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BJP समर्थकों में भय का माहौल, TMC के गुंडों के कारण सरकार से नहीं लेना चाहते बैर: क्या हैं बंगाल उपचुनाव परिणाम के मायने

भाजपा को पश्चिम बंगाल में झटका लगा है। राज्य में 4 जिलों की 4 अलग-अलग विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। पार्टी के लिए चिंता का विषय ये नहीं है कि उसने इन चारों सीटों को गँवा दिया, बल्कि हार का जो अंतर है – उस पर कोलकाता से लेकर दिल्ली तक ज़रूर मंथन होगा। 2019 लोकसभा चुनाव में 18 सीटें मिलने के बाद और 2021 विधानसभा चुनाव से पहले जो सरगर्मी थी, वो अब ठंडी पड़ रही है। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पहले से और मजबूत ही नजर आ रही है।

भाजपा के लिए खुश होने वाली सबसे बड़ी बात केवल यही है कि अब उसने कॉन्ग्रेस और वामदलों को पश्चिम बंगाल में कमजोर कर दिया है और इन दोनों की जगह ले ली है। पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को नेता प्रतिपक्ष बना कर और युवा सुकांता मजूमदार को प्रदेश अध्यक्ष का पद देकर ये ज़रूर दिखाया है कि वो लंबे समय का निवेश लेकर चल रही है, लेकिन TMC के गुंडों की हिंसा और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ किए जाने वाले सलूक ने एक भय का वातावरण पैदा कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में पार्टी के कई नेता पिछले कुछ दिनों में भाजपा छोड़ कर TMC में शामिल हो चुके हैं, जिनमें दो बड़े नाम पूर्व केंद्रीय मंत्रीगण मुकुल रॉय और बाबुल सुप्रियो शामिल हैं। बाबुल सुप्रियो अपनी कार पर हमले के डर से भाजपा कार्यकर्ताओं के बचाव में नहीं गए थे, जो दिखाता है कि विपक्ष का एक जनप्रतिनिधि भी TMC के शासनकाल में कितना लाचार है। प्रदेश में सरे संवैधानिक और संस्थागत पद उन्हीं नेताओं को मिलेगा, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चापलूसी करेंगे।

दिक्कत ये है कि हर नेता का रसूख अधिकारी परिवार जैसा नहीं है कि वो अपने बलबूते टिक सकें। ममता बनर्जी का कृपापात्र बनने के लिए जिस तरह पश्चिम बंगाल के नेताओं में होड़ लगी है, उसने भाजपा के पेशानी पर बल ज़रूर ला दिया है। या तो भाजपा के कार्यकर्ता भय दे वोट देने निकले ही नहीं, या उन्होंने सत्ता पक्ष से बैर लेना उचित नहीं समझा। क्योंकि, चारों सीटों पर भाजपा की जीत के बावजूद सरकार पर कोई असर नहीं पड़ता। कई भाजपा कार्यकर्ता तो विस्थापित भी हैं।

पश्चिम बंगाल उपचुनाव: चारों सीटों का चुनावी अंकगणित

सबसे पहले बात करते हैं कूच बिहार स्थित दिनहाता विधानसभा सीट की, जहाँ 1,89,575 मत पाकर TMC के उदयन गुहा विजयी रहे। भाजपा उम्मीदवार अशोक मंडल को मात्र 25,486 वोटों से संतोष करना पड़ा। यानी, तृणमूल को भाजपा से लगभग साढ़े 7 गुना ज्यादा वोट मिले। TMC ने जहाँ कुल मतों में से 84.15% पर कब्ज़ा किया, भाजपा के उम्मीदवार 11.31% पर सिमट गए। जीत का अंदर 1,64,089 रहा। ये बहुत बड़ा आँकड़ा है। 72.84% वोटों से हार भी एकतरफा है।

इसी सीट पर जब 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा के नीतीश प्रामाणिक लड़े थे, तब उन्हें 1,16,035 वोट प्राप्त हुए थे। भाजपा तब 47.60% वोट अपने पाले में करने में सफल रही थी। तब TMC की यहाँ हार हुई थी। हालाँकि, जीत का अंतर मात्र 57 ही रहा था और TMC भी 47.58% वोट लाने में कामयाब रही थी। बस 0.02% वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था। नीतीश प्रामाणिक फ़िलहाल केंद्रीय गृह और खेल मंत्रालयों में राज्यमत्री हैं। जिन उदयन गुहा को उन्होंने हराया था, वही इस बार जीत गए।

इसके बाद बात करते हैं साउथ 24 परगना स्थित गोसाबा विधानसभा सीट की, जहाँ 1,61,474 मत पाकर TMC के सुब्रता मंडल विजयी रहे। भाजपा उम्मीदवार पलश राणा को मात्र 18,423 वोटों से संतोष करना पड़ा। यानी, तृणमूल को भाजपा से लगभग साढ़े 8 गुना से भी ज्यादा वोट मिले। TMC ने जहाँ कुल मतों में से 87.19% पर कब्ज़ा किया, भाजपा के उम्मीदवार 9.95% पर सिमट गए। जीत का अंदर 1,43,351 रहा। ये बहुत बड़ा आँकड़ा है। 77.24% वोटों से हार भी एकतरफा है।

