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‘मेरा येशु-येशु’ वाला पादरी पंजाब के मोगा में खोल रहा ब्रांच, सीएम चन्नी और सोनू सूद को बुलावा: अंधों-लँगड़ों को चंगा करने का झाँसा

‘मेरा यशु यशु’ के वायरल मीम में गूँगी बच्ची के बोलने का ढोंग करने वाला विवादित पादरी बजिंदर सिंह एक बार फिर से सुर्खियों में है। बुधवार (24 नवंबर 2021) को सोशल मीडिया पर उसका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बजिंदर सिंह के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी किए गए विज्ञापन वीडियो में बताया गया है, ”आपको जानकर खुशी होगी कि ‘प्रोफेट बजिंदर सिंह मिनिस्ट्री’ की ब्रांच अब पंजाब के मोगा में भी खुलने जा रही है, जिसकी ग्रैंड ओपनिंग 25 नवंबर को की जा रही है। इसके उपलक्ष्य में विशाल सत्संग करवाया जा रहा है। यहाँ आकर परमेश्वर के दास बजिंदर सिंह द्वारा अंधों को आँखे मिलते, लंगड़ों को चलते, दुष्ट आत्माओं से ग्रसित लोगों को छुटकारा पाते, व्हील चेयर से लोगों को उठते और बीमार लोगों को चंगा होते हुए देखोगे।” हालाँकि, यूट्यूब वीडियो में यह नहीं बताया गया है कि मुख्य अतिथि के रूप में किसे आमंत्रित किया गया है।

आप​को बता दें निमंत्रण कार्ड में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, कॉन्ग्रेस विधायक हरजोत कमल, अभिनेता सोनू सूद और उनकी बहन मालविका सूद का नाम लिखा किया गया है। जी हाँ, वही मालविका जो पंजाब के मोगा से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी।

निमंत्रण कार्ड की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही है, क्योंकि बजिंदर सिंह पर झूठे और भ्रामक वादे करके लोगों को ईसाई धर्म में कन्वर्ट करने का आरोप लग चुका है। लेखक रतन शारदा ने इस निमंत्रण कार्ड को साझा करते हुए कहा, “यह कॉन्ग्रेस के सीएम के बारे में क्या कहता है? पार्टी के बारे क्या कहता है? यह एसजीपीसी अमृतसर, सुखबीर सिंह बादल और अकाली दल के बारे में क्या कहता है, जो सिख-हिंदू एकता को बढ़ावा देने वाले आरएसएस से नफरत करते हैं उन्हें और गाली देते हैं, लेकिन खुले तौर पर हो रहे इस धर्मांतरण के खेल पर चुप हैं?” उन्होंने आगे सवाल किया, “बजिंदर अब प्रोफेट बन गए हैं और सीएम चन्नी उनके शिष्य?”

खोजी पत्रकार विजय पटेल ने कहा, ”यह बजिंदर कोरोना का इलाज क्यों नहीं कर रहा है? अतिथियों की लिस्ट देखें। पंजाब के सीएम और सोनू सूद भी इस लिस्ट में हैं।”

मालूम हो कि पादरी बजिंदर सिंह का पूर्व में हत्या और बलात्कार के मामले में भी नाम सामने आ चुका है। 3 साल पहले उसे बलात्कार के मामले में जीरकपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर ‘चमत्कारी उपचार’ के बहाने अनुयायियों से पैसे लूटने का भी आरोप लगाया गया था। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी पंजाब पुलिस को अगस्त 2021 में पॉक्सो अधिनियम के तहत बजिंदर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए कहा था, क्योंकि सिंह का सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह एक नाबालिग लड़के का जबरन धर्म परिवर्तन करते हुए पाया था।

‘हीलर बाबा’ के नाम से मशहूर बजिंदर सिंह के YouTube पर 10 लाख से अधिक फॉलोवर हैं और फेसबुक पर 2 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर बड़ी से बड़ी बीमारियों को ठीक करने का दावा किया गया है। बजिंदर दावा करता है कि वह लोगों की दिक्कतें चुटकियों में दूर कर देगा। पादरी के यूट्यूब चैनल पर ऐसी कई घटनाओं के वीडियो आपको मिल जाएँगे। इसमें सबसे ज्यादा वायरल हुए वीडियो में दिखाया गया था कि वह कैसे एक मरे हुए बच्चे को जीवित कर सकता है। इस कार्यक्रम की बहुत आलोचना भी हुई थी और कई लोगों ने कहा कि घटना से पहले बच्चे को नशीला पदार्थ दिया गया था।

सरकार और स्थानीय नेताओं के विरोध जताने के कारण पंजाब में बजिंदर सिंह का धर्मांतरण नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। 25 नवंबर से मोगा में एक नई ब्रांच खोली जा रही है, ऐसे में सिंह इस शहर के आसपास के गाँवों में तेजी से धर्म परिवर्तन ​कर सकता है।

