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‘वनवासियों की संस्कृति सुरक्षित रखेंगे’: ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ आदिवासी संगठन ने फूँका बिगुल, छत्तीसगढ़ में ‘महा अभियान’

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में ईसाई धर्मान्तरण (Conversion) का मसला लंबे समय से चल रहा है। यहाँ ईसाई मिशनरी (Christian Missionaries) भोले-भाले लोगों का उपचार सभा के नाम पर ब्रेनवॉश करके उनका धर्मान्तरण करवाते रहे हैं। इसकी कई खबरें भी समय-समय पर सामने आते रहती हैं। इसी क्रम में राज्य के जशपुर में ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों का धर्मान्तरण करवाने के खिलाफ जनजातीय सुरक्षा मंच ने मोर्चा खोल दिया है।

यहाँ ईसाई मिशनरियों के खिलाफ बड़ा जागरुकता महाअभियान छेड़ा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जिले में ईसाई मिशनरियों द्वारा भोले-भाले आदिवासियों को अच्छे जीवन का लालच देकर उनके मतांतरण की खबरें सामने आती ही रहती है। इस मामले में आदिवासियों के हितों की रक्षा करने वाले संगठन जनजातीय सुरक्षा मंच के सदस्यों से पूर्व मंत्री गणेश राम भगत (Ganesh Ram bhagat) ने भी मुलाकात की है। बगीचा थाना क्षेत्र के पसिया पहुँचे भगत ने कहा कि वनवासियों की प्राचीन संस्कृति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए इसी तरह से हर गाँव में युवाओं की एक टीम बनाई जाएगी।

नक्सलवाद, धर्मान्तरण और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू से ही मुखर रहे गणेश राम भगत के मुताबिक, जशपुर जिले में अशांति फैलाने की कोशिशों का सहजता से ही पता चल रहा है। ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोग लगातार विदेशी धन के जरिए लोगों को लालच देकर उनका धर्मान्तरण कराने का घिनौना काम कर रहे हैं। इसे समय रहते रोकने की जरूरत है। अगर इसे अभी नहीं रोका गया तो फिर इसे रोक पाना आसान नहीं होगा। भगत के मुताबिक, बचपन से उन्हें शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंनद सरस्वती का सानिध्य मुझे मिला है। इसी कारण से वो आज भी सनातन धर्म की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

धर्मान्तरण के मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी बिफरे पूर्व मंत्री ने कहा कि धर्म की रक्षा के समय मौन होकर चुपचाप देख रहे इन नेताओं को चुनाव के समय जनता सबक सिखाएगी। गौरतलब है कि जशपुर जिले के पत्थलगाँव, जशपुर और बगीचा में चंगाई सभा के नाम पर ईसाई मिशनरी लोगों का धर्मान्तरण करवा रहे हैं।

12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को लगेगी Covaxin, डेटा के अध्ययन के बाद मिली मंजूरी

12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों को कोवैक्सीन लगाने की मंजूरी मिल गई है। अब तक भारत में 18 से अधिक उम्र वालों को ही वैक्सीन लग रही थी। ‘ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI)’ ने कोवैक्सीन को 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ‘इमरजेंसी यूज’ की अनुमति मिल गई है। ये वैक्सीन 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं है। अर्थात, 12 से 18 उम्र तक के किशोरों को ये कोरोना वैक्सीन लगाई जा सकती है। इसे लेकर योजना जल्द ही आएगी।

बता दें कि कोवैक्सीन का निर्माण ‘भारत बायोटेक’ नामक कंपनी करती है। इससे पहले कंपनी ने कोवैक्सीन (BBV152) के लिए 2 से 18 की उम्र तक के बच्चों के लिए क्लिनिकल ट्रायल के आँकड़े ‘सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (CDSCO)’ को सौंप दिया था। CDSCO ने इस डेटा की विस्तृत समीक्षा भी की है। ‘सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स कमिटी (SEC)’ ने भी इसका अध्ययन कर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। अब इसे बच्चों को कैसे दिया जाएगा, इसकी योजना तैयार की जा रही है।

‘बेचारे मुस्लिम’ को हिन्दू लड़की से प्यार की सज़ा, ज़िंदा जला कर मार डालते हैं ‘भगवान राम के वंशज’: ‘अतरंगी रे’ में रामायण-राधा का मजाक