इसी सीट पर जब 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा के वरुण प्रामाणिक लड़े थे, तब उन्हें 82,014 वोट प्राप्त हुए थे। भाजपा तब 42.88% वोट अपने पाले में करने में सफल रही थी। तब TMC की यहाँ जीत हुई थी। हालाँकि, जीत का अंतर तब 23,619 रहा था और TMC 53.99% वोट लाकर विजयी हुई थी। बस 12.06% वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था। अब भाजपा पिछली बार के जीत के अंतर इतने वोट लाने को भी तरस गई है।

अब आते हैं नॉर्थ 24 परगना स्थित खारदाहा विधानसभा सीट की, जहाँ 1,14,086 मत पाकर TMC के शोभनदेव चट्टोपाध्याय विजयी रहे। भाजपा उम्मीदवार जय साहा को मात्र 20,254 वोटों से संतोष करना पड़ा। यानी, तृणमूल को भाजपा से लगभग साढ़े 5 गुना से भी ज्यादा वोट मिले। TMC ने जहाँ कुल मतों में से 73.59% पर कब्ज़ा किया, भाजपा के उम्मीदवार 13.07% पर सिमट गए। हालाँकि, जीत का अंतर यहाँ 1 लाख से कम, अर्थात 93,832 रहा। फिर भी ये बड़ा आँकड़ा है। 60.52% वोटों से हार भी एकतरफा ही समझिए।

इसी सीट पर जब 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा के शीलभद्र दत्ता लड़े थे, तब उन्हें 61,667 वोट प्राप्त हुए थे। भाजपा तब 33.67% वोट अपने पाले में करने में सफल रही थी। हालाँकि, वो दूसरे स्थान पर ही रही थी। लेकिन, जीत का अंतर तब 28,140 रहा था और TMC 49.04% वोट लाकर विजयी हुई थी। बस 15.36% वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था। अब भाजपा ने उम्मीदवार बदला, लेकिन सफलता नहीं मिली। जीत का अंतर जितना था, उससे तीन गुना से भी अधिक इस बार रहा।

अंत में बात करते हैं नाडिया स्थित शांतिपुर विधानसभा सीट की, जहाँ 1,12,087 मत पाकर TMC के ब्रज किशोर गोस्वामी विजयी रहे। भाजपा उम्मीदवार निरंजन बिस्वास को मात्र 47,412 वोटों से संतोष करना पड़ा। यानी, तृणमूल को भाजपा से लगभग सवा दो गुने से भी ज्यादा वोट मिले। TMC ने जहाँ कुल मतों में से 54.89% पर कब्ज़ा किया, भाजपा के उम्मीदवार 23.22% वोट ही ला पाए। हालाँकि, यहाँ जीत का अंतर थोड़ा सम्मानजनक रहा। भाजपा इस सीट पर 64,675 मतों से हारी। फिर भी हार का अंतर 35.32% रहा।

इसी सीट पर जब 2021 विधानसभा चुनाव में भाजपा के जगन्नाथ सरकार लड़े थे, तब उन्हें 1,09,722 वोट प्राप्त हुए थे। भाजपा तब 49.94% वोट अपने पाले में करने में सफल रही थी। पार्टी ने TMC को मात भी दी थी। तृणमूल कॉन्ग्रेस को तब 42.72% वोट मिले थे। बस 7.28% वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था। भाजपा 15,878 वोटों से जीत का स्वाद चखने में सफल हुई थी। इस सीट पर भाजपा ने अब भी TMC को ठीक-ठाक टक्कर दे दी है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं।

क्या रहे भाजपा की हार के कारण, पश्चिम बंगाल में अब आगे क्या?

ममता बनर्जी अब गोवा और त्रिपुरा में पाँव पसार रही हैं। उन्हें लग रहा है कि पश्चिम बंगाल में उनके टक्कर का कोई है ही नहीं, तो बाहर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का विस्तार करने का यही समय है। वो खुद को विपक्ष के एक बड़े नेता के रूप में देख रही हैं। अपना गढ़ बचाने में कामयाब रहीं ममता बनर्जी के राज में हिंसा, हत्याओं, विस्थापन, मुस्लिम तुष्टिकरण और लूटपाट जैसी घटनाओं के बावजूद मीडिया की वो दुलारी बनी रहती हैं। भाजपा के लिए चुनौतियाँ और कड़ी हैं।

भाजपा की हार का कारण है कार्यकर्ताओं का हतोत्साहित होना। उन्होंने देखा कि पार्टी के बड़े नेता भी राज्य में आने पर हमलों से खुद को नहीं बचा पा रहे हैं। उन्होंने देखा कि केंद्रीय संवैधानिक संस्थाओं के जो पदाधिकारी जाँच करने आ रहे हैं, उन्हें भी TMC के गुंडे बख्श नहीं रहे। उन्होंने देखा कि अदालतों से लेकर जमीन तक, TMC के गुंडों का कहीं कुछ नहीं बिगड़ रहा। शक्तिशाली ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के विरुद्ध जाने में भय का माहौल है। भय ने हतोत्साह को जन्म दिया।

