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दिलबर नेगी हत्याकांड: ताहिर, शाहरुख, फैजल, शोएब सहित 6 को HC से जमानत, दिल्ली दंगों में मिली थी हाथ-पैर कटी अधजली लाश

दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान गोकुलपुरी हुई दिलबर नेगी की हत्या के मामले में मंगलवार (18 जनवरी, 2022) को छह आरोपितों को जमानत दे दी। इन पर मिठाई की दुकान में तोड़फोड़ और उसमें आग लगा लगाने का आरोप था जहाँ आग और चोट लगने से उत्तराखंड के दिलबर नेगी की मौत हो गई थी। इनके खिलाफ गोकुलपुरी थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148, 149, 302, 201, 436 और 427 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने इस मामले में मोहम्मद ताहिर, शाहरुख, मो. फैजल, मो. शोएब, राशिद और परवेज को जमानत दे दी। मृतक दिलबर सिंह नेगी अनिल स्वीट कार्नर में वेटर का काम करता था। इन सभी आरोपितों पर मिठाई की दुकान में तोड़फोड़ और आग लगाने का मामला दर्ज था।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपितों की जमानत का कड़ा विरोध किया। महाजन ने दलील दी कि जहाँ दंगे सुबह शुरू हुए और देर रात तक जारी रहे, यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपित व्यक्ति दोपहर में दंगा करने वाली भीड़ का हिस्सा थे न कि रात के दौरान पथराव करने वाली भीड़ का।

बता दें कि 22 वर्षीय दिलबर नेगी को दिल्ली की गोकुलपुरी में दंगाइयों की भीड़ ने उसके हाथ-पैर काटकर आग में जला दिया था। नेगी घटना से छह महीने पहले ही अपने पैतृक राज्य उत्तराखंड से नौकरी की तलाश में दिल्ली आया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, 24 फरवरी को शिव विहार तिराहे के पास एक दंगा हुआ था जिसमें आरोपित व्यक्तियों ने पथराव किया, तोड़फोड़ की और वहाँ कई दुकानों में आग लगा दी थी। दो दिन बाद एक मिठाई की दुकान से दिलबर नेगी का क्षत-विक्षत जला हुआ शव मिला था। बताया जाता है कि जब शव को लोगों ने देखा तब भी वह जल रहा था।

गोकुलपुरी थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की जाँच अपने हाथ में ले ली। हालाँकि, आगे की जाँच के मामला क्राइम ब्रांच की एसआईटी को ट्रांसफर कर दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जाँच के दौरान मामले में 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। वहीं छानबीन और जाँच के बाद 4 जून 2020 को चार्जशीट दाखिल की गई।

इस चार्जशीट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की एक भीड़ ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बृजपुरी पुलिया की तरफ से आई और हिंदुओं की संपत्तियों को निशाना बनाते हुए दंगा करना शुरू कर दिया और 24 फरवरी की देर रात तक उनमें आगजनी करती रही। पुलिस ने कहा कि भीड़ ने अनिल स्वीट्स नाम की एक दुकान में आग लगा दी थी, जहाँ से पुलिस ने 26 फरवरी को दिलबर नेगी का शव बरामद किया था। हत्या के वक्त नेगी लंच और आराम करने के लिए दुकान के गोदाम में गया था, जहाँ उसे दंगाइयों ने काटकर आग में झोंक दिया था।

गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तीन दिनों तक चले हिन्दू विरोधी दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि लगभग 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

जब 5 मिनट तक फ्लाइंग किस देते रहे थे भगवंत मान, बार-बार गिर रहे थे: AAP ने बनाया चेहरा तो बोले लोग – ‘उड़ते पंजाब का उड़ता CM’

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने भगवंत मान (Bhagwant Mann) को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। भगवंत मान को लोग नेता के अलावा बतौर कॉमेडियन के रूप में भी जानते हैं। उन्हें सीएम उम्मीदवार बनाने की औपचारिक घोषणा करने के बाद से उनके पुराने फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे हैं।

ट्विटर पर यूजर्स भगवंत मान को ‘पेगवंत मान’ कहकर संबोधित कर रहे हैं। उनके पाँच साल पहले का फोटो शेयर कर रहे हैं, जब उन पर शराब पीकर जनसभा में पहुँचने के आरोप लगे थे और लगातार 5 मिनट तक फ्लाइंग KISS देते रहे थे।

ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा, “पंजाब में सीएम उम्मीदवार के लिए ‘पेगवंत मान’ का चयन करना गलत है। वह गोवा में बेहतर सेवाएँ दे सकते हैं।”

वहीं संतोष कुमार नाम के यूजर ने लिखा, “केजरीवाल चले पंजाब को नशामुक्त करने, एक नशेड़ी के सहारे।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “पंजाब में दारू वाला, गोवा में फेनी वाला।”

पाँच साल पहले की बात है। मोगा की पुरानी अनाज मंडी में भगवंत मान एक जनसभा में पहुँचे थे, लेकिन जब वह बोलने उठे तो 5 मिनट तक ऑडियंस को फ्लाइंग किस ही देते रहे और बार-बार लड़खड़ाकर गिर रहे थे। संभले, उठे और फिर से फ्लाइंग किस देने लगे। बताया जाता है कि वह भाषण के दौरान एक बार भी सीधे खड़े नहीं हो पाए थे। किसी तरह सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें संभाला और सहारा देकर गाड़ी तक पहुँचाया था।

