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‘नहीं करने देंगे PM मोदी सुरक्षा चूक की जाँच’: जस्टिस इंदु मल्होत्रा को SFJ की धमकी, वकीलों से कहा – तुम सब खतरे में हो, लिस्ट बन रही है

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक की जाँच के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया था। अब खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने उन्हें भी फोन कॉल कर के धमकी दी है। कट्टरवादी संगठन ने कहा है कि वो जस्टिस इंदु मल्होत्रा को इस मामले की जाँच नहीं करने देगा। प्रदर्शनकारियों के कारण बठिंडा के हुसैनीवाला फ्लाईओवर पर 20 मिनट तक पीएम मोदी का काफिला रुका रहा था, जिसके बाद उन्हें वापस दिल्ली लौटना पड़ा था और फिरोजपुर की रैली रद्द हो गई थी।

कई वकीलों को SFJ ने एक वॉइस नोट भेजा है। इसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के नेतृत्व वाली समिति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जाँच नहीं करने दी जाएगी। संगठन ने कहा कि प्रधानमंत्री और सिखों में से किसी एक को ही चुनना होगा। साथ ही उसने ये भी बताया कि वो सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक सूची भी तैयार कर रहा है। ये पहली बार नहीं है जब वकीलों को इस तरह की धमकी खालिस्तानी संगठन द्वारा दी गई हो।

हाल ही में ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन’ ने भी जस्टिस इंदु मल्होत्रा को पत्र लिख कर वकीलों को धमकी दिए जाने वाले मामले की जाँच के लिए निवेदन किया था। इस पात्र में बताया गया था कि कई बार वकीलों को धमकी मिली है। SFJ ने वकीलों को धमकी देते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन लाल किला पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने दिया जाएगा। साथ ही एक वीडियो जारी कर के सिखों को भी भड़काया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील को तो 5 बार धमकी दी गई। महाराष्ट्र के पूर्व स्टैंडिंग काउंसिल निशांत कतनेश्वरकर ने बताया, “मुझे यूके के नंबर से फोन कॉल्स किए जा रहे हैं। SFJ का गुरपतवंत सिंह पन्नू मुझे धमकी दे रहा है। SFJ कह रहा है कि वो वकीलों की पहचान कर लेगा। शिकायत दायर कर के वकीलों ने खुद को खतरे में डाल लिया है। उसने जस्टिस इंदु मल्होत्रा को जाँच से रोकने के साथ-साथ गणतंत्र दिवस पर लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने की धमकी भी दी है।”

इससे पहले भी खालिस्तान समर्थक ग्रुप (Khalistani Supporters) सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से धमकी दी गई थी कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। यह ऐलान SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा किया गया था। फेसबुक पर गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा साझा किए गए एक नए प्रोपेगेंडा वीडियो में, प्रतिबंधित संगठन ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में भारतीय तिरंगे के बजाए खालिस्तानी झंडा फहराने वाले शख्स को ‘इनाम’ के रूप में $1 मिलियन डॉलर (7.39 करोड़ रुपए) देने की घोषणा की थी।

भारत सरकार ने बचा कर निकाला था, अब Pak के रास्ते फिर काबुल पहुँच गई पत्रकार; कहा- ये सपने सच होने जैसा

स्वतंत्र पत्रकार कनिका गुप्ता पाकिस्तान के रास्ते तालिबान-नियंत्रित क्षेत्र में वापस चली गई हैं। तरीबन पाँच महीने पहले भारत सरकार ने उन्हें युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से बाहर निकाला था। गुरुवार (13 जनवरी 2022) को एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने यह जानकारी दी। कनिका ने लिखा, “पाकिस्तान से होकर गुजरते हुए 10 अद्भुत दिन बिताने के बाद अभी काबुल पहुँची। हाईवे का अनुभव करना एक सपने के सच होने जैसा था… रास्ते में मैंने जो कहानियाँ और प्यार साझा किया, वह जीवन भर मेरे साथ रहेगा।”