जब ‘तनु वेड्स मनु (2011)’, ‘राँझना (2013)’ और ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स (2015)’ जैसी फ़िल्में बना चुके आनंद एल रॉय कोई फिल्म लेकर आते हैं तो दर्शकों को एक उम्मीद रहती है। ये अलग बात है कि उनकी पिछली फिल्म ‘जीरो (Zero)’ फ्लॉप रही थी। अबकी उनकी फिल्म ‘अतरंगी रे’ में अक्षय कुमार, धनुष और सारा अली खान जैसे बड़े अभिनेता हैं। अक्षय कुमार ने ‘सज्जाद’ का किरदार निभाया है इसमें। जबकि सारा अली खान हिन्दू लड़की ‘रिंकू’ होती हैं।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि इस समीक्षा में हम आपको फिल्म की कहानी भी बताएँगे, क्योंकि बॉलीवुड के प्रोपेगंडा को बेनकाब करने के लिए ये आवश्यक है। जैसा कि आरा अली खान खुद इस फिल्म में कहती हैं, वो ‘सूर्यवंशी ठाकुर’ होती हैं, जिनका भगवान राम के वंश से सीधा ताल्लुक है। अब एक हिन्दू ठाकुर परिवार को दिखाया गया तो उसे क्रूर बताना ज़रूरी हो जाता है। उस घर की महिलाएँ हो या पुरुष, सबका क्रूर और ‘प्यार से घृणा करने वाला’ होना ज़रूरी है।

बिहार का परिवार होता है, इसीलिए यहाँ थोड़ी बदनामी बिहार की भी हो जाए तो फिल्म में और मसाला लग जाता है। इसीलिए, ‘जबरिया शादी’ का कॉन्सेप्ट लाया गया है। रिंकू के परिवार वाले जबरन उसकी शादी एक तमिल लड़के से कर देते हैं, जिसे बाँध कर लाया जाता है। अब शुरू होता है तमिल भाषा का मजाक बनाना। तमिल बोलते विशु (जिसका असली नाम तमिल में कुछ लंबा सा है और रिंकू बोलती है कि ये भगवान वाला नाम है, इसीलिए धरती वाला नाम बताओ) को एक कॉमिक कैरेक्टर की तरह पेश किया गया है।

कुछ इसी तरह की चीज हमने ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में देखी थी, जहाँ तमिल बोलने वालों को कॉमेडी के लिए इस्तेमाल किया गया था। दूसरी भाषा का मजाक बना कर आप ये कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वो उनका सम्मान करें? खैर, इस फिल्म में तमिल अभिनेता धनुष भी हैं जो दक्षिण में अपनी अच्छी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं लेकिन ये भी कहा जाता है कि उन्हें हिंदी ठीक से नहीं आती। इससे पहले वो ‘राँझना’ के अलावा आर बल्कि की ‘शमिताभ (2015)’ में दिखे थे। ये उनकी तीसरी हिंदी फिल्म है।

फिल्म का सबसे बड़ा सस्पेंस ये होता है कि रिंकू जिस काल्पनिक लड़के से पूरी फिल्म प्यार कर रही होती है और अपनी बॉयफ्रेंड समझ रही होती है, वो उसके अब्बा होते हैं। फ्लैशबैक में पता चलता है कि इस शादी से रिंकू की माँ (जिसके किरदार में वो खुद हैं) के परिवार वाले इस शादी से खुश नहीं थे और जादूगर सज्जाद को ज़िंदा जला कर मारने के लिए उन्होंने साजिश रची। फिर जादू दिखाते हुए बच्ची रिंकू के सामने ही सज्जाद आग से जल कर मर जाता है।

स्पष्ट है, जलाने वाले वही ‘भगवान श्रीराम के वंशज सूर्यवंशी ठाकुर’ हैं और मरने वाला एक मुस्लिम जिसने एक हिन्दू लड़की से शादी कर ली। नैरेटिव ये है कि मुस्लिम पीड़ित है और हिन्दू अपराधी। गुंडे भगवान की पूजा न करें, चंदन न लगाएँ और भगवान का नाम न लें तो भला वो बॉलीवुड के विलेन कैसे हुए? इसीलिए रिंकू के परिवार वालों को भी हवन वगैरह करते हुए दिखाया गया है। रिंकू बार-बार घर से भागती है, लेकिन उसकी नानी जबरन उसकी शादी करवा देती है।

