मध्य प्रदेश स्थित इंदौर की पुलिस ने बहुत बड़े सेक्स रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने मानव तस्करी और देह व्यापार में शामिल मोमिन नाम के एक बांग्लादेशी को उसके साथी बबलू के साथ गिरफ्तार किया है। उसने पुलिस के सामने 5000 से अधिक लड़कियों की खरीद-फरोख्त और उन्हें सेक्स रैकेट में धकेलने का खुलासा किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘विजय कुमार’ के छद्म नाम से रह रहा मोमिन करीब 25 साल पहले बांग्लादेश से भारत आया था, भारत में घुसने के बाद वो मुंबई के नाला सोपारा इलाके के तंग इलाके में रहने लगा। फिलहाल, पूछताछ में उसने कबूल किया है कि मुंबई और सूरत जैसी जगहों पर दलालों की संख्या काफी ज्यादा थी। इसी कारण उसने इंदौर को अपने धंधे का नया ठिकाना बनाने की कोशिश में लगा हुआ था, ताकि एक सप्लाई चेन बनाई जा सके।
बांग्लादेशी दलाल की बीवी अपने देश में समाज कल्याण के नाम पर एक एनजीओ चलाती है, जिसकी आड़ में वो बांग्लादेश से भारत में लड़कियों की सप्लाई करती थी। वो गरीब घर की लड़कियों को नौकरी दिलवाने के बहाने भारत भेजती थी, लेकिन यहाँ पहुँचते ही उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था।
10 शादियाँ और 100 गर्लफ्रेंड हैं
इंदौर के आईजी हरिनारायण मिश्रा चारी का कहना कि मुख्य आरोपित मोमिन ने 10 शादियाँ की हैं और उसकी 100 गर्लफ्रेंड हैं। उसने इंदौर, धार, झाबुआ, अहमदाबाद, सूरत, जयपुर समेत देश के कई शहरों में सप्लाई चेन बना ली थी। देह व्यापार की आड़ में वो नशीले पदार्थों की तस्करी भी कर रहा था।
ऐसे पकड़ा गया दलाल
इंदौर की विजयनगर थाना पुलिस के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर 2020 में पुलिस में शिकायत कर बताया था कि वो बांग्लादेश की रहने वाली है और उसे शबाना औऱ बख्तियार ने अवैध तरीके से सीमा पार करवाकर भारत में विजय के हवाले किया था। तभी से वह पुलिस की रडार पर था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने टीम बनाई थी। वो करीब एक सप्ताह पहले मुंबई में था, लेकिन जैसे ही उसे पुलिस की कार्रवाई का पता चला तो वो इंदौर आ गया। हालाँकि, यहाँ विजयनगर पुलिस ने उसे धर दबोचा।
जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने एक बार फिर से ज़हर उगला है। उन्होंने कहा कि हम ‘गोडसे के हिंदुस्तान’ में नहीं रह सकते।PDP की मुखिया महबूबा मुफ़्ती ने बुधवार (24 नवंबर, 2021) को केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने धमकी भरे अंदाज़ में कहा कि अगर जम्मू कश्मीर को रखना चाहते हैं तो पहले अनुच्छेद-370 को पुनः बहाल किया जाए और कश्मीर मुद्दे का समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि लोग अपना ‘पंचन एवं सम्मान’ वापस चाहते हैं, वो भी सूद के साथ।
उन्होंने कहा कि हम महात्मा गाँधी का भारत चाहते हैं, इसीलिए, जम्मू कश्मीर के लोग ‘गोडसे के हिंदुस्तान’ में नहीं रह सकते। महबूबा मुफ़्ती ने लोगों को एकजुट रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा संविधान ने दिया था, जिसके समर्थन में संघर्ष है। उन्होंने ये भी कहा कि लोग अपनी ‘पहचान एवं सम्मान’ की सुरक्षा के लिए अपनी आवाज़ मुखर करें। बनिहाल के नील गाँव में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं।
महबूबा मुफ़्ती ने इस दौरान कहा, “हमारी किस्मत का फैसला महात्मा गाँधी के भारत के साथ किया था, जिसने हमें अनुच्छेद 370 दिया, हमारा अपना संविधान और झंडा दिया। हमलोग गोडसे के साथ नहीं रह सकते। अगर वो हमारी हर चीज छीन लेंगे तो हम भी अपना फैसला वापस ले लेंगे। उन्हें सोचना होगा कि अगर वो अपने साथ जम्मू कश्मीर को रखना चाहते हैं तो उन्हें अनुच्छेद-370 को वापस बहाल करना होगा और कश्मीर मुद्दे का समाधान करना होगा।”
