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वृद्धाश्रम, अनाथालय, गौशाला से लेकर लड़कियों की शिक्षा तक में सहयोग: जरूरतमंदों के लिए हमेशा खड़े रहते थे अभिनेता पुनीत राजकुमार

कन्नड़ फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता पुनीत राजकुमार का 29 अक्टूबर 2021 (शुक्रवार) को निधन हो गया। वह मात्र 46 वर्ष के थे। उनकी मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। उनके निधन से फिल्म जगत गहरे शोक में डूब गया है।

पुनीत राजकुमार दक्षिण भारतीय फिल्मों के सबसे महँगे कलाकारों में से एक थे। उनके चाहने वालों में समाज का हर तबका शामिल था। हालाँकि, पुनीत राजकुमार के जीवन का एक और बेहद सकारात्मक और भावनात्मक पहलू भी है। पुनीत परोपकारी स्वभाव के थे। वो जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे।

कोरोना महामारी के दौरान दिया था महत्वपूर्ण योगदान

पुनीत की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वो अपने किए गए नेक कार्यों का कभी प्रचार नहीं करते थे। वो सामाजिक संस्थाओं को दिल खोलकर मदद किया करते थे। जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था, तब उन्होंने 50 लाख रुपये सहयोग के तौर पर दान किए थे। यह पैसे उन्होंने कर्नाटक सरकार के रिलीफ फंड में दिए थे।

न सिर्फ आर्थिक मदद, बल्कि पुनीत ने कोरोना के खिलाफ जागरूकता अभियान में भी सक्रिय भागीदारी निभाई थी। 2020 से 2021 तक वो कोरोना के विरुद्ध जागरूकता के कई कार्यक्रमों में भागीदार रहे। पुनीत के समाज के लिए दिए योगदान को कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी एस येदुरप्पा ने भी सराहा था। तब उन्होंने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर के पुनीत के जनकल्याण में किए गए कार्यों के बारे में बताया था। यह ट्वीट 31 मार्च 2020 को किया गया था।

जब कोरोना अपने चरम पर था, तब पुनीत बेंगलुरु पुलिस के साथ मिलकर इसके खिलाफ लड़ रहे थे। यह अभियान उनका कोरोना की दूसरी लहर के दौरान का था। इसी के साथ उन्होंने अपने फिल्म इंडस्ट्री के साथियों को उन तमाम लोगों की मदद के लिए भी प्रोत्साहित किया, जिनकी नौकरियाँ या काम धंधों पर कोरोना के चलते बुरा प्रभाव पड़ा था।

वर्ष 2019 में उत्तरी कर्नाटक में बाढ़ का प्रकोप था। उस समय भी अभिनेता पुनीत लोगों की मदद के लिए आगे आए थे। उन्होंने तब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सहायता कोष में 5 लाख रुपये का दान किया था। इसी के साथ पुनीत 26 अनाथ आश्रम और 16 वृद्ध आश्रम के साथ-साथ 19 गौशाला के संचालन में भी सहयोग करते थे। कुछ ही समय पूर्व दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो गानों से मिला पैसा इन कामों के लिए दे देते हैं। पुनीत कई कन्नड़ भाषी स्कूलों को भी चलाने में सहयोग करते थे।

पुनीत अपनी माता के साथ मिलकर मैसूर में शक्तिधाम नाम से आश्रम भी चलाते थे। इस आश्रम के जरिये वो हजारों लड़कियों की पढ़ाई के लिए संसाधनों का इंतज़ाम किया करते थे। यह एक चैरिटेबल संस्था है। इस संस्था में बलात्कार पीड़िताओं की मदद, मानव तस्करी के विरुद्ध अभियान, वेश्यावृत्ति के खिलाफ कार्य भी किए जाते रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार अभी तक लगभग 4,000 महिलाएँ यहाँ से लाभान्वित हुई हैं।

मिल रही जानकारी के अनुसार, अभिनेता पुनीत ने अपनी आँखें दान की हैं। ऐसा ही उनके पिता डॉ राजकुमार ने भी किया था। कहा जा रहा है कि पुनीत की मृत्यु के बाद नारायण नेत्रालय के डायरेक्टर को पुनीत के घर से फोन किया गया था। यह फोन उनके भाई ने किया था। फ़ोन मृत देह से आँखें ले जाने के लिए किया गया था।

आँख प्राप्त करने वाले डाँक्टर का नाम भुजंग शेट्टी है। उन्होंने इस घटना को बेहद ही भावुक रूप में बताया। डॉक्टर के अनुसार, कई लोग मृत्यु के दौरान आँखों का दान दुःख के चलते भूल जाते हैं, लेकिन अभिनेता पुनीत के घर से डॉक्टर को इस तरह बुलाकर नेत्रदान करना अपने आप में अनोखा उदाहरण है। डॉक्टर ने पुनीत के परिवार को सिद्धांतों पर अटल परिवार बताया। साथ ही कहा कि पुनीत की आँखों से कल से 2 लोग इस दुनिया को देखेंगे। पुनीत की माँ ने भी अपनी आँखें दान की थीं।

अभिनेता पुनीत 2 घंटे जिम करके बाहर निकले तो सीने में दर्द के कारण उनकी तबियत अचानक खराब हो गई। उनको स्थानीय विक्रम अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। पुनीत अपने पीछे पत्नी और 2 बेटियाँ छोड़ कर गए हैं। उनकी पत्नी का नाम अश्विनी और बेटियों के नाम दृष्टि और वन्दिता हैं। पुनीत का अंतिम संस्कार 31 अक्टूबर 2021 (रविवार) को होगा। उनका अंतिम संस्कार विदेश में रहने वाली उनकी बेटी के आने के बाद होगा।

