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‘फिर से शुरू होगा आंदोलन, किसानों को 13 महीने की ट्रेनिंग भी’: राकेश टिकैत ने धमकाया – यूपी में BJP को कोई नहीं देगा वोट

राजस्थान पहुँचे ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक बार फिर से ‘किसान आंदोलन’ शुरू करने की धमकी दी है। उन्होंने कहा, “ना ही किसान कहीं गए है, ना सरकार कहीं गई है। अब किसानों के आंदोलन के लिए 13 महीने की ट्रेनिंग होगी। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ कोई चुनाव नहीं लड़ रहा है। 15 जनवरी को हमारी बैठक है। आंदोलन अभी सिर्फ स्थगित हुआ है, जो किसान गए हैं वो 4 महीने की छुट्टी पर गए हैं।”

राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को धमकाया कि अभी केवल तीन कृषि कानून ही वापस लिए गए हैं और अन्य माँगें नहीं पूरी हुई है, इसीलिए आंदोलन कभी भी फिर से शुरू हो सकता है। वहीं उन्होंने AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को भाजपा से भी ज्यादा खतरनाक है। MSP पर कानून की बात करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार धीमी गति से कमिटी बनाने के फैसले पर काम कर रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर उन्होंने कहा कि किसान हितैषी पार्टी को ही किसान वोट देगा।

फिर से आंदोलन खड़ा करने की धमकी देते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि वो किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने नहीं जा रहे हैं। कॉन्ग्रेस के समर्थन पर ‘किसान आंदोलन’ चलने के आरोप पर उन्होंने कहा कि ये कोई एक दिन की वार्ता नहीं, बल्कि 300 दिनों तक चलने वाला आंदोलन था। उन्होंने दावा किया कि ये किसी राजनीतिक दल के समर्थन से नहीं चल रहा था। उन्होंने कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा को कोई वोट नहीं देगा। उन्होंने कहा कि किसानों को फायदा देने वाले को ही वोट दिया जाएगा।

बता दें कि कुछ ही महीनों में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों में राज्य के 32 में से 25 किसान संगठन एक छत्री के नीचे आकर राजनीति का हिस्सा बनेंगे। चुनाव लड़ने के लिए किसानों ने संयुक्त समाज मोर्चा (SSM) बनाया है और भारतीय किसान यूनियन- राजेवाल (BKU- Rajewal) गुट के नेता बलबीर सिंह राजेवाल को मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे। मोर्चे को लेकर किसान नेता हरमीत कादियां ने बताया कि कृषि बिलों की वापसी के बाद लोगों को उनसे उम्मीद बढ़ गई है। पंजाब लौटने पर स्वागत हुआ और उन पर दबाव बनने लगा कि अगर दिल्ली मोर्चा जीता जा सकता है तो पंजाब को भी सुधारा जा सकता है।

‘हिन्दू भावनाओं को आहत कर रहे विधर्मी’: MP के गृह मंत्री ने कहा – माफ़ी नहीं माँगा तो सनी लियोनी और शाकिब तोशी पर कार्रवाई

बॉलीवुड एक्ट्रेस सनी लियोनी (Sunny Leone) के गाने ‘मधुबन में राधिका नाचे’ का उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्य प्रदेश में भी विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने इसे हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘मधुबन में राधिका नाचे’ पर सनी लियोनी के अश्लील डांस किए जाने पर पूछे गए सवाल पर गृहमंत्री ने कहा, “कुछ विधर्मी लगातार हिंदू भावनाओं को आहत कर रहे हैं। राधा हमारी भगवान हैं। अलग से इस देश में राधा के मंदिर हैं। माँ राधा की पूजा होती है। ये जो शाकिब तोशी हैं, वो क्या एकाध गीत अपने धर्म पर बना सकते हैं। ये केवल हमारे धर्म और आस्था पर चोट पहुँचाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “इनका गाना ‘मधुबन में राधिका नाचे’ ऐसा ही कुत्सित प्रयास है। मैं सनी लियोनी व शाकिब तोशी को हिदायत दे रहा हूँ कि समझें और संभलें। अगर तीन दिन में दोनों ने माफी माँगकर गाना नहीं हटाया तो हम उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगें।”

बता दें कि सनी लियोनी का मधुबन गाना (Sunny Leone’s Madhuban song) 22 दिसंबर को रिलीज किया गया था। तब से यह गाना विवादों में है। मधुबन में राधिका नाचे रे (madhuban me radhika nache re) गाने में हिंदू धर्म-संस्कृति के प्रतीकों, नामों आदि का जैसा चित्रण किया गया है, उसे लेकर मथुरा के संतों ने इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है।

