म्यांमार की अदालत ने सोमवार (6 दिसंबर 2021) को नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की को सेना के खिलाफ असंतोष भड़काने और कोविड नियमों का उल्लंघन करने के लिए चार साल जेल की सजा सुनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना द्वारा राजधानी Naypyidaw में गठित की गई विशेष अदालत की कार्यवाही से पत्रकारों को दूर रखा गया। साथ ही सू की के वकीलों पर मीडिया से बात करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
आंग सान सू की सैन्य शासन के खिलाफ आवाज उठाने वाले बड़े नेताओं में से एक हैं। विश्व स्तर पर आज भी उनकी लोकप्रियता बरकरार है। हालाँकि, आंग सान सू की के खिलाफ म्यांमार में कई मुकदमे चल रहे हैं। उन पर भ्रष्टाचार, मतदान में धांधली का भी आरोप लगाया गया है।
म्यांमार में इसी साल फरवरी में सैन्य तख्तापलट हुआ था। उसके बाद भारी विरोध-प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए सेना ने हिंसक तरीके अपनाए थे, जिसमें 1300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 10,000 से अधिक गिरफ्तार किए गए हैं। देश के कई इलाकों में अब भी विरोध-प्रदर्शन जारी है।
गौरतलब है कि म्यांमार को 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से तीन बार तख्तापलट हो चुका है। इससे पहले 1962 और 1988 में भी ऐसा हुआ था। एक दशक पहले तक म्यांमार में सैनिक शासन ही था। करीब 50 साल सैनिक शासन की वजह से म्यांमार का लोकतंत्र अभी जड़ें नहीं जमा सका है। म्यांमार में 2020 में हुए आम चुनावों में सू की की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (National League for Democracy/ NLD) को बड़ी जीत मिली थी। लेकिन कुछ महीनों बाद ही सेना ने जब आपातकाल की घोषणा करते हुए देश की कमान अपने हाथों में लेने का ऐलान किया था तब नई संसद की पहली बैठक भी नहीं हुई थी।
तुर्किश मूल के इस्लामी आक्रांता बाबर ने पहले फरगना और काबुल का सुल्तान हुआ करता था, लेकिन उसके बाद सन् 1525-26 में उसने भारत पर आक्रमण किया और फिर मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की। मुग़ल शासन में भारतीय हिन्दुओं को अत्याचार का सामना करना पड़ा। बाबर के नाम पर बनी बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर, 1992 को रामभक्त कारसेवकों ने ध्वस्त कर दिया, जिसे आज भी हम ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाते हैं। क्या आपको पता है कि ‘बाबरनामा’ से पता चलता है कि पहला मुग़ल बादशाह समलैंगिक भी था?
आगे बढ़ने से पहले सन् 1483 में जन्मे बाबर का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया दें कि वो खुद को तैमूर के वंश का सबसे श्रेष्ठ शासक साबित करना चाहता था। समरकंद में लगातार 3 बार हार के बाद उसने भारत का रुख किया था। सूफी फकीर ख्वाजा अहरार ने उसके ये नाम चुना था। चागताई तुर्की उसकी मातृभाषा थी। माँ की तरफ से वो मंगोल शासक चंगेज खान का वंशज था। 1494 ईस्वी में मात्र 11 वर्ष की उम्र में वो फ़रगना का शासक बन गया था।
आज भले ही वेब सीरीज बना कर बाबर का महिमामंडन किया जाता हो और लिबरल गिरोह उसे ‘उदार मुस्लिम’ बना कर पेश करता हो, लेकिन बाबर ने खुद स्वीकार किया है कि वो बाइसेक्सुअल था। ‘बाबरनामा’ बाबर की व्यक्तिगर आत्मकथा है, जिसमें उसने अपने जीवन के बारे में कई चीजें लिख रखी हैं। इसमें उसने लिखा है कि कैसे जब वो 17 साल का था तो वो ‘उर्दू बाजार’ में बाबरी नाम के एक अन्य लड़के के प्यार में पड़ गया था। हालाँकि, उसके उम्र को लेकर संदेह है।