पश्चिम बंगाल उपचुनाव में भाजपा ने उतना जोर लगाया भी नहीं था, जितनी हाइप और जितना मीडिया कवरेज 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान देखने को मिला था। कारण ये भी हो सकता है कि 4 सीटों के अंतर से ममता बनर्जी की सरकार पर कोई संकट आने-जाने वाला नहीं था, इसीलिए जनता और नेता दोनों ने सोचा कि क्यों न सत्ताधारी पार्टी को ही वोट दे दिया जाए या फिर उतनी सक्रियता न झोंकी जाए। राजनीति का जवाब दिया जा सकता है, यहाँ भाजपा को हिंसा का जवाब देना है। इसके तरीके खोजने हैं।

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा भी है कि जिस तरह इस्लाम तलवार के बल पर फैला, उसी तरह TMC तलवार की नोंक पर लोगों को बुला रही। उन्होंने उदाहरण दिया कि भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के विरुद्ध 120 केस ठोक दिए गए हैं और इसी तरह कई नेताओं के खिलाफ दर्जनों मुक़दमे दर्ज कर दिए गए हैं। खुद विजयवर्गीय के ऊपर 20 केस हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की हत्या की जा रही है, कोई क्या जिएगा। जनता यही तो देखती है कि जब जनप्रतिनिधि तक कि ये दुर्दशा है तो उनका क्या होगा।

कुल मिला कर देखें तो तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने न सिर्फ अपनी दोनों सीटें अपने पास रखीं, बल्कि भाजपा की जीती हुई दो सीटें भी छीन लीं। पश्चिम बंगाल में भाजपा के एक अन्य बड़े नेता पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने कैलाश विजयवर्गीय पर हाल ही में उँगली उठाई जी, जिससे लगता है बंगाल में सब ठीक नहीं है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि बांग्लादेश हिंसा का इस उपचुनाव पर असर पड़ेगा, जो आकलन गलत सिद्ध हुआ। दिसंबर में पश्चिम बंगाल के नगर चुनाव हो सकते हैं। अब देखना ये है कि भाजपा अपने कैडर में कितना जोश भर पाती है और कितनी सक्रियता दिखाती है।

भाजपा के शीर्ष आलाकमान को ये सिखाना होगा कि वो कार्यकर्ताओं के साथ खड़े हैं। अदालतों और संवैधानिक संस्थाओं की कार्रवाइयाँ वर्षों चलेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2019 शपथग्रहण समारोह में मृत कार्यकर्ताओं के परिजनों को बतौर अतिथि बुला कर सम्मानित किया गया था। इस तरह की चीजें होती रहनी चाहिए। कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लग्न चाहिए कि पार्टी उनके साथ है। लेकिन, अभी आलम ये है कि हिंसा और गुंडागिरी के आगे भाजपा का सांसद और केंद्रीय मंत्री तक पश्चिम बंगाल में सुरक्षित नहीं।

मुस्लिमों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर BJP ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व MLC विक्रम रंधावा को किया बर्खास्त

जम्मू कश्मीर के वरिष्ठ भाजपा नेता विक्रम सिंह रंधावा को पार्टी सचिव पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह पर उपाध्यक्ष शाम चौधरी को राजोरी जिले की जिम्मेदारी दी गई है। रंधावा को पद मुक्त किए जाने के संबंध में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र रैना ने पत्र जारी किया। जिसमें उन्होंने कहा कि रंधावा को तत्काल प्रभाव से पार्टी के सभी पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है।

मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले रंधावा का एक वीडियो वायरल होने के बाद जम्मू-कश्मीर के पूर्व एमएलसी और वरिष्ठ नेता विक्रम रंधावा को पार्टी के सभी पदों और जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विक्रम रंधावा का मुस्लिमों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का एक वीडियो टी20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मैच के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

भाजपा जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष रविंदर रैना ने पत्र में लिखा, “विक्रम रंधावा (पूर्व एमएलसी) को तत्काल प्रभाव से जेके-यूटी सचिव के पद सहित पार्टी के सभी पदों / जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है। भाजपा जेके-यूटी के उपाध्यक्ष शाम चौधरी (पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक सुचेतगढ़) जिला राजौरी के लिए नए प्रभारी/प्रभारी होंगे।”

Source: Republic

वीडियो में रंधावा कथित तौर पर कहते हैं, “ये 22- 23 साल की लड़कियाँ, जो घूँघट में जम्मू में घूमती हैं। कश्मीर में अपनी जैकेट हवा में फेंक रही थी और पाकिस्तान समर्थक नारे लगा रही थी। ये लड़कियाँ पाकिस्तान की तारीफ कर रही हैं और उनके दिल में इसके लिए सहानुभूति है। इस तरह की गतिविधि में शामिल सभी लोगों को पीटा जाना चाहिए और उनकी खाल उतारी जानी चाहिए। उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाना चाहिए कि उनकी आने वाली पीढ़ियों को भी भारत विरोधी नारे या भारत की धरती पर पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का नतीजा याद रहे। केवल उन्हें ही नहीं, उनके माता-पिता को भी यह महसूस करना चाहिए कि उन्होंने किस तरह के कृतघ्न बच्चों को जन्म दिया है”।