बात करें गाने की तो इसकी शुरुआत ही कुछ इस प्रकार से की गई की है कि हिंदू धर्म से जुड़े हर शख्स को इससे आपत्ति होगी। गाने की शुरुआत ‘नाचे मधुबन में राधिका, जंगल में नाचे जैसे मोर रे साँवरिया मोरे’ पंक्ति से होती है। गाने की अन्य पंक्तियाँ देखिए – ‘चली मैं बिजली गिरा कर, मधुबन में राधिका नाचे’, ‘घनघोर जवानी हूँ, तेरी प्रीत पुरानी हूँ, बाय बर्थ दीवाली हूँ, चली मैं गदर मचा के– मधुबन में राधिका नाचे।’ साथ ही इसमें सनी लियोनी ‘रिवीलिंग ड्रेस’ में भी दिख रही हैं और पानी से लेकर डांस मूव्स तक के इस्तेमाल से गाने को सेक्सी बनाने की भरपूर कोशिश की गई है।

गुजरात के ‘बेट द्वारका’ के दो द्वीपों पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने किया दावा, हाईकोर्ट ने कहा- कृष्णनगरी में वक्फ का कैसा मालिकाना हक?

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका को देवभूमि कहा जाता है। यहीं पर स्थित है बेट द्वारका। अब इस बेट द्वारका के दो द्वीपों पर अपना दावा करते हुए वक्फ बोर्ड ने गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। इस आवेदन पर कोर्ट की जज भी बिफर पड़ीं। गुजराती दैनिक दिव्य भास्कर की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के आवेदन पर सुनवाई हाईकोर्ट की जस्टिस संगीता विशेन की अदालत में हुई।

वक्फ समिति ने कोर्ट में दिए अपने आवेदन में दावा किया है कि बेट द्वारका द्वीप पर दो द्वीपों का स्वामित्व वक्फ बोर्ड के पास है। वक्फ बोर्ड के इस बेतुके दावे को सुनते ही गुजरात हाईकोर्ट ने इस पर अपनी असहमति व्यक्त की। कोर्ट ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि आप क्या कह रहे हैं? वक्फ बोर्ड कृष्णानगरी में भूमि के स्वामित्व का दावा कैसे कर सकता है?।” इसी के साथ कोर्ट ने वक्फ बोर्ड के आवेदन को सिरे से खारिज कर दिया।

दिव्य भास्कर रिपोर्ट में कहा गया है कि बेट द्वारका क्लस्टर में कुल 8 छोटे द्वीप हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर उन पर मालिकाना हक जताया है। वक्फ बोर्ड का दावा है कि बेट द्वारका में पास के द्वीपों की भूमि वक्फ बोर्ड की है। हालाँकि, हाईकोर्ट उसके दावे को सुनकर गुस्से में बिफर पड़ा। इसके बाद हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड को अपने आवेदन को फिर से पढ़ने और अवकाश न्यायालय में एक और संशोधित आवेदन जमा करने के लिए कहा।

बेट द्वारका जिसे बेयत द्वारका भी कहा जाता है, उस समय भगवान श्रीकृष्ण का निवास स्थान था, जब वो गुजरात में शासन करते थे। बेट द्वारका, द्वारका के तट पर एक छोटा सा द्वीप है। यहाँ पहुँचने में ओखा से नाव के जरिए करीब 30 मिनट का वक्त लगता है। इस छोटे से द्वीप में लगभग 7,000 परिवार रहते हैं, जिनमें से लगभग 6,000 परिवार मुस्लिम परिवार हैं। बेट द्वारका हिंदुओं के पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है।

‘लखनऊ अब दुश्मन देश के विरुद्ध दहाड़ेगा भी’: ‘ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट’ का शिलान्यास, ₹1 में योगी सरकार ने दी 80 हेक्टेयर जमीन

राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि में भारत अब और ताकतवर बन गया है। इसमें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का भी योगदान है। असल में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार (26 दिसंबर, 2021) को लखनऊ में ‘ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट’ का शिलान्यास किया। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सम्बोधन दिया। बता दें कि रूस के साथ समझौते के बाद ब्रह्मोस मिसाइल को भारतीय सेना में शामिल किया गया था। अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ये यूपी की राजधानी में बनेगा।