उन्होंने अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी को लाठी या बंदूक के बल पर ज्यादा दिनों तक नहीं रखा जा सकता है। बकौल महबूब मुफ्ती, अमेरिका को महाशक्ति होने के बावजूद अफगानिस्तान से निकल कर जाना पड़ा और वहाँ ताकत के बल पर शासन करने की उसकी कोशिश नाकाम हो गई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से वार्ता की बात करने पर उन्हें देशद्रोही करार दिया जाता है, जबकि वही लोग तालिबान से बात कर रहे यहीं अरुणाचल प्रदेश में ‘गाँव बसाने वाले’ चीन से बात कर रहे।
इससे पहले महबूबा मुफ़्ती ने तीनों कृषि कानूनों की वापसी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “कृषि कानूनों को निरस्त करने का निर्णय और माफी एक स्वागत योग्य कदम है, भले ही यह चुनावी मजबूरियों और चुनावों में हार के डर से उपजा हो। विडंबना यह है कि जहाँ भाजपा को वोट के लिए शेष भारत में लोगों को खुश करने की जरूरत है, वहीं कश्मीरियों को दंडित और अपमानित करना उसके प्रमुख वोट बैंक को संतुष्ट करता है।
कर्नाटक से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ कलबुर्गी जिले पीडब्ल्यूडी विभाग के एक जूनियर इंजीनियर के घर पर एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जब छापा मारा तो उन्हें घर के घर के ड्रेनेज पाइपों से500-500 रुपए के नोटों की गड्डियाँ मिलीं। बाल्टी में भर-भरकर नोट निकाले गए। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित इंजीनियर के घर से जाँच एजेंसी को करीब 54 लाख रुपए कैश मिले हैं।
भ्रष्टचार के आरोपित सरकारी अधिकारियों के राज्यव्यापी कार्रवाई अभियान के तहत कलबुर्गी जिले के पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर शांता गौड़ा बिरादर के घर पर एसीबी की टीम ने छापा मारा था। हालाँकि, एक अन्य रिपोर्ट में जाँच टीम को करीब 40 लाख रुपए नकद और काफी सोना मिला है। दरअसल, एसीबी को इस बात के इनपुट मिले थे कि आरोपित इंजीनियर घर के पाइप लाइन में नोट छिपा रखे हैं। इसी के आधार पर जब अधिकारियों की टीम ने छापा मारा तो पाइपों से नोटों के बंडल निकलते देख अधिकारी भी दंग रह गए।
फिलहाल इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि छत के पाइप लाइन को काट-काटकर नोट निकाले जा रहे है और उन गड्डियों को बाल्टी में भरा जा रहा है।
#WATCH Karnataka ACB recovers approximately Rs 13 lakhs during a raid at the residence of a PWD junior engineer in Kalaburagi
एसीबी की टीम कर्नाटक के राज्यभर में एंटी करप्शन ब्यूरो ने 15 अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस अभियान के तहत एसीबी के करीब 400 अधिकारियों को काम पर लगाया गया है। इसमें 8 एसपी, 100 अधिकारी और 300 एसीबी के कर्मचारी काम में लगे हुए थे। जिन अधिकारियों के ठिकानों पर छापे मारे गए, उनमें एक्जीक्यूटिव इंजीनियर केएस लिंगेगौडा, मांड्या के एक्जिक्यूटिव इंजीनियर के श्रीनिवास, डोडाबल्लापुरा के राजस्व निरीक्षक लक्ष्मी नरसिंहमैया, बेंगलुरू निर्मिति केंद्र के पूर्व परियोजना प्रबंधक वासुदेव, बेंगलुरू नंदिनी डेयरी के महाप्रंधक जी कृष्णा रेड्डी, कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक टीएस रूद्रे शाप्पा समेत अन्य शामिल हैं।
इसमें से टीएस रूद्रे शाप्पा के घर से जाँच टीम को 15 लाख रुपए कैश और 7 किलो सोना मिला है, जिसकी कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपए आँकी गई है।
पूर्व क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद गौतम गंभीर को बुधवार (24 नवंबर, 2021) को लगातार दूसरी बार जान से मार डालने की धमकी मिली है। उन्हें ये धमकी ‘[email protected]’ से मिली है। इसके बाद उन्होंने पुनः दिल्ली पुलिस से संपर्क कर के पूरी जानकारी दी है। इस ईमेल में लिखा है, “हमने तुम्हारी हत्या करने का इरादा बना लिया था, लेकिन कल तुम किसी तरह बच गए। अगर तुम अपने परिवार के जीवन से प्यार करते हो, तो राजनीति और कश्मीर मुद्दे से दूर रहो।”
इस ईमेल के साथ एक वीडियो भी भेजा गया है। खास बात ये है कि इस वीडियो को उनके घर के बाहर ही शूट किया गया है। इससे पहले भी गौतम गंभीर को ‘ISIS कश्मीर’ की तरफ से धमकी दी गई थी। वहीं पहले वाले ईमेल में लिखा था “हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को जान से मार डालेंगे।” DCP (सेंट्रल) श्वेता चौहान ने ‘इंडिया टुडे’ को बताया कि गौतम गंभीर की तरफ से गौरव अरोड़ा ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर FIR दर्ज कर जाँच शुरू है।