बारात के DJ से मुर्गियों को ‘हार्ट अटैक’, 63 मर गईं: पुलिस के पास पहुँचा पोल्ट्री फॉर्म मालिक, कर्ज लेकर शुरू किया था धंधा

ओडिशा के बालासोर जिले से एक हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है। एक पोल्ट्री फॉर्म मालिक का दावा है कि डीजे की तेज आवाज के कारण 63 मुर्गियों की मौत हो गई। उसने इस संबंध में अपने पड़ोसी के खिलाफ नीलगिरि पुलिस स्टेशन में शिकायत की है। पुलिस से मुआवजा दिलाने और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की माँग की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बालासोर जिले के कंडागराडी गाँव में रंजीत पराडा का पोल्ट्री फॉर्म है। उसने पुलिस को दी शिकायत में दावा किया है कि हार्ट अटैक से मुर्गियों की मौत हो गई। रंजीत के अनुसार उसके पड़ोसी रामचंद्र परीडा के घर में शादी का समारोह था। रविवार (21 नवंबर 2021) रात तेज आवाज में डीजे बजाते हुए बारात पोल्ट्री फॉर्म के पास से गुजरी। इस दौरान डीजे की आवाज इतनी तेज थी कि मुर्गी असामान्य रूप से व्यवहार करने और उछलने लगे।

रंजीत का कहना है कि उसने कई बार डीजे की आवाज धीमी करने का आग्रह किया। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। एक घंटे बाद उन्हें 63 मुर्गियॉं मृत मिलीं। रंजीत के मुताबिक, मौत का कारण जानने के लिए उन्होंने एक स्थानीय पशु चिकित्सक से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि तेज आवाज के कारण पक्षी सदमें में चले गए, जिससे उनकी मौत हो गई। शिकायत के साथ उन्होंने यह रिपोर्ट भी पुलिस को दी है।

खबरों के अनुसार 22 वर्षीय रंजीत इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने साल 2019 में नीलगिरि में एक सहकारी बैंक से 2 लाख रुपए का कर्ज लेकर फॉर्म शुरू किया था। रंजीत ने मुर्गों की मौत के बाद पड़ोसी रामचंद्र से मु्आवजे की माँग की थी। उनका कहना है कि पहले तो पड़ोसी इसके लिए तैयार हो गए, लेकिन बाद में इनकार कर दिया। इसके बाद 23 नवंबर को उन्होंने पुलिस से शिकायत की। बालासोर जिले के एसपी सुधांशु मिश्रा ने इस संबंध में शिकायत मिलने की पुष्टि की है।

‘हेमा मालिनी अब बूढ़ी हो गई हैं, सड़कें कैटरीना कैफ के गाल की तरह बननी चाहिए’: राजस्थान के कॉन्ग्रेसी मंत्री

राजस्थान के ग्रामीण विकास मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने कहा है कि हेमा मालिनी अब बूढ़ी हो गई हैं, इसीलिए कैटरीना कैफ के गाल जैसे सड़कें बननी चाहिए। दरअसल, झुंझनूं के कॉन्ग्रेस नेता मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने गाँव पहुँचे हुए थे, जहाँ उन्होंने ये बयान दिया। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने हाल ही में मंत्रिमंडल फेरबदल किया है, जिसके बाद उन्हें मंत्री बनाया गया है। गाँव पहुँचे राजेंद्र सिंह गुढ़ा से आम लोगों ने वहाँ की खराब सड़कों को लेकर शिकायत की।

इस पर उन्होंने ‘लोक निर्माण विभाग (PWD)’ के चीफ इंजीनियर से कहा कि हमारे गाँव में सड़कें एकदम कैटरिना कैफ के गाल जैसी बननी चाहिए। हालाँकि, इससे पहले उन्होंने अधिकारी एनके जोशी से कहा कि गाँव में हेमा मालिनी के गाल जैसी सड़कें बननी चाहिए। बाद में फिर खुद ही बोल बैठे कि हेमा मालिनी तो अब बूढ़ी हो गई हैं। फिर वो वहाँ मौजूद लोगों से ही पूछने लगे कि आजकल कौन सी अभिनेत्री हैं। लोगों ने भी इस दौरान कैटरीना कैफ का नाम ले लिया।

फिर मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि हमारे गाँव में कैटरीना कैफ के गाल जैसी सड़कें ही बननी चाहिए। बता दें कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने 2017 में मायावती की बसपा से जीत दर्ज की थी, लेकिन राजस्थान में बसपा के सभी आधा दर्जन विधायकों ने पाला बदल कर कॉन्ग्रेस का रुख कर लिया था। अब उन्हें मंत्रिमंडल फेरबदल में इसका नाम ग्रामीण विकास विभाग देकर दिया गया है। याद हो कि 2005 में राजद सुप्रीमो लालू यादव ने कहा था कि बिहार की सड़कें हेमा मालिनी के गाल की तरह चिकनी बनेगी।

