Home Blog Page 3264

मोदी सरकार का एक सफाई अभियान यह भी: महीने भर में 13.73 लाख फाइल का निपटारा, रद्दी-कबाड़ से आए ₹40 करोड़

केंद्र की मोदी सरकार ने एक ऐसा सफाई अभियान शुरू किया था जिसकी चर्चा कम हुई। यह अभियान इस साल गाँधी जयंती पर 2 अक्टूबर को शुरू किया गया था। यह अभियान 31 अक्टूबर को समाप्त हुआ। इस दौरान सरकारी कार्यालयों में 13.73 लाख से ज्‍यादा फाइलें क्लियर की गईं। दफ्तरों के रद्दी और कबाड़ को बेचकर 40 करोड़ रुपए भी आए।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस अभियान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इससे केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों से कुल आठ लाख वर्ग फुट से अधिक जगह को खाली किया गया। इसे इस तरह समझें कि इतने एरिया में राष्‍ट्रपति भवन जैसी चार इमारतें आ जातीं।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि डीएआरपीजी (प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग) के नोडल विभाग के तहत केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों में पुरानी फाइलों के निस्तारण के लिए अभियान की शुरुआत की गई थी। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चला। 

डीएआरपीजी के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 15,23,464 फाइलों में से 13,73,204 से अधिक फाइल क्लियर की गईं। इसी तरह, 3,28,234 लोक शिकायतों में से 2,91,692 शिकायतों का निवारण महज 30 दिनों के भीतर किया गया। सांसदों के 11,057 संदर्भों में से 8,282 का समाधान किया गया। इसके अलावा 834 चिन्हित नियमों और प्रक्रियाओं में से 685 को सरल बनाया गया। इस अभियान में पुरानी फाइलों को हटाकर केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों से आठ लाख वर्ग फुट से अधिक स्थान को खाली किया गया। इतने एरिया में राष्‍ट्रपति भवन जैसी चार इमारतें आ जातीं। राष्‍ट्रपति भवन का फ्लोर एरिया 2 लाख वर्ग फीट है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर सरकार ने लंबित मामलों के निस्तारण पर विशेष अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि इस विशेष अभियान का उद्देश्य सभी कार्यालयों में जन शिकायतों, संसद सदस्यों, राज्य सरकारों के संदर्भ, अंतर-मंत्रालयी परामर्श और संसदीय आश्वासनों का समय पर और प्रभावी निपटान सुनिश्चित करना था।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस अभियान के दौरान पुरानी फाइलों की पहचान की गई और उन्हें हटाया गया। देश में जन आंदोलन बन चुके PM मोदी के स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित होकर डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य में इस प्रथा जारी रखने की बात कही है ताकि कार्य स्थलों को स्वच्छ, शुद्ध और अव्यवस्था मुक्त बनाया जा सके।

उन्होंने डीएपीजी को निर्देश दिया कि वह विभिन्न श्रेणियों के लंबित मामलों में कमी लाने के संबंध में भारत सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों का तुलनात्मक विश्लेषण करे और प्रतिस्पर्धात्म भावना को बढ़ावा देने के लिए सभी के साथ साझा की जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं का भी पालन करे। मंत्री ने इस बात को दोहराया कि इस अभियान की शुरुआत करने वाले उद्देश्य के पूरा होने के बाद भी यह चलते रहना चाहिए, क्योंकि लंबित मामलों में कमी लाना एक निरंतर प्रक्रिया है।

अजीत पवार से जुड़ी ₹1000 करोड़ की संपत्ति जब्त : गोवा का रिसॉर्ट, दिल्ली का फ्लैट, सतारा का चीनी मिल, मुंबई का टॉवर, 27 जगह जमीन

आयकर (IT) विभाग ने महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और NCP नेता अजीत पवार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की है। उनसे जुड़ी 1000 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है। उनसे जुड़ी ये संपत्तियाँ महाराष्ट्र, गोवा और दिल्ली में मौजूद हैं। मंगलवार (2 नवंबर, 2021) को ये जानकारी दी गई। अजीत पवार से जुड़ी जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, उनमें उनकी एक कोऑपरेटिव चीनी मिल भी शामिल है। पिछले महीने चलाए गए एक गहन तलाशी अभियान में अजीत पवार की 184 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का पता चला था

इसके बाद ताज़ा कार्रवाई की गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के बेनामी विंग ने ये कार्रवाई की है। अभी इस मामले में जाँच जारी है और संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी जाँच का ही हिस्सा है। सतारा में स्थित जरांदेश्वर चीनी मिल के अलावा मुंबई स्थित एक परिसर को भी IT विभाग ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। गोवा में उनका एक रिसॉर्ट भी है, जो अब आयकर विभाग न अटैच कर लिया है। महाराष्ट्र में अलग-अलग जगहों पर उनकी 27 जमीनें अब IT विभाग के नियंत्रण में हैं।

इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत 1000 करोड़ रुपए के आसपास है, लेकिन इनकी ‘बुक वैल्यू’ काफी कम है। बताया जा रहा है कि इनमें से कोई भी संपत्ति सीधे अजीत पवार के नाम पर पंजीकृत नहीं हैं, अर्थात उनके करीबियों की हैं। पिछले महीने अजीत पवार से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों में छापेमारी के बाद IT विभाग को 184 करोड़ रुपए की छिपी हुई कमाई का पता चला था। बताया जा रहा है कि ये अजीत पवार के रिश्तेदारों के थे। डीबी रियल्टी और शिवालिक ग्रुप नाम की ये कंपनियाँ उनके बेटे और बहन के नाम पर रजिस्टर्ड हैं।

7 अक्टूबर, 2021 को शुरू हुआ ये तलाशी अभियान मुंबई, पुणे, बारामती, गोवा और जयपुर के 70 लोकेशनों पर चला था। जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, उनमें दक्षिणी मुंबई निर्मल टॉवर और दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित एक फ्लैट भी शामिल है। ये कार्रवाई ‘बेनामी लेनदेन निषेध अधिनियम (Prohibition of Benami Property Transactions Act), 1988’ के तहत की गई है। IT विभाग को अजीत पवार से जुड़ी कंपनियों द्वारा बड़ी मात्रा में अवैध लेनदेन और अनसिक्योर्ड लोन की जानकारी मिली है।

हिंदुओं के विरोध के बाद एले इंडिया ने डिलीट किया पोस्ट, चोरी करके लगाया था कार्टून, आर्टिस्ट भड़का: जानें कौन-कौन है शामिल

31 अक्टूबर को एले (ELLE) इंडिया ने हिंदुओं के विरोध में एक आर्टिकल पब्लिश किया था। ये आर्टिकल मुख्यत: इस बात पर था कि आखिर कैसे हिंदू अपने संस्कृति, त्योहार, सभ्यता के विरुद्ध तैयार किए जा रहे प्रचार पर मुखर होकर विरोध कर रहे हैं। जब इस आर्टिकल पर भी नेटीजन्स ने उन्हें आड़े हाथों लिया तो उन्होंने चुपके से पोस्ट ही डिलीट कर दी।

डिलीट होने के बाद पोस्ट का स्क्रीनशॉट

दिलचस्प बात यह है कि ये आर्टिकल रूमन बेग जैसे लोगों ने लिखा था जिनके सोशल मीडिया चेक करें तो पता चलता है कि वो कैसे शरजीम इमाम के समर्थन में आवाज उठाने वालों का समर्थन करते हैं। 

एले की डिजिटल एडिटर एनी निजामी अहमदी हैं। जिन्होंने आर्टिकल पर हुए बवाल के बाद अपने अकॉउंटस को लॉक कर लिया है। इनके साथ इस्लामी पत्रकारिता की सबसे बड़ा चेहरा राणा अयूब के भाई आरिफ अयूब भी एले से जुड़े हैं। इन सबकी सोशल एक्टिविटी बताती हैं कि कैसे ये सब सीएए के विरोध में कट्टरपंथी आवाजों के साथ थे।

एले द्वारा पोस्ट किए गए कुछ इलस्ट्रेशन भी एक हिंदू विरोधी मानसिकता वाले आर्टिस्ट की ही उपज थे, जो अक्सर अपने सोशल मीडिया अकॉउंट्स पर एंटी हिंदू सामग्री डालता रहता है। इस आर्टिस्ट का यूजर नेम Lord_VoldeMaut है। 19 साल का यह आर्टिस्ट हिंदू विरोधी है लेकिन इसे यह नहीं पता था कि इसका वर्क कैसे एले ने अपने कंटेंट को जानदार बनाने के लिए इस्तेमाल किया और बदले में न इससे पूछा और न पैसे दिए। जब इसे इस संबंध में पता चला तो इसने सारी पोल-पट्टी अपने अकॉउंट पर पोस्ट करके खोली। ये आर्टिस्ट हिंदुओं के विरोध में भगवा रंग का इस्तेमाल करके एक पूरी सीरिज चला रहा था। इसने अक्टूबर में हर दिन अपने कंटेट को डाल रखा था।

हिंदू विरोधी कार्टून की सीरिज
एले पर भड़का हिंदू विरोधी कार्टूनिस्ट

आर्टिस्ट ने ही बताया कि एले ने कैसे विरोध के बाद अपने खबर और पोस्ट से लेखक का नाम हटा दिया था और उसका नाम रहने दिया। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने आर्टिस्ट की क्लास लगाई और स्थिति ऐसी हो गई कि उसे भी अपने ट्विटर को डिएक्टिवेट करके जाना पड़ा। बाद में उसने कुछ बदलावों के साथ वापसी की और अब उसका हैंडल प्राइवेट हैं।  उधर, एले ने भी नेटीजन्स की लताड़ लगने के बाद अपने पोस्ट को इंस्टा से हटा लिया और बाद में बिन माफी माँगे चुपके से आर्टिकल भी डिलीट कर दिया।

यहाँ बता दें कि जिन हिंदुओं को असहिष्णु दिखाकर ये बताने का प्रयास हो रहा है कि वो विज्ञापन देने वाले की क्रिएटिविटी में रोक-टोक करते हैं, उन हिंदुओं की समस्या किसी की क्रिएटिविटी नहीं बल्कि सनातन धर्म और संस्कृति के विरुद्ध फैलाया जा रहा प्रोपगेंडा है।