बता दें कि गौरव अरोड़ा सांसद गौतम गंभीर के निजी सचिव हैं। दिल्ली पुलिस को सौंपी गई अपनी हस्तलिखित शिकायत में उन्होंने बताया था कि मंगलवार (23 नवंबर, 2021) को रात 9:32 बजे पूर्व क्रिकेटर को पहली धमकी मिली थी। दिल्ली पुलिस फ़िलहाल उस ईमेल एड्रेस की पुष्टि कर रही है। राजेंद्र नगर में उनके घर के बाहर सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। सेन्ट्रल डिस्ट्रिक्ट की साइबर सेल मामले की छानबीन कर रही है। अभी इस बारे में कुछ पता नहीं चल सका है।
बता दें कि आज ही
खुद को ‘आईएसआईएस कश्मीर (ISIS Kashmir)’ बताने वाले एक समूह ने पत्रकार आदित्य राज कौल को जान से मारने की धमकी दी है। कौल ने बताया कि धमकी के बारे में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस और स्पेशल सेल को जानकारी दे दी है और उम्मीद है कि जल्द ही आतंकी पकड़े जाएँगे। कौल ने धमकी भरे मेल के तीन स्क्रीनशॉट ट्विटर पर शेयर किए हैं। इनमें उन्हें स्पष्ट शब्दों में जान से मारने की धमकी मिली है। एक स्क्रीनशॉट में आईएसआईएस कश्मीर ने इस कश्मीरी पंडित पत्रकार को अपना अगला निशाना बताया।
जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के रामबाग इलाके से सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई है। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को ढेर कर दिया है। अच्छी बात यह है कि सुरक्षाबलों को कोई नुकसान नहीं हुआ। फिलहाल, ऑपरेशन लगातार जारी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार (24 नवंबर 2021) की दोपहर को सुरक्षाबलों को श्रीनगर के राजबाग में आतंकियों के होने की सूचना मिली थी। सिक्योरिटी इनपुट मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों की टुकड़ी ने इलाके को घेर लिया और ज्वाइंट सर्च ऑपरेशन छेड़ दिया। सुरक्षाबलों ने पूरे ट्रैफिक और लोगों की आवाजाही को रोक दिया। जब आतंकियों ने खुद को जवानों के चंगुल में फंसता देखा तो उन्होंने फायरिंग करते हुए वहाँ से भागने की कोशिश की। हालाँकि, बाद में तीनों को ढेर कर दिया गया।
सूत्रों ने खबर दी है कि इस मुठभेड़ में मारे गए दो आतंकियों के नाम मेहरान और बासित है। दोनों ही ‘द रजिस्टेंस फ्रंट’ के लिए काम करते थे। फिलहाल तीसरे आतंकी की शिनाख्त करने की कोशिश की जा रही है। खास बात ये है कि अभी तक सुरक्षाबलों की ओर से आतंकियों को लेकर कोई जानकारी नहीं जारी की गई है। फिलहाल, मुठभेड़ खत्म होने के बाद भी सुरक्षाबलों की टीम इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही है।
One of the three terrorists killed in the encounter in Srinagar’s Rambagh has been identified as Mehran, a top TRF commander who was involved in killing of two teachers & other civilians in the city. Identification of others is being ascertained: Kashmir IG Vijay Kumar to ANI pic.twitter.com/ZY9A19uMTu
एक सप्ताह पहले ही टीआरएफ कमांडर समेत पाँच को किया था ढेर
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने करीब एक सप्ताह पहले ही कुलगाम सेक्टर के पोंबे और जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को लगातार दूसरे दिन बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। सेना ने कुलगाम के पोंबे और गोपालपुरा में बड़ी कार्रवाई करते हुए पाँच आतंकियों को मार गिराया था। मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों में TRF का टॉप कमांडर अफाक सिकंदर, शकीर, हैदर और इब्राहिम शामिल है और एक अन्य था।
पहली मुठभेड़ पोंबे इलाके में हुई थी, जहाँ सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को ढेर किया। इसके बाद गोपालपुरा इलाके में भी सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को भी मार गिराया गया।
