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5 साल की मूक-बधिर बच्ची के साथ रेप करने वाले साबिर को उम्रकैद: विशेष पॉक्सो कोर्ट ने महज 4 महीने में सुनाई सजा

उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना में विशेष पॉक्सो कोर्ट की जज मुमताज अली ने शनिवार (30 अक्टूबर 2021) को 5 साल की बच्ची से बलात्कार करने वाले व्यक्ति को दोषी करार देते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। खास बात यह ​है अदालत ने महज चार महीने में इस मामले की सुनवाई की और दोषी को सजा सुनाई।

बताया जा रहा है कि शामली जिले के कैराना में चार महीने पहले रामपुर मनिहारान रेलवे प्लेटफार्म पर 5 साल की मूक-बधिर मासूम बच्ची के साथ साबिर नाम के शख्स ने दुष्कर्म किया था। न्यायाधीश मुमताज अली द्वारा यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) के तहत आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और POCSO अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने के बाद साबिर पर 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। इसकी आधी राशि पीड़िता को दी जाएगी।

इस मामले में पॉक्सो के विशेष अधिवक्ता पुष्पेंद्र मलिक के मुताबिक, लड़की शामली की रहने वाली है। उन्होंने बताया कि 15 जून को 5 वर्षीय मूक-बधिर बच्ची रामपुर मनिहारन रेलवे स्टेशन पर भीड़ में खो गई थी। माता-पिता से अलग होने के बाद उसे अकेला पाकर साबिर ने रामपुर मनिहारान रेलवे प्लेटफार्म पर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गया।

रेलवे प्लेटफार्म पर चाय की दुकान लगाने वाले की शिकायत पर गर्वेमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने रेप की धारा के तहत इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की। बाद में रेलवे पुलिस ने आरोपित साबिर को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट में पेश किया। इसके बाद कोर्ट ने शनिवार को उसकी सजा सुनाई। हालाँकि, कोर्ट में आरोपित ने अपने अपराध को स्वीकार नहीं किया है।

‘दीवाली पर पटाखों को भूल जाओ, जुआ खेलो’: फर्नीचर कंपनी ने दिया ज्ञान तो लोगों ने दिखाया आईना, पूछा – ईद-मुहर्रम पर ये करते हो?

जैसे-जैसे दीवाली नजदीक आती जा रही है, हिन्दुओं को ज्ञान देने और हिन्दू त्योहारों का अपमान करने व मजाक उड़ाने का सिलसिला भी तेज़ होता जा रहा है। पहले ये काम अधिकतर सेलेब्रिटीज किया करते थे, अब विभिन्न ब्रांड्स ने ये जिम्मा उठाया है। सब्यसाची ने नंगापन के साथ मंगलसूत्र को बेचना चाहा तो विराट कोहली ने ज्ञान दिया कि दीवाली कैसे मनाई जानी चाहिए। अब फर्नीचर कंपनी ‘Pepperfry’ ने सलाह दी है कि दीवाली पर पटाखे उड़ाने की जरूरत नहीं है, घर में ताश खेलो।

कंपनी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा की है, जिसमें घर के सभी लोग बैठ कर परिवार में ही ताश खेल रहे हैं। एक महिला गिटार बजाती हुई दिख रही हैं। दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने इस विज्ञापन पर तंज कसते हुए कहा, “पटाखे मत जलाओ, जुआ खेलो। दीवापली पर नया सेक्युलर अभियान।” लोगों ने ‘Pepperfry’ से पूछा कि क्या वो ईद-मुहर्रम के दौरान भी मुस्लिमों को ऐसे ही ज्ञान देता है कि घर से बाहर मत निकलो, अंदर बैठ कर ताश खेलो।

‘Pepperfry’ की करतूत से खफा हुए लोग

एक यूजर ने लिखा कि उसने अपने ऑनलाइन कार्ट में ‘Pepperfry’ की एक कुर्सी सेव कर के रखी थी, लेकिन अब वो उसे नहीं खरीदेगा। किसी ने सरकार ने ऐसी कंपनियों पर हिन्दुओं की भावनाएँ भड़काने के लिए कार्रवाई की माँग की, तो किसी ने कहा कि ये कंपनियाँ खुद अपना चरित्र सामने ला रही हैं और खुद को एक्सपोज कर रही हैं। एक यूजर ने लिखा कि अभी जुआ आया है, फिर शराब की बोतल खोलने की सलाह दी जाएगी। हिन्दुओं ने स्पष्ट कहा कि दीवाली पर दो दीपक जलाएँगे और पटाखे उड़ाएँगे, क्योंकि यही परंपरा है।