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‘समीर SC हैं’: वानखेड़े से मुलाकात के बाद बोले SC कमीशन के उपाध्यक्ष, महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर माँगा जवाब

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष अरुण हलदर से मुलाक़ात कर आवेदन दिया। शनिवार (30 अक्टूबर 2021) को हुई इस मुलाक़ात के बाद अरुण हलदर ने कहा है कि उन्हें लगता है कि समीर वानखेड़े अनुसूचित जाति से हैं। इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया कि समीर ने धर्म परिवर्तन के आरोपों से इंकार किया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार (29 अक्टूबर 2021) को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने मुंबई सरकार से स्पष्टीकरण माँगा था। यह स्पष्टीकरण समीर वानखेड़े की आयोग में की गई शिकायत के बाद माँगा गया था। अपनी शिकायत में समीर वानखेड़े ने खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। समीर वानखेड़े ने यह शिकायत 26 अक्टूबर 2021 (मंगलवार) को की थी।

समीर की शिकायत पर अनुसूचित जाति आयोग ने आरोपों की जाँच शुरू की है। आयोग को ये अधिकार संविधान के आर्टिकल 338 के तहत प्राप्त हैं। समीर वानखेड़े की शिकायत पर महाराष्ट्र के मुख्य सचिव, डीजीपी और मुंबई पुलिस कमिश्नर को नोटिस भेजा गया है। आयोग द्वारा इन अधिकारियों को नोटिस का उत्तर 7 दिनों में देने के लिए कहा गया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े द्वारा अपनी नौकरी में लगाए गए प्रमाण पत्रों पर सवाल खड़े किए थे। नवाब मलिक ने कहा की समीर वानखेड़े मुस्लिम हैं, जबकि समीर वानखेड़े ने खुद को SC समुदाय का बताया है। आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला मुंबई में क्रूज पर शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान की NCB द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ।

इससे पहले गुरुवार (28 अक्टूबर 2021) को मुंबई उच्च न्यायालय में एक सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने अपना पक्ष रखा था। इस सुनवाई में महाराष्ट्र सरकार के वकील ने अदालत को स्थिति से अवगत कराया था। महाराष्ट्र सरकार के वकील के अनुसार, समीर वानखेड़े के खिलाफ चार अलग-अलग याचिकाएँ लंबित हैं। इन याचिकाओं की जाँच ACP स्तर के अधिकारी द्वारा करवाई जा रही है। सरकारी वकील ने यह भी बताया कि अभी कोई केस दर्ज नहीं किया गया।

शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के साथ खुलकर खड़े होते हुए नवाब मलिक ने यहाँ तक कह डाला था कि NCB का यह केस फर्जी है। उन्होंने इस पूरे मामले की जाँच मुंबई पुलिस द्वारा करवाने की बात कही था। नवाब मालिक ने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस की जाँच में न्याय होगा।

इस से पहले समीर वानखेड़े ने अपने विरुद्ध की जा रही शिकायतों पर मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी माँग पर मुंबई हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को समीर वानखेड़े की गिरफ्तारी से 72 घंटे पहले नोटिस देने का आदेश दिया था। हालाँकि, अदालत ने वानखेड़े की यह माँग नहीं मानी थी कि मामले की जाँच CBI या NIA से करवाई जाए।

‘द प्रिंट’ के लेख में सड़क पर नमाज का बचाव, मंदिरों में नमाज पर गर्व: फिर सऊदी में क्यों है रोक? मस्जिदों में यज्ञ-हवन होगा?

‘द प्रिंट’ में एक लेख आया है, जिसमें मुस्लिम समाज के ‘सबसे महत्वपूर्ण मानस’ नमाज की बात करते हुए कहा गया है कि हिंदुत्व की राजनीति ने नए दावों से तमाशा खड़ा कर दिया है, ताकि इसे निशाना बनाया जा सके। सपाट शब्दों में कहें तो इस लेख में सड़क पर नमाज का बचाव किया गया है। कल को आपने घर में घुस कर भी कोई नमाज पढ़ेगा तो ‘द प्रिंट’ लेख लेकर आएगा कि क्यों ‘मुस्लिम मानस’ के लिए आपको अपने घर को मस्जिद में तब्दील कर देना चाहिए।

लेकिन, इस बीच ‘हिन्दू मानस’ का क्या? सरेआम चौराहों पर गायों को काटने वाले, गौ तस्करी करने वाले और गाय की पूजा करने वालों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले सदियों से यही काम तो करते आ रहे हैं। तब कभी सोचा गया क्या कि इससे हिन्दुओं की भावनाओं का क्या होगा? हिन्दुओं ने तो न कभी सड़क के अतिक्रमण को बढ़ावा दिया है और न ही किसी के घर में जबरन घुस कर पूजा करने की चेष्टा की है। हमारे 30,000 मंदिरों को तोड़ डाले जाने के बावजूद कभी हमारे लिए तो लेख नहीं लिखे गए इस तरह?

