केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि CDS जनरल बिपिन रावत के असामयिक निधन के कारण इस बार ‘स्वर्णिम विजय पर्व’ काफी सादगी के साथ मनाया जाएगा। बता दें कि तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हैलोकॉप्टर हादसे में CDS जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित 13 लोगों की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में देश में शोक का माहौल है। दिल्ली में अंतिम संस्कार के बाद रावत दंपति की अस्थियों को उनकी बेटियों कृतिका और तारिणी ने हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित किया।
ये भी भावुक कर देने वाली सूचना है कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने ‘स्वर्णिम विजय पर्व’ के लिए अपने सन्देश एक वीडियो के जरिए पहले ही रिकॉर्ड कर लिया था। उनके इस वीडियो सन्देश को यहाँ प्ले भी किया गया। इंडिया गेट पर इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जहाँ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में इस वीडियो सन्देश को चलाया गया। इस दौरान वहाँ मौजूद हर एक व्यक्ति भावुक हो गया। आइए, बताते हैं उस वीडियो में जनरल रावत ने क्या कहा।
इस वायरल वीडियो मैसेज में सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा, “स्वर्णिम विजय पर्व के अवसर पर मैं भारतीय सेना के सभी बहादुर जवानों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। भारतीय सेना की 1971 की लड़ाई में जीत की 50वीं वर्षगाँठ को हम विजय पर्व के रूप में मना रहे हैं। मैं इस पावन पर्व पर सशस्त्र सेनाओं के वीर जवानों को याद करते हुए उनके बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। 12 से 14 दिसंबर तक इंडिया गेट पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।”
वीडियो में सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने इसे बड़े सौभाग्य की बात बताया कि ‘विजय पर्व’ को ‘अमर जवान ज्योति’ की लौ की छाँव में आयोजित किया जा रहा है, जिसे हमारे वीर बलिदानियों की याद में स्थापित किया गया था। इस वीडियो में उन्होंने देशवासियों को इस ‘विजय पर्व’ के जश्न में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित भी किया था और ‘हमारी सेनाओं पर हमें हैं गर्व, आओ मिल कर मनाएँ विजय पर्व’ का नारा भी दिया। उनके जाने के बाद अब ये ‘जश्न’ न होकर एक सादगी भरा आयोजन भर रह गया है।
This is Gen Bipin Rawat’s prerecorded message on the occasion of Vijay Parv. The video was recorded in the evening of 7 December 2021. No one could imagine that he will be gone after few hours. #Life surprises but #Death unfortunately is so punctual. pic.twitter.com/U1nug09om9
इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि एयरफोर्स के ऑफिस ग्रुप कमांडर वरुण सिंह का इलाज चल रहा है और वो लगातार उनके परिवार के संपर्क में हैं। बता दें कि वरुण सिंह इस हैलीकॉप्टर क्रैश में जीवन बचे एकमात्र व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि ये आयोजन पहले काफी भव्य और दिव्य करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। उन्होंने बिपिन रावत को ‘बहादुर सैनिक, ज़िंदादिल और सलाहकार’ बताते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के स्वरूप व रूपरेखा को लेकर उनसे कई बार चर्चा हुई थी, इसीलिए उनकी कमी कह रही है।
सोशल मीडिया पर गुजरात के भरूच का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बुर्का पहनी हुई कुछ महिलाओं को ‘मटरिया तालाव’ स्थित एक सार्वजनिक पार्क में नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे महिला नीचे चादर बिछा कर पार्क में ही नमाज पढ़ना शुरू कर देती हैं, जबकि बच्चे आसपास खेल रहे होते हैं। कुछ अन्य महिलाएँ पार्क में व्यायाम कर रही होती हैं। देखें वीडियो:
वहीं हम अब आपको एक अन्य वीडियो दिखा रहे हैं, जो किसी और पार्क का है। इसमें देखा जा सकता है कि एक बुजुर्ग पार्क की स्लाइड पर ही खड़ा होकर अजान पढ़ रहा है, जिसका इस्तेमाल बच्चे खेलने-कूदने के लिए करते हैं। आसपास खेल रहे बच्चों की परवाह किए बिना वो ऊपर चढ़ कर अजान पढ़ रहा होता है। देखें वीडियो:
इसके अलावा एक और वीडियो है। ये वीडियो कुछ दिन पहले ही वायरल हो गया था। इसमें कुछ मुस्लिम महिलाओं को अहमदाबाद के वस्त्रपुर लेक पार्क में खुलेआम नमाज पढ़ते हुए देखा जा सकता है। देखिए:
‘मटरिया तालाव’ पार्क जैसे सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़े जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से कुछ मुस्लिम महिलाओं ने यहाँ नमाज पढ़ना शुरू किया है। उक्त व्यक्ति ने बताया कि महिलाओं और बुजुर्गों को आगे कर के वो अपनी ‘सॉफ्ट स्ट्रीट पॉवर’ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। महिलाएँ आकर नमाज पढ़ती हैं और बुजुर्ग अजान करते हैं। स्थानीय व्यक्ति ने इसे भड़काऊ कृत्य बताते हुए कहा कि अगर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी तो वो ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने उतर पड़ेंगे।