‘Pepperfry’ की करतूत से खफा हुए लोग

लोगों ने सलाह दी कि फर्नीचर के लिए कभी इन महँगी कंपनियों पर विश्वास करने की जरूरत नहीं है, इससे अच्छा है कि स्थानीय बढ़ई/लोहार से फर्नीचर बनवाएँ और उसका प्रयोग करें – इससे काम भी मनपसंद होगा और बजट भी कम लगेगा। एक यूजर ने लिखा कि 7000 रुपए की कुर्सी 7000 रुपए में बेचने वाले ऐसा ज्ञान दे रहे हैं। लोगों ने कहा कि हिन्दू पटाखे उड़ाना नहीं भूलेंगे, आप अपनी बिक्री भूल जाओ। कई हिन्दुओं ने ‘Pepperfry’ कंपनी का बहिष्कार करने का ट्रेंड चलाया।

मोदी की रैली में सीरियल बम ब्लास्ट, NIA कोर्ट ने 9 दोषियों को सुनाई सजा: इम्तियाज, हैदर, अंसारी और मोजीबुल्लाह को फाँसी

साल 2013 में पटना के गाँधी मैदान में हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट मामले में सोमवार (1 नवंबर, 2021) को एनआईए की विशेष अदालत ने चार आतंकियों को फाँसी की सजा सुनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाँधी मैदान में हुए विस्फोट मामले में एनआईए कोर्ट ने कुल 9 दोषियों को सजा सुनाई है।

इनमें से चार दोषियों इम्तियाज अंसारी, हैदर अली, नुमान अंसारी और मोजीबुल्लाह अंसारी को फाँसी दी गई है। वहीं, दो दोषियों को उम्रकैद, दो को 10 साल की जेल और एक दोषी को 7 साल की सजा सुनाई गई है। गाँधी मैदान में 27 अक्टूबर, 2013 को सिलसिलेवार विस्फोट उस समय किया गया था, जब नरेंद्र मोदी यहाँ ‘हुंकार’ रैली को संबोधित कर रहे थे। इस ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हुई थी और 89 लोग घायल हुए थे।

इन सभी आरोपितों पर बीते 27 अक्टूबर 2021 को एनआईए कोर्ट में हुए सुनवाई के दौरान दोषी करार दिया गया था, जिसके बाद सजा के लिए कोर्ट ने सोमवार का दिन निर्धारित किया था। मामले में दोषी करार 9 आतंकियों को पटना के बेऊर जेल में रखा गया था। उन्हें अलग-अलग सेल में रखा गया था, जबकि इससे पहले ये सभी एक ही सेल में बंद थे।

बता दें कि इस मामले की जाँच शुरू से ही NIA कर रही है। एनआईए कोर्ट ने मामले में उमेर सिद्दीकी, अहमद हुसैन, अजहरुद्दीन कुरैशी, हैदर अली, इम्तियाज अंसारी, मोजिबुल्लाह अंसारी, फिरोज अहमद और नुमान अंसारी को आईपीसी एक्ट की विभिन्न धाराओं, एक्सप्लोसिव एक्ट की विभिन्न धारा, यूए (पी) एक्ट और रेलवे एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया था। इनमें एक अभियुक्‍त नाबालिग था, जिसे पहले ही तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई जा चुकी है।

बिछड़ गए हीरा-पन्ना: शिकारियों ने सिर काटा, खाल उतारकर तालाब में फेंका शव, वर्षों तक साथ रहे दो बाघों की टूटी दोस्ती

मध्य प्रदेश का पन्ना जिला मंदिरों और हीरों के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है, लेकिन आज चर्चा पन्ना टाइगर रिजर्व के दो ऐसे बाघों की हो रही है जो एक-दूसरे से दूर हो गए हैं। हीरा और पन्ना नाम के इन बाघों की दोस्ती यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए भी बड़ा आकर्षण था, लेकिन अब इनकी दोस्ती हमेशा-हमेशा के लिए टूट गई है।

टाइगर रिजर्व में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना ‘हीरा’ नाम का बाघ अब कभी दिखाई नहीं देगा। शिकारियों ने इस बाघ हीरा का सतना में शिकार कर लिया। बेरहम शिकारियों ने करेंट की तार लगाकर बााघ का शिकार किया और उसकी खाल उतार कर शव को तालाब में फेंक दिया। इतना ही नहीं, हैवानों ने उसका सिर भी काट दिया। इसकी सूचना मिलने पर वन निभाग का अमला मौके पर पहुँचा और शव बरामद किया।