आगे उन्होंने कहा- “शुरू से ही, हमने माँग की है कि उनकी डिग्री रद्द कर दी जाए। हम यह भी माँग करते हैं कि उनकी नागरिकता भी रद्द कर दी जाए और उनकी पिटाई की जाए और उनकी खाल उतारी जाए।” वो कहते हैं, “पहले, वे मोबाइल फोन पर तलाक देते थे। तो नमाज भी व्हाट्सएप पर क्यों नहीं पढ़ लेते हैं, क्यों ये लोग इसके लिए सड़कों पर आते हैं और कब्जा कर लेते हैं।”

इससे पहले, विक्रम रंधावा के खिलाफ कश्मीरी मुस्लिमों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के लिए FIR दर्ज की गई थी और आईपीसी की धारा 295-ए, 505 एवं अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बीजेपी की अनुशासन समिति ने तब कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें लिखा था, “सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें आप एक विशेष समुदाय के खिलाफ लापरवाह और नफरत फैलाने वाली टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। यह पार्टी के लिए अस्वीकार्य है और इससे पार्टी की बदनामी और शर्मिंदगी हुई है।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, रंधावा ने टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की जीत के बाद कश्मीर के कुछ हिस्सों में जश्न की घटनाओं के दौरान मुस्लिमों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

केरल के मदरसा में इस्लाम सिखाने के बहाने महिलाओं का मौलवी ने किया यौन शोषण: पीड़ित महिला ने सुनाई आपबीती

केरल के कोझीकोड मुखदार तरबियाथुल इस्लामी सेंटर में इस्लाम कबूल करने वाली एक युवती ने मदरसा को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। महिला ने सेंटर के प्रमुख पर महिलाओं और लड़कियों को इस्लाम ‘सिखाने’ के बहाने प्रताड़ित करने और उनका यौन शोषण करने का आरोप लगाया है।

जनम टीवी के साथ अपने इंटरव्यू में, महिला ने कहा कि इस्लामी मदरसा का प्रमुख बड़ी संख्या में लड़कियों का यौन शोषण कर चुका है। महिला ने केंद्र की तुलना जेल से की और कहा कि महिलाओं और लड़कियों को मजहबी मदरसा छोड़ने पर प्रतिबंध है।

महिला के मुताबिक केंद्र के मुखिया मुस्लिम मौलवी ने एक दिन 18-19 साल की बच्ची के साथ रेप किया। इसके बाद लड़की को बताया गया कि स्नान करने के बाद उसके सभी पाप माफ हो जाएँगे। घटना के बारे में उसे कैसे पता चला, इस बारे में जानकारी देते हुए, महिला ने जनम टीवी को बताया कि पीड़िता ने ही उसके साथ आपबीती शेयर की थी।

महिला ने कहा कि पीड़िता को उसके परिवार वाले उसी दिन वहाँ से ले गए। महिला ने बताया कि कैसे मुस्लिम मौलवियों ने मजहबी केंद्र में शामिल होने के लिए असुरक्षित और कमजोर महिलाओं एवं लड़कियों को टारगेट किया और फिर इसके बाद उन्होंने उनके खिलाफ असहनीय अत्याचार किया। महिलाओं और लड़कियों को रहने के लिए घर और उनके खर्च के लिए पैसे देने के बहाने मदरसा में शामिल होने के लिए बहकाया गया।

महिला ने कहा कि लड़कियों को 40 दिनों के लिए केंद्र में रहने के लिए कहा गया था। इस दौरान मदरसा के प्रमुख ने उनमें से प्रत्येक के साथ व्यक्तिगत रूप से समय बिताया। महिला ने खुलासा किया कि उसने लड़कियों के कमरे में जाकर प्रताड़ित किया और उनका यौन शोषण किया। 19 वर्षीय लड़की द्वारा किए गए यौन उत्पीड़न के बारे में बात करते हुए, महिला ने कहा कि घटना 8 जून को हुई थी, लेकिन पुलिस में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई थी क्योंकि लड़की को कथित तौर पर पुलिस में घटना की रिपोर्ट करने के खिलाफ अपराधी द्वारा धमकी दी गई थी।

पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध को खारिज करने के SC के फैसले से नाराज रोशनी अली, कहा- कलकत्ता HC में फिर से करूँगी अपील