तृणमूल कॉन्ग्रेस अपना विस्तार कर रही है। शायद नाम की महिमा है कि पार्टी अधिकतर चुक गए कॉन्ग्रेसी नेताओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। माइग्रेशन की सबसे ताजा घटना में बिहार कॉन्ग्रेस के नेता कीर्ति आज़ाद तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल हुए। इसी प्रक्रिया में पूर्व में गोवा और असम जैसे राज्यों के कॉन्ग्रेसी नेताओं ने तृणमूल कॉन्ग्रेस ज्वाइन किया था।
गोवा में पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेसी नेता फलेरिओ ने ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल होकर उन्हें गोवा में राजनीतिक जमीन तलाशने का रास्ता दिखाया था। इसके पहले महिला कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्षा और असम में सिलचर की पूर्व सांसद सुष्मिता देव पार्टी में शामिल हुई थी और पार्टी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा भेजा था। मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा के भी कॉन्ग्रेस छोड़कर तृणमूल कॉन्ग्रेस में जाने की चर्चा लंबे समय से चल रही है।
शायद कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं के इसी मॉस माइग्रेशन का असर है जो पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस के सबसे धाकड़ नेता अधीर रंजन चौधरी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर यह आरोप लगाया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पश्चिम बंगाल में लूटकर जो पैसे इकठ्ठा किए हैं अब उसी से दिल्ली में राजनीतिक व्यापार कर रही है।
हालाँकि, चौधरी के इस वक्तव्य के जवाब में तृणमूल कॉन्ग्रेस की ओर से अभी तक प्रतिक्रिया नहीं आई है पर यह लग रहा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में ममता बनर्जी की महत्वकांक्षा को लेकर सहज नहीं दिखती। ममता बनर्जी द्वारा राष्ट्रीय राजनीति में अपने लिए बड़ी भूमिका की तलाश को कॉन्ग्रेस पार्टी ही नहीं, दस जनपथ में भी सहजता से स्वीकार नहीं किया गया है।
ऐसा नहीं कि एक राजनीतिक पार्टी के रूप में तृणमूल कॉन्ग्रेस केवल कॉन्ग्रेस के नेताओं को ही आकर्षित कर रही है। भाजपा से पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा पहले ही पार्टी में शामिल होकर उपाध्यक्ष बन चुके हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने भी हाल ही में टी एम सी में शामिल हुए थे। जे डी यू के पूर्व राज्यसभा सांसद पवन वर्मा भी ममता बनर्जी से मुलाकात कर पार्टी में शामिल हो चुके हैं।
विशेषज्ञ कह सकते हैं कि पार्टी में में पवन वर्मा के शामिल होने का असर अन्य बुद्धिजीवी नेताओं पर भी दिखाई दे सकता है। पार्टी के प्रति इसी आकर्षण का असर है कि अब डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी और ममता बनर्जी के बीच मुलाक़ात हुई और डॉक्टर स्वामी के अनुसार वे पहले से ही ममता बनर्जी के साथ थे इसलिए उनका टी एम सी में शामिल होना आवश्यक नहीं है। इसके बावजूद सबकी नज़रें सुब्रमण्यम स्वामी पर रहेंगी क्योंकि वे केवल मंत्रीपद नहीं बल्कि पार्टी की भी तलाश में हैं और टीएमसी कम से कम उनकी एक तलाश ख़त्म कर सकती है।
इन नेताओं द्वारा तृणमूल में माइग्रेशन पार्टी और उसकी सुप्रीमो की राष्ट्रीय राजनीति में विस्तार की महत्वाकांक्षा को कितनी हवा दे सकते हैं, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
जो नेता टी एम सी में शामिल हो रहे हैं, उनमें से अधिकतर के चुनावी राजनीति में प्रभाव को लेकर प्रश्न उठते रहे हैं। एक पार्टी छोड़ दूसरी में शामिल होने के उनके रिकॉर्ड का ही असर है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस में शामिल होते हुए कीर्ति आज़ाद को यह विश्वास दिलाना पड़ा कि वे अब राजनीति से रिटायर होने तक तृणमूल कॉन्ग्रेस में ही रहेंगे। पवन वर्मा ने ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल होते हुए अपने कदम के पीछे विपक्ष को मजबूती प्रदान करना मुख्य कारण बताया। वे और प्रशांत किशोर एक साथ जे डी यू से निकाले गए थे लिहाजा मज़बूत विपक्ष की आवश्यकता ने उन्हें एक पार्टी दिला दिया। पूर्व कॉन्ग्रेसी नफीसा अली ने भी ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल होकर उसे मजबूती प्रदान की थी।
राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका के विस्तार की महत्वाकांक्षा हर राजनीतिक दल और नेता के लिए सामान्य बात है पर प्रश्न यह है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की महत्वाकांक्षा के साथ विस्तार की इस मंशा को आने वाले समय में अन्य विपक्षी दल कैसे देखते हैं। अधीर रंजन की प्रतिक्रिया से यह साफ़ है कि कॉन्ग्रेस पार्टी इसे सहजता से स्वीकार नहीं कर सकेगी क्योंकि यह स्थिति सोनिया और राहुल गाँधी की अपनी महत्वाकांक्षा के आड़े आएगी।
राष्ट्रीय राजनीति में सीधे बीजेपी या PM मोदी को टक्कर देने के लिए जिस भूमिका की तलाश में ममता बनर्जी हैं, उसे पहले से ही अस्तित्व के संकट से दो-चार हो रहे अन्य दलों के चुक गए नेताओं के सहारे पाना बड़ी चुनौती होगी। इन सबके ऊपर विपक्ष की एकता अभी तक ऐसा छलावा साबित हुई है जिसकी परछाई तो कभी-कभी नजर आती है पर वो नज़र नहीं आती। ऐसे में उस परछाई के पीछे जाकर विपक्ष की एकता को अपने पक्ष में लेना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर जिले से ऐसा फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आया है, जहाँ आजमगढ़ के एक मदरसे में पढ़ाने वाले मौलाना ने ब्रिटेन की नागरिकता ले ली। इसके बाद भी वो पढ़ाता रहा। यहीं नहीं रिटायर होने के बाद वो ब्रिटेन चला गया, लेकिन लगातार वो पेंशन भी लेता रहा। इस घटना का खुलासा होने के बाद अब सीबीआई ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को पत्र लिखकर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र के सहसराँव माफी गाँव का है। यहीं के रहने वाले अब्दुल करीम नाम के व्यक्ति ने तहसील दिवस के मौके पर शिकायत की थी कि इलाके के मीट मंडी रोड के रहने वाले आरोपित मौलाना शमशुल होदा ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी सरकारी मदरसे के मौलाना के तौर पर पहले वेतन ले रहा था और सर्विस से वीआरएस लेने के बाद वह अब पेंशन भी ले रहा है।
करीम को शमशुल होदा की कार्यशैली पर शक था, जिस कारण से उसने आरटीआई के जरिए ये जानकारी निकाली। आरटीआई के इन्फॉर्मेशन आने के बाद पता चला कि शमशुल होदा आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर में सरकारी मदरसे में पढ़ा रहा था। वर्ष 2013 में उसने ब्रिटिश नागरिकता ले ली थी, लेकिन इसके 4 साल तक वो मदरसे में बतौर मौलाना पढ़ाता रहा। हालाँकि, 2017 में मौलाना ने अपनी सर्विस से रिटायरमेंट ले लिया था, लेकिन अभी भी वो उत्तर प्रदेश सरकार से पेंशन ले रहा है। जबकि संविधान के अनुच्छेद 66 के अंतर्गत यह गैरकानूनी है। इसी मामले को लेकर करीम ने शिकायत की।
नोटिस का नहीं दिया कोई जवाब
फ्रॉडगीरी के इस मामले में एडीएम स्तर पर आरोपित मौलाना को दो बार पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया जा चुका है, लेकिन उसने अब तक कोई भी जबाव नहीं दिया है। वहीं शिकायतकर्ता ने आरोपित पर मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशों से अवैध फंडिंग का आरोप लगाया है। उसने अपने गृह जिले में करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी बना ली है। शिकायत में ये भी आरोप लगाया है कि आरोपित मौलाना ब्रिटेन के मैनचेस्टर में पाकिस्तान के संगठन दावते इस्लामी में इस्लामिक टीचर के तौर पर काम कर रहा है। उसके खिलाफ में एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए पता चला था कि वह ब्रिटेन में जबरन नाबालिग लड़कियों का निकाह करा रहा था। उस पर चरमपंथ को बढ़ावा देने का आरोप भी है।
एक करोड़ रुपए से अधिक का वेतन और पेंशन ले चुका
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके शमशुल होदा ने सरकार से नौकरी और पेंशन के रूप में अब तक एक करोड़ रुपए से अधिक ऐंठ लिए हैं। रिटायर होने के बाद उसे हर महीने 40,000 रुपए की पेंशन मिल रही थी। इतना ही नहीं उस पर ब्रिटिश नागरिक होने के बाद भी इंडिया में इलेक्शन ड्यूटी और मतदान करने का आरोप है।