जहाँ कुछ लोगों का मानना है कि वो एक किशोर ही रहा होगा, वहीं कुछ मानते हैं कि उसकी उम्र इससे कम ही थी। बाबर उसके प्रति सम्मोहित था और उसने ‘बाबरनामा’ में इसका खुलासा किया है। कहा जाता है कि बाबर अपनी पत्नियों को लेकर सशंकित था और 8 अगस्त, 1499 से लेकर 28 जुलाई, 1500 ईस्वी के बीच में उक्त लड़के के साथ उसका प्रेम सम्बन्ध चला था। आइए, बाबर की नजर में ही हम इस ‘आकर्षक और युवा लड़के’ के साथ उसके संबंधों को समझते हैं।
‘बाबरनामा’ में उसने लिखा है, “उस समय उर्दू बाजार में बाबरी नाम का एक लड़का था। हमनामी नाम का एक लगाव भी क्या लगाव निकला! उससे एक अजीब सा लगाव पैदा हो गया है। उन खाली दिनों में मैंने एक अजीब सा झुकाव महसूस किया। उसके लिए मैं पागल सा हो रखा था। इससे पहले मुझे किसी से इस प्रकार का आकर्षण या प्यार नहीं हुआ था। वो कई बार मेरी उपस्थिति में आता था, लेकिन मैं शर्म और लज्जा के कारण उसकी तरफ सीधा देख भी नहीं पाता था।”
बाबर ने लिखा है, “फिर मैं उससे बातचीत कैसे कर पाता? एक बार मैं कुछ साथियों के साथ जा रहा था तो उससे मिला।” बाबर ने इस क्षण को काफी आश्चर्यजनक बताया है और उसे याद करते हुए एक शेर भी लिखा, जिसका अर्थ कुछ यूँ होगा, “उस परी-चेहरे पर हुआ शैदा/बल्कि अपनी खुदी भी खो बैठा।” बाबर खुद कह रहा है कि उससे पहले उसने ‘दिल्लगी’ का नाम तक न सुना था, लेकिन अब वो फ़ारसी में शेर लिखने लगा। उस समय उसकी मानसिक स्थिति ‘कुछ और’ ही हो गई थी।
आइए, उस लड़के के लिए बाबर के एक शेर पर नजर डालें, “कोई आशिक, नंगे-खुद, बर्बाद मुझ जैसे न हो/और तुझ सा कोई बुत बेपरवाह बेरहम न हो।” एक अन्य शेर में उसने अपनी हालत बयाँ की है, जिसका अनुवाद है – “न था मालूम, यह गत आशिकी में बना बैठा/परी चेहरों का आशिक बखुदो दीवाना होता है।” बाबर लिखता है कि जब बाबरी उसके सामने आता था तो वो सकुचाहट में उसे शुक्रिया तक नहीं कह पाता था, उसकी घबराहट का आलम कुछ ऐसा रहता था।
‘बाबरनामा’ के अंग्रेजी अनुवाद का एक अंश, जिसमें बाबर ने अपने समलैंगिक प्यार का किया है जिक्र
बाबर लिखता है, “अपने-आप पर मेरा इतना बस भी नहीं था कि मैं उससे चार बातें भी कर सकूँ। मोहब्बत के जोर, जवानी और जोश का ऐसा आलम मुझ पर सवार था कि कभी-कभी नंगे पाँव गली-मुहल्लों और बाग़-बगीचों में टहलता रह जाता था। न अपने-पराए के लिए कोई शिष्टता रह गई थी, न दूसरों की कोई परवाह। न चलने में चैन मिलता था और न ठहरने में।” बाबर ने इस प्रकरण का समापन भी एक शेर के साथ किया है, “जाऊँ, यह न कूवत रही, ठहरूँ नहीं और ताब/क्या और तू ऐ दिल मुझे बेहाल करेगा।”
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हेरम्बा चतुर्वेदी ने ‘बाबरनामा’ का अध्ययन कर अपनी पुस्तक ‘दो सुल्तान, दो बादशाह और उनका प्रणय परिवेश‘ में बताया है कि कैसे बाबर अपनी पत्नियों को ‘कर्कश, जिद्दी और लड़ाकू कैफियत वाली’ बताता था। साथ ही वो अल्लाह से दुआ करता था कि वो ‘सच्चे मुस्लिमों को चिड़चिड़ी, असंतुष्ट और ग़ुस्सैल पत्नियों से बचाए।’ वो लिखते हैं कि उस दौरान बाबर पत्नी-विमुख हो गया था और आइशा बेगम से निकाह के बाद उसके रिश्ते ठीक नहीं थे।
आजादी के समय भारत का विभाजन कराकर पाकिस्तान बनाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना अब चोरों के निशाने पर हैं। कंगाली की हालत से जूझ रहे पाकिस्तान में जिन्ना की मूर्ति में लगे एक लेंस वाले चश्मे को चोरों ने चोरी कर लिया है। यह मूर्ति पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में वेहारी इलाके में लगाई गई है। एक लेंस वाले चश्मे की मदद से ही जिन्ना आजीवन पढ़ने का काम करते थे।