‘ल@%&, काफिर…बुत परस्ती करती है’: सारा अली खान को केदारनाथ में देख भड़के कट्टरपंथी

बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान ने जाह्ववी कपूर के साथ हाल में केदारनाथ मंदिर पहुँचकर वहाँ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालीं। तस्वीरों में दोनों अभिनेत्रियाँ मंदिर परिसर और उसके आसपास की जगह में खड़ी नजर आ रही हैं। सारा ने तस्वीरों के कैप्शन में लिखा है- “वहीं पर दोबारा जहाँ से सब शुरू हुआ था।”

अब मालूम हो कि सारा ने अपने करियर की शुरूआत केदारनाथ मूवी से ही की थी। इसके बाद उन्हें कई फिल्में मिलीं। हाल में जब वो दोबारा केदारनाथ पहुँची तो सबने उनकी तारीफ की, लेकिन सारा अली खान को मंदिर में देखकर कट्टरपंथी एक बार फिर भड़क गए।

एक यूजर ने सारा को कहा, “अल्लाह तुम्हें हिदायत अता करे।”

फैजल ने तो लिखा, “ल@%&… काफिर नाम की मुस्लिम। नाम चेंज कर ले।”

एम फरीद ने लिखा, “तुम मुस्लिम हो फिर ये क्या कर रही हो अस्तगफिरुल्लाह।”

जेहनाब चौधरी लिखते हैं, “तुम मुस्लिम हो। लानत तुम पर सारा शर्म करो। अल्लाह से डरो।”

खान अफरीजी ने कहा, “तौबा अस्तगफिरउल्लाह भोले नाथ मोदी के डर से पहाड़ों पर चले गए हैं।” 

शेख साहब ने कहा अल्लाह तुम्हें हिदायत दे। खुशनसीब थी जो मुस्लिम पैदा हुई। अस्तगफिरुल्लाह और काम हिंदुओं वाले। ये जिंदगी है थोड़ी सी जहाँ जाना है वहाँ क्या हाल होगा तुम जैसों का। वक्त है तौबा करलो। रास्ते खुले हुए हैं।

हसीब नाम का यूजर कहता है, “नाम ही बदल दे कम से कम। इस्लामिक पोस्ट कभी लगाई नहीं बस यही लगाती है। डूब कर मरजाए इससे अच्छा है।”

फरहान ने कहा, “तुम खान कैसे हो गई तुम तो बुत परस्ती कर रही हो।”

बता दें कि सारा अली खान पर पहली बार कट्टरपंथियों की नफरत नहीं बरसी है। वो अक्सर हिंदू मंदिरों और हिंदू देवी देवताओं के सामने हाथ जोड़े फोटो खिंचवाती हैं जिसके कारण कट्टरपंथी उन्हें या तो अपने नाम से उन्हें अली और खान हटाने को बोलते हैं या फिर उन पर गालियों की बौछार कर देते हैं। 

मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों का नतीजा: अर्थव्यवस्था ज्यादा फॉर्मल, आँकड़े पहले से ज्यादा ठोस

पिछले तीन वर्षों में देश में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का साइज 52% से घटकर लगभग 15% से 20% तक पहुँच गया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान कम से कम 13 लाख करोड़ विभिन्न चैनलों से देश की औपचारिक अर्थव्यवस्था में आए हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में इस परिवर्तन के पीछे केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई कई आर्थिक योजनाएँ और प्रशासनिक कार्रवाई का हाथ रहा है। रिसर्च के अनुसार नोटबंदी, जीएसटी, डिजिटल पेमेंट से लेन-देन में लगातार हो रही वृद्धि और ई-श्रम पोर्टल पर लागू विभिन्न योजनाओं की वजह से ऐसा संभव हो सका है।

औपचारिक और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था

औपचारिक अर्थव्यवस्था किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा है, जिसका रिकॉर्ड सरकार के आर्थिक आँकड़ों में दिखाई देता है और जिसके आधार पर किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद का आकलन किया जाता है। इस अर्थव्यवस्था में करों के भुगतान से लेकर लेन-देन की प्रक्रिया का आँकड़ा सरकार के विभिन्न विभागों के पास रहता है। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था देश के सकल घरेलू उत्पाद का वह हिस्सा है, जिसका कोई औपचारिक आँकड़ा उपलब्ध नहीं रहता क्योंकि उसमें उद्योग, व्यापार या व्यवसाय में जो लेन-देन होता है उसमें न केवल करों से बचने का काम होता है बल्कि वह सरकारी आँकड़ों का हिस्सा नहीं बन पाता। भारतीय स्टेट बैंक के अनुसार करीब तीन वर्ष पहले तक देश की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का साइज औपचारिक अर्थव्यवस्था का लगभग 50-52% था जो सरकार के विभिन्न प्रयासों के चलते अब सिकुड़कर लगभग 20% तक रह गया है। इसका असर यह हुआ है कि अब उपलब्ध हो रहे आँकड़े देश के सकल घरेलू उत्पाद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करते हैं।

