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ICC टी-20 रैंकिंग में तीसरे नंबर पर खिसका भारत.. पाकिस्तान ने हासिल किया दूसरा स्थान.. इंग्लैंड अभी भी शीर्ष पर

T-20 विश्व कप- 2021 में पाकिस्तान से हार के कारण भारत को ICC टी-20 रैंकिंग में 1 स्थान का नुकसान उठाना पड़ा है। भारत अब टी-20 विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान से खिसक कर तीसरे नंबर पर पहुँच गया है। वहीं, लगातार 3 जीत हासिल कर पाकिस्तान ने ICC टी-20 विश्व रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल कर लिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इंग्लैंड अभी भी नंबर 1 टीम बनी हुई है। टी-20 विश्व कप की शुरुआत के समय पाकिस्तान भारत से 5 अंक पीछे चल रहा था। अंकतालिका में अब पाकिस्तान के 265 अंक हैं, जबकि 264 अंकों के साथ भारत तीसरे नंबर पर है।

शीर्ष पर मौजूद इंग्लैंड के कुल 279 अंक हैं। बुधवार (27 अक्टूबर 2021) को जारी आंकड़ों में बंगलादेश के साकिब अल हसन शीर्ष ऑल राउंडर बने हुए हैं। इस क्रम में दूसरे नंबर पर अफगानिस्तान के मोहम्मद नबी हैं। इस लिस्ट में भारत के हार्दिक पांड्या शीर्ष 10 की संख्या से भी बाहर हैं। बल्लेबाजों की लिस्ट में भारत के विराट कोहली पाँचवें नंबर पर हैं। नंबर 1 पर इंग्लैंड के डेविड मलान हैं।

गेंदबाजी में भी विदेशी खिलाड़ी आगे चल रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज़ तबरेज शम्सी दुनिया के नंबर वन T20 गेंदबाज बने हुए हैं। इसी क्रम में श्रीलंका के वानिंदु हसरंगा दूसरे स्थान पर हैं। भारत के भुवनेश कुमार 11 वें नंबर पर हैं।

‘राजनीति को गंभीरता से नहीं लेते कॉन्ग्रेस वाले, और ताकतवर होते जाएँगे PM मोदी’: PK के बाद अब ममता का निशाना

कॉन्ग्रेस राजनीति में गंभीर नहीं है- इस बात को अब तृणमूल कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी भी कहने लगी हैं। बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मनना है कि अगर यही हाल रहा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ताकतवर हो जाएँगे। उनके मुताबिक कॉन्ग्रेस सही निर्णय नहीं लेती है इसी वजह से पूरे देश को जूझना पड़ता है। लेकिन वह दिल्ली की दादागिरी और नहीं सहेंगी।

गोवा में अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान मीडिया से बात करते हुए बनर्जी से जब पूछा गया कि वो अगले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद की दावेदार हो सकती हैं तो उन्होंने कहा कि वो ‘कम महत्तवपूर्ण व्यक्ति’ होना पसंद करती हैं और खुद को स्ट्रीट फाइटर कहलवाना चाहती हैं।

बता दें कि गुरुवार को ममता बनर्जी ने गोवा जाकर स्थानीय नेताओं के साथ कई बैठकें की। उनकी पार्टी ने इस बार राज्य की 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसी दौरे में कॉन्ग्रेस पर बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “मैं अभी कुछ नहीं कह सकती क्योंकि वो लोग राजनीति को गंभीरता से नहीं लेते। मोदी जी कॉन्ग्रेस के कारण और ताकतवर होते जाएँगे…अगर कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है तो आखिर पूरा देश क्यों उससे जूझे।”

उन्होंने कहा, “उन्हें (कॉन्ग्रेस) को पहले अवसर मिले। उन्होंने भाजपा से लड़ने की बजाय मेरे खिलाफ़ मेरे राज्य में चुनाव लड़े। क्या तब नहीं सोचा जब उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ मेरे राज्य में चुनाव लड़ा।” बता दें कि इससे पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी हाल में गोवा दौरे में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा अगले कई दशकों तक भारतीय राजनीति के केंद्र में ताकतवर बनी रहेगी। उन्होंने इसके लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था।

