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‘ये मुसलमान था ही नहीं, पिछवाड़े से चला गया’ : मुस्लिमों ने ‘रिजवी’ को धमकाया, कहा- ‘पैगंबर का अपमान करने वालों को मार डालो’

गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर में जब से शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने हिंदू धर्म अपना कर अपना नाम जितेंद्र नारायण स्वामी किया है, तभी से कट्टरपंथी उन पर और भड़क गए हैं। दावा किया जा रहा है कि वो शिया समुदाय के थे और कभी मुसलमानों में आते ही नहीं थे। उनके विरुद्ध सोशल मीडिया पर अभियान चल रहा है। ARREST_WASEEM_RIZVI हैशटैग पर अब तक 53 हजार से ज्यादा ट्वीट हो चुके हैं। इस हैशटैग में न केवल त्यागी को गिरफ्तार करने की माँग हो रही है बल्कि उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें भी शेयर की जा रही हैं।

मोहम्मद मुस्लिम अंसारी ने ट्विटर पर ‘रिजवी’ की गिरफ्तारी माँगते हुए कहा कि जिसने नफरत फैलाई और इस्लाम के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी की उसे अब तक जेल के पीछे होना चाहिए लेकिन इतने संवेदनशील मामले पर संज्ञान नहीं लिया जा रहा।

मेहरीन लिखती हैं, “वसीम रिजवी मुसलमान था ही नहीं। ये जानकर खुशी हो रही है कि उसका अब इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है।”

पत्रकार इरेना अकबर इस खबर पर लिखती हैं, “वसीम रिजवी का आधिकारिक तौर पर इस्लाम छोड़ना एक अच्छी खबर हैं। सांप घर के पिछवाड़े से चला गया है। अब घर शुद्ध और डिटॉक्सिफाई होगा। “

एक नसीम अकरम नाम की आईडी से यूजर लिखता है, “वसीम रिजवी और नरसिंहानंद सरस्वती हमारे पैगंबऱ और कुरान के दुश्मन हैं। इनका कोई मजहब नहीं है। ये इस्लाम के नाम पर बकवास करते हैं। स्वतंत्र भारत में ये अस्थिरता लाना चाहते हैं।”

कुछ लोगों का कहना ये भी है कि चूँकि रिजवी ने कुरान की आयतों पर सवाल खड़ा किया था इसलिए उन्हें अल्लाह ने ही इस्लाम से खारिज करवाया है। दिलावर हुसैन लिखता है, इस्लाम शैतान के लिए नहीं है। ये आज साबित हो गया।

नफीस रब्बानी ने कहा कि सारे मुस्लिम उम्माह उठें और हमारी बची मस्जिदों की रक्षा करें सालाह पढ़कर और उन्हें इस्लाम की असली ताकत दिखाएँ और हमारे पैगंबर का अपमान करने वालों को मार डालें।

इन सब बातों के अलावा इस हैशटैग के अंतर्गत एक वीडियो शेयर हो रही है। इसमें एक व्यक्ति ‘रिजवी’ का सिर कलम करवाने के लिए इनाम की घोषणा करता है। वह कहता है कि जो कोई भी ‘रिजवी’ का मर्डर करके गला उसके पास ले जाएगा उसे 50 लाख रुपए मिलेंगे। इसके अलावा हर जगह, हर कोर्ट में वह कातिल का साथ देगा, उसके लिए वकील करेगा।

यह वीडियो कब की और किसकी है, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता, लेकिन वीडियो के पीछे बैकग्राउंड में तस्वीर राहुल गाँधी की दिख रही है और कॉन्ग्रेस का चिह्न भी छपा दिख रहा है।

यूपी में पहली बार: बाबा विश्वनाथ दरबार में होगी योगी सरकार की कैबिनेट, ‘भव्य काशी दिव्य काशी’ के लिए ऐसी है तैयारी

वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे। समारोह को भव्य बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियाँ की जा रही हैं। सबसे बड़ी तैयारी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के साथ ही योगी कैबिनेट की मीटिंग को लेकर हो रही है। 