वहीं बच्चों के खेलने-कूदने के लिए रखी गई स्लाइड पर चढ़ कर बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा अजान पढ़ने को लेकर उक्त व्यक्ति ने कहा कि इस पूरे इलाके में एक भी मुस्लिम निवासी नहीं है। उसने पूछा कि जब मुस्लिम इस इलाके में रहते ही नहीं हैं तो वो बुजुर्ग ऊपर चढ़ कर किन्हें अजान पढ़ने के लिए बोल रहा है? सूत्रों का कहना है कि ये सब पिछले एक सप्ताह से शुरू हुआ है। बता दें कि हरियाणा के गुरुग्राम में भी खुले में सैकड़ों की मुस्लिम भीड़ द्वारा नमाज पढ़ने का मुद्दा गरमाया हुआ है।
आत्मज्ञान के प्रकाश से काशी जगमगाती है। काशी सब वस्तुओं को आलोकित करती है। जो इस सत्य को जान गया वह काशी में एकरूप हो जाता है।
जिस श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Shri Kashi Vishwanath Corridor) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (13 दिसंबर 2021) को देश को समर्पित करेंगे, वहाँ उत्सव का वातावरण है। दिव्यता है, भव्यता है और काशी की वह जीवंत आध्यात्मिकता भी। दूर से ही अब उस मंदिर (Shri Kashi Vishwanath Temple) का कॉरिडोर दिखता है, जिसे 1669 में इस्लामी शासक औरंगजेब के आदेश पर ध्वस्त कर दिया गया था। जिसे उस मस्जिद से ढक दिया गया था, जिसे आज हम ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid) के नाम से जानते हैं। जिस मंदिर के आसपास अतिक्रमण और अराजकता थी, अब उस बाबा विश्वनाथ के मंदिर में सब कुछ व्यवस्थित है। काशी कॉरिडोर में दक्षिण भारत से आए श्रद्धालुओं के इस दल का वीडियो (नीचे) देखिए।
ये है मोदी का नया काशी
यह दृश्य काशी विश्वनाथ मंदिर का है। श्रद्धालु दक्षिण भारत के हैं। ठसाठस और भीड़ वाले उस मंदिर को अब भूल जाइए क्योंकि अब काशी कॉरिडोर में 2 लाख श्रद्धालु एक साथ जमा हो सकते हैं। #काशी_यात्राpic.twitter.com/xmIMjDWosI
जिन्होंने भी इससे पहले काशी विश्वनाथ का दर्शन किया हो, वहाँ की ठेलमठेल देखी हो, उनके लिए यह दृश्य स्वप्न जैसा ही होगा। लेकिन, काशी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों से 33 महीने में इस स्वप्न ने मूर्त रूप लिया है। प्रधानमंत्री ने 8 मार्च 2019 को इस कॉरिडोर की आधारशिला रखी थी। साबरमती रिवर फ्रंट को आकार देने वाले बिमल पटेल इसके आर्किटेक्ट हैं। वे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से भी जुड़े हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को काल भैरव की पूजा करने के बाद गंगा में जलमार्ग से होते हुए मंदिर पहुँचकर बाबा विश्वनाथ का पूजन-अर्चन और जलाभिषेक करेंगे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जिस ‘ललिता घाट’ से प्रवेश करेंगे वहाँ से एक सीढ़ी तैयार की जा रही है जो श्रद्धालुओं को सीधे विश्वनाथ मंदिर तक लेकर जाएगी। 9 दिसंबर को जब ऑपइंडिया की टीम कॉरिडोर में पहुँची तो इसका निर्माण कार्य चल रहा था। 5.2 लाख वर्ग फीट में फैले इस कॉरिडोर को अंतिम टच दिया जा रहा था।
अब ललिता घाट से गंगा स्नान कर श्रद्धालु सीधे बाबा का जलाभिषेक कर सकेंगे। निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
कैसा है कॉरिडोर?
ललिता घाट और विश्वनाथ मंदिर परिसर के बीच वाले कॉरिडोर के हिस्से को ‘मंदिर चौक’ का नाम दिया गया है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के सूचना जनसंपर्क अधिकारी पीयूष तिवारी ने ऑपइंडिया को बताया, “प्रधानमंत्री यहीं से कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। ये कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा है। ज्यादा भीड़ होने पर हम इस हिस्से में श्रद्धालुओं को रोक भी सकते हैं ताकि मंदिर में अव्यवस्था न हो। इसी हिस्से में एम्पोरियम बनाए गए हैं।”
बाबा विश्वनाथ के परिसर का द्वार। परिसर के चारों दिशा में द्वारा बनाए गए हैं।
5.2 लाख वर्ग फीट में फैला है कॉरिडोर
कॉरिडोर 5.2 लाख वर्ग फीट में फैला हुआ है। इसमें 33,075 वर्ग फीट में काशी विश्वनाथ मंदिर का परिसर है। इस कॉरिडोर में एक साथ 02 लाख लोग जमा हो सकते हैं। निर्माण में मकराना, चुनार के लाल बलुआ पत्थर समेत 7 विशेष पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। विश्राम गृह, संग्रहालय, सुरक्षा कक्ष और पुस्तकालय भी कॉरिडोर का हिस्सा हैं। पूरे कॉरिडोर में वृक्षारोपण के लिए जगह बनाई गई है। इनमें परिजात, रुद्राक्ष, अशोक, बेल इत्यादि पेड़ लगेंगे ताकि पूरा परिसर हरा-भरा रहे।
पूरे कॉरिडोर में वृक्षारोपण के लिए इसी तरह से जगह छोड़ी गई है
तिवारी ने बताया, “पहले जो मंदिर का परिसर था, वह केवल 3500 स्क्वायर फीट था। कॉरिडोर के लिए जब हमने घरों की खरीद शुरू की तो पहले ड्रोन सर्वे करवाया। इसमें कई पुराने मंदिर दिखे। जब हमने निर्माण शुरू किया तो इस बात का ध्यान रखा कि परिसर में अगर कोई श्रद्धालु बाहर से आए तो उसे वह हर सुविधा दी जाए जो एक धार्मिक स्थल में उसे मिलना चाहिए।” वे बताते हैं, “मेन गेट के बगल में यात्री सुविधा केंद्र बनाया गया है। सुरक्षा जाँच के बाद श्रद्धालु मंदिर परिसर में प्रवेश करेंगे। इसमें चार द्वार बनाए गए हैं, जो चारों दिशाओं में हैं। यह परिसर चुनार के लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है और इसका फर्श मकराना के सफेद संगमरमर से बना है। इस परिसर में अभी वृक्षारोपण होना है। इसी तरह गंगा की तरफ से भी प्रवेश की सुविधा है।”
बाबा का दर्शन करने के लिए कतारबद्ध श्रद्धालु
सुविधा केंद्र से लेकर वैदिक केंद्र तक
