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भारत ही नहीं फ्रांस भी सार्वजनिक जगहों पर मुस्लिमों के नमाज पढ़ने से है परेशान, जनता के अलावा 100 फ्रांसीसी नेता कर चुके हैं विरोध

भारत के अलावा दुनिया में और भी कई देश हैं, जहाँ मस्जिद होने के बावजूद मुस्लिमों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने के कारण माहौल खराब हो रहा है। ऐसे ही देशों में एक देश फ्रांस है। फ्रांस में वर्ष 2017 में सडकों पर नमाज पढ़ने को लेकर वहाँ के लोगों में मुस्लिमों के प्रति काफी रोष फैल गया था। उस समय लगभग 100 फ्रांसीसी नेताओं ने इसके विरोध में पेरिस में फ्रांस का राष्ट्रगान गाकर सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने वाले मुस्लिमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौरान नेताओं ने फ्रांस के ध्वज वाले कपड़े पहनकर राष्ट्रगान गाते हुए पेरिस के क्लिची की सड़क पर लगभग 200 नमाजियों को नमाज पढ़ने से रोकने का प्रयास किया था। इसको लेकर दोनों समूहों में काफी विवाद भी हुआ था। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद दोनों समूहों के बीच विवाद इतना बढ़ था गया कि मामला हाथापाई तक पहुँच गया था।

फ्रांस के लोगों का कहना था कि वहाँ सार्वजनिक स्थानों पर नमाज की अनुमति नहीं है। वहीं, मुस्लिमों का कहना था कि उनके पास इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि टाउन हॉल ने मार्च में उनके नमाज पढ़ने के लिए दिए गए कमरे को वापस ले लिया था। फ्रांस में लगभग पाँच मिलियन यानी 50 लाख मुसलमान रहते हैं, जो पश्चिमी यूरोप में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है।

पेरिस रीजनल काउंसिल के अध्यक्ष वैलेरी पेक्रेस ने नमाजियों का विरोध करते हुए कहा था, “सार्वजनिक स्थान पर इस तरह कब्जा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने मध्य-दक्षिणपंथी रिपब्लिकन (centre-right Republicans) और यूडीआई पार्टियों (UDI parties) के पार्षदों और सांसदों के साथ मिलकर शुक्रवार को जुमे की नमाज पढ़ने वालों का विरोध किया था।

क्लिची (Clichy) के दक्षिणपंथी महापौर रेमी मुज़्यू ने आंतरिक सुरक्षा विभाग से सड़कों पर खुलेआम नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था, “मैं अपने शहर में सभी की शांति और स्वतंत्रता के लिए जिम्मेदार हूँ।”

अब्देल कादेर नाम के एक नमाजी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया था कि हर शुक्रवार को जुमे की नमाज पढ़ने के लिए बेहतर स्थान चाहता है। सड़कों पर रहने का उन लोगों को कोई शौक नहीं है। उसने बताया कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान फ्रांसीसी नेताओं के राष्ट्रगान गाने से बेहद नाराज था। अब्देलकादर ने कहा था कि वे फ्रांस का राष्ट्रगान (Marseillaise) गा रहे थे, हमें उकसा रहे थे, जबकि मुस्लिम भी फ्रांस के ही लोग हैं। सोशल मीडिया पर नवंबर 2017 में इस घटना के कई वीडियो भी सामने आए थे।

बता दें कि ऐसी खबरें थीं कि मुस्लिम लोग मेयर द्वारा मस्जिद को बंद करने के विरोध में नमाज पढ़ने के लिए सड़कों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके तहत हर दिन ​कम-से-कम 5,000 मुस्लिम सड़कों पर नमाज पढ़ने के लिए आते थे। हालाँकि, अधिकारियों ने मुस्लिम समुदाय के लिए एक नई मस्जिद बनवाई थी, लेकिन यह 1.5 किमी दूर थी। नमाजियों का कहना था कि इतनी दूर जाना उनके लिए मुश्किल है। दरअसल, हर शुक्रवार को सड़कों पर नमाज पढ़ने का एक उद्देश्य यह भी था कि क्लिची के सेंटर में एक नई मस्जिद खोलने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया जा सके।

‘2 लड़कियों से तेज प्रताप के अवैध सम्बन्ध, ₹5 Cr खर्च कर होटल में रखा है’: फिर बरसे मामा साधु यादव, कहा – लालू चपरासी बनने लायक भी नहीं

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने जब से क्रिश्चियन रिचेल से शादी की है तब से बिहार में लालू परिवार में सियासी घमासान शुरू है। इसकी शुरुआत तेजस्वी के नाराज मामा साधु यादव ने करते हुए उन्हें समाज का कलंक बताया तो अब मामा ने भी पलटवार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने लालू परिवार की पोल खोलनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में साधु यादव ने कहा कि लालू प्रसाद यादव खुद चपरासी बनने के काबिल भी नहीं हैं।