और हाँ, फिल्म के एक दृश्य में ‘सज्जाद (असली में रिंकू का अब्बू लेकिन अब काल्पनिक बॉयफ्रेंड)’ उसे एक ‘रामायण’ भी समझाता है, जिसमें वो खुद को राम बोलता है। साथ ही जिस विशु से रिंकू की शादी हुई होती है, उसे रावण बताता है। फिर बताता है कि किस तरह वो ‘रावण’ इस ‘राम’ को ‘सोने का हिरण’ मारने भेजना चाहता है, ताकि वो ‘सीता’ का हरण कर सके। ‘अब रामायण शुरू होता है’ – इस डायलॉग के साथ ही इंटरवल की घोषणा होती है।

खैर, बॉलीवुड का शुरू से ऐसा ही रहा है। सज्जाद को ‘सेक्युलर’ दिखाने के लिए कृष्ण जन्माष्टमी पर गाना गाते हुए और मटका फोड़ते हुए भी दिखाया गया है। वो रामायण की बातें करता है। साथ ही राधा वाला एक गाने का तड़का हो जाए तो फिल्म की संगीत में चार चाँद लग जाते हैं। फिल्म के गाने जब एआर रहमान ने बनाएँ हों और लिरिक्स इरशाद कामिल ने लिखे हों, तो इस पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि ‘राधा’ को फूहड़ ढंग से पेश किया जाने वाला है।

कुल मिला कर बात ये है कि इस बिना सिर-पैर की कहानी वाली फिल्म में बॉलीवुड वालों ने वही किया है, जो वो वर्षों से करते आ रहे हैं। ठाकुर, ब्राह्मण या वैश्य समाज का विलेन, मुस्लिम पीड़ित, हिन्दू देवी-देवताओं का नाम लेकर फूहड़ गाने, हिन्दू धर्म ग्रन्थ का नाम लेकर मजाक। इन सबके अलावा एक लव ट्रायंगल और किसी कॉलेज का कैम्पस हो जाए तो सोने पर सुहागा। पुरानी बोतल में पुरानी शराब डाल कर उसमें नीम्बू गाड़ देने का ही नाम है – ‘अतरंगी रे’।

क्रिसमस पार्टी में इरा खान ने बॉयफ्रेंड नूपुर शिखरे को किया किस, पिता आमिर खान भी थे मौजूद

क्रिसमस के मौके पर बॉलीवुड की तमाम फिल्मी हस्तियों ने अपने-अपने अंदाज में ‘क्रिसमस’ मनाया। इसी क्रम में बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने अपनी बेटी इरा खान और उसके ब्वॉयफ्रेंड नूपुर शिखरे के साथ क्रिसमस मनाया। इसकी पिक्चर्स को इरा खान ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिनमें से एक पिक्चर में वो अपने ब्वॉयफ्रेंड नुपुर शिखरे को किस करती हुई दिखाई दीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इरा ने क्रिसमस सेलीब्रेशन की तस्वीरें इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की। पिक्चर्स में देखा जा सकता है कि इरा उनके अब्बू आमिर खान, नूपुर शिखरे और एक दोस्त साथ में थे। इन सभी ने एक टेलीस्कोप के साथ पोज दिया। खास बात यह थी कि इरा के ब्वॉयफ्रेंड नुपुर और आमिर खान ने एक ही तरह की ड्रेस पहन रखा था। उन्होंने लाल नीले रंग की चेक वाली शर्ट और पाजामा पहन रखा था। इन तस्वीरों के साथ इरा ने तस्वीर को कैप्शन दिया था, “मेरी क्रिसमस”।

साभार: इंस्टाग्राम

इससे पहले, इरा ने अपने ब्वॉयफ्रेंड नुपुर के साथ और तस्वीर शेयर की थी, जिसमें वो उसे किस करती दिख रही थी। बताया जा रहा है कि वो इमेज क्रिसमस की पूर्व संध्या पर क्लिक की गई थी। तस्वीर में इरा और नुपुर को लाल और हरे रंग के स्वेटशर्ट और डेनिम में ट्विनिंग करते हुए देखा गया था। वे दोनों पीछे रोशनी में जगमाते एक पेड़ के पास पोज दिया था। वो पेड़ क्रिसमस ट्री था। इसी दौरान उन्होंने उन्हें किस भी किया था। इंस्टाग्राम पर इस इमेज के साथ इरा ने लिखा था आपके साथ वादे करना सम्मान की बात है।

नुपुर शिखरे को किस करती इरा खान (साभार: पिंकविला)

उल्लेखनीय है कि इरा खान आमिर खान की पहली पत्नी रीना दत्ता की बेटी हैं। वहीं उनके ब्वॉयफ्रेंड नुपुर शिखरे की बात करें तो पेशे से वो एक जिम ट्रेनर हैं और शिखरे ने ही इरा को भी ट्रेनिंग दी है। कहा तो ये भी जा रहा है कि शिखरे आमिर खान के भी ट्रेनर थे।