बताया जा रहा है कि जिस चश्मे को चोरी किया गया है, वह उनके असली चश्मे की नकल था। जिस इलाके में यह मूर्ति लगाई गई है, वहाँ पर बड़े-बड़े अफसरों का घर है और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहती है। जिन्ना की ऐसी बहुत सी तस्वीरें हैं जिनमें वह एक लेंस वाला चश्मा लगाए दिखाई देते हैं। जिन्ना की यह मूर्ति पाकिस्तान के संविधान सभा में दिए गए भाषण की तस्वीर पर आधारित है। इसी भाषण में जिन्ना ने अल्पसंख्यकों को उनका हक देने की बात कही थी।
जानकारी के मुताबिक शनिवार-रविवार की रात में चोरों ने मूर्ति से जिन्ना का चश्मा चोरी कर लिया। हालाँकि गनीमत रही कि चोरों ने मूर्ति को नहीं तोड़ा, जैसा कि देश के अन्य हिस्सों में हो चुका है। रविवार को चोरी की जानकारी होने पर अधिकारियों ने चोर की तलाश शुरू कर दी। वे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खँगाल रहे थे। कुछ दिनों पहले ही चोरों ने ओलंपियन समीउल्लाह की प्रतिमा से एक हॉकी और एक गेंद चोरी कर लिया था।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले बलूच विद्रोहियों ने पिछले दिनों मोहम्मद अली जिन्ना की मूर्ति को बम से उड़ा दिया था। यह हमला पाकिस्तान के ग्वादर शहर में हुआ था जहाँ चीन चाइना-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के तहत अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन फ्रंट ने इस बम हमले की जिम्मेदारी ली थी। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक जिन्ना की इस मूर्ति को इस साल के शुरू में मरीन ड्राइव इलाके में लगाया गया था जिसे सुरक्षित इलाका माना जाता है।
बता दें कि कुछ दिनों पहले जिन्ना और उनकी बहन फातिमा जिन्ना की संपत्ति भी गायब हो गई। पाकिस्तान की एक अदालत ने पिछले दिनों देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना और उनकी बहन फातिमा की संपत्ति और अन्य सामानों का पता लगाने के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था।
उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ‘वसीम रिजवी’ ने आज (6 दिसंबर 2021) डासना देवी मंदिर में हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। अब उनका नाम जितेंद्र नारायण स्वामी/ त्यागी किया गया है। इस धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान मंदिर में हवन पूजा और अनुष्ठान हुए और ‘रिजवी’ से जलाभिषेक करवाया गया।
मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने बताया कि उन्होंने वसीम को त्यागी उपजाति इसलिए दी क्योंकि वह बताना चाहते हैं कि हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था कमजोरी नहीं है। वहीं ‘रिजवी’ ने कहा, “मैं अब यति का सिपाही हूँ, सनातन के दुश्मनों से मिल कर लड़ेंगे।”
हिंदू धर्म अपनाने के बाद मीडिया से बात करते जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी
‘रिजवी’ ने हिंदू धर्म स्वीकारते हुए कहा कि उन्होंने इस्लाम के बारे में इतना कुछ जान लिया है कि अब उसमें रहने का मतलब ही नहीं था। वह कहते हैं, “हर दिन मुझे इस्लाम से खारिज किया जाता था। अब मैं खुद ही इससे निकल गया।” इस दौरान ‘रिजवी’ ने सबसे बड़ा खतरा ISIS को बताया।