कनिका के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

स्वतंत्र पत्रकार ने ट्विटर पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उनकी कार को तालिबान शासित अफगानिस्तान के काबुल शहर में प्रवेश करते हुए देखा जा सकता है।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कनिका गुप्ता काबुल में उतरने के बाद से अफगानिस्तान में अपनी यात्रा को लेकर लगातार सोशल मीडिया पर अपडेट कर रही हैं। शनिवार (15 जनवरी, 2022) को उन्होंने सरकारी ऑफिस के बाहर अफगानों पर तालिबान द्वारा नजर रखने की घटना को लेकर ट्वीट किया और कहा, “आप पर नजर रखने का सही तरीका नहीं है।”

कनिका के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

उसी दिन एक अन्य ट्वीट में उन्होंने ‘कोविड-19 के प्रति जागरूक तालिबान’ की तस्वीर पोस्ट की थी।

कनिका के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

कनिका गुप्ता ने अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के दौरान भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई

पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान में प्रवेश करने के बाद काबुल की सड़कों पर घूम रही कनिका गुप्ता को काबुल में तालिबान के कब्जे के बाद अगस्त में मदद की सख्त जरूरत थी। पिछले साल 15 अगस्त को एक ट्वीट में स्वतंत्र पत्रकार कनिका गुप्ता ने दावा किया था, ”राजधानी प्यारी काबुल उखड़ने लगी है। आशा का खत्म होते देखना लोगों की मृत्यु देखने से कहीं अधिक कठिन है।”

उन्होंने कहा, “एक ऑफिस में एक महिला सुरक्षा ब्रीफिंग में खबर आई कि तालिबान शहर में प्रवेश कर गया है। कमरे में दहशत फैल गई, सभी महिलाएँ रोने लगीं। उन्होंने कहा, सब खत्म हो गया है।” कनिका गुप्ता ने तब सत्ता के सुचारू रूप से चलने की उम्मीद जताई थी। स्वतंत्र पत्रकार ने मोदी सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा था, “लेकिन शहर में बहुत दहशत है और सरकार कोई जवाबदेही नहीं ले रही है। इसलिए हम अपने दम पर हैं।”

कनिका के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

काबुल में भारतीय दूतावास पर असहयोग का आरोप लगाते कनिका गुप्ता ने कहा था कि एक भारतीय व्यक्ति का पासपोर्ट उसके एम्पलॉयर (Employer) द्वारा ले लिए जाने के कारण वह तालिबान के नियंत्रण वाले क्षेत्र में फँस गया था। उन्होंने कहा, “जब उन्होंने भारतीय दूतावास को फोन किया तो वे कहते हैं कि अगर आपका मालिक आपको नहीं छोड़ना चाहता तो हम क्या कर सकते हैं? क्या यह सच में हो रहा है? मैं सरकार की मदद के बिना यहाँ फँसे भारतीयों के लिए चिंतित हूँ।”

कनिका के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
ट्वीट का स्क्रीनशॉट

जब एक ट्विटर यूजर (@mechirubhat) ने बताया कि गुप्ता ने अफगानिस्तान से निकाले जाने के बाद भारत सरकार को धन्यवाद देने की भी जहमत नहीं उठाई तो पत्रकार ने दावा किया कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य था। इसलिए उन्हें इसके लिए सरकार को धन्यवाद देने की आवश्यकता नहीं है।

कनिका गुप्ता के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

भारत लौटने पर उन्होंने काबुल शहर से भागने की अपनी दुख भरी कहानी सुनाई थी। उन्होंने इंडिया टुडे से आपबीती साझा करते हुए कहा था, “जब मैं विमान सी-17 में चढ़ने वाली था तो मैंने टरमैक पर जो देखा, वह बेहद भयानक था। कितनी टूटी-फूटी चप्पलें थीं, एक औरत का दुपट्टा, एक बच्चे की टूटी-फूटी गुड़िया। केवल यह कल्पना करने के लिए कि बच्चे ने अपनी आखिरी दौड़ के दौरान अपनी गुड़िया उठा ली होगी! यह बहुत हृदयविदारक था।”