सोनिया गाँधी के गढ़ रायबरेली से कॉन्ग्रेस की विधायक अदिति सिंह भाजपा में शामिल हो गई हैं। उनके पिता अखिलेश सिंह भी यहाँ से 5 बार विधायक रहे थे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की उपस्थिति में अदिति सिंह पार्टी में शामिल हुईं। उत्तर प्रदेश में धुआँधार चुनाव प्रचार कर रहीं प्रियंका गाँधी और कॉन्ग्रेस को इससे तगड़ा झटका लगा है। अदिति सिंह पिछले कुछ समय से बागी हो गई थीं और लगातार गाँधी परिवार और कॉन्ग्रेस के खिलाफ उनके बयान आ रहे थे।
जनकल्याणकारी नीतियों से प्रभावित होकर अन्य दलों के नेता भाजपा परिवार में शामिल हो रहे हैं।
अदिति सिंह ने 2017 में अपने पिता की सीट रायबरेली सदर से जीत दर्ज की थी। लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली। 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। 1993 से लगातार इस सीट पर अदिति सिंह के परिवार का ही कब्ज़ा है। अटकलें हैं कि 3 दशकों के इतिहास को देखते हुए 2022 में भी इस सीट से अदिति सिंह को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा। पिछले कुछ समय में कॉन्ग्रेस के कई नेता अन्य दलों में शामिल हुए हैं, जिनमें जितिन प्रसाद प्रमुख हैं।
अदिति सिंह ने इससे पहले आवाज़ उठाते हुए कहा था कि एक-एक कर नेता जिस तरह से कॉन्ग्रेस छोड़ते जा रहे हैं, उस पर पार्टी आलाकमान को आत्मचिंतन करना चाहिए। अनुच्छेद-370 को निरस्त करने का फैसला हो या फिर राम मंदिर निर्माण का, अदिति सिंह ने लगातार केंद्र और राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रशंसा की थी। कॉन्ग्रेस ने उनके निलंबन के लिए स्पीकर को लिखा था। साथ ही रायबरेली में पार्टी के कार्यक्रम में हिस्सा न लेने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।
कैबिनेट की बैठक में बुधवार (24 नवंबर 2021) को तीनों कृषि कानूनों की वापसी का प्रस्ताव मंजूर कर लिया गया है। इसे 29 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। इसके अलावा कैबिनेट ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को मार्च 2022 तक बढ़ाने का अहम फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट के फैसलों पर यह जानकारी दी। अनुराग ठाकुर ने बताया कि आज पीएम के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की औपचारिकताएँ पूरी कीं। संसद के शीतकालीन सत्र में इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेना हमारी प्राथमिकता होगी।
It has been decided to extend the ‘PM Garib Kalyan Anna Yojana’ to provide free ration till March 2022: Union Minister Anurag Thakur on Cabinet decisions pic.twitter.com/9XO70IQXSz
मालूम हो कि केंद्र की मोदी सरकार ने 19 नवंबर 2021 को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया था। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए आंदोलनरत किसानों से अपने-अपने घर लौटने का आग्रह किया था। साथ ही पीएम ने यह भी कहा था कि किसानों के एक वर्ग को इन कानूनों के बारे में नहीं समझा पाने के लिए देश से माफी माँगता हूँ।
बात करें प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) की तो, इसके तहत 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो राशन मुफ्त दिया जा रहा है। कोरोना महामारी के बीच गरीब लोगों को राहत प्रदान करने के लिए यह योजना अप्रैल 2020 से तीन महीने के लिए शुरू की गई थी। इसके बाद से इसे कई बार बढ़ाया जा चुका है।
बता दें कि जिस तरह कानून बनाने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होती है, उसी तरह रद्द करने के लिए भी संसद की मंजूरी जरूरी है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस प्रस्ताव को संसद में पेश किया जाएगा। इस पर बहस होगी और वोटिंग होगी। इस प्रस्ताव के पास होते ही तीनों कृषि कानून रद्द हो जाएँगे।