ममता बनर्जी ने प्रशांत किशोर की टिप्पणी पर कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने कहा है कि अगर हम बीजेपी को हराना चाहते हैं, तो हम ऐसा नहीं कर सकते जिस तरह से कॉन्ग्रेस आगे बढ़ रही है। हमें बीजेपी को कड़ी टक्कर देनी है।” वह कहती हैं, “मैं चाहती हूँ कि क्षेत्रीय पार्टी सशक्त हों। हम चाहते हैं कि संघीय ढाँचा मजबूत हो। हमें राज्यों को मजबूत बनाना चाहिए, राज्य मजबूत होंगे तो केंद्र मजबूत होगा। दिल्ली की दादागिरी हमें नहीं चाहिए। बहुत हुआ।”

उन्होंने कहा, “मैं कॉन्ग्रेस के बारे में बात नहीं करूँगी क्योंकि कॉन्ग्रेस मेरी पार्टी नहीं है। मैंने क्षेत्रीय पार्टी बनाई हैं और बिना किसी की मदद के 3 बार सरकार बनाई है।” उन्होंने कहा, “उन्हें डिसाइड करने दो। यही मेरा सिस्टम है, मैं किसी अन्य राजनीतिक दल के कारोबार में हस्तक्षेप नहीं करती। मैं अपने राजनीतिक दल के बारे में कह सकती हूँ। हमारी पार्टी की लड़ाई जारी रहेगी। हम भाजपा के आगे सिर नहीं झुकाएँगे।”

सोनू बनकर सद्दाम ने युवती को फँसाया, शादी का झाँसा देकर 8 सालों तक किया रेप: गाँव पहुँची तो आरोपी के भाई ने भी किया दुष्कर्म

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। लव जिहाद का एक मामला रायबरेली से सामने आया है, जिसमें आरोपित युवक ने नाम बदल कर पीड़िता से फोन पर बात करने लगा और उसे अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। इसके बाद आरोपित युवक ने शादी का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपित ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। 

दैनिक भास्कर के मुताबिक, जब पीड़िता का आरोपित से बात होना बंद हो गया और कोई संपर्क नहीं हो पाया तो वह आरोपित के गाँव पहुँची। वहाँ पहुँचने पर उसे सच्चाई पता चली। इसके बाद पीड़िता ने थाने में शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। थक-हार कर पीड़िता एसपी की चौखट पर पहुँची और न्याय की गुहार लगाई। उसने न्याय नहीं मिलने पर आत्महत्या की धमकी भी दी।

दिल्ली की रहने वाली पीड़िता का आरोप है कि रायबरेली जिले के लालगंज कोतवाली क्षेत्र के मधुकरपुर के रहने वाले सद्दाम उससे सोनू बनकर फोन पर बात करता था। बात करते-करते वह पीड़िता को प्रेमजाल में फँसा लिया। इसके बाद आरोपित युवक दिल्ली जाकर पीड़िता का शारीरिक शोषण करने के साथ-साथ उससे रुपये भी ऐंठता था। सद्दाम पिछले 8 साल से शादी का झाँसा देकर उसका रेप कर रहा था।

पीड़िता का कहना है कि जब उसने शादी का दबाव डाला तो सद्दाम ने अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिया। कई दिनों तक आरोपित से पीड़िता की बात नही हुई तो वह दिल्ली से रायबरेली आ गई। आरोपित के गाँव पहुँचकर पीड़िता सोनू को खोजने लगी। इस दौरान उसे पता चला कि वहाँ सोनू नाम का कोई युवक है ही नहीं। जब पीड़िता ने फोटो दिखाई तब उसे पता चला कि जिसे वह सोनू के नाम से जान रही थी, वह असल में सद्दाम है।