14 दिसंबर को भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसके बाद 16 दिसंबर को योगी सरकार की कैबिनेट की बैठक होगी। यह बैठक काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में ही कराने की तैयारी हो रही है। अगर ऐसा होता है तो देश में पहली बार किसी सरकार की कैबिनट की बैठक किसी मंदिर में होगी। 

16 दिसंबर को होने वाली योगी कैबिनेट की बैठक में दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और डॉ. दिनेश शर्मा के साथ ही अन्य मंत्री और अधिकारी मौजूद रहेंगे। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को लेकर हो रहे आयोजनों को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का बड़ा दाँव माना जा रहा है।

इस बैठक को लेकर वाराणसी जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। सुरक्षा के लिहाज से भी यहाँ पुलिस ऑफिसर ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। अब तक उत्तर प्रदेश के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ है, जब पूरी कैबिनेट लखनऊ छोड़कर कहीं किसी मंदिर में पहुँचे और वहाँ बैठक हो।

13 दिसंबर को कॉरिडोर के लोकार्पण के साथ ही काशी में एक महीने तक चलने वाले आयोजनों की शुरुआत भी हो जाएगी। इसमें भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन, देश के सभी महापौरों का सम्मेलन के अलावा हर दिन अलग-अलग आयोजन होने हैं। ‘काशी चलो’ अभियान के तहत पूरे देश से काशी के लिए ट्रेनें चलाई जाएँगी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण करने के बाद 14 दिसंबर को भाजपा के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। सम्मेलन में 12 राज्यों के मुख्यमंत्री व दो राज्यों के तीन डिप्टी सीएम भाग लेंगे। यह सम्मेलन पाँच सत्रों में होगा। उसमें वे अपने राज्यों में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन का प्रेजेंटेशन देंगे। भाजपा पदाधिकारियों के मुताबिक शासन स्तर पर सभी मुख्यमंत्रियों को आमंत्रण भेजा जा चुका है। 

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी में करीब हफ्ते भर का प्रवास करने जा रहे हैं। सर्किट हाउस मुख्यमंत्री का कैम्प कार्यालय बनेगा। अधिकारियों के मुताबिक वह 8 से 14 दिसंबर तक काशी से सरकार चलाएँगे। इस दौरान पीएम के आगमन, विश्वनाथ धाम के लोकार्पण और महीने भर तक प्रस्तावित काशी विश्वनाथ यात्रा की तैयारियों की निगरानी करेंगे। 

उनका गोरखपुर और आसपास के जिलों का दौरा भी बनारस से ही होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी प्रवास के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों व अधिकारियों के साथ कार्य निबटाएँगे। इसके साथ ही 16 दिसंबर को काशी में होने वाली कैबिनेट बैठक की तैयारियों को भी अंतिम रूप देंगे।

इनामी नक्सली को मार गिराया, कल्लू गैंग का भी एनकाउंटर: सपाइयों ने जिस डिप्टी एसपी से लिया पंगा, वो फिल्मों में भी गुंडों को धोते हैं

आपने हाल ही में उत्तर प्रदेश के चंदौली में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के नेताओं को चंदौली में डिप्टी एसपी अनिरुद्ध सिंह के साथ हाथापाई और धक्का-मुक्की करते हुए देखा होगा। पुलिस अधिकारी ने काफी संयम से उस समय काम लिया। सकलडीहा के डिप्टी एसपी अनिरुद्ध सिंह का सपा विधायक प्रभु नारायण सिंह ने तो गला पकड़ लिया और अपने सिर से उन्हें कई टक्कर मारे। तेज-तर्रार अधिकारी अनिरुद्ध सिंह अभिनय की दुनिया में भी हाथ आजमा चुके हैं।

जालौन जिले के रहने वाले अनिरुद्ध सिंह के बारे में बता दें कि वो 2001 में पुलिस की नौकरी जॉइन कर वाराणसी में सब इंस्पेक्टर बने थे। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में पहचान बनाने के बाद 2007 में उनकी पोस्टिंग चंदौली जिले में हुई। उससे पहले 2005 में ट्रक लूटकर भाग रहे कल्लू चौरसिया गैंग के तीन बदमाशों के एनकाउंटर में उनका नाम सामने आया था। उन्हें बलुआ, अलीनगर और सैयदराजा – इन तीन थानों में वो बतौर थानाध्यक्ष तैनात रहे।