तिवारी ने बताया कि पूरे कॉरिडोर में तीन यात्री सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा गेस्ट हाउस, धार्मिक पुस्तकों की बिक्री का केंद्र, जलपान केंद्र, सिटी म्यूजियम, वाराणसी गैलरी, मुमुक्षु भवन इत्यादि भी हैं। योग साधना के लिए वैदिक केंद्र है। सिटी म्यूजियम और वाराणसी भवन दोनों संग्रहालय हैं और तिवारी के अनुसार अलग-अलग उद्देश्यों से बनाए गए हैं। कॉरिडोर में कैफे बिल्डिंग है। गंगा व्यू गैलरी है, जहाँ बैठकर गंगा का पूरा दृश्य देखा जा सकता है। इसके अलावा एम्पोरियम है। उन्होंने बताया, “एम्पोरियम वाले हिस्से में जीआई उत्पादों के बड़े-बड़े शोरूम होंगे।” वे कहते हैं, “इस परियोजना को बनाने का जो मुख्य उद्देश्य था वह यह है कि सावन के सोमवार और शिवरात्रि पर करीब ढाई से तीन लाख लोग आते हैं। उस दौरान पूरा शहर, पूरी गलियाँ ठसाठस भरी होती हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए लोगों को कम से कम तीन से चार किमी की दूरी तय करनी पड़ती थी। अब गंगा स्नान कर श्रद्धालु सीधे कॉरिडोर में प्रवेश करेंगे। बाबा का जलाभिषेक करेंगे और शहर में निकल जाएँगे। मंदिर परिसर वाले ही हिस्से में एक वक्त में कम से कम 10 हजार लोग अब आ सकते हैं।”
40 ऐसे मंदिर मिले जो घरों में दब गए थे
वाराणसी के आयुक्त दीपक अग्रवाल बताते हैं कि इस कॉरिडोर के लिए जिस बोर्ड का गठन किया गया था, उसने कुल 314 घरों की खरीद की थी। जब कॉरिडोर निर्माण के लिए इन घरों को तोड़ने का काम शुरू किया गया तो करीब 40 ऐसे प्राचीन मंदिर मिले जो अतिक्रमण की वजह से लुप्त हो चुके थे। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती कॉरिडोर वाले हिस्से में जिनलोगों की संपत्ति आ रही थी उन्हें अपनी जगह छोड़ने के लिए तैयार करना था। लेकिन लोग इसके लिए तैयार हुए, क्योंकि इस परियोजना में उनकी आस्था थी। हमने पारदर्शी और आकर्षक वित्तीय प्रस्ताव मुहैया कराया। कई परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति देखते हुए उन्हें कम जगह के एवज में भी अच्छा-खासा मुआवजा प्रदान किया गया। जिन्होंने अतिक्रमण कर रखा था उनके भी हितों का ध्यान रखा गया। अग्रवाल ने बताया कि जो प्राचीन मंदिर इस दौरान मिले उन्हें संरक्षित किया गया है और जल्द ही श्रदालु इनमें दर्शन कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि मंदिर परिसर में मुख्य मंदिरों के अलावा कई छोटे मंदिर बनाए गए हैं। इनमें से कुछ में देवताओं की पुर्नस्थापना हो चुकी है। कई ऐसे मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल भी गए हैं। शेष में काम अंतिम दौर में है।
2019 में जब कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू हुआ था
प्रोपेगेंडा बनाम हकीकत
जब से काशी कॉरिडोर की बात शुरू हुई कॉन्ग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल, उसकी पालतू मीडिया और लिबरल-सेकुलर गैंग इस दुष्प्रचार में जुटा है कि काशी के मूल स्वरूप के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मंदिरों को ध्वस्त किया जा रहा है। यह दुष्प्रचार अब भी जारी है। राम के अस्तित्व को नहीं मानने वाले लोगों की जलन समझी जा सकती है। उन्हें भला कैसे कबूल हो कि जो मंदिर कल तक दृष्टिगोचर नहीं था, वह अब भव्य दिखे। हिंदू गौरव की पुर्नस्थापना हो। हमसे बातचीत में स्थानीय लोगों के भाव भी कुछ इसी तरह प्रकट हुए।
‘विपक्ष को पच नहीं रहा’
पंकज दुबे बनारस की सड़कों पर 25 साल से ऑटो चला रहे हैं। वे कहते हैं, “काशी कॉरिडोर अति सुंदर है। जो हुआ है, अच्छा हुआ है। सही है। ऐसा बहुत पहले हो जाना चाहिए। बाहर से भी जो लोग आ रहे हैं उनको यह आकर्षित करता है। इससे यह भी संदेश जा रहा है कि बनारस विकास कर रहा है।” वे कहते हैं, “इससे टूरिस्ट बढ़ेंगे। धंधा बढ़ेगा।” निर्माण के दौरान मंदिरों को तोड़ने की बात पर वे कहते हैं, “यह सब विपक्ष चिल्ला रहा है। उनको पच नहीं रहा है। बजट तो उनके पास भी था, लेकिन काम नहीं किए। अब काम दिख रहा है तो वे झूठा प्रचार कर रहे हैं।”
‘मोदी-योगी राज में धरोहरों का विकास’
रोशनी वर्मा काशी की दुर्लभ शिल्पकला ‘गुलाबी मीनाकारी’ का प्रशिक्षण ले रही हैं। वे काशी के गायघाट की रहने वाली हैं और युवा हैं। उनका कहना है, “हमारे काशी के हर गली में मंदिर हैं। पहले बहुत सारे मंदिरों का हमें पता नहीं था। कॉरिडोर के निर्माण से हमें उनके बारे में पता चला है। पहले मंदिर के बिल्कुल पास में घर थे, जिससे मंदिर का पता ही नहीं चलता था। अब मंदिर के बास बहुत स्पेस है। कितने भी लोग जुट जाए भीड़भाड़ नहीं होती। दर्शन करने में भी सहूलियत रहती है।” वे कहती हैं, “मोदी-योगी सरकार में हमारी मिट्टी से जुड़ी चीजों, धरोहरों और क्राफ्ट को संरक्षण दिया जा रहा है। उनका विकास हो रहा। उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा। अब लोग उनके बारे में जान रहे हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।”
गंगा आरती
‘जो 70 साल में न हुआ, मोदी ने 7 साल में कर दिया’
बुजुर्ग विमलेश ओझा कहते हैं, “पहिले से तो अब बहुत अच्छा हो गया है। इस समय तो बनारस स्वर्ग हो गया है। मोदी जी, योगी जी जो बाबा की सेवा कर रहे हैं वे बेमिसाल है।” कॉरिडोर निर्माण पर दुष्प्रचार को लेकर पूछे जाने पर उनका कहना था, “विरोध का तो ऐसा है कि ये राजनीति है। आप अच्छा भी करेंगे तो उसमें बुराई निकालेंगे। मेरे हिसाब से जो 70 साल में नहीं हुआ है, वह मोदी जी ने 7 साल में कर दिया है। अभी काम हो ही रहा है। आप गलियों में भी जाइए तो लगेगा कितना बदलाव हुआ है।”