उस दौरान बिहार में उनकी ही सरकार थी। साथ ही केंद्र में भी वो रेल मंत्री थे। अक्टूबर 2019 में मध्य प्रदेश में ये मुद्दा फिर से उछला, जब तत्कालीन कमलनाथ सरकार में मंत्री पीसी शर्मा ने कह डाला कि राज्य की खराब सड़कें भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के गाल जैसी हो गई हैं, ऐसे में इन्हें हेमा मालिनी के गालों की तरह बनवाया जाएगा। बता दें कि मथुरा से सांसद हेमा मालिनी हाल ही में गोवा में हुए फिल्म फेस्टिवल में दिखी थीं। वहीं कैटरीना कैफ फ़िलहाल विक्की कौशल के साथ अपनी शादी की तैयारियों में व्यस्त हैं।

हिंदूवादी संगठनों ने बल्लभगढ़ में तोड़ दी वह मजार, जहाँ टॉयलेट में लगी थी देवी-देवताओं की तस्वीर: सेक्स और वशीकरण की दवाई भी मिली थी

फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में जिस अवैध मजार से सेक्स और स्त्रियों को वश में करने सहित कई तरह की दवाएँ मिली थीं, उसे मंगलवार (23 नवंबर 2021) की रात को तोड़ दिया गया है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, बल्लभगढ़ पंचायत भवन की जमीन पर बनाई गई मजार को हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने रात को तहस-नहस कर दिया था। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने थाना शहर प्रभारी सतीश कुमार को तत्काल प्रभाव से बदल कर उनके स्थान पर सत्यभान को नया थाना प्रभारी बना दिया है। बताया जा रहा है कि मजार टूटने के बाद शहर में काफी तनाव की स्थिति हैl पुलिस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

स्थानीय लोगों को मंगलवार दोपहर को शिकायत मिली थी कि मजार के टॉयलेट में हिन्दू-देवी देवताओं की तस्वीरें लगी हैं। जब लोग वहाँ पहुँचे तो उन्हें वहाँ से नशीली सेक्सवर्धक दवाओं के साथ, इस्लामी किताबें और कई आपत्तिजनक वस्तुएँ बरामद हुईं। जिससे लोग उस अवैध मजार को हटाने के लिए धरना-प्रदर्शन करने लगे। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था।

विरोध प्रदर्शन के दौरान वहाँ इकट्ठे हुए लोगों ने रिपोर्टर को बताया था कि मजार के मौलवी का नाम अब्दुल गफ्फार है, जो हिन्दू महिलाओं को बहकाने के लिए अपना नाम बबली बताता है। बल्लभगढ़ के इस मजार के बाहर जो बोर्ड लगा था, उस पर ‘बाबा भूरेशाह की दरगाह’ लिखा था।

बता दें कि हिन्दू संगठनों के विरोध को देखते हुए फरीदाबाद पुलिस मजार के अंदर मौजूद मौलवी को अपने साथ ले गई थी। हिन्दू संगठनों ने प्रशासन से माँग की थी कि जल्द से जल्द इस अवैध मजार को तोड़कर वहाँ एक मंदिर बनाया जाए। वहीं, फरीदाबाद पुलिस उपायुक्त जयबीर राठी ने जाँच की रिपोर्ट आने के बाद मौलाना के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था और इस मामले में राजस्व रिकार्ड खंगालने का भरोसा दिलाया था।

चंदे की सिंपल गणित से आहत हुए अमेरिकी ‘Woke’, वुमेन्स मार्च को माँगनी पड़ी माफी, योगेंद्र यादव को भी लगा था ऐसा ही झटका

अमेरिकी वोक आहत हैं तो दूसरे वोक्स ने बाकी बचे वोक को ठेस पहुँचाने के लिए माफी माँगी है, वजह है चंदे का एक बहुत ही साधारण सा गणित

नहीं समझ आया तो आइए बताते हैं कि मामला क्या है?

कहने को वुमेन्स मार्च एक विरोध प्रदर्शन है, जिसकी शुरुआत 21 जनवरी 2017 को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के बाद शुरू हुआ था। अब बुधवार (24 नवंबर, 2021) को वुमेन्स मार्च ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर अपने एक मेल के लिए माफी माँगी है, जिसे उन्होंने सब्सक्राइबर को भेजा था।

दरअसल, वुमेन्स मार्च ने भेजे गए उस ईमेल के लिए माफ़ी माँगी है जिसमें उल्लेख किया गया था कि इस सप्ताह का औसत डोनेशन मात्र 14.92 अमेरीकी डालर था। उन्होंने कहा कि यह सब तब हुआ जब यह वर्ष नेटिव इंडिजिनस लोगों के लिए उपनिवेशवाद, विजय और नरसंहार को याद करने का है। यह विशेष रूप से थैंक्सगिविंग से पहले’ से लोगों से कनेक्शन नहीं बनाने की हमारी एक भूल थी।