अब बताया जा रहा है कि नमाज हिन्दू विरोधी कृत्य नहीं है और हर भारतीय को इसका बचाव करना चाहिए। ये वही लोग हैं, जो ‘मूर्तिपूजा’ को ‘बुतपरस्ती’ कहते हैं और प्रतिमाओं को खंडित करने में अपनी भलाई समझते हैं। इसका नमूना हमने हाल ही में बांग्लादेश में देखा, जहाँ सैकड़ों पूजा पंडालों पर मुस्लिम भीड़ का कहर बरपा और मंदिरों में आग लगाई गई। मुस्लिमों ने ही कुरान का अपमान किया और इसका इल्जाम हिन्दुओं पर मढ़ने के लिए झूठी अफवाह फैलाई और फिर हिंसा की।

इस लेख को ‘राजनीतिक इस्लाम’ के कथित विद्वान और प्रोफेसर हिलाल अहमद ने लिखा है। वो गुरुग्राम में नमाज में बाधा डालने से खुद को क्षुब्ध बताते हैं। लेकिन, वो ये नहीं बताते कि सार्वजनिक जगह पर नमाज पढ़ने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए और नमाज को ट्रैफिक में बाधा क्यों नहीं माननी चाहिए। विरोध नमाज का नहीं हो रहा है, सरकारी जमीन पर और ट्रैफिक जाम कर के सड़क ब्लॉक करने का हो रहा है। नमाज आप दिन भर पढ़िए घर में बैठ कर, कोई आपत्ति नहीं करेगा।

वो ‘सर्वधर्म समभाव’ पर विश्वास करने की बड़ी-बड़ी बातें करते तो करते हैं, लेकिन साथ ही अल्लाह को सर्वशक्तिमान बताते हुए इस बात का जवाब नहीं दे पाते कि हिन्दू हनुमान चालीसा पढ़ दे तो ये ‘बाधा’ और मुस्लिम भीड़ सड़क पर नमाज पढ़े तो ये ‘प्रार्थना’ कैसे हुई? उनका कहना है कि वो चलती हुई ट्रेन में, व्यस्त गलियों में, अस्पतालों में और यहाँ तक कि कई सक्रिय हिन्दू मंदिरों में भी नमाज पढ़ चुके हैं। उन्हें इस पर गर्व है। वो इसे अपनी उपलब्धि बताते हैं।

फिर मस्जिद किसलिए है? अगर नमाज मंदिरों में पढ़ना है तो फिर मस्जिद का औचित्य ही क्या है? अगर व्यस्ततम दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग 2 को रोक कर सड़क पर घंटों यज्ञ किया जाए और ट्रैफिक जाम रखा जाए, तो क्या ये मुस्लिम समुदाय को स्वीकार्य होगा? मंगलवार के मंगलवार हनुमान चालीसा हो और इसके लिए सभी सार्वजनिक जगहों पर कामकाज रुक जाए तो क्या मुस्लिम ‘विद्वान’ इसकी आलोचना नहीं करेंगे? क्या मस्जिदों में यज्ञ-हवन, आरती, हनुमान चालीसा पढ़ने और पूजा-पाठ की अनुमति दी जा सकती है?

कभी नहीं। इसका सीधा अर्थ है कि मुस्लिम समुदाय के ये ‘विद्वान’ अभी भी अपने क्रूर शासन की मानसिकता से निकले नहीं हैं और हिन्दुओं को ‘धिम्मी’ समझते हैं। ‘धिम्मी’, अर्थात मुस्लिम साम्राज्य में रहने वाले गैर-मुस्लिम, जो अपने ‘तन पर सर को जुदा होने से बचाने’ के लिए जजिया कर और जकात देते हैं। मुस्लिमों के सामने सिर झुकाना जिसके लिए अनिवार्य है। यही तो वो सोच है, जो कहती है कि मंदिरों में नमाज होगी लेकिन मस्जिदों में यज्ञ-हवन नहीं हो सकता। सड़कें नमाज के लिए हैं, लेकिन हनुमा चालीसा वहाँ नहीं पढ़ा जा सकता।

उन्होंने अपने रिसर्चों का हवाला देते हुए कहा है कि हिन्दू आज भी बड़ी संख्या में नमाज को सम्मान देते हैं और दूसरे मजहब का आदर करने वाला हिन्दू नहीं हो सकता, ऐसी भावना है। फिर सार्वजनिक जगह मजहबी गतिविधियों के लिए नहीं हैं – ये भावना मुस्लिम क्यों नहीं विकसित करते? लेख में वो कहते हैं कि मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ी है और मस्जिदें कम पड़ रही हैं, इसीलिए सड़क पर नमाज होनी चाहिए। क्या अब ‘जनसंख्या जिहाद’ और धर्मांतरण का भार भी भारत ही वहन करे?

भारत में 3 लाख से भी अधिक मस्जिदें हैं। क्या ये संख्या कम है? अरब, जहाँ से इस्लाम का जन्म हुआ, वहाँ के सऊदी अरब में गाड़ी रोक कर किसी भी व्यक्ति के नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध है। जब इस्लामी मुल्क ही ये नियम नहीं चला रहे तो फिर सनातनी भारत क्यों झूठा सेक्युलरिज्म का दिखावा करे, जिससे यहाँ के बहुसंख्यकों और अन्य अल्पसंख्यकों को परेशानी हो? इंडोनेशिया में मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर की आवाज़ कम की गई है। भारत में ऐसा कानून बना तो फिर से लोग बताने आ जाएँगे कि इस्लाम में उसका क्या महत्व है।

‘द प्रिंट’ में सड़कों पर नमाज का खुल कर किया गया समर्थन

बात ये है कि जब हिन्दुओं के 30,000 मंदिर तोड़ डाले जाते हैं और बाकियों पर सरकारें कब्ज़ा कर के उनका पैसा खाती है तो हमें ‘सेक्युलरिज्म’ याद दिलाया जाता है और कहा जाता है कि वेद-पुराण-उपनिषद और रामायण-महाभारत की बात मत करो, क्योंकि ये देश संविधान से चलता है। जब बात मुस्लिमों के सड़क जाम कर नमाज पढ़ने और दिन में 5 बार लाउंडस्पीकर से क्षेत्र में रहने वाले लोगों को परेशान करने के खिलाफ होती है, तब ‘सेक्युलरिज्म’ भूल कर इस्लाम के इतिहास, मानस और पुस्तकों में क्या लिखा है – ये समझाया जाने लगता है।

‘द प्रिंट’ के इस लेख में राम मंदिर का भी नाम लिया गया है और उसके निर्माण के बाद की एक अलग दुनिया की बात की गई है। बद्रीनाथ धाम में नमाज का समर्थन किया गया है और इसके विरोध को ‘छुआछूत’ से जोड़ कर ब्राह्मणों को गाली दी गई है। ये तो ट्रेंड है। जब इस्लाम का नियम इस्लाम के हिसाब से चलता है, फिर मंदिरों का नियम भी इस्लाम के हिसाब से ही चले? मंदिरों में नमाज हो, सड़क पर नमाज हो और मस्जिदों में नमाज हो तो फिर पूजा कहाँ करेंगे हिन्दू अपने ही देश में?