ब्रह्मोस मिसाइल की इस यूनिट के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लीज पर जमीन उपलब्ध कराई है। खास बात ये है कि मात्र 1 रुपए की लीज पर 80 हेक्टेयर से अधिक जमीन उपलब्ध कराई है। साथ ही अमौसी एयरपोर्ट के बगल में एक DRDO लैब भी खुलेगा। वहाँ पर रक्षा अनुसन्धान और विकास का कार्य होगा। DRDO इन प्रोजेक्ट्स में 10,000 करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है। रोजगार भी बढ़ेगा। कई उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ब्रह्मोस का प्रोडक्शन अब लखनऊ में होगा। लखनऊ, अब केवल ‘मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं’ के लिए नहीं जाना जाएगा। लखनऊ अब दुश्मन देश के विरुद्ध दहाड़ेगा भी। यहाँ पर बनने वाली मिसाइल भारत की सुरक्षा पंक्ति को सुदृढ़ करेगी। डिफेंस कॉरिडोर युवाओं के लिए रोजगार का बेहतरीन माध्यम भी बनेगा। लखनऊ में ‘ब्रह्मोस नेक्स्ट जनरेशन मिसाइल’ का प्रोडक्शन और DRDO की अत्याधुनिक लैब की स्थापना देश की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। अब यूपी रक्षा क्षेत्र के लिए बनने वाले उपकरणों के एक्सपोर्ट के एक नए हब के रूप में स्थापित हो रहा है।”

लखनऊ में रक्षा प्रौद्योगिकी एवं परीक्षण केन्द्र तथा ब्रह्मोस विनिर्माण केन्द्र का शिलान्यास करने के लिए उन्होंने राजनाथ सिंह को धन्यवाद भी दिया। सीएम योगी ने ध्यान दिलाया कि 19 नवंबर को झाँसी में डायनामिक्स यूनिट का शिलान्यास किया था। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े 4 सालों में हमने मृतप्राय MSME क्षेत्र को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का कानपुर पहले से ही रक्षा सामग्रियों के लिए जाना जाता है, अब लखनऊ भी इसके लिए ही जाना जाएगा।

इस दौरान राजनाथ सिंह ने भी कहा कि इस समय उत्तर प्रदेश में अपराधियों की नहीं, बुलडोजर की बल्ले-बल्ले है। उन्होंने कहा कि देश में इतनी ताकत होनी चाहिए कि कोई बुरी नजर न डाले। उन्होंने कहा कि कोई भारत की तरफ आँख उठा कर न देख सके, इसके लिए उस तरह की ताकत होनी ज़रूरी है। सीएम योगी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। हमने दुनिया को मैत्री, शांति व करुणा का संदेश दिया है। साथ ही कहा कि लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम 135 करोड़ देश की जनता की सुरक्षा पर किसी भी प्रकार की आँच आने दें। उन्होंने कहा, “नया भारत छेड़ता नहीं, लेकिन अगर कोई छेड़े तो उसे छोड़ता भी नहीं है।

क्रिसमस के बाद दिल्ली में प्रदूषण का स्तर ‘खतरनाक’ स्तर पर पहुँचा, पर्यावरणविद से लेकर ऐक्टिविस्ट तक सब मौन

क्रिसमस के बाद दिल्ली की एक बार फिर हवा खराब हो गई है। वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, रविवार (26 दिसंबर 2021) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर श्रेणी’ पर पहुँच गया। यह सब दिल्ली में कथित ‘मौन‘ क्रिसमस समारोह आयोजित किए जाने के एक दिन बाद हुआ है।

कई रिपोर्टों में बताया गया है कि रविवार की सुबह हवा की गुणवत्ता का स्तर 430 था। यहाँ उल्लेखनीय यह है कि 400 से 500 के बीच एयर क्वालिटी इंडेक्स को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है।

हालाँकि, अभी तक यह जानने में सफलता नहीं मिल सकी है कि अचानक से हवा की गुणवत्ता के खराब को ने के पीछे क्या कारण है। लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल दिल्ली की हवा के खराब होने पर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने अभी तक क्रिसमस के त्योहार को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

इस महीने की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार को वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर एक गंभीर योजना के साथ आने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। देश के मुख्य न्यायधीश एनवी रमना ने सॉलिसटर जनरल तुषार मेहता को कहा था, “श्री मेहता हम एक गंभीर वास्तविक कार्रवाई की उम्मीद करते हैं, यदि आप कल नहीं कर सकते तो हम करने जा रहे हैं। हम आपको 24 घंटे दे रहे हैं।”

प्रदूषण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही तल्ख अंदाज में कहा था कि केंद्र और दिल्ली सरकार अगर प्रदूषण को कंट्रोल करने में विफल रहती है तो कोर्ट आदेश जारी करेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने स्कूलों को फिर से खोलने और फिजिकल कक्षाएँ शुरू कर बच्चों की जिंदगियों को खतरे में डालने के लिए दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी।