इसका अर्थ यह भी है कि अब देश में अब काले धन की मात्रा में कमी आई है और पहले से उपलब्ध काला धन किसी न किसी तरीके से औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन गया है। उद्योग, व्यापार और आर्थिक लेन-देन का उपलब्ध हिसाब-किताब अब अधिक परिष्कृत है।

विभिन्न सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक क़दमों का परिणाम

भारतीय स्टेट बैंक के अनुसार वर्ष 2016 से सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों जैसे नोटबंदी, डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी के लिए वातावरण तैयार करना, कर सुधार, जीएसटी और अन्य प्रशासनिक कदमों को वजह से न केवल ऐसा संभव हो सका, बल्कि भारतीय अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने की गति किसी भी अन्य देश से तेज़ रही है। डिजिटल पेमेंट के आँकड़ों को देखा जाए तो भारत आज विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट की सहायता से लेन-देन करने वाला देश बन गया है। पिछले कई दशकों में जीएसटी देश का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार रहा है, जिसकी वजह से न केवल कर चोरी को रोकने में काफी मदद मिली है बल्कि उसकी वजह से एक बेहतर सप्लाई चेन स्थापित करने में मदद मिली है। जनधन बैंक अकाउंट और उसमें डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने लेन-देन को न केवल आसान बनाया है, बल्कि उसकी वजह से आर्थिक लेन-देन का एक बड़ा हिस्सा अब सरकारी आँकड़ों में अधिक सुविधाजनक और बेहतर तरीके से लक्षित होता है।

इन सुधारों के अतिरिक्त असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का डेटा बेस ई-श्रम पर करीब 5.7 करोड़ मजदूरों का रजिस्ट्रेशन इस बात का सबूत है कि सरकार औपचारिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कटिबद्ध है और इसके लिए आवश्यक सुधार और प्रशासनिक कदम उठाने के लिए तैयार है। उपलब्ध आँकड़ों और भारतीय स्टेट बैंक के इस रिसर्च के अनुसार इनमें से 62% मजदूर 18-44 वर्ष के हैं और 92% मजदूरों की मासिक आय दस हजार रुपए से कम है। ऐसे आँकड़ों की उपलब्धता न केवल अर्थव्यवस्था के लिए सही मजदूर के चयन में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में उनके रोजगार सम्बंधित आँकड़ों को कई अन्य तरह से उपलब्ध करवाने में भी सहायक होंगे।

ई-श्रम पर असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों के रजिस्ट्रेशन सम्बंधित आँकड़े बताते हैं कि अभी तक पंजीकृत मजदूरों में से लगभग 81.2% यानी लगभग 4.6 करोड़ मजदूरों के पास बैंक अकाउंट है। हालाँकि उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार इन बैंक अकाउंट में अभी तक केवल 1.1 करोड़ बैंक अकाउंट ही आधार कार्ड से लिंक किए जा सके हैं। स्टेट बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार केवल ई-श्रम पोर्टल की वजह से अभी तक असंगठित क्षेत्र के करीब 17 प्रतिशत मजदूर अब औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और इनकी वजह से केवल कुछ महीनों में करीब 6.8 करोड़ रुपए (सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3 प्रतिशत) अब औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन चुका है।

रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार केवल कृषि क्षेत्र में छोटे और मझोले किसानों द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की वजह से करीब 4.6 करोड़ रुपए अब औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और भविष्य में कृषि क्षेत्र में किसान क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से यह आँकड़ा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

भविष्य में अन्य आर्थिक सुधारों का असर

सरकार द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों में पिछले वर्ष पास हुए कृषि कानूनों का औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। इन कानूनों में जिस तरह से कृषि में सहकारिता को महत्व दिया गया है उसकी वजह से कृषि सम्बंधित आय और आँकड़ों के औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा होने का मार्ग खुल जाएगा। कानून में कृषि उत्पादों के व्यापार के लिए पैन कार्ड का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन इन्हीं सुधारों का एक हिस्सा रहेगा। उसके अलावा लगातार बन रहे फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन (एफपीओ) के कारण कृषि उत्पादों के अंतर्राजीय व्यवसाय को सरल बनाने में न केवल सुविधा होगी, बल्कि कृषि व्यवसाय सम्बंधित आँकड़ों की उपलब्धता बढ़ेगी जिससे इन उत्पादों के व्यापार में कर चोरी कम होती जाएगी।

कृषि और आर्थिक सुधारों में कृषि की जमीन की जियो टैगिंग को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास भविष्य में महत्वपूर्ण साबित होंगे। जियो टैगिंग की वजह से न केवल कृषि उत्पादों के खेतों को पहचानना न केवल सरल होगा, बल्कि उसकी वजह से भारतीय कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्वीकार्यता बढ़ जाएगी। भविष्य में जियो टैगिंग का एक महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि किसी खेत की उत्पादकता की निगरानी न केवल आसान हो जाएगी, बल्कि इस निगरानी की वजह से उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर कृषि क्षेत्र के लिए बैंकों और अन्य आर्थित संस्थानों से ऋण की उपलब्धता सरल हो जाएगी।