इस्लाम को इसमें ‘भारतीय मजहब’ बताया गया है। फिर अरब से यहाँ आक्रमण करने कौन लोग आए थे? कोरोना के दौरान जब देश के हजारों मंदिर गरीबों को भोजन देने और पीएम केयर में मदद करने में लगे हुए थे, मौलवियों ने मस्जिदों को बंद करने से इनकार कर दिया था और निजामुद्दीन मरकज ने कोरोना फैलाया। इस लेख का सीधा सा जवाब है – किसी भी मजहबी गतिविधि के लिए अन्य लोगों को तकलीफ पहुँचाया गया तो वो आवाज़ उठाएँगे ही। सैकड़ों वर्ष से बर्दाश्त किया तो अब भी करें – ऐसा नहीं होगा। अब हिन्दू ‘धिम्मी’ बन कर नहीं रहना चाहते। उनसे जजिया मत माँगो।

राष्ट्रवाद को गाली, जिहाद का महिमामंडन, चुंबन लेते नग्न तस्वीरें: SFI ने हिंदुओं द्वारा पोषित केरल के कॉलेज में लगाए आपत्तिजनक पोस्टर

केरल के मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से जुड़े छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने त्रिशुर स्थित श्री केरल वर्मा कॉलेज में आपत्तिजनक और अश्लील पोस्टर लगाकर ना भारतीय परंपरा और कानून की धज्जियाँ उड़ाई है। एसएफआई एक पोस्टर में ‘सेक्सुअल लिबरेशन’ के नाम पर अश्लीलता प्रदर्शित किया है। इन पोस्टरों में ना सिर्फ राष्ट्रवाद को गाली दी गई है, जेहाद को महिमामंडित किया गया है। पोस्टर में हिंदुबोफिया भी स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। ये पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र लिखा है।

कॉलेज में पोस्टर के रूप में लगाए गए एक पेंटिंग में दो देशों की सीमा को दर्शाया गया है, जिसकी रखवाली एक सैनिक कर रहा है। इसमें सैनिक सीमा की दूसरी तरफ की महिला को चूमते हुए दिख रहा है। पोस्टर पर लिखा हुआ है, ‘फ* नेशनलिज्म। हम पृथ्वीवासी हैं’। इस गाली को अगर मर्यादित भाषा में राष्ट्रवाद की ऐसी-तैसी कह सकते हैं। एसएफआई के पुराने रिकॉर्ड के आधार पर कहा जा सकता है, बाड़ के दोनों तरफ देश भारत और पाकिस्तान हैं।

दूसरे पोस्टर में इस कट्टरपंथी छात्र संगठन ने ‘यौन स्वतंत्रता’ की वकालत की है। पोस्टर में एक महिला और एक पुरुष को नग्न होकर उत्तेजक अवस्था में चुंबन लेते हुए दिखाया गया है। साथ ही कैप्शन में लिखा है- ‘द प्लेनेट नीड सेक्सुअल लिबरेशन’ यानी धरती पर यौन स्वतंत्रता की जरूरत है।

कॉलेज परिसर में लगाए गए एक अन्य पोस्टर में एक मुस्लिम व्यक्ति को अमेरिकी झंडे की पैंट पहने कुर्सी पर बैठे हुए दिखाया गया है। उसके बगल AK-47 राइफल रखी हुई है। यह पोस्टर संभवत: अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के देश छोड़ने और वहाँ तालिबान शासन के स्थापित होने का जश्न के रूप में दिखाता है। वहीं, एक अन्य पोस्टर में हाथ में पत्थर लिए हुए एक व्यक्ति को सुरक्षाबलों के सामने खड़ा दिखाया गया है।

इस तरह की कट्टरपंथी सोच और भारतीय परंपरा एवं कानून को गाली देने वाली पोस्टर को लेकर एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने राष्ट्रीय महिला आयोग पत्र लिखकर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है। पत्र में अधिवक्ता अरोड़ा ने कहा है कि यौन क्रिया वाले इस तरह के पोस्टर लगाना न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि संवैधानिक रूप से भी गलत है। उन्होंने कहा, “एसएफआई ने अपने पोस्टर में ऐसी तस्वीरों और वाक्यों को लिखा है, जो महिलाओं के शरीर को सार्वजनिक रूप से ग्लैमराइज कर अश्लीलता, नग्नता और यौनिक क्रिया को बढ़ावा देते हैं।”

अपने पत्र में अधिवक्ता अरोड़ा ने लिखा है कि IPC की धारा 294 अश्लील क्रिया के सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अश्लील तस्वीर, पोस्टर, ईमेल, मैसेज आदि को यौन शोषण माना जाता है। इसको देखते हुए उन्होंने महिला आयोग से इन पोस्टरों को हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि श्री केरल वर्मा कॉलेज का स्वामित्व और प्रबंधन कोचीन देवस्वम बोर्ड द्वारा किया जाता है। देवस्वम बोर्ड हिंदुओं द्वारा वित्त पोषित है और हिंदू मंदिरों और उनकी संपत्ति की देखरेख के साथ-साथ यह हिंदुओं की पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए के लिए जिम्मेदार है। बोर्ड के सदस्यों को केरल सरकार और राज्य के हिंदू समुदाय दोनों द्वारा नामित किया जाता है।

