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सलमान खान को साँप ने काटा, 1 दिन बाद ही है बर्थडे… गए थे क्रिसमस की पार्टी मनाने

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) को शनिवार (25 दिसंबर 2021) रात को साँप ने काट लिया। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। सलमान खान की हालत अब ठीक है। सांप के काटने और उसके इलाज के बाद अब वो अस्पताल से फार्म हाउस वापस लौट आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान खान क्रिसमस की पार्टी मनाने के लिए परिवार और अपने दोस्तों के साथ पनवेल स्थित अपने फार्म हाउस पहुँचे थे। इस दौरान उन्हें फार्म हाउस पर साँप ने काट लिया है। इसके बाद उन्हें कामोथे अस्पताल में रात 3 बजे भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। सलमान रविवार (26 दिसंबर 2021) सुबह 9 बजे अपने फार्म हाउस लौटे।

27 दिसंबर को सलमान खान (Salman Khan Birthday) का 56वाँ जन्मदिन भी है। फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर है। वह तेजी से रीकवर कर रहे हैं और अपने फार्म हाउस पर ही हैं। जानकारी के मुताबिक, जहाँ पर अभिनेता का फॉर्म हाउस है, वह इलाका पहाड़ियों और वन क्षेत्र से घिरा हुआ है। यहाँ अक्सर साँप और अजगर दिखाई देते हैं।

बता दें कि बीते दिनों सलमान खान NCP नेता प्रफुल्ल पटेल के बेटे की शादी में ‘जुम्मे की रात’ गाने पर जम कर नाचते हुए नजर आए थे। इस मौके पर उनके साथ अनिल कपूर और शिल्पा शेट्टी भी थे। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें सलमान खान नाले रंग का सूट पहने हुए दिखाई दे रहे थे।

यूपी के मैनपुरी में लालच देकर चल रहा था धर्मांतरण का खेल, मौके पर पहुँचे हिंदू संगठन के लोगों और पुलिस पर ग्रामीणों ने की पत्थरबाजी

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मैनपुरी (Mainpuri) जिले में धर्मांतरण (Conversion) की सूचना के बाद मौके पर पहुँचे हिंदूवादी संगठनों के साथ ग्रामीणों ने मारपीट की। हालात को देखते हुए कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँचकर हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। वहीं, हिंसा को लेकर हिंदू संगठन के लोगों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। हालाँकि, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

मामला मैनपुरी जिले में किशनी थाना क्षेत्र के नगला बख्ती गाँव का है। आरोप है कि यहाँ धर्म परिवर्तन को लेकर एक सभा का आयोजन किया गया और साथ ही दावत का इंतजाम किया गया था। इस बात की सूचना जब हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारियों को पता चली तो वे मौके पर पहुँच गए। इसके साथ ही इन लोगों को पुलिस को इस बात की सूचना दी।

आरोप है कि गाँव के 71 साल के नेत्रहीन बुजुर्ग मेवालाल ने दावत का इंतजाम किया है। इस दावत में लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का काम किया जा रहा है। सूचना पर पहुँची पुलिस ग्रामीणों से जानकारी जुटाने लगी। पुलिस ने मेवाराम का आधार कार्ड चेक किया गया तो बताया गया कि मेवाराम गाँव की पूर्व प्रधान प्रेमा देवी पत्नी राम प्रसाद जाटव का मामा है।

इसी दौरान ग्रामीणों ने जागरण मंच के लोगों और पुलिस से अभद्रता शुरू कर दी और गाली-गलौच करने लगे। बात आगे बढ़ गई और ग्रामीणों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी और जागरण मंच और पुलिसकर्मियों को दौड़ा लिया। लोग किसी तरह से भागकर अपनी जान बचाई। उधर, मेवाराम का कहना था कि धर्म परिवर्तन जैसी कोई बात नहीं है, बल्कि उसने अपने जन्मदिन पर दावत का इंतजाम कराया था.