हिंदू धर्म में प्रवेश के बाद यति नरसिंहानंद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा धर्म सनातन धर्म ही है। इस्लाम कोई धर्म नहीं है। वह बोले कि उनका सनातन को अपनाना कोई धर्म परिवर्तन नहीं है। उन्होंने कहा, “जब मुझे इस्लाम से निकाल दिया गया है तो मेरी मर्जी मैं कौन सा धर्म चुनता हूँ।”
यहाँ बता दें कि हिंदू धर्म को स्वीकार करने के लिए शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल रात ही 10 बजे ही डासना देवी मंदिर पहुँच गए थे। वहाँ मंदिर के पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें विधिवत सनातन धर्म ग्रहण करवाया। वहीं इस पूरी प्रक्रिया के बाद मंदिर के बाहर पुलिस बल तैनात है।
हिंदू धर्म में प्रवेश करने के बाद ‘रिजवी’ बोले, सनातन धर्म दुनिया का सबसे पवित्र धर्म है। इसमें बहुत सारी खूबियाँ हैं। उन्होंने बताया कि धर्म परिवर्तन के लिए उन्होंने 6 दिसंबर के पवित्र दिन को चुना है। आज के ही दिन 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिराया था। अब आगे से वह सिर्फ हिंदुत्व के लिए काम करेंगे।
भारत और रूस के बीच होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने मंत्रिमंडल के साथ भारत के दौरे पर हैं। इसी क्रम में शिखर सम्मेलन से पहले दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षामंत्रियों के बीच 2+2 मीटिंग हुई। सोमवार (6 दिसंबर 2021) को नई दिल्ली में सुषमा स्वराज भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अपने रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगू के साथ अहम बैठक हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच S400 मिसाइल सिस्टम की समय पर आपूर्ति-तैनाती और AK 203 राइफल की डील को लेकर चर्चाएँ हुईं। इस दौरान दोनों देशों के बीच एग्रीमेंट भी साइन किए गए। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से कुल 6,01,427 7.63×39 मिनी असॉल्ट राइफल्स AK-203 की खरीद के लिए कॉन्ट्रैक्ट शामिल है। भारत-रूस राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड प्रोग्राम 2021-2031 से सैन्य-तकनीकी सहयोग का प्रोग्राम है।
Agreements signed between India & Russia – Protocol on amending agreement on cooperation in the field of Kalashnikov series small arms manufacturing dated 18 February 2019
इस डील के तहत 5 लाख से ज्यादा राइफलें तैयार की जानी हैं, जिससे भारतीय सुरक्षा बलों को बड़ी मदद मिलेगी। यही नहीं अमेठी के विकास और रोजगार की उपलब्धता के लिहाज से भी इसे अहम माना जा रहा है। रूस और भारत के बीच अगले 10 साल तक सैन्य तकनीक के सहयोग को लेकर भी करार हुआ है। यह अग्रीमेंट 2021 से 2031 तक लागू रहेगा।
बैठक को लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध बहुपक्षवाद, वैश्विक शांति, समृद्धि और आपसी समझ के आधार पर समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। रक्षा मंत्री के मुताबिक, जिस तरह वैश्विक जियो पॉलिटिकल हालात बदल रहे हैं ऐसे वक्त में भारत और रूस के बीच शिखर सम्मेलन का होना विशेष रणनीतिक साझेदारी की ओर इशारा करता है।
सिंह ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच की साझेदारी से क्षेत्र में शांति और स्थिरता आएगी। खुशी है कि छोटे हथियारों और सैन्य सहयोग से संबंधित कई समझौतों/अनुबंधों/प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए।
India deeply appreciates Russia’s strong support for India. We hope that our cooperation will bring peace, prosperity and stability to the entire region.