चर्च के सामने ‘ओरल सेक्स’, टिकटॉकर और उसकी गर्लफ्रेंड को 10 महीने की जेल: रूस की अदालत ने कहा – धार्मिक भावनाएँ भड़काई

रूस में एक चर्च के सामने अश्लील पोज देने के लिए एक टिकटॉकर और उसकी गर्लफ्रेंड को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों को 10 महीने जेल में काटने होंगे। इन्होंने राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वायर स्थित एक कैथेड्रल चर्च के बाहर ‘सेक्स एक्ट’ की नकल की। तजाकिस्तान मूल के टिकटॉकर रुस्लन मरोडझाओनजोडा और रूस की अनास्तासिया चिस्तोवा को मॉस्को की ‘Tverskoi’ अदालत ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का दोषी मानते हुए सज़ा सुनाई।

इन दोनों ने मॉस्को के सेंट बेसिल कैथेड्रल चर्च के बाहर ओरल सेक्स करने की नकल उतारी थी। बता दें कि रूस में इन चीजों को लेकर सख्त नियम-कानून हैं और राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के काल में ऐसी हरकतों पर सज़ा का सख्त प्रावधान है। इन दोनों को सितंबर 2021 में ही गिरफ्तार किया गया था। इन्होंने जो तस्वीरें पोस्ट की थीं, उनमें देखा जा सकता है कि रुसलन चर्च के सामने खड़े हैं और उनकी गर्लफ्रेंड अनास्तासिया घुटनों के बल उनके कमर तक झुकी हुई हैं।

इन्होंने अपनी तस्वीर का कैप्शन दिया था – ”The Labor Code is not the Criminal [Code], you can break it’. साथ ही महिला को इस तस्वीर में रूस की पुलिस का जैकेट पहने हुए भी देखा जा सकता है। इस तस्वीर को पोस्ट करने के 10 दिनों बाद इन्हें हिरासत में ले लिया गया था। ब्लॉगर ने इसके लिए माफ़ी माँगी थी और $71 (5244 रुपए) का जुर्माना भी भरा था। अदालत ने कहा कि इन दोनों ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की हरकत कर के समाज का अपमान किया है।

जहाँ रुस्लन सोशल मीडिया पर प्रैंक वीडियो के लिए जाने जाते हैं, उनकी गर्लफ्रेंड एक इंस्टाग्राम मॉडल है। जेल की सज़ा काटने के बाद टिकटॉकर को तजाकिस्तान डिपोर्ट किया जा सकता है। 2012 में तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के साथ ही पुतिन ने रूस की परंपरा को प्रमोट करने की घोषणा की थी। रूस के ऑर्थोडॉक्स चर्च और पुतिन के बीच अच्छे सम्बन्ध रहे हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस जोड़े की गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है।

‘आप डंडे के बूते देशभक्ति नहीं सिखा सकते…’ – Pak की जीत का जश्न मनाने वालों पर कार्रवाई से भड़कीं महबूबा, PM को लिखा पत्र

टी-20 विश्व कप क्रिकेट मैच में पाकिस्तान से भारत के हारने के बाद कुछ कश्मीरी छात्रों ने जो उनकी जीत का जश्न मनाया, उसके बाद उनके ऊपर कार्रवाई चल रही है। ऐसे में जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और उन सभी की रिहाई के लिए हस्तक्षेप की माँग की है।

उन्होंने लिखा, “मैं आपको जम्मू-कश्मीर की भयावह स्थिति के बारे में गहरी निराशा और चिंता के साथ लिखती हूँ, अभी कुछ समय पहले जब आपने दिल्ली में एक सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की थी, तो आपने दिल्ली और कश्मीर के बीच ‘दिल की दूरी’ को हटाने का इरादा व्यक्त किया था।”

अपने बयान में महबूबा ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को दोस्ताना मैच करार देते हुए कहा कि जो लोग पाकिस्तान की जीत का जश्न मना रहे थे वो बस जीतने वालों को चीयर कर रहे थे। ऐसे में उनके ऊपर UAPA जैसा भयावह धारा लगना गलत है।

पाकिस्तानियों की जीत में बम पटाखे फोड़ने वालों को महबूबा ने ‘अपने नौजवान लोग’ कहा और बताया कि वो एमबीबीएस जैसा प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हैं और उनके ऊपर एंटी टेरर कानून के तहत मुकदमा शुरू कर दिया गया है। 3 छात्रों को आगरा में देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया है जबकि वो ऐसी किसी गतिविधि में शामिल तक नहीं थे।

महबूबा मुफ्ती ने पत्र में आगे कहा है, “कश्मीरी छात्रों को टारगेट करने का सिलसिला अभी भी जारी है, हमने सोचा था कि हम, लोगों के खासकर युवाओं के दिलों और दिमागों को संबोधित करने के लिए एक नीति के लागू होने का इंतजार कर रहे थे जबकि उनके खिलाफ तो छापेमारी, गिरफ्तारी, हत्याओं का सिलसिला बिन किसी रोक थाम के जारी है, दमन का स्तर और राज्य की असहिष्णुता एक नए निचले स्तर पर पहुँच गई है।”

महबूबा ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा है, “मैं आपसे इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध करती हूँ ताकि इन युवाओं का भविष्य खराब न हो।” महबूबा ने चिट्ठी में उम्मीद जताई है कि गिरफ्तार छात्रों की जल्द रिहाई कर दी जाएगी। अपने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “देशभक्ति की भावना को प्यार से बढ़ा सकते हैं। उसे डंडे और बंदूक के जोर पर नहीं बढ़ाया जा सकता।” महबूबा ने आगे लिखा है कि छात्रों पर ऐसी कार्रवाई से अविश्वास का माहौल और बढ़ेगा।