इसको लेकर कभी दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी रह चुके वकील प्रशांत भूषण ने ‘आप’ सांसद भगवंत मान पर शराब पीकर जनसभा को संबोधित करने का अरोप लगाया था। भूषण ने एक अखबार की फोटो को ट्वीट करते हुए लिखा था, “आम आदमी पार्टी के स्‍टार परफॉर्मर भगवंत मान चुनावी बैठकों में शराब पीकर पहुँचे।”

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मोहाली के एक कार्यक्रम में मंगलवार (18 जनवरी 2022) को घोषणा करते हुए बताया कि 93.9% लोगों ने CM उम्मीदवार के रूप में भगवंत मान को अपनी पसंद बताया। वो 2014 से ही AAP से जुड़े हुए हैं। उससे पहले उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में संगरूर के लेहरा विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमाई थी, लेकिन उन्हें हार नसीब हुई थी। अल्कोहल को लेकर उनकी समस्या को लेकर कई बार आवाज़ उठ चुके हैं। हालाँकि, वो पंजाब में नशा मुक्ति की बात करते हैं।

भारत का कीमती ‘लाल सोना’, जिसके इर्दगिर्द घूमती है ‘पुष्पा’: 2021 में इसकी ₹508 Cr की लकड़ियाँ जब्त हुईं, चीन भी दीवाना

अगर आपने अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की हालिया सुपरहिट फिल्म ‘पुष्पा’ (Pushpa) देखी होगी तो आपको पता होगा कि ये फिल्म ‘रक्त चन्दन’ (Red Sanders) के लकड़ियों (Wood) की तस्करी (Smuggling) के इर्दगिर्द घूमती है। बताया गया है कि कैसे आंध्र प्रदेश के घने जंगलों में इसे पाया जाता है और ये करोड़ों में बिकता है। इसे काट कर लाने में काफी मेहनत लगती है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे तरह-तरह के तिकड़म आजमा कर तस्कर इसे भारत से बाहर ले जाकर भी बेचते हैं। इसमें पूरा का पूरा ‘सिंडिकेट’ लगा हुआ होता है, जिसमें नेता से लेकर माफिया और कारोबारी तक शामिल होते हैं।

‘अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature) ने ‘रक्त चन्दन’ को विलुप्त होने के कगार पर खड़ी प्रजाति में रखा है। ये पूर्वी घाटों (भारत का पूर्वी तटवर्तीय क्षेत्र) में एक समिति क्षेत्र में ही अब बच गया है। 2018 में इसे ‘लगभग विलुप्त होने का खतरा’ वाली श्रेणी में IUCN ने रखा था। पिछली तीन पीढ़ियों से इसकी संख्या में 50-80% तक की गिरावट सामने आई है। काफी ज्यादा काटे जाने के कारण ये अब दुनिया भर में मौजूद पेड़ों का 5% ही बचा है।

असल में इस फिल्म में जो भी दिखाया गया है, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की सीमा की वो दशकों से सच्चाई रही है। चन्दन की तस्करी से हमारे दिमाग में पहला नाम खूँखार डाकू वीरप्पन का आता है, लेकिन उसके मारे जाने के बाद भी ये रुकी नहीं है। चन्दन में दो प्रकार के प्रमुख होते हैं – लाल लकड़ियों वाले और सफ़ेद। पूजा-पाठ के लिए भी इसका उपयोग होता है। जहाँ ‘रक्त चन्दन’ का उपयोग शैव और शाक्त संप्रदाय द्वारा किया जाता है, वैष्णव समाज सफ़ेद चन्दन को प्रयोग में लाता है।

एक और बात जानने लायक है कि ‘रक्त चन्दन’ की लकड़ी लाल और आकर्षक दिखती है, लेकिन इसमें सफ़ेद चन्दन की तरफ सुगंध नहीं होता। विज्ञान इसे ‘Pterocarpus santalinus (टेराकॉर्पस सॅन्टनस)’ के नाम से जानता है। सामान्यतः इसके उपयोग इत्र और हवन-पूजन के लिए नहीं किया जाता है, जिसके लिए सफ़ेद चन्दन विख्यात है। लेकिन, सौंदर्य प्रसाधन और वाइन की इंडस्ट्री में इसकी बड़ी माँग है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3000 रुपए प्रति किलो से इसके मूल्य की शुरुआत होती है।

भारत में इसे काटना और इसकी तस्करी करने पर प्रतिबन्ध है, लेकिन इसके बावजूद अवैध रूप से इसकी खरीद-बिक्री होती है। इसके लिए ‘रेड सैंडलर्स एंटी-समुगलिंग टास्क फोर्स’ का गठन किया गया है, जिसने अकेले 2021 में इसकी 508 करोड़ रुपए की लकड़ियाँ जब्त की। RSASTF का कहना है कि पिछले साल इसकी तस्करी से जुड़े 117 मामले दर्ज किए गए और 342 तस्कर गिरफ्तार हुए। अब इसकी तस्करी रोकने के लिए टास्क फोर्स को सैटेलाइट फोन्स दिए जा रहे हैं, ताकि जंगल में उन्हें संचार व्यवस्था में दिक्कत न हो।