Glad that a number of Agreements/Contracts/Protocols were signed pertaining to small arms and military cooperation.
दोनों रक्षामंत्रियों के बीच बैठक से पहले सोमवार को ही विदेश मंत्री एस जयशंकर की अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ बैठक हुई। इसको लेकर एस जयशंकर ने कहा, “ये हमारी चौथी बैठक है। ये भारत और रूस के बीच विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।” एस जयशंकर के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन विश्वास का रिश्ता साझा करते हैं। गौरतलब है कि आज ही पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 2+2 स्तर की वार्ता होगी।
उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते से देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूती मिलेगी। S400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम विश्व के सबसे अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों में से एक है। इसकी जल्द आपूर्ति से भारत सीमाओं के साथ ही अपने आसमान को भी सुरक्षित रख सकेगा।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। सिंधिया ने सोमवार (6 दिसंबर 2021) को दिग्विजय सिंह के ‘गद्दार’ वाले बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, ”जिन्होंने ओसामा को ‘ओसामा जी’ कहा और कहा कि वे सत्ता में आने पर अनुच्छेद-370 को बहाल करेंगे। यह तो जनता तय करेगी कि कौन ‘गद्दार’ है। मैं उस स्तर तक नीचे नहीं गिर सकता।”
I don’t want to fall to that level… Ppl who called Osama as ‘Osama Ji’ & say that they’ll restore Art 370 when they come to power…public will decide as to who is a traitor, who isn’t: Jyotiraditya Scindia over reports of Congress leader Digvijaya Singh calling him a “traitor” pic.twitter.com/yfuGNIa4uz
दिग्विजय के गृह नगर राघोगढ़ में शनिवार (4 दिसंबर 2021) को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक सभा की थी। इसके कुछ ही देर बाद कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने पूर्व सहयोगी पर तीखा प्रहार किया था। उन्होंने सिंधिया के विधायकों समेत कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने पर उन्हें ‘गद्दार’ बताया था।
बता दें कि गुना के मधुसूदनगढ़ के रघुनाथ गाँव और विदिशा जिले के मुंडेला गाँव में शनिवार को दिग्विजय सिंह ने सभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2018 में हुए चुनाव के बाद कॉन्ग्रेस की सरकार तो बन गई थी, लेकिन सिंधिया गद्दारी कर गए। सिंधिया जी कॉन्ग्रेस छोड़कर चले गए और एक-एक विधायक का 25-25 करोड़ रुपए ले गए। मैं इसका क्या करूँ, किसने सोचा था ऐसा होगा। दिग्विजय ने आगे कहा कि इतिहास इसका साक्षी है, जब कोई व्यक्ति गद्दारी करता है, तो पीढ़ी दर पीढ़ी गद्दारी होती रहती है।
देश में कोविड-19 ने जब से दस्तक दी है, तभी से सबसे प्रभावित राज्यों की सूची में सबसे ऊपर नाम महाराष्ट्र का ही रहा। सबसे अधिक केस जब आए दिन महाराष्ट्र से आ रहे थे उस समय केवल मेडिकल स्टाफ ही था जो हर मोर्चे पर अपनी जान को दांव पर लगाकर मरीजों की देखरेख में जुटा था। लेकिन, अब यही मेडिकल स्टाफ है जो अपने मेहनताने के लिए महीनों से गुहार लगा रहा है और किसी के कान पर जूँ नहीं रेंग रही। वहीं मरीजों की बुनियादी जरूरत को पूरा करने वाले विक्रेता हैं जिन्हें उनके माल का पैसा अब तक नहीं मिला।