जैसे ही ये बात औरों को पता चली, अमेरिका में लोग इस बात से परेशान हो गए कि विमेंस मार्च को औसतन 14.92 अमेरीकी डालर का डोनेशन मिला। क्योंकि 1492 वह वर्ष है जब इतालवी खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका की खोज की थी जबकि वह भारत की तलाश में निकला था। वह पहली बार 12 अक्टूबर, 1492 को अमेरिका पहुँचा और बाद में उपनिवेशों की स्थापना की।

मामला यह है कि चूँकि वुमेन्स मार्च के वोक प्राप्त डोनेशन राशि को कोलंबस के अमेरिका पहुँचने के वर्ष से कनेक्ट नहीं कर पाए, इस बात ने दूसरे वोक को इतना आहत कर दिया कि बाकि वोक को माफी माँगनी पड़ी।

चीजों को ठीक ढंग से समझने के लिए, ऐसे समझते है कि अगर इच्छाधारी प्रदर्शनकारी से वर्तमान में ‘किसान’ बने योगेंद्र यादव अपने दम पर एक फण्डरेजर का आयोजन करते हैं और मान लेते हैं कि 125 लोग इसमें 2,480 रुपए का योगदान करते हैं, तो यह औसतन 19.84 रुपए प्रति व्यक्ति की डोनेशन राशि होगी। अगर योगेंद्र यादव को वूमेन मार्च से जोड़ते हुए देखें, तो वह इसे वर्ष 1984 से जोड़ते जब इंदिरा गाँधी सरकार द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को स्वर्ण मंदिर, अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत मारा गया, विरोध में इंदिरा गाँधी की हत्या हुई और उसके बाद पूरे भारत में सिख विरोधी दंगे भड़के।

मौसम के अनुसार विभिन्न कारणों से तमाम तरह से विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद, आज भी योगेंद्र यादव की स्थिति यह है कि अपने दम पर 100 रुपए भी नहीं जुटा पाएँगे। यह तथ्य इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि कैसे उनका फण्डरेजर कैम्पेन, उनके विरोध-प्रदर्शनों की तरह ही एक बड़ा मजाक साबित हुआ है।

बात दरअसल, 2019 की है जब हरियाणा विधानसभा चुनावों से पहले, योगेंद्र यादव ने ‘पर्यावरणविद्’ तेजपाल यादव को अपनी पार्टी के उम्मीदवारों में से एक के रूप में समर्थन देते हुए खड़ा किया था। ट्विटर पर एक कैम्पेन को आगे बढ़ाते हुए हुए, उन्होंने अपने तमाम चहेते फॉलोवर्स से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। लेकिन, जब उन्हें अपनी कथित ‘ग्रीन राजनीति’ के लिए केवल ₹50 रुपया ही मिला तो उन्हें गहरा सदमा लगा था। जिसका जिक्र उन्होंने बड़े ही निराश मन से अपने एक ट्वीट में भी किया था।

‘सर काट देंगे, आओ कभी श्रीनगर’: कश्मीरी पंडित पत्रकार को ‘ISIS कश्मीर’ की धमकी, गौतम गंभीर को भी आया है मेल

खुद को ‘आईएसआईएस कश्मीर (ISIS Kashmir)’ बताने वाले एक समूह ने पत्रकार आदित्य राज कौल को जान से मारने की धमकी दी है। इस समूह ने बीजेपी सांसद गौतम गंभीर को भी धमकी भरा मेल भेजा है। कौल ने बताया है कि धमकी के बारे में उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस और स्पेशल सेल को जानकारी दे दी है और उम्मीद है कि जल्द ही आतंकी पकड़े जाएँगे।

कौल ने धमकी भरे मेल के तीन स्क्रीनशॉट ट्विटर पर शेयर किए हैं। इनमें उन्हें स्पष्ट शब्दों में जान से मारने की धमकी मिली है। एक स्क्रीनशॉट में आईएसआईएस कश्मीर ने इस कश्मीरी पंडित पत्रकार को अपना अगला निशाना बताया।

स्क्रीनशॉट में कहा गया है, “जनाब आदित्य! आपने हमारे खिलाफ कुछ ज्यादा ही लिख दिया है। कुछ दिन बाद अब आपको हम लंबी यात्रा कराने वाले हैं। आओ कभी श्रीनगर।”

साभार: आदित्य राज कौल/ ट्विटर

एक अन्य स्क्रीनशॉट में कहा गया है, “जल्द ही हम तुम्हें मार देंगे।”

साभार: आदित्य राज कौल/ट्विटर

साझा किए गए एक स्क्रीनशॉट में आईएसआईएस कश्मीर ने दावा किया है कि कौल के बारे में सभी जानकारियाँ उसके पास है। इसमें लिखा है, “हमारे पास सभी तरह की डिटेल्स है। कहाँ रहते हो और अभी किस जगह पर हो? बस कुछ दिन की बात है और उसके बाद तुम्हारा सिर काट देंगे।”