सच्चाई जानकर पीड़िता को धक्का लगा। इसके बावजूद वह सद्दाम के घर पहुँची, लेकिन उसके भाई ने पीड़िता को कमरे में बंद कर लिया गया। पीड़िता का आरोप है कि उसके भाई ने भी उसके साथ रेप किया और धमकी देते हुए भगा दिया। पीड़िता का आरोप है कि वह जब इसकी शिकायत लालगंज थाने करने गई तो उसे वहाँ मदद नहीं, बल्कि दुत्कार मिली। जिससे तंग आकर वह एसपी की चौखट पहुँची, लेकिन एसपी से भी उसकी मुलाकात नहीं हो सकी। पीड़िता ने कहा कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेगी।

इस्लामी संगठनों और JNU के छात्रों ने लगाए ब्राह्मण विरोधी नारे, त्रिपुरा में कथित हिंसा का कर रहे थे विरोध: कई हिरासत में

त्रिपुरा में सांप्रदायिक तनाव के विरोध में दिल्ली स्थित त्रिपुरा भवन के सामने 29 अक्टूबर 2021 (शुक्रवार) को प्रदर्शन किया गया और इस दौरान आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑग्रेनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) और मुस्लिम स्टूडेंट फेडरेशन (MSF) ने JNU के छात्र राजद सहित कई अन्य संगठनों ने हिस्सा लिया। इस प्रदर्शन में ब्रह्मणवाद मुर्दाबाद के साथ-साथ हिन्दू संगठनों के विरुद्ध आपत्तिजनक नारेबाजी की गई।

इलाके में धारा 144 लगी होने के कारण दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से चले जाने के लिए कहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की अपील का कोई असर नहीं हुआ। आख़िरकार पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाया। इसके साथ ही कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया।

इस प्रदर्शन को AIMIM पार्टी से जुड़े सिकंदर ने अपने फेसबुक से LIVE किया था। LIVE किए गए वीडियो में साफ़ तौर पर प्रदर्शन में ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद के नारे सुनाई दे रहे हैं। इसी के साथ प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ भी नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शन में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब को भी कुर्सी छोड़ने के नारे लगाए जा रहे थे।

प्रदर्शन का सारांश त्रिपुरा की पूरी घटना में हिन्दुओं और समूहों को ही दोषी ठहरना रहा। इस प्रदर्शन में शामिल फ्रैटर्निटी मूवमेंट (Fraternity movement) की आयशा ने अपने ट्विटर पर खुद को हिरासत में लिए जाने की जानकारी साझा की है।

मकतूब ने भी इस प्रदर्शन की तस्वीरें और जानकारी ट्विटर पर साझा की है।

इस प्रदर्शन में भागीदारी करने वाले स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया (SIO) ने भी अपनी उपस्थिति के प्रमाण दिए हैं।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में साम्प्रदायिक तनाव फैला है। साम्प्रदायिक तनाव की वजह विश्व हिन्दू परिषद की पानीसागर क्षेत्र में हुई रैली के बाद सोशल मीडिया में उड़ाई गई अफवाह है। इन अफवाहों में मस्जिदों पर हमले की बात कही गई। हालाँकि, त्रिपुरा पुलिस ने इन अफवाहों का खंडन किया था। इसी के साथ ऐसी अफवाह उड़ाने वाले सोशल मीडिया हैंडल के विरुद्ध कार्रवाई की भी बात कही थी।

इधर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मुस्लिम में लाठी-डंडे और हथियार लिये मार्च कर रहे हैं। यह वीडियो त्रिपुरा की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में त्रिपुरा पुलिस भी उन्हें शांति और सद्भाव से रहने की अपील करती दिखाई दे रही है।

इस्लाम न अपनाने पर डॉक्टर इक़बाल ने बेटियों के सामने कर दी पत्नी निशा की हत्या, 10 साल पहले खुद को हिन्दू बता की थी शादी