कनिका गुप्ता के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इस महीने की शुरुआत में कनिका गुप्ता ने पड़ोसी देश पाकिस्तान की यात्रा की थी। उन्होंने लाहौर, इस्लामाबाद और पेशावर जैसे प्रमुख शहरों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने किस्सा ख्वानी बाजार में एक चाय की दुकान का एक वीडियो पोस्ट किया था, जो भारतीयों के लिए प्रतिबंधित है।

खालिस्तानी प्रोपगेंडे को पीछे धकेल सामने आए ब्रिटिश सिख, PM मोदी को दिया धन्यवाद, कहा- ‘आपने बहुत कुछ किया है’

विदेश में बैठकर भारत विरोधी अभियान चलाने वाले खालिस्तानियों को ब्रिटिश सिखों ने मुँहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया है। वहाँ के सिखों ने खालिस्तानी एजेंडे को पीछे धकेलते हुए अपना समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। रविवार को साउथहॉल के पार्क एवेन्यू में स्थित गुरुद्वारा गुरू सभा में एकत्रित होकर सिख समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी को आभार दिया, उनकी प्रशंसा की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिख समुदाय के नेताओं ने साउथहॉल के पार्क एवेन्यू में स्थित गुरुद्वारा गुरू सभा में इकट्ठा होकर एक प्रस्ताव पारित किया। यहाँ उन्होंने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने सिखों के लिए और उनकी गलतफहमी को दूर करने के लिए बहुत कुछ किया है। ब्रिटिश सिखों ने पीएम द्वारा 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित करने के लिए भी उनका धन्यवाद दिया। मंडली में शामिल सिख नेताओं और गुरुद्वारा समिति के पदाधिकारियों ने उन लोगों को चुनौती दी जो भारत और यहाँ की वर्तमान सरकार के बारे में तथ्यात्मक रूप से गलत चीजों को आगे बढ़ा रहे हैं।

बता दें कि यूएस में सिख समुदाय द्वारा पारित किए गए इस प्रस्ताव को एक साहसिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले तक विदेश से सिर्फ खालिस्तानियों द्वारा दिखाए गए प्रोपगेंडे की खबरें हमें पढ़ने को मिलती थीं। हालाँकि अब, वहाँ के सिखों ने सामने आकर उनका विरोध करने का मन बनाया है और भारत विरोधी खबरों की जगह भारत के समर्थन में उठे कदमों की खबर आ रही है।

सुरक्षा चूक मामले में भी ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने किया था PM मोदी का समर्थन

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने पीएम मोदी के समर्थन में अपना बयान जारी किया था। अपने बयान में सिख एसोसिएशन न केवल उन कार्यों को गिनाया था जिन्हें पीएम मोदी ने सिखों के लिए किया बल्कि पीएम की सुरक्षा में हुई चूक मामले की घोर निंदा करते हुए कहा था कि जिन लोगों ने पीएम मोदी का रास्ता रोका, उन्होंने असल में पंजाब का विकास रोका है।

एसोसिएशन के चेयरमैन लॉर्ड रामी रेंजर ने अपने बयान में कहा था, “मैं बताना चाहूँगा कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुनानक देव की जयंती के अवसर पर पंजाब के किसानों के सम्मान में तीन कृषि कानून खत्म करने का निर्णय लिया। उसे संसद से खत्म कराया। पंजाब के लोगों को तो इसके लिए पीएम मोदी के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। जिन लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी का रास्ता रोकने की कोशिश की, बाद में उन्हें अहसास हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी पंजाब के लोगों और भी कई सौगातें देने आए थे। पीएम के रास्ते में गतिरोध पैदा करके इन लोगों ने पूरे पंजाब के विकास को रोका है।”

दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में बम का ISI कनेक्शन: आतंकी हमला टालने के लिए अलर्ट जारी

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके से मिली विस्फोटक सामग्री की बरामदगी के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और इसकी जिहादी सेल की संलिप्तता का संदेह है। बता दें कि गाजीपुर फ्लावर मार्केट में शुक्रवार (14 जनवरी 2022) को एक लावारिस बैग से इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किया गया।