कश्मीर में गजनी हो या गोवा में पुर्तगाली… गुलाम नबी जी, ‘तलवार की नोक’ पर ही होता है धर्मांतरण, तभी सूटकेस में मिलती हैं हिन्दू लड़कियाँ

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद को लगता है कि भारत में इस्लामी आक्रांताओं ने बड़े ही प्यार से धर्मांतरण का काम शुरू किया, जो आज तक चला आ रहा है। कम से कम उनके बयान तो इसी ओर इशारा करते हैं। कॉन्ग्रेस नेता का कहना है कि किसी व्यक्ति के अच्छे काम और चरित्र से ही प्रेरित होकर लोग स्वेच्छा से धर्मांतरण करते हैं, न कि तलवार की नोक पर। उन्होंने जम्मू कश्मीर के उधमपुर में ये बात कही। जाहिर है, वो अपने समुदाय का बचाव करने के लिए ऐसा कह रहे हैं।

गुलाम नबी आज़ाद को थोड़ा इतिहास में जाना चाहिए और देखना चाहिए कि उनके ही राज्य में अगर तलवार की नोंक पर धर्मांतरण नहीं होता तो सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर को बलिदान नहीं देना पड़ता। औरंगजेब के काल में कश्मीरी हिन्दुओं के किए जा रहे जबरन धर्मांतरण के खिलाफ आवाज़ उठाने के कारण ही वो मुग़ल शासन की आँखों में अखरने लगे। अगर तलवार की नोंक पर धर्मांतरण नहीं होता तो हिन्दू राजाओं को अपने समाज की रक्षा के लिए इस्लामी आक्रांताओं से पंगा नहीं लेना पड़ता।

आज कई राज्यों में ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध कानून बन रहे हैं। जिस तरह से भोली-भाली हिन्दू लड़कियों को छद्म हिन्दू नाम से फँसाया जाता है और शादी के बाद बेचारी को जब तक पता चलता है कि उसका पति मुस्लिम है, तब तक एक परिवार का सब कुछ उजड़ गया होता है। फिर उस महिला का जबरन धर्मांतरण करा दिया जाता है और बाद में किसी सूटकेस में उसकी लाश मिलती है। और अधिकतर मामलों में अपराधी का पूरा परिवार इस कुकृत्य में उसके साथ होता है।

क्या गुलाम नबी आज़ाद मानते हैं कि जम्मू कश्मीर बिना तलवार के बल पर इस्लामी धर्मांतरण के ही मुस्लिम बहुल हो गया? पुर्तगालियों ने गोवा की एक बड़ी जनसंख्या को बिना तलवार के बल पर ही ईसाई बना दिया? गोवा में 300 हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त करने वाले पुर्तगालियों ने क्या तलवार का प्रयोग नहीं किया होगा? 1015 ईश्वी में महमूद गजनी ने कश्मीर पर हमला करने के लिए तलवार का प्रयोग नहीं किया? 12वीं सदी में गौरी ने फिर इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

अगर किसी को लालच देकर या फिर छद्म तरीके से झाँसा देकर मुस्लिम बनाया जाता है तो इसमें तलवार का प्रयोग तो नहीं होता, लेकिन क्या इसे ‘स्वेच्छा से धर्मांतरण’ कह सकते हैं? हिन्दू महिलाएँ अक्सर इसका निशाना बनते हैं। कानपुर के कमिश्नर के पद पर रहते हुए जब कोई IAS इफ्तिखारुद्दीन लोगों को प्रशासन की धमकी देकर या फिर उनके विवाद सुलझाने के लिए उन्हें इस्लाम अपनाने का ऑफर देता है और सरकारी दफ्तर में इस्लामी मुशायरा कराता है, तो क्या ये सब ‘स्वेच्छा से धर्मांतरण’ का ही एक भाग है?

इस्लाम के अलावा भारत आज ईसाई मिशनरियों द्वारा लालच देकर कराए जा रहे धर्म-परिवर्तन से भी जूझ रहा है। छत्तीसगढ़ का जशपुर हो या फिर झारखंड का खूँटी, जिस तरह नक्सलवाद को हवा देकर आदिवासियों का धर्मांतरण कराया जाता है, वो क्या ‘स्वेच्छा से’ होता है? राज्यों को धर्मांतरण के खिलाफ कोई कानून लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती, अगर ये तलवार की नोंक पर नहीं होता। फादर स्टेन स्वामी जैसे पादरी सामाजिक कार्यकर्ता बन कर भीमा-कोरेगाँव में दंगा भड़काते हैं, तो क्या इसमें तलवार का प्रयोग नहीं होता?