इस दौरान वो SOG प्रभारी भी रहे और एक लाख रुपए के इनामी नक्सली संजय कोल का एनकाउंटर किया। 2010 में ‘आउट ऑफ टर्न’ प्रमोशन देकर उन्हें इंस्पेक्टर बनाया गया और कई जिलों के बाद 2014 में उन्हें फिर चंदौली की ही कमान मिली। चंदौली कोतवाली के बाद वो मुगलसराय कोतवाली में कार्यरत रहे। 2019 में उनका प्रमोशन कर पुलिस क्षेत्राधिकारी बनाया गया। 2019 में वाराणसी में उन्हें CB-CID में पदस्थापित किया गया। फिर बदायूँ जिले में वो पुलिस उपाधीक्षक रहे।

बदायूँ जिले में इनके कामों की चर्चा पूरे उत्तर प्रदेश में होती रही है। वहाँ उन्होंने लगभग 2500 शराब कारोबारियों और चोरी-चकारी करने वालों को मुख्यधारा से जोड़ाने में सफलता पाई, जिसमें ‘बावरिया गैंग’ के लोग भी शामिल थे। वाराणसी के नदेसर इलाके में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान जब वो भीड़ को नियंत्रित करने में लगे हुए थे तो निर्देशक उनसे इतना प्रभावित हुआ कि उन्हें तेलुगु फिल्म ‘डॉ चक्रवर्ती’ में काम करने का ऑफर मिल गया। असल में भीड़ इतनी बेकाबू हो गई थी कि उन्हें वहाँ आना पड़ा था।

उच्चाधिकारियों से उन्हें इस फिल्म में अभिनय की अनुमति भी मिली। ‘गन्स ऑफ बनारस (2020)’ और ‘भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया (2020)’ में भी वो दिखे। हालाँकि, फिल्म शूटिंग के कारण ड्यूटी से अनुपस्थिति के आरोप में मई 2016 में उन्हें निलंबन भी झेलना पड़ा था। तब वो इलाहाबाद में क्राइम ब्रांच निरीक्षक के रूप में तैनात थे। अपने लुक्स के कारण भी वो चर्चा में रहते हैं। जौनपुर में भी वो पदस्थापित रह चुके हैं। वेब सीरीज ‘दी रेडलैंड’ में भी उन्होंने अपने अभिनय का जलवा दिखाया है।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चंदौली के रामगढ़ स्थित बाबा कीनाराम की जन्मस्थान में 30 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास करने के लिए आने वाले थे। लेकिन, सीएम के आने से पहले ही सपा के पूर्व सांसद रामकिशन यादव और सकलडीहा से सपा के विधायक प्रभु नारायण सिंह के साथ सैकड़ों की संख्या में सपा कार्यकर्ताओं ने पहले सड़क मार्ग को रोका और बाद में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के इरादे से निकल पड़े। रोके जाने पर उन्होंने हंगामा किया और गुंडागर्दी पर उतर आए।

संभल: चामुंडा मंदिर में घुसकर अराजक तत्वों ने मूर्तियाँ तोड़ी, हिंदुओं में आक्रोश

उत्तर प्रदेश के संभल में अराजक तत्वों ने माहौल खराब करने के उद्देश्य से चामुंडा मंदिर में घुसकर दो मूर्तियों को तोड़ डाला। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपितों की तालाश में जुट गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिले के गुन्नौर कस्बे के चामुंडा मंदिर में रविवार (5 दिसंबर 2021) की रात कुछ बदमाशों ने घुसकर अंदर रखी प्रतिमाओं को खंडित कर दिया। सोमवार (6 दिसंबर 2021) की सुबह जब श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुँचे तो वहाँ देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों को देखकर वो भड़क गए।

