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सिखों को ललकार ईसाई नेता ने बँटवा दिया था पंजाब: उसी Pak में उनका और ईसाइयों का बुरा हश्र, आज नाला साफ करने को मजबूर

एक समय था जब पूरा का पूरा पंजाब भारत का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन विभाजन के बाद इसका एक बड़ा भाग पाकिस्तान में भी चला गया। उस समय पंजाब के ही एक ईसाई नेता थे, दीवान बहादुर सिन्हा। अंग्रेजों के काल में वो पंजाब विधानसभा के स्पीकर हुआ करते थे। 1947-48 में वो पंजाब विधानसभा के सदस्य थे। उनका जन्म सन् 1893 में सियालकोट के पसरूर में हुआ था। उनके दादा बिहार और दादी बंगाल से सम्बन्ध रखते थे। उनकी माँ पंजाबी थीं, जिन्होंने एक अंग्रेज से शादी की।

भारत के विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना में दीवान बहादुर सिन्हा का बड़ा योगदान था, जिन्हें वहाँ के ईसाई आज भी याद करते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की एक महिला से शादी की थी। आगे पढ़ने की इच्छा से वो लाहौर पहुँचे। इसके बाद उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार की नौकरी मिली। कहा जाता है कि उनके प्रयासों के बाद ही मीट्रिक एग्जामिनेशन सिस्टम और इंटरमीडिएट लेवल डिग्रीज की शुरुआत हुई, जिसका आज भी अनुसरण किया जाता है।

उन्हें अंग्रेजों ने ‘दीवान बहादुर’ की उपाधि से नवाज़ा था। उन्होंने ही ये नैरेटिव फैलाया था कि उस समय के भारत में ईसाईयों की स्थिति ठीक नहीं थी और न ही उनके लिए गाँवों में कब्रगाह थे। साथ ही कुंओं से पानी भरने में उनके लिए पाबंदियों की बात कही गई। ये अलग बात है कि तब भारत पर राज करने वाले अंग्रेज ईसाई ही हुआ करते थे। पंजाब में इसे धर्मांतरण के पीछे मिशनरियों ने ‘हिन्दुओं द्वारा दलितों को अछूत मानना और उन पर अत्याचार करना’ जैसे कारण दिए गए।

तो दीवान बहादुर सिन्हा का मानना था कि मुस्लिम समुदाय दलितों के प्रति ज्यादा उदार है और ज्यादा सेक्युलर भी है, इसीलिए इस्लामी मुल्क के साथ जाना ईसाईयों का एक सही निर्णय रहेगा। उन्होंने ईसाईयों की बेहतरी की बातें करते हुए भले ही पाकिस्तान जाने का रास्ता चुना, लेकिन असली बात ये थी कि इसका उन्हें और पूरे ईसाई समुदाय को दुष्परिणाम झेलने पड़े। 21 नवंबर, 1942 को दीवान बहादुर ने मोहम्मद अली जिन्ना के समर्थन में एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया।

तब वो पंजाब यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार हुआ करते थे। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान और भारत विभाजन को लेकर भी पूर्ण समर्थन की घोषणा की। लाहौर स्थित फोरमैन क्रिस्चियन कॉलेज (अब चार्टर्ड यूनिवर्सिटी) ने भी खुद को इस गठबंधन का हिस्सा बनाया। उसी साल 25 जुलाई को पूरे भारत के ईसाईयों का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने बयान दिया कि विभाजन के वक्त ईसाई समुदाय को भी मुस्लिमों के साथ ही गिना जाए। इसके बाद ईसाईयों में पाकिस्तान को लेकर माहौल बनाया गया।

इसके लिए 1945-46 में विभाजन की माँग को और मजबूती देते हुए ‘ऑल इंडिया क्रिस्चियन एसोसिएशन’ और ‘ऑल इंडिया क्रिस्चियन लीग’ ने ‘लॉन्ग लिव पाकिस्तान’ का नारा दिया। खुद दीवान बहादुर सिन्हा ने गुरदासपुर और पठानकोट जैसे जिलों में जाकर वहाँ के ईसाईयों से पाकिस्तान के पक्ष में प्रस्ताव पास कराया। 20 नवंबर, 1946 को तो उन्होंने जिन्ना को ईसाईयों का नेता घोषित कर डाला। जिन्ना ने भी कहा कि वो ईसाईयों के इस समर्थन और त्याग को कभी नहीं भूलेंगे।

यूनियनिस्ट पार्टी के समर्थन से वो अखंड पंजाब की विधानसभा में स्पीकर के पद तक पहुँचे। 17 अगस्त, 1947 को जब ‘पंजाब बाउंड्री कमीशन’ ने पंजाब के एक हिस्से को भारत में रखा तो दीवान बहादुर सिन्हा ने इसका विरोध किया। उनकी माँग थी कि गुरदासपुर और फिरोजपुर को पाकिस्तान में शामिल किया जाए। ‘अकाली दल’ के नेता तारा सिंह ने तो यूनाइटेड पंजाब विधानसभा के सामने तलवार निकाल कर ऐलान किया था कि पाकिस्तान में मिलने की माँग करने वालों के गर्दन काट दिए जाएँगे।

इसके जवाब देते हुए ईसाई नेता दीवान बहादुर सिन्हा ने कहा था, “सीने पर गोली खाएँगे, पाकिस्तान बनाएँगे।” उस समय कुछ इस्लामी संगठन भी विभाजन के खिलाफ थे, लेकिन ईसाई संगठनों ने दीवान बहादुर के नेतृत्व में एकता दिखाई। ईसाईयों के कारण ही पश्चिमी पंजाब पाकिस्तान का हिस्सा बना। विधानसभा में पाकिस्तान और भारत के पक्ष में जब मतदान कराया गया तो दोनों तरफ से 88-88 का आँकड़ा सामने आया। तब जिन्ना भी इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि अब पश्चिमी पंजाब पाकिस्तान का हिस्सा बन पाएगा या नहीं।