किसी विधवा के पैर बाँध कर गैंगरेप करने और वीडियो बना लेने वाले इमाम अली को देखिए। किसी हिन्दू लड़की को भगा ले जाने वाले तौसीफ खान को देखिए। किसी मोहम्मद शकील को देखिए, जो लड़की का अपहरण कर ले जाता है और लड़की किसी तरह फोन कर पिता से गुहार लगाती है छुड़ाने की। किसी गरबा कार्यक्रम के बहाने धर्मांतरण कराने वालों को देखिए। 15 साल में 4 हिन्दू महिलाओं को ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाने वाले अब्दुल सलाम को देखिए, जो इस काम के लिए ‘विक्की’ या ‘अनिल’ बन जाता था। किसी हिन्दू युवती को गायब कर देने वाले समीर कुरैशी को भी देखिए

मैनपुरी में जब ग्रामीणों के धर्मांतरण की खबर आती है, तो ये गुलाम नबी आज़ाद को पता नहीं चलता? भरूच के 37 परिवार ईसाई बना दिए जाते हैं। जशपुर में आदिवासी संगठनों को धर्मांतरण के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ता है। धर्मांतरण का विरोध करने पर अभिनेत्री सेवा भास्कर उन्हें ‘गधों की बारात’ बता देती हैं। दरभंगा से दो चचेरी बहनों का अपहरण कर धर्मांतरण करा दिया जाता है। कोरोना के दौरान मुल्ला-मौलवी और मिशनरी इसी काम में लगे ही थे। तभी कर्नाटक जैसे राज्य में इसके खिलाफ कानून बनता है तो पूरा इकोसिस्टम भड़क जाता है।

ये सभी खबरें पिछले 6 महीने के भीतर की हैं, इनके लिए गुलाम नबी आज़ाद को इतिहास नहीं बल्कि समसामयिकी पढ़ने की जरूरत है। या फिर हो सकता है कि इन नेताओं को पता सब होता है, लेकिन ये लगे रहते हैं कि नैरेटिव क्या बनाना है। तलवार की नोंक पर जो मजहब दुनिया भर में फैला, उसके अनुयायी ये कहें कि तलवार की नोक पर धर्मांतरण नहीं हुआ, तो अच्छा नहीं लगता। गुलाम नबी आज़ाद वास्तविकता देखें, ख़बरें पढ़ें और उलटा नैरेटिव बनाने की जगह सच बोलें।

इस लेख में हमने पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे इस्लामी मुल्कों में हो रहे क्रूर धर्मांतरण की बात तो की ही नहीं, जहाँ हिन्दुओं के साथ सरेआम ज्यादती होती है। वहाँ की तस्वीरें और वीडियोज सामने आती रहती हैं, लेकिन दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन से लेकर कोई कुछ नहीं कर सकता। सोशल मीडिया पर भी उनकी आवाज़ दबा दी जाती है। इसीलिए, गुलाम नबी आज़ाद को न सिर्फ भारत बल्कि इस्लामी मुल्कों में चल रहे धर्मांतरण के खेल को भी देखना चाहिए।

गुलाम नबी आज़ाद कुछ ही महीनों पहले राज्यसभा सांसदी से एक तरह से ‘रिटायर’ हुए हैं, ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि कोई न कोई पार्टी उन्हें फिर से संसद भेजे। कॉन्ग्रेस में बगावत के कारण वो पार्टी तो ऐसा करने से रही, इसीलिए वो जम्मू कश्मीर में घूम-घूम कर अपना जनाधार बना रहे हैं। और कश्मीर की राजनीति में चमकने के लिए महबूबा-अब्दुल्ला किस किस्म के बयान देते हैं, ये छिपा नहीं है। हो सकता है कि गुलाम नबी आज़ाद भी उसी ढर्रे पर चलना चाहते हों।

‘मुस्लिम प्रेमी की माँ ने कहा बेटे संग भाग आओ, रानी बनाकर रखूँगी’: बजरंग दल की मदद से घर लौटी महिला ने कहा- जबरन खिलाया जाता था मांस

महाराष्ट्र के नागपुर से धर्मांतरण का मामला सामने आया है। यहाँ एक युवक नागपुर निवासी संगीता (बदला हुआ नाम) को अपने प्रेम के जाल में फँसाकर पहले मेरठ अपने घर ले गया, फिर उसका धर्मांतरण कर कैद कर लिया। धर्मांतरण के बाद महिला का नाम आफिया रख दिया गया। महिला को जब अपनी गलती का अहसास हुआ तो उसने अपने माता-पिता से संपर्क कर उसे वहाँ से निकाने की गुजारिश की।