भाजपा नेता कुमोद कुमार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अधीक्षक (SP) चक्रेश मिश्रा ने मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मिश्रा ने बताया कि गुन्नौर कस्बे में सोमवार सुबह चामुंडा माता मंदिर में दो मूर्तियाँ खंडित पाई गई। पुलिस द्वारा जाँच में पता चला कि यह घटना चोरी के प्रयास के दौरान हुई। उन्होंने बताया कि इलाके में शांति का माहौल है। एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया कि आरोपितों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ पहले भी हो चुकी है। पुलिस केवल खानापूर्ति करती है। कोई कार्रवाई नहीं करती।

मंदिर प्रबंध कमेटी के लोगों का कहना है कि इससे पहले भी कस्बे में एक और मंदिर में ऐसे ही तोड़फोड़ की गई थी। इसके बावजूद गुन्नौर कोतवाली पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था। इस बार भाजपा नेता कुमोद कुमार ने थाने में शिकायत देकर असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

माँ ने पाँव पकड़ी, बेटे ने काट डाली बहन की गर्दन, कटे सिर के साथ ली सेल्फी… महाराष्ट्र में खौफनाक मामला

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाला वारदात सामने आया है। जिसे देख पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए। यहाँ एक छोटे भाई ने बेरहमी से अपनी बड़ी बहन की हत्या कर दी। ऑनर किलिंग की इस जघन्य वारदात में आरोपित का साथ उसकी माँ ने भी दिया। दोनों ने मिलकर बेटी को मौत के घाट उतार दिया। 

इस तरह से उसकी हत्या की कि उसका सिर धड़ से ही अलग कर दिया। खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद वह अपने आप को सरेंडर करने के लिए पुलिस के पास भी पहुँचे। जहाँ उन्होंने जुर्म कबूलते हुए पूरी कहानी बयाँ की। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने पहली नजर में इसे ‘ऑनर किलिंग’ का मामला बताया है।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक बहन की बेरहमी से हत्या करने के बाद आरोपित लड़का कटे हुए सिर को आँगन में ले गया और हवा में उछालकर फेंक दिया। इसके बाद माँ-बेटे दोनों घटनास्थल से फरार हो गए। हालाँकि, पुलिस ने दावा किया कि फरार होने से पहले माँ-बेटे ने कटे सिर के साथ सेल्फी भी ली थी।

दरअसल, यह शॉकिंग क्राइम औरंगाबाद जिले के लाड़गाँव शिवार गाँव में घटी। जहाँ रविवार (5 दिसंबर 2021) देर रात आरोपित संकेत संजय मोटे ने अपनी माँ शोभा संजय मोटे के साथ मिलकर छोटी बहन कीर्ति ठोरे (19) की दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी। मृतका ने कुछ दिन पहले ही अपने प्रेमी से प्रेम विवाह किया था। जिससे उसके परिवार वाले खुश नहीं थे। वह शादी के बाद से ही उसकी हत्या करने की योजना बना रहे थे।

जानकारी के मुताबिक आरोपित ने छह महीने पहले पुणे के आलंदी में शादी की थी। कुछ दिन पहले ही वह वहाँ से लौटी थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि वह गर्भवती थी। कपल की वापसी के बारे में पता चलने पर माँ-बेटे उससे मिलने गए। जैसे ही उसे पता चला कि माँ और भाई आए हैं तो वह उनसे मिलने पहुँची और उनके लिए चाय बनाने चली गई। लेकिन उसे क्या पता था कि वह उसकी हत्या करने आए हैं।

जैसे ही मृतका किचिन में गई तो माँ ने पीछे से आकर उसके पैर पकड़ लिए और भाई ने धारदार हथियार से एक ही झटके में सिर धड़ से अलग कर दिया आरोपित तब तक उसकी गर्दन पर वार करता रहा जब तक उसका सिर कटकर अलग नहीं हो गया। आरोपितों ने इसके बाद उसके कटे सिर के साथ सेल्फी भी ली। 

जिस दौरान ये सब हो रहा था, मृतका का पति भी घर में मौजूद था। जानकारी के अनुसार मृतका का पति बीमार होने की वजह से घर मे सोया था। बर्तन गिरने की आवाज से वो उठा तभी भाई ने उसे भी मारने की कोशिश की। लेकिन वो किसी तरह बचकर भाग गया। उसके बाद भाई सिर हाथ में लेकर बाहर बरामदे में आया। सभी को दिखाया और फिर मोटरसाइकिल पर बैठकर पुलिस थाने जाकर सरेंडर कर दिया। 