भारत में बहुराष्ट्रीय सोशल मीडिया कंपनियाँ अपनी मनमर्जी चलाने पर उतारू हैं। कभी फेसबुक राष्ट्रवादी मीडिया पोर्टलों के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के बहाने बना कर कार्रवाई करता है, कभी Twitter राष्ट्रवादियों के हैंडल ब्लॉक कर देता है तो कभी YouTube राष्ट्र और धर्म की बात करने वाले कंटेंट क्रिएटरों को प्लेटफॉर्म छोड़ने पर ही मजबूर कर देता है। इसका एक उदाहरण है ‘सब लोकतंत्र’, जिसकी स्थापना रचित कौशिक ने की थी। YouTube ने बार-बार इस चैनल को बैन कर के हटा दिया।
हालाँकि, रचित कौशिक अब भी ‘SabLoktantra.com’ पर सक्रिय हैं और इस वेबसाइट के माध्यम से समसामयिक मुद्दों पर दुनिया को वीडियो के जरिए अपनी बात पहुँचाते रहते हैं। लेकिन, YouTube पर जो उनके सब्सक्राइबर्स थे, वो अब भी उनके वीडियो का इंतजार करते हैं। ऐसा पहली बार या किसी एक कंटेंट क्रिएटर के साथ नहीं हुआ है। देखा जाए तो अमेरिका में जन्मी ये सोशल मीडिया कंपनियाँ हर देश की राजनीति को अपने हिसाब से नचाना चाहती है।
शुरू से जानें: YouTube ने कैसे ‘सब लोकतंत्र’ चैनल के वीडियोज और फिर चैनल को ही हटाया
आइए, सबसे पहले बात करते हैं कि YouTube ने क्या-क्या कारण गिना कर ‘सब लोकतंत्र’ को उसके वीडियोज हटाने को मजबूर किया और अंत में प्रतिबंधित ही कर डाला। उन्होंने फरहान अख्तर की ‘तूफ़ान’ फिल्म के ट्रेलर की समीक्षा की, जिसमें ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा दिए जाने पर उन्होंने आवाज़ उठाई। YouTube ने कहा कि ये ‘Hate Speech (घृणा फैलाने वाला वक्तव्य)’ की श्रेणी में आता है। बताया गया कि वीडियो कंटेंट की समीक्षा के बाद उनकी टीम (YouTube की टीम) ने ऐसा पाया है।
5 जुलाई, 2021: ‘तूफ़ान’ फिल्म के ट्रेलर की समीक्षा को YouTube ने बता दिया हेट स्पीच
इसके बाद उत्तर प्रदेश का चुनावी विश्लेषण करने के कारण YouTube ने दावा कर दिया कि ये ‘Child Safety Policy (बाल सुरक्षा नीति)’ का उल्लंघन करता है। इस दौरान YouTube ने एहसान जताते हुए कहा कि आपको नहीं पता होगा कि आपने नियमों का उल्लंघन किया है, इसीलिए हम आपके चैनल पर स्ट्राइक नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, YouTube ने उस वीडियो को भी उसी तरह हटा दिया, जैसे ‘तूफ़ान’ वाली वीडियो को हटा दिया गया था।
5 जुलाई, 2021: यूपी चुनाव पर बनाए गए वीडियो को YouTube ने बच्चों की सुरक्षा की बात करते हुए हटाया
ये दोनों ही वीडियो के विरुद्ध YouTube ने 5 जुलाई, 2021 को ही मेल किया, जो स्पष्ट बताता है कि इस चैनल के विरुद्ध जानबूझ कर रिपोर्टिंग करवाई गई, ताकि इसे YouTube से हटाया जा सके। इसके कुछ दिनों बाद 14 जुलाई, 2021 को YouTube ने एक और मेल भेजा और बताया कि इस वीडियो को हमने हटा दिया है। बार-बार यही ऑटोमेटेड मैसेज साथ में चिपका हुआ आया कि YouTube को सबके लिए सुरक्षित बनाने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं।
14 जुलाई, 2021: ‘सब लोकतंत्र’ को YouTube ने बताया कि हमने आपका वीडियो हटा दिया है
अब आप देखिए, किस तरह YouTube ने भी माना कि ‘सब लोकतंत्र’ का कंटेंट आपत्तिजनक नहीं था। जब वीडियो हटाए जाने के खिलाफ अपील की गई तो 14 जुलाई, 2021 को ही भेजे गए एक मेल में YouTube ने बताया कि उन्होंने ‘सब लोकतंत्र’ के यूपी चुनाव वाले वीडियो की फिर से समीक्षा की है और पाया है कि ये उनके किसी भी नियम-कानूनों का उल्लंघन नहीं करता। साथ ही कहा गया कि कंपनी (YouTube) ने शिकायतकर्ता (सब लोकतंत्र) की अपील पर विचार किया और धैर्य रखने के लिए धन्यवाद भी किया।
14 जुलाई, 2021: अचानक YouTube को पता चला कि वीडियो में कुछ गलत था ही नहीं
अब आते हैं अगस्त 2021 में, जब YouTube ने ‘सब लोकतंत्र’ के एक वीडियो पर सिर्फ इसीलिए आपत्ति जताई, क्योंकि उसमें कुछ रोहिंग्या अपराधियों की गिरफ़्तारी की खबर दी गई थी। ये खबर कई मीडिया पोर्टलों, अख़बारों और टीवी चैनलों पर भी चली, बावजूद इसे आपत्तिजनक बता दिया गया। इसको भी ‘हेट स्पीच’ का बहाना देकर हटा दिया गया। इसमें इस खबर को बताने के साथ-साथ जानकारी दी गई थी कि कैसे रोहिंग्या घुसपैठ करते हैं और फर्जी डाक्यूमेंट्स बनवाते हैं। वही बात, जो कई नेता भी उठा चुके हैं सार्वजनिक रूप से।
