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खालिस्तानी प्रोपगेंडे को पीछे धकेल सामने आए ब्रिटिश सिख, PM मोदी को दिया धन्यवाद, कहा- ‘आपने बहुत कुछ किया है’

विदेश में बैठकर भारत विरोधी अभियान चलाने वाले खालिस्तानियों को ब्रिटिश सिखों ने मुँहतोड़ जवाब देना शुरू कर दिया है। वहाँ के सिखों ने खालिस्तानी एजेंडे को पीछे धकेलते हुए अपना समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। रविवार को साउथहॉल के पार्क एवेन्यू में स्थित गुरुद्वारा गुरू सभा में एकत्रित होकर सिख समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी को आभार दिया, उनकी प्रशंसा की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिख समुदाय के नेताओं ने साउथहॉल के पार्क एवेन्यू में स्थित गुरुद्वारा गुरू सभा में इकट्ठा होकर एक प्रस्ताव पारित किया। यहाँ उन्होंने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने सिखों के लिए और उनकी गलतफहमी को दूर करने के लिए बहुत कुछ किया है। ब्रिटिश सिखों ने पीएम द्वारा 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित करने के लिए भी उनका धन्यवाद दिया। मंडली में शामिल सिख नेताओं और गुरुद्वारा समिति के पदाधिकारियों ने उन लोगों को चुनौती दी जो भारत और यहाँ की वर्तमान सरकार के बारे में तथ्यात्मक रूप से गलत चीजों को आगे बढ़ा रहे हैं।

बता दें कि यूएस में सिख समुदाय द्वारा पारित किए गए इस प्रस्ताव को एक साहसिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले तक विदेश से सिर्फ खालिस्तानियों द्वारा दिखाए गए प्रोपगेंडे की खबरें हमें पढ़ने को मिलती थीं। हालाँकि अब, वहाँ के सिखों ने सामने आकर उनका विरोध करने का मन बनाया है और भारत विरोधी खबरों की जगह भारत के समर्थन में उठे कदमों की खबर आ रही है।

सुरक्षा चूक मामले में भी ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने किया था PM मोदी का समर्थन

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने पीएम मोदी के समर्थन में अपना बयान जारी किया था। अपने बयान में सिख एसोसिएशन न केवल उन कार्यों को गिनाया था जिन्हें पीएम मोदी ने सिखों के लिए किया बल्कि पीएम की सुरक्षा में हुई चूक मामले की घोर निंदा करते हुए कहा था कि जिन लोगों ने पीएम मोदी का रास्ता रोका, उन्होंने असल में पंजाब का विकास रोका है।

एसोसिएशन के चेयरमैन लॉर्ड रामी रेंजर ने अपने बयान में कहा था, “मैं बताना चाहूँगा कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुनानक देव की जयंती के अवसर पर पंजाब के किसानों के सम्मान में तीन कृषि कानून खत्म करने का निर्णय लिया। उसे संसद से खत्म कराया। पंजाब के लोगों को तो इसके लिए पीएम मोदी के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। जिन लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी का रास्ता रोकने की कोशिश की, बाद में उन्हें अहसास हुआ कि प्रधानमंत्री मोदी पंजाब के लोगों और भी कई सौगातें देने आए थे। पीएम के रास्ते में गतिरोध पैदा करके इन लोगों ने पूरे पंजाब के विकास को रोका है।”

दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में बम का ISI कनेक्शन: आतंकी हमला टालने के लिए अलर्ट जारी

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके से मिली विस्फोटक सामग्री की बरामदगी के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और इसकी जिहादी सेल की संलिप्तता का संदेह है। बता दें कि गाजीपुर फ्लावर मार्केट में शुक्रवार (14 जनवरी 2022) को एक लावारिस बैग से इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किया गया।

दिल्ली पुलिस की जाँच में पता चला है कि यह आईडी 24 बम की खेप का हिस्सा था, जिसे सीमा पार से या तो जमीन के जरिए या समुद्री मार्ग से पाकिस्तान द्वारा स्थानीय आतंकवादियों को भेजा गया था। हाल ही में जम्मू और कश्मीर और पंजाब में बरामद किए गए IED और विस्फोटक सामग्री को भी उसी खेप का हिस्सा माना गया। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि कुछ उपकरणों की तस्करी गुजरात और उत्तर प्रदेश में की गई हो सकती है।

दिल्ली पुलिस के शीर्ष जाँचकर्ताओं के मुताबिक, गाजीपुर डिवाइस एक टिफिन बम था जिसमें तीन किलोग्राम आरडीएक्स कोर चार्ज के रूप में और अमोनियम नाइट्रेट सेकेंडरी चार्ज के रूप में था। डिवाइस को स्टील के टिफिन में कीलों और बॉल बेयरिंग के साथ पैक किया गया था और इसे दूर से ही उड़ाया जा सकता था।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इन आईईडी को भारत में मौजूदा स्लीपर मॉड्यूल के साथ-साथ कुछ आपराधिक गिरोहों के लिए सीमा पार से तस्करी कर लाया गया था। सितंबर 2021 में दिल्ली पुलिस ने मुंबई, लखनऊ, इलाहाबाद और दिल्ली में कई गिरफ्तारियों के साथ एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। दिल्ली पुलिस के जाँचकर्ताओं का मानना ​​है कि आईईडी की खेप पिछले स्वतंत्रता दिवस के आसपास भारत आई थी।

दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ ​​खेप से अन्य आईईडी बरामद करने की कोशिश कर रही है। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, “ऐसा मालूम होता है कि भारत में कट्टरपंथी तत्वों को सीमा पार से पूर्व-निर्धारित लक्ष्यों पर उपकरण लगाने या काम करने के लिए स्थानीय आपराधिक तत्वों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा जा रहा है। राष्ट्रव्यापी अलर्ट जारी किया गया है ताकि आतंकी हमला टल जाए।”

गौरतलब है कि दिल्ली की गाजीपुर फूल मंडी में बम की घटना के कुछ दिन पहले ही खुफिया एजेंसियो ने दिल्ली समेत कई राज्यों को एक आतंकी अलर्ट जारी किया था। जिसमें बकायदा यह बताया गया था कि कैसे 26 जनवरी के मद्देनजर लश्कर-ए-तैयबा जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन बब्बर खालसा इंटरनेशनल आतंकी संगठन भीड़भाड़ वाले इलाके प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों बाजारों में आतंकी गतिविधि को अंजाम दे सकते हैं।

बॉर्डर जिलों में बढ़ रहे मस्जिद-मदरसों के बीच उत्तराखंड की जमीन पर नेपाल का दावा, चीन कब्जा चुका है उनका 33 हेक्टेयर

नेपाल ने लिपुलेख में सड़क के निर्माण एवं विस्तारीकरण की भारत की परियोजनाओं का विरोध किया है। नेपाल ने एक बार फिर से लिंपियाधुरा को अपना हिस्सा बताया है। लिंपियाधुरा के साथ-साथ नेपाल ने कालापानी में भी भारत द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों का विरोध किया है।

नेपाल के संचार मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने भारत की परियोजनाओं का विरोध करते हुए रविवार (16 जनवरी) को बयान दिया है। नेपाल की देउबा सरकार ने भारत से सीमा विवाद सुलझाने के लिए राजनयिक तौर-तरीकों को अपनाने के लिए कहा है।

अपने बयान में कार्की ने कहा, “लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी पर हमारा इरादा स्पष्ट है। महाकली नदी के उत्तर के सभी हिस्से हमारे भूभाग हैं। हम भारत से मित्रता निभाना चाहते हैं। इसलिए हम सभी प्रकार के सीमा विवाद संधियों, समझौतों, कागज़ातों और नक्शों के आधार पर सुलझाना चाहते हैं। हम भारत से इन सभी स्थानों पर निर्माण कार्य को रोकने की माँग करते हैं।”

शुक्रवार (14 जनवरी) को भी नेपाली कॉन्ग्रेस ने लिपुलेख में भारत द्वारा किए जा रहे निर्माण पर आपत्ति जताई थी। तब नेपाली कॉन्ग्रेस के महासचिव बिश्व प्रकाश शर्मा और गगन थापा ने भारत-नेपाल सीमा विवाद को सन 1816 की सुगौली संधि के आधार पर निबटाने की अपील की थी।

बिश्व प्रकाश शर्मा और गगन थापा के इसी बयान के बाद नेपाल में भारतीय दूतावास ने शनिवार (15 जनवरी) को नेपाल के लिपुलेख पर तमाम दावों को ख़ारिज कर दिया था। लिपुलेख भारत के उत्तराखंड में पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है, जिसे नेपाल अपने धारचूला जिले में दिखाता है।

गौरतलब है कि नेपाल की वामपंथी ओली सरकार के कार्यकाल में मई 2020 में यह सीमा विवाद शुरू हुआ था। जून 2020 में नेपाल सरकार ने भारत के साथ सीमा विवाद के चलते बिहार के पूर्वी चम्पारण में ढाका अनुमंडल के लाल बकेया नदी पर बन रहे तटबंध के निर्माण कार्य को रोक दिया था। इस विवाद को हवा देने के लिए जून 2020 में नेपाल ने अपने एफएम चैनल्स पर भारत विरोधी गानों का प्रसारण शुरू करवाया था। इन गानों के जरिए वह लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के इलाकों को भारत से वापस लेने की बात कह रहा था। इस गानों को उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी सुना गया था। सितम्बर 2020 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया था कि चीन इस बीच भारत-नेपाल सीमा पर भारत-विरोधी विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग कर रहा है।