3 बार हुई गोलीबारी, मारे गए 14 नागरिक: अमित शाह ने संसद में बताया नागालैंड में क्या हुआ, 250 की भीड़ ने जलाया ‘असम राइफल्स’ का दफ्तर

नागालैंड में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 13 नागरिकों की मौत और उसके बाद हुई हिंसा में एक सैनिक की मौत के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (6 दिसंबर, 2021) को संसद में बयान दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना को नागालैंड के मोन जिले के तिजीत क्षेत्र में तिरुगाँव के पास उग्रवादियों की आवाजाही की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर सेना के 21 पैराकमांडो के एक दस्ते ने 4 दिसंबर, 2021 की शाम को संदिग्ध क्षेत्र में घात लगाया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि जहाँ भारतीय सेना मौजूद थी, उसी स्थान पर एक वाहन गुजरा। वाहन को रुकने का इशारा किया गया, लेकिन वो गाड़ी उस जगह से तेजी से निकलने का प्रयास करने लगी। अमित शाह ने बताया कि इस आशंका पर कि वाहन में संदिग्ध विद्रोही जा रहे थे, उस पर गोली चलाई गई और उसमें सवार 8 व्यक्तियों में से 6 की मौत हो गई। अमित शाह ने माना कि बाद में ये ‘गलत पहचान’ का मामला पाया गया और जो दो लोग घायल हुए थे, उन्हें सेना द्वारा ही इलाज हेतु नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया।

अमित शाह ने संसद को बताया, “इस घटना का समाचार मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सेना की टुकड़ी को घेर लिया, दो वाहनों को जला दिया और उन पर हमला किया। इसके परिणामस्वरूप सुरक्षा बल के एक जवान की मृत्यु हो गई। कई अन्य जवान घायल हो गए। अपनी सुरक्षा में एवं भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जवानों को गोली चलानी पड़ी, जिसमें 7 अन्य नागरिकों की मौत हो गई कुछ कुछ अन्य घायल हो गए। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए हैं।”

केंद्रीय गृह मंत्री ने जानकारी दी थी स्थिति अभी भी तनावपूर्ण ही है, लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है। उन्होंने बताया कि नागालैंड के पुलिस महानिदेशक और वहाँ के आयुक्त ने घटना के अगले घटनास्थल का दौरा किया। अमित शाह ने तिजीत पुलिस थाने में इस घटना को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए इसे ‘राज्य अपराध पुलिस स्टेशन’ को जाँच के लिए सौंप दिया गया है। साथ ही एक विशेष SIT का भी गठन किया गया है, जिसे निर्देश दिया गया है कि वो एक महीने के भीतर जाँच पूरी करे।

उन्होंने बताया, “उपरोक्त घटना के अगले दिन शाम को लगभग 250 लोगों की उद्वेलित भीड़ ने मोन शहर में ‘असम राइफल्स’ की कंपनी ऑपेरेटिंग बेस ने तोड़फोड़ की और दफ्तर में आग लगा दी, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए ‘असम राइफल्स’ को गोली चलानी पड़ी। इस कारण एक और नागरिक की मृत्यु हो गई और एक घायल हो गए। प्रभावित क्षेत्र में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। सेना के 3 कोर मुख्यालय द्वारा एक प्रेस व्यक्तव्य जारी किया गया है।”

बता दें कि इस प्रेस वक्तव्य में भारतीय सेना ने निर्दोष नागरिकों की मौत को लेकर अत्यधिक दुःख व्यक्त किया था। अमित शाह ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि सेना इसके कारणों की जाँच उच्च-स्तर पर की जा रही है और कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी। अमित शाह ने बताया कि वो लगातार नागालैंड की सरकार से संपर्क में हैं और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तुरंत पूर्वोत्तर के सचिव को कोहिमा भेजा, जहाँ उन्होंने वहाँ के नेताओं-अधिकारियों के साथ बैठक की।