‘रक्त चन्दन’ के पेड़ मुख्य रूप से शेषचलम के जंगलों में पाए जाते हैं, जो आंध्र प्रदेश में तमिलनाडु से सटे चित्तूर, कडपा, कुरनूल और नेल्लोर नामक चार जिलों में फैला हुआ है। ये जंगल 5 लाख वर्ग हेक्टेयर में फैला हुआ है ‘रक्त चन्दन’ के पेड़ की ऊँचाई 8-11 मीटर तक की होती है। इसके पेड़ धीरे-धीरे विकसित होते हैं, इसीलिए लकड़ियों का घनत्व भी अधिक होता है। इसीलिए, ये पानी में तेज़ी से डूबता है और ऐसे ही पहचाना जाता है। चीन, जापान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में इसकी खासी माँग है।

चीन में जब ‘मिंग राजवंश’ का शासन हुआ करता था, तब वहाँ के लोग इन लकड़ियों के दीवाने हुआ करते थे। 14वीं से 17वीं शताब्दी तक के इस काल में इससे बने फर्नीचर की चीन में काफी माँग थी। वहाँ के ‘रक्त चन्दन संग्रहालय’ में अब भी इन लकड़ियों से बनी कलाकृतियाँ रखी हुई हैं। इसी तरह जापान में शादी के दौरान उपहार में दिए जाने वाले एक वाद्ययंत्र के लिए ‘रक्त चन्दन’ की लकड़ियों का उपयोग किया जाता था, लेकिन समय के साथ ये परंपरा कम हो गई है।

इसे भारत का ‘लाल सोना’ भी कहा जाता है। इसकी वजह से दक्षिण भारतीय राज्यों में कई बार हिंसा देखने को मिली है। इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। शराब और कॉस्मेटिक्स के कारोबार में लोकप्रिय इन लकड़ियों वाले ‘रक्त चन्दन’ के पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत भी भारत सरकार की ही है। दुनिया में और कहीं ये नहीं मिलते हैं। इसकी तस्करी पर 11 साल तक के जेल का प्रावधान है। 2015 में एक एनकाउंटर में 20 तस्कर मारे भी गए थे।

अंत में जान लीजिए कि असल में पुष्पा में ‘रक्त चन्दन’ की तस्करी को दिखाने के लिए नकली लकड़ियों का प्रयोग किया गया है। 500 से लेकर 1500 तक लोगों के साथ कई दिनों तक जंगल में इस फिल्म की शूटिंग की गई। फोम और फाइबर से ‘रक्त चन्दन’ की नकली लकड़ियों का निर्माण किया गया। फिल्म के आर्ट डिपार्टमेंट ने इसके लिए एक फैक्ट्री ही स्थापित कर डाली थी। एक बार तो पुलिस तक चकमा खा गई थी और क्रू को पूरी जाँच के बाद जाने दिया था। इन नकली लकड़ियों को शूटिंग के लिए जंगल ले जाना होता था और वापस लाना होता था।

महबूब की स्कूटी चेकिंग से भड़की भीड़ ने पुलिसकर्मियों के साथ की मारपीट, चौकी में मचाया तोड़फोड़: बुलानी पड़ी कई थानों की पुलिस

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक बार फिर से खाकी पर हमला बोल दिया गया। जिले के नौचंदी क्षेत्र में एल-ब्लॉक चौकी पर सोमवार (17 जनवरी 2022) शाम हुए बवाल में भीड़ ने पुलिस चौकी पर हमला कर दिया। तोड़फोड़ के साथ पुलिसकर्मियों से मारपीट की गई। कई थानों की पुलिस ने भीड़ को खदेड़कर स्थिति को जैसे तैसे सँभाला। इस बवाल में दरोगा की ओर से नौचंदी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमे में महबूब समेत कई अज्ञात को आरोपित बनाया गया है। पुलिस ने दो आरोपितों को पकड़ा है।

दरोगा विजय शुक्ला की ओर से एल ब्लॉक चौकी पर हुए बवाल के मामले में तहरीर दी गई थी। इस मामले में पुलिस के हाथ कुछ वीडियो फुटेज भी आई हैं। इन्हीं वीडियो फुटेज और बाकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने ताहिर, खालिद और महबूब को नामजद करते हुए कई अज्ञात पर मुकदमा किया है। पुलिस ने बलवा करने, संक्रमण फैलाने, सरकारी काम में बाधा समेत कई धाराएँ लगाई हैं।

इस बवाल, चौकी में तोड़फोड़ और हमले को लेकर पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। चौकी प्रभारी की तहरीर पर महबूब और उसके पक्ष के लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई की गई है। इतना ही नहीं, कुछ वीडियो फुटेज भी पुलिस के हाथ लगी हैं, जिसमें बवाल करने वालों के चेहरे दिख रहे हैं। इन्हें भी सुरक्षित किया गया है।