दिल्ली पुलिस की जाँच में पता चला है कि यह आईडी 24 बम की खेप का हिस्सा था, जिसे सीमा पार से या तो जमीन के जरिए या समुद्री मार्ग से पाकिस्तान द्वारा स्थानीय आतंकवादियों को भेजा गया था। हाल ही में जम्मू और कश्मीर और पंजाब में बरामद किए गए IED और विस्फोटक सामग्री को भी उसी खेप का हिस्सा माना गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कुछ उपकरणों की तस्करी गुजरात और उत्तर प्रदेश में की गई हो सकती है।

दिल्ली पुलिस के शीर्ष जाँचकर्ताओं के मुताबिक, गाजीपुर डिवाइस एक टिफिन बम था जिसमें तीन किलोग्राम आरडीएक्स कोर चार्ज के रूप में और अमोनियम नाइट्रेट सेकेंडरी चार्ज के रूप में था। डिवाइस को स्टील के टिफिन में कीलों और बॉल बेयरिंग के साथ पैक किया गया था और इसे दूर से ही उड़ाया जा सकता था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इन आईईडी को भारत में मौजूदा स्लीपर मॉड्यूल के साथ-साथ कुछ आपराधिक गिरोहों के लिए सीमा पार से तस्करी कर लाया गया था। सितंबर 2021 में दिल्ली पुलिस ने मुंबई, लखनऊ, इलाहाबाद और दिल्ली में कई गिरफ्तारियों के साथ एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। दिल्ली पुलिस के जाँचकर्ताओं का मानना ​​है कि आईईडी की खेप पिछले स्वतंत्रता दिवस के आसपास भारत आई थी।

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ ​​खेप से अन्य आईईडी बरामद करने की कोशिश कर रही है। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, “ऐसा मालूम होता है कि भारत में कट्टरपंथी तत्वों को सीमा पार से पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों पर उपकरण लगाने या काम करने के लिए स्थानीय आपराधिक तत्वों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा जा रहा है। राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया है ताकि आतंकी हमला टल जाए।”

गौरतलब है कि दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में बम की घटना के कुछ दिन पहले ही खुफिया एजेंसियो ने दिल्ली समेत कई राज्यों को एक आतंकी अलर्ट जारी किया था। जिसमें बकायदा यह बताया गया था कि कैसे 26 जनवरी के मद्देनजर लश्कर-ए-तैयबा जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन बब्बर खालसा इंटरनेशनल आतंकी संगठन भीड़भाड़ वाले इलाके प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों बाजारों में आतंकी गतिविधि को अंजाम दे सकते हैं।

बॉर्डर जिलों में बढ़ रहे मस्जिद-मदरसों के बीच उत्तराखंड की जमीन पर नेपाल का दावा, चीन कब्जा चुका है उनका 33 हेक्टेयर

नेपाल ने लिपुलेख में सड़क के निर्माण एवं विस्तारीकरण की भारत की परियोजनाओं का विरोध किया है। नेपाल ने एक बार फिर से लिंपियाधुरा को अपना हिस्सा बताया है। लिंपियाधुरा के साथ-साथ नेपाल ने कालापानी में भी भारत द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों का विरोध किया है।

नेपाल के संचार मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने भारत की परियोजनाओं का विरोध करते हुए रविवार (16 जनवरी) को बयान दिया है। नेपाल की देउबा सरकार ने भारत से सीमा विवाद सुलझाने के लिए राजनयिक तौर-तरीकों को अपनाने के लिए कहा है।

अपने बयान में कार्की ने कहा, “लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी पर हमारा इरादा स्पष्ट है। महाकली नदी के उत्तर के सभी हिस्से हमारे भूभाग हैं। हम भारत से मित्रता निभाना चाहते हैं। इसलिए हम सभी प्रकार के सीमा विवाद संधियों, समझौतों, कागज़ातों और नक्शों के आधार पर सुलझाना चाहते हैं। हम भारत से इन सभी स्थानों पर निर्माण कार्य को रोकने की माँग करते हैं।”

शुक्रवार (14 जनवरी) को भी नेपाली कॉन्ग्रेस ने लिपुलेख में भारत द्वारा किए जा रहे निर्माण पर आपत्ति जताई थी। तब नेपाली कॉन्ग्रेस के महासचिव बिश्व प्रकाश शर्मा और गगन थापा ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को सन 1816 की सुगौली संधि के आधार पर निबटाने की अपील की थी।