मामा अनिरुद्ध प्रसाद यादव उर्फ साधु यादव ने अपने ‘पोल खोल अभियान’ की शुरुआत राबड़ी देवी को लेकर की। यादव के मुताबिक, जिन राबड़ी देवी को यादव माना जाता है वो यादव नहीं बल्कि राजपूत हैं। साधु यादव ने कहा कि सुभाष और प्रभुनाथ यादव राबड़ी के भाई होंगे, लेकिन साधु यादव नहीं है। साधु यादव ने लालू और राबड़ी देवी दोनों को अपनी मेहनत के बूते मुख्यमंत्री बनवाने का दावा करते हुए कहा कि ‘लालू प्रसाद यादव’ तो चपरासी बनने के भी लायक नहीं हैं। उन्होंने ये भी कहा कि लालू से उनकी बात नहीं होती है।

साधु यादव यहीं नहीं रुके उन्होंने लालू यादव पर सत्ता में रहते हुए पद का दुरुपयोग करने और राज्य में अपराधीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। साथ ही लालू परिवार को धन का लालची करार दिया। साधु यादव ने ‘गंगाजल’ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन्हीं लोगों ने बॉलीवुड निर्देशक प्रकाश झा को पैसे देकर गंगाजल फिल्म बनवाया था और मेरी इमेज को खराब करने की कोशिश की।

तेज प्रताप यादव के हैं दूसरी लड़िकयों से संबंध

साधु यादव ने तेज प्रताप यादव के बयान के बाद खुलासा किया है कि तेज प्रताप के पटना की ही रहने वाली दूसरी जाति की एक लड़की से अवैध संबंध हैं। इसके अलावा भी एक अन्य लड़की साथ भी वो रिलेशन में हैं। इसकी पोल न खुले इसके लिए उसे 5 करोड़ खर्च कर दिल्ली के एक होटल में रखा गया है। यही कारण था तेज प्रताप यादव और दरोगा राय की पोती के बीच बात नहीं बनी और दोनों में तलाक हो गया।

गौरतलब है कि इससे पहले तेज प्रताप यादव ने साधु यादव पर जुबानी हमला करते हुए उन्होंने ‘औकात में रहने’ और ‘एक माँ का दूध’ वाली चेतावनी दी थी, जिसके बाद मामा साधू यादव ने ये खुलासा किया है। उन्होंने ‘फर्स्ट बिहार झारखंड’ न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान साधु यादव ने कहा, ”ये राजा नहीं रंक है, बिहार का कलंक है। हम यदुवंशी लोगों से भी कह रहे हैं कि इसका बहिष्कार करो। अगर ये पटना में आता है, तो इसका जूता-चप्पल से स्वागत करो। बीयर बार वाली डांसर से शादी कर रहा है। आप जिम्मेदार व्यक्ति हैं, कैसे नाजायज संबंध बनाया। अगर हम अपने बच्चे को संस्कार नहीं दे सकते हैं, तो उसे बिहार में रहने का अधिकार नहीं है।”

Oo Antava आइटम सॉन्ग के वायरल होने के बाद तिरुमला मंदिर दर्शन करने पहुँचीं सामंथा

दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु (Samantha Samantha Ruth Prabhu) एक्टर नागा चैतन्य (Naga chaitanya) से तलाक (Divorce) लेने के बाद रविवार (12 दिसंबर 2021) को तिरुमाला मंदिर (Tirumala temple) गईं। वहाँ उन्होंने भगवान का आशीर्वाद लेने के बाद मंदिर के पुजारी के साथ सेल्फी भी ली। उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वह काफ्तान ड्रेस में काफी खूबसूरत दिख रही थीं।

सामंथा तिरुमला मंदिर हमेशा जाती रहती हैं। इससे पहले एक्ट्रेस उस वक्त तिरुमला में दर्शन के लिए आईं थीं, जब उनके और तलाक को लेकर खबरें तेज थीं। इस मामले में उन्होंने मीडिया से बात करने से ही इनकार कर दिया था।

पुष्पा द राइज (Pushpa: The Rise) में आइटम सॉन्ग ओ अंटावा (Oo Antava)

इस बीच एक्ट्रेस अपनी नई फिल्म ‘पुष्पा द राइज’ (Pushpa: The Rise) को लेकर काफी चर्चा में हैं। इस फिल्म में उन्होंने पहली बार आइटम नंबर किया है। शनिवार (11 दिसंबर 2021) को रिलीज हुए पुष्पा के गाने के बोल ‘ओ अंटावा (Oo Antava)’ सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। इस गाने को इंद्रावती चौहान ने गाया है, जबकि इसके बोल चंद्रबोस ने दिए हैं।

पुष्पा फिल्म में सामंथा के अपोजिट स्टाइलिश स्टार अल्लू अर्जुन (Allu arjun) हैं। सामंथा के आइटम नंबर को वर्ष का सबसे ‘हॉट सॉन्ग’ कहा जा रहा है। इस गाने के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सामान्यतया पुरुष महिलाओं को कैसे देखते हैं।

बहरहाल, सामंथा का यह पहला आइटम नंबर है, जिसे काफी पसंद किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर अभिनेत्री के प्रशंसकों का कहना है कि ये तो अभी शुरुआत है। सिर्फ 2 दिन में इस गाने को 1 करोड़ 70 लाख लोगों ने यूट्यूब पर देख लिया है।