‘यह काशी ही नहीं, पूरे देश की धरोहर’
आचार्य सुबोध शास्त्री 2007 से काशी विश्वनाथ मंदिर में पुजारी हैं। उनका कहना है, “मंदिर के साथ बिना कोई छेड़छाड़ के बदलाव हुआ है। स्पेस बढ़ने से मंदिर की व्यवस्था चाक-चौबंद हो गई। हमलोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि बाबा मंदिर का इस तरह कायाकल्प होगा। परिसर इतना भव्य हो जाएगा। लेकिन बाबा विश्वनाथ ने ऐसे आदमी को चुना जिसने यह सब कर दिया।” वे कहते हैं, “यह काशी ही नहीं पूरे देश की गरिमा, धरोहर बन गया है। अब देश-विदेश से लोग हँसते हुए आएँगे और हँसते हुए जाएँगे। उन्हें कोई तकलीफ नहीं होगी।”
‘कॉरिडोर से टूरिज्म डेवलप होगा’
ट्रैवल ब्लॉगर हर्षित पल्लव भी काशी के ही रहने वाले हैं। वे बताते हैं, “बचपन से हम इन गलियों में घूमते रहे हैं। बाबा का दर्शन करते रहे हैं। 2019 तक बाबा मंदिर से सटे हुए घर बने थे। यह पता ही नहीं चलता था कि रास्ता किधर से है। अब सब कुछ व्यवस्थित है। इस कॉरिडोर से टूरिज्म डेवलप होगा।” वे कहते हैं, “यदि बदलाव से बेहतरी आती है तो उसमें कुछ गलत नहीं है।”
‘जो दिख रहा उसकी कल्पना नहीं थी’
रोहित कुमार त्रिपाठी भी बनारस के ही हैं। वे कहते हैं, “पहले जो लोग दर्शन के लिए आते थे, उन्हें काफी परेशानी होती थी। मंदिर के आसपास पूरा अतिक्रमण था। आज जो दिख रहा है उसकी हमने कभी कल्पना नहीं की थी। ये सब होना जरूरी था। यह विकास काशी का मान-सम्मान बढ़ा रहा है।”
मंदिर परिसर से सटा ज्ञानवापी मस्जिद
ज्ञानवापी मस्जिद… काशी की मुक्ति कब?
पत्रकार व्यालोक पाठक कहते हैं, “कौन नहीं जानता है कि गायों को हरावल दस्ते में आगे रखकर हिंदुओं को जीतने वाले कायर रेगिस्तानी बर्बरों ने हिंदुओं की चेतना को खत्म करने के लिए मंदिरों को अपवित्र किया, मूर्तियाँ तोड़ीं और बलात्कार किए।” पाठक जो कह रहे उसका ही प्रतीक है, औरंगजेब का 18 अप्रैल 1669 को काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने का जारी किया गया फरमान। 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को मंदिर तोड़ने का कार्य पूरा होने की सूचना दी गई थी। मंदिर ध्वस्त कर खड़ी की गई ज्ञानवापी मस्जिद भले एक कोने में सिमट गई हो, काशी कॉरिडोर में बाहर से भले लुप्त दिखती हो पर हकीकत यही है कि मंदिर परिसर से ही वह सटी है। यह उस इस्लामिक बर्बरता की याद दिलाती है, जिसे हिंदुओं ने भोगा है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि अयोध्या के साथ ही काशी और मथुरा की मुक्ति की रणनीति बनी थी। यह कार्य जब तक पूरा नहीं होता हर हिंदू को खुद से पूछते रहना चाहिए- काशी की मुक्ति कब?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) अपने भड़काऊ भाषणों के लिए अक्सर विवादों में रहते हैं। इस बार भी उनका पाकिस्तान (pakistan) के लिए प्रेम नजर आया है और बलिदानी हुए दो पुलिसकर्मियों के बारे में उन्होंने बात करना जरूरी नहीं समझा। सोशल मीडिया पर फारूक का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह एक पत्रकार पर सवाल पूछने पर चिल्लाते हुए नजर आ रहे हैं।
शनिवार (11 दिसंबर 2021) को जम्मू में टाइम्स नाउ के एक पत्रकार ने फारूक से दो पुलिसकर्मियों के बलिदान को लेकर सवाल किया। इस पर उन्होंने झल्लाते हुए कहा “तुम मुझसे यह सवाल क्यों पूछ रहे हो। तुम कहना क्या चाहते हो। इसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने पत्रकार से कहा कि क्या तुम लोगों के मरने से खुश हो। यह बहुत ही दुखद कहानी है। जाकर केंद्र सरकार से पूछो इसके बारे में।”
फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा, ”केंद्र सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। कश्मीर में अगर लोगों की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षाबल और पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो आम लोग कैसे सुरक्षित रह सकते हैं।”
इसके बाद एक अन्य रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि क्या हम इसके लिए पाकिस्तान से बात कर सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि आपको बात ही करनी है तो पाकिस्तान से नहीं चीन से करो, जो लगातार पूर्वी लद्दाख में तनाव बढ़ा रहा है। हमारे क्षेत्र पर कब्जा किया जा रहा है। क्या तुम लोग इससे सहमत हो।”
पाकिस्तानी आतंकवादी हमारे जवानों को मार रहे हैं आप उन्हें क्लीन चिट कैसे दे सकते हैं? इस सवाल पर फारूक अब्दुल्ला ‘टाइम्स नाउ’ के पत्रकार पर जोर से चिल्लाते हैं और कहते हैं, ”सरदार साहब। आपने पहले भी मुझे बदनाम किया है। माफी माँगता हूँ आपसे ये कहने के लिए। मैंने इससे पहले भी आपको देखा है और इसके लिए आपको चेतावनी भी दी है। मैं कभी आपसे बात नहीं करूँगा।”
Farooq Abdullah gives a dressing down to a Jammu based reporter of Times Now, refusing to see him as a journalist, “I am telling you this in your face. You are not a journalist. You are communal” pic.twitter.com/gpX6NXp4g5