उत्तर प्रदेश के बरेली से लव जिहाद, इस्लामी धर्मांतरण और हत्या का मामला सामने आया है। जिले के चुरई दलपतपुर में मूल रूप से शीशगढ़ के जाफरपुर निवासी इकबाल ने अपनी पत्नी निशा की बेटियों के सामने इसीलिए हत्या कर दी, क्योंकि उसने इस्लाम अपनाने से इनकार कर दिया था। बेटियों ने ही अपनी माँ की हत्या का राज़ खोला। पुलिस ने इस मामले की FIR दर्ज कर ली है, जिसके बाद आरोपित फरार हो गया है। पता चला है कि करीब एक दशक पहले इक़बाल ने खुद को हिन्दू बता कर निशा से शादी की थी।

पिछले 10 वर्षों से निशा ने धर्म नहीं बदला था और वो हिन्दू ही थी। वो हिन्दू तौर-तरीकों से ही रह रही थी। इक़बाल को इससे आपत्ति थी। बाद में पता चला कि निशा से शादी से पहले इक़बाल शादीशुदा था और उसने ये बात निशा से छिपाई थी। उसकी पहली पत्नी जाफरपुर में बच्चों के साथ रहती है। निशा की माँ की शिकायत के बाद यूपी पुलिस ने आरोपित की तलाश तेज़ कर दी है। इक़बाल ने अपने साथियों के साथ मिल कर पत्नी निशा की हत्या की थी। उनकी तलाश भी जारी है। पुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया है।

इससे निकल कर आया कि महिला की हत्या गला घोंट कर की गई है। पुलिस ने डॉक्टर इक़बाल के खिलाफ हत्या, धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम 2021 के तहत FIR दर्ज की है। मुकदमा दर्ज कर के जाँच की जा रही है। निशा की माँ ने बताया कि इक़बाल लगातार उनकी बेटी पर मुस्लिम बनने का दबाव डाल रहा था। इस कारण कई दिनों से वो निशा को प्रताड़ित भी कर रहा था। साथ ही निशा के नाम पर ली हुई संपत्तियों को अपनी पहली बीवी के नाम पर करने की धमकी भी दे रहा था।

मृतका निशा की माँ ने बताया कि फोन पर बात हुई थी तो निशा ने अपने ऊपर हो रही प्रताड़ना की जानकारी दी थी। विवाद के बाद इक़बाल ने अपने साथियों को घर बुलाया और बीवी की हत्या कर दी। उसने इसे आत्महत्या का रूप देने का भी प्रयास किया। उसने अपनी बेटियों रिया और रोशनी को धमकी दी कि अगर उन्होंने किसी के सामने मुँह खोला तो वो उन्हें भी मार डालेगा। निशा का शव मंगलवार (26 अक्टूबर, 2021) की रात फाँसी के फंदे से लटका हुआ मिला।

रोती हुई बेटियों को कमरे में बंद कर के डॉक्टर इक़बाल साथियों सहित फरार हो गया। एक रिश्तेदार की शादी में इक़बाल और निशा की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद दोनों में प्यार हुआ और उन्होंने शादी कर ली। कुछ दिन दोनों किराए के मकान में रहे। बाद में पता चला पहली बीवी से उसके 4 बच्चे हैं और वो मुस्लिम है। इक़बाल ने इसके बाद सुलह किया कि दोनों अपने-अपने धर्म को मानेंगे। उसने चुरई दलपतपुर में 300 वर्ग गज जमीन खरीद 3 मंजिला मकान बनवाया था। दोनों बेटियाँ फ़िलहाल सहमी ही हैं और कुछ खा-पी नहीं रहीं। उनकी नानी उन्हें सहारनपुर ले गई हैं।

पति की हत्या, लाश के साथ सेक्स, शव के टुकड़े-टुकड़े कर उँगलियाँ चूहों को खिला दी: रैपर को भारी पड़ा फैनगर्ल के साथ अफेयर

रूस में एक रैपर की विधवा पर आरोप लगा है कि उसने न सिर्फ अपने पति की हत्या की थी, बल्कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर के उसका खून भी पिया। पति एंडी कार्टवाइट की हत्या के मामले में पत्नी मरीना कोखल को कस्टडी से छोड़ दिया गया है, लेकिन वो हाउस अरेस्ट में है। अपने पति की हत्या की वो मुख्य आरोपित है। 37 वर्षीय मरीना को अगस्त 2020 में गिरफ्तार किया गया था। जाँच में पाया गया था कि उसने अपने पति की लाश के साथ सेक्स भी किया था।