दरअसल नौचंदी पुलिस सोमवार शाम चेकिंग कर रही थी। इस दौरान एक स्कूटी सवार महबूब को चेकिंग के लिए रोका गया। मगर स्कूटी सवार महबूब ने पुलिस की बात को नजरअंदाज कर भागना शुरू कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने पीछा कर उस स्कूटी को पकड़ लिया। मगर महबूब भाग गया। वह अपनी बेटी की शादी के वलीमा में जा रहा था।

बात यहीं पर खत्म नहीं हुई। जानकारी के मुताबिक, तकरीबन 20 मिनट बाद महबूब भीड़ को साथ लेकर थाने पहुँचा। आरोप है कि इन युवकों ने दरोगा के साथ हाथापाई कर दी। पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। चौकी के अंदर घुसकर तोड़फोड़ का प्रयास किया गया। इस दौरान चौकी के बाहर काफी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। चौकी पर हंगामे की सूचना पर इंस्पेक्टर नौचंदी जितेंद्र कुमार सिंह पहुँचे। उन्होंने दो युवकों ताहिर व खालिद को हिरासत में लेकर थाने भिजवा दिया, जबकि अन्य भाग गए। स्कूटी सवार युवक महबूब इनका भाई था।

पुलिस ने बताया कि फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। दारोगा के साथ हाथापाई करने वालों की सीसीटीवी फुटेज से पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी। इसके बाद सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। 

‘सिखों के लिए उठाए कदमों के लिए हृदय से आभार’: कनाडाई सिख नेता ने की PM मोदी की तारीफ, कभी खालिस्तानी होने के लगे थे आरोप

जहाँ एक तरफ पंजाब में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ सिख समुदाय में माहौल बनाने की कोशिश हो रही है वहीं अब ब्रिटिश सिख समुदाय के बाद कनाडा में रहने वाले सिख नेता रिपुदमन सिंह मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने पत्र लिखकर मोदी सरकार द्वारा सिख समुदाय के लिए उठाए गए कई अभूतपूर्व सकारात्मक कदमों के लिए उनका ह्रदय से आभार व्यक्त किया है। बता दें कि रिपुदमन सिंह पर कभी खालिस्तानी होने का आरोप भी लगा था। यहाँ तक उनके ऊपर 1985 में हुए एक बम ब्लास्ट मामले में लम्बे समय तक कनाडा में केस भी चला था। हालाँकि इसमें उन्हें बरी कर दिया गया था।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी को भेजे गए अपने पत्र में कनाडाई सिख नेता रिपुदमन सिंह मलिक ने लिखा, “मैं आपको सिखों द्वारा लंबे समय से की जाने वाली माँगों और शिकायतों के निवारण के लिए आपके द्वारा उठाए गए अभूतपूर्व सकारात्मक कदमों के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। जिसमें उस ब्लैकलिस्ट को खत्म करना भी शामिल है, जो विदेशों में रहने वाले हजारों सिखों की भारत यात्रा को प्रतिबंधित करता है। पासपोर्ट और वीजा प्रदान करने में समस्या पैदा करता है। शरणार्थियों और उनके परिवारों के लिए, 1984-दंगों के सैकड़ों बंद मामलों को फिर से खोलना, जिनमें से कुछ के लिए जेल की सजा भी हुई, 1984-दंगों को सदन के पटल पर तत्कालीन गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा ‘नरसंहार’ घोषित करते हुए, मुआवजे के रूप में सिख विरोधी नरसंहार पीड़ितों के परिवार को 5.00 लाख, श्री करतारपुर साहेब कॉरिडोर खोलने से भारत के तीर्थयात्रियों को हमारे पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के पूजनीय स्थान पर जाने की सुविधा मिली है।”

उन्होंने 26 दिसंबर को गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों की शहादत को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में घोषित किए जाने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। इसी पत्र में उन्होंने मोदी सरकार और भारत के खिलाफ सिख समुदाय के कुछ गुमराह सदस्यों (खालिस्तानी समूह) द्वारा चलाए जा रहे हिंसा के सुनियोजित अभियान पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, यह कुछ विदेशी शक्तियों के इशारे पर किया जा रहा है जो भारत को अस्थिर करने और इसकी राष्ट्रीय अखंडता को चुनौती देना चाहते हैं।

पत्र में आगे रिपुदमन सिंह ने लंबित मुद्दों के निवारण के लिए भारत सरकार के साथ काम करने का वादा किया। वहीं सिख समुदाय को को सम्बोधित करते हुए लिखे गए एक अलग पत्र में, सिंह ने उनसे ऐसे दुर्भावनापूर्ण, शातिर और प्रेरित अभियानों (खालिस्तानी या विदेशी) से दूर रहने का आग्रह किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, “पंजाब में हिंसा केवल पंजाब और पूरे भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में सिख समुदाय के हितों को नुकसान पहुँचाती है। मैं विश्व शांति के लिए रोज अरदास करता हूँ क्योंकि मुझे अपने समुदाय या किसी समुदाय को हिंसा के कारण पीड़ित होते देखना पसंद नहीं है।”

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “मैं नहीं मानता कि सिख समुदाय के प्रति उनके कई सकारात्मक कार्यों को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की गलत तरीके से आलोचना करना सही है। आलोचना करने के बजाय हमें भविष्य के लिए सकारात्मक साझेदारी की दिशा में उनके नेतृत्व में भारत सरकार की सराहना करनी चाहिए और सार्थक रूप से जुड़ना चाहिए।”