बेटी की स्थिति का पता चलते ही परिजनों ने उसे वापस लाने के लिए बजरंग दल के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया। नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक, बजरंग दल के कार्यकर्ता मेरठ पहुँचकर संगठन के स्थानीय कार्यकर्ताओं की मदद से मुस्लिम बहुल इलाके में जाकर संगीता को वापस ले आए।

पीड़िता ने बताया कि आरोपित शख्स नागपुर में पीओपी का काम करता था। वह अपनी सहेली के ​जरिए उससे मिली थी। संगीता ने बताया कि उसकी सहेली और आरोपित ए​क ही धर्म के थे। लगातार मुलाकात के बाद आरोपित और संगीता के बीच नजदीकियाँ बढ़ गईं। डेढ़ साल बाद मुस्लिम शख्स ने निकाह का प्रस्ताव रखा और मेरठ में अपनी माँ से बात करवाई।

इस दौरान आऱोपित और उसके परिजनों ने संगीता को खूब लुभाने की कोशिश की। आरोपित की माँ ने संगीता से कहा कि वह उसे रानी की तरह रखेगी, बेटे के साथ मेरठ चली आए। उन लोगों की चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर संगीता 5 महीना पहले घर से भाग मेरठ आ गई। मेरठ में 5 दिन रहने के बाद शख्स ने संगीता के साथ निकाह कर उसका धर्म परिवर्तन करा दिया और नया नाम आफिया दे दिया।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि कुछ दिन बाद उन लोगों का असली रूप उसके सामने आने लगा। वे उसे घर में कैद करके रखने लगे और नमाज के लिए मजबूर करने लगे। यहाँ त​क कि उन्होंने उस पर मांस खाने का दबाव भी बनाया।

इन सब बातों से परेशान होकर संगीता ने अपने परिवार वालों से संपर्क साधा और अपनी गलती के लिए माफी माँगी। रिपोर्ट के मुताबिक, बजरंग दल की मदद से घर वापस आई पीड़िता ने कहा है कि वह उस शख्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराएगी।

राहुल, महुआ, केजरीवाल से लेकर ठाकरे और प्रियंका तक… कोरोना वैक्सीन बूस्टर डोज का क्रेडिट लेने सब दौड़ पड़े

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime minister Narendra Modi) ने शनिवार (25 दिसंबर 2021) को देश को संबोधित करते हुए घोषणा की कि कोरोना वायरस (Covid-19) के नए वैरिएंट के मद्देनजर स्वास्थ्य देखभाल और अग्रिम पंक्ति के योद्धा (कोरोना वॉरियर्स) को 10 जनवरी 2022 से बूस्टर डोज दिया जाएगा। हैरानी की बात यह है कि जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की, वैसे ही विपक्ष (Opposition) गिद्ध की भाँति इसका श्रेय लेने की होड़ में लग गया।

इसकी शुरुआत सबसे पहले शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray ) ने की। उन्होंने पीएम के संबोधन के कुछ ही मिनटों के भीतर पीएम की इस घोषणा का श्रेय ले लिया। आदित्य ने 7 दिसंबर 2021 के अपने ट्वीट का हवाला देते हुए लिखा, “मुझे खुशी है कि 7/12 को किए गए इन सबसे महत्वपूर्ण अनुरोधों में से दो को स्वीकार कर लिया गया है।” बता दें कि आदित्य ठाकरे ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया को लिखे पत्र का जिक्र किया।

श्रेय लेने वालों में ही अगला नंबर भी शिवनेता नेता का ही आया। शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka chaturvedi) ने अपने ट्वीट में कुछ पोस्ट तो नहीं किया, लेकिन उनके ऑफिस के आधिकारिक हैंडल ने उन्हें इसका श्रेय दिया। प्रियंका के ऑफिस ने लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा का स्वागत है। यह उन मुद्दों में से एक है, जिसे प्रियंका चतुर्वेदी उठा रही थीं। खुशी की बात है कि अब इसे श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनुमोदित और घोषित किया गया है।”

वहीं इस मामले में तीसरे स्थान पर तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) भी पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए अनाउंसमेंट का श्रेय लेने के लिए आगे आ गईं। उन्होंने ने भी ट्वीट किया, “हालेलुआ! आदरणीय मोदी जी ने सुन लिया! 60 साल से अधिक उम्र वालों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए आखिरकार बूस्टर डोज की घोषणा हुई। खुशी हुई।”