महबूबा कहती हैं, “आप किसी को डंडे के बूते देशभक्त नहीं बना सकते। उन्हें हमदर्दी प्यार की जरूरत है ताकि आप यहाँ लोगों के दिलों को जीतें। वह कहती हैं खेल-खेल होता है। इसमें चाहे आगरा में हमारे बच्चों को जेल में बंद किया गया है। चाहे कश्मीर में उन्हें पकड़ा गया है। कौन किस खिलाड़ी को पसंद करता है। आप किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते। देश ने हमें ये हक दिया है कि हम किस खेल में किसको पसंद करें।”

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने टी20 विश्व कप मैच में 24 अक्टूबर, 2021 को भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान से हारने के बाद पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने के आरोप में 27 अक्टूबर, 2021 को 5 जिलों में 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। प्रशासन की तरफ से इस तरह देश विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ देशद्रोह (रासुका) के तहत भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के डाउनटाउन में भी पाकिस्तान की जीत पर मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने नारेबाजी करते हुए 24-25 अक्टूबर की रात में पाकिस्तान के समर्थन में जश्न मनाए थे। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ UAPA की धारा 13 और आईपीसी की धारा 105ए और 505 के तहत मामला दर्ज किया था।

ज़हर देकर 58 गायों को मार डाला, नौकरी से निकाले जाने पर आरोपित ने लिया ‘बदला’: अब यूपी पुलिस ने दबोचा

ग्रेटर नोएडा के खोदना खुर्द गाँव में गाय की डेयरी में नौकरी करने से निकाले पर 58 गायों को जहर देकर हत्या करने वाले आरोपित को सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित के पास से जहरीला पदार्थ बरामद किया है। आरोपित ने बदला लेने के लिए घटना को अंजाम दिया है। पुलिस ने आरोपित को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है।

डेयरी में करता था देखरेख का काम

खोदना खुर्द गाँव में रहने वाले ओमवीर सिंह गायों की डेयरी चलाते हैं। उनकी डेरी पर धर्मेंद्र निवासी खोदना खुर्द देखरेख का काम करता था। ओमवीर सिंह ने सही से गायों की देखभाल नहीं करने पर धर्मेंद्र को काम से निकाल दिया था। इसका बदला लेने के लिए धर्मेंद्र ने 22 अक्टूबर को 58 गायों को जहरीला पदार्थ खिलाकर हत्या कर दी। उसके बाद आरोपित फरार हो गया। पुलिस ने आरोपित धर्मेंद्र को तिलपता गोल चक्कर के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपित के पास से कीटनाशक दवाई बरामद की है।

पुलिस आयुक्त आलोक सिंह के प्रवक्ता ने बताया कि ओमवीर नागर की डेरी है, जहाँ उन्होंने गाय पाल रखी है। उन्होंने बताया कि ओमवीर नागर की 58 गाय पाँच दिनों में संदिग्ध अवस्था में मर गईं। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने पशु चिकित्सकों की टीम को बुलाकर जाँच करवाया तो पता चला कि गायों की मौत जहर खाने से हुई है।

प्रवक्ता ने बताया कि मामले की जाँच कर रही पुलिस ने शनिवार (30 अक्टूबर 2021) को ओमवीर नागर के पुराने नौकर धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि धर्मेंद्र को नशे की लत है, जिसकी वजह से उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। इसी बात से गुस्से में आकर उसने गायों को पानी पिलाने वाली हौदी में जहर मिला दिया, जिसकी वजह से जहर मिला पानी पीने से गायों की मौत हो गई।

गौरतलब है कि पिछले दिनों हरियाणा के पानीपत से गौहत्या की घटना सामने आई थी। यहाँ एक गाय का सिर कटा शव मिला था। गौहत्या की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या में गौशाला के सेवादार व गौभक्त घटनास्थल पर पहुँचे। इसके बाद सेक्टर-29 थाना पुलिस भी मौके पर पहुँची। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गौशाला प्रधान हरपाल सिंह ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत सेक्टर-29 थाने में केस दर्ज कराया। उन्होंने बताया कि लोगों ने काफी देर तक गाय का सिर ढूँढने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं मिला। गाय के शव को पोस्टमार्टम के लिए पशु अस्पताल भेज दिया गया।

भारत-नेपाल सीमा पर 2 दशक में 4 गुना बढ़ गई मस्जिदों-मदरसों की संख्या, खाड़ी से फंडिंग की आशंका: खुफिया एजेंसियाँ अलर्ट

भारत-नेपाल बॉर्डर पर खुफिया एजेंसियाँ और पुलिस विभाग पूरी तरह एलर्ट है। बॉर्डर पर संदिग्‍ध गति‍विधियों के साथ मदरसों की बढ़ती संख्या और उनके क्रिया-कलापों पर भी खुफिया ऐजेंसियों की नजर है। बॉर्डर के पास अचानक अस्तित्‍व में आए इन मदरसों और मस्जिदों की जरूरत और उनके आय के स्रोत का पता नहीं होने से खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। ऐसे में अब इनकी हर तरह से जाँच की जा रही है।

भारत और नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में पिछले 20 सालों में मदरसों की संख्या में 4 गुना बढ़ोतरी हुई है। अधिकतर मदरसे भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में खुले हैं। वर्तमान समय में सिद्धार्थनगर जिले में 597 मदरसे संचालित हैं, जिनमें 452 पंजीकृत हैं और 145 मदरसों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। खुफिया एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बिना रिकॉर्ड वाले मदरसे कैसे चल रहे हैं, इनकी फंडिंग कहाँ से हो रही है। कुछ मदरसों की फंडिंग दुबई और खाड़ी के देशों से होने की आशंका जताई जा रही है। वर्ष 1990 तक जिले में कुल 16 मान्यता प्राप्त मदरसे थे। वर्ष 2000 में इन मदरसों की संख्या बढ़कर 147 हो गई, जिनमें मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 45 थी।