सामंथा और नागा चैतन्य का तलाक

पिछले महीने 2 अक्टूबर 2021 को सामंथा और नागा चैतन्य ने तलाक ले लिया था। इसको लेकर खुद सामंथा और नागा ने कहा था, “पति-पत्नी के तौर पर हमारे रास्ते अलग होते हैं, लेकिन हम हमेशा दोस्त रहेंगे।” उन्होंने 2017 में गोवा में शादी की थी। नागा चैतन्य एक्टर नागार्जुन के बेटे हैं। कहा जा रहा था कि शादी के बाद भी सामंथा फिल्मों में बोल्ड सीन्स कर रही थीं, जो कि उनके ससुर नागार्जुन (Nagarjun) को पसंद नहीं था।

‘छाती में चाकू मार दिया… आगे से नहीं, पीछे से’: हिंदू Vs हिंदुत्ववादी के चक्कर में राहुल गाँधी का भाषण बना कॉमेडी शो

कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की किताब में हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठन ISIS और बोको हराम से करने के बाद उपजे विवाद पर पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा हिंदू और हिंदुत्व में अंतर बताने के बाद अब उन्होंने एक बार फिर दोनों को परिभाषित किया है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्ववादी पीछे से पीठ में चाकू मारता है, जबकि हिंदू आगे से। राजस्थान की राजधानी जयपुर की रैली में रविवार (12 दिसंबर) को बोलते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि 2014 से सत्ता में हिंदुत्ववादी बैठे हैं और इन्हें सत्ता से बाहर करना है।

रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा, “किसानों की जो आत्मा है… उनका जो दिल है… छाती में चाकू मारा…। और भाईयों और बहनों… आगे से नहीं… यूँ नहीं (चाकू मारने का प्रक्रिया बताते हुए)… यूँ (एक सुरक्षाकर्मी के पीछे जाकर चाकू मारने का संकेत हुए)। आगे से नहीं, पीछे से। क्यों? क्योंकि वो हिंदुत्ववादी है। हिंदू अगर मारता तो आगे से मारता। हिंदुत्ववादी है तो पीछे से मारेगा।”

राहुल गाँधी ने हिंदू और हिंदुत्व के बीच अंतर को दोहराते हुए कहा कि हिंदूवादी सत्य के लिए मरता है, लेकिन हिंदुत्ववादियों को सत्य को कोई लेना देना नहीं होता। उन्होंने कहा कि एक हिंदू के लिए सत्य उसका पथ होता है। वह आजीवन सत्य की खोज में रहता है और सत्य के लिए ही मरता है। महात्मा गाँधी का उदाहरण देते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि उन्होंने पूरे जीवन सत्य की खोज की, लेकिन हिंदुत्ववादी गोडसे ने उनके सीने में तीन गोलियाँ मारकर उनकी जीवन लीला समाप्त कर दी।

रैली में बोलते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि हिंदू और हिंदुत्व एक नहीं हो सकते। जैसे दो जीवों की एक आत्मा नहीं हो सकती, उसकी तरह दो शब्दों का एक मतलब नहीं हो सकता। हर शब्द का अलग मतलब होता है। एक हिंदू सत्य की खोज में कभी झुकता नहीं है, लेकिन एक हिंदुत्ववादी को नफरत से भरा होता है, क्योंकि उसके मन में खौफ होता है। रैली में जुटे कार्यकर्ताओं से कहा कि अब वक्त आ गया है कि सत्ता में बैठे हिंदुत्ववादियों को हटाकर हिंदुओं को लाया जाए।

उन्होंने कहा, “मैं हिंदू हूँ, लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं हूँ। इस देश में दो शब्दों का टक्कर है। महात्मा गाँधी हिंदू थे और गोडसे हिंदुत्ववादी था।” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि आज देश के सारे संस्थान एक संगठन और एक हाथ में है। हर मंत्री के दफ्तर में संघ के OSD बैठे हैं।

पूरी वीडियो आप नीचे सुन सकते हैं। राहुल गाँधी जैसे युवा नेता का भाषण पूरा सुनने की सहनशक्ति अगर नहीं है तो छाती में पीछे से कैसे चाकू मारा जाता है, उसके लिए 2:14:40 के आगे से सुनें।

इसके पहले नवंबर में राहुल गाँधी ने कहा था, “हिंदुस्तान में 2 विचारधाराएँ हैं, एक कॉन्ग्रेस पार्टी की और एक RSS की। आज के हिन्दुस्तान में बीजेपी और RSS ने नफरत फैला दी है और कॉन्ग्रेस की​ विचारधारा जोड़ने, भाईचारे और प्यार की है। उनका कहना है कि आरएसएस की विचारधार आज प्यार-भाईचारे पर हावी हो गई है।”

भाजपा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आगे कहा था, “बीजेपी हिंदुत्व की बात करती है। हिंदू और हिंदुत्व में क्या फर्क है, क्या ये एक हो सकते हैं? अगर हैं तो इनका नाम क्यों एक जैसा नहीं है। ये सच में अलग हैं। क्या हिंदू धर्म में ये है कि सिख और मुस्लिम को पीटा जाए? हिंदुत्व में ये है।”

‘बहुत बड़े अभिनेता ने स्कर्ट पर हाथ रखा और दबोच लिया, देखते रहे निर्माता-निर्देशक’: बॉन्ड गर्ल ने बताया – हॉलीवुड में यौन शोषण आम