बिश्व प्रकाश शर्मा और गगन थापा के इसी बयान के बाद नेपाल में भारतीय दूतावास ने शनिवार (15 जनवरी) को नेपाल के लिपुलेख पर तमाम दावों को ख़ारिज कर दिया था। लिपुलेख भारत के उत्तराखंड में पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है, जिसे नेपाल अपने धारचूला जिले में दिखाता है।

गौरतलब है कि नेपाल की वामपंथी ओली सरकार के कार्यकाल में मई 2020 में यह सीमा विवाद शुरू हुआ था। जून 2020 में नेपाल सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद के चलते बिहार के पूर्वी चम्पारण में ढाका अनुमंडल के लाल बकेया नदी पर बन रहे तटबंध के निर्माण कार्य को रोक दिया था। इस विवाद को हवा देने के लिए जून 2020 में नेपाल ने अपने एफएम चैनल्स पर भारत विरोधी गानों का प्रसारण शुरू करवाया था। इन गानों के जरिए वह लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के इलाकों को भारत से वापस लेने की बात कह रहा था। इस गानों को उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी सुना गया था। सितम्बर 2020 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया था कि चीन इस बीच भारत-नेपाल सीमा पर भारत-विरोधी विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग कर रहा है।

यह जानना भी जरूरी है कि नेपाल में कैसे चीन पैर पसार रहा है और कैसे मस्जिद-मदरसों की संख्या नेपाल-भारत सीमा पर बढ़ रही है। नेपाल की ‘सर्वे डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर इंडस्ट्री’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कुल मिला कर चीन ने अब तक 10 अलग-अलग क्षेत्रों में नेपाल की 33 हेक्टेयर जमीन का अवैध अतिक्रमण किया है। इस रिपोर्ट के 3 महीने बाद ही देहरादून, नैनीताल समेत हिमाचल, यूपी, बिहार और सिक्किम के कई शहरों को नेपाल अपना हिस्सा बताने लगा था।

नेपाल ने सीमा विवाद को हवा देने तक ही परिस्थिति सीमित नहीं रखी। भारत की सशस्त्र सीमा बल के अनुसार नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में डेमोग्राफिक बदलाव भी देखा गया है। नेपाल बॉर्डर से सटे यूपी के 7 जिलों में 3 साल में 26% मस्जिद-मदरसे के बढ़ने की रिपोर्ट है।

‘आप लोगन ते परीक्षा की घड़ी है, गठबंधन ते सफल बनाना है’ : SP-RLD को समर्थन से पीछे हटे टिकैत, कहा- BJP कैंडिडेट हमारे दुश्मन नहीं

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष नरेश टिकैत ने अपने उस बयान पर यू टर्न ले लिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में सपा और रालोद गठबंधन (SP-RLD Alliance) के प्रत्याशियों को खुला समर्थन देने की बात कही थी। यह यू टर्न उन्होंने 24 घंटे के ही अंदर लिया है। नए बयान में उन्होंने किसी का भी समर्थन न करने की घोषणा की है। यह बयान उन्होंने 16 जनवरी 2022 (रविवार) को जारी किया।

ANI को दिए इंटरव्यू में किसान नेता नरेश टिकैत ने अपने पिछले बयान को गलती माना है। नए बयान में नरेश टिकैत ने कहा, “वैसे तो कोई आ ही नहीं रहे। ये गठबंधन वाले ही आए। वहाँ किसान भवन में इकट्ठे हो रहे थे। मैंने भी कह दिया कि इनका ख्याल रखो। हम संयुक्त किसान मोर्चे के बंधन से फ़ालतू बोल पड़े। हमारे लिए किसान संयुक्त मोर्चा ही सर्वोपरि है। किसी भी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी आया तो हम उसे आशीर्वाद देंगे। यहाँ कोई वोट माँगने न आए। 40 संगठनों का मोर्चा है किसान संयुक्त मोर्चा। हम अकेले जाएँगे तो वो हमें भी निकाल देंगे। 2014 में BJP की लहर थी तब हमने उन्हें समर्थन किया था। पर अब दूसरी बात है। भाजपा कैंडिडेट भी हमारे दुश्मन नहीं है। सबका स्वागत है।”