‘सावरकर ने कहा था गोमांस से समस्या नहीं, कई हिन्दू खाते हैं बीफ’: दिग्विजय सिंह के बयान पर भाजपा MLA का पलटवार – दंगे कराना चाहते हैं

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि वीर सावरकर ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि गोमांस खाने से कोई परहेज नहीं है। दिग्विजय सिंह ने ये भी दावा किया कि स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर ने हिन्दू धर्म और हिंदुत्व को अलग-अलग बताया है। दिग्विजय सिंह के अनुसार, वीर सावरकर ने गाय को एक पशु बताते हुए लिखा है कि वो अपने ही मल में लोट लेती है, वो कहाँ से भला हिन्दुओं की माता हो सकती है? कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने शनिवार (25 दिसंबर, 2021) को ये बयान दिया।

दिग्विजय सिंह ने सावरकर के हवाले से कहा कि गोमांस खाने में कोई खराबी नहीं है, ऐसा वो खुद मानते थे। भारत को विविधताओं का देश बताते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि देश में कई ऐसे हिन्दू हैं जो गोमांस खाते हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि ऐसा कहाँ लिखा है कि गोमांस न खाया जाए? इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अधिकतर हिन्दुओं को गोहत्या के खिलाफ बताया। साथ ही उन्होंने लोगों से हाथ उठवा कर पूछा कि सावरकर के इस बयान के बारे में कितने लोगों को मालूम था?

उन्होंने वीर सावरकर को भाजपा और RSS का विचारक बताते हुए लोगों से पूछा कि अब वो ये बात भाजपा-संघ के नेताओं के सामने कहेंगे या नहीं? सेकंड स्टॉप तुलसी नगर नर्मदा मंदिर भवन में आयोजित कॉन्ग्रेस के ‘जन जागरण अभियान’ की सभा में उन्होंने ये बातें कही। संगठन को मजबूत करने के लिए गुस्सा पीकर चलने और गाली देने वाली को भी पुचकारने की सलाह देते हुए कार्यकर्ताओं को दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा और RSS देश को बाँटना चाहते हैं।

हालाँकि, सावरकर पर विस्तृत शोध कर के दो पुस्तकें लिख चुके इतिहासकार डॉक्टर विक्रम संपत ने स्पष्ट बताया था कि वीर सावरकर ने अपने जीवन में कभी बीफ नहीं खाया। हाँ, ये सही है कि सावरकर नहीं चाहते थे कि गाय को भगवान माना जाए, लेकिन वो ये मानते थे कि गाय मानव जाति के लिए उपयोगी है और हमें उसका पूरा फायदा उठाना चाहिए। उनका कहना था कि रक्षा के लिए पूजा वाली बात सही है, लेकिन किसी की पूजा करना और रक्षा करा भूल जाना ठीक नहीं है।

उन्होंने यहाँ ‘सिर्फ’ शब्द का प्रयोग किया है – ध्यान दीजिए। वीर सावरकर का कहना था कि पहले गाय को बचाइए, फिर उसकी पूजा करने की सोचिए। उन्होंने मजहब के नाम पर गोहत्या की निंदा की थी। उन्होंने आर्थिक कारणों से ही नहीं, गैर-हिन्दुओं को गोरक्षा का कर्तव्य बताते हुए कहा था कि गोहत्या करने वाले ‘आसुरी’ प्रवृत्ति के हैं। उन्होंने गाय से घृणा त्यागने की सलाह भी गैर-हिन्दुओं को दी। हालाँकि, आज उन्हें ‘गोमांस को बढ़ावा देने वाला’ बता कर झूठा नैरेटिव फैलाया जाता है।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह के बयान से नाराजगी जताते हुए उन्हें हिन्दुओं के खिलाफ षड्यंत्र रचने वाला करार दिया। उन्होंने दिग्विजय सिंह पर वीर सावरकर के नाम पर गलत टिप्पणी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो मुस्लिमों को अधिक संख्या में गोहत्या करने के लिए उकसाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय ऐसा कर के दंगे कराना चाहते हैं, ताकि कॉन्ग्रेस हिन्दू-मुस्लिम राजनीति की रोटियाँ सेंक सके। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म के लिए इतनी मेहरबानी तो करो कि गाय को गौमाता कहो।