भारतीय औपचारिक अर्थव्यवस्था का भविष्य

सरकार द्वारा उठाए जा रहे प्रशसनिक कदम और आर्थिक सुधारों की राजनीतिक मंचों पर आलोचना राजनीति का हिस्सा है। पर इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि इन सुधारों के परिणाम अब दिखने लगे हैं। राजनीतिक रैलियों और टीवी डिबेट में नोटबंदी या जीएसटी को अर्थव्यवस्था के विरुद्ध उठाया जाने वाले कदम बता कर उनपर बिना बहस के फैसला सुना देना राजनीतिक कारणों से समझ में आता है, पर उसके होने वाले असर से मुँह मोड़ लेना नेताओं को अर्थव्यवस्था में हो रहे गंभीर परिवर्तनों को देखने से रोकता है। जो भी हो, भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में बड़े महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है और सरकार के गंभीर प्रयास समुचित परिणाम ला रहे दिखते हैं। ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक विरोधों के बावजूद सरकार आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के अपने निर्णयों से पीछे न हटे।

₹100 करोड़ की वसूली: उद्धव सरकार में गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख गिरफ्तार, 12 घंटे की पूछताछ में ED को नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब

महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को ₹100 करोड़ के वसूली (मनी लॉन्ड्रिंग) केस में गिरफ्तार कर लिया गया है। 12 घंटे की पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देशमुख के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की। अब आज (नवंबर 2, 2021) उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा जहाँ ईडी देशमुख की कस्टडी माँगेगी।

मिड डे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कल (1 नवंबर) अनिल देशमुख अपने वकील और कुछ साथियों के साथ साउथ मुंबई के बॅलार्ड इस्टेट में ईडी ऑफिस गए थे। वहाँ अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। लेकिन देशमुख की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

इस कार्रवाई से पहले जाँच एजेंसी ने बहुत बार देशमुख को समन भेजा था, लेकिन उन्होंने 5 बार ईडी के नोटिस को नजरअंदाज किया। उनके सामने तमाम आरोपितों के बयान भी रखे गए थे जिनका इस अपराध में सक्रिय योगदान था, लेकिन देशमुख ने किसी सवाल का उचित जवाब नहीं दिया और हर आरोपों का खंडन करते रहे। ईडी ने अपनी जाँच के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

बता दें कि देशमुख ने ईडी दफ्तर जाने से पहले एक वीडियो रिलीज की थी। इसमें उन्होंने कहा है, “जब ईडी ने समन किया तो मैंने उन्हें सहयोग किया है। मैंने उन्हें कहा था कि जब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस का फैसला हो जाएगा, तब मैं आऊँगा। दो बार सीबीआई ने रेड की, उसमें भी मैंने सहयोग किया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मेरा फैसला नहीं आया है लेकिन मैं खुद ईडी दफ्तर आया हूँ।” 

उन्होंने कहा, “परमबीर सिंह ने मेरे ऊपर गलत आरोप लगाए थे। आज वही परमबीर सिंह विदेश भाग गए हैं। ऐसी खबरें न्यूज़ चैनलों और अखबारों के जरिए सामने आ रही है। उन्हीं परमबीर सिंह के खिलाफ पुलिस विभाग में कई शिकायतें आज भी दर्ज हैं।”

बता दें कि अनिल देशमुख के ऊपर मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि कैसे देशमुख ने सचिन वाजे को 100 करोड़ रुपए की हफ्ता वसूली का टारगेट दिया हुआ था इस पूरे केस में में अनिल देशमुख ने खुद को निर्दोष कहा था। देशमुख से जुड़े केस की जाँच पहले सीबीआई कर रही थी। इसके बाद इसमें मनी लॉन्ड्रिंग एंगल सामने आया और ईडी की एंट्री हुई। ईडी ने जाँच में पाया कि सचिन वाजे ने कई आर्केस्ट्रा बार से 4.70 करोड़ रुपए वसूले थे। बाद में यही पैसे देशमुख को सौंपे गए और उनके परिवार ने इस पैसे की हेर-फेर की। एक संस्था जिसका नाम श्री साई शिक्षण संस्था है उस ट्रस्ट में भी दिल्ली की फर्जी कंपनियों के जिए 4.18 करोड़ रुपए डाले गए थे।

छोटे भाई को घर से खींचा… सिर उड़ा दी… बड़े भाई के गले को पार कर गई गोली: राम मंदिर के लिए बलिदान की एक अमर गाथा

सौमित्र मुझे बचपने से खासे लुभाते रहे हैं। अक्सर सोचता हूॅं कि वह भाई किस मिट्टी का बना होगा जो भरी जवानी में अपनी नवविवाहिता को छोड़ भाई और भाभी की सेवा के लिए वन चला गया। कितने मजबूत कलेजे का रहा होगा कि जिस भाभी के लिए प्राण पर खेल गया, उसे ही भाई के आदेश पर गर्भावस्था में अरण्य छोड़ आया। कितना समर्पित रहा होगा कि जब भाई यज्ञवेदी पर बैठा था तो अश्व लेकर भूमंडल जीतने निकल पड़ा।

फिर मुझे कोठारी बंधु याद आते हैं। राम के लिए वैसा ही समर्पण। रामलला के लिए शरद कोठारी ने सिर में गोली खाई तो रामकुमार कोठारी के गले को चीरती गोली निकल गई।