इसके बाद पत्रकार कोई और सवाल करता फारूक अब्दुल्ला ने उसे उँगली दिखाते हुए कहा “जबान संभाल कर। तुम कोई जनर्लिस्ट नहीं हो। मैं तुम्हें जनर्लिस्ट नहीं मानता। तुम कम्युनल हो। हमेशा तुम्हारा व्यवहार सांप्रदायिक रहता है। तुम सांप्रदायिक हो।”
वहीं, एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर कभी भी उनके हाथों में नहीं आएगा। शनिवार को उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान से बात करने के अलावा केंद्र सरकार के पास कोई रास्ता नहीं है। शुक्रवार (10 दिसंबर 2021) को बांदीपोरा जिले में आतंकवादियों द्वारा दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर दिया गया था। इसके बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, “यह एक दुखद कहानी है। सब कुछ कहने वाली सरकार को हंकी-डोरी (बोलने) दो।
अपने पूर्वजों से सुनते आए पवित्र सरस्वती नदी की कहानियाँ सिर्फ कहानी ही नहीं, बल्कि अखंड सच्चाई है। इस बात की पुष्टि समय-समय पर विज्ञान शोधों में मिलने वाले सबूत करते रहते हैं। अब तक मान्यता यही रही है कि हिंदुओं की धर्मनगरी प्रयागराज (Prayagraj Sangam) में तीन प्राचीन एवं पवित्र नदियों- गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है। अब भारतीय वैज्ञानिकों को संगम के नीचे लगभग 12,000 साल पुरानी नदी मिली है। माना जा रहा है कि यह ऋग्वैदिक काल की पूज्य और अब विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी हो सकती है।
वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्वे में इस बात के ठोस प्रमाण मिले हैं कि संगम के नीचे 45 किलोमीटर लंबी यह प्राचीन नदी मौजूद है। वर्तमान में इस संगम तट पर गंगा और यमुना नदियों का मिलन होता है। ऐसे में इन दोनों की तलहटी में मौजूद सरस्वती नदी में जल का विशाल भंडार होने का अनुमान है। CSIR-NGRI के वैज्ञानिकों के इस संयुक्त अध्ययन को अडवांस्टड अर्थ एंड स्पेस साइंस में प्रकाशित किया गया है।
दरअसल, वैज्ञानिक इस बात का पता कर रहे थे कि पानी की बढ़ती खपत के कारण गंगा और यमुना नदी पर कितना प्रभाव पड़ रहा है। नदियों पर पड़ने वाले प्रभाव का सीधा असर पारिस्थितिकी और पर्यावरण पर पड़ता है। नदियों को रीचार्ज करने वाली जमीन के नीचे मौजूद पुरातन नदियों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी हासिल करना चाह रहे थे, क्योंकि नदियों को सिर्फ हिमालय जैसे ग्लेशियरों से ही नहीं, बल्कि भूतल में मौजूद नदियों से भी जल मिलता है। इस का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक इस क्षेत्र का 3D मैपिंग करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सर्वे कर रहे थे।
वैज्ञानिकों ने पाया कि विंध्य फॉर्मेशन के अंतर्गत आने वाली एक अति प्राचीन नदी गंगा और यमुना की तलहटी में मौजूद है। इस प्राचीन नदी ((Paleoriver) का एक्वीफर सिस्टम और पुरातन नहरें आपस में जुड़ी हुई हैं और एक-दूसरे की पानी की जरूरतों को पूरा कर रही हैं। इस प्राचीन नदी की लंबाई 45 किलोमीटर, चौड़ाई 4 किलोमीटर और गहराई 15 मीटर है। इसमें 2700 MCM रेत है और जब यह पानी से पूरी तरह भरी रहती है तो यह जमीन के ऊपर 1300 से 2000 वर्ग किलोमीटर के इलाके को सिंचित करने योग्य भूजल देती है। 1000 MCM जल क्षमता वाली यह नदी गंगा और यमुना में जल के स्तर को संतुलित करने का भी काम करती है।
हिंदू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि गंगा, यमुना और सरस्वती का उद्गम स्थल हिमालय है। अध्ययन में इस बात को माना गया है कि खोज में मिली यह नदी संभवत: हिमालय तक जाती है। नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजेआरआई) के निदेशक ने बताया कि यह नदी धरती की 10 मीटर नीचे गहराई में स्थित है और 10,000 से 12,000 साल पुरानी है। उन्होंने कहा कि समुचित अध्ययन के बाद ही नदी के सही उम्र के बारे में जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि सर्वे का काम जारी है और अभी तक पता चला है यह नदी कानपुर की ओर बह रही है।
गौरतलब है कि प्राचीन नदियों की खोज के लिए जल संसाधन मंत्रालय द्वारा गठित 7 सदस्यीय आयोग ने 2016 में अपनी रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भूतल में प्राचीन नदी सरस्वती के बहने के साक्ष्य मौजूद हैं। साल 2018 में मंत्रालय ने राजस्थान और हरियाणा में सरस्वती नदी की खोज को लेकर काम शुरू किया गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय से निकलने वाली प्राचीन नदी अरब सागर में जाकर मिलती थी।
उत्तर प्रदेश का नोएडा शहर अब और हाईटेक होने जा रहा है। दुनिया भर की कई आईटी कंपनियों के गढ़ बन चुके इस शहर का अब अपना ‘टाइम्स स्क्वायर’ भी होगा। ठीक वैसे ही, जैसा अमेरिका के न्यूयॉर्क में है। एक बड़ा सा मॉल, एक एम्फीथिएटर (विशाल एरीना) और बच्चों के खेलने के लिए प्ले एरिया – NCR में घूमने-फिरने के शौक़ीन लोगों के लिए सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक नोएडा के सेक्टर-18 में ये सब होगा। इस पूरे क्षेत्र की रूपरेखा बदलने की योजना शुरू हो गई है।
इसे ‘नोएडा टाइम्स स्क्वायर’ के नाम से जाना जाएगा। इसे एक पूरे शॉपिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसकी रूपरेखा अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित ‘टाइम्स स्क्वायर’ से मिलती-जुलती होगी। ये न्यूयॉर्क के प्रशासनिक क्षेत्र और कमर्शियल इंटरसेक्शन मैनहटन में स्थित है। एक बड़ा सा पार्किंग कम्पाउंड के साथ-साथ यहाँ एक स्थानीय एंटरटेनमेंट सेंटर भी होगा। पार्किंग कॉम्प्लेक्स का बाहरी हिस्सा LED से जगमगाएगा। 6500 स्क्वायर फ़ीट क्षेत्र में एक पूरा का पूरा ‘वीडियो वॉल’ होगा।