ट्रैवलर सह फिल्म निर्मात्री रोशनी अली ने मंगलवार (2 नवंबर 2021) को कहा कि वह फिर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील करने वाली है। बता दें कि रोशनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार (29 अक्टूबर, 2021) को दीवाली/काली पूजा के दौरान पूरे पश्चिम बंगाल में सभी प्रकार के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। हालाँकि, सोमवार (1 नवंबर 2021) को सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी करते हुए अली ने कहा, “नमस्ते, जैसा कि आप देख सकते हैं कि मैं कलकत्ता हाईकोर्ट में हूँ। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। मैं एक अपील करने जा रही हूँ और अभी भी अपने साँस लेने के अधिकार के लिए लड़ूँगी। यह सिर्फ पर्यावरण को लेकर नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तिगत स्वास्थ्य को लेकर है जो इस तरह के फैसले से दाँव पर लगा है। यह सिर्फ कलकत्ता नहीं, बल्कि पूरा देश देख रहा है।”

ज़ी बांग्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, रोशनी अली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, G24 ऑवर के साथ एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि उसे “एलर्जी” है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने दिवाली से तीन दिन पहले 1 नवंबर को ऐसा कहा था।

सोमवार को पटाखा निर्माताओं द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को किनारे रख दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वो इस बात को लेकर सुनिश्चित है कि कलकत्ता उच्च-न्यायालय को इतना बड़ा आदेश सुनाने से पहले सभी पक्षों को बुला कर उनकी बात सुननी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने ‘ग्रीन क्रैकर्स’ की अनुमति दे रखी है, ऐसे में उसका कहना है कि कलकत्ता हाईकोर्ट को पहले प्रशासन को बुला कर इसे सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था है या नहीं – ये पूछना चाहिए था।

बता दें कि गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को एक फेसबुक पोस्ट में, रोशनी अली ने पुष्टि की थी कि उन्होंने दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर को पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला दिया था।

हिन्दुओं के विरोध के सामने झुका गुरुग्राम प्रशासन, वापस लिया 8 सार्वजनिक जगहों पर नमाज की अनुमति वाला फैसला: समीक्षा के लिए नई समिति

गुरुग्राम के प्रशासन ने 8 सार्वजनिक जगहों पर नमाज की अनुमति वाला आदेश मंगलवार (2 नवंबर, 2021) को वापस लेने की घोषणा की। जनता के विरोध प्रदर्शन के बाद फैसला। स्थानीय लोग और कई हिन्दू संगठनों ने इसके विरुद्ध आवाज़ उठाई थी, क्योंकि आमजनों को इससे परेशानी हो रही थी और घंटों ट्रैफिक जाम भी लग रहा था। कई अन्य इलाकों में भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। गुरुग्राम प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि उन जगहों पर भी यही कार्यवाही होगी।

ऐसे लोकेशंस हैं – बंगाली बस्ती सेक्टर 49, V-Block DLF-III, सूरत नगर फेज-1, खेड़ी माजरा गाँव के बाहर, दौलताबाद गाँव के नजदीक द्वारका एक्सप्रेसवे पर, रामगढ गाँव के पास सेक्टर-68, DLF स्क्वायर टॉवर के नजदीक और रामपुर गाँव से नखडौला रोड के बीच। गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर ने इन जगहों के अलावा ऐसे अन्य जगहों की खोज के लिए कमिटी का गठन किया है, जहाँ नमाज पढ़ी जाती हो। SDM और ACP के अलावा इस समिति में हिन्दू-मुस्लिम समुदायों के प्रतिनिधि भी हैं।

सभी पक्षों से बात कर के ये समिति तय करेगी कि किन जगहों पर भविष्य में नमाज पढ़ी जा सकती है। साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर नमाज न पढ़ी जाए। इसका भी ध्यान रखा जाएगा कि जहाँ नमाज पढ़ने की अनुमति मिले, वहाँ के लोगों को इससे कोई आपत्ति न हो। गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता सुभाष बोकेन ने कहा कि केवल ईदगाह मस्जिदों और कुछ चुने गए जगहों पर नमाज पढ़ी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम समुदायों के बीच सामाजिक सद्भाव और भाईचारा बनाए रखना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए दोनों तरफ के संगठनों से सहयोग की ज़रूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होगी और सार्वजनिक जगहों पर नमाज के लिए जिला प्रशासन की अनुमति लेनी होगी। पुलिस निगरानी रख रही है और इसके लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर 12 और 47 में नमाज के कारण लोगों को खासी परेशानी हुई थी, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन हुआ था। खासकर जुमा के दिन सार्जनिक स्थानों पर भारी मुस्लिम भीड़ जुटती है।

‘हिन्दू आईटी सेल’ ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये हम सब हिन्दुओं की एक जीत है। संगठन ने इस सम्बन्ध में RTI भी दायर की थी। ‘हिन्दू आईटी सेल’ पहला संगठन था, जिसने इस मामले में वैधानिक रूप से किसी आधिकारिक अथॉरिटी के समक्ष आवाज़ उठाई थी। संगठन के संस्थापक सदस्य अक्षित सिंह, प्रवक्ता साहिल खोसला और अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी, बल्कि हिन्दुओं को इसके लिए एकजुट करने में भी भूमिका निभाई थी।