तब पंजाब का भविष्य 4 ईसाई सदस्यों के हाथ में थे और उन चारों के चारों ने पाकिस्तान का पक्ष लिया। जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गाँधी और सरदार पटेल जैसे नेताओं के प्रभाव के बावजूद दीवान बहादुर सिन्हा ने सुनिश्चित किया कि ये चारों पाकिस्तान के पक्ष में वोट डालें। 23 जून, 1947 को जब मतदान हुआ तो सिन्हा ही विधानसभा के स्पीकर थे। उनके अलावा फज़ल इलाही और सीई गिबन जैसे ईसाई सदस्यों ने भी उनका साथ दिया। इस तरह पंजाब के पक्ष में 91 और भारत के पक्ष में 88 वोट पड़े।

क्या आप जानना चाहते हैं कि जिस पाकिस्तान की स्थापना में दीवान बहादुर एसपी सिन्हा ने बड़ी भूमिका निभाई थी, उस पाकिस्तान में उनका क्या हश्र हुआ? जिन्ना की मौत के बाद उनके खिलाफ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और और कहा गया कि केवल एक मुस्लिम को ही इस्लामी मुल्क में स्पीकर बनने का हक़ है। उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, क्योंकि वो एक ईसाई थे। 22 अक्टूबर, 1948 को उनकी मौत हो गई। जिन्ना की मौत के बाद पाकिस्तान में उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।

उनकी पत्नी और बेटी को पाकिस्तान छोड़ कर भारत का रुख करना पड़ा। 1958 में इन दोनों ने इस्लामी मुल्क छोड़ दिया। हालाँकि, मार्च 2016 में दुनिया के सामने खुद को अल्पसंख्यक हितैषी दिखाने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने दीवान बहादुर एसपी सिन्हा के सम्मान में 10 रुपए का डाक टिकट जारी किया। आज स्थिति ये है कि पाकिस्तान में ईसाई खुल कर क्रिसमस तक नहीं मना सकते। वहाँ ईसाई तभी खबर में आते हैं जब भीड़ उनकी लिंचिंग करती है या इस समुदाय की किसी लड़की का अपहरण कर जबरन धर्मांतरण और निकाह कर दिया जाता है।

ईसाई महिलाओं से आज पाकिस्तान में साफ़-सफाई का काम लिया जाता है। पाकिस्तान के सफाईकर्मियों में अधिकतर ईसाई ही हैं। पाकिस्तानी मुस्लिमों में जातिवाद हावी है। जिन दलितों का अंग्रेज मिशनरियों ने हिन्दू जाति व्यवस्था का डर दिखा कर धर्मांतरित किया और दीवान बहादुर सिन्हा पाकिस्तान ले गए, उनकी जनसंख्या उस मुल्क में मात्र 1.27% रह गई है। पख्तून, सिंधी, बलूच और उसके कई जातियों में बँटे पाकिस्तान में आज ईसाईयों का हाल बेहाल है।

ये भी जानने लायक बात है कि विभाजन के समय दीवान बहादुर एसपी सिन्हा के पास दो वोट थे, एक सदस्य के रूप में और एक स्पीकर के रूप में। इस तरह तीन ईसाई सदस्यों के 4 वोटों से पंजाब पाकिस्तान का हिस्सा बना। 1949 उसी पाकिस्तान में प्रस्ताव पारित कर मुस्लिम के स्पीकर बनने का नियम तय हुआ और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। ‘पंजाब कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल’ ने सितंबर 2015 में एक विज्ञापन निकाला था कि केवल ईसाईयों की ही सफाईकर्मी के रूप में भर्ती होगी।

क्रिसमस पर केजरीवाल ने देशभर के अखबारों में दिया फुलपेज ऐड: करदाताओं की पैसे की बर्बादी पर भड़के लोग, दो साल में ₹800 करोड़ किए खर्च

क्रिसमस (Christmas) के मौके पर समुदाय विशेष में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर जनता के पैसे की बर्बादी करने का आरोप लगा है। दरअसल, केजरीवाल ने यह विज्ञापन क्रिसमस के मौके पर शनिवार (25 दिसंबर 2021) के समाचार पत्रों में दिया है। इसको देखकर सोशल मीडिया (Social Media) पर लोग उनकी तीखी आलोचना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर ऐक्टिविस्ट विजय पटेल ने एक ट्विटर थ्रेड के जरिए दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘मेरी क्रिसमस’ के विज्ञापनों के स्क्रीनशॉट साझा किए। इनमें साफ देखा जा सकता है कि केजरीवाल सरकार ने न केवल राष्ट्रीय दैनिक अखबारों में, बल्कि कई क्षेत्रीय अखबारों में भी फ्रंट पेज ऐड दिए हैं। इसकी आलोचना करते हुए यूजर ने लिखा, “एडमैन केजरीवाल दिल्ली के करदाताओं के करोड़ों रुपए दूसरे राज्यों में बर्बाद कर रहे हैं। कृपया अपना स्थानीय समाचार पत्र भी देखें!”

पटेल के थ्रेड्स को खोलने पर पता चला कि इसी तरह के विज्ञापन केजरीवाल द्वारा छत्तीसगढ़ और पंजाब के स्थानीय भाषाओं के अखबारों को भी दिए गए हैं।

यूजर ने हिंदी दैनिक ‘दैनिक जागरण’ के उत्तर प्रदेश के हर संस्करण में अरविंद केजरीवाल का विज्ञापन फ्रंट पेज पर छापा गया है।

ये केवल नॉर्थ इंडिया में ही नहीं, बल्कि इसी तरह के विज्ञापन गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के अखबारों में भी छपे हैं।

नेटिजन्स ने पैसा बर्बाद करने पर की अरविंद केजरीवाल की आलोचना

केजरीवाल द्वारा टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी करने पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए ट्विटर यूजर (@WokePandemic) ने अरविंद केजरीवाल सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, “केजरीवाल विज्ञापन पर सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च करके अखबार उद्योग को अकेले ही बचा रहे हैं। हकीकत में वो ही लोकतंत्र के स्तंभों में से एक का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन नफरत करने वाले नफरत करते रहेंगे।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक अन्य यूजर विक्रांत ने बताया कि किस तरह से क्रिसमस के मौके को भुनाने के लिए अरविंद केजरीवाल सभी गुजराती अखबारों में फुल पेज ऐड दे रहे हैं। यूजर ने लिखा, “एक नहीं बल्कि सभी गुजराती अखबार। हैरानी की बात है कि किसी स्थानीय नेता का नाम या फोटो नहीं है, केवल महामहिम सर अरविंद केजरीवाल की तस्वीर है।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वहीं, दूसरे यूजर ने अरविंद केजरीवाल के उस ढोंग का पर्दाफाश किया, जिसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार की कथित ‘विज्ञापनों पर अधिक खर्च’ के लिए आलोचना की थी।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ट्विटर यूजर शेसान रंगनाथन ने केजरीवाल से सवाल किया, “किस आधार पर दिल्ली के टैक्सपेयर्स के पैसे से गुजरात में क्रिसमस की बधाईयाँ दी जा रही हैं। ये या तो केजरीवाल का प्रचार है या फिर नरेंद्र मोदी को भड़काने के लिए फुल पेज ऐड दिए गए हैं।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस साल पहले तीन महीने में केजरीवाल सरकार ने खर्च किए ₹150

इसी साल की शुरुआत में एक 8 अप्रैल 2021 को RTI के जरिए इस बात का खुलासा हुआ था कि केजरीवाल सरकार ने जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक विभिन्न प्रकार के विज्ञापनों पर ₹150 करोड़ खर्च किए हैं। एक ट्विटर यूजर आलोक भट्ट द्वारा शेयर किए गए आरटीआई से पता चला है कि जनवरी 2021 में AAP सरकार द्वारा विज्ञापनों पर 32.52 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, फरवरी 2021 में 25.33 करोड़ रुपए और मार्च 2021 में 92.48 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।

अगर इस खर्च को प्रतिदिन के हिसाब से देखें तो यह औसतन 1.67 करोड़ रुपए प्रतिदिन हो रहा है। यह सब उस दौरान किया गया कोरोना की दूसरी लहर के कारण राष्ट्रीय राजधानी में स्वास्थ्य ढाँचा चरमरा गया था। इसमें कुल खर्च प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से विज्ञापन और प्रचारों में किया गया है। केजरीवाल सरकार ने बीते 2 साल में अपने प्रचार-प्रसार पर 800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किया है।

देश में ओमिक्रॉन मरीजों की संख्या बढ़कर हुई 415, महाराष्ट्र में सबसे अधिक: 10 राज्यों में केंद्र तैनात करेगी टीम

कोरोना वायरस (Covid-19) के ओमिक्रॉन वैरिएंट (Omicron) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विदेशों में ही नहीं, बल्कि अब देश में भी इसके मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इससे न केंद्र के साथ-साथ राज्यों की चिंता भी बढ़ गई है। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार (Central Government) ने ओमिक्रॉन से सबसे अधिक अफेक्टेड 10 राज्यों में कई कई विभागों वाले एक केंद्रीय दल (multi-disciplinary central team) को तैनात करने का निर्णय लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार की ये टीमें महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, मिजोरम, कर्नाटक, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पंजाब में तैनात होंगी। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, “10 चिह्नित राज्यों में बहु-विषयक केंद्रीय टीमों को तैनात करने का निर्णय लिया गया, जिनमें से कुछ ओमिक्रॉन और कोरोना के मामलों की बढ़ती संख्या और कुछ टीकाकरण की धीमी गति दर्ज कर रहे हैं।”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union health ministry) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मरीजों की कुल संख्या अब 415 पर पहुँच गई है। इनमें से अब तक 115 मरीज या तो स्वस्थ हो गए हैं या फिर कहीं माइग्रेंट कर गए हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के बीच देश भर की 61 प्रतिशत वयस्क आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं, 89 प्रतिशत लोगों ने फर्स्ट डोल ले लिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण 11 राज्यों में टीकाकरण की गति को लेकर चिंता जाहिर की है। ये 11 राज्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, नागालैंड, ओडिशा, मेघालय, झारखंड, मणिपुर नागालैंड और पंजाब हैं। इन राज्यों में टीकाकरण की दर राष्ट्रीय औसत से कम है।

राज्यों में ओमिक्रॉन के मरीजों की संख्या

कई राज्यों में ओमिक्रॉन वैरिएंट की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इस वैरिएंट के मरीजों के मामले में महाराष्ट्र देश में नंबर वन पर है। यहाँ कुल 108 केस दर्ज किए गए हैं। वहीं, दिल्ली में 70, गुजरात में 43, तेलंगाना में 38, केरल में 37, तमिलनाडु में 34, कर्नाटक में 31, राजस्थान में 22 में ओमिक्रॉन के मरीज हैं। इसके अलावा हरियाणा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में 4-4 केस सामने आए हैं। पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर में 3-3 केस, जबकि चंडीगढ़, उत्तराखंड और लद्दाख में एक-एक ओमिक्रॉन के मरीज मिले हैं।

बहरहाल अच्छी बात यह है कि देश में अब तक 141 करोड़ से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है।

युवाओं के लिए 1 करोड़ टैबलेट-स्मार्टफोन, मुफ्त इंटरनेट, कंटेंट भी फ्री मिलेगा: CM योगी ने वीर सावरकर और गुरु गोविंद को किया याद

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ स्थित ‘भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम’ से दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती ‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर राज्य के विद्यार्थियों हेतु’1 करोड़ निःशुल्क टैबलेट व स्मार्टफोन वितरण अभियान’ का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम योगी ने कहा कि आज अटल जी हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वो हमेशा हमें प्रेरणा देते रहते हैं, उन्होंने कहा था सिद्धांत विहीन राजनीति मौत का फंदा होती है, जो व्यक्ति समाज के लिए जीता है, उसका ही जीवन प्रेरणादायी होता है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन के खिलाफ किसने अफवाह फैला कर जान का संकट पैदा किया था, ये याद रखना है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश से बाहर जाने वाले युवाओं को होटल में कमरा तक नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश का युवा देश-दुनिया में जहाँ भी जाता है, उसकी धाक होती है।

इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन युवक-युवतियों की भी चर्चा की, जिन्होंने खेल से लेकर स्टार्टअप्स तक में उत्तर प्रदेश का परचम लहराया। उन्होंने याद दिलाया कि मथुरा को अत्याचार से मुक्त करने वाले भगवान श्रीकृष्ण जब कंस के अत्याचार से मथुरावासियों को मुक्त करा रहे थे, तब वो युवा ही थे। उन्होंने कहा कि विश्व को निर्वाण का सन्देश देने वाले बुद्ध हों या फिर आदि शंकराचार्य – ये युवा ही थे।

उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिभा को रखने वाले स्वामी विवेकानंद को भी याद किया, जो मात्र 40 वर्ष जीवित रहे। उन्होंने कहा कि ‘सवा लाख से एक लड़ाऊँ’ कहने वाले गुरु गोविंद सिंह, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप और महारानी लक्ष्मीबाई को कौन भूल सकता है। उन्होंने तर्क के साथ अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि 1857 स्वतंत्रता संग्राम युद्ध के समय रानी लक्ष्मीबाई की उम्र मात्र 23 वर्ष थे। उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, ठाकुर रौशन सिंह और अशफाकुल्लाह खान को याद करते हुए कहा कि सब युवा ही थे।

उन्होंने रामप्रसाद बिस्मिल को याद किया, जिन्होंने फाँसी से पहले अपनी अंतिम इच्छा मुक्ति नहीं, बल्कि देश-धर्म की रक्षा के लिए बार-बार जन्म व मृत्यु की कामना की थी। उन्होंने वीर सावरकर को याद करते हुए कहा कि वो एकमात्र ऐसे क्रांतिकारी हैं, जिन्हें दो-दो आजीवन कारावास की सज़ा मिली और उनकी उम्र तब 28 वर्ष ही थी। वर्षों कालापानी में बंद रहने के बावजूद वो वहाँ कैद अपने भाई के बारे में नहीं जान पाए थे। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि अभिमन्यु ने मात्र 16 वर्ष की उम्र में पराक्रम दिखाया।

सीएम योगी ने कहा कि टैबलेट और स्मार्टफोन के साथ-साथ मुफ्त में इंटरनेट और कंटेंट की सुविधा भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की ओर उनकी सरकार अग्रसर है। इसकी शुरुआत करते हुए 60,000 युवाओं को टैबलेट प्रदान किया गया। उन्होंने प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसे कार्यक्रम कर के ‘डिजिटल क्रांति’ को गाँव-गाँव पहुँचाने का संकल्प लिया, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी इसका पूरा फायदा मिले।

सीएम योगी ने कहा, “पहले सरकारी नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद होता था। नौकरी निकलते ही एक खानदान, वंश के लोग वसूली पर निकल पड़ते थे। महाभारत का कोई रिश्ता नहीं छूटता था, जो वसूली पर नहीं निकलता था। शकुनी मामा, दुर्योधन भाँजा, दुशासन और कहीं कोई भतीजा निकल पड़ता था। कोरोना के समय देखा कि तकनीक का व्यक्ति के जीवन में बड़ा महत्व है। बच्चे बताते थे कि स्मार्टफोन, टैबलेट न होने की वजह से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। तब हमने तय किया कि राज्य के 1 करोड़ युवाओं को टैबलेट देने की सुविधा से जोड़ेंगे।”

ईसाई धर्मांतरण का विरोध करने वाले हिन्दुओं को स्वरा भास्कर ने बताया ‘गधों की बारात’, रास नहीं आया सेंटा क्लॉज का पुतला जलाना

क्रिसमस के मौके पर आगरा में जब हिन्दू कार्यकर्ताओं ने सेंटा क्लॉज का पुतला जलाया तो अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने उन्हें ‘गधो की बरात’ कह डाला। बता दें कि इस दिन कई हिन्दू ‘तुलसी पूजन दिवस’ भी मनाते हैं और कहते हैं कि प्लास्टिस के पौधे को सजाने से अच्छा है कि इस दिन आयुर्वेद में अहम स्थान रखने वाली तुलसी के पौधे का पूजन किया जाए। आगरा में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं का गुस्सा सेंटा क्लॉज पर फूटा और उन्होंने उसका पुतला जलाया।

साथ ही इस दौरान हिन्दू कार्यकर्ताओं ने ‘सेंटा क्लॉज वापस जाओ’ के नारे भी लगाए। इस दौरान ‘अंतरराष्ट्रीय हिन्दू परिषद’ ने पश्चिमी सभ्यता से प्रभावित हो रहे हिन्दुओं के प्रति आक्रोश जताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को किसी भी कीमत पर गुमराह होने से रोका जाएगा और मिशनरियों के धर्मांतरण के धंधे को बंद किया जाएगा। सेंट जोन्स चौराहे पर क्रिसमस से एक दिन पहले शुक्रवार (24 दिसंबर, 2021) को ये विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। हिन्दुओं का कहना था कि सेंटा क्लॉज के माध्यम से हिन्दू बच्चों को भ्रमित किया जाता है।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, क्षेत्रीय महामंत्री अज्जू चौहान ने कहा कि बच्चों को धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने के लिए मिशनरियों ने सेंटा क्लॉज को एक माध्यम बना दिया है और कुछ शिक्षण संस्थान में इस खेल में शामिल होकर घर-घर पश्चिमी सभ्यता को पहुँचा रहे हैं। उन्होंने ऐसे शिक्षण संस्थानों को चेताते हुए कहा कि अगर उन्होंने इन करतूतों पर विराम नहीं लगाया तो इन संस्थानों के सामने विरोध प्रदर्शन होगा। गरीबों को लालच देकर धर्मांतरण का मुद्दा भी उठाया गया।

संगठन के पदाधिकारियों ने तय किया कि गरीब बस्तियों की निगरानी कर के पिछड़े समाज के लोगों को मिशनरियों के धर्मांतरण के जाल में फँसने से रोका जाएगा। इसके लिए टीम का गठन भी कर दिया गया है। हालाँकि, स्वरा भास्कर को ये सब रास नहीं आया और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर दिया। इसके लिए लोगों ने भी स्वरा भास्कर की क्लास ली और पूछा कि ये ‘गधो की बारात’ है तो वो क्या था, जब वो CAA विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा ले रही थीं? साथ ही उनकी उस समय की तस्वीर भी शेयर की।

कोहली नहीं… राहुल द्रविड़ करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस: भारत-दक्षिण अफ्रीका टेस्ट से पहले BCCI-विराट बवाल

भारतीय क्रिकेट टीम साउथ अफ्रीका दौरे (Indian cricket team south africa tour) पर गई है। इस दौरान टीम तीन वनडे और 3 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। इससे पहले हालाँकि BCCI और विराट कोहली के बीच जारी अंदरूनी घमासान एक बार फिर से सामने आ गया है। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इस बार राहुल द्रविड़ का नाम भी इसमें शामिल है।

साउथ अफ्रीका और भारत के बीच रविवार (26 दिसंबर 2021) को बॉक्सिंग डे टेस्ट (Boxing day test) खेला जाएगा। इससे पहले शनिवार को होने वाले आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीम के कप्तान विराट कोहली (Virat kohli) की जगह राहुल द्रविड़ (Rahul dravid) मीडिया को संबोधित करेंगे। स्पोर्ट्स मीडिया की रिपोर्टों से यह खुलासा हुआ है।

नियमानुसार आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट कोहली को शामिल होना चाहिए था, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसा नहीं होगा। कहा जा रहा है कि इस सीरीज में रोहित शर्मा की जगह उपकप्तान बनाए गए केएल राहुल (KL Rahul) शामिल होंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस आज (शनिवार, 25 दिसंबर 2021) शाम 4:30 बजे होगी। इस तरह की रिपोर्ट के पीछ तर्क यह दिया जा रहा है कि विराट कोहली को लेकर BCCI कोई और बवाल मोल नहीं लेना चाहता है।

कोहली, कप्तान, BCCI और विवाद

BCCI में विराट कोहली को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। पिछले दिनों BCCI ने बड़ा कदम उठाते हुए कोहली से वनडे और टी20 के कप्तान पद की जिम्मेदारी छीन ली थी। खबर यह भी आई थी कि उससे पहले बोर्ड ने उन्हें स्वत: पद छोड़ने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। जब कोहली की ओर से कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला, तो बोर्ड ये एक्शन लिया था।

बाद में BCCI चेयरमैन सौरव गांगुली (Saurav ganguli) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि विराट से केवल वनडे की कप्तानी वापस ली गई है। उनसे टी20 की कप्तानी छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था। लेकिन असली बवाल तब खड़ा हुआ, जब विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना होने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सौरव गांगुली के उस दावे को खारिज कर दिया। उनके बयान से हंगामा खड़ा होने के बाद अब बोर्ड काफी सतर्क हो गया है।

‘मिनी पाकिस्तान’ मेवात में बजरंग दल की शांतिपूर्ण रैली से मुस्लिमों में ‘डर’: ‘लोनी लिंचिंग’ में झूठ फैलाने वाला केरल का इस्लामी मीडिया का प्रोपेगेंडा

इस्लामिक संगठन मकतूब मीडिया के मल्टीमीडिया पत्रकार मीर फैसल ने 24 दिसंबर को ट्विटर पर मेवात में बजरंग दल की रैली के बारे में कई वीडियो पोस्ट किया और कहा कि इसके जरिए क्षेत्र के हिंदू और मुस्लिम के बीच ‘सांप्रदायिक विभाजन’ पैदा करने की कोशिश की जा रही है। वीडियो के बाद उन्होंने मकतूब मीडिया का एक आर्टिकल साझा किया, जिसमें कहा गया है कि मेवात के मुस्लिम हिंदू संगठनों के भय में जी रहे हैं। बता दें कि मेवात ‘मिनी पाकिस्तान’ के रूप में कुख्यात है और यहाँ हिंदू महिलाओं का अपहरण, बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और जिहादी हिंसा के कारण हिंदू समुदाय पलायन अथवा डर के साये में धर्मांतरण करने को विवश हैं।

मीर फैसल ने अपने ट्विटर थ्रेड में कहा कि 12 दिसंबर को बजरंग दल के सदस्य जीत वशिष्ठ ने मेवात के मुस्लिम बहुल इलाके नूँह की एक भगवा रैली का वीडियो फेसबुक पर पोस्ट किया था। मीर का कहना है कि मुस्लिम घरों के सामने जय श्रीराम के नारे लगाए गए। रैली में 500 से अधिक कारों में ‘हिंदुत्व समर्थक’ थे और वे मेवात का भगवाकरण आए थे।

मकतूब मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि 500 ​​से अधिक कारों में बजरंग दल के सदस्य हरियाणा के मेवात जिले के नूँह के सिंगार गाँव में घुसे। जीत द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में उन्होंने कहा, “हम सिंगार गाँव में हैं, जहाँ भगवान कृष्ण ने श्रृंगार किया था और हमारे भाईचारे कारण एक विशेष समुदाय (मुसलमान) की आबादी इतनी विशाल हो गई।”

वहीं, मकतूब मीडिया ने डर फैलाते हुए दावा किया कि मेवात के मुसलमान डर में जी रहे हैं, जबकि वीडियो में जीत कहते हैं कि मेवात में जाने को लेकर धमकी भरे मैसेज मिल रहे थे। उन्होंने कहा, “हम उतने कमजोर नहीं हैं, जितना आप (मुसलमान) सोचते हैं। हम आपके मैसेज और टिप्पणियों से नहीं डरते।”

मकतूब मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में हरियाणा पुलिस पर आरोप लगाते हुए लिखा है कि जब रैली हिंदू मंदिर से आगे बढ़ी तो वहाँ खड़ी पुलिस मूकदर्शक बनी रही। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उन्होंने पुलिस से रैली के लिए अनुमति के बारे में पूछा तो पुलिस ने कहा, “इस रैली के बारे में सभी जानकारी मुख्य पुलिस मुख्यालय में दर्ज है। आप वहाँ से और जानकारी ले सकते हैं।”

उसी रिपोर्ट मे मकतूब मीडिया ने इस भगवा रैली के बारे में दावा किया है कि ‘स्थानीय मुसलमानों में डर बढ़ रहा है’। मुस्तफा नाम के एक ग्रामीण के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे मुसलमानों का ‘दिल दुखता है’, लेकिन वे ‘इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते’। उसी ग्रामीण का हवाला देते हुए रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उन्होंने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की, क्योंकि वे जानते थे कि ‘कुछ नहीं होगा’, क्योंकि ‘पुलिस उन लोगों के साथ है और हमारे साथ नहीं। कोई हमारी नहीं सुनता, न पुलिस और न ही सरकार’।

मुस्तफा ने अंतरधार्मिक विवाह के एक मामले के बारे में भी बात की। गाँव के ही एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा एक हिंदू लड़की से शादी को लेकर कहा, “तब से कुछ लोगों का मकसद सिर्फ हमारे खिलाफ हिंसा करना है।” मकतूब मीडिया हाफिज नाम के एक अन्य व्यक्ति का हवाला देते हुए कहा कि ‘हिंदुत्व मानसिकता के लोग’ ‘मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा की कोशिश कर रहे हैं’।

मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के दावों को निम्नलिखित बिंदुओं में रखा सकता है:

1. भगवा रैली शांतिपूर्ण नहीं थी और इसने मुस्लिमों के दिल में डर पैदा किया
2. बजरंग दल की रैली को आवश्यक अनुमति नहीं मिली थी। हालाँकि, रिपोर्ट में कहा गया ‘सूचना पुलिस स्टेशन में उपलब्ध है’ से स्पष्ट है कि अनुमति ली गई थी।
3. उनका आरोप है कि पुलिस बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को किसी तरह बचा रही थी, क्योंकि वह ‘चुपचाप सड़क पर खड़ी थी’।
4. यह रैली एफआईआर दर्ज कराने लायक थी, लेकिन स्थानीय लोग ‘डर’ रहे थे और पुलिस ‘मिली हुई’ थी।

हालाँकि, उपरोक्त सारे तथ्य गलत हैं। ऑपइंडिया ने हरियाणा पुलिस से जब संपर्क किया तो बताया गया कि नूँह में हिंदुओं की रैली के लिए सभी आवश्यक अनुमति ली गई थी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि रैली पूरी तरह से शांतिपूर्ण थी और इस दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

इसके अलावा मकतूब मीडिया ने बेहद शातिर तरीके से कहा कि रैली को लेकर एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, लेकिन जब रैली के लिए अनुमति ली गई थी और रैली शांतिपूर्ण थी तो प्राथमिकी क्यों दर्ज की जानी चाहिए, इसको लेकर रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं किया गया है। दरअसल, रिपोर्ट से ऐसा लगता है कि वे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ ‘मुस्लिम बहुल क्षेत्र’ में जय श्रीराम के नारे लगाने के लिए प्राथमिकी चाहते हैं। मकतूब मीडिया के अनुसार, जय श्रीराम कहने से मुस्लिम हिंसक हो सकते हैं, जिसका दोष बजरंग दल पर जाता है।

अब जानने की कोशिश करते हैं कि कौन है मकतूब मीडिया। मकतूब एक मीडिया पोर्टल है, जो केरल से संचालित होता है। हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार करने और छोटी-छोटी घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देने के लिए यह कुख्यात है। उत्तर प्रदेश की लोनी की घटना में भी इस मीडिया पोर्टल ने इसी तरह का झूठ फैलाने की कोशिश की थी।

लोनी की घटना में ‘पीड़ित’ अब्दुल समद सैफी को उसके परिचित लोगों ने पीटा था, क्योंकि उसने जो ताबीज उन लोगों को दिया था, वह सही ढंग से काम नहीं किया था। इस मामले में आरोपी परवेज गुर्जर, आदिल और कल्लू को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन यूपी पुलिस के स्पष्टीकरण के बावजूद इस्लामी वेबसाइट मकतूब आरोपी मुस्लिम युवकों को निर्दोष बताता रहा और प्रोपेगेेंडा फैलाता रहा।

‘आज़ादी में सिखों के योगदान का गवाह है जलियाँवाला’: PM मोदी ने बताया ‘पेशकब्ज की तलवार’ के बारे में, जिसे अमेरिका ने लौटाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (25 दिसंबर, 2021) को गुजरात के कच्छ में स्थित लखपति साहिब में आयोजित गुरु नानक के देव जी के प्रकाश परब से सम्बंधित कार्यक्रम को सम्बोधित किया। ये गुजरात के सिखों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहाँ 23 दिसंबर से लेकर 25 दिसंबर तक हर साल राज्य के सिख इस कार्यक्रम को मनाते हैं। लखपत साहिब गुरुद्वारा में गुरु नाक से जुड़ी खड़ाऊँ के अलावा पालकी और गुरुमुखी लिपि में कुछ पांडुलिपियाँ सहेज कर रखी गई हैं। पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी याद किया और कच्छ में उनके द्वारा किए गए कार्यों की चर्चा की।

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि गुरुद्वारा लखपत साहिब समय की हर गति का साक्षी रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब वो इस पवित्र स्थान से जुड़ रहे हैं, तो उन्हें याद आ रहा है कि अतीत में लखपत साहिब ने कैसे कैसे झंझावातों को देखा है। उन्होंने याद किया कि एक समय ये स्थान दूसरे देशों में जाने के लिए, व्यापार के लिए एक प्रमुख केंद्र होता था। पीएम मोदी ने कहा कि 2001 के भूकम्प के बाद मुझे गुरु कृपा से इस पवित्र स्थान की सेवा करने का सौभाग्य मिला था और उन्हें याद है, तब देश के अलग-अलग हिस्सों से आए शिल्पियों ने इस स्थान के मौलिक गौरव को संरक्षित किया।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे प्राचीन लेखन शैली से यहाँ की दीवारों पर गुरुवाणी अंकित की गई और इस प्रोजेक्ट को तब यूनेस्को ने सम्मानित भी किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु नानकदेव जी का संदेश पूरी दुनिया तक नई ऊर्जा के साथ पहुँचे, इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दशकों से जिस करतारपुर साहिब कॉरिडोर की प्रतीक्षा थी, 2019 में हमारी सरकार ने ही उसके निर्माण का काम पूरा किया। पीएम मोदी ने बताया कि कुछ महीने पहले जब वो अमेरिका गए थे, तो वहाँ अमेरिका ने भारत को 150 से ज्यादा ऐतिहासिक वस्तुएँ लौटाईं।

उन्होंने जानकारी दी कि इनमें से एक पेशकब्ज या छोटी तलवार भी है, जिस पर फारसी में गुरु हरगोबिंद जी का नाम लिखा है, यही ये वापस लाने का सौभाग्य भी हमारी ही सरकार को मिला। उन्होंने ध्यान दिलाया कि अभी हाल ही में हम अफगानिस्तान से ससम्मान गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को भारत लाने में सफल रहे हैं, गुरु कृपा का इससे बड़ा अनुभव किसी के लिए और क्या हो सकता है? पीएम मोदी ने कहा कि ये गुजरात के लिए हमेशा गौरव की बात रहा है कि खालसा पंथ की स्थापना में अहम भूमिका निभाने वाले पंज प्यारों में से चौथे गुरसिख, भाई मोकहम सिंह जी गुजरात के ही थे।

बता दें कि देवभूमि द्वारका में उनकी स्मृति में गुरुद्वारा बेट द्वारका भाई मोहकम सिंघ का निर्माण हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि गुरु नानक देव जी और उनके बाद हमारे अलग-अलग गुरुओं ने भारत की चेतना को तो प्रज्वलित रखा ही, भारत को भी सुरक्षित रखने का मार्ग बनाया। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुओं का योगदान केवल समाज और आध्यात्म तक ही सीमित नहीं है। बल्कि हमारा राष्ट्र, राष्ट्र का चिंतन, राष्ट्र की आस्था और अखंडता अगर आज सुरक्षित है, तो उसके भी मूल में सिख गुरुओं की महान तपस्या है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “जिस तरह गुरु तेगबहादुर जी मानवता के प्रति अपने विचारों के लिए सदैव अडिग रहे, वो हमें भारत की आत्मा के दर्शन कराता है। जिस तरह देश ने उन्हें ‘हिन्द की चादर’ की पदवी दी, वो हमें सिख परंपरा के प्रति हर एक भारतवासी के जुड़ाव को दिखाता है। औरंगज़ेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर का पराक्रम और उनका बलिदान हमें सिखाता है कि आतंक और मजहबी कट्टरता से देश कैसे लड़ता है। इसी तरह, दशम गुरु, गुरुगोबिन्द सिंह साहिब का जीवन भी पग-पग पर तप और बलिदान का एक जीता जागता उदाहरण है।”

पीएम मोदी ने इतिहास का जिक्र करते हुए याद किया कि अंग्रेजों के शासन में भी हमारे सिख भाइयों-बहनों ने जिस वीरता के साथ देश की आज़ादी के लिए संघर्ष किया, हमारा आज़ादी का संग्राम, जलियाँवाला बाग की वो धरती, आज भी उन बलिदानों की साक्षी है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कच्छ से कोहिमा तक, पूरा देश एक साथ सपने देख रहा है, एक साथ उनकी सिद्धि के लिए प्रयास कर रहा है। बकौल पीएम मोदी, आज देश का मंत्र है- एक भारत, श्रेष्ठ भारत। आज देश का लक्ष्य है- एक नए समर्थ भारत का पुनरोदय। आज देश की नीति है- हर गरीब की सेवा, हर वंचित को प्राथमिकता।

सनी लियोनी के ‘मधुबन में राधिका नाचे’ गाने पर बैन की माँग, इस्लामी प्रतीकों पर ऐसे अश्लील गाने बनाने का चैलेंज

सनी लियोनी का मधुबन गाना (Sunny Leone’s Madhuban song) 3 दिन पहले 22 दिसंबर 2021 को रिलीज किया गया था। तब से यह गाना अपने अपने डांस (फिल्मांकन) आदि के कारण विवादों में है। मधुबन में राधिका नाचे रे (madhuban me radhika nache re) गाने में हिंदू धर्म-संस्कृति के प्रतीकों, नामों आदि का जैसा चित्रण किया गया है, उसे लेकर अब मथुरा के संतों ने इस पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है।

मधुबन (Madhuban) नाम के गाने पर सनी लियोनी के डांस को अश्लील बताया गया है। आरोप लगाया गया है कि इस गाने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। वृन्दावन के संत नवल गिरि महाराज ने तो यहाँ तक कहा है कि जब तक सनी लियोनी माफी नहीं माँगेगी, उन्हें भारत में नहीं रहने दिया जाए।

सनी लियोनी के मधुबन गाने को लेकर संत नवल गिरि महाराज ने कहा है कि अगर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करेगी या प्रतिबंध नहीं लगाएगी तो वो इसे मुकदमे के जरिए कोर्ट में ले जाएँगे। वृन्दावन के संत नवल गिरि महाराज के अनुसार इस गाने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए

संत नवल गिरि महाराज के साथ-साथ अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने भी सनी लियोनी के मधुबन गाने (Sunny Leone’s Madhuban song) पर आपत्ति जताई है। इनका कहना है कि जिस तरह से इस गाने को फिल्माया गया है, इससे पूरे बृजभूमि की छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल हुई है।

सोशल मीडिया पर भी लोग इस गाने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कुछ तो इतना तक लिख गए कि क्या इन प्रोड्यूसरों को इस्लाम के प्रतीकों को लेकर ऐसे गाने बनाने की हिम्मत है? जबकि कुछ ऐसे गानों का बायकॉट कर इसे आर्थिक क्षति पहुँचाने और सबक सिखाने की बात कर रहे हैं।

आपको बता दें कि सनी लियोनी के मधुबन गाने को कनिका कपूर और अरिंदम चक्रवर्ती ने अपनी आवाज दी है। इसे गणेश आचार्य द्वारा कोरियोग्राफ किया गया है।

लुधियाना बम ब्लास्ट: ऐक्टिवेट करने के दौरान RDX बम हुआ ब्लास्ट: प्लांट करने गए पूर्व पुलिसकर्मी की ही मौत, हेरोइन तस्करी में हुआ था बर्खास्त

पंजाब के लुधियाना कोर्ट परिसर में गुरुवार को हुए ब्लास्ट को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पंजाब पुलिस ने फॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि कोर्ट परिसर में हुए धमाके में RDX का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने बताया कि धमाके के लिए 2 किलोग्राम RDX का इस्तेमाल किया गया था। धमाके के कारण पानी की पाइप लाइन फट गई थी। वहीं, ब्लास्ट में मारे गए व्यक्ति की पहचान पूर्व पुलिसकर्मी गगनदीप सिंह (30) के रूप में हुई है और उसके खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से लिंक सामने आए हैं।

बताया जा रहा है कि बब्बर खालसा से जुड़े हरविंदर सिंह रिंदा के निर्देश पर वह कोर्ट परिसर में बम लेकर पहुँचा था। बाथरूम में बम लेकर पहुँचने के बाद उसे मोबाइल के जरिए सक्रिय करने का निर्देश ले रहा था। इसी दौरान बम ब्लास्ट हो गया और गगनदीप खुद मारा गया।

केंद्रीय जाँच एजेंसी NIA ने जब घटनास्थल की जाँच के दौरान मोबाइल फोन और डोंगल मिले थे। इसके अलावा, उसकी जेब में 500 रुपये भी मिले थे। जाँच अधिकारियों ने इन्हीं नंबरों के आधार पर जाँच शुरू की। इस दौरान अधिकारियों को पता चला कि यह डोंगल खन्ना निवासी गगनदीप सिंह का है। मृतक के परिजनों ने भी गगनदीप के शव की पहचान कर ली है।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक गगनदीप सिंह पंजाब पुलिस में मुंशी था, लेकिन अगस्त 2019 में हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। वह 2 साल जेल में रहने के बाद सितंबर 2021 में जमानत पर बाहर आया था।

गगनदीप सिंह पुत्र अमरजीत सिंह खन्ना के जीटीबी नगर का रहने वाला था और एक महिला के साथ मिलकर तस्करी करता था। पंजाब पुलिस की STF ने गगनदीप को 785 ग्राम हेरोइन के साथ अगस्त 2019 में पकड़ा गया था। उस दौरान गगनदीप सिंह के साथ कुछ और लोग भी जुड़े हुए थे, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है। पुलिस को आशंका है कि ये लोग भी इस ब्लास्ट में शामिल हो सकते हैं।

गगनदीप छोटे कद का पहलवान टाइप का शख्स था। उसने अपने हाथ पर खंडे (सिख धर्म का प्रतीक चिह्न) का टैटू बनवा रखा था। उसके खिलाफ 11 अगस्त 2019 को U/S 21, 29-61-85 NDPS एक्ट के तहत पुलिस स्टेशन STF मोहाली फेज 4 में FIR नंबर 75 दर्ज हुई थी।

इस ब्लास्ट के पीछे बब्बर खालसा का हाथ बताया जा रहा है। बब्बर खालसा की स्थापना 1978 में की गई थी और 90 के दशक में भागकर पाकिस्तान में छिप कर बैठा वधावा सिंह बब्बर इसे संचालित करता है। बब्बर खालसा का मुख्य उद्देश्य सिखों के लिए खालिस्तान बनवाने का है। ये संगठन कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन और भारत के कुछ भागों में सक्रिय है। वहीं हरविंदर की बात करें तो ये कुछ समय पहले भारत से भागकर पाकिस्तान चला गया था। वहाँ इसने ऐसे गैंगस्टरों को एकजुट किया जो पंजाब में धमाका करवा सकें।