तालिबान के साथ भिड़ंत में मारे गए Pak के 2 सैनिक, पाकिस्तान का तार भी ले गए तालिबानी: सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर हुई झड़प

अफगानिस्तान में तालिबान का शासन शुरू होने के पहले से ही लगातार पाकिस्तान द्वारा उसका समर्थन किए जाने की खबरें आती रही हैं। यहीं नहीं, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबान को मान्यता दिलाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। लेकिन, अब उसी पाकिस्तान औऱ अफगान तालिबान के बीच सीमा विवाद उभर कर सामने आया है। दोनों के बीच सीमा पर कँटीले तारों की बाड़ लगाने को लेकर न केवल विवाद, बल्कि गोलीबारी भी हुई। हालाँकि, अब खबरें ऐसी भी हैं कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है।

‘द डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और अफगान तालिबान के अधिकारियों ने सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर हालिया विवाद को आपसी सहमति से सुलझा लिया है। साथ ही दोनों इस बात पर सहमत हुए हैं कि भविष्य में फेंसिंग लगाने का काम आपसी सहमति से ही किया जाएगा। इसको लेकर इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी।

हालाँकि, अधिकारी ने इस बात को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की कि बुधवार (22 दिसंबर, 2021) की घटना के बाद दोनों देशों के बीच किस स्तर पर बातचीत हुई थी, जिसके बाद तालिबान लड़ाकों ने न केवल सीमा पर बाड़बंदी के काम को बाधित किया बल्कि तारों को अपने साथ भी लेकर चले गए। इसके बाद दोनों तरफ से गोलीबारी भी हुई थी।

गोलीबारी में दो पाक सैनिक भी मार गिराए गए

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लगती डूरंड लाइन पर तालिबान की ओर से गोलीबारी की जा रही है। शुक्रवार (24 दिसंबर 2021) को बाजौर क्षेत्र के गंजगल, सरकानो और कुनार जैसे गाँवों में गोलियाँ चलीं। दोनों ओर से फायरिंग की घटना तब शुरू हुई जब कथित तौर पर तालिबान के एक स्नाइपर ने सीमा पर बाड़बंदी वाली जगह पर दो पाक सैनिकों को गोली मार दी। इसके बाद दोनों तरफ से गोलीबारी की गई।

हालाँकि, घटना के बाद दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों ने इस मुद्दे पर बातचीत की। तालिबान के सीमा और कबायली मामले का मंत्रालय इसमें शामिल हुआ था।

2017 से ही बाड़ लगा रहा पाकिस्तान

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान 2017 से अफगानिस्तान के साथ 2600 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगा रहा है। इस्लामी मुल्क का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि आतंकवादी घुसपैठ और तस्करी पर रोक लगाई जा सके। लेकिन, तालिबान इसका विरोध कर रहा है। यहाँ बाड़बंदी के अलावा पाकिस्तान सीमा चौकियाँ, किले का निर्माण और सीमा की रक्षा करने वाले अर्धसैनिक बल, फ्रंटियर कॉर्प्स के नए विंग का का भी निर्माण कर रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि बाड़ लगाने का 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

25 किसान संगठन मिलकर पंजाब के सभी 117 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव: AAP और ‘संयुक्त समाज मोर्चा’ में गठबंधन की कोशिश

केंद्र सरकार द्वारा तीनों कृषि बिलों को वापस लेने से अति उत्साही किसानों ने अब आगामी विधानसभा चुनावों में किस्मत आजमाने का निर्णय लिया है। कुछ ही महीनों में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों में राज्य के 32 में से 25 किसान संगठन एक छत्री के नीचे आकर राजनीति का हिस्सा बनेंगे। चुनाव लड़ने के लिए किसानों ने संयुक्त समाज मोर्चा (SSM) बनाया है और भारतीय किसान यूनियन- राजेवाल (BKU- Rajewal) गुट के नेता बलबीर सिंह राजेवाल को मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे।

मोर्चे को लेकर किसान नेता हरमीत कादियां ने बताया कि कृषि बिलों की वापसी के बाद लोगों को उनसे उम्मीद बढ़ गई है। पंजाब लौटने पर स्वागत हुआ और उन पर दबाव बनने लगा कि अगर दिल्ली मोर्चा जीता जा सकता है तो पंजाब को भी सुधारा जा सकता है। उन्होंने बताया कि जनता की आवाज पर ही नया संयुक्त मोर्चा शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि नए मोर्चे से जुड़ने को लेकर 22 संगठनों ने फैसला लिया है, जबकि 3 संगठन जल्द ही जुड़ जाएँगे।