साभार: आदित्य राज कौल/ट्विटर

पत्रकार आदित्य राज कौल कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद के खिलाफ मुखर होकर लिखते रहे हैं। शायद यही वजह है इस्लामी चरमपंथियों की उनसे नफरत की। हाल ही में कश्मीर में इस्लामिक चरमपंथियों ने नागरिकों को टार्गेट कर उनकी हत्याएँ की हैं। इस तरह की घटनाएँ खतरों को और अधिक चिंताजनक बनाती हैं।

गौरतलब है कि पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर को भी ISIS कश्मीर से धमकी मिली है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत की है। डीसीपी सेंट्रल श्वेता चौहान ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। गंभीर को मिले ई-मेल में उनकी और उनके परिवार की हत्या की बात कही गई है। दिल्ली पुलिस ने गंभीर के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

इससे पहले ISIS के मुखपत्र ‘वॉयस ऑफ हिंद’ ने भारत में देवताओं की मूर्तियों को तोड़ने की धमकी दी थी। इसका जो कवर जारी किया गया है, उस पर भगवान शिव की कंप्यूटरजनित खंडित मूर्ति है। इसके नीचे लिखा है- ‘इट्स टाइम टू ब्रेक फॉल्स गॉड (यह झूठे देवताओं के ध्वंस का समय है)’। खंडित मूर्ति के शीर्ष पर आईएसआईएस का झंडा भी लगा है।

जिसे 16 की उम्र में IS ने बनाया सेक्स स्लेव, परिवार को मार डाला; उसकी किताब को ‘मुस्लिम विरोधी’ बता कनाडा ने लगाई रोक

कनाडा हाल के दिनों में यूरोप के कई साहित्य पर प्रतिबंध लगा चुका है। कारण दिया गया कि इसमें लिखी चीजें स्थानीय देशज लोगों के लिए ठीक नहीं हैं। राजधानी का ‘टोरंटो डिस्ट्रिक्ट स्कूल बोर्ड (TDSB)’ इस काम में वहाँ सबसे आगे है। बच्चों और साहित्य की लगभग 5000 पुस्तकों को वो आपत्तिजनक बता कर नष्ट कर चुका है। अब एक बुक क्लब कार्यक्रम से उसने अपना समर्थन वापस ले लिया है। इसमें नोबेल पुरस्कार विजेता और यज़ीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता नादिया मुराद भी हिस्सा लेने वाली थीं।

इस कार्यक्रम में दो किताबों के लेखकों की मौजूदगी में उनकी पुस्तकों पर चर्चा के लिए आयोजित की जाने वाली थी। इसमें नादिया मुराद की पुस्तक ‘The Last Girl: My Story of Captivity, and My Fight Against the Islamic State‘ (द लास्ट गर्ल: मेरी कैद और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ मेरी लड़ाई) भी शामिल है। बोर्ड का कहना है कि नादिया मुराद की पुस्तक मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती है और और इस्लामोफोबिया को बढ़ावा दे सकती है।

बोर्ड ने दावा किया कि ये पुस्तक मुस्लिमों के लिए ठीक नहीं है। बता दें कि नादिया मुराद तब मात्र 16 साल की थीं, जब 2014 में ISIS के आतंकियों ने उनका अपहरण कर के उन्हें ‘सेक्स स्लेव’ बना दिया था। वो उत्तरी इराक के एक गाँव में रहती थीं, जहाँ हमले के बाद आतंकियों ने उन्हें बंदी बना लिया था। TDSB के प्रवक्ता रयान बर्ड ने कहा कि इस मामले में कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग हुई है, बुक क्लब के लिए सिर्फ अपने छात्रों को वहाँ बैठने का समर्थन वापस लिया गया है।

‘A Room of Your Own; नामक क्लब को तान्या ली ने 2017 में शुरू किया था। इसमें कई स्कूलों के 13 से 18 वर्ष तक की उम्र की छात्राओं को बुला कर उन्हें किताबें पढ़ने और एक-दूसरे से ऑनलाइन चर्चाएँ करने की सुविधा दी जाती है। ली ने बोर्ड के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यही इस्लामिक स्टेट का अर्थ होता है, जो एक आतंकी संगठन है। उन्होंने कहा कि सामान्य मुस्लिमों का इससे कुछ लेनादेना नहीं है और टोरंटो स्कूल बोर्ड को इस अंतर की जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहली बार बोर्ड ने उनके बुक क्लब द्वारा आयोजित किसी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है। ये कार्यक्रम फरवरी 2022 में प्रस्तावित है। इस किताब में नादिया मुराद ने बताया है कि किस तरह उनकी आँखों के सामने उनके परिवार को मार डाला गया और उन्हें कैदी बना लिया गया। उनका कई बार आतंकियों द्वारा बारी-बारी से बलात्कार हुआ और प्रताड़ित किया गया। वो किसी तरह वहाँ से भाग कर निकलने में कामयाब रहीं। बोर्ड ने अब कहा है कि उसके कर्मचारी किताबें पढ़ रहे हैं।