अमित शाह ने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और पूरे दिन इस घटना को लेकर सूक्ष्म निगरानी रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चलाते समय भविष्य में ऐसी किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना न हो। उन्होंने कहा कि शांति-सौहार्दता के लिए राज्य प्रशासन ने कुछ निषेध्यता लागू की है और कदम उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दल लगातार इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर हैं और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी इस पर ट्वीट किया था।

बता दें कि ‘असम राइफल्स’ ने ये भी जानकारी दी है कि 13 ज़िंदगियों के चले जाने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और उच्च-स्तर पर इसकी जाँच की जा रही है। साथ ही आश्वस्त किया गया है कि कानून के हिसाब से इस मामले में उचित करवाई की जाएगी। जहाँ सेना के एक जवान की मौत हुई है, कई अन्य घायल भी हुए हैं। प्रतिबंधित आतंकी संगठन NSCN (K) के ‘युंग ऑन्ग’ गुट के वहाँ सक्रिय होने की सूचना मिली थी। बता दें कि ये आतंकी संगठन म्यांमार में स्थित है और भारत में अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है।

2022 में BJP और ढींडसा के साथ मिलकर लड़ेंगे चुनाव: कैप्टन अमरिंदर सिंह का ऐलान, बोले- ‘हमें विजेताओं को चुनना चाहिए’

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियाँ तेज हैं। कॉन्ग्रेस से अलग होकर नई पार्टी गठित करने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने चंडीगढ़ में अपनी पार्टी का ऑफिस खोला है। इसके साथ ही कैप्टन ने बीजेपी और ढींडसा के साथ गठबंधन कर आगामी विधानसभा चुनाव भी लड़ने का ऐलान कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (6 दिसंबर 2021) को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चंडीगढ़ के सेक्टर 9 डी में पार्टी के कार्यालय का उद्घाटन किया। बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी का नाम पंजाब लोक कॉन्ग्रेस पार्टी है। बीजेपी के साथ समझौते को लेकर उन्होंने कहा कि हालाँकि, पार्टी स्तर पर अभी तक प्रधानमंत्री या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बात नहीं हुई, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर दोनों ही नेताओं से बातचीत हो चुकी है।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कैप्टन ने कहा है, “हमारा उद्देश्य पंजाब विधानसभा चुनाव जीतना है और हम जीतेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “सैद्धांतिक तौर पर फैसला हो चुका है, अब सीट एडजस्टमेंट करना है। हम ढींडसा साहब की पार्टी के साथ सीट एडजस्टमेंट भी करेंगे। मैं दोनों पार्टियों से कहूँगा कि हमें विजेताओं को चुनना चाहिए और उन्हीं उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहिए।”

पार्टी के उद्घाटन को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट किया, “आज ‘पंजाब लोक कॉन्ग्रेस’ कार्यालय का उद्घाटन करने से पहले वाहेगुरु जी का आशीर्वाद लिया। पंजाब की समृद्धि और सुरक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। मैं अपने राज्य और इसके लोगों के कल्याण के लिए काम करना जारी रखने का संकल्प लेता हूँ।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी अमरिंदर सिंह और टकसाली नेता ढींडसा के साथ समझौता करने का इशारा किया था। शनिवार को उन्होंने कहा था कि कैप्टन और सुखदेव सिंह ढींडसा के साथ बातचीत हो रही है।

भारत अनादि काल से आध्यात्मिक रहा है, संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ जोड़ने से देश की छवि धूमिल हुई: हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मित्तल ने संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’ शब्द जोड़े जाने पर आपत्ति जताई है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत अनादि काल से एक आध्यात्मिक देश रहा है। संविधान की प्रस्तावना से ये दो शब्द जोड़ने से देश की इस छवि को नुकसान पहुँचा है।

रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस मित्तल ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में पहले से ही उल्लेखित ‘संप्रभु, लोकतांत्रिक, गणतंत्र’ में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द 1976 में जोड़कर देश की आध्यात्मिक छवि की विशालता को सीमित कर दिया गया। उन्होंने ये भी कहा कि संविधान में देश को ‘आध्यात्मिक लोकतंत्र भारत’ कहा जाना चाहिए था।