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक खबर, सूत्रों के हवाले से यह दावा करती है कि कोरोना के समय में जिन डॉक्टर, नर्स और वार्ड कर्मचारियों ने कोविड केंद्रों में काम किया उन्हें जुलाई-अगस्त से वेतन नहीं मिला है। हैरानी की बात ये है कि ऐसी लापरवाही उस समय की जा रही है जब तीसरी लहर का खतरा सिर पर मंडरा रहा है और ओम्रिकॉन केसों की संख्या भी 8 हो गई है।
Doctors, nurses, ward boys at temporary Covid facilities in Maharashtra not paid since July-August. Bills of vendors running into several crores pending. PSA plant and LMO installation vendors not paid. Sorry state of affairs in our state. pic.twitter.com/Qoo7vZzfnM
रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जिस स्टाफ ने अपनी सेवा दी, उनके पैसे कई महीने से उन्हें नहीं मिले। सूत्रों के हवाले से कहा गया कि बिजली बिल से लेकर मरीजों को दिए जाने वाले खाने का पैसा और अस्थायी कोविड केंद्रों पर रखे गए कर्मियों का वेतन अभी बकाया है। कुछ राज्यों में तो जहाँ ऑक्सीजन के लिए पीएसए प्लांट लगाए गए हैं वहाँ भी पेमेंट क्लियर नहीं की गई है। हर बिल लाख से करोड़ तक का है। सतारा जैसे छोटे जिले में 4 करोड़ रुपए बकाया है।
एक अधिकारी ने बताया, “हमें विक्रेताओं के कॉल आते हैं। उन्हें उस खाने के बदले पैसे ही नहीं मिले जो उन्होंने मरीजों को दिया। दवाइयों का भी बकाया अब तक नहीं दिया गया।” उन्होंने कहा कि अगर रातोंरात तीसरी लहर की तैयारी करना हो तो चंद ही लोग मदद के लिए आगे आएँगे।
सिविल सर्जन ने बताया कि एक जिले में को 300-400 स्वास्थ्यकर्मी हैं जिन्हे उनका वेतन नहीं दिया गया। इस सूची में डॉक्टर, नर्स और वार्ड ब्वॉय तक आते हैं जिन्हें दूसरी लहर के दौरान नियुक्त तो किया गया लेकिन उनको वेतन नहीं दिया गया। सर्जन ने इस बात की पुष्टि की कि अभी हर जिले पर करोड़ों रुपए बकाया है। उनके खुद के जिले को ‘कुछ करोड़’ देने हैं।
इस मामले में एक राज्य सरकार अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कोविड संबंधी बिलों के भुगतान के लिए कई बजट हेड बनाए हैं ताकि डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर सारे बिल चुका सकें। कलेक्टरों को अनुमति दी गई है कि वो राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष, जिला विकास निधि, और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन वाले फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अधिकारी ने कहा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष से 550 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे ताकि संबंधित खरीद और सेवाओं के लिए भुगतान हो। अब इसमें फंड 700 करोड़ रुपए से कम बचा है। अधिकारी का कहना है कि ये फंड भी कोविड पीड़ितों के परिवारों को 50 हजार रुपए का मुआवजा देने में खत्म हो जाएगा। योजना पूरी करने के लिए राज्य को 800 करोड़ रुपए की जरूरत है
महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ को अब गीतकार जावेद अख्तर में भी वीर सावरकर नजर आ रहे हैं। उनकी तारीफों के पुल बाँधे गए हैं। इस लेख में दावा किया गया है कि अन्याय के विरोध में लिखने पर आजकल लेखकों को ‘देशद्रोही’ करार दिया जाता है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से ही कई निर्दोष लोग सरकारी फैसलों का शिकार हुए हैं। कोरोना, सांप्रदायिक घटनाएँ और किसान आंदोलन – इन सब में लोगों की मौतों का दावा कर भाजपा पर इसका दोष मढ़ा गया है।