गौरतलब है कि रिपुदमन सिंह मलिक कनाडा में खालसा स्कूल चलाते हैं और 1985 में कनाडा की न्यायपालिका द्वारा एयर इंडिया कनिष्क बमबारी में 2005 में उन्हें बरी कर दिया गया था। फिर भी उन पर बैन था जिसे मोदी सरकार ने हटा दिया था तो करीब 25 साल बाद 2019 में वह अपने भाई से मिलने दिल्ली आए थे। जिसका जिक्र करते हुए उन्होंने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है।

खालिस्तानी प्रोपगेंडे को पीछे धकेल सामने आए ब्रिटिश सिख

विदेश में बैठकर भारत विरोधी अभियान चलाने वाले खालिस्तानियों को ब्रिटिश सिखों ने मुँहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया है। वहाँ के सिखों ने खालिस्तानी एजेंडे को पीछे धकेलते हुए अपना समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। रविवार (16 दिसंबर, 2022) को साउथहॉल के पार्क एवेन्यू में स्थित गुरुद्वारा गुरू सभा में एकत्रित होकर सिख समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी को आभार दिया, उनकी प्रशंसा की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिख समुदाय के नेताओं ने साउथहॉल के पार्क एवेन्यू में स्थित गुरुद्वारा गुरू सभा में इकट्ठा होकर एक प्रस्ताव पारित किया। यहाँ उन्होंने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने सिखों के लिए और उनकी गलतफहमी को दूर करने के लिए बहुत कुछ किया है। ब्रिटिश सिखों ने भी पीएम द्वारा 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित करने के लिए भी उनका धन्यवाद दिया। मंडली में शामिल सिख नेताओं और गुरुद्वारा समिति के पदाधिकारियों ने उन लोगों को चुनौती दी जो भारत और यहाँ की वर्तमान सरकार के बारे में तथ्यात्मक रूप से गलत चीजों को आगे बढ़ा रहे हैं।

‘संजय दत्त अपराधी नहीं, उसे फँसाया गया था’: 1993 ब्लास्ट के 29 साल बाद बोले सुभाष घई – मुझे पता था चोली के पीछे क्या है

1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में संजय दत्त (Sanjay Dutt) की गिरफ्तारी के 29 साल बाद डायरेक्टर सुभाष घई (Subhash Ghai) ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह जानते थे कि संजय दत्त कोई क्रिमिनल नहीं था। वह निर्दोष था, उसे केवल फँसाया गया था। मनोरंजन वेबसाइट बॉलीवुड हंगामा ने उन्हें कोट करते हुए लिखा, “मैं संजय दत्त को बचपन से जानता था। मैंने वर्ष 1982 में आई संजय की फिल्म ‘विधाता’ का निर्देशन किया। फिर 10 साल बाद मैंने उन्हें ‘खलनायक’ के लिए कास्ट किया। मैं उन्हें बहुत करीब से जानता था। जब संजय को गिरफ्तार किया गया तो मैं यह जानता था कि वह निर्दोष हैं, उसे केवल फँसाया गया है। वह अपराधी नहीं हैं।”

उसी समय संजय दत्त की फिल्म ‘खलनायक‘ भी रिलीज हुई थी। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल कर थी। सुभाष ने कहा कि संजय जिस बुरे दौर से गुजर रहे थे, उसका इस्तेमाल करना मेरे उसूलों के खिलाफ था। उन्होंने खुलासा किया कि मैंने ‘खलनायक’ (Khalnayak) के प्रमोशन पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया। एक सवाल के जवाब में घई ने कहा कि उन्होंने कभी भी ‘खलनायक’ के प्रचार के लिए संजय के कानूनी विवाद का इस्तेमाल नहीं किया।

संजय दत्त को पहली बार अप्रैल 1993 में गिरफ्तार किया गया था और उनकी फिल्म ‘खलनायक’ को उसी साल 15 जून को रिलीज किया गया था। संजय ने फिल्म में एक वॉन्टेड अपराधी की भूमिका निभाई थी। घई ने कहा कि फिल्म में दत्त की मौजूदगी के कारण काफी कॉन्ट्रोनर्सी हुई। उन्होंने कहा, “चोली के पीछे गाने को लेकर इतना बवाल हुआ, 32 पोलिटिकल यूनिट्स मेरे खिलाफ हो गए, कोर्ट केस हो गए, लेकिन मैं खामोश रहा। मुझे पता था कि मैंने कौन सी फिल्म बनाई है। मुझे पता था कि संजय दत्त क्या हैं, मुझे पता था कि चोली के पीछे क्या है।”

उन्होंने आगे बताया कि मैंने सबसे कम प्रमोशन अपनी इस फिल्म के लिए किया था, क्योंकि ‘खलनायक’ उन दिनों संजय की वजह से खासा सुर्खियों में थी। सब जगह उसके चर्चे थे। मैंने बस लोगों को इंफॉर्म किया था कि इस दिन फिल्म थिएटर में लग रही है। इसका अलावा मैंने कुछ नहीं किया।