मरीना ने अपनी माँ 68 वर्षीय एलेना कोखल के साथ मिल कर खतरनाक जहर देकर एंडी कार्टवाइट की हत्या कर दी थी। हालाँकि, रूस की जाँच एजेंसियाँ अपनी गलती मानती हैं कि वो अब तक ये साबित करने में नाकाम रही हैं। मरीना ने हत्या के लिए इन्सुलिन की टेबलेट खरीदी थी, जिसे ट्रेस करना भी मुश्किल हो। इसका उपयोग डायबिटीज में किया जाता है। इसके बाद इन टेबलेट्स का ओवरडोज अपने पति को दे दिया। मृतक का असली नाम अलेक्जेंडर युष्को है, जो मूल रूप से यूक्रेन का था।

जाँच में पता चला है कि हत्या से पहले रैपर का प्रेम सम्बन्ध उनकी 25 वर्षीय ग्लैमरस फैन नाडिया रोमानेंको के साथ चल रहा था। जाँच एजेंसियों के पास इसके सबूत तो हैं कि मरीना ने ही इस हत्याकांड को अंजाम दिया, लेकिन अदालत में साबित करने लायक साक्ष्य उनके पास नहीं है। मरीना ने अपने पति की लाश के टुकड़े-टुकड़े करने के लिए चाकू और आड़ी का सहारा लिया। ये बात मरीना ने स्वीकार की है। लेकिन, उसका कहना है कि उसने ऐसा इसीलिए किया ताकि फैंस को ये पता न चले कि रैपर की मौर ड्रग ओवरडोज से हुई है।

बकौल मरीना कोखल, मीडिया में इस बात का फैलना अपमानजनक होता, इसीलिए उसे मजबूरन ऐसा करना पड़ा। हत्या की बात को वो लगातार नकार रही है। लाश के टुकड़ों को उसने फ्रिज व अन्य जगहों पर रखा था। आरोप है कि रैपर की उँगलियों को चूहों को खिला दिया गया। इस जोड़े का एक 4 वर्षीय बेटा भी है। कस्टडी से रिहाई के बाद मरीना मुस्कराती हुई दिखी। कुछ लोगों ने उसे रोते हुए अपने वकील को गले लगाते भी देखा। शरीर के 8 अंगों को वॉशिंग मशीन में डालने का भी आरोप है।

त्रिपुरा में मुस्लिम भीड़ का हमला: मंदिर में घुस तोड़ डाली काली माँ की मूर्ति, ABVP कार्यकर्ता पर भी जानलेवा हमला

त्रिपुरा के उनाकोटि जिले में शुक्रवार (29 अक्टूबर) को मुस्लिम भीड़ नें हिंदुओं के कैलाशहर स्थित काली मंदिर में हमला किया। ये घटना उन अफवाहों के बाद घटित हुई जिसमें कहा जा रहा था कि राज्य में हिंदुओं की भीड़ ने मस्जिद में आग लगा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिम भीड़ ने काली मंदिर पर दोपहर 4 बजे हमला किया। उन्होंने वहाँ माँ की मूर्ति तोड़ी और मंदिर को क्षतिग्रस्त किया। 

इसके अलावा एक अन्य मामला भी सामने आया जहाँ एबीवीपी कार्यकर्ता शिबाजी सेनगुप्ता पर NSUI और तृणमूल छात्र परिषद के लोगों ने हमला किया। इस घटना में एबीवीपी कार्यकर्ता को काफी चोट आई लेकिन अब हालत स्थिर है। खबरों के मुताबिक, इलाके में कई बार शांति बहाल की अपील की गई थी, लेकिन त्रिपुरा के करीब 1100 मस्जिदों में जुमे की नमाज के बाद समुदाय के लोगों को भड़काया गया और फिर इलाके में स्थिति और खराब होती गई।