खत आया, भाई न आए

साल था 1990 और महीना था दिसंबर। पहले हफ्ते के एक दिन डाकिया आज के कोलकाता और तब के कलकत्ता के खेलत घोष लेन स्थित एक घर में पोस्टकार्ड लेकर पहुॅंचता है। बकौल पूर्णिमा कोठारी, “चिट्ठी देख मैं बिलख पड़ी। उसने मॉं और बाबा का ध्यान रखने को लिखा था। साथ ही कहा था कि चिंता मत करना हम तुम्हारी शादी में पहुॅंच जाएँगे।” यह पत्र था पूर्णिमा के भाई शरद कोठारी का जो अपने बड़े भाई रामकुमार के साथ अयोध्या में 2 नवंबर को ही बलिदान हो चुके थे। चिट्ठी बलिदान से कुछ घंटों पहले ही लिखी गई थी।

वादा जो पूरा न हुआ

22 साल के रामकुमार और 20 साल के शरद कोलकाता में अपने घर के करीब बड़ा बाजार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में नियमित रूप से जाते थे। दोनों द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित थे। कई अन्य स्वयंसेवकों की तरह ही राम और शरद ने भी विहिप की कार सेवा में शामिल होने का फैसला किया। 20 अक्टूबर 1990 को उन्होंने अयोध्या जाने के अपने इरादे के बादे में पिता हीरालाल कोठारी को बताया। उसी साल दिसंबर के दूसरे हफ्ते में बहन पूर्णिमा की शादी होनी तय थी। पिता ने कहा- कम से कम एक भाई तो घर पर रुको ताकि शादी के इंतजाम हो सके। पर दोनों भाई इरादे से पीछे नहीं हटे।

बकौल पूर्णिमा, “आखिर में एक शर्त पर पिता राजी हुए। उनसे हर रोज अयोध्या से खत लिखते रहने को कहा। अयोध्या के लिए निकलने से पहले उन्होंने ढेर सारे पोस्टकार्ड खरीदे ताकि चिट्ठियॉं लिख सके। मुझे जब पता चला कि भाई अयोध्या जा रहे हैं तो मैं दुखी हो गई। उन्होंने वादा किया कि वे मेरी शादी तक जरूर लौट आएँगे।” दिसंबर के पहले हफ्ते में पूर्णिमा को जो चिट्ठी मिली वो इनमें से ही एक पोस्टकार्ड पर लिखा गया था। पूर्णिमा की शादी भी उसी साल दिसंबर में हो गई। लेकिन, बहन से किया वादा पूरा करने दोनों भाई घर लौट नहीं पाए।

भाइयों की तस्वीर के साथ पूर्णिमा कोठारी (साभार: news18.com)

घर न लौटने की वह यात्रा

राम और शरद ने 22 अक्टूबर की रात कोलकाता से ट्रेन पकड़ी। हेमंत शर्मा ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखते हैं- बनारस आकर दोनों भाई रुक गए। सरकार ने गाड़ियॉं रद्द कर दी थी तो वे टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए। यहॉं से सड़क रास्ता भी बंद था। 25 तारीख से कोई 200 किलोमीटर पैदल चल वे 30 अक्टूबर की सुबह अयोध्या पहुॅंचे। 30 अक्टूबर को विवादित जगह पहुॅंचने वाले शरद पहले आदमी थे। विवादित इमारत के गुंबद पर चढ़कर उन्होंने पताका फहराई। दोनों भाइयों को सीआरपीएफ के जवानों ने लाठियों से पीटकर खदेड़ दिया। शरद और रामकुमार अब मंदिर आंदोलन की कहानी बन गए थे। अयोध्या में उनकी कथाएँ सुनाई जा रही थी।

दोनों भाइयों के साथ कोलकाता से अयोध्या के लिए निकले राजेश अग्रवाल के मुताबिक वे 30 अक्टूबर को तड़के 4 बजे अयोध्या पहुॅंंचे। वे बताते हैं कि मस्जिद की गुंबद पर भगवा ध्वज फहरा कोठारी बंधुओं ने उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव की दावे की हवा निकाल दी थी। मुलायम ने कहा था, “वहॉं परिंदा भी पर नहीं मार सकता।”

घर से खींच मारी गोली

फिर आया 2 नवंबर का दिन। ‘युद्ध में अयोध्या’ के अनुसार दोनों भाई विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहे थे। जब सुरक्षा बलों ने फायरिंग शुरू की तो दोनों पीछे हटकर एक घर में जा छिपे। सीआरपीएफ के एक इंस्पेक्टर ने शरद को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया और सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख रामकुमार भी कूद पड़े। इंस्पेक्टर की गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनकी अंत्येष्टि में सरयू किनारे हुजूम उमड़ पड़ा था। बेटों की मौत से हीरालाल को ऐसा आघात लगा कि शव लेने के लिए अयोध्या आने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। दोनों का शव लेने हीरालाल के बड़े भाई दाऊलाल फैजाबाद आए थे और उन्होंने ही दोनों का अंतिम संस्कार किया था।