सिद्धार्थनगर में मदरसों की संख्या में लगातार वृद्धि जारी है। वर्तमान समय में अकेले 152 मदरसे डुमरियागंज तहसील में संचालित हैं। यहाँ के टिकरिया गाँव में वर्ष 1978 में पहले मदरसे को मान्यता मिली थी। इटवा तहसील में 134 मदरसे हैं। क्षेत्र के भावपुर भदोखर में वर्ष 1963 में पहला मान्यता प्राप्त मदरसा खुला था। नौगढ़ तहसील में 119 मदरसे हैं, यहाँ पहला मदरसा वर्ष 1983 में शिवपति नगर में संचालित हुआ था।

जानकारी के मुताबिक शोहरतगढ़ में 102 मदरसे हैं। वहीं, बांसी में मदरसों की संख्या सबसे कम 90 है, जिनमें से 16 मदरसों को सरकारी अनुदान मिल रहा है। इन मदरसों में तहनिया (प्राथमिक), फौकनिया (पूर्व प्राथमिक), मौलवी (हाईस्कूल), मुंशी (अरबी-फारसी में हाईस्कूल), आलिया (इंटरमीडिएट), कामिल (स्नातक) और फाजिल (परा-स्नातक) की पढ़ाई होती है।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय कुमार ने बताया कि मदरसा कोई भी खोल सकता है। इस पर कोई रोक नहीं है। उन्हीं मदरसों को शासन स्तर से सहायता दी जाती है, जो मान्यता प्राप्त होते हैं। एस‌एसबी 43वीं वाहिनी के डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार ने बताया की जिन मदरसों का कोई रिकॉर्ड नहीं है, उन पर नजर है। समय-समय पर जाँच के बाद शासन को रिपोर्ट प्रेषित की जाती है। बिना मान्यता वाली मदरसों की फंडिंग और उनकी गतिविधियों पर एसएसबी की नजर है।

वर्ष 1961 में मिली थी जिले के पहले मदरसे को मान्यता

जिले में सबसे पहला मदरसा 4 अप्रैल 1961 को शोहरतगढ़ तहसील के सिसहनियां अलीदापुर गाँव में खुला था। दूसरा मदरसा 7 जुलाई 1961 को बांसी तहसील की बराँवशरीफ गाँव में खुला था। 13 अगस्त वर्ष 1963 को इटवा के भावपुर भदोखर में तीसरे मदरसे को मान्यता मिली थी।

जिले में लगातार बढ़ रहे मदरसों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह से सतर्क हैं। हालाँकि जिन मदरसों का कोई रिकॉर्ड नहीं है, उन पर स्थानीय प्रशासन की भी नजर रहती है। सिद्धार्थनगर जिले की कुछ संवेदनशील स्थानों पर बने मदरसों के रिकॉर्ड खंगाले ले जा रहे हैं और उनकी फंडिंग की भी जाँच की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि नेपाल से लगे जिलों में मुस्लिम आबादी की संख्या में 2.5 गुना की बढ़ोतरी हुई। यहाँ पर 2 साल में ही 400 मदरसे और मस्जिद बन गए। सुरक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नेपाल की सीमा से सटे क्षेत्रों में हो रहे ये बदलाव सामान्य नहीं हैं। इसी स्थिति के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसी ने साल की शुरुआत में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट दी थी। पिछले 2 साल के अंदर बहराइच, बस्ती व गोरखपुर मंडल से लगी नेपाल सीमा पर 400 से अधिक मजहबी शिक्षण संस्थान और मजहबी स्थल खुले।

‘जुमे की नमाज के लिए हाइवे को कर दिया जाता था ब्लॉक’: अमित शाह ने कहा – चुनाव में नए कपड़े सिलवाने वाली पार्टी है कॉन्ग्रेस

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उत्तराखंड के दौरे पर हैं। यहाँ राजधानी देहरादून में उन्होंने एक सभा को सम्बोधित किया है। अपने संबोधन में उन्होंने काँग्रेस पार्टी पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगया है। अमित शाह ने सड़कों को घेर कर होने वाली नमाज़ पर भी आपत्ति जताई है।

अपने भाषण में अमित शाह ने काँग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस को सत्ता का भोग करने वाली पार्टी बताया है। कॉन्ग्रेस पर कभी भी जनसेवा की भावना से काम न करने का आरोप भी लगाया। इसी के साथ उन्होंने कॉन्ग्रेस को तुष्टिकरण की नीति पर चलने वाली पार्टी बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की ऐसी सोच से देवभूमि उत्तराखंड का विकास कभी नहीं हो सकता है।

काँग्रेस शासित एक प्रदेश का जिक्र भी उन्होंने अपने भाषण में किया। वहाँ सड़कों पर ट्रैफिक रोक कर नमाज़ होने की बात जनता को बताई। उन्होंने कहा कि उनका काफ़िला अचानक ही रुक गया था। उन्होंने इसका कारण जानना चाहा। तब उन्हें शुक्रवार का दिन बताया गया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार सुन कर वो ठीक से समझ नहीं पाए। वो काफिला रुकने का शुक्रवार से क्या संबंध है इस पर विचार करने लगे।

अमित शाह ने बताया कि उन्हें लगा कि उनका सामान्य ज्ञान ही कमजोर हो गया है। तब उन्हें बताया गया कि शुक्रवार को राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर के नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार में शुक्रवार को छुट्टी भी देने की हिमाकत की गई थी। नमाज़ पर अमित शाह के भाषण का यह अंश सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