प्रशासन ने हालात काबू करने के लिए इलाके में धारा 144 लगाई है। अब 5 लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर मनाही है। 31 अक्टूबर तक यह प्रतिबंध लागू रहेगा। उनाकोटि पुलिस ने कहा, “2 अलग-अलग घटनाओं में शांति भंग करने पर लक्ष्मीपुर और कैलाशहर में धारा 144 लागू की गई है। कल अज्ञात बदमाशों ने लक्ष्मीपुर में काली मंदिर में तोड़फोड़ की, और कैलाशहर में एनएसयूआई और तृणमूल छात्र परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा एबीवीपी नेता पर हमला किया गया।”

उधर एबीवीपी त्रिपुरा के आधिकारिक हैंडल से इस बात की पुष्टि की गई है कि शिबाजी सेनगुप्ता कैलाशहर नगर यूनिट में संगठन के सचिव हैं। उनपर हमले के बाद उनका ईलाज एजीएमसी & जीबीपी अस्पताल में किया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार समृद्धि के सकुनिया ने एबीवीपी कार्यकर्ता की वीडियो शेयर की है। देख सकते हैं कि इसमें शिबाजी स्ट्रेचर पर पड़े हैं और मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए उन्हें ले जाया जा रहा है।

मंदिर और कार्यकर्ता पर हुए हमले को लेकर समृद्धि ने दावा किया कि पहले अफरोज अली नामक एक मदरसा उलेमा पर कुछ अज्ञात लोगों ने हमला किया। वहीं अकबर अली की दुकान जलाई गई जिसके बाद काली मंदिर पर हमले की घटना को अंजाम दिया गया। 

बता दें कि उत्तरी त्रिपुरा के धर्मनगर में आपसी झड़प के बाद सांप्रदायिक अशांति देखी गई। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने वहाँ बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा की माँग को लेकर एक मार्च निकाला था। मार्च का नेतृत्व विहिप नेता पूर्ण चंद्र मंडल ने किया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धर्मनगर के रोवा गाँव में जुलूस के पहुँचने पर हिंसा हुई। वहाँ पथराव के बाद स्थिति और खराब हो गई थी। कुछ रिपोर्ट्स ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों ने एक मस्जिद को निशाना बनाया और उसके बाद उनकी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया। वहीं ऑपइंडिया ने आपको रिपोर्ट में बताया था कि विरोध में मुसलमानों की कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की गई, लेकिन त्रिपुरा में किसी भी मस्जिद पर कोई हमला नहीं हुआ। 

मर्लिन मुनरो को ‘श्रद्धांजलि’ के नाम पर मैडोना हुई पूरी न्यूड, सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- बैड टेस्ट

गायिका मैडोना एक बार फिर नए फोटोशूट को लेकर विवादों में हैं। अभिनेत्री मर्लिन मुनरो को अनुचित तरीके से श्रद्धांजलि देने के लिए मैडोना की सोशल मीडिया पर खिंचाई की गई। मर्लिन मुनरो के डेथ बेड सीन को रीक्रिएट करने के दौरान यौन उत्तेजित फोटोशूट कराने को लेकर लोगों ने मैडोना को फटकार लगाई।

63 वर्षीय गायिका ने अमेरिकी फैशन पत्रिका वी (V) के लिए फोटोशूट कराने के दौरान अपना अंडरवियर उतार दिया था और खुद को फर में लपेट लिया था, ताकि वह लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर सकें। वी मैगज़ीन के लिए मैडोना और फोटोग्राफर स्टीवन क्लेन ने बर्ट स्टर्न की ‘द लास्ट सिटिंग’ का उपयोग करने का निर्णय लिया। एक फोटो में वह पूरी न्यूड है। यह फोटो पीछे की तरफ से ली गई है। वह बेड पर लेटी हुई हैं। इसमें उनका चेहरा नहीं दिख रहा है।

क्लेन के अनुसार, वह केवल तस्वीरों को फिर से बनाना नहीं चाहते थे, बल्कि एक श्रद्धांजलि देना चाहते थे। वी मैगज़ीन के फोटोशूट में मैडोना को गद्दे पर लेटते हुए देखा गया था, जबकि एक अन्य शॉट में प्रिस्क्रिप्शन गोली की बोतलें एक नाइटस्टैंड पर रखी हुई देखी जी सकती हैं।