‘निक से 10 साल का एज गैप… तो क्रिस हेम्सवर्थ से कर लूँगी शादी’: प्रियंका चोपड़ा ने पति और उनके भाइयों को किया रोस्ट

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और उनके पति निक जोनस की तलाक की खबरें सोशल मीडिया पर उड़ने के बाद अब एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वह अपने पति को ही नहीं बल्कि निक जोनस के साथ उनके भाइयों को भी रोस्ट कर रही हैं। अपनी वीडियो में उन्होंने न केवल उम्र, करियर, अपनी शादी को लेकर उन्हें रोस्ट किया बल्कि ये भी कहा वह किसी और से शादी नहीं करना चाहेंगी, जब तक कि क्रिस हेम्सवर्थ सिंगल नहीं हो जाते।

23 नवंबर को नेटफ्लिक्स पर प्रीमियर हुए स्पेशल कॉमेडी शो में निक और उनके भाइयों के साथ नजर आईं प्रियंका ने बताया कि उनका उनके पति के साथ रिश्ता बेहद मजेदार है। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच 10 साल उम्र का फर्क हैं और दोनों एक दूसरे को सिखाते रहते हैं। वह कहती हैं, “हम एक दूसरे को चीजें सिखाते हैं। उदाहरण के लिए वह मुझे टिकटॉक चलाना सिखाता है और मैं उसे बताती हूँ कि एक कामयाब एक्टिंग करियर क्या होता है।आउच “

प्रियंका ने बताया कि अगर क्रिस हेम्सवर्थ (ऑस्ट्रेलियन अभिनेता) सिंगल होते तो प्रियंका उनसे शादी करना पसंद करेंगी। उन्होंने जोनस भाइयों को रोस्ट करते हुए ये भी कहा कि तीनों भाइयों के पास मिलाकर इतने फॉलोवर नहीं है जितने प्रियंका के अकेले के हैं। वह बोली, “क्या तुम लोग नोटिस करते हो कि जोनस भाई कितना कंटेंट ऑनलाइन पोस्ट करते हैं? ये लोग हमेशा इंस्टाग्राम में रहते हैं। हमेशा फोन पर होते हैं। ये बहुत क्यूट चीज है। लेकिन मैं आपको बताती हूँ ऐसा क्यों- इन सबके पास मेरे जितने फॉलोवर नहीं हैं। इसलिए मुझे लगता है जो सबसे ज्यादा पॉपुलर जोनस है वो- प्रियंका चोपड़ा है।”

यहाँ बता दें कि 22 नवंबर को प्रियंका चोपड़ा ने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट से निक जोनस का सरनेम हटाया था। ऐसे में सोशल मीडिया पर अटकलें लगीं कि कहीं दोनों के रिश्ते में दरार तो नहीं आ रही। हालाँकि बाद में प्रियंका की माँ और दोस्त ने मीडिया को बताया था कि जैसी अफवाहें उड़ रही हैं वैसा कुछ नहीं है। निराधार अफवाहों पर यकीन न किया जाए।

‘हम दुनिया को क्या संदेश दे रहे, ब्यूरोक्रेसी कहाँ है?’: SC ने दिल्ली प्रदूषण पर फिर ली क्लास, कहा – एक वैज्ञानिक मॉडल तैयार कीजिए

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (24 नवंबर, 2021) को कहा कि दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उच्च-स्तर के कदम उठाने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस जरूरत पर बल दिया कि दिल्ली में विभिन्न मौसमों में प्रदूषण के अलग-अलग स्तरों और हवा के पैटर्न का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिक मॉडल पर आधारित कदम उठाए जाएँ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हवा की गुणवत्ता बेहद खराब होने पर आपात स्थिति में फैसले लेने से अच्छा है कि स्थायी समाधान पर कार्य किया जाए।

CJI एनवी रमणा, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को देखते हुए आपात स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों को लेकर एक याचिका की सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान आँकड़ों और वैज्ञानिक मॉडल पर आधारित फैसले लेने की सलाह दी गई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि आज सुबह दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 290 है, जो पिछले सप्ताह के 403 से काफी सुधरा हुआ है।

केंद्र सरकार की तरफ से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि चूँकि अब दिल्ली की हवा की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है, इसीलिए कंस्ट्रक्शन से जुड़ी गतिविधियों पर लगा प्रतिबंध भी 22 नवंबर से हटा दिया गया है। इस दौरान उन्होंने ‘Commission for Air Quality Management in National Capital Region and Adjoining Areas’ द्वारा लिए गए निर्णयों और 21 नवंबर को हुई बैठक की जानकारी दी। इसी बीच जस्टिस चंद्रचूड़ ने उन्हें टोकते हुए कहा कि ये निर्णय तब लिए गए, जब इसकी विशेष ज़रूरत थी।