एक दिन पहले शनिवार (15 जनवरी) को नरेश टिकैत का एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में वो गठबंधन को सफल बनाने की बात कह रहे थे। उनके आस पास समाजवादी और RLD कार्यकर्ता दिखाई दे रहे थे। वीडियो में उन्हें कहते सुना गया था, “आप लोगन ते परीक्षा की घड़ी है। गठबंधन ते सफल बनाना है। गठबंधन को जिताने के लिए आप जो भी कर सकते हैं करें।”

अब टिकैत ने अपने इसी बयान पर सफाई दी है। उन्होंने वायरल वीडियो में जो कुछ भी कहा उसे गलती बताते हुए कहा कि वह कुछ ज्यादा बोल गए थे। अगर वह संयुक्त किसान मोर्चा से अलग गए तो मोर्चा उन्हें अलग कर सकता है। उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट्स को समर्थन दिए जाने पर ये भी कहा कि अगर बीजेपी उम्मीदवार उनके पास जाएँगे तो वो उनका स्वागत करेंगे। चाय पानी की व्यवस्था करेंगे। बीजेपी के उम्मीदवार उनके दुश्मन नहीं है।

‘थम गई संगीत की लय… सुर हुए मौन’ : नहीं रहे कथक के सरताज बिरजू महाराज, दिल का दौरा पड़ने से निधन

कथक (Kathak) की दुनिया के सबसे मशहूर नाम पंडित बिरजू महाराज (Pandit Birju Maharaj) अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका रविवार-सोमवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 83 वर्षीय बिरजू महाराज के जाने की खबर उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर साझा की।

परिजनों ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “अत्यंत दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे परिवार के सबसे प्रिय सदस्य पंडित बिरजू महाराज जी का असामयिक निधन हो गया है। 17 जनवरी, 2022 को महान आत्मा अपने स्वर्गीय निवास के लिए प्रस्थान कर गई। दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करें- महाराज परिवार।” 

महाराज की पोती रागिनी महाराज ने बताया- “उनका पिछले माह से इलाज चल रहा था। उन्हें अचानक देर रात सांस लेने में दिक्कत हुई। हम उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन 10 मिनट के अंदर उन्हें देह त्याग दी।”

बता दें कि कथक के जरिए बिरजू महाराज ने सिर्फ भारत में ही नहीं विश्व भर में ख्याति कमाई थी। जब वो मंच पर जाते थे तो और अपना नृत्य करते थे तो उनके चेहरे के हाव-भाव देखने लायक होते थे। उनकी कला का लोहा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भी देखने को मिलता था। सरोज खान जैसी नामी कलाकार ने उनके नक्शेकदम पर चलकर अपनी पहचान बनाई थी। बिरजू महाराज पद्मविभूषण जैसे अवार्डों से सम्मानित महान शख्सियत थे। उनके पास नाटक अकादमी पुरस्कार, कालिदास सम्मान, फिल्मफेयर पुरस्कार भी था।

उनके जाने से बॉलीवुड से लेकर पूरा संगीत जगत आहत है। गायिका मालिनी अवस्थी और अदनान सामी ने उन्हें सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धांजलि दी। मालिनी अवस्थी ने लिखा, “आज भारतीय संगीत की लय थम गई। सुर मौन हो गए। भाव शून्य हो गए। कथक के सरताज पंडित बिरजू महाराज जी नहीं रहे। लखनऊ की ड्योढ़ी आज सूनी हो गई। कालिकाबिंदादीन जी की गौरवशाली परंपरा की सुगंध विश्व भर में प्रसरित करने वाले महाराज जी अनंत में विलीन हो गए।” वहीं सामी ने भी इस खबर को सुन शोक जताया। बाकी हस्तियों ने भी अपना दुख प्रकट किया।