जिन्होंने जेम्स बॉन्ड पर बनी फ़िल्में देखी हैं, उन्हें नाओमी हैरिस के बारे में पता होगा। जेम्स बॉन्ड की हालिया फिल्मों ‘स्काईफॉल (2012)’ और ‘स्पेक्टर (2015)’ में उन्होंने ‘मिस ईव मनीपैनी’ का किरदार निभाया है। इस साल रिलीज हुई जेम्स बॉन्ड की फिल्म ‘नो टाइम टू डाई’ में भी वो इसी भूमिका में दिखाई दी थीं। अब नाओमी हैरिस ने मनोरंजन इंडस्ट्री में यौन शोषण को लेकर खुलासा किया है। उन्होंने अपना कड़वा अनुभव साझा करते हुए उदाहरण भी दिया है।

‘बॉन्ड गर्ल’ नाओमी हैरिस ने बताया कि कैसे एक ऑडिशन के दौरान एक बड़े अभिनेता ने उन्हें दबोच लिया था। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा व्यथित करने वाली बात ये थी कि इस दौरान फिल्म के निर्माता बस देखते रहे और उन्होंने उस बड़े अभिनेता को रोकने के लिए कुछ नहीं किया। 45 वर्षीय अभिनेत्री ने कहा कि वो खुद को ‘काफी सौभाग्यशाली’ समझती हैं कि उन्हें एक ही ऐसी घटना का सामना करना पड़ा। उन्होंने मनोरंजन इंडस्ट्री में यौन शोषण के स्तर को देखते हुए ये बात कही।

अभिनेत्री ने बताया कि जब वो अपने हिस्से के डायलॉग्स पढ़ रही थीं, तभी उसे बड़े अभिनेता ने अपने हाथ उनके स्कर्ट के ऊपर रख दिया। उन्होंने बताया कि चूँकि वो एक काफी बड़ा स्टार था, इसीलिए वहाँ मौजूद कास्टिंग डायरेक्टर और फिल्म निर्देशक ने भी कुछ नहीं कहा। उन्होंने हॉलीवुड में इसे सामान्य घटना बताते हुए कहा कि उनके जीवन का एक एकमात्र ‘Me Too’ वाला क्षण है। उन्होंने बताया कि बाद में उस अभिनेता को उस प्रोजेक्ट से निकाल दिया गया था।

नाओमी हैरिस को हाल ही में ‘Venom: Let There Be Carnage’ फिल्म में भी देखा गया है। उन्होंने 1987 में ही BBC के कार्यक्रम ‘Simon and the Witch’ से बतौर बाल अभिनेत्री मनोरंजन की दुनिया में कदम रखा था। 2002 में ’28 Days Later’ फिल्म से उन्हें लोकप्रियता मिली। इसके बाद ‘Pirates of the Caribbean’ की दो फिल्मों ‘Dead Man’s Chest (2006) और ‘At World’s End’ ने उन्हें हॉलीवुड में एक स्थापित नाम बना दिया। 2016 में ऑस्कर विजेता फिल्म ‘मूनलाइट’ के लिए उन्हें सहायक अभिनेत्री के कई पुरस्कार व नॉमिनेशन मिले।

‘शुक्राणु तस्करी’ से जन्मी बच्ची वाली फिल्म ‘अमीरा’ ऑस्कर नामांकन से बाहर: कहा गया- इजरायली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों का अपमान

मिस्र के फिल्म निर्देशक मोहम्मद दीब (Mohammad diab) की फिल्म ‘अमीरा’ (Amira) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा रखी है। दर्शक इसे खूब पसंद कर रहे हैं, लेकिन फिलिस्तीन (palastine) में इस फिल्म का जबर्दस्त विरोध किया जा रहा है। फिलिस्तीनियों ने इस फिल्म को इजरायल (israel) की जेलों में बंद उसके कैदियों का अपमान बताया है। भारी विरोध के बाद ऑस्कर के लिए भेजी गई इस फिल्म को जॉर्डन (Jorden) ने वापस ले लिया है।

यह फिल्म 17 साल की काल्पनिक फिलिस्तीनी लड़की ‘अमीरा’ (Amira) की कहानी पर आधारित है। अमीरा का पिता इजरायल की जेल में बंद है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि फिलिस्तीनी कैदी अपने शुक्राणु (Sperm) को स्मगल करके जेल से बाहर भेजवाते थे और उससे उनकी पत्नियाँ गर्भधारण करती थीं। ऐसी ही ‘शुक्राणु तस्करी’ से अमीरा का जन्म हुआ था। बाद में अमीरा को पता चलता है कि जिस कैदी को वह अपना जैविक पिता समझती है, वास्तव में वो ‘नपुंसक’ है। उसका जन्म तो इजरायल की जेल के जेलर के वीर्य (Sperm) से हुआ है।

दूसरी तरफ, फिलिस्तीनी कैदी समर्थक समूह का कहना है कि बीते 10 साल में इस तरह से फिलिस्तीन में करीब 100 बच्चों का जन्म हुआ है। फिलिस्तीनी कैदी सहायता समूह के मुताबिक, वर्तमान में इजरायल की जेलों में करीबी 4,500 फिलिस्तीनी कैदी बंद हैं। इन सभी को इजरायल के नागरिक और सैन्य ठिकानों पर आतंकी हमले के आरोप में कैद किया गया है। वहीं, फिलिस्तीनी सरकार इन कैदियों को इजरायल के कब्जे के खिलाफ लड़ना वाला स्वतंत्रता सेनानी बताती है।

अमीरा को लेकर फिलिस्तीन के संस्कृति मंत्रालय (Culture ministry) ने कहा है कि यह फिल्म कैदियों की गरिमा, उनकी वीरता और महान संघर्ष का मजाक उड़ाती है। फिलिस्तीन स्थित आतंकी संगठन हमास (Hamas) ने इसे आक्रामक करार दिया है। स्मगल किए गए शुक्राणु से बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं में से एक उम मुहन्नद अल जेबेन ने बताया कि फिल्म में इजरायल की कहानी को प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है, जबकि इसमें फिलिस्तीन के संघर्ष को कम दिखाया गया।

दो पुरस्कार जीतकर भी फिल्म को वापस लेना पड़ा

फिल्म का प्रीमियर सितंबर में वेनिस (Venis) के बिएननेल में हुआ था, जहाँ इसने दो पुरस्कार जीते थे। लेकिन फिलिस्तीनियों के विरोध के आगे इसे वापस लेना पड़ा। जॉर्डन के रॉयल फिल्म आयोग ने 2022 अकादमी पुरस्कार के नामांकन से इस फिल्म को वापस लेने की घोषणा करते हुए कहा कि वह फिल्म के कलात्मक मूल्यों का सम्मान करती है। आयोग का यह भी मानना है कि फिल्म में कैदियों की दुर्दशा और प्रतिरोध के साथ-साथ कब्जे के बावजूद एक सम्मानजनक जीवन के लिए उनकी इच्छा को उजागर किया गया है।

गौरतलब है कि इस फिल्म को जॉर्डन, फिलिस्तीन और मिस्र ने मिलकर बनाया है। फिल्म के निर्देशक मोहम्मद दीब मिस्र के रहने वाले हैं और उनकी शिक्षा अमेरिका के न्यूयॉर्क में हुई है। उन्होंने फिल्म का बचाव किया, लेकिन यह भी कहा कि स्क्रीनिंग तब तक बंद रहेगी, जब तक कि कैदियों और उनके परिवारों की एक ‘विशेष समिति’ फिल्म देखकर अपनी राय नहीं देती।

28000 शिवालयों में पूजा, 5 लाख घरों में प्रसाद वितरण: PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से यूँ बदल गई अवधूत की क्रीड़ास्थली, दिखेगा इतिहास

काशी की महिमा अपरंपार है। भगवान शिव के अवधूत स्वरूप की क्रीड़ास्थली जहाँ विश्व के नाथ स्वयं विराजित हैं, वह काशी पुन: अद्भुत, अकल्पनीय, असाधारण मंगलकारी घड़ी का साक्षी बनने जा रहा है। माँ गंगा बाबा का सीधे दर्शन कर नित्य प्रणाम करेंगी, यह युगप्रवर्तक घटना 13 दिसम्बर को होने जा रही है। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी काशी विश्वनाथ कोरिडोर का लोकार्पण करने जा रहे हैं। नरेन्द्र मोदी जी के बनारस को अपना मानने के पूर्व तक किसी ने कल्पना तक नहीं की होगी कि ऐसा असाधारण कार्य भी संभव है।

गंगा मैया को बाबा का सीधा दर्शन करते हुए देखने की भारतवासियों की अभिलाषा का पूर्ण होना एक स्वप्न के साकार होने की भाँति है। यह केवल बाबा विश्वनाथ के मंदिर के सौंदर्यीकरण का विषय भर नहीं है, अपितु संस्कृति के उदय और सभ्यता के पुनरोद्भव की अविस्मरणीय घटना भी है। काशी जिसे विश्व के एकमात्र प्राचीन जीवित नगर होने का सौभाग्य व गौरव प्राप्त है, विश्व भर के लिए सनातन संस्कृति की धार्मिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक राजधानी भी है।

यह राजधानी वैभव के परम शिखर पर होनी चाहिए थी, किंतु दुर्भाग्य से स्वतंत्रता पूर्व इस्लामी मुगल आक्रांताओं के भयानक प्रहार और स्वतंत्रता पश्चात भारतीय संस्कृति व सभ्यता की उपेक्षा करने वाली सरकारों की उदासीनता से काशी के गौरव को धूमिल करने का षडयंत्रकारी प्रयास किया जाता रहा। 2014 में नरेन्द्र मोदी ने काशी को अपने कर्मयोग की स्थली बनाई और इसकी महिमा का विश्वव्यापी गुणगान एवं इसके प्राचीन गौरव की पुनर्स्थापना का संकल्प लिया और आज वह संकल्प काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के रूप में साकार हो रही है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर परिसर के चारों और निर्मित भित्तियाँ विश्व कोने-कोने से आने वाले भक्तों को काशी और महादेव के पौराणिक इतिहास की जानकारी देगी। इन भित्तियों पर शिव की महिमा का बखान किया गया है। इन भित्तियों के प्रस्तरों पर उत्कीर्ण श्लोक व उसके भावार्थ पर विशेष प्रकाश प्रक्षेपित होगा, जिससे रात्रि में भी सरलता से पढ़ा जा सके। इन भित्तियों पर यहाँ की पौराणिकता से संबंधित चित्रों को भी उकेरा गया है। काशी विश्वनाथ धाम के अंदर और बाहर की भित्तियों पर संस्कृति, सभ्यता पर आधारित चित्र उत्कीर्ण किये गए हैं।

कॉरिडोर में चारों वेद, शिव पुराण और सनातन धर्मग्रंथों में काशी से जुड़ी जानकारियाँ हैं। भक्तों को धाम की मंदिर मणिमाला में सम्मिलित सभी 27 मंदिरों की जानकारी भी मिलेगी। इसमें प्रत्येक मंदिर पर उसके इतिहास के साथ पौराणिक महत्व का उल्लेख किया गया है। एक विशेष एप के माध्यम के भक्त दृश्य व श्रव्य माध्यम से भी मंदिरों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। काशी विश्वनाथ धाम प्रधानमंत्री मोदी जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। लोकार्पण के पश्चात बाद चलो काशी मास प्रारंभ होगा।

54000 वर्ग मीटर में व्याप्त यह कोरिडोर भारत के सांस्कृतिक गौरव को विश्व में गुंजायमान करने का वह केंद्र होगा, जो समस्त विश्व को भारतीय सभ्यता व भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करने का भाव-स्रोत बनेगा। काशी देव दीपावली की भाँति घर-घर अलंकृत की जाएगी। धाम का निर्माण कार्य दो चरणों में हुआ। प्रथम चरण की परियोजना में मंदिर चौक, वाराणसी सिटी गैलरी, म्यूजियम, बहुउद्देशीय सभागार, हॉल, भक्त के लिए सुविधा केंद्र, सार्वजनिक सुविधा, मोक्ष गृह, गोदौलिया गेट, भोगशाला, पुजारियों और सेवादारों के लिए आश्रय, आध्यात्मिक पुस्तक पैलेस और अन्य का निर्माण शामिल है।

द्वितीय चरण में मंदिर चौक से विश्वनाथ धाम परिसर के साथ ही गंगा दर्शन किए जा सकेंगे। दूसरे चरण में जलासेन घाट और ललिता घाट से रैंप का निर्माण, एस्केलेटर, सांस्कृतिक केंद्र आदि का निर्माण हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम में बनाए गए तीन प्रवेश द्वारों पर यात्री सुविधा केंद्र तैयार किया गया है। सामान सहित भक्त विश्वनाथ धाम में प्रवेश करेगा और यहाँ यात्री सुविधा केंद्र में प्रसाधन के साथ ही मोबाइल, बैग सहित अन्य सामान रखा जा सकेगा। यहाँ से भक्त गंगा घाट और विश्वनाथ मंदिर तक सरलता से पहुँच पाएँगे।

काशी विश्वनाथ धाम में सभी प्रदेशों के पर्यटन केंद्र स्थापित होगा, जिससे प्रत्येक प्रदेश के भक्तों को स्थानीय भाषा सहित अन्य पर्यटन का लाभ मिल सके। इसके लिए यात्री सुविधा केंद्र में ही सभी प्रदेशों के लिए स्थान आवंटित किया जाएगा। काशी भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक राजधानी है तो काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण समारोह भी अखिल भारतीय होना चाहिए और ऐसा ही होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 13 दिसंबर, 2021 को काशी विश्वनाथ कोरिडोर का लोकार्पण करने के साथ ही एक मास तक चलने वाला दिव्य काशी भव्य काशी अभियान का श्रीगणेश हो जाएगा, जो 14 जनवरी, 2022 तक चलेगा।

अभियान के अंतर्गत 27,700 शक्ति केंद्रों पर स्थित शिवालयों में पूजा अर्चना की जाएगी। 12 से 14 दिसंबर तक प्रदेश के सभी घरों, हाटों, घाटों व मंदिरों में दीपोत्सव मनाया जाएगा। प्रदेश के सभी 27,700 शक्ति केंद्रों पर स्थित शिवालयों तथा प्रमुख मठ मंदिरों में व्यवस्थित रूप से स्क्रीन लगा कर लोकार्पण समारोह को सीधा प्रसारण किया जाएगा। कार्यक्रमों में दिव्य काशी-भव्य काशी’ का साहित्य भी दिया जाएगा। साथ ही 5 लाख घरों में प्रसाद वितरण भी कराया जाएगा।

इस दौरान धर्माचार्यों और साधु-संतों को सम्मानित भी किया जाएगा। सभी प्रमुख मंदिरों, मठों, आश्रमों, धार्मिक स्थलों में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी गाँवों और शहरों में दीपोत्सव के लिए अभियान चलाया जाएगा। 12 से 14 दिसंबर तक काशी में लेजर शो, अग्नि-गंधक क्रीड़ा, के साथ समस्त मंदिर, नगर की दीर्घाएँ (गलियाँ), चौक व अन्य सार्वजनिक स्थान प्रकाश से नहाएँगे। 14 दिसंबर को वाराणसी में भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे। सभी मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री 13 से 15 दिसंबर तक वाराणसी में सांस्कृतिक प्रवास भी करेंगे। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की ओर से वाराणसी में ही 17 दिसंबर को महापौरों का सम्मेलन होगा। 23 दिसंबर को काशी में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर के कृषि वैज्ञानिक, उन्नत किसान सहित कृषि विशेषज्ञ भाग लेंगे।

महासम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। 12 जनवरी 2022 को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर काशी में युवा सम्मेलन का आयोजन होगा। ऐसी दिव्यता व भव्यता की ओर काशी भारतीय पर्यटन का प्रवेश द्वार बनेगा और भारतीय संस्कृति के गुणगान का अद्भुत जीवंतता को और विस्तार देगा। काशी का भारतीय पर्यटन में कितना विस्तार व महत्व बढ़ने जा रहा है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि देश का पहला रोप-वे सार्वजनिक यात्री परिवहन सेवा वाराणसी में बनने जा रही है।

वाराणसी विकास प्राधिकरण 410.30 करोड़ की लागत से इसका निर्माण कराने जा रहा है। यह सेवा वाराणसी रेलवे जंक्शन से आरंभ होकर गोदौलिया तक जाएगी। रोप-वे के स्टेशन ऐसे होंगे, जिनमें काशी के ज्ञान, कला, धर्म व संस्कृति की झलक मिलेगी। एक समय में लगभग चार हजार लोग इस रोप-वे पर यात्रा कर पाएँगे। विश्व में यह सेवा अभी तक केवल बोलीविया देश के ला पाज नगर व मेक्सिको देश की राजधानी मेक्सिको सिटी में ही है। वाराणसी विश्व का तीसरा नगर होगा, जहाँ यह सेवा होगी।

काशी और बाबा विश्वनाथ का धाम मात्र एक स्थान नहीं है, अपितु यह ज्ञान व विज्ञान आधारित लाखों वर्ष प्राचीन संस्कृति की चित्रमय सत्य कथा है। यह जीव को जीवंत करने वाली अदृश्य ऊर्जा का प्राकट्य केंद्र है, भाव है, अनुभव है, धरोहर है। काशी का कण-कण शिवमय अर्थात सत्यं शिवम् सुंदरम् की पवित्रता से सन्नद्ध है, धर्म व आध्यात्म की अलौकिक अनुभूति की पवित्र धरा है। यह देखना सौभाग्य का विषय है कि यह धरा पुन: अपने उसी जीवंत स्वरूप को व्याप्त करने जा रही है।

सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और शाहजहाँपुर बॉर्डर… देश में चार धाम का अर्थ बदल गया: योगेंद्र यादव

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने शनिवार (11 दिसंबर 2021) को दिल्ली की सीमाओं पर ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थलों की तुलना हिन्दुओं के तीर्थ स्थल चार धाम से की। गाजीपुर बॉर्डर पर एक सभा को संबोधित करते हुए यादव ने कहा, ”यह भाषणों का दिन नहीं है। किसानों ने जो कहा, उसे उन्होंने कर दिखाया है।”

योगेंद्र यादव ने आगे कहा, “अब हम नहीं बोलेंगे, लेकिन किताबें और इतिहास बोलेगा। पूरा देश बोलेगा। आज यह सिर्फ याद रखने का दिन है कि पिछले एक साल से हमारे देश में चार धाम का अर्थ बदल गया है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के लोग दिल्ली आते थे, तो कहते थे कि वे चार धाम की यात्रा करना चाहते हैं। ये चार धाम सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर और शाहजहाँपुर बॉर्डर है। ये प्रदर्शन स्थल अब देश के लिए चार धाम बन गए हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि अब से जब भी देश चंपारण आंदोलन को याद करेगा, उसके साथ वह ‘दिल्ली का मोर्चा’ भी याद करेगा। जब भी लोग कहेंगे कि देश ने 26 नवंबर को संविधान अपनाया, तो उन्हें यह भी याद आएगा कि ‘किसान’ भी 26 नवंबर को दिल्ली आए थे।

दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से भी अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन करने के बाद ‘किसान’ अब अपने घर की ओर लौटने लगे हैं। प्रदर्शनकारियों ने शनिवार (11 दिसंबर 2021) को अपने सारे तंबू उखाड़ लिए और अपना सामान बाँधकर ट्रकों पर लाद कर ले गए।

सिंघु बॉर्डर पर बनाया गया करीब 40 फुट चौड़ा और 100 फुट लंबा किसान मोर्चा का पंडाल भी हटा लिया गया है। शुक्रवार (10 दिसंबर 2021) की शाम तक करीब 40 फीसदी ‘किसान’ अपने घरों के लिए रवाना हो गए थे।

बता दें कि शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा (Samyukt Kisan Morcha) के मुख्य मंच पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग बैनर और सामान को हटाने का काम कर रहे जगतार सिंह ने बताया था कि मोर्चा फतह करने के बाद कल जाना या आज कोई फर्क नहीं पड़ता।

‘नंगी क्यों घूमती हो?’: मेल प्राइवेट पार्ट के आकार का केक काटने वाली ऐक्ट्रेस का दोस्तों को लेकर खुलासा, बताया – एक एक्स बॉयफ्रेंड ने तो…

टेलीविजन अभिनेत्री निया शर्मा ने कहा है कि कम कपड़े पहनने को लेकर उनके दोस्तों ने भी उन्हें ‘स्लट-शेम’ किया है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इसका खुलासा किया। ‘एक हजारों में मेरी बहना है’ और ‘जमाई राजा’ में अपने किरदार से लोकप्रियता बटोर चुकी अभिनेत्री ने कहा कि उनके अपने ही दोस्त अवॉर्ड शोज में उनके द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों को लेकर खुश नहीं थे और पूछते थे कि तुम अवॉर्ड समारोहों में ‘नंगी’ क्यों घूमा करती हो? उन्होंने बताया कि इसके लिए उनके दोस्तों ने गलत शब्दों का इस्तेमाल किया था।

निया शर्मा ने बताया कि उनके दोस्त उनसे पूछते थे कि तुम ये अजीब किस्म का लिपस्टिक क्यों इस्तेमाल करती हो? साथ ही वो कहते थे कि तुम टीवी का जाना-माना चेहरा हो, ये सब करती हुई अच्छी नहीं लगती हो। निया शर्मा ने इस दौरान अपने एक्स बॉयफ्रेंड के बारे में भी बात की, जो उन्हें ट्रोल करता था। ‘नागिन 4: भाग्य का जहरीला खेल’ और ‘इश्क़ में मरजावाँ’ की अभिनेत्री ने बताया कि वो जिसे डेट कर रही होती थीं, उसे उनके सोशल मीडिया छवि को लेकर समस्या रहती थी।

निया शर्मा ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता है कि आखिर सोशल मीडिया व्यक्तिगत समीकरण को कैसे खराब कर सकता है। सोशल मीडिया तो सोशल होता है न यार। उसे वहीं रहने दो।” बता दें कि विक्रम भट्ट के ‘ट्विस्टेड’ से वेब सीरीज में डेब्यू करने वाली निया शर्मा को हाल ही में ‘बिग बॉस OTT’ और ‘बिग बॉस 15’ में भी देखा गया था। हाल ही में निया शर्मा ने एक वीडियो पोस्ट कर के लिखा कि बैकलेस पहनने में पीछे नहीं हटना चाहिए। वो सोशल मीडिया पर भी खासी सक्रिय रहती हैं।

याद दिला दें कि निया शर्मा कभी मेल प्राइवेट पार्ट के आकार का केक काट कर सुर्ख़ियों में आ चुकी हैं। ‘Voot’ एप पर चल रहे ‘बिग बॉस’ के 2021 संस्करण में आते ही उन्हें ‘बॉस लेडी’ का तमगा मिला। अक्टूबर 2020 में निया शर्मा ने अपने 30वें जन्मदिन के अवसर पर मेल प्राइवेट पार्ट के आकार का केक काटा था। उन्होंने कहा था कि ये उनका सबसे ‘डर्टी’ जन्मदिन है। इसके बाद उनके कई फैंस ने भी शर्मिंदगी जताई थी और उन पर अश्लीलता फैलाने के आरोप लगे थे।

गुरुग्राम के बाद अब नोएडा में सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने को लेकर विवाद, पुलिस ने पार्क में जुटे सैकड़ों नमाजियों को लौटाया

दिल्ली-एनसीआर (Delhi- NCR) में मस्जिद की बजाए सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। साथ ही इसको लेकर विवाद भी बढ़ रहा है। गुरुग्राम (Gurugram) के बाद अब नोएडा (Noida) में सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा के सेक्टर-54 स्थित खरगोश पार्क में शुक्रवार (10 दिसंबर 2021) को जुमे (शुक्रवार) की नमाज अदा करने लिए पहुँचे सैकड़ों लोगों को पुलिस ने खदेड़ दिया।

पुलिस के प्रवक्ता पंकज कुमार ने बताया, ”जनपद में धारा-144 लागू है और सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियाँ आयोजित करने की अनुमति नहीं है।” उन्होंने बताया कि सेक्टर 54 स्थित खरगोश पार्क में सेक्टर 57, 58 59 और 60 की फैक्टरियों में काम करने वाले लोग नमाज पढ़ने आते थे। धीरे-धीरे ये संख्या बढ़कर अब हजारों में हो गई है। पुलिस ने खुले और सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रकार की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाते हुए मुस्लिमों को पार्क के पास बनी मजार या किसी मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए कहा।

मालूम हो कि मुस्लिमों द्वारा वर्ष 2015 से यहाँ खुले में नमाज पढ़ी जा रही है। इसके लिए मुस्लिम समाज एक पत्र दिखाता है, जिसमें उन्हें नोएडा अथॉरिटी द्वारा पार्क में नमाज पढ़ने की अनुमति देने का दावा किया जा रहा है।

नोएडा अथॉरिटी का पत्र

बता दें कि इससे पहले गुरुग्राम में शुक्रवार (10 दिसंबर) को खुले में नमाज पढ़ने को लेकर विवादित स्थानों पर टकराव की स्थिति बन गई थी। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने सख्त हिदायत देते हुए कहा था कि खुले में नमाज पढ़ने की प्रथा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि खुले में नमाज किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का निर्देश दिया था।