कुछ प्रशंसकों ने मैडोना के नए वी मैगज़ीन शूट पर नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह मर्लिन की स्मृति के लिए अपमानजनक है और इसे आत्महत्या को ‘ग्लैमराइज’ करने के तौर पर देखा जा सकता है।

एक फैन ने ट्विटर पर अपनी राय व्यक्त करते हुए लिखा, “किसी रुग्ण और भयानक कारण से मैडोना ने मर्लिन मुनरो की मौत के बिस्तर को रीक्रिएट किया।” एक अन्य ने इसे अनुचित बताया। एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि यह कूल नहीं है।

बता दें कि यह अभिनेत्री मर्लिन मुनरो की 1962 में 36 साल की आयु में असामयिक मृत्यु हो गई थी। यह उनकी ली गई अंतिम तस्वीर थी। मुनरो 1962 में अपने ब्रेंटवुड, कैलिफ़ोर्निया स्थित घर में मृत पाई गई थीं। कहा जाता है कि एक रात पहले उन्होंने ड्रग्स लिया था। मर्लिन की मृत्यु को उस समय ‘संभावित आत्महत्या’ करार दिया गया था।

IAS मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन का 8 जिलों में धर्मांतरण नेटवर्क, 80 वीडियो और 7 किताबें बरामद, SIT से कहा – कोई पछतावा नहीं

पूर्व कमिश्नर और ‘उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम’ के अध्यक्ष मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्हें अपने सरकारी आवास पर इस्लामी धर्मांतरण से जुड़ी मुल्ले-मौलवियों की मजलिस में शामिल देखा गया था। इसके बाद इस मामले की जाँच के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने SIT का गठन किया। अब जाँच में खुलासा हुआ है कि पूर्व मंडल आयुक्त ने 8 से भी अधिक जिलों में इस्लामी धर्मांतरण कराया है।

इस मामले के कई सबूत SIT के हाथ आए हैं। अब इस मामले में लोगों को सरकार की कार्रवाई का इंतजार है, क्योंकि जाँच रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी गई है। सरकारी आवास पर इस्लामी तकरीर के वीडियो वायरल होने के बाद यूपी सरकार ने महानिदेशक सीबीसीआइडी जीएल मीणा की अध्यक्षता और एडीजी जोन भानु भाष्कर की सदस्यता वाली दो सदस्यीय SIT का गठन किया था। SIT को मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन के ऐसे 80 वीडियो मिले हैं। साथ ही उनकी लिखी इस तरह की 7 पुस्तकें भी बरामद हुई हैं

उन पर एक मामले में सीटीएस बस्ती वालों पर इस्लामी धर्मांतरण का दबाव बनाने के आरोप लगे थे, वरना उन्हें कानूनी कार्रवाइयों में फँसाने की धमकी दी थी। अब पता चला है कि कानपुर में सचेंडी के एक गाँव में उन्होंने इस्लामी धर्मांतरण कराया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी उन्होंने अपना नेटवर्क फैलाया हुआ है। सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में भी वो सक्रिय रहे। SIT को मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन द्वारा ऐसी कई इस्लामी धर्मांतरण कराने की बातें पता चली हैं।

हैरानी की बात तो ये है कि कानपुर के पूर्व डिविजनल कमिश्नर ने अपनी करतूतों को कबूल भी कर लिया है और SIT की पूछताछ में कहा है की उन्हें अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने मजहबी कट्टरता की तकरीरों से लेकर भड़काऊ साहित्य और इस्लामी धर्मांतरण को भी सही माना है। अब लोग पूछ रहे हैं कि इतने खुलासे होने के बावजूद उनके विरुद्ध कार्रवाई का ऐलान क्यों नहीं किया जा रहा है। कमिश्नर आवास पर तैनात कर्मचारियों से भी बातचीत कर के रिपोर्ट तैयार की गई है।