उल्लेखनीय है कि बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी 1938 को लखनऊ में हुआ था। उनका असली नाम पंडित बृजमोहन मिश्र था। कथक करने के अलावा उन्हें शास्त्रीय गायिकी में भी महारत हासिल थी। उनसे पहले उनके पिता अच्छन महाराज, चाचा शंभु महाराज और लच्छू महाराज भी प्रसिद्ध कथक नर्तक थे।

चीन में छात्रों को मिला साल भर अच्छे प्रदर्शन का इनाम, स्कूल ने दिए 5-10 kg के सूअर के बच्चे

चीन से एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। दक्षिण-पश्चिमी चीन के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई को दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले 20 छात्रों को पुरस्कार के तौर पर सुअर के बच्चे दिए गए। जिसे बच्चों के माता-पिता अपने साथ अपने घर ले गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना युन्नान प्रांत के यिलियांग काउंटी के जियांगयांग एलीमेंट्री स्कूल की है। यहाँ के छात्रों की सालभर के प्रदर्शन का ईनाम स्कूल प्रबंधन ने 20 छात्रों के परिवारों को 20 पिगलेट दिए थे। इस मामले में स्कूल के एक शिक्षक होउ चांगलियांग ने कहा कि पिगलेट को ग्रामीण शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों को बढ़ावा देने की कोशिशों के तहत शंघाई शियांगवु पब्लिक वेलफेयर फंडजियांगवु पब्लिक वेलफेयर फंड की ओर से दिया गया है। दरअसल, इस इलाके में गरीबी काफी ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि छात्रों का चयन उनके शैक्षणिक प्रदर्शन के अनुसार किया गया। इस स्कूल में कुल 65 बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें 4 शिक्षक पढ़ाते हैं। छात्रों को दिए गए इस अजीब पुरस्कार की तस्वीरें चीन के सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ईनाम में दिए गए प्रत्येक सुअर के बच्चे का वजन 5-10 किलो के बीच था।

प्रत्येक सूअर का वजन 5 से 10 किलोग्राम के बीच था और उसने सफेद, पीले और काले रंग की फर पहन रखी थी। शिक्षक होउ के मुताबिक, “इस तरह के इनाम से न केवल छात्रों को प्रोत्साहित किया गया है, बल्कि उनके परिवारों की भी मदद की गई है।” उनका मानना है कि हालाँकि, इन सुअरों से इन परिवारों को शुरुआती तौर पर लाभ नहीं होगा, लेकिन भविष्य में इन परिवारों को इसका वित्तीय लाभ मिल सकेगा।

गौरतलब है कि यिलियांग काउंटी चीन के सबसे गरीब इलाकों में से एक है। वर्ष 2019 में स्थानीय निवासियों प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 27,291 युआन (3,18,597.38 रुपए) थी। स्थानीय अधिकारियों ने जून 2020 में घोषणा की कि इस क्षेत्र के सभी परिवारों को गरीबी से बाहर निकाल दिया गया है और वे कम्युनिस्ट पार्टी के गरीबी उन्मूलन अभियान के तहत गरीबी से बाहर निकलने वाले अंतिम परिवारों में से थे।

जिन धमाकों में गई 250+ जानें, उसे अंजाम देने वाला सलीम गाजी कराची में मरा: छोटा शकील और दाऊद का था करीबी

साल 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम ब्लास्ट केस में एक आरोपित सलीम गाजी की पाकिस्तान में मौत हो गई। रविवार (16 जनवरी 2022) को मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, सलीम की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई। वह लंबे समय से हाई बीपी व अन्य बीमारियों से ग्रसित था। आतंक की दुनिया में उसे दाऊद इब्राहिम व छोटा शकील का करीबी बताया जाता था।

सलीम पर आरोप था कि वह सीरियल ब्लास्ट केस में धमाकों की योजना बनाने और उसे अंजान देने के काम में सक्रिय रूप से शामिल था और घटना को अंजाम देने के फौरन बाद छोटा शकील और दाऊद इब्राहिम के गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ देश छोड़ भाग गया था। इस ब्लास्ट में कम से कम 257 लोगों की जान गई थी जबकि  713 लोग घायल हुए थे। सलीम के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी था। इतने सालों में उसे इंटरपोल द्वारा पकड़ने का प्रयास किया जा रहा था मगर वो अपने ठिकाने बदलता रहता था। इस वजह से एजेंसियाँ सफल नहीं हुईं।