ऑपइंडिया से बातचीत में किशनी थाना के अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया, “नागला बख्ती गाँव में लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने की सूचना पुलिस को मिली तो हमलोग मौके पर पहुँचे। इस दौरान ग्रामीण भड़क गए और पत्थरबाजी करने लगे। अफतरा-तफरी में लोगों ने भागकर किसी तरह भागकर जान बचाई।”

हालाँकि, धर्मेंद्र कुमार ने पुलिस पर हमले की बात को नकार दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस पर हमला नहीं किया गया था। ग्रामीणों ने जागरण मंच के लोगों पर पत्थरबाजी की थी। धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि मंच के लोगों ने शिकायत दी है। इस मामले में किसी की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है और मामले की जाँच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘ओमिक्रोन से बचाव, कोरोना पर सतर्कता’: Mann Ki Baat में भावुक हो पीएम मोदी ने किया बिपिन रावत, वरुण सिंह को याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 दिसंबर 2021) को 84वें और इस वर्ष के आखिरी ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन से बचाव और नए साल पर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा।

पीएम मोदी ने कहा कि ये जो नया Omicron variant आया है, उसका अध्ययन हमारे वैज्ञानिक लगातार कर रहे हैं। हर रोज नया data उन्हें मिल रहा है, उनके सुझावों पर काम हो रहा है। ऐसे में स्वयं की सजगता, स्वयं का अनुशासन कोरोना के इस variant के खिलाफ देश की बहुत बड़ी शक्ति है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आजादी का अमृत महोत्सव, हमें आजादी की जंग की स्मृतियों को जीने का अवसर देता है, उसको अनुभव करने का अवसर देता है। ये देश के लिए नए संकल्प लेने का, कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति दिखाने का प्रेरक उत्सव है, प्रेरक अवसर है।”

मन की बात कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “इस समय आप 2021 की विदाई और 2022 के स्वागत की तैयारी में जुटे ही होंगे। नए साल पर हर व्यक्ति, हर संस्था आने वाले साल में कुछ और बेहतर करने, बेहतर बनने के संकल्प लेते हैं।”

उन्होंने Vaccine की 140 करोड़ dose के पड़ाव को पार करने को प्रत्येक भारतवासी की उपलब्धि बताते हुए कहा, “ये जनशक्ति की ही ताकत है, सबका प्रयास है कि भारत 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी से लड़ सका। हम हर मुश्किल समय में एक दूसरे के साथ, एक परिवार की तरह खड़े रहे। अपने मोहल्ले या शहर में किसी की मदद करना हो, जिससे जो बना, उससे ज्यादा करने की कोशिश की।”

सीडीएस बिपिन रावत और ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को याद करते हुए प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “वरुण सिंह, उस हेलीकॉप्टर को उड़ा रहे थे, जो इस महीने तमिलनाडु में हादसे का शिकार हो गया। उस हादसे में हमने देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत कई वीरों को खो दिया। वरुण सिंह भी मौत से कई दिन तक जांबाजी से लड़े, लेकिन फिर वो भी हमें छोड़कर चले गए।”

इसके बाद उन्होंने कहा कि हर साल मैं ऐसे ही विषयों पर विद्यार्थियों के साथ परीक्षा पर चर्चा करता हूँ। इस साल भी exams से पहले मैं students के साथ चर्चा करने की planning कर रहा हूँ। इस कार्यक्रम के लिए दो दिन बाद 28 दिसंबर से http://MyGov.in पर registration भी शुरू होने जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज दुनियाभर में भारतीय संस्कृति के बारे में जानने के लिए लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। अलग-अलग देशों के लोग ना सिर्फ हमारी संस्कृति के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं, बल्कि उसे बढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ के लोगों ने एक अनूठा अभियान चला रखा है। इस अभियान के तहत लोग स्वेच्छा से अपनी एयरगन सरेंडर कर रहे हैं। ताकि पक्षियों का अधाधुंध शिकार रुक सके। पिछले कुछ महीनों में पहाड़ से मैदानी इलाकों तक लोगों ने इसे खुले दिल से अपनाया है।

इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले सरकारी दफ्तरों में पुरानी फाइलों का कितना ढेर रहता था। आज से सरकार ने पुराने तौर-तरीकों को बदलना शुरू किया है। हमारे सरकारी विभाग भी स्वच्छता जैसे विषय पर इतने इनोवेटिव हो सकते हैं। कुछ साल पहले तक किसी को इसका भरोसा भी नहीं होता था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर की रात राष्ट्र के नाम अपने खास संबोधन में तीन बड़े ऐलान किए हैं। इसमें उन्होंने बताया कि अब 15 साल से 18 साल के बच्चों को कोरोना की वैक्सीन मिलने जा रही है। इसी के साथ प्रधानमंत्री ने फ्रंटलाइन वर्कर्स, हेल्थ वर्कर्स और 60 साल से ज्यादा के गंभीर बीमारी वालों को बूस्टर डोज देने का भी ऐलान किया है।

‘लोग स्वेच्छा से धर्मांतरण कर रहे, ना कि तलवार की नोक पर’: कॉन्ग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने धर्म परिवर्तन पर ​बड़ा बयान दिया है। जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के उधमपुर जिले में शनिवार (25 दिसंबर 2021) को क्रिसमस समारोह में शामिल हुए आजाद ने कहा:

”लोग स्वेच्छा से धर्मांतरण कर रहे हैं, ना कि तलवार की नोक पर। किसी व्यक्ति का अच्छा चरित्र, उसके अच्छे काम से ही लोग प्रेरित होकर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। लोग किसी से प्रभावित होकर या प्रेरित होकर ही धर्म परिवर्तन कराते हैं। लोगों को लगता है कि कोई विशेष धर्म मानवता की सेवा कर रहा है, हर किसी को साथ लेकर चल रहा है, लोगों के बीच भेदभाव नहीं कर रहा है तो वह धर्म परिवर्तन कराते हैं।”

कॉन्ग्रेस नेता ने यह बयान क्रिसमस पर कुछ लोगों द्वारा धर्म परिवर्तन कराने और ईसाई धर्म अपनाने की बात पर बोलते हुए दिया है। इस दौरान गुलाम नबी आजाद ने यह भी कहा, “जम्मू-कश्मीर तत्कालीन महाराजा (पूर्व डोगरा शासकों) के दौर में आज की तुलना में कहीं बेहतर था। एक महाराज जिसको हम तानाशाह कहते थे, वंशवादी या निरंकुश शासक कहते थे, वो आज के वक्त के हिसाब से लोगों की भलाई के लिए ज्यादा अच्छा सोचते थे। लेकिन वर्तमान सरकार ने तो तीनों चीजें ले लीं।”

कॉन्ग्रेसी गुलाम नबी आजाद ने धर्मांतरण की बात के बाद महाराजा और उसके बाद राजनीति पर आते देर नहीं की। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई साल में जम्मू-कश्मीर में व्यापार और विकास में गिरावट आई है। गरीबी बढ़ रही है। दरबार मूव प्रथा के खत्म होने का विरोध करते हुए भाजपा पर हमला भी बोला।

गुलाम नबी आजाद के अनुसार महाराजाओं का निरंकुश शासन वर्तमान सरकार की तुलना में कहीं बेहतर था, उस वक्त सरकारी कार्य दरबार मूव के तहत किए जाते थे। लेकिन इस साल जून में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया। आजाद ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मैं हमेशा दरबार मूव का समर्थन करता था। महाराजाओं ने हमें तीन चीजें दी थीं, जो कश्मीर और जम्मू दोनों क्षेत्रों की जनता के हित में थीं और उनमें से एक दरबार मूव भी था।”

क्या है दरबार मूव प्रथा?