कुछ दिनों पहले ये भी सामने आया था कि उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के कुछ कारोबारी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से जिहादी विचारधारा फैला रहे हैं। ये लोग इस्लामी धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाले IAS इफ्तिखारुद्दीन से प्रेरित हैं। कानपुर के ये दुकानदार ग्राहकों को जो बिल थमा रहे थे, उस पर लिखा था – ‘Islam Is The Only Solution’, अर्थात इस्लाम ही एकमात्र समाधान है। पुलिस आयुक्त ने लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) को ऐसे मामलों का पता करने के लिए लगाया था।

त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा पर HC ने लिया स्वत: संज्ञान, पूछा- हिंसा रोकने के लिए सरकार की क्या है योजना, 10 नवंबर तक माँगी रिपोर्ट

पूर्वोत्तर भारत के त्रिपुरा राज्य में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने व उनकी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने की खबरों पर हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है और सरकार से रिपोर्ट माँगी है। मामले का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति सुभाशीष तलपात्रा ने त्रिपुरा सरकार को इस संबंध में 10 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही यह भी पूछा कि सांप्रदायिक उन्माद भड़काने की साजिश को नाकाम करने के लिए राज्य की क्या योजना है।

इसके अलावा, मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति एस तलपात्रा की खंडपीठ ने राज्य के भीतर शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। कोर्ट ने राज्य के भीतर शांति और व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रिंट मीडिया द्वारा निभाई गई ‘सक्रिय व सकारात्मक भूमिका’ को भी स्वीकार किया।

राज्य सरकार ने कोर्ट के समक्ष एक संक्षिप्त नोट देकर राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव लाने के लिए उसके द्वारा उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण कदमों के साथ-साथ ऐसी हिंसा के अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में बताया। इसको लेकर कोर्ट ने कहा कि उसकी एकमात्र चिंता त्रिपुरा के सभी नागरिकों की के जीवन, उनकी संपत्ति और स्वतंत्रता को लेकर है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ नागरिकों को उनके जीवन, आजीविका और संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि जहाँ सांप्रदायिक हिंसा हुई है, उन स्थानों पर विभिन्न शांति समितियों का गठन किया गया है, न्यायालय ने ऐसे कदमों को और अधिक विस्तार करने की बात कही। कोर्ट ने कहा, “राज्य न केवल जिला स्तर पर बल्कि उप-मंडल स्तर पर और यदि आवश्यक हो तो पंचायत स्तर पर भी शांति समितियाँ बनाने पर विचार कर सकता है और हम सभी राजनीतिक दलों से ऐसी शांति प्रक्रिया में पूरी तरह से भाग लेने का आह्वान करते हैं, ताकि लोगों का विश्वास हो सके। साथ ही राज्य में शांति बहाल हो सके और अप्रिय घटना से उपयुक्त तरीके से निपटा जा सके।”

गौरतलब है कि त्रिपुरा पुलिस ने राज्य के पानीसागर में मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ के दावों को झूठा करार दिया है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में सोशल मीडिया में शेयर की जा रही तस्वीरों और वीडियो का राज्य में हुई घटना से कोई संबंध नहीं है। यहाँ बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई हालिया हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने रैली निकाली थी। इसके बाद से मस्जिद को निशाना बनाए जाने का दावा किया जा रहा था।

बता दें कि VHP ने बंगलादेश में हिन्दुओं पर हुए हमलों के विरोध में पानीसागर में रैली का आयोजन किया था। इसी रैली में मस्जिद पर हमले का दावा किया गया था। पानीसागर उत्तर त्रिपुरा जिले के अंतर्गत आता है। सोशल मीडिया पर मस्जिद पर कथित हमले का वीडियो वायरल होने के बाद त्रिपुरा के कई क्षेत्रों में तनाव फ़ैल गया था। कुछ क्षेत्रों में छिटपुट हिंसक गतिविधियाँ भी हुई थीं। हालात को काबू करने के लिए पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू कर दी थी और धर्मस्थलों की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया गया था।