किसान नेता बलबीर राजेवाल ने कहा कि पंजाब के लोग उन पर दबाव बना रहे हैं और फोन कर कह रहे हैं कि चुनाव लड़ो। राजेवाल ने कहा कि यह मोर्चा राज्य के सभी 117 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करेगा लड़ेगा और पंजाब के हितैषियों से बातचीत होगी। राजेवाल ने कहा कि किसान संगठनों का चुनाव में उतरने का मुख्य मकसद पंजाब के गंदे सिस्टम को सुधारना है।

उधर हरियाणा के किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी पंजाब चुनाव में उतरने की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। चढ़ूनी ने कुछ दिन पहले ही चंडीगढ़ में संयुक्त संघर्ष पार्टी बनाने की घोषणा की है। हालाँकि, अभी यह साफ नहीं हो सका है कि इस मोर्चे में चढूनी शामिल होंगे या नहीं, लेकिन राजेवाल ने जिस तरह से कहा है कि सभी लोगों से बातचीत होगी तो अंदाजा लगाया जा रहा है कि चढूनी से भी पर्दे के पीछे बातचीत चल रही होगी।

दरअसल, लुधियाना के मुल्लापुर में शुक्रवार (24 दिसंबर) को किसान संगठनों की बैठक हुई। बैठक में सभी ने सहमति से चुनाव लड़ने की बात कही, लेकिन राज्य के सात किसान संगठन चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं दिखे। ये 7 किसान संगठन हैं- किरती किसान यूनियन, क्रांतिकारी किसान यूनियन, भारतीय किसान यूनियन- क्रांतिकारी, दोआबा संघर्ष कमेटी, भारतीय किसान यूनियन- सिद्धुपुर, किसान संघर्ष कमिटी और जय किसान आंदोलन। इन संगठनों ने चुनाव में उतरने वाले संगठनों से SKM का बैनर इस्तेमाल न करने के लिए भी कहा है।

उधर, खबर आ रही है कि किसान नेता पंजाब में आम आदमी पार्टी के साथ संपर्क में है और गठबंधन के माध्यम से चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, ये भी कहा जा रहा था कि राजेवाल आम आदमी पार्टी की टिकट पर खन्ना से चुनाव लड़ सकते हैं। इसके पीछे ये वजह थी कि खन्ना में नए मुख्यमंत्री के रूप में राजेवाल के पोस्टर लगे थे, लेकिन राजेवाल आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ने को लेकर इनकार कर चुके हैं।

हिन्दू लड़की को फँसाने के लिए शोहिब बन गया ‘शिवा’, फेसबुक के जरिए दोस्ती फिर साथ ले भागा: ‘लव जिहाद’ का मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश के एटा जिले से ‘लव जिहाद‘ का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ दिलशाद उर्फ शोहिब खान ने शिवा बनकर फेसबुक के जरिए एक हिंदू लड़की से दोस्ती और उसे अपने झूठे प्यार के जाल में फँसा कर ‘लव जिहाद’ का शिकार बनाया। इसके साथ ही उसका धर्मांतरण भी कराने की कोशिश की। मामले में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के एटा जिले की रहने वाली पीड़िता शांतिनगर स्थित कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा है। उससे मुरादाबाद जिले के रहने वाले शोहिब खान उर्फ दिलशाद ने फेसबुक के जरिए दोस्ती की। उस दौरान उसने लड़की को अपना परिचय हिंदू युवक शिवा के तौर पर दिया। धीरे-धीरे दोनों की आपस में दोस्ती हुई और समय के साथ दोस्ती प्यार में बदल गई। युवती को अपने जाल में फँसा देख आरोपित ने उसका ब्रेनवॉश करना आरंभ किया और इसके बाद एक दिन 6 दिसंबर 2021 को जब पीड़िता अपने कॉलेज गई हुई थी तो वो एटा आया और उसे अपने साथ लेकर चला गया।

इस बीच जब शाम को लड़की अपने घर नहीं लौटी तो घरवालों को उसकी चिंता सताने लगी। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। दिनभर तलाश करने के बाद भी जब उसका पता नहीं चला तो पीड़िता के परिजनों ने उसकी कोतवाली सिटी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद एसएसपी उदयशंकर सिंह के निर्देश पर पुलिस की सर्विलांस टीम ने एक्शन लिया। जब साइबर टीम ने मामले को खँगालना शुरू किया तो पुलिस को शोहिब खान के अकाउंट का पता मिल गया। उसने मुस्लिम होते हुए भी हिंदू नाम शिवा के नाम से फेसबुक अकाउंट बनाया था। इसी के जरिए उसने छात्रा को अपने जाल में फँसाया था।