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस साल जून में राज्य में 149 साल पुरानी दरबार मूव प्रथा (Darbar Move) को खत्म कर दिया था। हर 6 महीने में राज्य की दोनों राजधानियों जम्मू और श्रीनगर के बीच होने वाले ‘दरबार मूव’ से हर साल 200 करोड़ रुपए खर्च होते थे।

दरबार मूव मतलब मौसम बदलने के साथ हर 6 महीने में जम्मू-कश्मीर की राजधानी भी बदल जाती थी। 6 महीने राजधानी श्रीनगर में रहती थी और 6 महीने जम्मू में। राजधानी बदलने पर जरूरी कार्यालय, सिविल सचिवालय वगैरह का पूरा इंतजाम जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू ले जाया जाता था। इस प्रक्रिया को ‘दरबार मूव’ के नाम से जाना जाता है।

जम्मू-कश्मीर में राजधानी बदलने की यह परंपरा 1862 में डोगरा शासक गुलाब सिंह ने शुरू की थी। गुलाब सिंह महाराजा हरि सिंह के पूर्वज थे। हरि सिंह के समय ही जम्मू-कश्मीर भारत का अंग बना था।

भरूच के 37 परिवारों का इस्लाम में धर्मांतरण: लालच देने वाले 4 फरार आरोपित पहुँचे हाईकोर्ट, FIR खारिज करने की माँग

गुजरात के भरूच में बहुचर्चित सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 6 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। वहीं, मामले के फरार चार आरोपियों ने प्राथमिकी रद्द कराने के लिए गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया है। इन आरोपियों पर विदेशों से धन लेकर इस्लाम में धर्मांतरण करने के आरोप हैं।

गुजराती दैनिक ‘गुजरात समाचार’ के अनुसार, शब्बीर बेकरीवाला, समज बेकरीवाला, हसन टिस्ली और इस्माइल अछोडवाला ने उच्च न्यायालय में दिए याचिका में कहा है कि उनमें से चार सहित नौ लोगों के खिलाफ पुलिस ने शिकायत दर्ज की है। उन पर विदेशी धन प्राप्त करने और क्षेत्र में आदिवासियों को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए इसका उपयोग करने का आरोप लगाए गए हैं।

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि धर्म परिवर्तन हुआ है, लेकिन ऐसा करने के लिए किसी को बहलाया-फुसलाया नहीं गया। शिकायत में विसंगतियों का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने 2018 में इस्लाम धर्म अपना लिया था।

इस मामले में ऑपइंडिया ने बताया था कि साल 2018 में 37 आदिवासी परिवारों को बेहतर नौकरी, पैसा, शादी का लालच आदि देकर इस्लाम में धर्मांतरित कर दिया गया था। ऑपइंडिया से बात करते हुए इस्लाम में धर्मांतरित होने के बाद सलमान पटेल नाम रखने वाले प्रवीण वसावा था, “हमें सिखाया गया था कि हिंदू धर्म जैसा कोई धर्म नहीं है और इस्लाम ही सच्चा धर्म है।” उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को 2018 में वापस इस्लाम में धर्मांतरित किया गया था, उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई थी कि उनके पहचान पत्र भी बदल दिए जाएँगे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए वसावा ने कहा था, “आदिवासी गरीब लोग हैं। अगर कोई कुछ अनाज देता है तो हम मानते हैं कि वे अच्छे लोग हैं। यही कारण है कि लोग धर्म परिवर्तन का लालच देते हैं।”

इस मामले में आमोद पुलिस ने 15 नवंबर 2021 को ‘गुजरात फ्रीडम फॉर रीलिजन बिल’ के तहत मामला दर्ज किया था। 16 दिसंबर को भरूच पुलिस ने मामले में छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पाटन से याकूब इब्राहिम शंकर, पालेज से रिजवान महबूब पटेल, ठाकोरभाई गिरधरभाई वसावा और आमोद से साजिद मोहम्मद पटेल एवं यूसुफ पटेल और जंबूसर से अयूब बशीर पटेल को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने विदेशों से चंदा लेकर 14 लाख रुपए जुटाए थे। इसमें से 7 लाख रुपए रिजवान पटेल ने बहरीन के इस्माइल से जमा किए थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भरूच के पुलिस उपाधीक्षक एमपी भोजानी ने कहा कि जाँच के दौरान यह पता चला है कि याकूब शंकर और रिजवान पटेल ने 14 लाख रुपए एकत्र किए थे, जिसका उपयोग एक इबादतगाह (मस्जिद) बनाने और इस्लाम धर्मांतरित करने वाले लोगों में बाँटने के लिए किया गया था। इस तरह की धर्मांतरण गतिविधियों के लिए भरूच जिला कलेक्टर से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।