जस्टिस पंकज मित्तल ने रविवार (5 दिसंबर 2021) को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अधिवक्ता परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘धर्म और भारत का संविधान: परस्पर क्रिया’ शीर्षक पर बोलते हुए यह बात कही। जस्टिस मित्तल का कहना है कि भारत अपने सभी नागरिकों की देखरेख और सुरक्षा करने में सक्षम है। इसमें पहले से ही समाजवादी प्रकृति शामिल है। उन्होंने कहा कि पांडवों से लेकर मौर्य, गुप्त, मुगलों और अंग्रेजों ने इस पर शासन किया, लेकिन भारत को कभी भी मुस्लिम, ईसाई या हिंदू राष्ट्र के रूप में धर्म के आधार पर परिभाषित नहीं किया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि एक आध्यात्मिक राष्ट्र के रूप में देश की सर्वमान्य छवि रही है।

संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े जाने को लेकर उन्होंने कहा, “इसे एक संकीर्ण सोच कहा जा सकता है।” संशोधनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संशोधनों का होना अच्छा है, क्योंकि ये काफी मददगार साबित होते हैं। लेकिन जो राष्ट्रीय हित में नहीं हैं, वे किसी काम के नहीं हैं। उन्होंने कहा, “कभी-कभी हम अपनी जिद के कारण संशोधन लाते हैं।” अपनी बात को पुख्ता करने के लिए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 1976 में संविधान में किए गए दो संशोधनों का जिक्र किया। पहला संविधान के 14वें चैप्टर में मौलिक कर्तव्यों को जोड़ना और प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को जोड़ना। उन्होंने कहा, “ये बहुत अच्छे शब्द हैं, लेकिन हमें यह देखना होगा कि क्या इन संशोधनों की आवश्यकता थी या इन्हें सही जगह पर जोड़ा गया है।”

जो है सलमान खान का बॉडीगार्ड, उसकी टीम कराएगी कैटरीना कैफ की शादी

बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी की चर्चा इन-दिनों जोरो पर है। खबर है कि दोनों लव बर्ड्स 9 दिसंबर को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। इस दौरान सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा की पर्सनल टीम को विक्की और कैटरीना की शादी में सुरक्षा व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिली है। शेरा फिल्म इंडस्ट्री में काफी मशहूर हैं। वह टाइगर सिक्योरिटी सर्विसेज (Tiger Security Services) नाम से अपनी खुद की सिक्योरिटी कंपनी चलाते हैं। कंपनी सिक्स सेंस फोर्ट बड़वारा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी, जहाँ ये शादी होनी वाली है। इसके अलावा राजस्थान पुलिस ने भी जयपुर से करीब 100 बाउंसरों को हायर किया है।

वहीं, बीते कुछ दिनों से एक और खबर खासा सुर्खियों रही है कि सलमान खान परिवार संग इस इवेंट में शामिल नहीं होंगे। वह अपनी एक्स गर्लफ्रेंड कैटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी को स्किप कर सकते हैं। दरअसल, बॉलीवुड के भाईजान और कैटरीना की लव स्टोरी किसी से छिपी हुई नहीं है। भले ही कैट ने कैजाद गुस्ताद की फिल्म ‘बूम’ से बॉलीवुड में अपना फिल्मी सफर शुरू किया हो, लेकिन सही मायनों में सलमान खान के साथ फिल्म ‘मैंने प्यार क्यों किया’ को उनकी डेब्यू फिल्म माना जाता है। इसके बाद ये जोड़ी ‘पार्टनर’ और ‘एक था टाइगर’ और ‘टाइगर जिंदा है’ फिल्म में भी नजर आई थी। उन दिनों बॉलीवुड गलियारों में दोनों की लव लाइफ को लेकर कई रिपोर्ट्स सामने आई थीं। कहा जाता था कि इन फिल्मों में काम करने के बाद ये दोनों बेहद करीब आ गए और दोनों में प्यार हो गया था।