भाइयों की याद में पूर्णिमा उनके दोस्त राजेश अग्रवाल के साथ मिलकर ‘राम-शरद कोठारी स्मृति समिति’ नाम से एक संस्था चलाती हैं। ऐसे वक्त में जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है राम और शरद की स्मृतियॉं उस ‘शौर्य’ की पहचान है जिसके कारण यहॉं तक का सफर पूरा हो पाया है।

‘आर्यन मामले में गोसावी, प्रभाकर ने SRK की मैनेजर से लिए ₹50 लाख, रिहाई के लिए 18 करोड़ की डील’- गवाह सैम डिसूजा का दावा: रिपोर्ट

मुबंई क्रूज ड्रग्स केस में आर्यन खान की रिहाई के बाद सोमवार (1 नवंबर 2021) को फिर एक नया ट्विस्ट सामने आया है। इस केस में मुख्य गवाह सैम डिसूजा ने कई दिनों बाद अचानक ABP न्यूज चैनल के सामने और कई बड़े खुलासे किए। सैम ने दावा किया कि आर्यन खान के पास से ड्रग्स नहीं मिला था। किरण गोसावी केवल शाहरुख खान से पैसे वसूलना चाहता था।

सैम ने कहा, ”आर्यन मामले में शाहरुख खान के स्टाफ और गवाह बने कुछ लोगों के बीच डील हुई थी। इस डील में किरण गोसावी और प्रभाकर सैल का हाथ था। दोनों ने शाहरुख की मैनेजर पूजा ददलानी से 50 लाख रुपए टोकन मनी के तौर पर लिए थे। डील के पीछे सुनील पाटिल नाम का शख्स था। वही गोसावी को निर्देश दे रहा था।”

आर्यन को छोड़ने के बदले 18 करोड़ की डील के सवाल पर सैम डिसूजा ने कहा, “मेरा इसमें कुछ लेना देना नहीं है। सुनील पाटिल ने मुझे फोन किया था और कहा था कि मेरे पास कॉर्डेलिया शिप के बारे में कुछ जानकारी है। उसके बाद उन्होंने मुझे कॉल करके कहा कि एनसीबी अधिकारी के साथ कनेक्ट कराएँ। जब मैंने कनेक्ट करा दिया तो किरण गोसावी का मेरे पास फोन आया। उन्होंने कहा कि हम लोग अभी अहमदाबाद में है और सुबह सात बजे तक मुंबई पहुँच जाएँगे।”

सैम डिसूजा ने एबीपी को बताया कि गोसावी ने उन्हें बताया था कि वो (आर्यन खान) क्लीन है, उसके पास से कुछ नहीं मिला और हम उसकी मदद कर सकते हैं। इसके बाद गोसावी ने मुझे आर्यन खान का सिल्वर रंग का बैग दिखाया और बैग की तस्वीर भी ली। सैम ने कहा कि उसके बाद वो (गोसावी) एनसीबी दफ्तर में गया। गोसावी ने आर्यन की आवाज रिकॉर्ड की, जिसमें आर्यन कह रहे थे कि ‘पापा मैं एनसीबी में हूँ।’

सैम डिसूजा ने शाहरुख खान की मैनेजर पूजा ददलानी से भी बात करने का दावा किया है। सैम ने कहा कि उन्होंने पूजा को बताया कि वो इस बारे में ज्यादा नहीं जानते। जो इस मामले को हैंडल कर रहे हैं आप उनसे आकर मिलिए। इसके बाद हम उनसे लोवर परेल में मिले, उस वक्त वहाँ पर गोसावी, मैं और पूजा ददलानी के पति भी थे। सैम ने बताया कि मुझे सुनील पाटिल के जरिए पता चला कि गोसावी ने आर्यन की मदद करने के लिए 50 लाख रुपए का टोकन अमाउंट माँगा था।

बता दें कि किरण गोसावी को बीते दिनों पुणे से पुलिस ने हिरासत में लिया है। आर्यन के साथ उसकी सेल्फी भी सामने आई थी। क्राइम ब्रांच ने उसे तीन साल पुराने धोखाधड़ी के एक मामले में पकड़ा है।

स्वच्छ भारत.. नल से नल.. उज्ज्वला… COP26 में PM मोदी ने दुनिया को बताई भारत की उपलब्धियाँ, किसानों की भी आवाज़ उठाई

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हो रहे संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन COP26 को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दुनिया को बताया कि किस तरह भारत ने जलवायु की दिशा में कुछ बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने चेताया कि वैश्विक क्लाइमेट डिबेट में अनुकूलन (पर्यावरणीय) को उतना अधिक महत्व नहीं मिला है, जितना मिटिगेशन को। यह उन विकासशील देशों के साथ अन्याय है, जो जलवायु परिवर्तन से अधिक प्रभावित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को याद दिलाया कि भारत सहित अधिकतर विकासशील देशों के किसानों के लिए क्लाइमेट बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि फसलों के पैटर्न में बदलाव आ रहा है और बेमौसम बारिश और बाढ़ या लगातार आ रहे तूफानों से किसानों की फसलें तबाह हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पेयजल के स्रोत से लेकर वहन करने योग्य मकान तक, सभी को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने इस संदर्भ मेरे तीन विचार पेश किए।