‘सामना’ के इस ‘अग्रलेख’ में पूछा गया है कि क्या ये सारी चीजें लेखकों और कवियों के चिंतन का विषय नहीं होनी चाहिए? बताया गया है कि नासिक में हुए 94वें साहित्य सम्मेलन में जावेद अख्तर ने इसी ओर इशारा दिया है। बता दें कि 70-80 के दशक में सलीम खान के साथ जोड़ी बना कर फिल्मों की कहानियाँ और पटकथाएँ लिखने वाले जावेद अख्तर जोड़ी टूटने के बाद गीतकार बन गए और आजकल ‘ट्विटर ट्रोल’ की भूमिका में हैं। इस साहित्य सम्मेलन में उन्हें मुख्य अतिथि की भूमिका में बुलाया गया था।
‘सामना’ ने उन्हें एक वाक्पटु और वक्त बताते हुए लिखा है कि ‘अघोषित प्रतिबंधों से गुजरते हुए देश में’ उन्होंने लोगों से अपील की, “जो बात कहने से डरते हैं सब, तू वो बात लिख, इतनी अँधेरी थी न पहले कभी रात लिख।” इसे वीर सावरकर को सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए लिखा गया है कि जावेद अख्तर ने लेखकों को आत्मसमर्पण न करने की सलाह दी है। स्वतंत्रता से पहले वीर सावरकर के उद्धरणों का जिक्र किया गया है। लिखा गया है कि उसी तरह आज जावेद अख्तर नेतृत्व कर रहे हैं।
‘सामना’ के इस लेख में लिखा है, “लोकतंत्र में, साहित्यिक और आम नागरिकों को बोलने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। श्री जावेद अख्तर का कहना है कि उन्हें प्रश्न पूछते रहना चाहिए। जो लेखक ऐसा नहीं करते, वो बकरियों और भेड़ों के उन पूँछों के सामान हैं जिनका देश के लिए कोई उपयोग नहीं। जो स्पष्ट रूप से बोलते हैं उन्हें घेर लिया जाता है और परेशान किया जाता है। जावेद अख्तर भी उस स्थिति से गुजरे हैं। इसलिए उनके दिल का दर्द बाहर आ गया। आपातकाल में लिखने की आजादी का गला घोंट दिया गया था, उसका दुख आज भी व्यक्त किया जाता है।”
शिवसेना ने सामना में जावेद अख़्तर की तारीफ़ की और उनके संदेश की तुलना सावरकर से की।
ये अजीब है, क्योंकि सितंबर 2021 में इसी शिवसेना ने ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)’ और ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ की तुलना तालिबान से करने पर जावेद अख्तर की आलोचना की थी। ‘सामना’ के उस लेख में दावा किया गया था कि RSS को लेकर कुछ मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जावेद अख्तर का बयान हिन्दू संस्कृति का अपमान करने वाला है। लेकिन, उसी लेख में जावेद अख्तर की प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि जब भी कट्टरवादी और देशद्रोही ताकतें सिर उठाती हैं, जावेद अख्तर उसके चीथड़े कर देते हैं।
बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद को बृह्ममुंबई नगर निगम (BMC) ने नोटिस भेजा है। बता दें कि बीएमसी ने ये नोटिस सोनू सूद को जुहू स्थित एक रेजिडेंट बिल्डिंग को होटल बनाने और उसमें अवैध निर्माण को लेकर भेजा है। यह नोटिस 15 नवंबर को जारी किया गया।
दरअसल, जुलाई में बीएमसी ने सोनू सूद को अपने जुहू होटल को वापस रेजिडेंट बिल्डिंग में बदलने और बिल्डिंग में किए गए अवैध निर्माण को हटाने के लिए कहा था, लेकिन सोनू ने जुलाई में बीएमसी से कहा था कि वह खुद ही इस बिल्डिंग को रिनोवेट करेंगे। हालाँकि, पिछले महीने जारी एक नए नोटिस में कहा कि सोनू ने अभी तक नोटिस में बदलाव नहीं किया है।
बीएमसी के नए नोटिस में सोनू सूद को संबोधित करते हुए लिखा है, “आपने अपने पत्र में कहा था कि आपने बिल्डिंग की मौजूदा पहली से छठी मंजिल में रहने/खाने की गतिविधि बंद कर दी है। इसका उपयोग स्वीकार की गई प्लानिंग के अनुसार रेजिडेंट्स के लिए किया जाएगा। साथ ही आपने उस आवश्यक कार्य का भी उल्लेख किया है।”