रोहिंग्या अपराधियों की गिरफ़्तारी की खबर दिखाए जाने पर भी YouTube ने जताई आपत्ति
इसके बाद YouTube ने बड़ा कदम उठाते हुए ‘सब लोकतंत्र’ नामक चैनल को ही सस्पेंड कर दिया, हमेशा के लिए YouTube से हटा दिया। इसमें कहा गया कि YouTube ने ‘सब लोकतंत्र’ चैनल के खिलाफ अपने दिशा-निर्देशों के आधार पर काफी बार और बड़े-बड़े उल्लंघन पाए हैं, इसीलिए उनका चैनल हटा दिया गया है। दावा किया गया कि यूजर्स को प्रोटेक्ट करने के लिए ऐसा किया गया है। ये सब तब हो रहा है, जब मौलाना-मौलवियों के धमकी भरे और अजीबोगरीब बातें करते वीडियोज YouTube पर खुला मौजूद हैं।
वीडियो हटाते-हटाते YouTube ने ‘सब लोकतंत्र’ चैनल को ही अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया
रचित कौशिक ने YouTube के इस तानाशाही भरे रवैये के खिलाफ अपील की। उन्होंने जानना चाहा कि भला उनके किस वीडियो/कंटेंट से किन नियमों का उल्लंघन हुआ है। बताया गया कि उनकी (YouTube) इंटरनल टीम को कोई ऐसा वीडियो ही नहीं मिला, जिसमें नियमों का उल्लंघन हो। साथ ही कहा गया कि उनके यहाँ कोई ‘ग्रीवांस अधिकारी’ ही नहीं है, ऐसा कोई पद ही नहीं है। ये केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन है। इन सबके बावजूद कहा गया कि चैनल (सब लोकतंत्र) तो सस्पेंडेड रहेगा।
27 अगस्त, 2021 को YouTube का जवाब: ‘कोई वीडियो नहीं मिला नियमों के उल्लंघन का, फिर भी प्रतिबंधित रहेगा आपका चैनल’
किस तरह किसी व्यक्ति को जानबूझ कर परेशान किया जाता है, उसका उदाहरण ये है कि रचित कौशिक ने जब ‘बाबा लोकतंत्र’ चैनल के जरिए अपनी बात रखनी शुरू की तो YouTube इसके पीछे भी पड़ गया। इस चैनल को तो बताया भी नहीं गया कि इसके किस वीडियो और कौन से कंटेंट को लेकर क्या परेशानी है और किस नियम-कानून का उल्लंघन किया गया है। सीधा मेल आया कि आपने काफी बार हमारे (YouTube के) कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन किया है।
जो चैनल ज्यादा सक्रिय ही नहीं था, उसके चालू होते YouTube ने कर दिया बैन
ऑपइंडिया ने लगातार कवर किया ‘सब लोकतंत्र’ के खिलाफ YouTube का अन्याय भरा व्यवहार
अंत में आपको बताते चलें कि रचित कैशिक द्वारा चलाए जा रहे एक अन्य चैनल ‘Truth & Dare’ को भी YouTube ने नहीं बख्शा और उसे भी हमेशा के लिए हटा दिया। फरहान अख्तर की ‘तूफ़ान’ ट्रेलर की समीक्षा वाले वीडियो को यूट्यूब द्वारा हटाए जाने से पहले भी इस पर 3 लाख व्यूज आ चुके थे।
यूपी चुनाव वाले वीडियो में असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में होने वाले 2022 विधानसभा चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जो चुनौती दी थी, उस पर बात की गई थी। इस पर भी रचित कौशिक ने वीडियो बनाया था और मात्र 12 घंटे में ही उस पर 1.35 लाख व्यूज भी आ गए थे। लेकिन, यूट्यूब ने इसे अपनी नीतियों का उल्लंघन मानते हुए प्रतिबंधित कर दिया था।
रोहिंग्या वाले वीडियो में रचित कौशिक ने पूछा था कि अगर आपके घर में चूहे बड़ी संख्या में हो गए हों और उनसे अपना सामान बचाने के लिए कपड़ों की अलमारी व रसोई वगैरह बंद रखना पड़ता हो तो क्या आप अपने घर का मुख्य द्वार खुला छोड़ेंगे? इसके बाद उन्होंने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा था कि आप ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि आपको पता है कि एक बार चूहे घर में घुस गए तो उन्हें निकालना बड़ा मुश्किल है।
चैनल को पूर्व रूप से YouTube से हटाए जाने के बाद ऑपइंडिया से बात करते हुए रचित कौशिक ने कहा था, “नए IT नियमों के तहत ऐसी कंपनियों के लिए अनिवार्य है कि वो एक भारतीय ग्रीवांस अधिकारी की नियुक्ति करें। गूगल और यूट्यूब ने इसे पहले ही मान लिया था। लेकिन, अब मैं जब उनसे उनके ग्रीवांस अधिकारी का एक्सेस माँग रहा हूँ तो वो मुझे नहीं मिल रहा है। उनके ग्रीवांस अधिकारी से कैसे संपर्क किया जाए, उनका ईमेल एड्रेस क्या है, ये सब कुछ नहीं बताया जा रहा है।”