इसका काम पहले से ही जारी है। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र के विकास के लिए नोएडा अथॉरिटी ने 7.5 करोड़ रुपए भी जारी किए हैं। बता दें कि न्यूयॉर्क का बिलबोर्ड (वीडियो वॉल) वहाँ के आकर्षण का केंद्र है। अथॉरिटी के स्पेशल ड्यूटी अधिकारी इंदु प्रकाश सिंह LED वॉल के लिए टेंडर दी जा रही है। हालाँकि, बिलबोर्ड का आकर उससे काफी छोटा होगा। मैनहटन में इसका क्षेत्र 18-30 हजार स्क्वायर फ़ीट है। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के आदर पर विकसित किया जाएगा।
साथ ही बिलबोर्ड का निर्माण करने वाली कंपनी को अगले 10 वर्षों तक इसकी देखरेख का जिम्मा देकर आसपास जगह भी उपलब्ध कराई जाएगी। लीज ख़त्म होने के बाद उसे वापस सौंपना होगा। ऑपरेटर को हर महीने 6.6 लाख रुपए भी देने होंगे। एम्फीथिएटर में 172 लोगों के बैठने की सुविधा होगी। अभी इस बारे में और विचार-विमर्श होना है। महामारी के दौरान अथॉरिटी की आय कम रही है। 2019-20 में आउटडोर एडवर्टाइजिंग से नोएडा अथॉरिटी ने 18 करोड़ रुपए की कमाई की है।
बता दें कि नोएडा के सेक्टर-18 को ‘मिनी कनॉट प्लेस’ भी कहा जाता रहा है। कई बड़ी कंपनियों के शोरूम और मॉल्स यहाँ की शोभा बढ़ाते हैं। ‘टाइम्स स्क्वायर’ के निर्माण में 9.96 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। नोएडा प्राधिकरण इसके लिए RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) भी नए साल के मौके पर जारी कर देगा। बहुमंजिला पार्किंग एरिया भी होगा। ठेका लेने वाली कंपनी खुद अधिकतर चीजें तैयार करेगी और इसमें सरकारी पैसा नहीं लगेगा। बदले में उसे विज्ञापन का अधिकार दिया जाएगा। 1 साल में ये बन कर तैयार हो जाएगा। 75 करोड़ रुपए में पार्क भी बनेगा।
राजद (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के छोटे बेटे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की शादी इन दिनों विवादों में है। तेजस्वी यादव ने 9 दिसंबर को अपनी बचपन की ईसाई दोस्त रिचेल से दिल्ली में शादी रचाई थी, जिसको लेकर उनके साधु मामा बेहद नाराज हैं। उन्होंने बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी को समाज का कलंक बताया है। इसके बाद से यादव परिवार में जुबानी जंग शुरू हो गई है।
मामा अनिरुद्ध प्रसाद यादव उर्फ साधु यादव (Sadhu Yadav) की बातों को लेकर तेजस्वी के भाई तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने उन्हें धमकी दी है। तेज प्रताप यादव ने कहा, ”बिहार आएँगे तो गर्दा उड़ा देंगे, औकात में रहिए।” इसके बाद साधु यादव भी चुप नहीं रहे। उन्होंने अपने भांजे पर पलटवार करते हुए जीजा लालू यादव और बहन राबड़ी देवी को अपने बच्चों को नियंत्रण में रखने की सलाह देते हुए कहा, ”मैं किसी को नहीं बख्शूँगा। मैं सबको बेनकाब करूँगा चाहे तेज प्रताप यादव हों या तेजस्वी यादव।”
#WATCH | Bihar LoP Tejashwi Yadav’s uncle Sadhu Yadav: These people have been mentally torturing me for 10-12 years. You (Tejashwi) are free to marry whoever you want, I’ve no objection… There’ll be serious repercussions if Lalu Ji or Behan Ji don’t control their children”. pic.twitter.com/8cjbdfFDiJ
‘फर्स्ट बिहार झारखंड’ न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान साधु यादव ने कहा, ”ये राजा नहीं रंक है, बिहार का कलंक है। हम यदुवंशी लोगों से भी कह रहे हैं कि इसका बहिष्कार करो। अगर ये पटना में आता है, तो इसका जूता-चप्पल से स्वागत करो। बीयर बार वाली डांसर से शादी कर रहा है। आप जिम्मेदार व्यक्ति हैं, कैसे नाजायज संबंध बनाया। अगर हम अपने बच्चे को संस्कार नहीं दे सकते हैं, तो उसे बिहार में रहने का अधिकार नहीं है।”
साधु यादव ने इस शादी पर सवाल उठाते हुए कहा, ”ये शादी चोरी-छिपे हुआ है। बताइए कभी एक दिन में कोई शादी होता है क्या?” उन्होंने मीडियाकर्मी को बताया, “हमारे यहाँ जब किसी का शादी होता है, तो कम तो कम से कम 15 दिन का समय तो देता ही है। एक दिन या फिर रातों-रात शादी नहीं होता है। आप चोरी-छिपे शादी कर रहे हैं। किसी को भी आमंत्रित नहीं कर रहे हैं। किसी को जानकारी नहीं दे रहे हैं। हिंदू रीति रिवाज में डोल नगाड़ा बजाके कार्ड बाँटकर शादी होता है।”
उन्होंने आगे कहा “आप अकेले व्यक्ति नहीं हैं। बिहार की 13 करोड़ जनता का आपके ऊपर विश्वास है। उस विश्वास को आपने चकनाचूर कर दिया। या तो आप नेता प्रतिपक्ष मत रहिए, तब आप कुछ भी करिए। जब जिम्मेदारी पद को संभालते हैं, तो एक व्यक्ति कैसे हैं। अब तो सबके सामने आ गया कि आपने क्रिश्चियन धर्म को अपनाया है।” लालू और राबड़ी को लपेटते हुए साधु ने कहा “इससे पहले आपने सभी शादी यादव परिवार में किया, लेकिन छोटे बेटे की शादी क्रिश्चियन धर्म में की। आपने क्या संस्कार दिया। परिस्थिति चाहे जो भी हो, अगर अपने बच्चों को संस्कार नहीं दे रहे हैं, तो उसे बिहार में रहने का अधिकार नहीं है। बिहार से पूरा देश चलता है। बिहार से देश है, देश से बिहार नहीं है। किसी यदुवंशी की गरीब बेटी नहीं मिली आपको? आपने कैसे धर्म परिवर्तन कर दिया?”