यह जानना भी जरूरी है कि नेपाल में कैसे चीन पैर पसार रहा है और कैसे मस्जिद-मदरसों की संख्या नेपाल-भारत सीमा पर बढ़ रही है। नेपाल की ‘सर्वे डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर इंडस्ट्री’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कुल मिला कर चीन ने अब तक 10 अलग-अलग क्षेत्रों में नेपाल की 33 हेक्टेयर जमीन का अवैध अतिक्रमण किया है। इस रिपोर्ट के 3 महीने बाद ही देहरादून, नैनीताल समेत हिमाचल, यूपी, बिहार और सिक्किम के कई शहरों को नेपाल अपना हिस्सा बताने लगा था।

नेपाल ने सीमा विवाद को हवा देने तक ही परिस्थिति सीमित नहीं रखी। भारत की सशस्त्र सीमा बल के अनुसार नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में डेमोग्राफिक बदलाव भी देखा गया है। नेपाल बॉर्डर से सटे यूपी के 7 जिलों में 3 साल में 26% मस्जिद-मदरसे के बढ़ने की रिपोर्ट है।

‘आप लोगन ते परीक्षा की घड़ी है, गठबंधन ते सफल बनाना है’ : SP-RLD को समर्थन से पीछे हटे टिकैत, कहा- BJP कैंडिडेट हमारे दुश्मन नहीं

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष नरेश टिकैत ने अपने उस बयान पर यू टर्न ले लिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में सपा और रालोद गठबंधन (SP-RLD Alliance) के प्रत्याशियों को खुला समर्थन देने की बात कही थी। यह यू टर्न उन्होंने 24 घंटे के ही अंदर लिया है। नए बयान में उन्होंने किसी का भी समर्थन न करने की घोषणा की है। यह बयान उन्होंने 16 जनवरी 2022 (रविवार) को जारी किया।

ANI को दिए इंटरव्यू में किसान नेता नरेश टिकैत ने अपने पिछले बयान को गलती माना है। नए बयान में नरेश टिकैत ने कहा, “वैसे तो कोई आ ही नहीं रहे। ये गठबंधन वाले ही आए। वहाँ किसान भवन में इकट्ठे हो रहे थे। मैंने भी कह दिया कि इनका ख्याल रखो। हम संयुक्त किसान मोर्चे के बंधन से फ़ालतू बोल पड़े। हमारे लिए किसान संयुक्त मोर्चा ही सर्वोपरि है। किसी भी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी आया तो हम उसे आशीर्वाद देंगे। यहाँ कोई वोट माँगने न आए। 40 संगठनों का मोर्चा है किसान संयुक्त मोर्चा। हम अकेले जाएँगे तो वो हमें भी निकाल देंगे। 2014 में BJP की लहर थी तब हमने उन्हें समर्थन किया था। पर अब दूसरी बात है। भाजपा कैंडिडेट भी हमारे दुश्मन नहीं है। सबका स्वागत है।”

एक दिन पहले शनिवार (15 जनवरी) को नरेश टिकैत का एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में वो गठबंधन को सफल बनाने की बात कह रहे थे। उनके आस पास समाजवादी और RLD कार्यकर्ता दिखाई दे रहे थे। वीडियो में उन्हें कहते सुना गया था, “आप लोगन ते परीक्षा की घड़ी है। गठबंधन ते सफल बनाना है। गठबंधन को जिताने के लिए आप जो भी कर सकते हैं करें।”

अब टिकैत ने अपने इसी बयान पर सफाई दी है। उन्होंने वायरल वीडियो में जो कुछ भी कहा उसे गलती बताते हुए कहा कि वह कुछ ज्यादा बोल गए थे। अगर वह संयुक्त किसान मोर्चा से अलग गए तो मोर्चा उन्हें अलग कर सकता है। उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट्स को समर्थन दिए जाने पर ये भी कहा कि अगर बीजेपी उम्मीदवार उनके पास जाएँगे तो वो उनका स्वागत करेंगे। चाय पानी की व्यवस्था करेंगे। बीजेपी के उम्मीदवार उनके दुश्मन नहीं है।

‘थम गई संगीत की लय… सुर हुए मौन’ : नहीं रहे कथक के सरताज बिरजू महाराज, दिल का दौरा पड़ने से निधन

कथक (Kathak) की दुनिया के सबसे मशहूर नाम पंडित बिरजू महाराज (Pandit Birju Maharaj) अब हमारे बीच नहीं हैं। उनका रविवार-सोमवार देर रात दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 83 वर्षीय बिरजू महाराज के जाने की खबर उनके परिवार ने सोशल मीडिया पर साझा की।

परिजनों ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “अत्यंत दुख के साथ सूचित किया जाता है कि हमारे परिवार के सबसे प्रिय सदस्य पंडित बिरजू महाराज जी का असामयिक निधन हो गया है। 17 जनवरी, 2022 को महान आत्मा अपने स्वर्गीय निवास के लिए प्रस्थान कर गई। दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करें- महाराज परिवार।” 

महाराज की पोती रागिनी महाराज ने बताया- “उनका पिछले माह से इलाज चल रहा था। उन्हें अचानक देर रात सांस लेने में दिक्कत हुई। हम उन्हें अस्पताल ले गए लेकिन 10 मिनट के अंदर उन्हें देह त्याग दी।”