उन्होंने कहा कि कमीशन को आँकड़ों का अध्ययन कर के एक वैज्ञानिक मॉडल तैयार करना पड़ेगा। अगले 7 दिनों तक के हवा के पैटर्न का अध्ययन करना होगा, ताकि हवा की दिशा को देखते हुए निर्णय लिए जाएँ। उन्होंने कहा कि ये देखना पड़ेगा कि कौन से कदम उठाने की ज़रूरत है और उसका अगले 7 दिनों में क्या असर होगा। उन्होंने कहा कि किसी को तो इसका अध्ययन करना होगा। उन्होंने कहा कि कमीशन कह रहा है कि मौसम खराब होगा तो आपात कदम उठाए जाएँगे, लेकिन उससे अच्छा है कि मौसम का अनुमान लगा कर पहले से कदम उठाए जाएँ।

उन्होंने कहा कि स्थिति खराब होने पर हम कदम उठाना शुरू करते हैं, लेकिन अच्छा है कि उससे पहले ही हम अनुमान लगा कर फैसले लें। उन्होंने कहा कि अनुमान लगाना होगा कि किस मौसम में हवा की दिशा क्या होगी और उस आधार पर तैयार दिल्ली का ‘स्टैटिस्टिकल मॉडल’ तैयार करना होगा। इस पर SG ने कहा, “मैं सिर झुकाता हूँ। हमें इसका इंतजार नहीं करना चाहिए कि चीजें भयवाह हों।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये राष्ट्रीय राजधानी है और हम दुनिया को क्या संदेश दे रहे हैं, उस पर ध्यान दीजिए।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “आपको इन गतिविधियों पर पहले से ही लगाम लगानी होगी, ताकि स्थिति भयावह हो ही नहीं। दिल्ली के अलग-अलग मौसमों के लिए अलग-अलग मॉडल की आवश्यकता है। पूरे साल समान मौसम तो रहता नहीं है। प्रदूषण के कारण, हवा की दिशा के अनुमान और मौसम के आधार पर वैज्ञानिक मॉडल तैयार होना चाहिए। पहले से कार्रवाई होनी चाहिए। दिल्ली वाले क्यों ऐसी हवा में साँस लेकर तकलीफ झेलें, जो एकदम खराब या भयवाह हो?”

CJI ने कहा कि हवा की गुणवत्ता में इसीलिए सुधार हुआ है, क्योंकि हवा की गति पिछले कुछ दिनों में कम हुई है। उन्होंने कहा कि काफी उम्मीदें थीं कि सरकार कुछ करेगी, लेकिन अधिकतर चीजें हवा की गति कम होने के कारण हुई है। उन्होंने बताया कि फ़िलहाल AQI 318 है और सुप्रीम कोर्ट इस मामले को ख़त्म न करते हुए इस पर निगरानी रखेगा। उन्होंने कहा कि स्थिति फिर खराब हो सकती है, इसीलिए हमारे दिशानिर्देशों के आधार पर कदम उठाए जाएँ।

उन्होंने कहा कि सोमवार को फिर से सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा और AQI का स्तर 200 से नीचे आ जाता है तब प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है। उन्होंने राज्यों को सलाह दी कि ‘लेबर सेस’ के नाम पर जो हजारों करोड़ उनके पास हैं, उन रुपयों से मजदूरों की मदद की जाए – जब कंस्ट्रक्शन गतिविधियाँ बंद हों। उन्होंने पूछा कि राज्य की ब्यूरोक्रेसी क्या कर रही है? किसानों और वैज्ञानिकों से बात कर के स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा? CJI ने कहा कि हम चुनाव नहीं, प्रदूषण की बात कर रहे हैं।

बिटकॉइन में लगे पैसे का क्या होगा, क्रिप्टोकरेंसी पर मोदी सरकार के बिल में क्या है: जानिए सब कुछ

केंद्र सरकार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार क्रिप्टो करेंसी के नियमन और नियंत्रण सम्बंधित बिल लाने वाली है। निजी क्रिप्टो करेंसी को नियंत्रित/बंद करने के आलावा सरकार द्वारा लाए जाने वाले बिल का उद्देश्य भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तावित आधिकारिक डिजिटल करेंसी के नियमन हेतु एक कानूनी रूपरेखा तैयार करना होगा। इसके साथ ही पिछले कुछ वर्षों से क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग, उसके इस्तेमाल और उसपर सरकारी नियंत्रण को लेकर व्याप्त संशय दूर किया जा सकेगा।

ज्ञात हो कि क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग और उसमें निवेश के मामले में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में क्रिप्टोकरेंसी, उसके चलन और उससे सम्बंधित अन्य विषयों पर संज्ञान लेने के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी के साथ बैठक की थी।
   