जब इतने लोग घोषणा का श्रेय ले रहे थे तो इसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) कैसे पीछे रहने वाले थे। उन्होंने भी 20 दिसंबर के अपने ट्वीट का बूस्टर डोज के लिए अपनी माँग की पुष्टि की। उन्होंने ट्वीट किया, “मुझे खुशी है कि आज प्रधानमंत्री ने फ्रंट लाइनवर्कर्स के लिए बूस्टर डोज का ऐलान किया। बूस्टर डोज सभी को मिलनी चाहिए। यह सुखद है कि अब से अब 15 से 18 साल के बच्चों को भी वैक्सीन लग सकेगी।”

2014 के बाद से भारत सरकार जो भी घोषणाएँ कर रही हैं, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) ने हमेशा से उसका श्रेय लेने की कोशिश की है। उसी परंपरा को बरकरार रखते हुए उन्होंने फिर से अपने पुराने ट्वीट का हवाला देते हुए इसका भी श्रेय लेना चाहा।

उन्होंने कोरोना वायरस वैक्सीन के डोज को लेकर अपने तथ्यात्मक रूप से गलत ट्वीट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आखिरकार पीएम मोदी ने उनके सुझाव को मान लिया है। केरल कॉन्ग्रेस, इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस और पश्चिम बंगाल यूथ कॉन्ग्रेस ने उन्हें इसका श्रेय दिया। तीनों ने ही देश को दिशा देने के लिए राहुल गाँधी की तारीफ में कसीदे पढ़े।

गौरतलब है कि जब लोगों में वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट थी तो उस दौरान न तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और न ही उनके बच्चे राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी किसी ने भी आगे बढ़कर लोगों में इसको लेकर जागरुकता फैलाने की कोशिश तक नहीं की। लोगों की वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट को खत्म करने के लिए आगे बढ़कर पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम मंत्रियों ने लोगों में जागरुकता फैलाने का काम किया।

‘जिंस पहनने वाली लड़कियों को मोदी पसंद नहीं, 40-50 साल की महिलाएँ ही उनसे प्रभावित’: ‘टंच माल’ वाले दिग्विजय सिंह का बेतुका बयान

अपने विवादास्पद बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने एक बार फिर महिलाओं को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से 40 साल से अधिक उम्र वाली महिलाएँ प्रभावित हैं, जिंस पहनने वाली लड़कियाँ उनसे प्रभावित नहीं होती हैं।

दरअसल, दिग्विजय सिंह शनिवार (25 दिसंबर) को कॉन्ग्रेस के जनजागरण अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिंस पहने वाली और मोबाइल रखने वाली लड़कियाँ पीएम मोदी को पसंद नहीं करती हैं। 40-50 साल वाली महिलाएँ ही उनसे प्रभावित होती हैं। दरअसल, दिग्विजय सिंह कॉनग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) के ‘मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ के थीम सॉन्ग लेकर अपनी बात कह रहे थे।

इसी दौरान उन्होंने बजरंग दल को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को गुंडा बताते हुए उन्होंने कहा- “मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा गुंडे बजरंग दल के हैं।” उन्होंने पुलिस पर भी इनका साथ देने का आरोप लगाया।

दिग्विजय सिंह ने ये भी दावा किया था कि स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर ने हिन्दू धर्म और हिंदुत्व को अलग-अलग बताया है। उन्होंने कहा था कि सावरकर ने कहा था कि गोमांस खाने में कोई खराबी नहीं है। भारत को विविधताओं का देश बताते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि देश में कई ऐसे हिन्दू हैं जो गोमांस खाते हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि ऐसा कहाँ लिखा है कि गोमांस न खाया जाए?

ये पहली बार नहीं है, जब दिग्विजय सिंह ने महिलाओं से संबंधित इस तरह के आपत्तिजनक बयान दिए हैं। इसके पहले भी वह ऐसा कर चुके हैं, जिसको लेकर भारी विवाद हुआ था। साल 2013 में मंदसौर की रैली में उन्होंने तत्कालीन सांसद मीनाक्षी नटराजन को लेकर कहा था, “मैं राजनीति का पुराना जौहरी हूँ। मीनाक्षी जी का काम देखकर मैं कह सकता हूँ कि वह 100 टका टंच माल हैं।”

दिग्विजय सिंह के इस बयान पर राजनीतिक गलियारे से लेकर हर जगह भारी बवाल हुआ था। तब उन्होंने सफाई देते हुए कहा था, “मैंने कुछ गलत नहीं कहा। मैंने उन्हें 100 टका सोने का माल कहा था। मैंने तो उनकी तारीफ में ये बात कही थी।”