याद दिला दें कि पुलिस ने कुल 37 जगहों पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी थी। इसके विरोध में हिन्दू महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में लोग लगातार पाँच सप्ताह तक भजन-कीर्तन और नारेबाजी करते हुए सड़क पर निकल आए थे। विरोध करने की कड़ी में गुरुग्राम के सेक्टर-12-ए इलाके में पहुँचे हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों को गुरुग्राम पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। मुस्लिम समूहों ने नूंह और पटौदी से अधिक लोगों को ‘समर्थन’ के लिए बुलाया था। शांतिपूर्वक जुमे की नमाज की अदायगी के लिए 500 पुलिस के जवान पाँच जगहों पर तैनात किया गया था। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बनाई ‘पंजाब लोक कॉन्ग्रेस पार्टी’, सोनिया गाँधी को 7 पन्ने की चिट्ठी भेज दिया इस्तीफा

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार (2 नवंबर 2021) को सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसी के साथ उन्होंने अपनी नई पार्टी का भी ऐलान कर दिया है। कैप्टन अमरिंदर ने ‘पंजाब लोक कॉन्ग्रेस’ के नाम से अपनी नई पार्टी बनाई है। हालाँकि अभी रजिस्ट्रेशन बाकी है। चुनाव आयोग से अनुमोदन मिलने के बाद ही रजिस्ट्रेशन हो पाएगा और फिर इसके बाद पार्टी के चिन्ह को मंजूरी दी जाएगी।

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को 7 पेज का इस्तीफा भेजा है। कैप्टन अमरिंदर ने अपने इस्तीफे में कॉन्ग्रेस आलाकमान की ओर से नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले पर चिंता व्यक्त की है और सोनिया गाँधी को लिखा है कि एक दिन कॉन्ग्रेस आलाकमान को अपने इस फैसले पर पछताना पड़ेगा। साथ ही 7 पन्नों की अपनी चिट्ठी में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कॉन्ग्रेस के साथ अपने कई सालों के जुड़ाव और मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पंजाब के हित में किए गए कामों का लेखा-जोखा भी पेश किया है।

इस्‍तीफे में कैप्‍टन ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा समेत पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा पर नवजोत सिद्धू, जो ‘एक अस्थिर व्यक्ति’ हैं और ‘पाकिस्‍तान के प्रति साफ्ट कॉर्नर रखने वाले’ हैं, को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि सोनिया गाँधी ने ‘इस सब से आँखें मूँद लीं’।

बता दें कि पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू से खींचतान के बीच 18 सितंबर को कैप्टन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने अपमान किया है। जल्दी ही पार्टी छोड़ दूँगा। उन्होंने आगे की रणनीति को लेकर पूछे गए सवालों पर कहा था कि वो दोस्तों और करीबियों से चर्चा के बाद फैसला लेंगे। इसके बाद उन्होंने नई पार्टी बनाने की घोषणा की थी। 

पूर्व मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर को कहा था, ‘‘मैं जल्द ही अपनी पार्टी गठित करूँगा और किसानों के मुद्दे सुलझने के बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव, 2022 के लिए बीजेपी, शिरोमणि अकाली दल से अलग हो चुके धड़ों और अन्य के साथ सीटों के बँटवारे के लिए बातचीत करूँगा। पंजाब और राज्य के किसानों के हित में मैं एक मजबूत सामूहिक ताकत चाहता हूँ।’’ 

बता दें कि मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान, तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये कानून पिछले साल सितंबर में बनाए गए थे और प्रदर्शनकारी किसान इन्हें निरस्त करने की माँग कर रहे हैं।

हिरासत में मनेगी महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की दीवाली, कोर्ट ने 6 नवंबर तक ED के हवाले किया

महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री व एनसीपी नेता अनिल देशमुख को 100 करोड़ रुपए की वसूली केस और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के बाद PMLA विशेष अदालत ने 6 नवंबर तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया है। उनकी गिरफ्तारी 12 घंटे पूछताछ के बाद सोमवार को हुई थी। उन्हें प्रीवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया गया। इसके बाद उन्हें मंगलवार को मुंबई की सेशन अदालत में पेश किया गया।

यहाँ बता दें कि कल (1 नवंबर) अनिल देशमुख अपने वकील और कुछ साथियों के साथ साउथ मुंबई के बॅलार्ड इस्टेट में ईडी ऑफिस गए थे। वहाँ अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। लेकिन देशमुख की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

इस कार्रवाई से पहले जाँच एजेंसी ने बहुत बार देशमुख को समन भेजा था, लेकिन उन्होंने 5 बार ईडी के नोटिस को नजरअंदाज किया। उनके सामने तमाम आरोपितों के बयान भी रखे गए थे जिनका इस अपराध में सक्रिय योगदान था, लेकिन देशमुख ने किसी सवाल का उचित जवाब नहीं दिया और हर आरोपों का खंडन करते रहे। ईडी ने अपनी जाँच के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मंगलवार को उन्हें दीवाली की छुट्टियों के कारण हॉलिडे कोर्ट में पेश किया गया और वहाँ उनकी हिरासत 6 नवंबर तक ईडी को दी गई। उन पर आरोप है कि उन्होंने सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की हफ्ता वसूली का टारगेट दिया हुआ था। इस बाबत मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने शिकायत दी थी। बाद में इस केस को पहले सीबीआई ने संभाला और फिर ईडी की एंट्री हुई।