भोजानी ने आगे कहा कि ठाकोरभाई गिरधरभाई वसावा ने आदिवासी परिवारों को इस्लाम में धर्मांतरित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जंबूसर के अयूब बशीर पटेल गाँव में मोहम्मदी मस्जिद का सदस्य है और नए धर्मांतरित आदिवासियों को इस्लाम के बारे में सिखाने के लिए वहाँ ले जाता है।

वहीं, साजिद और युसूफ अछोडवाला गाँव के बैतुलमाल ट्रस्ट के सदस्य हैं और सलाउद्दीन शेख ने उन्हें 3.71 लाख रुपए का चंदा दिया था। इस साल अक्टूबर में वडोदरा शहर पुलिस के विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने पाया कि शहर स्थित अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इंडियन ओरिजिन (एएफएमआई) ने ‘विस्थापित’ बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के लिए गाजियाबाद के नजदीक 400 फ्लैटों के निर्माण सहित अन्य गतिविधियों के लिए हवाला के जरिए फंड भेजा था।

उस पर भारत-नेपाल सीमा के पास मौलवियों को फंडिंग करने का भी आरोप है। शेख AFMI के ट्रस्टियों में से एक हैं। कुछ साल पहले मुंबई में इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक से प्रभावित होकर शेख ने ट्रस्ट की शुरुआत की थी। उसका नाम उत्तर प्रदेश के सामूहिक धर्म परिवर्तन रैकेट में भी सामने आया था। इस रैकेट के प्रमुख संदिग्धों में उमर गौतम है।

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने भरूच पुलिस प्रशासन पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। सूत्र का कहना है, “उन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो मूल रूप से हिंदू थे और उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित कर दिया गया था। मुख्य आरोपी अभी फरार हैं। मामले के आरोपित मौलवियों में से एक ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी दिया है।”

नेपाल ने कर्ज लेकर चीन से खरीदा 6 हवाई जहाज… सब इतने ‘कबाड़ी’ कि कमाई से अधिक रखरखाव में खर्च

चीन से खरीदे गए विमान अब खराब कार्यक्षमता और प्रदर्शन के कारण नेपाल के लिए बोझ बन गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई ने द एचके पोस्ट की एक रिपोर्ट का हवाले से कहा, “नेपाल एयरलाइंस ने वर्ष 2014 में चीन से खरीदे गए विमानों का जुलाई 2020 में परिचालन बंद कर दिया था। इनमें दो जियान एमए60एस (Xian MA60s) और चार हर्बिन वाई12एस (Harbin Y-12s) विमान शामिल हैं। नेपाली एयरलाइंस का कहना है कि वह अपने छह ग्राउंडेड बीजिंग-निर्मित विमानों के परिचालन का खर्च नहीं उठा सकती है। इसलिए वह इसे लीज पर देने या बेचने पर विचार कर रही है।”

रिपोर्ट बताती है कि इन विमानों की बिक्री से केवल चीन को ही फायदा हुआ है, इसने नेपाल को कर्ज के दुष्चक्र में फँसा दिया है। नेपाल चीन निर्मित विमानों को भारी कर्ज पर लाया था, लेकिन इसके रखरखाव में होने वाले अत्यधिक खर्च के कारण इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सका। इस प्रकार चीन ने नेपाल के लिए वित्तीय संकट खड़ा कर दिया है।

नेपाल छह चीनी विमानों (दो जियान MA60S और चार हार्बिन Y12S विमानों) से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल एयरलाइंस ने जुलाई 2020 में उन्हें उड़ान भरने से रोकने का फैसला किया था, क्योंकि वे जितना पैसा कमा रहे थे, उससे कहीं अधिक खर्च उसके रखरखाव में करना पड़ रहा था।