बता दें कि संजय को वर्ष 2006 में टाडा अदालत द्वारा आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने उन्हें 9 एमएम पिस्तौल और एके-56 राइफल रखने का दोषी पाया था। उन्होंने 2007 में कुछ दिन जेल में बिताए, लेकिन तीन सप्ताह से भी कम समय में उन्हें जमानत मिल गई। इसके बाद वह 2013 से 2016 तक जेल में रहे थे।

‘हिन्दुओं को भागने की जगह नहीं मिलेगी…’ कहने वाले मौलाना तौकीर रज़ा ने कॉन्ग्रेस को दिया समर्थन, प्रियंका गाँधी से मुलाकात

बरेली के ‘आला हजरत शरीफ’ के तौकीर रजा खान ने कॉन्ग्रेस पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। हिन्दुओं के खिलाफ ज़हर उगलने के बाद वो सुर्ख़ियों में आए थे। उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के इस बात का ऐलान किया कि मौलाना तौकीर रजा खान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी को समर्थन दिया है। साथ ही प्रियंका गाँधी के साथ तौकीर रजा व अन्य मुस्लिम नेताओं की एक तस्वीर भी वायरल हुई है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के अनुसार, तौकीर रजा ने उत्तर प्रदेश में ‘अमन-चैन’ के लिए गैर-भाजपा सरकार की वकालत की और मुस्लिमों से कहा कि वो अपने वोट को बँटने नहीं दें। तौकीर रजा ने कहा, ”मैं उत्तर प्रदेश से प्यार करने वाले सभी हिंदू, मुस्लिम, सिख ईसाई और खासकर मुस्लिमों से अपील करता हूँ कि अगर राज्य में शांति कायम रखनी है तो किसी भी कीमत पर अपने वोट को तकसीम (बँटने) नहीं होने देना है। कॉन्ग्रेस की हिमायत में वोट करना है।”

तौकीर रजा ने कहा कि कॉन्ग्रेस के साथ जब भी मुस्लिम और दलित खड़े हुए हैं, तब-तब पार्टी ने सरकार बनाई है। उन्होंने कहा कि इस बार भी ‘इंशाअल्लाह’ हम सरकार बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा सरकार के लिए क़ुरबानी भी दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वो अपनी पार्टी की क़ुरबानी देकर कॉन्ग्रेस के साथ आए हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने निशाना साधते हुए पूछा कि क्या प्रियंका गाँधी से इसी मुलाकात के बाद मौलाना तौकीर रजा ने कहा की हमारे लड़ाको ने अगर कानून अपने हाथ में ले लिया तो हिन्दुओं को देश में रहने की जगह नहीं मिलेगी और हिंदुस्तान का नक्शा बदल देंगे?

कॉन्ग्रेस पार्टी ने प्रियंका गाँधी के साथ उनकी तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “बीते दिनों आला हज़रत बरेली शरीफ के मौलाना तौकीर रज़ा खान साहब (राष्ट्रीय अध्यक्ष, इत्तेहाद मिल्लत कौंसिल) की कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जी से मुलाकात हुई थी। उन्होंने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी से चुनाव ना लड़ाने का फैसला करते हुए अपनी पार्टी का पूरा समर्थन कॉन्ग्रेस पार्टी और कॉन्ग्रेस पार्टी के उम्मीदवारों को दिया है। पाँचों राज्य में हो रहे चुनाव में भी उन्होंने अपने समर्थकों को कॉन्ग्रेस के समर्थन के लिए कहा है।”

बता दें कि भड़काऊ भाषण देते हुए तौकीर रजा ने कहा था कि जिस दिन मुस्लिम कानून हाथ में ले लेंगे, उस दिन हिंदुओं को पूरे देश में कहीं पनाह नहीं मिलेगा। रजा ने कहा था, “अगर ये गुस्सा फुट पड़ा, जिस दिन मेरा नौजवान मेरे कंट्रोल से बाहर आ गया उस दिन….. । लोग मुझे कहते हैं कि तुम तो बुजदिल हो गए हो, तो मैं कहता हूँ कि पहले मैं मरूँगा, उसके बाद तुम्हारा नंबर आएगा। मैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर पर कहता हूँ कि मुझे उस वक्त से डर लगता है, जिस दिन मेरा ये नौजवान कानून अपने हाथ में ले लेगा उस दिन हिंदुस्तान में तुम्हें रहने की कहीं जगह नहीं मिलेगी।”

पंजाब चुनाव से पहले CM चन्नी के भतीजे के घर पड़ी ED रेड, अवैध बालू खनन मामले में कॉन्ग्रेस विधायकों पर भी हैं आरोप

अवैध बालू खनन (Illegal sand mining) मामले में आज (18 जनवरी 2022) पंजाब मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (CM Charanjeet singh) के भतीजे भूपिंदर सिंह हन्नी के घर में ईडी ने छापेमारी की। हन्नी के घर के अलावा 9-10 अन्य ठिकानों पर भी ईडी ने छापा मारा। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मंगलवार की सुबह अपनी कार्रवाई की। सामने आई तस्वीरों में सीएम चन्नी के भतीजे का लुधियाना वाला घर नजर आ रहा है जिसके बाहर पुलिस बल तैनात है और अंदर ईडी की कार्रवाई की जा रही है।