सहाना बेगम ने 4 युवकों को घर से उठवाया, 3 दिन तक पीटा-करंट लगाया: वीडियो वायरल होने पर एक्शन में MP पुलिस

मध्य प्रदेश के जबलपुर में चोरी के शक में चार लोगों को तीन दिनों तक बेरहमी से पीटा गया। पहले पीड़ितों को बंधक बनाया गया, उसके बाद उन्हें करंट के झटके भी दिए गए। इस अमानवीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। आप इस वीडियो में देख सकते हैं कि पीड़ितों से चोरी कबूल करवाने के लिए उन्हे बंधक बनाकर कैसे मारा-पीटा जा रहा है।

बताया जा रहा है कि इन पीड़ितों की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन पर दुकान से सामान चुराने का शक था। इसके बाद पीड़ितों के परिजनों ने कुछ हिंदू संगठनों से संपर्क किया, जिसके बाद चारों को मुक्त कराया गया। फिलहाल, आरोपितों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

दरअसल, जबलपुर के गोरखपुर क्षेत्र स्थित मांडवा बस्ती निवासी सहाना बेगम की मोबाइल और अन्य सामग्री की दुकान है। इसी दुकान में बीते दिनों चोरी हुई थी। चोरी के शक में सहाना बेगम ने अपने गुर्गों की मदद से मांडवा बस्ती निवासी दुर्गेश ठाकुर, नितिन ठाकुर, हर्षित गुप्ता और अंजू कुमरे को 29 अक्टूबर को घर से उठवा लिया था। इसके बाद टेंडर-2 मांडवा रामपुर स्थित अपने घर में बंधक बना लिया। तीन दिन तक सहाना के गुर्गे उन चारों की पिटाई करते रहे। चोरी का गुनाह कबूल कराने के लिए उन्होंने न केवल पीड़ितों को बेरहमी से पीटा, बल्कि करंट भी लगाया।

चारों पीड़ितों के परिजनों ने बताया कि चोरी के आरोप के बाद वे डर गए थे। यही कारण है कि वह पुलिस के पास न जाकर शिवसेना के प्रदेश अध्यक्ष ठाडेश्वर महावर के पास पहुँचे थे और उन्हें बताया कि तीन दिन पहले सहाना बेगम उनके घर के सदस्यों को उठाकर ले गई है। इसके बाद ठाडेश्वर महावर सहाना के घर पहुँचे और बंधक बनाए गए चारों लोगों को मुक्त कराया।

बता दें कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद सहाना बेगम और उसके गुर्गे सागर, तौफिक, सनी, मुन्ना, राहुल काला, अविनाश आदि के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

राजस्थान के ‘कुकर्मी जज’ का डर, विधवा माँ ने बेटे सहित छोड़ा राजस्थान: PM मोदी को पत्र लिख कहा- उलटा हम पर ही केस

राजस्थान के भरतपुर में एक जज पर 14 साल के किशोर के रेप का आरोप लगा। अब पता चला है कि भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट (एसीबी) के विशेष न्यायाधीश जितेंद्र गुलिया और उसकी कोर्ट के दो क्लर्क अंशुल और राहुल के भय से पीड़ित परिवार को घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा है। परिवार भरतपुर से आगरा शिफ्ट हो गया है। पुलिस उपाधीक्षक सतीश वर्मा पिसित किशोर का बयान लेने पहुँचे थे, लेकिन घर पर कोई नहीं मिला। भरतपुर पुलिस परिवार की तलाश के लिए आगरा गई है।

इसी बीच किशोर की माँ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सुरक्षा की गुहार लगाई है। माँ ने कहा है कि वो एक विधवा हैं और उनके बेटे का एक महीने से भी अधिक समय तक रेप किया गया। उन्होंने बताया कि ‘मथुरा गेट’ पुलिस थाने में जब वो न्याय के लिए पहुँचीं तो कोतवाल रामनाथ ने घंटों उन्हें, उनके परिवार को और बच्चे को धमकाया। साथ ही कोतवाल पर जज के खिलाफ खिलाफ मुकदमा न लिखवाने के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है।

पीड़ित की माँ ने पत्र में लिखा है, “कोतवाल रामनाथ ने उलटा मेरे परिवार पर ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। हमसे कड़ी पूछताछ की। मेरे द्वारा दी गई तहरीर में एडिशनल एसपी का नाम था, लेकिन FIR में इसे नहीं जोड़ा गया। उन्हें बचाने का प्रयास किया गया। पक्षपात पूर्ण कार्रवाई की गई है। मुझे अप्रत्यक्ष रूप से धमकाया जा रहा है। मेरे परिजनों पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है। इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। मुझे जान-माल का खतरा है।”