ऐसे पकड़ा गया

फेसबुक अकाउंट का पता चलने के बाद पुलिस ने उसके अकाउंट को सर्विलांस पर लिया तो पता चला कि उसकी लोकेशन मुरादाबाद जिले के मुहल्ला बिहारी कला में मिली। इसके बाद पुलिस की टीम जब वहाँ पहुँची शोहिब खान वहाँ नहीं मिला, लेकिन उसके पिता इरशाद से पुलिस ने जानकारी ली। पिता से पूछताछ की तो मुरादाबाद में शोहिब खान का भी पता मिल गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपित को कब्जे में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद पीड़िता भी शहर के ही एक घर से बरामद हो गई। इस बीच पीड़िता ने पुलिस को बताया है कि इसमें आरोपित शोहिब का पूरा परिवार उसके साथ मिला हुआ था।

CAA विरोधी कबीर खान वाली ’83’ की धीमी ओपनिंग, JNU वाली दीपिका पहुँचीं मंदिर… उधर ‘पुष्पा’ ने बटोरे ₹229 Cr

जहाँ अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा’ ने एक सप्ताह में 229 करोड़ रुपए बटोर लिए हैं, रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की ’83’ को सुस्त प्रतिक्रिया मिली है। ‘पुष्पा’ के निर्माताओं ने ही जानकारी दी है कि फिल्म ने एक सप्ताह में 229 करोड़ रुपए की कमाई की है। वहीं हिंदी में इसकी नेट कमाई 30 करोड़ रुपए के आसपास है। साथ ही ये जानकारी भी सामने आई है कि अब तक ‘BookMyShow’ नामक एप से ‘पुष्पा’ के 35 लाख टिकट बिक चुके हैं।

वहीं 1983 क्रिकेट विश्व कप में भारत की बड़ी जीत पर बनी फिल्म ’83’ ने सभी भाषाओं में मिला कर पहले दिन मात्र 12.64 करोड़ रुपए की ही कमाई की। वहीं विदेश में इसकी कमाई 11.81 करोड़ रुपए रही। इस फिल्म के निर्देशक कबीर खान हैं, जबकि दीपिका पादुकोण इसके निर्माताओं में से एक हैं। उन्होंने इस फिल्म में एक किरदार भी निभाया है। मास पॉकेट्स में ’83’ को काफी धीमी शुरुआत मिली है, जबकि महँगे मल्टीप्लेक्स में इसे देखा जा रहा है।

हालाँकि, उधर ‘स्पाइडर मैन: नो वे होम’ ने भारत में 154 करोड़ रुपए का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कर के धमाल मचा दिया है। दीपिका पादुकोण ने ’83’ की रिलीज से पहले मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में जाकर भी दर्शन किया। फिल्म में उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान कपिल देव (जिनकी भूमिका दीपिका के पति रणवीर सिंह निभा रहे हैं) की पत्नी रोमी भाटिया का किरदार निभाया है। 22 दिसंबर को ’83’ का प्रीमियर हुआ था। दीपिका पादुकोण की आने वाले दिनों में ‘द्रौपदी’ और ‘फाइटर’ सहित कई फ़िल्में आने वाली हैं।

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब जनवरी 2020 में CAA (नागरिकता संशोधन बिल) को लेकर समझाने और अपना स्टैंड रखने के लिए फिल्म समुदाय के साथ बैठक की थी, तो उसमें ’83 (2021)’, ‘न्यूयॉर्क (2009)’, ‘एक था टाइगर (2012)’ ‘बजरंगी भाईजान (2015)’ और ‘ट्यूबलाइट (2017)’ के निर्देशक कबीर खान नहीं पहुँचे थे। उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए बैठक में हिस्सा नहीं लिया था और कहा था कि गुंडे यूनिवर्सिटी में घुस कर छात्रों को पीट रहे हैं तो चर्चा करने के लिए है ही क्या?

उन्होंने उस बैठक को ‘डिनर मीटिंग’ बताते हुए कहा था कि ये चीजें बाद में हो सकती हैं, लेकिन हँसते हुए गुंडों ने छात्रों को पीटा वो दिल दहलाने वाला है। बता दें कि तब JNU में वामपंथी गुंडों ने हॉस्टलों में घुस कर ABVP के छात्रों की पिटाई की थी, जबकि नैरेटिव इसके उलट बनाया गया था। दीपिका ने तब JNU जाकर वामपंथी दलों के छात्रों को अपना समर्थन भी जताया था। तब कबीर खान ने ‘राजनीति और समाजिक मामलों में धर्म को घुसाने’ को त्रासद बताते हुए कहा था कि जो फ़िल्मी हस्तियाँ इसके खिलाफ आवाज़ उठाती हैं, उन पर हमले होते हैं इसीलिए हो सकता है वो कई कारणों से डरे हुए हों।

‘हैदराबाद में नहीं होने दिया जाएगा मुनव्वर फारूकी का शो’: तेलंगाना CM को लेकर भाजपा नेता ने कहा- बाप-बेटे के लिए हिंदू समाज हास्य बन गया है

अपने कथित कॉमेडी शो में हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए कुख्यात कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के हैदराबाद में शो के आयोजन को लेकर भाजपा नेताओं ने कड़ी चेतावनी दी है। तेलंगाना के भाजपा अध्यक्ष बांदी संजय कुमार ने कहा फारूकी का शो शहर में आयोजित नहीं करने दिया जाएगा। गौरतलब है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बेटे और राज्य में मंत्री केटी रामाराव ने खुद को अति सहिष्णु बताते हुए फारूकी को शहर में शो आयोजित करने के लिए आमंत्रित किया था।

हैदराबाद में शनिवार (25 सितंबर) को भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की एक बैठक को संबोधित करते हुए कुमार ने केटी रामाराव की भी तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के कारण जब कई राज्य फारूकी के विवादास्पद शो को आयोजित करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, ऐसे में राज्य के मंत्री उन्हें शहर में शो आयोजित करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

9 जनवरी 2022 को हैदराबाद में निर्धारित फारूकी के शो को लेकर कुमार ने कहा, “जिस व्यक्ति को लगता है कि वह सच्चा हिंदू है, उसका बेटा और मंत्री, सभी नास्तिक हैं। मुनव्वर फारूकी ने अपने शो में दुर्गा, सीता, राम, रामायण और भगवद्गीता का अपमान किया है और ये लोग यहाँ उनका स्वागत कर रहे हैं। हम समझ सकते हैं कि किस तरह के लोग राज्य चला रहे हैं।”

इसके पहले शुक्रवार (24 अक्टूबर) को तेलंगाना के निजामाबाद से भाजपा सासंद अरविंद धर्मपुरी ने भी शो को आयोजित नहीं होने देने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, “क्या आप जानते हैं कि मुनव्वर फारूकी कौन है? उसने देवी सीता पर मजाक उड़ाया है, जिनकी पूजा बहुसंख्यक हिंदू करते हैं। कर्नाटक जैसे राज्य ने उस पर (फारूकी पर) प्रतिबंध लगाया है, वहीं केटीआर ने कॉमेडी करने के लिए तेलंगाना में उसका स्वागत किया है। क्या इस बाप-बेटे के लिए हिंदू समाज हास्य बन गया है?”

दरअसल, मुनव्वर फारूकी और कुणाल कामरा के बेंगलुरु में शो रद्द होने बाद रामाराव (केटीआर) ने उन्हें हैदराबाद में आकर शो करने का निमंत्रण दिया था। केटीआर ने कहा था, “हम हैदराबाद में सभी कॉमेडियन्स का स्वागत करते हैं। वे यहाँ आकर परफॉर्मेंस दे सकते हैं। शो कर सकते हैं। राज्य सरकार बहुत सहिष्णु (very tolerant) है।” उन्होंने यह बात 17 दिसंबर को कही थी।

एक वीडियो में केटीआर को कह रहे हैं, “हम मुनव्वर फारूकी और कुणाल कामरा के शो सिर्फ इसलिए रद्द नहीं करते हैं, क्योंकि हम उनके साथ राजनीतिक रूप से जुड़े हुए नहीं हैं। इसलिए, हमारा हैदराबाद शहर, जो सभी संस्कृतियों का स्वागत करता है, आलोचनाओं का स्वागत करता है। आप यहाँ आ सकते हैं, सरकार की आलोचना कर सकते हैं। सच कहूँ तो हमें विपक्ष से हर रोज अपनी आलोचनाएँ सुननी पड़ती हैं, लेकिन टीआरएस सरकार विपक्ष के प्रति बहुत सहिष्णु है।”