बीएमसी के नोटिस में आगे लिखा है, “साथ ही आपने उल्लेख किया था कि जोड़ने/बदलने/पुनर्स्थापन के लिए आवश्यक कार्य प्रगति पर है। इस कार्यालय (बीएमसी का कार्यालयल) ने 20.10.2021 को साइट का निरीक्षण किया है। इसमें यह देखा गया है कि आपने अभी तक स्वीकृत योजना के अनुसार काम शुरू नहीं किया है।”
गौरतलब है कि एक्टिविस्ट गणेश कुसमुलु ने सोनू सूद पर आरोप लगाया था कि उन्होंने होटल को बदल कर गर्ल्स हॉस्टल बना दिया है। इसके लिए इमारत को तोड़ दिया जाना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक सोनू सूद ने कहा, “हम पहले ही इसे बदल चुके हैं। हमने बीएमसी को ब्योरा जमा कर दिया है और डॉक्यूमेंटशन की प्रक्रिया चल रही है। मैं कोई अवैध गतिविधि नहीं कर रहा हूँ और यह स्वीकृत योजना के अनुसार एक आवासीय संरचना बनी रहेगी।”
जानकारी के मुताबिक सूद ने कथित तौर पर बीएमसी की आवश्यक अनुमति के बिना इमारत को होटल में बदल दिया था। इस साल की शुरुआत में, सूद ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका वापस लेने के बाद एक अनधिकृत होटल को वापस आवासीय परिसर में बदलने पर सहमति व्यक्त की थी। बता दें कि इससे पहले सोनू सूद पर टैक्स चोरी के भी आरोप लग चुके हैं।
मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद डॉक्टर सैयद तुफैल हसन (एसटी हसन) अक्सर अपने बयानों के कारण विवाद में रहते हैं। एक बार फिर उन्होंने ऐसा किया है। उन्होंने मुस्लिमों को कॉमन सिविल कोड का डर दिखाया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एसटी हसन ने कहा, “कौम के लिए मैं आपसे इतनी दरख़्वास्त करना चाहता हूँ कि चुनाव आने वाले हैं, अल्लाह के वास्ते इसमें बँट मत जाना। सिर्फ एक ही आपका मकसद होना चाहिए कि BJP को हराना है।”
हसन ने दावा किया कि BJP कॉमन सिविल कोड लाने वाली है। यदि यह कानून आया तो मुसलमानों के अधिकार छिन जाएँगे। इतना ही नहीं उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि इसके बाद मुस्लिम दूसरी शादी नहीं कर पाएँगे। मुस्लिमों के शैक्षणिक संस्थानों का माइनॉरिटी स्टेटस खत्म हो जाएगा। इसके बाद मुस्लिम संस्थाओं में 50% मुस्लिमों के पढ़ने का अधिकार खत्म हो जाएगा। हसन ने कहा, “आप चुनावों में बँटे तो इसके नतीजे घातक होंगे। इसलिए एकजुट होकर BJP को हराएँ।”
बता दें कि एसटी हसन ने इससे पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बयान देते हुए कहा था कि वे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उस बयान के साथ खड़े हैं, जिसमें बोर्ड ने सिविल कोड की मुखालफत की है। सपा सांसद का कहना था कि हिंदुस्तान का संविधान ये इजाजत नहीं देता। हसन ने कहा कि देश के संविधान ने इस तरह की इजाजत दी है कि हर मजहब के मानने वाले अपने हिसाब उसे फॉलो करें, उनके कानून चले, किसी भी कानून में बदलाव हो सकता है, लेकिन पर्सनल लॉ किसी के खत्म नहीं किए जा सकते, ये कानून के खिलाफ है।
उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एसटी हसन राष्ट्रगान ही भूल गए थे। उन्होंने झंडा तो फहराया लेकिन राष्ट्रगान भूल गए तो जल्दी-जल्दी में उल्टा-पुल्टा गाकर वहाँ से चलते बने थे। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो खूब वायरल हुआ था। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि राष्ट्रगान गाने के लिए दूसरी टीम थी जिसने गलत गा दिया और उन्होंने उन लोगों को टोका भी था। उन्होंने कहा कि उनकी याददाश्त कमजोर नहीं है और वो बचपन से राष्ट्रगान गाते आ रहे हैं।