दरअसल, पन्ना के टाइगर रिजर्व से हीरा नाम का बाघ भटक कर सतना के सिंहपुर थाना क्षेत्र के अमदरी वनक्षेत्र में आ गया था। यहाँ घात लगाए शिकारियों ने करेंट की तार लगाकर उसका शिकार कर डाला। शिकारियो ने बााघ की खाल उतारने के बाद शव को तालाब में फेंक दिया था। आज सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुँचा और सड़ी गली हालत में तलाब से बााघ का शव निकालकर बरामद किया गया। वन अमले ने 3 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ कर घटनाक्रम की जानकारी ली जा रही है। वन विभाग के आला अफसर भी मौके पर पहुँचे हैं। फिलहाल वन अमला मौके का मुआयना और शव निरीक्षण कर जाँच में जुटे है। वन अधिकारी एक्सपर्ट की रिपोर्ट के बाद ही विस्तृत जानकारी दे सकेंगे।

बता दें कि शिकार हुए बाघ को पन्ना टाइगर रिजर्व का कॉलर आईडी लगा बाघ बताया जा रहा है। शिकार के बाद शिकारियों ने कॉलर आईडी निकाल कर झाड़ियों में फेंक दिया था जिसे बरामद कर लिया गया है। शव का पोस्टमार्टम करने के बाद वन विभाग अंतिम संस्कार किया गया। आपको बता दें कि यह इलाका टाइगर रिजर्व से लगा हुआ है। गाहे-बगाहे भटक कर बाघ और अन्य जंगली जानवर इस इलाके में आ जाते हैं और बेरहम शिकारियों का शिकार हो जाते हैं।

हीरा और पन्ना दोनों बाघिन पी 234 की संतान थे। फील्ड डायरेक्टर शर्मा के अनुसार बाघ हीरा और पन्ना व्यस्क होने के बाद भी 7 से 8 माह तक साथ रहे। जबकि अव्यस्क बाघों के मामले में ऐसा नहीं देखा जाता है। हीरा और पन्ना वर्षों से एक-दूसरे के साथ रहते थे। पिछले दिनों अपना वंश बढ़ाने के लिए हीरा टाइगर रिजर्व की सीमा छोड़कर सतना जिले के चित्रकूट के जंगलों में चला गया था। दोनों बाघों के नाम टाइगर रिजर्व वालों ने ही रखे थे। वह एक दूसरे के बिना रह भी नहीं सकते थे। ऐसे में टाइगर प्रबंधन को चिंता है कि अब पन्ना, हीरा के बगैर कैसे रह पाएगा।

आम तौर पर नर बाघों के बीच दोस्ती कम ही देखने को मिलती है। इन दोनों बाघों ने बफर क्षेत्र अकोला में अपना रहवास बना लिया था। दोनों एक-दूसरे के साथ अक्सर अटखेलियाँ करते नजर आते थे और पर्यटकों को भी खूब लुभाते थे। इनकी मौजूदगी की वजह से पन्ना टाइगर रिजर्व के अकोला रेंज में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ गई थी।

गर्ल्स-बॉयज टॉयलेट अलग-अलग क्यों? बच्चे होते हैं कंफ्यूज: NCERT ने जेंडर मुद्दे पर जारी किया प्रोग्राम, जाति-पितृसत्ता को बनाया दोषी

नेशनल काउंसिल ऑफ एड्युकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने शिक्षकों के लिए एक नया प्रोग्राम शुरू किया है। इसका नाम ‘स्कूली शिक्षा में ट्रांसजेंडर बच्चों को शामिल करना: चिताएँ और दिशा-निर्देश  (Inclusion of Transgender Children in School Education: Concerns and Roadmap’ है। इसके मैनुएल में जेंडर संबंधी मुद्दों को परिभाषित किया गया है और इसमें वो चिह्न भी बताए गए हैं जिससे पहचाना जा सके कि व्यक्ति किस स्वभाव का है।

प्रोग्राम को कॉर्डिनेट करने वाली डॉ पूनम अग्रवाल ने कहा कि संस्थाओं में ट्रांसजेंड़र बच्चों को शामिल करना उनके लिए जनादेश का हिस्सा है, इसलिए उन्होंने शिक्षकों और पढ़ाने वालों को ट्रांसजेंडर बच्चों के अनुभव, उनकी उपलब्धियाँ और संघर्ष समझाने के लिए इस कार्यक्रम को तैयार किया है। 

अब इसी प्रोग्राम के एक सेक्शन में एक बेहद अजीबोगरीब मुद्दा भी उठाया गया है। लिंग विविधता पर बात करते हुए इसमें कहा गया कि ज्यादातर स्कूलों में दो तरह के टॉयलेट होते हैं जिनका उद्देश्य ये बताना होता है कि दुनिया में सिर्फ दो सेक्स हैं- पुरुष और महिला। प्रोग्राम के दस्तावेज के अनुसार, “ढाँचागत सुविधा के रूप में टॉयलेट का इस्तेमाल बच्चों को दो लिंगों में बदलने के लिए किया जाता है। लड़कियों को इस तरह से समझाया जाता है कि वो गर्ल्स टॉयलेट में जाएँ और लड़कों को बताया जाता है कि वो लड़के वाले टॉयलेट में ही जाएँ।”

दस्तावेज में बताया गया है कि जो बच्चे जेंडर डिस्फोरिया से जूझ रहे होते हैं उन्हें समझ नहीं आता कि वो कौन सा शौचालय में जाएँ। अब ऐसा क्यों होता है इसका ठीकरा भी उन्होंने गर्ल्स-बॉयज टॉयलेट के अलग होने वाले कॉन्सेप्ट पर फोड़ा है। इसके मुताबिक ये दो-दो लिंगों वाला ढाँचा है जो उन बच्चों के लिए परेशानी खड़ी करता है जो कम उम्र में अपनी चॉइस नहीं बना पाते कि उनका शरीर क्या चाहता है। उनके ऊपर ये कॉन्सेप्ट भार जैसा होता है।

आगे इस दस्तावेज में जाति पितृसत्ता को भी ट्रांसजेंडर लोगों के साथ होते भेद-भाव के लिए दोषी कहा गया है। इसमें कहा गया है कि वेदिक काल से ही भारत में विभिन्न लिंगों के लोग थे लेकिन जाति पितृसत्ता की सामाजिक व्यवस्था ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को ऐसे व्यवसाय में ढकेला जो कि कलंकित माने जाते हैं। आगे बताया गया कि कैसे ब्रिटिश काल में ट्रांसजेंडर वर्ग की हालत और खराब हुई और उनके साथ वैसा बर्ताव आज भी हो रहा है।

दस्वावेज में कहा गया कि फरवरी 2020 में सिर्फ 25 ट्रांसजेंडर ही 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए रजिस्टर करवा पाए। इनमें 19 बच्चों ने 10 वीं के लिए नामांकन किया और बाकी 6 ने 12वीं के लिए। आगे प्रोग्राम में ये इस बात पर जोर दिया गया कि स्कूल से ये बाइनरी प्रैक्टिस खत्म होनी चाहिए फिर चाहे बात क्लासरूम में रो (पंक्ति) डिवाइड करने की हो, अलग-अलग यूनिफॉर्म पहनाने की हो…इस प्रोग्राम के मुताबिक सब अभ्यासों को डिस्कन्टिन्यू किया जाना चाहिए और हर ग्रुप में हर बच्चा होना चाहिए और साथ ही उनकी एक ड्रेस होनी चाहिए। बता दें कि इस मैनुएल के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसका खूब विरोध हो रहा है।

जिस आतंकवाद की शिकार हुई इंदिरा गाँधी, उन्हीं जड़ों को सींचने में क्यों लगी है कॉन्ग्रेस?

1 नवम्बर 1984 का वो दिन, जब हजारों सिख परिवारों को एक योजनाबद्ध तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया, जब सत्ता के नशे में चूर एक राजनीतिक पार्टी के इशारे पर सिखों का कत्लेआम मचा दिया गया। अगले दिन सुबह केवल दिल्ली ही नहीं भारत के कई राज्यों में सिखों का नरसंहार आरंभ होता है। निर्दोष सिखों का बर्बरता से नरसंहार किया गया, सरेआम गले में टायर डालकर उन्हें जलाया गया, सामूहिक कत्ल किए गए, बलात्कार किए गए, लूट की गई और गुरुद्वारों को तोड़ दिया गया।

इस घटनाक्रम में सरकारी आँकड़ों के अनुसार 3 दिनों में करीब 2800 सिख दिल्ली में और 3350 सिख भारत के दूसरे राज्यों में मौत के घाट उतार दिए गए। लूट खसोट और नुकसान का तो कोई हिसाब ही नहीं।

इतिहास किसी भी राष्ट्र की स्मरणशक्ति है। किसी भी समाज के भविष्य की सुरक्षा इसी बात पर निर्भर करती है कि वह ऐतिहासिक तथ्यों का आकलन कितनी स्पष्टता के साथ करता है। 1984 के सिख कत्लेआम को याद करने की कोई एक वजह नहीं है। देश के इतिहास का यह एक ऐसा काला अध्याय है, जिसे पलट कर हम आतंकवाद, अतिवाद और लोकतंत्र में अधिनायकवाद से बच सकते हैं। बशर्ते, 1984 में हुए सिखों के नरसंहार को न सिर्फ स्मरण करना होगा बल्कि रक्तरंजित 72 घंटों को खौफनाक हालात पैदा करने वाली वजहों को भी पहचानना होगा।

इतिहास के पन्नों में 31 अक्टूबर 1984 को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की दिल्ली स्थित उनके आवास पर हत्या कर दी गई। हत्या करने वाले कोई और नहीं बल्कि उन्हीं के अंगरक्षक सतवंत सिंह और बेअंत सिंह थे। यह दोनों सिख समुदाय से थे। इंदिरा की हत्या ऑपरेशन ब्लू स्टार की प्रतिक्रिया में की गई थी, जिसका आदेश उस समय इंदिरा गाँधी ने दिया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त करवाने के लिए चलाया गया था। दरअसल पंजाब में उस वक्त भिंडरावाले के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सिर उठा रहीं थी, जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था।

इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद सिख दंगों के दौरान हालात कुछ इस कदर बेकाबू थे कि तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जब इंदिरा को देखने एम्स जा रहे थे, उस वक्त उनकी गाड़ी पर भी हमला हुआ। उन्होंने अपनी आत्मकथा मेमोरिज ऑफ ज्ञानी जैल सिंह में लिखा है कि देश वापस आते ही उन्होंने अस्पताल जाने का निर्णय लिया। उन्होंने रास्ते में देखा कि लोग आगजनी कर रहे हैं। कुछ लोग हाथों में जलते हुए बाँस लेकर घूम रहे थे, लेकिन उन्होंने आगे होने वाली घटनाओं के बारे में नहीं सोच सके।

31 अक्टूबर को राजीव गाँधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ तो ले ली, लेकिन फिर देश भर में सिखों के विरुद्ध हिंसा का जो दौर शुरू हुआ, वह देश का रक्तरंजित इतिहास ही कहा जाएगा। 1 नवंबर 1984 को शुरू हुए कत्लेआम के चश्मदीदों के मुताबिक सिख बन्धुओं को जैसे चुन-चुन कर मौत के घाट उतारा जा रहा था। दूर-दूर तक सड़कों में बच्चों और महिलाओं की सिर्फ चीख सुनाई देती थी। ऐसा लग रहा था जैसे जगदीश ही ‘जगतहंता’ और सज्जन ‘दुर्जन’ बन बैठे थे।

तत्कालीन राष्ट्रपति के मुताबिक वह स्वयं प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को बार-बार सिखों के खिलाफ हो रहे हिंसक घटनाओं को रोकने का मुद्दा संज्ञान में ला रहे थे। चश्मदीदों और पीड़ितों के मुताबिक यह कुछ नेताओं के शह पर हो रहा था। इसे राजनीतिक स्वार्थ के लिए भी अंजाम दिया गया। इतिहास के घटनाक्रम को जोड़कर देखें तो कॉन्गेस के दामन में जो दंगों के जो दाग लगें हैं, वह यूँ ही नहीं हैं।

सिख विरोधी दंगों के आरोपित नेताओं को कॉन्ग्रेस ने सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक बनाया। जगदीश टाइटलर कॉन्ग्रेस के लिए कितने जरूरी हैं, इसका अंदाजा हाल ही में उन्हें तमाम विरोध को दरकिनार कर दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी में शामिल किए जाने से लगा सकते हैं। कुछ इसी तरह दंगों में आरोपित सज्जन कुमार भी कॉन्ग्रेस की टिकट पर संसद पहुँच चुके हैं।

देश में बड़ी संख्या में लोग ऐसा मानते हैं कि इंदिरा गाँधी देश से आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई लड़ते हुए आतंकवाद की ही शिकार हो गईं, लेकिन इंदिरा के बाद ऐसी कौन सी मजबूरी कॉन्ग्रेस के सामने आ गई कि कॉन्ग्रेस आतंकवाद की उन्हीं जड़ों को सींचने लगी जिसे इंदिरा हमेशा के लिए खत्म करना चाहती थीं।

अपने शौर्य और पराक्रम की गाथाओं के लिए पहचाने जाने वाले सिखों के कत्लेआम को अभी कुछ दिन बीते भी नहीं थे कि उस वक्त के प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने दिल्ली के वोट क्लब में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब कोई बड़ा और भारी भरकम पेड़ गिरता है तो आसपास की धरती हिलती तो है ही। क्या ऐसा कहकर राजीव गाँधी ने सिखों के जनसंहार को न्यायसंगत नहीं ठहरा दिया?

इंदिरा के बाद की कॉन्ग्रेस कभी सिख विरोध तो कभी तुष्टिकरण की राजनीतिक पैरोकार क्यों बनती दिखती है। यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि जिस आतंकवाद को समाप्त करने के लिए इंदिरा ने शहादत दे दी। वही कॉन्ग्रेस राजीव गाँधी की हत्या में शामिल आतंकवादियों को माफी दे देती है।

राहुल गाँधी अक्सर कहते हैं कि वह बलिदानी परिवार से आते हैं, लेकिन दूसरी ओर महबूबा मुफ्ती के आतंकवाद समर्थक बयानों के साथ खड़े नजर आते हैं। आज कथित किसान आंदोलनकर्ताओं के खालिस्तानी समर्थकों के साथ रिश्ते उजागर हो चुके हैं, बावजूद इसके कॉन्ग्रेस राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशविरोधी ताकतों को समर्थन देने और लेने से गुरेज नहीं करती।

इंदिरा गाँधी को को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दुर्गा करार दिया था। उस दौर में इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता कुछ इस कदर थी कि कि उनकी मृत्यू के बाद सहानुभूति के रथ में सवार राजीव गाँधी चार सौ से अधिक सीटें जीतने में कामयाब हुए। यह बात सच है कि भारतीय लोकतंत्र के शैशवाकाल में ही आपातकाल लगा कर इंदिरा ने लोकतंत्र की हत्या की थी। लेकिन बाद के समय में इंदिरा के नेतृत्व में ही एक बार फिर लोगों ने लोकतंत्र के रास्ते पर कदम बढ़ाना शुरू किया था।

दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने अपनी गलतियों से कभी सबक लेना उचित नहीं समझा। सिखों के सरेआम हुए कत्लेआम का इतिहास आने वाली कई पीढ़ियाँ पढ़ेंगी। देश की रक्षा के लिए अपना ही नहीं अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले सिख अपने शौर्य और पराक्रम के लिए पहचाने जाते हैं। देश में दो समुदायों के बीच अविश्वास की भावना पैदा करने के लिए हुए इस सुनियोजित नरसंहार की कटु स्मृतियाँ हमें इसलिए भी सहेजनी होंगी, जिससे भविष्य में देश की एकता और अखंडता के साथ ऐसी सोची समझी साजिश को अंजाम न दिया जा सके।

नोट: यह लेख लवी चौधरी (स्वतंत्र स्तम्भकार) ने लिखा है।

‘बॉम्बे के केले इतने बड़े-बड़े…’: Pak के न्यूज़ चैनल पर समझा रहा था ‘विशेषज्ञ’, हँसते-हँसते लोट-पोट हुईं एंकर अलवीना

पाकिस्तान में ऐसे-ऐसे विशेषज्ञ बैठे हैं कि वहाँ के न्यूज़ चैनलों पर अक्सर अजोबोग़रीब बात होती रही हैं। अब एक केला वाला वीडियो वायरल हुआ है। हालाँकि, ये साफ़ नहीं है कि ये वीडियो कब का है। लेकिन, ये फ़िलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने भी इसे ट्वीट किया है। ये पाकिस्तान के एक उर्दू न्यूज़ ‘न्यूज़ वन’ चैनल का वीडियो है, जिसमें अलवीना आगा (Alveena Agha) एंकर हैं और एक गेस्ट उन्हें केले के बारे में समझा रहा है।

वीडियो में उक्त शख्स एक्सप्लेन करते हुए कहता है, “यहाँ के लोग अगर थोड़ा सा खर्चा करें, रिसर्च करें तो बॉम्बे (मुंबई) में इतने बड़े-बड़े केले होते हैं.. अगर किसी कमरे में 6 केले पड़े हों तो पूरे कमरे में उसकी खुश्बू भर जाती है। इसी तरह ढाका का केला, इतना लंबा केला है।” इस दौरान उक्त शख्स हाथों से लम्बाई भी बता रहा था कि मुंबई और बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कितने बड़े-बड़े केले होते हैं। उसने कहा कि रिसर्च कर के पाकिस्तान में भी ऐसे केले उपजाए जाने चाहिए।

उक्त शख्स के इस बयान को सुन कर एंकर अलवीना आगा अपनी हँसी रोक नहीं पाईं। कुछ देर तक वो सिर झुका कर हँसती रहीं, उसके बाद हाथ से उक्त व्यक्ति की तरफ इशारा किया। हँसते-हँसते ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में विकास बहुत कम है और यहाँ और विकास की जरूरत है। इसके बाद उन्होंने अतिथि से अपनी बात पूरी करने को कहा। उक्त ‘विशेषज्ञ’ ने कहा कि ऐसे तरीके रिसर्च कर के पाकिस्तान में अपनाए जाएँ तो यहाँ केलों का आकार भी बढ़ जाएगा और उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

नायला इनायत ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा, “और बॉम्बे की जीत हुई।” लोगों ने कहा कि वो मनोरंजन के लिए ही पाकिस्तान के न्यूज़ चैनल्स देखते हैं। एक व्यक्ति ने कहा कि ‘अंकल’ तो सही ही समझा रहे थे, लेकिन एंकर ने इसे गलत तरीके से ले लिया। कुछ लोगों ने एंकर अलवीना आगा को ‘अनप्रोफेशनल’ करार दिया। कुछ लोगों ने सलाह दी कि उन्हें ‘अफ्रीका के केले’ की बात कर लेनी चाहिए, फिर जजमेंट देना चाहिए। वीडियो में एक समय ऐसा भी आता है, जब दोनों हँस रहे होते हैं।

कुत्ते को परेशान कर रहा था, तभी गाय ने जमीन पर धड़ाम से पटका, लोगों ने कहा- ‘जैसी करनी वैसी भरनी’: वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक आदमी कुत्ते का कान पकड़कर उसे परेशान करता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे उसे काफी पीड़ा हो रही है, लेकिन तभी पीछे से एक गाय आती है और उस शख्स को जमीन पर पटक देती है। वायरल वीडियो को लेकर नेटिजन्स ने कहा, ”जैसी करनी वैसी भरनी।” भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुशांत नंदा ने रविवार (31 अक्टूबर 2021) को ट्विटर पर ‘कर्मा’ कैप्शन के साथ यह वीडियो शेयर किया था। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने वीडियो में दिख रहे शख्स पर अपना गुस्सा निकाला है। हालाँकि, वीडियो किस जगह का है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।

शुभम चौधरी नाम के यूजर ने लिखा है, ”सर, लोग इतने क्रूर कैसे हो सकते हैं कि वो एक बेजुबान कुत्ते को मार कर जला दे रहे हैं वो भी केवल इसलिए की उनकी बकरी को दौड़ा लिया था। यह मेरे घर के बगल में कुछ स्पेशल लोगों द्वारा किया गया। क्या ऐसे बेजुबान जानवरों के लिए भी कोई कानून है?? कृपया जवाब दीजिएगा।”

वहीं, एक यूजर ने लिखा, ”लोग रिकॉर्डिंग में व्यस्त थे, लेकिन एक जानवर ने दूसरे जानवर की पीड़ा को समझा और उसकी मदद की।”

एक ने लिखा, ”कुत्ता अगर गलती से काट ले तो उसको जान से मार देते हैं, लेकिन लोग अगर कुत्ते को मारे तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं। ये है कानून में प्रावधान।”

रामजीत पाल नाम के यूजर ने लिखा, ”बिल्कुल सर सही बात हर इंसान अपने कर्म का ही भागीदार होता है, जैसा कर्म वैसा ही फल मिलता है।”

गौरतलब है कि बिहार की राजधानी पटना में सितंबर 2021 को कुछ असामाजिक तत्वों ने मिलकर एक खटाल में आग लगा दी थी, जिससे तीन गर्भवती गायें जिंदा जल मर गई थीं। सोशल मीडिया पर गायों की तस्वीर भी सामने आई थी, जिसको लेकर लोगों में खासा रोष देखने को मिला था।

‘पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता HC के आदेश को रद्द किया, कहा – सभी पक्षों को नहीं सुना गया

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को किनारे रख दिया है, जिसमें पश्चिम बंगाल में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही गई थी। दीवाली से पहले बड़ा फैसला। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वो इस बात को लेकर सुनिश्चित है कि कलकत्ता उच्च-न्यायालय को इतना बड़ा आदेश सुनाने से पहले सभी पक्षों को बुला कर उनकी बात सुननी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने ‘ग्रीन क्रैकर्स’ की अनुमति दे रखी है, ऐसे में उसका कहना है कि कलकत्ता हाईकोर्ट को पहले प्रशासन को बुला कर इसे सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था है या नहीं – ये पूछना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कोई भी पक्ष उचित मैटेरियल्स के साथ अपनी बात रखने के लिए हाईकोर्ट का रुख कर सकता है। अगले आदेश तक 29 अक्टूबर, 2021 को दिया गया सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू रहेगा। प्रतिबंधित वस्तुओं को आयात न किया जाए, ये सुनिश्चित करने का आदेश भी पश्चिम बंगाल के प्रशासन को दिया गया है। साथ ही व्यवस्था को दुरुस्त करने की सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध संभव नहीं है, व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाईकोर्ट ने ये समझ कर फैसला दिया कि प्रशासन के पास इसकी कोई व्यवस्था नहीं है कि सिर्फ ‘ग्रीन क्रैकर्स’ का इस्तेमाल हो सके। इस पर विचार-विमर्श तक नहीं किया गया। पश्चिम बंगाल के अधिवक्ता ने भी कहा कि अगर उच्च-न्यायालय ने मौका दिया होता तो उसे व्यवस्था के बारे में जानकारी दी जाती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले पर विचार कर रहा है और 29 अक्टूबर को दिए गए आदेश में कहा भी गया है कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अमल में लाने के लिए काम कर रहा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने केवल मोम और तेल के दीए जलाने की ही अनुमति दी थी। उसने यहाँ तक कहा था कि ‘पटाखों’ की श्रेणी में ऐसी सभी चीजें आती हैं, भले ही उन्हें जलाने के लिए आग की आवश्यकता हो या नहीं, या उनसे प्रकाश निकले या नहीं। पश्चिम बंगाल सरकार ने इसका विरोध करते हुए ‘राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT)’ के दिशानिर्देश की याद दिलाई थी, जिसमें ‘ग्रीन क्रैकर्स’ की अनुमति है।

याद दिला दें कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार (29 अक्टूबर, 2021) को दीवाली/काली पूजा के दौरान पूरे पश्चिम बंगाल में सभी प्रकार के पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। पटाखों पर प्रतिबंध राज्य में आने वाले अन्य सभी उत्सवों पर भी लागू होने की बात कही गई थी, जिनमें गुरु नानक जयंती, क्रिसमस और नए साल के जश्न शामिल हैं। एक ट्रैवलर सह फिल्म निर्मात्री रोशनी अली द्वारा अदालत में एक जनहित याचिका दायर किए जाने के बाद यह आदेश जारी किया गया था।

केजरीवाल, सिसोदिया सहित 11 AAP नेताओं को नोटिस, दिल्ली के मुख्य सचिव रहे अंशु प्रकाश से मारपीट का मामला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अलावा नौ अन्य आप नेताओं को नोटिस जारी किया है। मामला दिल्ली के मुख्य सचिव रहे अंशु प्रकाश से कथित मारपीट से जुड़ा है। उन्होंने इस मामले में मजिस्ट्रेट अदालत में इनलोगों को बरी करने के फैसले को चुनौती दे रखी है।

पूर्व मुख्य सचिव अंशु प्रकाश की अपील पर राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल जज गीतांजलि गोयल ने इन नेताओं को नोटिस जारी किया है। अंशु प्रकाश की रिविजन पिटिशन पर कोर्ट ने नोटिस भेज कर जवाब माँगा है। इन सभी को 23 नवंबर तक नोटिस के जवाब देने हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। अंशु प्रकाश ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत अन्य को मारपीट के मामले में बरी करने पर सवाल उठाया था।

अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया के अलावा आम आदमी पार्टी के विधायक राजेश ऋषि, नितिन त्यागी, प्रवीण कुमार, अजय दत्त, संजीव झा, ऋतुराज गोविंद, राजेश गुप्ता, मदन लाल और दिनेश मोहनिया को नोटिस जारी किए हैं। अंशु प्रकाश की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और अधिवक्ता कुमार वैभव ने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने अगस्त के आदेश में केजरीवाल और अन्य को आरोप मुक्त करने में गलती की है। साथ ही अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 506 सहित अतिरिक्त आरोप तय करने का भी अनुरोध किया।

गौरतलब है कि साल 2018 में अंशु प्रकाश से मारपीट और बदसलूकी मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के अलावा AAP के 11 विधायकों पर आरोप लगे थे। दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने सीएम अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के विधायकों पर मुख्यमंत्री आवास में मारपीट का आरोप लगाया था। मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल की थी। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को भी आरोपित बनाया गया था। बाद में 11 अगस्त को कोर्ट ने अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल को छोड़कर सभी को बरी कर दिया था। कोर्ट ने AAP के दो विधायकों अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जरवाल के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश दिए थे।