ईडी की कार्रवाई को जहाँ कॉन्ग्रेस ने केंद्र सरकार का चुनावी दांव बताया है। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी इस पुरानी पार्टी पर अवैध बालू खनन के कारोबार में शामिल होने का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि कॉन्ग्रेस के विध्याक गैर कानूनी ढंग से अवैध रेत खनन के कारोबार में संलिप्त हैं। पार्टी नेताओं पर आरोप मढ़ते हुए उन्होंने कहा था, “अगर मैं नाम बताना शुरू करूँ तो ऊपर से नाम बताना होगा।” अमरिंदर सिंह का यह दावा था कि उन्होंने इस संबंध में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को बताया था। 

इसी तरह आम आदमी पार्टी ने भी पंजाब में अवैध बालू खनन के आरोपों पर पंजाब कॉन्ग्रेस पर कई बार निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, “सीएम चन्नी पर बालू चोरी के गंभीर आरोप हैं। पंजाब जानना चाहता है कि क्या वह अवैध रेत खनन के मालिक हैं, उनकी साझेदारी है या दूसरों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।”

गौरतलब है कि विपक्षी पार्टियाँ लगातार अवैध बालू खनन मामले में सीएम चन्नी और कॉन्ग्रेस को घेरती रही हैं। बावजूद इन सबके पंजाब कॉन्ग्रेस ने ट्वीट करके इस छापेमारी पर अपनी नाराजगी दिखाई और कहा चुनाव के दौरान भाजपा सरकार सीबीआई, ईडी, आयकर रेड्स का प्रयोग करती है। अलका लांबा ने तो ये तक कहा कि भारतीय जनता पार्टी सीएम चन्नी की बढ़ती लोकप्रियता से डर गई है। इसलिए अब वह अपनी बी टीम (केंद्रीय एजेंसियाँ) के माध्यम से छापेमारी वाले काम करवा रही है।

बता दें कि सीएम चन्नी के भतीजे के घर पर रेड चुनावों से एक माह पहले पड़ी है। प्रदेश की 117 सीटों पर एक ही राउंड में 20 फरवरी को वोट डलेगा। पहले ये तारीख 14 फरवरी रखी गई थी मगर कॉन्ग्रेस समेत सभी दलों द्वारा चुनाव टालने की माँग के बाद इसे 20 फरवरी कर दिया गया ।

‘सपा के लिए CM योगी को काले झंडे दिखाए, फिर भी पार्टी ने साथ नहीं दिया’: जानिए कौन हैं मनमोहन झा जिन्हें ओवैसी ने बनाया उम्मीदवार

ऑल इंडिया मजलिस-इ-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2022) में पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रहे हैं। यही कारण है कि ओवैसी की पार्टी ने बड़ा दाँव खेलते हुए गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा सीट से पंडित मनमोहन झा (Manmohan Jha) को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। मनमोहन झा गामा कई वर्षों तक समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) का हिस्सा रहे हैं।

मनमोहन झा गामा मूलरूप से बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले हैं। वह केवल दसवीं तक पढ़े हैं और बेहद गरीब परिवार से आते हैं। उन्होंने छोटी सी उम्र में ही काम तलाशना शुरू कर दिया था। कुछ समय बाद दिल्ली आकर उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था। झा समाजवादी पार्टी में जिला उपाध्यक्ष और साहिबाबाद विधानसभा के प्रभारी भी रह चुके हैं।

बताया जाता है कि साहिबाबाद में मनमोहन झा काफी मशहूर हैं। उन्होंने गाजियाबाद और साहिबाबाद क्षेत्र में अपनी अच्छी पकड़ बनाई हुई है। इसके चलते ही उन्होंने लंबे समय तक समाजवादी पार्टी का राजनीतिक कद भी तेजी से बढ़ाया। वह 22 साल पार्टी तक सपा का हिस्सा रहे हैं।

मनमोहन गामा का कहना है कि वह समाजवादी पार्टी में इसलिए शामिल हुए थे, क्योंकि वह (सपा) पहले लोहिया जी के सिद्धांतों पर चलते थे। गामा का यह भी कहना है कि सपा अब पूंजीपतियों की पार्टी हो गई है। हमें उन्होंने गरीब होने के कारण अपमानित किया है।

झा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर सपा को अपना इस्तीफा सौंपते हुए 15 जनवरी को लिखा था, “मैंने समाजवादी पार्टी में वर्ष 1998 से विभिन्न पदों पर रहकर पार्टी की सेवा की। कई बार जेल गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वर्ष 2017 में एलिवेटेड रोड का उद्घाटन करते हुए काला झंडा दिखाकर उनका विरोध किया। जब आजम साहब और अब्दुल्ला आजम साहब को गिरफ्तार किया गया था, उस समय हमने यूपी सरकार का पुतला दहन किया था, जिसका मुकदमा आज भी चल रहा है। सपा की वजह से मैंने और मेरे परिवार ने कितनी यातनाएँ सही। इसके बावजूद पार्टी ने हमारा साथ नहीं दिया।”

फोटो साभार: मनमोहन झा का फेसबुक

हमेशा हिंदू विरोधी बयान देकर विवादों में रहने वाले औवेसी की पार्टी ने दूसरी लिस्‍ट में एक सीट पर हिंदू प्रत्‍याशी तो अन्‍य सात पर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है। साहिबाबाद विधानसभा सीट पूरे प्रदेश में सबसे अधिक मतदाताओं वाली सीट है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस सीट पर होने वाला मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। इससे पहले एआईएमआईएम ने नौ सीटों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। यानी AIMIM अब तक 17 प्रत्याशियों के टिकट का ऐलान कर कर चुकी है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा सीटों के लिए सात चरणों में मतदान होना है। 10 फरवरी को राज्य के पश्चिमी हिस्से के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान के साथ इसकी शुरुआत होगी। दूसरे चरण में 14 फरवरी को राज्य की 55 सीटों पर मतदान होगा। तीसरे चरण में 59 सीटों पर, चौथे चरण में 60 सीटों, पाँचवें चरण में 60 सीटों, छठे चरण में 57 सीटों और सात मार्च को सातवें चरण में 54 सीटों पर मतदान होगा।

पंजाब में फिर से ‘बेअदबी’… गुरुद्वारा रेरू साहिब के पास गुटका साहिब के फटे हुए पन्ने मिले: इलाके में तनाव, FIR दर्ज

पंजाब में बार फिर से ‘बेअदबी’ का मामला सामने आने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। यह मामला लुधियाना के डाबा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले बसंत नगर इलाके की है। यहाँ रविवार (16 जनवरी 2022) शाम को गुरुद्वारा रेरू साहिब के पास गुटका साहिब के फटे हुए पन्ने मिले। जिसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है।

पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से फटे हुए पन्नों को इकट्ठा किया और गुरुद्वारा साहिब के कर्मचारियों को सौंप दिया। संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP, ग्रामीण) रावचरण सिंह बराड़ ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने गुरुद्वारा रेरू साहिब के पास एक गली में गुटका साहिब के फटे पन्ने देखे थे और पुलिस को सूचित किया। जिसके बाद उन्होंने जाँच शुरू कर दी।

मामले में पुलिस ने सुखदीप सिंह की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। डाबा थाना प्रभारी उप निरीक्षक दविंदर सिंह ने कहा कि अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295-A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खँगाल रही है और आरोपित का पता लगा रही है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

गौरतलब है कि हाल ही में पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला शहर स्थित भागूपुर हवेलियाँ गुरुद्वारा में बेअदबी के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि उसने गुरुग्रंथ साहिब के स्वरूप को पालकी साहिब से उठा कर मेज पर रख दिया। इसके बाद उसने ‘गुटका साहिब’ को उठाकर अपनी जेब में डाल लिया। उसने रुमाल साहिब को भी उठाकर जेब में रख लिया और भागने की कोशिश करने लगा। तभी गुरुद्वारे के प्रबंधकों ने उसे पकड़ कर एक कमरे में बंद कर दिया। उसे मानसिक रूप से असंतुलित बताया गया था।

‘रुमाल साहिब’ एक प्रकार का पवित्र रुमाल है। जिन सिखों ने अपने बाल कटा लिए हैं और पगड़ी नहीं पहनते हैं, वो गुरुद्वारा समेत सिखों के अन्य पवित्र स्थल में जाने पर इसे अपने सिर पर रखते हैं। हिन्दू समाज के लोग भी गुरुद्वारा में दर्शन करने जाते हैं तो इससे अपना सिर ढकते हैं। अधिकतर गुरुद्वारा में अतिथियों के लिए इसे पहले से ही बड़ी संख्या में रखा जाता है। अगर गुरुद्वारा से ये नहीं मिलता है, तो लोग घर से ही साफ़-सुथरा रुमाल लेकर जा सकते हैं।

इससे पहले पंजाब के मुक्तसर जिले से गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला सामने आया था। यहाँ सेवादार के बेटे पर ही आरोप था कि उसने धर्मग्रंथ को मूल स्थान से उठाकर आँगन में रखकर उसका अनादर किया। दिसंबर 2021 में अमृसर के स्वर्ण मंदिर में कथित बेअदबी के आरोप में आरोपित की दरबार साहिब परिसर में ही हत्या कर दी गई थी।

बता दें कि ‘गुटका साहिब’ को सिख समुदाय में एक पवित्र पुस्तक के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसका आकार छोटा होता है। इसमें गुरुओं की कुछ चुनी हुई ‘वाणी’ को प्रकाशित किया जाता है। ‘गुटका’ शब्द संस्कृत और पाली भाषाओं से आता है, जिसका अर्थ होता है – सुरक्षित रखना, या फिर लिफाफे में रखना। 18वीं शताब्दी में जब इस्लामी आक्रांताओं का अत्याचार बढ़ गया था, तब इसके छोटे आकार के कारण सिख संतों ने ‘गुटका साहिब’ पास में रखना और इसे लेकर यात्रा करना उचित समझा। इसके कई प्रकार हैं, जैसे – रोज पाठ किए जाने वाले ‘गुटका साहिब’ को ‘नितनेम गुटका’ कहते हैं।