नेपाल एयरलाइंस के प्रबंध निदेशक डिम प्रसाद पौडेल के अनुसार, लीज का रेट निर्धारित करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। वे एक हफ्ते के भीतर इस पर अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके बाद बोर्ड की स्वीकृति के लिए उनके पास रिपोर्ट भेजी जाएगी। संभावित बोली लगाने वाले (राष्ट्रीय और विदेशी) बोर्ड की मंजूरी के बाद वे अपनी डील की पेशकश करेंगे।

पौडेल ने कहा, “वित्त मंत्रालय द्वारा सुझाए गए दो विकल्पों में ड्राई लीज और एकमुश्त बिक्री में से नेपाल एयरलाइंस पहले वाले विकल्प को आजमाएगी। अगर इसे लीज पर लेने वाला कोई नहीं मिला है, तो इसके बाद इनकी बिक्री करेंगे। हालाँकि, दोनों ही विकल्प मुश्किल लगते हैं, लेकिन हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नेपाली एयरलाइंस ने इन विमानों को लोन पर खरीदा था। इसके बाद से ही विमानन कंपनी भुगतान संबंधी कठिनाइयों का सामना कर रही है। समझौते के मुताबिक, नेपाल के वित्त विभाग को कर्ज के बदले चीन को 1.5 फीसद की दर से ब्याज और सेवा शुल्क व प्रबंधन व्यय के रूप में अतिरिक्त 0.4 फीसद का भुगतान करना है।

वित्त मंत्रालय ने नेपाली विमानन कंपनी को आठ फीसद वार्षिक ब्याज दर से कर्ज दिया है। नेपाली एयरलाइंस बोर्ड के एक सदस्य का कहना है कि यह विमानन कंपनी का सबसे खराब फैसला था।

’15 साल की मुस्लिम लड़की अपनी मर्जी से शादी करने के लिए स्वतंत्र’: हाईकोर्ट ने हिंदू लड़के से विवाह को सही ठहराया, सुरक्षा का दिया निर्देश

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किशोरवय मुस्लिम युवती अपनी मर्जी से शादी करने के लिए स्वतंत्र है और अगर उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो तो उसे सुरक्षा दी जानी चाहिए। उच्च न्यायालय ने यह फैसला एक वर्षीय मुस्लिम लड़की की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी।

एक हिंदू लड़के से अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाली 17 साल की एक मुस्लिम लड़की ने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट में याचिका दी थी। कोर्ट ने सुनवाई के लिए याचिका को स्वीकार करते हुए उक्त आदेश दिया।

लड़की के नाबालिग होने की दलील को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम लड़की के यौवन आरंभ होते ही वह स्वेच्छा से अपनी शादी कर सकती है और उसके अभिभावक को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता लड़की की उम्र 17 वर्ष है और वह अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ विवाह करने के योग्य है। जिस लड़के से वह विवाह कर रही है, उसकी उम्र करीब 33 साल है।

कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम लड़की की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ द्वारा संचालित होती है। सर दिनशाह फरदुनजी मुल्ला की किताब ‘प्रिंसिपल्स ऑफ मोहम्मडन लॉ’ के अनुच्छेद 195 में कहा गया है कि एक लड़का और लड़की 15 साल की आयु में यौवन हासिल कर लेता है, जो शादी के लिए योग्य मानी जाती है।

मलेरकोटला के एसएसपी को कपल की सुरक्षा का सुरक्षा का निर्देश देते हुए जस्टिस हरनरेश सिंह गिल ने कहा कि कोर्ट इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकता है कि याचिकाकर्ता की आशंका को दूर करने की जरूरत है। जस्टिस गिल ने कहा कि याचिकाकर्ता को संविधान में दिए उसके अधिकारों से इसलिए दूर नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की है।

‘मारने की बात रेपिस्टों के लिए थी, आम मुस्लिमों के लिए नहीं’: धर्मसंसद में बयान को लेकर धर्मदास व साध्वी अन्नपूर्णा पर भी मामला दर्ज

उत्तराखंड के हरिद्वार में हाल ही में आयोजित हुए धर्म संसद में एक समुदाय विशेष को लेकर दिए गए भाषण को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में वसीम रिजवी से जितेंद्र नारायण त्यागी बने उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व प्रमुख के बाद अब साध्वी अन्नपूर्णा और संत धर्मदास के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, संतों के बयानों को लेकर अखाड़ा परिषद के प्रमुख रवीन्द्र पुरी ने माफी माँगी है।

वही, शिकायतकर्ता द्वारा रिजवी के खिलाफ UAPA (Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967) लगाने के आग्रह पर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा था कि यह मामला UAPA लगाने लायक नहीं है।

DGP अशोक कुमार ने कहा था, “जितेंद्र नारायण के बयान से किसी की हत्या या हिंसा नहीं हुई। इसलिए इस मामले में UAPA एक्ट नहीं लागू होता है। इसी के साथ विवादित वीडियो फेसबुक से हटा दिया गया है। हम नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं। हमने 153A के 1 और 2 दोनों सेक्शन लगाए हैं। इसी के साथ इस मामले में पुलिस की जाँच भी जारी है।”

बता दें कि उत्तरी हरिद्वार खड़खड़ी स्थित वेद निकेतन में 17 से 19 दिसंबर तक धर्म संसद का आयोजन किया गया था।, जिसमें यति नरसिंहानंद, जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी, संत धर्मदास, साध्वी अन्नपूर्णा समेत कई संत शामिल हुए थे। इस आयोजन का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना की गई थी।

हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी गुलबहार खाँ ने जितेंद्र नारायण त्यागी और अज्ञात के खिलाफ कोतवाली थाने में धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। इस मामले में रिजवी के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। 

शहर कोतवाली प्रभारी राकेंद्र सिंह कठैत ने बताया कि वायरल वीडियो में संत धर्मदास और साध्वी अन्नपूर्णा की भी भूमिका सामने आई है और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब तीन आरोपी नामजद हो गए है, अन्य लोगों के संबंध में जाँच जारी है।  

उधर धर्म संसद में शामिल आनंद स्वरूप ने कहा कि वे अपने बयानों पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि उनके बयान सुविचारित हैं। अगर कोई बहन-बेटियों से दुष्कर्म करे तो क्या उसे नहीं मार डालेंगे? वक्ताओं ने ऐसे व्यक्तियों को मारने की बात की थी, न कि आम मुसलमान की।

इस पूरे प्रकरण पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवीन्द्र पुरी ने नाराजगी जाहिर करते हुए माफी माँगी है। न्यूज 18 से बातचीत में उन्होंने कहा, “संत महात्माओं ने उत्तेजना में इस तरह की बातें की हैं। ऐसी भाषा का प्रयोग किया जाना उचित नहीं था। संतों की ओर से मैं माफी माँगता हूँ।”

‘एक कदम पीछे हटे हैं, फिर आगे बढ़ेंगे’: जानिए कृषि सुधार को लेकर क्या बोले केंद्रीय मंत्री, टिकैत ने फिर दी आंदोलन की धमकी

मोदी सरकार ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के एक बयान ने इस बात को लेकर चर्चा को फिर से छेड़ दिया है कि क्या केंद्र सरकार फिर से कृषि सुधार पर नए कानून ला सकती है? उन्होंने कहा है कि कृषि कानूनों को वापस लेकर हम एक कदम पीछे हटे हैं, लेकिन हम फिर से आगे बढ़ेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय कृषि मंत्री नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उसी दौरान उन्होंने ये बयान दिया। उन्होंने कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के मुद्दे पर बात करते हुए इसे 70 साल में लाया गया सबसे बड़ा कृषि रिफॉर्म करार दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसे कुछ लोगों के दबाव के कारण वापस लेना पड़ा। हम एक कदम पीछे जरूर हटे हैं, लेकिन हम निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम आगे बढ़ेंगे, किसान भारत की रीढ़ की हड्डी हैं।