साधु यादव ने यह भी कहा, “आप दिल्ली में जाकर मौज मस्ती कर रहे हैं, यहाँ बिहार का जनता आपको ढूँढ रही है। विदेश में जाकर नाजायज संबंध बनाए, एक जिम्मेदार व्यक्ति होकर कैसे किया ये काम। बिहार की जनता को इसका जवाब देना होगा। नहीं तो नेता प्रतिपक्ष के पद से हटिए। आपके दल में बहुत नेता हैं। विधायकों से मेरी अपील है कि इसे बदलो। बिहार इसका जागीर नहीं है। इसके बाप का बपौती नहीं है। इसकी मनमानी नहीं चलेगी। इसलिए हम बिहार के लोगों से, हिंदू समाज से और यदुवंशी लोगों से कह रहे हैं कि इसका बहिष्कार करो और पटना आए इसका जूतों-चप्पलों से स्वागत करो।”
मामा साधु यादव को लेकर रोहिणी आचार्य ने भी मोर्चा खोल दिया है। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने ट्वीट कर कहा, “कंस आज भी समाज में मौजूद हैं, ये बात इन्होंने साबित कर दी है। अगर रिश्ता निभाना है तो कृष्ण बनो, दुष्ट कंस के जैसा अन्यायी ना बनो।”
कंस आज भी समाज में मौजूद है इन्होंने साबित कर दिया. रिश्ता निभाना है तो कृष्ण बनो दुष्ट कंस के जैसा अन्यायी ना बनो.. https://t.co/v2qjP7csYm
बीते दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की छोटी बहू रिचेल इस शादी को लेकर परिवार वालों की नाराजगी दूर करने के लिए ईसाई से हिंदू बन गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेजस्वी यादव की पत्नी का नया नाम राजेश्वरी यादव होगा। हालाँकि लालू के परिवार से जुड़े किसी सदस्य ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत ट्विटर हैंडल कुछ देर के लिए हैक क्या हुआ, कॉन्ग्रेस पार्टी एक किस्म के जश्न के मूड में दिख रही है। क्रिप्टोकरेंसी सम्बंधित ट्वीट वाली हैकिंग का निशाना विश्व की कई हस्तियाँ बन चुकी हैं, लेकिन अजीबोगरीब तर्क देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीचा दिखाने की कोशिश हो रही है। लेकिन, यही लोग भूल गए हैं कि 2016 में राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी का ट्विटर हैंडल हैक कर के गालियों वाले ट्वीट्स किए गए थे। ये अलग बात है कि पार्टी के नेताओं ने तब भी इसका ठीकरा पीएम मोदी की सरकार पर ही फोड़ा था।
पत्रकार विद्या कृष्णन ने ट्विटर पर लिखा, “जो आदमी अपना ट्विटर नहीं संभाल पाता, उसे बेटियों और बॉर्डर की जिम्मेदारी दे रखी है। इस व्यक्ति को सेकेंड हैंड कैक्टस को पानी देने की जिम्मेदारी भी नहीं दी जानी चाहिए।” इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए अंकुर सिंह ने उन्हें बताया कि किस तरह जिस राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए लिबरल जमात अभियान चलता रहा है, उनका ट्विटर हैंडल भी हैक हुआ था और उससे किस-किस किस्म के ट्वीट्स किए गए थे।
Jo aadmi apna Twitter nahin sambhal pata use betiyon aur border ki zimmedaari de rakhi hai… ??♀️
This man shouldn't even be responsible to water a second-hand cactus. https://t.co/KEjtNnPT67
तब राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल से जो ट्वीट्स हुए थे, उन्हें देखिए, ‘मैं और ज्यादा क्या कहूँ, आम आदमी को लूटना मुझे काफी पसंद है’, ‘मैं मीम के लायक ही हूँ’, ‘मेरे भ्रष्ट परिवार को जला दिया जाना चाहिए। उन्होंने 60 साल इस देश को बर्बाद किया। सब कुछ लूट लिया भाई।’, ‘मेरा %&$ छोटा है, इसीलिए मई नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन करता हूँ’। बता दें कि इन ट्वीट्स में गालियों की भी भरमार थी और साथ ही कई प्रकार के अपशब्दों का प्रयोग भी किया गया था।
इसके बाद कॉन्ग्रेस पार्टी का आधिकारिक ट्विटर हैंडल भी हैक कर लिया गया था, और उससे ट्वीट्स किए गए थे, ‘कॉन्ग्रेस हमारे $%# को किस कर सकती है’, ‘एक भ्रष्ट पार्टी निर्दोष हैकरों को परेशान कर रही है, क्या ये सही है?’ साथ ही राहुल गाँधी के ट्विटर हैंड ल का नाम बदल कर ‘Retarded (मंदबुद्धि) गाँधी’ भी कर दिया गया था। उस समय राहुल गाँधी अपने दफ्तर के माध्यम से ट्विटर पर थे और उस हैंडल का नाम ‘Office Of RG’ हुआ करता था। यही हैंडल अब राहुल गाँधी का व्यक्तिगत है।
राहुल गाँधी के ट्विटर हैंडल को हैक कर के किए गए थे गालियों भरे ट्वीट्स
जानकारी दे दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर हैंडल रविवार (12 दिसंबर, 2021) को तड़के सुबह कुछ देर के लिए हैक कर लिया गया। इसके बाद इससे बिटकॉइन से जुड़े ट्वीट किए गए। रात के 2:11 बजे उससे ट्वीट किया गया, “भारत ने बिटकॉइन को लीगल टेंडर के रूप में स्वीकार कर लिया है। भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से 500 बिटकॉइन की खरीददारी की है और इन्हें सभी नागरिकों को बाँटा जा रहा है। जल्दी कीजिए, इंडिया। भविष्य आज आ गया है।”
छत्तीसगढ़ के कवर्धा के जिस चौक पर मुस्लिम भीड़ ने भगवा ध्वज को उखाड़कर फेंकने के बाद उसे अपमानित किया था, वहाँ साधु संतों के नेतृत्व में शुक्रवार (10 दसंबर) को 108 फीट ऊँचा भगवा ध्वज फिर फहराया गया। इस दौरान 13 अखाड़ों के महामंडलेश्वर, महंत और सभी शंकराचार्यों के प्रतिनिधि की मौजदूगी में रामजानकी मंदिर से 5100 कलशों के साथ विशाल धार्मिक यात्रा निकाली गई। दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्व वाली इस पदयात्रा में 20 हजार से अधिक लोग शामिल थे। इस दौरान डीजे की धुन पर लोग ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते रहे।
A few months ago, they removed one Bhagwa flag from a pole and rioted against the Hindus in Kawardha, #Chhattisgarh. Yesterday the Hindus of Kawardha took out a huge procession and installed a 108 feet Bhagwa flag in the centre of the city. #Kawardha shows ultimate Hindu unity! pic.twitter.com/8j3rzxGokD
इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “भगवा ध्वज हमारे गौरव और स्वाभिमान का ध्वज है। हमारे धर्म में आठ प्रकार के ध्वज का वर्णन किया गया है। कवर्धा में जो भगवा ध्वज फहराया गया है, उसका नाम विशाला ध्वज है। भगवा ध्वज का सम्मान सर्वोपरि है। कवर्धा के माथे पर लगाया गया यह भगवा ध्वज उल्लासपूर्वक फहराएगा।” अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जिस भगवा झंडा के लिए दुर्गेश देवांगन को पीटा गया था, उन्हीं के हाथों भगवा ध्वज का आरोहण किया गया है। उन्होंने आगे कहा, “उन लोगों (मुस्लिमों) ने मात्र 15 फीट ऊँचे ध्वज के लिए लड़ाई की और हमने 108 फीट से भी ऊँचा ध्वज लगा दिए।” उन्होंने कवर्धा को छत्तीसगढ़ राज्य की धर्म राजधानी घोषित किया।
इसके पहले हिंदू समाज ने उस स्थान पर भगवा महावीरी ध्वज स्थापित किया था। वहाँ हिन्दू युवाओं ने चढ़ कर फिर से भगवा रंग का ध्वज स्थापित किया, जिस पर भगवान हनुमान जी की तस्वीर भी बनी हुई है। हिन्दुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी जगह हासिल की।
इस दौरान हिन्दू संगठनों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध भी किया था। महावीरी भगवा ध्वज लेकर लोगों ने पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में ‘जय श्रीराम’ के नारों के साथ-साथ ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ जैसे राष्ट्रभक्ति नारे भी लगाए थे।
दरअसल, इसी साल अक्टूबर के शुरुआत में कवर्धा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू ध्वज को उखाड़ कर फेंक दिया और फिर उसका अपमान किया। इस हिन्दू व मुस्लिम समाज में झड़प भी हुई। जब हिन्दू ध्वज उखाड़ के फेंका जा रहा था और भीड़ उसका अपमान कर रही थी, तब वहाँ कुछ पुलिसकर्मी भी तमाशबीन बन कर खड़े थे।
इस घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया था। एक स्थानीय पत्रकार ने बताया था कि पहले मौखिक रूप से झगड़ा शुरू हुआ, लेकिन बाद में पत्थरबाजी होने लगी। इसके बाद पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।
जिस जगह पर हिन्दुओं का ध्वज लगा हुआ था, वहाँ मुस्लिमों ने अपने आयोजन को लेकर अपना झंडा भी लगा दिया। फिर ध्वज फाड़ दिया और पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। दोनों पक्षों में तनाव इतना ज्यादा बढ़ गया था कि शहर में सभी शैक्षिक संस्थानों को बंद करना पड़ा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर हैंडल रविवार (12 दिसंबर, 2021) को तड़के सुबह कुछ देर के लिए हैक कर लिया गया। इसके बाद इससे बिटकॉइन से जुड़े ट्वीट किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत ट्विटर हैंडल ‘@narendramodi’ को निशाना बनाया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि कम समय के लिए हैंडल में गड़बड़ी हुई थी और इसे तुरंत ठीक भी कर लिया गया। साथ ही माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर के साथ इस मसले को उठाया भी गया है।
साथ ही PMO ने कहा कि हैंडल में गड़बड़ी के दौरान जो भी ट्वीट्स किए गए, उन्हें नजरअंदाज किया जाना चाहिए। बता दें कि प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत ट्विटर हैंडल को हैक कर के रात के 2:11 बजे उससे ट्वीट किया गया, “भारत ने बिटकॉइन को लीगल टेंडर के रूप में स्वीकार कर लिया है। भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से 500 बिटकॉइन की खरीददारी की है और इन्हें सभी नागरिकों को बाँटा जा रहा है। जल्दी कीजिए, इंडिया। भविष्य आज आ गया है।”
इसके साथ ही एक संदिग्ध लिंक भी शेयर किया गया। हालाँकि, हैंडल के वापस आने के बाद इस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ‘इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम’ (CERT-IN) पता लगा रही है कि इस हरकत के पीछे कौन लोग हैं और कैसे ऐसा हुआ। हालाँकि, ये पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ हो। सितंबर 2020 में भी प्रधानमंत्री की वेबसाइट के हैंडल को हैक कर के क्रिप्टो करेंसी से जुड़े ट्वीट्स किए गए थे।
सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, दुनिया भर की कई हस्तियाँ इस प्रकार की हैकिंग का निशाना रही हैं। जुलाई 2021 में टेस्ला के CEO और विश्व के सबसे अमीर व्यक्ति एलोन मस्क, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन, माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स टीवी स्टार किम करदाशियाँ और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के ट्विटर हैंडल्स को निशाना बना कर बिटकॉइन सम्बंधित ट्वीट्स किए गए थे। ट्विटर के उच्च-स्तरीय आंतरिक अधिकारियों को निशाना बना कर इन हैंडल्स को हैक किया गया था।
The Twitter handle of PM @narendramodi was very briefly compromised. The matter was escalated to Twitter and the account has been immediately secured.
In the brief period that the account was compromised, any Tweet shared must be ignored.
ट्विटर ने इसे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के जरिए की गई हैकिंग बताते हुए कहा था कि अधिकारियों के टूल्स को नियंत्रण में लेकर हैकर्स ने कई हस्तियों के हैंडल्स को हैक किया। इसी तरह सितंबर 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट के ट्विटर हैंडल को हैक कर के लिखा गया था कि ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए डोनेट करें। साथ ही एक ब्लॉकचेन एड्रेस भी दिया गया था। बाद में एक अन्य ट्वीट में बताया गया कि ‘जॉन विक’ ने इस हैंडल को हैक किया है।