बता दें कि कथक के जरिए बिरजू महाराज ने सिर्फ भारत में ही नहीं विश्व भर में ख्याति कमाई थी। जब वो मंच पर जाते थे तो और अपना नृत्य करते थे तो उनके चेहरे के हाव-भाव देखने लायक होते थे। उनकी कला का लोहा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में भी देखने को मिलता था। सरोज खान जैसी नामी कलाकार ने उनके नक्शेकदम पर चलकर अपनी पहचान बनाई थी। बिरजू महाराज पद्मविभूषण जैसे अवार्डों से सम्मानित महान शख्सियत थे। उनके पास नाटक अकादमी पुरस्कार, कालिदास सम्मान, फिल्मफेयर पुरस्कार भी था।

उनके जाने से बॉलीवुड से लेकर पूरा संगीत जगत आहत है। गायिका मालिनी अवस्थी और अदनान सामी ने उन्हें सोशल मीडिया के जरिए श्रद्धांजलि दी। मालिनी अवस्थी ने लिखा, “आज भारतीय संगीत की लय थम गई। सुर मौन हो गए। भाव शून्य हो गए। कथक के सरताज पंडित बिरजू महाराज जी नहीं रहे। लखनऊ की ड्योढ़ी आज सूनी हो गई। कालिकाबिंदादीन जी की गौरवशाली परंपरा की सुगंध विश्व भर में प्रसरित करने वाले महाराज जी अनंत में विलीन हो गए।” वहीं सामी ने भी इस खबर को सुन शोक जताया। बाकी हस्तियों ने भी अपना दुख प्रकट किया।

उल्लेखनीय है कि बिरजू महाराज का जन्म 4 फरवरी 1938 को लखनऊ में हुआ था। उनका असली नाम पंडित बृजमोहन मिश्र था। कथक करने के अलावा उन्हें शास्त्रीय गायिकी में भी महारत हासिल थी। उनसे पहले उनके पिता अच्छन महाराज, चाचा शंभु महाराज और लच्छू महाराज भी प्रसिद्ध कथक नर्तक थे।

चीन में छात्रों को मिला साल भर अच्छे प्रदर्शन का इनाम, स्कूल ने दिए 5-10 kg के सूअर के बच्चे

चीन से एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। दक्षिण-पश्चिमी चीन के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई को दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वाले 20 छात्रों को पुरस्कार के तौर पर सुअर के बच्चे दिए गए। जिसे बच्चों के माता-पिता अपने साथ अपने घर ले गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना युन्नान प्रांत के यिलियांग काउंटी के जियांगयांग एलीमेंट्री स्कूल की है। यहाँ के छात्रों की सालभर के प्रदर्शन का ईनाम स्कूल प्रबंधन ने 20 छात्रों के परिवारों को 20 पिगलेट दिए थे। इस मामले में स्कूल के एक शिक्षक होउ चांगलियांग ने कहा कि पिगलेट को ग्रामीण शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों को बढ़ावा देने की कोशिशों के तहत शंघाई शियांगवु पब्लिक वेलफेयर फंडजियांगवु पब्लिक वेलफेयर फंड की ओर से दिया गया है। दरअसल, इस इलाके में गरीबी काफी ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि छात्रों का चयन उनके शैक्षणिक प्रदर्शन के अनुसार किया गया। इस स्कूल में कुल 65 बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें 4 शिक्षक पढ़ाते हैं। छात्रों को दिए गए इस अजीब पुरस्कार की तस्वीरें चीन के सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। ईनाम में दिए गए प्रत्येक सुअर के बच्चे का वजन 5-10 किलो के बीच था।

प्रत्येक सूअर का वजन 5 से 10 किलोग्राम के बीच था और उसने सफेद, पीले और काले रंग की फर पहन रखी थी। शिक्षक होउ के मुताबिक, “इस तरह के इनाम से न केवल छात्रों को प्रोत्साहित किया गया है, बल्कि उनके परिवारों की भी मदद की गई है।” उनका मानना है कि हालाँकि, इन सुअरों से इन परिवारों को शुरुआती तौर पर लाभ नहीं होगा, लेकिन भविष्य में इन परिवारों को इसका वित्तीय लाभ मिल सकेगा।

गौरतलब है कि यिलियांग काउंटी चीन के सबसे गरीब इलाकों में से एक है। वर्ष 2019 में स्थानीय निवासियों प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 27,291 युआन (3,18,597.38 रुपए) थी। स्थानीय अधिकारियों ने जून 2020 में घोषणा की कि इस क्षेत्र के सभी परिवारों को गरीबी से बाहर निकाल दिया गया है और वे कम्युनिस्ट पार्टी के गरीबी उन्मूलन अभियान के तहत गरीबी से बाहर निकलने वाले अंतिम परिवारों में से थे।

जिन धमाकों में गई 250+ जानें, उसे अंजाम देने वाला सलीम गाजी कराची में मरा: छोटा शकील और दाऊद का था करीबी

साल 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम ब्लास्ट केस में एक आरोपित सलीम गाजी की पाकिस्तान में मौत हो गई। रविवार (16 जनवरी 2022) को मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, सलीम की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई। वह लंबे समय से हाई बीपी व अन्य बीमारियों से ग्रसित था। आतंक की दुनिया में उसे दाऊद इब्राहिम व छोटा शकील का करीबी बताया जाता था।

सलीम पर आरोप था कि वह सीरियल ब्लास्ट केस में धमाकों की योजना बनाने और उसे अंजान देने के काम में सक्रिय रूप से शामिल था और घटना को अंजाम देने के फौरन बाद छोटा शकील और दाऊद इब्राहिम के गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ देश छोड़ भाग गया था। इस ब्लास्ट में कम से कम 257 लोगों की जान गई थी जबकि  713 लोग घायल हुए थे। सलीम के ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी था। इतने सालों में उसे इंटरपोल द्वारा पकड़ने का प्रयास किया जा रहा था मगर वो अपने ठिकाने बदलता रहता था। इस वजह से एजेंसियाँ सफल नहीं हुईं।

इस ब्लास्ट में शामिल एक अन्य आरोपित युसूफ मेनन की मौत भी पिछले साल दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। वह पूरे ब्लास्ट के मास्टरमाइंड टाइगर मेनन का भाई था। युसूफ का भाई टाइगर दाऊद इब्राहिम के साथ विस्फोट की साजिश में एक प्रमुख सह-साजिशकर्ता था और जब इब्राहिम ने रायगढ़ जिले के शेखादी तट पर आरडीएक्स को उतारने की व्यवस्था की, तो वह टाइगर ही था जिसने उन्हें मुंबई में ले जाने में गाड़ी की व्यवस्था की। युसूफ से पहले टाइगर के एक भाई याकूब मेनन को 2015 में फाँसी की सजा हुई थी।

उल्लेखनीय है कि 12 मार्च 1993 में मुंबई में सिर्फ दो घंटों के अंदर अलग-अलग जगहों पर 12 धमाके हुए थे। इन धमाकों में 257 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी। 19 नवंबर 1993 में ये मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। 19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई थी। अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। कुछ समय पहले इसी मामले में पुलिस ने आतंकी मुनाफ हलारी को गिरफ्तार किया था।

‘रेप कैपिटल बन गया है राजस्थान’: अलवर मूक-बधिर बच्ची से गैंगरेप मामले में पुलिस का यू-टर्न, गहलोत सरकार ने की CBI जाँच की सिफारिश

राजस्थान (Rajashthan) के अलवर जिले में मूक-बधिर बच्ची के साथ किए गए बलात्कार (Rape) की वारदात का खिलाफ तेज होते विरोध के आगे झुकते हुए प्रदेश सरकार ने इस घटना की जाँच CBI से करवाने की बात कही है। सीएम अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने रविवार (16 जनवरी 2022) कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच CBI से करवाने की सिफारिश केंद्र को भेजने का निर्णय लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सीएम गहलोत ने कहा था कि पीड़िता का परिवार अगर चाहेगा तो वे इस केस की जाँच CID या CBI या फिर किसी भी इंडिपेंडेंट एजेंसी से इसकी जाँच कराने को तैयार हैं। हालाँकि, इस मामले में राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

इसी क्रम में रविवार को सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के युवा मोर्चा ने जिला कलेक्टर के आवास का घेराव किया। पार्टी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष संदीप ओला ने जिले की पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया और कहा कि एसपी कहती हैं कि रेप नहीं एक्सीडेंट हुआ है, अगर ऐसा है तो पीड़िता के प्राइवेट में ही बस चोट क्यों है। क्यों उसके शरीर के बाकी हिस्से में कोई चोट नहीं है। उन्होंने पुलिस पर अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

वहीं इस मामले में राजसमंद से बीजेपी सांसद दिया कुमारी (BJP MP Diya Kumari) ने सीएम गहलोत पर निशाना साधते कहा कि वीरों और वीरांगनाओं का प्रदेश अब रेप कैपिटल हो गया है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि हर दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार चैन की नींद सो रही है।

पीड़िता की हालत में हो रहा सुधार

रेप पीड़ित बच्ची का इलाज जयपुर के जेके लोन अस्पताल में हो रहा है। उसका इलाज कर रहे डॉ अरविंद शुक्ला के मुताबिक, अब पीड़िता की हालत में सुधार है। उसे दिन में केवल पानी ही दिया जा रहा है। हालाँकि, उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि 3-4 दिन में उसे खाना भी दिया जाएगा।

कब हुई थी यह वारदात

गौरतलब है कि मंगलवार (11 जनवरी 2022) को शिवाजी पार्क थाना क्षेत्र में शाम करीब आठ बजे अज्ञात लोग नाबालिग मंदबुद्धि लड़की को तिजारा पुलिया पर पटक कर फरार हो गए। लड़की की हालत गंभीर थी और सूचना पर पहुँची पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लड़की को अस्पताल पहुँचाया। पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर इंटरनल इंजरी थी। उसे तत्काल इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया।

CM योगी का UP: 2000 Cr का अवैध साम्राज्य ध्वस्त, ढेर हुए 140 अपराधी, धर्मांतरण और गोकशी पर शिकंजा, महिलाएँ सुरक्षित हुईं

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव और मायावती का लगातार 15 वर्षों के शासनकाल के बारे में पूछते ही लोग कानून व्यवस्था के उन दुर्दिनों को याद करने लगते हैं। मई 2002 से लेकर मार्च 2017 तक मायावती, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने राज किया। इनमें मायावती दो बार मुख्यमंत्री बनीं – एक बार 1 साल 4 महीने के लिए और एक बार पूरे 5 साल के लिए। मुलायम सिंह यादव 4 साल के लिए सीएम बने। उनके बेटे अखिलेश यादव ने भी कार्यकाल पूरा किया। लेकिन, सपा-बसपा के बाद आई भाजपा के राज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था को बहाल करने में सफलता पाई।

किसे याद नहीं है कि सपा-बसपा के शासनकाल में मुख़्तार अंसारी, अतीक अहमद, हरिशंकर तिवारी, राजा भैया और विकास दुबे जैसे गुंडे जनता में अपना खौफ चलाया करते थे। आज योगी आदित्यनाथ के शासनकाल ये तथाकथित ‘बाहुबली’ या तो जेल में हैं या फिर दुबके बैठे हुए हैं। डर का माहौल ख़त्म हुआ है। आखिर उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था को सुधारने में कैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सफलता हासिल की, इसका राज़ सरकार के एक से बढ़ कर एक लिए गए कड़े फैसलों से जुड़ा है।

योगी सरकार में एनकाउंटर्स: अब अपराधियों की गोली के सामने बेबस नहीं रहती यूपी पुलिस

सबसे पहले बात करते हैं अपराधियों के साथ पुलिस के एनकाउंटर्स की। योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्यमंत्री पुलिस को इतनी छूट दे रखी है कि जब सामने से अपराधी गोली चलाएँ तब वो हाथ पर हाथ धरे बैठे न रहें। इसी का नतीजा है कि अकेले 2021 में विभिन्न मुठभेड़ों में 26 कुख्यात ढेर कर दिए गए। 2020 की तुलना में पंजीकृत मुकदमों में 4.4% की कमी आई। डकैती की घटनाओं में 40%, लूट की घटनाओं में 23%, बलात्कार के मामलों में 17% और हत्या की घटनाओं में 11% की कमी आई।

अकेले 2021 में विभिन्न मुठभेड़ों में 3910 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया। इतना ही नहीं, गैंगस्टर एक्ट के तहत भी 9933 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया। 1012 करोड़ रुपए की संपत्ति को कबत किया गया। पूरे साढ़े 4 वर्षों की बात करें तो भाजपा सरकार में अब तक अपराधियों के 1900 करोड़ रुपए के साम्राज्य को ध्वस्त किया गया है। आलम ये है कि उत्तर प्रदेश में बदमाश खुद तख्ती लटका कर थाने में पहुँचते हैं और कहते हैं कि जेल में ले चलो।

कुछ महत्वपूर्ण एनकाउंटर्स को यहाँ हम आपके समक्ष रख रहे हैं। साढ़े 4 साल में मार गिराए गए 139 बदमाशों में से अधिकतर इनामी थे। मार्च 2018 में 1 लाख रुपए का इनामी श्रवण कुमार, अप्रैल 2018 में ढाई लाख का इनामी बलराज भाटी, जून 2018 में 1 लाख का ही इनामी टिंकू कपाला, अक्टूबर 2019 में डेढ़ लाख का इनामी लक्ष्मण यादव, जनवरी 2020 में डेढ़ लाख का इनामी चाँद मोहम्मद, जुलाई 2020 में 5 लाख का इनामी विकास दुबे, अक्टूबर 2020 में 2 लाख का इनामी अनिल उर्फ अमित उर्फ जूथरा, नवंबर 2020 में 3 लाख का इनामी सूर्याश दुबे और फरवरी 2020 में 1 लाख का इनामी जावेद मार गिराया गया।

अब आलम ये है कि मुख़्तार अंसारी, अतीक अहमद और विजय मिश्रा जैसे बड़े माफिया जेल की हवा काट रहे हैं। जिन बदमाशों को मार गिराया गया, उनमें 5 लाख रुपए के इनामी एक, 2 लाख के इनामी दो, एक लाख के इनामी 18, 50 हजार के इनामी 46, 15 हजार के इनामी 11, 12 हजार के इनामी 4 और 5 हजार के इनामी एक बदमाश शामिल थे। मेरठ में सबसे ज्यादा 18 अपराधी ढेर हुए हैं। 16,000 से ज्यादा अपराधी विभिन्न मुठभेड़ों में गिरफ्तार हुए। हालाँकि, 3000 से ज्यादा पलिसकर्मी भी घायल हुए। 13 पुलिसकर्मी बलिदान भी हुए।

महिलाओं और बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर शुरू से योगी सरकार का खास जोर

मार्च 2017 में सत्ता संभालने के साथ ही राज्य की भाजपा सरकार ने ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ का गठन किया। महिला हित की बात करने वाले वामपंथी और छद्म सेक्युलर मीडिया ने भी इसका समर्थन नहीं किया। इसका गठन छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए किया गया था। सपा-बसपा शासनकाल में छात्राएँ स्कूलों में सुरक्षित नहीं थीं, लड़कियाँ पार्क्स में या सड़क पर सुरक्षित नहीं थीं और महिलाओं के साथ आए दिन आपराधिक वारदातें आम हो गई थीं। इसके लिए समाज में परिवार्तन आवश्यक था।

सितंबर 2020 तक के आँकड़े कहते हैं कि साढ़े 3 वर्षों में योगी सरकार की इस पहल के अंतर्गत 35 लाख स्थानों पर 83 लाख से अधिक लोगों की चेकिंग की गई। स्कूल, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों जैसे मार्केट चौराहों, मॉल, पार्क व अन्य स्थलों पर इस ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ को सक्रिय किया गया था। 7351 FIR दर्ज किए गए। कुल 11,564 की गिरफ़्तारी हुई। 35 लाख ऐसे लोगों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। इससे महिलाएँ सार्वजनिक स्थलों पर पहले से काफी अधिक सुरक्षित हुईं।

अगर हम 2020 के ‘राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)’ के आँकड़े को देखें तो पता चलता है कि 2019 के मुकाबले महिलाओं के खिलाफ अपराध में 9.7% की कमी आई। वहीं 2013 के मुकाबले इसमें 9.2% कमी आई थी। छेड़छाड़ की घटनाओं में भी राष्ट्रीय औसत से यहाँ कामी कम घटनाएँ हुईं और 2020 में 2013 के मुकाबले 9.2% कमी देखी गई। महिला प्रताड़ना के मामलों में तो 2013 के मुकाबले 64% की भारी कमी आई। राष्ट्रीय औसत 2.2 के मुकाबले 2020 में उत्तर प्रदेश में अपराध 1.7 रहा था

इसके अलावा यहाँ ‘मिशन शक्ति’ की बात करना भी आवश्यक है। अक्टूबर 2020 में योगी आदित्यनाथ ने ‘मिशन शक्ति’ को लॉन्च किया, जिसके तहत लड़कियों को आत्मरक्षा की तकनीक सिखाई जाती है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की भारतीय संस्कृति की भावना के तहत शुरू किए गए इस अभियान के तहत राज्य के 1500 पुलिस थानों में महिलाओं के लिए अलग कक्ष स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इनमें महिलाओं के खिलाफ अपराध महिला पुलिसकर्मी ही दर्ज करती हैं।

इतना ही नहीं, ‘मिशन शक्ति’ के तहत महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाती है। विद्यालयों में शत-प्रतिशत नामांकन के लिए अभियान चलाया जाता है और इसके लिए प्रयास करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है। इस अभियान के तहत महिलाओं की कमाई का जरिया विकसित करने के कार्य भी किया जा रहा है। लाखों महिलाओं की आजीविका की व्यवस्था की गई। महिलाओं की जागरूकता, छात्रों में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण और महिलाओं के साथ अपराध होने पर त्वरित कार्रवाई ही इसका लक्ष्य है।

जनता की भावनाओं का योगी सरकार ने रखा ख्याल: धर्मांतरण गिरोह और गोकशी पर शिकंजा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा की राज्य सरकार ने हिन्दुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए गोकशी के खिलाफ भी कानून को और कड़ा किया। ‘यूपी गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश-2020’ को उस साल जून में मंजूरी दी गई, जिससे गोकशी और गोवंश तस्करी पर लगाम लगी। गोहत्या पर न्यूनतम 3 साल की सज़ा और 3 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया। तस्करी के मामले में वाहन मालिकों की भूमिकाओं की जाँच की व्यवस्था की गई। गोवंश को नुकसान पहुँचाने वालों पर कार्रवाई का प्रबंध किया गया

योगी सरकार ने भू-माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया। लखनऊ, नोएडा, कानपुर और वाराणसी जैसे जिलों को पुलिस कमिश्नरेट घोषित किया गया, ताकि पुलिस को गुंडों पर कार्रवाई के लिए बार-बार डीएम की अनुमति न लेनी पड़े और वो स्वछन्द तरीके से कार्य कर सकें। जिन जिलों की आबादी 10 लाख से ज्यादा है, वहाँ इस सिस्टम को लागू करने की व्यवस्था की जा रही है। इससे पुलिस के पास मजिस्ट्रेटियल अधिकार भी आते हैं।

योगी सरकार ने पेपर लीक करने वालों और परीक्षाओं में धाँधली करने वालों पर शिकंजा कसा, जिससे शिक्षा व्यवस्था माफियाओं से मुक्त हुई। पेपर लीक करने वालों पर रासुका और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करने के निर्देश खुद सीएम योगी ने दिए। हाँ, ये ज़रूर है कि इस क्षेत्र में पुराने सड़े हुए सिस्टम को बदलने में समय लग रहा है। अब हर जिले में यूपी पुलिस की यूनिट सोशल मीडिया पर भी सक्रिय है और वहाँ हर कार्रवाई की जानकरी दी जाती है, साथ ही वहाँ कई मामलों का संज्ञान लेकर कार्रवाई भी होती है।

इन सबके अलावा धर्मांतरण के मामले में कार्रवाई करते हुए कैसे कट्टर इस्लामी समूहों का पर्दाफाश किया गया, ये भी जानने लायक है। ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाया गया। विदेशी फंडिंग के जरिए अपना कारोबार चला रहे मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और उसके नेटवर्क से जुड़े डेढ़ दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया गया। धर्मांतरण विरोधी कानून बनने के 1 साल के भीतर 110 के करीब मामले दर्ज किए गए। अधिकतर में चार्जशीट भी दायर की गई।

सबसे बड़ी बात ये है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से कोई दंगा नहीं हुआ। अंतिम दंगा मुजफ्फरनगर का 2013 में हुआ हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष ही है, जिसमें इस्लामी कट्टरपंथियों ने जाट समुदाय पर हमला किया था। 2005 में मऊ में रामायण पाठ कर रहे हिन्दुओं पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। 2005 में कार्टून को लेकर दंगा हो गया था। 2016 में इसी तरह मथुरा में हिन्दू जाट समुदाय और मुस्लिम भीड़ के बीच संघर्ष के बाद दंगे हुए। योगी सरकार में इस तरह की ख़बरें कभी नहीं आईं।

CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी बाहर तो निकले और पत्थरबाजी व आगजनी भी की, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान का एक-एक पाई उनसे वसूल लिया गया। लगभग सवा 200 नए थानों की स्थापना की गई, ताकि पुलिस की पहुँच बढ़ सके। पुलिस अधीक्षकों (SP) कार्यालयों में FIR काउंटर्स खोले गए। लखनऊ में पुलिस फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी बन रही है। प्रत्येक जिले में साइबर सेल और जोन में साइबर थानों की स्थापना हुई, ताकि ऑनलाइन अपराधों पर शिकंजा कसा जा सके। आतंकी गतिविधियों की रोकथाम के लिए पुलिस की स्पेशल टीम बनी।

गरीब से अचानक करोड़पति बन गया लतीफ और उसका बेटा उबेदुल: खरीदे 7 बाइक, ट्रैक्टर, कई बीघा जमीन: SDM ने दिए जाँच के आदेश

बिहार के किशनगंज से चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ देखते ही देखते रातों रात एक लकड़हारा करोड़पति हो गया है। उसे कहीं से सीक्रेट तरीके से इतना धन मिला कि उसने एक ट्रैक्टर खरीद लिया, अपने रिश्तेदारों को सात महंगी बाइक खरीद कर दे दी। साथ ही अपना घर भी बनवा लिया। हालाँकि, अब कानूनी पचड़े से बचने के लिए लकड़हारा लतीफ अपने बेटे उबेदुल के साथ कहीं फरार हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला किशनगंज टाउन थाना क्षेत्र की टेउसा पंचायत का है। यहीं का रहने वाला मुस्लिम लकड़हारा संदिग्ध तरीके से रातों-रात करोड़पति बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि उसने लॉटरी खरीदा था और उसे एक करोड़ रुपए की लॉटरी लगी थी। खास बात ये है कि लॉटरी खरीदना और बेचना दोनों ही बिहार में बैन है। माना जा रहा है कि लकड़हारे ने पश्चिम बंगाल से ये लॉटरी खरीदा था।

बताया जा रहा है कि लकड़हारा ने बीते 15 दिन के अंदर लकड़हारा और उसके बेटे ने सात बाइक और ट्रैक्टर के अलावा कई बीघे जमीन भी खरीदा है। खास बात ये है कि ग्रामीणों का ये भी कहना है कि जिस व्यक्ति की लॉटरी लगी थी, उसे तो कुछ भी नहीं मिला। लेकिन उसकी टिकट छीनकर ये अमीर बन गया।

लेकिन अब मामला बढ़ता देख दोनों बाप-बेटे कहीं अंडरग्राउंड हो गए हैं। लेकिन पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए घटना की जाँच शुरू कर दी है। दोनों की तलाश की जा रही है। ताकि, दोनों को पकड़ के अचानक से आई इस अमीरी के राज से पर्दा उठाया जा सके।

आईटी और ईडी से करवाई जाएगी जाँच

इस मामले के सामने आने के बाद किशनगंज के एसडीएम शाहनवाज अहमद नियाजी ने इस घटना की जाँच इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय से करवाने की बात कही है। अधिकारी के मुताबिक, अगर यह मनी लॉन्ड्रिंग का केस हुआ तो पर्दे के पीछे छिपे लोगों को भी बेनकाब किया जाएगा।