काँग्रेस को वादाखिलाफी करने वाली पार्टी बताते हुए उन्होंने देहरादून के चौराहे पर काँग्रेस को खुली बहस की चुनौती दी। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अमित शाह ने उनके स्टिंग ऑपरेशन की याद दिलाई। उत्तरखंड के विकास के लिए अमित शाह ने फिर से पूर्ण बहुमत से बीजेपी की सरकार को सत्ता में लाने की माँग की।

उत्तराखंड के निर्माण का श्रेय अमित शाह ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को दिया। इसी के साथ उन्होंने सवाल किया कि उत्तराखंड माँगने वाले युवाओं पर गोली चलाने वाले कौन थे? गोली चलाने वाले सवाल का जवाब उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से खुद तलाशने को कहा।

अमित शाह के अनुसार कॉन्ग्रेस पार्टी सीजनल सक्रियता दिखाती है। काँग्रेस कभी बाढ़, बीमारी आदि मौकों पर नहीं दिखती। उनके अनुसार कॉन्ग्रेस सिर्फ चुनावों में दिखने वाली पार्टी है। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस चुनाव के सीजन में ही नए कपड़े सिलवाते हैं। साथ ही अलग अलग मुद्दों पर धरना प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस को उन्होंने कॉन्ग्रेस की परम्परा बताया।

‘पिच पर ये रीढ़विहीन लोग नहीं, हम खेलते हैं’: शमी के बचाव में बोले कोहली – सामने बोलने की हिम्मत नहीं, पीछे फ्रस्ट्रेशन निकालते हैं

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने तेज़ गेंदबाज मोहम्मद शमी को कथित रूप से ट्रोल किए जाने को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘रीढ़विहीन’ बताते हुए कहा कि उनके लिए किसी का मजाक बनाना मनोरंजन का जरिया हो गया है। उन्होंने कहा कि ये प्रकरण हतोत्साहित करने वाला है। बता दें कि T20 विश्व कप में पाकिस्तान के हाथों भारत की 10 विकेट से हार के बाद मोहम्मद शमी को ‘मुस्लिम होने के कारण ट्रोल किए जाने’ का नैरेटिव चलाया गया था।

विराट कोहली ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं कहता हूँ कि कोई व्यक्ति सबसे बुरा काम अगर कर सकता है तो वो ये है कि किसी को उसके मजहब के आधार पर निशाना बनाना। हर किसी को अपने विचारों को प्रकट करने का अधिकार है और ये बताने का कि किसी परिस्थिति को लेकर वो क्या सोचते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से मजहब के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करने की सोच भी नहीं सकता। हर एक मनुष्य के लिए एक एक बेहद ही पवित्र और व्यक्तिगत चीज है।”

मैच से पहले होने वाले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट कोहली ने कहा कि लोग सिर्फ अपना फ्रस्ट्रेशन निकाल रहे हैं और उन्हें पता तक नहीं है कि हम मैदान पर क्या करते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को पता तक नहीं है कि मोहम्मद शमी ने भारत को कितने ही मैच जिताए हैं। खेल में असर छोड़ने के मामले में विराट कोहली ने मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह को भारत का प्रमुख गेंदबाज करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर लोग इसे नज़रअंदाज़ करते हैं और देश के प्रति उनके जोश को नहीं देखते हैं, तो मैं ऐसे लोगों पर अपना एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहता।

विराट कोहली ने कहा, “ये एक अच्छा कारण है कि पिच पर हम लोग खेलते हैं, सोशल मीडिया के ‘रीढ़विहीन’ कायर लोग नहीं, जिन्हें किसी के सामने कुछ कहने की हिम्मत नहीं है लेकिन सोशल मीडिया पर किसी अन्य पहचान में छिप कर ये सब करते हैं। ये किसी व्यक्ति की क्षमता का सबसे निचला स्तर हो सकता है और मैं इन लोगों को वैसे ही देखता हूँ। हमें समझ है कि मैदान पर क्या करना है और और मैदान के बाहर कैरेक्टर और मानसिक मजबूती के लिए क्या करना है।”

विराट कोहली ने कहा कि ट्रोल करने वाले सोशल मीडिया के लोग ये सब करने की सोच भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के पास कुछ करने का न तो साहस है और न ही क्षमता, और उन्हें इसी रूप में देखा जाना चाहिए। बकौल विराट कोहली, आत्मविश्वास की कमी वाले लोगों ने अपने फ्रस्ट्रेशन को निकालने के लिए ये ‘ड्रामा’ रचा। उन्होंने कहा कि हमें एक समूह के रूप में एक-दूसरे का साथ देकर अपनी मजबूरी पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है और बाहर लोग क्या सोचते हैं इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।

बता दें कि शमी को निशाना बनाने वाले ज्यादातर ट्वीट्स पाकिस्तान के थे। ऐसा सामने आया है कि ये पाकिस्तान की सोशल मीडिया हैंडलों द्वारा रची गई साजिश थी। यह भारत को नीचा दिखाने की उनकी एक चाल थी। शमी की आलोचना करने वाले ट्वीट्स उतने विजिबल नहीं थे और दूसरों की तरह चुनिंदा पेजों तक ही सीमित थे लेकिन शमी की आलोचना पर हमला करने वाले चुनिंदा ट्वीट्स की ज्यादा विजिबिलिटी थी। यह अभी भी कई लोगों के लिए एक रहस्य है क्योंकि कहीं भी शमी विरोधी ट्वीट या सोशल मीडिया पोस्ट दिखाई नहीं दे रहे थे। मतलब, कुछ ही हैंडल थे, जो शमी के खिलाफ अभद्र टिप्पणियों में लिप्त थे।