इस ब्लास्ट में शामिल एक अन्य आरोपित युसूफ मेनन की मौत भी पिछले साल दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। वह पूरे ब्लास्ट के मास्टरमाइंड टाइगर मेनन का भाई था। युसूफ का भाई टाइगर दाऊद इब्राहिम के साथ विस्फोट की साजिश में एक प्रमुख सह-साजिशकर्ता था और जब इब्राहिम ने रायगढ़ जिले के शेखादी तट पर आरडीएक्स को उतारने की व्यवस्था की, तो वह टाइगर ही था जिसने उन्हें मुंबई में ले जाने में गाड़ी की व्यवस्था की। युसूफ से पहले टाइगर के एक भाई याकूब मेनन को 2015 में फाँसी की सजा हुई थी।

उल्लेखनीय है कि 12 मार्च 1993 में मुंबई में सिर्फ दो घंटों के अंदर अलग-अलग जगहों पर 12 धमाके हुए थे। इन धमाकों में 257 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। 19 नवंबर 1993 में ये मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। 19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। कुछ समय पहले इसी मामले में पुलिस ने आतंकी मुनाफ हलारी को गिरफ्तार किया था।

‘रेप कैपिटल बन गया है राजस्थान’: अलवर मूक-बधिर बच्ची से गैंगरेप मामले में पुलिस का यू-टर्न, गहलोत सरकार ने की CBI जाँच की सिफारिश

राजस्थान (Rajashthan) के अलवर जिले में मूक-बधिर बच्ची के साथ किए गए बलात्कार (Rape) की वारदात का खिलाफ तेज होते विरोध के आगे झुकते हुए प्रदेश सरकार ने इस घटना की जाँच CBI से करवाने की बात कही है। सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने रविवार (16 जनवरी 2022) कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच CBI से करवाने की सिफारिश केंद्र को भेजने का निर्णय लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सीएम गहलोत ने कहा था कि पीड़िता का परिवार अगर चाहेगा तो वे इस केस की जाँच CID या CBI या फिर किसी भी इंडिपेंडेंट एजेंसी से इसकी जाँच कराने को तैयार हैं। हालाँकि, इस मामले में राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

इसी क्रम में रविवार को सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के युवा मोर्चा ने जिला कलेक्टर के आवास का घेराव किया। पार्टी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष संदीप ओला ने जिले की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया और कहा कि एसपी कहती हैं कि रेप नहीं एक्सीडेंट हुआ है, अगर ऐसा है तो पीड़िता के प्राइवेट में ही बस चोट क्यों है। क्यों उसके शरीर के बाकी हिस्से में कोई चोट नहीं है। उन्होंने पुलिस पर अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

वहीं इस मामले में राजसमंद से बीजेपी सांसद दिया कुमारी (BJP MP Diya Kumari) ने सीएम गहलोत पर निशाना साधते कहा कि वीरों और वीरांगनाओं का प्रदेश अब रेप कैपिटल हो गया है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि हर दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार चैन की नींद सो रही है।

पीड़िता की हालत में हो रहा सुधार

रेप पीड़ित बच्ची का इलाज जयपुर के जेके लोन अस्पताल में हो रहा है। उसका इलाज कर रहे डॉ अरविंद शुक्ला के मुताबिक, अब पीड़िता की हालत में सुधार है। उसे दिन में केवल पानी ही दिया जा रहा है। हालाँकि, उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि 3-4 दिन में उसे खाना भी दिया जाएगा।

कब हुई थी यह वारदात

गौरतलब है कि मंगलवार (11 जनवरी 2022) को शिवाजी पार्क थाना क्षेत्र में शाम करीब आठ बजे अज्ञात लोग नाबालिग मंदबुद्धि लड़की को तिजारा पुलिया पर पटक कर फरार हो गए। लड़की की हालत गंभीर थी और सूचना पर पहुँची पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लड़की को अस्पताल पहुँचाया। पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर इंटरनल इंजरी थी। उसे तत्काल इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया।