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‘मुस्लिमों-ईसाईयों की हो घर वापसी, मंदिर-मठ लें जिम्मेदारी’: बोले तेजस्वी सूर्या – हिन्दू धर्म को मिटाने की कोशिश करने वालों को पहचानें

भाजपा (BJP) सांसद तेजस्वी सूर्या ने (Tejasvi Surya) धर्मान्तरण (Religious Conversion) कर मुस्लिम और ईसाई बने लोगों की ‘घर वापसी’ (Ghar Wapsi) करवाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इतिहास में धर्मान्तरण कर दूसरे धर्मों में शामिल कराए गए समूहों को युद्ध स्तर पर हिंदू धर्म (Hindu religion) में वापस लाया जाना चाहिए। भाजपा सांसद ने ये भी कहा कि घर वापसी करवाने के मिशन की जिम्मेदारी मंदिरों और मठों को लेनी होगी।

तेजस्वी सूर्या ने ये बयान उडुपी में कृष्ण मठ में 25 दिसंबर 2021 को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने हिंदू मान्यता और विचारधाराओं को मजबूत बनाने की अपील की। बीजेपी सांसद के मुताबिक, पश्चिमी विचार जैसे साम्यवाद, मक्कावाद और उपनिवेशवाद का उद्देश्य सनातन धर्म (Sanatan Dharm) को खत्म करना है। इसे समझने की जरूरत है। अपने दुश्मनों को हराओ। सूर्या के मुताबिक, “अगर आपको नहीं पता कि आपका असली दुश्मन कौन है तो आप कभी भी अपना बचाव नहीं कर सकते हैं।” हिंदू धर्म को मिटाने की कोशिश करने वालों की पहचान करना हिंदू जाति के लिए बहुत ही आवश्यक हो गया है।

उनके बयान का वीडियो अब वायरल हो रहा है। इसमें सूर्या यह कहते हुए दिखा दे रहे हैं, “हिंदुओं के पास एक ही विकल्प बचा है कि उन सभी का फिर से धर्मांतरण किया जाए जो हिंदू धर्म से बाहर हो गए हैं। कोई दूसरा उपाय नहीं है। हमें आश्चर्य होता है कि क्या यह संभव है, क्योंकि यह स्वाभाविक रूप से हमारे पास नहीं है। लेकिन आज हमें इसे खुद में विकसित करना होगा। यह कायापलट हमारे डीएनए में आना चाहिए।”

तेजस्वी ने घर वापसी की प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा, “हमने इस देश में राम मंदिर बनाया है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाया गया है। हमें पाकिस्तान के मुस्लिमों की हिंदू धर्म घर वापसी करवानी चाहिए। हमें घर वापसी को प्राथमिकता देनी होगी। अखंड भारत के विचार में पाकिस्तान शामिल है। मठों और मंदिरों को इस संबंध में नेतृत्व करना चाहिए।” भाजपा सांसद का कहना है कि मंदिरों और मठों में लोगों का ‘वार्षिक लक्ष्य’ होना चाहिए कि वे फिर से हिंदू धर्म में परिवर्तित हो जाएँ।

वो राजा जो पानीपत के तीसरे युद्ध में बदल सकता था भारत की तकदीर… जिसे मारने के लिए इस्लामी आक्रांताओं ने लिया छल का सहारा

महाराजा सूरजमल जाट की वीरता की गाथाएँ न सिर्फ राजस्थान के भरतपुर, बल्कि उस समय मुगलों के गढ़ रहे दिल्ली और आगरा तक फैली हुई हैं। 13 फरवरी, 1707 के जन्मे महाराजा सूरजमल जाट ने दिल्ली और आगरा से लेकर अलीगढ़, भरतपुर, बुलंदशहर, धौलपुर फरीदाबाद, हाथरस, मथुरा, मेवात, मुजफ्फरनगर मेरठ और पलवल जैसे जिलों को इस्लामी आक्रांताओं से मुक्त कराया। उन्हें भारत का प्लेटो (प्राचीन यूनानी दार्शनिक) और जाट समुदाय का ओडीसियस (प्राचीन ग्रीक राजा और होमर की पुस्तक ‘इलियद’ का किरदार) भी कहा जाता है।

18वीं शताब्दी के भारत निर्माताओं में शामिल महाराजा सूरजमल जाट का जन्म ऐसे समय में हुआ था, जब अफगान अहमदशाह अब्दाली और ईरान से आए नादिर शाह जैसे आक्रांताओं ने हजारों हिन्दुओं का कत्लेआम मचाया, गायों का नरसंहार किया और मंदिरों-तीर्थस्थलों को ध्वस्त किया। मुग़ल आक्रांता कमजोर हो चुके थे, ऐसे में जिसे मन वो आकर भारत को लूट कर चला जा रहा था। राजपूत और मराठा शक्तिशाली जरूर थे, लेकिन एकता न होने के कारण देश बेचैन था।

ऐसे में वो महाराजा सूरजमल जाट ही थे, जिनके कारण बृजभूमि में फिर से हरी फसलें लहलहाईं और बलूचों-अफगानों को नंगे पाँव भारत से भागना पड़ा। हम जानते हैं कि गंगा यमुना के बीच का क्षेत्र इस्लामी आक्रांताओं से सबसे ज्यादा पीड़ित रहा। किसानों से इतना कर वसूला जाता था कि कई तो जंगल भाग गए। ऐसे में दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में बसे जाटों ने अपनी लड़ाकू प्रवृत्ति जारी रखी और इस्लामी आक्रांताओं से संघर्ष करते रहे। शाहजहाँ ने भी अपने समय में मुर्शिद कुली खान को जाटों को कुचलने की जिम्मेदारी दी थी।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मेले में हिन्दुओं के छद्म वेश में पहुँचे उस नीच ने वहाँ की स्त्रियों को पकड़-पकड़ कर अपनी फ़ौज के हवाले कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप हिन्दुओं में उसके प्रति भारी आक्रोश का जन्म हुआ और आखिरकार संभल के नजदीक जाटवाड़ में जाटों ने उसका संहार कर दिया। फिर शाहजहाँ ने महाराजा जयसिंह को ये जिम्मेदारी देकर हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़वाया। 18वीं शताब्दी की शुरुआत में जाट योद्धा गोकुला ने अपने समाज को एक किया।

उन्होंने औरंगजेब के अत्याचारों से तंग आकर हिन्दू समाज को मुगलों को कर न देने की सलाह दी। मुग़ल सेनापति अब्दुल नबी खान को उनके पीछे लगाया गया, लेकिन उसका भी सफाया हो गया। औरंगजेब ने जाटों को घेर लिया, जिस कारण उनकी स्त्रियों को जौहर करने को मजबूर होना पड़ा। आगरा में गोकुला को हथकड़ियों में जकड़ कर पेश किया गया और जान बचाने की एवज में इस्लाम अपनाने की सलाह दी। उस योद्धा ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनके एक-एक अंग काट-काट कर फेंक दिए गए।

ब्रजराज और उनके भतीजे राजाराम ने जाटों को फिर से संगठित किया। ब्रजराज की भी हत्या कर दी गई। हालाँकि, राजराम ने संघर्ष जारी रखा। औरंगजेब ने शफी खान को जाटों के दमन के लिए भेजा, लेकिन राजाराम ने आगरा पर ही चढ़ाई कर दी और अपने पोते बेदार बख्त को एक बड़ी फ़ौज के साथ भेजा, लेकिन राजाराम ने आगरा में अकबर की कब्र खोद कर उसकी हड्डियाँ जला डालीं और अपनी वीरता का प्रदर्शन किया। मुगलों को उन्होंने जम कर लूटा। राजाराम के बाद चूड़ामन जाटों के नेता बने।

सूरजमल जाट ने अपनी कुशल रणनीतिक क्षमता का परिचय देते हुए मराठों के साथ समझौता किया। अहमदशाह अब्दाली ने कैसे जाटों का नरसंहार किया था और उनकी चौकियों को ध्वस्त किया था, ये उन्हें याद था। ,मजबूत कद-काठी के रणबाँकुड़े सूरजमल जाट अक्सर लड़ाई के लिए हाथियों का सही इस्तेमाल करते थे। मुग़ल सरदार नजीबुद्दौला के साथ लड़ाई में उनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन, उनके सिखाए अनुशासन का परिणाम था कि इस खबर के फैलने के बावजूद जाट अंत तक लड़ते रहे और मुस्लिम फ़ौज को खदेड़ दिया।

सूरजमल जाट की शक्ति को नियंत्रित करने के लिए ही अहमदशाह अब्दाली भारत आया था और उसी गुस्से में उसने हिन्दुओं की लाशों की मीनारें बनवाई थीं और मथुरा व इसके आसपास के इलाकों में लूटपाट मचाई थी। महाराजा सूरजमल जाट ने सन् 1733 में भरतपुर से अपना साम्राज्य विस्तार शुरू किया था। उनकी मृत्यु के बाद भी मुग़ल भयभीत थे और नजीबुद्दौला ने कई लोगों को बुला कर उनके शव की पहचान कराई थी, जिसके बाद वो निश्चित हुआ कि ये महाराजा सूरजमल जाट ही हैं।

उस समय पानीपत के युद्ध में अहमदशाह अब्दाली की जीत और मराठों की हार के पीछे एक बड़ा कारण ये भी था कि मराठे महाराजा सूरजमल जाट की सहायता लेने और उनकी शक्ति को समझने में नाकाम रहे। उन्होंने इस युद्ध के बाद इलाके के सबसे अमीर शहर आगरा पर कब्जे की योजना बनाई। 12 जून, 1761 को वो ऐसा करने में सफल रहे। फिर उन्होंने हरियाणा की तरफ अपना ध्यान बढ़ाया। नजीबुद्दौला रोहिल्ला सेना का सरदार था। महाराजा सूरजमल जाट के गाजियाबाद पहुँचने की सूचना से वो क्रोधित हो गया।

लेकिन, नजीबुद्दौला इतना डरा हुआ था कि उसने बार-बार सूरजमल को मनाने की कोशिश की और उनके लिए महँगे उपहार तक भेजे, लेकिन सभी को वापस कर दिया गया और उसका कोई फायदा नहीं हुआ। बलूचों को अपने साथ मिला कर नजुबुद्दौला ने यमुना पार किया और हिंडन के नजदीक डेरा डाला। सूरजमल ने 25,000 की सेना के साथ प्रस्थान किया। बीच में हुए सभी छोटे-मोटे युद्धों में जाटों ने अपनी वीरता का प्रदर्शन किया। महाराजा सूरजमल ने जनुबुद्दौला को तीन तरफ से घेरने की कोशिश की।

इसी दौरान कुछ इस्लामी सैनिक घात लगा कर बैठे हुए थे और उन्होंने महाराजा सूरजमल जाट की हत्या कर दी। उनकी मृत्यु को लेकर इतिहासकारों की अलग-अलग राय है। कहा जाता है कि दोनों तरफ से घात लगाए रोहिल्लों ने उनकी हत्या की थी। कला-साहित्य के संरक्षक रहे सूरजमल ने कई कवियों को अपने दरबार में शरण दी। मथुरा के सूदन उनके पसंदीदा कवि थे। उन्होंने गोवर्धन, मधुरा और वृन्दावन में कई मंदिर और तालाब बनवाए। उन्होंने कई किले भी बनवाए।

वो एक कुशल योद्धा भी थे। उन्होंने कभी बिना सोचे-समझे और बिना योजना के कोई हमला नहीं किया। अहमद शाह अब्दाली जब चौथी बार भारत को लूटने आया था तब उसने महाराजा सूरजमल जाट से भी समर्पण करने को कहा था। इसके बदले भेजे गए पत्र में खुद को रेगिस्तान का शासक बताते हुए सूरजमल ने पूछा था कि इतना बड़ा राजा अब एक गरीब इलाके के शासक से लड़ेगा? उन्होंने कहा था कि उनके साथियों का सम्मान उन्हें इसकी अनुमति नहीं देता कि वो समर्पण करें।

मोहम्मद शाकिर ने ‘शिवम’ बन हिन्दू लड़की को फँसाया, अश्लील वीडियो के सहारे करने लगा रेप: 11वीं में थीं तब से करता था पीछा

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ मोहम्मद शाकिर ने ‘शिवम’ बनकर हिंदू युवती निशा सिंह का कई दिनों तक पीछा किया और उसे अपने जाल में फँसा कर ‘लव जिहाद’ किया। बाद में जब पीड़िता को उसकी सच्चाई का पता चला तो उसने उससे रिश्ता तोड़ने की कोशिश की। लेकिन, शाकिब ने उसके अश्लील वीडियो और तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ रेप करना शुरू कर दिया।

स्वराज्य को पीड़िता निशा सिंह (21) ने बताया ये कि ये घटना उस वक्त की है जब वो कक्षा 11वीं की छात्रा थी। उस दौरान मोहम्मद शाकिर स्कूल जाते वक्त उसका पीछा करता था। उसे अनसुना करने के बाद भी वो निशा को फँसाने की कोशिशों में लगा रहा। आखिरकार पीड़िता उसकी बातों में आ गई। दोनों के बीच दोस्ती औऱ प्यार का रिश्ता पनपा। उस वक्त तक पीड़िता को उसकी असलियत का पता नहीं था। धीरे-धीरे दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। लेकिन पहले से कुटिल मानसिकता के साथ पीड़िता को फँसाने वाले शाकिर ने पीड़िता के अंतरंग पलों का वीडियो बना लिया।

इस बीच एक दिन पीड़िता को पता चल गया कि उसके साथ धोखा हुआ है। वो जिस शिवम से प्यार करती है वो असल में मोहम्मद शाकिर है। ये जानने के बाद पीड़िता ने उससे ब्रेकअप करने की कोशिश की। उसने ये बात अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद वो आरोपित शाकिर के घर गए, जो कि बड़ौत का ही रहने वाला था। उल्लेखनीय है कि निशा भी बागपत के बड़ौत कस्बे की घनश्याम पट्टी के रहने वाली है। हालाँकि, शाकिर के घर में उसकी बड़ी बहन ने निशा के परिजनों को गंदी गालियाँ दी और उन्हें उसके घर से निकल जाने का कह दिया।

वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रहा था शाकिर

निशा ने अपनी तरफ से रिश्ते को खत्म कर दिया तो अब शाकिर उसके अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल कर रहा था। वो उसी वीडियो को जरिए वो लगातार उसका रेप कर रहा था। ‘स्वराज्य’ को निशा ने बताया कि इसी साल नवंबर में उसकी सगाई उसके परिवार वालों उसी का जाति के लड़के से कर दी। निशा के पिता का करीब एक दशक पहले ही निधन हो गया था और तभी से उसके पूरे परिवार के भरण-पोषण का जिम्मा वही उठा रहे हैं। निशा ने बताया कि वो अपने होने वाले पति से दो बार मिल चुकी है।

हाल ही में उसका भावी पति उससे मिला और उसने वो सारी अश्लील तस्वीरें निशा को दिखाई, जिससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। हालाँकि, उसके भावी पति ने उससे सगाई नहीं तोड़ी। वहीं निशा ने उसे इस मामले को समझाने के लिए कुछ समय माँगा। इसके बाद 12 दिसंबर को वो अपने परिजनों के साथ थाने गई और आरोपित के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज कराया।

बहरहाल, पाड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपित मोहम्मद शाकिर के खिलाफ आईपीसी की धारा 354D, 328, 376, 323, 504, 506 के साथ ही आईटी एक्ट 2008 की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

बड़ौत पुलिस के ट्विटर हैंडल के मुताबिक, शाकिर पोक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012) की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।

फिलहाल, निशा की शादी स्थगित कर दी गई है और उसे डर है कि रिश्ता टूट भी सकता है।

बदलेगा सनी लियोनी के गाने ‘मधुबन में राधिका नाचे’ का लिरिक्स और नाम, हिन्दुओं के विरोध के आगे झुका ‘Saregama Music’

म्यूजिक लेबल ‘सारेगामा म्यूजिक’ (Saregama Music) भारी विरोध के बाद अब सनी लियोनी (Sunny Leone) के गाने ‘मधुबन में राधिका नाचे’ (Madhuban Mein Radhika Nache) के बोल में बदलाव करने के लिए राजी हो गया है। सोशल मीडिया पर जारी किए गए आधिकारिक बयान में कंपनी ने कहा कि ताज़ा प्रतिक्रियाओं और को देखते हुए और हमारे देशवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ‘मधुबन’ गाने का न सिर्फ लिरिक्स, बल्कि नाम में भी बदलाव किया जाएगा।

भारत के सबसे पुराने संगीत लेबल ‘सारेगामा म्यूजिक’ ने कहा कि अगले तीन दिनों के भीतर ही नया गाना पुराने वाले की जगह ले लेगा। सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर ये बदलाव किया जाएगा, जहाँ-जहाँ ये गाना रिलीज हुआ है। खबर लिखे जाने तक इस गाने को यूट्यूब (YouTube) पर 1.01 करोड़ बार देखा जा चुका था। 2.19 लाख लोगों ने इसे लाइक भी किया है। इस गाने को गायिका कानुका कपूर ने गाया है और शारिब-तोशी ने संगीत दिया है। चैनल ने इसे 2021 का सबसे बड़ा पार्टी सॉन्ग बताते हुए प्रमोट किया था।

मथुरा के संतों ने भी इस गाने पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। इसे अश्लील बताते हुए कहा गया था कि इस गाने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। वृन्दावन के संत नवल गिरि महाराज ने तो यहाँ तक कहा था कि जब तक सनी लियोनी माफी नहीं माँगेगी, उन्हें भारत में नहीं रहने दिया जाए। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने भी सनी लियोनी के ‘मधुबन’ गाने पर आपत्ति जताई थी। इनका कहना है कि जिस तरह से इस गाने को फिल्माया गया है, इससे पूरे बृजभूमि की छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल हुई है।

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी चेताया था, “कुछ विधर्मी लगातार हिंदू भावनाओं को आहत कर रहे हैं। राधा हमारी भगवान हैं। अलग से इस देश में राधा के मंदिर हैं। माँ राधा की पूजा होती है। ये जो शाकिब तोशी हैं, वो क्या एकाध गीत अपने धर्म पर बना सकते हैं। ये केवल हमारे धर्म और आस्था पर चोट पहुँचाते हैं। इनका गाना ‘मधुबन में राधिका नाचे’ ऐसा ही कुत्सित प्रयास है। मैं सनी लियोनी व शाकिब तोशी को हिदायत दे रहा हूँ कि समझें और संभलें। अगर तीन दिन में दोनों ने माफी माँगकर गाना नहीं हटाया तो हम उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगें।”

‘करियर और रिश्तों की असफलता, पैसे की कमी…’: आत्महत्या के बारे में सोच रही थीं ‘कास्टिंग काउच’ की शिकार उर्फी जावेद, इस्लाम को नहीं मानतीं

अपने बोल्ड लुक को लेकर अक्सर ट्रोलर्स का निशाना बनने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्फी जावेद (Urfi Javed) ने अपने जीवन को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उर्फी ने कहा कि कैरियर में लगातार मिल रही असफलताओं से तंग आकर एक बार वो आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगी थीं।

अपने इंस्टाग्राम (Instagram) पेज के जरिए उर्फी ने यह जानकारी अपने फैंस के साथ साझा की है। उन्होंने लिखा, “आपको मालूम है कि मैं अपनी जिंदगी में कितनी बार असफल हुई हूँ? अब तो मैं भी नहीं गिन सकती! अपने जीवन में कई बार मैंने महसूस किया है कि इस झंझट से निकलने का एक ही रास्ता है कि मैं खुद को समाप्त कर दूँ। मेरी लाइफ गंभीर तौर पर बिगड़ चुकी थी। असफल कैरियर, असफल रिश्ते, पैसे की कमी ने मुझे एक ऐसे हारे हुए व्यक्ति की तरह महसूस कराया जो जीने के लायक नहीं है।”

उर्फी आगे कहती हैं, “मेरे पास अभी भी बहुत पैसा नहीं है, लेकिन सफल करियर है और मैं अभी भी सिंगल हूँ लेकिन मुझे उम्मीद है। आज अगर में जिंदा हूँ तो इसका केवल एकमात्र कारण यह है कि मैं कभी रुकी नहीं। आज मैं जीवित रहने का एकमात्र कारण है (मेरा विश्वास कीजिए, मेरे जीवन में ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं, जिन्होंने लगभग मुझे मार ही दिया था।) मैं चलता रही और अभी भी चल ही रही हूँ। मैं वो नहीं हो सकती जो मैं बनना चाहती हूँ, लेकिन इतना जरूर है कि मैं रास्ते में हूँ। साल खत्म होने से पहले कुछ जोश की बात करते हैं! उठो, लड़ो, दोहराओ। आप अपने आस-पास की परिस्थितियों से कहीं अधिक मजबूत हो।”

झेल चुकी हैं कास्टिंग काउच (Casting coutch) का दर्द

इससे पहले हाल ही में उर्फी जावे ने बॉलावुड के घिनौने सच का खुलासा करते हुए बताया था कि वो भी अपने कैरियर के शुरुआती दिनों में कास्टिंग काउच का शिकार हुई थीं। एक्ट्रेस ने ये भी बताया था कि इस कारनामें में इंडस्ट्री के कई नामचीन लोग शामिल थे। उन्होंने ये भी कहा था इंडस्ट्री में केवल मर्दों की चलती है।

यहीं नहीं इस्लाम से ताल्लुक रखने वाली उर्फी जावेद ये घोषणा कर चुकी हैं कि वो इस्लाम को नहीं मानती हैं और हिंदू धर्म को जानने के लिए ‘भगवद गीता’ का पढ़ रही हैं। उन्होंने ये भी कहा था कि इस्लाम में पुरुष महिलाओं पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते हैं, इसलिए वो कभी किसी मुस्लिम से निकाह नहीं करेंगी।

‘यूपी में किसी माफिया की हैसियत नहीं कि…’: जहाँ कभी खड़ी थी अतीक अहमद की अवैध संपत्ति, वहाँ ₹158 Cr में गरीबों को घर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में रविवार (26 दिसंबर, 2021) को ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के आवासों सहित 158 करोड़ रुपए लागत की 31 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और चाभी भी वितरित की।

सीएम योगी ने लूकरगंज में पूर्व सांसद अतीक अहमद के कब्जे से छुड़ाई गई जमीन पर गरीबों के लिए बनने वाले आवास का शिलान्यास करने के बाद लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “वर्ष 2017 से पहले गरीबों व व्यापारियों की संपत्ति पर कब्जा होता था। आज प्रयागराज में कुख्यात माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों के लिए निःशुल्क आवास की दो स्कीम लॉन्च होने के अवसर पर मैं आप सभी को बधाई व शुभकामनाएँ देता हूँ।”

इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस योजना से लाभान्वित होने वाले गरीबों को भी मैं अग्रिम बधाई देता हूँ। उन्होंने कहा कि यह आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना की तर्ज पर उनके जीवन में व्यापक परिवर्तन का कारक बनेगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कई वर्षों तक काबिज रहीं सपा-बसपा सरकारों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पहले विकास के लिए पैसा नहीं था और जनता के विकास के लिए आने वाले पैसे को चंद लोग हड़प जाते थे, जिसके परिणामस्वरूप, गरीब टकटकी लगाकर देखता रह जाता था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहा, “यह समाजवादी इत्र नहीं, समाजवादी बदबू है, जो गरीबों की बद्दुआ लेकर प्रदेश में फैलाई जा रही है। यह गरीब की आह की प्रतीक है। किसी गरीब को मकान, अन्न व यूपी सरकार की अन्य योजनाओं से वंचित करके जो पैसा इन्होंने लूटकर रखा था, आज दीवारों से निकल रहा है।”

उत्तर प्रदेश के सीएम ने कहा कि यह जीरो टॉलरेंस नीति का ही परिणाम है कि आज पेशेवर माफियाओं और अपराधियों की जमीनों को कब्जों से मुक्त करके उन पर गरीबों के लिए आवास बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आवास गरीबों को पहले भी दिए जा सकते थे, लेकिन पिछली सरकारों की रुचि नहीं थी।

उन्होंने आगे कहा, “मैं कह सकता हूँ कि उत्तर प्रदेश में किसी माफिया की हैसियत नहीं है, जो किसी गरीब, व्यापारी या कमजोर की संपत्ति पर कब्जा कर सके। अगर उसने किसी कालखंड में किसी सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा किया है तो उसकी अवैध कमाई पर अब यूपी सरकार का बुलडोजर चल रहा है।”

केरल में क्रिसमस सेलिब्रेशन के दौरान हिंसा: नशे में धुत लोगों के हमले में 15 पुलिसकर्मी घायल, कई वाहन आग के हवाले, 3kg ड्रग बरामद

केरल (Kerala) के एर्नाकुलम में शनिवार (25 दिसंबर 2021) देर रात क्रिसमस के जश्न के दौरान नशे में धुत मणिपुर और नगालैंड के प्रवासी मजदूरों ने बड़े पैमाने पर हिंसा को अंजाम दिया। घटनास्थल पर पहुँची पुलिस को भी नहीं छोड़ा गया। मजदूरों ने इस दौरान पुलिस पर हमला करते हुए उसकी तीन जीपों में भी आग लगा दी। इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

घटना में कुन्नथुनाडु एसएचओ सहित 15 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। घायल पुलिसकर्मियों का कोलेनचेरी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। पुलिस ने बताया कि यह घटना काइटेक्स कंपनी के लेबर कैंप में हुई है। सभी मजदूर किझक्कमबलम में स्थित काइटेस्क कंपनी में काम करते हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवासी मजदूरों के एक समूह के बीच हुई लड़ाई ने विवाद का रूप ले लिया था। उन्होंने स्थानीय लोगों और पास के घरों पर पथराव शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही कुन्नथुनाडु थाने से पुलिस की एक टीम स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए मौके पर पहुँची, लेकिन नशे में धुत इन मजदूरों ने पुलिस पर लाठियों से हमला कर दिया और उन पर भी पथराव करने लगे। यही नहीं, पुलिसकर्मी जब जीप को छोड़कर भागने लगे तो मजदूरों ने उनकी 3 जीपों में आग लगा दी।

पुलिस ने करीब 150 प्रवासी मजदूरों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पथराव में स्थानीय लोगों के भी कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अलुवा ग्रामीण एसपी कार्तिक के नेतृत्व में 300 से अधिक पुलिसकर्मियों को घटनास्थल पर तैनात किया गया है।

काइटेक्स ग्रुप के चेयरमैन साबु एम जैकब ने कहा कि वहाँ कुछ ऐसे स्थानीय गैंग हैं, जो इन मजदूरों को ड्रग्स की सप्लाई करते हैं। घटना पर रेड के दौरान भी ड्रग्स बरामद किए गए हैं। वहीं, आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि घटनास्थल से लगभग 3 किलोग्राम MDMA ड्रग बरामद किया गया है।

ग्रामीण एसपी कार्तिक ने बताया कि प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, ड्रग्स और शराब पीने के बाद मजदूर भिड़ गए। पुलिस की टीम पहुँचने पर उन्होंने उन पर भी पथराव कर दिया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। घायल पुलिसकर्मियों की हालत भी ठीक है। मामले की जाँच के लिए टीमों का गठन किया गया है।

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नोटों से भरी 9 बोरियाँ, 175 kg सोने-चाँदी की सिल्लियाँ… ‘समाजवादी इत्र’ वाले कारोबारी के घर छापा, अब तक ₹284 Cr बरामद

सामान्यतया ऐसा फिल्मों में ही देखने को मिलता है कि प्रशासन कहीं पर छापेमारी करता है और आरोपित के घर से उसे बेहिसाब धन मिलता है। लेकिन इस बार ऐसा वास्तविकता में हुआ है। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर में इत्र कारोबारी पीयूष जैन (Piyush jain) के घर और दफ्तरों में पड़े आयकर विभाग के छापों से लगातार धनवर्षा हो रही है। जैन के यहाँ से इनकम टैक्स को 177 करोड़ रुपए का कैश मिला है। CGST और इनकम टैक्स (Income Tax Department) विभाग की जाँच अभी जारी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित के यहाँ जाँच एजेंसी को कन्नौज वाले घर में एक तहखाना भी मिला है, जहाँ से 150 किलो चाँदी औऱ 25 किलो सोने की सिल्लियाँ मिली हैं। इनमें से चाँदी की बाजार कीमत करीब पौने 2 करोड़ रुपए और सोने की कीमत करीब 12 करोड़ रुपए आँकी गई है। इसके अलावा जाँच टीम को 107 करोड़ रुपए भी मिले हैं। इस तरह से कुल मिलाकर अब तक एजेंसियों ने पीयूष जैन के पास से कुल मिलाकर 284 करोड़ रुपए की राशि मिल चुकी है।

इसके अलावा जैन के यहाँ तहखाने से नोटों से भरी 9 बोरियाँ मिली हैं। इस कैश को अभी तक नहीं गिना जा सका है। इसकी गिनती करने के लिए बैंकों के अधिकारियों और नोट गिनने की 7 मशीनों को मंगाया गया है। अनुमान लगाया गया है कि यह कैश भी करीब 50 करोड़ रुपए हो सकता है। इसके अलावा उसके पास से सीक्रेट लॉकर और आलमारियाँ मिली हैं, जिन्हें खोलने में अधिकारियों की भी हालत खराब हो गई है। इसलिए अब लखनऊ से आर्किटेक्ट की टीम को बुलाया गया है।

हिरासत में पीयूष जैन

फिलहाल इत्र कारोबारी पीयूष जैन को महानिदेशालय जीएसटी इंटेलीजेंस (DGGI) अहमदाबाद की टीम ने हिरासत में ले लिया है। जाँच दल आरोपित को लेकर कन्नौज गई है, जहाँ उसके फिंगर प्रिंट की सहायता से बंद दरवाजों के लॉकर को खोला गया। इसके अलावा पीयूष जैन के 2 बेटों प्रत्युष और प्रियांश जैन को भी हिरासत में लिया गया है। गौरतलब है कि कर चोरी के मामले में बुधवार को इनकम टैक्स की टीम ने शिकर पान मसाला के घर पर छापा मारा था। उसके बाद से यह छापेमारी लगातार चल रही है। पीयूष जैन समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के MLC पुष्पराज जैन पम्मी (Pushpraj jain pummi) के रिश्तेदार बताए जा रहे हैं।

रहस्यमयी तरीके से बनाए हैं घर

पीयूष जैन का घर बहुत ही रहस्यमयी तरीके से बनाया गया है। एक बड़े अहाते में कुल चार बड़े मकान बनाए गए हैं। लेकिन, इनमें आने-जाने के लिए कुल आठ दरवाजे हैं और सभी मकान एक-दूसरे से पूरी तरह से अलग हैं। यानि के एक मकान से दूसरे मकान में जाने के लिए बाहर आना पड़ेगा। यहाँ से भी अब तक चार बोरे बरामद किए जा चुके हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, गुजरात, मुंबई और कानपुर के कई ठिकानों पर रेड शुरू की गई है।

सत्ता से बाहर रहने वालों के यहाँ मिल रहे 200 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aaditynath) ने पीयूष जैन के बहाने सपा पर निशाना साधते हुए आगरा में अपनी सभा के दौरान कहा कि जो लोग 5 साल से सत्ता से बाहर हैं उनके यहाँ से 200 करोड़ रुपए निकल रहे हैं।

लुधियाना ब्लास्ट: जेल में बंद खालिस्तानी ‘चीता’ के सहयोग से पाकिस्तान में बैठा रिंदा ने कराया विस्फोट, मृतक गगनदीप की गर्लफ्रेंड भी अरेस्ट

पंजाब के लुधियाना कोर्ट परिसर में गुरुवार (23 दिसंबर) को हुए RDX बम ब्लास्ट मामले में तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हैं। इसको लेकर पुलिस जाँच में कई खुलासे हुए हैं। पता चला है कि ब्लास्ट की साजिश पंजाब की लुधियाना स्थित सेंट्रल जेल में रची गई थी। इसमें इसका सहयोग कुख्यात तस्कर रंजीत सिंह बाबा उर्फ चीता और सुखविंदर सिंह उर्फ बॉक्सर ने सहयोग किया था।

बम को ऐक्टिवेट करने के दौरान मारा पंजाब पुलिस का पूर्व कर्मचारी गगनदीप सिंह तस्करी के मामले में इन दोनों के साथ लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद था। जेल में रहने के दौरान गगनदीप का दोनों के साथ मेलजोल बढ़ गया। इस दौरान दोनों ने गगनदीप को बड़े सपने दिखाने शुरू कर दिए और पाकिस्तान स्थित खालिस्तान के अपने हैंडलरों के बारे में बताया।

मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चीता ने पाकिस्तान में बैठे तस्कर हरविंदर सिंह रिंदा से बात कराई थी। जेल में बैठे आरोपियों ने सितंबर में जमानत पर बाहर आए गगनदीप को पैसे का लालच देकर उसे योजना के अंजाम देने के लिए मना लिया। गगनदीप जेल से बाहर आने के बाद भी फोन के जरिए चीता के संपर्क में रहता था।

चीता ने गगनदीप को कोर्ट में ब्लास्ट करने की योजना के बारे में गगनदीप को बताया था। उसने गगनदीप को यह भी बताया कि ब्लास्ट करने के लिए सामान कहाँ से लेना है और ब्लास्ट कैसे, कहाँ और कितने बजे करना है। यही नहीं, चीता ही रिंदा के संपर्क में रहता था और रिंदा उसे बताता था कि ड्रग्स कहाँ से लेना है और कहाँ सप्लाई करना है।

रंजीत सिंह उर्फ चीता अमृतसर के गांव करिंडा का रहने वाला है। वह नशा तस्करी के आरोप में पिछले काफी समय से जेल में बंद था। वहीं, इस मामले का दूसरा साजिशकर्ता 39 वर्षीय सुखविंदर सिंह उर्फ बॉक्सर राणा खुर्द गाँव का रहने वाला है। खन्ना पुलिस ने तीन साल पहले उसे आरडीएक्स के एक मामले में गिरफ्तार किया था। वह तब से ही जेल में बंद है।  

ब्लास्ट में मारे गए गगनदीप सिंह को 24 अगस्त 2019 को एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार किया था। आरोपी से पूछताछ के दौरान उसके दो और साथियों को गिरफ्तार किया गया था। जमानत की अपनी याचिका में गगनदीप ने तर्क दिया था कि वह पिछले दो साल से जेल में बंद है, इसलिए देश में चल रहे कोविड के माहौल और उसके अच्छे व्यवहार को देखते हुए उसे जमानत दी जाए। इसके बाद उसे सितंबर में जमानत दे दी गई थी।

जाँच एजेेंसियों ने जेल में जाकर दोनों से पूछताछ की है। इसके अलावा, उसके साथ बैरक में बंद अन्य आरोपियों से भी पूछताछ की जा रही है। जाँचकर्ता पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दो सालों तक जेल में बंद रहने के दौरान गगनदीप से जेल में कौन लोग और कितनी बार मिलने के लिए आए। इसके साथ साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गगनदीप से कौन-कौन लोगों ने और किन-किन माध्यमों से संपर्क किया। इस मामले में पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारियों के साथ-साथ पंजाब और केंद्र की खुफिया एजेंसियाँ निगाह रख रही हैं।

आरोपी गगनदीप की पूर्व सहयोगी और उसकी कथित पुलिसकर्मी दोस्त कमलजीत कौर को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। घटनास्थल से मिले गगनदीप के कॉल रिकॉर्ड से पता चलता है कि बम विस्फोट में मारे जाने से एक दिन पहले उसने कमलजीत कौर को आखिरी बार फोन किया था। उसने न तो अपनी पत्नी को और न ही परिवार के किसी अन्य सदस्य को फोन किया था। कमलजीत कौर फिलहाल एसपी ऑफिस में टाइपिस्ट के पद पर तैनात है। वह खन्ना सिटी थाने में 2015 से 2017 तक तैनात थी और इसी थाने में गगनदीप मुंशी था।

‘प्रियंका वाड्रा जी, देख लीजिए…’: कॉन्ग्रेस के ‘मैराथन’ में लड़कियों के साथ कार्यकर्ताओं ने की अभद्रता, छात्राओं ने लगाए मोदी-योगी के नारे

उत्तर प्रदेश के झाँसी में प्रियंका गाँधी के समर्थन में आयोजित रैली में लड़कियों के साथ अभद्रता हुई, जिसके बाद लड़कियों ने ‘मोदी-योगी’ के नारे लगाए। अभद्रता का आरोप कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर ही लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियोज में देखा जा सकता है कि किस तरह ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ का नारा देने वाली प्रियंका गाँधी की रैली में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। ये लड़कियाँ वहाँ आयोजित मैराथन में शामिल होने के लिए आई थीं। भाजपा ने इसे लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी की आलोचना भी की है।

इसके बाद लडककियों ने ‘मोदी-मोदी’ और ‘योगी-योगी’ के नारे लगाने भी शुरू कर दिए। ‘उत्तर प्रदेश भाजपा’ ने भी इस वीडियो को साझा किया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने झाँसी के अलावा लखनऊ में भी इसी तरह के ‘मैराथन’ के आयोजन की घोषणा की थी, लेकिन फिर पार्टी ने प्रशासन पर इसकी अनुमति न देने का आरोप लगाया। यूपी भाजपा ने कहा, प्रियंका वाड्रा जी, अपनी ही रैली में देख लीजिए बेटियों की दुर्गति। इन लड़कियों को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं’ से ही लड़ना पड़ रहा है।”

साथ ही भाजपा ने पूछा कि क्या यही है कॉन्ग्रेस में लड़कियों का सम्मान? वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी का दावा है कि बिना सरकारी बसें और सरकारी तंत्र लगाए ही उसके आयोजन में 10,000 से अधिक लड़कियाँ दौड़ने के लिए उतरीं। पार्टी ने प्रदेश की हर लड़की को कॉन्ग्रेस के ‘लड़की हूँ , लड़ सकती हूँ’ नारे के साथ बताते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ ने ‘लड़कियों के डर’ से लखनऊ में प्रस्तावित कार्यक्रम को रद्द करा दिया। हालाँकि, झाँसी के वीडियोज से पार्टी की खासी फजीहत हुई।

मुंबई भाजपा के प्रवक्ता सुरेश नाखुआ ने कहा, “महिलाओं से दुर्व्यवहार करना कॉन्ग्रेस के DNA में है। लड़कियों से कॉन्ग्रेसियों ने दुर्व्यवहार किया। लड़कियों ने लगाए मोदी योगी के समर्थन में नारे। अब प्रियंका गाँधी वाड्रा के मुँह में दही जम जाएगा।” दिल्ली भाजपा आईटी सेल के मुखिया शहजाद पूनावाला ने कहा, “लड़कियों से किया कॉन्ग्रेसियों ने दुर्व्यवहार तो लड़कियों ने विरोध में लगाए योगी-मोदी के नारे। प्रियंका जी, झाँसी की लड़कियों ने आपको एक संदेश भेजा है कि लड़कियाँ सहेंगी नहीं, अपने हक के लिए लड़ेंगी।”