प्रस्तावित बिल का उद्देश्य सरकार द्वारा बताए जाने के बावजूद क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग और उनमें निवेश को लेकर पहले से व्याप्त भ्रम के और बढ़ने की संभावना है। कुछ लोगों का मानना है कि निजी क्रिप्टो करेंसी पर देश में पूरी तरह से बैन लगना चाहिए। वहीं अन्य का यह मानना है कि क्रिप्टो करेंसी पर पूरी तरह से बैन न लगाकर कानून की सहायता से उनके इस्तेमाल, ट्रेडिंग और उनमें निवेश सम्बंधित नियम बनाकर उसे जारी रहने देना चाहिए। सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘द क्रिप्टो करेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ़ ऑफिसियल डिजिटल करेंसी बिल 2021’ के संसद में लाने से क्रिप्टो करेंसी से सम्बंधित ऐसे तमाम प्रश्नों के उत्तर मिलने की संभावना है। 

विज्ञप्ति के अनुसार बिल का उद्देश्य; भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तावित और भविष्य में जारी की जाने वाली आधिकारिक डिजिटल करेंसी के चलन हेतु नियम बनाना है। साथ ही बिल में; देश में डिजिटल करेंसी संबंधित बुनियादी तकनीक को प्रोत्साहित करने वाली क्रिप्टो करेंसी को छोड़कर अन्य सभी तरह के निजी डिजिटल करेंसी पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। हालाँकि, सरकार की ओर से निजी क्रिप्टो करेंसी को अभी तक परिभाषित नहीं किया गया है पर अनुमान लगाया जा रहा है कि वे क्रिप्टो करेंसी जो उनके इस्तेमाल करने वालों की जानकारी गुप्त रखती हैं, उनके इस्तेमाल, ट्रेडिंग और उसमें निवेश पर इस बिल में प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रहेगा। 

विशेषज्ञों के अनुसार निजी क्रिप्टो करेंसी पर सीधे तौर पर प्रतिबंध के परिणामस्वरूप भारत में चल रहे क्रिप्टो एक्सचेंज का ऑपरेशन बंद हो जाएगा। इसी वर्ष सितंबर में जब चीन ने क्रिप्टोकरेंसी पर सीधा प्रतिबंध लगाया था तब हूओबी ने चीन में अपना ऑपरेशन बंद कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी कारणों से क्रिप्टो करेंसी की ट्रेडिंग, उनके इस्तेमाल और उनमें निवेश संबंधी नियम कठिन है और इसी वजह से सरकार निजी क्रिप्टो करेंसी को सीधे तौर बैन कर देगी।

यही वजह है कि क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने वालों के बीच यह संशय बना हुआ है कि निजी क्रिप्टो करेंसी को लेकर सरकार की योजना क्या रहेगी? यदि बिल में निजी क्रिप्टो करेंसी पर सीधे तौर पर बैन का प्रस्ताव रहेगा तो सरकार उनमें निवेश करने वालों को राहत देने के लिए क्या करेगी? एक अनुमान के अनुसार क्रिप्टो करेंसी में करीब 6 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश है। 

हाल के दिनों में भारत में क्रिप्टो करेंसी में निवेश और ट्रेडिंग को लेकर लगातार हो रहे विज्ञापनों की वजह से केवल सरकार ही नहीं आर्थिक विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की थी। वित्त मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष जयंत सिन्हा ने हाल ही में क्रिप्टो एक्सचेंज, ब्लॉकचेन और बीएसीसी के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित लोगों से बैठकों के बाद यह प्रस्ताव दिया था कि क्रिप्टो करेंसी को सीधे तौर पर बैन न करके उनका नियमन किया जाना चाहिए। दूसरी ओर भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से क्रिप्टो करेंसी पर सीधे तौर पर बैन लगाने के प्रस्ताव है। भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्ति कांति दास के अनुसार क्रिप्टो करेंसी किसी भी देश की वित्तीय प्रणाली के लिए संकट पैदा कर सकते हैं। 

चीन में क्रिप्टो करेंसी पर पूरी तरह से बैन है। चीन का सेंट्रल बैंक क्रिप्टो करेंसी से लेन देन को अवैध घोषित कर चुका है। चीन के अलावा नाइजीरिया, तुर्की, बोलीविया, क़तर, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, विएतनाम जैसे देशों में क्रिप्टो करेंसी पर सम्पूर्ण बैन है। प्रस्तावित बिल जब संसद में पेश होगा तब भारत में क्रिप्टो करेंसी को लेकर सरकार का दृष्टिकोण साफ़ हो जाएगा। साथ ही बिल पर बहस में ढेरों ऐसे तथ्यों के सामने आने की संभावना है जिन्हें लेकर अभी तक लोगों में संशय और भ्रम की स्थिति है।

ऐसे समय में जब विश्व की अर्थव्यवस्था को कोरोना जैसी महामारी की वजह बड़ा धक्का लगा है, यह तय करना आवश्यक है कि वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था का किसी और संकट से सामना न हो। ऐसे में क्रिप्टो करेंसी को लेकर सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक का फैसला चाहे जो हो, उस पर कानून और नियम बनाने का प्रस्ताव उचित दिशा में सही कदम है और इसका स्वागत होना चाहिए।