पीड़ित किशोर की माँ का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र

खतरे के कारण पीड़ित की माँ ने राजस्थान छोड़ कर कहीं और सुरक्षित जगह जाने की बात कही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि उन्हें उनसे न्याय की उम्मीद है। उन्होंने माँग की कि उनके परिवार के विरुद्ध दर्ज फर्जी मुकदमा वापस लिया जाए, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो और परिवार को सुरक्षा व न्याय दिलाया जाए। पत्र की प्रति मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अलावा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को भी भेजी गई है।

इस प्रकरण के सामने आने के बाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (विजिलेंस) प्रवीण भटनागर को भरतपुर भेजा गया है। उन्होंने जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता और पुलिस अधीक्षक देवेंद्र बिश्नोई से मिलकर पूरे मामले की जानकारी ली। आरोपित न्यायाधीश गुलिया सोमवार को भरतपुर से जयपुर निकल गए, जिसके बाद उनसे गुलिया से पूछताछ के लिए पुलिसकर्मी भेजे गए हैं। पुलिस ने जानकारी दी है कि पीड़ित के घर 5 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।

बता दें कि मामला सामने आने के बाद जोधपुर हाई कोर्ट ने आरोपित जज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर लगे आरोप में बताया गया है कि वह पिछले 1 महीने से पीड़ित के साथ दुष्कर्म कर रहे थे। उन पर बच्चे को नशीला पदार्थ खिलाने का भी आरोप है। पीड़ित कक्षा 8 का छात्र है। उनके कहने पर DSP परमेश्वर लाल ने भी पीड़ित परिवार को मुँह बंद रखने की धमकी दी थी। आरोप है कि जज ने कहा कि जो तेरे साथ किया वही तेरी माँ के साथ भी करूँगा। सबको जेल भेजने की भी धमकी दी।

NCERT साइट से हटा ‘लड़का-लड़की का टॉयलेट अलग क्यों’ वाला मैनुएल, अब जानिए इस ‘ज्ञान’ के पीछे कौन

नेशनल काउंसिल ऑफ एड्युकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा जेंडर और ट्रांसजेंडर विषय पर शिक्षकों के लिए जारी किया गया विवादित मैनुएल अब साइट से गायब है। 115 पेज का मैनुएल डॉ पूनम अग्रवाल, प्रोफेसर, जेंडर स्टडीज विभाग पूर्व अध्यक्ष और कई शिक्षकों ने मिलकर तैयार किया था। मैनुएल की अजीब बात ये थी कि इसमें ट्रांस्जेंडर्स के साथ होते भेदभाव के पीछे ये कारण दिया गया था कि स्कूलों में जो अलग-अलग शौचालय बनाए जाते हैं उससे ये लिंग भेद बढ़ता है।

NCERT वेबसाइट से गायब हुआ लिंक

इस मैनुएल के जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने इस पर सवाल उठाए थे। पूछा गया था कि ऐसी मानसिकता वाले लोग आखिर शिक्षा क्षेत्र में कैसे हैं। जब पड़ताल हुई तो इस मैनुएल को बनाने वाले कुछ अन्य नामों के बारे में पता चला और ये भी मालूम चला कि शिक्षा क्षेत्र में ट्रांसजेंडर वर्ग के साथ होने वाले भेदभाव के पीछे ‘शौचालय’ को कारण बताने वाले ‘लोग’ खुद अपने इंस्टाग्राम पर अश्लील सामग्री शेयर कर रहे हैं।

मैनुएल बनाने वालों में एक नाम विक्रमादित्य सहाय का था। वह बाहरी टीम सदस्य थे। उनके इंस्टा पर अश्लील तस्वीरों को शेयर देखा जा सकता है। जानकारी के मुताबिक वो सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी रिसर्च में एसोसिएट के तौर पर काम करते हैं। उनके विवादित ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

विक्रम को मिलाकर एक्सटर्नल टीम सदस्यों में 6 लोग शामिल थे। जिनमें डॉ राजेश डीयू के और डॉ बिट्टू कावेरी राजारमण अशोक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं।

स्क्रीनशॉट

इसके अलावा एक एल राम कृष्णन हैं जो कि SAATHI के उपाध्यक्ष हैं और उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास से डॉक्टरेट की डिग्री भी मिली है।

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डॉ मानवी अरोड़ा भी इसी सूची में एक नाम हैं और पेशे से वह एक स्वतंत्र शोधार्थी हैं। वहीं टीम की छठी सदस्य प्रिया बाबू हैं जो कि ट्रांसजेंडर रिसोर्स सेंटर की ट्रस्टी हैं।

इन 6 बाहरी सदस्यों के अलावा मैनुएल बनाने वाली डॉ. पूनम अग्रवाल को न्यूट्रिशियन (गृह विज्ञान), जैव-रसायन विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी, महिला अध्ययन, व्यावसायिक शिक्षा, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, शैक्षिक अनुसंधान में विशेषज्ञता प्राप्त है। दूसरी ओर, डॉ मोना यादव को “लड़कियों की शिक्षा और विज्ञान शिक्षा” में विशेषज्ञता प्राप्त है, जबकि डॉ. मिली रॉय आनंद के पास इतिहास / लिंग अध्ययन में विशेषज्ञता है।