सलमान ने कैटरीना का मेंटर बनकर उनके करियर को आगे ले जाने में भी काफी मदद की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों 5 साल तक रिलेशनशिप में रहे थे, लेकिन सलमान के अग्रेसिव व्यवहार से परेशान होकर कैट ने उनसे ब्रेकअप कर लिया था। इसके बाद ‘राजनीति’ की शूटिंग के दौरान रणबीर कपूर और कैटरीना एक दूसरे के करीब आ गए, लेकिन कुछ साल बाद इन ​दोनों के प्यार ने भी दम तोड़ दिया। इन सबके बावजूद आज भी कैटरीना कैफ के सलमान खान के परिवार से अच्छे संबंध हैं। ऐसे में ये देखना खास होगा कि शेरा की टीम जिस शादी की सिक्योरिटी संभाल रही है उसमें ‘बंजरगी ​भाईजान’ फिल्म के अभिनेता शिरकत करते हैं या नहीं।

बता दें कि कैट और विक्की का 7 दिसंबर को संगीत समारोह, 8 दिसंबर को मेहंदी समारोह होगा। यह जोड़ा 9 दिसंबर को शादी के बंधन में बंध जाएगा और 10 दिसंबर को इनका रिसेप्शन होगा।

‘राकेश टिकैत के आंदोलन को कॉन्ग्रेस की फंडिंग, बल प्रयोग कर के हटाए जाएँ प्रदर्शनकारी’: किसान नेता का बड़ा खुलासा

BKU (भानु) के अध्यक्ष और वरिष्ठ किसान नेता भानु प्रताप सिंह ने आरोप लगाया है कि राकेश टिकैत कॉन्ग्रेस की फंडिंग से अपना आंदोलन चला रहे हैं। ‘भारतीय किसान यूनियन (भानु)’ के अध्यक्ष ने कहा कि राकेश टिकैत फंडिंग के ऊपर ही काम करते हैं। बता दें कि पिछले 1 साल से चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के दौरान दिल्ली की सीमाओं को जाम कर के रखा गया, जिससे आम लोगों को खासी परेशानी हुई। अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा की।

हालाँकि, इन सबके बावजूद ये आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है और BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत रोज नए मुद्दे लेकर आ रहे हैं। ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी चाहती ही नहीं है कि ये ‘किसान आंदोलन’ ख़त्म हो, तभी तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के बावजूद दिल्ली की सीमाएँ खाली नहीं की जा रही हैं। उन्होंने माँग की कि अगर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग करने की ज़रूरत पड़े तो ऐसा किया जाना चाहिए।

इससे पहले ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने राकेश टिकैत को ‘आतंकवादी’ भी करार दिया था। 26 जनवरी, 2021 को ट्रैक्टर रैली के नाम पर जिस तरह से दिल्ली में हिंसा हुई और कट्टरवादी सिख संगठनों के साथ मिल कर प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिसकर्मियों को घायल कर के लाल किला पर झंडा फहराया, उसके बाद से ही खुद को इस आंदोलन से अलग कर भानु प्रताप इस पर हमलावर हैं। अब राकेश टिकैत 700 मृतक किसानों की बात कर उनके लिए मुआवजा और MSP की गारंटी पर कानून की माँग कर रहे हैं।

राकेश टिकैत ने इसके लिए 5 सदस्यीय समिति के गठन का भी ऐलान किया है, जो केंद्र सरकार से बातचीत करेगी। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ की इस समिति में बलबीर सिंह राजेवाल, शिव कुमार कक्का, गुरनाम सिंह चढ़ूनी, युद्धवीर सिंह और अशोक धवले शामिल हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र से बातचीत के लिए ये ‘आधिकारिक कमिटी’ है। SKM की बैठक के बाद उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से किसानों की बातचीत बेनतीजा रही।

कुछ दिनों पहले ही खबर आई थी कि राकेश टिकैत अब बैंकों के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन करने के मूड में हैं। बैंकों के निजीकरण के खिलाफ बोलते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया था। उन्होंने ट्वीट कर संकेत दिया था कि वह अब नए मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को घेरने वाले हैं। उन्होंने लिखा था, “हमने आंदोलन की शुरुआत में आगाह किया था कि अगला नंबर बैंकों का होगा। नतीजा देखिए, 6 दिसंबर को संसद में सरकारी बैंकों के निजीकरण का बिल पेश होने जा रहा है। निजीकरण के खिलाफ देश भर में साझा आंदोलन की जरूरत है।