इसी तरह मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ ने भी विवादित बयान दिया था। कमलनाथ ने डबरा इलाके में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री इमरती देवी को लेकर कहा था कि वो आइटम हैं। तब भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कमलनाथ को खूब लताड़ लगाई थी। विवाद बढ़ने के बाद कमलनाथ ने खेद प्रकट किया था।

CM जगन की ‘मुंडी घुमाने’ की धमकी देने वाला हीरो बन गया ‘अखंडा’ और फिल्म ने कमा लिए ₹125 Cr: त्रिशूल से ‘अपराधियों का सर्वनाश’

तेलुगु सिनेमा इंडस्ट्री के वरिष्ठ अभिनेता नंदामुरी बालकृष्ण (Nandamuri Balakrishna) की ‘अखंडा’ (Akhanda) ने 3 हफ्ते में दुनिया भर में 125 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन (Box Office Collections) कर लिया है। ये फिल्म 2 दिसंबर, 2021 को रिलीज हुई थी। इसके बाद एक अन्य तेलुगु फिल्म अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) की ‘पुष्पा’ (Pushpa) भी आई, लेकिन ‘अखंडा’ का दमदार कलेक्शन जारी रहा। नंदामुरी बालकृष्ण ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी का ‘मुंडी घुमा देने’ की चेतावनी दी थी। फिल्म की सफलता के बाद उनके फैंस ने भी राहत की साँस ली है।

एक्शन-ड्रामा जॉनर की फिल्म ‘अखंडा’ को बोयापति श्रीनू ने लिखा और निर्देशित किया है, जो नंदामुरी बालकृष्ण के साथ पहले भी ‘सिम्हा (2010)’ और लीजेंड (2014)’ जैसी सफल फ़िल्में बना चुके हैं। अल्लू अर्जुन के साथ उनकी फिल्म ‘सराइनोडु (2016)’ काफी हिट हुई थी और इसका हिंदी डब यूट्यूब पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्मों में से एक है। ‘अखंडा’ में प्रज्ञा जायसवाल और जगपति बाबू सहायक किरदारों में हैं। ‘अखंडा रूद्र सिकंदर अघोड़ा’ के रूप में नंदामुरी बालकृष्ण के किरदार को समीक्षकों और लोगों ने काफी पसंद किया।

ये किरदार बचपन से अघोड़ियों के बीच पला-बढ़ा होता है और साधु की वेशभूषा में त्रिशूल लेकर रहता है। साथ ही ये अपराधियों का सर्वनाश कर के ‘पाप’ को मिटाता है। साथ ही उस पर भगवान शिव का भी आशीर्वाद होता है, जिससे उसकी शक्तियाँ असीमित हो जाती हैं। एक बच्चे की जान बचाने के लिए ‘अखंडा’ को काशी जाकर महामृत्युंजय पूजा करनी होती है, लेकिन गुंडे उसे मारना चाहते हैं। फिल्म में नंदामुरी बालकृष्ण का एक और किरदार है।

नंदामुरी बालकृष्ण के बारे में बता दें कि वो आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एनटीआर के बेटे हैं। उन्हें उनके फैंस प्यार से ‘बलैया’ भी कहते हैं। हिंदूपुर विधानसभा क्षेत्र से वो लगातार दूसरी बार विधायक भी हैं। उन्होंने 1974 में ही अपने पिता की फिल्म से बतौर बाल कलाकार मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा था। 100 से भी अधिक फिल्मों में काम कर चुके नंदामुरी बालकृष्ण ने अपने सौवें फिल्म में भारत के पराक्रमी राजा ‘गौतमीपुत्र शतकर्णी’ का किरदार निभाया था। इस फिल्म की हिंदी डबिंग राइट्स 20 करोड़ रुपए में बिके हैं

नवंबर 2021 में नंदामुरी बालाकृष्ण ने सीएम जगन को चेताते हुए कहा था, “हम यहाँ चुप नहीं बैठे। अगर तुम नहीं बदले। हम तुम्हारी मुंडी घुमाकर तुम्हें सुधारेंगे। सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारे पास बहुमत है। हम तुम्हारी कही कोई भी भी बर्दाश्त नहीं कर लेंगे।” बता दें कि साउथ के एक्टर बालाकृष्णा रिश्ते में चंद्रबाबू नायडू के बहनोई लगते हैं। विधानसभा में पत्नी का अपमान होने के बाद पूर्व सीएम और टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रो दिया था, जिसके बाद उनका परिवार खासा आक्रोशित था।