पहला,एडेप्टेशन को हमें अपनी विकास नीतियों और परियोजनाओं का मुख्य अंग बनाना होगा। भारत में नल से जल, स्वच्छ भारत मिशन और उज्जवला जैसी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे हमारे जरूरतमंद नागरिकों को अनुकूलन लाभ तो मिले ही हैं, उनके जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है। उन्होंने पिछड़े देशों को वैश्विक मदद की वकालत की। पीएम ने कहा कि कई पारंपरिक समुदाय में प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने का ज्ञान है।

उन्होंने सलाह दी कि हमारी अनुकूलन नीतियों में इन्हें उचित महत्व मिलना चाहिए और इन्हें स्कूल के पाठ्यक्रम में भी इसे जोड़ा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत में जनजातियाँ प्रकृति के साथ रहने का हुनर जानती है और हम चाहते हैं कि उनका यह हुनर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचे। इसके लिए उन्होंनेइस जीवन से जुड़े मुद्दे को स्कूल के सिलेबस में शामिल करने की जरूरत जताई। उन्होंने आवश्यकता जताई कि ग्लोबल वॉर्मिंग के मुद्दे पर सभी देश एक साथ आएँ और इसे जनभागीदारी अभियान बनाएँ।

दिनेश बन कर किराए पर रहता था शादीशुदा ‘दानिश’, अश्लील वीडियो बना कई बार किया विधवा का रेप: जबरन निकाह, खिलाया गोमांस

देश की राजधानी दिल्ली से लव जिहाद का मामला सामने आया है। आरोपित न सिर्फ पहले खुद को हिन्दू बता कर छद्म नाम से किराए पर रहा, बल्कि उसने पीड़िता का नहाते हुए अश्लील वीडियो भी शूट कर लिया। आरोपित दानिश ने इसके बाद उस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को ब्लैकमेल किया। कई बार उसका बलात्कार किया। उसे दिल्ली बुला कर जबरन इस्लामी धर्मांतरण करा दिया। दानिश ने पीड़ित महिला को जबरन गोमांस खाने के लिए भी मजबूर किया।

बुराड़ी थाना पुलिस ने शुक्रवार (29 अक्टूबर, 2021) को पीड़िता की शिकायत पर मुख्य आरोपित बुराड़ी निवासी दिनेश राणा उर्फ इनाम अली उर्फ दानिश राणा व उसके अन्य साथियों के खिलाफ बलात्कार, धोखाधड़ी, मारपीट, आपराधिक षड्यंत्र समेत कई धाराओं में FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। आरोपित फिलहाल फरार है। पीड़िता को पुलिस ने सुरक्षा मुहैया कराई है। पीड़ित महिला की उम्र 40 वर्ष है, जो छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की रहने वाली है।

वहीं पर महिला का ससुराल भी है। ससुराल के मकान में 2005 से ही कैसर नाम का एक व्यक्ति रहा करता था। उसका सर्दियों में कंबल बेचने का व्यापार था। उसके कुछ साथी भी उसके साथ रहते थे। फरवरी 2017 में पीड़िता के पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद कैसर अपने दोस्त दानिश को लेकर यहाँ रहने आया। उसने खुद का नाम ‘दिनेश राणा’ बताया और अपना धर्म हिन्दू बताया। दिसंबर 2019 में उसने पीड़िता की अश्लील तस्वीरें खींच लीं।

इसके बाद करीब एक-डेढ़ साल तक वो पीड़िता को ब्लैकमेल करता रहा और उससे 3.5 लाख रुपए वसूल लिए। 2020 में उसने महिला को डरा-धमका कर बिलासपुर के एक होटल में बुलाया। यहाँ उसने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। कुल मिला कर उसने 8.5 लाख रुपए और 7 लाख रुपए के गहने हड़प लिए। करीब एक साल तक वो विधवा का शारीरिक शोषण करता रहा। अप्रैल 2021 को उसने महिला को अपनी घरेलू सहायिका के साथ दिल्ली बुलाया।

आरोपित ने घरेलू सहायिका को छत्तीसगढ़ भेज दिया और पीड़ित महिला को अलग-अलग मकानों में रखता रहा। इसी दौरान महिला को पता चला कि जिसे वो दिनेश समझ रही है, वो असल में ‘दानिश’ है। मई 2021 में जब वो महिला को अपने घर ले गया, तब खुलासा हुआ कि वो पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। 15 जून, 2021 को उसने महिला के साथ जबरन निकाह किया और गोमांस खिलाया। उसके दोस्त भी महिला के साथ छेड़छाड़ करते थे।

पीड़िता ने इसके बाद पुलिस में शिकायत करने का मन बनाया क्योंकि दानिश की हरकतें अब बर्दाश्त से बाहर हो गई थीं। पीड़िता के वकील राकेश कौशिक ने जानकारी दी है कि न सिर्फ दानिश, बल्कि उसका पूरा परिवार महिला को प्रताड़ित कर रहा था। उस पर जबरन इस्लामी धर्मांतरण के दबाव बनाए गए थे। मुस्लिम बनाने की पुष्टि के लिए निकाल के वक्त गोमांस खिलाया गया था। पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई है। फ़िलहाल वो फरार चल रहा है।