हालाँकि, केंद्रीय कृषि मंत्री के बयान के बाद अब भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी सरकार को फिर से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दे डाली है। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल तीन कृषि कानून ही रद्द किए हैं, बाकी कि माँगे अभी भी नहीं मानी। टिकैत ने कहा कि एमएसपी पर कानून नहीं बना है। इसके लिए कमेटी बनाने की जो कवायद चल रही है, उसके मामले में सरकार की स्पीड बहुत ही धीमी है। अगर यही चला तो आंदोलन फिर से शुरू होगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर 2021 को देश को संबोधित करते हुए तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार देश के हित में, किसानों के हित में, कृषि के हित में, किसानों के प्रति पूर्ण समर्पण भाव से ये कानून लेकर आई थी। लेकिन इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए।

15-18 की उम्र के बच्चों को 3 जनवरी से वैक्सीन, कोरोना वॉरियर्स और बीमार बुजुर्गों को भी 10 जनवरी से प्रिकॉशन डोज: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (25 दिसंबर, 2021) को रात 9:50 बजे राष्ट्र को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वैक्सीन निर्माण पर काफी पहले से ही काम शुरू कर दिया गया था और डिस्ट्रीब्यूशन और ट्रेनिंग से लेकर आईटी सपोर्ट सिस्टम तक पर काम किया गया। उन्होंने कहा कि इस तैयारी का ही नतीजा था कि 16 जनवरी, 2021 से भारत ने अपने नागरिकों को वैक्सीन देना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि भारत अब 141 करोड़ वैक्सीन डोज के लक्ष्य को पार कर चुका है।

उन्होंने जानकारी दी कि भारत की व्यस्क जनसंख्या में से 61% को दोनों डोज लग चुकी है और 90% को दोनों डोज लगाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि हमने दुनिया का सबसे बड़ा और कठिन भौगोलिक स्थितियों के बीच इतना सुरक्षित टीकाकरण अभियान चलाया। उन्होंने पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्यों (गोवा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश) में शत प्रतिशत वैक्सीनेशन डोज के लिए उनकी पीठ ठोकी और कहा कि दूर-दराज के गाँवों से ऐसी ख़बरें आती हैं तो मन को संतुष्टि मिलती है।

उन्होंने कहा कि जल्द ही हमारे देश में नजल वैक्सीन और दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन भी शुरू होगी। उन्होंने कहा कि ये सब वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित होंगी। प्रधानमंत्री ने बताया कि वैक्सीन की पहली डोज किसे दी जाए से लेकर सारी चीजें वैज्ञानिकों की सलाह पर काम की गई। उन्होंने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर भी हमारे वैज्ञानिक अध्ययन में लगे हैं। उन्होंने कहा कि आज पसहहले 11 महीने के टीकाकरण के अनुभवों को लेकर निर्णय लिए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “15 वर्ष से 18 वर्ष तक की आयु के बीच जो बच्चे हैं, उनका टीकाकरण अभियान सोमवार (3 जनवरी, 2022) से शुरू की जाएगी। इससे स्कूल-कॉलेजों में जा रहे बच्चों और उनके माता-पिता की चिंता दूर होगी। जो कोरोना वॉरियर्स हैं (स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर्स) हैं, उन्हें वैक्सीन की ‘प्रिकॉशन डोज’ दी जाएगी, जिसकी शुरुआत सोमवार (10 जनवरी, 2022) से होगी। जो गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें प्रिकॉशन लेना सलाह योग्य हैं। “

उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले बीमार लोगों को डॉक्टरों की सलाह पर वैक्सीन के प्रिकॉशन के डोज उपलब्ध होगा, जो 10 जनवरी, 2022 से ही शुरू होगा। उन्होंने लोगों को डर और भ्रम से बचने की सलाह देते हुए कहा कि आगे हमें इस वैक्सीनेशन अभियान को और गति देना है, क्योंकि हमारे प्रयास इस देश को मजबूत करेंगे। उन्होंने लोगों को सावधानी से जुड़े सलाह न भूलने की सलाह देते हुए कोरोना वायरस के म्यूटेशन की याद दिलाई।