फूलों के अर्क में वायरस से लड़ने की कितनी खूबी है इसे समझने की कोशिश की गई थी और अंत में पाया गया कि इससे मिलने वाले फाइटोकेमिकल्स बेहद असरदार हैं। प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, ये प्रयोग वीरो ई 6 कोशिकाओं पर किया गया है। ये कोशिकाएँ अफ्रीकन ग्रीन मंकी की किडनी से डेवलप होती हैं। इसका उपयोग बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण की गंभीरता को समझने के लिए किया जाता है। इन्हीं सेल्स पर जब फूलों का अर्क इस्तेमाल हुआ तो ये निष्कर्ष सामने आए कि ये कोविड के संक्रमण को रोकने में मददगार है।

हूती आतंकी हमले में 2 भारतीयों की मौत का बदला: कमांडर सहित मारे गए कई, सऊदी अरब ने किया हवाई हमला

सऊदी अरब और उनके गठबंधन की सेना ने यमन पर हमला कर दिया है। इस हवाई हमले में यमन के हूती विद्रोहियों (Yemen Houthi Rebels) का कमांडर अब्दुल्ला कासिम अल जुनैद मारा गया। कमांडर के साथ-साथ हूती विद्रोहियों के कई सीनियर रैंक अधिकारी भी मारे गए। यह जानकारी अरब न्यूज चैनल अल-हदाथ (Al-Hadath) ने दी है।

सऊदी अरब गठबंधन के लड़ाकू विमानों ने मंगलवार की आधी रात (17-18 जनवरी 2022) को यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर बम बरसाए। इस हवाई हमले में F-15 और F-16 (सऊदी F-15SA और अमीरात F-16) लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल करने की खबर आ रही है। यह भी कहा जा रहा है कि सउदी अरब गठबंधन यह हमला अगले 24 घंटों तक जारी रखेगी।

आपको बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों (Yemen Houthi Rebels) ने सोमवार (17 जनवरी 2022) को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबुधाबी पर ड्रोन अटैक किया था। इस हमले में 2 भारतीयों समेत 3 लोगों की मौत हो गई थी। यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब गठबंधन का यह हमला उसी की प्रतिक्रिया में देखा जा रहा है।

हूती विद्रोही Vs सऊदी अरब

यमन के हूती विद्रोही (Yemen Houthi Rebels) शिया इस्लाम को मानते हैं। इसकी शुरुआत हुई थी 1990 से। हूती विद्रोहियों के पहले नेता थे हुसैन बदरेद्दीन अल-हूती। 2004 में यमन के सैनिकों ने विद्रोही हुसैन बदरेद्दीन अल-हूती की हत्या कर दी थी। इसके बाद 2015 में यमन की राजधानी सना पर हूती विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया। इस कारण से यमन के राष्ट्रपति अब्दरबू मंसूर हादी को देश छोड़ कर भागना पड़ा था।

सऊदी अरब सुन्नी (जबकि हूती विद्रोही शिया इस्लामी) बहुल आबादी वाला देश है। इसके अलावा सऊदी अरब यमन के भाग गए राष्ट्रपति अब्दरबू मंसूर हादी का समर्थन करता था। धर्म और सत्ता दोनों के मामलों को मिला कर देखें तो सऊदी अरब हमेशा से यमन के हूती विद्रोहियों (Yemen Houthi Rebels) के खिलाफ रहा है।

धर्म और सत्ता के अलावा एक और भी पहलू है यहाँ – ईरान। ईरान और हूती विद्रोही दोनों ही शिया इस्लाम को मानते हैं। आरोप लगता रहा है कि ईरान ही इन विद्रोहियों को हथियार-पैसे देता है। ईरान और सऊदी अरब की प्रतिद्वंद्विता इस्लामी दुनिया का मुखिया बनने को लेकर भी है।

जिस ‘रिश्ते’ की खबर से हिल गए थे रजनीकांत, वो 18 साल बाद टूटा: ऐश्वर्या और धनुष के रास्ते हुए अलग-अलग

साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या और अभिनेता धनुष शादी के 18 साल बाद अलग हो गए हैं। धनुष ने सोशल मीडिया के जरिए इस बात की जानकारी दी। अपने पोस्ट में उन्होंने अलग होने के पीछे की वजह को बताया कि वो दोनों खुद को अच्छे से समझने के लिए वक्त देना चाहते हैं।

अपने पोस्ट में धनुष ने लिखा, “हमने 18 साल तक दोस्ती, दंपत्ति, पेरेंट्स और एक दूसरे के शुभ चिंतक बन कर ग्रोथ, समझदारी और साझेदारी का लंबा सफर तय किया। आज हम जिस जगह खड़े हैं, वहाँ से हम दोनों की राहें जुदा हो रही हैं। मैंने और ऐश्वर्या ने एक कपल के तौर पर अलग होने का फैसला किया है। हम खुद को बेहतर समझने के लिए वक्त देना चाहते हैं। हमारे फैसले का सम्मान करें और हमारी निजता का ध्यान रखें।” ऐश्ववर्या ने भी ऐसे ही एक पोस्ट को साझा किया और जानकारी दी कि अब दोनों की राहें अलग-अलग हो गई हैं।

बता दें कि साल 2004 में धनुष ने रजनीकांत की बड़ी बेटी ऐश्वर्या से शादी की थी। बाद में दोनों के दो बच्चे हुए। इनके नाम यात्रा और लिंगा है। धनुष प्रोफेशन से एक्टिंग करते हैं जबकि ऐश्वर्या डायरेक्टर होने के साथ-साथ प्लेबैक सिंगर भी हैं। कथिततौर पर दोनों की मुलाकात एक थिएटर में हुई थी। ऐश्वर्या अपनी बहन सौंदर्या के साथ धनुष की फिल्म देखने गई थीं। जहाँ थिएटर मालिक ने धनुष को रजनीकांत की दोनों बेटियों से मिलाया।

पहली मुलाकात के बाद ऐश्वर्या ने धनुष के लिए फूलों का गुलदस्ता भेजा और उनके काम की तारीफ करते हुए कहा कि वो उनसे टच में रहें। इसके बाद दोनों का मिलने का सिलसिला चलता रहा। धीरे-धीरे मीडिया में खबरें आना शुरू हुईं। और फिर जब बात रजनीकांत तक पहुँची तो उन्हें धक्का लगा और वो थोड़ा परेशान हो गए। जब दोनों को बुलाकर इस संबंध में पूछा गया तो ऐश्वर्या और धनुष दोनों ने शादी के लिए हाँ कर दी। इसके बाद मीडिया की उल-जुलूल खबरों से बचने के लिए दोनों की शादी जल्दबाजी में तय कर दी गई और 18 नवंबर 2004 को दोनों ने सात फेरे लिए।

बताया जाता है कि जिस समय धनुष और ऐश्वर्या की शादी हुई उस समय वह दोनों एक दूसरे को डेट नहीं कर रहे थे। मगर जब खबरें आईं और सवाल हुए तो वो शादी के लिए मान गए। बाद में दोनों की ओर से इस रिश्ते को खुशी-खुशी स्वीकारा गया। यहाँ बता दें कि अभिनेता धनुष को फिल्म जगत में काम करते हुए 2 दशक बीत गए हैं। उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत फिल्म ‘थुल्लुवाधो इलामाई’ से की थी। इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्में दीं। अब तक वह 50 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं। उन्होंने बॉलीवुड की रांझणा फिल्म और अतरंगी फिल्म में काम किया है। हिंदी फिल्मों में उनके अभिनय को दोनों बार सराहा गया है।